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चाहत का घर
घर आकर चाहत ने हमेशा की तरह आर्यन के साथ होमवर्क किया । होमवर्क हो जाने के बाद चाहत अपने एग्जाम की तैयारी करने का सोच चाहत पढ़ने लगी।
उसने मैथ्स के क्वेश्चंस सॉल्व लिए ..अब उसने साइंस बुक निकाल ली तभी घर की डोरबेल बजी। चाहत ये देख उठी और दरवाजे के पास पहुंचीं । चाहत ने दरवाजा खोला तो देखा सामने 910साल की कोई बच्ची खड़ी है... बच्ची पिंक फ्रॉक पहने खड़ी थी। उसने सिर पर दो प्यारी प्यारी चोटिया बनाई थी। जैसे सिर पर छोटा नारियल के पेड़ हो उन छोटी के नीचे उसने पिंक कलर के दो पीन लगा रखे थे। उसका
मैथ्स की नोटबुक चाहिए थी...
आर्यन ने मिनी के दोनो हाथो को पकड़ा और फिर उसके साथ गोल घूमते हुए - मै ना ...तुझे ना ...नोटबुक ना... बस इतना ही कहा था और मिनी खुश होकर - दे रहा है ना ..
आर्यन ने उसका हाथ झट से छोड़ दिया फिर कहा - नहीं दूंगा जा भाग...
ये सुन मिनी की खुशी दो मिनट में खत्म हो गई। वो उदास हो गई अब मिनी चाहत को आशा भरी निगाहो से देखने लगी।
चाहत को उस पर दया आ गई। चाहत ने मुस्कुराते हुए उसे इशारे से इस बात का आश्वासन दिया कि वो आर्यन को मना लेगी।
आर्यन वापस जाने के लिए मुड़ा ही था तभी चाहत आर्यन के सामने आ गई।
चाहत कमर पर हाथ रख उसे घूरते हुए - ये क्या तरीक़ा है?
आर्यन चाहत को देखते हुए - दी आप...आप इसकी साइड ना लो ... आर्यन मिनी की तरफ इशारा करते हुए ...ये एक नं. की चालू है...
चाहत हाथ बांध कर आर्यन देख कर पूछती है - अच्छा ... वो कैसे???
आर्यन मिनी को देखते हुए - ये मेरी फ्रेंड है.. पर जब इसे हेल्प चाहिए तब ही आती है..उससे पहले नहीं आती ...और आज तो इसने हद्द कर दी...
चाहत मिनी को देखते हुए - ऐसा क्या किया इसने ...
आर्यन - आज लंच में मै चाउमिन लेकर गया था ना...तो बस खाने आ गई पर ...खाने के बाद चले गई...मुझसे बात तक नहीं की... मै इसे कोई कॉपी नहीं दूंगा।
अब चाहत फस गई क्योंकि गलती तो मिनी की थी ही पर फिर भी चाहत ने एक कोशिश करना सही समझा वो मिनी के पास गई। उसने मिनी को आर्यन से सॉरी बोलने को कहा ।
मिनी आर्यन के पास जा कर - सॉरी ...अब से ऐसा नहीं करूंगी..
आर्यन ने मुंह घुमा कर कहा - नहीं...
मिनी उसके घूमे हुए मुंह के साइड जा कर - अगर मै तुझे ये दू तब भी नहीं...मिनी ने हाथ बढ़ा कर मासूमियत से उसे कहा तो आर्यन ने मिनी के हाथ को देखा ... मिनी ने चॉक्लेट पकड़ रखी थी... और अपनी छोटी आंखो पर मौजूद बड़ी
पलको को झपकते हुए उसे ही देख रही थी ।
आर्यन चॉक्लेट देख पिघल गया।
आर्यन चॉक्लेट देखते हुए - अब तू इतना कह रही है तो मान जाता हूं ...
ये कह कर आर्यन मिनी के हाथ से चॉक्लेट ली और मिनी को अपने साथ रूम ले गया । वहा उसने नोटबुक मिनी को दे दी...
मिनी थोड़ी देर में घर चले गई...
रात में खाना खाने के बाद चाहत ने सोचा वैसे भी उसे कोई काम नही है तो क्यों ना साइंस का एक चैप्टर ही पढ़ लिया जाए । चाहत पढ़ ही रही थी।
रात काफी हो गई थी। पर चाहत को कोई मतलब नहीं था। वो अपने में मगन होकर पढ़ रही थी।
तभी रीमा जी उसके कमरे के पास से गुजरी । जब उन्होंने चाहत को पढ़ते देखा तो वो चाहत के पास गई। चाहत जो अपने बुक में मग्न थी ।अचानक चाहत को रूम में किसी के आने का अहसास हुआ ।
चाहत ने पलट कर देखा तो रीमा जी उसे देख रही थी।
रीमा जी चाहत के पास खड़े होकर - बेटा टाइम देखो 11 11बज रहे है...सोना नहीं है क्या...
चाहत - हा ... बस एक क्वेशन फिर सो जाउंगी...
रीमा जी - ठीक है बोल कर उठी..पर पता नहीं उन्हें क्या हुआ वो वापस आकर चाहत को देखने लगी।
वो चाहत को एकटक देख रही थी। ये देख चाहत को सबसे ज्यादा आश्चर्य हुआ। पर वह मुस्कुरा कर रह गई।
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - गुड नाईट मम्मी।
रीमा जी - गुड नाईट बेटा।
रीमा जी ने चाहत के सिर पर हाथ फेरा और रूम से बाहर आ गई। रीमा जी अपने रूम की तरफ बढ़ गई । जब वो अपने रूम पहुंची।
इतने में उनके मोंबाइल पर किसी की कॉल आ रही थी...रीमा जी ने देखा तो कॉल शिव जी की थी । बिना देर किए रीमा जी ने कॉल उठा ली...
शिव जी - कैसे हो ...?
रीमा जी - जैसे छोड़ कर गए थे.. आपके बिना अकेली...
शिव जी - ऐसा नहीं कहते ...
रीमा जी - हमम...
शिव जी - क्या कर रही थी...,?
रीमा जी बेड पर बैठते हुए - कुछ नहीं ।
शिव जी - बच्चे क्या कर रहे है..
रीमा जी - आर्यन सो गया है...और चाहत
रीमा जी कहते कहते चुप हो गई।
शिव जी डरते हुए - चाहत क्या हुआ चाहत को ...
रीमा जी - कुछ नहीं हुआ ... मै बस चाहत के रूम में चाहत को द्देखने गई थी...वो पढ़ रही थी... तो उसे सोने बोलने गई थी ... क्युकी रात भी काफी हो गई है...
शिव जी - वो अभी तक जग रही है..
रीमा जी - हा उसके टर्मिनल एग्जाम है ..उसके लिए ही प्रिपेयर कर रही है...शायद इसीलिए पढ़ रही है..
शिव जी - अच्छा।
रीमा जी - ह्म्म।
शिव जी - कभी कभी लगता है..चाहत उम्र से पहले ही बड़ी हो गई.. साथ ही हर चीज समझने लग गई है...
रीमा जी कुछ याद करते हुए भरी आंखो के साथ..
रीमा जी - वो भी तो एक बच्ची ही थी ...पर घर पर पापा के
ना होने के कारण और मेरा उसमे ज्यादा ध्यान ना दे पाने के कारण... उम्र से पहले समझदारी सीख ली उसने।
लोगो के तानों ने उसे वो सब करने से रोका था। जो चाहत करना चाहती थी...फिर भी वो रुकती या थकती नहीं है.. चाहत सब से लड़ कर आगे बढ़ना चाहती हैं। एक अलग मुकाम हासिल करना है उसे...। रीमा जी ने ये कहा और उनका गला भर आया।
शिव जी घबराते हुए - क्या हुआ .. किसी ने फिर कुछ कहा क्या उसे...
रीमा जी खुद को संभाल - किसी ने कुछ कहा भी होगा ..तो वो हमे नहीं बताती...कहा ना मेरी बच्ची समझदार हो गई है...सब कुछ छिपाती..पर आखिर तो मा हूं...उसकी आंखो से ही उसका हाल जान लेती हूं... जब भी कोई उसे उसके रंग के लिए ताना देता है ... तो वो उदास हो जाती है..उसकी उदासी हमेशा खलती है मुझे... मै चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती...
शिव जी को भी बुरा लगा पर वो रीमा जी को समझाते हुए - सुनो ..मेरी बात पहले ...,चाहत दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है... वो सबसे अलग है...जितना उसे सुनना पड़ा है ...इतना कोई पर सुनता तो टूट जाता ...पर हमारी चाहत ने सब सहा... सभी चीज़े दिल से सीखी..देखना वो एक दिन
सबसे आगे बढ़ेगी...और सभी चीज़े करेगी जो वो नहीं कर पाई ..., उसकी कमियाबी के आगे कोई उसका रंग नहीं देखेगा। रीमा जी ये सुन कर चुप हो गई ।
शिव जी बात जारी रखते हुए - हमे उसकी मदद करनी चाहिए ...उसका हौसला बढ़ाना चाहिए... ताकि उसका कामयाब होने का सपना पूरा हो जाए..
रीमा जी भी ये सुन कर खुश हों गईं। उन्होंने शिव जी से कहा - हा मै अपनी पूरी कोशिश करूंगी...
ऐसे ही थोड़ी देर एक दूसरे से यू ही बात करने के बाद रीमा जी ने शिव जी को बाय कहा और रीमा जी सो गई।
हर सुबह की तरह चाहत भी उठी। वो पूरी रात बुक पकड़े पकड़े ही सो गई थी। उसने खुद को एक थपकी मारी । फिर अपने सारे काम कर के स्कूल के लिए निकल गई।
घर आकर चाहत ने हमेशा की तरह आर्यन के साथ होमवर्क किया । होमवर्क हो जाने के बाद चाहत अपने एग्जाम की तैयारी करने का सोच चाहत पढ़ने लगी।
उसने मैथ्स के क्वेश्चंस सॉल्व लिए ..अब उसने साइंस बुक निकाल ली तभी घर की डोरबेल बजी। चाहत ये देख उठी और दरवाजे के पास पहुंचीं । चाहत ने दरवाजा खोला तो देखा सामने 910साल की कोई बच्ची खड़ी है... बच्ची पिंक फ्रॉक पहने खड़ी थी। उसने सिर पर दो प्यारी प्यारी चोटिया बनाई थी। जैसे सिर पर छोटा नारियल के पेड़ हो उन छोटी के नीचे उसने पिंक कलर के दो पीन लगा रखे थे। उसका
मैथ्स की नोटबुक चाहिए थी...
आर्यन ने मिनी के दोनो हाथो को पकड़ा और फिर उसके साथ गोल घूमते हुए - मै ना ...तुझे ना ...नोटबुक ना... बस इतना ही कहा था और मिनी खुश होकर - दे रहा है ना ..
आर्यन ने उसका हाथ झट से छोड़ दिया फिर कहा - नहीं दूंगा जा भाग...
ये सुन मिनी की खुशी दो मिनट में खत्म हो गई। वो उदास हो गई अब मिनी चाहत को आशा भरी निगाहो से देखने लगी।
चाहत को उस पर दया आ गई। चाहत ने मुस्कुराते हुए उसे इशारे से इस बात का आश्वासन दिया कि वो आर्यन को मना लेगी।
आर्यन वापस जाने के लिए मुड़ा ही था तभी चाहत आर्यन के सामने आ गई।
चाहत कमर पर हाथ रख उसे घूरते हुए - ये क्या तरीक़ा है?
आर्यन चाहत को देखते हुए - दी आप...आप इसकी साइड ना लो ... आर्यन मिनी की तरफ इशारा करते हुए ...ये एक नं. की चालू है...
चाहत हाथ बांध कर आर्यन देख कर पूछती है - अच्छा ... वो कैसे???
आर्यन मिनी को देखते हुए - ये मेरी फ्रेंड है.. पर जब इसे हेल्प चाहिए तब ही आती है..उससे पहले नहीं आती ...और आज तो इसने हद्द कर दी...
चाहत मिनी को देखते हुए - ऐसा क्या किया इसने ...
आर्यन - आज लंच में मै चाउमिन लेकर गया था ना...तो बस खाने आ गई पर ...खाने के बाद चले गई...मुझसे बात तक नहीं की... मै इसे कोई कॉपी नहीं दूंगा।
अब चाहत फस गई क्योंकि गलती तो मिनी की थी ही पर फिर भी चाहत ने एक कोशिश करना सही समझा वो मिनी के पास गई। उसने मिनी को आर्यन से सॉरी बोलने को कहा ।
मिनी आर्यन के पास जा कर - सॉरी ...अब से ऐसा नहीं करूंगी..
आर्यन ने मुंह घुमा कर कहा - नहीं...
मिनी उसके घूमे हुए मुंह के साइड जा कर - अगर मै तुझे ये दू तब भी नहीं...मिनी ने हाथ बढ़ा कर मासूमियत से उसे कहा तो आर्यन ने मिनी के हाथ को देखा ... मिनी ने चॉक्लेट पकड़ रखी थी... और अपनी छोटी आंखो पर मौजूद बड़ी
पलको को झपकते हुए उसे ही देख रही थी ।
आर्यन चॉक्लेट देख पिघल गया।
आर्यन चॉक्लेट देखते हुए - अब तू इतना कह रही है तो मान जाता हूं ...
ये कह कर आर्यन मिनी के हाथ से चॉक्लेट ली और मिनी को अपने साथ रूम ले गया । वहा उसने नोटबुक मिनी को दे दी...
मिनी थोड़ी देर में घर चले गई...
रात में खाना खाने के बाद चाहत ने सोचा वैसे भी उसे कोई काम नही है तो क्यों ना साइंस का एक चैप्टर ही पढ़ लिया जाए । चाहत पढ़ ही रही थी।
रात काफी हो गई थी। पर चाहत को कोई मतलब नहीं था। वो अपने में मगन होकर पढ़ रही थी।
तभी रीमा जी उसके कमरे के पास से गुजरी । जब उन्होंने चाहत को पढ़ते देखा तो वो चाहत के पास गई। चाहत जो अपने बुक में मग्न थी ।अचानक चाहत को रूम में किसी के आने का अहसास हुआ ।
चाहत ने पलट कर देखा तो रीमा जी उसे देख रही थी।
रीमा जी चाहत के पास खड़े होकर - बेटा टाइम देखो 11 11बज रहे है...सोना नहीं है क्या...
चाहत - हा ... बस एक क्वेशन फिर सो जाउंगी...
रीमा जी - ठीक है बोल कर उठी..पर पता नहीं उन्हें क्या हुआ वो वापस आकर चाहत को देखने लगी।
वो चाहत को एकटक देख रही थी। ये देख चाहत को सबसे ज्यादा आश्चर्य हुआ। पर वह मुस्कुरा कर रह गई।
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - गुड नाईट मम्मी।
रीमा जी - गुड नाईट बेटा।
रीमा जी ने चाहत के सिर पर हाथ फेरा और रूम से बाहर आ गई। रीमा जी अपने रूम की तरफ बढ़ गई । जब वो अपने रूम पहुंची।
इतने में उनके मोंबाइल पर किसी की कॉल आ रही थी...रीमा जी ने देखा तो कॉल शिव जी की थी । बिना देर किए रीमा जी ने कॉल उठा ली...
शिव जी - कैसे हो ...?
रीमा जी - जैसे छोड़ कर गए थे.. आपके बिना अकेली...
शिव जी - ऐसा नहीं कहते ...
रीमा जी - हमम...
शिव जी - क्या कर रही थी...,?
रीमा जी बेड पर बैठते हुए - कुछ नहीं ।
शिव जी - बच्चे क्या कर रहे है..
रीमा जी - आर्यन सो गया है...और चाहत
रीमा जी कहते कहते चुप हो गई।
शिव जी डरते हुए - चाहत क्या हुआ चाहत को ...
रीमा जी - कुछ नहीं हुआ ... मै बस चाहत के रूम में चाहत को द्देखने गई थी...वो पढ़ रही थी... तो उसे सोने बोलने गई थी ... क्युकी रात भी काफी हो गई है...
शिव जी - वो अभी तक जग रही है..
रीमा जी - हा उसके टर्मिनल एग्जाम है ..उसके लिए ही प्रिपेयर कर रही है...शायद इसीलिए पढ़ रही है..
शिव जी - अच्छा।
रीमा जी - ह्म्म।
शिव जी - कभी कभी लगता है..चाहत उम्र से पहले ही बड़ी हो गई.. साथ ही हर चीज समझने लग गई है...
रीमा जी कुछ याद करते हुए भरी आंखो के साथ..
रीमा जी - वो भी तो एक बच्ची ही थी ...पर घर पर पापा के
ना होने के कारण और मेरा उसमे ज्यादा ध्यान ना दे पाने के कारण... उम्र से पहले समझदारी सीख ली उसने।
लोगो के तानों ने उसे वो सब करने से रोका था। जो चाहत करना चाहती थी...फिर भी वो रुकती या थकती नहीं है.. चाहत सब से लड़ कर आगे बढ़ना चाहती हैं। एक अलग मुकाम हासिल करना है उसे...। रीमा जी ने ये कहा और उनका गला भर आया।
शिव जी घबराते हुए - क्या हुआ .. किसी ने फिर कुछ कहा क्या उसे...
रीमा जी खुद को संभाल - किसी ने कुछ कहा भी होगा ..तो वो हमे नहीं बताती...कहा ना मेरी बच्ची समझदार हो गई है...सब कुछ छिपाती..पर आखिर तो मा हूं...उसकी आंखो से ही उसका हाल जान लेती हूं... जब भी कोई उसे उसके रंग के लिए ताना देता है ... तो वो उदास हो जाती है..उसकी उदासी हमेशा खलती है मुझे... मै चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती...
शिव जी को भी बुरा लगा पर वो रीमा जी को समझाते हुए - सुनो ..मेरी बात पहले ...,चाहत दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है... वो सबसे अलग है...जितना उसे सुनना पड़ा है ...इतना कोई पर सुनता तो टूट जाता ...पर हमारी चाहत ने सब सहा... सभी चीज़े दिल से सीखी..देखना वो एक दिन
सबसे आगे बढ़ेगी...और सभी चीज़े करेगी जो वो नहीं कर पाई ..., उसकी कमियाबी के आगे कोई उसका रंग नहीं देखेगा। रीमा जी ये सुन कर चुप हो गई ।
शिव जी बात जारी रखते हुए - हमे उसकी मदद करनी चाहिए ...उसका हौसला बढ़ाना चाहिए... ताकि उसका कामयाब होने का सपना पूरा हो जाए..
रीमा जी भी ये सुन कर खुश हों गईं। उन्होंने शिव जी से कहा - हा मै अपनी पूरी कोशिश करूंगी...
ऐसे ही थोड़ी देर एक दूसरे से यू ही बात करने के बाद रीमा जी ने शिव जी को बाय कहा और रीमा जी सो गई।
हर सुबह की तरह चाहत भी उठी। वो पूरी रात बुक पकड़े पकड़े ही सो गई थी। उसने खुद को एक थपकी मारी । फिर अपने सारे काम कर के स्कूल के लिए निकल गई।