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Guest
चाहत सामने देख रही थी। उसने देखा वो शहर से बाहर आ गए है।।। चाहत को समझ ही नहीं आ रहा था कि वो कहा
जा रहे है। चाहत गौर से रास्तों को देख रही थी। अंत में अध्यन ने अपनी बाइक एक ढाबे पर रोकी।
अध्यन बाइक से उतरा । उसने चाहत को देखा जो उस जगह को देख रही थी। उस ढाबे का नाम था "दिल खुश"
चाहत ने अध्यन को देखा.. फिर कहा - मैंने नाश्ता कर लिया है .. तुम खा लो..
अध्यन उसे देखते हुए - नाश्ता तो मैंने भी किया है.. पर आज तुम्हारे लिए यहां की स्पेशल चीज लाता हूं ।
चाहत उस जगह को देख रही थीं ।
तभी अध्यन अंदर गया। चाहत वहा पर कई लोगो को देख रही थी। जिनमे ज्यादातर ट्रक वाले थे। वे काफी मोटे थे उनकी बड़ी बड़ी मूछे थी। सिर पर पगड़ी बांधे हुए वो बड़े ही रौबीले और खडूस टाइप के भी लग रहे थे पर जब उनमें से एक ट्रक वाले अंकल ने वहा काम के रहे एक गरीब बच्चे को अपने हाथ से खाना खिलाया तो उसे लगा के दिखने में जितने भी खडूस हो पर दिल के साफ़ होते है। हमे किसी की शक्ल पर नहीं जाना चाहिए। कभी कभार पैसों से नहीं दिल से अमीर होना चाहिए।
वो ये सोच ही रही थी। तभी अध्यन आया और बोला - क्या देख रही हो।
चाहत ने हाथो से इशारा कर उन ट्रक वाले अंकल को
दिखाया और बोलने लगी - तुम्हे पता है उन अंकल ने उस बच्चे को खाना खिलाया।...... फिर उनसे नजर हटा कर ... पता है अध्यन जब भी मै किसी को किसी की हेल्प करते हुए देखते हुं ना तो हमेशा सोचती हूं........ कब इतनी बड़ी होऊंगी जब मै भी ऐसे लोगो की हेल्प कर पाऊं।
चाहत ने ये बाते ऐसे कहीं की अध्यन उसे ऐसे बोलते देख कुछ बोल ही नहीं पाया। थोड़ी देर चुप होने के बाद उसने कहा - तुम जरूर करोगी..
चाहत उसकी तरफ देख मुस्कुरा दी।
अध्यन ने कहा - चलो...
कहां??? चाहत ने तुरंत पूछा।
अध्यन - हेल्प करने.....
चाहत को समझ नहीं आया। तो अध्यन उसका हाथ पकड़ कर उसे ढाबे के सामने ले गया जहां दान पेटी रखी थी और ऊपर लिखा था " गरीब बच्चो के लिए अपना सहयोग दे"
चाहत ने मुस्कुराते हुए अध्यन को देखा अध्यन ने उसे इशारे से दान करने के कहा। उसने अपने जींस की जेब से कुछ नोट निकले और पेटी ने डाल दिया।बस इतना ही कर वो बहुत खुश थी। और उसे खुश देख अध्यन खुश था।
अध्यन ने चाहत को बाइक के पास इंतज़ार करने को कहा और खुद ढाबे के अंदर चला गया। चाहत भी बाइक के पास आकर उसका इंतज़ार करने लगी।
थोड़े देर बाद अध्यन आया और उसके बगल में खड़े हो गया । उसने चाहत को देखा ।चाहत ने पहले अध्यन को देखा ।
फिर उसकी नजर अध्यन के हाथ पर गई। उसने हाथो की तरफ इशारा करते हुए पूछा - ये क्या है...
अध्यन अपने दोनो हाथ उपर उठाते हुए - ये लस्सी...
चाहत उसके दोनो हाथ नीचे करते हुए - हा मुझे भी पता है .. पर मै इतना नहीं पी सकती ।
अध्यन उसे आश्चर्य से देखते हुए - वाह...
चाहत उसे देख कर - सच में।
चाहत के चेहरे से ही पता चल रहा था कि उससे ये पूरा नहीं पिया जाएगा। मैंने बताया था ना मैंने नाश्ता किया है सो आई कांट..
अध्यन उसकी बात समझते हुए - आधा तो पी लोगी ना।।
चाहत ने खुश होकर - हा कहा..
जिनको मै छोड़ने अाई थी... वो मेरी ..
अध्यन बीच में - दादी थी।
चाहत चौक कर - तुम्हे कैसे पता??
अध्यन - जब तुम उन्हें हाथ दिखाते हुए "बाय दादी" कह रही थी तब मै वहीं था ।
चाहत - तुम वहा क्या कर रहे थे..??
अध्यन - डेड अपनी फाइल भूल गए थे तो उन्हें देने गया था ।
चाहत - ओह ... तुम्हारे डेड ... अच्छा तुम्हारे डेड क्या करते है...
अध्यन - इंजिनियर है..
चाहत - और तुम्हारी मॉम...
अध्यन - प्रिंसिपल है।।
चाहत बाते जारी रखते हुए - और तुम्हारे घर में...
जा रहे है। चाहत गौर से रास्तों को देख रही थी। अंत में अध्यन ने अपनी बाइक एक ढाबे पर रोकी।
अध्यन बाइक से उतरा । उसने चाहत को देखा जो उस जगह को देख रही थी। उस ढाबे का नाम था "दिल खुश"
चाहत ने अध्यन को देखा.. फिर कहा - मैंने नाश्ता कर लिया है .. तुम खा लो..
अध्यन उसे देखते हुए - नाश्ता तो मैंने भी किया है.. पर आज तुम्हारे लिए यहां की स्पेशल चीज लाता हूं ।
चाहत उस जगह को देख रही थीं ।
तभी अध्यन अंदर गया। चाहत वहा पर कई लोगो को देख रही थी। जिनमे ज्यादातर ट्रक वाले थे। वे काफी मोटे थे उनकी बड़ी बड़ी मूछे थी। सिर पर पगड़ी बांधे हुए वो बड़े ही रौबीले और खडूस टाइप के भी लग रहे थे पर जब उनमें से एक ट्रक वाले अंकल ने वहा काम के रहे एक गरीब बच्चे को अपने हाथ से खाना खिलाया तो उसे लगा के दिखने में जितने भी खडूस हो पर दिल के साफ़ होते है। हमे किसी की शक्ल पर नहीं जाना चाहिए। कभी कभार पैसों से नहीं दिल से अमीर होना चाहिए।
वो ये सोच ही रही थी। तभी अध्यन आया और बोला - क्या देख रही हो।
चाहत ने हाथो से इशारा कर उन ट्रक वाले अंकल को
दिखाया और बोलने लगी - तुम्हे पता है उन अंकल ने उस बच्चे को खाना खिलाया।...... फिर उनसे नजर हटा कर ... पता है अध्यन जब भी मै किसी को किसी की हेल्प करते हुए देखते हुं ना तो हमेशा सोचती हूं........ कब इतनी बड़ी होऊंगी जब मै भी ऐसे लोगो की हेल्प कर पाऊं।
चाहत ने ये बाते ऐसे कहीं की अध्यन उसे ऐसे बोलते देख कुछ बोल ही नहीं पाया। थोड़ी देर चुप होने के बाद उसने कहा - तुम जरूर करोगी..
चाहत उसकी तरफ देख मुस्कुरा दी।
अध्यन ने कहा - चलो...
कहां??? चाहत ने तुरंत पूछा।
अध्यन - हेल्प करने.....
चाहत को समझ नहीं आया। तो अध्यन उसका हाथ पकड़ कर उसे ढाबे के सामने ले गया जहां दान पेटी रखी थी और ऊपर लिखा था " गरीब बच्चो के लिए अपना सहयोग दे"
चाहत ने मुस्कुराते हुए अध्यन को देखा अध्यन ने उसे इशारे से दान करने के कहा। उसने अपने जींस की जेब से कुछ नोट निकले और पेटी ने डाल दिया।बस इतना ही कर वो बहुत खुश थी। और उसे खुश देख अध्यन खुश था।
अध्यन ने चाहत को बाइक के पास इंतज़ार करने को कहा और खुद ढाबे के अंदर चला गया। चाहत भी बाइक के पास आकर उसका इंतज़ार करने लगी।
थोड़े देर बाद अध्यन आया और उसके बगल में खड़े हो गया । उसने चाहत को देखा ।चाहत ने पहले अध्यन को देखा ।
फिर उसकी नजर अध्यन के हाथ पर गई। उसने हाथो की तरफ इशारा करते हुए पूछा - ये क्या है...
अध्यन अपने दोनो हाथ उपर उठाते हुए - ये लस्सी...
चाहत उसके दोनो हाथ नीचे करते हुए - हा मुझे भी पता है .. पर मै इतना नहीं पी सकती ।
अध्यन उसे आश्चर्य से देखते हुए - वाह...
चाहत उसे देख कर - सच में।
चाहत के चेहरे से ही पता चल रहा था कि उससे ये पूरा नहीं पिया जाएगा। मैंने बताया था ना मैंने नाश्ता किया है सो आई कांट..
अध्यन उसकी बात समझते हुए - आधा तो पी लोगी ना।।
चाहत ने खुश होकर - हा कहा..
जिनको मै छोड़ने अाई थी... वो मेरी ..
अध्यन बीच में - दादी थी।
चाहत चौक कर - तुम्हे कैसे पता??
अध्यन - जब तुम उन्हें हाथ दिखाते हुए "बाय दादी" कह रही थी तब मै वहीं था ।
चाहत - तुम वहा क्या कर रहे थे..??
अध्यन - डेड अपनी फाइल भूल गए थे तो उन्हें देने गया था ।
चाहत - ओह ... तुम्हारे डेड ... अच्छा तुम्हारे डेड क्या करते है...
अध्यन - इंजिनियर है..
चाहत - और तुम्हारी मॉम...
अध्यन - प्रिंसिपल है।।
चाहत बाते जारी रखते हुए - और तुम्हारे घर में...