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Romance चाहत

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सिटी हॉस्पिटल

भिलाई

अध्यन के सारे टेस्ट हो चुके थे। हाथ में रिपोर्ट पकड़े अध्यन डॉक्टर के केबिन के बाहर बैठा था। देव जी इधर उधर चहल कदमी करते हुए केबिन के तरफ देख रहे थे। अध्यन भी उन्हे ऐसे करते देख रहा था। वो अपने चेयर से उठा और देव जी के पास गया । अध्यन ने देव जी का हाथ पकड़ा फिर उन्हे अपने साथ चेयर के पास ले आया।

अध्यन ने देव जी को कंधों से पकड़ कर चेयर पर बैठाया फिर वो उनके बगल में बैठ गया। देव जी ने बैठते ही अध्यन की तरफ देखा अध्यन ने पलकें झपका कर सब ठीक है कहा। अब अध्यन सामने देखने लगा।

तभी रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने अध्यन के तरफ देखते हुए कहा - your turn..

अध्यन और देव जी ने उसकी आवाज़ सुनी दोनो चेयर से उठे फिर केबिन कि तरफ चले गए।

अंदर केबिन में डॉक्टर किसी से फोन पर बात कर रहे थे। देव जी ने उन्हें बात करते देखा तो दरवाजे पर ही रुक गए। डॉक्टर की नजर जब उन पर पड़ी तो उन्होंने रिसीवर रखा फिर देव जी और अध्यन को अंदर आने का इशारा किया।

देव जी और अध्यन अंदर आ गए तो डॉक्टर ने उन्हें बैठने का इशारा किया। दोनों बैठ गए। अध्यन और देव जी ने डॉक्टर को गुड मॉर्निंग विश किया । डॉक्टर ने भी सिर झुकाते हुए उनका अभिवादन किया।

कुछ बातो के बाद देव जी ने अध्यन की रिपोर्ट्स डॉक्टर को दे दी। डॉक्टर ने रिपोर्ट्स ली फिर उसे पढ़ने लगे अध्यन वहा बैठे बस डॉक्टर के चेहरे पर आने जाने वाले भावो को पढ़ रहा था। वहीं देव जी के चेहरे पर परेशानी के भाव थे। जैसे जैसे अध्यन की रिपोर्ट्स पढ़ी जा रही थी देव जी की टेंशन बढ़ती जा रही थी।

अध्यन बस डॉक्टर को देख रहा था पर पता नहीं उसे अचानक क्या हुआ उसने पलट कर देव जी की तरफ देखा। अध्यन ने देव जी के परेशानी से भरे चेहरे को देखा तो वो

समझ गया इस परेशानी का कारण है उसकी रिपोर्ट्स । अध्यन ने कुछ नहीं कहा बस अपना हाथ देव जी के हाथ पर रख दिया। देव जी ने हाथो का अहसास पाते ही अध्यन की तरफ देखा तो अध्यन मुस्कुरा दिया।

डॉक्टर रिपोर्ट्स देखते हुए बोले - रिपोर्ट्स तो ठीक है.. पर..

अध्यन ने ये सुनते ही देव जी का हाथ छोड़ दिया। देव जी ने अध्यन का हाथ छूटते हुए महसूस किया तो उन्होंने अध्यन की तरफ देखा जो किसी हारे हुए खिलाड़ी की तरह सिर झुकाए नीचे देख रहा है। देव जी को उसका ऐसे नीचे देखना नागवार गुजरा उन्होंने एक बार फिर उसका हाथ मजबूती से पकड़ते हुए बोले - पर क्या डॉक्टर.. डर तो देव जी को भी काफी लग रहा था पर वो अध्यन के सामने दिखाना नहीं चाहते थे। वहीं अध्यन ने अपने हाथो में देव जी की पकड़ को महसूस किया जिससे उसे हिम्मत मिली और वो भी डॉक्टर को देखने लगा।

"एक पिता के लिए उसके बच्चे चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाए.. वो उनके लिए छोटे ही होते है.. जिनकी फिक्र उन्हे उम्र भर होती है... एक पिता हमेशा अपने बच्चो के सामने खुद को मजबूत बना कर रखने की कोशिश करता है.. क्युकी वो जनता है.. ये बच्चे ही उसकी ताकत है.. और साथ साथ कमजोरी भी... क्युकी अगर वो कमजोर पड़ा तो ये उनके

बच्चो के लिए सही नहीं होगा .. उनके बच्चे भी कमजोर पड़ जाएंगे "

देव जी बस अध्यन को कमजोर पड़ते देखना नहीं चाहते थे। डॉक्टर ने देव जी और अध्यन के आंखो में देखा फिर मुस्कुराते हुए बोले - पर .. अब आप दोनों को यहां आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी..

ये सुन अध्यन और देव जी ने चौक कर डॉक्टर की तरफ देखा तो डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - अब बस आपको एक महीने के लिए ही दवाई लेनी होगी.. फिर आप पूरी तरह से ठीक .. डॉक्टर की बात सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई वहीं देव जी की आंखे नम हो गई जिसे सफाई से छुपाते हुए उन्होंने मुस्कुराहट अपने चेहरे पर ला लिया ।

डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखते हुए देव जी से कहा - अब बिल्कुल ठीक है अध्यन.. अब आपको ज्यादा टेंशन लेने की जरुरत नहीं.. बस एक महीने की दवाई.. और लेनी है... और रही एक्सरसाइज की तो .. वो तो हर हेल्थी इंसान को करनी चाहिए.. इससे बॉडी फीट रहती है.. और आप बीमारियों से भी दूर रहते है..

अध्यन ने मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया वहीं देव जी ने अपना हाथ आगे किया और डॉक्टर से हाथ मिलाते हुए बोले - थैंक्यू.. डॉक्टर .. आपने बहुत हेल्प की..

डॉक्टर ने भी मुस्कुराते हुए कहा - मैंने कुछ खास नहीं किया.. ये तो मेरा फ़र्ज़ था.. जो भी हुआ है.. वो आपकी और अध्यन की मेहनत के कारण हुआ है.. हमने तो बस आपको रास्ता दिखाया है.. चलने वाले तो आप थे..

देव जी ने भी मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया।

अब डॉक्टर ने अध्यन की तरफ देखा फिर उन्होंने कहा - तुम मेरे पहले ऐसे पेशेंट थे.. जिसने मुझसे सीधा ये क्वेश्चन किया था.. की उसके पास कितने दिन है.. मैंने कभी भी ऐसा इंसान नहीं देखा था.. जो इतनी कम उम्र का होते हुए .. भी मौत से नहीं डरता.. मैंने तुमसे पहले भी कहा था.. आज भी कहता हू.. तुम बहुत ब्रेव हो.. हमेशा ऐसे ही रहना..

अध्यन बस मुस्कुरा दिया। थोड़ी फॉर्मेलिटी के बाद अध्यन और देव जी बाहर आए।

देव जी को कार पार्क से बाहर लेनी थीं इसीलिए वो पार्किंग के साइड आ गए। अध्यन मेडिकल शॉप चला गया। उसने मेडिसिंस ली फिर मूड कर देखा तो सामने वहीं मंदिर था। अध्यन उस मंदिर की तरफ चला गया।

ये मंदिर हनुमान जी का छोटा सा मंदिर था अध्यन ने अपने शूज मंदिर के बाहर उतारा फिर मंदिर के अंदर आ गया उसने घंटी बजाई और हाथ जोड़ कर आंखे बंद कर के खड़ा हो गया। उसने हाथ जोड़े हुए कहा - थैंक्यू.. बस यही है मेरे पास.. इससे ज्यादा कुछ नहीं है मेरे पास.. जो मै आपसे कह सकूं.. गुस्सा था मै आपसे .. और क्यों नहीं होता.. मेरे साथ जो हुआ.. उस टाइम मुझे उसमे आपकी ही गलती लगी थी.. पर अब सब ठीक है

.. अपने किया है है ये.. सो थैंक्यू.. थैंक्यू..आगे मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना.. बस आपका साथ चाहिए.. जिससे मै अपनी फैमिली और अपनी चाहत को खुश रख पाऊ.. बस इतना ही दे दीजियेगा.. ये बोल अध्यन ने आंखे खोली फिर आगे बढ़ उसने दान पेटी में कुछ पैसे डाले। एक बार फिर हाथ जोड़ा और मूड कर मंदिर से बाहर आ गया।

कुछ दूर चलने के बाद उसने देखा देव जी कार के बाहर उसका वेट कर रहे थे। वो उनके पास गया तो उनका मोबाइल बजने लगा कॉल गौरी जी का था तो देव जी साइड में चले गए। अध्यन ने कार का गेट खोला फिर अंदर आ गया । कार नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी तो अध्यन को कार के अंदर बैठना ही ठीक लगा वैसे भी मौसम ठंडा था तो कार में बैठना उसके लिए कंफर्टेबल था ।

अध्यन कार के अंदर बैठा ही था उसे बोरियत होने लगी तो उसने अपना मोबाइल निकाल लिया मोबाइल को उसने अनलॉक किया तो उसे चाहत की फोटो दिखी। उस फोटो को उसने मुस्कुराते हुए देखा फिर मोबाइल को सिर से लगा उसने कहा - बस अब कुछ दिन और.. फिर तुम मेरे पास होगी.. मेरे साथ होगी... तभी कार का गेट खुला और देव जी अंदर आ गए। देव जी ने कार निकली और फिर कार अपनी मंजिल की तरफ चलने लगी।

अध्यन ने देखा बहुत शांति है तो उसने music system ऑन कर दिया .. एक प्यारी सी धुन अध्यन के कानों में पड़ी। जिसे सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

ना जानूं मैं, कैसी ये बेकरारी है

शायद दिल के, जाने की अब तैयारी है...

तू दिल का ठिकाना, हूँ तेरा दीवाना

दीवाना तेरा..

तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी..

तू आए ना आए दीवाना तेरा..

तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी,

तू आए ना आए ऊऊ..

दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना है..

अध्यन ये सॉन्ग सुन खुद भी गुनगुनाने लगा.. देव जी ने ड्राइव करते हुए उसे एक नजर देखा और मुस्कुरा दिए। फिर सामने देखने लगे। अब अध्यन थोड़ा जोर से गाने लगा। ये सुन देव जी भी अध्यन को देखने लगे। जो अपने में मस्त होकर गा रहा था ।

पूछे निगाहें मेरी.. है कहा राहे तेरी..

जाने क्यों ना जाने तू.. तन्हा है बाहें मेरी ...

नींदों बिन, रात भी गुज़ारी है ..

जो उतरे ना, तेरी ही तो खुमारी है .. मुश्किल है भुलाना, हूँ तेरा दीवाना

दीवाना तेरा.. तुझे ही बुलाए ये मर्ज़ी तेरी, तू आए ना आए ...

अध्यन ने गाना ख़तम किया फिर उसने पलट कर देव जी की

तरफ देखा जो उसे ही देख रहे थे। ये देख अध्यन थोड़ी देर के लिए डर गया । इसी डर से वो चुप हो गया और उसने अपना सिर सीट से टिका दिया । फिर आंखे बंद कर वो बैठ गया। ऐसे ही उसे कब नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला ।

रायपुर...

चाहत क्लास रूम में बैठे अपनी लास्ट क्लास अटेंड कर रही थी। तभी ma'am ने टॉपिक ख़तम कर के कहा - आपको कुछ नोटिस मिला..

सब ने ना में सिर हिला दिया जिसे देख मैम ने कहा - आपके सेकंड ct होने वाले है.. टाइम टेबल आपको नोटिस बोर्ड में मिल जाएगा.. तो टाइम टेबल आ गए है.. ये आपका सेकंड ct ( क्लास टेस्ट ) है.. तो आप सभी ठीक से prepare कर ले.. एग्जाम में बेस्ट ऑफ टू ही जाएगा.. तो जिसका पहला ct ठीक नहीं गया है.. वो अभी भी कवर कर सकता है.. so all the best.. इतना कहते ही सभी ने एक साथ चिल्लाया - थैंक्यू.. मैम..

ये बोल ma'am मुस्कुराते हुए बाहर आ गई।

सारी क्लासेज अब ख़तम हो गई थी। चाहत भी क्लास से बाहर आ गई। वो सीधा नोटिस बोर्ड के पास पहुंची जहां उसे ct टाइम टेबल दिखा । उसने मोबाइल से उसकी फोटो क्लिक की और मूड गई। उसने जब पीछे देखा तो डॉली खड़ी उसे ही देख रही थी। चाहत ने उसकी तरफ देखा फिर मुस्कुरा दी।

दोनों अपने ब्लॉक से बाहर आए । दोनों बस में चढ़ गए। दोनों चलते हुए बस की पिछली सीट पर दोनों बैठ गए और बस ने रफ्तार पकड़ ली।

डॉली सीट पर बैठ बैग गोद में रखते हुए - ct के बारे में सुना..

चाहत - हा.. रश्मि मैम ने बताया था.. ये बोल उसने अपना मोबाइल डॉली कि तरफ बढ़ा दिया। जिसमे टाइम टेबल था।

डॉली उसे देखते हुए - बाकी सारे सब्जेक्ट तो हो जाएंगे पर.. fme ( fundamental of mechanical engineering ) का क्या करें..

चाहत ने ये सुनते ही झट से कहा - हा यार.. उसमे तो बहुत सारे डाउट है..

ये सुन डॉली ने भी सिर पकड़ लिया।

डॉली सीरियस होकर - अब क्या करे..

चाहत ने उसे देख मुंह बना लिया फिर सिर नीचे कर लिया।

दोनों सोच में पड़ गए।

तभी डॉली ने सिर उठा कर देखा तो बस चौक क्रॉस कर रही थी। डॉली ने ऐसे ही देखा तो उसे इशांत दिखा।
 
डॉली ने झट से चाहत की तरफ देखा जो सोच में डूबी थी। डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ा । डॉली के ऐसे हाथ पकड़ने से चाहत ने डॉली की तरफ देखा तो वो दांत दिखा कर हसने लगी। चाहत को कुछ समझ नहीं आया। डॉली ने चाहत का हाथ छोड़ उंगली से खिड़की से बाहर की तरफ इशारा किया। चाहत ने डॉली की उंगली की तरफ देखा तो उसे इशांत दिखा। पहले तो चाहत को कुछ समझ नहीं आया तो उसने डॉली की तरफ देखा। डॉली फिर से उसे देख दांत दिखाते हुए मुस्कुरा दी।

चाहत को उसकी मुस्कुराहट के पीछे का कारण पहले तो समझ नहीं आया वो कभी इशांत को तो कभी डॉली को देख रही थी पर जैसे ही उसे ये बात समझ में आई तो उसने सीधे उठते हुए कहा - no...

बस में बैठे सभी लोग उनकी तरफ अजीब नजरो से देखने लगे। ये देख डॉली अपने चेयर पर से उठी फिर सबको मुस्कुराते हुए देख कर चाहत से दबी आवाज़ में कहा - बैठ जाओ... सब देख रहे है.. डॉली की बात सुन चाहत ने इधर उधर नजर दौड़ाई तो उसने देखा सभी उसे ही देख रहे है ये

देख वो सीट पर बैठ गई।

डॉली ने जैसे ही कुछ कहना चाहा वैसे ही चाहत ने कहा - नहीं.. मै ये नहीं करूंगी..

डॉली उसे घूरते हुए - क्यों..

चाहत ने डॉली को समझाते हुए कहा - नहीं यार.. वो आलरेडी मेरी बहुत हेल्प कर चुके है.. अब और नहीं..

डॉली उसे देखते हुए - हम हमेशा उनकी हेल्प नहीं ले रहे.. बस अभी ही उनकी हेल्प चाहिए.. वो भी डाउट के लिए.. plz चाहत मान जाओ..मै ct में फेल नहीं होना चाहती.. plz

चाहत ने डॉली को देखा जो उससे मिन्नते कर रही थी और मासूम आंखो से चाहत को देख रही थी जिसे देख चाहत ने कहा - ok..

डॉली ने जब ये सुना तो खुश हो गई और जोर से चिल्लाते हुए चाहत को गले से लगा फिर उसके गालो पर किस करते हुए बोली - थैंक्यू.. I love you.. मिसेज शर्मा.. चाहत ने ये सुन डॉली को घुरा तो डॉली ने कान पकड़ते हुए कहा - sorry..

ये बोल उसने चाहत को छोड़ा और अपने आस पास देखा तो सभी फिर अजीब निगाहों से उन दोनों को ही देख रहे थे। ये देख डॉली ने अपना सिर पीट लिया और चाहत उसकी इस

हरकत को देख मुस्कुरा दी। कुछ देर चुप रहने के बाद डॉली ने फिर से बोलना शुरू कर दिया और चाहत बस मुस्कुराते हुए उसे सुन रही थी।

बस वैसे ही चल रही थी और साथ ही डॉली की बकबक भी।

राजनांदगांव,,

अध्यन की कार गेट के पास रुकी अध्यन और देव जी कार से बाहर आए । दोनों गेट के पास आए देव जी ने जैसे ही बेल बजाने के लिए हाथ उठाया ही था उससे पहले ही नौकर ने गेट खोल दिया। देव जी और अध्यन ने अंदर देखा तो गौरी जी के हाथ में पूजा की थाली थी। गौरी जी थाली लेकर अध्यन के सामने गई उन्होंने थाली अध्यन के सामने घुमाते हुए कुछ मंत्र पढ़े।

वहीं देव जी और अध्यन उन्हे देख रहे थे। जब आरती हो गई तो अध्यन ने घर के अंदर आने के लिए अपना कदम बढ़ाया ही था तभी गौरी जी ने उसे हाथ दिखाते हुए रुकने का इशारा किया। अध्यन रुक गया तो गौरी जी ने एक नौकर से लाल सुखी मिर्च लेकर अध्यन के चारो तरफ घूमने लगी और

उसकी नजर उतारने लगी। उन्हे ऐसे करते देख अध्यन ने देव जी की तरफ देखा। तो देव जी ने भी कंधे उचका दिए।

अध्यन ने कुछ बोलना चाहा तो गौरी जी ने भी आंखे बड़ी कर उसे चुप रहने को कह दिया । अध्यन भी सिर हिलाते हुए चुप चाप खड़ा रहा । मिर्च घुमा लेने के बाद गौरी जी ने मिर्च को नौकर को देकर कहा - इसे घर के बाहर फेक आओ..

देव जी जो काफी देर से उन्हे ये सब करते देख रहे थे उनसे ये अंध विश्वास देखा नहीं गया तो उन्होंने गौरी जी से कहा - क्या आप भी.. इतनी पढ़ी लिखी होकर भी.. इन सब बातो पर यकीन करती है..

तब गौरी जी ने अध्यन का हाथ पकड़ कर उसे अन्दर लाते हुए बोली - हा मै पढ़ी लिखी हूं.. पर उसके साथ एक मा भी हूं.. अपने बेटे के लिए जो भी करना होगा वो मै करूंगी.. पर उसे कोई भी नुकसान हो.. ये बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी.. ये एक शब्द एक मा के थे जिसके लिए उसके बेटे से बढ़ कर कुछ नहीं था। इन शब्दों ने देव जी की बोलती बन्द कर दी वो चुप चाप अध्यन के पीछे चलने लगे।

" सही तो कहा था गौरी जी ने.. वो चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी क्यों ना हो.. अपने बेटे के लिए .. वो किसी भी हद तक जा सकती थी.. शायद यही होता है.. एक मा का दिल..

जिसमे अपने बच्चे के लिए बस प्यार ही प्यार भरा होता है "

अब तक अध्यन हॉल में आ चुका था।

गौरी जी ने अध्यन का हाथ छोड़ दिया तब अध्यन ने कहा - मॉम मै फ्रेश होकर आता हूं.. जिसे सुन देव जी ने भी कहा - हा .. मै भी आता हूं..

अध्यन जैसे ही जाने के लिए तो गौरी जी ने उसका हाथ पकड़ लिया । अध्यन एकदम से रुक गया। उसने मूड कर गौरी जी की तरफ देखा तो गौरी जी अध्यन के पास गई फिर उसके माथे को चूमते हुए अध्यन के गले लग गई। वहीं देव जी भी रुक कर अध्यन की तरफ देखने लगे।

अध्यन ने कंफ्यूज होकर देव जी की तरफ देखा तो उन्होंने भी नहीं पता का इशारा किया। अध्यन ने महसूस किया गौरी जी उसके गले लग कर सिसक रही है तो अध्यन ने गौरी जी की पीठ सहला कर कहा - क्या हुआ.. मॉम.. अब तो मै ठीक हूं.. फिर आप क्यों रो रहे हो..

ये सुन गौरी जी ने अध्यन से दूर होते हुए कहा - इन 6 महीनों से खुद को रोक कर रखा था मैंने.. तुम्हारे सामने हमेशा खुश रहती .. पर दिल हमेशा रोता था मेरा.. आज जब तुम ठीक हो.. तब खुशी से ये आंखे बहने लगी है.. ये बोल वो और

ज्यादा सिसकते हुए रोने लगी।

अध्यन ने ये सुना तो उसने देव जी की तरफ देखा जिनकी आंखे भीगी हुई थी। अध्यन ने पहले कभी देव जी को रोते हुए नहीं देखा था आज उन्हे रोते देख अध्यन को भी अच्छा नहीं लग रहा था उसने कुछ नहीं कहा बस गौरी जी को कस कर गले लगा कर कहा - मॉम.. मै आपको और डैड को कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा.. आप दोनों मेरी स्ट्रेथ हो.. ये बोल उसने देव जी की तरफ देख कर पलकें झपका दी। देव जी भी नम आंखो से मुस्कुरा दिए।

कुछ देर रो लेने के बाद गौरी जी अध्यन से दूर हुई उन्होंने अध्यन के चेहरे पर आए आंसुओ को अपने आंचल से साफ करते हुए कहा - अब बस .. अब मत रोना.. कभी भी नहीं.. जाओ फ्रेश होकर आओ.. फिर हम खाना खायेंगे..

अध्यन ने सिर हिला दिया और वहा से जाने लगा।

गौरी जी ने पीछे पलट कर देखा तो देव जी गीली आंखो के साथ उन्हे देख रहे थे

। गौरी जी उनके पास आई तो देव जी ने उनसे कुछ नहीं कहा बस अपने गले से लगा लिया । उन्हे ऐसे देख अध्यन दौड़ते हुए उनके पास आया और उनके गले लग गया। उसने अपनी आंखे बंद की फिर कहा - love you both...

ये सुन देव जी और गौरी जी ने मुस्कुराते हुए एक साथ कहा - love you to..

रायपुर..

चाहत कॉलेज से रूम अा चुकी थी। उसने कपड़े चेंज किए और अपने कपड़े मोड़ कर अलमारी में रखने लगी। अब तक निशा भी रूम में अा चुकी थी । वो भी चेंज कर बेड पर लेट गई। इतने में रूम का दरवाजा जोर से खुला । जिससे चाहत और निशा एक पल के लिए चौक गए। चाहत ने कपड़ों को यू ही पकड़े हुए और निशा ने बेड से उठते हुए दरवाजे की तरफ देखा तो डॉली बुक्स पकड़े चाहत के रूम में एंट्री ले रही थी। उसे ऐसे देख निशा और चाहत ने अपने सिर पर हाथ रख लिया।

डॉली दरवाज़े को पैरो से बंद करते हुए आई फिर अपने बुक्स को बेड पर रख देती है। फिर लम्बी लंबी सांसें लेने लगती है। जिसे देख चाहत ने जल्दी से कपड़े अलमारी में रखे फिर उसने पानी की बोतल उठाई और निशा की तरफ पानी की बोतल बढ़ा दी। डॉली पानी पीने लगती है। निशा डॉली को एक नजर देखती है फिर कानों में इयर फोन डाल कर सो

जाती है। ये देख डॉली हसने लगती है तो चाहत उसे आंख दिखाती हैं। जिसे देख वो चुप हो जाती है।

चाहत ने अलमारी के दरवाज़े बंद कर पानी की बोतल डॉली से लेकर टेबल पर रख देती है फिर डॉली के पास बैठ जाती है। डॉली सारे सब्जेक्ट्स की बुक एक साइड रखते हुए कहती है - बाकी सब तो हो जाएगा.. फिर fme की बुक उठा कर कहती है - but इसका क्या करें..

चाहत उस बुक को एक साइड रख कर अपना मोबाइल उठा लेती है और उसमें से इशांत का नंबर निकाल कर डॉली को दिखाती है डॉली नंबर देख कर खुश हो जाती है। चाहत नंबर डायल करती है तो डॉली मोबाइल को स्पीकर पर रख देती है। मोबाइल पर कॉलर ट्यून बजती है।

दिल को तुमसे प्यार हुआ..

पहली बार हुआ.. तुमसे प्यार हुआ..

ये सुन डॉली फिर से हसने लगती है तो चाहत उसे आंखे दिखा चुप रहने को कहती है। डॉली चुप हो जाती है । इसके तुरंत बाद ही इशांत कॉल अटेंड कर लेता है।

इशांत - हा.. चाहत.. इशांत की आवाज़ इतनी प्यारी होती है कि डॉली दिल पर हाथ रख कर बोलती है - हाए.. मर जाऊं गुड़ खाके.. चाहत एक बार फिर डॉली को घूरती है तो डॉली

चुप हो जाती है।

कॉल पर इशांत जवाब ना पाकर एक बार फिर चाहत को पुकारता है - हेल्लो.. चाहत... चाहत ये सुन झट से कहती है- हा हेल्लो.. इशांत..

इशांत - हा चाहत.. कहो...कुछ काम था?

चाहत ने ये सुन डॉली को देखा तो डॉली उसे इशारे से बात करने को कह रही थी।

चाहत डॉली को देख हिचकिचाते हुए - हा.. नहीं.. मेरा मतलब हा..

इशांत उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - अरे.. तुम तो ऐसे घबरा रही हो.. जैसे मैं तुम्हे खा ही जाऊंगा.. या मुझसे मेरी प्रॉपर्टी लेना चाहती हो..

चाहत को ये सुन हसी अा गई और वो भी मुस्कुराने लगी फिर उसने कहा - हा.. प्रॉपर्टी ही चाहिए..

ये सुन इशांत ने हस्ते हुए कहा - ठीक है.. ले लो.. पर एक बात बता दू .. मै बहुत गरीब परिवार से हूं.. तो ज्यादा प्रॉपर्टी नहीं है मेरी..

चाहत ये सुन हस्ते हुए - नहीं .. भई.. ऐसे कैसे... हमे तो इन्फॉर्मेशन मिली थी.. आप करोड़ों के मालिक है.. तो इस नाते आपके सारे करोड़ों रुपए हमे चाहिए..

इशांत हस्ते हुए - ठीक है .. ले लीजिए.. सब आपका ही तो है.. मेरी प्रॉपर्टी और मै.. वो अपनी बात पूरी कर पाता इससे पहले ही चाहत ने इशांत को टोकते हुए कहा - जी???

इशांत ने खुद को संभालते हुए कहा - नहीं कुछ नहीं.. तुम बताओ.. क्या काम था..??

चाहत ने ये सुना तो डॉली की तरफ देखने लगी। डॉली ने उसे इशारे से बात करने को कहा । तो चाहत ने कहा - वो आपकी हेल्प चाहिए थी..

इशांत ने ये सुन कहा - हा बोलो..

चाहत - वो fme में डाउट थे.. तो.. क्या..आप.. हेल्प करेंगे...

इशांत ने तुरंत कहा - हा ठीक है..आज मेरे एग्जाम कंपलीट हुए है.. ठीक 4 दिन बाद मेरे प्रैक्टिकल कंपलीट हो जाएंगे तो..मै कर दूंगा हेल्प..

ये सुन डॉली ने अपना हाथ सिर पर दे मारा तो चाहत ने झट से कहा - पर हमारे ct तो .. वो तो 4 दिन बाद है.. और हमने कुछ नहीं पढ़ा..

इशांत उसकी बात सुन - हम कौन..??

चाहत - मै और डॉली..

इशांत - कोई नई.. मै तुम्हारी हेल्प कर देता हूं.. कल तुम

दोनों लाइब्रेरी में मिलना.. मै सारे डाउट क्लियर कर दूंगा..

चाहत - पर आपके प्रेक्टिकल..??

इशांत - तुम उसकी टेंशन ना लो.. वैसे भी मेरे प्रैक्टिकल जल्दी हो जाएंगे.. ये सुन डॉली खुश हो जाती है और बेड पर चढ़ कर नाचने लगती है जिसे देख चाहत बेड से उठ जाती है और खिड़की के पास खड़ी हो जाती है।

चाहत - पर ऐसे कैसे.. आपके practical उसका क्या..??

इशांत - क्युकी.. मेरा रोल नंबर पहले आता है.. तो प्रैक्टिकल जल्दी ख़तम हो जाएगा..

चाहत - ठीक है.. तो कल आपसे लाइब्रेरी में मिलते है..

इशांत ये सुन - ओके तो.. मै जाऊ..

चाहत एकदम से - नहीं.. जिसे सुन डॉली भी उसकी तरफ देखती है तो चाहत इशांत से कहती है - एक ओर डाउट है..

इशांत हस्ते हुए कहता है - वो तो कल सॉल्व होगा ना..

चाहत - नहीं ये दूसरा वाला डाउट है..

इशांत फिर से मुस्कुराते हुए - ठीक है .. बोलो..

चाहत - वो.. हमारा एग्जाम नेक्स्ट मंथ है.. तो आपका एग्जाम अभी कैसे कंपलीट हो गया.. ??

इशांत - क्युकी.. हम है आपके सीनियर.. तो हमारे एग्जाम आप सभी से पहले होते है.. जब आप भी सीनियर बन

जाएंगी.. तो आपके भी एग्जाम जल्दी हो जाएंगे.. ये सुन चाहत ने कुछ नहीं कहा ।

इशांत - और कुछ..

चाहत - जी??

इशांत - मेरा मतलब .. और कोई डाउट..

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - नहीं.. और बाय कहते हुए कॉल कट देती है। इधर डॉली बेड से नीचे उतर कर चाहत को गले से लगा लेती है.. वहीं दूसरी तरफ इशांत मोबाइल को सिर से लगा मुस्कुराते हुए बोलता है - पागल लड़की.. फिर अपना काम करने लगता है।
 
चाहत डॉली की तरफ देखने लगी डॉली ने कुछ नहीं कहा बस चाहत से दूर हुई फिर उसने चाहत को गोल घुमाते हुए कहा - ये.. हमारा काम हो गया... और भांगड़ा करने लगी। चाहत अब उसे देख मुस्कुरा रही थी ।

राजनांदगांव...

अध्यन खाना खा कर बेड पर लेटा हुआ था। तभी दरवाज़ा खुला और अंश अंदर अा गया। अंश सीधा बेड पर चढ गया फिर अध्यन के गले लग गया। अंश को गले लगा अध्यन को

बहुत अच्छा लग रहा था। थोड़े देर बाद अंश अध्यन से दूर हुआ फिर उसने कहा - फाइनली तू ठीक हो गया..

अध्यन ने उससे दूर होते हुए कहा - हा.. यार.. अब सब ठीक है..

अंश - डॉक्टर ने क्या कहा..??

अध्यन - उन्होंने बस इतना कहा कि .. मुझे एक महीने बस और मेडिसिन लेनी है.. फिर मै ठीक हो जाऊंगा.. ये बोल अध्यन ने उसके और डॉक्टर के बीच हुई हर बात अंश को बता दी।

अंश ने इतना सुन कहा - hmm.. ठीक है.. फिर उसने सिर झुका कर कहा - क्या अब.. तू चाहत से बात करेगा..

अध्यन ने अंश को देखा जो सिर झुकाए बैठा था ये देख अध्यन मुस्कुराते हुए - हा करूंगा.. ये सुन अंश खुश होकर कहा - सच में..??

अध्यन ये सुन उसके कंधो में हाथ रख - हा सच में..

अंश ये सुन कर - तू जानता नहीं .. मै कब से ये सुनना चाहता था.. इतने दिनों में मैंने अपने दोनो बेस्ट फ्रेंड्स को बहुत मिस किया है.. अब जब तुम दोनों साथ में होगे तो.. सबसे ज्यादा मै ही खुशी मुझे ही होगी.. अंश ने ये सब खुश

होकर कहा।

इतना सुन अध्यन भी बेड से उठ कर खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया। उसने बाहर देखते हुए कहा - तू हमेशा चाहत के बारे में सोचता है..पर क्या तूने कभी एक बार भी मेरे बारे में सोचा है..

अंश ने अध्यन की बात सुन कर कहा - नहीं अध्यन ऐसा नहीं है .. मै तो बस... अंश बोल ही रहा था।

अध्यन उसे टोकते हुए - तू सोच भी नहीं सकता.. मैंने इतने दिन कैसे गुजारे है.. रोज़ उसी जगह पर जाता था मै.. वहा उसे बैठा देख मुझे बहुत तकलीफ होती थी.. मै चाहता था उसके पास जाना पर जा नहीं पाया...क्युकी डरता था.. कहीं उसे मेरी वजह से दुख ना हो.. अब अध्यन की आवाज़ भारी होने लगी किसी तरह खुद को संभालते हुए कहा - पता है... जब वो मुझे छोड़ कर जा रही थी.. स्टेशन में थी वो.. तब तू वहा नहीं था.. वहा मै था.. मैने उसे देखा था बार बार मूड कर देखते हुए.. जा रही थी.. एक नए सफर पर.. पर फिर भी..उसके आंखो में कोई खुशी नहीं थी.. सब खुश थे.. पर वो खुश नहीं थी.. मै उसके दिल का हाल जानता था.. फिर भी मै उसे रोक नहीं पा रहा था... ट्रेन में उसके साथ था .. ठीक उसके पीछे.. उसे वैसे ही देख रहा था.. अपने पापा के कंधो पर सिर रख कर बड़ी ही सुकून से सोई हुई थी...

उसकी घनी पल्को में आए आंसु... तूने नहीं देखे थे... मैंने देखे थे.. पता है.. जब वो ट्रेन से उतर कर घबराहट भरी नज़रों से इधर उधर देख रही थी.. मन किया उसी वक़्त ही उसका हाथ पकड़ लू... और कहूं.. मै हूं तुम्हारे साथ .. हमेशा.. हर पल..

ये बोल अध्यन ने अंश की तरफ देखा जिसमे नमी थी और दर्द था जो बहुत ही गहरा था उसने वैसे ही कहा - तू सोच भी नहीं सकता.. कितना दर्द होता है .. जब आप चाह कर भी अपने प्यार के लिए कुछ नहीं कर पाते है..

अंश ने उसकी आंखे देख कर कहा - सॉरी भाई.. मैंने तुझे आज तक समझा ही नहीं..

अध्यन ने भीगी पलको के साथ मुस्कुराते हुए कहा - इट्स ओके .. तेरी कोई गलती ही नहीं शायद मैंने ही.. तुझे बताने में देर कर दी..

अंश ने कहा - ठीक है मुझे तो देर से बता रहा है... पर उसे जल्दी बता देना.. पर भाई तू उसे छोड़ने रायपुर तक गया था.. और उसे पता भी नहीं..

अध्यन मुस्कुराते हुए - महसूस तो उसने भी किया था.. पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा..

अंश - हा ये हो सकता है..

तभी अंश का मोबाइल बजने लगा अंश ने मोबाइल देखा फिर मुस्कुराने लगा ये देख अध्यन ने कहा - क्या हुआ.. क्यों पागलों की तरह बिना बात के मुस्कुरा रहा है..

अंश ने कुछ नहीं कहा बस मोबाइल अध्यन की तरफ कर दिया अध्यन ने मोबाइल देखा फिर वो भी मुस्कुराने लगा क्युकी कॉल चाहत का था।

अंश ने कॉल अटेंड किया फिर कहा - हा चाहत...

चाहत ने चहकते हुए - हेल्लो अंश..

अंश उसकी आवाज़ की खनक को महसूस करते हुए - क्या बात है.. बहुत खुश हो..

चाहत - हा आज मै बहुत खुश हूं.. जानते हो क्यों..

अंश ने मोबाइल स्पीकर पर कर के पूछा - अच्छा बताओ.. क्यों..?

चाहत - क्युकी.. आज मेरी बहुत बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व हो गई..

अंश और अध्यन चाहत की खुशी को महसूस कर पा रहे थे उसे ऐसे खुश होते देख अध्यन भी मुस्कुराने लगा। अंश ने कहा - और प्रॉब्लम क्या थी..??

चाहत ने ज़ोर से कहा - fme

अंश ने अजीब सा रिएक्शन देते हुए कहा - fme आई think वो तो सब्जेक्ट है ना.. फिर वो.. अंश बोल ही रहा था

तभी ...

चाहत - अरे बुद्धू ... वो क्या है ना.. नेक्स्ट four days के बाद हमारा ct है तो.. उसके लिए prepare करना था.. बाकी के सारे सब्जेक्ट्स तो हो गए.. बस fme में ही डाउट था.. तो आज मैंने और डॉली..

अंश उसे टोकते हुए - डॉली.. कौन डॉली..

चाहत सिर पर हाथ मारते हुए - अरे डॉली.. मेरी फ्रेंड..

अंश - ओह अच्छा..

चाहत ने फिर से कहना स्टार्ट किया - हा तो.. मैंने और डॉली बहुत परेशान थे.. तो हमने सोचा क्यों ना इशांत से बात की जाए.. and guess what.. जब हमने उन्हें अपनी प्रॉब्लम बताई तो वो मान गए ..

अंश - मान गए.. बट किस लिए मान गए..

चाहत - हमारे डाउट क्लियर करने के लिए.. है ना मज़े की बात...

अंश - ओह.. अच्छा..

चाहत ये सुन उदास होकर बोलना है - बस अच्छा.. ये सुन बगल में खड़ा अध्यन अंश को आंखे दिखता है।

जिसे देख अंश जबरदस्ती खुश होकर - बस अच्छा नहीं..

बहुत अच्छा.. ये तो बहुत अच्छा हुआ.. yeh...

चाहत अब दोबारा चहकते हुए - है ना अच्छी बात.. वहीं तो .. ये बोल चाहत थोड़ी देर के लिए चुप हो जाती है ।

अध्यन को उसका ऐसा चुप रहना अच्छा नहीं लगता तो वो अंश को बिना आवाज़ के होठ हिलाते हुए कहता है - क्या हुआ पूछे..

अंश उसका इशारा समझ कर कहता है - क्या हुआ.. चाहत ऐसे suddenly चुप क्यों हो गई..

चाहत थोड़ी देर चुप रहती है तो अध्यन को घबराहट होने लगती है जिसे देख अंश झट से कहता है - हेल्लो.. चाहत तुम सुन रही हो..

चाहत अंश की बात सुनकर कहा - अंश वो..

अब अंश को भी घबराहट होने लगती है जिसे छुपाते हुए कहता है - क्या हुआ.. बोलो..

चाहत - वो .. मुझे सुबह से बेचैनी हो रही थी..और अजीब भी लग रहा था.. तो क्या तुम..

अंश उसकी बात सुन - तो.. मै क्या ..

चाहत ने वैसे ही हिचकिचाते हुए कहा - तो.. क्या तुम.. अध्यन के घर जाकर उसे देख कर आओगे..

अध्यन ने उसकी आवाज़ में एक तरह की फिक्र के साथ डर

को भी महसूस किया । जिसे समझ कर वो बेड पर बैठ गया । उसने अपने हाथो को अपने चेहरे पर रख लिया । ये देख अंश को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले।

इधर चाहत ने भी अपनी आंखे साफ कर के कहा - हेल्लो.. अंश..

अंश ने उसकी बात सुन कर कहा - हा चाहत यही हूं मै.. बोलो..

चाहत ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - अध्यन .. ठीक है या नहीं .. बस इतना जान लू.. फिर मुझे भी अच्छा लगेगा..

अब अंश से रहा नहीं गया उसने अध्यन को घूरते हुए कहा - मै तुम्हे बताना भूल गया.. मै अध्यन के घर पर हूं.. वो अभी वॉशरूम में है.. तुम कहो तो उससे बात करवाऊ तुम्हारी..

ये सुन अध्यन ने चेहरे से हाथ हटा कर अंश को देखा जो उसे ही घुरे जा रहा था दूसरी तरफ चाहत ये सुन थोड़ी देर के लिए चुप हो गई।

चाहत ने गहरी सांस लेकर कहा - नहीं.. जब तक वो खुद नहीं चाहेगा.. तब तक तो मै उससे बात करूंगी नहीं.. ये सुन अंश ने सिर पर हाथ दे मारा वहीं अध्यन मुस्कुराने लगा।

चाहत ने बात जारी रखते हुए कहा - बस तुम इतना करना..

उसे कहना अपना ख्याल रखे.. क्युकी कुछ दिनों से मुझे अजीब सी बेचैनी महसूस होती है.. और अगर कोई भी प्रॉब्लम होगी तो.. मुझे बताना..

अंश ने ये सुन कर कहा - अच्छा ठीक है.. पर तुम चाहो तो अभी अध्यन से बात..

अंश बोल ही रहा था तभी चाहत ने कहा - मै चलती हू.. अंश मुझे कुछ काम था.. बाय..

अंश ने भी बाय कहा और चाहत ने भी कॉल कट कर दी।

अब अंश ने मोबाइल को जेब में डाल कर अध्यन को देखा जो उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था जिसे देख अंश ने कहा - हस मत.. नहीं तो मुंह तोड़ दूंगा तेरा.. सालों तुम ही दोनो का अच्छा है.. एक दूसरे को मिस भी करते हो.. एक दूसरे की फिक्र भी करते हो.. पर बात दोनो को नहीं करनी.. फिर अपनी तरफ उंगली कर - और एक मै हूं.. जो थाली के बैगन की तरह.. कभी इधर तो कभी उधर होता हू.. जाओ यार मुझे तो बात ही नहीं करनी तुम दोनों से.. ये बोल अंश वहा से जाने लगा।

तभी अध्यन ने कहा - अंश रुक..

अंश रुक गया तो अध्यन उसके पास जाकर - नहीं यार तू ये नहीं कर सकता.. अंश ने हैरानी से अध्यन की तरफ देखा तो

अध्यन ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - क्युकी एक तू ही तो है.. जिसके जरिए मुझे चाहत के बारे में सब कुछ पता चल जाता है.. मेरा मेल कबूतर.. ये बोल अध्यन हसने लगा ।

अंश ने ये सुन खीज कर कहा - साले सेलफिश.. ये बोल जाने लगा तो अध्यन ने उसे जबरदस्ती बेड पर बैठाते हुए कहा - तू बैठ मेरी जान.. चल तुझे कुछ खिलता हूं.. बोल क्या खाएगा..

अंश खाने की बात सुन खुश होते हुए - हा ये हुई ना बात.. जो भी टेस्टी हो.. खिला दे.. अध्यन ने उसकी बात सुनी फिर कहा - नौटंकी कहीं का.. ये बोल उसने नौकर को आवाज़ दी फिर उसे नाश्ता लाने को कहा ।

अब अध्यन ने अंश की तरफ देखते हुए कहा - चाहत ct की बात कर रही थी.. वो क्या होता है..

अंश ने बताना शुरू किया -ct means class test.. हर सेमेस्टर में हमारे टेस्ट होते है.. जिसमे से बेस्ट मार्क्स होते है.. उन्हे यूनिवर्सिटी भेजा जाता है.. और ये मार्क्स हमारे semester एग्जाम में count होते हैं..

अध्यन ने ये सुन कहा - और तुम्हारे सेमेस्टर एग्जाम कब है..??

अंश - वो नेक्स्ट मंथ.. वैसे तू ये क्यों पूछ रहा है.. इतने में

दरवाजे पर नॉक हुई फिर एक नौकर खाने की प्लेट लेकर अंदर अा गया फिर प्लेट्स को टेबल पर रख कर उसने कहा - बाबा आपका नाश्ता.. अध्यन ने उसकी बात सुन हा में सिर हिला दिया। अब अध्यन ने अंश की तरफ इशारा किया तो अंश भी उठ कर टेबल के पास अा गया।

अध्यन ने अंश को बैठने का इशारा किया फिर उसने नाश्ते की प्लेट अंश की तरफ बढ़ाते हुए कहा - तो तेरा मतलब है .. की तुम लोगो के सेमेस्टर एग्जाम almost 2 महीनों में हो जाएंगे..

अंश ने बाइट लेते हुए कहा - हा तो..

अध्यन ने भी नाश्ते की प्लेट उठाते हुए कहा - तो कुछ नहीं.. मै चाहत से एग्जाम के बाद बात करूंगा..

अंश के हाथ खाते खाते रुक गए उसने चम्मच साइड में रखा फिर अपना एक हाथ सिर पर रखते हुए कहा - तू मुझे चैन से खाने और जीने देगा की नहीं..

अध्यन ने उसका हाथ सिर से हटाते हुए कहा - ज़्यादा टेंशन मत ले.. ये लास्ट टाइम है.. इसके बाद हम पक्का बात कर लेंगे.. ये बोल अध्यन ने एक बाइट अंश को खिला दिया।

अंश ने खाते हुए कहा - पर तू अब क्यों रुका हुआ है..

अध्यन ने नाश्ते के प्लेट में चम्मच रखते हुए कहा - क्युकी..

अभी उसका एग्जाम है.. और मै नहीं चाहता .. मेरी वजह से उसके एग्जाम में इफेक्ट पड़े.. समझा..

अंश - हा समझ गया... तुम दोनों और तुम्हारा प्यार.. उसकी इस बात को सुन अध्यन मुस्कुराने लगा।

अब दोनोे चुप चापें नाश्ता करने लगे।
 
रायपुर...

अगले दिन

कॉलेज...

चाहत की क्लास ख़तम हुई तो वो सीधे डॉली के क्लास के सामने अा गई। थोड़ी देर बाद डॉली भी क्लास से बाहर आई तो चाहत ने उसे देख अपना हाथ बढ़ा कर उसे अपने पास बुला लिया। दोनों थोड़े देर बाद लाइब्रेरी की तरफ चल पड़ी।

तय समय पर चाहत और डॉली क्लास के बाद लाइब्रेरी पहुंचे । गेट पर ही उनको लाइब्रेरियन ने रोक लिया बिना कुछ बोले ही उन्होंने इशारे से रिजिस्टर को तरफ उंगली कर दी। चाहत

डॉली चाहत भी बुक्स सेक्शन कि तरफ चले गए। उनको प्रॉब्लम थी fme में तो उस सब्जेक्ट की बुक्स दोनो ने उठाई और एक टेबल पर बैठ गए। थोड़े देर सिर खपाने के बाद डॉली ने चाहत की तरफ बेचारगी से देखा। इधर चाहत का चेहरा भी डाउट से भरा पड़ा था।

डॉली और चाहत ने एक दूसरे को बेचारगी से देखा फिर से बुक्स में घुस गए। तभी डॉली की नजर अंदर बैठे लाइब्रेरियन पर पड़ी जो चुपके से चिप्स खा रहे थे। वहीं जब उन्होंने देखा डॉली उन्हे घुर रही है तो वो खाते हुए अटक गए और खासने लगे। लाइब्रेरी में बैठे बाकी लोगो के साथ चाहत ने भी उनकी तरफ देखा फिर डॉली से कहा - इनको अचानक क्या हो गया..??

डॉली को उनकी हालत देख हसी अा गई उसने चाहत से कहा - हम यहां पहले से ही भूखे है.. और ये ऐसे खायेंगे तो बच्चो की बद्दुआ तो लगेगी ही ना..

चाहत को डॉली की बात समझ नहीं आई तो डॉली ने जो कुछ भी थोड़े देर पहले देखा था उसे चाहत को बता दिया अब चाहत भी हसने लगी।

थोड़े देर बाद दरवाज़े के पास किसी के आने की आहट हुई

तो चाहत और डॉली के साथ बाकी सभी की नज़रे दरवाज़े की तरह चली गई। जहा एक 6 फीट की हाइट का लड़का अंदर अा रहा था जिसने हल्के स्काई ब्लू कलर की शर्ट और ब्लैंक फॉर्मल पेंट पहने लड़का रिजिस्टर पर साइन कर रहा था। उसने अपनी शर्ट के स्लीव्स को कोहनी तक मोड़ रखा था बालो को जेल लगा कर अच्छे से सेट कर रखा । बियर्ड्स ट्रीम थे पर उस पर काफी जच रहे थे पैरो में फॉर्मल ब्लैक शूज में वो काफी डैसिंग लग रहा था। लाइब्रेरी में बैठी लड़कियों के साथ लड़के भी उसे घुर रहे थे।

चाहत और डॉली टेबल कोने में बैठे थे। इसलिए दोनों को चेहरा साफ नहीं दिख रहा था। पर शर्ट की फिटिंग से कोई भी कह सकता था कि लड़के की बॉडी काफी अच्छी है। साथ ही साथ चेहरे पर रहने वाला एट्टीट्यूड बता रहा था कि बंदा मैकेनिकल वाला है। धीरे धीरे वो लड़का टेबल के करीब आने लगा.. उसके करीब आते ही चाहत और डॉली ने उसे पहचान लिया । डॉली ने तो सीधे दिल पर हाथ रख कर कहा - हाए... कतई.. जहरीले लग रहे है.. ना..

चाहत ने डॉली की बात सुनी फिर उसे आंखे दिखाते हुए चुप रहने का इशारा किया ।

उस लड़के ने आस पास नजर दौड़ाई फिर अपना मोबाइल निकाल कर कॉल लगा दी। दूसरी तरफ चाहत का मोबाइल

वाइब्रेट होने लगा। चाहत ने एक नजर लड़के को देखा फिर कॉल अटेंड करते हुए कहा - हा इशांत ..इधर देखिए .. लेफ्ट साइड .. चाहत के बोलते ही लड़के ( इशांत ) ने लेफ्ट साइड देखा । जहा कोने में चाहत और डॉली बैठे थे जो उसे देख कर मुस्कुरा रहे थे। उन्हे देख इशांत उनके पास आने लगा।

वहीं इशांत को उनके पास जाता देख बाकी जितने भी बच्चे वहा बैठे थे सभी की नजर इशांत की तरफ चली गई। इशांत जब चाहत और डॉली के पास पहुंचा तो डॉली और चाहत अपने सीट से खड़े हो गए। जिसे देख इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - ये क्या कर रहे हो

..??

इस पर डॉली और चाहत ने एक साथ कहा - गुड आफ्टरनून..सर.. सर पर उन्होंने ज्यादा ही ज़ोर दिया था। दोनो को ऐसा करते देख इशांत मुस्कुराने लगा फिर उसने भी गुड आफ्टरनून कहा फिर कहा - तुम दोनों को इतना फॉर्मल होने की जरूरत नहीं.. ये बोल उसने दोनों को बैठने का इशारा किया। इशारा पाकर चाहत और डॉली दोनों चेयर पर बैठ गए।

उसने अपने बुक्स को अपनी तरफ किया।

फिर चाहत और डॉली की तरफ देख कर कहा - कौन सा यूनिट..

जिसे सुन चाहत ने झट से कहा - यूनिट फर्स्ट ... ये सुन इशांत मुस्कुरा दिया..

फिर इशांत यूनिट फर्स्ट को एक्सप्लेन करने लगा चाहत जहा समझ रही थी वहीं डॉली उसका तो ध्यान रह रह कर इशांत के पिंक लिप्स पर ही जा रहा था। यूनिट के एक टॉपिक को एक्सप्लेन कर लेने के बाद इशांत ने डॉली की तरफ बिना देखे कहा - डॉली कैल्सी...

डॉली वो तो बस इशांत के चेहरे में खोई थी उसने ध्यान नहीं दिया तो इशांत ने सिर उठाया और मूड कर सीधे डॉली को देखने लगा जिससे डॉली एक पल के असहज हो गई उसने अपना सिर नीचे झुका लिया।

इशांत ने उसे ऐसा करते देखा फिर मुस्कुराते हुए उसने केल्सी ( कैलकुलेटर ) को खुद ही हाथ बढ़ा कर ले लिया। फिर इशांत ने क्वेश्चन सॉल्व किया इशांत का मेथड इतना ईज़ी था कि चाहत को झट से समझ अा गया। उसने बुक इशांत से ली और प्रॉब्लम्स खुद सॉल्व करने लगी। वहीं डॉली इशांत को ही देख रही थी। वो बार बार कोशिश करती की वो

जाता हूं.. तुम्हारी इन पलको को देख कर... तभी किसी ने उसके कंधो पर हाथ रखा जिससे इशांत ने पलट कर देखा तो पीछे खड़ा लड़का उसे साइड होने को कह रहा था। जिसे सुन इशांत भी पलट कर आगे निकल गया।

इशांत बुक पकड़े चाहत के पास आया उसने बुक को टेबल पर रखा और पढ़ने लगा साथ ही चाहत और डॉली भी पढ़ने लगे। थोड़े देर बाद इशांत ने मोबाइल पर टाइम देखा फिर चाहत की तरफ देखते हुए कहा - चाहत... जिस पर चाहत ने अपना सिर उठा कर इशांत की तरफ देखा तो इशांत ने कहा - काफी वक़्त हो गया है.. अब तुम दोनों को जाना चाहिए.. तुम्हारी बस अा गई होगी..

चाहत ने कहा - बट ये यूनिट तो कंपलीट नहीं हुआ है..

इस पर इशांत ने उसकी परेशानी समझते हुए कहा - ये जो टॉपिक मैंने समझाया है ना.. सारे क्वेश्चन इसी से सॉल्व होंगे.. और रेस्ट टॉपिक्स भी इसी से रिलेटेड है.. तुम एक बार ट्राई करना.. सॉल्व करने की.. अगर फिर भी अगर कोई प्रॉब्लम हुई तो .. कल मै उसे सॉल्व कर दूंगा..

चाहत ने ये सुन हा में सिर हिला दिया फिर उठ कर उसने बुक्स उठाई फिर उसे वापस रो में रख कर अा गई। इशांत ने

डॉली और चाहत को देखते हुए कहा - तो कल इसी टाइम पर .. यही मिलते है..

चाहत और डॉली ने एक साथ हा कहा फिर अपने केलसी और बाकी चीजों को पकड़ कर आगे बढ़ने लगी। दोनों लाइब्रेरियन के पास पहुंची एक बार फिर उन्होंने रिजिस्टर में एंट्री कर तीनों बाहर अा गए। उन्होंने अपने बैग्स लिए फिर लाइब्रेरी से बाहर अा गए। चाहत और डॉली ने पलट कर इशांत को बाय कहा फिर अपने बस की तरफ बढ़ने लगी।

थोड़ी दूर चले जाने के बाद।

डॉली ने एक बार पलट कर इशांत को देखा जो एक हाथ में साइड बैग पकड़े दूसरे हाथ से मोबाइल पकड़ उसे कान से लगाए किसी से बात कर रहा था । इशांत के बाल हवा में उड़ रहे थे। वो बहुत ही स्मार्ट लग रहा था। जिसे देख डॉली मुस्कुरा दी।

थोड़ी देर बाद चाहत और डॉली बस के पास पहुंच गए। चाहत और डॉली बस में बैठ गए। चाहत आज बहुत थक गई थी तो उसने अपना सिर सीट से लगा लिया वहीं डॉली लाइब्रेरी में हुए किस्से को सोच कर मुस्कुराने लगी। आज उसने इशांत के लिए कुछ महसूस किया था ऐसा पहली बार

था कि डॉली का दिल किसी के लिए धड़क रहा था। डॉली ये सोच कर मुस्कुरा रही थी । ऐसे ही बस आगे बढ़ने लगी।

अब ऐसा रोज़ होने लगा चाहत और डॉली रोज़ लाइब्रेरी जाते वहा वो इशांत से मिलते वो वहा उन्हे टॉपिक्स समझता साथ ही उनके डाउट सॉल्व करता था। चाहत और डॉली भी कॉलेज से आकर हॉस्टल में fme पढ़ती जिस दिन जो यूनिट होता उस यूनिट से रिलेटेड चीज़े वो पहले ही पढ़ लेती थी साथ ही उन्हे जो भी डाउट होते वो जाकर इशांत से डिस्कस कर लेती थी। लगातार तीन दिनों तक ये सब होने के बाद ।

चौथे दिन ..

चाहत की क्लास ख़तम हो जाने के बाद चाहत डॉली के क्लास के बाहर पहुंची उसकी क्लास चल रही थी तो चाहत बाहर डॉली के बाहर आने का इंतज़ार करने लगीं । डॉली थोड़े देर में बाहर आई उसे देख चाहत के चेहरे पर चिंता के भाव अा गए क्युकी डॉली के चेहरे से लग रहा था जैसे

उसकी तबीयत ठीक नहीं थी।

चाहत झट से डॉली के पास गई तो उसका चेहरा मुरझाया हुआ था। चाहत ने डॉली के पास जाकर उसे छुआ तो उसकी बॉडी का टेंपरेचर नॉर्मल था पर उसका चेहरा उतरा हुआ था।

ये देख चाहत ने डॉली से पूछा - क्या हुआ.. तेरा चेहरा इतना पीला कैसे पड़ गया है???

डॉली ने धीरे से कहा - मुझे.. आजीब लग रहा है. जैसे शरीर में जान ही ना हो.. ये उसने बेहद सुस्त होकर कहा था.. उसकी ऐसी आवाज़ सुन चाहत ने उसका हाथ पकड़ा फिर उसे कैंटीन ले आई वहा से चाहत ने डॉली को एक टेबल पर बिठाया।

चाहत वहा से उठ कर काउंटर के पास गई फिर उसने वहा से डॉली के लिए एनर्जी ड्रिंक और चॉकलेट ली। फिर ड्रिंक ले कर चाहत के पास अा गई। उसने डॉली को ड्रिंक पीने को दी फिर उसे चॉकलेट दिया । डॉली ने ड्रिंक पिया फिर चॉकलेट खाने लगी । चाहत ने उसे देखते हुए पूछा - क्या तुम ठीक हो..

तब डॉली ने कहा - हा मै अब ठीक हूं.. फिर डॉली ने मोबाइल पर देखते हुए कहा - तुम लेट हो रही हो.. चलो लाइब्रेरी जाओ..

चाहत ने उसकी बात सुन कहा - पर तुम्हे ऐसे छोड़ कर.. नहीं यार.. वो अपनी बात पूरी करती इससे पहले ही डॉली ने कहा - परसो ct है.. और आज हम लास्ट chapter करने वाले थे..and I think तुम्हे जाना चाहिए.. वरना इतने दिन की मेहनत वेस्ट हो जानी है..

चाहत ने फिर से कुछ कहना चाहा तो डॉली ने चाहत के हाथ में अपना हाथ रख कर कहा - जाओ.. मै ठीक हूं ...

डॉली की बात सुनकर चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया और अपना बैग पकड़ कर उठते हुए बोली - तुम्हे ठीक लगे तो ही.. बस में जाना वरना.. यही रुक कर मेरा इंतज़ार करना.. उसकी बात सुन डॉली ने हा में सिर हिला दिया।

चाहत वहा से बाहर आई और लाइब्रेरी की तरफ चले आई। उसने रिजिस्टर में एंट्री की फिर अन्दर अा गई। उसने नज़रे घुमाते हुए यहां वहा देखा तो इशांत उसे टेबल पर बैठा बुक पढ़ते हुए नजर आया चाहत उसके पास आई फिर उसने कहा - इशांत..

इशांत ने चेहरा उठा कर चाहत की तरफ देखा फिर कहा -

अरे चाहत .. आओ ना.. उसने पीछे देखते हुए कहा - डॉली.. वो कहा है..

चाहत ने ये सुन कहा - वो उसकी तबीयत ठीक नहीं है तो.. वो आज नहीं अा पाएगी..

ये सुन इशांत ने कहा - अच्छा ठीक है.. फिर उसने सामने की तरफ हाथ बढ़ा कर कहा - बैठो ना... इशांत की बात सुन चाहत सामने चेयर पर बैठ गई।

अब दोनों लास्ट यूनिट को पढ़ने लगे जिससे रिलेटेड प्रॉब्लम्स दोनों ने मिल कर सॉल्व किए। प्रॉब्लम्स सॉल्व हो जाने के बाद डाउट्स देखे गए।ऐसे ही दो घंटों की मेहनत के बाद किसी तरह वो यूनिट कंपलीट हुआ चाहत और इशांत ने अब राहत की सांस ली।

चाहत ने पेन की कैप को लगाते हुए कहा - फाइनली.. ये कंपलीट हुआ..

फिर उसने इशांत की तरफ देखा फिर कहा - ऑल थैंक्स टू यू...

इशांत ने उसकी तरफ देखा फिर सीने पर हाथ रख सिर झुकाते हुए कहा - my pleasure... फिर हसने लगा।

उसकी इस हरकत पर चाहत मुस्कुरा दी।

चाहत चेयर से उठी फिर उसने अपने नोट बुक्स समेटने लगी तभी इशांत का मोबाइल वाइब्रेट होने लगा तो उसने मोबाइल को देखा । मोबाइल पर फ़्लैश होने वाले नाम को देख चाहत की आंखो का साइज बड़ा हो गया । चाहत अब सवालिया निगाहों से इशांत को देखने लगी।

इशांत जो खुद भी बुक्स समेट रहा था उसकी नजर भी वाइब्रेट होते हुए मोबाइल को देखा जिसमे " अध्यन " नाम फ़्लैश हो रहा था। जिसे देख इशांत ने मोबाइल उठाया फिर जैसे ही उसने नज़रे उठा कर सामने देखा तो चाहत उसे सवालिया नजरो से देख रही थी।

इशांत ने गहरी सांस ली फिर कॉल अटेंड कर चाहत की तरफ देखते हुए कहा - हा.. अध्यन.. इधर चाहत के दिल ने मानो धड़कना छोड़ दिया था।

दूसरी तरफ से अध्यन ने कुछ पूछा जिसे सुनते इशांत ने बुक पकड़ी फिर आगे बढ़ गया। चाहत भी उसके पीछे चलने लगी। उसने बाते सुनते हुए कहा - अध्यन एक मिनट होल्ड

करना...

तो दूसरी तरह से अध्यन ने कुछ कहा तो इशांत ने कहा - हा ये ठीक रहेगा.. ये बोल उसने कॉल कट कर दी। उसने मोबाइल एक हाथ में पकड़े रखा फिर लाइब्रेरियन के पास जाकर उसने साइन किया । उसने तिरछी नज़रों से चाहत को देखा जो उसे ही देख रही थी।

इशांत ने चाहत को साइन करने का इशारा किया चाहत ने उसकी बात सुन रिजिस्टर पर साइन कर दिया । दोनों थोड़ी देर बाद लाइब्रेरी से बाहर अा गए।

चाहत अभी भी इशांत को सवालिया नजरो से देख रही थी जिसे देख इशांत ने कहा - तुम्हारे सारे क्वेश्चंस के आंसर मै यहां नहीं दे पाऊंगा...

चाहत ने फिर से एक बार फिर इशांत को सवालिया नजरो से देखा तो इशांत ने कहा - चलो बास्केट बाल ग्राउंड चलते हैं...

इशांत के इतना कहते ही चाहत चुप हो गई। उसने मोबाइल निकाल कर डॉली को मेसेज कर कहा - तुम हॉस्टल चली जाओ.. मुझे देर होगी.. मै ऑटो से अा जाऊंगी.. और ये बात

राजू भैया ( बस का ड्राइवर ) को बता देना।

जिस पर थोड़े देर में डॉली का रिप्लाइ आया - ओके...

डॉली का रिप्लाइ देख चाहत ने इशांत की तरफ देखा फिर उसके पीछे चलने लगी।

दोनों अब ग्राउंड के पास अा गए थे।

चाहत अब इशांत को देखने लगी या यू कहे उसके बोलने का वेट करने लगी...

इशांत ने गहरी सांस ली फिर ग्राउंड के नजदीक लगे चेयर की तरफ इशारा किया और चाहत से कहा - यहां बैठो ..

चाहत अब भी इशांत को देख रही थी इशांत उसके पैर के पास बैठ गया फिर उसने कहा - चाहत...

चाहत ने अब इशांत की आंखो में देखना शुरू किया तो इशांत ने कहा - I love you...

I love you....

ये सुन कर चाहत ने कुछ नहीं कहा । कहती भी क्या.. वो बस इशांत को ही देखे जा रही थी। वहीं इशांत ने कुछ देर के लिए सिर झुका लिया । उसने चाहत के हाथो पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा - पता नहीं.. कब से मै ये सब फील करने लगा.. पर ट्रस्ट मी.. मैंने कभी भी अपनी फीलिंग्स तुम पर थोपने की कोशिश नहीं की... मैंने हमेशा से चाहा है कि तुम खुश रहो.. शायद इसीलिए.. ये बोल इशांत ने अपना सिर उठाया ।

इशांत के सिर उठाते ही चाहत ने इशांत की आंखो में देखा जिसमें अजीब तरह का दर्द था। वहीं इशांत को चाहत के चेहरे पर बस सवाल दिख रहा था मानो वो पूछना चाह रही हो। आखिर क्यों... इशांत चाहत के सवालिया नजरो को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने फिर से अपना सिर नीचे झुका लिया।
 
इशांत ने सिर झुकाए हुए ही कहा - शायद इसीलिए ही उस

दिन.. जब अध्यन मुझसे मिलने आया था... तो मैंने उसे मना नहीं किया.. क्युकी कहीं ना कहीं मै ये चाहता था.. की वो तुमसे दूर हो जाए...और तुम मेरे पास अा जाओ.. ये सुन चाहत हैरान रह गई और उसने इशांत के हाथो से अपना हाथ हटा लिया।

चाहत के हाथ हटाते ही इशांत ने उसे देखा फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा - हा चाहत.. अध्यन मुझसे मिलने आया था..जब तुमने काउन्सलिंग करवाई और तुम्हे ये कॉलेज अलॉट हुआ.. तो उसने मिनी से बात की जिससे उसे पता चला.. मै यहां इस कॉलेज में हूं.. तो वो मुझसे मिलने आया था.. ये बात बाद में मैंने मिनी से कन्फर्म की .. अध्यन ने ही मुझे तुम्हारे बारे में बताया.. उसने ही कहा मै तुम्हारी हेल्प करू.. जिसे सुन मैंने झट से हा कह दिया.. वजह तुम जानती हो.. मेरा तुम्हारे लिए प्यार.. जिसके कारण मै तुम्हे अपनी नज़रों के सामने रखना चाहता था.. यही मेरा स्वार्थ था.. मुझे अध्यन की बातो से ये तो पता चल गया था .. उसे जरूर कोई प्रॉब्लम है.. वरना वो तुम्हे ऐसे छोड़ दे.. ये इंपॉसिबल है.. पर मुझे इन बातो से कोई मतलब नहीं था.. मेरे लिए तो तुम्हारा पास होना मायने रखता था.. मैंने सोचा तुम अध्यन से दूर होगी तो उसे भूल जाओगी.. पर ये नहीं हुआ..

इतना कहने के बाद इशांत ने दर्द भरी मुस्कुराहट के साथ चाहत को देखा जिसके चेहरे पर अब सवाल नहीं था कहीं ना कहीं चाहत को अध्यन का उसके लिए फिक्रमंद होना अच्छा लग रहा था। ये चाहत के चेहरे पर अचानक आई चमक ने बता दिया था।

इशांत अब उठ कर चाहत के बगल में बैठ गया। उसने चाहत का हाथ छोड़ते हुए कहा - चाहत तुम्हे पता है.. जब मैंने अध्यन को कहा .. अगर चाहत ने तुम्हे भुला दिया तो .. ये सुन चाहत के चेहरे के भाव थोड़े देर के लिए बदले जिसे देख इशांत ने फिर से मुस्कुराते हुए कहा - तो.. उसने अपनी उंगली.. यहां.. ये बोल इशांत ने अपने सीने कि तरफ इशारा कर कहा - यहां रख कर कहा था.. की वो तुम्हारे यहां पर है.. तुमने उसे यहां जगह दी है.. तुम उसे भुला दो.. ऐसा तुम कभी नहीं करोगी.. और देखो ना उसका प्यार.. जीत गया .. और मै हार गया.. ये बोल इशांत ने एक बार फिर अपना सिर झुका लिया।

तभी इशांत का मोबाइल एक बार फिर वाइब्रेट हुआ । इशांत ने मोबाइल देखा तो कॉल अध्यन का था । इशांत ने सिर उठा कर चाहत की तरफ देखा तो चाहत ने मोबाइल इशांत के हाथ से ले लिया फिर उसे स्पीकर पर रख दिया।

दूसरी तरफ से अध्यन की आवाज़ आई - हेल्लो इशांत..

इशांत ने एक नजर चाहत पर डालते हुए कहा - हा.. अध्यन..

अध्यन ने दूसरी तरफ से कहा - कैसे है आप..??

इशांत - अच्छा हूं..

अध्यन - आपका एग्जाम था ना.. कैसा रहा..

इशांत - अच्छा गया..

अध्यन थोड़े देर के लिए शांत हो गया फिर उसने कहा - वो आपको थैंक्यू.. कहना था..

अध्यन के थैंक्यू से जितना चाहत हैरान थी उतना ही इशांत भी हैरान था उसने झट से कहा - थैंक्यू.. पर क्यों..??

अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा - वो मुझे चाहत से पता चला.. आपने उसकी हेल्प की किसी सब्जेक्ट में.. सो उसके लिए थैंक्यू..

इशांत और चाहत फिर एक बार हैरान रह गए इशांत ने झट से कहा - पर ये बात तुम्हे कैसे पता..?? तुम्हारी बात हुई चाहत से..??

अध्यन ने तुरंत कहा - नहीं.. वो चाहत ने अंश को बताया था.. जिससे मुझे भी पता चल गया.. जहा तक चाहत से बात

करने की बात है.. वो तो अब दो महीने बाद ही होगी..

इशांत ने ये सुन चाहत की तरफ देखा जो बस सुन रही थी पर उसके चेहरे के एक्सप्रेशन से ये लग रहा था जैसे वो इस बात को सुन कर खुश नहीं है। जिसे इशांत देखते ही समझ गया था।

फिर उसने अध्यन से कहा - पर क्यों.. मेरा मतलब है.. दो महीने बाद क्यों..??

अध्यन ने कहा - क्युकी अभी उसके ct है.. उसके बाद एग्जाम .. और मै हूं उसकी जिंदगी का कमजोर हिस्सा.. अगर मै अभी उसके पास गया तो.. वो कहीं ना कहीं कमजोर पड़ेगी.. और इसका इफेक्ट उसके एग्जाम पर पड़ेगा.. जो मै बिल्कुल भी नहीं चाहता..

इतना बोल अध्यन ने गहरी सांस ली फिर कहा - उसे खुद से दूर .. मैंने इसीलिए नहीं किया.. की वो अपना एग्जाम और अपना फ्यूचर ही खराब कर दे.. अभी उसे अच्छे से एग्जाम दिला लेने दो.. फिर मै उससे बात कर लूंगा.. इतना बोल अध्यन चुप हो गया।

इशांत ये सुन चुप हो गया वहीं चाहत को अध्यन की आवाज़ में सुनाई देने वाली फिक्र ही चाहत की आंखो को गीला करने के लिए काफी था। वहीं अध्यन का खुद पर विश्वास और चाहत के लिए प्यार देख कर इशांत को खुद पर शर्म अा रही थी उसे इस बात का बुरा लग रहा था कि आखिर क्यों.. क्यों..? उसने चाहत को अध्यन से दूर करने की बात सोची.. थोड़े देर तीनों के बीच ऐसे ही चुप्पी छाई रही।

तभी अध्यन ने कहा - हेल्लो.. इशांत..

इशांत जो खुद में ही गुम था। उसने अध्यन की आवाज़ सुन कर कहा - हा अध्यन..

तो अध्यन ने कहा - आप बस दो महीने मेरी चाहत का ध्यान और रख लो.. उसके बाद .. मै हूं उसके लिए.. मुझे पता है.. आपको भी कितना बुरा लगता होगा.. अपने प्यार के सामने होते हुए भी.. उससे अपने दिल की बात ना कह पाना.. तकलीफ में तो आप भी होगे.. बस दो महीने और रुक जाइए.. फिर सब ठीक कर दूंगा मै..

इस पर इशांत ने एक नजर चाहत को देखा जिसकी आंखो में अध्यन के लिए प्यार के साथ एक अलग तरह का गर्व दिख रहा था मानो वो इशांत को कहना चाह रही हो "देखा ये है मेरा प्यार जिसे दूसरो कि फीलिंग्स की कद्र है" इशांत अध्यन

कर लिया था उसने कहा - आप पहले चुप हो जाइए..प्लीज़.. चाहत की खातिर.. थोड़े देर के लिए चुप हो जाइए... ये सुन इशांत शांत हो गया। अध्यन ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - आपको क्या लगता है.. आपने ये जो कुछ भी अभी कहा.. वो मुझे पता नहीं होगा.. मै पहले दिन से ये बात जानता था.. अब एक बार फिर इशांत और चाहत हैरान रह गए। उन्होंने झटके से एक दूसरे को देखने लगे।

अध्यन ने कहा - क्या हुआ.. इतना शॉक्ड होने की जरूरत नहीं.. आपकी जगह कोई भी होता .. शायद वो भी यही सोचता .. तो जो भी अपने सोचा वो गलत नहीं है.. अपने प्यार को पाने की कोशिश हर कोई करता है.. आपने भी की.. इसमें कुछ गलत नहीं है.. पर ...

ये बोल अध्यन ने मुस्कुरा कर कहा - पर चाहत के दिल से मुझे निकालना.. इतना आसान नहीं..

ये सुन इतने देर बाद चाहत और इशांत के चेहरे पर मुस्कान आई । अध्यन ने कहा - तो.. आप हो .. या कोई भी..कुछ भी कर ले.. ना उसके दिल से मै बाहर जाऊंगा.. ना वो मेरे दिल से बाहर जाएगी.. चाहे सिचुएशन कितनी भी खराब क्यों ना हो.. और रही आपकी सॉरी की बात .. तो मुझे इस बात का जरा सा भी बुरा नहीं लगा..

के शब्दों से जमीन में गड़ा जा रहा था। उसने बा मुश्किल से कहा - अध्यन थोड़ा बिजी हूं.. बाद में बात करते है..

दूसरी तरफ से अध्यन ने भी कहा - हा.. मै तो भूल ही गया था.. बाय.. ये बोल अध्यन कॉल कट करने ही वाला था तभी इशांत ने कहा - अध्यन.. अध्यन रुक गया। फिर उसने कहा - हा..

इशांत ने तुरंत कहा - I'm sorry..

अध्यन ने ये सुन कर कहा - सॉरी पर क्यों.. ??

इशांत ने खुद को संभालते हुए कहा - जब तुमने मुझे चाहत का ख्याल रखने को कहा था.. तब मुझे लगा था.. शायद अब मै चाहत को तुमसे दूर कर दूंगा.. पर मै गलत था.. ये बोल इशांत ने भरी आंखो से चाहत को देखा जो उसे ही देख रही थी। फिर इशांत ने कहा - और तुम सही.. वो तुमसे कभी दूर नहीं हो सकती ... कभी नहीं.. क्युकी वो भी तुमसे बेइंतेहा प्यार करती है.. इतना बोलते ही इशांत के आंखो से आंसु छलक पड़े। चाहत भी इशांत को देखने लगी उसे इशांत की तकलीफ का अंदाज़ा हो गया था पर उसने खामोश रहना ही जरूरी समझा।

अध्यन ने इशांत की आवाज़ में आए भारीपन को महसूस

इशांत ने ये सुन कहा - बहुत प्यार करते हो ना उससे..

इस पर अध्यन ने कहा - बहुत नहीं.. बहुत से भी ज्यादा.. बहुत बहुत.. ज्यादा प्यार.. वजह है वो मेरे होने की.. अगर वो नहीं तो मै नहीं.. आपको पता है.. पहले मुझे लगता था .. प्यार जैसी कोई चीज नहीं होती.. सब फालतू की बाते पर.. जब से मैंने चाहत को देखा है.. तब से मुझे इस प्यार पर यकीन हो गया.. इतना सुन इशांत ने चाहत की तरफ देखा जिसने कोई भाव अपने चेहरे पर आने नहीं दिए बस अपना सिर झुका लिया था..

इशांत ने चाहत को ऐसे देख फिर से अध्यन से पूछा - इतना प्यार कब हुआ.. उससे..??

अध्यन ने कहा - पता नहीं.. बस हो गया... उसके साथ रहते हुए ही.. पता ही नहीं चला.. कब प्यार हो गया.. ये बोल अध्यन ने चहकते हुए कहा - आपको पता है.. पहली बार जब मैंने उसे देखा था तब से ही वो मुझे पसंद अा गई थी.. उसके साथ रहते हुए मुझे उसे जानने का मौका मिला.. शायद तब से ही वो मेरे दिल में बस गई थी.. और ऐसे बसी है.. की अब कोई उसके अलावा .. इस दिल में अा ही नहीं सकती.. मै खुद उसके अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं पाता.. ये बोल अध्यन ने गहरी सांस ली। जहा अपने दिल की बात कह अध्यन मुस्कुरा रहा था। साथ ही उसकी आंखे भी गीली हो गई थी।

वहीं चाहत के चेहरे पर दर्द भारी मुस्कान थी। पर उसकी आंखो ने अब भी बहना बंद नहीं किया था। तभी अध्यन ने खुद को संयत कर कहा - मै भी ना.. कहा से कहा पहुंच गया.. आपको जाना था ना.. आप जाइए.. बाय.. जिसे सुन इशांत ने भी बाय कहा फिर कॉल कट हो गई।

अब इशांत ने चाहत को देखा जो अपने आंखो में आए हुए आंसुओ को साफ कर रही थी इशांत ने उसे ऐसे देख कर कहा - चाहत तुम.. क्या तुम ठीक हो..

जिसे सुन चाहत ने सिर उठा कर इशांत को देखा । चाहत के सिर उठाते ही इशांत शॉक्ड रह गया चाहत का पूरा चेहरा आंसुओ से भरा हुआ था। उसकी आंखे लाल हो गई थी। जिसे देख इशांत ने घबरा गया उसने चाहत को देखते हुए लड़खड़ाती जुबान में कहा - तुम.. तुम ठीक तो हो ना..

चाहत ने एक पल इशांत को देखा फिर फफक कर रो पड़ी उसने रोते हुए कहा - मुझे देखो इशांत.. क्या मै इतनी खास हूं.. जिसके लिए वहा वो इतनी दूर होते हुए भी.. फिक्र कर रहा है.. मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया.. जितनी भी खुशी.. उसने मुझे दी है..उसका एक percent भी मैंने उसे नहीं

दिया.. फिर भी वो मेरे लिए इतना कुछ कर रहा है.. मै बहुत बुरी हूं इशांत.. मैंने कभी भी उसे.. और उसके प्यार को नहीं समझा.. दिल हमेशा उसके साथ था.. पर दिमाग ने कभी भी.. उसे सही नहीं समझा.. हर बार मैंने उसे गलत समझा.. ये बोल चाहत फिर से रोने लगी । उसे रोता देख इशांत को बहुत बुरा लग रहा था।

उसने चाहत का हाथ पकड़ते हुए कहा - नहीं..चाहत.. तुम बुरी नहीं हो.. अगर ऐसा होता तो तुम.. यहां उसके लिए रो नहीं रही होती.. तुम्हे ये बात पहले ही पता थी.. तभी तो तुमने कभी भी उसे खुद से दूर नहीं होने दिया.. क्युकी कही ना कही तुम भी ये जानती थी.. की अगर उसने ये किया है.. तो इसके पीछे कोई ना कोई वजह जरूर होगी.. खुद को ब्लेम करना बंद करो.. और बस इंतजार करो.. अध्यन खुद से आकर .. तुमसे बात करेगा..

इशांत की बात सुन चाहत ने उसे देखा फिर चाहत ने अपने आंसु पोछे फिर कहा - आपको पता है.. इशांत .. मुझे पहले से ही पता था.. की आप मुझे पसंद करते है.. ये सुन इशांत को फिर झटका लगा तो उसने कहा - यार तुम दोनों..ये बोल वो थोड़े देर के लिए रुक गया फिर उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - तुम दोनों ने मिल कर मुझे हार्ट अटैक ही दे

देनी है..एक दिन.. ये सुन चाहत मुस्कुरा दी।

उसे इतने देर बाद मुस्कुराते देख इशांत को चैन मिला उसने फिर मुस्कुराते हुए कहा - वैसे.. ये तुम्हे कैसे पता चला ..??

चाहत ने कहा - अध्यन की डायरी.. जिसमे उसने मेरे बारे में लिखा है.. उस डायरी में आपका भी जिक्र उसने किया है.. आपसे लगी शर्त.. से लेकर.. आपका स्कूल में लास्ट डे आना.. और मुझसे मिलने के बाद.. हुई अध्यन से बात.. इन सभी बातों का जिक्र अध्यन ने उस डायरी में किया है.. ये बोल चाहत ने इशांत की तरफ देखा जो मुंह खोले उसे ही देख रहा था।

उसे ऐसे देख चाहत ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - मुझे हमेशा से ये बात पता थी.. पर मैंने सोचा.. जब आपने खुद को इतने दिनों तक रोक कर रखा है.. तो मै क्यों कुछ कहूं.. इसीलिए मैंने कभी भी आपके सामने ये बात जाहिर नहीं होने दी.. और आपने खुद भी कभी.. अपनी हदे पार नहीं की.. ना ही आज से पहले.. मुझे ये महसूस करवाया.. तो मुझे भी जरूरत महसूस नहीं हुई.. आपको कुछ कहने की..

चाहत ने इतना कहा जिसे सुन इशांत ने सिर झुका कर कहा - क्या.. तुम.. क्या तुम.. मुझसे नाराज़ हो..??

चाहत ने इशांत की तरफ देखा फिर कहा - नहीं.. अध्यन ने जो कुछ भी कहा वो मुझे अच्छे से याद है.. उसने कहा था.. अगर आपकी जगह कोई भी होता तो यही करता.. और मुझे भी यही लगता है.. अपने कुछ गलत नहीं किया.. हर इंसान अपनी आखिरी सांस तक कोशिश करता है.. अपने प्यार को पाने की.. और अपने भी वहीं किया है.. इसमें कुछ गलत नहीं..

इतना कह कर चाहत ने मोबाइल पर टाइम देखते हुए कहा - बहुत देर हो गई है.. अब मुझे चलना चाहिए.. वरना ऑटो नहीं मिलेगी.. ये बोल वो चेयर से उठ गई।

तभी इशांत ने चाहत से कहा - ऑटो से मत जाओ.. मै तुम्हे छोड़ देता हूं..

इशांत के इतना कहते ही चाहत ने झट से कहा - नहीं.. मै चली जाऊंगी .. आप फिक्र ना करे.. आपको और भी कम होंगे..

जिसे सुन इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - अरे ऐसे कैसे.. अभी तुमने सुना नहीं.. अध्यन ने क्या कहा है.. बस दो महीनों तक मुझे तुम्हारा ख्याल रखना है.. तो ज्यादा ना नुकुर ना करो..

और चलो मेरे साथ.. चाहत ने इशांत की बात सुनी फिर हाथ जोड़ कर मुस्कुराते हुए बोली - जो हुकुम .. मेरे सीनियर..

उसकी इस हरकत पर इशांत भी मुस्कुरा दिया। इसके बाद दोनों चलते हुए पार्किंग एरिया में आए। उन्होंने देखा शाम हो चली है साथ ही हल्का अधेरा भी हो चुका है। ठंडी हवा चल रही है जिससे ठंडक का अहसास भी हो रहा था।

जिसे देख इशांत ने चाहत को देखा जो एक साइड बैग लटकाए अपने हाथो को आपस में रगड़ रही थी। उसे देख इशांत ने अपना जैकेट बाइक की डिक्की से निकाला और चाहत को देते हुए कहा - इसे पहन लो.. ठंड कम लगेगी.. चाहत ने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला वैसे ही इशांत ने कहा - अब ना मत कहना.. प्लीज.. नहीं तो मै अध्यन को .. आज जो भी हुआ वो बता दूंगा..

चाहत ने इशांत की बात सुनी फिर उसने मुस्कुराते हुए जैकेट लिया फिर कहा - नहीं मै मना.. नहीं करने वाली थी.. बल्कि ये कहने वाली थी.. अगर मैंने ये पहन लिया.. तो आप क्या पहनेंगे.. आपको ठंड नहीं लगेगी..

इशांत ने उसकी बात सुनी फिर कहा - नहीं .. मुझे आदत है.. ये बोल उसने अपनी बाइक पार्किंग से निकाल ली । बाइक पर बैठ कर इशांत ने बाइक स्टार्ट कर के कहा - चले..

चाहत ने भी हा कहा और बाइक पर बैठ गई। बाइक ने रफ्तार पकड़ी। थोड़े देर में इशांत और चाहत रोड पर थे ।
 
इशांत और चाहत रोड पर शांति से चल रहे थे। इशांत ने बैंक मिरर से देखा तो चाहत बड़ी ही मासूमियत से रास्तों को देखते हुए बैठी थी। एक अलग ही तरह की शांति थी चाहत के चेहरे को देख कर इशांत ने मन ही मन सोचते हुए कहा - तुम बहुत ज्यादा साफ हो.. और प्यारी भी.. एक ऐसा हीरा.. जो बस किसी जौहरी के पास ही सलामत रह सकता है.. और आज मुझे यकीन हो गया है.. की वो जौहरी मै नहीं हूं..

ये सोच इशांत ने बाइक टर्न की फिर से उसने मन में कहा - अध्यन.. अध्यन ही वो जोहरी है.. जो तुम्हारे जैसे हीरे को संभाल कर रख सकता है.. और जहा तक मेरी बात है.. मै शायद तुम्हारे प्यार के काबिल नहीं हूं.. पर.. फिर गहरी सांस लेकर इशांत ने कहा - पर.. मैंने पहली बार किसी से प्यार किया है.. और वो तुम हो.. ये प्यार ताउम्र ऐसे ही बना रहेगा.. कभी ख़तम नहीं होगा..

ऐसे ही सोचते हुए चाहत का हॉस्टल अा गया। जिसे देख इशांत ने अपनी बाइक रोक दी। चाहत भी बाइक से उतरी । उसने बाइक से उतर कर इशांत की तरफ देखा फिर बाय कर वापस जाने लगी।

उसे जाता देख इशांत ने चाहत को आवाज़ लगाते हुए कहा - चाहत ..

चाहत ने मूड कर इशांत को देखा वो उसके पास आई तो इशांत ने कहा - अपना ख्याल रखना..

चाहत ने उसे देख मुस्कुराते हुए कहा - आप भी..

ये बोल चाहत मूड गई और हॉस्टल के गेट के पास जाकर एक बार फिर मूड कर इशांत को देखा फिर हाथ हिला कर इशांत को बाय बोला और अंदर चले गई।

इशांत उसे जाते हुए देखता रहा फिर उसने कहा - i always love you.. चाहे कुछ भी हो.. ये प्यार कभी ख़तम नहीं होगा.. कभी भी नहीं..

ये बोल उसने बाइक घुमा ली.. और अपनी मंजिल की तरफ चले गया..

चाहत थके कदमों से रूम अा गई। उसने अपना बैग साइड में रखा फिर वो वॉशरूम फ्रेश होने चले गई। चाहत जैसे ही वाशरूम से बाहर आई वैसे ही उसकी नजर बेड पर गई। जहा डॉली पैर फैलाए बैठी उसका ही इंतज़ार कर रही थी। चाहत ने एक नजर डॉली को देखा फिर टॉवेल साइड में रखा ।

डॉली ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोला वैसे ही बेल बजी डॉली समझ गई थी। ये बेल चाय की है उसने चाहत का काफी मग लिया और चाय लेने चले गई। वहीं चाहत ने अपने कपड़े बदले और बेड पर बैठ गई।

थोड़े देर में डॉली भी अा गई। जिसे देख चाहत ने अलमारी से टोस्ट निकले फिर दोनों बैठ कर टोस्ट खाने लगे। चाहत

हमेशा की तरह खामोशी से टोस्ट खा रही थी। वहीं डॉली की बक बक जारी थी। चाहत उसकी बातो को सुन कर बस हा, हूं में सिर हिला रही थी।

थोड़ी देर ऐसे ही बात कर लेने के बाद जब चाहत से रहा नहीं गया तो उसने डॉली को रोकने का सोचा । चाहत ने कहा - डॉली वो...

चाहत के अचानक ऐसे कहने से डॉली चुप हो गई वो चाहत की तरफ देखने लगी। तो चाहत ने जैसे ही कुछ कहने के मुंह खोला।

तभी चाहत का मोबाइल बजने लगा । चाहत ने एक नज़र डॉली को देखा जो इसके मोबाइल की तरफ ही देख रही थी । चाहत ने मोबाइल देखा फिर लपक के मोबाइल ले लिया।

चाहत ने मोबाइल कान से लगा लिया ।

दूसरी तरफ से आवाज़ आई - हेलो चाहत बेटा..

आवाज़ रीमा जी की थी जिसे सुन चाहत को भी अच्छा लगा। क्युकी वो पहले से ही परेशान थी वजह थीं आज होने वाली चीज़े।

चाहत ने जैसे ही रीमा जी की आवाज़ को सुना चाहत की आधी टेंशन तो दूर हो गई उसने मोबाइल कान से लगाए हुए कहा - हा मम्मी..

दूसरी तरफ से रीमा जी - तुम ठीक हो..

चाहत ने बेड से उठते हुए कहा - हा मम्मी मै ठीक हूं... आप बताओ..

रीमा जी ने सांस लेते हुए कहा - मै भी ठीक हूं.. वो पता नहीं क्यों.. अजीब सी बेचैनी हो रही थी.. सुबह से ... तुम्हे देखने का मन कर रहा था..

"ये मा भी ना ऐसी ही होती है.. पता नहीं कैसे.. पर उनहे अपने बच्चो की तकलीफ पहले ही महसूस हो जाती है .. पता नहीं कौन सा जीपीएस होता है इनके पास जो बच्चे की हर तकलीफ को बिना बोले ही पहचान लेती है ... "

चाहत ने जैसे ही ये सुना तो उसने कहा - अरे मम्मी..आप ना फिक्र ना करो.. आप अपना और आर्यन का ख्याल रखो.. मै वैसे भी एग्जाम के बाद अा जाऊंगी..

चाहत की बात सुन रीमा जी ने कहा - कब है एग्जाम..??

चाहत ने उनकी बात सुन कहा - अभी 3 दिन तो ct ही

चलेंगे.. फिर उसके 15 दिन बाद एग्जाम है.. और ये एग्जाम भी 2 महीनों में ख़तम हो जायेंगे.. फिर मै घर अा जाऊंगी..

रीमा जी को चाहत की बात सुन कर अच्छा लगा उन्होंने चहकते हुए कहा - ये तो बहुत अच्छी बात है..फिर वो चुप हो गई जिसे महसूस कर चाहत ने कहा - हेल्लो.. हेल्लो मम्मी...

जिसे सुन रीमा जी ने कहा - हा बेटू.. सुन रही हूं.. फिर उन्होंने कहा - जल्दी आना बेटा.. बहुत दिन हो गए तुम्हे देखे.. अब रीमा जी आवाज़ भारी होने लगी थी। जिसे सुन चाहत को भी बुरा लगा ।

चाहत ने झट से कहा - हा मेरी मम्मा.. मै जल्दी से अा जाऊंगी.. फिर हम दोनों खूब मस्ती करेंगे..आप देर सारा खाना बनाना जिसे मै अकेले खाऊंगी.. और हा मै आपके सामने ही बैठ जाऊंगी.. आप जी भर कर मुझे देख लेना.. ठीक है.. ये बोल चाहत हसने लगी।

चाहत की बात सुन कर रीमा की के चेहरे पर मुस्कान अा गई । उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - हट.. बदमाश बच्चा..

चाहत को रीमा जी की चहकती हुई आवाज़ सुन कर अच्छा लगा वो यही तो चाहती थी कि किसी तरह से रीमा जी का

मूड ठीक हो जाए । चाहत ने फिर रीमा जी कुछ देर ऐसे ही बाते की । फिर उसने बाय कह कर कॉल कट कर दी।

चाहत जब तक नीचे आई तब तक डिनर का टाइम हो गया था। डॉली और निशा गेट बंद कर के चाहत का ही वेट कर रहे थे। चाहत ने मोबाइल अपनी लोअर के जेब में रखा फिर निशा और डॉली के साथ नीचे अा गई। आज आलू मटर की सब्जी बनी हुई थी।

चाहत , निशा और डॉली सभी चेयर पर बैठ गए। तीनो खाना खाने लगे। डॉली ने तो खाते ही मुंह बना लिया यही हाल निशा का भी था । सब्जी काफी फीकी थी जिसके कारण मिर्ची ज्यादा लग रही थी। निशा और डॉली ने पानी पीते हुए खाना खाना जारी रखा। किसी तरह डॉली और निशा खाना खाने लगे। ठीक ऐसे ही खाते हुए डॉली ने चाहत को देखा जो बिना किसी दिक्कत के खाना खा रही थी। डॉली थोड़ी देर के लिए शॉक्ड हो गई। क्योंकि चाहत को मिर्ची बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती फिर भी आज वो बिना किसी दिक्कत के खाना खा रही थी।

डॉली चाहत को देख रही थी जिसका चेहरा लाल हो चुका था पर जैसे चाहत को इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा

था। चाहत ने जल्दी खाना ख़तम किया और चेयर से उठ गई। उसने प्लेट साफ की फिर सीढ़ियों से होते हुए रूम की तरफ बढ़ गई।

डॉली और निशा ने उसे सीढ़ियों की तरफ जाते हुए देखा डॉली को यहां फिर हैरानी हुई क्युकी आज से पहले चाहत ने ऐसा कभी नहीं किया था हा उसकी आदत थी जल्दी खाने की पर चाहत वहीं रुक कर डॉली और निशा का इंतज़ार करती थी। पर आज उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

डॉली ये सोच ही रही थी तभी उसके बगल में बैठी शिखा ने उसे कंधो से झटका दिया। जिससे डॉली अपने होश में आई। उसने पलट कर शिखा की तरफ देखा जो उसे खाने को कह रही थी। डॉली ने शिखा की तरफ देख कर मुस्कुरा दी। बदले में वो भी मुस्कुरा दी। डॉली ने अपना खाना जल्दी ख़तम किया।

डॉली और निशा अब चाहत के रूम की तरफ अा गए। जब दोनों चाहत के रूम आए तो उन्होंने देखा चाहत बिस्तर लगा रही है।

जिसे देख डॉली ने कहा - क्या हुआ चाहत.. आज इतनी जल्दी सो रही हो.. अभी तो 9:30 ही हुए है...

चाहत ने बिस्तर पर बैठते हुए ही कहा - हा .. आज कॉलेज में मुझे बहुत लेट हो गया था.. तो मै काफी थक गई हूं .. इसीलिए जल्दी सो रही हूं.. ये बोल चाहत बेड पर बैठ गई और सोने को हुई।

जिसे देख डॉली उसके पास आई उसने चाहत को कंधो से पकड़ कर बेड पर लिटाया फिर कहा - ठीक है .. वैसे भी कल कॉलेज कोई नहीं जा रहा.. तुम आराम कर लो.. ये बोल डॉली ने चाहत को ब्लैंकेट ओढ़ाया फिर बोली - गुड नाईट.. मिसेज शर्मा..

डॉली के मुंह से मिसेज शर्मा सुन कर चाहत मुस्कुरा दी उसने ब्लैंकेट सिर तक तान लिया। जिसे देख निशा ने डॉली से कहा - क्या अब तुम भी सोने वाली हो..

डॉली ने उसके कंधो पर अपना हाथ रख कर कहा - नहीं मेरी जान .. अभी कहा.. हम तो तब सोते है.. जब पूरा हॉस्टल सो जाता है.. ये बोल डॉली ने अपनी आई विंक कर दी।

जिसे सुन निशा ने कहा - तो क्या मै तुम्हारे रूम में पढ़ सकती हूं.. वो चाहत यहां सो रही है... तो मै उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती.. निशा ने कहा तो डॉली को बहुत ज्यादा अच्छा लगा उसे निशा का चाहत का फिक्र करना अच्छा लग रहा था। उसने निशा को देखते हुए कहा - नेकी और पूछ

पूछ... चलो जान.. जैसे ही डॉली ने ये कहा तो निशा ने जल्दी से अपने बुक्स को पकड़ा फिर लाइट ऑफ कर उसने दरवाजा बंद कर दिया।

चाहत जो ब्लैंकेट ओढ़े सोई थी उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान अा गई। जब चाहत को यकीन हो गया कि निशा और डॉली वहा से चले गए है तब उसने झट से अपना ब्लैंकेट हटाया उसने पास पड़ा मोबाइल उठाया फिर गैलरी खोल कर कुछ फोटोज देखने लगी।

उसे उसकी ओर अध्यन की एक फोटो मिली जिसे देख चाहत की आंखे एक बार फिर से भीगने लगी । वो बहुत देर तक यूं ही रोती रही फिर उसने मोबाइल को अपने तकिए साइड में रखा फिर कुछ सोचते हुए सो गई।
 
अगली सुबह

आज का दिन नया था चाहत जल्दी से उठी और नहा कर रेडी होने लगी। उसने अपने एक बैग में कुछ जरूरी समान रखे और फिर बालो की चोटी बना ली । चाहत ने देखा बेड के दूसरे साइड निशा सोई हुई है तो उसने कुछ नहीं कहा बस

उसके सिर पर हाथ फेरा फिर बैग लेकर बाहर निकल गई।

नीचे आकर उसने मि गर्ग को देखा जो कि लोअर टी शर्ट पहने बाहर गार्डन में बैठे न्यूजपेपर पढ़ रहे थे। चाहत उनके पास गई फिर उसने कहा - अंकल..

मि. गर्ग ने अपना पेपर साइड किया फिर कहा - अरे चाहत बेटा... इतनी सुबह.. बोलो क्या बात है..

चाहत ने झट से कहा - अंकल मै.. अपने फ्रेंड के पास पढ़ने जा रही हूं.. शाम तक वापस अा जाऊंगी..

ये सुन मि. गर्ग ने गंभीर होकर कहा - तुम्हारे घर वालो से तुमने बात की..

चाहत ने ना में सिर हिला दिया।

जिसे देख मि. गर्ग ने कहा - तो मै तुम्हे परमिशन नहीं दे सकता..

चाहत ने ये सुन कर रीमा जी को तुरंत कॉल किया रीमा जी ने भी कॉल अटेंड कर लिया उनके बोलने से पहले चाहत ने कहा - हेल्लो.. मम्मी ..

रीमा जी चाहत की आवाज़ सुन चिंतित स्वर में बोली - क्या हुआ.. चाहत.. तुम इतनी सुबह... बेटू सब ठीक तो है ना..

जिसे सुन चाहत ने कहा - हा.. मम्मी मै ठीक हूं... वो मुझे आपसे कुछ काम था..

चाहत ने एक नजर मि. गर्ग को देखा फिर रीमा जी से कहा - वो.. मम्मी मेरा कल ct है.. तो मै पढ़ने के लिए.. अपने फ्रेंड के घर जा रही हूं.. तो क्या मै जाऊ..

इतने में मिसेज गर्ग चाय की ट्रे लेकर अा गई और वहीं पर खड़े होकर चाहत की बात सुनने लगी।

रीमा जी ने भी ct का सोच कर कहा - हा बेटा चले जाओ.. और ठीक से पढ़ना.. साथ ही अपना ख्याल रखना..

तभी मिसेज गर्ग जो कब से वहीं खड़ी ये सब सुन रही थी। उन्होंने कहा - सॉरी रीमा जी.. मुझे बीच में नहीं बोलना चाहिए.. पर आपको नहीं लगता.. आपने चाहत को कुछ ज्यादा ही छूट दे दी है.. मेरा मतलब था कि..

मिसेज गर्ग की बात सुन कर रीमा जी ने कड़क आवाज़ में कहा - जी नहीं .. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है..मुझे मेरी चाहत पर मुझे पूरा भरोसा है.. वो कुछ भी करेगी.. पर कुछ गलत नहीं करेगी.. तो आप ज्यादा ना सोचे...

ये सुन मिसेज गर्ग ने मिमियाते हुए कहा - अरे.. आप भी

ना .. रीमा जी ... आप गलत समझ रही है.. मेरा वो मतलब नहीं था.. मै तो बस..

रीमा जी ने उन्हें टोकते हुए कहा - आप जो भी कहना चाहती थी... या है.. मै वो अच्छे से समझ रही हूं.. पर मैंने आपसे कहा ना ... आप फिक्र ना करे..

ये बोल उन्होंने चाहत से कहा - ठीक है चाहत ... तुम जाओ.. वरना लेट हो जाओगी.. और हा.. जल्दी आना बेटा.. ये बोल रीमा जी ने कॉल कट कर दी।

चाहत ने अब मिसेज गर्ग को देखा तो वो मुंह बना कर अपने घर की तरफ चले गई। वहीं मि. गर्ग ने कुछ नहीं कहा बस अपने पीले दांतो को दिखा कर हसने लगे। फिर उन्होंने हस्ते हुए कहा - ठीक है चाहत... तुम जा सकती हो... ये सुन चाहत ने हा में सिर हिला दिया । फिर चाहत गेट के पास आई और उसे खींचते हुए खोला फिर बाहर निकल गई।

चाहत गली से होते हुए बाहर आई उसने अपना बैग साइड में पकड़े हुए ऑटो रुकवाया फिर उसने अपने चेहरे को स्कार्फ से कवर किया फिर ऑटो वाले से कहा - रेलवे स्टेशन चलेंगे..

जिसे सुन ऑटो वाले ने कहा - जी जरूर चलेंगे.. आइए.. बैठ जाइए..

चाहत ये सुन ऑटो में बैठ गई। चाहत ने हाथ में पहनी घड़ी पर नजर डाली तो 7:30 हुआ था उस टाइम । ऑटो चलने लगी। चाहत ने मोबाइल निकाला फिर डॉली को मैसेज किया - "मैं राजनांदगांव जा रही हूं.. शाम तक अा जाऊंगी.. कुछ सवाल है.. जिनके जवाब मुझे चाहिए.. तुम मेरी फिक्र मत करना मै जल्द ही अा जाऊंगी " इतना लिख कर उसने मेसेज डॉली को सेंड कर दिया।

चाहत हॉस्टल में हुई बातों को सोच रही थी कि कैसे आज उसने झूट बोला था उसने अपने हाथ जोड़े फिर कहा - माफ़ करना भगवान जी... आज मैंने मम्मी से झूट बोल पर .. क्या करती ... मेरा राजनांदगांव जाना जरूरी है.. प्लीज.. मुझे माफ़ कर देना... ये बोल उसने अपनी आंखे खोल दी और ऑटो में बैठे वो रास्तों को देखने लगी।

8 बजे तक वो स्टेशन पहुंच गई। चाहत ऑटो से उतरी। उसने ऑटो वाले को पैसे दिए ।

अब वो रेलवे स्टेशन के अंदर अा चुकी थी उसने आस पड़ देखा फिर उसे टिकट काउंटर दिखा । चाहत वहा से टिकट काउंटर के पास जाने लगी। चाहत ने टिकिट काउंटर के पास आकर कहा - एक टिकिट .. राजनांदगांव लोकल ..

जिसे सुन कर वहां के इंचार्ज ने कहा - ठीक है... ये बोल उसने टिकिट चाहत को देते हुए कहा - प्लेट फार्म नंबर - 02 ये सुन चाहत ने टिकट लेते हुए हा में सिर हिला दिया। फिर प्लेट फॉर्म की तरफ चले गई।

चाहत प्लेट फार्म में आई फिर उसने घड़ी की तरफ देखा कहा 8:20 हो रहे थे। चाहत वहीं बैठ गई । काफी देर तक चाहत वहीं बैठी रही । वो सोचने लगी - " मै अब दो महीने इंतज़ार नहीं कर सकती.. पहले मुझे कुछ नहीं पता था.. पर अब सब जानने के बाद तो बिल्कुल भी नहीं.. अध्यन तुम्हे मेरे सारे सवालों के जवाब आज ही देने होंगे... प्यार क्या बस तुमने ही किया.. मै भी तो करती हूं ना.. जैसे तुम मुझे तकलीफ में नहीं देख सकते.. वैसे ही मै भी तुम्हे तकलीफ में नहीं देख सकती..मै तुम्हे अकेले दर्द में नहीं छोड़ सकती.. मै अा रही हूं.. अपने सवालों के जवाब तुमसे लेने के लिए.. " ये सोच उसने अपना सिर चेयर से लगा लिया..

इधर हॉस्टल में डॉली की नींद खुली उसने ब्रश किया और चाहत के रूम की तरफ अा गई। हमेशा की तरह उसने दरवाज़ा बिना नॉक किए खोल दिया। जिसकी आवाज़ से सोई हुई निशा की नींद खुल गई । उसने सिर पर हाथ रख

कर दरवाज़े की तरफ देखा। उसे इस बात का अंदाज़ा था कि हो ना हो.. डॉली ही होगी.. और उसका अंदाजा सही निकला।दरवाज़े पर डॉली ही थी। उसने दरवाज़े को देखते हुए ब्लैंकेट सिर तक ओढ़ लिया।

डॉली ने अंदर आकर जोर से आवाज लगाई चाहत... चाहत.. यार कहा हो तुम..

जिसे सुन कर निशा ने इरिटेट होकर कहा - तुम वॉशरूम में क्यों नहीं देख लेती..

डॉली को निशा की बात सही लगी। वो वॉशरूम के पास पहुंची उसने वॉशरूम के दरवाज़े को नॉक किया.. पर अंदर से कोई हलचल नहीं हुई तो डॉली ने दरवाज़े को झटका दिया। जिससे दरवाज़ा खुल गया।
 
डॉली ने अंदर देखा तो चाहत अंदर नहीं थी। जिसे देख डॉली ने निशा से कहा - यार निशा.. चाहत यहां भी नहीं है.. तुम्हे पता हो तो बता दो..

निशा ने वैसे ही बेड पर लेटे हुए ही कहा - अरे.. यार होगी यही कही.. तुम खुद ढूंढ़ लो ना.. और प्लीज.. मुझे तंग मत करो.. बहुत नींद आ रही है..

डॉली को निशा की बात सुन कर बहुत गुस्सा आया पर वो कर भी क्या सकती थी। वो वैसे ही बाहर की तरफ भागी उसने अपने फ्लोर में रहने वाली सभी लड़कियों से पूछा पर किसी को कुछ भी पता नहीं था। अब डॉली को डर लगने लगा। उसके दिमाग में बुरे बुरे ख्याल आने लगे।

डॉली ने फिर सेकंड फ्लोर में आई वहा उसे प्रिया दिखी जो उसी हॉस्टल में रहती थी और उसकी चाहत से अच्छी दोस्ती थी। डॉली प्रिया के पास आई फिर उसने प्रिया से हकलाते हुए पूछा - प्रिया .. तुमने चाहत को देखा क्या..

प्रिया ने ये सुन ना में सिर हिला दिया।

ये सुन डॉली को समझ ही नहीं आया उसने अपना सिर पकड़ लिया और उसकी आंखे बहने लगी। ये देख प्रिया डर गई उसने डॉली को संभालते हुए पूछा - डॉली क्या हुआ.. तुम ऐसे क्यों.. रो रही हो.. बोलो..

डॉली ने प्रिया की बात सुनी फिर रोते हुए उसने प्रिया को सारी बात बता दी।

जिसे सुन प्रिया ने कहा - ये तो टेंशन वाली बात है.. पर

चाहत जा कहा सकती है.. ये बोल वो कुछ सोचने लगी। वहीं डॉली की आंखो ने अभी तक बहना बंद नहीं किया था। प्रिया ने कुछ सोचते हुए झट से कहा - मोबाइल.. तुमने चाहत को कॉल किया..

जिसे सुन डॉली ने ना में सिर हिला दिया तो प्रिया ने अपने सिर पर हाथ मारा फिर कहा - अरे तो.. किस बात का इंतज़ार कर रही थी.. बेवकूफ लड़की.. पहले जाओ उसे कॉल करो.. उसके बाद आगे का सोचना।

डॉली ने जैसे ही ये सुना उसका बंद दिमाग चल पड़ा उसने जल्दी से प्रिया को गले लगाया फिर कहा - थैंक्यू.. थैंक्यू सो मच.. ये बोल उसने प्रिया को छोड़ा और अपने रूम की तरफ भागी।

प्रिया उसे जाते हुए देखती रही फिर उसने मुस्कुरा कर कहा - पागल लड़की.. और फिर अपने रूम की तरफ चले गई।

डॉली भागते हुए रूम आई उसने अब अपना मोबाइल ढूंढना स्टार्ट किया काफी मशक्कत के बाद डॉली को अपना मोबाइल बिस्तर के पास मिला । उसने जैसे ही मोबाइल को देखा वो खुश हो गई। उसने खुशी में मोबाइल को किस कर लिया। फिर अपनी ही हरकत पर उसे हसी अा गई।

उसने खुद को संयत कर मोबाइल में पासवर्ड डालकर उसे ओपन किया। चाहत का मैसज ही उसे पहले देखने को मिला जब डॉली ने चाहत का मेसेज पढ़ा तो डॉली और भी ज्यादा डर गई। उसे समझ ही नहीं आया वो क्या करे। उसने अपना मोबाइल अपने लोअर के जेब में डाला । फिर अलमारी से अपना बैग उठाया । और चप्पल पहन कर ही रूम से जल्दी में बाहर जाने लगी।

तभी उसे निशा दिखी जिसे देख कर डॉली उसके पास गई। उसने निशा से कहा - मै बाहर जा रही हूं.. तुम मेरे और चाहत के लिए टिफिन ले आना । ये बोल बिना निशा की बात सुने डॉली बाहर निकल गई। निशा उसे जाते हुए देखती रही।

डॉली नीचे आई तो मिसेज गर्ग पौधों को पानी दे रही थी डॉली जल्दी जल्दी नीचे उतरी और उसने मिसेज गर्ग को बिना देखे ही कहा - आंटी मै थोड़े देर के लिए बाहर जा रही हूं.. मिसेज गर्ग ने उसकी बात सुन कर जैसे ही कुछ कहने के लिए मुंह खोला वैसे ही उन्हे रीमा जी की बात याद अा गई।

जिसे याद कर उन्होंने बस इतना कहा - ठीक है.. जल्दी अा

जाना..फिर अपना काम करने लगी।

वहीं डॉली ने उनकी बात सुनी वहा से बाहर चले आई। उसके दिमाग में बस यही था कि चाहत जितनी जल्दी हो .. उसे मिल जाए..

डॉली भागते हुए रोड पर पहुंची। तभी डॉली ने ऑटो को देखा उसने हाथ दिखा कर ऑटो को रोका फिर ऑटो वाले को देखते हुए ऑटो वाले से बोली - भैया... रेलवे स्टेशन चलेंगे....

ऑटो वाला - हा.. इतना सुनते ही डॉली ऑटो में बैठ गई फिर ऑटो चलने लगी।

डॉली ऑटो में बैठे बैठे भगवान से प्रार्थना करने लगी उसने कहा - बस ये लड़की ठीक हो... मिल जाए बस मुझे... टांगे तोड़ देनी है मैंने.. बेवकूफ लड़की की...फिर थोड़ा रुक कर - बस उसे मिला दीजिए... प्लीज़ ... भगवान जी..

वो ऑटो में बैठे ही ये सब बड़बड़ाए जा रही थी। थोड़ी देर में ऑटो स्टेशन पहुंचा । ऑटोवाले ने डॉली से कहा - मैडम स्टेशन अा गया...

खुद में ही खोई डॉली का ध्यान ये सुन कर टूटा और वो जल्दी से नीचे उतरी।। उसने ऑटो वाले को पैसे दिए फिर भागते हुए स्टेशन के अंदर जाने लगी। वो मन ही मन ये सोच रही थी कि कहीं ट्रेन ना अा गई हो..

जिससे चाहत राजनांदगांव जा सकती थी।

डॉली भागते हुए सीढ़ियों पर चढ़ती है और ऐसे ही वो प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अा जाती है। वो एक बार फिर से चाहत को ढूंढने लगती है। तभी ट्रेन अा जाती है और स्टेशन पर बैठे सभी लोग ट्रेन में चढ़ने लगते है। डॉली ट्रेन के आस पास देखते रहती है। पर उसे चाहत कहीं नहीं दिखती ।

थोड़ी देर बाद ट्रेन चले जाती है। डॉली जाते हुए ट्रेन को देखते रहती है। ट्रेन जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी। डॉली की उम्मीद टूटती जा रही थी। बड़ी ही मुश्किल से उसने अपने आप को संभाला था। जैसे ही ट्रेन की आखरी बोगी प्लेटफॉर्म से बाहर गई। वैसे ही डॉली की आंखो से भी पानी बाहर अा गया। वो भी जाने के लिए मुड़ी तभी उसे कुछ महसूस हुआ। उसने झट पलट कर देखा तो सामने दूसरे प्लेटफॉर्म में चाहत एक हाथ में बैग पकड़ कर उसे ही भरी आंखों से देखे जा रही थी।

डॉली को यकीन ही नहीं हुआ उसने अपनी पलकें झपका कर एक बार फिर से चाहत की तरफ देखने लगी। जब उसे इस बात का यकीन हो गया कि वो कोई और नहीं चाहत हीं है तब वो भागते हुए सीढ़ियों की तरफ पहुंची फिर सीढ़ियां चढ कर वो दूसरे प्लेटफार्म की तरफ आई ।

डॉली स्टेशन के अंदर आई सबसे पहले वो प्लेटफॉर्म नंबर 1 में गई वहा उसने इधर उधर घूम घूम कर पूरा स्टेशन छान मारा पर उसे चाहत का कहीं पता नहीं चला। तभी एक अनाउंसमेंट हुई।

" यात्रीगण कृपया ध्यान दे.. बिलासपुर से डोंगरगढ़ जाने वाली .. छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस.. अपने निर्धारित समय से 20 मिनट देर से चल रही है.. आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है..,"

डॉली ने ये सुना तो पहले उसने ध्यान नहीं दिया वो यूहीं अपने कदम बढ़ा कर प्लेट फार्म में चाहत को ढूंढ रही थीं । ऐसे सी दस मिनट बाद फिर अनाउसमेंट हुई।

" यात्रीगण कृपया ध्यान दे.. बिलासपुर से डोंगरगढ़ जाने वाली .. छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस कुछ ही देर में प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अा रही है.. "

ये सुन डॉली ने सिर झटका और वैसे ही चलने लगी। तभी उसे कुछ याद आया जिसके उसके कदम रुक गए। उसने अपने दातों तले अपनी जीभ दबाई फिर उसने जोर से कहा - नो.. ये बोल उसने साइड में देखा जहा सीढ़ियां थी जिसके जरिए दूसरे प्लेटफॉर्म में जा सकते थे। क्युकी यही वो ट्रेन थी

डॉली के कदम रुक ही नहीं रहे थे वो बस भागे जा रही थीं । वो सीधा चाहत के पास जाकर रुकी । उसने चाहत को कुछ नहीं कहा बस उसे देखने लगी। चाहत को जब अपने पास किसी के होने का अहसास हुआ तो उसने मूड कर देखा। डॉली उसे अपने करीब नजर आई उसने भी कुछ नहीं कहा बस आगे बढ़ कर डॉली के गले लग गई।

डॉली ने भी उसे कस के पकड़ लिया। दोनों कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे। तभी एक बार फिर से अनाउंसमेंट हुई जिसे सुन डॉली को होश आया। उसने आंखे खोल आस पास नजर दौड़ाई तो स्टेशन में जितने भी लोग थे उन दोनों को ही देख रहे थे। कुछ तो उन पर हस भी रहे थे। और कुछ जिनको शायद काम करना था वो भी अपना काम छोड़ उन दोनों को ही देख रहे थे।

डॉली को उन सब पर भी गुस्सा अा गया। उसने भी सभी को घुर कर देखा तो सभी अपने अपने काम करने लगे। डॉली चाहत से अलग हुई। चाहत ने डॉली को ही कुछ कहना चाहा वैसे ही डॉली ने उसके मुंह पर उंगली रख कर कहा - यहां नहीं...फिर इधर उधर देख कर - चलो बाहर चलते है.. ये बोल डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ा और स्टेशन से बाहर की

तरफ जाने लगी।

थोड़ी देर बाद दोनों बाहर थे। डॉली ने इधर उधर नजर दौड़ाई उसे कुछ ही दूरी पर एक गार्डन दिखा जिसे देख कर उसने चाहत का हाथ पकड़ा और गार्डन की तरफ चले गई।

दोनों गार्डन के अंदर आए। ये एक सिम्पल सा गार्डन था जहा पर हरी घास दूर तक फैली थी। आस पास गुलाब , गेंदे जैसे फूलों के पौधे लगे थे जिनकी खुशबू से पूरा गार्डन महक रहा था। कुछ ही दूरी पर बच्चो के खेलने के लिए झूले, और बुजुर्गो के बैठने के लिए सीमेंट के बेंच रखे हुए थे। पास में ही एक तालाब था जहा बोटिंग करवाई जा रही थी।

डॉली भी ये सब देख कर खुश हुई रायपुर में आने के बाद वो इस तरह के गार्डन में पहली बार आई थी। इसलिए ये सब देख उसके चेहरे पर अलग ही तरह की मुस्कान थी। उसने चाहत का हाथ पकड़े हुए उसे वहीं रखे बेंच पर बिठाया।

उसने एक नजर गार्डन को देखा फिर वो चाहत को देखने लगी। जिसने अपनी पलकें झुका रखी थी। डॉली चाहत को देखने लगी या यू कहे की उसके बोलने का इंतज़ार करने लगी। पर चाहत ने कुछ नहीं कहा । थक हार कर डॉली ने चाहत को पुकारा - चाहत..

चाहत ने डॉली की आवाज़ सुनी और अपना सिर उठा लिया। चाहत ने जैसे ही सिर उठाया डॉली धक से रह गई। चाहत का चेहरा आंसुओ से भीगा था। डॉली को तो कुछ समझ नहीं आया । उसने चाहत का हाथ पकड़ कर कहा - क्या हुआ.. चाहत..

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस डॉली के गले लग कर रोने लगी। उसकी आंखे बस बहते जा रही थीं उसने अपना सिर डॉली के सिर पर रख दिया था वहीं डॉली ने भी उसे वैसे ही संभाले हुए पकड़ा था वो बस रोते ही जा रही थीं। डॉली ने भी उसे रोकना सही नहीं समझा उसे रोने दिया।

वो बस चाहत की पीठ को सहला रही थी।

थोड़ी देर बाद चाहत का रोना सिसकियों में बदल गया। फिर चाहत ने डॉली के पहने हुए जैकेट के कॉलर पर अपनी पकड़ मजबूत कर कहा - मेरे साथ ही क्यों.. क्यों हुआ ये.. मेरे साथ हमेशा से ही ऐसा होता है.., हर बार..

डॉली को चाहत की बात सुन कुछ समझ नहीं आया उसने चाहत को खुद से दूर कर उसके आंखो में देखते हुए कहा - तुम.. तुम कहना क्या चाहती हो..

चाहत ने सिसकते हुए उसके और अध्यन के बीच की सारी

बाते डॉली को बताने लगी।

डॉली शांति से उसकी बाते सुनने लगी। चाहत की बाते सुन कर उसे भी कुछ समझ नहीं आया कि आखिर वो कहे तो क्या..? । वो कुछ देर तक वो भी चुप रह कर चाहत के चेहरे को देखने लगी।

चाहत अपने हाथो से पहले अपनें आंसु पोछे फिर कहा - ये सब जानने के बाद मै चुप कैसे रहती.. मुझे मिलना था .. मिलना था .. अध्यन से किसी भी तरह से.. इसीलिए आज मै राजनांदगांव जाने के लिए यहां आई.. पर लगता है.. भगवान जी भी नहीं चाहते .. मै अध्यन से मिलू.. मैने आज राजनांदगांव जाने के लिए जो टिकट्स ली थी.. तो उन्होंने प्लेटफॉर्म नंबर 2 कहा था.. जब मै वहा पहुंची.. तो किसी ने कहा - राजनांदगांव की ट्रेन तो प्लेटफार्म नंबर 1 में आयेगी.. जब मै वहा पहुंची तो ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 2 में अा गई.. और मै राजनांदगांव नहीं जा पाई.. ये सारी बाते उसने मासूमियत से कहा था।

डॉली ने जब ये सब सुना तो उसे हसी आ गई वो अपने पेट पर हाथ रख कर हसने लगी। चाहत उसे हैरानी से देखने लगीं उसने अपना मुंह बनाते हुए कहा - तुम हस रही हो.. पर क्यों..??

चाहत के इतना कहते ही डॉली ने एक नजर उसकी तरफ देखा एक बार फिर उसे हसी आ गई वो फिर से हसने लगी।

चाहत को ये देख अजीब लगा और वो चुप हो गई। वहीं डॉली ने अपने हसने का कोटा पूरा किया। तभी उसने देखा सामने एक बच्चा अपने हाथ में चाय लिए जा रहा है। डॉली सीधी हो कर बैठ गई। उसने उस बच्चे को आवाज़ लगाई वो बच्चा भी डॉली के सामने आया। उसने उस बच्चे से पूछा - छोटू.. चाय देना दो ..

बच्चे ने हा में सिर हिला दिया फिर उसने अपने हाथ में पकड़ी चाय की केतली वहीं रखी और चाय को प्लास्टिक के कप में डालने लगा। तभी डॉली ने पूछा - और छोटू.. स्कूल. .. विस्कुल जाते हो या सिर्फ चाय ही बेचते हो..

उस बच्चे ने चाय डॉली की तरफ बढ़ाते हुए कहा - हा दी.. जाते है ना.. उ देखिए वो है हमारा दुकान.. जिसमे हम और हमारी अम्मा रहती है.. जिनके साथ हम चाय बेचते है.. उ का है ना.. हमारा स्कूल 12 बजे से 4 बजे तक रहता है.. तो.. साढ़े 11 तक चाय बेचते है.. फिर यही से अपने ड्रेस बदल कर.. स्कूल चले जाते है.. बच्चे ने मुस्कुराते हुए कहा।

डॉली ने जब उसके मुंह से ये बात सुनी तो उसने एक नजर

चाहत को देखा फिर बच्चे से कहा - क्या बात है छोटू.. तुमने तो दिल जीत लिया.. वैसे एक बात बताओ तुम ये सब क्यों करते हो..

बच्चे ने फिर मुस्कुराते हुए कहा - अपनी अम्मा के लिए.. वो हम ना अपनी अम्मा से बहुत प्यार करते है.. तो उनकी खुशी के लिए .. स्कूल जाते है..ताकि बड़े आदमी बन सके.. और साथ ही सुबह उनकी मदद कर देते है.. ताकि उनको ज्यादा काम ना करना पड़े..
 
डॉली ये सुन मुस्कुरा दी उसने अपने पर्स से सौ का नोट निकाला और उस बच्चे की तरफ बढ़ा दिया। उस बच्चे ने उस नोट को लिया फिर अपने जेब से 1010 के नोट निकाल कर उसने जोड़े फिर अपने जेब से कुछ सिक्के निकले फिर उन सभी पैसों को अपने दोनो हाथो से पकड़ा फिर उसे डॉली कि तरफ बढ़ा दिया। डॉली ने कहा - ये क्या कर रहे हो.. ये पैसे तो मैंने तुम्हारे लिए दिए थे.. तुम वापस काहें कर रहे हो..

बच्चे ने मासूमियत से कहा - हमारी अम्मा ने सिखाया है.. कभी बिना मेहनत के पैसे नहीं लेते .. ऐसा पैसा हराम का होता है.. तो ई सब आप के है.. तो आप रखो.. हमने तो अपनी चाय के पैसे ले लिए..

चाहत और डॉली ने जब ये सुना तो वो बहुत खुश हुई । डॉली

ने उस बच्चे से सारे पैसे ले लिए और उसे अपने बैग में डाल लिया। उसने उस बच्चे के चेहरे पर हाथ रख कर कहा - भगवान तुम्हे कामियाबी दे.. बच्चा फिर मुस्कुरा दिया। ये मुस्कुराहट भी पहले की तरह ही थी निश्छल..

वो बच्चा जैसे ही जाने को मुड़ा तो चाहत ने उसे पुकारा - छोटू..

वो बच्चा रुक गया उसने पलट कर चाहत को देखा तो चाहत ने अपने बैग से एक बिस्किट का पैकेट निकाला जो शायद उसने सफर में खाने के लिए था। उसने वो बच्चे को देते हुए कहा - ये तुम्हारे लिए.. बच्चा शायद अपनी अम्मा के दिए संस्कारो के आगे मजबूर था इसलिए उसने बिस्किट का पैकेट नहीं लिया। तो चाहत ने उसके हाथो को पकड़ कर उसे बिस्किट के पैकेट को देते हुए कहा - ये कोई अहसान नहीं है.. ये गिफ्ट है..ये बोल कर उसने डॉली की तरफ देखते हुए कहा - हमारी तरफ से तुम्हारे लिए.. बच्चा खुश हो गया उसने बिस्किट के पैकेट को ले लिया और मुस्कराते हुए वहा से चला गया। चाहत उसे जाते हुए देखती रही।

डॉली ने एक चाय का कप उसकी तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने चाय का कप लिया तो डाली ने कहा - उस छोटू को देखो.. उसे अपनी अम्मा से इतना प्यार है.. और एक तुम हो.. ये

बोल डॉली ने चाय का एक घुट पिया।

चाहत ने डॉली की तरफ हैरानी से देखा फिर उसने कहा - तुम कहना क्या चाहती हो..

जिसे सुन डॉली ने कहा - यही की उस बच्चे को भी पता है.. कब क्या जरूरी है.. पर तुम हो की.. ये बोल वो चुप हो गई.. उसने अपनी चाय ख़तम की फिर कप को डस्टबिन में डाल दिया। फिर चाहत के हाथ से चाय लेने के लिए अपना हाथ आगे कर दिया।

चाहत ने झट से अपना हाथ पीछे किया जिसे देखा डॉली हैरानी से चाहत को देखने लगी तब चाहत ने कहा - पहले अपनी बात पूरी करो.. चाहत ने थोड़ा कड़क आवाज़ में कहा।

जिसे सुन डॉली ने ठंडी आह भरी फिर कहा - क्या तुम सच में अध्यन से प्यार करती हो..??

चाहत ने जैसे ही ये सुना उसने झट से कहा - ये कैसा सवाल है.. हा मै उससे बहुत प्यार करती हूं..

डॉली ने ये सुन अपने दोनो हाथो को आपस में बांध दिया फिर कहा - सच में..

चाहत ने भी हा कहने के मुंह खोलना चाहा पर उससे पहले

ही डॉली ने अपना हाथ आगे कर उसे रोकते हुए कहा - नहीं तुम नहीं करती.. चाहत को ये सुन गुस्सा अा गया उसने झट से कहा - तुम चुप रहो.. मै कुछ बोल नहीं रही .. तो तुम कुछ भी बोलोगी ..

जिसे सुन डॉली उसके करीब आई और उसने कहा - तुम अध्यन से प्यार करती हो.. पर उतना नहीं जितना वो तुमसे करता है..ये सुन चाहत ने हैरानी से डॉली की आंखो में देखा तो डॉली ने उससे दूर होते हुए कहा - अगर तुम प्यार करती .. तो इतना सब जानने के बाद.. तुम उसके आने का इंतज़ार करती.. ना की सब छोड़ कर.. उससे मिलने के लिए उसके पीछे इस तरह से जाती..

ये सुन चाहत सोच में पड़ जाती है वो एक बार पलकें झुका कर इस बारे में सोचती है तभी डॉली कहती है - अध्यन ने क्या कहा था.. याद करो.. उसने ये कहा था.." अभी चाहत का एग्जाम है.. मै अभी उससे नहीं मिलूंगा.. मै उसे एग्जाम के बाद मिलूंगा .. ताकि उसका एग्जाम अच्छे से हो जाए.. मै उसकी कमजोरी हूं.." याद आया.. ये बोल डॉली ने चाहत को हिलाया।

चाहत को ये बात याद आई पर अभी भी उसे समझ नहीं आया डॉली कहना क्या चाह रही थी। तो उसने एक बार फिर

डॉली कि तरफ देखा । डॉली ने चाहत को देखा फिर उसका हाथ पकड़ते हुए बोली - चाहत.. अध्यन चाहता है.. तुम अभी अपना एग्जाम दिलाओ.. वो अपने वजह से तुम्हारे एग्जाम को खराब नहीं करना चाहता.. उसे तुम पर हमेशा से भरोसा था.. चाहत को अब सब समझ आने लगा।

डॉली ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - उसी भरोसे के लिए.. उसने 6 महीने इंतज़ार किए है.. तुम उसकी मेहनत को ऐसे बर्बाद करना चाहती थी.. चाहत ने जैसे ही ये सुना उसने एकदम से अपना सिर उठा कर ना में सर हिला दिया।

जिसे देख डॉली ने कहा - वहीं तो.. अध्यन .. भी चाहता.. की तुम दोनों की बातें अभी न हो.. अभी वो समय नहीं है.. अभी इंपॉर्टेंट है.. तुम्हारा एग्जाम.. जिसके लिए उसने तुम्हे यहां भेजा था.. खुद से दूर किया था.. तुम उसकी मेहनत पर पानी फेर ना चाहती हो.. बोलो..

डॉली ने एक बार फिर चाहत को हिलाते हुए कहा ।

तो चाहत ने ना में सिर हिला दिया जिसे देख कर डॉली ने कहा - समझो उसे.. वो लड़का तुम्हारे प्यार के लिए.. तुम्हारे लिए तुम से दूर है.. और तुम हो की .. उसकी बातो को समझ ही नहीं रही हो..

चाहत ने उसकी बात सुनी तो उसे भी अपनी गलती का

अहसास हुआ ।

चाहत ने डॉली से कहा - हा तुम सही कह रही हो.. मैंने तो ऐसे सोचा ही नहीं.. जब वो मेरे लिए रुक सकता है.. इतनी मेहनत कर सकता है.. तो मै क्यों नहीं.. ये बोल वो अपने जगह से खड़ी हुई फिर उसने कहा - मै इतनी सेलफिश नहीं हूं.. मै उसका वेट करूगी.. जब वो चाहेगा तभी हम बात करेंगे.. डॉली भी अब उठ चुकी थी.. उसने डॉली के हाथ से चाय का कप लिया और चाय पीते हुए उसने कहा - that's like a good girl.. ये बोल कर वो मुस्कुरा दी।

चाहत भी मुस्करा दी। डॉली ने चाय ख़तम की फिर कप डस्टबिन में फेक दिया। चाहत ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - चलो.. अब चलते है.. जिसे सुन डॉली ने चौक कर कहा - कहा??

जिसे सुन चाहत ने उसके सिर पर चपत लगाते हुए कहा - हॉस्टल.. और कहा ??

डॉली ने ओह.. कहा तो चाहत ने उसे चलने का इशारा किया । फिर आगे चलने लगी।

चाहत और डॉली ऐसे ही चल रहे थे। तभी चाहत अचानक से रुक गई जिसे देख कर डॉली ने कहा - क्या हुआ..?? तुम ऐसे क्यों रुक गई।..

डॉली की बात सुन चाहत ने कहा - तुमसे कुछ पूछना था..

डॉली ने भी कहा - हा पूछो.. ना.. क्या हुआ..??

चाहत ने अपनी आंखो को छोटा कर के कहा - वो तुम.. तुम उस समय हस क्यों रही थी..

जिसे सुन डॉली एक बार फिर हसने लगीं। चाहत ने अपनी आंखे दिखाते हुए कहा - बताओ .. क्यों हस रही थी तुम.. बोलो..

डॉली ने हस्ते हुए कहा - तुम पहली बार स्टेशन आई थी.. और क्या हुआ.. गलत प्लेटफॉर्म में अा गई.. वो भी किसी और के कहने पर.. मतलब कमाल हो यार.. ये बोल वो फिर से हसने लगी।

चाहत ने ये सुन मुंह बना लिया.. जिसे देख डॉली और हसने लगी। चाहत को अब चिढ़ होने लगी। उसने गुस्से से कहा - तुम ना.. तुम बहुत बुरी हो.. मै जा रही हूं.. तुम ना .. यही बैठ कर बस हस्ते रहो.. ये बोल चाहत आगे चलने लगी।

डॉली ने उसे रोकते हुए कहा - अच्छा बाबा.. सॉरी.. अब से नहीं बोलूंगी.. ऐसा कुछ ..

डॉली की बात सुन कर चाहत ने उसकी तरफ देखा फिर

बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली - पक्का..

डॉली ने भी अपने हाथ जोड़ते हुए कहा - हा मेरी मां.. पक्का.. डॉली की नौटंकी देख चाहत भी मुस्कुरा दी।

थोड़े देर बात दोनों गार्डन से बाहर अा चुके थे। उन्होंने ऑटो रुकवाया ।

चाहत ने ऑटोवाले को देख कर कहा - संतोषी नगर..

ऑटो वाले ने हा में सिर हिला दिया। चाहत और डॉली ऑटो में जल्दी से बैठ गए। फिर ऑटो ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली । साथ ही डॉली की बातो ने भी अपनी रफ़्तार पकड़ ली। चाहत उसकी बातो को सुन रही थी.. और साथ ही अध्यन के बारे में भी सोच रही थी..
 
देरी के दिल से सॉरी..घर पर कुछ इंपॉर्टेंट काम अा गया था.. अब से रेगुलरली पार्ट्स अपडेट होंगे..

चाहत और डॉली ऑटो से हॉस्टल पहुंचे । रूम आकर चाहत ने देखा निशा बेड पर बैठी पढ़ रही है। डॉली ने निशा को देखा जो चुप चाप पढ़ रही थी। जिसे देख उसे बहुत गुस्सा आया। डॉली उसकी तरफ बढ़ने लगी।

तभी डॉली ने महसूस किया किसी ने उसके हाथो को कस कर पकड़ा हुआ है। उसने पलट कर देखा तो चाहत ने उसके हाथो को पकड़ कर रखा था। डॉली ने देखा तो । तो वो हैरानी से चाहत को देखने तो चाहत ने अपना सिर ना में हिला दिया। डॉली ने चाहत का चेहरा देखा फिर हाथ झटक कर रूम से बाहर निकल गई।

चाहत ने उसे जाते हुए देखा फिर वो भी अपने कपड़े पकड़ कर वॉशरूम की तरफ चले गई। उसने खुद को बाथरूम में लगे मिरर में देखा । कुछ देर तक वो ऐसे ही खुद को देखने

लगी। शायद आज की अपनी की हुईं हरकत के बारे में सोच रही थी। फिर उसने हाथ मुंह धोया और बाहर अा गई।

चाहत ने अपने कपड़े रखे फिर टेबल पर रखे गणेश जी के सामने उसने अपने हाथ जोड़ लिए। उसने अपनी आंखे बंद की तो उसे अध्यन का चेहरा दिखा । वो बंद आंखो के साथ मुस्कुरा दी। उसने मन ही मन कहा - भगवान जी.. आज आपकी वजह से .. मै यहां हूं.. अगर अपने सही समय पर.. डॉली को भेजा नहीं होता तो .. तो शायद मै अपने प्यार के साथ कुछ गलत कर बैठती.. थैंक्यू... मुझे इतनी अच्छी दोस्त.. और इतना प्यार करने वाला इंसान देने के लिए.. ये बोल उसने अपनी आंखे खोल ली।

उसने साइड से अपनी बुक्स निकाल ली और बेड पर रख कर पढ़ने लगीं। तभी निशा ने अपनी बुक पर नजर जमाए हुए कहा - तुम्हारे लिए मै टिफिन ले आई थी.. वो वहा .. ये बोल उसने अपनी उंगली साइड में रखे स्टूल की तरफ कर के बोलती है.. वहा रखा है.. तुम पहले खा लो.. फिर पढ़ना.. नहीं तो खाना ठंडा हो जाएगा..

चाहत ये सुन मुस्कुरा देती है। और उठ कर टिफिन की तरफ जाती है । तभी एक बार फिर निशा की आवाज़ आती है - तुम्हारे और डॉली .. दोनों का खाना है.. खा लेना.. ये बोल वो बेड से उठती है और अपनी बुक उठाते हुए बोलती है - मै प्रिया के रूम जा रही हूं.. पढ़ने.. शाम को वापस अा जाऊंगी..

ये बोल निशा पलट कर जाने लगी तो चाहत ने कहा - निशा ..

निशा चाहत की आवाज़ सुन कर रुक गई पर पलटी नहीं। तब चाहत ने कहा - थैंक्यू..

जिसे सुन निशा ने कहा - मुझे पता है.. डॉली और तुम .. तुम दोनों मुझसे नाराज़ हो.. क्युकी मैंने तुमसे .. तुम्हारे बाहर जाने के बारे में नहीं पूछा.. पर चाहत.. ये बोल कर वो पलटी.. और उसने चाहत को देखते हुए कहा - कल ct है.. मुझे पढ़ना है.. तुम दोनों ने तो शायद अपनी पढ़ाई पूरी भी कर ली.. पर मुझे तो पढ़ना है.. ऐसा नहीं है.. मुझे तुम्हारी फिक्र नहीं है.. फिक्र है तभी मैंने लगभग 3 बार आंटी और अंकल से ( हॉस्टल की ओनर ) से पूछा था.. पर अभी मेरे लिए तुमसे ज्यादा जरूरी मेरा ct है.. जिसके लिए मै यहां हूं.. ये बोल वो पलट गई।

उसने पलटने के साथ देखा डॉली हाथ में बुक्स पकड़े हुए

उसे देख रही थी। निशा ने उसे देखा फिर डॉली को साइड से जाने लगी। डॉली ने उसकी बात सुन ली थी। फिर उसने निशा से कहा - सॉरी.. मैंने तुम्हे गलत समझा ..

निशा ने कहा - इट्स ओके .. और वो वहा से चले गई।

डॉली उसे जाते हुए देखती रही । फिर रूम में अा गई। जहा चाहत टिफिन खोल रही थी। उसने डॉली को देखा फिर हाथ के इशारे अपने पास बुलाया। फिर कहा - खाना खा लो...

डॉली उसके पास बैठ गई। फिर चाहत ने उसकी तरफ प्लेट में खाना सर्व कर के दिया । डॉली और चाहत अब खाना खाने लगे।

चाहत ने रोटी का टुकड़ा खाते हुए कहा - कई बार हम जैसा सोचते है.. जरूरी नहीं कि .. वो सही हो..

डॉली ने सुना तो उसके हाथ भी रुक गए। उसने चाहत की तरफ देखा पर कहा कुछ नहीं । शायद वो चाहत की बात से सहमत थी। दोनों ने अपना खाना ख़तम किया । चाहत ने प्लेट्स उठाए फिर दोनों ने मिल कर अपने प्लेट्स साफ किए।

दोनों वापस रूम में आईं फिर पढ़ने लगीं। चाहत का ध्यान

बार बार अध्यन की तरफ जा रहा था। उसने खुद को एक बार फिर समझाया और पढ़ने लगी। दोनों पढ़ने में इतना बिजी हो गई की उनको पता ही नहीं कब शाम हो गई।

चाहत और डॉली को होश तब आया जब बाहर चाय की बेल बजी डॉली उठी और कप लेकर बाहर चले गई। उसके जाते ही निशा ने रूम में एंट्री ली। चाहत जो को बुक्स उठा रही थीं। उसने नजर उठा कर निशा को देखा । निशा ने भी उसी समय उसकी तरफ नजर उठा कर देखा । दोनों कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे को देखते रहे । फिर चाहत मुस्कुरा दी जिसे देख निशा भी मुस्कुरा दी।

"कभी कभी हमारी एक मुस्कुराहट काफी होती है सारे गीले सिकवे मिटाने के लिए। ये बात आज चाहत और निशा को भी समझ अा गई थी। "

डॉली चाय लेकर वापस अा गई उसने भी निशा को देखा । पर ना उसने कुछ कहा और ना ही निशा ने कुछ कहा । दोनों बस बिस्तर पर बैठ गए फिर तीनो चाय पीते हुए बिस्किट्स और टोस्ट खाने लगे।

एक अजीब तरह की शांति फैली थी आज उनके बीच.. तीनो

में से कोई कुछ भी नहीं बोल रहा था.. पर कभी कभी किसी भी विवाद ख़तम करने के लिए.. बोलना जरूरी नहीं.. बस खामोश होकर भी सभी परेशानी ख़तम हो सकती हैं.. जैसा हो रहा है.. उसे वैसे ही चलने देना चाहिए " ये बात तीनो बखूबी समझ रहे थे। शायद इसीलिए चुप थे।

खैर तीनो ने अपने चाय ख़तम की और फिर से पढ़ाई में लग गए। किसी तरह रात बीती और सुबह हुई।

आज सभी को जल्दी थी चाहत और निशा भी जल्दी रेडी हो गए । दोनों ने पूजा की और कॉलेज के लिए निकल गए। घबराहट बस में बैठे सभी गर्ल्स को थी। वजह थी आज का टेस्ट । सभी फर्स्ट सेमेस्टर की गर्ल्स थी तो डरना भी स्वाभाविक था।

चाहत और डॉली हमेशा की तरह साथ बैठे थे। तभी चाहत के मोबाइल की फ़्लैश ऑन हुई । चाहत ने मोबाइल देखा तो एक मेसेज था। इस मेसेज को देख कर चाहत के चेहरे पर स्माइल अा जाती हैं। डॉली ने चाहत को मुस्कुराते हुए देखा फिर उसकी भी नजर चाहत के मोबाइल पर गई। उसने

मैसेज था जो कि अंश की तरफ से आया था। जिसमे " all the best //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg" लिखा था।

चाहत और डॉली मेसेज देख मुस्कुराने लगे। थोड़े देर में बस कॉलेज पहुंच गई। दोनों बस से उतरे फिर एक दूसरे को _"all the best" बोल कर अपने क्लास की तरफ चले गए।

पहला टेस्ट ख़तम हुआ फिर एक घंटे के गैप के बाद सेकंड टेस्ट हुआ। उसके बाद सारे गर्ल्स फिर से हॉस्टल । ऐसे ही सारे ct और एग्जाम कंपलीट हो गए और दो महीने पंख लगा कर उड़ गए।

आज लास्ट एग्जाम था जिसे देकर आए चाहत , निशा और डॉली रूम में आए खाना खा कर सो गए। Ct से लेकर एग्जाम के ख़तम होने तक तीनो ने चैन की नींद सोने को नहीं मिली थी। आज तीनो को चैन की नींद सो गए थे।

शाम को चाहत और निशा की नींद चाय की बेल से खुली। चाहत और निशा उठे ही थे तभी दरवाज़े के जोर से बजने के

साथ खुल गया दोनों ने चौक कर उस ओर देखा। निशा ने सिर पर हाथ रख कर दरवाज़े की तरफ देखा जहा डॉली हाथ में कप पकड़ कर उसे ही देख रही थी।

निशा ने "नोट अगैन" कह कर वाशरूम में चले गई। वहीं डॉली उप्स बोलते हुए रूम में अा गई। चाहत ने डॉली को देखा तो डॉली भी मुस्कुरा दी। उसने चाय का कप चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत चाय पीने लगी। तभी डॉली ने पूछा - तो कल घर..??

चाहत ने घुट भरते हुए कहा - हा..

डॉली ने अपने कप को हाथ में मजबूती से पकड़ कर कहा - क्या तुम.. तुम अध्यन से मिलेगी..??

डॉली के इस क्वेश्चन पर चाहत ने कोई रिएक्शन नहीं दिया बस बेड से उठ कर अलमारी खोलने लगी।

चाहत के कुछ नहीं कहा तो डॉली ने फिर से कहा - क्या तुम .. अध्यन से मिलेगी..

चाहत जों की अलमारी खोल रही थी उसके हाथ अलमारी के दरवाज़े पर ही रुक गए । और वो पलट कर डॉली कि तरफ देखने लगी।

चाहत ने नम आंखो के साथ हा में सिर हिला दिया। तभी निशा वॉशरूम से बाहर निकली और अपने फेस को टॉवेल से साफ करते हुए बोली - हा और सारी बाते क्लियर कर लेना.. और अगर सब ठीक हो तो.. रसगुल्ले लाना..

ये बोल वो बेड पर बैठ गई।

चाहत और डॉली हैरानी से उसकी तरफ देखने लगे। निशा बेड में बैठ कर अपना मोबाइल चलाने लगी। चाहत और डॉली उसे हैरानी से देखने लगीं। दोनों समझ ही नहीं पा रही थी। आखिर निशा को किस बारे में बात कर रही है।

निशा ने मोबाइल में देखते हुए कहा - ऐसे हैरानी से मत देखो.. जैसे मैंने कुछ अजीब कह दिया हो.. मुझे सब कुछ पता है..

निशा की बात सुन डॉली उसके पास अा गई फिर कहा - तो तुमने कभी कुछ कहा क्यों नहीं..

निशा ने सिर उठा कर डॉली को देखा फिर कहा - तुम लोगो ने कभी मुझे बताया था.. उसका जवाब सुन कर डाली कि तो बोलती ही बंद हो गई।

निशा ने ये बोल अपना मोबाइल साइड में रखा डॉली उसकी बातो का जवाब नहीं दे पाई । तो निशा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - जब तक तुम दोनों ने मुझे कुछ नहीं बताया.. तो मै कैसे बोल या बता सकती थी..

निशा के इस जवाब को सुन डॉली तो चुप हो गई थी पर चाहत उठी फिर निशा के पास आकर बोली - सॉरी..

निशा ने कहा - डोंट बी.. मैंने ही कभी तुम्हारे मामले में कुछ कहना जरूरी नहीं समझा.. और ना तुमने बताया.. तो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.. बट आई वांट की तुम दोनों.. एक साथ हो जाओ.. ये बोल उसने मोबाइल पकड़ा और बाहर जाने लगी।

तभी चाहत ने उसे रोकते हुए कहा - बट निशा तुम्हे कब से ये सब पता है.. ??

निशा ने पलट कर मुस्कुराते हुए कहा - जब तुम दोनों उस रात बात कर रही थी.. तब मैंने भी सुना था.. ये बोल उसने अपनी आई विंक की और मुस्कुराते हुए रूम से बाहर निकल गई।

चाहत और डॉली उसे जाते हुए देखते रहे फिर उन दोनों ने एक दूसरे को देखा फिर ज़ोर से हसने लगे.. ऐसे ही दोनों बाते करते हुए बैठे थे।

ऐसे ही रात को खाना खा कर चाहत और निशा बेड पर लेटे हुए थे। पर नींद दोनों की आंखो में नहीं थी। ऐसा ही होता है जब लोग हॉस्टल में हो और दूसरे दिन उन्हे घर जाना हो तो पहली रात नींद किसी को नहीं आती।

निशा ने देखा चाहत भी बिस्तर पर करवटें बदल रही है। तो उसने कहा - चाहत नींद नहीं आ रही है क्या..??

चाहत ने भी हमम कह कर उसके सवाल का जवाब दिया । जिसे सुन निशा बेड पर बैठ गई। फिर चाहत भी उठ कर बैठ गई और दोनों बात करने लगी।

दोनों की बाते सुबह तक चली फिर सुबह सुबह चाहत और निशा दोनों को नींद आई और दोनों सो गए। डॉली के दरवाज़ा खटखटाने से उनकी नींद खुली। डॉली खुद कभी इतनी जल्दी उठती नहीं थी। पर आज उसकी नींद जल्दी खुल गई थी। वजह थी आज वो तीनो इतने दिन बाद अपने घर जो जाने वाली थी।

चाहत ने दरवाज़ा खोला तो डॉली मुंह में ब्रश लिए हुए बोली - 10 बजे की ट्रेन है.. जल्दी रेडी हो जाओ .. फिर नाश्ता कर

के निकलते है.. इतना बोल उसने चाहत की बात सीने बगैर वहा से वो चली गई।

चाहत दरवाज़ा पकड़ कर उसे देखती रह गई पर डॉली वो तो अपने ही घुन में थी। फिर चाहत ने सिर झटक कर रूम के अंदर चली गई।

चाहत भी जल्दी से वॉशरूम में गई और वहा से नहाकर वापस आईं उसने व्हाइट टॉप पहना जो की फूल स्लीव्स की थी जिसे उसने कोहनी तक खींच रखा था। हाथो में ब्लैक वाच और नीचे ब्लैंक जीन्स पहनी, पैरो में व्हाइट शूज पहना था। बालो को समेट कर एक रबर कि मदद से एक पोनी बनाई फिर उसने उसे घुमा कर जुड़ा बना दिया और उसके जुड़ा सटीक लगा दी। बैग उसने रात से ही पैक कर रखा था। चेहरे पर कोई मेकअप नहीं था बस आंखो में काजल लगा लिया था उसने और होठों पर हलकी सी लिप ग्लोस लगा ली थी।

रेडी होने के बाद उसने अपना बैग उठाया और उसे बेड पर रखा फिर उसने चार्जर और जरूरी सामान रखा । बगल में निशा भी अपना बैग पैक कर रही थी। उसने भी ग्रीन टॉप और ब्लू जीन्स पहन रखी थी। और बैग में अपनी जरूरत की चीज़े रख रही थी।

तभी एक बार फिर से दरवाज़ा जोर की आवाज़ से खुला पर अब ना तो निशा चौकी और ना ही चाहत क्युकी दोनों को इसकी आदत सी हो गई थी। चाहत ने बिना मुडे बैग के चैन को बंद करते हुए कहा - तुम किसी दिन हमारा दरवाज़ा तोड़ दोगी..

डॉली मुस्कुराते हुए अंदर एंट्री लेती हुए कहती है - हा यार ये होना चाहिए .. मि. एंड मिसेज अरोड़ा को जो हम पैसा देते है..वो किसी काम तो आयेगा.. ये बोल उसने बैग चाहत के बैग के पास रखा और बेड पर बैठ गई।

चाहत उसकी बात सुन मुस्कुरा दी। उसने एक नजर डाली को देखा जिसने ब्लू टॉप के साथ ब्लैक पेंट और ब्लैक बेली पहनी थी। दोनों का बैग ज्यादा बड़ा नहीं था। क्युकी दोनों ज्यादा कपड़े नहीं ले जा रहे थे। चाहत ने अपना पर्स जो कि साइड में रखा था वो उसे लेने गई। तभी डॉली की नजर चाहत पर अच्छे से पड़ी। उसने चाहत को देखा फिर ज़ोर से सिटी बजाई फिर कहा - क्या बात है.. मिसेज शर्मा .. क्या लग रही हो.. आज तो राजनांदगांव वाले गिर ही जाएंगे.. शायद हॉस्टल के फर्स्ट डे के बाद ही चाहत को ऐसे देखने का असर था जो डॉली सिटी बजा रही थी।

चाहत डॉली की इस हरकत पर मुस्कुरा दी। उसने अपना पर्स बेड के पास रखा फिर अपने शूज के लेस को टाइड करते हुए निशा से पूछा - निशा तुम.. तुम किसके साथ जा रही हो..??

निशा ने कहा - दी अा रही है लेने..

चाहत और डॉली ने एक साथ ओह कहा।

निशा मुस्कुराते हुए बेड पर बैठ गई फिर कहा - हा यार.. दी के साथ उनके फ्रेंड के घर जाना है.. नहीं तो मै भी तुम लोगो के साथ जाती.. मुझे भी दुर्ग तक कंपनी मिल जाती..

डॉली ये सुन उसके पास गई फिर उसके गले में हाथ डालते हुए बोली - कोई नहीं यारा.. नेक्स्ट टाइम.. उसकी इस हरकत पर निशा ने अजीब से एक्सप्रेशन के साथ उसे देखा तो डॉली मुस्कुरा दी।

तभी नाश्ते की बेल बजी चाहत डॉली और निशा तीनो नाश्ता करने नीचे चले गई। तीनो ने नाश्ता लिया और टेबल पर बैठ गई। आज नाश्ते के टेबल पर सभी गर्ल्स रेडी होकर आईं थी क्युकी सभी को आज घर जो जाना था। नाश्ते के बाद तीनो वापस रूम अा गई। तभी निशा का मोबाइल बजा तो निशा अपना बैग बाहर निकालने लगी । जिसे देख चाहत और निशा ने भी अपने बैग्स पकड़ लिए।

तीनो ने अपने बैग्स बाहर निकाले और रूम लॉक किया। सीढ़ियों से होते हुए तीनो नीचे आए नीचे आकर उन्होंने देखा मि . अरोड़ा अपने मोटे से पेट के साथ अपने पीले दांतो को दिखाते हुए उन्हे ही देख रहे थे। तीनो मि. अरोड़ा के पास आए। उन्होंने पास रखे रजिस्टर पर साइन किया और गेट से बाहर अा गए।

उन्होंने देखा निशा की दी कार के साथ बाहर खड़ी है। चाहत ने निशा की दी को पहले फोटोज में भी देखा था तो वो उन्हे पहचानती थी। निशा की दी ने जब तीनो को देखा तो कहा - अरे तुम दोनों कहा जा रही हो..??

निशा की दी का ये सवाल अचानक हुआ तो डॉली को कुछ समझ नहीं आया वो चुप उन्हे देखती रही । जिसे देख चाहत ने पहले बैग को साइड में रखा फिर हाथ जोड़कर उन्हे नमस्ते कहा उसने अपनी घड़ी देखते हुए कहा - स्टेशन जा रहे है..

निशा की दी ने ये देख कर तुरंत कहा - मै भी वहीं से जा रही हूं.. चलो तुम दोनों को स्टेशन छोड़ दू.. ये सुन चाहत ने संकोच से पहले डॉली की तरफ देखा फिर उसने निशा की तरफ देखा ।

निशा उसकी बात समझते हुए बोली - हा तुम दोनों अा जाओ.. हम ड्रॉप कर देते है.. ये सुन डॉली और चाहत ने हा में सिर हिला दिया और कार की पिछली सीट में बैठ गए।

उनके हॉस्टल से स्टेशन ज्यादा दूर नहीं था। कार कुछ ही देर में स्टेशन अा गई। चाहत और डॉली कार से उतरी गई। चाहत कार की विंडो के पास आकर बोली - थैंक्यू.. दी हम दोनों की साइड से..

निशा की दी भी मुस्कुरा दी। तभी निशा ने कहा - बाय.. चाहत फिर चाहत भी मुस्करा दी । वो विंडो के पास से हट गई। निशा विंडो से झांकते हुए बोली - बाय.. जिसे सुन कर डॉली ने भी हाथ हिला कर बाय कहा ।

कार के चले जाने के बाद चाहत और डॉली स्टेशन के अंदर आई। उन्होंने टिकट्स ली चाहत ने राजनादगांव की और डॉली ने दुर्ग की।

डॉली बालोद से थी जिसकी वजह से उसे दुर्ग से ट्रेन चेंज करनी थी।

दोनों स्टेशन के अंदर अा गई दोनों वहीं ट्रेन का इंतजार करने लगी।

चाहत ने साइड में देखा तो एक शॉप थी उसने डॉली से कहा

- तुम कुछ खाओगी..

डॉली ने हा में सिर हिलाया तो चाहत वहा से शॉप चले गई। वहा उसने सफर में कुछ खाने के लिए ले लिया । और साथ में आर्यन के लिए चॉकलेट ली ।

चाहत जैसे ही वापस आई वैसे ही ट्रेन अा गई। चाहत ने चॉकलेट अपनी पर्स में डाला और डॉली का हाथ पकड़ कर ट्रेन में चढ गई। ट्रेन में ज्यादा भीड़ नहीं थी तो उनको सीट जल्दी मिल गई है तो दोनों वहीं बैठ जाते है।

डॉली खिड़की के पास बैठी थी उसके बगल में चाहत बैठी थीं । दोनों ने शॉप से लिए हुए चिप्स खाते हैं । दोनों शांत थे चाहत जों की रात भर सोई नहीं थी वो डॉली के कंधो पर सिर रख कर सो जाती है। जिसे देख डॉली मुस्कुरा देती है। वो पीछे छूट रहे रास्तों को देखते रहती है।

थोड़े देर में दुर्ग स्टेशन आने वाला होता है तो डॉली चाहत को कंधो से हिला कर उठाती है। चाहत अपना सिर उठा कर डॉली को देखती है तो डॉली कहती है - मेरा स्टेशन अा गया.. ये बोल डॉली ने अपना बैग निकाल लिया।

चाहत डॉली को देखने लगी । थोड़े देर में ट्रेन दुर्ग स्टेशन में

रुकी । चाहत अपनी जगह से उठने लगी। उसने सोचा था जाने से पहले एक दूसरे को एक बार गले लगा कर उसे बाय बोलेगी। पर डॉली सीधा दरवाज़े की तरफ गई । जिसे देख चाहत चुप चाप बैठ गई।

थोड़े देर बाद चाहत की नजर बगल में रखे डॉली के बैग पर गई। जो उसके बैग के बगल में ही था । चाहत ने डॉली का बैग पकड़ा उसे लगा डॉली अपना बेग भूल गई है फिर वो भागते हुए गेट के पास गई।

चाहत ने देखा डॉली किसी लडके के साथ खड़ी है । चाहत ने देखा लड़का दिखने में काफी स्मार्ट था और उसने ब्लू शर्ट और ब्लैक जीन्स पहनी है। चेहरे पे हल्की दाढ़ी के साथ काफी अच्छी पर्सनैलिटी का मालिक था।

डॉली उससे मुस्कुराते हुए बात कर रही थी तभी लड़के ने चाहत को देखा उस टाइम डॉली की पीठ चाहत की तरफ थी। और डॉली के साथ खड़े लड़के का फेस चाहत के साइड था जिस कारण वो चाहत को देख पा रहा था। चाहत को देख लड़के ने डॉली को इशारा किया तो उसने पलट कर चाहत की तरफ देखा ।
 

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