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अगले दिन
चाहत का घर
चाहत ने अपना रोज़ का काम किया । नहाकर आईं तो उसकी नजर रुमाल पर पड़ी जो अध्यन की थी। उस रुमाल को उसने धो कर साफ़ किया। उसे सूखा कर अपने बेग में रखा । एक बार फिर अध्यन का ख्याल उसका दिल को धड़का गया।
स्कूल में
चाहत क्लास आईं उसने देखा अध्यन उसे ही देख रहा था । वो उसके पास जाती उससे पहले ही कोई लड़की दौड़ती हुई आईं और उसके गले लग गई।
चाहत जहा थी वहीं रुक गई...
कौन है ये?
स्कूल क्लासरूम
चाहत जहा थी वहीं जम गई । वो एकटक उन दोनों को देखने लगी ।
वो लड़की अध्यन के गले लगे हुए थी । अध्यन ने उसे देखा फिर लड़की से कहा - सोनिया...
सोनिया - हा ।।
अध्यन - तुमसे कितनी बार कहा है.... ऐसे क्लास में ये सब नहीं करते...
सोनिया - जानती हूं... पर इतने दिन बाद तुमसे मिली.... ना तो खुद को रोक नहीं पाई ।
अध्यन ने उसके सिर पर थपकी दी फिर उसे लेकर क्लास से
बाहर चला गया ।
चाहत जैसे जम ही गई इतने में काजल आईं और उसे कहा - कहा खोई है...
चाहत - कहीं नहीं ...
काजल - तो ऐसे बीच रास्ते में क्यू खड़ी है...
चाहत वहा से हट अपने डेस्क पर चले जाती है।
प्रेयर बेल बजी तो सब थे बस अध्यन नहीं था । चाहत की नज़र बाहर ही थी पर वो उसे नहीं दिखा । प्रेयर लाइन में उसे सोनिया दिखी जो कि अभी भी अध्यन के साथ बातो में लगी थीं । ये देख चाहत को बहुत बुरा लगा पर वो समझ ही नहीं पा रही थी उसे बुरा क्यू लग रहा है।
क्लास में जब वो पहुंची तो भी सोनिया उसकी सीट पर बैठी थी ।
जब चाहत वहा पर आईं तो अध्यन ने सोनिया को वहा से जाने को कहा और चाहत के साथ बैठ गया ।
क्लास में टीचर आए और पढ़ने लगे ।
सर - सो सॉल्व दिस इक्वेशन...
सर ने चाहत को देखा जिसका ध्यान नहीं था तो सर ने उसे जोर से पुकारा चाहत....
चाहत डर गई और अपनी जगह पर खड़ी हो गई ।
सर - ध्यान कहा है... तुम्हारा...सॉल्व करो इस इक्वेशन को ।
ये सुन चाहत गुस्से में उठी और ब्लैक बोड में जाकर इक्वेशन सॉल्व करने लगी । आंसर आ जाने के बाद वो रुकीं। सब उसे देख रहे थे।
सर ने पहली बार उसे इतने गुस्से में देखा था। वो उसे कुछ नहीं बोले । वो अपनी जगह पर बैठ गई।
अध्यन ने उसे देखा। उसे भी समझ नहीं आया कि हुआ क्या जो चाहत इतने गुस्से में है।
क्लासेस अपने हिसाब से चल रही थी काजल और अध्यन दोनो चाहत के बिहेवियर को देख हैरान थे।
सोनिया ने अध्यन को देखा और आंख मार दी । अध्यन मुस्कुराकर फिर अपना काम करने लगा। ये सब चाहत ने
देखा तो उसे और गुस्सा आ गया।
चाहत अपने में ही बड़बड़ाए जा रही थी ।
चाहत - अभी भी उसे ही देख रहा है । .. ये नहीं कि पूछ लू ... चाहत क्या हुआ...लेकिन नहीं,....कहा फर्क पड़ता है.... रहे अपनी सोनिया के साथ ... मुझे क्या..
अध्यन सोचता है पुछू या नहीं फिर हिम्मत कर के चाहत को पुकारता है ।
अध्यन बड़े प्यार से - चाहत
चाहत उतने ही गुस्से से बोलती है - क्या है?
अध्यन - वो... तुम ... तुम गुस्सा ... मेरा मतलब वो...
चाहत - ये वो ... वो क्या लगा रखा है। .... साफ़ साफ़ कहो...
तभी लंच की बेल बजती है और चाहत कहती है।
चाहत - मुझे जाना है लंच करने तो मै तुमसे बाद में बात करती हूं । तुम जाओ ... अपनी सोनिया से बाते करो ... उसके सामने वो ... वो....करो समझे ।
ये सब बोल चाहत पैर पटकते हुए निकाल जाती है।
अध्यन बिना कुछ समझे सोचता है मैंने क्या किया ,?
तभी पीछे से सोनिया आती है और उसे अपने साथ लंच
करने बोलती है।
लंच हो जाने के बाद वो सोनिया के साथ बात कर ही रहा होता है तभी उसकी नज़र पास में खड़े काजल और चाहत पर पढ़ती है वो सोनिया को बाय बोल । उनके पास जाता है।
उसे पास आता देख चाहत काजल से चलने को कहती है और वो दोनो क्लास आ जाते है । अध्यन वहीं खड़ा होकर उन दोनों को देखते रह जाता है उसे समझ ही नहीं आता की हुआ क्या है चाहत को??
इधर क्लास में आकर चाहत एक गहरी सांस लेती है। और काजल को देखती है जो उसे देख रही होती है।
काजल उसे अजीब सी नजरो से देखती हैं।
काजल - ये क्या कर रही है तू???
चाहत - मै ... मैंने क्या किया?
काजल - तू बन मत ।
चाहत - मै कहा बन रही हूं ।
काजल - ये क्या हरकत है फिर...
चाहत - क्या ... कुछ भी तो नहीं .. तू क्या बोल रही है... मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा।
काजल चाहत को बोली तो तू ऐसे नहीं बताएगी।
ये बोल के उसने चाहत को पकड़ा और गुदगुदी करने लगी । दोनों क्लास में एक दूसरे को गुदगुदी कर रहे थे । वो तो लंच टाइम था नहीं तो आज उनकी खैर नहीं होती । दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को तंग कर रही थी । और जब थक गई तो बेंच पर बैठ कर गई फिर एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखते है।
काजल - तू अध्यन को इग्नोर कर रही है ।
चाहत नज़रे चुराते हुए - नहीं तो
काजल - अच्छा।
चाहत उसे देखते हुए हा बस कहने ही वाली थी तभी काजल को देख वो चुप हो गई । काजल हाथ बांध कर खड़ी हुई थी फिर उसने कहा - तू उसे सोनिया के वजह से इग्नोर के रही है ना।
चाहत ने हा में सिर हिलाया।
काजल - क्यू?
चाहत अब क्या कहे क्युकी उसे खुद समझ नहीं आ रहा था । कुछ सोच के उसने कहा।
चाहत - अरे यार वो अपने दोस्त के साथ था... उस सोनिया के साथ तो... मैंने सोचा .... क्यों उनके बीच आऊ
इसीलिए ...
काजल - अच्छा.... वैसे तुझे नहीं लगता ये मि. अध्यन कुछ ज्यादा ही ध्यान नहीं दे रहे तुझ पर...
ये बोल कर उसने चाहत को आंख मारी । तो चाहत उसके पीछे भागी और बोली रुक तुझे... मै बताती हूं कौन किसके पीछे ध्यान दे रहा है ।... रुक तू....
कुछ देर बाद जब दोनों शांत हुए तो काजल ने कहा।
काजल - कुछ कहूं।।
चाहत - हा बोल ना ...
काजल - मुझे कुछ दिनों से एक बात फील हो रही ।
चाहत उसकी तरफ देखते हुए - अब घुमा मत बोल ना।
काजल - मुझे ... वो मुझे लगता है...
चाहत - क्या लगता है...
काजल - शायद .... वो
चाहत हाथ दिखाते हुए - अब नहीं बोली ना तो कान के नीचे लगाऊंगी।
काजल ने आंख बंद की और बोली - मुझे अनिल ने परपोज किया है।
काजल कुछ देर तक वैसे ही थी । उसने आंख खोल कर देखा तो पाया।
चाहत कुछ सोच रही है।
ये देख काजल ने उसे कहा - क्या हुआ ?
चाहत ने एक गहरी सांस ली और कहा - क्या तू भी उसे?
काजल ने एकदम से कहा - नहीं । वो .. मै एक्चुअली।
चाहत उसका हाथ अपने हाथ में लेकर - देख वो बुरा नहीं है पर ... लड़कियों के बारे में उसका रिकॉर्ड खराब है... वो किसी भी लड़की के साथ अच्छे से नहीं रहा है...
इतना बोलते ही काजल बोल पड़ी - मैंने उसे हा नहीं कहा है।... मै... वो बोल ही रही थी तभी
चाहत - तूने उसे हा कह दिया है ... तेरे चेहरे पर ही दिख रहा है।
काजल अब चुप हो गई । उसे पता था कि चाहत से वो कुछ नहीं छुपा सकती। उसने सिर झुका दिया।
चाहत - तू रह उसके साथ ... बस अगर कहीं कुछ गलत लगे तो... सबसे पहले मुझे बताना।
काजल ने हा में सिर हिलाया।
चाहत ने काजल को गले लगाया और कहा - congratulation
काजल - थैंक्स...नाराज़ तो नहीं है ना तू...
चाहत - बिल्कुल नहीं ... बस खुद का ख्याल रखना ... वो क्या है ना... एक ही मिस्टी है.. मेरे पास ... तुझसे ही तो मेरी लाइफ की स्वीटनेस बरकरार है।।।
काजल हा बोल उससे दूर हुई ।
चाहत - आज चले
काजल - कहा?
चाहत - अपने अड्डे पर ।
काजल - बिल्कुल ।
कोई था जिसका दिल आज टूट चुका था .... वो था अंश। गलती से उसने काजल और चाहत की अनिल को लेकर हुई बात सुन ली थी। उसने खुद को किसी तरह संभाला और क्लास में आकर बैठ गया था।
क्लास का टाइम हो चुका था।
सब क्लास आने लगे। अंश को पता था ये हो सकता है पर फिर भी एक उम्मीद थी उसे। पर शायद वो उम्मीद भी अब टूट चुकी है।
उसे बुरा भी नहीं लग रहा था। बस उसके लिए वो पहला अहसास था।
कभी कभी ऐसा होता है। लोग किसी चीज़ को बस देख के उसे पसंद कर लेते है । उसे अपने पास लाने के बारे में सोचते है ।
उसके साथ रहना चाहते और उसे पाने के लिए हर पॉसिबिलिटी अपनाते है ।
पर जब वो समझ जाते है वो चीज उनके लिए नहीं है तो उसे वो छोड़ भी देते है।
ये कुछ ऐसा था "जैसे की पहली बारिश में मिट्टी का भीग जाना और एक सौंधी खुशबू का आना।" पर ये कुछ ही समय के होता है।
अंश बस उसी खुशबू को लिए क्लास से बाहर आया ।
अपना चेहरा धोया और फिर मुस्कुराते हुए क्लास की ओर
चला गया कहीं ना कहीं उसे पता चल चुका था "पसंद कि चीज को ना पाकर भी खुश रहा जा सकता है।
ये देखते हुए की वह चीज जिसके पास है... इससे वो चीज खुश है ।"
ऐसे ही वो क्लास आया । क्लासेस खत्म हुई सब घर की तरफ निकाल गए।
चाहत हमेशा की तरह अपने साइकिल से उन पपी के पास पहुंची वहा उसे बिस्कटिट्स दे कर उसे सहलाने लगी तभी किसी की एक परछाई वहा से गुजरी। उसे पहले तो समझ नहीं आया। उसने मुड़ के देख तो हर्ष था जो उसे देख रहा था।
चाहत हर्ष को ऐसे अचानक देख थोड़े देर के लिए रुक गई फिर उसने उसे देख कर पूछा।
चाहत - तुम... यहां क्या कर रहे हो?
हर्ष - क्यू मै यहां नहीं आ सकता क्या??
चाहत - नहीं ऐसा नहीं है ... मै तो बस यूं ही ...
हर्ष पापी की तरफ इशारा कर के - ये तुम्हारे है।।
चाहत - नहीं ...
हर्ष - तो फिर ...
चाहत - मतलब
हर्ष - जब ये तुम्हारे नहीं.... तो क्यू हो तुम इनके साथ?
चाहत - हर बार जरूरी नहीं ... जो चीज हमारी हो या हमसे उससे कोई फायदा हो... तभी उसके साथ रहा जाए।
हर्ष कुछ देर के लिए चुप हो गया। फिर मुस्कुरा कर कहा।
हर्ष - शायद तुम ठीक कह रही हो ।
वो बात ही कर रहे थे। तभी एक आवाज़ गूंजी ।
"तू यहां क्या कर रहा है ... "
दोनों आवाज़ की तरफ पलट गए । उस शख्स को देख चाहत के चेहरे पर गुस्सा और हर्ष के चेहरे पर मुस्कान आ गई...
हर्ष - मै चलता हूं । बोल कर मुस्कुराते हुए वहा से चला गया।
उस इंसान ने चाहत का रुख लिया। फिर कहा - ये यहां क्या कर रहा था।
चाहत - मुझे नहीं पता । ये उसने बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा और जाने लगी ।
उसने एक हाथ से चाहत का हाथ थाम उसे रोक लिया।
चाहत - अध्यन .......
हा ये अध्यन था जिसे चाहत और हर्ष ने देखा था।
चाहत मुड़ी और पहले अपने हाथ को फिर अध्यन को देखा ।
अध्यन - सुन तो लो .... कुछ कहना था तुमसे।।
चाहत हाथ छुड़ाते हुए - नहीं सुनना कुछ ... मुझे देर हो रही है...
अध्यन - बस थोड़ी देर...
चाहत उसे देख कर - ठीक है ... पर पहले हाथ छोड़ो।
सुन अध्यन ने उसका हाथ छोड़ दिया ।
अध्यन सामने देखते हुए - हर्ष सही नहीं है...
चाहत उसकी तरफ थोड़े से आश्चर्य से देखने लगी।
अध्यन बात जारी रखते हुए - वो अच्छा लड़का नहीं है... दूर रहना तुम उससे।
चाहत - हम्म... ठीक है .. वो अच्छा नहीं है... तो कौन अच्छा है ... तुम या ....,तुम्हारी वो सोनिया...
चाहत ने बस इतना कहा अध्यन झटके के साथ उसे देखने लगा । चाहत ने भी अपना सिर पकड़ लिया ये उसने क्या कह दिया...
अध्यन कुछ देर चुप रहा फिर बोला - वो दोस्त है मेरी... पापा के फ्रेंड की बेटी ... और मेरे बचपन की दोस्त इससे ज्यादा के कुछ नहीं...
चाहत - नहीं वो... मै ... तो
अध्यन उसके पास आ कर - हा... हा.... मै समझ गया...
चाहत ने जल्दी से कहा - मुझे लेट हो रहा है... मै जाती हूं...
ये कह उसने अपनी साइकिल पकड़ी और वहा से भाग गई।
अध्यन होठो पर मुस्कुराहट लिए उसे देखता रहा और कुछ देर बाद वो भी चला गया।
चाहत का घर
चाहत मुस्कुराते हुए घर आती है घर के बाहर गेट पर किसी बाइक को देख वो दौड़ते हुए घर जाती है....
ये किसकी बाइक थी????
चाहत घर पहुंची .... बाइक को देख वो हैरान हो गई वो बाइक चाहत के पापा की थी ।
चाहत भागते हुए अपने घर के अंदर गई वहा देखा तो शिव जी चाय पी रहे थे।
चाहत उसको देख खुद को रोक ना सकी।
चाहत उनके पास जाकर उनसे गले मिली फिर उसने धीरे से उनके पैर छुए । वो बहुत खुश थी ।
शिव जी पुलिस में थे । उनकी पर्सनैलिटी थी भी दबंग टाइप थी । शांत और सपाट चेहरा सावला रंग और उनके होठ के ऊपर की मुछे उन्हें थोड़ा सा सख्त दिखती थी पर वो थे नहीं । आर्यन और चाहत अपने पापा पर गए थे ।
चाहत के पापा चाहत से - कैसा है मेरा बच्चा।
चाहत - अच्छी हूं ।
पापा - पढ़ाई कैसे चल रहीं है ,?
चाहत - अच्छी ...
चाहत को अपने पास बैठा शिव जी उनसे बात कर रहे थे। चाहत अपने पापा के बहुत करीब थी । अगर उसका बस चलता तो उन्हें कहीं जाने ही ना देती । पर उनका काम यही तो था जिस कारण वो उनको रोक भी नहीं सकती थी।
बहुत दिनों के बाद मिलने के कारण वो उन्हें देख रही थी । और उनकी बातो का जवाब ही दे रही थी।
अपने पापा को देख उसकी आंखे भर आई थी वो बस रोने ही वाली थी तभी आर्यन - दी... हटो ना.... कब से पापा से चिपकी हो मेरा नंबर कब आयेगा....
चाहत अपने पापा से दूर होते हुए - कभी नहीं...
ये बोल उसने एक बार फिर अपने पापा को देखा फिर कहा - और ये मेरे भी पापा है...., जब तक मन ना भरे तब तक मै उनसे चिपकी रहूंगी ....
आर्यन मुंह फुलाए बैठ गया । ये देख चाहत उसके पास बैठी
और बोली - जा सिमरन जा ....जा लग जा गले उनसे.... तू भी क्या याद रखेगी....,
आर्यन मुंह बनाता हुआ उठा और बोला - हम्मम ... आपको याद रखना भी कौन चाहत है ... ये बोल वो भाग गया और शिव जी के गले लग गया।
चाहत गुस्से उसे देखने लगी । अपने शूज उतारते हुए कहती है... हा बड़ा आया।
इतने में रीमा जी चाय का कप लिए आती है और सभी को सर्व करते हुए - चाहत बेटा कार्ड्स आ गए है । तुम देख लो तुम्हे कितने चाहिए।
चाहत - जी मम्मी।
चाहत कार्ड्स देखती है। साथ ही सोचती है कि उसे किन लोगो को कार्ड देना चाहिए....,
वो सोचते हुए रूम आती है । अपना काम पूरा कर रही होती है । उसके घर में आज जश्न का माहौल था उसके पापा जो आए थे।
ये माहौल वो हमेशा मिस करती थी। जब पापा होते थे तो घर में अलग ही चहल पहल होती थी । उनके आने से घर की
रौनक और बढ़ जाती थी।
चाहत ने आर्यन को आवाज़ दी जब वो नहीं आया तो वो खुद उसे बुलाने गई ।
चाहत - आर्यन ... बाबू कहा है...
चाहत ने देखा आर्यन और पापा दोनो कैरम खेल रहे है। चाहत उनके पास गई और कहा।
चाहत कमर में हाथ रख कर - ये आप दोनो क्या कर रहे है...??
आर्यन - दी कुछ खास नहीं ।।। बस बम बना रहे है...
चाहत चौक कर - क्या... बम
आर्यन चाहत को देखते हुए - हा सोच तो रहे है... एक आपके स्कूल में और एक मेरे स्कूल में फोड़ देते है... बताओ कैसा आइडिया है...
चाहत के बोलने से पहले शिव जी बोले - अरे .... टू गुड.... मै तुम दोनों की पूरी हेल्प करूंगा... वैसे ये करना कब है... ??
चाहत ने दोनो को घुरा और कहा - पापा इसका तो हमेशा का है .... पर अब आप भी शुरू हो गए ।।
चाहत आर्यन को देख कर - और तू .... उठ अभी
आर्यन - पर क्यू...???
चाहत। - क्युकी .... तुझे तेरा होमवर्क करना है.... चल अब।।।
आर्यन का चेहरा उतर गया । तो वो शिव जी की तरफ देख कर हेल्प मांगने लगा। शिव जी कुछ बोलने ही वाले थे उससे पहले चाहत बोली।
चाहत - पापा इसका होमवर्क हो जाने के बाद ... आप इसके साथ खेल लेना।... मै भी आऊंगी आपके साथ खेलने.... पर अभी इसका होमवर्क जरूरी है.... नहीं तो कल ये स्कूल भी नहीं जाएगा।
अब शिव जी के पास भी कोई तर्क नहीं बचा उन्होंने हार मान कर आर्यन को देखा जो चाहत के साथ जाने लगा।
शिव जी ने देखा दोनो पढ़ने में बिज़ी है तो वो किचन की तरफ चले गए जहा रीमा जी कुछ मसाले पीस रही थी। शिव जी ने उन्हें देखा। वो उनको एकटक देख रहे थे।
आखिर वो भी दूर रहते थे उनसे और उनके पास ये ही समय
था जो उनको सुकून दे सकता था।
वो उनके करीब आए और खुद बाकी की सब्जी धोने लगे । फिर कड़ाई निकाल छौका लगा कर दाल फ्राई किया । और साथ साथ बाकी काम करने लगे।
चाहत पानी लेने किचन आई तो पाया उसके पापा और मम्मी दोनो मिल कर काम कर रहे थे। ये उसके लिए नई बात नहीं थी । उसने बचपन से अपने पापा और मम्मी को एक दूसरे की मदद करते हुए देखा था।
उसे ये चीज पसंद थी। जहा दूसरे घरों में लोग लड़का लड़की में भेद करते थे वहीं चाहत की फैमिली ऐसी ना थी। सब को सामान्य मानती थी। उन्होंने कभी भी आर्यन और चाहत में कोई फर्क नहीं समझा था।
उसने पानी पिया और बाहर चले आईं थोड़ी देर में चाहट पर आर्यन का होमवर्क हुआ और वो दोनो एक साथ बाहर आए। मम्मी पापा को आवाज़ दी वो दोनो भी आ गए । सब वहीं बैठ कर कैरम खेलने लगे।
हमेशा की तरह आज भी आर्यन और शिव जी की टीम जीत गई थी। चाहत मुंह फुला कर बैठ गई थी।
तभी रीमा जी ने घड़ी देखा जो 9 बजने का इशारा कर रही थी। उन्होंने कहा बाकी कल अभी खाना खा लो।
सबने खाना खाया। चाहत और आर्यन सो गए।
शिव जी रूम में आए तो रीमा जी उनको देख रही थी फिर एकदम से उनके गले लग गईं।
शिव जी उनका सिर सहला रहे थे। और वो उनके गले लगी रही थी। हर औरत जो अपने पति से दूर हो.... तो उसका भी यही हाल होता है जो इस वक़्त रीमा की का था।
रीमा जी - उनसे गले लगे हुए,... बहुत याद करती हूं आपको....
शिव जी - मै भी।
रीमा जी - एक दिन भी बात ना हो तो नींद नहीं आती...
शिव जी - मुझे भी।
रीमा जी - पता है ... आपको याद ना करने के लिए मै अपने आप को काम में बिज़ी रखती हूं।....
शिव जी उनको अपने पास बिठा लिया और कहा - अब तो सामने हूं अब बात कर लो।
रीमा जी ने देखा शिव जी उनके पास बैठे थे। थोड़े देर के लिए तो उनको समझ नहीं आया फिर जब रीमा जी ने देखा शिव जी उनको प्यार से देख रहे है ।
तो वो सब भूल उनकी आंखो में खो गई।
चाहत का घर
चाहत ने अपना रोज़ का काम किया । नहाकर आईं तो उसकी नजर रुमाल पर पड़ी जो अध्यन की थी। उस रुमाल को उसने धो कर साफ़ किया। उसे सूखा कर अपने बेग में रखा । एक बार फिर अध्यन का ख्याल उसका दिल को धड़का गया।
स्कूल में
चाहत क्लास आईं उसने देखा अध्यन उसे ही देख रहा था । वो उसके पास जाती उससे पहले ही कोई लड़की दौड़ती हुई आईं और उसके गले लग गई।
चाहत जहा थी वहीं रुक गई...
कौन है ये?
स्कूल क्लासरूम
चाहत जहा थी वहीं जम गई । वो एकटक उन दोनों को देखने लगी ।
वो लड़की अध्यन के गले लगे हुए थी । अध्यन ने उसे देखा फिर लड़की से कहा - सोनिया...
सोनिया - हा ।।
अध्यन - तुमसे कितनी बार कहा है.... ऐसे क्लास में ये सब नहीं करते...
सोनिया - जानती हूं... पर इतने दिन बाद तुमसे मिली.... ना तो खुद को रोक नहीं पाई ।
अध्यन ने उसके सिर पर थपकी दी फिर उसे लेकर क्लास से
बाहर चला गया ।
चाहत जैसे जम ही गई इतने में काजल आईं और उसे कहा - कहा खोई है...
चाहत - कहीं नहीं ...
काजल - तो ऐसे बीच रास्ते में क्यू खड़ी है...
चाहत वहा से हट अपने डेस्क पर चले जाती है।
प्रेयर बेल बजी तो सब थे बस अध्यन नहीं था । चाहत की नज़र बाहर ही थी पर वो उसे नहीं दिखा । प्रेयर लाइन में उसे सोनिया दिखी जो कि अभी भी अध्यन के साथ बातो में लगी थीं । ये देख चाहत को बहुत बुरा लगा पर वो समझ ही नहीं पा रही थी उसे बुरा क्यू लग रहा है।
क्लास में जब वो पहुंची तो भी सोनिया उसकी सीट पर बैठी थी ।
जब चाहत वहा पर आईं तो अध्यन ने सोनिया को वहा से जाने को कहा और चाहत के साथ बैठ गया ।
क्लास में टीचर आए और पढ़ने लगे ।
सर - सो सॉल्व दिस इक्वेशन...
सर ने चाहत को देखा जिसका ध्यान नहीं था तो सर ने उसे जोर से पुकारा चाहत....
चाहत डर गई और अपनी जगह पर खड़ी हो गई ।
सर - ध्यान कहा है... तुम्हारा...सॉल्व करो इस इक्वेशन को ।
ये सुन चाहत गुस्से में उठी और ब्लैक बोड में जाकर इक्वेशन सॉल्व करने लगी । आंसर आ जाने के बाद वो रुकीं। सब उसे देख रहे थे।
सर ने पहली बार उसे इतने गुस्से में देखा था। वो उसे कुछ नहीं बोले । वो अपनी जगह पर बैठ गई।
अध्यन ने उसे देखा। उसे भी समझ नहीं आया कि हुआ क्या जो चाहत इतने गुस्से में है।
क्लासेस अपने हिसाब से चल रही थी काजल और अध्यन दोनो चाहत के बिहेवियर को देख हैरान थे।
सोनिया ने अध्यन को देखा और आंख मार दी । अध्यन मुस्कुराकर फिर अपना काम करने लगा। ये सब चाहत ने
देखा तो उसे और गुस्सा आ गया।
चाहत अपने में ही बड़बड़ाए जा रही थी ।
चाहत - अभी भी उसे ही देख रहा है । .. ये नहीं कि पूछ लू ... चाहत क्या हुआ...लेकिन नहीं,....कहा फर्क पड़ता है.... रहे अपनी सोनिया के साथ ... मुझे क्या..
अध्यन सोचता है पुछू या नहीं फिर हिम्मत कर के चाहत को पुकारता है ।
अध्यन बड़े प्यार से - चाहत
चाहत उतने ही गुस्से से बोलती है - क्या है?
अध्यन - वो... तुम ... तुम गुस्सा ... मेरा मतलब वो...
चाहत - ये वो ... वो क्या लगा रखा है। .... साफ़ साफ़ कहो...
तभी लंच की बेल बजती है और चाहत कहती है।
चाहत - मुझे जाना है लंच करने तो मै तुमसे बाद में बात करती हूं । तुम जाओ ... अपनी सोनिया से बाते करो ... उसके सामने वो ... वो....करो समझे ।
ये सब बोल चाहत पैर पटकते हुए निकाल जाती है।
अध्यन बिना कुछ समझे सोचता है मैंने क्या किया ,?
तभी पीछे से सोनिया आती है और उसे अपने साथ लंच
करने बोलती है।
लंच हो जाने के बाद वो सोनिया के साथ बात कर ही रहा होता है तभी उसकी नज़र पास में खड़े काजल और चाहत पर पढ़ती है वो सोनिया को बाय बोल । उनके पास जाता है।
उसे पास आता देख चाहत काजल से चलने को कहती है और वो दोनो क्लास आ जाते है । अध्यन वहीं खड़ा होकर उन दोनों को देखते रह जाता है उसे समझ ही नहीं आता की हुआ क्या है चाहत को??
इधर क्लास में आकर चाहत एक गहरी सांस लेती है। और काजल को देखती है जो उसे देख रही होती है।
काजल उसे अजीब सी नजरो से देखती हैं।
काजल - ये क्या कर रही है तू???
चाहत - मै ... मैंने क्या किया?
काजल - तू बन मत ।
चाहत - मै कहा बन रही हूं ।
काजल - ये क्या हरकत है फिर...
चाहत - क्या ... कुछ भी तो नहीं .. तू क्या बोल रही है... मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा।
काजल चाहत को बोली तो तू ऐसे नहीं बताएगी।
ये बोल के उसने चाहत को पकड़ा और गुदगुदी करने लगी । दोनों क्लास में एक दूसरे को गुदगुदी कर रहे थे । वो तो लंच टाइम था नहीं तो आज उनकी खैर नहीं होती । दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को तंग कर रही थी । और जब थक गई तो बेंच पर बैठ कर गई फिर एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखते है।
काजल - तू अध्यन को इग्नोर कर रही है ।
चाहत नज़रे चुराते हुए - नहीं तो
काजल - अच्छा।
चाहत उसे देखते हुए हा बस कहने ही वाली थी तभी काजल को देख वो चुप हो गई । काजल हाथ बांध कर खड़ी हुई थी फिर उसने कहा - तू उसे सोनिया के वजह से इग्नोर के रही है ना।
चाहत ने हा में सिर हिलाया।
काजल - क्यू?
चाहत अब क्या कहे क्युकी उसे खुद समझ नहीं आ रहा था । कुछ सोच के उसने कहा।
चाहत - अरे यार वो अपने दोस्त के साथ था... उस सोनिया के साथ तो... मैंने सोचा .... क्यों उनके बीच आऊ
इसीलिए ...
काजल - अच्छा.... वैसे तुझे नहीं लगता ये मि. अध्यन कुछ ज्यादा ही ध्यान नहीं दे रहे तुझ पर...
ये बोल कर उसने चाहत को आंख मारी । तो चाहत उसके पीछे भागी और बोली रुक तुझे... मै बताती हूं कौन किसके पीछे ध्यान दे रहा है ।... रुक तू....
कुछ देर बाद जब दोनों शांत हुए तो काजल ने कहा।
काजल - कुछ कहूं।।
चाहत - हा बोल ना ...
काजल - मुझे कुछ दिनों से एक बात फील हो रही ।
चाहत उसकी तरफ देखते हुए - अब घुमा मत बोल ना।
काजल - मुझे ... वो मुझे लगता है...
चाहत - क्या लगता है...
काजल - शायद .... वो
चाहत हाथ दिखाते हुए - अब नहीं बोली ना तो कान के नीचे लगाऊंगी।
काजल ने आंख बंद की और बोली - मुझे अनिल ने परपोज किया है।
काजल कुछ देर तक वैसे ही थी । उसने आंख खोल कर देखा तो पाया।
चाहत कुछ सोच रही है।
ये देख काजल ने उसे कहा - क्या हुआ ?
चाहत ने एक गहरी सांस ली और कहा - क्या तू भी उसे?
काजल ने एकदम से कहा - नहीं । वो .. मै एक्चुअली।
चाहत उसका हाथ अपने हाथ में लेकर - देख वो बुरा नहीं है पर ... लड़कियों के बारे में उसका रिकॉर्ड खराब है... वो किसी भी लड़की के साथ अच्छे से नहीं रहा है...
इतना बोलते ही काजल बोल पड़ी - मैंने उसे हा नहीं कहा है।... मै... वो बोल ही रही थी तभी
चाहत - तूने उसे हा कह दिया है ... तेरे चेहरे पर ही दिख रहा है।
काजल अब चुप हो गई । उसे पता था कि चाहत से वो कुछ नहीं छुपा सकती। उसने सिर झुका दिया।
चाहत - तू रह उसके साथ ... बस अगर कहीं कुछ गलत लगे तो... सबसे पहले मुझे बताना।
काजल ने हा में सिर हिलाया।
चाहत ने काजल को गले लगाया और कहा - congratulation
काजल - थैंक्स...नाराज़ तो नहीं है ना तू...
चाहत - बिल्कुल नहीं ... बस खुद का ख्याल रखना ... वो क्या है ना... एक ही मिस्टी है.. मेरे पास ... तुझसे ही तो मेरी लाइफ की स्वीटनेस बरकरार है।।।
काजल हा बोल उससे दूर हुई ।
चाहत - आज चले
काजल - कहा?
चाहत - अपने अड्डे पर ।
काजल - बिल्कुल ।
कोई था जिसका दिल आज टूट चुका था .... वो था अंश। गलती से उसने काजल और चाहत की अनिल को लेकर हुई बात सुन ली थी। उसने खुद को किसी तरह संभाला और क्लास में आकर बैठ गया था।
क्लास का टाइम हो चुका था।
सब क्लास आने लगे। अंश को पता था ये हो सकता है पर फिर भी एक उम्मीद थी उसे। पर शायद वो उम्मीद भी अब टूट चुकी है।
उसे बुरा भी नहीं लग रहा था। बस उसके लिए वो पहला अहसास था।
कभी कभी ऐसा होता है। लोग किसी चीज़ को बस देख के उसे पसंद कर लेते है । उसे अपने पास लाने के बारे में सोचते है ।
उसके साथ रहना चाहते और उसे पाने के लिए हर पॉसिबिलिटी अपनाते है ।
पर जब वो समझ जाते है वो चीज उनके लिए नहीं है तो उसे वो छोड़ भी देते है।
ये कुछ ऐसा था "जैसे की पहली बारिश में मिट्टी का भीग जाना और एक सौंधी खुशबू का आना।" पर ये कुछ ही समय के होता है।
अंश बस उसी खुशबू को लिए क्लास से बाहर आया ।
अपना चेहरा धोया और फिर मुस्कुराते हुए क्लास की ओर
चला गया कहीं ना कहीं उसे पता चल चुका था "पसंद कि चीज को ना पाकर भी खुश रहा जा सकता है।
ये देखते हुए की वह चीज जिसके पास है... इससे वो चीज खुश है ।"
ऐसे ही वो क्लास आया । क्लासेस खत्म हुई सब घर की तरफ निकाल गए।
चाहत हमेशा की तरह अपने साइकिल से उन पपी के पास पहुंची वहा उसे बिस्कटिट्स दे कर उसे सहलाने लगी तभी किसी की एक परछाई वहा से गुजरी। उसे पहले तो समझ नहीं आया। उसने मुड़ के देख तो हर्ष था जो उसे देख रहा था।
चाहत हर्ष को ऐसे अचानक देख थोड़े देर के लिए रुक गई फिर उसने उसे देख कर पूछा।
चाहत - तुम... यहां क्या कर रहे हो?
हर्ष - क्यू मै यहां नहीं आ सकता क्या??
चाहत - नहीं ऐसा नहीं है ... मै तो बस यूं ही ...
हर्ष पापी की तरफ इशारा कर के - ये तुम्हारे है।।
चाहत - नहीं ...
हर्ष - तो फिर ...
चाहत - मतलब
हर्ष - जब ये तुम्हारे नहीं.... तो क्यू हो तुम इनके साथ?
चाहत - हर बार जरूरी नहीं ... जो चीज हमारी हो या हमसे उससे कोई फायदा हो... तभी उसके साथ रहा जाए।
हर्ष कुछ देर के लिए चुप हो गया। फिर मुस्कुरा कर कहा।
हर्ष - शायद तुम ठीक कह रही हो ।
वो बात ही कर रहे थे। तभी एक आवाज़ गूंजी ।
"तू यहां क्या कर रहा है ... "
दोनों आवाज़ की तरफ पलट गए । उस शख्स को देख चाहत के चेहरे पर गुस्सा और हर्ष के चेहरे पर मुस्कान आ गई...
हर्ष - मै चलता हूं । बोल कर मुस्कुराते हुए वहा से चला गया।
उस इंसान ने चाहत का रुख लिया। फिर कहा - ये यहां क्या कर रहा था।
चाहत - मुझे नहीं पता । ये उसने बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा और जाने लगी ।
उसने एक हाथ से चाहत का हाथ थाम उसे रोक लिया।
चाहत - अध्यन .......
हा ये अध्यन था जिसे चाहत और हर्ष ने देखा था।
चाहत मुड़ी और पहले अपने हाथ को फिर अध्यन को देखा ।
अध्यन - सुन तो लो .... कुछ कहना था तुमसे।।
चाहत हाथ छुड़ाते हुए - नहीं सुनना कुछ ... मुझे देर हो रही है...
अध्यन - बस थोड़ी देर...
चाहत उसे देख कर - ठीक है ... पर पहले हाथ छोड़ो।
सुन अध्यन ने उसका हाथ छोड़ दिया ।
अध्यन सामने देखते हुए - हर्ष सही नहीं है...
चाहत उसकी तरफ थोड़े से आश्चर्य से देखने लगी।
अध्यन बात जारी रखते हुए - वो अच्छा लड़का नहीं है... दूर रहना तुम उससे।
चाहत - हम्म... ठीक है .. वो अच्छा नहीं है... तो कौन अच्छा है ... तुम या ....,तुम्हारी वो सोनिया...
चाहत ने बस इतना कहा अध्यन झटके के साथ उसे देखने लगा । चाहत ने भी अपना सिर पकड़ लिया ये उसने क्या कह दिया...
अध्यन कुछ देर चुप रहा फिर बोला - वो दोस्त है मेरी... पापा के फ्रेंड की बेटी ... और मेरे बचपन की दोस्त इससे ज्यादा के कुछ नहीं...
चाहत - नहीं वो... मै ... तो
अध्यन उसके पास आ कर - हा... हा.... मै समझ गया...
चाहत ने जल्दी से कहा - मुझे लेट हो रहा है... मै जाती हूं...
ये कह उसने अपनी साइकिल पकड़ी और वहा से भाग गई।
अध्यन होठो पर मुस्कुराहट लिए उसे देखता रहा और कुछ देर बाद वो भी चला गया।
चाहत का घर
चाहत मुस्कुराते हुए घर आती है घर के बाहर गेट पर किसी बाइक को देख वो दौड़ते हुए घर जाती है....
ये किसकी बाइक थी????
चाहत घर पहुंची .... बाइक को देख वो हैरान हो गई वो बाइक चाहत के पापा की थी ।
चाहत भागते हुए अपने घर के अंदर गई वहा देखा तो शिव जी चाय पी रहे थे।
चाहत उसको देख खुद को रोक ना सकी।
चाहत उनके पास जाकर उनसे गले मिली फिर उसने धीरे से उनके पैर छुए । वो बहुत खुश थी ।
शिव जी पुलिस में थे । उनकी पर्सनैलिटी थी भी दबंग टाइप थी । शांत और सपाट चेहरा सावला रंग और उनके होठ के ऊपर की मुछे उन्हें थोड़ा सा सख्त दिखती थी पर वो थे नहीं । आर्यन और चाहत अपने पापा पर गए थे ।
चाहत के पापा चाहत से - कैसा है मेरा बच्चा।
चाहत - अच्छी हूं ।
पापा - पढ़ाई कैसे चल रहीं है ,?
चाहत - अच्छी ...
चाहत को अपने पास बैठा शिव जी उनसे बात कर रहे थे। चाहत अपने पापा के बहुत करीब थी । अगर उसका बस चलता तो उन्हें कहीं जाने ही ना देती । पर उनका काम यही तो था जिस कारण वो उनको रोक भी नहीं सकती थी।
बहुत दिनों के बाद मिलने के कारण वो उन्हें देख रही थी । और उनकी बातो का जवाब ही दे रही थी।
अपने पापा को देख उसकी आंखे भर आई थी वो बस रोने ही वाली थी तभी आर्यन - दी... हटो ना.... कब से पापा से चिपकी हो मेरा नंबर कब आयेगा....
चाहत अपने पापा से दूर होते हुए - कभी नहीं...
ये बोल उसने एक बार फिर अपने पापा को देखा फिर कहा - और ये मेरे भी पापा है...., जब तक मन ना भरे तब तक मै उनसे चिपकी रहूंगी ....
आर्यन मुंह फुलाए बैठ गया । ये देख चाहत उसके पास बैठी
और बोली - जा सिमरन जा ....जा लग जा गले उनसे.... तू भी क्या याद रखेगी....,
आर्यन मुंह बनाता हुआ उठा और बोला - हम्मम ... आपको याद रखना भी कौन चाहत है ... ये बोल वो भाग गया और शिव जी के गले लग गया।
चाहत गुस्से उसे देखने लगी । अपने शूज उतारते हुए कहती है... हा बड़ा आया।
इतने में रीमा जी चाय का कप लिए आती है और सभी को सर्व करते हुए - चाहत बेटा कार्ड्स आ गए है । तुम देख लो तुम्हे कितने चाहिए।
चाहत - जी मम्मी।
चाहत कार्ड्स देखती है। साथ ही सोचती है कि उसे किन लोगो को कार्ड देना चाहिए....,
वो सोचते हुए रूम आती है । अपना काम पूरा कर रही होती है । उसके घर में आज जश्न का माहौल था उसके पापा जो आए थे।
ये माहौल वो हमेशा मिस करती थी। जब पापा होते थे तो घर में अलग ही चहल पहल होती थी । उनके आने से घर की
रौनक और बढ़ जाती थी।
चाहत ने आर्यन को आवाज़ दी जब वो नहीं आया तो वो खुद उसे बुलाने गई ।
चाहत - आर्यन ... बाबू कहा है...
चाहत ने देखा आर्यन और पापा दोनो कैरम खेल रहे है। चाहत उनके पास गई और कहा।
चाहत कमर में हाथ रख कर - ये आप दोनो क्या कर रहे है...??
आर्यन - दी कुछ खास नहीं ।।। बस बम बना रहे है...
चाहत चौक कर - क्या... बम
आर्यन चाहत को देखते हुए - हा सोच तो रहे है... एक आपके स्कूल में और एक मेरे स्कूल में फोड़ देते है... बताओ कैसा आइडिया है...
चाहत के बोलने से पहले शिव जी बोले - अरे .... टू गुड.... मै तुम दोनों की पूरी हेल्प करूंगा... वैसे ये करना कब है... ??
चाहत ने दोनो को घुरा और कहा - पापा इसका तो हमेशा का है .... पर अब आप भी शुरू हो गए ।।
चाहत आर्यन को देख कर - और तू .... उठ अभी
आर्यन - पर क्यू...???
चाहत। - क्युकी .... तुझे तेरा होमवर्क करना है.... चल अब।।।
आर्यन का चेहरा उतर गया । तो वो शिव जी की तरफ देख कर हेल्प मांगने लगा। शिव जी कुछ बोलने ही वाले थे उससे पहले चाहत बोली।
चाहत - पापा इसका होमवर्क हो जाने के बाद ... आप इसके साथ खेल लेना।... मै भी आऊंगी आपके साथ खेलने.... पर अभी इसका होमवर्क जरूरी है.... नहीं तो कल ये स्कूल भी नहीं जाएगा।
अब शिव जी के पास भी कोई तर्क नहीं बचा उन्होंने हार मान कर आर्यन को देखा जो चाहत के साथ जाने लगा।
शिव जी ने देखा दोनो पढ़ने में बिज़ी है तो वो किचन की तरफ चले गए जहा रीमा जी कुछ मसाले पीस रही थी। शिव जी ने उन्हें देखा। वो उनको एकटक देख रहे थे।
आखिर वो भी दूर रहते थे उनसे और उनके पास ये ही समय
था जो उनको सुकून दे सकता था।
वो उनके करीब आए और खुद बाकी की सब्जी धोने लगे । फिर कड़ाई निकाल छौका लगा कर दाल फ्राई किया । और साथ साथ बाकी काम करने लगे।
चाहत पानी लेने किचन आई तो पाया उसके पापा और मम्मी दोनो मिल कर काम कर रहे थे। ये उसके लिए नई बात नहीं थी । उसने बचपन से अपने पापा और मम्मी को एक दूसरे की मदद करते हुए देखा था।
उसे ये चीज पसंद थी। जहा दूसरे घरों में लोग लड़का लड़की में भेद करते थे वहीं चाहत की फैमिली ऐसी ना थी। सब को सामान्य मानती थी। उन्होंने कभी भी आर्यन और चाहत में कोई फर्क नहीं समझा था।
उसने पानी पिया और बाहर चले आईं थोड़ी देर में चाहट पर आर्यन का होमवर्क हुआ और वो दोनो एक साथ बाहर आए। मम्मी पापा को आवाज़ दी वो दोनो भी आ गए । सब वहीं बैठ कर कैरम खेलने लगे।
हमेशा की तरह आज भी आर्यन और शिव जी की टीम जीत गई थी। चाहत मुंह फुला कर बैठ गई थी।
तभी रीमा जी ने घड़ी देखा जो 9 बजने का इशारा कर रही थी। उन्होंने कहा बाकी कल अभी खाना खा लो।
सबने खाना खाया। चाहत और आर्यन सो गए।
शिव जी रूम में आए तो रीमा जी उनको देख रही थी फिर एकदम से उनके गले लग गईं।
शिव जी उनका सिर सहला रहे थे। और वो उनके गले लगी रही थी। हर औरत जो अपने पति से दूर हो.... तो उसका भी यही हाल होता है जो इस वक़्त रीमा की का था।
रीमा जी - उनसे गले लगे हुए,... बहुत याद करती हूं आपको....
शिव जी - मै भी।
रीमा जी - एक दिन भी बात ना हो तो नींद नहीं आती...
शिव जी - मुझे भी।
रीमा जी - पता है ... आपको याद ना करने के लिए मै अपने आप को काम में बिज़ी रखती हूं।....
शिव जी उनको अपने पास बिठा लिया और कहा - अब तो सामने हूं अब बात कर लो।
रीमा जी ने देखा शिव जी उनके पास बैठे थे। थोड़े देर के लिए तो उनको समझ नहीं आया फिर जब रीमा जी ने देखा शिव जी उनको प्यार से देख रहे है ।
तो वो सब भूल उनकी आंखो में खो गई।