अध्यन के पास अब कहने के लिए कुछ नहीं था उसने बस अपना सिर नीचे झुका लिया। तब सोनिया ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा - ख्याल रखना अपना... और अपनी चाहत का... और..
अध्यन ने सिर उठा कर कहा - और...
सोनिया ने कुछ नहीं कहा बस आगे बढ़ी और अध्यन के गले लग गई। अध्यन ने भी उसके सिर पर हाथ रखा और उसे सहलाने लगा।
उस टाइम सारी क्लास उन दोनों को ही देख रही थी। चाहत जो अंश के साथ बात कर रही थी वो भी उसी तरफ देखने लगी। थोड़े देर बाद सोनिया उससे दूर हुई । अध्यन ने देखा उसकी आंखे आंसुओ से भरी हुई थी। उसके चेहरे पर आंसुओ के निशान थे। अध्यन ने हाथ बढ़ा कर सोनिया के आंसु को पोछा । अध्यन ने जैसे ही सोनिया को छुआ
सोनिया ने आंखे बंद कर ली । एक बार फिर उसकी आंखो से आंसु की एक बूंद छलक गई। सोनिया ने आंखे खोल सामने देखा तो अध्यन भी खामोश खड़ा था।
सोनिया ने भरी आंखो के साथ मुस्कुराते हुए कहा - ओय... मुझे ऐसे रोते हुए ... विदा करोगे...
अध्यन ने भी मुस्कुराते हुए - नहीं .. फिर उसने अपना हाथ हटा कर कहा - तुम भी अपना ख्याल रखना... मिस करूंगा तुम्हे..
सोनिया दिल पर हाथ रख कर मजाक कर के बोली - सच में..
अध्यन ने भी मुस्कुराते हुए कहा - तुम्हारी कसम...अब दोनों हसने लगे।
सोनिया अब धीरे धीरे सभी से मिलने लगी और सभी सोनिया को congratulate कर रहे थे। सोनिया भी खुशी खुशी सभी को थैंक्यू बोल रही थीं। ऐसे ही वो चाहत के पास पहुंची और उसने चाहत ने कहा - तुमसे कुछ कहना था... चाहत उसे देखने लगी क्युकी चाहत को समझ ही नहीं आ रहा था वो क्या कहने वाली हैं वो अजीब से एक्सप्रेशन के साथ सोनिया को देखने लगी।
सोनिया ने उसके चेहरे को देखा फिर हस्ते हुए कहा - कुछ खास नहीं बस यही.. तुम बहुत साफ हो.. साफ दिल की हो ... शायद इसीलिए किसी की पसंद बन चुकी हो... ये बोल उसने एक नजर अध्यन को देखा जो बाकी ब्वॉयस के साथ कुछ बात कर रहा फिर चाहत की तरफ देखते हुए कहा - बस उस किसी की जिम्मेदारी है तुम पर .. बस उसका ख्याल रखना...
इतना बोल सोनिया चाहत के करीब आई उसने चाहत का हाथ अपने हाथो में लिया और कहा - वो बहुत चाहता है तुम्हे.. बस बोल नहीं पा रहा .. पर एक बात मै दावे के साथ कह सकती हूं.. उसने तुम्हारे अलावा किसी के बारे में सोचा भी नहीं होगा.. चाहत जो सोनिया को देख रही थी अब उसकी पलकें शर्म से झुक गई थी। जहा उसके चेहरे पर जो अजीब एक्सप्रेशन थे उसकी जगह एक मुस्कान ने ले ली थी।
सोनिया ने फिर मुस्कुराते हुए कहा - उस पागल का ख्याल रखना.. उसे छोड़ कर मत जाना... एक तुम ही हो.. जिसकी वजह से वो यहां तक पहुंच गया है.. अगर तुम उसके साथ रही तो ... तो वो अपने अंदर के रियल टेलेंट को पहचान भी पाएगा...
चाहत ने अब सोनिया को ध्यान से देखा जिसके चेहरे पर अलग चमक थी।
चाहत ने सोनिया को कहा - क्या तुम अध्यन से प्या...
सोनिया उसे रोकते हुए - अरे... पागल हो क्या तुम... नहीं .. मै उससे प्यार नहीं करती ... वो मेरा बेस्ट बड्डी है... फिर थोड़ा रुक कर - बट तुम्हे.. अच्छा हम गले लगे थे इसलिए... अरे नहीं... वो दरअसल बात ये है... हम बचपन से साथ है.. इसलिए दूर जा रहे थे तो... ये हो गया ... तुम ज्यादा ना सोचे .. वो तुम्हारा था.. है... और रहेगा... डोंट वरी...
चाहत फिर मुस्कुरा दी। अब सोनिया आगे बढ़ी ।
वो गेट तक पहुंची फिर उसने एक बार अध्यन को देखा जो गेट के पास खड़ा उसे ही देख रहा था। उसने मुस्कुराते हुए अध्यन को बाय कहा और वहा से चले गई। अध्यन भी उसे जाते हुए देखते रहा। उसने पीछे मूड कर देखा तो चाहत उसके सामने थी। वो चाहत के साथ अपने डेस्क पर आ गया।
अध्यन ने चाहत को देखते हुए कहा - मेरी सबसे पहली दोस्त थी.. मेरा बचपन उसके साथ ही बीता था.. मेरा उससे लड़ना.. उसकी नारियल के पेड़ जैसी चोटी को खींचना.. उसे तंग करना... अब अध्यन के आंखो में नमी के साथ मुस्कुराहट थी।
उसने चाहत की तरफ देखते हुए कहा - हम चाहे जितना
लड़े... पर थोड़ी देर में मिल भी जाते थे... मिस करूंगा उसे मै.. ये बोल अध्यन ने सिर झुका लिया।
चाहत ने अध्यन के हाथो पर हाथ रखा अध्यन ने सिर उठा कर चाहत को देखा तो चाहत ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ा और मुस्कुरा दी। अध्यन ने भी कुछ नहीं कहा वो भी हल्के से मुस्कुरा दिया।
सोनिया क्लास रूम से बाहर जा रही थी।
"सोनिया" तभी किसी की आवाज़ ने उसे रोका। सोनिया ने पलट कर देखा तो हर्ष खड़ा था हर्ष उसके पास भागते हुए आया। वो हाफ रहा था उसने कहा - तुम... तुम जा रही हो... ??
सोनिया ने हर्ष को देखा और मुस्कुराते हुए कहा - हा..
हर्ष - क्यों... मेरा मतलब है... हमारा स्कूल काफी अच्छा है.. तो तुम क्यो..
सोनिया उसे देखते हुए - मेरे पापा चाहते है.. मै वहा पढू.. तो मै उनकी ये विश पूरी कर रही हूं.. ये बोल सोनिया ने अपनी घड़ी देखी और कहा - लेट हो रहा है.. पापा मेरा वेट कर रहे है... ये बोल वो पलट गई और जाने लगी।
तभी हर्ष ने कहा - मत जाओ ना...plz मत जाओ ... तुम्हे
देखे बिना मै.. मै रह नहीं पाऊंगा...
सोनिया चलते चलते रुक गई उसके आंखो से आंसु की एक बूंद उसके आंखो से होकर नीचे गिरी जिसे साफ कर वो पलटी और धीरे धीरे हर्ष की तरफ आई ।
सोनिया हर्ष के सामने आकर - क्यों.. क्यों नहीं रह पाओगे.. पिछले 2 साल से तो रह ही रहे हो ना.. अब क्यों नहीं रह पाओगे... बोलो..ये बोलते हुए सोनिया की आवाज़ भारी हो गई।
हर्ष ने उसकी तरफ हैरानी से देखा तो सोनिया ने कहा - तुम्हे क्या लगा.. मुझे नहीं पता..
अब हर्ष को कुछ समझ नहीं आया कि वो इस बात का क्या जवाब दे। उसने अपनी पलकें झुका ली और नीचे देखने लगा।
सोनिया उसके पास आकर कहा - अब बोलो.. बोल क्यों नहीं रह सकते .. इतने दिन तो बिना बोले रहे ना तुम... अब भी रह लोगे.. ये बोल वो पलट गई।
हर्ष ने पीछे से उसका हाथ पकड़ा और कहा - आई एम् सॉरी... वो मै
सोनिया हाथ झटकते हुए - सॉरी... रियली हर्ष अब भी तुम्हे ये ही कहना है.. दूर तुम गए... मुझे और अध्यन को गलत
समझा
..मुझे खुद से दूर तुमने किया.. और बस सॉरी... क्या ये कहने से सब ठीक हो जायेगा... हर्ष ने फिर सिर झुका दिया सोनिया ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - तुम... तुम रहने दो... मुझे देर हो रही है.. और मै जा रही हूं..
हर्ष उसे देखते हुए - मै मानता हूं.. मैंने तुम्हे और अध्यन को गलत समझा.. तुम्हे दुख पहुंचाया.. मै बस माफी चाहता हूं... वो तो तुम दे ही सकती हो..
सोनिया ने कहा - नहीं .. नहीं मिलेगी माफी... तुम भी दो साल वैसे ही तड़प तड़प कर रहोगे.. जैसे मै तड़पी हूं.. बार बार तुमसे बात करने की कोशिश की ... पर तुम ... तुम नहीं माने.. साल बीत गया फिर चाहत भी आ गई.. पूरी क्लास इस बात से वाकिफ थी.. अध्यन के मन में , दिल में , बस चाहत है.. फिर भी तुमने मुझसे बात करना जरूरी नहीं समझा... हमारे बीच जो भी गलतफहमी उसे ख़तम करना जरूरी नहीं समझा... मैंने सोचा चलो कोई नहीं.. मुझे तुमसे बात करनी चाहिए.. जब भी मौका देख कर तुम्हारे पास आती तुम किसी दूसरी लड़की के करीब चले जाते.. पर मुझसे बात तो क्या .. उस वक़्त मुझे देखना भी जरूरी नहीं समझते थे तुम.. अब रहो ऐसे ही.. उन्हीं के साथ... बहुत शौक था ना इंतज़ार करवाने का.. तो अब करो इंतजार.. ये बोल वो दुबारा मुड़ी और जाने लगीं ।
हर्ष को उसकी गलती का अहसास हो चुका था उसने देखा सोनिया जा रही है तो उसने पीछे से कहा - क्या तुम .. मुझसे प्यार नहीं करती..
सोनिया फिर से एक बार रुक गई उसकी आंखे फिर बहने लगी वो मुड़ना चाहती थी एक बार हर्ष को गले लगा कर कहना चाहती थी कि हा वो भी बहुत प्यार करती है उससे पर वो ये नहीं करेगी उसे पता था अगर वो यहां रुकी तो फिर वो जा नहीं पाएगी।
उसने दोबारा अपने कदमों को आगे बढ़ाते हुए कहा - नहीं... और आगे बढ़ गई।
हर्ष वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखते रहा फिर उसने कहा - पर मै करता हूं.. बहुत करता हूं.. उसने इतना ही कहा और उसकी तरफ देखता रहा । सोनिया नीचे की तरफ चले गई। वो गेट के पास आई जहा उसके पापा उसका इंतज़ार कर रहे थे। हर्ष अपने क्लास के बने गैलरी में खड़े होकर उसे कार में बैठते हुए देख रहा था। उसका मन तो था वो सोनिया को रोक ले पर कैसे रोकता ये आग तो उसकी खुद की लगाई हुई थी । उसने ही गलती की थी अपने प्यार पर विश्वास ना कर के । वो बस कार को देखने लगा। सोनिया कर में बैठी उसने अपनी कार का शीशा ऊपर किया और कार आगे बढ़ गई।
हर्ष उस कार को देखते ही रहा उसे लगा शायद सोनिया उसके पास आए और कह दे कि उसने उसे माफ कर दिया। पर ये होना अब मुश्किल था। वो वहा से क्लास के अंदर आ गया। उसने क्लास में देखा किसी का ध्यान उसकी तरफ नहीं था।
हर्ष ने एक नजर सोनिया के डेस्क पर डाली जो की खाली थी और वो डेस्क भी हर्ष को देख कर हस रही थी।
ऐसे ही उसने पूरी क्लास में देखा फिर उसकी नजर एक डेस्क पर गई जहा अध्यन और चाहत बैठे बात कर रहे थे। हर्ष ने कुछ सोचा और उसके पास गया । अध्यन जो कि चाहत से बात कर रहा था और चाहत भी उसकी बातो का जवाब दे रही थी। तभी उसकी नजर पीछे खड़े हर्ष पर गई । जिसकी आंखो में आंसु थे। अध्यन ने बात को समझते हुए अपने डेस्क से उठ कर बाहर आया। चाहत भी उसके पीछे आ गई। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है। अध्यन ने हर्ष की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ।
हर्ष ने पहले हाथ को देखा फिर वो अध्यन के गले लग गया वैसे ही उसकी आंखो से आंसु गिरने लगे। उसने अध्यन के गले लगे हुए ही कहा - आई एम् सॉरी भाई.. मैंने तुम्हे गलत समझा .. मेरी वजह से तुम्हारी बड्डी तुम से दूर हुई... मुझे
माफ़ कर दो.. कम से कम तुम मुझे माफ़ कर दो..
अध्यन ने हर्ष के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा - इट्स ओके..
चाहत वहीं बैठी हैरानी से उन दोनों को देखती रही...
Continue...
अध्यन और हर्ष को सब ऐसे देख रहे थे मानो कोई अजीब चीज देख ली हो...
अंश सभी को देखते हुए बोला - क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो.. क्या कभी दो लड़के एक दूसरे से गले मिल भी नहीं सकते क्या... सबने उसे ऐसे बोलते सुन अपनी नज़रे हटा ली पर ध्यान अभी भी अध्यन की तरफ ही था।
थोड़ी देर बाद अध्यन और हर्ष अलग हुए तो हर्ष ने अध्यन से
कहा - तुमने मुझे माफ़ किया..?
तो अध्यन ने हा में सिर हिला दिया।
अंश उन दोनों को अलग होते हुए देख कर बोला - अगर तुम दोनों का भरत मिलाप हो गया हो तो.. मै तुम दोनों को ये याद दिलाना चाहता हू की तुम दोनों अभी क्लास में हो.. ओर सब तुम्हे अजीब तरह से देख रहे हैं । अंश के इतना कहते ही हर्ष और अध्यन ने अपनी नज़रे घुमाई तो सभी उन दोनों को अजीब नजरो से देख रहे थे।
चाहत तो अध्यन और हर्ष को मुंह खोले देख रही थी। अध्यन की नजर हर्ष से यू ही बात करते हुए चाहत पर पड़ी तो उसे अपनी ओर घूरता पाकर अध्यन को अजीब लगा पर उसने कुछ कहा नहीं।
वहीं चाहत अध्यन और हर्ष को घुरे जा रही थीं। थोड़े देर में हर्ष वहा से हट कर अपने डेस्क पर आ गया।
अब अध्यन ने फिर से एक नजर चाहत को देखा चाहत का घूरना तो यू ही बरकरार था। अब अध्यन चाहत की तरफ जाने लगा ।
अंश भी अध्यन और हर्ष की बातो के ख़तम होने का ही वेट कर रहा था जैसे ही हर्ष अध्यन के पास से हटा तो अंश
अध्यन की तरफ बढ़ने लगा। अध्यन को खुद की तरफ आता देख अंश खुश हो गया और उसकी तरफ जाने लगा इतनी में ही अध्यन अंश के साइड से निकल कर चाहत के पास चला गया।
ये देख अंश चिढ़ते हुए बोला - मेरी तो किसी को पड़ी ही नहीं है... सब अपना ही देखते है .. ये बोल वो भी अपने डेस्क कर बैठ गया।
इधर अध्यन चाहत के पास पहुंचा तो वो अभी भी अध्यन को घुरे जा रही थी तो अध्यन ने पहले तो कुछ नहीं कहा पर जब अध्यन से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने इरिटेट होते हुए कहा - चाहत .. घूरना बंद करो...
उसकी बात सुन चाहत ने तुरंत कहना शुरू किया - अध्यन वो ..वो हर्ष.. तुम और अध्यन.. तुम दोनों..ऐसे गले मिल रहे थे.. थोड़ी देर पहले हर्ष ने कहा .. उसने तुमसे सोनिया को उससे दूर कर दिया.. पर तुमने ये सब ... मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा..
चाहत ये सब एक सांस में बिना रुके बोले जा रही थी। अध्यन ने जब चाहत को ये सब बोलते देखा तो उसे समझ ही नहीं आया वो क्या करे उसने चाहत का डर से भरा चेहरा
देखा तो उससे रहा नहीं गया उसने अपना एक हाथ चाहत के चेहरे पर रखा जिसके अहसास से ही चाहत चुप हो गई। उसने चाहत के गाल पर हाथ रखे हुए ही कहा - चाहत... शांत .. शांत हो जाओ..
चाहत जो अध्यन के छूने से ही चुप हो गई थी उसकी चुप्पी देख अध्यन ने एक बार फिर पूछा - क्या तुम ठीक हो.. चाहत ने हा में सिर हिला दिया। अध्ययन ने उसे ऐसा करते देख राहत की सांस ली।
अध्यन ने चाहत की बात समझते हुए कहा - तुम..मेरी , हर्ष और सोनिया के बारे में जानना चाहती हो ... राइट.. चाहत ने एक बार फिर हा में सिर हिला दिया।
अध्यन ने अब चाहत को देखा जो अपनी आंखो को बड़ा कर उसके बोलने का वेट कर रही थी। चाहत की काली गहरी काली आंखे जिस और धनी पलको का पहरा.. वो काली आंखे जिनमे वो डूब जाना चाहता था...पर नहीं अभी वक़्त नहीं था उसके डूबने की ...
अध्यन जैसे ही खोने लगा उसने खुद को संभालते हुए कहा - हर्ष जैसा अभी है वो ऐसा पहले नहीं था...
चाहत ने जैसे ही ये सुना वो झटके से अध्यन को देखने लगी । अध्यन ने फिर से अपना सिर पकड़ लिया । अध्यन ने सिर
ऊपर उठा कर भगवान से कहा - उफ्फ ये आंखे भी ना.. क्या करु मै इन आंखो का..
ये सोच उसने चाहत का हाथ अपने हाथो में लिया फिर कहना शुरू किया - हा चाहत हर्ष ऐसा पहले नहीं था.. मेरी मुलाकात हर्ष से पहली बार 8th क्लास में हुई थी। तब वो ऐसा नहीं था... वो बहुत सीधा और प्यारा सा लड़का हुआ करता था.. उसे किसी से कोई मतलब नहीं था .. वो अपने में ही मस्त रहा करता था.. इसी बीच उससे मेरी दोस्ती हो गई.. मेरी सोनिया के साथ शुरू से ही दोस्ती थी ये बात पुरे क्लास को पता थी.. अब तुम तो जानती ही हो.. सोनिया का नेचर कैसा है.. वो कितनी मस्तीखोर है..
ये बोल अध्यन ने बगल में बैठी चाहत को देखा तो चाहत ने भी किसी बच्चे की तरह हा में सिर हिला दिया।
अध्यन ने जब उसे ऐसा करते देखा तो वो चाहत की मासूमियत को देखता ही रह गया उसने अपना सिर ऊपर की तरफ उठा कर मन कहा - इसकी इस मासूमियत को कभी ख़तम मत करना भगवान... इसी पर तो जान देने का दिल करता है...
अध्यन ने इतना कहा तभी चाहत ने आवाज़ लगाई - अध्यन ... अध्यन कहा खो गए..
अध्यन ने खोए हुए अंदाज़ में कहा - तुम में..
चाहत चौकते हुए - क्या...
अध्यन ने कहा - वो... वो.. वो तुम चुप हो गई थी तो मै भी चुप हो गया था..
चाहत ने कहा - अच्छा
अध्यन ने फिर गहरी सांस ली और बात जारी रखते हुए कहा - सोनिया शुरू से ही मस्तीखोर थी.. क्लास में हमेशा मेरे पास आती फिर मुझे सताती.. और अब तो वो हर्ष को भी सताने लगी थी.. मै उसे शुरू से जानता था.. उसकी इन नादानियों से वाकिफ था.. मुझे इन नादानियों से कोई दिक्कत नहीं थी..पर हर्ष वो थोड़ा अजीब महसूस करता था.. फिर धीरे धीरे उसे भी आदत हो गई.. पर सोनिया की नादानियों के साथ.. उसे आदत हो गई थी.. उसकी मुस्कुराहट की.. उसकी अदाओं की..
अब अध्यन हल्के से मुस्कुराते हुए - वो हर्ष को भा गई थी.. जब उसने मुझे बताया कि वो सोनिया को पसंद करता है तब सबसे ज्यादा खुश मै ही हुआ था.. ये बोल वो चाहत की तरफ मुड़ा उसने चहकते हुए कहा - मुझे हर्ष से कोई प्रॉब्लम नहीं थी.. वो मुझे सोनिया के लिए पसंद था.. क्युकी वो काफी अच्छा लड़का था।.. मैंने और हर्ष ने डिसाइड किया .. सोनिया को हर्ष के फीलिंग्स के बारे में बताएंगे.. यानी सोनिया को प्रपोज करेंगे.. पूरी प्लानिंग के साथ दिन तय
हुआ सोनिया का बर्थडे .. हर्ष ने सोनिया को परपोज भी कर दिया... सोनिया ने भी हा कर दिया.. वो क्या है ना.. हर्ष को भी सोनिया पसंद थी.. दोनों रिलेशन शिप में भी आ गए ..पर..
ये बोल अध्यन चुप हो गया तो चाहत ने उसके हाथो को हिलाते हुए पूछा - पर .. पर क्या.. बोलो ना..
अध्यन ने चाहत को देखा जो बच्चों की तरफ उसके हाथो को हिला रही थी । अध्यन ने खीज़ कर कहा - सांस लेने दोगी..
तब चाहत को अपनी गलती का अहसास हुआ उसने अपनी आंखें बंद कर जीभ बाहर निकलते हुए कहा - सॉरी..
अध्यन उसे ऐसे करते देख मुस्कुराते हुए बोला - इट्स ओके...
अध्यन ने फिर से कहना शुरू किया - पर मेरे बर्थडे पर..सोनिया दौड़ कर मेरे पास आई.. मुझे गिफ्ट दिया .. और मुझे गले से लगा लिया.. ये देख कर किसी ने हर्ष के कान भर दिए.. की मै और सोनिया रिलेशन शिप में है .. पर हमने किसी को बताया नहीं है.. हर्ष को ये बात बुरी लग गई.. हर्ष ने उस दिन मुझसे झगड़ा किया.. मेरी बात भी नहीं सुनी.. मुझे और सोनिया को गलत समझ कर.. बुरा भला कहा.. मेरे तक तो ठीक भी था.. पर उसने सोनिया से भी सारे रिश्ते ख़तम कर दिए.. लेकिन सोनिया उसे खोना नहीं
चाहती थी.. उसने हर्ष को मानने की कोशिश की.. हर तरह से वो उसे मानती पर.. हर्ष ने जिद पकड़ ली थी.. वो मना ही नहीं.. थक हार कर सोनिया मेरे पास आती.. रोती .. एक दिन मैंने ही उसे अपनी कसम देकर कह दिया .. की वो अब उसके पास ना जाए.. पर सोनिया ने फिर भी कहा वो कोशिश करते रहेगी..पर..
अध्यन ने इतना कहते ही चाहत ने उसकी आंखो में देखा जिसमें नमी ने जगह ले ली थी उसने उन्ही आंखो के साथ कहा - पर जब उसने हर्ष को दूसरी लड़कियों के साथ देखा तो वह ये सह नहीं पाई.. वो टूट गई .. बिखर गई.. कुछ दिनों के लिए ऐसी सोनिया बन गई.. जिसे कोई नहीं जानता था.. किसी तरह मैंने उसे संभाला.. इसके बाद भी उसने कोशिश की.. पूरे दो साल .. दो साल उसने कोशिश की हर्ष को मानने की..
अब जब अध्यन ने सिर उठा चाहत को देखा तो उसकी भी आंखे नम हो चली थी। और उसके हाथ अध्यन के हाथ पर आ गए थे। अध्यन ने कहा - तुम खुद जानती होगी.. एक लड़की का अपने प्यार को किसी और के साथ देखना कितने दुख की बात है.. अब जब उससे सहन नहीं हुआ तो.. वो
चले गई.. वो चले हमेशा के लिए.. शायद कभी ना आने कर लिए.. ये बोल अध्यन ने सिर झुका लिया।
चाहत की भी आंखे नम हो चली थी.. ये होना लाजमी था क्युकी जब कोई हमारे लिए इंपॉर्टेंट होता है। तो उसे उदास देख अच्छा नहीं लगता । यही अहसास चाहत को महसूस हो रहा था। उसने अध्यन के हाथ पर अपना हाथ रख कर बस इतना ही कहा - सोनिया ने सही किया .. अध्यन ने उसकी बात सुन सिर उठा कर देखा तो चाहत मुस्कुरा दी उसे देख कर अध्यन भी मुस्कुरा दिया।
दिन बीते अध्यन , अंश और चाहत की तिगड़ी ने फिर से धूम मचा दिया । क्लास में सभी उनके दोस्ती से परिचित थे। वो तीनो भी एक दूसरे का साथ पाकर खुश थे। सब अच्छे से हुआ तीनो अब 12th क्लास में आ गए थे।
फिर से बोर्ड क्लास फिर से कड़ी पढ़ाई स्टार्ट हो चुकी थी । तीनो ने अपनी कमर कस ली थी तीनो खूब मेहनत करते थे। तीनो ने प्लान बनाया की वो हर संडे ग्रुप स्टडी करेगे। प्लान के मुताबिक तीनो की ग्रुप स्टडी स्टार्ट हो गई थी।
चुकी चाहत एक लड़की थी तो अंश और अध्यन ने सोचा वो चाहत के घर जाकर पढ़ाई करेंगे। तो तय दिन पर दोनों चाहत के घर जाते थे।
ऐसे ही एक संडे
चाहत के घर की डोर बेल बजी । चाहत भागते हुए घर से बाहर आई उसने दरवाज़ा खोला तो सामने अध्यन खड़ा था मुस्कुराते हुए । चाहत भी उसे देख मुस्कुरा दी तभी चाहत ने पीछे देखा जहा कोई नहीं था।
चाहत ने अध्यन के पीछे नज़रे दौड़ाते हुए पूछा - अंश कहा है..?
अध्यन - वो आज नहीं आ पाएगा..
चाहत - क्यों..??
अध्यन - वो अपने गांव गया है.. उसे कुछ काम था..
अध्यन को चाहत ने दरवाज़े पर ही रोक लिया था। वो बिल्कुल टीचर की तरह उससे क्वेंशन कर रही थी। और अध्यन एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसके सवालों के जवाब दे रहा था।
रीमा जी को बाहर जाना था तो वो बाहर आई उन्होंने देखा चाहत ने अध्यन को बाहर ही रोका हुआ है। रीमा जी ये देख -
चाहत बेटू.. ये क्या तरीका हुआ... उसे अंदर तो बुलाओ.... तुमने तो बेचारे को कैदी की तरह बाहर खड़ा कर दिया है...
रीमा जी की बात सुन चाहत को याद आया कि उसने तो अध्यन को अंदर बुलाया ही नहीं।
उसने अपनी जीभ दांतों तले दबाते हुए कहा - सॉरी... ये बोल चाहत दरवाज़े से हटते हुए कहा - प्लीज कम.. अध्यन चाहत ऐसे करते देख कर मुस्कुरा उठा और अंदर आ गया जैसे ही वो चाहत के पास से गुज़रा तो उसे अजीब तरह की खुशबू महसूस हुई ये चाहत की खुशबू थी। अध्यन थोड़े देर के लिए उस खुशबू में खो सा गया पर जब उसे ख्याल आया कि वो कहा पर है उसने जल्दी ही खुद को संभाल लिया और सोफे पर बैठ गया।
अध्यन ने सोफे पर बैठते ही रीमा जी को नमस्ते किया। रीमा जी ने भी मुस्कुराते हुए अपना सिर हिला दिया।
अब रीमा जी चाहत की तरफ देखते हुए - चाहत मैं मार्केट जा रही हूं... जल्दी आउंगी...
ये बोल उन्होंने अध्यन की तरफ देखा जिसे देख अध्यन मुस्कुरा दिया।
चाहत ने रीमा जी की बात सुन हा में सिर हिला दिया।
अध्यन सोफे पर बैठ गया उसने अपना बेग गोद में रखा और
बुक निकाल कर चाहत को देखने लगा। आज सन्डे था चाहत ने आज अपने लंबे बालों को धोया था और साइड से मांग निकाल कर कुछ बालों कों छोड़ते हुए उसने उन पर कल्च किया था। उसने एक सिम्पल ब्लू कुर्ती और नीचे व्हाइट लैगी पहनी थी। कानो में छोटे ब्लू झुमके और आंखों में काला काजल । बालो की लट हमेशा की तरह चहेरे से होते हुए होठो को छू रही थी। जिस लगी पिंक लिपस्टिक उसके मीडियम साइज होठों को प्यारा बना रही थी।
वो चाहत को देखते हुए सोचने लगा कितनी बदल गई है चाहत अब पहले की तरह नहीं रही थी। वो अब काफी अलग लगती थी इन तीन सालों में उसने खुद पर बहुत काम किया था.. हमेशा दबी दबी रहने वाली चाहत आज कल खुल कर रहा करती थी और ये सब हुआ था अध्यन की वजह से क्युकी एक अध्यन ही था जिसने कभी भी चाहत के बाहरी चिजो पर नहीं उसकी अंदरुनी चीजो पर ध्यान दिया था। जब जब चाहत गिरी थी तब तब उसने उसे सभाला था। उसने उसे ये बताया था भले वो दूसरो कि तरह नहीं थी पर जो भी थी अलग थी और उसके लिए इंपॉर्टेंट थी। अध्यन ने चाहत को खुद से प्यार करना सीखा दिया था।
अब चाहत ने खुद पर ध्यान देना शुरू कर दिया था । सजना संवरना उसे शुरू से ही पसंद नहीं था। इसीलिए आज भी वो
मेकअप ना के बराबर ही करती थी। पर इसके चेहरे से अलग तरह का आकर्षण झलकता था। ये आकर्षण ही अध्यन को आकर्षित करती थीं। बदलाव के बावजूद चाहत में को चीज बरकरार थी वो थी सादगी... अध्यन के लिए उसकी सादगी ही उसकी पहचान थी।
उसकी सादगी ही अध्यन को पसंद थी। चाहत अब वो नहीं थी जिसे अध्यन ने तीन साल पहले साइकिल स्टैंड पर देखा था ये तो अलग ही चाहत थी। चाहत का व्यक्तित्व अब पहले से अलग हो चुका था। सांचे में ढला शरीर , 5'5 इंच की हाइट के साथ चेहरे पर चमक ने भी जगह ले ली थी। अगर कुछ नहीं बदला था तो वो थी चाहत के चेहरे की मुस्कुराहट जिस मुस्कुराहट पर अध्यन आज भी मर मिटने को तैयार था।
बदलाव तो हमारे अध्यन जी में भी हुए थे उनका गोरा रंग काफी खिल गया था। उसके 6 फुट की हाइट , गठीले शरीर और दिलकश आवाज़ ने उनकी पर्सनैलिटी पर चार चांद लगा दिए थे। अध्यन ने भी आज ब्लैक टी शर्ट और ब्लू जींस पहनी थी। टी शर्ट के स्लीव्स से झांकती बाहे.. जिसमें उसके हाथो के पर टी शर्ट के स्लीव्स को जकड़ा हुआ था जिससे टी शर्ट की पकड़ अध्यन के हाथो पर काफी मजबूत दिख रही थी। नए स्टाइल में कटे बाल जिसे बड़े ही सलीके के साथ
सेट कर रखा था । इस पूरे कॉम्बिनेशन में अध्यन जी अलग ही लग रहे थे।
सब कुछ बदल गया था। पर नहीं बदला था तो उनके बीच का प्यार वो अनकहा प्यार जो प्यार जिसकी खुशबू दोनों महसूस करते थे। पर कहने से पता नहीं क्यों कतराते थे। ये इनका इश्क़ था जो दूसरो से अलग था दोनों जानते थे पर पता नहीं क्यों एक दूसरे के सामने मानना नहीं चाहते थे। आंखो ने इजहार तो कर दिया था पर पता नहीं क्यों .. लब अभी भी खामोश थे ।
अध्यन अभी भी वहा बैठ चाहत को देखते हुए यही सोच रहा था । चाहत हा चाहत .. वहीं तो थी उसके जिंदगी में होने वाले हर बदलाव की वजह उसने ही तो उसमे बदलाव लाए थे। उसने ही तो ये सब किया था। वहीं वो वजह थी.. जिसके कारण आज अध्यन इस मुकाम पर था। वरना वो कहा मुश्किल से पास होने वाला लड़का... जिसे किताबो से जरा सा भी प्यार नहीं था.. आज टॉपर था.. ये चाहत के लिए उसका प्यार ही तो था जिसके लिए उसने वो आधी आधी रात तक पढ़ता था क्युकी चाहत उस पर मेहनत कर रही थी और उसकी सफलता देख वो खुश होती थी। कितना अजीब था ना ये .. दोनों ने एक दूसरे से कुछ कहा भी नहीं पर एक दूसरे के लिए बखूबी खुद को बदल दिया था। ये प्यार ही था
जिसने उसे खुद में बदलाव लाने पर मजबूर कर दिया था।
यूंही सोचते हुए एक बार फिर चाहत के बालो की उस नादान लट ने चाहत के होठों को छू लिया ठीक उसी वक़्त अध्यन का ध्यान चाहत के चेहरे पर था। अब अध्यन की नजर ना चाहते हुए भी उन होठों पर ठहर गई।
अध्यन वहीं बैठे एक टक उन होंठो को ही देख रहा था तभी उसके मन से आवाज़ आई - ये क्या कर रहे हो.. अध्यन ऐसे नहीं .. अध्यन ने ये सुन खुद को संभाला और कहा - नहीं।
उसकी इस हरकत पर चाहत ने अध्यन को देखा जो उसे है देख रहा था। चाहत ने जब उसे बुक के साथ देखा तो वो फटाफट अपने रूम के अंदर गई वहा से उसने अपनी बुक्स उठाई और बाहर आ गई। दोनों अब साथ पढ़ने लगे। किसी तरह दोनों ने एक चैप्टर कंप्लीट किया ही था। तभी आर्यन वहा आया। उसके साथ उसके कुछ दोस्त भी थे।
आर्यन अब पहले जैसा क्यूट बेबी नहीं रहा अब वो भी बड़ा हो गया था। उसकी हाइट चाहत की तुलना में काफी बढ़ गई थी लम्बी हाइट सावला रंग सीधा और सपाट चेहरा जिस पर हल्की मुछो ने पहरा कर रखा था उसने ग्रे टी शर्ट और ब्लैक जींस पहनी थी।
आर्यन ने अध्यन को देखा फिर कहा - हेल्लो... अध्यन भैया.. अध्यन ने भी उसे हेल्लो कहा । आर्यन चाहत के पास आकर - दी मेरे दोस्त आ रहे है।
चाहत ने सिर उठा उसे देखते हुए कहा - तो... आर्यन उसकी तरफ देखते हुए - तो आप और भैया रूम जाओ.... मै यहां हूं अपने दोस्तो के साथ..
चाहत ने ये सुन कहा - और मम्मी... उनको क्या बोलेंगे..
आर्यन - दी रिलैक्स ... मम्मी कुछ नहीं बोलेगी... और अगर बोली तो मै बोल दूंगा.. मेरे ही फ्रेंड्स आए थे.... और समझा भी दूंगा...
फिर आर्यन अध्यन की तरफ देखते हुए - भैया आपको कोई प्रोबलम तो नहीं..
अध्यन जो सामने सोफे पर बैठ उनकी बाते सुन रहा था उसने कहा - हा मुझे कोई प्रोबलम नहीं..
वो सोफे से उठ गया चाहत भी सोफे से उठी और उसने बुक्स को उठाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया उससे पहले ही अध्यन ने बुक्स उठा ली फिर आगे बढ़ गया। चाहत ने कुछ नहीं कहा वो बस चलने लगी अब दोनो रूम में आ गए थे...
मैंने सभी से पूछा था मेरी स्टोरी आप सभी को अच्छी लग तो रही हैं ना। तो अपने जो रिप्लाई किए उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया । मैंने अधिकतर लोगो से ये सुना है.... उन्हें स्टोरी अच्छी लग रही हैं। तो मै इसे अब अच्छे से कंप्लीट कर सकती हूं... अब आते है सस्पेंस पर तो वो भी नेक्स्ट पार्ट तक खुल ही जाएगा। अगर आप सभी को स्टोरी में कभी भी कहीं भी कोई भी दिक्कत हो तो आप मुझे बता सकते है। मै बस आपके कॉमेंट्स और सजेशन दोनो का वेट करूंगी ...
चाहत और अध्यन दोनों चाहत के रूम में आ गए थे। चाहत ने अध्यन को खिड़की के पास रखे स्टडी टेबल की तरफ इशारा करते हुए बोली - अध्यन वहा पर बैठ जाओ.. चाहत का इशारा समझ अध्यन टेबल पर बैठ गया। चाहत ने बुक्स बेड के पास रखे और फिर अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - मै आती हु.. अध्यन ने हा में सिर हिला दिया । चाहत नीचे चली गई।
अध्यन ने अपना सिर इधर उधर घुमा कर रूम को देखने लगा। अध्यन पहले भी इस रूम में आ चुका था पर वो तीन साल पहले आया था तो उसे रूम थोड़ा बदला बदला सा ही दिख रहा था। रूम में हर चीज सलीके से रखी हुई थी। बेड पर व्हाइट बेडशीट और व्हाइट तकिये। बेड के ठीक ऊपर चाहत की मुस्कुराती हुई फोटो। लेफ्ट साइड कबर्ड राइट साइड स्टडी टेबल। दूसरी दीवार पर चाहत के बचपन कि
फोटोज। कमरे से जुड़ी हुई बालकनी जिस के आस पास ढेर सारे छोटे पौधों के गमले लगे थे। बालकनी के ठीक ऊपर एक पिंजरा था जिस पर दो छोटे छोटे बर्डस थे जिनकी आवाज़ बड़ी प्यारी थी उनकी आवाज़ सुन कर अध्यन के चेहरे पर स्माइल आ गई। उसने सामने देखा तो रूम में ब्लू और व्हाइट कॉम्बिनेशन के पर्दे लगे हुए थे।
अध्यन ने मुस्कुराते हुए अपने बुक्स उठाए और मैथ्स के क्वेश्चंस को सॉल्व करने लगा । थोड़े देर बाद चाहत रूम में आई तो उसके हाथो में दो प्लेट्स थी। जिनमे पास्ता था। चाहत आगे बढ़ कर अध्यन के ठीक पीछे खड़ी हो गई उसने देखा अध्यन एक क्वेश्चन को कब से सॉल्व करने की कोशिश कर रहा है। पर वो क्वेशन है जो उससे सॉल्व हो ही नहीं रहा।
चाहत ने पास्ता बेड पर रखा फिर अध्यन के ठीक पीछे आ गई उसने अपना एक हाथ टेबल पर रखा और अध्यन की तरफ झुक गई। अध्यन जो इसके लिए तैयार नहीं था। उसने झटके से चाहत की तरफ देखा चाहत के आधे बाल उसके पीठ पर थे और बाकी काधो पर से होते हुए नीचे तक आ रहे थे। अध्यन एकटक चाहत को देखने लगता है।
इससे बेखबर चाहत पेन उठा कर साइड से टेबल खींच उस पर बैठ जाती है। और क्वेश्चन सॉल्व करने लगती है। चाहत
को कंधे पर आ रहे बाल शायद उतने अच्छे नहीं लगते इसीलिए वो उन बालो को झटका देकर पीठ की तरफ कर देती है। जिससे उसका चेहरा साफ साफ दिखाई देने लगता है।
अध्यन जो चाहत को ही देख रहा था अब उसे और करीब से देख पा रहा था। चाहत चेयर पर ठीक उसके बगल में बैठी थी। चेहरे पर उसके छोटे बालो की लटे उड़ उड़ कर आ रहे थे। जिन्हे वो कितनी भी कोशिश कर ले अपने चेहरे से हटा नहीं पा रही थी। वो बार बार उन लटो को कान के पीछे करती पर वो लट वापस उसी जगह पर आ जाती क्युकी वो लटे जिद्दी थी वो इतनी आसानी से उसके चहरे को नहीं छोड़ना चाह रही थी।
अध्यन जो चाहत को ही देख रहा था अब उससे रहा नहीं गया उसने अपनी चेयर चाहत के करीब गया उसने चाहत से बिना कुछ कहे और पूछे उन लट को कान के पीछे कर दिया।
अध्यन के छूटे ही चाहत जैसे जम सी गई उसकी पकड़ हाथ पर रखे पेन पर मजबूत हो गई। चाहत ने अपनी आंखे बंद कर ली फिर थोड़े देर बाद उसे खोल वो मुड़ी और अध्यन की तरफ देखने लगी अध्यन बस चाहत की आंखो में देख रहा था। जिसमे कुछ अलग ही नशा भरा पड़ा था। अध्यन अब
बहकने लगा था।
पहले तो चाहत की करीबी उसके बाद उससे आती भिनी खुशबू। उस पर उम्र ऐसी जिस पर खुद का नियंत्रण ही नहीं होता। अध्यन अब खुद को संभाल नहीं पाया उसने आगे बढ़ चाहत के करीब जाने लगा अब चाहत की धधकने बढ़ने लगी थोड़े देर में चाहत को अपने गले में अध्यन की सांसे महसूस होने लगी। जैसे ही अध्यन गले के पास अपने होठ रखने ही वाला था।
तभी चाहत ने एकाएक घबराई हुई आवाज़ में कहा - अध.. अध्यन..
अध्यन रुक गया चाहत की घबराई हुई आवाज़ से उसे होश आया वो झटके से उठा उसने चाहत को देखा जो उसे ही देख रही थी। चाहत की आंखो में अध्यन ने डर देखा । एक ऐसा डर जिसे देख अध्यन डर गया । वो चाहत के पैरो के पास बैठ गया। उसने चाहत को देखा तो चाहत ने अपनी पलकें झुका दी।
अध्यन को कुछ समझ नहीं आ रहा था उसने हिम्मत कर चाहत को आवाज़ लगाई - चाहत .. चाहत ने कुछ नहीं किया बस अपनी घनी पलको को उठा कर अध्यन की तरफ देखा । उसकी आंखो में डर और एक सवाल था । वो अध्यन से
आंखो आंखो में ही पूछ रही थी - क्या करना चाह रहे थे तुम.. मेरे इतने करीब आकर..
अध्यन ने उसकी आंखो को देख कर मामला समझा फिर जमीन से उठ खड़ा हुआ और अपना बैग उठाते हुए बोला - आई एम सॉरी.. मै घर जा रहा हूं.. ये बोल उसने चाहत की तरफ देखा। वो अभी भी उसी सवाल के साथ अध्यन को देख रही थी अध्यन को अब चाहत की आंखे चुभने लगी उसे लगा अब वो एक पल भी यहां नहीं रुक सकता। फिर अध्यन रूम से बाहर आ गया।
नीचे आर्यन और उसके दोस्त थे आर्यन अध्यन को जाता देख बोला - अध्यन भैया .. आप इतनी जल्दी जा रहे है..
अध्यन ने उसकी बात सुनी पर वो रुका नहीं उसने चलते हुए ही कहा - हा .. वो घर पर कुछ काम है..
ये सुन आर्यन ने हा में सिर हिला दिया पर जैसे ही वो कुछ बोलने को हुआ वैसे ही अध्यन बाहर निकल गया। आर्यन बस उसे जाते हुए देखता रहा ।
तभी मिनी ने आर्यन के कंधो पर हाथ रखा और उसे अपने साथ दोस्तो के पास ले गई।
अध्यन बाहर आया उसने अपनी बाइक की चाबी लगाई और उसे घुमा कर गेट से बाहर जाने लगा अचानक उसकी नजर
चाहत की खिड़की पर पड़ी जहा विंड चाइम के बगल में खड़ी चाहत उसे अजीब नजरो से देख रही थी। अध्यन ने चाहत को देखा फिर अपनी बाइक आगे बढ़ा दी। अध्यन जिन नजरो में हमेशा खो जाया करता था पर आज वो नज़रे अध्यन से सवाल कर रही थी जिसका जवाब उसे पता होते हुए भी वो दे नहीं पा रहा था।
अध्यन के जाते ही चाहत खिड़की से दूर हुई उसकी नजर सामने रखे पास्ता पर पड़ी । उसने अपना सिर झटकते हुए उन प्लेट्स को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया । वो उन प्लेट्स को उठा ही रही थी तभी उसने देखा बेड के नीचे कुछ गिरा है। चाहत ने झुक कर देखा तो वहा एक डायरी थी। चाहत ने डायरी उठाई और उसे बेड पर रख नीचे आ गई।
चाहत ने देखा आर्यन अपने फ्रेंड के साथ बैठा मस्ती कर रहा है तो उसने आर्यन को परेशान करना जरूरी नहीं समझा उसने प्लेट्स किचेन में राखी और अपने रूम आ गई। चाहत ने वहा से सभी बुक्स को हटाया और बेड पर बैठ गई।
तभी उसकी नजर दुबारा उस डायरी पर पड़ी उसने उस डायरी को खोला तो पहले ही पेज पर उसका नाम लिया था । चाहत ने दूसरे पेजेस पलट कर देखे तो उसमे चाहत की एक
फोटोज भी चिपकी थी। अब चाहत एक एक पेज को पलट कर देखती । उसमे लिखे शब्दों को वो पड़ने के बाद छू कर महसूस करती ।
हा ये अध्यन की डायरी थी। वहीं डायरी जिस पर उसने अपने सारे अहसास उकेरे थे। अगर हम कहे उसने इस पर शब्द नहीं अपना दिल ही लिख कर रख दिया था तो ये बात गलत नहीं होगी। चाहत एक एक पेज को पढ़ रही थी। उन पर लिखी बातों को वो पढ़ती कभी हस्ती तो कभी रोती। उसके रोने का कारण था उस डायरी पर लिखे शब्द जो सीधे उसके दिल पर वार कर रहे थे।
चाहत को पहले लगता था कि अध्यन उससे प्यार करता है पर वो उससे इतना प्यार करेगा वो सोच भी नहीं सकती थी। जिस प्यार को वो बस महसूस करती थी अध्यन तो उसे जी रहा था। यही सोच उसकी आंखे रह रह कर नम हो रही थी। ऐसी ही रोते हुए वो सो गई।
शाम को रीमा जी चाहत के रूम आई तो उन्होंने देखा चाहत सोई हुई है । वो चाहत के पास आई उन्होंने चाहत के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा - चाहत बेटू... उठो .. चाहत ने करवट ली फिर सो गई रीमा की ने एक बार फिर आवाज़ लगाई तब
जाकर चाहत उठी। चाहत ने अपनी आंखे मसलते हुए आंखे खोली रीमा जी ने उसकी आंखे देखते हुए पूछा - क्या हुआ.. बेटे.. तबीयत तो ठीक है ना.. तुम्हारी आंखे लाल क्यों है..
चाहत ने रीमा जी की बात सुनी फिर कहा - मै ठीक हूं.. वो सो गई थी.. तो आंखे लाल हो गई होगी.. ये बोल वो उठ गई । रीमा जी भी रूम से बाहर आ गई। चाहत भी बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गई। रात होने लगी चाहत भी रूम से बाहर आई रीमा जी ने देखा चाहत आज चुप चुप थी सब डायनिंग टेबल पर बैठे थे फिर भी वो ज्यादा बोल नहीं रही थी।
रीमा जी ने देखा चाहत चम्मच को घुमाए जा रही थी रीमा जी ने देखा तो कहा - क्या हुआ.. चाहत
चाहत ने सिर उठा कर रीमा जी को देखा तो रीमा जी ने एक बार फिर अपना सवाल दोहराते हुए पूछा - क्या हुआ.. बोलो
चाहत ने तुरंत कहा - कुछ नहीं मम्मी.. अभी थोड़ा थक गई हूं तो..
रीमा जी ने भी उसकी बातो को समझते हुए हा में सिर हिला दिया। थोड़ी देर बाद सबने खाना ख़तम किया और अपने अपने रूम में चले गए। वहीं चाहत अपने रूम की खिड़की के
पास खड़े होकर विंड चाइम को ही देख रही थीं ।
उसे रह रह कर अध्यन का चेहरा याद आ रहा था। स्टडी टेबल पर रखी अध्यन के डायरी के पन्ने हवा में उड़ उड़ कर फड फड़ा रहे थे। अब जब चाहत गहराई से सोच रही थी तो उसे सारी बाते समझ में आ रही थी।
आज जो हुआ या होने वाला था वो क्यों हुआ.. वो समझ चुकी थी..आज जो भी चीज़े हुई .. वो वासना में लिप्त कोई गलत चीज नहीं थी.. वो बस एक पल था.. जिस पर ना अध्यन का बस चला.. ना ही चाहत का.. क्युकी चाहत ये बात समझ चुकी थी .. की वो भी अध्यन की तरफ झुकने लगी थी.. जब अध्यन उसके करीब आया था.. तो उसने अध्यन को रोका नहीं था..,शायद उसका दिल पहले ही अध्यन को वो जगह दे चुका था.. जिसकी खबर उसे नहीं थी.. उसे अब अध्यन की सिचुएशन समझ आ रही थी।
चाहत ने डायरी के पेजेस को पलट कर अपने पेन लेकर लास्ट पेज पर लिखा ..
अध्यन..
आज जो भी हुआ.. उसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं थी... तुम खुद को दोषी मत समझो... ये एक पल था.. जिस पर ना तुम्हारा बस चला .. और ना मेरा.. पर आज एक बात समझ आ गई... हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने है..सब जानते हुए भी मै ... आज तक इस सच से मै दूर भाग रही थी... पर अब ... अब नहीं.. बोर्ड एग्जाम के बाद मै तुमसे मिलना चाहती हूं... तुम्हारे जज़्बात जानना चाहती हूं... और खुद के एहसासों से तुम्हे रूबरू करवाना चाहती हूं.. तो लास्ट एग्जाम के बाद वहीं मिलना.. जहा हम हमेशा मिलते थे.. मै तुम्हारा वहीं इंतज़ार करूंगी...
चाहत ने इतना लिख डायरी बंद कर ली उसने उस डायरी को पहले अपने माथे से लगाया फिर चूम कर बैग में रख दिया। इतना कर वो पीछे पलटी उसने देखा सामने लगी विंड चाइम बाहर चल रहे हवा से लहरा रही है साथ ने मीठी आवाज़ भी
आ रही है। चाहत ने ये सब देखा फिर मुस्कुराते हुए अपने बेड पर सोने चले गई।
अगली सुबह
चाहत का स्कूल
चाहत को आज बेशब्री से अध्यन का इंतज़ार था वो बार बार दरवाजे की तरफ देख रही थी पर अध्यन वो तो आ ही नहीं रहा था। ऐसे ही देखते देखते वक़्त बीता और प्रेयर बेल भी बज गई। सभी लोग प्रेयर ग्राउड़ में आ गए। प्रेयर भी हुई और क्लासेज भी होने लगी पर अध्यन का कोई अता पता ही नहीं था।
लंच के टाइम चाहत अंश के पास गई तो अंश उसे देखते ही समझ गया उसके जाते ही अंश ने कहा - वो अध्यन की तबीयत ठीक नहीं है.. इसीलिए वो आज स्कूल नहीं आया..
चाहत हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी तो अंश ने कहा - सुबह अध्यन का कॉल आया था... उसने मुझे पहले ही बता दिया था.. उसने कहा था कि .. तुम परेशान हो जाओगी.. तो तुम्हे बता दे..
अध्यन की बात सुन चाहत ने राहत की सांस ली फिर उसने कुछ नहीं कहा बस डायरी अंश को देते हुए बोली - ये अध्यन की डायरी है.. वो कल मेरे पास भूल गया था.. उसे ये दे देना.. और टेक केयर भी बोल देना..
अंश ने ये सुन कुछ नहीं कहा बस हा में सिर हिला दिया और उसने डायरी ले ली।
आज अंश और चाहत का स्कूल में लास्ट डे था क्युकी आज के बाद उन्हें प्रिपरेशन लिव मिलने वाली थी । इसके बाद सीधे एग्जाम ही था। आज वे लोग हॉल टिकट लेकर घर जाने वाले थे। चाहत और अंश ने हॉल टिकट लिया और घर आ गए।
कुछ दिनों बाद एग्जाम हुए चाहत ने फर्स्ट एग्जाम में अध्यन को देखा जो उसे ही देख रहा था और मुस्कुरा दिया बदले में चाहत भी मुस्कुरा दी.. इसी तरह सारे एग्जाम हुए पर चाहत ,अंश और अध्यन की बाते ज्यादा नहीं हो पाई थी। तीनो के लिए बोर्ड एग्जाम बहुत इंपॉर्टेंट थे। वो उसी में डूबे हुए थे। किसी तरह सभी सब्जेक्ट्स के बाद लास्ट एग्जाम हुआ ।
आज चाहत बहुत खुश थी। उसने रीमा जी से पहले ही कह दिया था कि वो आज लेट आयेगी। तो वो टेंशन ना ले इस बात पर रीमा जी भी मान गई थी।
चाहत एग्जाम के बाद जैसे ही बाहर आई तो अंश भी बाहर था उसने चाहत से पूछा - कैसा गया ..
चाहत ने भी मुस्कुराते हुए कहा - एक नंबर.. तुम बताओ..
अंश ने भी अपना अंगूठा दिखा कर कहा - सुपर..
अब दोनों हसने लगी ठीक उसी टाइम चाहत ने अध्यन को देखा था। वो कुछ परेशान सा लग रहा था। चाहत उसकी तरफ जाने लगी वो उसके पास पहुंच पाती इससे पहले ही अध्यन की कार उसके सामने आकर रूकी अध्यन भी कार में बैठ कर निकल गया। चाहत उसके कार को आगे जाते हुए देखती रही ।
चाहत ने जब कार को ऐसे जाते हुए देखा तो वो वहीं रुक गई उसे पता ही नहीं चला कब अंश उसके पास आकर खड़ा हो गया । वो तो अंश ने अपना हाथ चाहत के कंधो पर रखा तब जाकर चाहत को होश आया तो उसने झटके से अंश को देखा तो अंश ने कहा - क्या हुआ..
चाहत कार की तरफ इशारा करते हुए - वो.. वो अध्यन..
अंश उसकी बात समझ कर - उसके पापा आए थे.. तो शायद वो उनके साथ ही निकल गया हो..
चाहत को अंश की बात सही लगी उसने कुछ नहीं कहा तो अंश ने उसका हाथ पकड़ा और उसे आइसक्रीम पार्लर ले आया उसने दो आइसक्रीम ऑर्डर की फिर दोनों साथ में आइसक्रीम खाने लगे। आइसक्रीम खाने के बाद अंश ने चाहत को बाय कहा तो चाहत ने भी उसे बाय कह दिया । अंश अब वहा से चले गया।
थोड़े देर बाद चाहत उस जगह पर थी जहा वो और अध्यन अक्सर मिला करते थे। उनके स्कूल से कुछ दूर का वो सुनसान इलाका जहा कोई नहीं आता था। चाहत वहीं पर रखे पेड़ के कटे हुए हिस्से पर बैठ गई।
चाहत को पता था कि अध्यन यही आयेगा इसीलिए वो वहीं बैठ कर उसका इंतज़ार करने लगी। उनका एग्जाम 2pm को ख़तम हुआ था तो वो 3pm से यहां आकर बैठी थी। धीरे धीरे समय बीतने लगा। पर चाहत वहा से हिली भी नहीं।
ऐसे ही शाम के 6:30 हो गए। अब चाहत ने अपनी घड़ी की देखा फिर एक बार पलट कर पीछे देखा अब भी अध्यन का कोई पता नहीं था। अब उसकी आंखे बहने लगी वो कुछ देर तक वैसे ही रोती रही थोड़े देर बाद उसने अपनी वाटर बोतल निकाली और अपना चेहरा धोया ।
वो अपने साइकिल के पास गई फिर उसने अपना बैग ठीक से रखा और घर की तरफ चले गई।
चाहत अपने घर के पास आई और थके कदमों से घर के अंदर दाखिल हुई। अंदर आते ही उसे रीमा जी मिल गई । चाहत ने उन्हें देखा तो रीमा जी ने चहकते हुए पूछा - बेटू.. एग्जाम कैसा गया..
तो चाहत ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा - अच्छा गया मम्मी..
रीमा जी जैसे ही कुछ बोलने को हुई वैसे ही चाहत ने कहा - मम्मी मै थक गई हूं.. रेस्ट करना चाहती थी..
रीमा जी ने चाहत की तरफ देखा तो उन्हें भी वो थकी हुई सी लगी। फिर उन्होंने जैसे ही कुछ कहना चाहा उससे पहले ही चाहत अपने रूम की तरफ बढ़ गई ।
रीमा जी ने भी सोचा शायद एग्जाम के कारण थक गई होगी।
ये सोच उन्होंने चाहत की तरफ ध्यान नहीं दिया और किचेन में चले गई।..
वर्तमान समय
चाहत उस दिन की बात याद कर अभी भी रो रही थी डॉली ने लेटे हुए ही उसकी पीठ सहला दी साथ ही उसके आंसु भी पोछने लगी। पर फिर भी जब वो नॉर्मल नहीं हुई तो डॉली उठी और पानी की बोतल से एक ग्लास पानी निकाल चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने भी पानी के ग्लास को पकड़ा और एक सांस में पी गई।
थोड़े देर चाहत ने कुछ नहीं कहा। पानी पी लेने के कुछ समय बाद चाहत ने फिर से कहना शुरू किया - उस दिन के बाद मै अध्यन से नहीं मिली.. मै चाहती थी उससे मिलना .. पर वो हमेशा मुझसे दूर भागता रहा ..मेरे पास इशांत के बुक्स थे.. उसने जाने से पहले मिनी के हाथो से मुझे भिजवाए भी थे.. मैंने उन्हे पढ़ा... और.. मैंने कैसे भी कर cgpet का एग्जाम दिलाया .. मेरा सिलेक्शन भी हुआ .. मै स्कूल गई सबने मुझे बधाई दी.. पर अध्यन वो नहीं आया.. नहीं आया... ये बोल
वो बेड पर उठ कर बैठ गया। उसने अपने माथे पर आई हलकी पसीने की बूंदों को अपने हाथो से साफ किया फिर साइड में रखे पानी के जग की तरफ देखा उसने देखा जग पूरा खाली है। ये देख वो उठा और किचेन के पास आकर पानी निकाल कर पीने लगा।
वो किचेन में था पर उसने किचेन कि लाइट नहीं जलाई थी। उसने पानी का ग्लास सामने रखा तभी किचेन की लाइट ऑन हुई । अध्यन ने मूड कर देखा तो गौरी जी थी।
गौरी जी - अध्यन..
अध्यन गौरी जी को देख मुस्कुराते हुए - हा मॉम...
गौरी जी अध्यन के पास आकर उसके माथे पर मौजूद पसीने की बूंदों को पोछते हुए - क्या हुआ.. तुम्हे इतना पसीना क्यों आ रहा है..??
अध्यन उनके आंखो में चिंता देख उनका हाथ पकड़ कर कहता है - कुछ नहीं मॉम.. वो बस बुरा सपना देख लिया था.. तो घबरा गया था.. अभी ठीक हूं..
गौरी जी ने फिर से अध्यन के चेहरे पर हाथ रख कर कहा - 6 महीने से यही सुन रही हूं.. पर पता नहीं क्यों.. तुम्हारा चेहरा ..देख.. तुम्हारी बातो पर भरोसा.. नहीं होता...
चाहत को गले से लगा लिया । डॉली की आंखे भी नम थी वो बस चाहत के पीठ को सहला रही थी। थोड़ी देर बाद उसने चाहत को खुद से दूर किया ।
अब उसने तकिया ठीक कर पहले चाहत को लेटाया फिर खुद उसके बगल में लेट गई। उसने चाहत के सिर पर थपकी लगाते हुए कहा - बस.. अब बस करो.. और सो जाओ .. बहुत रात हो गई है.. कल कॉलेज भी जाना है ना.. डॉली की बात सुन चाहत ने हा में सिर हिलाया और डॉली को कस कर पकड़ वो लेट गई। डॉली ने भी उसे वैसे ही जकड़ लिया फिर दोनों सो गए। चाहत को बहुत दिनों बाद इतनी अच्छी नींद आई होगी।
वो कहते है ना.. अगर हम दर्द बाट ले तो दिल हलका हो जाता है.., बस आज वही हुआ था। डॉली के साथ अपना दर्द बांट चाहत का मन हल्का हो गया था वो सो गई थी। गहरी नींद में ...
अध्यन का घर
अध्यन बेड पर सोया था। तभी उसे कुछ बेचैनी महसूस हुई
अध्यन ने जबदस्ती मुस्कुराते हुए कहा - नहीं .. मॉम मै ठीक हूं.. आप ना ज्यादा सोचा ना करो.. ये बोल अध्यन उनके पीछे आया उसने गौरी जी को पीछे से कंधो से पकड़ा फिर उन्हें धीरे धीरे उनके कमरे की तरफ ले गया और दरवाजे के पास पहुंच कर अध्यन ने गौरी जी का हाथ पकड़ कर दरवाज़ा खोलते हुए कहा - चलो अब सोने जाओ.. बहुत रात हो गई है.. गुड नाईट.. ये बोल वो जाने लगा। तभी गौरी जी ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया अध्यन ने मूड कर देखा तो गौरी जी ने उसके माथे को चूमते हुए कहा - गुड नाईट... अध्यन ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुरा दिया।
गौरी जी को उनके कमरे में छोड़ कर आने के बाद अध्यन अपने रूम आ गया उसने रूम का दरवाज़ा बन्द किया अपने स्टडी टेबल के पास आ गया उसने वहा से एक डायरी उठाई । उस डायरी को हाथ में पकड़ अध्यन मुस्कुराने लगा। उसने डायरी के पगेस पलट कर देखा । एक पेज पर आकर वो रुक गया। ठीक उसी समय उसके आंख से एक आंसु की बूंद डायरी पर गिरती है।
अध्यन अब डायरी पर लिखे शब्दों को छूते हुए बोला
"मेरे जज्बातों से तुम पहले ही वाकिफ हो..
फिर भी तुम्हे लबो के हिलने का इंतज़ार क्यों है..
यू तो मेरी सांसों को भी पहचानती हो..
फिर धड़कनों की भाषा समझने से इंकार क्यों है"
ये बोल उसने एक बार फिर डायरी के पेज पर हाथ फेरा और डायरी बंद कर ली।
अध्यन फिर कुछ देर के लिए पुरानी यादों में खो गया..
उस दिन जब वो चाहत के घर से वापस आया था। उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। वो सीधा अपने रूम में गया। उसने अपना बैग बेड पर पटका और सीधे बाथरूम चला गया। उसने शॉवर ऑन किया और उसके नीचे खड़ा हो गया। थोड़ी देर भीगने के बाद वो बाहर आया उसने अपना सिर पोछा और कपड़े चेंज कर मिरर के सामने खड़ा हो गया।
अध्यन खुद को मिरर में देखते हुए - क्या किया तूने आज.. क्या सोच रही होगी वो तेरे बारे में.. मानता हूं.. उसकी आंखो में तू रोज़ प्यार देखता है.. बट इसका ये तो मतलब बिल्कुल नहीं ना.. तू अपनी हद भूल जाए.. ये क्या किया तूने ..
अध्यन खुद को ही डांटे जा रहा था तभी उसका सिर घुमा और वो धम से जमीन पर जा गिरा..
धम की आवाज़ सुन गौरी जी जो किचेन में थी वो भागते हुए अध्यन के रूम में आई। उन्होंने अध्यन को नीचे गिरे हुए देखा तो घबराते हुए देव जी को आवाज़ लगाया। क्यूकी आज संडे था तो देव जी भी घर पर थे। गौरी जी की आवाज़ सुन देव
जी भी भागते हुए रूम में पहुंचे ।
उनके साथ कुछ नौकर भी रूम में आए गौरी जी देव जी को देखते हुए - देखिए ना अध्यन को.. उसे क्या हो गया..
देव जी गौरी जी को संभालते हुए - आप रिलैक्स रहिए.. मै देखता हूं ये बोल उन्होंने अध्यन को नौकरों की मदद से उठाया और बैठ पर लिटा दिया। देव जी ने तुरंत डॉक्टर को कॉल किया। डॉक्टर भी आए और उन्होंने अध्यन को देखा । फिर कहा - देखिए .. शायद कमजोरी के कारण चक्कर आ गया होगा.. फिर भी मै इजेक्शन लगा देता हूं.. और साथ में कुछ टेस्ट भी लिख देता हूं.. आप करवा लीजिए... क्युकी सिम्टम्स कुछ अलग ही लग रहे है..
देव जी ने डॉक्टर की बात सुन हा में सिर हिला दिया। डॉक्टर ने अध्यन को इंजेक्शन लगा दिया। फिर देव जी को अपने साथ बाहर ले जाते हुए उनसे कुछ बोलने लगे।
थोड़े देर बाद जब अध्यन को होश आया तो अध्यन ने देखा उनके सिर के पास गौरी जी बैठी है और उनकी आंखे आसुओं से भरी है। ये देख अध्यन उठा उसने गौरी जी के आंसु पोछते हुए बोला - मम्मा मै ठीक हूं.. वो सुबह से कुछ खाया नहीं ना.. शायद इसीलिए..
गौरी जी अध्यन का हाथ पकड़ - बाबू .. तुम बिल्कुल अपना
गया.. मैंने वहा देखा अध्यन नीचे गिरा हुआ था..उसे उठाया .. फिर मैंने डॉक्टर को कॉल किया.. डॉक्टर ने आकर अध्यन का चेक अप किया .. फिर उन्होंने मुझे टेस्ट करवाने को कहा .. फिर मुझे कहा कि एक बार आपसे मिल लू..
डॉक्टर उनकी बात सुन सिर हिलाते हुए अध्यन की तरफ देखा फिर कहा - अध्यन .. आप बताइए आपको पहले कभी ऐसा फील हुआ है..
अध्यन ने शांत स्वभाव में कहा - नहीं.. सर ऐसा तो कभी पहले नहीं हुआ.. कल मैं बाहर से आया.. मुझे गर्मी लग रही थी.. तो सोचा नहा लू.. नहा कर बाहर आया तो.. मेरा सिर घूम गया और फिर मुझे याद नहीं..
अब डॉक्टर ने फाइल देखने हुए गौरी जी से पूछा - क्या अध्यन का कभी ऐक्सिडेंट जैसा कुछ हुआ है जिसमें अध्यन के सिर पर चोट आई हो.. क्या ऐसा हुआ है..??
गौरी जी ने ना में सिर हिलाते कहा - नहीं.. छोटे मोटे चोट लगे है.. पर कोई बड़ा ऐक्सिडेंट नहीं हुआ... पर आप ये सब..
डॉक्टर ने अध्यन की फाइल फिर से साइड में रखते हुए बोले - अब जो मै कहने वाला हूं.. उसे आप तीनो ध्यान से सुनो..
अध्यन , गौरी जी और देव जी ने नाश्ता किया और बाहर आ गए। तीनो अपनी गाड़ी के पास पहुंचे फिर देव जी ड्राइवर के सीट पर बैठ गए उनके बगल में गौरी जी और पीछे अध्यन बैठ गए। अध्यन ने कुछ नहीं किया बस सॉन्ग चला दिया। किसी तरह ये सफर कटा अध्यन भिलाई पहुंच चुका था।
तीनो भिलाई के एक बहुत बड़े हॉस्पिटल में गए । तीनो ने वहा जाकर अध्यन की सारी डिटेल्स दी। अध्यन को तो ये सब बहुत बोरिंग लग रहा था। अध्यन वहा बस देव जी के लिए था वरना उसे एक सेकंड भी वहा रुकना गवारा नहीं था । अध्यन को चैक करने के बाद डॉक्टर ने जो टेस्ट करवाने बोले थे। वो स्टार्ट हुए। पहले सिटी स्कैन हुआ फिर बाकी सारे टेस्ट हुए ।
थोड़ी देर बैठने के बाद अध्यन को डॉक्टर ने अपने केबिन में बुलाया साथ में देव जी और गौरी जी भी गए। तीनो वहीं चेयर पर बैठ गए।
डॉक्टर रिपोर्ट्स देखते हुए - मि . शर्मा अध्यन को क्या हुआ था.. जो आप सीधे यहां आ गए..
देव जी - कल मै घर पर ही था.. अचानक मुझे अध्यन के कमरे से गौरी की आवाज़ सुनाई दी तो मै रूम की तरफ
उन्होंने गहरी सांस ली फिर कहने लगे - अध्यन के ब्रेन में एक क्लॉट है.. जो मेबी .. किसी तरह के ऐक्सिडेंट से हुआ है..
अध्यन को इस बारे में कुछ पता नहीं था पर गौरी जी और देव जी इस बारे में जानते थे तो डॉक्टर के इतना कहते ही उन्होंने एक दूसरे को देखा । फिर दोनों ने एक साथ कहा - क्या..??
डॉक्टर ने दोनों को समझाते हुए कहा - ये क्लोट ज्यादा बड़ा नहीं है.. हम इसे ठीक कर सकते है.. क्युकी ये अभी just स्टार्ट हुआ ही तो .. ठीक होने की पोसीबिलिटी ज्यादा है... तो बस थोड़ी सी मेहनत और थोड़ा सा एतिहात बरतने की जरूरत होगी..
ये सुन गौरी जी की आंखे भीग गई साथ ही देव जी भी सोच में पड़ गए।
अध्यन को तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था उसने सीधे डॉक्टर से कहा - सर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा .. please explain..
तो डॉक्टर ने उसे देखते हुए कहा - अध्यन .. तुम्हारे ब्रेन में ब्लड जम गया है.. जिस वजह से तुम्हे चक्कर आ रहे है.. तो बस तुम्हे कुछ प्रिकॉशन लेने होने ..than you Will be fine.. ये बोल वो prescription लिखने लगे।
अध्यन ने डॉक्टर की बात सुनी फिर अपने पैरेंट्स कि तरफ देखा जिनके चेहरे पर अलग ही टेंशन थी। उनको देख अध्यन ने कहा - sorry to say but बात बस इतनी ही होती तो.. मेरे पैरेंट्स इतना टेंशन नहीं लेते..
डॉक्टर ने उसकी बात सुनी फिर उन्होंने देव जी और गौरी जी को देखा जिन्होंने आंखो से सब बताने की सहमति दी।
तो डॉक्टर ने कहा - तुम्हारे ब्रेन में को ब्लड जमा है.. अगर वो मेडिसिन से ठीक हो गया तो.. ठीक है.. बट अगर ये ऐसे ठीक नहीं हुआ तो.. ये बोल वो रुक गए..
तब अध्यन ने सीधा पूछा - और अगर नहीं हुआ तो..
डॉक्टर ने कहा - तो हमे सर्जरी करनी पड़ेगी.. जिसमे खतरा है..
अध्यन उनकी बात सुन - खतरा.. कैसा खतरा..
डॉक्टर ने एक नजर अध्यन को देखा फिर कहा - सर्जरी अगर सक्सेस हुई तो.. ठीक नई तो .. आपकी बॉडी का हाफ पोर्शन परेलाइज हो जाएगा..
अध्यन ने ये सुन अपनी आंख बंद कर ली और गौरी जी की आंखे बहने लगी जिन्हे देख देव जी ने अपना रुमाल उनकी
अध्यन ने गहरी सांस ली फिर कहा - कितना टाइम है.. मेरे पास..
डॉक्टर उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए बोले - i must say.. बहुत हिम्मत वाले हो तुम.. पर तुम ज्यादा सोच रहे हो.. ऐसा कुछ नहीं होगा.. अभी तुम इनीशियल स्टेज पर हो.. तो तुम्हारे ठीक होने के चांसेज ज्यादा है.. बाकी जैसा भगवान चाहे..
अध्यन ने उनकी बात सुन मुस्कुराते हुए कहा - तो मुझे क्या क्या करना होगा..
डॉक्टर ने कहा - कुछ नहीं.. अभी 15 दिन तक तो मेडिसिन लेना होगा.. फिर हम चैक अप कर के देखेंगे .. कितना इंप्रूव हुआ.. उसके बाद आपका रियल ट्रीटमेंट स्टार्ट होगा..
अध्यन ने उनकी बात सुन झट से कहा - हा.. तब तक मेरे बोर्ड एग्जाम भी हो जाएंगे..
डॉक्टर उसकी बात सुन फिर मुस्कुरा दिए। उन्होंने दवाइयां लिखी साथ में हिदायते भी दी ।
थोड़ी देर बाद देव जी , गौरी जी और अध्यन बाहर आए
तीनो के चेहरे उतरे हुए थे। हमेशा की तरह देव जी ड्राइव कर रहे थे पर इस बार गौरी जी पीछे बैठी थी उन्होंने अध्यन का सिर अपनी गोद में रखा हुआ था और उसे सहला रही थी।
अध्यन ने मन ही मन कुछ डिसाइड कर लिया था।
Present time
यही सब अध्यन सोच रहा था।
थोड़ी देर बाद वो बेड पर था उसने हाथ में एक फोटो पकड़ रखी थी। अध्यन ने इस तस्वीर को देखते हुए कहा - जानता हूं.. नाराज़ हो.. पर बस कुछ दिन और.. उसके बाद मै तुम्हारी नाराजगी.. दूर कर दूंगा.. ये बोल उसने फोटो को माथे से लगाया। उसने फोटो को अपने सामने रखा और उसे देखते हुए बोला - गुड नाईट चाहत..
ये बोल वो सो गया।
अगली सुबह
गर्ग हॉस्टल
चाहत की नींद खुली तो उसने देखा वो डॉली से चिपक कर सो रही थी। इधर खुद से डॉली को दूर किया फिर बेड से उठी । उसने एक नजर डॉली को देखा फिर उसे ब्लैंकेट ओढ़ा कर बाथरूम आ गई। वो फ्रेश हुई और नहाकर बाहर आई तो उसने देखा डॉली उठ चुकी है । डॉली चाहत को देखते हुए - गुड मॉर्निंग चाहत ..
चाहत ने भी उसे गुड मॉर्निंग कहा । डॉली चाहत को गुड मॉर्निंग बोल कर बाहर आ गई । वो जल्दी से रेडी होकर चाहत के पास गई जहा निशा और चाहत दोनों कॉलेज के लिए रेडी हो गए थे।
तीनो ने नीचे नाश्ता किया फिर कॉलेज के लिए बस में बैठ गई। चाहत ने नोटिस किया आज डॉली पहले के मुकाबले चुप चुप सी है और एक टक खिड़की के बाहर देख रही है तो उसने डॉली के कंधो पर अपना हाथ रखा । डॉली ने झट से रिएक्ट किया जैसे किसी ने उसे नींद से जगा दिया हो। चाहत डॉली के ऐसे रिएक्ट करना देख कर बोली - क्या हुआ..,
डॉली ने सिर हिलाते हुए कहा - कुछ नहीं..
चाहत ने भी कुछ नहीं कहा बस खिड़की से। बाहर देखने लगी । डॉली जो जब से बाहर देख रही थी अब वो चाहत को देखने लगी। वो उसे बहुत ही ध्यान से देखने लगी।
थोड़ी देर तक ऐसे ही देखने के बाद डॉली ने चाहत के हाथो पर अपना हाथ रखते गए कहा - चाहत..
चाहत जो बाहर देख रही थी डॉली के छूटे ही उसे देखने लगी।
डॉली ने पहले सिर नीचे किया और बोली - कुछ पुछु...
चाहत ने उसे देखते हुए कहा - तुम कब से परमीशन लेने लगी.. फिर मुस्कुराते हुए बोली - पूछो..
डॉली सिर उठा कर - मुझे लगता है.. वो..
चाहत उसकी हिचक को समझते हुए - बोलो ना ऐसे हैसिटेट मत हो.. बोलो ..
डॉली चाहत का हाथ पकड़ - देखो.. तुम मुझे गलत मत समझना .. बट मुझे लगता है.. कि.. कि
चाहत उसके हाथो पर अपनी पकड़ मजबूत कर - कि...
डॉली एक लम्बी सांस लेकर आंख बन्द कर बोलती है - यही की .. अध्यन तुमसे इसलिए नहीं मिला.. क्युकी तुमने उसे
खुद को .. खुद को.. किस नहीं करने दिया..
चाहत ने डॉली की बात सुनी फिर उसका हाथ छोड़ दिया।
चाहत कुछ देर के लिए चुप हो गई फिर खिड़की के बाहर देखते हुए बोली - तुम उसे गलत समझ रही हो.. वो ऐसा नहीं है..
डॉली चाहत को हैरानी से देखने लगी फिर उसने कहा - और.. तुम्हे ऐसा क्यों लगता है..
चाहत - क्युकी .. मै अध्यन को जानती हूं.. ये बोल चाहत ने अपना सिर सीट से लगा लिया...
डॉली उसे देखते हुए गुस्से से - तुम प्यार में पागल हो गई हो..
चाहत उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - प्यार का तो पता नहीं..बट उस पर विश्वास बहुत करती हूं..
डॉली को चाहत की बात अच्छी नहीं लगी उसने जैसे ही कुछ और कहना चाहा वैसे ही कॉलेज आ गया और फिर बस रुक गई। उसने गुस्से से चाहत की तरफ देखा और अपना बैग उठा कर पैर पटकते हुए नीचे उतर गई। चाहत उसे देख मुस्कुरा दी।
अध्यन बुक पढ़ रहा था। तभी उसके गेट पर नॉक हुई अध्यन ने बुक में देखते हुए कहा - कम इन..
तभी उसके कानों में एक आवाज़ पड़ी - इतना क्या पढ़ रहा है.. upsc टॉप करना है क्या..??
उस आवाज़ को सुन अध्यन मुस्कुराने लगा उसने मुस्कुराते हुए कहा - अंश .. तू कब से नॉक करने लगा..
अंश ने अंदर आते हुए कहा - जब से तूने डोर लॉक करना शुरू कर दिया है..
अध्यन ने एक नजर अंश को देखा फिर अपनी बुक पढ़ते हुए बोला - हम बड़े हो चुके है.. तो प्राइवेसी रखनी पड़ती है..
अंश उसे घूरते हुए - हा समझता हूं.. तेरी प्राइवेसी ..
अध्यन उसकी बात सुन फिर मुस्कुरा दिया।
अंश उसे देख - तो कल तू भिलाई जा रहा है.. ये बोल अंश चुप हो गया। उसने दो मिनट तक तो अध्यन को देखा और उसके रिप्लाइ का इंतज़ार करने लगा। पर अध्यन वो तो कुछ बोल ही नहीं रहा था।
अंश अब इरिटेट हो गया उसने एक बार फिर पुकारा - अध्यन ..
अध्यन ने वैसे ही बुक में देखते हुए कहा - हम्म..
अब अंश को गुस्सा आने लगा वो उठ कर अध्यन के पीछे आ गया उसने अध्यन के हाथ से बुक छीनी जिसे देख अध्यन चेयर से उठ गया। अब अंश आगे आगे भाग रहा था और अध्यन उसके पीछे दोनों बच्चो की तरह भागने लगे।
अंश भागते हुए रूम से हॉल आ गया दोनों दुनिया से बेखबर एक दूसरे के पीछे भागने लगे। अंश बुक को पकड़ कर - आ पकड़ मुझे..
अध्यन उसके पीछे भागते हुए - अंश मेरी बुक.. वापस कर उसे..
अंश जिद करते हुए - बिल्कुल नहीं.. कब से तुझसे बात करने की कोशिश कर रहा हूं.. पर नही तुझे तो इस बुक में घुसना है.. तो ले घुसे रह..
अध्यन ने कहा - सॉरी ना.. मुझे मेरी बुक दे दे.. मै तेरी हर बात सनुंगा..
अंश उसकी बात सुन कर भी उसे बुक नहीं लौटता । थोड़ी देर दोनों यू ही दौड़ते रहते है । अंश अब थक कर सोफे में बैठ जाता है। अध्यन भी वही साइड में बैठ गया । अंश ने मुस्कुराते हुए अध्यन को देखा तो अध्यन भी मुस्कुरा दिया।
अंश ने बुक को देखते हुए कहा - " वृहद छत्तीसगढ़" ये क्यों पढ़ रहा था तू.. फिर अंश ने बुक अध्यन को दे दी।
अध्यन बुक लेते हुए - कभी कभी अपने स्टेट.. अपने शहर के बारे में भी पढ़ना चाहिए.. knowledge बढ़ती है..
अंश ने अध्यन की बात सुनी फिर उसे घूरने लगा।
तभी गौरी जी आई उनके पीछे एक नौकर था जिसके हाथ में एक ट्रे थी। गौरी जी उनके पास आई फिर उन्होंने नौकर को ट्रे रखने का इशारा किया नौकर ने भी ट्रे रखा फिर वहा से चले गया।
गौरी जी सोफे के पास आई तो अंश ने उन्हें देखते ही कहा - गुड इवनिंग आंटी..
गौरी जी ने भी मुस्कुराते हुए कहा - गुड इवनिग.. अंश..
गौरी जी ने ट्रे एक प्लेट जिसमे अप्पे था उसे अंश की तरफ बढ़ा दिया । अंश ने भी मुस्कुराते हुए प्लेट पकड़ ली।
गौरी जी ने अध्यन को भी प्लेट दी। जिसमे कटे हुए फ्रूट्स थे। अध्यन ने फोक से फ्रूट्स खाना शुरू किया।
अंश अप्पे खाते हुए - तू कल भिलाई जा रहा है...?
अध्यन - हा..
अंश ने कुछ कहने के लिए मुंह तो खोला पर गौरी जी को देख वो चुप हो गया। तीनो अब वैसे ही सोफे पर बैठे रहे।
थोड़ी देर गौरी जी ने अंश से बाते की फिर उन्हें कुछ काम था तो अध्यन और अंश को हॉल में छोड़ वो वापस अपने रूम चले गई। हॉल में अध्यन और अंश अकेले थे।
अंश नाश्ता कर लेने के बोला - तो.. तू .. कल चाहत से बात करेगा..
अध्यन जो कि फ्रूट्स खा रहा था उसके हाथ रुक गए वो अंश को देखने लगा ।
अंश ने पानी पिया फिर बात जारी रखते हुए बोला - कल तेरी रिपोर्ट्स आ जाएगी.. जिससे ये पता चल जाएगा कि तू ठीक है.. तो क्या अब तू चाहत से..
अध्यन ने उसे टोकते हुए कहा - और अगर मेरी रिपोर्ट में कुछ सही नहीं आया तो..
अंश ने उसकी बात सुनी तो उसे घूरते हुए कहा - क्यों सही नहीं होगी.. देख खुद को तू.. ट्रीटमेंट और एक्सरसाइज से
तू .. कितना ज्यादा फिट हो गया है.. तुझे नहीं लगता तू अब .. ठीक है..
अंश की बात सुन अध्यन उठा और अपना प्लेट टेबल पर रखते हुए बोला - मुझे लगने ना लगने से कुछ हो नहीं जाएगा..
अंश - तू ऐसा क्यों सोच रहा है.. क्या पता सब ठीक हो..
अध्यन - मै फालतू की एक्सपेक्टेशन नहीं लगाता.. कल जो होगा देखा जाएगा.. ये बोल अध्यन सोफे से उठ गया और उसने बुक उठाई । अध्यन के उठने के साथ अंश भी उठ गया।
अध्यन आगे आगे अपने रूम की तरफ बढ़ गया । अंश भी उसके रूम में आया उसने रूम में आते ही दरवाज़ा बंद किया और अध्यन के सामने आ गया।
अध्यन ने एक नजर अंश को देखा फिर हाथ में पकड़ी बुक को स्टडी टेबल पर रख कर जैसे ही वो पलटा वैसे ही अंश ने अध्यन को बेड पर धक्का दे दिया।
अध्यन इसके लिए तैयार नहीं था वो लड़खड़ाते हुए हुई बेड पर गिर गया उसने बेड पर हाथ रख उठने की कोशिश की उससे पहले ही अंश उसके ऊपर बैठ गया ।
अंश ने अध्यन की आंखो में देखते हुए गुस्से से कहा - तू
आखिर खुद को समझता क्या है.. क्या मिल रहा है तुझे उस लड़की को ऐसे तड़पा कर .. वो बेचारी अभी भी तेरा वेट कर रही है.. और तू .. तू इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है..क्या मिल रहा है तुझे ये सब कर के.. क्या तुझे उसकी तड़प दिख नहीं रही.. बोल जवाब दे.. बोल ..
इतना बोल अंश ने अध्यन को देखा जो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था।
अंश को उसकी मुस्कुराहट देखी जिसे देख उसे और चिढ़ हो गई उसने कुछ नहीं सोचा बस हाथ उठा कर एक मुक्का उसके चेहरे पर जड़ दिया। उसके मुक्का मारते ही अध्यन का चेहरा दूसरी तरफ घूम गया। अध्यन को इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। अध्यन ने मूड कर अंश को देखा जो गुस्से से लाल चेहरे के साथ उसे देख रहा था।
अब अध्यन से रहा नहीं गया वो उठा और उसने अंश को धक्का देकर अपने ऊपर से उठा दिया अंश हिलते हुए बेड के दूसरे साइड जा गिरा । अध्यन ने उठते हुए कहा - पागल है क्या.. उसने अपने चेहरे को सहलाते हुए अंश से कहा - लगी मुझे..
अंश बेड पर लेटा था वो उठ कर बैठ गया । अंश अभी भी अध्यन को गुस्से से देख रहा था। थोड़ी देर बाद अंश ने कहा
- तू क्यों कर रहा है ये.. अध्यन ने उसकी बात सुनी पर कहा कुछ नहीं वो बेड से उठ कर स्टडी टेबल के पास आकर चेयर पर बैठ गया। अध्यन ने फिर से वही बुक उठा ली।
अंश तो वैसे ही गुस्सा में था पर अध्यन का ऐसे इग्नोर करना उसे और गुस्सा दिला रहा था। वो बेड से उठ कर अध्यन के पास आया फिर अध्यन की बुक अध्यन के हाथ से ले ली।फिर उसने बुक बंद कर के टेबल पर रख दी। अब फिर अंश अध्यन को घूरने लगा।
अध्यन ने गहरी सांस ली फिर कहा - मै जानता हूं तू क्या सुनना चाहता है... पर वो मै तुझे कल ही बता पाऊंगा... ये बोल अध्यन ने फिर से अपना हाथ बुक के तरफ बढ़ा दिया।
अंश ने उसके हाथ को बीच में ही रोक कर कहा - लेकिन क्यों..
अध्यन ने उसे एक नजर देखा फिर वापस चेयर पर टिकते हुए - क्युकी.. कल ही रिपोर्ट आयेगी.. रिपोर्ट अगर सही हुई तो ठीक.. पर अगर गलत हुई तो.. मेरी सर्जरी होगी.. और अगर वो फेल हो गई तो मै.. ये बोल अध्यन चुप हो गया ।
अंश ने उसके देखते हुए कहा - तो तू..
अध्यन ने कहा - तो मुझे पैरालिसिस होने के चांसेज है.. अंश ने जैसे ही ये सुना उसकी आंखे बड़ी हो गई।
अध्यन ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - हा.. यही वजह है .. जो मुझे उससे दूर रखे हुए है..
अंश उसकी बात सुन कुछ देर के लिए चुप हो गया फिर उसने अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - पर तू ये बात चाहत को बता भी तो सकता है ना.. उसने अध्यन के हाथ पर अपना हाथ रख कर कहा - देख भाई.. वो बहुत समझदार है.. वो तेरी situation समझेगी..
अध्यन उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - हा जानता हूं... वो मेरी हर situation समझेगी.. पर अगर मै ठीक नहीं हुआ .. और मुझे कुछ हो गया तो..
अंश उसे टोकते हुए - ये तू क्या बोले जा रहा है...
अध्यन उसे शांत रहने का इशारा कर कहा - अगर मै ठीक नहीं हुआ तो .. मुझे पैरालिसिस हो जाएगा.. मतलब समझता है तू.. मेरी बॉडी का हाफ पोर्शन खराब हो जायेगा..
अंश - तो तुझे क्या लगता है.. वो तुझे ऐसे में छोड़ देगी.. नहीं भाई वो ऐसा नहीं करेगी.. वो तुझ से प्यार करती है.. और वो उन लोगो में से है नहीं.. जो तुझे ऐसे बीच में छोड़ जाए... वो रहेगी तेरे साथ..
अध्यन - मैंने ये कब कहा वो मुझे छोड़ देगी..मै ये जानता
हूं... वो मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेगी..
अंश - हा यही तो.. यही तो मै कह रहा था..
अध्यन - यही तो मै नहीं चाहता..
अंश उसे देख हैरानी से टेबल से उठ जाता है - क्या..?? मतलब .. तू कहना क्या चाह रहा है..
अध्यन भी उसके साथ खड़ा हो गया - चाहत हर situation में मेरे साथ रहेगी.. यहां तक कि मै मर भी जाऊ ना.. तब भी .. पर मै .. मै उसे ऐसे देख नहीं पाऊंगा..
अंश - तू ज्यादा सोच रहा है..
अध्यन - नहीं मै ज्यादा सोच नहीं रहा .. मै बस इतना चाहता हूं.. वो बस अपने गोल पर कॉन्संट्रेट करें.. अगर मै उसके साथ रहा तो.. वो मुझ पर ही ध्यान देगी.. ना की अपने ड्रीम पर.. और by the way मुझे कुछ हो गया तो.. तो उसकी भी हालत इशांत और सोनिया जैसी हो जाएगी.. फिर उसने अंश के कंधो पर हाथ रख कर कहा - तूने शायद देखा नहीं है.. पर मैंने देखा है.. इशांत और सोनिया को अपने प्यार के लिए तड़पते हुए.. मै ऐसे चाहत को नहीं देख पाऊंगा .. कभी नहीं देख पाऊंगा.. अध्यन ने इतना कहा फिर उसका गला भर आया। उसने गला साफ करते हुए कहा - अब बस कल के रिपोर्ट का इंतज़ार है.. उसके बाद ही मै आगे का सोचूंगा..
अंश को अब कुछ समझ नहीं आया कि उसे क्या कहना
चाहिए। वो बस अध्यन के करीब आया फिर उसके गले मिल कर बोला - तू जो भी करे.. जब भी करे.. मै हर पल .. तेरे साथ हूं..
अध्यन ने कुछ नहीं कहा बस उसके पीठ पर अपना हाथ रख कर खड़ा रहा ।
चाहत खाना खा कर छत पर थी वो वहीं खड़े होकर रोड पर चलती गाड़ियों को देख रही थी। दिन भर कॉलेज में बर्बाद कर लेने के बाद बस यही समय होता था जब वो कुछ पल के लिए सुकून महसूस करती थी। चाहत बस अपने सुकून को लिए रोड को देखती जा रही थी। पर आज वो सुकून उसे मिल नहीं रहा था। जिसकी वजह थी डॉली का उससे बात नहीं करना। डॉली ने बस में हुए बातो के बाद चाहत से बात भी नहीं की थी ना ही वो उसके साथ डिनर के लिए गई थी। चाहत इसीलिए खामोश सी खड़ी थी।
हॉस्टल आने के बाद से एक डॉली ही थी जिसके साथ चाहत को अच्छा लगता था। जिससे वो खुल कर बात कर पाती थी। ऐसा नहीं था कि उसकी दोस्ती हॉस्टल में किसी से नहीं थी
वो प्रिया, तापसी, सना के साथ और भी कई लड़कियों से बाते किया करती थी पर वो कनेक्ट डॉली से ज्यादा थी। उसे डॉली में अंश की झलक दिखती थी। वो आज की बाते याद कर ही रही थी तभी उसे किसी के छत पर आने की आहट हुई । थोड़ी देर बाद उसके बगल में एक साया खड़ा हुआ ।
उस साए को देख चाहत ने कुछ नहीं कहा बस शांत सी खड़ी रही।
तब उस साए ने चाहत की बाह को पकड़ा और कहा - कितनी बुरी हो ना तुम.. मै यहां कब से खड़ी हूं.. और तुम हो की.. मुझे इग्नोर करे जा रही हो.. गुस्सा मै हूं और ईगो तुम दिखा रही हो..
चाहत ने उसकी बात सुनी फिर मुस्कुराते हुए कहा - डॉली..
डॉली ने गुस्से से उंगली दिखाते हुए कहा - बात मत करो मुझसे.. तुम..तुम बहुत बुरी हो.. तुम्हे मेरी फिक्र ही नहीं..
चाहत ने उसकी उंगली नीचे कर उसी अंदाज़ में कहा - मै क्यों बुरी हूं.. ?
डॉली उसकी बात सुन उसे घूरते हुए - क्यों तुम्हे नहीं पता . ..
चाहत फिर से मुस्कुराते हुए - नहीं..
डॉली अब इरिटेट होकर - बहुत बुरी हो तुम.. ये बोल उसने अपना चेहरा घुमा लिया और अपनी पीठ चाहत की तरफ कर दी।
चाहत ने मुस्कुराते हुए उसे सीधा किया फिर कहा - अच्छा बाबा.. मेरी गलती थी.. आई एम् सॉरी..
डॉली ने उसकी बात सुन कर कहा - ठीक है.. जाओ माफ़ किया..
चाहत ने एक नजर उसे देखा फिर वापस सामने देखने लगीं।
डॉली कुछ देर के लिए शांत हो गई शायद कुछ सोच रही थी।
थोड़ी देर बाद डॉली - तुम्हे नहीं लगता तुम.. कुछ ज्यादा ही भरोसा करती हो.. अध्यन पर..
चाहत ने मूड कर डॉली को देखा फिर कहा - हा बहुत भरोसा करती ही उस पर.. जितना शायद खुद पर भी नहीं है.. इतना भरोसा है मुझे उस पर..
उसकी बात सुन डॉली - पर चाहत .. तुम खुद जानती हो.. उसने क्या किया है .. ये बात क्लियर है कि.. तुमने उसे खुद को किस करने नहीं दिया.. इसीलिए वो तुमसे दूर गया है..
चाहत ने डॉली को देखते हुए कहा - ऐसा तुम्हे लगता है.. मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता.. ये बोल वो मूड कर छत से जाने लगी ।
तभी डॉली - ओह.. यार प्लीज़ .. तुम अब ऐसे नहीं जा सकती.. तुम्हे मुझे बताना होगा.. आखिर तुम क्यों.. उस पर इतना विश्वास करती हो.. और ये जो तुम्हे लगता है.. वो क्यों
लगता है...
चाहत जो बाहर जा रही थी उसके कदम रुक गए।
चाहत वहीं से मूड डॉली के पास आई उसके करीब आकर चाहत ने डॉली का हाथ पकड़ा और अपने चेहरे के ऊपर रख गले से होते हुए पेट तक ले जाते हुए हुए कमर के पास रुक कर बोली - ऐसे कई जगह है.. जिसे अध्यन ने छुआ है.. पर कभी भी.. ये बोल चाहत डॉली का हाथ छोड़ उससे दूर हुई फिर कहा - पर उसने कभी भी अपनी हद पार नहीं की.. उसके छूने से कभी भी कुछ गलत फील नहीं हुआ.. एक दोस्त के नाते हम कई बार गले लगे.. पर उसके पास रहने के अहसास ने मुझे हमेशा सेफ फील करवाया है.. उसके गले लग कर मै खुद को महफूज़ महसूस करती हूं.. ये बोल चाहत मूड गई और चलते हुए बोली - शायद अब तुम समझ गई होगी.. की मै क्यों उस पर इतना भरोसा करती हूं..
डॉली ने जब चाहत की बात सुनी तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ वो चाहत के पास आकर बोली - आई एम् सॉरी.. मुझे ये सब नहीं पता था..
चाहत ने मुस्कराते हुए कहा - सॉरी मत कहो.. इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.. ये बस इसलिए हुआ .. क्युकी तुम अध्यन को जानती नहीं हो..
चाहत और डॉली कुछ देर ऐसे ही शांत रहे फिर नीचे आ गए।
चाहत अपने रूम में आई तो निशा बेड पर बैठ उसी का इंतज़ार कर रही थी। उसने चाहत को देख बेड से उठते हुए कहा - वो सिया है ना.. रूम नंबर 20 वाली..
चाहत ने उसकी बात सुन हा में सिर हिला दिया तो निशा ने कहा - वो आज उसकी रूम मेट नहीं है तो.. उसने मुझे अपने साथ सोने के लिए बुलाया है..
चाहत कुछ बोलती उससे पहले निशा ने कहा - उसने बस पूछा है.. तो..
चाहत ने उसकी बात सुनी फिर कहा - ठीक है तुम जाओ..
निशा उसकी बात सुन हड़बड़ाते हुए - पर तुम अकेले.. कैसे..
चाहत - डोंट वरी.. मुझे आदत है ... मै सो जाऊंगी..
निशा खुश होते हुए - थैंक्यू.. ये बोल वो रूम से बाहर चले गई..
चाहत उसके जाते ही बेड ठीक करने लगी उसके बेड ठीक करते ही डॉली बेड पर बैठ गई चाहत ने उसे हैरानी से देखा तो डॉली ने कहा - वो .. क्या है ना.. आज शिखा भी नहीं है.. तो मै .. ये बोल उसने ब्लैंकेट उठाया और उसे खींचते हुए बोली - तो मै.. यही सो जाती हूं.. ये बोल वो वहीं लेट गई।
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुराई और लाइट बंद कर ली
फिर डॉली के बगल में लेट गई।
डॉली कुछ देर तक यूं ही लेटी रही फिर उसने चाहत को पुकारते हुए कहा - चाहत.. चाहत..
चाहत ने डॉली की आवाज़ सुन कहा - हा...
डॉली - सो गई क्या..??
चाहत ने वैसे ही लेटे हुए कहा - हा .. अभी तो सपना भी देख लिया मैंने..
डॉली उसकी बात सुन उसका ब्लैंकेट खींचते हुए - मुझे एक डाउट है..
चाहत ब्लैंकेट वापस ओढ़ते हुए - कल सॉल्व करती हूं.. अभी सोने दे..
डॉली दोबारा उसकी ब्लैंकेट खींचते हुए - नहीं ये अर्जेंट है..
चाहत ने अब ब्लैंकेट साइड किया और उठ गई उसने गुस्से से डॉली को घुर तो डॉली ने डर से अपनी आंखे बंद कर ली फिर कहा - तुम अध्यन से नाराज़ हो या नहीं...
चाहत जो उसे अभी तक गुस्से से घुर रही थी अब उसे हैरानी से देखने लगी । डॉली ने अपनी आंखे खोली उसने चाहत को देखा तो उसे लगा चाहत उसे गुस्से में देख रही है तो उसने घबराते हुए कहा - मतलब वो .. उसने तुमसे बात नहीं की
तो..
चाहत ने डॉली को देखते हुए कहा - हा मै उससे नाराज़ हूं.. पर इसीलिए नहीं की .. उसने मुझसे बात नहीं की.. बल्कि इसलिए.. क्युकी उसे कोई प्रॉब्लम थी तो आकर मुझसे बात करता.. पर उसने ऐसा नहीं किया.. उल्टा मुझे बिना बताए... मुझसे दूर हो गया.. ये बोल उसने डॉली को देखते हुए कहा - उसे कम से कम बताना तो चाहिए था ना.. एक बार मुझसे उस बारे में बात करता .. पर नहीं उसने ऐसा नहीं किया.. बस इसीलिए मै नाराज़ हु उससे..
चाहत की बात सुन डॉली को अच्छा लगा उसने चाहत से कहा - बहुत प्यार करती हो ना उससे..
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस नीचे देखने लगी। तो डॉली ने उसके चीन पर उंगली रख कर ऊपर उठाते हुए कहा - तुम शर्माती भी हो.. ये बोल उसने चाहत का चीन छोड़ा और दोनों हाथों से उसकी बलाए लेते हुए कहा - नजर ना लगे तुम्हे.. और तुम्हारे अध्यन जी को..
चाहत ने डॉली की बात सुनी उसके सिर पर चपत लगा उसे वापस बेड पर लिटाते हुए बोली - बहुत हुआ .. अब सो जाओ..
ये बोल चाहत भी लेट गई...
थोड़े देर बाद डॉली ने फिर चाहत के कंधो को हिलाया। अब
चाहत ने डॉली को सच में गुस्से से देखा तो डॉली ने चाहत को देखते हुए शरारत से कहा - गुड नाईट.. जान
ये बोल उसने ब्लैंकेट सिर तक ओढ़ लिया।
चाहत उसकी इस हरकत पर मुस्कुरा दी.. और गुड नाईट .. बोल वो भी सो गई...
आज की सुबह थोड़ी अलग पर खास थी। चाहत की नींद खुली उसने अपने बगल में देखा जहा डॉली बिस्तर पर सिमट कर सोई हुई थी। उसका ब्लैंकेट नीचे गिरा हुआ था । चाहत ने ब्लैंकेट उठाया फिर उसने डॉली को ओढ़ा दिया डॉली ने ब्लैंकेट को कस कर पकड़ा फिर बच्चो की तरह सो गई। चाहत उसे देख मुस्कुराई उसने डॉली के सिर पर हाथ फेरा और नहाने चले गई।
चाहत जब नहाकर बाहर आई तो उसने डॉली को ब्लैंकेट मोड़ते देखा फिर मुस्कुराते हुए बोली - गुड मॉर्निंग डॉली.. फिर अलमारी से अगरबत्ती और माचिस निकालने लगी ।
तभी डॉली ने जम्हाई लेते हुए कहा - गुड मॉर्निंग.. मिसेज शर्मा..
चाहत जिसने अलमारी खोली ही थी उसके हाथ वहीं रुक गए वो झट से पलट गई और डॉली की तरफ हैरानी से देखने लगी।
डॉली ने जब चाहत को ऐसे घूरते हुए देखा तो उसने कहा - क्या हुआ..,
चाहत उसे घूरते हुए - क्या कहा तुमने.. ये बोल चाहत ने अपने दोनो हाथ अपने कमर पर रख लिए।
डॉली उसे देख मुस्कुराई फिर कहा - क्यों.. कुछ गलत कहा क्या..
चाहत ने उसकी बात सुनी फिर माचिस और अगरबत्ती को टेबल पर रख कर मुड़ी फिर उसने कहा - रुको.. तुम्हे बताती हूं.. ये बोल वो डॉली के पीछे भागने लगी और डॉली भी उससे बचने के लिए यहां वहा भागने लगी ।
थोड़ी देर बाद डॉली रुकी फिर उसने अपना हाथ चाहत की तरफ बढ़ा कर बोली - स्टॉप.. और हाफने लगी।
चाहत भी रुक गई वो झट से पानी का बोतल ले आई फिर उसने बोतल डॉली की तरफ बढ़ा दिया। डॉली ने पानी पिया फिर वो लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी।
डॉली की नज़र चाहत पर पड़ी जो उसे ही देख रही थी। थोड़ी देर दोनों ने एक दूसरे को देखा फिर दोनों हसने लगी वो दोनो हस ही रही थी तभी दरवाज़ा खुला और निशा अंदर आ गई
उसके ऐसे आने से चाहत और डॉली और जोर से हसने लगे। निशा ने उन दोनों को ऐसे देख कंफ्यूज हो गई। वो कभी चाहत को देखती तो कभी डॉली को देखती जो पागलों की तरह हसे जा रहे थे।
ऐसे ही हस लेने के बाद जब चाहत और डॉली चुप हुए तो निशा ने थक हार के उनसे पूछ ही लिए - क्या हुआ..?? ऐसे क्यों हस रही हो..??
निशा ने बिल्कुल बच्चे की तरह पूछा तो चाहत उसके पास आई और उसके गाल खींचते हुए बोली - कुछ नहीं.. ये बोल उसने अपनी उंगली डॉली की तरफ कर के बोली - ये डॉली है ना.. ये पागल हो गई है .. और फिर हसने लगी ।
डॉली ने चाहत की बात सुनी फिर वो चलते हुए निशा के पास आई । डॉली ने अपना सीधा हाथ निशा के कंधो पर रख दिया फिर चाहत की तरफ देखते हुए बोली - हा.. मै पागल हो गई हूं.. जानती हो क्यों..?? डॉली के इतना बोलते ही निशा ने उसकी तरफ देखा तो डॉली ने कहा - मुझे ना मिसेज शर्मा मिल गई है.. ये बोल वो चाहत को देखने लगी।
चाहत की हसी एक पल में गायब हो गई वो डॉली की तरफ देखने लगी । वहीं निशा ने कंफ्यूज होकर अपना सिर
खुजलाने लगी और कहा - कौन मिसेज शर्मा.. ??
डॉली ने चाहत की तरफ देखते हुए कहा - ये तो तुम.. चाहत से ही पूछ लो.. मै जा रही हूं.. नहाने.. ये बोल डॉली ने चाहत को आंख मारी फिर वहा से बाहर चले गई ।
निशा अब चाहत को देखने लगी उसने कुछ पूछने के मुंह खोला ही था तभी चाहत ने कहा - कहा तुम.. उस पागल की बात पर भरोसा करती हो.. जाओ नहा लो.. ऑलरेडी लेट हो.. निशा ने उसकी बात सुनी फिर बाथरूम की तरफ भाग गई ।
चाहत ने गहरी सांस लेटे हुए कहा - बच गए चाहत.. फिर दरवाजे की तरफ देख कर - डॉली.. ये लड़की भी ना.. कहीं भी कुछ भी बोल देती है.. ये बोल कर वो भी अपना काम करने लगी।
आज सुबह से ही घर में भगदड़ मची थी देव जी सुबह से तैयार बैठे थे। अध्यन जॉगिंग करने गया तब से ही वो रेडी बैठे थे। उनके मन की दशा शायद एक बाप ही समझ सकता
था वो काफी टेंशन में बैठे थे वजह बस यही थी "आज आने वाली अध्यन की रिपोर्ट " वो बार बार घड़ी देखते उन्हे ये लग रहा था मानो आज उनके एग्जाम का रिजल्ट आने वाला हो। वो कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे फिर पूरे हाल में चहल कदमी करने लगे।
गौरी जी सुबह से उन्हे देख रही थीं वो उनके पास आई उन्होंने देव जी को कंधो से पकड़ा फिर सोफे पर बैठते हुए बोली - आप के इस तरह से चलने से .. टाइम जल्दी बीत नहीं जाएगा..
देव जी बैठ गए तो गौरी जी वहा से जाने के मुड़ी तभी देव जी ने उनका हाथ पकड़ लिया । गौरी जी रुक गई उनके तरफ देखने लगी तभी देव जी ने गौरी जी का हाथ पकड़े हुए कहा - डर लग रहा है..
गौरी जी ने देव जी का हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा फिर कहा - सब ठीक होगा.. आप खामखां ही टेंशन ले रहे हो.. ये बोलते हुए वो सोफे पर बैठ गई। देव जी ने अभी भी गौरी जी का हाथ पकड़े रखा था। गौरी जी ने कुछ नहीं कहा बस वैसे ही बैठी रही। देव जी परेशान थे उनके चेहरे से ही दिख रहा था। गौरी जी ने देखा तो बोली - मैंने आपसे कहा ना ... सब ठीक होगा.. अगर आप ऐसे ही अपसेट रहोगे तो .. अध्यन को कौन संभालेगा.. वो आपको ऐसे देख वो खुद दुखी हो
जाएगा.. आपको स्ट्रॉन्ग रहना होगा..
देव जी गौरी जी के हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए - तो आप भी चलो ना.. आप रहोगी तो.. डर भी नहीं लगेगा..गौरी जी ने जब ये सुना तो अपना हाथ हटा कर बोली - नहीं मै नहीं जा सकती.. ये बोल वो सोफे से उठ गई ।
देव जी ने गौरी जी की तरफ देखते हुए पूछा - क्यों.. तो गौरी जी ने सिर उठा कर देव जी की तरफ देखा उनकी आंखे नम थी ये देख देव जी उठे और उनका चेहरा हाथो में लेकर बोले - क्या बात है.. आप ऐसे.. बोलिए..
गौरी जी अपनी पलकें ऊपर कर कहा - मै जाप करूंगी.. जब तक अध्यन के रिपोर्ट्स नहीं आ जाते.. देव जी ने गौरी जी की तरफ देखा अब उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि वो क्या कर रहे थे? उनसे क्या छूट रहा था? देव जी ने अपने बारे में तो सोच लिया था पर गौरी जी वो तो उन्हें याद ही नहीं रही थी। उन्होंने गौरी जी को गले से लगाया जिससे गौरी जी का सिर देव जी के सीने पर जा लगा। देव जी ने उन्हें बाहों में कसते हुए कहा - हमारा अध्यन ठीक हो जाएगा..
इतने में अध्यन रेडी होकर अपने रूम से बाहर आया उसने देखा गौरी जी और देव जी दोनों नम आंखो के साथ एक दूसरे के गले लगे देखा तो वो भी इनके पास गया और उनके
गले लग कर बोला - आे आे.. मेरे लव बर्डस.. उसकी आवाज़ सुन देव जी और गौरी जी एक दूसरे से दूर हुए जिसे देख अध्यन ने कहा - आप दोनों ..please carry on मै बाहर हूं..
वो ये बोल बाहर की तरफ जाने लगा तो देव जी ने उसे कॉलर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर बोले - कहा चले बेटा... रुको यही .. मै भी चलूंगा तुम्हारे साथ .. ये बोल देव जी अपने रूम की तरफ चले गए। अध्यन ने अब गौरी जी तरफ देखा फिर मुस्कुराते हुए बोला - मॉम..आप दोनों ना बहुत क्यूट हो.. जब भी आप दोनों को साथ देखता हूं... बहुत अच्छा लगता है..
ये बोल कर अध्यन ने गौरी जी की तरफ देखा जो उसे ही देख रही थी । तो अध्यन उनके पास आकर - क्या हुआ मॉम..
गौरी जी ने अध्यन की बात सुनी फिर उसका चेहरा हाथो में लेकर बोली - बाबू.. तुम हमेशा ऐसे ही रहना.. ये बोल गौरी जी की आंखे फिर गीली होने लगी । अध्यन ने जब गौरी जी की आंखे देखी तो वो समझ गया की वो क्यूं रो रही है??
अध्यन ने गौरी जी की आंखो को साफ कर कहा - मॉम.. आप ना.. अगर आप ऐसे रोओगे .. तो मै नहीं जा पाऊंगा..ये बोल अध्यन ने सिर नीचे कर लिया।
गौरी जी ने अध्यन की बात सुनी उन्होंने अध्यन को सोफे पर बिठाया फिर उन्होंने नौकर को आवाज़ लगाई थोड़े देर में नौकर एक ट्रे ले आया गौरी जी ने ट्रे पर रखी कटोरी उठाई जिसने दही चीनी थी। दही को चीनी में अच्छे से मिलते हुए बोली - आज सब अच्छा होगा.. अध्यन मुंह खोलो.. अध्यन ने सिर उठा कर देखा तो गौरी जी ने उसे दही चीनी खिला कर कहा - जाओ.. all the best..
ये सुन अध्यन ने गौरी जी को गले लगा कर कहा - थैंक्यू.. गौरी जी ने भी अध्यन से अलग होकर उसका माथा चूमा अध्यन ने अपनी आंखे बंद कर ली ।
तभी देव जी बाहर आए उन्होंने दोनों को ऐसे देखा तो रुक गए । उनकी भी आंखे नम थी पर वो अपनी नम आंखे दिखा कर अध्यन को दुखी नहीं करना चाहते थे।
"कितना अजीब होता है ना.. जब आप दुखी हो.. किसी अपने के लिए.. पर उसकी खुशी के लिए.. उसे ये बताना भी नहीं चाहते.. खुद तकलीफ में हो .. पर उसे तकलीफ ना हो.. इसीलिए चुप हो.. "
खैर देव जी अपनी आंखे साफ की और अध्यन के पास खड़े
होकर - चले.. वरना डॉक्टर .. आ जाएंगे हमे लेने..
उनकी आवाज़ सुन अध्यन ने मुस्कुराते हुए हा में सिर हिलाया और देव जी के हाथो से रिपोर्ट लेकर आगे चले गया। देव जी भी आगे बढ़ने लगे तभी गौरी जी ने उनका हाथ पकड़ लिया देव जी ने मूड कर देखा तो गौरी जी ने कहा - ख्याल रखना उसका.. और कॉल करना।
देव जी ने भी उनके हाथो पर अपना हाथ रखा फिर कहा - हा जरूर.. आप फिक्र ना करे.. गौरी जी ने उनकी बात सुन हा में सिर हिला दिया।
थोड़े देर बाद अध्यन और देव जी अपनी कार में थे और कार अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो गई। देव जी ने कार में लगा music system ऑन किया। जिसमे गाना बजने लगा ।
" मै चाहता हूं तुझको दिलो जान की तरह.. तू छा गई है मुझपे.. आसमान की तरह..."
ये गाना सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने कार की मिरर से देखा तो चाहत का अश्क उसे रोड पर नजर आया । अध्यन ने ये देख अपना सिर कार की सीट पर टिका दिया और अपनी आंखे बंद कर ली। देव जी ने एक नजर अध्यन को देखा फिर कार ड्राइव करने लगे।
बाहर आ गई। उसने रीमा जी को कॉल लगाया फिर बात करने लगी।
थोड़े देर घर पर बात कर लेने के बाद चाहत वापस रूम आ गई। चाहत और निशा बाहर आई । निशा ने रूम लॉक कर दिया तभी उनकी नजर सामने से आते डॉली पर पड़ी । डॉली मुस्कुराते हुए उनके पास आकर खड़ी हो गई। तीनो ने जल्दी जल्दी नाश्ता किया और बस में बैठ गई ।
हमेशा की तरह चाहत के पास डॉली बैठी थी। चाहत आज खिड़की की तरफ बैठी बाहर देख रही थी। डॉली हमेशा की तरह बक बक कर रही थी और चाहत उसकी बात सुन मुस्कुरा रही थी।
थोड़े देर बोल लेने के बाद उनके बीच चुप्पी ने जगह ले ली। डॉली ने चाहत की तरफ देखा जो उसकी बात सुन तो रही थी पर ध्यान नहीं दे रही थी।
डॉली ने कुछ देर उसे ऐसे ही देखा फिर चाहत के हाथ पर अपना हाथ रखा तो चाहत ने डॉली को झटके से देखा उसे ऐसा करते देख डॉली ने कहा - क्या हुआ..?? कहा खोई
गर्ग हॉस्टल , रायपुर
चाहत ने देखा निशा बाहर आ रही है तो उसने अगरबत्ती जला ली निशा चाहत के बगल में आकर खड़ी हो गई दोनों ने मिल कर अगरबत्ती भगवान के सामने घुमाई । चाहत ने अगरबत्ती साइड में अगरबत्ती स्टैंड पर रख दी।
निशा अब वहा से हट कर रेडी होने लगी। पर चाहत वो वहीं भगवान जी के पास ही खड़ी थी और एक तक उनकी मूर्ति को देखे जा रही थी। निशा ने चाहत को ऐसे देखा तो उसके करीब आई और उसके कंधो पर हाथ रख कर बोली - क्या हुआ..
चाहत ने मूड कर निशा की तरफ देखा फिर कहा - कुछ नहीं..
इस पर निशा ने अपना हाथ हटा कर कहा - तो तुम ऐसे क्या देख रही हो..
चाहत ने कहा - कुछ खास नहीं.. बस आज थोड़ा.. मन ठीक नहीं लग रहा.. अजीब सी फीलिंग्स आ रही हैं..
निशा ने उसकी बात सुनी तो उसे लगा शायद चाहत घर को मिस कर रही है। तो उसने तुरंत कहा - एक काम करो.. घर पर बात कर लो.. मन ठीक हो जाएगा.. चाहत ने उसकी बात सुन हा में सिर हिला कर कहा - हा.. और मोबाइल लेकर
हो.. ??
चाहत ने उसे देखते हुए कहा - पता नहीं.. सुबह से अजीब सा लग रहा है..
ये सुन डॉली ने चाहत के माथे को छुआ फिर गाल पर हाथ रख कर कहा - तुम ठीक तो हो ना.. कहीं तबीयत तो खराब नहीं ना..
चाहत ने डॉली की फिक्र देख कर उसका हाथ नीचे करते हुए कहा - मै ठीक हूं.. और मेरी तबियत भी ठीक है.. पर..
डॉली झट से - पर क्या..
चाहत ने फिर खिड़की से बाहर देखते हुए कहा - पर पता नहीं क्यों.. ये मन ना आज ठीक नहीं है.. कुछ तो होने वाला है.. मुझे ऐसा फील हो रहा है..
डॉली ने चाहत के हाथ को पकड़ते हुए कहा - होता है.. कभी कभी ऐसा होता है..
ये बोल दोनों चुप हो गए तभी उनका कॉलेज का चौक आ गया डॉली ने बाहर देखा तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आया जिसे सोच वो खुश हो गई और ड्राइवर के पास जाकर बोली - सुनो.. बस रोको..
ड्राइवर (राजू) उसे देखने लगा तो डॉली ने आंखे बड़ी कर कहा - कुछ काम था.. तो ..
ड्राइवर राजू ने कुछ बोलना चाहा तो डॉली ने उसे आंखे दिखा कर चुप करवा दिया। थक हार कर ड्राइवर ने बस रोक दी फिर डॉली ने पीछे मुड़ कर चाहत को बाहर निकालने का इशारा किया। चाहत को तो समझ ही नहीं आ रहा था वो सीट से उठ ही नहीं रही थी पर जब डॉली ने उसे घुरा तो वो उठ गई ।
दोनों बस से नीचे उतरे तो चाहत ने इधर उधर देखते हुए कहा - हम यहां क्यों उतरे है..??
डॉली ने कहा - तुम्हारे मन की बेचैनी को दूर करने..
चाहत को डॉली की बात समझ नहीं आई वो डॉली की तरफ देखने लगी तो डॉली ने अपना एक हाथ ऊपर उठाते हुए सामने की तरफ इशारा किया। चाहत ने हाथ के दिशा में देखा तो वहा एक मंदिर था। मंदिर को देख कर चाहत के चेहरे पर मुस्कान आ गई उसने मुस्कुराते हुए डॉली की तरफ देखा और जैसे ही चाहत ने कुछ कहना चाहा तो डॉली ने कहा - अब प्लीज थैंक्यू जैसा कुछ मत कहना... चाहत ने जब ये सुना तो वो चुप हो गई।
उसे चुप देख डॉली ने फिर कहा - चले मैम.. उसकी बात सुन चाहत मुस्कुरा दी .. फिर उसने हा में सिर हिला दिया अब
दोनों मंदिर की तरफ चलने लगे।
दोनों मंदिर आ गए ये मंदिर राधा कृष्ण का छोटा सा मंदिर था। जिसमे एक पुजारी जी अपनी आंख बंद कर बैठे थे। सुबह का समय होने के कारण कोई भी नहीं था मंदिर में। चाहत ने अपने दुपट्टे से सिर ढक लिया उसे ऐसा करते देख डॉली ने भी अपना सिर ढक लिया।
दोनों चलते हुए मंदिर के अंदर आ गए। चाहत ने राधा कृष्ण की मूर्ति को देखा तो उसे अजीब तरह का सुकून मिला । इस सुकून को अपने मन में महसूस करते हुए चाहत ने अपनी आंखे बंद कर ली और अपने हाथ जोड़ लिए। ये देख साथ में खड़ी डॉली ने भी अपनी आंखे बंद कर हाथ जोड़ लिए।
चाहत बंद आंखो के साथ कहा - भगवान जी.. आपको तो सब पता है.. मेरे यहां आने का कारण भी.. मुझे आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा.. कुछ अजीब सा फील हो रहा है.. तो आपसे एक रिक्वेस्ट है.. प्लीज .. सभी को ठीक रखना.. आर्यन .. मम्मी .. पापा और .. और अध्यन को भी.. क्युकी यही है.. मेरी लाइफ .. इनको कुछ हुआ तो.. तो मै रह नहीं पाऊंगी.. प्लीज इनको .. ठीक रखना.. ये बोल चाहत ने अपनी आंखे खोली।
उसने सामने देखा और हाथ जोड़ते हुए अपने हाथो को एक बार फिर अपने माथे से लगा लिया। चाहत ने पलट कर डॉली को देखा जो गाल पर हाथ रख उसे ही देख रही थी उसने चाहत से कहा - ओह माय गॉड.. तुम कितनी बाते करती हो.. भगवान जी से.. मिसेज शर्मा तुम ना.. वो ये बोल ही रही थी।
तभी चाहत ने डॉली के कान को पकड़ कर कहा - क्या कहा.. सुबह से ही तुमने ये मिसेज शर्मा.. मिसेज शर्मा लगा रखा है..
डॉली ने कान को छुड़ाते हुए कहा - आह.. लग रही है यार.. छोड़ो कान .. प्लीज चाहत..
चाहत ने ना में सिर हिला कर कहा - नहीं बिल्कुल नहीं..
तो डॉली ने फिर से मिन्नत करते हुए कहा - अच्छा बाबा सॉरी.. अब से नहीं बोलूंगी..
चाहत ने उसके कान छोड़ते हुए कहा - ठीक है.. चाहत के कान छोड़ते ही डॉली अपने कान सहलाने लगी। डॉली ने कान सहलाते हुए चाहत को घुरा तो चाहत मुस्करा दी। अब दोनों मुस्कुराने लगे ।
अब तक पंडित जी भी उठ गए। ये देख दोनों पंडित जी के पास गए फिर वहा से प्रसाद लिया। पंडित जी ने भी उनके सिर पर टिका लगाया । दोनों ने उनसे आशीर्वाद लिया और कॉलेज आ गए।
इधर अध्यन की कार भी हॉस्पिटल के सामने रुक गई। अध्यन ने अपनी आंखे खोली फिर कार से बाहर आ गया । देव जी कार को पार्क करने चले गए।
अध्यन ने सामने देखा उसे वहा एक मंदिर दिखा जिसे देख फिर मन में सोचा - आज लास्ट टाइम यहां हूं.. जब पहली बार यहां आया था तो.. अपने प्यार से दूर कर दिया था आपने..अब यहां आया हूं तो.. मुझे मेरा प्यार वापस चाहिए.. मुझे अगर मेरी फैमिली के बाद मैंने किसी की खुशी चाही है.. तो वो चाहत है.. उसके लिए ही मै यहां हूं.. सब ठीक कर देना आप .. ये बोल अध्यन थोड़े देर वहीं रुका रहा ।
देव जी भी कार पार्क कर आए फिर वो अध्यन को देख गेट की तरफ बढ़ गए। अध्यन भी हॉस्पिटल के गेट के सामने आया। उसने गहरी सांस ली फिर वो भी हॉस्पिटल के गेट से अंदर आ गया।