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Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

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Guest
Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

आज फिर लेट हो गया, हर बार क्लास में लेट पहुँचती हूं इस ललिता की वजह से - कमरे के दरवाजे पर खड़ी बार-बार घड़ी को देखती डॉली बडबड़ाई कि तभी कमरे से बाहर की ओर भागते हुए ललिता आई - सॉरी यार , तुझे तो पता है कि मैं कितनी आलसी हूँ इसलिए तो कहती हूं कोचिंग टाइम से 2 घंटे पहले जगाया कर मुझे । अब देख हो गए ना लेट ,पर तू मेरी सुनती ही कहा है ?

उसकी बात सुन अब डॉली हैरानी से बोली - मेरी वजह से लेट हो गए हैं या तेरी वजह से ? और तू 2 घंटे की बात कर रही है , मैं 3 घंटे से जगा रही हूं तुझे ।

हमारा कोचिंग टाइम 10 बजे का है और मैं 7 बजे से तुझे जगा रही थी पर मैडम जी जागती ही कहा है ? कुंभकरण की बहन जो है ।

ललिता - अच्छा चल, रास्ते मे सुना लेना जितना सुनाना है । लेट हो रहे है ना ?

अब दोनों पीजी से बाहर निकल सड़क पर आ गईं, उनके कदम तेजी से कोचिंग सेंटर के लिए बस पकड़ने को बस स्टैंड की ओर बढ़ चले ।

डॉली - रोज का नाटक हो गया है तेरा ये।

ललिता - अरे तो हो गए लेट ,क्या हो गया ? हमें कौन सा पढ़ना है - कहते वह हंसने लगी ।

डॉली - हम नहीं, सिर्फ तु । मुझे तो इस बार कैसे भी करके बैंक का यह एक्जाम निकालना ही है । पिछले दो बार से कभी दो नंबर से तो कभी चार नंबर से रह जाती हूं लेकिन इस बार तो निकाल कर ही दम लूंगी ।

ललिता (हंसते हुए) - तू तो अपने पापा की बेटी है ,उनका सपना है तुझे बैंक ऑफिसर बनाने का । ठीक भी है लेकिन यही जिंदगी के कुछ अच्छे दिन है हमारे पास तो थोड़ा मजा तो करना ही चाहिए वरना बाद में मां-बाप शादी कर ही देंगे फिर उसके बाद आजादी कहां मिलेगी - कहते हुए ललिता ने हवा में अपने दोनों हाथों को फैला दिया ।

डॉली ने जल्दी से ललिता के हाथों को नीचे किया - सामने देख बस आ गई है , थोड़ा ध्यान रख वरना जिंदगी से आजादी मिल जाएगी फिर कहना कि ऐसी आजादी और कहाँ ?

बस के रूकते ही दोनों फटाफट से उसमे बैठ गई। ललिता अपनी बातों से डॉली को पूरे रास्ते पकाती रही।

थोड़ी देर मे दोनों कोचिंग सेंटर के सामने खड़ी थी । डॉली उसके अंदर जाने को हुई तो ललिता ने उसे रोक लिया - आज बंक मारते है यार प्लीज ।

डॉली (खींझकर ) - नहीं , एक तो वैसे ही लेट हो गए हैं और तेरा ये रोज का बंक का अलाप । एक काम कर, तू जा घूमने। मैं तो चली - कहते हुए वह कोचिंग सेंटर मे चली गई । ललिता भी अब बेमन से उसके पीछे पीछे चली गई।

तीन घंटे बाद जब डॉली और ललिता कोचिंग से निकले कि डॉली के पापा का फोन आया ।

पापा - कैसी हो बेटा?

डॉली - बढ़िया ।

पापा - ऐसे ही मन लगाकर पढ़ाई किया करो , तुम को बैंक ऑफिसर बनना है । यह सुन डॉली थोड़ी उदास हो गई ।

पापा - क्या हुआ , हमारी बेटी चुप कैसे हो गई ?

डॉली - पापा पिछले दो बार से मैं आपका सपना पूरा नहीं कर पाई , इस बार भी कहीं ....

यह सुनकर डॉली के पापा हँस पड़े - तो क्या हुआ ? दुनिया में सभी लोग बस बैंक ऑफिसर होते हैं क्या ? हां , यह मेरा सपना जरूर है कि तुम बैंक ऑफिसर बनो लेकिन यह तुम्हारे जीवन का कोई आखिरी लक्ष्य नहीं है ।

मैं जानता हूं कि मेरी बेटी मेहनत करती है तो बस वही करो लेकिन याद रखना , तुम चाहे बैंक ऑफिसर बनो या ना बनो पर मेरी बेटी हमेशा रहोगी । हमेशा स्वाभिमान और खुद्दारी से जीना , कभी कोई ऐसा काम नही करना कि तुम खुद से ही नजरे ना मिला पाओ । जो भी करो , गर्व से करो।

डॉली ( मुस्कुराकर ) - जी पापा। मैं हमेशा यह बात याद रखूंगी ।

पापा - चलो , अब मुझे भी जाना है - कह कर फोन रख दिया।

ललिता - वाह यार, तेरे पापा ने अपने सपने से तुझे आजाद कर दिया है । तू फालतू ही टेंशन लेती है । अब तो चल यार , थोड़ा घूम आते है आस पास ।

डॉली ( हंसते हुए ) - मेरे पापा ने आजाद किया है पर तेरे पापा ने तुझे आजाद नहीं किया । तुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ता ?

ललिता (लापरवाही से ) - अरे तो ऑफिसर बनके क्या कर लूंगी? वैसे यह सब मैं अपने पापा के लिए ही कर रही हूं कि की पढ़ नहीं रही ढंग से ।

डॉली (हैरानी से ) - वह कैसे ?

ललिता - देख अगले 1 साल में पापा मेरी शादी कर ही देंगे । है ना ?

डॉली - हां तो ?

ललिता - तो अगर मैं बैंक ऑफिसर बन भी गई तो क्या फायदा? अभी 2 महीने में प्री होगा , उसके बाद उसका रिजल्ट आएगा। फिर मेन होगा, फिर उसका रिजल्ट फिर इंटरव्यू और उसके बाद सलेक्शन फिर ट्रेनिंग और उसके बाद जॉइनिंग । इस चक्कर में ही पूरा साल भर से ऊपर ही लग जाएगा लेकिन तब तक तो मेरी शादी हो जाएगी फिर मेरी सैलरी आ जाएगी मेरे ससुराल और पति के पास तोे मेरे पापा का फायदा थोड़े हुआ ? मेरे पापा को क्या मिलेगा? कुछ नहीं ना, उल्टा शादी में दहेज और देना पड़ेगा ।

तो फिर मैं क्यों मदद करूं नौकरी कर अपने ससुराल वालों की जिन्हें मै जानती भी नहीं कि कौन होंगे वो ? बिल्कुल नहीं मैं उनके लिए इतनी मेहनत क्यों करूं ?

डॉली - तेरा कुछ नहीं हो सकता । तू एक काम कर, पापा से कह देती कि तेरे बस का नहीं है यह सब ।

ललिता - पागल है क्या ? अगर मैंने ऐसा कह दिया तो 1 साल में नहीं 1 महीने में ही मेरी शादी करवा देंगे यार । इसी के बहाने तो कुछ वक्त के लिए आजादी मिल रही है खुल के जीने की ।

डॉली यह सुनकर हंसने लगी- तु सच में चापली ही है।

ललिता - श्श..... कोई सुन लेगा यार ,फिर सबको पता पड़ जाएगा कि मेरी मम्मी मुझे चापली कह कर बुलाती है ।

डॉली - यह बात तो सबको वैसे ही पता पड़ जानी है तेरी बातें सुन के ।

ललिता (मुंह फुलाते हुए ) - जा , मैं नहीं बात करती तुझसे ।

डॉली - हाँ , जैसे मै तो जानती नहीं कि मेरी चापली खाना खाए बिना रह सकती है पर बात बनाए बिना नहीं । अच्छा चल तुझे आइसक्रीम खिलाती हूं ।

ललिता ( खुशी से उछलते हुए ) - फिर मैं तुझे माफ करती हूँ ।

दोनों आइसक्रीम खाकर अपने पीजी में आ गई ।

ललिता - चल, बाकी लोगों से मिलते हैं । भावना , मीरा यही है ना आज।

डॉली - तू चल, मैं भी आती हूं ।
 
ललिता उनके कमरे में चली गई । अब डॉली जैसे ही कमरे से निकली कि उसका फोन बज उठा - यह किसका नंबर है , वह सोच में पड़ गई । पता नहीं किसका होगा , उठाऊँ या नहीं ? वह अभी इसी कशमकश में थी कि फोन बजना बंद हो गया - लगता है कोई गलती से लग गया होगा और अगर कोई जान पहचान का हुआ तो दोबारा कर देगा ।

डॉली अपने दोस्तों से मिलने उनके कमरे में चली गई । शाम होते-होते वह उस फोन के बारे में भूल ही गई ।

डॉली अब पढ़ाई कर रही थी और उसके पास ही ललिता अपने बिस्तर पर लेटी दोस्तों से चैटिंग कर रही थी कि तभी डॉली का फोन उठा ।

उसका फोन ललिता के बगल में ही पड़ा हुआ था। ललिता ने फोन उठाया तो देखा कि अनजान नम्बर है - पता नहीं यार , नंबर है कोई - कहते हुए उसने हाथ उठा डॉली की ओर फोन बढ़ा दिया कि देख तो, किसका नंबर है ?

डॉली ने देखा कि यह तो वही दोपहर वाला नंबर है , उसने फोन उठाया - हेलो ।

दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।

डॉली ने एक बार फिर कहा - हेलो , कौन बोल रहा है लेकिन दूसरी तरफ एकदम सन्नाटा पसरा था।

डॉली ने गुस्से में फोन काट दिया ।

ललिता - क्या हुआ ,किसका नंबर था ?

डॉली - पता नहीं यार , यह दोपहर को भी आया था पर उठाया नही था। अब उठाया है तो दूसरी तरफ से कोई बोल ही नहीं रहा - कहते हुए उसने वापस ललिता की तरफ अपना फोन बढ़ा दिया - ले रख ले ।

ललिता - यार मैं चैटिंग कर रही हूं , डिस्टर्ब मत कर।वही रख ले अपने पास।

डॉली - अच्छा बता कहां जगह दिख रही है तुझे इस टेबल पर ? किताबों से भरा पड़ा है , वही रख लेना।

ललिता - ला , इधर ही रख तु - कहते हुए उसने फोन अपने बगल में रख लिया ।

अब थोड़ी देर बाद फिर से उठा , डॉली ने पलट कर ललिता की ओर देखा तो वह गुस्से से उसे ही देख रही थी।

डॉली - साँरी , कह कर मुस्कुरा दी ।

ललिता ने फोन उठाकर देखा तो बोली - यह फिर वही नंबर है।

डॉली अब परेशान हो गई - पता नहीं यार , जब कोई बोल ही नहीं रहा तो क्यों बार-बार फोन कर रहा है ?

ललिता - तू परेशान मत हो, इसे तो मैं देखती हूं , कहते हुए उसने फोन उठाया - हेलो ।

दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।

ललिता जोर से चिल्लाई - हेलो ।

दूसरी तरफ से जवाब में फिर वही खामोशी मिली ।

ललिता गुस्से में बोली - अरे भैया जब बात करनी ही नहीं है तो क्यों बार-बार फोन करके अपना और हमारा टाइम खराब कर रही हो ? बात करने में शर्म आ रही है या मुंह में जुबान ही नहीं है ? हेलो बोलेगा कोई या फोन काट दूं पर कोई नहीं बोला।

ललिता - अगर तूने अगली बार फोन किया ना तो तेरा मुंह तोड़ दूंगी इसी फोन में से निकल कर, रख फोन गधे कहीं के। दोबारा फोन किया तो सीधा पुलिस को नंबर दे दूंगी - कहते हुए उसने फोन काट दिया।

ललिता की बात सुन डॉली हँसने लगी - तुमने तो कमाल कर दिया।

ललिता - अरे यार लातों के भूत बातों से नहीं मानते । कब से दिमाग खराब कर रहा है , बोलना है तो बोल । अगर अगली बार फोन आए तो बताना मुझे , ऐसी सुनाऊंगी कि फोन करना ही भूल जाएगा।

डॉली - वैसे मुझे लगता नहीं है कि इसके बाद वह दोबारा फोन करेगा और अगर करेगा भी तो तू तो है ही ।

ललिता (हंसते हुए) - शुक्रिया शुक्रिया लेकिन कभी कोई ऐसा फोन आए तो सुना दिया कर ढंग से। जितना डरेगी , लोग उतना डराऐंगे।

उसके बाद सच में वह फोन दोबारा नहीं आया । अगले दिन डॉली और ललिता का दिन यूं ही मस्ती करते हुए गुजर गया । रात के 12 बज रहे थे , डॉली और ललिता अपने बिस्तर पर चैन की नींद सो रही थी कि डॉली का फोन बज उठा ।

डॉली ने अधखुली आंखों से अपने पास रखे टेबल पर से उठाया तो नम्बर देख चौक गई - यह तो वही अनजान नंबर है । मुझे तो लग रहा था कि चापली की फटकार सुनने के बाद दोबारा फोन नहीं करेगा । लगता है कोई बेशर्म, है ।

वह अपने बिस्तर से उठी और पास में सो रही ललिता को जगाया लेकिन ललिता तो घोड़े बेच कर सो रही थी ।

डॉली ने फोन उठाया नहीं , वह फोन को देखती रही । फोन बजना बंद हो गया । डॉली ने राहत की सांस ली और वापस अपने बिस्तर की ओर बढ़ी कि फोन फिर बज उठा।

डॉली ने सोचा कि फोन बंद कर दे लेकिन यह कोई हल तो है नहीं क्योंकि मैं कब तक बंद रखूंगी फोन को फिर उसे ललिता की बात याद आई कि सुनाया कर ऐसे लोगों को ।

डॉली ने फोन उठाया और गुस्से में बोली - हेलो , कौन है जो आधी रात को फोन करके बार-बार तंग कर रहा है । कहीं से नंबर मिल गया तो क्या तुम हर वक्त फोन मिलाते रहोगे ? अगर बात करने का इतना ही शौक है तो अपनी मां बहन को मिलाओ लेकिन दोबारा फोन किया तो तुम्हें ढंग का सबक सिखाऊंगी डॉली ने एक सांस में यह सब बोल दिया । लगता है , ललिता का असर उस पर भी हो रहा है - डॉली यह सोच ही रही थी कि उसके कानों में आवाज गूंजी - बोल दिया या कुछ और भी बाकी है ?

डॉली ने ध्यान दिया दूसरी तरफ से किसी लड़के की आवाज है लेकिन उसके बोलने के तरीके और आवाज से तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वह कोई लोफर है पर यह है कौन?

डॉली अब खामोश रही , दूसरी तरफ से वह लड़का बार-बार बोल रहा था - हेलो ? हेलो डॉली , तुम सुन रही हो ?

डॉली अपना नाम सुनकर हैरान रह गई कि यह लडका उसका नाम कैसे जानता है ?

डॉली ने खुद को संभाला और हडबड़ाते हुए बोली - कौन बोल रहा है ?

दूसरी तरफ से लड़का बोला - मैं जय बोल रहा हूं ।

डॉली सोच में पड़ गई - कौन जय ? मैं तो किसी जय को नहीं जानती थी पर वह यह भी नहीं जानती थी इसके बाद उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी.....

डॉली - जय ? कौन जय ? मैं किसी जय को नहीं जानती।

जय यह सुनकर हंसने लगा - तो मैंने कब कहा कि तुम मुझे जानती हो ?

डॉली - तो फिर तुम मेरा नाम कैसे जानते हो ?कहां से मिला मेरा नंबर तुम्हें ?

जय - नंबर कहां से लिया यह मैटर नहीं करता लेकिन क्यों लिया , यह मैटर करता है ।

डॉली (गुस्से में ) - अच्छा बताओ फिर क्यों लिया?

जय ( मुस्कुरा कर) - मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं।

डॉली - दिखा दिया ना अपना असली रंग ? तुम सब लड़के एक जैसे होते हो । पहले कहीं से नंबर ले लेते हो फिर लड़की को अच्छे होने का नाटक कर दिखाते हो कि मैं तो बस दोस्ती चाहता हूं उसके कुछ दिन बाद ही तुम अपना असली रंग दिखा देते हो ।-तुम्हारे जैसे मजनू को मैं अच्छे से पहचानती हूं ।

जय - मैं मानता हूं कि आजकल लड़के ऐसा करते हैं लेकिन मेरा यकीन मानो मैं ऐसा नहीं हूं , मैं बस तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं । ना तो मैं कोई लोफर हूं और ना ही कोई मजनू ।

डॉली - अच्छा अगर तुम्हारे दिल में कुछ और नहीं था तो पहले तीन बार कॉल करने पर बोले क्यों नहीं और मैं दोस्ती क्यों करूं तुमसे ? मान ना मान मैं तेरा मेहमान ?

जय - अच्छा ठीक है , मत करो । मैं फोर्स नहीं करूंगा पर तुम कम से कम तीन-चार दिन मुझसे बात करके तो देखो, अगर उसके बाद तुम्हें जरा भी शक हो मुझ पर तो फिर मैं कभी फोन नहीं करूंगा तुम्हें । रही बात पहले ना बोलने की तो सच यह है कि शुरू में मैं ही तुमसे बात करने में घबरा रहा था कि कैसे बात करूं और क्या कहूं ? तीसरी बार में हिम्मत कर बात करने की सोची तो तुम्हारी दोस्त ने फोन उठा अच्छा खासा सुना दिया । रही सही कसर अब तुमने अभी पूरी कर ली - कहते हुए वह हँसने लगा ।

डॉली - और मेरा नंबर कहां से मिला? मुझे कैसे जानते हो, इस सवाल का जवाब नहीं दिया अभी ।

जय - यह नहीं बताऊंगा कि नंबर कहां से मिला लेकिन मैं तुम्हारे बारे में सब जानता हूं कि तुम यहाँ कोचिंग के लिए रहती हो ,तुम्हारे साथ तुम्हारे दोस्त ललिता भी रहती है । तुम्हारे पापा प्राइवेट बैंक में काम करते हैं लेकिन चाहते हैं कि तुम सरकारी बैंक में जॉब करो । तुम अपने घर से 50 किलोमीटर दूर यहां रहती हो क्योंकि तुम्हारे पापा नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई में कोई भी डिस्टर्ब हो।
 
जय ने डॉली के स्कूल कॉलेज सब के बारे में सही सही बताया तो डॉली के जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई कि यह लड़का उसके बारे में इतना कैसे जान सकता है ? वह अपने दिमाग के घोड़े दौडाने लगी कि कौन हो सकता है यह लड़का?

डॉली को चुप देख जय बोला - ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। मैंने कहा ना कि तुम मुझे नहीं जानती फिर क्यों बेवजह दिमाग के घोड़े दौड़ा रही हो ।

डॉली - तो तुमने मुझे फोन करने से पहले ही मेरी जानकारी निकाल ली है ? लगता है कोई लंबा प्लान है तुम्हारा लेकिन मैं ऐसी लड़की नहीं हूं कि तुम्हारी बातों में आ जाऊंगी। तुम्हारे जैसे लोगों को मैं अच्छे से जानती हूं , दोबारा फोन मत करना - कहते हुए उसने फोन काट दिया ।

डॉली काफी देर तक बिस्तर पर लेटी लेटी सोचती रही कि कौन है यह लड़का और मेरे बारे में इतना सब कुछ कैसे जानता है ? जय का फोन फिर नहीं आया।

अगले दिन रविवार था तो कोचिंग की छुट्टी थी । ललिता और डॉली रूम पर ही थी।

ललिता ने डॉली को आज कुछ शांत सा देखा तो बोली - क्या बात है ?आज कैसे तेरी बोलती बंद है ? कोई परेशानी है क्या?

डॉली - यार समझ नहीं आ रहा कैसे कहूं ?

ललिता - मुंह से बोल और किससे बोलेगी? इसमें समझने की बात क्या है ?

डॉली (खींझते हुए ) - मुझे पता है कि मुँह से ही बोला जाता है चापली ।अब चुपचाप मेरी बात सुन, कहते हुए उसने रात की सारी बात बताई।

ललिता ( गुस्से में ) - तु ना पागल है । मुझे रात में जगाया क्यों नहीं ? मैं ऐसी ऐसी गाली देती है उसकी अकल ठिकाने आ जाती।

डॉली - तू तो बस चुप ही बैठी रह , पूरी दुनिया जानती है चापली तुझे कि तू मिनी कुंभकरण है ।एक बार सो गई तो तेरा जागना मुश्किल है । पता है कितनी बार जगाया मैंने तुझे। वैसे मुझे लग तो नहीं रहा उसके बात करने के तरीके से कोई लोफर टाइप है?

ललिता - ओह! तु कोई संत, ज्ञानी है जो उसकी आवाज से पता चल गया कि जय लोफर टाइप नहीं है ?

डॉली - वह मुझे नहीं पता लेकिन जो लगा , वह कह दिया।

ललिता - कहीं तुझे वो पसंद तो......

डॉली (गुस्से मे) -बिल्कुल नहीं।

ललिता - अरे हाँ मै तो भूल ही गई कि तुझे तो अभी तक एक ही लडका अच्छा लगा है जो स्कूल मे तेरा वो सुपर सीनियर था ना जिसने कभी तेरी ओर देखा तक नहीं और जिसकी शक्ल भी तुझे ढंग से याद नहीं है । चल,एक काम कर - अगली बार इस जय का फोन आए तो मेरी बात कराना इससे, मैं भी तो देखूं ऐसी कौन सी शराफत की चाशनी में डुबोकर बातें की है इसने कि तुझे बेचारा लगा है।

उसी दोपहर जब डॉली और ललिता एक साथ बैठकर बातें कर रही थी कि डॉली के फोन पर जय का फोन आया ।

ललिता ने झाँक कर देखा तो फोन में जय का नाम फ्लैश हो रहा था - अरे वाह, एक रात में ही नाम भी सेव कर लिया ? ला दे मुझे । अभी इसने जो शराफत का चोला ओढ रखा है, मेरी जली कटी सुन दो मिनट मे उतार फेंकेगा - कहते हुए ललिता ने डॉली के हाथ से फोन लिया और कॉल रिसीव की।

ललिता - श्रीमान जय महोदय, आपसे निवेदन है कि हमारे मित्र को बार-बार फोन कर परेशान ना करें । हम आपके जैसे दुष्ट जाति के लोगों को भली-भांति जानते हैं कि अभी तो आप भगवान राम की तरह मर्यादा वाले बनेंगे फिर कुछ ही दिनों में रावण वाला नीच रूप दिखाने से भी गुरेज नहीं करेंगे पर याद रखना कि हम तुम्हारी चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आएंगे इसलिए यह सारा घी तुम अपने घर की रोटियाँ चुपडने में लगाओ -कहते हुए उसने फोन काट दिया ।

डॉली नाराज होकर बोली - यार ऐसे बात करने की क्या जरूरत थी ? उसने कुछ गलत बात थोड़े ही की थी ।

ललिता - हे भगवान , क्या लड़की है ? जब वह कोई गलत बात कहेगा तो क्या उसे तभी जवाब देगी? यह लोग ऐसे ही होते हैं, ज्यादा भाव देने की जरूरत नहीं है इसे । चल थोड़ी देर घूम कर आते है - ललिता डॉली को अपने साथ लेकर बाहर निकल गई ।

जय दिन में दो तीन बार फोन कर ही लेता था लेकिन हर बार ललिता उसे उल्टा सीधा सुना कर फोन रख देती थी लेकिन जय बस चुपचाप सब कुछ सुनता रहता था ।

डॉली रात में फोन को स्विच ऑफ कर देती थी क्योंकि चापली ने बोला था कि अगर मुझे पता चला तूने फोन बंद नहीं किया है तो फिर तेरी खैर नहीं ।

इन दस दिनों में डॉली को आदत हो गई थी जय के फोन के आने की और ललिता को भी क्योंकि वह कितना भी बुरा बोलती उसको ,वह बस चुपचाप सुनता रहता था ।
 
11 वें दिन दोनों दोस्त जय के फोन का इंतजार करती रहीं लेकिन उसका फोन नहीं आया । ललिता बार-बार डॉली से पूछ रही थी कि चैक तो कर फोन सही है तेरा या नहीं ? आज कैसे जय का फोन नहीं आया?

डॉली - क्यों ,तू भी तो यही चाहती थी ना कि उसका फोन नहीं आए। मैंने तो पहले ही कहा था कि यह ऐसा लड़का नहीं लगता वरना 10 दिन तक चुपचाप क्यों सुनता रहता तेरी बकवास?

ललिता - लेकिन अब तो बंद हो गया ना ? क्योंकि अब उस पर सहन नहीं हुआ होगा कि कहीं वह अपना असली रंग ना दिखा दे इसलिए फोन करना ही बंद कर दिया ।

अगले चार-पांच दिनों तक जय का कोई फोन नहीं आया। डॉली का मन अब पढ़ाई में नहीं लग पा रहा था ।

एक दिन शाम को डॉली और ललिता ने डिसाइड किया कि वह पीसीओ से जय को फोन करेंगी। जरा देखे तो उसका नाम सच में जय है या कुछ और ? ललिता ने डॉली को समझा दिया कि तुफोन करना क्योंकि जय से तेरी एक ही बार बात हुई है। ललिता ने तो उसे इतनी गालियां दी थी कि जय अब भीड़ में से भी उसकी आवाज पहचान ले लेकिन वह शायद डॉली की आवाज नहीं पहचाने।

अगले दिन कोचिंग जाने से पहले दोनों पास ही के पीसीओ पर गईं और जय को फोन लगाया । एक बार तो उसने फोन उठाया नहीं लेकिन दूसरी बार में फोन उठा लिया।

जय - हेलो।

मैली - हेलो ।

जय - कौन ? आप कौन बोल रहे हैं ?

डॉली - मुझे मोहन से बात करनी है ।

जय शायद थोड़ा जल्दी में था - नहीं , यह मोहन का नंबर नहीं है ।

डॉली -लेकिन मुझे तो यही नंबर दिया था मोहन ने ।

जय - अरे नहीं है उसका नंबर, मैंने कहा ना आपसे ।

डॉली - तो फिर किसका है ,कौन बोल रहे हैं ?

जय - मैं जय बोल रहा हूं - कहकर उसने फोन काट दिया।

डॉली - यार इसनेे तो फोन ही काट दिया!

ललिता - नाम बताया ?

डॉली - हां नाम तो जय ही बताया ।

अब दोनों कोचिंग सेंटर चली गईं, वहां से 3 घंटे की क्लास लेकर वापस पीजी पहुंची और खाना खा कर आराम करने लगी कि तभी एक बार फिर डॉली का फोन बज उठा ।

डॉली ने फोन उठा कर देखा तो जय का फोन था।

ललिता में जब जय का फोन देखा तो बोली - यह कैसे फोन कर रहा है इतने दिनों बाद ? उठा जल्दी।

डॉली - लेकिन फिर तू ही तो मना करती है ।

ललिता - अरे पागल लड़की उठा कि आखिर उसने आज फोन क्यों किया है ? और फोन स्पीकर पर डाल ।

डॉली ने फोन का स्पीकर आँन किया - हेलो ।

जय - क्या बात है ? आज ललिता ने फोन नहीं उठाया ?लगता है उसके पास बोलने के लिए अब कुछ नहीं है ।अगर है , तो वह भी कह दे ।

डॉली ने ललिता की ओर देखा, ललिता यह सुनकर झेंप गई ।

डॉली - अच्छा आज फोन क्यों किया ?

जय हँसते हुए बोला - यही बात तो मैं भी जानना चाहता हूं कि तुमने सुबह फोन क्यों किया?

यह सुन डॉली , ललिता एक दूसरे को हैरानी से देखने लगी कि इसे कैसे पता चला ?

जय - अब तुम सोच रही होगी कि मुझे कैसे पता चला ? मै डॉली की आवाज पहचान गया था पर जल्दी में था तो चुप रहा । तुम जाना चाहती थी ना कि मैंने तुमसे झूठ तो नहीं बोला?

डॉली (गुस्से में ) - हां तो क्या हुआ? तुमने भी तो मेरे बारे में सारी जानकारी निकाली है ।

जय ( हंसते हुए ) - तुम मुझसे वैसे ही पूछ लेती, मैं बता देता तुम्हें ।

तभी ललिता बोल पडी - अब तो पूछ रहे हैं ना, तो बताओ?

ललिता की आवाज सुन जय एक पल को चुप हो गया फिर बोला - ओह तो तुम भी यहां हो ? ठीक है , अगर तुम लोगों का हो गया हो तो मैं बोलूं ?

डॉली - हां बोलो, हम सुन रहे हैं ।

जय - डॉली मैं तुम्हें कैसे जानता हूं , यह तो मैं बाद में बताऊंगा लेकिन यह सच है कि मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं । मेरा नाम जय शर्मा है , मैं आर्मी में लेफ्टिनेंट हूं ।

मैंने तुम्हें अभी तक देखा भी नहीं है कि तुम कैसी दिखती हो लेकिन मैं बस इतना चाहता हूं कि तुम मेरी दोस्त बनो।

लेफ्टिनेंट शब्द सुनते ही ललिता के चेहरे की हवाइयां उड़ने लगी क्योंकि उसने पिछले 10 दिनों में जय को बहुत कुछ उल्टा सीधा सुनाया था । कहीं इसने मुझे जेल भेज दिया तो?

डॉली (हैरानी से )-तुम लेफ्टिनेंट ?

जय - हां । वैसे ललिता ने मुझसे बहुत कुछ कहा पर मैं इसलिए चुप रहा क्योंकि वह अपनी जगह सही थी । अब ललिता कुछ बोल क्यों नहीं रही ?

ललिता डरते हुए बोली - तुम मुझे जेल तो नहीं भेजोगे ?

यह सुनकर जय हंस पड़ा - सोच तो रहा हूं लेकिन अगर तुम इस डॉली को मुझसे दोस्ती के लिए मना लोगी तो मैं तुम्हें माफ कर सकता हूं ।

ललिता ने डॉली को देखा - यार प्लीज हां बोल दे , मुझे नहीं जाना जेल। प्लीज प्लीज प्लीज हां बोल दे ।

डॉली - ठीक है, मैं दोस्ती के लिए तैयार हूं लेकिन बस दोस्ती।

जय - मंजूर है , मुझे भी बस दोस्ती ही चाहिए ।
 
उस दिन के बाद से डॉली , जय दोस्त बन गए। दोनों में फोन पर बात हुआ करती थी । जय उसे अपनी रेजीमेंट और दोस्तों के बारे में बताता रहता था । ललिता भी जय से बात करती थी पर कम क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसने कुछ उल्टा सीधा बोल दिया तो जय उसे जेल ना भेज दे ।

20 दिन हो गए थे डॉली और जय को बातें करते हुए। दोनों अब एक दूसरे को अच्छे से समझ चुके थे।

एक रात डॉली और जय आपस में बातें कर रहे थे, डॉली ने नोटिस किया कि जय आज कुछ उदास सा है ।

डॉली - क्या बात है, आज कैसे शांत हो ?

जय - डॉली मैंने तुमसे कुछ छुपाया है ।

डॉली यह सुनकर नाराज होकर बोली - क्या छिपाया है, बताओ मुझे अभी ।

डॉली को अब डर लगने लगा कि कहीं किसी मुसीबत में तो नही फंस गई । उसने ललिता की ओर देखा पर वह तो चादर तान कर सो रही थी ।

जय - तुम सुन रही हो ना ?

डॉली - हां ।

जय - दरअसल तुमसे दोस्ती करने के पीछे एक बहुत बड़ी वजह थी .....

डॉली अब घबराते हुए बोली - कहीं तुम मेरा कोई इस्तेमाल तो नहीं कर रहे थे ?

जय ( हंसकर ) - नहीं , ऐसा कुछ भी नहीं है , वह दरअसल....

डॉली - जल्दी बताओ ना, यहां मुझे बहुत टेंशन हो रही है।

जय ने अब एक गहरी सांस ली और बोला - मेरी बात ध्यान से सुनो डॉली , मेरा एक दोस्त है राज शर्मा और वह तुम्हें बहुत पसंद करता है । उसी ने मुझे तुम्हारी सारी डिटेल्स और नंबर दिया था , वह तुमसे बात करने में बहुत हिचकिचा रहा था इसलिए वह चाहता था कि मैं तुमसे बात करूं और उसके बारे में बताऊँ कि वह तुम्हें पिछले 7 सालों से बहुत पसंद करता है ।

डॉली के लिए जय की कही हर बात समझ से बाहर थी - कौन राज ? उसे तो जानती तक नहीं फिर वह मेरे बारे में इतना कैसे जानता है और 7 साल पहले तो मैं 10th क्लास में थी फिर वह कहां से पसंद करने लगा ?

कि जय ने उसे पुकारा - डॉली ? डॉली तुम सुन रही हो ना? कुछ तो बोलो?

डॉली - क्या बोलूं ? तुमने तो मुझे भूल भुलैया में डाल दिया। अभी तक तो मैं तुम्हारे बारे में ही सब कुछ नहीं जान पाई थी कि अब यह राज कौन है , मैं तो उसे भी नहीं जानती।

जय - वह मेरा बेस्ट फ्रेंड है, उसने कहा है कि कल दोपहर 2:00 बजे को तुम्हें फोन करेगा तभी तुम उससे अपने सारे सवालों के जवाब मांग लेना। वैसे तुम्हारे एक सवाल का जवाब तुम्हें मिल ही गया।

डॉली ( हैरानी से ) - क्या ? किस सवाल का जवाब ?

जय - तुम हमेशा जानना चाहती थी ना कि मैं तुम्हें कैसे जानता हूं ? कैसे तुम्हारे बारे में इतना सब कुछ पता है ? याद आया ? वो जवाब मिल गया ।

डॉली - हां लेकिन मैं क्या बात करूंगी उससे ? तुम तक तो ठीक है लेकिन अब यह राज भी आ गया। कल कोई और भी..

जय गंभीर होकर बोला - बस , हर बात मजाक नहीं होती। तुम एक बार राज से बात करो, उससे पूछो कि कैसे जानता है वह तुम्हें ? उसके अलावा कभी कोई और नहीं आएगा हमारे बीच में । मैं दोस्त हूं तुम्हारा और वादा करता हूं कि अगर कल राज से बात करने के बाद अगर तुम दोबारा उससे बात नहीं करना चाहोगी तो वह फिर कभी तुम्हें फोन नहीं करेगा , यह वादा है मेरा तुमसे ।

डॉली थोड़ा शांत हो गई ।

जय - चलो अब तुम सो जाओ, कल कोचिंग के लिए भी जाना है तुम्हें ।

डॉली - तुम राज को कैसे जानते हो ? मतलब दोस्ती कैसे हुई ?

जय - वह भी एक लेफ्टिनेंट है । उसकी और मेरी ट्रेनिंग साथ साथ ही हुई थी और दोस्ती भी तभी हुई । रहने वाला तो तुम्हारे शहर का ही है । बाकी वो बता ही देगा कल ।

डॉली - ठीक है ।

जय ने फोन काट दिया ।
 
उस पूरी रात डॉली सो नहीं पाई - आखिर कौन है यह जो पिछले 7 सालों से मुझे पसंद करता है ? अब तो सारे सवालों के जवाब कल दोपहर 2:00 बजे ही मिलेंगे ।

अगले दिन जब ललिता उठी तो देखा कि डॉली अभी तक सो रही है ।

ललिता ने घड़ी की ओर देखा तो 8:30 बज रहे थे , उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि डॉली आज इतना लेट तक सो रही है। अब वह बहुत खुश हुई कि आज 1 दिन के लिए ही सही, वह डॉली से जल्दी उठी है ।

वह अब जल्दी से बाथरूम में भागी और जल्दी से तैयार होकर आ आई उसने टाइम की ओर देखा तो 9:05 बज रहे थे ।

ललिता - अब बताती हूँ इस हिटलर को । रोज सुबह मुझ पर रौब जमाती है ना दरवाजे पर खड़ी होकर कि ललिता जल्दी कर, आज मेरी बारी है।

यह सोच वह डॉली के पास गई और उसे जोर से हिलाया - डॉली ? अरे उठ यार, देख कितना लेट हो गया है । तेरी वजह से रोज-रोज लेट हो जाती हूं मैं ।

डॉली बिस्तर से उठ बैठी , उसने अलसाई नजरों से ललिता की ओर देखा तो हैरान रह गई । वह बस ललिता को देखे ही जा रही थी ।

ललिता को यह बड़ा अजीब सा लगा कि डॉली उसे ऐसे क्यों देख रही है - क्या है ? ऐसे क्यों देख रही है आंखें फाड़ फाड़ कर ?

डॉली ( हैरानी से ) - तो और क्या करूं ? तू आज पहले तैयार हो गई ? पूरे डेढ़ साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि तु मुझे जगा रही है वह भी पूरी तरह से तैयार होकर। एक मिनट, आज सूरज पश्चिम से तो नहीं निकला?

डॉली बिस्तर से उतर भाग कर खिड़की के पास गई और सूरज को देखा - सूरज तो पूरब से ही निकला है फिर यह कैसे ....

ललिता ( झल्लाते हुए) - हां हां मैडम , हम तो है ना मिनी कुम्भकरन ! लेकिन जो भी है , आज तु लेट और मैं जल्दी उठी हूं । अब जल्दी से तैयार हो जा। मैं तेरी वजह से और लेट नहीं हो सकती ।

डॉली हसँते हुए बाथरूम की ओर बढ़ी कि उसे कुछ याद आया , वह पलट कर ललिता की ओर देखी ।

ललिता - अब क्या हुआ?

डॉली - ललिता कहीं ऐसा तो नहीं कि तू आज नहाई ही ना हो बस मुँह हाथ धो कपड़े पहन मेरे सामने खड़ी हो गई हो ?

ललिता (हैरानी से) - पागल है क्या? तू ऐसा सोचती है मेरे बारे में ? मैं मानती हूं कि हफ्ते में दो-तीन बार हो जाता है ऐसा पर हर रोज थोड़े ही चलता है और आज तो बिल्कुल भी नहीं चल सकता क्योंकि मैं ठीक 3 दिन के बाद आज नहाई हूं।

डॉली - छि: यार , कितनी गंदी है तू - कहते हुए बाथरूम में भाग गई ।

ललिता वहीं बिस्तर पर बैठ गई - यार तभी तो पानी की किल्लत हो रही है दुनिया में । रोज रोज नहा कर पानी बर्बाद क्यों करें ?

थोड़ी देर में डॉली तैयार होकर बाथरूम से बाहर आ गई ।

ललिता और डॉली अब बस स्टैंड की ओर बढ़ चली।

ललिता - यार डॉली मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है ? तू तो रोज 6:00 बजे उठ जाती है फिर आज इतना लेट क्यों ? ओह, लगता है पूरी रात जय से बात की है । कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारी दोस्ती कुछ ज्यादा ही गहरी हो रही है ।

डॉली - ऐसा कुछ नहीं है यार , जय मेरा अच्छा दोस्त है बस लेकिन यह भी सच है कि एक परेशानी है जिसकी वजह से मैं रात देर तक जागती रही और सुबह फिर लेट आंख खुली ।

ललिता (हैरानी से ) - ऐसा क्या हुआ है अब कि तू रात भर परेशान रही?

डॉली ने उसे कल रात की जय से हुई सारी बातों के बारे में बताया ।

ललिता - अब यह कौन है राज शर्मा ?

डॉली - यही तो समझने की कोशिश कर रही हूं कि यह है कौन जो 7 सालों से जानता है मुझे? बड़ी अजीब सी परेशानी है ।

ललिता - यार पता नहीं , रोज-रोज का क्या स्यापा है ? चल अब दोपहर 2:00 बजे का इंतजार करते हैं इस पहेली को सुलझाने के लिए।

डॉली - अब इससे ज्यादा और कर भी क्या सकते हैं ?

दोनों अब कोचिंग क्लासेस में बैठी थी ।

ललिता - यार सच में तेरे दिल में जय के लिए कुछ नहीं है ?

डॉली - हां यार , नहीं है पर तू बार-बार क्यों पूछ रही है ?

ललिता - नहीं बस ऐसे ही पूछ रही हूं क्योंकि बड़ी कन्फ्यूजन हो गई है ।

डॉली - वह कैसे ?

ललिता - देख, एक लड़का जिसे तू स्कूल में पसंद करती थी। दूसरा जय और अब यह तीसरा राज । बहुत कंफ्यूजन है यार ।

डॉली - तू अपनी बकवास बंद कर और पढ़ाई पर ध्यान दें।

अब दोनों पढ़ाई में लग गई ।

दोपहर को दोनों लौट कर कमरे में आई ।

ललिता - अभी तो यार एक ही बजा है , एक घंटा बाकी है ।

डॉली - अरे यार मैं तो भूल ही गई , पापा को फोन करना था। कुछ बात करनी है उन्हें ।

डॉली ने पापा को फोन मिलाया - हेलो पापा , क्या कह रहे थे आप ?

पापा - वह तुम्हारी बचपन की दोस्त है ना जो तुम्हारे साथ स्कूल में पढ़ी थी, क्या नाम है उसका... हाँ रितु ,वह आई थी आज तुम्हारे बारे में पूछने कि तुम घर कब आ रही हो ?

डॉली सोच में पड़ गई कि रितु को अचानक इतने दिनों बाद मेरी याद कैसे आ गई - मैं जल्दी ही आऊंगी पापा। थोड़ी देर पापा से बात कर फोन रख दिया ।

ललिता - तूने रितू का नाम लिया ना !

डॉली - हाँ।

ललिता - तूने इसके बारे में बताया था , यह वही है ना?

डॉली - हां यार लेकिन आज इसे मेरी याद कैसे आ गई ,यह समझ नहीं आ रहा? पता नहीं यह सब क्या हो रहा है ?

ललिता - मुझे तो लगता है कि यह जय पनौती है , इसके आने के बाद से सब उथल-पुथल हो रहा है ।

डॉली (कुछ सोचते हुए) - नहीं , ऐसा नहीं है , रितू का इस तरह लोटना शायद अच्छा हो ।

ललिता ( हैरानी से ) - कैसे अच्छा हो सकता है ? वह उस लोफर के चक्कर में पड़ गई थी और जब तूने उसे समझाने की कोशिश की तो रितु ने उल्टे तुझसे ही दोस्ती तोड़ ली थी।

डॉली - हां यही तो मैं भी कह रही हूं कि फिर वह कल मेरे घर क्यों गई? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसे सच का पता चल गया हो और वह माफी मांगने आई हो ?

ललिता - यह बात 2 साल पुरानी है ,उसे अपने दोस्त पर भरोसा करना चाहिए था तब उसने उस नमन पर भरोसा किया जिसे वह बस 2 हफ्ते से जानती थी लेकिन तुझ पर नहीं जिसे वह पिछले 5 साल से जानती थी। चल ठीक है , माना कि अब उसको नमन का पता चल गया तो क्या फायदा ? जब रिश्तो में दरार पड़ जाए तो भले ही वो दोबारा जुड जाए पर उनमें गाँठ पड ही जाती है ।

डॉली - हम्म, शायद तू सही कह रही है लेकिन जानना तो होगा ना कि वह क्यों आई थी ?

ललिता - आई होगी रोने धोने और माफी मांगमे और वैसे भी उससे ज्यादा भी जरूरी काम है तेरी लाइफ में ।

डॉली (हैरानी से ) - क्या ?

ललिता - उधर देख, घड़ी मे बस 5 मिनट बाकी है ।

डॉली ने हंसकर पूछा कि एक बात बता कि तू क्यों इतनी एक्साइटेड हो रही है ?

ललिता ( हंसते हुए ) - अरे यार , जब खुद की जिंदगी में कुछ अच्छा ना हो रहा हो तो दोस्तों की खुशियों को देखकर ही खुश होना चाहिए । मैं भी जानना चाहती हूं कि यह राज है कौन , वैसे भी उसका फोन आता ही होगा।

डॉली - 2 बजे की कहा है तो 5 या 10 मिनट तो उपर नीचे हो जाएगा ना, तो ठंड रख ललिता ।

ललिता ने अपना सिर पकड़ लिया - हे भगवान ! तू पिछले 20 दिन से जय से बात कर रही है और यह नहीं समझ पाई कि आर्मी वाले समय के बहुत पाबंद होते हैं उनके लिए दो बजे मतलब दो ही है , समझी?

डॉली ( हंसते हुए ) - समझ गई.

तभी डॉली का फोन बज उठा , उसने फोन उठा कर देखा तो कोई अनजान, नंबर था ।

उसने फोन उठाया और धीरे से बोली - हेलो ।

उधर से जय की आवाज आई - डॉली मै जय , यह राज का नंबर है। लो बात करो उससे, अगली आवाज राज की थी ।

राज - हेलो , कैसी हो ?

डॉली ने हडबडाते हुए कहा - म.. मैं ठीक हूं ।

राज डॉली की असहजता को भाँप गया - लगता है तुम्हें अभी भी याद नहीं आया कि मैं कौन हूं ?

डॉली - नहीं , मैंने नहीं पहचाना और तुम मेरे बारे में इतना कुछ कैसे जानते हो ?

यह सुन राज हँसने लगा - चलो कोई बात नहीं , मैं याद दिलाता हूं । दसवीं क्लास में तुम्हारी एक दोस्त थी शिखा, जिसके घर तुम अक्सर जाया करती थी ।

शिखा का नाम सुन डॉली हैरान रह गई कि ये तो शिखा को भी जानता है लेकिन कैसे ?

राज - अब तुम यह सोच रही होंगी कि मैं उसको कैसे जानता हूं ? अरे वह छोटी बहन है मेरी , भूल गई? हां एक दो बार ही मिले थे हम, शायद तुम्हें याद हो तो !

यह सब सुनकर डॉली के जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई, उसने फोन काट दिया और जल्दी से जाकर बिस्तर परबैठ गई ।

डॉली की हड़बड़ाहट देख ललिता जल्दी से उसके पास आकर खड़ी हो गई - क्या हुआ? बता तो सही , बात क्या है ?

डॉली ने ललिता की ओर देखा - यार ऐसा कैसे हो सकता है ?

ललिता - दिमाग का दही मत कर , सीधे सीधे मुद्दे पर आ।

डॉली - यार मैं तो भूल ही गई थी उसे बस एक सपना समझकर पर यह तो वही राज है मेरा, शिखा का भाई जिसे मैं पसंद करती थी । मुझे लगता था कि शायद वह मुझे पसंद नहीं करता लेकिन कल जय ने बताया कि वह पिछले 7 सालों से मुझे पसंद करता है , इसका मतलब जब मैं इसे पसंद करती थी तो यह भी मुझे पसंद करता था - कहते हुए वो खुशी से कूदने लगी ।

ललिता - हे भगवान, इस लड़के ने बात कहने में 7 साल लगा दिए ? पहले ही कह देता तो शायद अब तक तो तुम्हारी शादी भी हो चुकी होती । अच्छा चल यह सब छोड़ , यह बता कि दिखता कैसा है और तूने फोन क्यों काटा ?

डॉली यह सुनकर उदास हो गई - नहीं यार मुझे बस हल्का सा चेहरा याद है उसका और मैं यह सुन एकदम से घबरा गई थी इसलिए फोन काट दिया ।
 
राज का अब दोबारा फोन आने लगा ।

ललिता (खुशी से) - उठा जल्दी।

डॉली ने फोन उठाया - हेलो।

राज की आवाज में थोड़ा तनाव सा था - डॉली क्या हुआ? तुमने मेरा फोन काटा ? क्या तुम्हें अभी भी कुछ याद नहीं आया ?

डॉली - नहीं नहीं ऐसा नहीं है । मुझे सब याद है ।

राज - तो फिर तुमने फोन क्यों काट दिया ?

डॉली - वह थोड़ा नेटवर्क की परेशानी है यहां आज तो एकदम से कट गया खुद ही।

राज ने अब राहत की सांस ली - ओह! अच्छा , मुझे लगा शायद तुम्हें याद नहीं आया या फिर तुम मुझसे बात करना नहीं चाहती ।

अब कुछ पल तक दोनों तरफ खामोशी छाई रही ।

राज - दरअसल मैं तो तुमसे तभी दोस्ती करना चाहता था फिर लगा कि तुम क्या सोचोगी मेरे बारे में पर हां शिखा से पूछता रहता था बीच-बीच में तुम्हारे बारे में तभी तो इतनी जानकारी है मुझे तुम्हारी।

डॉली को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे ? वह बस चुपचाप राज की बातें सुन रही थी, दूसरी ओर राज के पास खड़ा हुआ जय मुस्कुराता हुआ राज को देख रहा था ।

राज - डॉली तुम सुन रही हो ना?

डॉली - हां।

राज - मैं तुमसे कुछ कहना चाहता था अगर तुम बुरा ना मानो तो ..

डॉली यह सुनकर थोड़ा घबरा सी गई कि अब यह क्या कहेगा ?

राज - डॉली में कहना चाहता था कि मैं तुमसे ......

राज कुछ आगे बोल पाता कि जय ने जल्दी से उसके हाथ से फोन खींच लिया और काट दिया ।

राज हैरानी से जय को देख रहा था और जय उसे गुस्से से देख रहा था....

4

राज (हैरानी से) - क्या हुआ? ऐसे फोन क्यों काट दिया ? मै बात कर रहा था ना ?

जय - जानता हूं कि तुम बात कर रहे थे लेकिन क्या यह तरीका सही था ? मैंने कितना समझाया तुम्हें कि आराम से चलो पर तुम्हें तो एक ही दिन में डॉली को पाना है ।

राज - मतलब क्या है तुम्हारा? मैं समझा नहीं ।

जय - देख तू अभी जानता ही कितना है डॉली को? आज से पहले कभी दो तीन दिन हाय हेलो से ज्यादा बात तो हुई नहीं तेरी उससे , आज पहली बार बात कर रहा है और आज ही प्रपोज कर रहा था ?

राज - हां , आज बात कर रहा हूं पहली बार पर वह तो जानती है ना कि मैं उसे पसंद करता हूं फिर मेरे कहने से क्या हो जाएगा?

जय ने अपना सिर पीट लिया - हे भगवान , किस भोंदू से पाला पड़ गया है मेरा? अब उसमें राज को समझाना शुरू कर दिया । देख यह प्यार ना इतना आसान नहीं होता है जितना तू सोच रहा है । हम आर्मी वाले हैं , जैसे ही सामने टारगेट दिखता है , उसे गोली मार देते हैं लेकिन प्यार में हम ऐसा नहीं कर सकते मेरे भाई।

राज - यार अब तु बात को गोल गोल घुमा रहा है ,कहना क्या चाहता है तू ?

जय - अच्छा ध्यान से सुन मेरी बात। तेरे दिल का हाल डॉली तो जानती है लेकिन डॉली के दिल का हाल कोई नहीं जानता, उसे तो ये भी याद नही था कि तु है कौन । अगर आज तु उससे अपने प्यार का इजहार करता तो वह पक्का मना कर देती क्योंकि कोई लडकी इतनी जल्दी हाँ नही बोलती । इससे तेरी कहानी शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाती ।

राज - अरे हां , यह तो मैंने सोचा ही नहीं फिर क्या करूं मैं?

जय - सोचने का काम तू मुझ पर छोड़ दिया कर, समझा मेरे भोले भंडारी ? अभी तू बस डॉली से दोस्ती कर और उसे समझ , वह तुझे समझे । उसे टाइम दे खुद को समझने का फिर जब तुझे लगे कि तुम्हारी दोस्ती अच्छी हो गई है , तुम दोनों को एक दूसरे को समझने लगे हो तो उससे अपने दिल की बात कह देना । कम से कम तो उम्मीद तो होगी कि डॉली हां बोलेगी । अब तो वो ना बोल कर सीधा फोन रख देती।

राज अब सोच में पड़ गया - हां जय , यह बात तुमने सही कही । मैं अभी जल्दबाजी में सब कुछ बिगाड़ देता ।

कभी (मुस्कुरा कर) - तू टेंशन ना ले । यह तेरा भाई है ना , कुछ नहीं बिगडऩे देगा कभी ।

राज ( हँसकर ) - जानता हूं , तू तो मेरा सच्चा वाला दोस्त है।

जय - अच्छा चल अब उसे फोन कर वापस और बोल कि मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं ।

राज - और अगर वह पूछने लगी कि मैंने ऐसे बीच में फोन क्यों काट दिया तो ?

जय इस बार कुछ सोच कर बोला - तो कह देना कि कैप्टन सर आ गए थे किसी काम से तो तुम उन्हीं से बात कर रहे थे, ठीक है ना ?

राज - हां , ये ठीक रहेगा ।

उधर डॉली और ललिता बातें कर रही थी।

ललिता - यार यह तो वह वाली बात हो गई कि बिन मांगे मोती मिले , मांगे मिले ना भीख । जहां वह राज तुम्हें 7 साल पहले पसंद था , उसे तु कुछ नहीं कह पाई जबकि तुम्हें वो चाहिये था लेकिन अब तु सब कुछ भूलकर जिंदगी में आगे बढ़ चुकी थी फिर अब यह जय तुम्हारी जिंदगी में आया दोस्त बन कर । वह तो आया ही लेकिन साथ में राज को भी ले आया। यार तेरी तो कहानी पूरी फिल्मी हो गई , अब 2 - 2 आ गए तेरी जिंदगी में - जय भी और राज भी !

डॉली (खीझकर ) - खाली दिमाग पर ज्यादा जोर मत चला चापली। जय सिर्फ और सिर्फ मेरा दोस्त है और हमेशा दोस्त ही रहेगा।

ललिता - और राज ?

डॉली - वह मुझे पसंद है लेकिन पहले मैं उसे समझना चाहती हूं , उसके बाद देखा जाएगा इस रिश्ते को कहां तक ले जाना है ।

ललिता - तु सही कह रही है, किसी भी रिश्ते में जल्दबाजी ठीक नहीं ...

तभी फिर से राज का फौन आया ।

ललिता - देख, सोच समझ कर काम करना ।

डॉली ने फोन उठाया ।

राज - हां तो मैं कह रहा था कि क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी और फिर तुम तो मुझे और मेरी फैमिली को जानती भी हो।

डॉली - ठीक है ।

राज यह सुनकर मुस्कुरा दिया और उसने जय को इशारे में बताया कि डॉली दोस्ती के लिए मान गई है ।

कभी ने यह सुन चैन की सांस ली कि चलो तकरीबन 1 महीने से वह अपने दोस्त के लिए जो कर रहा था वह काम हो ही गया । फाइनली राज और डॉली की दोस्ती हो गई ।

राज - डॉली मुझे कुछ काम है, मैं बाद में बात करता हूं तुमसे, कह कर उसने फोन रख दिया और खुशी से जय को गले से लगा लिया - थैंक यू सो मच यार , तू सच में मेरा भाई है तूने मुझे डॉली से मिला दिया । अब देखना मैं उसे कितना खुश रखूंगा । अच्छा तू बोल , तुझे क्या चाहिए? मैं अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकता हूं ।

जय - मैंने अपने दोस्त के लिए दोस्ती निभाई है, इसमें लेन-देन कैसा? आज जरूरत पड़ने पर मैंने अपना फर्ज निभाया है ,कल को मुझे जरूरत पड़ने पर तु अपना फर्ज निभा देना ।

राज - वादा रहा , मैं अपने यार का सर साथ कभी नहीं छोडूंगा फिर चाहे कुछ भी छोडना पडे । आज हमारी दोस्ती और भी पक्की हो गई यार।

उधर डॉली खुशी से बिस्तर पर उछलने लगी - यार मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि राज खुद से चलकर मेरी जिंदगी में आ गया है ।

ललिता उसे देख कर हंसने लगी - रुक जा लड़की वरना यह टूट जाएगा और फिर तुझे जमीन पर सोना पड़ेगा क्योंकि मैं तो अपना विस्तर तेरे साथ शेयर नहीं करने वाली ।

डॉली यह सुनकर जमीन पर उतर गई - तु रोज कहती है ना कि घूमने चलते हैं तो चल आज हम घूमने चलेंगे ।

ललिता ( हैरानी से ) - सच्ची?

डॉली - मुच्ची ।

अब दोनों बाहर घूमने चली गई ।

उस रात एक बार फिर डॉली का फोन बज उठा लेकिन इस बार वह फोन जय का नहीं , राज का था ।

ललिता जब तक हो सकता था , बैठ कर उनकी बात सुनती रहती और जब नींद आती तो अपने बिस्तर पर जाकर सो जाती।

धीरे धीरे राज और डॉली के बीच बातें और भी ज्यादा बढ़ने लगी, दोनों अक्सर पूरी पूरी रात बातें किया करते थे । राज को डॉली के साथ ज्यादा वक्त मिले इसलिए जय अक्सर उसके हिस्से का काम भी कर दिया करता था ।

जब कभी राज की नाईट ड्यूटी होती थी तो वह जय से कह देता था कि डॉली को मेरी याद ना आए इसलिए तु उससे बात कर लिया कर। आखिर तू भी तो उसका दोस्त है इसलिए जय डॉली से बातें कर लेता था । अब हालात ऐसे थे कि राज , जय और डॉली की दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही थी ।

एक रोज जय और राज के शहर में मेला लगा । उस दिन राज जय को जबरदस्ती खींचकर वहां ले गया।

जय - यार यहां मेले में क्यों लाया है ? कोई देख लेगा तो क्या कहेगा कि हम आर्मी वाले भी मेले में घूमने आने लगे हैं, क्यों हमारी इज्जत का कबाड़ा कर रहा है ?

राज (हंसते हुए ) - आर्मी वाले हैं तो क्या जीना छोड़ दें? दरअसल मैं सोच रहा हूं कि डॉली के लिए कुछ खरीद लूं। आज नहीं तो कल उससे मिलूंगा ही तो ऐसे खाली हाथ थोड़े ही मिलूंगा । कुछ तो लेना होगा उसके लिए ।

जय - हां , वह तो ठीक है लेकिन उसकी पसंद का पता भी तो होना चाहिए ।

राज - हां यार , यह तो मैंने सोचा ही नहीं रुक मैं फोन कर पूछता हूं उससे ?

जय - एक काम कर , तुझे जो भी पसंद है तू खरीद ले ।अगर वह तुझ से प्यार करती है तो तेरा दिया कोई भी गिफ्ट उसे पसंद आना ही है ।

राज - हां , यह सही कहा तूने । लड़कियों को वैसे भी ज्वैलरी पसंद होती है तो चल उसी की दुकान पर चलते हैं । अब दोनों दोस्त ज्वेलरी वाली शॉप पर पहुंचे राज ने एक सुंदर सा नेकलेस पसंद किया, उसने जय की ओर देखा उसकी पसंद जानने के लिए तो पाया कि जय कहीं और ही खोया हुआ है ।

राज - जय ? जय कहां खो गए?

जय - नहीं , कुछ नहीं ।

राज - बता ना ?

जय - वह सामने देख, कितने सुंदर ईयर रिंग्स हैं बस वही देख रहा था ।

राज - वाह , क्या बात है ? अगर पसंद है तो ले लेना ।

जय ( हंसकर ) - मैं क्या करूंगा इनका?

राज - अरे रख ले , जब कोई मिल जाए तो उसे दे देना ।

जय ने मना किया पर आखिरकार राज ने उसे मना ही लिया। जय ने अब वो ईयर रिंग्स खरीद लिये।

जय - अब चलें। हो गया ना तेरा काम ?

राज - अरे यार, भला कुँए के पास कोई प्यासा लौटता है क्या? क्यों ना एक बार फिर अपना बचपन जिया जाए ?

वह अब गुनगुनाने लगा -

भाई मेरे यार

तुझसे इतना प्यार

तेरी जीत मेरी जीत

तेरी हार मेरी हार

जो दुश्मन से लड जाता है

पर करता मुझसे प्यार

तु मेरी हर मुश्किल में

रहता हरदम तैयार

भाई मेरे यार

तुझसे इतना प्यार
 
जय अब हँसने लगा - तु जानता है कि अच्छा गाता है और तेरा ये गाना सुन कर मैं ना नही कर पाता। चल ठीक है, सोच ले क्योंकि सबसे बड़े वाले झूले पर झूलेंगे ।

राज - तू साथ है तो फिर क्या बात है ? तेरे साथ तो मैं सबसे बड़े झूले पर तो क्या सबसे बडे पहाड पर चढ जाऊँ।

जय - ठीक है , आज फिर इस मेले में मौजूद सारे झूले झूलने है।

राज - मंजूर ।

अब दोनों बच्चों की तरह मस्ती करते हुए मेले में घूमने लगे ।

उनके आसपास मौजूद सभी लोग आर्मी अफसरों को बच्चों की तरह मस्ती कर देख मुस्कुराए बिना नही रह सकी।

इधर डॉली पापा से बात कर रही थी ।

पापा - डॉली , मुझे तो बैंक से छुट्टी मिल नहीं रही इसलिए नहीं आ पा रहा लेकिन तू तो आ सकती है ना? एक दिन के लिए आजा अपने पापा मम्मी से मिलने , शाम को चले जाना लौट कर।

डॉली - ठीक है , मैं आ जाऊंगी ।

उस रात डॉली ने राज को बताया कि वह कल घर जा रही है और अगले दिन सुबह लौट कर आएगी इसलिए कल रात बात नहीं हो पाएंगी यह सुनते उदास हो गया फिर कल रात वह उससे बात भी नहीं बात किए बिना कैसे रह पाएगा ।

डॉली - अरे एक ही दिन की तो बात है फिर आ जाऊंगी मैं।

राज - हम्म, ठीक है ।

उस पूरी रात दोनों बातें करते रहे , अगले दिन डॉली अपने घर के लिए निकल गई । जब वह घर, पहुंची तो उसके मम्मी पापा बहुत खुश हुए ।

2-3 घंटे बाद वहां रितु भी आ गई । रितु और डॉली अब कमरे में चली गई।

रितु - भूल जाना यार वह सब।

डॉली ( मुस्कुराकर) - कुछ बातें इतनी आसानी से भुलाई नहीं जा सकती ।

रितु अब चुप हो गई ।

उधर राज को डॉली की याद आ रही थी , वह परेशान सा इधर उधर घूम रहा था कि जय आता हुआ दिखाई दिया । यह देख राज उसकी ओर भागा।

जय ( हंस कर) - आराम से , क्या हो गया? ऐसे क्यों भाग रहा है ?

राज - यार , बस बहुत हो गया । मुझे और डॉली को बातें करते हुए 1 महीना हो गया है । अब तो मैं उसे अपने दिल की बात बोल दूँ ना ?

जय उसकी बात सुनकर हंस पड़ा - अच्छा, चल ठीक है। कल जब वो लौट कर आएगी तो उसे प्रपोज कर देना , अब खुश ?

यह सुन कर राज खुशी से उछल पड़ा - बहुत खुश, फाइनली कल मैं डॉली का जवाब भी जान जाऊंगा और पता नहीं क्यों मुझे पूरा यकीन है कि वो हां ही कहेगी।

जय - बिल्कुल , वो हां ही कहेगी ।

राज को अब इंतजार था तो बस कल का लेकिन फैसला तो डॉली के हाथ में था.... 5

रितु अब उदास होकर घर से जाने लगी तो डॉली बोली - रितु हम दोस्त थे और रहेंगे। तुझे जब भी मेरी जरूरत हो तो याद करना लेकिन अब वह पहले जैसा भरोसा मुझे तुझ पर नहीं है ।

रितु मायूस सी घर से चली गई , उसके जाने के बाद डॉली अपने कमरे में आराम से बैठ गई और 2 साल पहले की बात याद करने लगी -

रितु और डॉली 11वी से ग्रेजुएशन तक साथ ही पढ़ी थी, दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी । रितु तो हर मामले में डॉली से सलाह लेती थी। ग्रेजुएशन में रितु और डॉली के साथ पूजा भी उनकी दोस्त बन गई। तीनों हर वक्त साथ रहती थी।

उनकी क्लास में नमन नाम का लड़का पढ़ता था जो हर वक्त लड़कियों के पीछे भागता रहता था। वैसे तो सबसे अच्छा बनता था पर लड़कियों के लिए सही नहीं था । एक बार डॉली की गली में रहने वाली लड़की ने उसे बताया कि नमन उसके साथ ट्यूशन पढ़ता था । उसने उसका जीना हराम कर दिया और उसे इतना परेशान किया कि उसे अपना ट्यूशन छोड़ दूसरी जगह ट्यूशन लगाना पड़ा । उसे और लड़कियों ने भी बताया कि हमारे साथ भी ऐसा ही करता था ।

, अपनी दोस्त की बात सुनकर डॉली जान गई कि नमन सही लडका नहीं है। एक दिन उसे रितु ने बताया कि शायद नमन मुझे पसंद करता है , तब डॉली ने उसे बताया कि नमन अच्छा नहीं है , उसने रितु और पूजा को नमन के बारे में सब कुछ बता दिया लेकिन रितु के सिर पर नमन नाम का भूत चढ़ा हुआ था ।

एक दिन तो नमन ने रितु को सबके सामने प्रपोज भी कर दिया लेकिन डॉली और पूजा उसे वहां से ले गई । रितु ने तब तो कुछ नहीं कहा लेकिन उसके मन में डॉली के लिए गुस्सा बढने लगा था लेकिन वह उसे रास्ते का कांटा समझने लगी थी । उसने नमन को चुपके से हां कर दी थी , वह अब सामने तो डॉली दोस्त बनकर रहती थी पर पीठ पीछे उसकी बुराई करती थी। 1 दिन डॉली को रितु के इस दोगले व्यवहार का पता चल गया , उसने उसे समझाने की कोशिश की , कि वह सिर्फ उसका भला चाहती है और नमन सच में सही नहीं है लेकिन रितु ने भरी क्लास में डॉली हो बहुत बुरा भला कहा और यह तक कह डाला कि वह उसकी खुशी से जलती है, उसकी खुशी देख नहीं सकती है और जबरदस्ती उसकी लाइफ में दखल दे रही है । रितु ने नमन को भी बता दिया था कि डॉली तुम्हारे बारे में अनाप-शनाप बकती है जिससे अब नमन भी डॉली से चिढने लगा था ।

उस दिन के बाद से डॉली और रितु की दोस्ती टूट गई । पूजा ने भी एक दो बार कोशिश की रितु को समझाने की लेकिन रितु उससे भी लड़ पडी। उस दिन के बाद से रितु अब लौट कर डॉली के पास आई थी ।

डॉली को अपने और दोस्तों से पता चला था कि कुछ दिन पहले ही रितु को नमन की सच्चाई पता , चली है और उसने नमन से रिश्ता खत्म कर लिया है।

रात का समय था , डॉली अपनी मां के साथ लेटी हुई थी। उसकी मां उसे बता रही थी कि पड़ोस के घर में एक लड़की ने दूसरी जाति के लड़के से भाग कर शादी कर ली । देखो क्या किया उसने ? अपने मां बाप का नाम खराब कर दिया, कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। बेटा मैं जानती हूं कि तू ऐसा कभी नहीं करेगी पर तू बच कर रहना, आजकल के लड़के मीठी मीठी बातों में लड़कियों को फंसा लेते हैं फिर उन्हें छोड़कर भाग जाते हैं या उन्हें साथ लेकर । तेरे पापा को बड़ा भरोसा है अपनी बेटी पर और मुझे भी है ।

कुछ देर बाद डॉली की माँ तो सो गई लेकिन डॉली परेशान थी। उसके दिमाग में बार-बार मां की बातें घूम रही थी - कहीं राज भी तो ऐसा ही नहीं है , कहीं मैं कुछ गलत तो नहीं कर रही , लेकिन राज से बात करते हुए मुझे 1 महीना भर हो गया और उसकी बातों से ऐसा तो कभी नहीं लगा कि वो धोखेबाज है ।

डॉली उदास हो गई क्योंकि उसकी और राज की जाति भी अलग है । जब हम कभी शादी कर ही नहीं पाएंगे तो फिर बातचीत आगे बढ़ाने का क्या फायदा ? अगर कल को राज मुझसे प्यार करने लगा और शादी का सोचने लगा तो?

अब उसने तय किया कि वह राज के साथ अपनी दोस्ती को आगे नहीं बढाएगी ।

डॉली अगले दिन वापस अपने पीजी पहुंची ।

ललिता ने उसे चुप देखा तो पूछा - क्या बात है आज तेरी जुबान तु अपने घर ही भूल आई है।

डॉली ने उसे अपनी परेशानी बताई, यह सुन ललिता , अब सोच में पड़ गई ।

डॉली - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा । काश जय का फोन आया ही नहीं होता तो सब पहले जैसा चलता, ना किसी बात की टेंशन ना कोई झंझट। आज राज का फोन आएगा तो मना कर दूंगी कि हमारी दोस्ती और आगे नहीं बढ़ सकती है लेकिन वो इस बात से अंजान थी राज तो आज अपने प्यार का इजहार करने वाला है।

शाम राज का फोन आया , डॉली जैसे ही फोन उठाने को हुई कि ललिता बोल पड़ी - एक बार फिर सोच ले यार , कहीं बाद में पछताना ना पड़े ।

डॉली ने फोन नहीं उठाया - तो क्या करूं ? मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा । मैं राज को पसंद भी करती हूं , उससे दोस्ती रखना चाहती हूं पर मम्मी पापा का भरोसा नहीं तोडना चाहती । अगर हमारी जाति एक होती तो मै जैसे तैसे उन्हें मना लेती और अभी तो मैं और राज दोस्त है। वह मेरे , दिल की बात नहीं जानता लेकिन जब जान जाएगा तो फिर उसे भी तकलीफ होगी क्योंकि मंजिल तो कोई है ही नहीं ।

क्या करूं ? कुछ समझ नहीं आ रहा । ललिता तू तो दोस्त है मेरी , तू ही बता क्या करू?

ललिता - यार , यहां तो मेरी भी बत्ती गुल हो गई है ।

रात होने तक राज के तकरीबन 16 फोन आ चुके थे पर डॉली ने फोन नहीं उठाया।

राज परेशान था कि आखिर डॉली मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही है, क्या हुआ होगा?

अब राज ने किसी काम से शहर से बाहर गए जय को फोन कर सारी बात बताई कि डॉली उसका फोन नहीं उठा रही है। एक बार तू कोशिश करके देख , क्या पता तेरा फोन उठा ले

,

जय - तू परेशान मत हो, मैं कॉल करता हूं ।

अब जय ने डॉली को फोन किया।

डॉली - अब जय भी फोन कर रहा है यार चापली।

ललिता - यह तो तेरा दोस्त है ना , इससे तो बात कर ही सकती है और सच कहूं तो मुझे राज से ज्यादा जय समझदार लगता है । एक दोस्त होने के नाते वो तेरी बात जरूर समझेगा , आखिर इतना अच्छा दोस्त है वो तेेरा।

डॉली ने जय का फोन उठाया ।

जय - हेलो डॉली , क्या बात है ? तुम फोन क्यों नहीं उठा रहे राज का?

,

जय की आवाज सुनते ही डॉली की आंखों से आंसू बहने लगे । उसे ऐसे देख ललिता भी मायूस हो गई।

जय समझ गया कि कोई तो बात है -क्या हुआ, तुम रो क्यों रही हो ?सब कुछ ठीक तो है ? घर पर कोई परेशानी है तो मुझे बताओ , मैं अपनी दोस्त के लिए इतना तो कर ही सकता हूं ।

डॉली ( सिसकते हुए ) - नहीं , ऐसा कुछ नहीं है । मैं ठीक हूं।

जय - ठीक होती तो रोती क्यों ? फिर तुम फोन भी नहीं उठा रही राज का, वह कब से तुम्हारा फोन मिला रहा है ?

डॉली - तुम राज के साथ में हो ?

, जय - नहीं , मैं किसी काम से शहर से बाहर हूं पर तुम बताओ तो सही कि बात क्या है ?

डॉली - जय मुझे लगता है कि मुझे तुमसे और राज से अपनी दोस्ती खत्म करनी होगी। मैं अपनी मम्मी-पापा को और धोखा नहीं दे सकती । जब उन्हें पता चलेगा तो कितना बुरा लगेगा लेकिन तुम दोनों भी जरूरी हो मेरे लिए। कुछ समझ नहीं आ रहा मेरे कि करूँ क्या?

जय चुपचाप डॉली की बातें सुन रहा था।

डॉली - तुम कुछ बोलते क्यों नहीं ? बताओ , क्या करूं मैं? तुम क्या सोचते हो इस बारे में ?

जय ( मुस्कुरा कर) - तुम्हारे सवाल का जवाब मैं बाद में दूंगा लेकिन अभी तुम पहले राज से बात करो । उससे बात होने के बाद तुम मुझे फोन करना, तब तुम्हारे सवाल का जवाब दूंगा - कहते , हुए उसने फोन रख दिया ।

डॉली अब हैरान सी सोच में पड़ गई।
 
ललिता - क्या हुआ? क्या कहा जय ने?

डॉली - कह रहा है कि पहले मैं राज से बात करूँ, तब वह कुछ कहेगा इस बारे में ।

ललिता - राज से ? पता नहीं क्या खिचड़ी पक रही है इन लोगों के दिमाग में ? 1 मिनट, मुझे अब समझ में आया कि जय ने ऐसा क्यों कहा ?

डॉली - क्यों कहा ?

ललिता - देख तू पहले जय से बात करती थी लेकिन राज के आते ही तेरी जय से बात कम हो गई तो कहीं ऐसा तो नहीं कि जय तुझसे नाराज हो इसलिए तुझे सुना रहा हो कि पहले राज से बात करे ।

, डॉली - तू भी ना चापली कुछ भी बोलती रहती है लेकिन उसने मुझे राज से फोन करने को क्यों कहा, यह तो राज को फोन करने के बाद ही पता चलेगा।

उधर जय ने राज को मैसेज कर दिया कि कुछ ही देर में डॉली का फोन आएगा , आज तु डॉली से अपने दिल की बात कह देना क्योंकि कल शायद तुझे दोबारा मौका ना मिले।

कुछ देर बाद डॉली ने राज को फोन किया - हां बोलो।

राज - यार कब से फोन कर रहा हूं , कम से कम एक बार तो फोन उठा लेती । कल भी हमारी बात नहीं हो पाई थी , पता है मैं कितना परेशान हो गया था।

डॉली - राज , मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

, राज ( गुस्से में ) - नहीं , पहले तुम मेरी बात सुनो। यह तो तुम जानती हो मैं तुम्हें पसंद करता हूं लेकिन अब आज मैं तुमसे कहना चाहता हूं कि मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं और शादी करना चाहता हूं । मैं बस तुम्हारा जवाब जानना चाहता हूँ।

डॉली एकदम से राज के मुंह से यह सारी बातें सुनकर हैरान रह गई - क्या उसने जो सुना ,सही सुना ? राज उससे प्यार करता है ? डॉली खुशी से नाचना चाहती थी कि उसे मां पापा की याद आई ।

राज - क्या जवाब है तुम्हारा ?

डॉली - वो..मैं..... ये सब ऐसे जल्दी.....

राज - कोई बात नहीं , तुम आराम से सोच लो । सोच समझ कर कल मुझे जवाब दे देना । अगर तुम्हारा जवाब नहीं है तो मैं कभी तुम्हें तंग नहीं करूंगा लेकिन हां , अगर तुम्हारा जवाब हां है तो , मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा । जितना सोचना है, आज सोच लो लेकिन कल मुझे मेरे सवाल का जवाब चाहिए - कहकर राज ने फोन रख दिया।

डॉली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह खुश हो या परिवार की खुशी के लिए राज से दूर हो जाए ? इसका मतलब जय जानता था कि आज राज उसे प्रपोज करने वाला है, तभी उसने कहा कि पहले एक बार राज से बात कर लो।

अब ललिता डॉली को सोच में डूबा देखकर बोली - क्या हुआ? 440 वोल्ट का झटका लगा है या याददाश्त चली गई है तेरी? बोल तो सही कुछ ?

डॉली - यार ललिता , राज मुझसे प्यार करता है और कल तक का टाइम दिया है मुझे जवाब देने के लिए ।

, ललिता यह सुनकर बहुत खुश हो गई - तो कल तक का टाइम लिया है क्यों तुने, अभी हां कह देती ।

डॉली उदास होकर बोली - कह तो देती लेकिन मम्मी पापा!

ललिता कुछ देर चुप रही फिर बोली - तू जय से बात कर, उसने कहा था ना राज से बात करने के बाद उसे फोन करें।

डॉली - मैं भी यही सोच रही थी ।उसने जय को फोन किया।

जय - हां बोलो ।

डॉली - तो तुम जानते थे कि राज आज क्या करने वाला है , है ना! तुम मेरे भी तो दोस्त हो , मुझे बताना चाहिए था ना।

,

जय (हंसकर) - फिर सारा मजा किरकिरा हो जाता ना, वैसे तुम्हारा जवाब क्या है ?

डॉली - जवाब से पहले जो यह परेशानी है जिसमें मैं उलझी हूं , उसे तो हल करो ।

जय - देखो डॉली , यह जात पात कुछ नहीं होता। अगर तुम राज को पसंद नहीं करती तो ठीक है , तुम्हें जो ठीक लगे करो लेकिन अगर तुम राज से प्यार करती हो तो मैं वादा करता हूं कि तुम दोनों की शादी के लिए तुम्हारी फैमिली को मैं मना लूंगा फिर चाहे मुझे कुछ भी क्यों ना करना पड़े । तुम्हारी खुशी से बढ़कर तुम्हारी फैमिली के लिए क्या जरूरी है ? जान पहचान का लडका है , स्मार्ट है ,लेफ्टिनेंट है और तुमसे प्यार करता है तो फिर और क्या चाहिए? शुरू में तो लोग बोलेंगे ही पर बाद में सब चुप हो जाएंगे ।

,

मैं यह नहीं कहता कि भाग कर शादी करो । शादी होगी और वह भी तुम्हारे परिवार की मर्जी से । बस तुम जो भी फैसला लो, बिना किसी दबाव के लेना और याद रखना, यह दोस्त हमेशा तुम्हारे साथ है ।

डॉली ( मुस्कुराकर) - थैंक्यू जय । तुम सच में मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो ।

उधर ललिता उन दोनों की बात सुनकर मुस्कुरा दी - सच में जय कितना अच्छा है जो अपने दोस्तों का इतना ध्यान रखता है ।

डॉली ने फोन रख दिया और ललिता की ओर मुड़ी।

,

ललिता तो कहीं और ही खोई हुई थी ।

डॉली ने ललिता को पुकारा - ललिता ? ललिता ?

ललिता एकदम से होश में आई - क्या ?

डॉली - कहां खो गई ?

ललिता - यार मैं सोच रही हूं कि जब जय अपने दोस्तों का इतना ख्याल रखता है तो अपने प्यार का कितना ध्यान रखेगा?

डॉली मुस्कुराते हुए बोली - क्यों? तुझे पसंद है क्या ?

ललिता ( हंस कर) - पागल है क्या ? वह और मैं दोनों बिल्कुल अलग है । वो समय का पाबंद, हर , चीज सही समय पर करने वाला, सुबह जल्दी उठने वाला और कहां मैं मिनी कुंभकरण और आलसी ! अरे अपने दोस्त पर कुछ तो रहम कर , मुझ पर ना सही तो जय पर ही कर ।

डॉली यह सुन हँसने लगी ।

ललिता (हंसते हुए ) - अब तू सोच समझ कर फैसला करना। मुझे बस इतना पता है कि तेरे हर फैसले में मैं तेरे साथ हूं ।

अब डॉली सारी रात सोचती रही कि क्या फैसला करें ? अगले दिन डॉली तैयार हो ललिता को जगा रही थी लेकिन वो थी कि उठने का नाम ही नहीं ले रही थी कि तभी राज का फोन आया ।

डॉली - राज का फोन इतनी जल्दी ?

राज का नाम सुन ललिता झट से अपने बिस्तर पर ही , उठ बैठी - बता ना, क्या फैसला है तेरा?

डॉली ने फोन उठाया - तुम इतनी जल्दी...

राज - सॉरी मैंने इतनी जल्दी फोन किया पर मुझसे अब और रुका नहीं जा रहा, प्लीज अपना फैसला बता दो।

डॉली - ऐसे कैसे?

ललिता - तो क्या पंडित जी से मुहूर्त निकलवाएंगे ? अरे बता भी दे ,मैं भी जानना चाहती हूं ।

राज - बोलो, तुम्हें मेरा प्यार कबूल है या नहीं ? बस हां या ना कह दो ।

डॉली ने अब गहरी सांस ली और बोली - मेरा जवाब....,
 
नोट - ये कहानी 2009 - 10 के आसपास का माहौल देख कर बनाई गई है तो व्हाट्स ऐप नही, फेसबुक की जानकारी नहीं।

डॉली - मेरा जवाब ना है।

यह सुनकर ललिता और राज हैरान रह गए।

ललिता जैसे ही कुछ कहने को हुई कि डॉली ने उसे चुप रहने का इशारा किया , वह मन मसोसकर चुप रह गई।

राज अब बिल्कुल चुप था , उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे ? उसे तो लग रहा था कि डॉली जरूर हां कहेगी लेकिन इसने तो ना कर दिया !

डॉली - राज , मैं उम्मीद करती हूं कि तुम मेरे जवाब का बुरा नहीं मानोगे।

राज (उदास होकर ) - नहीं , इट्स ओके । मैं समझ सकता हूं। कोई बात नहीं , अच्छा मैं रखता हूं फोन - कह कर वह फोन रखने को हुआ कि डॉली जोर से हंसने लगी ।

ललिता ( गुस्से से ) - क्या हुआ , पागल हो गई है क्या? सुबह सुबह चढ़ा ली है ?

,

इधर राज अब हैरान था कि डॉली ऐसे हंस क्यों रही है - क्या हुआ, तुम ठीक तो हो?

डॉली - मैं बिल्कुल ठीक हूं लेकिन तुम्हें क्या हुआ है ?

राज - मुझे क्या हुआ ? तुम ही हंस रही हो पागलों की तरह जोर जोर से।

डॉली - हंसू नहीं तो क्या करूं ? तुम सच में बुद्धू हो । अरे मैं तो मजाक कर रही थी ।

यह सुन अब ललिता की जान में जान आई - चलो शुक्र है भगवान का कि लड़की एकदम ठीक-ठाक है ।

,

राज (हैरानी से ) - मतलब? क्या मजाक था?

डॉली अब चुप हो गई।

राज - बोलो डॉली ?

डॉली (गंभीरता से ) - तुम्हें पता है राज , मैं तुम्हें तबसे पसंद करती हूं जब से मैं दसवीं क्लास में थी । कई बार तो मैं बिना वजह ही शिखा के यहां आ जाती थी कि शायद तुम्हें एक बार देख पाऊं और आज जब तुम खुद सामने से मुझसे अपने प्यार का इजहार कर रहे हो तो भला मेरा जवाब ना कैसे हो सकता है ?

यह सुन राज की खुशी का ठिकाना ना रहा - तुम सच कह रही हो ? दसवीं में ? मैं भी कितना पागल था जो तुम्हारे दिल की बात समझ नहीं पाया , इसका मतलब मैं हां समझूं ना?

, डॉली ( मुस्कुराते हुए ) - हां , मेरा जवाब हां ही है ।

राज - यार मैं बता नहीं सकता कि कितना खुश हूं मै.. थैंक यू मेरे प्यार को अपनाने के लिए। मुझे तो कुछ..... कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि .... कि क्या कहूं ? क्या करूं? मैं बस बहुत बहुत खुश हूं ।

डॉली (हंसते हुए ) - अरे बस बस , ऐसे ही खुशी में पागल मत हो जाना क्योंकि अभी तो जय भी नहीं है तुम्हें संभालने को।

राज - ओह हां , मेरा जिगरी यार अभी यहां पहुंचने वाला है। यह सब मेरे जय की वजह से हुआ है । अगर वह तुमसे दोस्ती नहीं करता और फिर मुझे तुमसे नहीं मिलाता तो शायद मैं कभी तुमसे अपने दिल की बात नहीं कह पाता। आज , तो हम दोनों यार खूब मस्ती करेंगे । थैंक यू डॉली । तुम देखना, मैं तुम्हें बहुत खुश रखूंगा । कभी कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा ।

डॉली - अच्छा ठीक है , चलो मुझे कोचिंग के लिए भी जाना है । मैं लेट हो गई हूं , शाम को बात करते हैं - कहते हुए डॉली ने फोन रख दिया ।

ललिता जो अब तो खुद पर काबू करके बैठी थी , अब खुशी से चिल्लाने लगी - शाबाश मेरी शेरनी , आखिर तूने अपने दिल की बात सुन ही ली ।

डॉली अब थोड़ी शांत हो गई ।

ललिता - क्या हुआ, अभी तो पागलों की तरह हँस रही थी ।

,

डॉली - मेरे पापा मम्मी ?

ललिता - यार , जय ने कहा ना कि वह संभाल लेगा।

डॉली (मुस्कुरा कर ) - उसी का तो भरोसा है , तभी तो हां कहा । मैं जानती हूं कि मेरा दोस्त मुझे कभी निराश नहीं करेगा । सच में यार वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है ।

ललिता - ओ हेलो मैडम, जरा उस जय से अपना दिमाग हटाओ और मेरी तरफ भी देखो। मैं भी तो दोस्त ही हूं तुम्हारी?

डॉली ( हंसते हुए ) - हां हां तू तो मेरी सबसे प्यारी दोस्त है लेकिन हर बार कोचिंग के लिए लेट कर देती है , देख जरा क्या टाइम हो रहा है ?

, ललिता ने घड़ी की ओर देखा - अरे बाप रे , फिर से लेट लेकिन इस बार मैं तेरी बातों से लेट हुई हूं । तु रूक, अभी आती हूं तैयार होकर, तू अपनी ट्रीट तैयार रखना - लौटते वक्त पानी पूरी खिलानी है तुझे मुझे पेट भर के ।

डॉली - हाँ हाँ पहले जाकर तैयार तो हो!

ललिता अब जल्दी से तैयार होने चली गई।

उधर राज जय का बेसब्री से इंतजार कर रहा था - पता नहीं कहां रह गया ? जरूर कैप्टन सर ने किसी काम में लगा दिया होगा , चल कर देखता हूँ । सोचते हुए वह उस ओर बढ़ चला कि सामने से उसे जय आता दिखाई दिया ।

उसे देख राज के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी , वह अब खुशी से वह आप जय की ओर बढ़ा कि उसे एक शरारत सूझी । उसने देखा कि जय किसी से फोन पर बात कर रहा था और , उसका ध्यान राज पर नहीं गया था तो राज अब जल्दी से कमरे में आकर उदास सा बैठ गया , वह जानता था कि जय अपने कमरे में जाने से पहले एक बार उसके पास जरूर आएगा।

यह आदत इन दोनों ही दोस्तों की थी कि कोई भी एक कहीं बाहर जाए तो लौटते वक्त दूसरे से आकर सबसे पहले मिलता था ।

जय अब राज के कमरे में पहुंचा तो सामने उसने उदास बैठे राज को देखा तो वह परेशान हो गया और राज के पास जाकर खड़ा हो गया ।

जय - क्या बात है , ऐसे मुंह क्यों लटका रखा है?

राज - नहीं कुछ नहीं पर तू बता तेरा काम हुआ?

जय - हां मेरा काम तो हो गया लेकिन कुछ , हुआ है क्या? किसी ने कुछ कहा ?

राज - नहीं ।

जय - किसी से झगड़ा हुआ?

राज - नहीं यार ।

जय - कैप्टन सर ने डाँटा?

राज - अरे नहीं यार।

जय - डॉली से बात हुई ?

राज - हां यार , उसने मना कर दिया ।

जय (हैरानी से ) - मना कर दिया ? ऐसा कैसे हो सकता है? पर मुझे तो लगता था कि वह तुझे पसंद करती है !

,

राज - तुझे कैसे पता ?

जय - यार उसकी बातों से लगता था लेकिन ऐसे कैसे ...

रुक मैं बात करता हूं उससे - कह कर उसने अपनी जेब से फोन निकाला कि राज ने उसके हाथ से फोन ले लिया और हंसने लगा इसकी कोई जरूरत नहीं है यार , लड़की मान गई है ।

जय - लेकिन अभी तो तूने.....

राज - वह तो मैं बस थोड़ा सजा दे रहा था तुझे क्योंकि तूने आने में एक घंटा देर कर दी ।

जय ( हंसते हुए ) - तूने तो जान ही निकाल दी थी मेरी , वह सिन्हा सर मिल गए थे तो उनके साथ था लेकिन अब तु यह सब छोड़ और पहले यह बता कि क्या कहा उसने ?

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राज - तुझे विश्वास नहीं होगा जो उसने कहा ।

जय - ऐसा भी क्या कह दिया उसने ?

राज - उसने मुझे बताया कि वह दसवीं क्लास से ही मुझे पसंद करती है । आज मुझे डॉली मिल ही गई , मैं बहुत खुश हूं।

जय एक पल को तो दसवीं क्लास वाली बात सुन हैरान रह गया फिर हँसते हुए बोला - अब तो पार्टी करेंगे सारी रात ।मेरे यार को उसका प्यार जो मिल गया है - कहते हुए उसने राज को गले से लगा लिया ।

राज - सच यार, मैं बहुत खुश हूं आज । भगवान की कृपा ऐसे ही मुझ पर बनी और मेरे अपनों पर बनी रहे - कहते हुए वह जय से अलग हुआ।

,

जय - तू टेंशन ना ले , आगे भी सब अच्छा ही होगा।

राज - हम्म लगता तो यही है । अब देख , भगवान ने कितना कुछ दिया है मुझे - अच्छा परिवार , भाई से भी बढ़कर दोस्त , देश की सेवा और अब डॉली भी । ये सब सच ही है ना?

जय - सब सच है दोस्त।

राज - बस एक कमी है वह भी पूरी हो जाए तो जिंदगी में किसी चीज को शिकायत नहीं है उसके बाद तो मैं हंसते-हंसते मर जाऊं तो भी गम नहीं ।

जय - पागल , अरे अभी तो डॉली ने हाँ कहा है , उसके साथ घूम फिर, समझ उसे । शादी भी करनी है लेकिन तू यहां मरने की बात कर रहा है ! मरेंगे हमारे दुश्मन।

राज (हंसते हुए ) - सही कहा ,अभी तो दूर तक , जाना है।

जय - अच्छा चल मैं फ्रेश होकर आता हूं जल्दी से । सर के साथ मीटिंग है 1 घंटे में , याद है ना ?

राज - जी बिल्कुल याद है सर।

जय - चल, चलता हूं - कहते हुए वह कमरे से बाहर चला गया।

डॉली और ललिता कोचिंग के बाद पानी पुरी की पार्टी कर वापस पीजी पहुंचे ।

ललिता - यार मजा आ गया कसम से, क्या स्वाद था। मैं तो बहुत खुश हूं कि तुझे तेरा प्यार मिल गया लेकिन अब तो तेरे पास हमारे लिए टाइम नहीं रहेगा । जब तुम ैम्लस स थे तब 10 बार बातें किया करते थे फिर अब तो पता नहीं 10 , मिनट का भी समय मिलेगा या नहीं हमें अपनी दोस्त का !

डॉली (मुस्कुराते हुए ) - मैं रितु नहीं हूं जो प्यार के चक्कर में अपने दोस्तों को भूल जाऊं ।

ललिता - चल देखते हैं क्या होता है ? कहते हुए ललिता चुप हो गई।

डॉली - क्या हुआ ,तू एकदम से कैसे चुप हो गई ?

ललिता - नहीं , ऐसे ही एक सवाल दिमाग में आया है मेरे।

डॉली -क्या?

ललिता - सोच रही हूं कि कभी ऐसा हो कि तुझे दोस्ती और प्यार में से किसी एक को चुनना पड़े तो क्या चुनेगी ?

, डॉली - पागल है क्या? ऐसा सवाल आया ही क्यों है तेरे मन में ? प्यार और दोस्ती दोनों ही अपनी जगह जरूरी है । इनमें से एक का भी ना होना मेरी जिंदगी को अधूरा कर देगा। मैं तो भगवान से हमेशा यही प्रार्थना करूंगी कि कभी ऐसी नौबत ही ना आए जहां मुझे प्यार और दोस्ती में से किसी एक को चुनना पड़े ।

ललिता (हंसते हुए) - मैं तो मजाक कर रही थी , तू इतनी राज दास मत बन।

डॉली - हम्म चल मैं थोड़ा पढ़ लेती हूं वरना राज का फोन आ गया तो पढ़ाई भी नहीं हो पाएगी - कहते हुए वह पढ़ने बैठ गई ।

ललिता - हां हां पढ ले ,दो हफ्ते बाद प्री एग्जाम है । पापा का सपना भी तो पूरा करना है।

उधर राज और जय कैप्टन सर के पास गए तो पता चला कि दोनों की आज रात की पेट्रोलिंग , ड्यूटी थी। दोनों वापस राज के कमरे में आए।

राज - यार अब कैसे बात करूंगा डॉली से ? यहां तो नाइट शिफ्ट हो गई ।

जय ( हंसते हुए) - मेरे पास एक प्लान है जो मैंने पहले ही सोच लिया था।

राज ( हैरानी से) - क्या ?

जय - अरे वह है ना अपना राठी , प्यार का मसीहा । उसे कहूंगा कि प्यार का मामला है तो बस, वह तैयार हो जाएगा तेरी ड्यूटी करने को । तू वहां हमारे पास आराम से बैठना और बातें करना । मैं और राठी पेट्रोलिंग कर लेंगे , तु अपनी डॉली से बातें करते रहना।

राज - हाँ, ये सही रहेगा।

, जय - हम्म, चल मै थोड़ा आराम कर लूँ, रातभर जागना भी है - कहते हुए वह कमरे से बाहर की ओर चला कि उसे कुछ याद आया।

वह वापस मुड़ा और बोला - राज तू कह रहा था ना एक कमी और बाकी है , क्या है वह?

राज यह सुनकर हंसने लगा।

जय - हंस क्यों रहा है?

राज ने जय के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला - मुझे तो मेरी जूलियट मिल गई बस मेरे इस यार की जिंदगी में भी कोई आ जाए जिससे मेरे दोस्त को भी सच्ची मोहब्बत हो जाए फिर हम दोनों भाइयों की जिंदगी सेट हो जाएगी।

जय यह सुनकर जोरों से हंस पड़ा ।

राज - अब तु क्यों हँसा? कोई पहले ही मिल चुकी , है क्या?

जय (गम्भीर होकर ) - है एक जिससे मैं बेइंतहा मोहब्बत करता हूं । जिसके लिए इश्क मेरे रग रग में बहता है और जिसके आगे मुझे कुछ भी नहीं दिखता।

राज ( हैरानी से ) - अबे तू तो छुपा रुस्तम निकला, इतना कुछ हो गया और तूने मुझे खबर तक नहीं लगने दी? चल छोड़ वह सब, बता कौन है वह? अपनी यूनिट की है ? मैं जानता हूं उसे ?

जय - नहीं यूनिट की नहीं है पर तू उसे बहुत अच्छी तरीके से जानता है ।

राज - ओह तभी तुने ईयर रिंग्स लिए थे। यार अब और तंग मत कर , बता जल्दी

, जय - वो कोई और नही......, 7

जय (हंसकर)- वह और कोई नहीं - मेरी धरती है , मेरी ड्यूटी है । भूल गया तू , मेरा बचपन से सपना था आर्मी जॉइन करने का , पापा भी यही चाहते थे और फिर वह भी देश के लिए शहीद हुए थे । मेरे लिए मेरा देश , मेरी धरती सबसे पहले है । मेरी मिट्टी के लिए मेरी मोहब्बत सबसे पहले है , उसके बाद फिर मेरी मां , छोटा भाई और मेरे दोस्त ( राज के कंधे पर हाथ रख ) है । हाँ, उसके बाद कुछ बचा तो देखेंगे - कहते हुए जय हँसने लगा।

राज - हद है यार जय ।

जय - लेकिन मैं उसे पहले ही बता दूंगा कि मेरे और मेरी ड्यूटी के बीच ना आए वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ।

राज यह सुनकर हसँ दिया - जानता हूं तुझे भी और तेरे देश के लिए प्यार को भी लेकिन मुझे पता है कि मेरे इस पागल राँझे को एक दिन अपनी हीर मिलेगी जरूर ।

जय - हम्म , मिल कर भी क्या फायदा यार? हम लोगों की जिंदगी का क्या भरोसा? जब हम अपनी जिंदगी की सच्चाई जानते ही हैं तो भला किसी को अपने पीछे रोने के लिए क्यों छोड़ जाए ?

, राज - बात तो तू सही कह रहा है लेकिन यह जो मोहब्बत है ना , यह अपने आप हो जाती है और जब पता चलता है तब तक हमें यह बीमारी लग जाती है । ये दिल किसी का हुकुम नहीं बजाता , समझा?

जय ( हंसते हुए) - फिलहाल मेरे राँझे, तू अपनी हीर का ख्याल रख । मैं बस 10 मिनट में आया- कह कर वह अपने कमरे में चला गया।
 
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