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Guest
Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए
आज फिर लेट हो गया, हर बार क्लास में लेट पहुँचती हूं इस ललिता की वजह से - कमरे के दरवाजे पर खड़ी बार-बार घड़ी को देखती डॉली बडबड़ाई कि तभी कमरे से बाहर की ओर भागते हुए ललिता आई - सॉरी यार , तुझे तो पता है कि मैं कितनी आलसी हूँ इसलिए तो कहती हूं कोचिंग टाइम से 2 घंटे पहले जगाया कर मुझे । अब देख हो गए ना लेट ,पर तू मेरी सुनती ही कहा है ?
उसकी बात सुन अब डॉली हैरानी से बोली - मेरी वजह से लेट हो गए हैं या तेरी वजह से ? और तू 2 घंटे की बात कर रही है , मैं 3 घंटे से जगा रही हूं तुझे ।
हमारा कोचिंग टाइम 10 बजे का है और मैं 7 बजे से तुझे जगा रही थी पर मैडम जी जागती ही कहा है ? कुंभकरण की बहन जो है ।
ललिता - अच्छा चल, रास्ते मे सुना लेना जितना सुनाना है । लेट हो रहे है ना ?
अब दोनों पीजी से बाहर निकल सड़क पर आ गईं, उनके कदम तेजी से कोचिंग सेंटर के लिए बस पकड़ने को बस स्टैंड की ओर बढ़ चले ।
डॉली - रोज का नाटक हो गया है तेरा ये।
ललिता - अरे तो हो गए लेट ,क्या हो गया ? हमें कौन सा पढ़ना है - कहते वह हंसने लगी ।
डॉली - हम नहीं, सिर्फ तु । मुझे तो इस बार कैसे भी करके बैंक का यह एक्जाम निकालना ही है । पिछले दो बार से कभी दो नंबर से तो कभी चार नंबर से रह जाती हूं लेकिन इस बार तो निकाल कर ही दम लूंगी ।
ललिता (हंसते हुए) - तू तो अपने पापा की बेटी है ,उनका सपना है तुझे बैंक ऑफिसर बनाने का । ठीक भी है लेकिन यही जिंदगी के कुछ अच्छे दिन है हमारे पास तो थोड़ा मजा तो करना ही चाहिए वरना बाद में मां-बाप शादी कर ही देंगे फिर उसके बाद आजादी कहां मिलेगी - कहते हुए ललिता ने हवा में अपने दोनों हाथों को फैला दिया ।
डॉली ने जल्दी से ललिता के हाथों को नीचे किया - सामने देख बस आ गई है , थोड़ा ध्यान रख वरना जिंदगी से आजादी मिल जाएगी फिर कहना कि ऐसी आजादी और कहाँ ?
बस के रूकते ही दोनों फटाफट से उसमे बैठ गई। ललिता अपनी बातों से डॉली को पूरे रास्ते पकाती रही।
थोड़ी देर मे दोनों कोचिंग सेंटर के सामने खड़ी थी । डॉली उसके अंदर जाने को हुई तो ललिता ने उसे रोक लिया - आज बंक मारते है यार प्लीज ।
डॉली (खींझकर ) - नहीं , एक तो वैसे ही लेट हो गए हैं और तेरा ये रोज का बंक का अलाप । एक काम कर, तू जा घूमने। मैं तो चली - कहते हुए वह कोचिंग सेंटर मे चली गई । ललिता भी अब बेमन से उसके पीछे पीछे चली गई।
तीन घंटे बाद जब डॉली और ललिता कोचिंग से निकले कि डॉली के पापा का फोन आया ।
पापा - कैसी हो बेटा?
डॉली - बढ़िया ।
पापा - ऐसे ही मन लगाकर पढ़ाई किया करो , तुम को बैंक ऑफिसर बनना है । यह सुन डॉली थोड़ी उदास हो गई ।
पापा - क्या हुआ , हमारी बेटी चुप कैसे हो गई ?
डॉली - पापा पिछले दो बार से मैं आपका सपना पूरा नहीं कर पाई , इस बार भी कहीं ....
यह सुनकर डॉली के पापा हँस पड़े - तो क्या हुआ ? दुनिया में सभी लोग बस बैंक ऑफिसर होते हैं क्या ? हां , यह मेरा सपना जरूर है कि तुम बैंक ऑफिसर बनो लेकिन यह तुम्हारे जीवन का कोई आखिरी लक्ष्य नहीं है ।
मैं जानता हूं कि मेरी बेटी मेहनत करती है तो बस वही करो लेकिन याद रखना , तुम चाहे बैंक ऑफिसर बनो या ना बनो पर मेरी बेटी हमेशा रहोगी । हमेशा स्वाभिमान और खुद्दारी से जीना , कभी कोई ऐसा काम नही करना कि तुम खुद से ही नजरे ना मिला पाओ । जो भी करो , गर्व से करो।
डॉली ( मुस्कुराकर ) - जी पापा। मैं हमेशा यह बात याद रखूंगी ।
पापा - चलो , अब मुझे भी जाना है - कह कर फोन रख दिया।
ललिता - वाह यार, तेरे पापा ने अपने सपने से तुझे आजाद कर दिया है । तू फालतू ही टेंशन लेती है । अब तो चल यार , थोड़ा घूम आते है आस पास ।
डॉली ( हंसते हुए ) - मेरे पापा ने आजाद किया है पर तेरे पापा ने तुझे आजाद नहीं किया । तुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ता ?
ललिता (लापरवाही से ) - अरे तो ऑफिसर बनके क्या कर लूंगी? वैसे यह सब मैं अपने पापा के लिए ही कर रही हूं कि की पढ़ नहीं रही ढंग से ।
डॉली (हैरानी से ) - वह कैसे ?
ललिता - देख अगले 1 साल में पापा मेरी शादी कर ही देंगे । है ना ?
डॉली - हां तो ?
ललिता - तो अगर मैं बैंक ऑफिसर बन भी गई तो क्या फायदा? अभी 2 महीने में प्री होगा , उसके बाद उसका रिजल्ट आएगा। फिर मेन होगा, फिर उसका रिजल्ट फिर इंटरव्यू और उसके बाद सलेक्शन फिर ट्रेनिंग और उसके बाद जॉइनिंग । इस चक्कर में ही पूरा साल भर से ऊपर ही लग जाएगा लेकिन तब तक तो मेरी शादी हो जाएगी फिर मेरी सैलरी आ जाएगी मेरे ससुराल और पति के पास तोे मेरे पापा का फायदा थोड़े हुआ ? मेरे पापा को क्या मिलेगा? कुछ नहीं ना, उल्टा शादी में दहेज और देना पड़ेगा ।
तो फिर मैं क्यों मदद करूं नौकरी कर अपने ससुराल वालों की जिन्हें मै जानती भी नहीं कि कौन होंगे वो ? बिल्कुल नहीं मैं उनके लिए इतनी मेहनत क्यों करूं ?
डॉली - तेरा कुछ नहीं हो सकता । तू एक काम कर, पापा से कह देती कि तेरे बस का नहीं है यह सब ।
ललिता - पागल है क्या ? अगर मैंने ऐसा कह दिया तो 1 साल में नहीं 1 महीने में ही मेरी शादी करवा देंगे यार । इसी के बहाने तो कुछ वक्त के लिए आजादी मिल रही है खुल के जीने की ।
डॉली यह सुनकर हंसने लगी- तु सच में चापली ही है।
ललिता - श्श..... कोई सुन लेगा यार ,फिर सबको पता पड़ जाएगा कि मेरी मम्मी मुझे चापली कह कर बुलाती है ।
डॉली - यह बात तो सबको वैसे ही पता पड़ जानी है तेरी बातें सुन के ।
ललिता (मुंह फुलाते हुए ) - जा , मैं नहीं बात करती तुझसे ।
डॉली - हाँ , जैसे मै तो जानती नहीं कि मेरी चापली खाना खाए बिना रह सकती है पर बात बनाए बिना नहीं । अच्छा चल तुझे आइसक्रीम खिलाती हूं ।
ललिता ( खुशी से उछलते हुए ) - फिर मैं तुझे माफ करती हूँ ।
दोनों आइसक्रीम खाकर अपने पीजी में आ गई ।
ललिता - चल, बाकी लोगों से मिलते हैं । भावना , मीरा यही है ना आज।
डॉली - तू चल, मैं भी आती हूं ।
आज फिर लेट हो गया, हर बार क्लास में लेट पहुँचती हूं इस ललिता की वजह से - कमरे के दरवाजे पर खड़ी बार-बार घड़ी को देखती डॉली बडबड़ाई कि तभी कमरे से बाहर की ओर भागते हुए ललिता आई - सॉरी यार , तुझे तो पता है कि मैं कितनी आलसी हूँ इसलिए तो कहती हूं कोचिंग टाइम से 2 घंटे पहले जगाया कर मुझे । अब देख हो गए ना लेट ,पर तू मेरी सुनती ही कहा है ?
उसकी बात सुन अब डॉली हैरानी से बोली - मेरी वजह से लेट हो गए हैं या तेरी वजह से ? और तू 2 घंटे की बात कर रही है , मैं 3 घंटे से जगा रही हूं तुझे ।
हमारा कोचिंग टाइम 10 बजे का है और मैं 7 बजे से तुझे जगा रही थी पर मैडम जी जागती ही कहा है ? कुंभकरण की बहन जो है ।
ललिता - अच्छा चल, रास्ते मे सुना लेना जितना सुनाना है । लेट हो रहे है ना ?
अब दोनों पीजी से बाहर निकल सड़क पर आ गईं, उनके कदम तेजी से कोचिंग सेंटर के लिए बस पकड़ने को बस स्टैंड की ओर बढ़ चले ।
डॉली - रोज का नाटक हो गया है तेरा ये।
ललिता - अरे तो हो गए लेट ,क्या हो गया ? हमें कौन सा पढ़ना है - कहते वह हंसने लगी ।
डॉली - हम नहीं, सिर्फ तु । मुझे तो इस बार कैसे भी करके बैंक का यह एक्जाम निकालना ही है । पिछले दो बार से कभी दो नंबर से तो कभी चार नंबर से रह जाती हूं लेकिन इस बार तो निकाल कर ही दम लूंगी ।
ललिता (हंसते हुए) - तू तो अपने पापा की बेटी है ,उनका सपना है तुझे बैंक ऑफिसर बनाने का । ठीक भी है लेकिन यही जिंदगी के कुछ अच्छे दिन है हमारे पास तो थोड़ा मजा तो करना ही चाहिए वरना बाद में मां-बाप शादी कर ही देंगे फिर उसके बाद आजादी कहां मिलेगी - कहते हुए ललिता ने हवा में अपने दोनों हाथों को फैला दिया ।
डॉली ने जल्दी से ललिता के हाथों को नीचे किया - सामने देख बस आ गई है , थोड़ा ध्यान रख वरना जिंदगी से आजादी मिल जाएगी फिर कहना कि ऐसी आजादी और कहाँ ?
बस के रूकते ही दोनों फटाफट से उसमे बैठ गई। ललिता अपनी बातों से डॉली को पूरे रास्ते पकाती रही।
थोड़ी देर मे दोनों कोचिंग सेंटर के सामने खड़ी थी । डॉली उसके अंदर जाने को हुई तो ललिता ने उसे रोक लिया - आज बंक मारते है यार प्लीज ।
डॉली (खींझकर ) - नहीं , एक तो वैसे ही लेट हो गए हैं और तेरा ये रोज का बंक का अलाप । एक काम कर, तू जा घूमने। मैं तो चली - कहते हुए वह कोचिंग सेंटर मे चली गई । ललिता भी अब बेमन से उसके पीछे पीछे चली गई।
तीन घंटे बाद जब डॉली और ललिता कोचिंग से निकले कि डॉली के पापा का फोन आया ।
पापा - कैसी हो बेटा?
डॉली - बढ़िया ।
पापा - ऐसे ही मन लगाकर पढ़ाई किया करो , तुम को बैंक ऑफिसर बनना है । यह सुन डॉली थोड़ी उदास हो गई ।
पापा - क्या हुआ , हमारी बेटी चुप कैसे हो गई ?
डॉली - पापा पिछले दो बार से मैं आपका सपना पूरा नहीं कर पाई , इस बार भी कहीं ....
यह सुनकर डॉली के पापा हँस पड़े - तो क्या हुआ ? दुनिया में सभी लोग बस बैंक ऑफिसर होते हैं क्या ? हां , यह मेरा सपना जरूर है कि तुम बैंक ऑफिसर बनो लेकिन यह तुम्हारे जीवन का कोई आखिरी लक्ष्य नहीं है ।
मैं जानता हूं कि मेरी बेटी मेहनत करती है तो बस वही करो लेकिन याद रखना , तुम चाहे बैंक ऑफिसर बनो या ना बनो पर मेरी बेटी हमेशा रहोगी । हमेशा स्वाभिमान और खुद्दारी से जीना , कभी कोई ऐसा काम नही करना कि तुम खुद से ही नजरे ना मिला पाओ । जो भी करो , गर्व से करो।
डॉली ( मुस्कुराकर ) - जी पापा। मैं हमेशा यह बात याद रखूंगी ।
पापा - चलो , अब मुझे भी जाना है - कह कर फोन रख दिया।
ललिता - वाह यार, तेरे पापा ने अपने सपने से तुझे आजाद कर दिया है । तू फालतू ही टेंशन लेती है । अब तो चल यार , थोड़ा घूम आते है आस पास ।
डॉली ( हंसते हुए ) - मेरे पापा ने आजाद किया है पर तेरे पापा ने तुझे आजाद नहीं किया । तुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ता ?
ललिता (लापरवाही से ) - अरे तो ऑफिसर बनके क्या कर लूंगी? वैसे यह सब मैं अपने पापा के लिए ही कर रही हूं कि की पढ़ नहीं रही ढंग से ।
डॉली (हैरानी से ) - वह कैसे ?
ललिता - देख अगले 1 साल में पापा मेरी शादी कर ही देंगे । है ना ?
डॉली - हां तो ?
ललिता - तो अगर मैं बैंक ऑफिसर बन भी गई तो क्या फायदा? अभी 2 महीने में प्री होगा , उसके बाद उसका रिजल्ट आएगा। फिर मेन होगा, फिर उसका रिजल्ट फिर इंटरव्यू और उसके बाद सलेक्शन फिर ट्रेनिंग और उसके बाद जॉइनिंग । इस चक्कर में ही पूरा साल भर से ऊपर ही लग जाएगा लेकिन तब तक तो मेरी शादी हो जाएगी फिर मेरी सैलरी आ जाएगी मेरे ससुराल और पति के पास तोे मेरे पापा का फायदा थोड़े हुआ ? मेरे पापा को क्या मिलेगा? कुछ नहीं ना, उल्टा शादी में दहेज और देना पड़ेगा ।
तो फिर मैं क्यों मदद करूं नौकरी कर अपने ससुराल वालों की जिन्हें मै जानती भी नहीं कि कौन होंगे वो ? बिल्कुल नहीं मैं उनके लिए इतनी मेहनत क्यों करूं ?
डॉली - तेरा कुछ नहीं हो सकता । तू एक काम कर, पापा से कह देती कि तेरे बस का नहीं है यह सब ।
ललिता - पागल है क्या ? अगर मैंने ऐसा कह दिया तो 1 साल में नहीं 1 महीने में ही मेरी शादी करवा देंगे यार । इसी के बहाने तो कुछ वक्त के लिए आजादी मिल रही है खुल के जीने की ।
डॉली यह सुनकर हंसने लगी- तु सच में चापली ही है।
ललिता - श्श..... कोई सुन लेगा यार ,फिर सबको पता पड़ जाएगा कि मेरी मम्मी मुझे चापली कह कर बुलाती है ।
डॉली - यह बात तो सबको वैसे ही पता पड़ जानी है तेरी बातें सुन के ।
ललिता (मुंह फुलाते हुए ) - जा , मैं नहीं बात करती तुझसे ।
डॉली - हाँ , जैसे मै तो जानती नहीं कि मेरी चापली खाना खाए बिना रह सकती है पर बात बनाए बिना नहीं । अच्छा चल तुझे आइसक्रीम खिलाती हूं ।
ललिता ( खुशी से उछलते हुए ) - फिर मैं तुझे माफ करती हूँ ।
दोनों आइसक्रीम खाकर अपने पीजी में आ गई ।
ललिता - चल, बाकी लोगों से मिलते हैं । भावना , मीरा यही है ना आज।
डॉली - तू चल, मैं भी आती हूं ।