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Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

रात को राज जय और राठी से थोड़ी थोड़ी दूर बैठा डॉली से बात कर रहा था । उसे खुश देखकर जय मुस्कुरा दिया और पेट्रोलिंग में लग गया।

राठी अब दूर से ही चिल्लाने लगा - ओ कबीरे ,इस लड़के ने लड़की कहां से पटा ली?

जय (हंसते हुए ) - अरे क्या बताऊं मन्जीते , , लड़की तो पहले से ही पटी हुई थी पर हमारे इस बंदे ने ही देर कर दी कहने में ।

राठी ( हैरानी से ) - ऐसे कैसे ? अभी कल तक तो अकेला था फिर आज कैसे चमत्कार हुआ ?

जय - कुछ नहीं यार , लड़का लड़की सालों से एक-दूसरे को पसंद करते थे फिर अब दोस्ती और कल इजहार हुआ।

राठी - फिर चट मंगनी और पट ब्याह।

अब जय और राठी हंसने लगे।

राज (खीझकर ) - तुम लोग धीरे-धीरे बोलो ना , मुझे परेशानी हो रही है बात करने में । वैसे भी ये , राठी कब से चिल्ला कर बातें कर रहा है, पूरे कैन्ट को बता दोगे ऐसे तो तुम मेरी लव स्टोरी ।

राठी - तो इतनी दूर से हम क्या फुसफुसाए ? ओह, सॉरी यार हम तो भूल ही गए थे कि हमारा राज अब हमारा नहीं रहा , यह तो पराया हो गया है । क्यों कबीरे, सही कहा ना ?

दूर खड़ा जय फिर से हंस पड़ा - सही कहा मन्जीते ।

अब दोनों हंसते हुए गाने लगे - दोस्त दोस्त ना रहा ।

उनकी हरकतें देख कर राज हँसने लगा।

डॉली - क्या हुआ ,किस से बात कर रहे हो ?

, राज - अरे यही हैं जय और मेरा दोस्त मन्जीत राठी । दोनों तंग कर रहे हैं मुझे ।

डॉली - अगर जिंदगी में अच्छे दोस्त ना हो तो बड़ी बेजान सी लगती है - कहते हुए उसने घोड़े बेच कर सो रही ललिता को मुस्कुराते हुए देखा।

राज - हां सही कहा । यही वह लोग हैं जो जिंदगी में हमें कभी निराशा और अकेलापन महसूस नहीं होने देते ।

डॉली - अच्छा ये मनजीत राठी कौन है ?

राज - हमारा ही बैचमेट है। बहुत जिंदादिल इंसान है । इसके पापा हरियाणा से तो माँ पंजाब से है । इससे कोई काम करवाना हो तो बस दोस्ती और प्यार का वास्ता देकर करवाया जा सकता है । अब देखो ड्यूटी मेरी है पर फिर भी कैसे खुशी-खुशी लगा हुआ है ? बेटा है इसका एक साल का, दिन भर उसी की बातें करता रहता है , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।

मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।

डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।

राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।

इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।

मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।

डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।

राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।

इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , खिलाफ ,बता अभी ।गोलियों से भून देता हूं उन्हें ।

दूर खड़ा जय मुस्कुरा दिया - मन्जीते , गोलियों की जरूरत नहीं है । तु बस उनके सामने जाकर खड़ा हो जाना और काम हो जाएगा ।

राज अब उठ खड़ा हुआ - तू इधर आ राठी , ले तू ही बात कर ले अपनी भाभी से।

मन्जीत - अरे सॉरी भाई , तू तो बुरा मान गया - कहते हुए अब थोड़ी और दूर चला गया ।

राज - अच्छा सुनो , क्या हम मिल सकते हैं ?

डॉली ।- मिला तो मैं भी चाहती हूं लेकिन कैसे मिलेंगे ??

राज ( कुछ देर सोच कर ) - देखता हूं अगर छुट्टी का जुगाड़ हो जाए तो, फिर मैं और जय दोनों , आएंगे तुम्हारे शहर। डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है ना ?

डॉली (हंसते हुए ) - कह तो ऐसे रहे हो कि डेढ़ सौ किलोमीटर नहीं सिर्फ डेढ़ किलोमीटर ही दूर है पर मैंने सुना है कि आर्मी वालों को छुट्टी बड़ी मुश्किल से मिलती है ।

राज - हां जी बिल्कुल सही सुना है पर तुमसे मिलने के लिए कुछ ना कुछ तिकडम तो लगानी ही पड़ेगी। अच्छा तुम्हारा पेपर कब है ?

डॉली - 1 अगस्त ।

राज - अभी तो 15 दिन है , देखते हैं क्या कर सकते हैं पर तुम बाद में मना मत कर देना कि नहीं मिल सकती।

, डॉली - नहीं , अभी तो मैं पूरा एक महीना यही हूं ।

राज - तो ठीक है ,मैं जय से बात करता हूं । दोनों मिलकर कुछ सोचते हैं कि क्या किया जाए ? तुम सो जाओ - कहते हुए उसने फोन काट दिया ।

डॉली अब सोने की कोशिश करने लगी लेकिन राज , जय से मिलने की खुशी में उसे अब नींद ही नहीं आ रही थी।

राज अब राठी की ओर बनावटी गुस्से से देखने लगा ।

राठी उसे छेड़ने के अंदाज में जय से बोला - कबीरे, भाभी है कैसी ?

जय - हां , अच्छी है ।

,

राठी - तूने देखी नहीं है क्या ?

जय - नहीं , देखी तो नहीं है लेकिन बातें जरूर की है । बड़ी अच्छी बातें करती है तो पता चलता है कि साफ दिल की है।

राठी - तो गधे तूने उसे क्यों छोड़ दिया इस राज के लिए, तू ही पहले उसे पटा लेता । बार बार ऐसी अच्छी लड़की नहीं मिलती।

जय ( हंस कर ) - अरे मंजीते, अपने दोस्त के लिए तो मैं ऐसी सैकड़ों लड़कियां कुर्बान कर दूं । हम दोनों भाईयों के बीच कोई नहीं आ सकता ।

राज - क्यों करवा ली ना अपनी बेइज्जती ? सुन राठी, तू चाहे कितना भी जहर घोल ले मेरे और जय के बीच लेकिन तू हम दोनों को कभी भी अलग नहीं कर पाएगा । हम दोनों दोस्तों के बीच में तू तो क्या कभी कोई नहीं आ पाएगा।

, तू बहुत देर से तंग कर रहा है मुझे, अब देखता हूं तुझे - कहते हुए राज राठी की ओर भागा । राठी बचने को इधर उधर भागने लगा ।

राज - बडे मजे ले रहा था ना, रूक तु ।

राठी अब भाग कर जय के पीछे आ खड़ा हुआ - यार ये मजनू तो सच में पागल हो गया है, दोस्तों की जान का दुश्मन बना बैठा है ।

जय ( हंसते हुए) - अरे यार , मजाक कर रहा था ।

राठी दुखी सा मुँह बनाकर बोला - थोड़ा मस्ती मजाक तो चलता है इसमें इतना रूठने की क्या जरूरत है? तूने अगर मुझे हाथ भी लगाया तो मैं भाभी से तेरी शिकायत कर दूंगा फिर देखना वह तुझे कैसे सबक सिखाएंगी।

राज - जा छोड़ दिया तुझे , वह तो मैं अपने , भतीजे की वजह से छोड़ रहा हूं वरना वह कहेगा कि चाचू ने पापा को मारा।

राठी - बहुत-बहुत मेहरबानी जनाब ।

जय - जा मंजीते, आराम कर। अब हम ड्यूटी कर लेंगे।

राठी - ठीक है कबीरे, एक तू ही मेरा सच्चा दोस्त है जो मेरे बारे में सोचता है वरना यह तो मुझे रातों में जगाकर ड्यूटी करवा रहा है अपने प्यार के लिए - कहते हुए वह गुनगुनाता हुआ वहां से चला गया ।

राज - कमाल का इंसान है अपना राठी, पिछले 7 महीने में बेटे को देखने के लिए तरस गया है और तुझे पता है , ये पागल क्या कहता है ? कहता है कि दुश्मन की किसी भी गोली में इतना दम नहीं कि इस मंजीत राठी की सांस रोक दे ।

, दोनों दोस्त अब हँसने लगे।

जय - अच्छा यह बता, क्या बात हुई ? सब बढ़िया है ना?

राज - सब बढ़िया पर एक इच्छा है यार ।

जय - क्या?

राज - एक बार देखना चाहता हूं उसे, 7 साल हो गए डॉली को देखे हुए ।

जय - वह सब तो ठीक है लेकिन छुट्टी का भी तो जुगाड़ करना पड़ेगा ना तेरी।

राज - मेरी ? ये तेरी मेरी कब से होने लगा ? तुझे पता है ना, ड्यूटी के काम के अलावा मैं कहीं भी तेरे बिना नहीं जाता और फिर मैं डॉली से मिलने जा रहा हूं ।भूले मत कि वह तेरी भी दोस्त है , तु , भी तो देखना चाहता होगा उसे ? तु मुझसे अलग नहीं हो सकता कभी भी।

जय - जानता हूं और मैं खुद हमेशा तेरे साथ रहूंगा ।इतनी आसानी तेरा पीछा नहीं छोडूंगा लेकिन बात वही है यार - छुट्टी की परेशानी ।

राज - सिन्हा सर से बात करता हूं । कुछ होता है तो ??

जय - ठीक है , देखते हैं ।

अब दोनों वापस पेट्रोलिंग में लग गए।
 
अगले दिन दोपहर को डॉली के पास राज का फोन आया कि उसकी और जय की छुट्टी मंजूर हो गई है पर एक दिन की। जिस दिन तुम्हारा पेपर है , उसी दिन की छुट्टी ली है हमने।

यह सुनकर डॉली बहुत खुश हुई , उसने ललिता को बताया कि पेपर वाले दिन जय और राज आ , रहे हैं ।

ललिता ( हैरानी से ) -सच्ची ? चलो अब तक तो आवाज ही सुनी थी , अब देख भी लेंगे कि कैसे हैं तुम्हारे करण अर्जुन?

डॉली ( हंसते हुए ) - तू भी ना ! मुझे भी देखने है दोनों ।राज की शक्ल भी हल्की सी याद है, सामने आएगा तो पहचान लूंगी ।

ललिता दुखी सा मुंह बनाते हुए बोली - लेकिन मैं उन्हें कैसे देखूंगी, क्योंकि मेरा तो एग्जाम का सेंटर अलग है और तेरा अलग।

डॉली - अरे सिर्फ डेढ़ घंटे का ही तो पेपर है , मैं उन्हें रोक लूंगी । तू पीजी में आकर उनसे मिल लेना ।

ललिता - ठीक है ।

2 हफ्ते तक डॉली और ललिता ने जी तोड़ मेहनत , की । डॉली रात को राज से बातें करती । सब कुछ अच्छा चल रहा था पर जय के फोन अब कम हो गए थे । ललिता ने 1 दिन डॉली का ध्यान इस ओर खींचा - जय तुझसे अब कम बातें करने लगा है और फोन करता भी है तो ज्यादा देर बात नहीं करता ।

जब डॉली ने जय से इसकी वजह पूछी तो बोला - मैं बस तुम्हें और राज को एक साथ ज्यादा वक्त देना चाहता हूं । देखो, पहले हम तीनो दोस्त थे , तीनो का एक दूसरे के टाइम पर बराबर का हक था लेकिन अब तुम दोनों दोस्ती से आगे बढ़ चुके हो ।यहां वैसे भी कम टाइम मिलता है और उसमें भी अगर मैं तुम्हारा टाइम ले लूंगा तो राज को क्या मिलेगा?

अभी तुम दोनों एक दूसरे को समझो , पहचानो क्योंकि जब तक एक दूसरे को नहीं समझोगे बात कैसे आगे बढ़ेगी?

,

डॉली - थैंक्स जय , तुम कितना सोचते हो हम लोगों के बारे में ।

जय मुस्कराते हुए बोला - फर्ज है हमारा ।

डॉली ने बाद में ललिता को बताया कि जय क्यों कम फोन करता है ।

डॉली - सच ललिता , कितना ध्यान रखता है अपने दोस्तों का!

ललिता यह सुनकर मुस्कुरा दी - यार बड़ा समझदार लड़का है ।

2 हफ्ते कैसे निकल गए, किसी को पता ही नहीं चला। कल डॉली और ललिता का बैंक का पेपर था तो आज कोचिंग की छुट्टी थी । दोनों दोस्त कमरे में ही बैठ कर पढ़ रही थी , ललिता तो पेपर नहीं देना चाहती थी पर डॉली ने उसे मना ही लिया था । जय का फोन आया ,उसने डॉली को बेस्ट , ऑफ लक बोला और ललिता को भी ।

कुछ ही देर बाद राज का फोन आया कि उनकी छुट्टी कैंसिल हो गई है इसलिए वह कल मिलने नहीं आ पाएंगे लेकिन कोशिश करेंगे कि कुछ दिनों बाद छुट्टी मिल जाए। यह सुनकर डॉली उदास हो गई ।

राज ने उसे समझाया कि कोई बात नहीं , फिर किसी और दिन मिलेंगे । तुम बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो । डॉली ने अब फोन रख दिया।

ललिता ने जब उसकी उदासी की वजह पूछी तो डॉली ने बताया कि राज और जय की छुट्टी कैंसिल हो गई है वो कल नहीं आएंगे ।

ललिता भी यह सुनकर उदास हो गई कि अब वो भी नहीं देख पाएेंगी उन्हें।

अगले दिन ललिता और डॉली दोनों अपने-अपने , एग्जाम सेंटर्स की ओर निकल गई । डॉली अपने सेंटर पहुंची , जब वह पेपर देकर बाहर आई और बस स्टॉप पर खड़ी होकर बस का इंतजार करने लगी तो उसे महसूस हुआ कि कोई उसे लगातार घूरे जा रहा था । डॉली ने इधर-उधर देखा लेकिन उसे कोई दिखाई नहीं दिया , वह परेशान सी हो गई ।

उसने अब राज को फोन मिलाया ।

डॉली - राज कैसे हो ?

राज शायद जल्दी में था - मै बाद मे बात करता हूँ, अभी काम कर रहा हूं - कहते हुए उसने फोन काट दिया।

डॉली ने अब जय को फोन किया पर उसने उठाया नहीं।

डॉली को घबराहट होनी शुरू हो गई कि कोई तो उस पर नजर जमाए बैठा था ...,
 
डॉली मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी कि जल्दी से बस आ जाए और वह उसमें बैठ जाए । भरी दोपहरी की वजह से आसपास लोग भी बहुत कम ही थे , अब उसे महसूस हुआ कि कोई उसके पीछे आकर खड़ा हो गया है।

डॉली ने घबराकर पीछे मुड़कर देखा तो अपने सामने खड़े इंसान हो देख हैरान रह गई - तुम ? तुम यहां कैसे और ऐसे मुझ पर नजर क्यों रख रहे थे ?

नमन (मुस्कुराकर) - मैं तो यहां किसी काम से आया था कि तुम खड़ी दिखाई दी। सोचा पहले पक्का कर लू कि तुम ही हो ना !

डॉली अब गुस्से में मुंह फेर कर खड़ी हो गई और बस का इंतजार करने लगी।

नमन (गुस्से में ) - तुम ही हर वक्त जहर भरती थी ना रितु दिमाग में मेरे लिए? अब तो खुश हो ना तुम ?

डॉली - मैंने बस वही कहा जो सच था। तुम अच्छे लड़के नहीं हो और वही मैंने रितु को भी बताया । हाँ, वह बात अलग है कि उसने मेरी बातों पर भरोसा नहीं किया और तुम्हारी असलियत जानने में उसने देर कर दी।

नमन - एक बात बताओ , तुम्हें तो कभी कुछ , नहीं कहा मैंने फिर तुम क्यों इतनी फड़फड़ा रही हो और वैसे भी मेरे पास लड़कियों की कोई कमी नहीं है । रितु से भी अच्छी अच्छी लड़कियां मिल जाएंगी मुझे ।

डॉली - तुम सच में बहुत घटिया इंसान हो । देखना एक दिन तुम अकेले पड़ जाओगे और कोई तुम्हारे साथ नहीं होगा।

नमन - हाँ हाँ, बहुत देखे तुम्हारे जैसे! खुद को कोई घास भी नहीं डालता तो जलती हो इससे ।

डॉली - मैं तुम्हारी तरह घटिया नहीं ।

नमन (हंसकर) - वैसे तुम चाहो तो मैं तुम्हें थोड़ी बहुत घास डाल सकता हूं ।

, डॉली कुछ कहती कि इतने में वहां एक लड़का आ गया और नमन से बोला - क्या बात है ? क्यों बहस कर रहे हो लड़की से ?

नमन - तू चुपचाप अपना रास्ता पकड, तुझसे बात नहीं कर रहा हूं मैं ।

उस लड़के ने अब डॉली की ओर देखा - तुम जानती हो इसे?

डॉली - यह मेरे कॉलेज में साथ पढा एक आवारा लड़का है जो इस वक्त मुझसे बहस कर रहा है क्योंकि मैंने इसकी सच्चाई अपने दोस्त को बताई थी ।

नमन अब गुस्से में डॉली की ओर बढा - आवारा किसे बोल रही है ?

,

कि तभी लड़के ने उसे काँलर पकड दूर कर दिया - क्यों समझ नहीं आ रहा? वह तुझसे बात नहीं करना चाहती तो क्यों बार-बार बकवास कर रहा है ?

नमन - तू है कौन और तेरे को क्यों मिर्ची लग रही है - कहते हुए उसने उस लड़के को धक्का दिया । वह लड़का थोड़ा पीछे हट गया उसके धक्के से।

डॉली परेशान सी बोली - दूर रहो नमन उससे , प्लीज यहां हाथापाई कर तमाशा मत बनाओ।

उसके बाद नमन डॉली की ओर फिर से गुस्से में आगे बढा कि उस लड़के ने आगे बढ़ नमन के गाल पर एक करारा थप्पड़ जड़ दिया जिससे नमन का सिर बुरी तरह घूमने लगा। अब उसने खुद को संभाला और वहां से नौ दो ग्यारह हो , गया ।वह लडका डॉली को देख मुस्कुरा दिया ।

डॉली - थैंक यू , वैसे आपको जरूरत नहीं थी बीच में आने की ।

डॉली अब वहां से थोड़ा दूर हट गई । उसने देखा कि वह लड़का उसके पास खड़ा हो गया है , डॉली को उस पर गुस्सा आ रहा था कि एक तो नमन और उसके बीच आ गया फिर यहां मेरे बगल में आकर खड़ा हो गया है। कोई देखेगा तो क्या सोचेगा?

डॉली ने देखा कि वह लड़का उसे देख मुस्कुरा रहा है । वह सोचने लगी कि आज किस्मत ही खराब है मेरी क्योंकि पहले तो बस नहीं मिल रही फिर नमन और अब ये लडका ! तभी उसके कानों में लड़के की आवाज आई - तो बताइए, कैसी है जनाब ?

, डॉली हैरानी से उसे देखने लगी - आपने मुझसे कहा ?

लड़का - क्यों ? यहां कोई और भी दिख रहा है तुम्हें ?

डॉली - सॉरी , मैं आपको नहीं जानती - कहते हुए अब वह उससे एक बार फिर दूर खड़ी हो गई लेकिन वह लड़का फिर उसी के पास आकर खड़ा हो गया - लेकिन मैं तो तुम्हें बहुत अच्छे से जानता हूं और पसंद भी बहुत करता हूं ।

डॉली (गुस्से में ) - आ गए ना अपनी औकात पर ? तभी तो उस नमन के सामने बड़े हीरो बन रहे थे और उसे भगाकर अब खुद ही ऐसी बेशर्म की तरह बकवास कर रहे हो ? शक्ल से तो किसी शरीफ घर के लगते हो और हरकत ऐसी? लेकिन यह मत सोचना कि मैं अकेली हूं तो डर , जाउंगी - कहते हुए उसने अपनी स्लीपर निकाल ली - अगर दोबारा से कोई घटिया बात की तो इसी से मार मार कर तुम्हारी अकल ठिकाने लगा दूंगी ।

लडका यह देखते ही दो कदम पीछे हटा और जोर से हँसने लगा।

डॉली अब हैरानी से उसे देखने लगी - हंस क्यों रहे हो ? रुको तुम्हारे जैसे बेशर्म और ढीठ लड़के ऐसे नहीं मानेंगे - कहते हुए डॉली अब उसकी और स्लीपर लेकर बड़ी कि वह लड़का हंसते हुए बोला - पागल हो क्या यार? अरे कोई ऐसे ट्रीट करता है क्या किसी को ? कमाल हो मुझे नहीं पहचाना तुमने?

डॉली - कौन हो तुम ? जल्दी बताओ वरना अभी सबक सिखाती हूं ।

उस लड़के ने अपनी जेब से फोन निकाला और , एक नंबर डायल किया कि तभी डॉली का फोन बज उठा । उसने स्लीपर वापस पैर में पहनी और फोन निकाल कर देखा तो स्क्रीन पर कॉलर का नाम देख हैरानी से उस लड़के को देखने लगी ।

वह लड़का बोला - अब समझ आया कुछ ? मैं तो इतनी दूर से बस तुमसे मिलने आया था और तुम यहां स्लीपर लेकर मेरा स्वागत कर रही हो !

डॉली (हडबडाते हुए) - लेकिन तुमने तो कहा था कि.... वह चुप हो गई । उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि कहे तो कहे क्या ?

वह शर्मिन्दा थी - आई.... आई एम सॉरी। मुझे कैसे पता होगा कि तुम हो ? तुमने तो मुझे डरा ही दिया था।

अब राज हसँता हुआ डॉली के पास आया और अपने दोनों कान पकड़ लिए - आई एम वेरी सॉरी। मैं तो बस तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था , लेकिन वो नमन यहाँ आ गया फिर तुम परेशान हो गई।

डॉली के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। राज ने अब आगे बढ़ डॉली का हाथ थामा और बोला - देख लो, किसकी मोहब्बत सच्ची है? हम दोनों ही एक दूसरे को 7 साल से बिना देखे पसंद करते हैं लेकिन तुम मुझे नहीं पहचान पाई जबकि मैं तुम्हें एक नजर में पहचान गया ।

डॉली (मुस्कुराते हुए) - इसमें मेरी गलती नहीं है , तुम बिल्कुल ही बदल गए हो । जरा भी पहचान नहीं पाई मैं और रही बात तुम्हारी , तो सबको पता है कि पुलिस वालों की नजरें बहुत तेज होती हैं - कहते हुए वह हँस पड़ी ।

राज मुस्कुराता हुआ डॉली को बड़े प्यार से देखता रहा।

डॉली अब शांत हो गई - क्या हो गया, ऐसे चुप , चुप क्यों मुस्कुरा रहे हो ?

राज - अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मैं तुम्हें एक बार गले लगा सकता हूं ?दरअसल मैं बहुत बहुत खुश हूं । ऐसा लग रहा है जैसे कुछ सपना पूरा हो गया है । 7 साल के लंबे इंतजार के बाद आज मेरा प्यार मेरी आंखों के सामने है , मैं बस इतना महसूस करना चाहता हूं कि यह सपना नहीं हकीकत है ।

डॉली ने आसपास देखा कि ज्यादा लोग तो नहीं है पर वहां फिलहाल कोई नही था। उसने अब मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया - सच कहूं तो मैं भी खुद को विश्वास दिलाना चाहती हूं कि तुम मेरा सपना नहीं हकीकत हो ।

राज अब आगे बढ़ा और डॉली को गले से लगा लिया । दोनों की आंखें खुशी से नम थी, दोनों कुछ देर तक यूं ही चुपचाप खड़े रहे कि बस के होर्न की आवाज उनके कान में पड़ी।

, दोनों अब अलग हुए ।

डॉली - बस आ गई है, कहते हुए राज से हाथ छुड़ाकर आगे बढ़ने को हुई कि राज ने उसका हाथ नहीं छोड़ा और गुनगुनाने लगा - तू जहां जहां चलेगी, मेरा साया साथ होगा - गाते हुए अब वह डॉली के साथ बस में चढ़ गया और सबसे पीछे वाली सीट पर बैठा।

कुछ पल तक दोनों खामोश रहे ।

राज - अच्छा तुम्हारा पेपर कैसा हुआ?

डॉली - बहुत अच्छा , मुझे पूरा भरोसा है कि मैं प्री में बहुत आसानी से पास हो जाऊंगी।

राज - यह तो बहुत अच्छी बात है। अच्छा ये वही था ना रितु का लवर?

डॉली - हाँ, तुम्हें बताया तो था।

,

अब डॉली को एकदम से जय की याद आई - जय कहाँ है? वह भी तो आने वाला था - यह सुनकर राज कुछ उदास सा हो गया।

डॉली - क्या हुआ? तुमने तो कहा था कि दोनों को छुट्टी मिली है फिर वह कहां है ? बताओ ना ,मैं उससे भी मिलना चाहती हूं ।

राज नहीं आया वह । दरअसल मन्जीत को अपने बेटे को देखना था तो उसे कल की छुट्टी मिली थी पर हमारे जय साहब ने उसे अपने हिस्से की आज की छुट्टी भी दे दी कि मन्जीत को एक और दिन मिल जाएगा अपने बच्चे के साथ बिताने को । इस बार 7 महीने में घर गया है ना वह इसलिए।

डॉली (मुस्कुराकर) - यह तो उसने बहुत अच्छा किया।

, राज - हाँ लेकिन मैं तो अकेला पड़ गया ना! वह जानता है कि मुझे उसके बिना कहीं भी जाना अच्छा नहीं लगता , भाई है वह मेरा ।अभी भी तुम्हारे पास आया हूं तो ऐसा लग रहा है जैसे कुछ छूट गया है पीछे। जय कह रहा था कि फिर कभी मिलूंगा डॉली से लेकिन मन्जीत ही खुशी हमारी खुशी से ज्यादा बड़ी है ।

सच कहूँ तो मैं तो मना कर रहा था कि मैं भी नहीं जा रहा डॉली से मिलने तभी तो मैंने फोन कर कहा कि छुट्टी कैंसिल हो गई लेकिन उसने जबरदस्ती की । मै जानता हूँ कि वहाँ वो भी उदास होगा अकेले मेरे बिना ।

डॉली - तुम दोनों की दोस्ती बहुत ज्यादा गहरी है ।

राज (मुस्कुराकर) - खून से भी ज्यादा गहरी है हमारी दोस्ती, कई लोग तो जलते हैं हमारी दोस्ती , से लेकिन अब तो और भी जलने लगेंगे।

डॉली - क्यों ?

राज (हंसकर ) - तुम जो मेरे पास आ गई हो। अब अपनी लाइफ सेट है यार - कहते हुए राज हँसने लगा ।

डॉली भी हँस पड़ी कि ललिता का फोन आया ।

डॉली ने फटाफट से फोन उठाया - हां बोलो ललिता ।

ललिता - यार बस मिली या नहीं तुझे और पेपर कैसा हुआ? मुझे तो पता था कि कुछ न कुछ गड़बड़ होगी , कर तो आई हूं बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में है कि वह मेरी नैया डुबाऐंगे या पार लगाएंगे ।

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डॉली (मुस्कुराकर ) - सब अच्छा होगा । मेरा तो पेपर अच्छा हुआ है और बस अभी मिली है । अच्छा सुन तुझे एक बात बतानी है ।

ललिता - बोल, क्या हुआ ? सब ठीक तो है ना !

डॉली - सब ठीक है । वह मैं कह रही थी कि मेरे साथ राज है।

राज का नाम सुनते ही ललिता के चेहरे पर मुस्कान तैर गई - क्या कहा राज ? तू सच कह रही है ? लेकिन वह तो .....
 
डॉली - हां यार यह सरप्राइज था उसका। राज ने झूठ बोला था की छुट्टी कैंसिल हो गई है ।

ललिता - वाह यार मजा आ गया और जय कहां है वह भी तो होगा तुम लोगों के साथ में ?

,

डॉली थोड़ी निराश हो गई - नहीं वह नहीं आया दरअसल उसने छुट्टी अपने दोस्त को दे दी है , कहता है फिर कभी आकर मिलूंगा।

ललिता एक पल को खामोश रही फिर बोली - यह तो आधा सरप्राइज़ हुआ, चल ठीक है । कोई बात नहीं पर कितना टाइम लगेगा तुम्हें यहां पहुंचने में ?

डॉली - 1 घंटे के अंदर हम पहुंच चुके होंगे । आकर बात करती हूं - कहते हुए डॉली ने फोन रख दिया।

ललिता यह क्या बात हुई ? आधा सरप्राइज? एक आया, एक नहीं । सच में आर्मी वाले लोगों को कोई नहीं समझ सकता। खैर मुझे क्या है? वह अब दूसरे रूम की लड़कियों के पास चली गई।

राज -ललिता बड़ी फिक्र करती है तुम्हारी। जय ने , बताया मुझे कि उसे तुमसे दोस्ती करने के लिए ललिता की बहुत गालियां खानी पड़ी है ।

डॉली - मैं तुम्हें मिलवाउंगी उससे , वह बहुत खुश होगी तुमसे मिलकर ।

राज - हम्म, मुझे शाम को लौट कर जाना होगा। कल ड्यूटी ज्वाइन करनी है ।

डॉली - अभी तो आए हो और अभी जाने का हंगामा शुरू कर रहे हो ? और ना जय आया? ऐसे कैसे चलेगा?

राज - अच्छा ठीक है , अब नहीं कहूंगा । खुश ?

डॉली - हां , यह सही है ।

, राज - वैसे तुम्हें मैं पसंद तो आया हूं ना ? मेरा मतलब जैसा तुमने मुझे सोचा था, मैं वैसा ही हूं ना ।

डॉली (मुस्कुराकर) - हां , मुझे तुम पसंद हो और मैं? मैं कैसी लगी तुम्हें ?

राज - मुझे तो तुम पहले से ही पसंद हो।

दोनों यूँ ही बात करते हुए घंटे भर के अंदर पीजी पहुंच गए।उन्हें ललिता दरवाजे पर ही मिल गई । तीनों अब रूम में आए और बातें करने लगे ।

डॉली ने इशारे से ललिता को पूछा कि राज कैसा लगा ?

ललिता ने मुस्कुराकर हां में सिर हिला दिया और बोली - तो हमारे होने वाले जीजा जी आप अकेले ही आए हो ?आपका दोस्त नहीं आया आपके साथ , कहीं ऐसा तो नहीं है कि वह , मुझसे डर गया हो क्योंकि मैंने उसे बहुत कुछ सुनाया है - कहते हुए वह हँस पड़ी ।

राज (हंसते हुए) - अरे नहीं , ऐसा कुछ नहीं है। भूलो मत , हम आर्मी वाले है। डरते तो हम मौत से भी नहीं है।

ललिता - हम्म,तभी तो ! वैसे आप आर्मी वाला होने के साथ काफी स्मार्ट भी हो तो मेरी तरफ से इस रिश्ते के लिए हां समझो लेकिन जब आप अगली बार आएंगे तो अपने दोस्त को भी साथ लाए, मैं भी माफी मांग लूंगी उससे । मैंने उसको बहुत कुछ सुनाया है ।

राज ( मुस्कुराते हुए) - हां , अगली बार हम दोनों साथ ही आएंगे । कुछ देर बातें कर राज और डॉली एक साथ घूमने के लिए निकल गए ।उन्होंने ललिता से भी बहुत कहा साथ चलने को लेकिन उसने मना कर दिया कि मैं कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहती।

,

अब राज और डॉली अब रेस्टोरेंट में गए ,उसके बाद आइसक्रीम पार्लर से होते हुए एक गार्डन में जाकर बैठ गए।

राज डॉली की गोद में सिर रख कर लेट गया।

डॉली - थक गए ?

राज - हां सुबह से सफर कर रहा हूं और अब फिर वापस भागना है । मेरा मन तो ऐसा कर रहा है कि बस यूं ही ताउम्र तुम्हारी गोद में सिर रख कर लेटा रहूं ।

डॉली प्यार से उसके सिर को सहलाने लगी ।

उधर जय कुछ जरूरी फाइल्स कैप्टन सर को , सौंप कर वापस अपने कमरे में आया और बिस्तर पर बैठ गया। राज के बिना आज उसका भी मन नहीं लग रहा था फिर मन्जीत भी कल ही घर चला गया था । जय ने टाइम देखा तो सोचने लगा- अभी तो राज डॉली मिल भी चुके होंगे । राज को फोन करूं क्या? सोचते हुए उसने फोन निकाला फिर अगले ही पल उसे बिस्तर पर रख दिया - नहीं ऐसे अच्छा नहीं लगेगा। पहली बार तो वह मिले हैं दोनों इतने सालों में और मैं उन्हें डिस्टर्ब कर दूं । रात में तो आएगा ही , तब इत्मीनान से बैठकर बातें करेंगे ।

यह सोच कर जय उठा - चल जय , थोड़ा काम निपटा ले वह अब दो कदम ही सामने टेबल की ओर बढ़ा था कि उसके दरवाजे पर दस्तक हुई ।

जय ने आगे बढ दरवाजा खोला तो सामने चपरासी था।

, जय - बोलो?

चपरासी -सर , राज सर का लैटर है पर उनका रूम लाँक है।

जय - हाँ, वो आज छुट्टी पर है।

चपरासी - फिर ये लैटर?

जय - लाओ मुझे दो, मै दे दूंगा उसे।

जय ने अब रिसीविंग वाले रजिस्टर पर साइन कर राज का लैटर ले लिया और कमरे में वापस आ बिस्तर पर बैठ गया। उसने लैटर को चारों ओर से देखा - पढूँ क्या? अरे अपने राज का ही तो है। हमारे बीच क्या तेरा - मेरा ? यह सोच जय ने लैटर खोल उसे पढना शुरू कर दिया ।

राज डॉली को उसके रूम तक छोड़ने गया और चलते वक्त डॉली को अपना मेले से खरीद कर , लाया हुआ नेकलेस भी गिफ्ट किया - मेरी तरफ से पहला तोहफा।

डॉली - इसकी क्या जरूरत थी ?

राज - जरूरत थी और अब तुम आदत डाल लो क्योंकि मैं तुम्हारी आदत बिगाड़ने वाला हूं । जरा खोल कर तो देखो कि तुम्हें पसंद आया कि नहीं ?

मोदी ने उसे खोल कर देखा -अरे वाह , यह तो बहुत सुंदर नेकलेस है ।

राज - हां पर तुमसे ज्यादा नहीं ।

यह सुनकर डॉली के पीछे खड़ी ललिता हँस पडी।

राज ( झेंपकर ) - अच्छा चलो मुझे निकलना होगा । पिछले घंटे से फोन मिला रहा हूं जय को पर वह उठा ही नहीं रहा। कहीं नाराज तो , नहीं हो गया मुझसे ?

डॉली - मुझे नहीं लगता। वह समझदार है ।

राज - हां वह तो है । चलो, मैं चलता हूं ।

राज अब वापस अपने शहर की बस पकड़कर कैंट पहुंचा। रात के तकरीबन 11 बज रहे थे , वह सीधा जय के कमरे में गया और तो देखा कि जय दूसरी तरफ मुँह किए चुपचाप बिस्तर पर सर झुकाए बैठा है ।

राज ने जाकर बिस्तर पर चढ उसे पीछे से गले से लगा लिया और खुशी से चहकने लगा - अरे मेरे यार , क्या बताऊं तुझे आज कितना मजा आया। सच में , जैसी सोची थी बिलकुल वैसी ही है , मेरी डॉली ।
 
राज ने देखा कि जय ने उसे कोई जवाब नहीं दिया है । वह अभी भी चुपचाप सर झुकाए बैठा है। राज अब उसके पीछे से हटकर सामने आया और घुटनों के बल के सामने जमीन पर बैठ गया। उसने जय के कंधे पर हाथ रखा और उसे पुकारने लगा - जय ! जय क्या हुआ? तु चुप क्यों है? यार, अब डरा रहा है तु मुझे? देख, अगर ये तेरा मजाक है तो मत कर। मै बहुत थका हुआ हूँ लेकिन जय अब भी खामोश था।

राज ने जय के चेहरे को अपने हाथों से थाम कर अपनी तरफ किया तो देखा कि उसका चेहरा उतरा हुआ था और उसकी आंखें लाल हो रही थीं कि जैसे वो बहुत देर तक रोया हो।

यह देख राज का तो जैसे दिल बैठ सा गया - हुआ क्या है, तेरी हालत ऐसी कैसे है....,

राज - हुआ क्या है ? कुछ बोलेगा भी?

जय ने गुस्से से राज की ओर देखा और बोला - झूठे इंसान से मैं बात करना जरूरी नहीं समझता , कह कर उसने राज का लैटर उसके हाथ में थमा दिया और कमरे से बाहर निकल गया ।

राज अब हैरानी से जय को जाते हुए देखता रह गया और फटाफट से लैटर को खोलकर पढने लगा - हे भगवान ! तो जय को सच पता चल ही गया , यह लड़का भी ना कभी नहीं सुधरेगा ।

वह अब जय के पीछे पीछे गया , जय जाकर अब गैलरी में खड़ा हो गया कि तभी राज वहां आ गया । जय अब उसे देख वहां से जाने को हुआ कि राज जल्दी से बोला - तुझे हमारी दोस्ती की कसम ।

जय अब रुक गया लेकिन वह अब भी राज से बात करने के मूड में नहीं था।

राज - गलती हो गई यार, सॉरी । माफ कर दे अपने भाई को।

जय - गलती नहीं यह धोखा है। तुमने मेरे , आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है , जब मैंने तुझसे मना किया था तो फिर तूने ऐसा क्यों किया? क्या मैं खुद इस लायक नहीं हूं ? क्या रोहन मुझसे खुद आकर नहीं कह सकता था अपने दिल की बात? क्या कमी छोड़ी है मैंने उसकी इच्छा पूरी करने में ? - कहते हुए वह गंभीर हो गया।

राज - ऐसा कुछ भी नहीं है यार, तू जानता है कि रोहन बस तुझसे बातें नहीं कह पाता और मुझसे कह लेता है । अब तू ही बता कि हम दोनों ही बड़े भाई हैं उसके तो उसे जो चाहिए होता है या कुछ बताना होता है, वह मुझे कह देता है । बस इतनी सी बात है।

जय ( झुंझला कर) - बस नहीं है यह और क्यों डरता है वह मुझसे ? मैंने कभी डांटा या मारा उसे ? कभी किसी चीज की कमी महसूस होने दी ? उसके माँगने से पहले ही हर चीज लाकर दी है उसे तो फिर क्यों नहीं कहता मुझसे कि उसे क्या चाहिए?क्या मैं अपना फर्ज ढंग से नहीं , निभा रहा?

- कहते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए।

यह देख राज ने उसे गले से लगा लिया - शांत हो जा । ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तू सोच रहा है । हम सब जानते हैं कि वह तुझसे और तु उससे कितना प्यार करते हो । सच तो यह है कि उसने कम उम्र से ही तुझे घर की सारी जिम्मेदारियां उठाते हुए देखा है , अपनी हर खुशी को उसके लिए छोड़ते देखा है तो वह नहीं चाहता कि तुझे और तंग करें ।

दरअसल उसने मुझे भी मना किया था पर मुझे लगा कि जरूरत है बाइक की तो इसलिए भिजवा दी घर पर कहकर। वैसे भी घर पर रखे रखे खराब ही तो हो रही थी । अगर मेरे छोटे भाई के काम आ जाए तो क्या बिगड़ जाएगा ?

जय अब राज से अलग हटने को हुआ तो उसने छोडा नहीं ।

, जय - दूर हट ।

राज ने उसको और कस कर पकड़ लिया - नहीं छोडूंगा जब तक तु मुझे माफ नहीं कर देता ।

जय अब थोड़ा शांत हो गया ।

राज -छोड़ दूं ? भागेगा तो नहीं ।

जय - कहां भाग लूंगा तुझसे मै ? जानता हूं जहां भी जाऊंगा तो वही पीछे पीछे आ जाएगा ।

राज ने उसे मुस्कुराते हुए छोड़ दिया - ये हुई ना बात। देख, अब तो तू ही उसके पिता जैसा है। वह चाहता तो है तुझसे कहना पर नहीं कह पाता । वैसे भी मैं जानता हूं कि तुम दोनों भाई एक जैसे ही हो। इसमें ऐसा क्या गजब हो गया ?

जय - गजब हुआ है क्योंकि रोहन ने मुझे क्यों नहीं कहाँ? मुझसे कहता तो मैं नहीं दिलाता उसे , बाईक?

राज (हँसते हुए ) - तो सारी परेशानी यह है तुझे मिर्ची लग रही है कि रोहन ने अपने दिल की बात तुझे ना बता मुझे कह दी ।

जय - बात मत घुमा। वो बाइक तेरे बड़े भाई ने अपनी सैलरी से लाकर दी थी । तकलीफ इस बात की है मुझे कि तूने मुझसे बात छुपाई और मेरे पीछे उसे बाईक दी और दूसरी तकलीफ इस बात की है कि मेरा भाई मुझे इस काबिल नहीं समझता कि वह अपने दिल की बात मुझसे कह सके। वह तो आज मेरे हाथ उसका तुझे भेजा वह लेटर मिल गया वरना तुम तो मुझे पता ही नहीं लगने देते । झूठ सहन नहीं होता मुझसे।

राज - अरे यार , वो कॉलेज में आ गया है । बस के धक्के खाता है । एक दिन जब यहाँ आया था, मुझसे कह रहा था कि बहुत परेशानी होती है भैया तो मैंने कहा कि बाइक ले लो।

, उसने कहा कि नहीं अभी भैया पर और बोझ नहीं बन सकता तो मैंने बस इतना ही किया कि उसे मेरे घर से बाइक ले जाकर इस्तेमाल करने को कहा । मेरी बाइक वैसे भी वहां घर पर खड़ी खड़ी जंग ही तो खा रही थी तो अब वह रोज चल जाती है । पेट्रोल, मरम्मत का खर्चा तो रोहन खुद ही उठाता है ना!

मैंने कह रखा है उसे कि बस ग्रेजुएशन तक के लिए दे रहा हूं फिर अपनी जॉब देख और खुद की बाईक ले। वह तो मना कर रहा था पर मैंने उसे अपनी कसम देकर मनाया । घबरा मत तेरा ही भाई है वह, मैं नहीं छीन रहा उसे तुझसे । जब यहां आया था तुझसे मिले तभी मिला हूं उससे मुश्किल से दो-तीन बार, वह तो फोन पर बात हो जाती है ।

जय - लेकिन तू अच्छे से जानता है जब कोई मेरा अपना झूठ बोले तो मैं सहन नहीं कर पाता। आज तूने खुद से उसकी मदद की है , कल को वह मुंह से कह कर तुझसे मदद मांगेगा। मैं नहीं , चाहता कि वह हम में से किसी के भी ऊपर डिपेंड रहे । कल को अगर हम नहीं रहे तो क्या करेगा वह? कैसे अपना रास्ता बनाएगा?

राज - यह सब बाद में देखेंगे यार लेकिन जब तक दम है तब तक अपने परिवार की सोच सकते हैं ना । बस यही फर्क है तुझ में और मुझ में , तू आगे की सोचता है और मैं आज की। जिस झूठ मे किसी की खुशी छुपी हो, वह झूठ नहीं होता और मैं छुपा नहीं रहा था, सही समय का इंतजार कर रहा था बस तुझे बताने के लिए। अब माफ भी कर दे ।

जय - एक शर्त पर ।

राज - तेरी हर शर्त मंज़ूर है , तू बोल ।

जय - मैं जानता हूं कि तू अभी भी मुझसे झूठ बोल रहा है। मैं कल रोहन से पूछता हूं कि तूने उसे हमेशा के लिए बाईक दी है या नहीं ? अगर , हमेशा के लिए दी है तो अपनी हर महीने की सैलरी से तुझे उसके पैसे देता रहूंगा ।

राज - यार ऐसे थोड़े होता है ?

जय - बस एक बार कह दिया तो कह दिया, कहते हुए वह कमरे मे वापस आ गया।

राज - हे भगवान, ये और इसकी खुद्दारी । अरे सुन तो, आज क्या हुआ - कहते हुए राज जय के पीछे गया।

डॉली अपने बिस्तर पर लेटी हुई ललिता से बातें कर रही थी।

डॉली ने आज की सारी बातें उसे बताई कि कैसे नमन मिला फिर राज आया और उसे जोर से चांटा मारा, उसका स्लीपर से राज को मारने के लिए तैयार होना , बस की बातें, रेस्टोरेंट का खाना , आइसक्रीम पार्लर और आखिर में पार्क में बैठना।

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डॉली आज चापली वाला काम कर रही थी , वह खुशी से चहक रही थी। उसकी बातें थी कि बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी । काफी देर तक बोलते रहने के बाद डॉली ने बिस्तर से उठ ललिता की ओर देखा तो उसे सोता देख हैरान रह गई - मैं भी पागल हूं , कब से बोले जा रही हूं और यह भी नहीं देखा कि मिनी कुंभकरण सो गई है ।

वह अब राज के दिए नेकलेस को बड़े प्यार से निहारने लगी।
 
दूसरी ओर जय जाकर अपने बिस्तर पर लेट गया, तभी राज उसके बगल में आकर लेट गया ।

जय -क्या कर रहा है ? तू जाना अपने कमरे में और आराम कर। सो जा , मुझे भी सोने दे । मैं अभी बात करना नहीं चाहता ।

, राज - अरे तुझसे बात करने की कह कौन रहा है ? तू तो बस सुन , कहते हुए उसने जय को बिस्तर पर थोड़ा आगे धकेल दिया - थोड़ा ढंग से लेट ना , मुझे भी सोना है । आज मैं यही सोऊंगा तेरे साथ ।

जय - ले यहीं सोना, आधी रात को बहस नहीं करनी मुझे।

राज अब जय को डॉली के बस स्टॉप से मिलने से लेकर शाम तक की सारी बातें बताने लगा ।

राज - तु बोर तो नहीं हो रह ना - कहते हुए उसने अब जय की ओर देखा तो वह सो चुका था ।

राज ( हंसते हुए) - यह लो जनाब सो रहे हैं और हम इन से बातें करने में लगे पड़े थे । सो ले लेकिन जब प्यार नाम की बीमारी तुझे भी लगेगी ना तब देखूंगा कि तू कितना सोएगा।

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राज ने अब टाइम देखा तो 12:30 बज रहे थे , उसने सोचा कि डॉली को फोन करके देखूं , क्या पता जाग रही हो लेकिन अगर सो रही होगी तो? ऐसा करता हूं एक मिस कॉल देता हूं, जाग रही होगी तो बैक कॉल कर लेगी ।

राज ने डॉली के फोन पर एक मिस कॉल दी , अगले ही पल डॉली का फोन आ गया ।

राज धीरे-धीरे बात कर रहा था , उधर डॉली भी धीमी आवाज में बोली - क्या हुआ ? इतना धीरे-धीरे कैसे बोल रहे हो ?

राज - आज मैं जय के कमरे में हूं । मैं उसे आज की सारी बातें बता रहा था और पता नहीं वह कब सो गया कहते हुए वह हँस पडा ) ,लेकिन तुम भी तो धीरे बोल रही हो?

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डॉली ने बताया कि उसके साथ भी ऐसा ही हुआ, वह ललिता को सारी बात बता रही थी लेकिन ललिता भी पता नहीं कब की सो गई ।

अब राज और डॉली धीरे धीरे बातें करने लगे, राज पूरे दिन का थका होने की वजह से कुछ ही देर में सो गया। डॉली समझ गई कि राज सो चुका है । उसने अपना फोन काटा और सो गई।

जय सुबह उठा तो देखा कि राज सोया हुआ था , वह उठा और तैयार हो गया । जय अब कमरे से बाहर जाने को हुआ कि राज का फोन बज उठा ।

जय वापस आया और उसका फोन देखा तो डॉली का फोन था - दोनों की बातें खत्म ही नहीं होती , कहते हुए उसने फोन उठाया, वह कुछ बोल पाता कि डॉली बोल पडी - गुड मॉर्निंग , जय

जय ( हैरानी से )- तुम्हें कैसे पता कि .....

डॉली - मुझे पता है कि राज बहुत थका हुआ था और रात को देर से सोया है तो इस वक्त तो जागेगा नहीं । मैंने तुम से ही बात करने के लिए फोन किया था ।

जय - अगर मुझसे ही बात करनी थी तो मेरे फोन पर क्यों काँल नहीं की?

डॉली - जरा जाकर अपना फोन चेक करो, तुम्हारा फोन बंद पड़ा है।

जय ने अपना फोन उठा कर देखा तो सच में बंद था ।

जय - हां वह मैंने कल चार्ज नहीं किया , भूल , गया था।

डॉली - अच्छा तुम कैसे हो ?

जय - ठीक हूं , तुम सुनाओ कि पेपर कैसा हुआ ?

डॉली - बहुत अच्छा लेकिन मुझे तुमसे एक शिकायत है।।

जय यह सुनकर चौंक गया - मुझसे? मैंने क्या किया ?

डॉली - कल राज ने तुम्हें कितने फोन किए पर तुमने नहीं उठाया, क्या मैं इसकी वजह जान सकती हूं ?

जय - नहीं ऐसी कोई बात नहीं थी । बस हम दोनों की आपस की बात है ।

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डॉली - ओके । अच्छा तुम मुझसे मिलने क्यों नहीं आए ? पता है मुझे कितना बुरा लगा और राज भी उदास था । कह रहा था कि ऐसा लग रहा है जैसे कुछ पीछे छूट गया हो मेरा।

जय मुस्कुरा कर राज को देखने लगा - ये ऐसा ही है । हर जगह में मुझे साथ खींच कर ले जाता है । इसे कौन समझाए कि मैं हर वक्त तो साथ नही रह सकता ना इसके ।

डॉली (मुस्कुरा कर ) - यह तो अच्छी बात है ना कि तुम दोनों दोस्तों में इतना प्यार है । अच्छा यह बताओ कि मुझसे मिलने कब आ रहे हो ?

जय - जैसे ही छुट्टी मिलती है , मैं आता हूं ।

डॉली - मैं इंतजार करूंगी और तुम्हें पता है , ललिता भी तुम्हारा इंतजार कर रही है ।

, जय को यह सुनकर बड़ा अजीब सा लगा - लेकिन क्यों?

डॉली - उसने तुम्हें बहुत गालियां सुनाई थी ना शुरू में, इसलिए कह रही थी कि सॉरी बोलना ही होगा ।

जय - नहीं मै समझ सकता हूं , सॉरी की कोई जरूरत नहीं है ।

डॉली - अच्छा सुनो , तुमसे कुछ कहना है ।

जय ने टाइम देखा - थोड़ा जल्दी बोलो ।

डॉली - हां हां बोल रही हूँ । थैंक यू सो मच ।

जय - यह किसलिए?

, डॉली - तुम नही होते तो शायद हम दोनों कभी नहीं मिल पाते । राज खुद से मुझसे कभी बात नहीं कर पाता , तुम ही हो जिसने हम दोनों को मिलाया। थैंक यू , थैंक यू सो मच और आज फ्रेंडशिप डे है तो हैप्पी फ्रेंडशिप डे । तुम्हारे लिए एक अच्छा सा फ्रेंडशिप बैंड लेकर आऊंगी मैं और जब तुम मिलोगे ना , तब तुम्हारे हाथ में खुद बाँधूंगी।

जय अब मुस्कुरा दिया - मतलब मैं तुम्हारे खास दोस्तों में शुमार हो गया हूं ।

डॉली ( हंसते हुए ) - खास नहीं , बहुत खास दोस्त हो तुम मेरे ।

जय - अच्छा चलो मैं रखता हूं , कह कर उसने फोन रख दिया और डॉली की बातों को याद कर मुस्कुराने लगा - कितनी प्यारी बातें करती है यह लड़की तभी तो राज हर वक्त इससे बातों में लगा रहता है । अब उसने आगे बढ़ बिस्तर पर सो रहे राज को जगाया ।

,

जय - अबे उठ , घोड़े बेच कर सो रहा है । जल्दी उठ , बहुत लेट हो गया है - कहते हुए उसने अब राज को जगाया ।

राज - सोने देना यार , बहुत नींद आ रही है । रात को बहुत लेट सोया हूं ।

जय - यह तो तभी सोचना था ना जब तू लेट सो रहा था। अब उठ वरना सजा के तौर पर पूरे ग्राउंड के 4 चक्कर लगाने होंगे ।

यह सुनते ही राज फटाफट खड़ा हो गया - नहीं मेरे बस का नहीं है चक्कर लगाना। इससे अच्छा तो मैं तैयार ही हो जाता हूं , कहते हुए वह अपने रूम की तरफ भागा कि एकदम से रूक गया - तु कितना अच्छा है यार, पहले भी कितनी बार सजा से बचाया है और आगे भी ऐसे ही रहना।

जय - अरे बाबा जी , प्रवचन हो गए हों तो जाओ । राज अपने कमरे की ओर भाग गया ।

,

जय रूम से बाहर आकर खड़ा हो गया कि सामने से सिन्हा सर आते दिखाई दिए ।

जय - जय हिन्द सर।

सिन्हा सर - जय हिंद, राज कहां है ?

जय - वह बस आता ही होगा ।

सिन्हा सर -तो तुम लोग तैयार हो ना ?

जय ( हैरानी से ) - मैं कुछ समझा नहीं सर ?

सिन्हा सर - जाओ, नोटिस बोर्ड पर जाकर नोटिस पढ़ो, कहते हुए वह वहां से चले गए ।

जय - अब यह क्या नाटक है , सोचते हुए जल्दी से राज के कमरे में पहुंचा, राज तैयार हो चुका था।

,

राज - अरे आ ना, देख कितनी जल्दी तैयार हो गया मैं ।

जय - यह सब छोड़ , सिन्हा सर मिले थे अभी । कह रहे हैं कोई नोटिस लगा है , जल्दी चल । देखना है ,क्या है ?

राज - अरे यार , सुबह-सुबह क्या बुरी खबर सुना दी। चल जल्दी ।

अब दोनों जल्दी से नोटिस बोर्ड की ओर भागे , वहां पहुंच कर उन्होंने जल्दी से सामने लगे नोटिस को पढ़ा और हैरानी से एक दूसरे को देखने लगे....,
 
राज (हैरानी से ) - क्या यह सच है?

जय - लग तो यही रहा है । 1 मिनट , मैं दोबारा देखता हूं - कहते हुए उसने दोबारा नोटिस पढा और राज की ओर देखकर मुस्कुरा दिया - यह सच है मेरे यार, तेरे तो वारे न्यारे हो गए ।

राज - यार संभाल मुझे , कहीं मैं खुली आंखों से सपने तो नहीं देख रहा ?

जय ( हंसते हुए ) - नौटंकी कहीं का! बस यह समझ ले कि किस्मत मेहरबान है तुझ पर।

राज के चेहरे पर अब मुस्कुराहट अलग से दिख रही थी , उसे क्या पता था सुबह-सुबह यह सरप्राइज़ मिलेगा। वह हँसते हुए बोला - मैं तो अभी से खुशी से आसमान में उड़ने लगा हूं, अभी जाकर डॉली को बताता हूं ।

जय (हंसकर) - तू सच में पागल हो गया है इस प्यार के चक्कर में ।

राज जय को गले लगा कर खुशी से उछलने लगा - पागल होने वाली बात ही तो है । 2 दिन बाद हमारा 3 दिन का ट्रेनिंग कैंप है और वह भी डॉली के शहर में । इसका मतलब 3 दिन में डॉली के पास रहूंगा ! सच्ची यार , बहुत मजा आएगा , और अब तो तू भी साथ है तो मजा तो दोगुना बनता है । मैं तो कहता हूं कि तू भी पटा ले कोई अच्छी सी लड़की और सेट हो जा ।

जय - मेरे मजनू अपने भाषण किसी और को सुनाना , मुझे माफ कर और चल रिर्पोटिंग टाइम हो गया है ।

राज को अपने साथ लेकर जय आगे बढा कि सामने से मंजीत भागता हुआ आया - कबीरे मेरे यार, मजा आ गया, कहते हुए वह जय की ओर गले मिलने को आगे बढ़ा कि राज लपक कर उसके बीच में आ गया ।

राज - तू ना मेरे यार से दूर रहा कर । मैं बता रहा हूं कि तेरी नियत खराब लगती है मुझे । अभी अभी घर से लौट कर आया है और आते ही कबीरेे कबीरे की रट शुरू कर दी ।

मंजीत -तो तेरे को मिर्ची क्यों लगती है और बार-बार कहूंगा कबीरे कबीरे । अरे उसी की , वजह से तो अपने अंश के साथ 1 दिन और बिता पाया हूं । उसे थैंक यू नहीं बोलूंगा तो क्या तुझे बोलूंगा ? हट परे - कहते हुए वह राज को हाथ से खींच जय से दूर हटाने लगा।

राज उससे हाथ छुडा अब जय की ओर मुड़ा - सुन ले कान खोल कर । अगर तेरे मेरे बीच में कोई भी आया ना तो अच्छा नहीं होगा । इस मन्जीत को दूर रखा । ठीक आदमी नहीं है ये।

जय अब जोर से हँसा - बड़ा पागल है तु । हट रास्ते से , मुझे मिलने दे मंजीत से ।

राज - नहीं , मैं नहीं हटूंगा ।

मन्जीत - तू तो सच में बड़ा मतलबी है । देख लेना, इस जय को तु सबसे बचा कर रखता है ना, ये एक दिन किसी और को गले लगा कर तुझसे बहुत दूर भाग जाएगा, कहते हुए वह हँसने लगा ।

,

राज - सबसे पहले तु भाग । हम दोनों के बीच कोई नहीं आ सकता ।

मंजीत - ठीक है , जा रहा हूं और घर से जो खाने का सामान भेजा है ना तुम लोगों की भाभी ने तुम्हारे लिए,वह मैं अकेले अकेले ही खा लूंगा - कहकर वह गुस्से का नाटक करते हुए वापस मुड़ा कि राज बोल पड़ा - अरे यार , मैं तो मजाक कर रहा था । अच्छा, ले मिलने अपने जय से और मैं तेरा बैग संभालता हूं -कहते हुए वह मंजीत का बैग लेकर भाग गया।

मंजीत - ओए भुक्कड़ थोड़ा हमारे लिए भी छोड़ देना।

राज - देखा जाएगा।

जय और मंजीत अब गले मिले ।

, जय - अब तो खुश है ना?

मंजीत - अरे बहुत खुश हूं लेकिन यह बता, आज अपना राज कैसे पागल हो रहा है ? भाभी हद से ज्यादा अच्छी मिल गई है क्या ?

जय - हम्म, वह तो है ही लेकिन यह नोटिस पढ।

मंजीत ने अब नोटिस पड़ा - तो इसमें खुशी की बात क्या है?

जय - दरअसल यह ट्रेनिंग कैंप डॉली के शहर में है और वहां से राज का घर भी पास पड़ेगा ।

मंजीत - पर क्या फायदा ? छुट्टी तो मिलेगी नहीं , शाम को फ्री हुआ करेंगे ।

जय अब शरारती अंदाज में मुस्कुरा दिया ।

मंजीत - 1 मिनट , तू कहना क्या चाहता है ?

,

जय - यही कि शाम और रात तो अपनी है ।

मंजीत - सही कहा तूने , मैं तो कहता हूं कि तू भी देख ले कोई अच्छी लड़की।

जय - मैं क्या देखूं ? जब मिलनी होगी तो खुद ही मिल जाएगी । फिलहाल चल उसको पकड़ कर ग्राउंड में भी ले जाना है ।

ललिता और डॉली अपनी बुक्स को सही जगह पर लगा रही थी तभी राज का फोन आया ।

डॉली - हां बोलो ।

राज - तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है ।

डॉली - क्या ?

राज - मैं और जय 2 दिन बाद तुम्हारे शहर में , आ रहे हैं और 3 दिन तक रहेंगे ।

यह सुनकर डॉली खुशी से उछल पड़ी - मजाक तो नहीं कर रहे हो ना?

राज - नहीं यार , मैं सच कह रहा हूं ।हमारा 3 दिन का ट्रेनिंग कैंप है तुम्हारे ही शहर में ।मैं तो बस इंतजार कर रहा हूं जल्दी से 2 दिन कट जाए फिर मौका मिलते ही तुम्हारे पास आ जाएंगे हम । अब तो तुम जय से भी मिल पाओगी।

डॉली ( मुस्कुराते हुए ) - यह तो बहुत अच्छी खबर है ।

इतने में जय और राठी वहां आ गए ।

जय - यहां पर चिपका हुआ है ,चल जल्दी - कह कर वो राज का हाथ पकड़ कर ले गया।

राज - बाद में बात करता हूं , कहते हुए उसने फोन काट दिया।

,

राठी - देख जय मैंने कहा था ना कि यह खुशखबरी दे रहा होगा डॉली को ।

ललिता - क्या बात है , कौन आ रहा है ?

डॉली ने अब सारी बातें ललिता को बताई तो ललिता के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई ।

डॉली - अब उस जय से मिलना हो जाएगा । मै तो बहुत एक्साइटेड हूं उससे मिलने के लिए , राज बहुत तारीफ करता है उसकी।

ललिता - सच कहूं तो मिलना तो मैं भी चाहती हूं उससे ।

डॉली - क्या बात है हमारी चापली भी मिलने की जल्दी में है जय से ।

ललिता - अभी तो तू ही कह रही थी कि बहुत , तारीफ सुनी है। मै भी बस इसलिए देखना चाहती हूं ।

डॉली - अच्छा सॉरी, मैं मजाक कर रही थी ।

ललिता - जा माफ किया ।

शाम हो चुकी थी । जय अपने कमरे में आकर बैठ गया तभी उसे याद आया कि मां को फोन करना है , उसने फटाफट से माँ को फोनकिया ।

माँ - अच्छा यार आ ही गई अपनी मां की ।

जय (मुस्कुराकर ) -अरे मेरी माता, मैं बिल्कुल अभी फ्री हुआ हूं ।

माँ - राज के साथ रहते हुए तुझे मुझे याद करने का वक्त ही कहां है ?

, जय ( हंसते हुए ) - आप भी कमाल करती हो , उस पागल के चक्कर में क्या मैं अपनी मां को भूल जाऊंगा ?

माँ (मुस्कुराकर) - यह बता कैसा है तू ?

जय - अच्छा हूं और अभी आप से बात करके तो और भी अच्छा हो गया ।

मां - मैं सब समझ रही हूं । अभी मक्खन लगा रहा है ना तू लेकिन मैं कुछ नहीं भूली हूं । पिछली बार भाग गया था ना तू शादी की बात सुनकर, इस बार आएगा ना तो पकड़ कर बैठा लूंगी अपने पास और फिर सारी लड़कियों के फोटो दिखाकर पूछूंगी कि कौन सी लड़की पसंद है - कहकर हंसने लगी ।

जय - बस इसीलिए दूर भागता हूं आपसे । जब कभी भी बात करो, आप ही सुई शादी पर ही अटकती है ।

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मां - तो क्या करूं ? अपने बेटे की शादी के बारे में सोचना गलत बात है क्या ?

जय - नहीं लेकिन मैं इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहता और आपको क्या जरूरत है बहू की? अगर वह आ गई तो आपका प्यार बँट जाएगा उस में और मुझ में , जो मैं नहीं होने दूंगा । आप सिर्फ मेरी मां हो और आपका सारा का सारा प्यार सिर्फ और सिर्फ मेरा है ।

मां प्यार से बोली - पगले , ऐसा कुछ नहीं है । तू तो मेरे जिगर का टुकड़ा है , मेरा चांद है तू ।

जय - अब आप बताइए कि आप कैसी हैं ?

मां (हंसते हुए) - मैं भी अच्छी हूं ।

जय - अब जल्दी से बताओ कि आपका लाडला बेटा कौन है ?

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मां - तू कभी नहीं सुधरेगा , हर बार यही सवाल पूछता है और हर बार मेरा एक ही जवाब है कि मेरा लाडला मेरा जय है। रोहन कहता है कि माँ आप भैया से ज्यादा प्यार करती हो पर क्या करूं , मेरा जय है ही लाखों में एक ।

जय - लेकिन वो तो हमेशा आपके साथ है । तरस तो मै ही रहा हूँ ना आपके प्यार के लिए , कहते हुए उसकी आँख से आँसू बह निकला जिसे उसने फटाफट से पोंछ लिया।

माँ ने खुद को सम्भाला - अच्छा सुन , जल्दी आना । कई महीने हो गए हैं , तेरी बहुत याद आती है।

जय की आंखें नम हो उठी - मैं भी आपको बहुत याद करता हूं । बहुत जल्द आऊंगा और आप की गोद में सर रख बहुत सारी बातें करूँगा और थकान उतारूंगा लेकिन तब जब आप शादी की बात नहीं करेंगे ।

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मां - अच्छा नहीं करूंगी , अब खुश ? बस तू आजा , आंखें तरस गई है तुझे देखने को।

जय कुछ कहता कि राज ने आकर उसके हाथ से फोन छीन लिया।

जय - पागल है क्या ? माँ है ।

राज - मैं जानता हूं । उन्हीं से बात करनी है ।

अब वह जय की मां से बात करने लगा - नमस्ते आंटी, कैसे हो ? हां हां मैं जानता हूं कि एक बेटे से दूर मां कैसे अच्छे रह सकती है पर आप टेंशन ना लो । आपके उस बेटे के पास आपका यह बेटा है ना उसका ख्याल रखने के लिए।

मां (हंसते हुए ) - सब जानती हूं मैं । तू ना बिगाड़ रहा है उसे, तेरे साथ यह लड़का इतना बिजी , रहता है कि अपनी मां को भी फोन करने का टाइम नहीं मिलता है इसे ।

राज - क्या ? ऐसी बात है तो ठीक है । मैं इसे अभी सबक सिखाता हूं , मेरे चक्कर में मां को ही भूल गया ।

मां - इस बार छुट्टी में जय के साथ तू भी आना । तुम दोनों को खिला पिला कर खूब मोटा ताजा करके भेजूंगी।

राज ( हंसते हुए ) - जी पक्का। इस बार जरूर आएंगे और आप टेंशन ना लिया करो ज्यादा। अपने बेटे से थोड़ा सा प्यार बचा कर रोहन को भी दे दिया करो। इसके लिए तो मैं और मेरा प्यार ही काफी है ।

मां (हंसते हुए ) - अच्छा रखती हूं और हां , अपना और अपने इस दोस्त जय का ख्याल रखना - कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया ।

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राज ने अब जय की ओर देखा तो वह शांत खड़ा था ।

जय - क्या हुआ ? तू ठीक तो है ।

जय ( मुस्कुरा कर ) - ठीक हूं , मां के बारे में सोच रहा था। कैसे अकेले सब कुछ संभालती हैं , मैं तो यहां हूं और वहाँ रोहन अभी पढ़ाई कर रहा है । कितना मुश्किल हो जाता होगा उनके लिए ।

राज ( मुस्कुरा कर ) - वह एक शेर की बीवी है और एक बब्बर शेर की मां है । वह कुछ भी कर सकती हैं ।

जय ( हँसते हुए ) - कभी-कभी तु अच्छी बातें कर जाता है।

राज - शुक्र है भगवान का, तुझे मेरी बातें पसंद तो आई।

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अब 2 दिन के बाद राज , जय और मंजीत ट्रेनिंग कैंप के लिए डॉली के शहर पहुंच चुके थे । ट्रेनिंग की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थी ।

राज अपने साथियों से 20 बार पूछ चुका था कि ट्रेनिंग शाम को कितने बजे खत्म होगी ।

उसकी इस हरकत पर जय और मंजीत उस पर हंस रहे थे।

राज - बडे जालिम हो तुम दोनों । तुम क्या समझोगे मेरे प्यार का दर्द , सामने कुँआ है फिर भी प्यासा खड़ा हूं और राठी तु कुछ तो शर्म कर। तेरे तो बीवी बच्चे हैं , तुझे किस चीज की कमी है लेकिन जय तु भी उसका साथ दे रहा है ? याद रखना , जब तेरी बारी आएगी ना तब देखूंगा कि कैसे तड़पता है अपनी वाली से मिलने को ?

, जय - अपनी नौटंकी बंद कर और दिमाग का इस्तेमाल कर। तू सबसे बार बार पूछेगा तो सबकी निगाहों में आ जाएगा कि शायद कुछ गड़बड़ करने वाला है ।

मंजीत - और सब का ध्यान तुझ पर रहेगा लेकिन तू तो खुद ही सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है उनसे कह कर ।

राज - तो क्या करूं ? मैं डॉली से मिलने को मरा जा रहा हूं। कुछ तो रहम करो । जय मेरी जान कुछ कर।

जय - अच्छा यह बता कि यहां से कितना दूर होगा डॉली का ?

राज (सोच कर ) - यही कोई 20 मिनट दूर ।

जय ( मुस्कुरा कर ) - 20 मिनट जाने के और 20 मिनट आने के । मतलब 40 मिनट तो सफर , के लिए ही चाहिए।

राज - हां तो ?

जय - अभी मैंने सुना है कि 10 मिनट में सभी को सारी गाइडलाइंस और रूल्स समझा दिए जाएंगे , उसके बाद एक माकँ ड्रिल है ।

राज - इसका मतलब आज टाइम नहीं मिलेगा जरा भी।

राठी - अरे सुन तो सही। फिर उसके बाद रेस्ट 3 घंटे का है।

राज - झूठा ।

जय - तू समझ नहीं रहा है। रेस्ट के बाद हमारे सीनियर मीटिंग करेंगे कुछ जरूरी तो उनकी मीटिंग में तकरीबन डेढ़ से दो घंटा लगेगा - जय , मुस्कुराते हुए बोला ।

राठी - और जब वह सीनियर्स मीटिंग में बिजी होंगे तो हम पर नजर कौन रखेगा । वार्डन ना! मैं उसे संभाल लूंगा । तुम दोनों चले जाना लेकिन 3 घंटे के अंदर आ जाना वरना हमारा कोर्ट मार्शल तय है ।

राज - अरे बिल्कुल , 3 घंटे बहुत है । बस तू वार्डन की नजरों से हमारी गैरमौजूदगी को बचा कर रखना।
 
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