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डॉली ने जब सुबह अपने और नीलेश के बीच हुई सारी बातें काकी को बताई तो काकी को बहुत अच्छा लगा ।
कि उनके नीलेश का सपना पूरा हुआ है और वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा है । और डॉली ने वहाँ जाने वाली बात भी बताई ।
पर डॉली जहां सोच रही थी ,कि काकी उदास हो जाएंगी, और अकेली कैसे रहेंगी, वहीं दूसरी तरफ काकी ने बहुत खुश होकर ,डॉली को जाने के लिए कहा।
डॉली तू वैसे भी कहीं नहीं जाती राजनी की परीक्षा हो जाए ,तो तू भी कुछ दिनों की छुट्टी लेकर घूम आ।
काम से और घर से मन बंटेगा तो मन अच्छा हो जाएगा ,जबसे अप्सर बनी है कही भी नही गई,तेरी तो सालों की छुट्टियां पड़ी है,कबसे तूने ली ही नही। कभी-कभी खुश रहने के इंसान को जगह बदल लेनी चाहिए ,रही मेरी बात, तो मुझे यहां कोई परेशानी नहीं होगी।
मेरे पास पिंकी है ना !
24 घंटे वैसे भी बहुत बोलती है।
उसको अपने पास ही रख लूंगी ,और फिर छोटू तो ढाबे पर सोता ही है ।
जरूरत पड़ी तो पिंकी की मां को भी बुला लूंगी । तू यहां की बिल्कुल भी चिंता मत करना ।
बेटा नीलेश तो पिछले 5 सालों से अकेला ही रह रहा है । 15 दिन के लिए उसे भी मां का प्यार नसीब हो जाएगा ।
अब यहां तो उसका आना ठीक ही है अभी इतना व्यस्त है ,आगे चलकर और व्यस्त होगा।
फिर उसे कहां फुर्सत है की 15 ,15 दिनों के लिए यहां रुक पाए ।
अब तू किसी भी तरह वहां जाने के लिए मना नहीं करेगी । और चुपचाप आज ही छुट्टी के लिए दरख्वास्त दे दे।
सरकारी काम है ,तेरी अफसर की ड्यूटी है । छुट्टी मिलने में भी समय लगेगा।
जब काकी ने इतने अच्छे से डॉली को समझाया । और वह खुशी लग रही थी तो डॉली ने हां कह दी ।
और राजनी भी यह सुनकर बहुत खुश हो गई ,कि वह पूरे 15 दिनों के लिए मुंबई जाने वाली है ।
राजनी भी अपनी पढ़ाई की वजह से कहीं नहीं आती जाती थी ।
राज के जाने के बाद ,यह यह पहला मौका था ,जब दोनों कहीं बाहर जा रही थी ।
जब तक राज उनके साथ यहां था ।
हर साल बच्चों की छुट्टियां लगते साथ ही डॉली और बच्चों को लेकर बाहर घूमाने के लिए ले जाता था ।
डॉली ने, नीलेश को फोन करके बता दिया था ।
और यह सुनकर नीलेश बहुत खुश था। अगले 3 महीनों में उसे ऐसा बहुत कुछ करना था ।
जो डॉली और राजनी के लिए सरप्राइजिंग हो ।
3 महीने उसके लिए काफी थे ।और उसने बहुत कुछ सोच रखा था ।
जो वह डॉली के आने से पहले करना चाहता था ।
इधर राजनी पूरे जी जान से अपनी पढ़ाई की तैयारियों में लग गई थी ।
और देखते ही देखते 3 महीने बीत गए। इन 3 महीनों में डॉली ने अपने ऑफिस का सारा पेंडिंग वर्क पूरा कर लिया था। और 15 दिनों के लिए डॉली की छुट्टी भी
मंजूर हो गई थी।
राजनी के एग्जाम शुरु हो गए ,और पूरे 20 दिन चलने के बाद खत्म भी हो चुके थे ।
अब बस तीन-चार दिन बाद ही शहर से सीधा फ्लाइट लेकर वह दोनों मुंबई पहुंचने वाले थे।
विकास ने सारा इंतजाम करवा दिया था और वहां नीलेश राजनी और डॉली को लेने आ रहा था ।
डॉली और राजनी अपनी तैयारियों में लगी हुई थी, साथ ही डॉली यहां का भी सारा काम सबको अच्छे से समझा रही थी ।
कि उसके जाने के बाद ढाबे पर ,घर पर और काकी को कोई परेशानी ना हो ।
सारा काम अच्छे से चलता रहे ,और विकास ने भी डॉली को आश्वासन दिया था ,किन 15 दिनों में जब भी उसकी छुट्टियां पड़ेगी, वह गांव आकर काकी को और घर को देख जाएगा ।
उन्होंने तो यहां तक कहा था ,कि वह काकी को उनके पास शहर में छोड़ दे, तो कुछ दिनों के लिए उन्हें भी काकी का साथ मिल जाएगा ।
लेकिन काकी अपना घर छोड़कर जाना नहीं चाहती थी ,इसलिए डॉली ने पिंकी छोटू और उसकी पत्नी को काकी की देखरेख करने के लिए घर पर छोड़ दिया था।
काकी से विदा लेते हुए ,डॉली और राजनी शहर के लिए निकल गई थी।
और आज शाम को ही वहां से उनकी सीधी मुंबई के लिए फ्लाइड थी।
अभी भी जब शहर जाना हो, तो कन्हैया ही डॉली को छोड़ने जाता था ।
लेकिन अभी डॉली ने कन्हैया को विकास के घर छोड़ने के लिए कहा था ।
क्योंकि विकास और पूनम ने पहले ही कह दिया था, कि डॉली सीधी यहां आ जाए ।
रात को वह दोनों नीनी को एयरपोर्ट छोड़ देंगे ।
क्योंकि कन्हैया को लौटने में बहुत देर हो जाती । और कन्हैया विकास के यहां छोड़ कर वापस गांव चला गया था।
पूरा दिन सब ने साथ में बिताया ,और राजनी ने शैलेश
पूनम से पीजी की बात भी कर ली थी ।
पूनम ने अपने घर के पास ही राजनी के लिए PG देख लिया था ।
जिस में रहकर 1 साल तक एमएस के लिए कोचिंग करने वाली थी ।
और उसने कह दिया था, कि जैसे ही वह मुंबई से आती है, बिना देर किए ,अपनी पढ़ाई फिर से स्टार्ट कर देगी ।
सुबह के 400 बजे डॉली और राजनी मुंबई पहुंच चुकी थी ।
जब एयरपोर्ट से बाहर निकली तो नीलेश सामने मुस्कुराता हुआ खड़ा था।
नीलेश ने जैसे ही डॉली को देखा ,कि भागता हुआ आकर गले लग गया ।
डॉली ने भी उसको अपने कलेजे से लगा लिया था ।
डॉली के आंसू उसके गालों पर धड़कने लगे थे ।
पूरे 7 महीने बाद बेटे को आंखों के सामने देखा था ।
जब जी भर के अपने कलेजे के टुकड़े को गले लगा चुकी तो ।
फिर राजनी भी जाकर नीलेश के गले लग गई । निलेश ने ऊपर से नीचे तक राजनी को देखा ,तो डॉली की तरफ देखते हुए बोला ,,,,,
मां लगता है मोटू को मेरी बहुत याद आती थी ,,,,
राजनी ने आंखें फाड़कर निलेश को देखा ,,,,,मां देखो ना इतने दिनों बाद मिला है फिर भी चिढ़ा रहा है।
अरे मेरी पूरी बात तो सुन!
मैं तो तेरी तारीफ ही करने वाला हूं
मेरे कहने का मतलब है ,कि शायद तुझे मेरी बहुत याद आती थी ,तूने मुझे बहुत मिस किया ,इसलिए देख ना कितनी पतली हो गई है ।
क्या
यह सुनकर सच में राजनी खुश हो गई थैंक गॉड !
अगर तूने मुझे पतला कहा है ।
तो मतलब मैं पतली हो गई हूं।
सच में पतली हो गई है ,मजाक नहीं कर रहा हूं ,,,,,,
डॉली ने हमेशा की तरह दोनो को समझाया ,,,,,निलेश घर चलकर लड़ लेना ।
अभी हम चलें ,,,,
ठीक है मॉम चलिये।
नीलेश ने सारा लगेज खुद ही उठा लिया और बैग को अपने कंधे पर टाँगते हुये आगे आगे चलने लगा ।
निलेश बेटा में ले रही हूं ना !
मॉम आप बस आ जाइए ,,,जब पार्किंग में आये,,,,तो नीलेश ने एक न्यू ब्राण्ड कार का दरवाजा खोलते हुए, डॉली और राजनी को बैठने का इशारा किया ।
डॉली ने इशारे से पूछा ,यह किसकी गाड़ी है ।
मॉम हमारी,,,,//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
राजनी गाड़ी को देखने लगी,,,,,
भाई सच में गाड़ी तू ने ले ली
और नहीं तो क्या
तुझे लाइसेंस दिखाऊ,,,
भाई बहुत अच्छी गाड़ी है ,न्यू ब्रांड!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
अरे तूने कब ली ,और हम लोगों को बताया भी नहीं ,अब बता रहा हूं ना
अगर पहले से बता देता ,तो सरप्राइस कैसे होता
राजनी झट से गाड़ी में आगे की सीट पर बैठ गई ,,,,
भाई मैं आगे बैठूगी,,,
डॉली ने राजनी को देखते हुए कहा ठीक है तू ही आगे बैठ जा ।
निलेश ने सारा सामान दिग्गी में और कुछ पीछे डॉली के पास रखा ,और गाड़ी पार्किंग से निकालते हुए कुछ ही देर में मुंबई की सड़कों पर दौड़ने लगी थी।
कि उनके नीलेश का सपना पूरा हुआ है और वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा है । और डॉली ने वहाँ जाने वाली बात भी बताई ।
पर डॉली जहां सोच रही थी ,कि काकी उदास हो जाएंगी, और अकेली कैसे रहेंगी, वहीं दूसरी तरफ काकी ने बहुत खुश होकर ,डॉली को जाने के लिए कहा।
डॉली तू वैसे भी कहीं नहीं जाती राजनी की परीक्षा हो जाए ,तो तू भी कुछ दिनों की छुट्टी लेकर घूम आ।
काम से और घर से मन बंटेगा तो मन अच्छा हो जाएगा ,जबसे अप्सर बनी है कही भी नही गई,तेरी तो सालों की छुट्टियां पड़ी है,कबसे तूने ली ही नही। कभी-कभी खुश रहने के इंसान को जगह बदल लेनी चाहिए ,रही मेरी बात, तो मुझे यहां कोई परेशानी नहीं होगी।
मेरे पास पिंकी है ना !
24 घंटे वैसे भी बहुत बोलती है।
उसको अपने पास ही रख लूंगी ,और फिर छोटू तो ढाबे पर सोता ही है ।
जरूरत पड़ी तो पिंकी की मां को भी बुला लूंगी । तू यहां की बिल्कुल भी चिंता मत करना ।
बेटा नीलेश तो पिछले 5 सालों से अकेला ही रह रहा है । 15 दिन के लिए उसे भी मां का प्यार नसीब हो जाएगा ।
अब यहां तो उसका आना ठीक ही है अभी इतना व्यस्त है ,आगे चलकर और व्यस्त होगा।
फिर उसे कहां फुर्सत है की 15 ,15 दिनों के लिए यहां रुक पाए ।
अब तू किसी भी तरह वहां जाने के लिए मना नहीं करेगी । और चुपचाप आज ही छुट्टी के लिए दरख्वास्त दे दे।
सरकारी काम है ,तेरी अफसर की ड्यूटी है । छुट्टी मिलने में भी समय लगेगा।
जब काकी ने इतने अच्छे से डॉली को समझाया । और वह खुशी लग रही थी तो डॉली ने हां कह दी ।
और राजनी भी यह सुनकर बहुत खुश हो गई ,कि वह पूरे 15 दिनों के लिए मुंबई जाने वाली है ।
राजनी भी अपनी पढ़ाई की वजह से कहीं नहीं आती जाती थी ।
राज के जाने के बाद ,यह यह पहला मौका था ,जब दोनों कहीं बाहर जा रही थी ।
जब तक राज उनके साथ यहां था ।
हर साल बच्चों की छुट्टियां लगते साथ ही डॉली और बच्चों को लेकर बाहर घूमाने के लिए ले जाता था ।
डॉली ने, नीलेश को फोन करके बता दिया था ।
और यह सुनकर नीलेश बहुत खुश था। अगले 3 महीनों में उसे ऐसा बहुत कुछ करना था ।
जो डॉली और राजनी के लिए सरप्राइजिंग हो ।
3 महीने उसके लिए काफी थे ।और उसने बहुत कुछ सोच रखा था ।
जो वह डॉली के आने से पहले करना चाहता था ।
इधर राजनी पूरे जी जान से अपनी पढ़ाई की तैयारियों में लग गई थी ।
और देखते ही देखते 3 महीने बीत गए। इन 3 महीनों में डॉली ने अपने ऑफिस का सारा पेंडिंग वर्क पूरा कर लिया था। और 15 दिनों के लिए डॉली की छुट्टी भी
मंजूर हो गई थी।
राजनी के एग्जाम शुरु हो गए ,और पूरे 20 दिन चलने के बाद खत्म भी हो चुके थे ।
अब बस तीन-चार दिन बाद ही शहर से सीधा फ्लाइट लेकर वह दोनों मुंबई पहुंचने वाले थे।
विकास ने सारा इंतजाम करवा दिया था और वहां नीलेश राजनी और डॉली को लेने आ रहा था ।
डॉली और राजनी अपनी तैयारियों में लगी हुई थी, साथ ही डॉली यहां का भी सारा काम सबको अच्छे से समझा रही थी ।
कि उसके जाने के बाद ढाबे पर ,घर पर और काकी को कोई परेशानी ना हो ।
सारा काम अच्छे से चलता रहे ,और विकास ने भी डॉली को आश्वासन दिया था ,किन 15 दिनों में जब भी उसकी छुट्टियां पड़ेगी, वह गांव आकर काकी को और घर को देख जाएगा ।
उन्होंने तो यहां तक कहा था ,कि वह काकी को उनके पास शहर में छोड़ दे, तो कुछ दिनों के लिए उन्हें भी काकी का साथ मिल जाएगा ।
लेकिन काकी अपना घर छोड़कर जाना नहीं चाहती थी ,इसलिए डॉली ने पिंकी छोटू और उसकी पत्नी को काकी की देखरेख करने के लिए घर पर छोड़ दिया था।
काकी से विदा लेते हुए ,डॉली और राजनी शहर के लिए निकल गई थी।
और आज शाम को ही वहां से उनकी सीधी मुंबई के लिए फ्लाइड थी।
अभी भी जब शहर जाना हो, तो कन्हैया ही डॉली को छोड़ने जाता था ।
लेकिन अभी डॉली ने कन्हैया को विकास के घर छोड़ने के लिए कहा था ।
क्योंकि विकास और पूनम ने पहले ही कह दिया था, कि डॉली सीधी यहां आ जाए ।
रात को वह दोनों नीनी को एयरपोर्ट छोड़ देंगे ।
क्योंकि कन्हैया को लौटने में बहुत देर हो जाती । और कन्हैया विकास के यहां छोड़ कर वापस गांव चला गया था।
पूरा दिन सब ने साथ में बिताया ,और राजनी ने शैलेश
पूनम से पीजी की बात भी कर ली थी ।
पूनम ने अपने घर के पास ही राजनी के लिए PG देख लिया था ।
जिस में रहकर 1 साल तक एमएस के लिए कोचिंग करने वाली थी ।
और उसने कह दिया था, कि जैसे ही वह मुंबई से आती है, बिना देर किए ,अपनी पढ़ाई फिर से स्टार्ट कर देगी ।
सुबह के 400 बजे डॉली और राजनी मुंबई पहुंच चुकी थी ।
जब एयरपोर्ट से बाहर निकली तो नीलेश सामने मुस्कुराता हुआ खड़ा था।
नीलेश ने जैसे ही डॉली को देखा ,कि भागता हुआ आकर गले लग गया ।
डॉली ने भी उसको अपने कलेजे से लगा लिया था ।
डॉली के आंसू उसके गालों पर धड़कने लगे थे ।
पूरे 7 महीने बाद बेटे को आंखों के सामने देखा था ।
जब जी भर के अपने कलेजे के टुकड़े को गले लगा चुकी तो ।
फिर राजनी भी जाकर नीलेश के गले लग गई । निलेश ने ऊपर से नीचे तक राजनी को देखा ,तो डॉली की तरफ देखते हुए बोला ,,,,,
मां लगता है मोटू को मेरी बहुत याद आती थी ,,,,
राजनी ने आंखें फाड़कर निलेश को देखा ,,,,,मां देखो ना इतने दिनों बाद मिला है फिर भी चिढ़ा रहा है।
अरे मेरी पूरी बात तो सुन!
मैं तो तेरी तारीफ ही करने वाला हूं
मेरे कहने का मतलब है ,कि शायद तुझे मेरी बहुत याद आती थी ,तूने मुझे बहुत मिस किया ,इसलिए देख ना कितनी पतली हो गई है ।
क्या
यह सुनकर सच में राजनी खुश हो गई थैंक गॉड !
अगर तूने मुझे पतला कहा है ।
तो मतलब मैं पतली हो गई हूं।
सच में पतली हो गई है ,मजाक नहीं कर रहा हूं ,,,,,,
डॉली ने हमेशा की तरह दोनो को समझाया ,,,,,निलेश घर चलकर लड़ लेना ।
अभी हम चलें ,,,,
ठीक है मॉम चलिये।
नीलेश ने सारा लगेज खुद ही उठा लिया और बैग को अपने कंधे पर टाँगते हुये आगे आगे चलने लगा ।
निलेश बेटा में ले रही हूं ना !
मॉम आप बस आ जाइए ,,,जब पार्किंग में आये,,,,तो नीलेश ने एक न्यू ब्राण्ड कार का दरवाजा खोलते हुए, डॉली और राजनी को बैठने का इशारा किया ।
डॉली ने इशारे से पूछा ,यह किसकी गाड़ी है ।
मॉम हमारी,,,,//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
राजनी गाड़ी को देखने लगी,,,,,
भाई सच में गाड़ी तू ने ले ली
और नहीं तो क्या
तुझे लाइसेंस दिखाऊ,,,
भाई बहुत अच्छी गाड़ी है ,न्यू ब्रांड!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
अरे तूने कब ली ,और हम लोगों को बताया भी नहीं ,अब बता रहा हूं ना
अगर पहले से बता देता ,तो सरप्राइस कैसे होता
राजनी झट से गाड़ी में आगे की सीट पर बैठ गई ,,,,
भाई मैं आगे बैठूगी,,,
डॉली ने राजनी को देखते हुए कहा ठीक है तू ही आगे बैठ जा ।
निलेश ने सारा सामान दिग्गी में और कुछ पीछे डॉली के पास रखा ,और गाड़ी पार्किंग से निकालते हुए कुछ ही देर में मुंबई की सड़कों पर दौड़ने लगी थी।