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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

डॉली का मुंह बन गया था, और वह चुपचाप खाना खाने लगी, राज चुपचाप डॉली को खाना खाते हुए देख रहा था, उसने काकी की तरफ देखते हुए कहा ,काकी महारानी का कहना है कि मैं भी कथा सुनने चलू तू एक काम कर तू आकर मुझे यहीं सुना दिया कर ,, वहां पंडित तेरे को जो भी बताएगा ना अपुन यही सुन लेगा उसको ,

काकी चुपचाप दोनों के तमाशे देख रही थी पर काकी ने तो हमेशा डॉली का ही पक्ष लिया है ,उसने समझाया की डॉली सही कह रही है ,पहले वह भी नहीं जा रही थी ,लेकिन आज वह गई और उसको बहुत अच्छा लगा मैं तो कहती हूं एक-दो दिन तू भी चल ढावे से जरा बाहर निकल ,,स्कूल ना सही कम से कम कथा पुराण तो सुन ले,,

राज ने खाता खत्म किया और हाथ धोने के लिए बाहर चला गया, डॉली का भी खाना खत्म हो चुका था,उसने अपनी और राज की थाली उठाकर बाहर रखी ,और राज के आने से पहले ही अपने कमरे में चली गई राज वापस आया तो देखा कि डॉली वहां नहीं है, वह समझ गया कि डॉली उसकी बात पर गुस्सा हो गई है, पीछे पीछे उसके कमरे तक चला गया ,जब देखा तो डॉली चादर ओढ़ कर लेट गई थी ,राज ने तेज आवाज में बोलते हुए कहा, महारानी मुंह फुलाने की जरूरत

नहीं है ,देखता हूं अगर कल मुझे समय मिला तो मैं आ जाऊंगा थोड़ी देर के लिए ,और इतना कहकर कमरे से बाहर निकल गया ,डॉली चादर से मुंह ढक कर लेटी थी, राज की बात सुनकर उसके होठों पर हंसी आ जाती है,,,,

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दूसरे दिन भी डॉली के मन में कथा सुनने की ललक बहुत ज्यादा थी ,और उसने निश्चय कर लिया था कि वह आज भी शिवपुराण की कथा सुनने जरूर जाएगी ,वह जल्दी ही उठी घर के सारे काम किये ,बल्कि रात तक का खाना बनाकर उसने सुबह ही रख दिया था ,जिससे कि वह टाइम से पहले और पूरे टाइम तक कथा अच्छे से सुन पाए, डॉली टाइम से तैयार हो गई ,और आंगनबाड़ी जाते जाते एक बार फिर उसने राज को टाइम पर तैयार होने के लिए बोल दिया था सिवा ने उसकी तरफ देखा पर कोई जवाब नहीं दिया ,डॉली ने पर्स उठाया और आंगनवाड़ी चली गई ,आंगनबाड़ी में भी डॉली ने अच्छे से सारा काम कर लिया था क्योंकि वह नहीं चाहती थी किस शिव पुराण सुनने में आंगनवाड़ी की किसी छूटे काम की वजह से उसका ठीक से मन ना लगे ,वह पुराणको पूरे एकाग्र चित्र के साथ सुनना चाहती थी ,शाम को ठीक 500 बजे डॉली घर आ चुकी थी ,आकर उसने जल्दी से हाथ मुंह धोया ,तब तक काकी ने चाय बना ली काकी चाय लेकर जैसे ही कमरे में आई तो देखा कि राज भी ढावे

से आ चुका है, तीनों ने चाय खत्म की और पुराण में जाने के लिए तैयार हो गए, डॉली आज और भी अच्छे से तैयार हुई थी ,जल्दी-जल्दी डॉली और काकी ने घर बंद किया , बाहर निकल कर ताला लगाते हुये चाबी पर्स में डाली ,और पुराण सुनने चल पड़ी, लेकिन तभी राज का फोन बज उठा और राज को याद आया कि आज कुछ लोग उसके ढाबे पर शहर से आ रहे हैं और ऐसे में राज का रुकना जरूरी था क्योंकि वह हाई-फाई लोग थे, और उनको अटेंशन देना जरूरी था , इसलिए चाहते हुए भी राज वहां नहीं जा सकता था

उसने डॉली की तरफ देखकर दोनों कान पकड़े और सॉरी बोलते हुए माफी मांगी महारानी तू तो समझती है कि अपुन के लिए काम से जरूरी कुछ नहीं है

अपुन नहीं चाहता कि कोई कस्टमर आकर अपुन के ढाबे पर लफड़ा करे,क्योंकि अपुन ने पहले ही उनसे वादा कर लिया था कि आ उनको पूरा अटेंशन देगा, तो सॉरी पर तू चिंता मत कर आज नहीं तो ना सही पर कल तेरे साथ जरूर चलेगा,,,

अब चूँकि राज का काम ही ऐसा था कि किसी भी समय करना पड़ जाए, इसलिए डॉली ने भी कुछ नहीं कहा, और डॉली काकी के साथ ही पुरान में चली गई

दोनों पुरान में आ चुकी थी,पंडित जी आज आगे की कथा का वर्णन सुनाने वाले थे जिसमें शिव के प्रति पार्वती के प्रेम की अनुभूति को दिखाया जाना था

डॉली कथा सुनने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी थी , कथा की शुरुआत आरती के साथ हुई ,और फिर पंडित

जी ने पुनः कथा का प्रारंभ किया ,कल कथा का समापन जहां पर हुआ था ,उससे आगे की कथा आज सुनाने वाले थे ,पंडित जी ने कथा सुनाना प्रारंभ किया ,,,,,,

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svgओम नमः राजय //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

जब सती का पूरा शरीर छत विक्षत होकर समाप्त हो गया, तब शिवजी घोर तपस्या में बैठ चुके थे ,और उसी बीच मां पार्वती का जन्म हिमालय पुत्री के यहां नैना देवी की कोख से हो चुका था ,नारद जी ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी, की पार्वती श्री शिव की धर्मपत्नी बनेंगी, और इन दोनों का विवाह निश्चित है ,लेकिन इस बात का भान ना तो शिव को था, ना ही पार्वती मैया को पर जैसे-जैसे मां गौरा बड़ी होती गई अपने आप ही शिव के लिए उनका प्रेम बढ़ता गया श्री शिव के लिए उनकी श्रद्धा और विश्वास अनंत थी ,जहां एक तरफ शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे ,वहीं दूसरी तरफ पार्वती धीरे-धीरे उनके प्रेम में डूबती जा रही थी, जब पार्वती को पूर्ण रूप से यह ज्ञान हो गया कि वह पूरे मन से शिवजी का वरन कर चुकी है ,श्री शिव के बिना उनका जीवन अधूरा है श्री शिव को पाना ही उनके जीवन का लक्ष्य और धर्म है, क्योंकि वह मन से पूर्ण रुप से शिव की हो चुकी है ,अतः वह सारे प्रयत्न करने लगी थी, कि वह शिव को पति के रूप में पा सकें ,लेकिन वहीं दूसरी तरफ तपस्या में बैठे लीन श्री शिव को अभी तक मां गौरा के प्रेम का कोई भान नहीं था ,क्योंकि वह पूरी तरह से अपनी तपस्या में लीन थे,

नर नारी ,देवता ,स्वर्ग लोक और पृथ्वीलोक के सभी बासी यही चाहते थे कि मां गौरा और शिव का विवाह हो ,लेकिन इस विवाह में जो सबसे बड़ी विडंबना थी, वह थी श्री शिव का तपस्या से जगाना जो सबसे असंभव कार्य था ,जब तक राज स्वयं इस तपस्या से नहीं उठ जाते ,तब तक यह किसी के बस की बात नहीं थी ,अतः शिव का इस तपस्या से जागना अत्यंत आवश्यक था,, पर पार्वती के साथ सभी का इसमें पूरा सहयोग था कि शिव तपस्या से जागृत हो, और माता पार्वती से विवाह रचाये, क्योंकि यही सृष्टि का नियम है ,कि एक स्त्री और पुरुष ऐसे दो लोग जिनमें सच्चा प्रेम हो ,जब वह अपने गृहस्थ जीवन को शुरू करते हैं ,तभी इस समाज का विकास संभव हो पाता है ,अतः अब माँ पार्वती का कर्तव्य था ,,कि कैसे भी विवाह के लिए उन्हें मनाये ,,, चाहे तपस्या करके या फिर किसी दूसरे उपाय से ,लेकिन यह परीक्षा मां पार्वती की ही थी ,कि उन्हें अपने प्रेम की शक्ति से शिव को आकर्षित करना ही होगा, और तभी यह संभव हो पाएगा कि वह श्री शिव को अपने वर के रूप में प्राप्त कर सके,,,,

और जब मां पार्वती इस बात को भलीभांति समझ चुकी, तो वह शिव को प्राप्त करने के जतन करने लगी, अब उनकी तपस्या तभी पूरी मानी जाती जब वह श्री शिव को अपने पति के रूप में वर लेती इसी के साथ आज की कथा समाप्त होती है, कल की कथा का श्रवण करने के लिए सभी बहन और भाई सही समय पर पंडाल में आ जाए ,,,इसके साथ आरती और प्रसाद

वितरण हुआ और सभी अपने अपने घर आ गए ,,,

आज घर आकर डॉली ने काकी से कोई भी सवाल नहीं किया था ,उसकी समझ में आ चुका था किसी की पार्वती मैया ने शिवजी से ही सच्चा प्रेम किया ,उन्हें इस बात का एहसास हो गया था ,और इसीलिए उन्हें प्राप्त करने के लिए वह सभी जतन करने लगी थी, कि चाहे कुछ भी हो शिव जी को पाना ही उन्होंने अपना लक्ष्य बना लिया था डॉली को एक बात अच्छी तरह से समझ आ गई थी ,कि जब दो लोगों के बीच प्रेम होता है और वह प्रेम की सच्ची अनुभूति को समझ जाते हैं ,तो फिर उसे पाना गलत नहीं होता उसे शिव पार्वती की कथा बहुत पसंद आई थी ,अभी तक डॉली सिर्फ पढ़ाई ,घर के काम और आंगन बाड़ी में ही व्यस्त रहती थी

पर शिव पार्वती की कथा सुनकर उसने जाना कि हर इंसान के जीवन में एक प्रेम का अध्याय भी होता है ,जिसे वह कभी ना कभी जरूर महसूस करता है, चाहे वह त्रिलोकनाथ शिव और गौरी मैया ही क्यों ना हो ,राधा कृष्णा ,सीताराम ,यह सभी अनूठे प्रेम के उदाहरण है, डॉली के मन में प्रेम का अंकुर फूट चुका था ,उसे कुछ ऐसी चीजें महसूस हो रही थी ,जो वह ठीक से समझ नहीं पा रही थी, लेकिन कहीं ना कहीं वह सारी बाते उसे कुछ सोचने पर मजबूर तो कर रही थी ,डॉली शिव पार्वती की कथा सोच सोच कर बहुत अच्छा महसूस कर रही थी मां गौरा मैया के असीम प्रेम को देखकर सोच रही थी ,कि क्या सबके जीवन में

कुछ पल ऐसे जरूर आते है ,जब वह किसी से प्रेम करता है ,और क्या मेरे जीवन में भी ऐसा कोई पल आएगा ,जब मैं किसी से प्रेम करूंगी ,अपनी बात पर सोच कर डॉली को हंसी आ गई थी ,कि क्या उसे भी मां पार्वती की तरह ही किसी को पाने के लिए जतन करने होंगे, या फिर उसके शिवजी खुद ही उसके पास आ जाएंगे, तभी काकी की आवाज से डॉली की तंद्रा टूटी ,,

जैसे ही राज घर आया तो काकी ने राज को सुनाते हुए कहा ,,,

राज तू भी ना किसी औघड़ से कम नहीं है जैसा तेरा नाम है राज, वैसा ही तेरा काम जहां एक तरफ भगवान शिव अपनी धूनी में रम जाते थे ,तू बिलकुल उसी तरह ढावे में रम जाता है ,ना तुझे दुनियादारी से कोई मतलब ,ना अपने जीवन से ,,

भगवान शिव तपस्या में लीन रहते है और तू भी यह कहते कहते काफी जोर से हंस दी थी डॉली काकी की बात को बहुत ध्यान से सुन रही थी ,डॉली ने काकी के पास जाकर पूछा काकी आपने ऐसा क्यों कहा,

कहा कि राज भी भगवान शिव के जैसे है काकी ने हंसते हुए कहा ,,,,

और नहीं तो क्या, तू देखती नहीं है उसको जैसे शिवजी अपनी धूनी में रहते थे, वह अपने ढावे में रमा रहता है, उसके दिल में तुझे दूर दूर तक प्रेम दिखता है क्या

बस अपनी दुनिया से मतलब है उसे ,अरे मैं तो कहते-कहते थक गई हूं ,कि अपने लिए कोई लड़की

देख कर घर बसा ले ,लेकिन उसे तो इन सब बातों से कोई मतलब ही नहीं अरे क्या पूरी जिंदगी क्वांरा ही रहेगा

उमर हो गई है घर बसा कर एक दो बच्चे पैदा कर ले ,तो मैं भी सुख से मर सकूं,, जैसे शिवजी को अपने जीवन की कोई चिंता नहीं थी ,सच कहती हूं डॉली अगर पार्वती मैया आकर शिव की तपस्या भंग ना करती

और पति के रूप में उन्हें पाने की जिद ना करती तो शिव जन्म जन्मांतर तक अपनी धूनी में ही रमे रहते ,जब मां पार्वती ने आकर उनकी तपस्या की उनको पाने की ज़िद की और सब ने उनका साथ दिया, तब कहीं जाकर वह शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त कर पाई, में भगवान से यही प्रार्थना करती हूं ,कि उन्होंने मेरे राज के लिए भी कहीं कोई पार्वती मैया जन्मी हो ,जो आकर इसकी तपस्या भी भंग करें और इसे अपना पति बनाये, तभी इसकी शादी हो पाएगी नहीं तो मुझे नहीं लगता कि यह कभी किसी लड़की से कुछ कहेगा ,तब तक राज हाथ धोकर खाना खाने आ चुका था ,काकी अंदर रसोई में थालियां लगा रही थी ,और डॉली ने चटाई बिछाकर पानी रखा सलाद रखा और अंदर खाना परसने में मदद करवाने लगी काकी के कहे हुए शब्द डॉली के दिमाग में बार-बार आ रहे थे ,कि राज भी भगवान शिव की तरह ही है, डॉली काकी की बात सोच कर मुस्कुरा रही थी, सच में राज की आदतें तो बिल्कुल वैसी ही थी ,

बस राज के बारे में ही सोच रही थी ,जब थाली देख लेकर आई और राज को देने लगी तो वह उसे देखे जा रही थी

राज ने डॉली के हाथ से थाली लेते हुए कहा ओ सहजादी मुझे थाली देगी भी ,या फिर ऐसे ही पकड़ के खड़ी रहेगी

और थाली लेकर खाना शुरू कर दिया

तब तक डॉली और काकी भी अपनी

थालिया लेकर आ चुकी थी

और तीनों एक साथ खाना खाने लगे राज खाना खाते हुए बोला,,,,

काकी अपूण तेरे साथ नहीं आ पाया तू बता ना क्या हुआ था वहां

काकी ने कहा तेरी तो सब समझ से परे है लेकिन आज शिवजी और पार्वती मैया के प्रेम की कथा का वर्णन किया था पंडित जी ने ,अरे तू तो इन सब बातों से कोसों दूर है तुझे क्या समझ आएगा ,तभी तो कहा था तू भी 4 शब्द सुन लेता,

काकी जब तेरे पास टाइम होगा ना तू अपन को सुना देना,,,

डॉली खाना खाते हुए बीच-बीच में राज को देखती जा रही थी, उसे सच में काकी की कही बात सही लग रही थी, कि किस तरह से राज में शिव जी के जैसा रूप ही है काकी ने ये बात मजाक में कही थी ,लेकिन डॉली ने बहुत बार सोचा और उसे राज का एक अलग ही रूप दिखा,,,,,

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डॉली और काकी हर रोज कथा सुनने जाती थी ,कथा पूरे 8 दिनों तक चलने वाली थी और अभी 5 दिन निकल भी चुके थे, लेकिन रोज कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता जिससे राज वहां जाने से रह जाता ,अब तक शिव पार्वती के विवाह का वर्णन भी हो चुका था आज कथा का छठवां दिन था, ढाबे पर कोई खास काम भी नहीं था ,राज फ्री था तो उसने आज कथा में जाने का पक्का इरादा कर लिया था ,डॉली और काकी रोज की तरह तैयार होकर कथा के लिए निकल गई राज भी बस धावे पर कुछ काम समझा कर कथा में जाने के लिए तैयार ही हो रहा था

15 मिनट में राज काम से फ्री होकर ढाबे पर सारा काम समझा कर कथा सुनने के लिए निकल गया , वैसे राज के लिए यह बिल्कुल नई बात थी ,क्योंकि वो भंडारे कथा पूजा से बहुत दूर रहता था ,इन सब का व्यवहार काकी ही निभाती थी, लेकिन अभी काकी और डॉली रोज कथा सुनकर आती और राज को समझाती, तो सुन सुन के उसका भी मन हो गया था कि आखिर एक बार जाकर सुनु कि पंडित ऐसा बोलता

क्या है, कि सब लोग वहां जाकर अपना अपना टाइम खोटी करते हैं, राज मजाक के मूड में ही सही ,पर कथा सुनने पंडाल में आ चुका था ,पीछे पड़ी हुई कुर्सियों में सबसे पीछे वाली कुर्सी राज को खाली दिखी ,और वह वही जाकर चुपचाप बैठ गया, तब तक आरती संपन्न हो चुकी थी , और पंडित जी कथा का प्रारंभ करने ही वाले थे ,

आज समुद्र मंथन से संबंधित सारी बातें कथा में बताने वाले थे पंडित जी ने,,,,

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के साथ ही कथा सुनाना प्रारंभ किया

जब समुद्र मंथन प्रारंभ हुआ तो समुद्र में से एक से एक दुर्लभ अमूल्य और आश्चर्यजनक वस्तुएं निकलना प्रारंभ हो गई, कुछ वस्तुएं बहुत ही सुंदर थी, कुछ अमूल्य थी, समुद्र मंथन में मां लक्ष्मी जी निकली, जिन्हें श्री विष्णु को सौंपा गया ,कभी ना मुरझाने वाली कमल फूल की माला ,जिसे इंद्र के सुपुर्द कर दिया गया, एरावत हाथी ,उच्चेश्रेवा घोड़ा इस तरह एक से एक अमूल्य वस्तुये समुद्र मंथन से निकलती गई, और इनमें देवता और दानवों में बंटवारा होता गया ,उसके बाद अमृत से भरा कलश जिसको देवताओं ने दानवों को धोखे में रखकर खुद ही ग्रहण कर लिया, क्योंकि यह पृथ्वी के हित में था, और जब हलाहल विष से भरा घड़ा निकला तो सारे देवताओं के शरीर जलने लगे ,विष

के प्रभाव से हाहाकार मच गया, पर देवों के देव महादेव ने उस हलाहल विष को अपने कंठ में रखा ,और सब को निश्चिंत किया,

तभी तो श्री शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है, विश्व जगत के भले के लिए उन्होंने खुद के कंठ में विष को रख लिया पंडित जी इस कथा का पर्याय समझाने लगे कि श्री शिव तो महा शंभू थे तो उन्होंने विष से भरा हुआ घड़ा अपने कंठ में उड़ेल लिया लेकिन आज के मनुष्य में इतनी शक्ति नहीं है पर अगर हमारा मन अच्छा हो ,हम दूसरों के लिए निस्वार्थ रूप से मन में अच्छे भाव रखते हो ,तो उसके लिए कुछ अच्छा सोच सकते हैं ,अगर किसी मनुष्य से सच्चा प्रेम करता है, तो स्वार्थ से परे होकर उसके भले के बारे में सोच सकता है, अपना स्वार्थ ना देखते हुए उस इंसान के साथ हम क्या अच्छा कर सकते हैं ,कलयुग में अगर हमने इतना कर लिया, या इतना सोच लिया तो हमारे लिए यही श्री महा शिव का आशीर्वाद होगा ,और अगर कोई ऐसा व्यक्ति है जो अपने स्वार्थ से परे होकर किसी और के भले के बारे में सोच सकता है ,तो कलयुग में उसे भी भगवान शिव का ही रूप मान सकते हैं ,पर आजकल ऐसे मनुष्य होते ही कहां है जो किसी और का भला सोच पाए

आजकल तो सब अपने ही स्वार्थ में लिप्त होते हैं ,,परम धर्म वही है ,सच्चा प्रेम वही है जब हम किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में और उसके भविष्य के बारे में कुछ अच्छा करने का सोचते हैं ,और इसी के साथ

आज की कथा समाप्त हो चुकी थी,,,,,

भीड़ भाड़ में तो पता नहीं चला पर रास्ते में काकी और डॉली को वहां से लौटते हुए राज दिख गया था ,और काकी बहुत खुश थी, कि आखिर राज एक दिन कथा सुनने आ ही गया ,घर आकर जब काकी ने काम करते हुए राज से पूछा ,,,राज तू कथा में टाइम से तो पहुंच गया था ना

हां काकी अपुन टाइम से पहुंच गया था लेकिन मुझे तो तू कहीं नहीं दिखा ,,,

अरे काकी बह सबसे पीछे वाली कुर्सी खाली पड़ी हुई थी ,तो मैं वहीं बैठ गया था ,पीछे से तुझे कुछ सुनाई भी दिया या फिर ऐसे ही बैठा रहा ,,,,,अरे काकी अपुन ने सुना था ना वह पंडित बता रहा था ,,

कि जो पहले का विलेन होता था ,और दूसरी तरफ से सभी भगवान होते थे, ऐसा कुछ बताया था ना ,अमृत तो मिल बांट के पी लिया ,लेकिन जब साला पॉइजन की बात आई तो अपने भोलेनाथ को पकड़ा दिया

अपुन पूछता है कि उनने पिया कायको

काकी ने समझाया बेटा ऐसे नहीं कहते वह तो त्रिलोकनाथ है, उन्होंने विष दुनिया के भले के लिए पिया था ,अगर वह अपने हलक में इसे न उतारते तो दुनिया का उसी क्षण नाश हो जाता, इसलिए उन्होंने खुद का सुख न देखते हुए दूसरों का सुख देखा ,वह चाहते तो विषपान न करते, अमृत भी पी सकते थे लेकिन वह दुनिया जहां से प्रेम करते थे उसका अच्छा

चाहते थे, इसलिए उन्होंने खुद ही विष पी लिया, और सब को संकट से बचा लिया ,,,,,

हां काकी तू शायद सच्ची कह रही है यह साला आज का आदमी है ना सिर्फ अपना ही अपना स्वार्थ देखता है, कि कैसे भी हो, कुछ भी हो ,उसके साथ सब कुछ अच्छा हो जाना चाहिए ,, दुनिया को आग लगती है तो लग जाए ,,,पर काकी एक बात मेरी समझ में आ गई ,कि जहां हम स्वार्थ नहीं देखते ,और जिससे प्रेम करते हैं ,उसके बारे में सब कुछ अच्छा होता हुआ देखना चाहते हैं, कि बस वह सुखी रहे, और उसकी जिंदगी में सब कुछ अच्छा हो ,काकी भी राज की बातों पर हंसते हुए बोली, बेटा यह तूने बिल्कुल सही बात कही ,पंडित जी की कथा का सार तो यही था,कि इस कलयुग में अगर हम किसी एक इंसान का भी भला पर कर पाए तो हमारा इस पृथ्वी पर जन्म लेना सिद्ध हो जाता है, हां काकी वैसे अपुन को अच्छा लगा कथा सुनकर ,,,,

डॉली बहुत ध्यान से राज के चेहरे की तरफ देख रही थी, क्योंकि उसने 5 सालों में पहली बार राज के मुंह से भगवान का नाम सुना था ,,ऐसा नहीं है कि वह मंदिर ना जाता हो पर बात मंदिर जाने पर ही खत्म हो जाती थी अगर काकी कभी कहती तो उनके साथ मंदिर जाता, और हाथ जोड़कर वापस आ जाता ,बाकी चीजों की गहराई में कभी नहीं उतरा था ,धीरे धीरे 8 दिनों बाद शिव पुराण पूरा हो चुका था, राज बड़ी मुश्किल से एक ही दिन कथा सुनने जा पाया था, और उसकी

समझ में बस इतना ही आया कि हमें खुद के लिए नहीं जीवन दूसरों के लिए जीना चाहिए और अगर हम किसी के लिए कुछ करते हैं तो निस्वार्थ भाव से ही करना चाहिए जहां स्वार्थ हो ,वहां प्रेम नहीं हो सकता और जहां प्रेम हो वहां स्वार्थ नहीं, क्योंकि इससे आगे पीछे की कथा तो राज ने सुनी ही नहीं थी लेकिन डॉली ने जो कथा सुनी थी उसमें वह शिव और पार्वती के प्रेम की अनुभूति को अच्छी तरह से समझ गई थी, उसने समझ लिया था किस शिव में कौन-कौन सी खूबियां थी, और क्यों गौरी मैया ने उन्हें पाने के लिए तपस्या की थी ,क्योंकि वह शिव को जान चुकी थी, एक ही कथा से डॉली ने कुछ और सीखा था, और राज की छाप उसके मन पर कुछ और ही पड़ी थी ,,,,,

डॉली जब भी राज को कुछ अच्छा करता हुआ देखती उसे हमेशा पंडित जी की कथा की याद आ जाती ,राज का शुरू से ही नियम था कि उसके ढाबे के बाहर से कोई भूखा नहीं गुजर सकता था, रोज 5,,7 लोगों को भरपेट खाना वह फ्री में ही खिलाता था अगर किसी बच्चे के स्कूल की फीस रह गई तो, चुपचाप जाकर उसे जमा कर देता, किसी गरीब के पास चप्पल नहीं है तो फटाफट खरीद कर उसके हाथ में पकड़ा देता , पर राज ने इन सब बातों के बदले कभी कोई उम्मीद किसी से नहीं की थी

वह जुबान का चाहे जितना ही कड़वा हो पर उसका मन बिल्कुल आईने की तरह साफ था डॉली जब भी राज की ऐसी बातों को देखती तो उसके मन में राज के

लिए इज्जत और बढ़ जाती, कथा पुराण हुए दो-तीन महीने बीत चुके थे, इन दो-तीन महीनों में डॉली ने कितनी बार महसूस किया था, की राज के अलावा ऐसा कोई नहीं है जिसकी डॉली पूरे दिल से इज्जत करती हो ,उसको राज की हर बात में शिव जी का ही रूप दिखने लगा था ,लेकिन अभी भी वह समझ नहीं पा रही थी, कि आखिर ऐसी कौन सी बात है ऐसा क्या हुआ है ,जो कुछ दिनों से उसे राज की हर बात आकर्षित कर रही थी, राज जब ढाबे पर काम करता या ,अपनी गाड़ी साफ करता ,या बगीचे में लगी सब्जियों में पानी देता ,तो डॉली एकटक उसे ऐसा करते हुए देखती रहती, और इसी बीच अगर राज की नजर उस पर पड़ती तो शर्मा जाती , उसे अकेले में ही इन बातों पर हंसी आ जाती थी और फिर कभी कभी खुद से ही सवाल करती , यह सब क्या है ,वह क्यों ऐसी हरकतें कर रही है,,,,

एक बार तो बाजार जाते हुए उसको राज की अच्छी खासी डांट भी खानी पड़ी थी डॉली राज के साथ बाजार जा रही थी, और वह उसके साथ ही आगे की सीट पर बैठी थी राज पूरी मस्ती में गुनगुनाते हुए गाड़ी चला रहा था ,और डॉली उसे देखे जा रही थी

जब राज की नजर डॉली पर पड़ी तो उसने आंखें चढ़ाते हुए कहा ,,,,महारानी तू अपुन को घूरती कायको रहती है ,देख अपुन ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके लिए तू अपुन को डांट लगाए,,,, इसलिए यह बड़ी-बड़ी आंखें अपने पास ही रख,,

उसके बाद भी डॉली राज को देखे जा रही थी ,,,,और उसने अचानक राज से पूछा आपने शादी के बारे में कभी कुछ सोचा है क्या

राज ने अचानक गाड़ी को ब्रेक मारा और डॉली की तरफ देखते हुए बोला, तू अपन से क्या बोली एक बार फिर बोल ,डॉली ने फिर मासूमियत से कहा मैंने बस यही पूछा क्या आपने शादी के बारे में कुछ सोचा है

इस बात पर राज जोर जोर से खिलखिला कर हंस पड़ा था,,, क्यों तू भी काकी का रोल प्ले कर रही है, क्या एक काकी कम थी जो अब तू भी मुझे मेरी शादी

के लिए टोकने लगी ,,,,सुन तू बच्ची है मेरी काकी बनने की कोशिश मत कर ,,,,,

हां शादी के बारे में तो जरूर सोचा है पर अपुन की नहीं ,तेरी!

1 दिन अपन से काकी ने भी कहा था कि अब तू शादी के लायक हो गई है, तेरे लिए एक अच्छा सा लड़का ढूंढना पड़ेगा मेरे को,,,

क्या डॉली इस बात पर मुंह फुला कर बैठ जाती है ,मेरी शादी कहां बीच में आ गई मुझे नहीं करनी कोई शादी-वादी ,और दूसरी तरफ देखने लगती है ,राज ने दोबारा गाड़ी स्टार्ट की और डॉली से कहा अरे महारानी इसमें गुस्सा होने वाली कौन सी बात है काकी कहती है कि लड़कियों को तो 1 दिन शादी करके अपने घर जाना ही होता है, अरे सारी लड़कियां जाती हैं ,तो तू भी जाएगी मुंह क्यों फुला रही है ,फिर मैं आज ही थोड़ी ना तेरी शादी करने जा रहा हूं,,,,,,

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गाड़ी अपनी रफ्तार पर थी ,शहर बस आने ही वाला था ,डॉली और राज कई महीनों बाद शहर आ रहे थे ,तो उन्हें शहर में काफी काम थे ,अब डॉली अधिकतर ऑनलाइन सामान ही मंगा लेती , तो शहर आना जाना कम ही होता था ,कुछ ही देर में दोनों शहर आ चुके थे ,और आकर ही खरीदारी करने में लग गए ,एक के बाद एक सामान खरीदते हुए गाड़ी में रखते जा रहे थे, कुछ डॉली के आंगनबाड़ी का सामान था ,जो उसे लेकर जाना था ,कुछ राज के ढाबे का ,और कुछ घर का भी सामान था ,चूँकि डॉली भी काम में व्यस्त रहती ,और राज भी तो इस वजह से दोनों का शहर आना जाना कम ही होता था ,खरीदारी करते हुए रात हो चुकी थी लेकिन शहर सिर्फ 2 घंटे की दूरी पर था

तो कोई चिंता की बात नहीं थी, फिर रोड भी काफी चालू था ,सारी खरीदारी खत्म करने के बाद दोनों गांव के लिए निकल पड़े लेकिन जैसे ही शहर को क्रॉस किया कि अचानक मौसम में बदलाव आने लगा

हल्की बूंदों के साथ तेज आंधी और तूफान अचानक से शुरू हो गया , राज ने जल्दी से उतर कर गाड़ी में

रखी हुई बड़ी सी पॉलिथीन से सामान को तो कवर कर दिया

लेकिन राज की जीप खुली हुई थी, तो तूफान और पानी की बौछार से इन दोनों का गाड़ी में बैठना मुश्किल हो रहा था ,यही कोई 1015 मिनट गाड़ी ड्राइव करके वह दोनों एक गांव में रुक गए, गांव में किसी के घर के बाहर बनी हुए दालान के नीचे दोनों खड़े हो गए, कि पानी कुछ कम हो तो वहां से निकले ,लेकिन पानी कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा था ,तूफान की तेजी भी कम नहीं हुई थी ,दोनों को यहां खड़े हुए लगभग आधे घंटे से ज्यादा बीत चुका था तभी अंदर का दरवाजा खुला ,और एक बूढ़ी अम्मा बाहर निकली, बारिश की वजह से लाइट जा चुकी थी ,और घुप अंधेरा था

पहले तो वह थोड़ा डर गई ,लेकिन जब डॉली ने समझ लिया कि उन्हें कुछ सही नहीं लग रहा है, तो डॉली ने आगे बढ़ते हुए उन्हें आवाज लगाई ,,अम्मा आप डरिये मत बारिश की बजह से हम यहाँ रुके हुए है आपके घर के बाहर जगह दिखी ,तो बस कुछ देर के यहां रुक गए, हमारा गांव यहां से पास ही है, डॉली की कुछ बातें शायद उनके कान में पड़ चुकी थी, थोड़ी ही देर बाद वह हाथ में लानटेन लेकर बाहर निकली

और लानटेन को ऊपर करते हुए उन्होंने डॉली और राज को देखा, तो दोनों बहुत ही भले लगे ,उनके बाहर की दालान (बरामदा) काफी बड़ी थी, उन्होंने राज से दालान के अंदर जीप लगाने के लिए कहा ,और दोनों

को अंदर बुला लिया ,डॉली को पहले तो अंदर जाने में कुछ संकोच लगा, पर राज उसके साथ था ,डॉली और राज दोनों अम्मा के घर के अंदर चले गए ,क्योंकि इस समय सच में उन्हें किसी के सहारे की जरूरत थी बाहर तेज बारिश ,और ठंडी हवा से डॉली कांपने लगी थी, उसके कपड़े भी कुछ कुछ भीग गए थे, डॉली जैसे ही अंदर आई तो सामने ही अम्मा के घर में चूल्हा जल रहा था जिसकी गर्माहट की डॉली को शख्त जरूरत थी,वह जाकर चूल्हे के सामने बैठ गई,और आग तापने लगी,,,

उन्होंने लानटेन की रोशनी थोड़ी और बढ़ा दी, जिससे वह एक दूसरे को अच्छे से देख पाए ,काम करते हुए वह बोलती जा रही थी बेटा लग रहा कि तुम दोनों को बहुत ठंड लग रही है, मैं तुम लोगों के लिए चाय बनाती हूं डॉली ने आगे बढ़ते हुए कहा! अम्मा आप परेशान मत होइए ,बस हम थोड़ी देर आपके यहां बैठना चाहते हैं ,जैसे ही बारिश रुकेगी तो हम यहां से चले जाएंगे, पर उन्होंने डॉली की बात को ना सुनते हुए चाय चढ़ाई और उसमें शक्कर पत्ती डालने लगी, वह बोलती ही जा रही थी,,, बेटा इस बुड़िया के घर में आता ही कौन है, भगवान तो मेहमान का रूप होते हैं, महीनों बाद कभी ऐसा होता है कि कोई इस बुढ़िया के यहां आए ,और मुझे कुछ करने का मौका मिले, वह सभी चीजो को टटोलते हुए शक्कर, पत्ती ,और दूध चाय में डालती जा रही थी, और बोले जा रही थी कुछ देर में डॉली की समझ मे आ गया कि शायद वह न के बराबर ही सुन पा

रही थी राज कमरे के अंदर इधर उधर देखता हुआ जायका ले रहा था कि अम्मा के यहां और कौन-कौन है ,,,,चाय बन चुकी थी ,अम्मा ने तीन स्टील के ग्लास में चाय छानी, डॉली और राज को देकर खुद भी चाय पीने लगी चाय पीते पीते ही पूछा ,बेटा भूख तो तुम लोगों को जरूर लगी होगी, मैं बस अभी खाने के लिए कुछ बनाती हूं, यह बात तो सच थी की डॉली को बहुत तेज भूख लग रही थी ,और राज को भी ,इस बार डॉली ने उन्हें मना नहीं किया ,,,,,पर इतना जरूर कह दिया,,,,कि सच बात तो यह है, कि मुझे सच में बहुत तेज भूख लग रही है, पर आप चिंता मत कीजिए, मैं आपके साथ खाना बनवा लूँगी, इतना सुनकर अम्मा के चेहरे पर खुशी आ गई थी ,उन्होंने चूल्हे के पीछे रखी हुई डलिया में से बड़े-बड़े दो बैगन ,और कुछ टमाटर लेकर चूल्हे की जलती हुई आग में डाल दिए, और और पास ही रखे कनस्तर से एक बर्तन में आटा निकाल कर डॉली को दे दिया ,,,बेटा तू यह आटा माँढ़ (गूँथ) दे तब तक मैं यह बैगन और टमाटर भून के इसकी चटनी बना लेती हूं ,अभी तो डॉली को अगर नमक और रोटी भी मिल जाती तो उसमें भी उसकी आत्मा तृप्त हो जाती, फिर अम्मा जब इतने प्यार से उसके लिए बैंगन टमाटर की चटनी ,और रोटियां बना रही थी ,तो डॉली के मुंह में अभी से पानी आने लगा था डॉली ने जल्दी से आटा गूंथा और मिट्टी का तवा चूल्हे पर चढ़ाते हुई रोटियां सेकने लगी तब तक अम्मा के बैंगन और टमाटर भुन चुके थे ,उनको छीलकर सिलबट्टी पर रखा उसमें

दो-तीन बड़ी नमक की डाली डाली और तीन-चार हरी मिर्ची और हरा धनिया डालकर चटनी भी बनकर तैयार हो गई थी राज सामने ही बैठा यह सब कुछ देख रहा था ,गरम गरम रोटी कि खुशबू से राज की भूख और भी बढ़ गई थी ,जैसे ही पहली रोटी सिकी अम्मा ने एक बड़ी सी थाली में चटनी रखकर डॉली को देते हुए कहा ले बिटिया इसमें रोटी रख और अपने आदमी को यह थाली पकड़ा दे ,जब तक वह खाएगा तब तक हमारी रोटियां सिक जाएंगी ,और फिर हम दोनों खा लेंगे ,इस बात पर राज डॉली की तरफ देखने लगा ,,

और राज ने कहा,, अम्मा अपुन इसका कोई आदमी नहीं है,,, अम्मा शायद ऊंचा सुनती थी ,वह कोई भी बात सुने बिना ही लगातार बोले जा रही थी,,,
 
राज ने फिर डॉली की तरफ इशारा किया महारानी इस अम्मा को बोलना कि अपुन तेरा जो वह बोल रही है ,वह कुछ नहीं है डॉली को पता था कि अम्मा सुनने वाली नहीं है ,इसलिए वह चुपचाप रोटियां सेकती रही थोड़ी ही देर में अम्मा ने फिर आवाज लगाई बेटा उससे पूछ ले उसे और कुछ तो नहीं चाहिए, ले थोड़ी चटनी और परस दे कहते हैं कि जब आदमी खाना खाता है ,तो औरत को उसके थाली पर ही निगाह रखनी चाहिए कि उसे किसी चीज की जरूरत तो नहीं है

बेटा मुझे तो कुछ ठीक से दिख नहीं रहा

तू ही अपने आदमी का ध्यान रख, और उसे ठीक से खाना खिला दे ,कहते हैं कि अगर आदमी भरपेट खाना खा लेता है ,तो औरत की भूख अपने आप ही मिट

जाती है,,,

राज,,फिर बोला ,ये अम्मा भी न रेडियो के माफिक ही बोलती जाती है,सुनती नही है

शहज़ादी तू इशारा करके इसको समझा कि अपुन को है तेरा!

डॉली ने कहा आप परेशान क्यों हो रहे है उन्हें जो समझना है समझने दीजिये हम कोन सा यहाँ रहने बाले है,,,,,,

वैसे तो राज खाना खा ही चुका था, लेकिन बार-बार अम्मा के इस तरह बोलने से उसने थाली सरकाते हुए बाहर जाकर हाथ धोए और डॉली के कान के पास आकर बोला तू कुछ बोलती कायको नहीं है, इस बहरी अम्मा को समझा कि अपन तेरा वो नही है बिना सोचे समझे कुछ भी बोलती जा रही है डॉली ने फिर कहा , क्या आपको लगता है कि मेरे समझाने से अम्मा को सुनाई देगा उनका बुढ़ापा है ,अगर उन्हें नहीं सुनाई देता तो इसमें उनकी क्या गलती है ,और फिर इस बात का आपको ज्यादा बुरा लगा है, तो आप ही समझा दो ना उन्हें ,मैं क्यों अपना गला खराब करूं ,डॉली ने एक थाली लगाकर अम्मा के हाथ में पकड़ाई ,और इशारे से कहा का कि खाना खा लेते हैं, काकी ने टटोलते हुए राज की थाली में ही चटनी और रोटियां रखते हुए डॉली को थाली दे दी , बेटा तू इसी में खाना खा ले , आदमी की झूठी थाली में खाना खाने से दोनों के बीच प्रेम बढ़ता है

राज ने जब सुना कि अम्मा कुछ भी बोले जा रही

है ,तो बुरा परेशान होकर, बुरा सा मुंह बनाते हुए पास ही पड़ी खटिया पर जाकर लेट गया, और बड़बड़ करने लगा महारानी तू भी ना चुपचाप सबकुछ सुनती जा रही है, यह नहीं की अम्मा को सारी बात समझा दे, डॉली ने अम्मा के हाथ से थाली ली और चुपचाप खाना खाने लगी

सच में दो नमक के डेली और कुछ हरी मिर्ची से खाने में इतना स्वाद आ जाएगा इससे इस बात का पता चल गया, की प्रेम तो बनाने वालों के हाथ में होता है ,और उसी से खाने का स्वाद आता है, डॉली और राज खाने से तृप्त हो गए थे, राज ने घर पर भी काकी को फोन करके बता दिया था, कि वह चिंता ना करें ,वह पास ही के गांव में किसी के घर में रुके हैं ,और जैसे ही बारिश बंद होगी वह आ जाएंगे ,और काकी ने भी कह दिया था कि रात में आना ठीक नहीं होगा ,अब तुम दोनों सुबह ही वहां से निकलना , काकी से बात करने के बाद राज उसी खटिया पर गहरी नींद में सो गया ,अम्मा ने एक दरी निकालते हुए डॉली को दी बेटा इसे तू बिछा ले ,,,,और खुद दूसरे कमरे में सोने चली गई,,,,, डॉली ने बह दरी वही नीचे जमीन में बिछाई और वह भी सो गई, रात को मौसम और भी खराब होने लगा था, तेज बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट की कड़क दार आवाज से ,डॉली की नींद खुल गई और वह डर कर बैठ गई ,दो-तीन घंटे की नींद लेने के बाद राज की भी नींद खुल गई थी ,राज ने जब देखा की डॉली उसके पास ही नीचे बिछी हुई दरी पर बैठी है, तो वह अचानक

उठ कर बैठा ,और इधर-उधर देखने लगा क्यों शहज़ादी वह अम्मा किधर को गई

वह तो दूसरे कमरे में है ,तो तू इधर क्या कर रही है, जाकर उसी के साथ सो जा

डॉली ने राज की बात अनसुनी करते हुए बुरा सा मुंह बना कर कहा ,मुझे डर लग रहा है ,इसलिए नींद नहीं आ रही ,

कमरे के कोने में लानटेन अभी भी टिमटीमा रही थी ,लेकिन उसकी रोशनी इतनी नहीं थी कि ठीक से कुछ देखा जा सके ,दबी हुई रोशनी ,बादल की गड़गड़ाहट और मूसलाधार पानी ,सच में एक डरा देने वाला मौसम लग रहा था, राज भी अपनी खटिया पर बैठा हुआ था ,और डॉली नीचे बैठी डर रही थी ,तभी एक बहुत जोरदार आवाज हुई ,और डॉली ने कसके राज का हाथ पकड़ लिया

,डॉली सच में बुरी तरह डर गई थी ,यह शायद कहीं बिजली गिरने की आवाज थी ,जो आसपास ही कहीं किसी पेड़ के ऊपर गिरी होगी, राज डॉली की इस हरकत पर जोर से हंसने लगा ,,,,

महारानी तुझे बस बातें करनी ही आती है

तू है नंबर वन की डरपोक ,अरे बिजली गिरी होगी ,ऐसे मौसम में तो बिजली गिरती ही रहती है ,तू घर के अंदर है, डर क्यों रही है डॉली ने अभी भी राज का हाथ पकड़ के रखा था,,, राज ने डॉली को समझाया कि

उसे डरने की जरूरत नहीं है, वह उसके पास ही है ,और अपना हाथ छुड़ाते हुए

उसे खटिया पर आराम से सो जाने के लिए कहा ,और खुद आकर नीचे दरी पर लेट गया महारानी मैं वैसे भी सो चुका हूं ,मेरी नींद पूरी हो गई ,अब तू आराम से सो

मैं हूं यही हूं, डॉली चुपचाप ऊपर जाकर खटिया पर लेट गई ,और राज नीचे दरी पर बैठकर अपना मोबाइल चलाने लगा, क्योंकि उसकी दो-तीन घंटे की गहरी नींद पूरी हो चुकी थी ,,,,,,,

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राज के कहने पर डॉली ऊपर खटिया पर जाकर लेट गई लेकिन अब भी उसे नींद नहीं आ रही थी ,बादलों की तेज गड़गड़ाहट उसे सोने ही नहीं दे रही थी ,कभी खुली हुई खिड़की में से पानी की बौछार अंदर आती तो कभी बिजली की चमक, इन सब से वह अब भी डर रही थी ,कुछ देर इधर से उधर करवटें बदलने के बाद ,जब एक बार फिर जोरदार बिजली कड़की तो वह उठकर राज के बगल में बैठ गई,,

राज मोबाइल चलाने में व्यस्त था

जब अचानक उसने डॉली को इस तरह अपने पास आता हुआ देखा ,तो वह भी चौक गया ,और डॉली की तरफ देखते हुए बोला ,यह क्या तू खुद भी डर रही है

और साला अपुन को भी डरा कर ही रहेगी क्या एकदम से भूतनी के माफिक मेरे बगल में आकर बैठ गई ,क्या हुआ क्या है तेरे को क्या आराम से ऊपर सो नहीं सकती

नहीं !! मुझे डर लग रहा है, मैं आपके पास ही बैठूंगी ,,,राज ने उसकी तरफ देखते हुए कहा ,तू एक काम कर ,अब मेरे सिर पर बैठ जा ,शायद फिर तेरा डर

खत्म हो जाए

अरे क्या यह बात तेरे को समझ में नहीं आती ,कि अपुन यही बैठा है

फिर डरती कायको है ,,,

पर डॉली ने किसी भी बात का जवाब नही दिया,,,, वह राज के बगल में ही चुपचाप बैठ गई ,जब डॉली राज के बगल में आकर बैठी तो धीरे-धीरे उसे नींद के झोंके आने लगे कभी आगे गिरती ,तो कभी पीछे, फिर खुद को संभाल लेती समलते समलते कभी राज के कंधे से उसका सिर टकरा जाता,,

राज जानता था कि उसके कहने पर वह बिल्कुल नहीं मानेगी, इसलिए बह चुपचाप अपने मोबाइल में ही लगा रहा ,,अब तक डॉली राज के कंधे पर सर रखकर गहरी नींद में सो चुकी थी ,,और राज ने भी उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा ,क्योंकि वह जानता था, कि अगर एक बार उठ गई तो फिर उसका दिमाग खा जाएगी, कभी डर लग रहा है ,तो कभी नींद नहीं आ रही इसलिए वह इस बात का इंतजार कर रहा था कि सुबह हो ,और वहां से निकले ,,

कुछ देर में हल्का हल्क उजाला होने लगा था बारिश भी थम गई थी ,लेकिन बादल अभी भी छटे नहीं थे ,बस थोड़ी देर के लिए बारिश रुकी हुई थी ,कभी भी दोबारा आंधी तूफान आ सकता था, सुबह के 630 बज चुके थे ,लेकिन जब राज ने देखा कि अभी बारिश रुकी है ,तो हिलाते हुए डॉली को उठाया ,और चलने के लिए कहा, डॉली जल्दी से हड़बड़ा कर उठ

गई थी

डॉली ने दूसरे कमरे में झांका तो देखा कि अम्मा भी उठ गई है ,डॉली ने जाकर उनका हाथ पकड़कर इशारे से कहा ,की अम्मा अब हम लोग निकलते हैं ,अम्मा ने दरवाजे से बाहर झांका और बोली, बेटा अभी भी बारिश हो सकती है ,बादल अभी छटे नहीं है अपना घर समझकर ही रुक जाओ मैं खाना बना लेती हूं ,दोपहर तक बादल छठ जाएंगे उसके बाद चली जाना,,,

नहीं अम्मा ,हमारी काकी भी परेशान हो रही होंगी ,और यहां से हमारा गांव ज्यादा दूर नहीं है, बस एक घंटा ही लगता है जाने में अभी बारिश रुकी है, हम लोगों को निकल जाना चाहिए ,डॉली ने मां को धन्यवाद दिया पता नहीं क्यों एक ही दिन में अम्मा को डॉली और राज से काफी लगाव हो गया था उन्होंने दोनों को आशीर्वाद दिया ,और फिर मिलने के लिए कहा ,डॉली और राज ने अपना सामान लिया ,और वहां से निकल आये , मौसम में 1 दिन में ही काफी बदलाव आ गया था ,सुबह के 7 बज चूके थे पर ऐसे लग रहा था, जैसे कि अभी 45 बजे का ही समय हो ,चारों तरफ काफी अंधेरा था, बादल भी काफी हो रहे थे ,और ऐसे लग रहा था ,किसी भी टाइम तेज बारिश आ सकती है ,मौसम काफी ठंडा हो गया था ,राज ने जीप की रफ्तार थोड़ी बढ़ाई ,तो डॉली को और भी ठंड लगने लगी ,पर घर पहुंचना भी जरूरी था ,इसलिए डॉली तो कुछ नहीं कहा ,लेकिन जब राज की नजर पड़ी कि डॉली कांप रही है ,तो उसने गाड़ी की रफ्तार थोड़ी कम

की ,और आंगनबाड़ी के लिए जो सामान लाए थे, उसमें कुछ चादरे भी थी उसमें से एक चादर निकालकर डॉली को दी डॉली को सच में इस वक्त चादर की बहुत जरूरत थी ,वह चारों तरफ चादर को अच्छे से लपेटते हुए जीप में बैठ गई,,

ठीक 50 मिनट में ही राज की जीप घर के दरवाजे पर पहुंच गई थी ,जैसे ही गाड़ी का हॉर्न सुना काकी दौड़ कर दरवाजे पर आई उसे पूरी रात से दोनों बच्चों की चिंता हो रही थी ,आकर उसने डॉली और राज की खैरियत पूछी ,और गाड़ी में से जल्दी जल्दी सामान निकलवाने लगे, क्योंकि बारिश दोबारा किसी भी वक्त आ सकती थी

सबने गाड़ी का पूरा सामान अंदर रखा ,और राज ने गाड़ी गैरेज में लगाते हुए, ढाबे पर एक नजर मारी, उसके बाद अंदर आ गया जब तक काकी चाय और पकौड़े बना चुकी थी, डॉली अभी उसी चादर को लपेटकर अंदर बैठी थी ,क्योंकि उसे ठंड लग रही थी जब गरम गरम पकौड़ी , और गिलास भर चाय उसने आराम से पी ली ,तब जाकर उसे अच्छा लगा ,क्योंकि काकी को पता था कि बचपन से ही डॉली से ठंड सहन नहीं होती है और उसकी ठंड का एक ही इलाज रहता है चाय के साथ गरम गरम पकौड़ी या फिर देसी घी का हलवा, और सर्दियों में अक्सर ही काकी यह दोनों चीजें डॉली को खिलाती रहती थी,,,

राज भी चाय और पकौड़े खाते हुए बार-बार डॉली की तरफ देख रहा था ,और उसे सोच कर हंसी आ रही

थी ,की आंगनबाड़ी की मैडम जी खुद ही कितनी बड़ी डरपोक है आखिर वह अपनी हंसी को रोक नहीं पाया वह हंसते हुए काफी से कहने लगा ,काकी यह महारानी ना सिर्फ बातों की ही है ,रात में बिजली की आवाज से डर कर इसने अपन को भी सोने नहीं दिया ,,अपुन का रात भर भेजा खाया ,और खुद भी इधर से उधर होती रही, डॉली राज की बातों पर कोई भी एक्शन किए बिना चादर में सिमट कर बैठी हुई थी ,और वही सोच रही थी कि जब राज उसके पास होता है ,तो सारी चीजों की चिंता खत्म हो जाती है ,सारे डर उसके मन से निकल जाते हैं, राज के बगल में बैठे ही बैठे कैसे चैन की नींद सो गई थी, फिर उसे होश भी नहीं था कि बिजली की गड़गड़ाहट और बादलों की चमक कितनी तेज़ और कब तक रही थी ,वह निश्चिंत होकर गहरी नींद में सो चुकी थी, राज चाहे उसे कितना भी डांटता रहे ,उसका मजाक उड़ाता रहे ,पर उसे डॉली कि हर बात की चिंता रहती है ,डॉली को किस चीज की जरूरत है ,खुद डॉली से पहले राज उस बात को समझ जाता है ,डॉली राज की तरफ देखते हुए यही सारी बातें सोच रही थी ,कि सच में अगर राज उसकी जिंदगी में नहीं आता ,तो वह खुद को इतना सुरक्षित महसूस कभी नहीं करती, ना ही आगे पढ़ लिख पाती ,और ना ही अपने पैरों पर खड़ी हो पाती ,डॉली की जिंदगी से जुड़ी हर बात में सिर्फ और सिर्फ राज का ही हाथ था, उसके हौसले से और उसकी मेहनत से ही डॉली आज इस मुकाम तक पहुंची

थी कि सारे गांव में उसकी इज्जत थी ,लोगों उसे पूछते थे , गांव की महिला और बच्चों के लिए कुछ अच्छा कर पा रही थी ,इस सबके पीछे राज ही था

डॉली के लिए राज की कोई भी बात छुपी नहीं थी , पर उसकी मुस्कान के पीछे का दर्द उसके खुशी या दुखी रहने की वजह, और सख्त स्वभाव के पीछे छुपा हुआ उसका कोमल ह्रदय ,सब कुछ पहचान लेती थी

वह जितना राज के बारे में सोचती धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा था ,कि सच में राज ने अपनी जिंदगी में खुशियां देखी ही कहां है वह तो बस अपनी मेहनत और ईमानदारी से आगे ही बड़े हैं ,उन पर कितने झूठे आरोप लगाए गए ,यहां तक की जेल भी भेज दिया गया ,शायद यही वजह है कि वह अपनी जुबान से थोड़ा सख्त हो गए हैं ,पर जिंदगी की जो खुशियां होती हैं ,खुद के लिए जीना होता है ,किसी के प्यार की जरूरत होती है उन सब से तो राज कितना दूर है ,पता नहीं कब अपने बारे में सोचेंगे ,दूसरों के लिए कितना कुछ करते हैं ,लेकिन खुद के लिए,,,,,,,,

ये सब सोचते सोचते पता नहीं डॉली कितनी गहराई में पहुंच चुकी थी, अब उसे भी राज के भविष्य के लिए चिंता होने लगी थी ,सच में काकी की कहि हुई लाइन का मतलब अब डॉली के समझ में आया था

काकी भी तो यही चाहती थी कि राज का घर बसे ,उनके बाल बच्चे हो ,और वह अपने परिवार के साथ कुछ पल खुशी के विताये पर वह खुद इस बारे में क्यों नहीं सोचते

अब मुझे ही कुछ करना होगा ,मुझको उन्हें समझाना होगा ,कि आपको अपनी आपकी आगे की जिंदगी के बारे में सोचना चाहिए आखिर कब तक ऐसे अकेले ही जिंदगी जीते रहेंगे,,,,,

धीरे-धीरे कुछ दिनों में यह बात डॉली की समझ में आ गई थी, कि अब वह वक्त आ चुका है ,जब राज को भी अपना साथी चुन कर अपनी घर गिरहस्ती बसाना चाहिए

बह राज के लिए सब कुछ अच्छा होता हुआ देखना चाहती थी ,पर साथ ही यह भी जानती थी ,कि राज खुद कभी कोई भी कोशिश नहीं करेंगे, इसलिए इस बारे में उसे ही कुछ सोचना होगा,,,,,

अब उसने सोच लिया था, कि वह खुद ही राज के लिए उसका साथी ढूंढेंगी,,,,
 
इस बात को 10, 15 दिन निकल चुके थे एक दिन पास के गांव की ही आंगनबाड़ी की एक कार्यकर्ता डॉली की आंगनबाड़ी पर किसी काम से आई, उन दोनों को एक दूसरे की आंगनबाड़ी की रिपोर्ट बनाकर भेजनी थी एक दिन पहले ही जाकर डॉली ने उसकी आंगनबाड़ी की रिपोर्ट कंप्लीट कर दी थी और आज वह डॉली की आंगनबाड़ी पर आकर यहां की रिपोर्ट बना रही थी, डॉली भी उसके काम में सहायता कर रही थी ,पर काम करते-करते काफी देर हो गई ,जो उसके गांव जाने वाली बस शाम को 400 बजे यहां से निकलती थी ,वह

भी निकल चुकी थी, लेकिन आज रिपोर्ट का बनना जरूरी था, इसलिए डॉली ने कहा था कि वह उसे किसी से छुड़वा देगी ,करीब 500 बजे रिपोर्ट बन कर तैयार हो गई ,तब तक काकी ने राज को आंगनबाड़ी भेजा था, कि वह पता करे डॉली अभी तक क्यों नहीं आई

जब राज आंगनवाड़ी पर डॉली से पूछने आया ,,तो डॉली के पास में बैठी हुई उसकी सहेली ,राज को देखकर पूछने लगी

डॉली इस गांव में इतना स्मार्ट बंदा कहां से आया,, डॉली मुस्कुराए और जवाब दिया यह राज है ,,वह राज को नाम से तो जानती थी ,क्योंकि डॉली के ही मुंह से उसने राज का नाम सुना था ,पर उसने पहली बार राज को देखा था ,,तभी डॉली ने राज से कहा प्लीज आपने इनके गांव तक छोड़ दीजिए क्योंकि कुछ रिपोर्ट रह गई थी ,इसलिए इनकी बस मिस हो गई है

डॉली ने कहा और फिर जरूरी भी था तो। राज ने फटाफट उन्हें बैठने के लिए कहा क्योंकि शाम के टाइम ढाबे पर रस भी ज्यादा हो जाता है ,तो उसे टाइम से वापस भी आना था ,जब आंगनबाड़ी बंद करके दोनों बाहर निकली ,तो उसकी सहेली झट से राज के साथ आगे की सीट पर बैठ गई, डॉली जैसे ही घर जाने के लिए मुड़ी राज ने कहा महारानी तू भी गाड़ी में बैठ जा ,बस मैडम को छोड़ने में आधा घंटा लगेगा, उसके बाद साथ ही घर आ जाएंगे ,डॉली जानती थी कि राज इस तरह से अकेले उसको छोड़ने नहीं जाएगा ,तो डॉली जाकर पीछे की सीट पर बैठ गई, राज जब गाड़ी

ड्राइव करने लगा तो डॉली ने देखा कि वह राज की बातों में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट ले रही है ,बहुत गौर से राज को देखते हुए, कभी मुस्कुराती तो कभी राज से कोई सवाल पूछती, पर राज का ध्यान उसकी तरफ बिल्कुल भी नहीं था सिर्फ 20 मिनट में ही डॉली ने महसूस किया कि वह राज की तरफ आकर्षित हो रही थी दो-चार मिनट बाद उसका गांव आ ही चुका था,, सिवा ने उसके घर का पता पूछा और घर के दरवाजे पर जाकर जीप रोक दी

जब वह गाड़ी से उतरी तो बहुत ही इतराते हुए अदा के साथ उसने राज को थैंक्यू कहा और वह कोशिश कर रही थी, कि राज उससे और भी बातें करें ,लेकिन राज ने उसकी बात सुने बिना ही गाड़ी स्टार्ट की और वापस गांव की तरफ ले ली,,,,

डॉली की सहेली को छोड़कर, डॉली और राज घर वापस लौट रहे थे ,आते हुए डॉली राज के साथ ही आगे की सीट पर बैठ गई थी, डॉली ने मुस्कुराते हुए राज से पूछा!

दखिये ना मेरी फ्रेंड कितनी अच्छी तरह से आप को थैंक यू बोल रही थी, और आपने उसकी बात का जवाब भी नहीं दिया

यह गलत बात है, उसको वेलकम ना सही कम से कम उसकी तरफ देख कर एक बार मुस्कुरा तो सकते थे, राज ने आंखें चढ़ाते हुए डॉली को देखा ,और वापस गाड़ी ड्राइव करने लगा, डॉली को राज की ऐसी शक्ल देख कर हंसी आ रही थी, और उन्हें चिड़ाने का भी मन कर रहा था ,डॉली ने फिर कहा आपने उसको थैंक्यू क्यों नहीं बोला ,वह क्या सोचेगी कि आपको लड़कियों की फ़ीलिंग को समझना ही नहीं आता ,,

गाड़ी चलाते हुए ही राज ने डॉली से कहा देख महारानी तू अपन को मत सिखा किससे क्या बोलना है , बड़ी आई मुझे सिखाने वाली यह मत भूल कि मेरे सामने ही बढ़ी हुई है तू और रही बात लड़कियों को

समझने की

तो अपुन को इस सब की जरूरत नहीं है अपुन तेरे को समझता है ,अपने वास्ते इतना ही काफी है ,और सुन आगे से जब भी आंगनवाड़ी का कोई काम हो, तो उसे बोल देना कि टाइम पर खत्म कर के यहां से कल्टी काट ले ,,अब अपन उसको कोई छोड़ने वोढ़ने नहीं जाने वाला,,

डॉली ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा ठीक है नहीं कहूंगी आपसे किसी को छोड़ने के लिए और चुपचाप बैठ गई, राज समझ गया था कि डॉली का मूड खराब हो गया है

उसने डॉली को मनाने की कोशिश की और हंसते हुए डॉली से कहने लगा ,,

महारानी तू भी ना सब के पचड़े में कायको पड़ती है ,अपने काम से काम रख ना अरे उसकी नौकरी है ,उसका काम है ,उसको खुद ही सोचना चाहिए, तूने सब का ठेका ले रखा है ,डॉली ने दोनों कान पकड़ते हुए राज से सॉरी बोला ,

और कहां मैंने कह तो दिया आपसे

कि आज के बाद आपसे कभी किसी को छोड़ने के लिए नहीं कहूंगी

फिर क्यों मुझे इतना लंबा लेक्चर सुना रहे हैं डॉली जब गुस्सा होती ,तो ऐसे ही बात करती है,अब राज के पास एक ही चारा था

उसने भी अपना कान पकड़ते हुए डॉली से कहा सॉरी मैडम जी माफ कर दो

आगे से इतना लंबा लेक्चर नहीं सुनाऊंगा थोड़ी देर बाद दोनों घर आ चुके थे

घर आकर भी डॉली राज की बात पर गुस्सा थी ,और सिवा कुछ ना कुछ कहते हुए उसे मनाने की कोशिश कर रहा था

और उससे बात करने की कोशिश भी कर रहा था ,लेकिन डॉली सीधी जाकर अपने कमरे में चली गई ,और राज अभी भी बाहर से कुछ ना कुछ बोलते ही जा रहा था

थोड़ी देर बाद जब वह चेंज करके कमरे से निकली ,तो राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा ,काकी देखना महारानी कितना भाव खा रही है ,अरे पता नहीं कैसी कैसी लड़कियों को मुझसे छोड़ने के लिए कहती है और फिर अपुन को समझाती है ,कि अपुन

ने ठीक से उससे बात नहीं की ,काकी तू ही बता क्या मुझे लड़कियों से बात करना आता है ,छोरी के नाम पर अपुन की लाइफ में तू और महारानी के अलावा और कोई नहीं है अपुन साला कैसे समझेगा की लड़कियों से कैसे बात की जाती है, राज की बड़बड़ अब भी चालू थी ,डॉली ने जब तक हाथ मुंह धो कर सबके लिए खाना भी लगा लिया था और काकी को बुलाकर खाना शुरू करने के लिए कहा, राज भी हाथ धो कर आ चुका था ,काकी ने आज खाने में छोले, पूरी और खीर बनाई थी ,राज ने थाली देखते हुए कहा काकी क्या आज क्या तेरा बर्थडे है

जो यह सब आइटम बने हैं ,अरे नहीं बेटा बस बहुत

दिनों से मेरा ही मन कर रहा था छोले पूरी खाने का ,इसलिए सोचा रात को बना लूं, तो सब लोग बैठ कर आराम से खा लेंगे, डॉली अभी मुंह बनाकर छोटे-छोटे कौर चुपचाप खा रही थी ,राज पूरी तरह से डॉली को मनाने की कोशिश कर रहा था

खाना खाते हुए डॉली को अचानक हिचकियां शुरू हो गई ,वह जोर-जोर से हिचकी लेती जा रही थी ,शायद हरी मिर्ची कुछ तेज थी ,और डॉली ने मिर्ची का एक बड़ा वाइट खा लिया था ,काकी ने जल्दी से डॉली को खीर की कटोरी पकड़ाते हुए कहा डॉली खीर खा ले ,तो तेरी हिचकियां बंद हो जाएंगी,लगता है तुझे मिर्ची लग गई

राज ने देखा कि डॉली लगातार हिचकियां लिए ही जा रही है ,और उसने खीर को हाथ तक नहीं लगाया ,शायद वह अभी गुस्सा थी और किसी ना किसी तरह अपनी भड़ास निकाल रही थी ,तभी राज ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा, काकी तेरे को पता है कि जिस तरह जहर को जहर मारता है

उसी तरह मिर्ची को मिर्ची मारेंगी तू ऐसा कर महारानी को 4,6 हरी मिर्ची खिला दे

तो इसकी हिचकियां बंद हो जाएंगी,,,,

डॉली इस बात पर बुरी तरह से खिसिया गई और थाली छोड़कर पैर पटकती हुई अपने कमरे में चली गई, काकी ने देखा कि राज के चिढ़ाने पर डॉली गुस्सा हो गई है

तो राज को डांटते हुए कहा !

तू क्यों उसके पीछे पड़ा रहता है ,अब वह मेरे कहने पर नहीं आएगी ,जा और उसे मना कर ला, तुझे पसंद है ना कि उसे मीठा कितना पसंद है ,और फिर भी उसको आधे खाने से गुस्सा कर दिया ,और वह खाली छोड़ कर चली गई ,भूखे पेट तो राज भी डॉली को नहीं देख सकता था ,वह भी अपनी थाली छोड़ कर डॉली को लेने उसके कमरे में चला गया ,जब देखा तो डॉली पलँग पर उल्टी लेटी हुई अभी भी हिचकियां ले रही थी

राज ने पलंग के पास घुटनों के बल बैठते हुए डॉली से कहा सॉरी !

अब अपुन कुछ भी नहीं कहेगा ,तू चल कर खाना खा ले ,तू आंगनबाड़ी की मैडम जी और तुझे इतना भी पता नहीं कि खाने को छोड़ कर नहीं आते, डॉली ने लेटे-लेटे ही कहा आप जाइए मुझे नहीं खाना खीर

राज थोड़ी देर उसे मनाता रहा फिर भी डॉली नहीं उठी तो उसकी छोटी खींचते हुए कहा ,तू चल रही है, या तुझे उठा कर ले जाऊं ,चुपचाप चलकर अपनी थाली खत्म कर ,,चल ठीक है अगर तू नहीं जाती तो मैं भी नहीं खाऊंगा ,जब डॉली ने राज की बात सुनी ,तो चुपचाप उठी और धीरे-धीरे दोबारा अपनी थाली के पास आकर बैठ गई राज भी उसके पीछे जल्दी से आ कर खाना खाने लगा ,,डॉली ने अपनी खीर खत्म कर ली, तो राज ने अपनी कटोरी में से भी आधी खीर दुबारा डॉली की कटोरी में डालते हुए कहा ,महारानी ! तुझे मीठे की ज्यादा जरूरत है ले ले,और जब डॉली ने घूरकर उसे देखा तो जल्दी से दोनों कान पकड़ते हुए

कहा, सॉरी गलती हो गई अब तू गुस्सा मत करना ,चुपचाप खा ले ,,,

बहुत देर की हंसी हुई रुकी नीले के होठों पर आ गई थी ,वह हंसते हुए खीर खाने लगी,,,,,

दूसरे दिन जब डॉली आंगनबाड़ी गई तो आज भी उसकी सहेली पूनम को डॉली की आंगनबाड़ी पर काम था ,और आज पूनम टाइम पर डॉली की आंगनवाड़ी में आ गई थी आज डॉली भी घर से कुछ जल्दी ही निकल गई ,इसलिए वह ना खाने का डिब्बा लेकर जा पाई और ना ही खाना खाकर गई

उसने दोपहर में आने के लिए कह दिया था दोपहर में जब लंच टाइम हुआ तो नहीं डॉली

ने पूनम से भी घर चलने को कहा

भूख तो पूनम को भी लग रही थी

और फिर डॉली उसकी सहेली ही थी इसलिए वह भी डॉली के साथ उसके घर आ गई, काकी ने पालक दाल ,चावल ,रोटी और सूखे आलू की सब्जी बनाई थी

दोनों बैठ कर जल्दी खाना खाने लगी क्योंकि उन्हें वापस आंगनबाड़ी जाना था

तभी राज भी किसी काम से घर पर आया जैसे ही राज ने घर के अंदर पैर रखा

और राज की आवाज पूनम के कानों में पड़ी ,तो उसका ध्यान खाने से हटकर राज पर चला गया ,राज ने बॉडी फिट बॉडी

टी शर्ट और जींस पहन रखा था ,उसके पैरों में स्पोर्ट्स शूज ,और बेल्ट में लगा हुआ चाबी का छल्ला ,इस लुक

में राज किसी साउथ हीरो से कम नहीं लग रहा था ,उसका ऊंचा कद डोले शोले वाली सिक्स पैक बॉडी जिसके लिए वह करीब 2 से 3 घंटे रोज मेहनत करता था ,जो उसकी टीशर्ट मै से साफ नजर आ रही थी

पूनम ने देखा तो बस देखती ही रह गई,,,,, शायद ढाबे पर सिलेंडर खत्म हो गया था और सिलेंडर का स्टॉक ऊपर वाले कमरे में रहता था ,जिससे कि कोई डर ना रहे

जब काकी ने राज से खाने के लिए पूछा तो राज ने जवाब दिया ,काकी ढाबे पर सिलेंडर खत्म हो गया है ,मैं बस यू वहां सिलेंडर रख कर आता हूं ,बाद में खाना खा लूंगा और बड़ी-बड़ी डगें रख ता हुआ ऊपर गया

और किसी फूल की तरह, भरे हुए सिलेंडर को लेकर 2 मिनट में ही नीचे आ गया

पूनम राज की इस अदा पर

उसकी मर्दानगी को देखकर अपने होश खो बैठी थी, पूनम और डॉली खाना खा चुके थे लेकिन पूनम जानबूझकर किसी ना किसी काम में डॉली को जाने से रोक रही थी जिससे कि राज खाना खाने घर आए

और उसे दोबारा राज को देखने का मौका मिले,,,,,,

करीब 1015 मिनट गुजर चुके थे, जैसे ही डॉली और पूनम जाने को हुई राज अंदर आ गया ,अब पूनम के पास यहां रुकने का कोई बहाना नहीं था ,पर फिर भी वह एक बार मुड़कर राज के पास आई और कहने लगी राज शायद मैं आज भी लेट हो जाऊंगी

क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ देंगे

राज पूनम को जवाब ना देते हुए डॉली की तरफ देखने लगा ,पूनम भी राज और डॉली को देख रही थी ,पूनम ने चुप्पी तोड़ी और कहां राज आप डॉली की तरफ क्यों देख रहे हैं ,वह मना थोड़ी ना करेगी

क्यों डॉली ,राज से बोलो ना मुझे छोड़ने के लिए ,डॉली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे ,कल ही उसकी राज से इस बात पर अच्छी खासी बहस हुई थी तभी काकी ने बात को संभालते हुए कहा

हां हां पूनम बेटा चिंता क्यों कर रही है राज तुझे जरूर छोड़ देगा , पूनम ने देखा कि उसने अपनी बात मनवा ली है

तो वह राज को एडवांस में ही थैंक यू और बाय बोलते हुए मुस्कुरा कर बाहर चली गई पूनम के जाते ही ,राज काकी पर बरस पड़ा था ,काकी तू काय को अपुन को इन छोरियों के पचड़े में लाती है,अपुन इसे छोड़ने वाला नहीं है ,अरे कल छोड़ दिया, आज फिर वह कहने लगी ,जब नौकरी कर रही है ,तो आने जाने के इंतजाम के बारे में भी तो सोचना चाहिए ,अपुन पहले ही बता देता है

अगर टाइम होगा तो ही अपन जा पाएगा और हाथ धोते हुए वापस ढाबे पर चला गया

शाम को 500 बजे जब आंगनवाड़ी का काम खत्म हुआ ,तो पूनम मुस्कुराती हुई खुशी में डॉली के साथ घर पर ही आ गई डॉली अभी तक बीच में कुछ भी नहीं बोली थी, काकी ने पूनम से घर छुड़वाने के लिए कह

दिया था ,इसलिए जब पूनम घर आई तो काकी राज को बुलाने ढाबे पर गई

अब ऐसी स्थिति में कैसे भी राज को छोड़ने तो जाना ही था ,लेकिन उसने कहा काकी को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा !

काकी आज अपुन आखिरी बार जा रहा है आज के बाद तू उससे कभी नहीं कहेगी

हां रे नहीं कहूंगी ,पर आज वह लड़की घर पर बैठी हुई है, अब तो उसे छोड़ दे

तू चल मैं आता हूं ,राज ने घर आकर जीप की चाबी उठाई ,और चश्मा लगाते हुए पूनम को चलने के लिए कहा, पूनम को तो मानो खुशियों का खजाना मिल गया था

वह इठलाती हुई राज के साथ चलने लगी

राज गाड़ी में बैठता ,इससे पहले ही पूनम जाकर आगे कि सीट पर बैठ गई

और जब राज ने गाड़ी स्टार्ट की तो पूनम ने बड़ा खुश होते हुए डॉली और काकी से बाय किया ,,,जैसे ही गाड़ी गांव की तरफ चली पूनम राज को रिझाने के लिए कभी अपने बालों को चेहरे से हटाती तो कभी अपनी

चुन्नी ठीक करती, पर राज का ध्यान गाड़ी पर ही था ,जब राज ने हल्की सी गाड़ी की स्पीड बढ़ाई , तो डॉली ने इतराते हुए कहा राज गाड़ी धीरे चलाइए ना ,मुझे तेज गाड़ी में डर लगता है, राज ने एक निगाह पूनम को देखा और कहा ,यह अपुन का सबसे धीमा

स्टाइल है ,अगर गाड़ी को इससे कम स्पीड में चलाएगा तो बंद हो जाएगी,,,, ,

पूनम इस बात पर कुछ झेंप गई थी

क्योंकि गाड़ी सच में ही धीरे चल रही थी इतनी देर में पूनम का घर आ चुका था

पूनम गाड़ी से नीचे उतरती इससे पहले ही उसने बड़ा भोला चेहरा बनाकर राज से कहा ,राज क्या आप मुझे अपना मोबाइल नंबर दे सकते हैं ,अगर मुझे कभी किसी काम की जरूरत पड़े, तो आप से सीधे ही बात हो जाएगी ,वरना विचारी डॉली को बीच में परेशान होना पड़ता है

राज का दिमाग वैसे ही पूनम की बातों से पका हुआ था ,उसने सोचा कि नंबर दे दिया तो फिर रोज रोज का लफड़ा हो जाएगा इसलिए उसने कन्नी काटते हुए कहा

अपुन को अपना ही नंबर याद नहीं रहता तुझे कोई काम हो तो बिंदास डॉली के फोन पर फोन लगाना ,वह अपुन को बता देगी पूनम की बात को अधूरा छोड़कर राज ने गाड़ी स्टार्ट की ,और बैक करने लगा

जब पूनम ने देखा कि राज इतनी आसानी से अपना नंबर देने वाला नहीं है

तो वह बुरा सा मुंह बनाकर गाड़ी से नीचे उतर गई ,और राज वापस घर आ गया,,

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अब तो पूनम की आदत में शुमार हो चुका था, कि मैं जब भी आंगनबाड़ी आती तो किसी न किसी बहाने राज से जरूर मिलती कभी उसके ढाबे पर पहुंच जाती ,तो कभी डॉली के साथ घर पर आ जाती

अगर राज किसी काम से आंगनबाड़ी में मिल जाता ,तो वहां भी उससे बातें करना शुरू कर देती, वैसे तो पूनम भी अच्छी लड़की थी ,उसकी उम्र डॉली से बस यही कोई दो-तीन साल ज्यादा होगी, वह डॉली से भी राज की बहुत बातें करती थी

हमेशा हर बात उसके बारे मैं जानने के लिए बेचैन रहती, और डॉली भी पूनम को अपनी अच्छी सहेली मानकर उसे सब कुछ बता देती,,

डॉली की तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था ,कि आखिर पूनम चाहती क्या है

डॉली बिल्कुल भोलेपन से , मासूमियत से सारी बातें बताती जाती, असल में पूनम जानना चाहती थी, कि राज कैसा है

उसका नेचर कैसा है, डॉली और राज के बीच का रिश्ता कैसा है

वह बातों ही बातों में धीरे-धीरे हर बात को समझ रही थी ,वैसे तो सबको ही पता था कि डॉली कैसे इस घर में राज और काकी के साथ रहने लगी, पर चूँकि पूनम दूसरे गांव की थी, तो उसे ज्यादा गहराई से हर बात का पता नहीं था ,पर जब उसने पूछा तो डॉली ने भी कुछ ना छुपाते हुए उसे सारी बातें साफ-साफ बता दीं

पूनम को इतना तो विश्वास हो गया था कि डॉली और राज के बीच एक बेनाम और पवित्र रिश्ता है,

अब तो वह राज के और भी करीब आना चाहती थी ,क्योंकि डॉली और काकी से उसने काफी अच्छी दोस्ती कर ली

और इस बीच वह यह भी समझ चुकी थी की काकी यही चाहती है, कि जल्द से जल्द राज का घर बसाय, और क्यों नही आखिर

अब राज की उम्र हो चुकी थी

बूढ़ी काकी और कितना इंतजार करती उसकी तो हमेशा से एक ही इच्छा रहती कि राज का घर बसे ,

और वह अपनी गृहस्थी में रम जाए ,पर जब भी पूनम राज के करीब जाने की कोशिश करती, तो उसे ऐसा लगता कि राज उससे दूर भाग रहा है

वैसे राज एक बहुत ही अच्छा समझदार और सबकी मदद करने वाला था

पर पूनम का ऐसा व्यवहार उसे पसंद नहीं आता था ,अगर पूनम कभी धोखे से भी अपना हाथ राज के हाथ पर रख दे तो वह एक झटके से अपना हाथ हटा देता

पूनम राज से कुछ जानना चाहती, या उसका फोन नंबर मांगती, तो वह सब कुछ डॉली के ऊपर छोड़ देता

1 दिन पूनम अचानक से डॉली के घर आई जब उसने देखा कि डॉली रसोई में रोटियां सेक रही है ,तो वह भी हाथ धोते हुए डॉली के साथ उसकी मदद करवाने रसोई में पहुंच गई ,ठीक उसी समय राज खाना खाने घर आया हुआ था ,जब पूनम ने देखा कि काकी राज के लिए थाली लगा रही है

तो जल्दी से उसने खुद थाली लगाते हुए खाना परोसा, और थाली लेकर राज को देने चली गई ,राज ने बिना उसकी तरफ देखे थाली उसके हाथ से ली ,और अपने कमरे में चला गया ,वैसे तो राज बाहर वाले कमरे से ही खाना खाता था, पर वह समझ गया था कि पूनम बार-बार आकर उसे परेशान करेंगी इसलिए वह अपने कमरे में चला गया था जब पूनम ने देखा कि अब उसे राज के पास जाने का कोई मौका नहीं मिल रहा तो

वह डॉली से चिमटा लेकर जानबूझकर रोटियां सेकने लगी, और थोड़ी ही देर में जोर से चिल्लाई ,कि उसका हाथ जल गया है काकी और डॉली पूनम को देखने दौड़ी और डॉली ने जल्दी से पूनम का हाथ पकड़ा और उसे लेकर बाहर आकर बरनोल ढूंढने लगी, जब उसे बरनोल नहीं दिखी, तो उसने राज को आवाज लगाई

राज जरा बरनोल लेकर यहां आइए

देखिए ना पूनम का हाथ जल गया है

राज जब बरनॉल लेकर बाहर आया तो देखा कि डॉली उसका हाथ पकड़कर खड़ी है और पूनम दर्द से कराह

रही थी

डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा देख की रहे हैं ,जल्दी से पूनम के हाथ पर बरनोल लगा दीजिए, राज ने एक बार घूर कर डॉली की तरफ देखा ,और बरनोल का ढक्कन खोलते हुए डॉली के हाथ में पकड़ा कर कहा ले तू ही लगा दे, मुझे ढाबे निकलना है, और एक झटके के साथ बाहर चला गया डॉली जल्दी से पूनम के हाथ पर दवा लगाने लगी, लेकिन इस बात से पूनम दुखी हो गई थी, कि उसका हाथ जल गया और राज ने एक बार उससे पूछना या देखना भी ठीक नहीं समझा, पर आखिर इस बात की भड़ास निकालती भी तो किस पर ,,,

राज के आगे तो कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था, राज ढाबे पर जा चुका था

डॉली ने पूनम को दवा लगाई और अपने हाथों से उसे खाना भी खिलाया, जब पूनम को आराम मिला ,तो आज वह टाइम से 400 बजे की बस से अपने गांव वापस चली गई,,,,,

इसी तरह करीब दो-तीन महीने गुजर चुके थे अब पूनम और डॉली अच्छी सहेलियां बन चुकी थी, पूनम किसी ना किसी बहाने डॉली के पास आती रहती थी, यहां तक कि कभी-कभी तो वह अपने घर वालों या रिश्तेदारों को लेकर राज के ढाबे पर खाना खाने भी आ जाती थी ,जिससे उसे राज का साथ मिले ,और

राज बस डॉली की सहेली होने के नाते उससे जरूरत की बात ही करता था ,,

पूनम समझ नहीं पा रही थी, कि आखिर राज क्यों उसे भाव नहीं देता ,क्यों जब भी वह एक कदम आगे बढ़ाती है

तो राज दो कदम पीछे हट जाता , आखिर मुझ में ऐसी क्या कमी है,,,

दो-तीन दिन बाद संडे था, उस दिन पूनम के भाई का बर्थडे था ,तो पूनम ने यही प्लान बनाया ,कि वह अपने भाई और परिवार वालों को लेकर शाम को राज के ढाबे पर आएगी ,और उसने डॉली को भी फोन कर दिया था ,जिससे कि डॉली भी टाइम पर काम खत्म करके उसे मिल जाए, तो दोनों कुछ समय साथ बिता लेंगी,

डॉली को भी अच्छा लगा ,क्योंकि काफी दिनों से वह पूनम से मिली भी नहीं थी

पूनम ने आज सोच लिया था कि वह राज से अपने दिल की बात आज कह कर ही रहेगी ,हो सकता कि राज स्वभाव से शर्मिला हो ,और इसलिए वह मुझसे दूर भागता हो ,अगर मैं साफ और सीधे शब्दों में अपनी बात उसके सामने रख दूं ,तो शायद उसे मेरी दोस्ती मंजूर हो जाए, और इसीलिए वह अपने मां बाप को भी साथ ला रही थी कि अगर राज ने उसकी बात मान ली, उसके प्यार को कुबूल कर लिया ,तो वह अपने मां पिता से भी राज को मिलवा देंगी यह सब कुछ सोच कर आज शाम को ही राज के ढाबे पर आने वाली थी

पूनम ने आज सबसे सुंदर अपनी पसंद का सूट पहना हुआ था ,खुले हुए बाल और नए झुमके ,यानी कि वह खुद को अच्छे से सजा संवार कर आने वाली थी

शाम को 600 बजे तक पूनम अपने माता पिता भाई ,और भाई के कुछ दोस्त भी साथ में थे, सबको लेकर आ चुकी थी

डॉली भी पूनम को ढाबे पर ही मिल गई थी डॉली और पूनम ने एक दूसरे से बातें की नीलम ने उसके भाई को बर्थडे विश किया और फिर दोनों अंदर जाकर केक काटने की तैयारियां करने लगी ,क्योंकि केक का प्रोग्राम

उसने अपने भाई से छुपा कर रखा था

जब डॉली और पूनम बातें कर चुकी

तो पूनम निगाहें घुमाते हुए राज को देखने लगी, राज अभी तक उसे ढाबे पर नहीं दिखा था, जब उसने डॉली से पूछा तो डॉली ने कहा ,वह घर पर हैं

बस आते ही होंगे, पूनम बिल्कुल तैयार हो चुकी थी ,कि जैसे ही राज आएंगे मौका देखते हुए वह अपने मन की बात राज के सामने रख देगी ,तभी थोड़ी देर में राज आता हुआ दिखा, वह जैसे ही आया ढाबे पर चल रहे कामों की निगरानी करने लगा शाम के टाइम काफी कस्टमर आते हैं

तो उन सब में बिजी हो गया था

डॉली भी अंदर की व्यवस्था देख रही थी क्योंकि केक काटने का प्रोग्राम अंदर ही था इस बीच पूनम को मौका मिला ,और बह राज के करीब जाने की कोशिश करने

लगी कभी उसके पीछे किचन में जाती, तो कभी बाहर के हॉल में ,बह राज से बात करने की कोशिश कर रही थी ,पर राज बहुत बिजी था ,बह 2 मिनट भी पूनम को नहीं दे पा रहा था ,पूनम ने राज से कहा भी कि मुझे आपसे जरूरी बात करनी है

राज ने बिना उसकी तरफ देखे ही कह दिया अभी अपन बहुत बिजी है

जो भी बात है डॉली को बता देना

पूनम फिर भी राज के पीछे पीछे जा रही थी और कोशिश कर रही थी, कि कैसे भी वो उसकी तरफ देखे, और वह अपने दिल का हाल उससे कहे ,पर राज ने एक बार भी नजर उठाकर पूनम को नही देखा

वह सच में बहुत व्यस्त था ,कभी बिल बनाना ,तो कभी ऑर्डर के लिए बोलना

कभी खाने का इंतजाम देखना, बहुत सारे काम एक साथ ही हो रहे थे ,लेकिन इसी बीच किसी जरूरी काम से जैसे ही राज स्टोर रूम में आया ,कि पूनम उसका रास्ता रोककर उसके सामने खड़े हो गई

और उसकी आंखों में देखते हुए कहा !

राज क्या आपके पास मेरे लिए 2 मिनट भी नहीं है ,मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं

एक बार तो सुन लो

सिवा उसके बगल से निकलते हुये

स्टोर रूम का काम निपटाने लगा

शायद ऊपर रखी अलमारी में से कुछ निकाल रहा था ,जब वापस नीचे उतरा तो दोबारा पूनम फिर राज

के सामने खड़ी हो गई ,पूनम ने दोबारा उसकी आंखों में देखते हुए कहा, राज एक बार तो मेरी तरफ देखिए ,मैं आपसे कहना चाहती हूं ,कि आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं ,और मैं आपको पसंद करने लगी हूं ,मैं आपसे शादी करना चाहती हूं,,,,,,,

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राज अपने काम में लगा हुआ था ,शायद स्टोर रूम से कुछ निकालने आया था

पर पूनम ने राज का रास्ता रोकते हुए उससे अपने दिल की बात कह दी

वह राज की आंखों में देखते हुए कहने लगी ,राज मैं आपको पसंद करने लगी हूं आप मुझे अच्छे लगने लगे हैं ,और मैं आपसे शादी करना चाहती हूं, राज ने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला ,कि उसे डॉली की चीख सुनाई दी ,राज का पूरा ध्यान डॉली की तरफ चला गया, उसके हाथ में एक बड़ा सा कार्टून था ,उसने उस कार्टून को वही फेंका ,और भागता हुआ डॉली के पास पहुंच गया ,जब वहां जाकर देखा तो डॉली की उंगली मैं कैची से हल्का सा कट लग गया था, जो शायद बैलून लगाते हुए टेप काटने से लगा था, उसकी उंगली से खून निकल रहा था ,राज ने डॉली के हाथ से कैंची लेकर दूर फेंक दी ,और उसे डांटते हुए कि वह ठीक से काम क्यों नहीं करती

और यह सब काम करने की जरूरत ही क्या है ,ढाबे पर बहुत सारे लड़के हैं

वह सब देख लेंगे ,झट से डॉली की उंगली को पकड़ते हुए अपने मुंह में रख लिया डॉली के मुंह से हल्की-हल्की कराहने की आवाज निकल रही थी, शायद उसे दर्द हो रहा था ,राज ने एक हाथ से पकड़ते हुए डॉली कुर्सी पर बैठाया ,और छोटू से बर्फ लाने के लिए कहा, जब वह बर्फ लेकर आया तो अपने हाथों से उसकी उंगली पर बर्फ फिराने लगा,,,,

तभी पूनम भी राज के पीछे पीछे वहां आ चुकी थी, पूनम बुझे हुए मन से चुपचाप खड़े होकर सारा नजारा देखती जा रही थी

वह देख रही थी कैसे राज उसकी बातों को इग्नोर करके, डॉली के एक चीख पर भागता हुआ डॉली के पास आ गया ,उसे डॉली की कितनी चिंता है, मेरी बात का तो उसने जवाब देना ही ठीक नहीं समझा ,पूनम एक जगह जड़ होकर खड़ी रह गई थी

उसकी आंखें डबडबा गई थी ,और उसके चेहरे पर उदासी छा गई थी

राज का पूरा ध्यान सिर्फ डॉली पर था

वह किसी बच्चे की तरह डॉली की देखरेख करने में लगा हुआ था, कभी डॉली को पानी पिलाता ,तो कभी उसकी उंगली पर बर्फ घिसता और बीच-बीच में उसे झिड़कियां भी देता जा रहा था ,लेकिन राज की उन झिड़कियों में डॉली के लिए प्यार ,अपनापन और केयर साफ-साफ दिख रही थी

कि डॉली की जरा सी चोट से भी उसका दिल कितना दुखा है, पिछले आधे घंटे में एक पल के लिए भी

उसका दिमाग डॉली से हटा नहीं था ,डॉली कितनी बार कह चुकी कि अब वो ठीक है, उसे बस जरा सी चोट आई है ,उसकी उंगली में बैंडेज इस लगा दो

कोई दिक्कत नहीं है ,पर राज डॉली की बात सुने बिना ही, अपने तरीके से उसकी देखभाल कर रहा था ,उसने जल्दी से काकी को भी फोन कर दिया , वह हल्दी का दूध लेकर ढाबे पर आ जाए,, तब तक काकी भी दूध लेकर आ चुकी थी ,,,

काकी और राज दोनों का प्यार डॉली के लिए अद्भुत था ,और पूनम बस चुपचाप खड़ी हुई सब कुछ देख रही थी, धीरे-धीरे उसकी समझ में आने लगा, कि राज उसे क्यों इग्नोर कर रहा था ,राज के दिल में कहीं ना कहीं डॉली ही है ,पर उसे खुद भी इस बात का एहसास नहीं है

राज से ज्यादा दुनिया का कोई भी व्यक्ति डॉली को कभी नहीं समझ सकता ,और डॉली की राज के लिए जो भावनाएं हैं

जो प्यार है ,जो इज्जत है, उन सब में भी तो कहीं ना कहीं प्रेम ही है, इससे गहरा प्रेम और क्या होगा, कि दोनों बिना बताए एक दूसरे के दिल की बातें समझ जाते हैं

कुछ कहने से पहले ही एक दूसरे की पसंद ना पसंद,और जरूरतों को पूरा कर देते हैं अगर मैं इनको देख कर ही समझ गई हूं कि इनका प्रेम अद्भुत है ,,

तो क्यों सिवा को समझ नहीं आता ,कि वह दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं, वह तो बस इनके बीच में आने की

कोशिश कर रही थी लेकिन डॉली ने ऐसा मुझसे कभी कुछ नहीं कहा ,और ना ही मुझे इनकी बातों से ऐसा महसूस हुआ ,कि एक दूसरे के लिए उनके मन में कोई प्यार बाली फीलिंग है

पर क्यों आखिर अपनी भावनाओं को छुपा क्यों रही है ,,,क्यों सब कुछ पानी की तरह साफ नहीं हो जाता, ऐसी कौन सी मजबूरी है जो दोनों एक दूसरे से अपने दिल की बात नहीं कह पा रहे हैं, पूनम का चेहरा खड़े-खड़े आंसुओं से भीग चुका था

सच जो भी हो लेकिन कहीं ना कहीं वह भी राज को चाहने लगी थी ,जब किसी की चाहत अधूरी रह जाती है ,तो एक दर्द तो दिल में होता ही है ,प्यार चाहे एक तरफा हो या दो तरफा, दिल एक का दुखे या दोनों का पर कहीं ना कहीं चोट तो लगती ही है

ऐसा ही पूनम के साथ भी हुआ था, उसकी एक आंख से आंसू उसका प्यार अधूरा रहने के लिए बह रहे थे, तो दूसरी आंख से डॉली और राज के प्रेम को देखकर, इन दोनों का दिल कितना सच्चा था ,और इनका प्रेम कितना पाक और साफ , जो इतनी गहरी अनुभूति होते हुए भी इनने कभी उसे व्यक्त करने की कोशिश ही नहीं की,,,

थोड़ी ही देर में पूनम ने अपने आंसू पोछे और खुद से कहा ,कि मैं स्वार्थी नहीं बनूंगी अगर डॉली मेरी बहुत अच्छी फ्रेंड है

तो दूसरी तरफ राज से मैंने कहीं ना कहीं प्रेम ही किया है, और प्रेम हमेशा अपने चाहने वाले का अच्छा ही

सोचता है, और मैं भी राज के लिए अच्छा ही सोचूंगी, अब कहीं ना कहीं यह मेरी जिम्मेदारी भी बनती है ,कि मैं इन्हें इनके प्रेम का एहसास दिलवाऊ, कि यह सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे के लिए ही बने हैं ,और मुझे दोनों को समझाना ही होगा ,,

तब तक पूनम ने जाकर डॉली का हाथ पकड़ा, और राज की तरफ देखते हुए कहा राज डॉली बिल्कुल ठीक है, और उसका ध्यान में रखूंगी ,आप जाकर अपना काम देख लीजिए ,राज भी पूनम की तरफ देखते हुए धीरे से मुस्कुराया, और वहां से चला गया

उसके बाद पार्टी कंटिन्यू हुई केक काटा सबने पूनम के भाई को बर्थडे विश किया उसके बाद खाना पीना खाकर जब पूनम जाने लगी ,तब तक डॉली काकी के साथ अंदर जा चुकी थी, पूनम के सभी घरवाले घर से बाहर निकल चुके थे, पूनम ने देखा की राज ढाबे के अंदर अकेला है ,तो एक बार जाते जाते , वह राज से मिलने अंदर आ गई उसने राज से कहा थैंक्स!

कि आपने बहुत अच्छा इंतजाम किया था पार्टी सबको बहुत पसंद आई ,और खाना भी बहुत अच्छा था, फिर पूनम ने धीरे से हंसते हुए कहा और

थैंक्स फॉर स्पेशल डिस्काउंट ,,,,

इस बात पर राज भी हंसने लगा ,जब पूनम जाने लगी तो। राज ने रोकते हुए कहा पूनम अपन को तेरे से कुछ कहने का है

पूनम मोदी और राज की तरफ देखने लगी उसने कहा, बोलो क्या कहना है आपको पूनम वह जो तू अपन से

स्टोर रूम में कह रही थी ना ,,अपन ने ठीक से तो नहीं सुना पर हां समझ में आ गया, कि तू अपन से क्या कहना चाहती थी, तू अपन से प्यार के लफड़े की बात कर रही थी ना ,यह सब चक्कर जो लड़के और लड़कियों के बीच चलता है

उसी के बारे में कह रही थी ना, तो अपन तेरे को बताना चाहता है ,की अपुन इन सब चक्कर में नहीं पड़ने वाला ,साला शादी के बाद बहुत सारे लफड़े होते हैं, और वो कंडीशन खतरनाक वाली होती है ,अपन तो एक आजाद पंछी है, और पूरी लाइफ ऐसे ही रहने का है ,यह सब लफड़े बाजी से दूर रहना ही अच्छा है,,,,,

सुन ! अरे तू एक बहुत अच्छी लड़की है

तू पढ़ी लिखी है ,नौकरी भी करती है

तेरे को बहुत मस्त लड़का मिल जाएंगा जिनका अच्छा घर, खानदान ,मां बाप और जिनके पास एक अच्छी सी नौकरी होगी अपन के साथ रहकर तो तेरी जिंदगी का भी कचरा हो जाएगा ,अपन तो कभी स्कूल भी नहीं गया ,साला ढाबे में ही अपनी लाइफ कट जाएगी, इसलिए तू अपने वास्ते एक मस्त नौकरी वाला छोरा ढूंढ ,,और हां अपन तेरी शादी में आएगा ,एक बहुत अच्छे गिफ्ट के साथ ,तू अपन को कार्ड जरूर देना

इतना कह कर राज ने पूनम को बाय कर लिया ,,,पूनम बहुत ध्यान से राज की बात सुन रही थी, उसकी आंखों में झांकने की कोशिश कर रही थी ,कि डॉली कितनी गहराई से उसके अंदर समाई हुई है

राज की सारी दुनिया ही डॉली के इर्द-गिर्द घूम रही

थी ,फिर भी उसे इस बात का अहसास नहीं है, कि वह सिर्फ डॉली के लिए बना है, पूनम एक फीकी हंसी हंसते हुए वहां से चली गई, पूनम पूरे रास्ते सोच रही थी कि राज क्यों नहीं समझ पा रहा है, की डॉली ही उसकी दुनिया है

राज की लैंग्वेज में कहें तो उसका लफड़ा चक्कर सब कुछ डॉली ही है ,,,,,
 
घर पहुंचते-पहुंचते पूनम के मन का सारा सैलाब आंसुओं में बह चुका था ,अब उसका मन हल्का हो चुका था ,और उसने सोच लिया, कि इस बारे में बहुत जल्द वह डॉली से बात करके रहेगी,, करीब छह-सात दिन निकलने के बाद ,आज डॉली को पूनम के गांव उसकी आंगनबाड़ी पर रिपोर्ट बनाने के लिए जाना था

उसने राज से सुबह ही कह दिया था कि 1011 बजे वह उसे पूनम के यहां छोड़ आए राज भी टाइम पर तैयार हो गया था

डॉली को छोड़ने के लिए दोनों जीप में बैठ और पूनम के घर पहुंच गए, डॉली टाइम से पहले ही पहुंच गई थी, इसलिए वह सीधी पूनम के घर ही चली गई ,पूनम को पता था कि डॉली आने वाली है, इसलिए पूनम तैयार होकर दरवाजे पर ही दोनों का इंतजार कर रही थी ,जैसे ही दोनों पहुंचे डॉली घर के अंदर आ गई ,और पूनम ने राज से भी चाय पीने के लिए कहा ,लेकिन राज वैसे भी बहुत व्यस्त रहता है ,,,,

उसने कहा फिर किसी दिन ,और कार बैक करके वापस ढाबे पर चला गया,,,,

कुछ देर दोनों घर में बैठी, और फिर आंगनबाड़ी सेंटर पर पहुंच गई ,पूनम ने कुछ फाइल निकालकर डॉली को दीं, और दोनों जमीन पर बिछे हुए फर्स पर बैठकर अपना रिकॉर्ड बनाने का काम करने लगी

पूनम सोच रही थी कि वह डॉली से इस बारे में बात करे,,,लेकिन अभी काम कुछ बारीकी का था ,तो उसने सोचा यह खत्म हो जाए उसके बाद ही आराम से बात करना ठीक रहेगा ,तकरीबन डेढ़ 2 घंटे बाद सारा काम खत्म हो चुका था ,अब सिर्फ चार्ट सीट तैयार करना बाकी था, जो आराम से बातें करते हुए बन सकती थी

जब सारी जरूरी फाइलें समेट कर डॉली ने रख दी ,और चार्ट पेपर का सामान निकालकर दोनों एक्टिविटी चार्ट सीट बनाने लगी, तब बातों ही बातों में पूनम ने डॉली से कहा ,,,

डॉली तूने शादी के बारे में कुछ सोचा है क्या डॉली काम में व्यस्त थी, एक फूल बनाते हुए वह फूल में रंग भर रही थी, और उसका सारा ध्यान उसी पर था,उसने रंग भरते हुए ही पूनम से कहा,,

नहीं पूनम अभी मेरा सारा ध्यान मेरी पढ़ाई और नौकरी पर है, ग्रेजुएशन का मेरा सेकंड ईयर है ,कम से कम डेढ़ 2 साल तो इस बारे में ,मैं कुछ नहीं सोचने वाली ,,,

और दोबारा अपने काम में लग गई ,थोड़ी देर में पूनम ने फिर डॉली से सवाल किया

अच्छा ठीक है शादी ना सही, यह बता कि तू किसी से प्यार करती है क्या

मेरा मतलब तुझे कोई अच्छा लगता है

या कभी तुझे ऐसा लगा है की किसी को प्यार करती हो,,,,

डॉली ने व्रश रखा और पूनम की तरफ देखते हुए कहा ! पूनम आज तेरे सर पर यह प्यार और शादी का भूत कहां से सवार हो गया कहीं ऐसा तो नहीं कि तुझे ही किसी से प्यार हो गया हो ,,,आज तो पूनम ने सोच ही लिया था ,कि चाहे कुछ भी हो सारी बात डॉली से कर के ही रहेगी,,,,,

पूनम ने डॉली की आंखों में देखते हुए कहा हां डॉली मुझे किसी से प्यार हुआ है

और इसी बारे में ,मैं तुझे सब कुछ बताना चाहती हूं ,और बहुत सारी ऐसी बातें है

जो मैं तुझसे भी जानना चाहती हूं ,क्या आज तू अपने दिल की सारी बातें मुझे सच और साफ-साफ बताएगी

पूनम की यह बात सुनकर डॉली को कुछ अजीब लगा ,कि पूनम इस तरह से बात क्यों कर रही है ,उसने पूनम से कहा तुझे हो क्या गया है,पर पूनम ने डॉली के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए ,और डॉली से कहा !

हां डॉली मैं सच में सीरियस हूं ,और तुझ से इस बारे में बात करना चाहती हूं!

क्या आज तू मेरे सारे सवालों के जवाब देगी

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पूनम लगातार डॉली की तरफ देखे जा रही थी ,क्योंकि आज उसने डॉली से प्रॉमिस लिया था ,कि डॉली उसे उन सारे सवालों के जवाब देगी ,जो वह उससे जानना चाहती है पूनम सच में बहुत सीरियस थी

डॉली भी पूनम की ऐसी बातें सुनकर थोड़ा सोच में पड़ गई थी, कि आखिर अचानक ऐसी कौन सी बात हो गई ,जो पूनम इस तरह से बातें कर रही है, डॉली ने भी उसे भरोसा दिलाया ,कि हां पूनम तो पूछ मुझसे क्या पूछना चाहती है ,इतने महीनों में तू मेरी बहुत अच्छी सहेली बन गई है ,और यकीन कर तू मुझसे जो भी पूछेगी , मैं तुझे सच सच ही बताऊंगी

पूनम ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा

डॉली इन तीन चार महीनों में मैं किसी से प्यार करने लगी थी, धीरे-धीरे उसके करीब आने लगी थी ,और कहीं ना कहीं मुझे लगता था, कि शायद वह भी इस बात के लिए राजी हो जाएगा ,लेकिन जब हिम्मत करके मैंने उसे यह बात बताई, मैंने उससे कहा कि

मैं उसको बहुत प्यार करती हूं और उसके साथ शादी करना चाहती हूं ,तो उसने मेरी इस बात पर कुछ भी

रियेक्ट नहीं किया डॉली बहुत ध्यान से पूनम की बात सुन रही थी, डॉली ने पूछा पूनम वो कौन है

तू तो इतनी अच्छी लड़की है ,और जब तू उससे प्यार करती तो उसने तुझे मना क्यों किया

डॉली क्योंकि वह किसी और से प्यार करता है ,डॉली ने कहा पूनम क्या इस बात का तुझे पहले से पता नहीं था

नहीं डॉली अगर मुझे पता होता तो क्या मैं ऐसा सोचती ,या उससे ऐसा कुछ कहती डॉली ने कहा पूनम जो हुआ उसे भूल जा अच्छा है कि तुझे टाइम पर ही सब कुछ पता चल गया ,और तूने यह बात एक्सेप्ट भी कर ली, कि वह तेरा नहीं हो सकता

अब इस बात को जाने दे, और मैं चाहूंगी कि तू अपनी जिंदगी में आगे बढ़े

पूनम का चेहरा अब भी उतरा हुआ था उसने डॉली से कहा डॉली क्या तू एक बार उसका नाम जानना नहीं चाहेगी

कि वह कौन है, डॉली ने कहा वैसे तो अब नाम जानने से कोई मतलब नहीं है

क्योंकि अब तेरे और उसके बीच ऐसा कुछ है भी नहीं ,फिर भी अगर तू चाहती है तो बता दे ,कि वह कौन है

राज !!!!!

क्या

डॉली हैरान होकर पूनम की तरफ देखने लगी

हां डॉली वो राज ही है ,जिसे मैं अपना दिल दे बैठी

थी ,मुझे राज बहुत अच्छा लगने लगा था ,और मैं धीरे-धीरे उसके करीब आ रही थी, मैंने सोच लिया था कि इस बारे में राज से बात कर के ही रहूंगी, और इसीलिए अपने भाई के बर्थडे वाले दिन ,मैं अपने मां पिता को भी साथ लेकर आई थी

कि वह राज को प्रपोज करूंगी और अगर वह हां कहता है ,तो अपने मां बाप से भी मिलवा दूंगी ,मुझे पूरा यकीन था

कि मेरे मां पिता भी राज को जरूर पसंद करते ,राज में ऐसी कोई कमी है ही नहीं

कि कोई उसे नापसंद कर सके, राज में बहुत सारी खूबियां हैं ,जिनकी वजह से वह बहुत अच्छे इंसान हैं

पर जब मैंने राज से इस बारे में बात की

उस वक्त राज एक स्टोर रूम में था

राज के सामने मैंने अपनी सारी बात रख दी थी ,लेकिन उसी वक्त तुझे कैंची से चोट लग गई ,और तेरी एक हल्की सी चीख सुनकर वह सामान स्टोर रूम में फेंकते हुए तेरी तरफ दौड़ पड़ा ,और मैं खड़ी रह कर उसका इंतजार करती ही रह गई

जब मैं वहां पहुंची तो देखा कि राज तेरी चोट से कितना परेशान हो रहा था

चोट तुझे लगी थी ,लेकिन दर्द उसे हो रहा था आह तेरी निकल रहीं थी

पर महसूस राज को हो रही थी

वह सब कुछ भूल कर तेरी छोटी सी चोट को ठीक करने में लगा था, डॉली तब मुझे समझ आया ,कि राज

के लिए तुझसे ज्यादा अहमियत किसी और की नहीं है

जहां एक तरफ मेरी बात अधूरी छोड़ कर वह तेरे पास आ गया था

वहीं दूसरी तरफ जब राज आया तो तू भी निश्चिंत हो गई थी, तूने खुद को राज के हवाले छोड़ दिया था, क्योंकि तू जानती है कि तेरे दर्द को उससे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता ,,,,

,और उस दिन जब मैं जाने लगी थी तो राज ने मुझे रोकते हुए कहा ,कि मैं एक अच्छी लड़की हूं ,और अपने लिए एक पढ़ा-लिखा और अच्छा लड़का देख सकती हूं

और उसकी लाइफ में ऐसा कुछ भी नहीं है ना ही वह इस बारे में ऐसा कुछ सोच रहा है और राज कि इस बात पर मैं हैरान थी

कि वह तेरी इतनी केअर करता है

तेरे लिए हमेशा हाजिर रहता है

तेरी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात का ख्याल रखता है

तेरे दर्द पर सब कुछ छोड़कर पागलों की तरह दौड़ा चला जाता है

तुझे लेना, तुझे छोड़ना ,तेरी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना ,तेरे आसपास के माहौल पर नजर रखना ,तुझे बच्चों की तरह ट्रीट करना

तेरे नखरे उठाना

डॉली यह सब प्यार नहीं तो क्या है

यह राज का वो प्यार है जिसे वह खुद ही नहीं समझ

पा रहा,,,

उसने मुझसे कहा था, कि वह अकेला ही रहना चाहता है, उसकी भाषा में कहें तो उसे शादी की लफड़े बाजी पसंद नहीं है

डॉली तू जानती है ,उसे मेरा इस तरह से प्यार का इजहार करना पसंद क्यों नहीं आया क्योंकि उसके दिल में पहले से तूने जगह बना रखी है, तो उसके दिल के एक ऐसे कोने में बैठी है ,जहां से कोई और तुझे नहीं देख पा रहा, सिवाय राज के

डॉली किसी स्टैचू की तरह बिना पलकें झपकाए पूनम की बात सुनती जा रही थी उसे पूनम की कोई भी बात समझ नहीं आ रही थी ,कि वह कहना क्या चाहती है

इन सब के बारे में तो डॉली ने कभी सोचा ही नहीं ,,,,,

वह तो राज के पास आकर रहने लगी थी राज और काकी से उसका एक ऐसा रिश्ता है ,जिसका कोई नाम नहीं है,,,,

पर जो पूनम कहती जा रही है, वह सब क्या है ,वह सारी बातें तो मेरे ऊपर से निकल रही हैं ,,,,

पूनम कुछ और कहती, तभी डॉली ने कहा पूनम तू यह सब क्या बोल रही है

राज मुझसे प्यार करते है

पर ये कैसे हो सकता है ,ना तो मैंने और ना ही राज ने कभी इस बारे में सोचा

हां तेरी यह बात सही है कि राज से ज्यादा मुझे कोई भी नहीं समझता, राज मेरी हर बात का ध्यान रखते हैं ,मेरे कुछ कहने से पहले ही वह मेरी आंखों में पढ़

लेते हैं

कि मैं चाहती क्या हूं,,,

पूनम ने डॉली को समझाते हुए कहा डॉली तू और कितना समझना चाहती है

अगर यह प्यार नहीं ,तो क्या है

राज तेरे अलावा किसी के नजदीक नहीं जाना चाहता, तू हमेशा राज के साथ रहना चाहती है

जब वह तेरे पास होते हैं ,तो तू निश्चफिकर हो जाती है

राज की हर चीज का कितने अच्छे से ध्यान रखती है तू,,,,,,,

डॉली एक बार ज़रा आंखें बंद करके सोच एक लंबी चौड़ी सुनसान रोड है

जिसके मीलो दूर तक तुम्हारे आगे और पीछे कोई नहीं है, तुम्हें उस सड़क पर बहुत दूर तक चलते जाना है ,और अगर कोई आकर तुझ से कहें कि इस लंबी चौड़ी सुनसान सड़क पर तुझे किस का साथ चाहिए, ऐसा कौन है जो इसी वक्त तेरे पास आ जाए ,तो तू किसका नाम लेगी

डॉली ने बहुत ही सहज तरीके से कहा

राज का !!!!!!!!

डॉली अगर तुझे किसी चीज की जरूरत हो तो किससे मांगेगी

राज से !!!!!!

और ऐसा कौन है जिससे तू कभी दूर होना नहीं चाहती, और अगर दूर होती भी है तो तुझे हर वक्त उसी की चिंता लगी रहती है पूनम ! मुझे राज की ही चिंता

रहेगी!!!!

पर इन सब से प्यार का क्या मतलब

डॉली में यही तो तुझे समझाना चाहती हूं कि प्यार इसी को कहते हैं, तू राज से प्यार करती है

तुम दोनों एक दूसरे के लिए बने हो ,और तुम्हारे कान्हा जी नेही तुम्हें राज से मिलाया है ,तुम दोनों का साथ तो ऊपर वाला पहले ही लिख चुका है ,मुझे आश्चर्य हो रहा है

कि तू अब तक क्यों नहीं समझी

डॉली अब वक्त आ गया है, कि तुझे राज का हाथ थाम लेना चाहिए ,आखिर वह कब तक अपनी जिंदगी में यूं ही अकेला रहेगा

क्या तुझे काकी की आंखों में राज की गृहस्ती के लिए तड़प दिखाई नहीं देती

वह भी चाहती हैं कि उनके राज का घर बसे ,उसके छोटे-छोटे बच्चे हो

वो अपनी गृहस्ती में सुखी रहे

डॉली एक बार सोच कर देख, क्या तुझे यह सब सोचते हुए अच्छा नहीं लग रहा

कि तू राज के दो छोटे छोटे से बच्चों की मां है, राज अपने दो छोटे बच्चों और तेरे साथ अपनी गृहस्थी में खुश है

डॉली बहुत गहरी चिंता में पड़ गई थी
 
वह इन सारी बातों को गहराई से सोच रही थी,,,,,

उसने पूनम से कहा, पूनम पर यह कैसे हो सकता है ,,राज ने कभी भी उस नजर से मुझे देखा ही नहीं और ना ही मैंने ,,,,

उनके लिए तो मैं अभी तक एक बच्ची हूं

वह मुझे हमेशा बच्चों की तरह ही ट्रीट करते हैं ,,,,डॉली माना कि तू राज से काफी छोटी है, पर प्रेम उम्र नहीं देखता

वह एक दूसरे के लिए इज्जत और प्यार देखता है, और तुम दोनों में वह सब कूट-कूट कर भरा हुआ है, जरा एक बार सोच कर देख अगर कल को तेरी शादी हो गई,

और तू कहीं और चली गई ,तो क्या तू किसी और के साथ खुश रह पाएगी,,,,

यह बात सुनकर सच में डॉली परेशान हो उठी थी ,राज से दूर जाने का की सोच कर भी वह डर गई थी ,,,,

उसके बाद भी पूनम कितनी देर तक एक एक बात उसे समझाती रही, उसे बताती रही अब आंगनबाड़ी बंद करने का टाइम हो गया था ,और राज का भी फोन आ गया था कि वह 1520 मिनट में ही डॉली को लेने आ रहा है, डॉली धीरे-धीरे आंगनबाड़ी में बिखरा हुआ अपना सामान समेटने लगी

तब तक राज की जीप का हॉर्न बाहर सुनाई दिया, जैसे ही डॉली बाहर जाने लगी पूनम ने उसका हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा !

डॉली अब और देर मत करना,,,,

तुझे इस बात को समझना ही होगा, कि तू और राज एक दूसरे के लिए ही बने हैं

यह कहते हुए पूनम ने डॉली का हाथ छोड़ दिया,,,, डॉली चुपचाप आकर जीप में आगे की सीट पर बैठ गई ,,,

हमेशा की तरह राज ने जीप स्टार्ट की और उसका बोलना शुरू हो गया,,,,,

महारानी ! कैसा रहा आज का दिन तेरा जो भी काम था, सब हो गया ना, कि तेरे को अभी और यहां पर छोड़ने को आना पड़ेगा डॉली प्रश्नवाचक निगाहों से राज की तरफ देखे जा रही थी ,,

वह बहुत कुछ पूछना चाहती थी राज से बहुत बातें करना चाहती थी, पर उसे पता था कि राज को यह सब समझाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, पता नहीं वह इस बात पर कैसे रिएक्ट करेंगे ,,,

राज लगातार बोल रहा था, और डॉली चुपचाप उसकी बातें सुनती जा रही थी

कुछ ही देर में घर आ गया, डॉली ने अपना बैग उठाया और अंदर चली गई

राज भी उसके पीछे-पीछे अंदर आ गया था ,काकी दोनों का इंतजार ही कर रही थी जैसे ही दोनों अंदर आए, राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा,,,,

काकी देखना इस महारानी को क्या हो गया है, मैं कबसे से कुछ पूछ रहा हूं ,ये है कि कुछ बोलती ही नहीं ,,

डॉली आई और काकी के गले में बाहें डाल कर उनके कंधे पर अपना सिर टिका दिया राज देख रहा था, कि डॉली चुपचाप है लेकिन वह फिर भी उसे चिढ़ाने की कोशिश कर रहा था, पर काकी ने डॉली के गाल पर हाथ रखते हुए, उसकी आंखों में देखकर पूछा!

क्या होगा मेरी डॉली बिटिया को आज ऐसे चुपचाप और बुझी बुझी क्यों है, तेरा सब काम तो ठीक रहा ना, डॉली ने धीरे से कहा जी काकी सब ठीक था

और बैग उठाकर अपने कमरे में चली गई राज और काकी एक दूसरे की तरफ देखने लगे, कि आज से पहले तो डॉली ने ऐसा कभी नहीं किया, वह जब भी आती चहकते हुए सारी बातें बताती, और आते साथ ही

काकी की मदद भी करवाने लगती

जैसे ही राज उसके पीछे उसके कमरे में जाने लगा, तो काकी ने राज का हाथ पकड़कर रोकते हुए कहा!

बेटा लगता है वह किसी बात पर परेशान है अभी उसे और परेशान मत कर कुछ देर बाद उसका मूड ठीक हो जाएगा, तो वह खुद ही हमसे बात कर लेंगी,,,

और यह कह कर काकी रसोई में चली गई पर राज के दिमाग में अभी भी चल रहा था कि आखिर हुआ क्या है, जो डॉली इस तरह का व्यवहार कर रही है,,तभी दुकान से कोई लड़का बुलाने आया,,,

राज भैया ढाबे पर चलिए, कुछ ग्राहकों को आपसे बात करनी है ,और राज भी ढाबे पर चला गया...............

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डॉली बहुत देर तक अपने कमरे में चुपचाप लेटी रही, आज वह रसोई में भी काकी की मदद करवाने नहीं आई थी ,काकी ने भी सोचा की आंगनवाड़ी का काम ज्यादा हो गया होगा ,इसलिए थक गई होगी ,काकी रात का खाना भी बना चुकी थी ,जब डॉली खाना खाने के लिए नहीं उठी,तो काकी ने बुलाया तब भी डॉली ने कोई उत्तर नहीं दिया काकी थालियां लगा रही थी, और बीच-बीच में डॉली को आवाज भी देती जा रही थी

तब तक राज भी ढाबे से आ गया ,जब उसने देखा कि काकी रसोई में अकेले ही है तो राज ने डॉली के बारे में पूछा

तो काकी ने राज से ही डॉली को बुलाने के लिए कहा !

बेटा जाकर उसको उठा ले ,लगता है आज थक गई होगी ,इसलिए सो गई ,राज ने डॉली के कमरे में जाकर डॉली को जोर से आवाज लगाते हुये कमरे की लाइट भी जला दी,, और देखा तो सच में डॉली सो रही थी ,राज ने कमरे से ही आवाज लगाई काकी ,यह क्या महारानी अभी से सो गई मैं आवाज लगा रहा हूं, सुन

भी नहीं रही

काकी ने कहा बेटा, अगर सो गई है तो उसे उठा ले ,आंगनबाड़ी से आकर तो उसने कुछ भी नहीं खाया, राज हिलाकर डॉली को उठाने लगा, फिर भी डॉली गहरी नींद में थी राज ने उसके माथे पर अपना हाथ रखा तो देखा कि उसका माथा गर्म था

राज ने चादर हटाते हुए डॉली का हाथ पकड़ा, तो हाथ भी गर्म था

राज वहीं से चिल्लाता हुआ काकी के पास आया, काकी महारानी को तो बुखार है

क्या काकी थाली छोड़ते हुए डॉली के कमरे की तरफ गई ,काकी रास्ते में ही बढ़बढ़ाती जा रही थी ,यह लड़की भी ना सुबह से शाम तक मशीन की तरह काम करती है

अपने खाने-पीने का तो ख्याल ही नहीं रखती कितनी बार कहती हूं, टाइम पर खाना खा लिया कर ,दूध फल लिया कर ,पर उसे तो घर के काम और आंगनबाड़ी के काम इन दोनों के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं सबका ध्यान रख लेती है, एक अपना ही नहीं रख पाती, काकी ने भी आकर डॉली के माथे पर हाथ रखा ,देखा तो माथा गर्म था

काकी जल्दी से रसोई में से पानी का गिलास भरकर लाई ,और राज से कहां तू डॉली को थोड़ा पानी पिला, जब इसकी नींद खुल जाए ,तो कुछ खिलाकर दवाई देना पड़ेगी राज ने डॉली को उठा कर बेड पर बिठा लिया था ,और अपने कंधे से उसका सर टिकाते हुए

उसको सहारा दिया

काकी डॉली को पानी पिलाने लगी

डॉली लगभग आधा गिलास पानी पी गई थी राज ने काकी की तरफ देखते हुए कहा कि मैं अभी डॉक्टर को लेकर आता हूं

डॉली ने राज को रोका और धीरे से कहा मैं ठीक हूं, इतनी रात को वैसे भी कौन सा डॉक्टर मिलेगा, अभी पेरासिटामोल ले लेती हूं ,हम सुबह चलकर डॉक्टर को दिखा देगे

डॉली की टेंशन में राज के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी

उसने कहा तू ऐसे कैसे कोई भी दवाई ले लेगी, और पहले तो तू कुछ खा ले सुबह से काम काम और बस काम लगा रहता है पहले कुछ खा, उसके बाद तुझे कोई दवाई देंगे ,और काकी से खाने की थाली लाने के लिए कहा, डॉली बच्चों की तरह जिद करने लगी कि मुझे कुछ नहीं खाना ,मुझे बिल्कुल भी भूख नहीं है

पर राज छोटे-छोटे कौर तोड़कर एक एक निवाला उसके मुंह में रखता जा रहा था

डॉली जबरदस्ती मुंह बना बना कर वह कौन निगल रही थी ,,,

जैसे ही एक रोटी खत्म हुई डॉली ने दोनों हाथों से अपना मुंह बंद कर लिया ,मैं अब और नहीं खा सकती ,प्लीज !

काकी ने कहा ठीक है ,राज अब जबरदस्ती मत कर ,इतने खाने के बाद हम इसको दवाई दे सकते हैं,

लेकिन राज ऐसे कहां मानने वाला था , इसी गांव के पास एक डिस्पेंसरी थी ,जहां पर राज और काकी अक्सर जाया करते थे, और उनसे राज की अच्छी जान पहचान भी थी ,उनको फोन लगा दिया

डॉक्टर से बात करने के बाद, जब डॉली के बारे में सब कुछ बता दिया ,और उन्होंने टेबलेट का नाम बता कर अच्छे से सब कुछ समझा दिया ,तब राज को तसल्ली हुई जिस टेबलेट का नाम उन्होंने बताया ,वह घर पर ही रखी थी ,राज ने वह टेबलेट डॉली को खिला दी ,और उसे लिटा कर उसके पास ही बैठ गया, तभी काकी ने कहा राज डॉली को तो दवाई खिला दी,, अब तू भी तो कुछ खा ले ,लगी हुई थाली भी ठंडी हो गई होगी राज ने कहा की तू जा कर खाले

मैं शहज़ादी के पास बैठता हूं

जब डॉली ने सुना ककि अभी तक राज और काकी ने खाना नहीं खाया ,तो डॉली ने धीरे से उठते हुए कहा ,काकी आप दोनों खाना खा लीजिए, मैं अब ठीक हूं

मुझे पहले से अच्छा लग रहा है

डॉली के कहने पर राज खाना खाने काकी के साथ आ गया ,लेकिन खाना खाने के बाद उसने एक बार फिर डॉली को जाकर देखा उसका बुखार कम हुआ कि नहीं, इस बार पहले से बुखार कम था, राज ने कहा काकी आप लोगों के साथ, में भी यही एक फोल्डिंग डाल कर सो जाता हूं ,रात को भी इसका फीवर देखना पड़ेगा , यह तो सो जाएगी तो इसको होश ही नहीं रहेगा ,काकी

भी दवाई खा कर सोती थी ,तो उसकी आंख सुबह ही खुलती थी ,इसलिए काकी को भी यही सही लगा ,राज ने भी एक फोल्डिंग डाला और सो गया ,राज हर दो-तीन घंटे में उठकर पूरी रात डॉली का फीवर चेक करता रहा

कि कहीं बढ़ तो नहीं रहा है

लेकिन फीवर नॉर्मल ही था, ऐसे ही पूरी रात निकल गई ,जब सुबह हुई तो डॉली रोज की तरह ही उठ गई ,हां पर उसे कमजोरी लग रही थी ,इस इसलिए वह रोज की तरह काम भी नहीं कर पा रही थी ,राज की नींद तो सुबह बहुत ही पक्की होती थी

उसको आसानी से उठाना तो हो ही नहीं पाता था, लेकिन आज राज की भी नींद खुल गई ,उसने जब देखा कि डॉली अपनी जगह पर नहीं है ,तो जल्दी से बाहर आया जहाँ हाथ में झाड़ू लीये डॉली दिखी

झाड़ू छीनते हुए डॉली को डांटना शुरू कर दिया ,महारानी तुझे चैन नहीं पड़ता क्या

क्या तेरी इच्छा क्या है, तू अच्छी तरह से बीमार पड़ना चाहती है क्या

यह सब काम छोड़ और जाकर चुपचाप अपने कमरे में लेट जा ,और फिर काकी को भी आवाज लगाई ,काकी देखना ये शहज़ादी सुबह सुबह क्या कर रही है

यह झाड़ू लेकर आ गई ,तू भी इसे कुछ नहीं कहती ,,,काकी ने अभी तक डॉली को देखा ही नहीं था, कि वह उठकर झाड़ू लगाने लगी है

काकी तो सुबह से उठकर नाश्ता बनाने में लग

गई ,और जब राज के उठने की आहट हुई ,तो उसने एक चूल्हे पर चाय भी चढ़ा दी डॉली के हाथ से झाड़ू छीन कर

उसका हाथ पकड़ उसके कमरे में ले गया औऱ वापस उसे बेड पर लिटा दिया

डॉली राज को समझाने की कोशिश कर रही थी, कि कल से उसे बेहतर लग रहा है और फिर आज शनिवार है ,सप्ताह का आखरी दिन तो उसे आंगनवाड़ी भी जाना होगा ,कल तो छुट्टी तो है ही

वह कल ही आराम कर लेगी, राज ने डांटते हुए कहा ,तेरी समझ में नहीं आ रहा

कि मैं तुझ से कह क्या रहा हूं

खबरदार जो यहां से हिली भी ,अरे तेरी नौकरी लगे हुए 1 साल हो गया

1 दिन की भी छुट्टी नहीं ली होगी

साला सब फालतू में बर्बाद हो जाएंगी

छुट्टियां ,जब तक तू बिल्कुल ठीक नहीं हो जाती, घर से बाहर कदम भी नहीं रखेगी

मैं जाकर वहां पर बोल दूंगा ,और तुझे मोबाइल दे रहा हूं ,और भी तुझे जिस से बोलना हो तो तू बोल देना, यह राज का आखरी फैसला था ,औऱ राज के सामने बोलने की डॉली की हिम्मत भी नहीं थी

डॉली ने कहा ठीक है ,कम से कम मुझे डांटो तो मत ,देखो ना एक तो मेरी तबीयत ठीक नहीं ,ऊपर से आप कल से मुझे डांटे ही जा रहे हैं,,,

हां क्योंकि तुझे डांट से ही समझ में आता है अगर प्यार

से बोलो , तो तू सर पर चढ़ कर नाचने लगती है ,,,जब डॉली लेट गई तो

राज रसोई में गया ,और मखाने का डिब्बा ढूंढने लगा ,एक के बाद एक डिब्बे खोलता जा रहा था ,काकी ने उसके पीछे आते हुए कहा, राज तुझे क्या चाहिए ढूंढ क्या रहा है काकी मैं मखाने का डिब्बा ढूंढ रहा हूं

जब मुझे बुखार आता ,तो तू मुझे वह थोड़ी सा घी और नमक डालकर फ्राई करके देती थी ना ,तो उससे अपुन का मुँह एकदम रापचिक हो जाता था ,और टेस्ट भी अच्छा लगता था ,तो वैसे ही मैं महारानी के लिए बना रहा हूं ,,,,,,

काकी ने हंसते हुए कहा वह मेरी रसोई है

तू रहने दे मेरी रसोई में ही संभाल लूंगी

तू अपना ढाबा ही संभाल ,तू जाकर डॉली के पास बैठ जा ,मैं मखाने तल के लाती हूं और काकी मखाने का डब्बा निकालकर उसे कढ़ाई में हल्का सा घी डाल कर भूना और नमक मिलाते हुए डॉली के पास ले आई

ऐसे मखाने खाने से सच में मुंह का स्वाद अच्छा हो जाता था, राज एक एक मखाना डॉली को अपने हाथों से खिला रहा था राज

ने मखाने खिलाए ,और दूध पिलाया तब तक काकी ने अंदर आते हुए कहा

राज ,राज ,डॉक्टर साहब आए हैं

क्या तू ने उन्हें फोन किया था

हां काकी मैंने तो रात को ही उन्हें फोन किया था, और

सुबह आने के लिए भी बोल दिया था ,आप उन्हें बिठाओ मैं डॉली को लेकर आता हूं ,राज ने डॉली को उठाया और बाहर वाले कमरे में उसे डॉक्टर को दिखाने ,लगा डॉक्टर ने अच्छे से डॉली की आंखें ,जीभ ,हाथ, नाखून और बुखार सब कुछ चेक किया ,और कहा! राज चिंता की कोई बात नहीं है ,डॉली को वायरल फीवर है पर हां मुझे लग रहा है ,कि इन्होंने किसी बात का स्ट्रेस भी लिया है

राज डॉक्टर का मुंह देखने लगा, डॉक्टर साहब मैं कुछ समझा नहीं, राज मेरे कहने का मतलब है ,कि जब हम किसी बात को बहुत गहराई से ,और बहुत देर तक सोचते रहते हैं ,तो उसकी वजह से भी हमारी बॉडी में वीकनेस महसूस होती है, और ऐसे में हमारा साधारण सा फीवर भी काफी बढ़ जाता है ,तो बस डॉली के साथ ही यही हुआ है ,कुछ काम का प्रेशर होगा ,और प्रेशर से ज्यादा लगता है उन्होंने अपने दिमाग पर जोर डाला है ,पर फिर भी लापरवाही करना सही नहीं है ,मैं 3 दिन का मेडिसन दे रहा हूं और डॉली को आराम के साथ ही अच्छे से खाना पीना भी खाना होगा

उसके बाद बिल्कुल पहले की तरह स्वस्थ हो जाएंगी, डॉक्टर ने दवाइयां लिखकर राज के हाथ में दी ,और जाने के लिए खड़े हो गए ,राज डॉक्टर साहब के पीछे पीछे उन्हें छोड़ने बाहर तक आ गया

जब डॉक्टर जाने लगे, तो राज ने एक बार फिर उनसे पूछा डॉक्टर साहब कोई और परेशानी तो नहीं है ना ,डॉक्टर ने हंसते हुए कहा अरे नहीं राज, कोई भी

परेशानी नहीं है ,वायरल फीवर तो वैसे भी दो-तीन दिन का होता है, 3 दिन का डोज़ लेने के बाद उनको अच्छा लगेगा ,और डॉक्टर चले गए
 
पर्चा राज के हाथ में ही था ,राज ने अपनी मोटरसाइकिल निकाली और जल्दी से डॉली की दवाइयां भी ले आया ,आकर उसने डॉली से ही दवाइयों के बारे में समझा

और एक एक दवाई खोलकर डॉली को पिलाने लगा, राज डॉली का ध्यान रख रहा था

और डॉली के ध्यान में तो राज ही था

डॉली को पूनम की कही हुई एक एक बात याद आ रही थी, पूरी रात यही स्ट्रेस तो डॉली के दिमाग में था ,और शायद इसी की वजह से उसका बुखार इतना बढ़ गया था

डॉली ने बहुत सोचा ,हर पहलू से सोचा

हर तरह से सोचा ,अभी भी वह सोचती ही जा रही थी, पूनम की कही हुई एक एक बात डॉली को सच महसूस हो रही थी

आज राज के लिए वह अपने अंदर के भावों को समझने की कोशिश कर रही थी जब राज ने डॉली को सारी दवाइयां खिला दी,और देखा कि यहाँ पानी नहीं था

तो पानी लेने रसोई में चला गया, तब तक डॉली ने देखा कि सामने ही दीवार पर टंगे हुए मंदिर से, कान्हा जी का मुकुट उनके माथे से निकलकर जमीन पर आ गिरा है डॉली धीरे से उठी ,और जाकर कान्हा जी का मुकुट

हाथ में लेकर उन्हें पहनाने की कोशिश करने लगी,,,,

डॉली ने धीरे से कान्हा जी के सर पर उनका मुकुट वापस रख दिया ,और एक बार उनकी तरफ देख कर मुस्कुराई, कान्हा ,मेरे भाई मेरे सखा ,सब कुछ तुम ही हो ,मेरे दिमाग में इतनी सारी उलझने चल रही है

तुमने मेरा हर कदम पर साथ दिया है

जब भी मैं भटकी हूं तुमने मुझे राह दिखाइ है ,मेरा सहारा तुम बने हो ,मेरी उलझने तुमने ही सुलझाइ है

लेकिन अब मेरे साथ जो हो रहा है

ना तो वह उलझन है ,नहीं कोई परेशानी है और ना ही कोई ऐसी बात है जिसकी शिकायत में तुमसे करूं, बस इस बार अगर मुझे जरूरत है ,तो अपनी समझ की

सब कुछ समझते हुए भी मैं क्यों जान नहीं पा रही हूं ,कान्हा जी तुम मेरी सहायता करो मुझे बताओ कि

सच क्या है

कान्हा जी पूनम ने कहा था कि राज को मेरे लिए ही बनाया है ,लेकिन मैं क्यों नहीं समझ पाई ,

अभी तक राज के साथ अपने रिश्ते को लेकर मैं नासमझ क्यों हूं

कान्हा जी मैं तो 8 साल की थी तभी मेरी मां और कुछ दिनों बाद ही बापू मुझे छोड़ कर चले गए थे ,तब से मैं बिल्कुल अकेली हूं लेकिन आपने मुझे इस घर में भेजा

तो आप मुझे भी बता दो कि मेरी किस्मत में किसका साथ लिखा है ,वह कौन है जो आकर मेरे साथ खड़ा होगा ,जिसका हाथ पकड़ कर मैं पूरी जिंदगी चलूंगी ,कान्हा जी आपको मुझे बताना ही होगा ,,,

जिस मंदिर में डॉली के कान्हा जी बैठे थे उनके ठीक उसी के पीछे कान्हा जी की एक बड़ी सी कांच से जड़ी हुई तस्वीर भी रखी थी जिसे डॉली के जन्मदिन पर राज मेले से लेकर आया था

डॉली लगातार अपने कान्हा जी से यह सवाल करती ही जा रही थी, कि कान्हा जी मुझे इस बात का एहसास करवाइए कि मेरा साथ किसके लिए है

और सामने रखी बड़ी सी कांच की तस्वीर में डॉली को राज का चेहरा नजर आया

जो डॉली के बगल में आकर खड़ा हो गया था ,कान्हा जी की परछाई के पीछे डॉली और राज दोनों का चेहरा साफ नजर आ रहा था ,राज को देख कर डॉली का मुंह खुला का खुला रह गया

जब वह मुड़ी तो देखा कि पानी का गिलास लेकर राज

ठीक उसके पीछे ही खड़ा था डॉली ने राज को देखा और राज डॉली को पानी पिलाने लगा, लेकिन पानी पीते हुए डॉली बहुत ध्यान से राज को देखती जा रही थी ,आज कान्हा जी से पूछे हुए सवालों का जवाब उसे मिल चुका था

अब उसे जानने के लिए कुछ भी बाकी नहीं था ,वह सब कुछ समझ गई थी

उसे तो हमेशा ही खुद से ज्यादा भरोसा अपने कान्हा जी पर रहा है

सब कुछ उन्ही पर तो छोड़ रखा है उसने शुरू से आज तक जब वह इतनी बड़ी उलझन में थी ,तो यह कैसे हो सकता था कि कान्हा जी उनका साथ ना दे

वह हर बात समझ चुकी थी ,सब कुछ जान चुकी थी, अब कुछ भी कहने या सुनने के लिए बाकी नहीं था ,उसे राज में अपने भोलेनाथ दिखाई दे रहे थे

राज का प्रेम भी तो बिल्कुल भोलेनाथ की तरह ही अजर अमर और निश्चल था

जिसमें कोई झूठ ,कोई फरेब ,और कोई धोखा नहीं था ,एक एक बात अच्छी तरह से डॉली कि समझ में आ गई थी

पानी पीते पीते उसके होठों पर एक मुस्कुराहट आ गई ,और आंखें राज के चेहरे से हट ही नहीं रही थी, वह राज को देखे ही जा रही थी,,,,,,,,

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डॉली लगातार राज की आंखों में देखे ही जा रही थी, वह भी राज की आंखों में अपनी परछाई देखना चाहती थी, कि वह कितनी गहराई से राज की आंखों में समाई हुई है बह राज में खुद को ढूंढ रही थी

आज सारी बातें साफ हो चुकी थी

उसे सब कुछ महसूस होने लगा था , कि राज का अपनापन ,उसकी देखभाल और उसकी डांट यह सब प्यार ही तो है

राज इस प्यार को चाहे कुछ भी नाम दे लेकिन डॉली को आज अपने मन में राज के लिए प्रेम की अनुभूति हो चुकी थी

डॉली का कतरा कतरा राज के प्रेम की गवाही दे रहा था ,डॉली भी तो राज की जो देखरेख करती थी, उसकी इज्जत करती थी उसकी सारी चीजों की परवाह करती थी उसके घर के लिए ,उसके ढाबे के लिए काकी के लिए, मन में जो रिस्पेक्ट ,जो प्यार और जो चिंता थी ,वह प्रेम ही तो है

इन्हीं सब चीजों से तो प्रेम को आंका जाता है अब कुछ और समझने के लिए बाकी नहीं रहा था, राज के हाथ

में अब भी पानी का गिलास था ,और डॉली बड़ी-बड़ी आंखों से एकटक राज को से देखे जा रही थी

राज को कुछ अजीब लगा तो उसने डॉली को आवाज लगाई ,,महारानी अपुन को तू

घूरने क्यों लगती है ,अपन तेरे लिए पानी लेने को गया था ,और तू इधर मंदिर के पास आकर अपने कान्हा जी से क्या खुसर पुसर कर रही थी, अपन को पक्का यकीन है अपनी कंप्लेन कर रही होगी

तो देख एक बात मैं तेरे कान्हा जी को पहले ही बता देता हूं ,अगर तूने दवाइयां खाने में या अपना ध्यान रखने में जरा भी लापरवाही की और डाँट के साथ साथ तुझे एक चपत भी लगाना पड़ा ना ,तो लगा दूंगा

और इसलिए अपन तेरे कान्हा जी को पहले ही बता देता हूं ,कि वह तेरे को समझा दे डॉली मुस्कुराई और राज के हाथ से पानी पीने लगी ,,,वह पानी का पूरा ग्लास खत्म कर चुकी थी ,पानी खत्म हुआ तो राज ने उसे वापस बेड पर बैठा दिया

और सख्त हिदायत देकर कि जब तक पूरी तरह से ठीक नही हो जाती, तब तक ना तो डॉली घर के कोई काम करेगी और आंगनबाड़ी तो बिल्कुल भी नहीं जाएगी इतना कहते हुए ढाबे के लिए निकल गया जाते-जाते काकी से भी डॉली का ध्यान रखने के लिए कह गया था,,,,,

डॉली मेंटली तो पूरी तरह से फिट हो चुकी थी ,बस बुखार की वजह से थोड़ी सी कमजोरी महसूस हो रही थी,,,,,

राज के जाने के बाद पिछले 5 सालों की सारी बातें एक-एक करके डॉली के दिमाग में घूमने लगी थी, जिस दिन से इस घर में आई उस दिन से आज तक उसे कभी भी राज की किसी भी बात से दुख नहीं पहुंचा था

हां यह जरूर था ,कि पहले बह राज से डरती थी, उससे ज्यादा बात नहीं करती थी और उसके पास भी नहीं जाती थी

लेकिन तब भी अपने लिए उसने राज की आंखों में फिकर ही देखी थी

चाहे वह भले ही उससे दूरी बनाकर रखती थी, क्योंकि तब वह बच्ची थी

और उसे लगता था ,राज बहुत ही सख्त है पर तब भी अगर राज उसके आस पास होता तो वह निश्चिंत हो जाती थी

हमेशा ही आंख बंद करके भरोसा किया है उसने राज और काकी पर ,और सच में यही तो प्यार है ,डॉली अब तक क्यों नहीं समझ पाई थी ,कि राज के अलावा उसकी जिंदगी में कोई और हो ही नहीं सकता

डॉली दिल ही दिल में पूनम को थैंक यू बोल रही थी ,क्योंकि अगर पूनम ये सब नहीं बताती ,तो वह अपने रिश्ते को नाम ही नहीं दे पाती, उसे समझ ही नहीं आता

कि उसके और राज के बीच जो रिश्ता है वह सिर्फ और सिर्फ प्रेम का रिश्ता है जिसकी अनजान डोर से दोनों कब के बंध चुके हैं ,लेकिन अभी तक जिस तरह

डॉली को इस बात की भनक नहीं थी

और समझ नहीं थी, इसी तरह राज को भी समझ नहीं है ,कि वो डॉली से प्यार करता है पर डॉली ने सोच लिया था ,कि वह राज के दिल में अपने लिए प्रेम जगा कर ही रहेगी सब सोचते हुए डॉली को मीठी मीठी नींद आने लगी थी ,वह सो गई जब दोपहर में काफी ने उसे खाने के लिए उठाया ,तो उसे काफी अच्छा लग रहा था

शरीर की सारी थकावट दूर हो चुकी थी

और मन भी बहुत हल्का था ,डॉली ने खाना खाया और दवाई खाकर काकी ने उसे फिर आराम करने के लिए कहा ,डॉली ने कहा कि मैं बिल्कुल ठीक हूं ,अब मुझे आराम की जरूरत नहीं है ,काकी ने काम करते हुए कहा डॉली तू जाने और राज अगर राज आ गया और उसने तुझे घर में घूमता हुआ देख लिया ,तो डांट सुनने के लिए तैयार रहना पर मेरे पास मत आ जाना ,कि वह तुझे डांटता है ,इसलिए तेरी भलाई इसी में है कि जाकर चुपचाप अपने कमरे में आराम कर ले डॉली मुंह बनाते हुए वापस कमरे में चली गई क्योंकि वह जानती थी

सच में पहले उसे डाँटेगा , उसके बाद उसकी दूसरी बात शुरू होगी ,इन 5 सालों में राज ने डॉली के साथ हर तरह का व्यवहार किया था ,जैसे कि हमारे घर वाले हमारे साथ करते हैं ,पर एक चीज का एहसास डॉली को हुआ ही नही था,वह था,राज का प्यार से बोलना राज या तो डॉली का मजाक उड़ाता था

या उसे डांटता था ,या फिर उसकी चिंता करता

था ,लेकिन प्यार के दो शब्द उसने डॉली से कभी नहीं बोले, शायद उसे प्यार से बोलना आता ही नहीं था, उसकी डांट में ही उसका अपनापन और प्रेम छुपा था

लेकिन अब डॉली राज के मुंह से अपने लिए प्रेम के वो ढाई अक्षर सुनना चाहती थी जिसकी अनुभूति उसे आज हो गई थी

पर यह बात तो डॉली की समझ से बाहर थी कि ,आखिर वह बात की शुरुआत करे कहां से ,अब सांझ होने को आई थी

और डॉली को काकी ने शुरू से ही समझाया कि दीया बत्ती के टाइम उठ कर बैठ जाना चाहिए, बिस्तर में पड़ा रहना शुभ नहीं माना जाता ,डॉली उठी अच्छे से हाथ मुंह धो कर कपड़े बदले ,और बाल काढ़ते हुए खुद को शीशे में देखा ,तो चेहरा कुछ उतरा हुआ लग रहा था, जब उसे राज का ख्याल आया तो उसने बाल बनाते हुए चेहरे पर क्रीम लगाई फिर भी चेहरा कुछ उदास और रंगहीन लग रहा था ,तो पास ही रखे काजल पर उसकी नज़र गई आंखों में अच्छे से काजल लगा लिया लेकिन डॉली को अब भी कुछ कमी लग रही थी, इधर उधर देखते हुए कि कहीं राज तो नहीं आ रहे है

उसने अपने होठों पर हल्की सी लिपस्टिक भी लगा ली, वैसे तो डॉली कभी कुछ भी नहीं लगाती थी , बस कभी शादी में जाना हो तो काकी के कहने पर थोड़ा बहुत मेकअप कर लेती थी, इतने में ही डॉली बहुत सुंदर लगने लगी थी,,,

कहते हैं न मन की खुशी चेहरे पर आती है और आज

डॉली मन से बहुत खुश थी

राज के प्रेम से उसका रूप खिल गया था

डॉली खुद को बार बार आईने में देख रही थीअब उसे राज के आने का इंतजार था कि राज घर आए तो वह अपने हाथों से चाय बनाकर राज को दे, लेकिन साथ ही उसे डर भी लग रहा था, कि इस तरह से देखने पर पता नहीं राज क्या कहेगे

जैसे ही डॉली को राज के आने की आहट हुई ,जल्दी से पिंक कलर का दुपट्टा ओड़ते

हुये रसोई में पहुंच गई ,शायद काकी दरवाजे पर थी ,काकी की आदत थी की शाम को खाने पीने से निपट कर कुछ देर के लिए बाहर जा कर बैठ जाती थी

वैसे ही खाना तो राज के आने के बाद ही होता था , डॉली ने जल्दी से चाय चढ़ाई

एक ट्रे में चाय और पानी रखकर बाहर ले आई

राज की नजर डॉली पर गई ,तो टॉवेल से हाथ पोछते हुए बोला

महारानी तू कहीं बाहर से आ रही है क्या मैंने तुझे मना किया था ना,कि तू घर में ही आराम करेगी, डॉली ने मुँह बनाते हुए कहा मैं कहीं भी नहीं गई थी,,, आप डॉटने से पहले एक बार मुझसे पूछ तो लिया करो !

तू कहीं नहीं गई थी ,फिर ये सब क्यों लगा कर रखा है ,घर में इतनी तैयार होकर क्यों घूम रही है
 
डॉली ने फिर गुस्सा होते हुए कहा अगर मैं तैयार हो जाऊ तो आप सवाल करने लगते हैं ,और अगर मैं ऐसे ही घूमती रहूं ,तो काकी मुझे डांटती रहती हैं

मैं करूं तो करूं क्या

एक बार मुझे देख कर बताइए क्या मैं अच्छी नहीं लग रही //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg

आप तो हमेशा मुझे डांटते रहते हैं ,चाहे मैं कुछ भी करूं, क्या कभी प्यार से नहीं बोल सकते, एक बार देखकर मेरी तारीफ नहीं कर सकते ,कि मैं सुंदर लग रही हूं

और मुंह बनाकर राज की तरफ देखे जा रही थी, राज समझ गया कि डॉली गुस्सा हो गई है ,सिवा ने टॉवेल एक तरफ रखी और डॉली के हाथ से ट्रे लेते हुए कहा

सॉरी तुझे अपुन की बात का बुरा लग गया अरे मेरे कहने का मतलब वह नहीं थ

तू यह सब कभी करती नहीं है ना

तो ऐसे ही अच्छी लगती है, तुझे अच्छा लगने के लिए यह सब करने की जरूरत नहीं है ,तू जैसी है वैसे ही बहुत अच्छी है

और आज यह क्या तू बहकी बहकी बातें कर रही है ,कि तू सुंदर नहीं है ,अपन तेरी तारीफ नहीं करता ,यह क्या सब फालतू की बकवास किए जा रही है, देख तू एक बहुत अच्छी लड़की है, और बहुत अच्छी तरह से रहती है ,तू जो भी करती है सब कुछ सही करती है, तेरा कोई भी काम गलत नहीं होता डॉली ने बीच में ही बात काटते हुए कहा राज मैं आपसे जो कुछ कहना चाहती हूं मतलब वह आप समझ नहीं रहे हैं

राज चाय पीते पीते मोबाइल भी देखता जा रहा था, उसने कहा देख ये गोल-गोल बातें करेगी तो अपन कुछ भी नहीं समझेगा

तू अपन को डायरेक्ट बता कि तू समझाना क्या चाहती है, डॉली अपनी चुन्नी को उंगली में लपेटते हुए राज के आसपास चक्कर लगा रही थी, वह चाहती थी कि राज उसे देखे ,उसकी तारीफ करे,और उसकी आंखों में आंखें डाल कर उससे बात करे

लेकिन राज चाय पीने में ,और मोबाइल में व्यस्त था

डॉली लगातार बोलती जा रही थी ,डॉली ने कहा राज में कुछ आपको समझाना चाह रही हूं ,,,

हां तो बोल ना ! क्या तेरे बोलने का मुहूर्त निकलवाना

पड़ेगा

पहले बताइए आप मुझे डांटेंगे तो नहीं

अरे नहीं ,तू बोल ना और तू कब से अपन को इतना डरने लगी है ,तुझे जो बोलना होता है वह तो तू बोलती ही रहती है

मैं जो आपसे कहने वाली हूं ,आप मेरी वह बात मानेंगे

देख में पहले ही बता देता हूं अगर मानने वाली बात होगी तो ही अपन मानेगा

और मानूंगा तो तब जब तुम मुझे बताएगी

कल मुझे आपके साथ शहर चलना है

शहर पर काय के वास्ते

मुझे कुछ काम है

जो काम तुझे होगा उसका नाम भी तो होगा अभी तो शहर गए थे ,अभी शहर में कौन सा काम है ,,,,

मुझे आपके साथ मूवी देखना है

क्या राज चाय पीते पीछे अचानक रुक गया था ,उसने कप को टेबल पर रखा और डॉली के सामने खड़ा हो गया

महारानी एक बार फिर से बोलना तू क्या बोली,, डॉली ने आंखें झुकाते हुए कहा मुझे आपके साथ मूवी देखने शहर चलना है

मुझे सिनेमा हॉल में मूवी देखना है

महारानी तुझे कबसे सिनेमा देखने का शौक हो गया

पहले तो अपुन सिनेमा देखने बहुत ज्यादा

जाता था, हर संडे को जाता था

जब से तू आई है ,तब से नही गया

आज से पहले तो तू हमेशा मना करती थी और अब तुझे भी सिनेमा का शौक चढ़ गया ठीक है अगर तू कह रही है

तो एक बहुत ही मस्त मूवी लगी है

डॉन नंबर वन

मस्त साउथ मूवी है ,मारधाड़ से भरपूर

क्या एक्शन है हीरो का , इसका जो हीरो है ना साला ,एक लात से ट्रक को भी पीछे धकेल देता है, ठीक है मैं तुझे कल यही वाली मूवी दिखा कर लाता हूं ,और हां काकी से कह देना ,उसको भी ले चलेंगे

उसने भी सालों सिनेमा नही देखा है

खैर यह मैं तुझे क्यों बता रहा हूं ,तो वैसे भी काकी के बगैर हिलती कहां है

तो तैयार हो जाना कल ,मस्त तीन टिकट आज ही बुक करवा देता हूं

नहीं !!!! राज जो आप कह रहे हैं, मुझे वह वाली मूवी नहीं देखनी ,मुझे तो बाहुबली मूवी देखनी है

कुछ ही दिन पहले बाहुबली पार्ट 2 आया है और मेरी सहेली बता रही थी यह बहुत अच्छी मूवी है ,इस के गाने, इसका हीरो इसकी हीरोइन बहुत अच्छे हैं

और मैं चाहती हूं कि मैं आपके साथ यही मूवी देखने जाऊं और हां यह मूवी काकी को तो बिल्कुल भी पसंद नहीं आएगी

और फिर कल तो एकादशी है ,उनका व्रत रहता है ,तो वैसे भी वह शहर में कहां भूखी प्यासी परेशान होंगी, इसलिए मैं आपके साथ ही मूवी देखने चलूंगी

सिर्फ आप और मैं ,और कोई नहीं

महारानी तू पता नहीं अपन को कौन सी मूवी के लफड़े में डाल रही है, तब डॉली ने आश्चर्य से राज की तरफ देखते हुए कहा राज मूवी बहुत अच्छी है ,और जो आपको पसंद है ना एक्शन ,और मारधाड़ ,इसमें वह भी है ,और जो मुझसे पसंद है गाने ,और लव स्टोरी ,तो वह भी है ,दोनों का बहुत अच्छा कॉम्बिनेशन है

प्लीज मैं आपके साथ ही मूवी देखने चलूंगी और इसके सिर्फ दो टिकट ,आप आज ही मंगवा लीजिए ,मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए और हां अगर आप मुझे मूवी दिखाने नहीं ले गए ,तो मैं वापस कल से ही आंगनबाड़ी जाना शुरु कर दूंगी, और अपनी दवाइयां भी नहीं खाऊंगी ,शहज़ादी तू पागल हो गई है क्या ,यह क्या बच्चों जैसी जिद कर रही है चल ठीक है, तू जो कह रही है वह सब हो जाएगा, मैं आज ही तेरी जो तूने मुझे बताइ है ना उसको बुक करवा देता हूं

इतना कहते साथ ही राज फोन निकालकर किसी को टिकट बुक करवाने के लिए फोन लगाने लगा, राज ने फोन को होल्ड किया और डॉली से पूछा शहज़ादी दोपहर में 1200 से 300 का शो बुक कर दूं

डॉली ने कहा नहीं मुझे रात को 600 से 900 का शो

देखना है, दोपहर में भी भला कोई मूवी देखने जाता है क्या

और इतनी गर्मी में मैं नहीं जाऊंगी

फोन होल्ड पर था तो ,राज ने डॉली से कुछ ना कहते हुए चुपचाप रात को 600 से 900 के दो टिकट बुक कर दिए

और मोबाइल जेब में रखते हुए बोला अब तो तू खुश है ना ,और सुन दवाइयां और आराम तो बराबर करेगी, इसी शर्त पर मैं तुझे मूवी दिखाने ले जा रहा हूं डॉली ने खुश होते हुए राज की आंखों में देख कर कहा थैंक यू

और अपने कमरे में चली गई......

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राज मूवी जाने के लिए तैयार हो गया था

और उसने फटाफट टिकट भी बुक कर दिए तब कहीं डॉली के कलेजे में ठंडक पड़ी राज ढावे जा चुका था ,और काकी अभी भी बाहर बैठी थी, डॉली अपने कमरे में गई और झट से अपनी अलमारी खोलकर देखने लगी कि कल वह कौन सा सूट पहनकर राज के साथ मूवी देखने जाएगी, वह सारे कपड़ों को उलट पलट करती हुई कोई अच्छा सा सूट देख रही थी

आज तक तो डॉली को कभी भी ज्यादा शौक था ही नहीं ,कहीं जाती तो कभी कभार साड़ी ,या कोई अच्छा सा सूट पहन लेती

वह भी काकी के कहने पर, वैसे डॉली को किसी चीज की कमी नहीं रहती थी

पर उसका मन ही नहीं करता था कि वह नए-नए सुंदर-सुंदर कपड़े खरीदे, और पहने सिंपल लैगी और कुर्ता पहन कर ही आंगनवाड़ी चली जाती थी

लेकिन कुछ दिन पहले ही डॉली की सहेली की शादी थी ,तो उसके लिए डॉली ने एक बहुत सुंदर पटियाला सूट सिलवाया था

जिसकी शॉर्ट टाइट फिटिंग की वाइट कुर्ती ,और पिंक पटियाला सलवार के साथ पिंक दुपट्टा

यह सूट डॉली के ऊपर बहुत अच्छा लगता था ,और जब वह इसे शादी में पहन कर गई थी ,तो सबने उसकी बहुत तारीफ की थी डॉली ने सूट के साथ लंबे खुले हुए बाल किए और मैचिंग के झुमके भी कानों में डाले थे उस दिन राज ने भी एक झलक देखकर डॉली की तारीफ की थी

शहज़ादी तेरा सलवार कुर्ता अच्छा लग रहा तूने कहां से सिलवाया इसे

डॉली को यह बात याद आते ही उसने झट से उसी सूट को कल पहनने के लिए बाहर निकाल लिया , क्योंकि यह पहली बार था जब राज ने किसी ड्रेस की तारीफ की थी सूट निकालकर उस पर अच्छे से प्रेस किया और हैंगर में लटका दिया ,उसकी मैचिंग के झुमके, और चुन्नी भी निकाल कर बाहर रख दी थी, जिससे कि जाते समय किसी चीज को ढूंढने में दिक्कत ना हो

डॉली कल के बारे में सोच कर अभी से बहुत खुश हो रही थी ,लेकिन उसने अभी तक यह नहीं सोचा था ,कि मूवी देखने तो जा रही है पर वहां जाकर भी राज से कुछ कहेगी कैसे डॉली को एक आईडिया आया

उसने झट से अपना मोबाइल उठाया और उसमें बाहुबली 2 डाउनलोड करके उसे देखने लगी, क्योंकि वह सारी मूवी देख कर समझ लेना चाहती थी ,कि मूवी के बीच में राज से किस गाने पर और किस सीन के बारे में कौन सी बात कर सकती है

और उस बात का जवाब राज के पास है कि नहीं ,इसलिए डॉली एक बार पहले ही इस मूवी को अच्छी तरह से देखना चाहती थी

थोड़ी ही देर बाद राज और काकी अंदर आ चुके थे, जब सभी खाना खाने लगे तो राज ने कल सिनेमा जाने का जिक्र काकी के सामने किया ,,,

काकी तुझे पता है

अपनी महारानी का सिनेमा देखने का मूड बन रहा है, और उसी के कहने पर मैंने तो टिकट भी बुक करा दीये है

और अपुन इसको ले जा रहा है सिनेमा दिखाने ,लेकिन अपन ने इसके सामने एक शर्त भी रखी है ,कि सिनेमा देखने के बाद यह अपना ध्यान रखे ,और घर पर रहकर आराम करे, काकी !!! इस बात की गवाह तू ही है

वर्ना ये सिनेमा भी देख लेगी ,और अपनी बात से मुकर भी जाएगी

काकी मेने तो तुझे भी साथ ले जाने की बात कही थी ,पर इस डॉली ने यह कहते हुए मना कर दिया, कि तेरा कल उपवास है तो तू कहां परेशान होती फिरेगी ,,,,

काकी ने कहा! हां बेटा अच्छा ही किया मेरा कल उपवास भी है ,और मुझे ना देखना कोई फिल्म ,वहाँ 3 घंटे अंधेरे में बैठकर मेरा तो दम घुटने लगता है,और वहां इतनी ठंडक होती है , कि मुझे ठंड भी लगने लगती है राज ने हंसते हुए कहा , काकी वहां ऐ सी लगा रहता है ,इसलिए ठंडक होती है

हां जो भी हो, तुम दोनों ही देख आओ

डॉली का भी मन बहल जाएगा, काम में फंसी रहती ,वैसे भी वह कहीं बाहर कब जाती है

डॉली कभी राज को देखती और कभी काकी को,वह चुपचाप खाना खाती जा रही थी,,

वह सोच रही थी, सच में राज के मन में तो मेरे लिए कुछ भी पर्सनल नहीं है

अगर में उनसे कुछ कहूंगी भी ,तो वह बात तुरंत काकी तक पहुंच जाएगी

राज किसी बात को समझते ही नहीं

वह अपने कान्हा जी को याद करके कहने लगी,,, कान्हा जी!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg

राज को आप ही समझा सकते हैं

वरना कहीं ऐसा ना हो ,कि मैं उनसे कुछ कहूं और इस बात को काकी के साथ-साथ ढाबे पर भी सबके साथ शेयर करने लगे

डॉली के होठों पर हंसी आ गई थी

पर जो भी हो ,कैसे ना कैसे बात की शुरुआत तो उसे करनी ही होगी ,और इस तरीके से करनी होगी कि बिना कहे ही राज बहुत कुछ समझ जाए,,,,,

बह जब डॉली सो कर उठी तो आज का यह दिन उसके लिए बहुत इंपोर्टेंट था

आज 3 दिन बाद उसकी कमजोरी और बुखार सब कुछ ठीक हो गया था

और फिर अगर कमजोरी होती भी तो राज के साथ

रहते हुए भला उसे किस बात की चिंता थी ,वह उठी काकी के साथ थोड़ा बहुत काम करवाया, नहा धोकर कान्हा जी को प्रसाद खिलाया ,उनसे अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए आशीर्वाद मांगा,और छोटे-मोटे काम करते हुए शाम का इंतजार करने लगी,,,

शाम को 600 से 900 का शो था

कम से कम 400 बजे उन्हें यहां से निकलना था 400 बजे तक डॉली अच्छी तरह से सज कर तैयार हो गई थी

वाइट कुर्ती के साथ पिंक पटियाला सलवार पिंक दुपट्टा ,होठों पर हल्की सी लिपस्टिक कानों में झुमके, हाथों में उसी की मैचिंग की नेल पॉलिश ,और पैरों में जूतियां

अपने बालों को डॉली ने खुला ही छोड़ा था

जब तैयार होकर कमरे से बाहर निकली

तो काकी डॉली को देखती ही रह गई

बिना कुछ कहे कमरे में गई, और उंगली में थोड़ा सा काजल ले कर आई

डॉली के बालों को हटाते हुए काजल उसके कान के पीछे, और बालों के ऊपर छुपाते हुए लगा दिया ,और खुश होकर कहने लगी

देख कितनी सुंदर लग रही है मेरी बच्ची

अरे हमेशा ऐसी ही तैयार होकर जाया कर कहीं भी जाए,,, कितनी प्यारी लग रही है तुझसे कितना भी कहो कभी अच्छे से तैयार होती ही नहीं ,आजकल की लड़कियां तो देखो बिना लाली लगाए घर से बाहर ही नहीं निकलती, आज पहली बार है जब तू बिना कहे ही

मेरी पसंद का तैयार हुई है

अरे मैं भी ऐसे ही चाहूं ,कि जैसे सब की लड़कियां सज सवरकर रहती हैं

तू भी ऐसी ही रहे, तुझे नजर ना लगे बड़ी प्यारी लग रही है,,,,,

राज भी अपना बेल्ट लगाते हुए काकी की बातें ध्यान से सुन रहा था

कभी काकी को देखता, और कभी डॉली को

जीन्स,वाइट फुल शर्ट, और हमेशा की तरह अपनी फेवरेट जैकेट ,राज के कपड़े हमेशा ही ब्रांडेड और अच्छे होते थे

उसे बचपन से सिर्फ दो ही चीजों का तो शौक था, एक कपड़ों का और दूसरा गाड़ियों का ,चाहे वह उसकी अपनी रॉयल इनफील्ड बुलेट हो ,या फिर उसकी पसंदीदा जीप

जब दोनों घर से बाहर निकलने लगे

तो काकी ने एक टिफिन और पानी की बोतल पकड़ाते हुए कहा!

डॉली तू अभी बुखार से ठीक हुई है

बाहर का कुछ भी मत खाना ,,,,

राज ने टिफन को वापस टेबल पर रखते हुए कहा ,काकी वहां पर सारा खाना पैक मिलता है ,और बहुत साफ सफाई वाला होता है ,तू यह सब रहने दे

पर डॉली ने टिफिन को वापस उठाया और पानी की बॉटल लेते हुए काकी से कहा कि मैं आपके हाथ का खाना ही खा लूंगी

अब तो खुश ,,,,और राज के साथ वाहर आ गई,,,मार्च का महीना था ,शाम को 400 बजे के बाद अभी भी हल्की ठंडक रहती थी राज ने जीप स्टार्ट की और शहर की तरफ लेते हुए आगे बढ़ाई

डॉली बार बार राज का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी

कभी कुछ कहती तो कभी कुछ, पर राज अपनी ही धुन में मस्त ,गोविंदा का कोई गाना गुनगुनाते हुए गाड़ी आगे बढ़ाता जा रहा था डॉली ने मुँह बनाते हुए राज से कहा

राज आप मेरे साथ शहर जा रहे हैं

आपको याद भी है कि आप के बगल में कोई और भी बैठा है ,आप खुद में ही मस्त हो जाते हैं , किसी और पर आपका ध्यान ही नहीं जाता ,काकी ने मेरी इतनी तारीफ की और आपने मुझे ठीक से देखा भी नहीं

मैं क्या देखूं मैंने कहा तो है तू हमेशा ही अच्छी लगती है ,,,और हां यह वही वाला ड्रेस है, ना जो तूने अपनी सहेली की शादी में पहना था ,,,यह रापचिक लगता है तेरे ऊपर अपन और क्या कहे

तू बता ना ,मैं सेम टू सेम बोलेगा,,,,

राज को समझाना सच मे बहुत मुश्किल था

ठंडी हवा के झोंके डॉली के बाल कभी उसके चेहरे को छूते ,तो कभी उसके कंधों को

सुहाना मौसम औऱ राज के परफ्यूम की महक मौसम

को और भी खुशनुमा बना रही थी, रास्ते के इस सुहाने सफर के बाद दोनों शहर पहुंच गए थे ,और कुछ ही देर में शहर की भीड़भाड़ भरी सड़कों को चीरते हुए वहां के मल्टीप्लेक्स के सामने थे

बाहुबली मूवी में अब भी काफी भीड़ थी

सारे शो हाउसफुल चल रहे थे ,और जहां तक डॉली को याद था ,वह राज के साथ पहली बार ही सिनेमा हॉल में आई थी

भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चलने में भी परेशानी हो रही थी ,लिफ्ट के बाहर भी काफी लोग लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे पहले ही मंजिल पर थिएटर था ,तो राज ने पैदल जाना ही ठीक समझा ,और कस के डॉली का हाथ थामते हुए डॉली को सबसे बचते बचाते सीढ़ियों से ऊपर ले जाने लगा पीछे से दूसरे नंबर की लाइन में डॉली और राज की 2 सीटें बुक थी

लास्ट सीट पर डॉली को बिठाते हुए खुद उसके बगल वाली सीट पर बैठ गया एडवर्टाइजमेंट चल रहे थे ,बस पांच 7 मिनट बाद ही मूवी शुरू होने वाली थी

पिक्चर शुरू हो चुकी थी ,हालांकि डॉली ने कल ही पूरी मूवी मोबाइल में देख ली और अब मूवी से ज्यादा ध्यान उसका राज पर था

मूवी निकले हुई 1 घंटे से ज्यादा बीत चुका था ,काफी रोमांटिक सीन चल रहे थे

फिल्म का हीरो जब हीरोइन को साथ ले जाने लगता है , तो उसे जहाज पर बैठना होता है ,लेकिन जहाज जमीन से काफी दूर था, और हीरोइन उस पर आराम से

नहीं चढ़ पा रही थी, तुरंत हीरो पानी में उतर कर अपना एक हाथ हीरोइन के पैर के नीचे और दूसरा हाथ जहाज के ऊपर रख देता है

और फिर वह बड़े आराम से उसके कंधों पर पैर रखते हुए जहाज पर चढ़ जाती है
 
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