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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

मूवी के रोमांटिक सीनों में से यह एक था डॉली ने धीरे से राज के कान के पास आते हुए कहा, राज अगर हमें कहीं जाना हो और फिल्म के हीरो की जगह आप हों तो क्या आप भी ऐसा ही करेंगे, मुझे अपने कंधो से जहाज तक पहुंचाएंगे क्या

राज मूवी से ध्यान हटाकर डॉली को देखने लगा ,,,

महारानी तू यह क्या उल्टे सीधे सवाल पूछने का है, आराम से मूवी देखना अच्छी लग रही है ,,

नहीं पहले आप मुझे बताइए कि आप भी मुझे इसी तरह से नाव में बिठाएंगे

हां हां बिठा दूंगा अब खुश

ठीक इसी के बाद हीरो और हीरोइन एक बहुत ही खूबसूरत से जहाज पर सवार होकर समुद्र की रोमांटिक यात्रा पर निकलते हैं चारों तरफ ऊंची ऊंची समंदर की लहरें

घने घने बादल उसके बीच मोरनुमा खूबसूरत जहाज, जिस पर लहराते हुए वाइट पर्दे लगे थे ,,,,और एक गाना शुरू होता है इस गाने में दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आते हैं ,और उनका प्यार भी दिखाया जाता है ,, इस सॉन्ग का डॉली को कब से इंतजार था ,,

पूरी मूवी में सबसे रोमांटिक सॉन्ग यही था मूवी में सांग चल रहा था

और डॉली लगातार राज से सवाल करती जा रही थी

गाने में ही डॉली ने फिर से सवाल किया राज!

हां बोल!!!!

डॉली ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ,,,,

राज!!! देखिए ना मेरी तरफ

मुझे आपसे कुछ कहना है

राज ने बिना देखे ही कहा महारानी ये क्या तू बीच-बीच में पटर पटर बोलती जा रही है एक तो खुद ही मूवी देखने लाई, कि बहुत मस्त मूवी है ,और जब मैं मन लगाकर इसको देख रहा हूं ,तो देखने नहीं देती

अभी चुपचाप मुझे मूवी देखने दे ,और तू भी देख ,,,घर चल कर आराम से बात करना

डॉली ने मचलते हुए कहा, राज मुझे आपसे अभी

बात करनी है ,और यही बात करनी है प्लीज मेरी तरफ देखिये, ना वरना मैं आपको डिस्टर्ब करती ही रहूंगी ,,,,

हॉल में अंधेरा तो था ही,, फिर भी राज ने डॉली को देखने की कोशिश करते हुए उसकी तरफ अपना सिर घुमाया

और कहां बोल क्या कहना है

मुझे आपसे कहना है ,क्या आप भी मुझे किसी ऐसी जगह ले कर जाएंगे जहां सिर्फ आप ,और मैं हूँ

पर किधर उस जगह का कुछ नाम तो होगा

बिल्कुल ऐसी जगह जैसी आप इस गाने में देख रहे हैं, इतना ही खूबसूरत सा जहाज हो और और ऐसे ही दूर दूर तक कोई ना हो सिर्फ आप और मैं ,इतने ही खूबसूरत मौसम में ,बिल्कुल वैसे ही जैसे कि यह दोनों

कौन दोनों

महारानी तू क्या बोले जा रही है

राज आप ये सॉन्ग देख रहे हैं

ना बस ऐसे ही आपके साथ में हूं ,और कोई नहीं ,और मैं भी आपके साथ ऐसे ही गाना गाना चाहती हूं ,जैसे यह दोनों गा रहे हैं

मैं भी आपके साथ ऐसे ही बैठना चाहती हूं जैसे ये दोनों बैठे हैं

मैं भी आपके इतना ही करीब आना चाहती हूं ,जैसे ये दोनों आ रहे हैं

तू ये क्या बोले जा रही है

यह बात अपुन के भेजे से बाहर है

देख मैंने कहा ना अभी तो चुपचाप मूवी देख और अगर तू इसी तरह से बोलती रही ना

तो कुछ देर में सारे सिनेमा वाले हमें हॉल से बाहर निकाल देंगे

डॉली मुंह बनाते हुए चुपचाप मूवी देखने लगी

पर वो इतनी आसानी से कहां मानने वाली थी, किसी न किसी तरह तो वह आज राज को बता ही देना चाहती थी

थोड़ी देर बाद उसने राज के बाजू को कसके पकड़ते हुए उसके कंधे पर अपना सिर टिका दिया

राज धीरे से बोला तू सोने के वास्ते इधर अपन को लेके आई है

ठीक है सो जा अपन को तो,मूवी भी मस्त लग रही है ,अपन तो फुल टाइम देखेगा

राज को डॉली की छुअन का कोई एहसास नहीं था ,,उसे डॉली के प्यार में उसकी नींद नजर आ रही थी

डॉली का दूसरा वार भी फेल हो गया था

राज को लग रहा था ,कि डॉली सो चुकी है और डॉली ने इस बात का फायदा उठाते हुए अपने हाथ में राज

का हाथ लेकर कस के पकड़ लिया,,,,

वो धीरे-धीरे आंखें खोलते हुए राज को देख रही थी ,उसके मजबूत कंधे और परफ्यूम की भीनी भीनी महक , आज डॉली को एक अलग ही एहसास हो रहा था

वह राज के गले लग कर कुछ देर के लिए सब कुछ भूलना चाहती थी,,,,

कि कैसे राज को भी अपने प्यार का एहसास हो जाये,डॉली के कानों में सिर्फ पिक्चर की रोमांटिक धुन ही गूंज रही थी लेकिन उसकी आंखों में राज था

उसकी छुअन का एहसास, उसके मजबूत बाजूओं का स्पर्श ,और उसकी महक से डॉली उसके प्यार में डूबती जा रही थी

आज पहली बार उसे अहसास हुआ था ,

,कि प्यार कैसे हमें किसी की ओर खींचता है उसकी हर चीज आकर्षित करने लगती है उसकी सारी बातें हमें अच्छि लगने लगती हैं और उसकी नज़दीकियां मदहोश करने लगती हैं ,आज प्यार के साथ-साथ डॉली को कुछ ऐसी बातों का भी एहसास हुआ था जिनका नाम वह नहीं जानती थी

लेकिन उसकी इच्छा थी, कि कुछ देर के लिए वो दोनों किसी ऐसी जगह पहुंच जाए जहां पर उनके अलावा कोई और ना हो

और राज उसे अपनी अपनी बाहों में छुपा ले , वह राज के गले लग कर उसकी,सांसो की गर्माहट को महसूस कर पाए,उसकी धड़कने सुन पाए ,,

अब वह राज से दूर रहना नहीं चाहती थी इज्जत ,प्यार ,देख रेख ,इन सबके साथ साथ कुछ और बातें भी थी ,जो डॉली की समझ में आ रही थी ,और जिनकी चाहत उसे होने लगी थी ,वह राज का साथ पा लेना चाहती थी , राज की शारीरिक नज़दीकियों को भी खुद में समा,लेना चाहती थी

राज डॉली को उठाने की कोशिश करता तो वह उसके और करीब आके उसके बाजू को और कस के पकड़ लेती

राज को डॉली की हरकत कुछ अजीब तो लग रही थी ,क्योंकि आज से पहले उसने ऐसा नही किया था

पर उसने ज्यादा गहराई से इसके बारे में कुछ नहीं सोचा था, कुछ देर बाद अचानक हॉल की लाइट जल गई ,इंटरवल हो गया था

और लोग उठ कर स्नेक्स कोल्ड ड्रिंक के लिए यहां से वहां आने जाने लगे थे

डॉली अभी भी राज के कंधे पर सर रखकर वैसे ही बैठी हुई थी ,जब आसपास के लोग उन्हें कुछ गौर से देखने लगे

तो राज ने हिलाते हुए डॉली को उठाया और कहा बोल क्या खाएगी

अपुन जल्दी लेकर आता है

वरना फिर मूवी शुरू हो जाएगी, और ये क्या तू जब से आई है ,सोते ही जा रही है

अगर तुझे सोना ही था, तो फिर आई ही क्यों है

डॉली ने कहा आपको जो लाना है ले आइए और

चुपचाप बैठ गई.

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जब इंटरवल में सिनेमा हॉल की लाइट जली और राज स्नेक्स लेने बाहर चला गया तो डॉली इधर-उधर देखने लगी, उसने देखा कि कुछ लोग ध्यान से डॉली की तरफ देख रहे थे शायद इसीलिए क्योंकि लाइट जलने के बाद भी डॉली का सिर राज के कंधे पर था

और उसने राज का हाथ पकड़ रखा था डॉली सामान्य होने की कोशिश करने लगी बस 5 मिनट बाद ही राज एक बड़ी सी ट्रे लेकर आ गया था

जिसमें दो बर्गर कुछ पॉपकॉर्न और दो कोल्ड ड्रिंक के ग्लास रखे हुए थे

राज ने सीट पर बैठते हुए कहा ,शहज़ादी अपुन तेरे वास्ते यहां की सबसे फेवरेट डिस लेकर आया है ,,,बर्गर!

खा कर देख इसका कितना मस्त स्वाद है अरे पूरी फिल्म में अपन तो यही सोच रहा था, कि कब इंटरवल हो और अपन तेरे वास्ते कुछ लेकर आए ,,,

राज ने वो ट्रे अपने घुटनों पर रखी और बर्गर की प्लेट डॉली को पकड़ा दी

ए तू टुकुर-टुकुर क्या इधर उधर देख रही है ले इसको जल्दी से खत्म कर ले ,वरना ठंडा हो जाएगा ,साला स्वाद का कचरा हो जाएगा और खुद भी बड़े-बड़े कौर तोड़ते हुए बर्गर खाने लगा ,,

बीच-बीच में कोल्ड ड्रिंक भी पीता जा रहा था ,,डॉली का खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था ,पर उसे खाना ही ठीक लगा क्योंकि वह जो चाह रही थी ,वो तो पूरा हुआ नहीं ,, बस उसने यही सोचा कि अच्छे से एक बार खा पी लूँ, तब इंटरवल के बाद दूसरा ट्राय तो करना ही है

शायद राज को कुछ समझा सकूँ

बर्गर था तो सच में बहुत ही टेस्टी डॉली ने पूरा बर्गर खाया ,,साथ साथ ड्रिंक भी पीती जा रही थी ,डॉली का बर्गर खत्म भी नहीं हो पाया ,कि राज ने उसकी तरफ पॉपकॉर्न का पैकेट बढ़ाते हुए कहा, महारानी पॉपकॉर्न खा मस्त बटर डलवा कर लाया हूं मसाले के साथ ,,,वाह क्या लगते हैं

खा कर देख ना ,,,

डॉली अभी भी राज की तरफ देखती जा रही थी ,,राज ने एक मुट्ठी भरी और एक साथ सारे पॉपकॉर्न डॉली के मुंह में डाल दिए डॉली का मुंह पॉपकॉर्न से भर चुका था

वह पॉपकॉर्न खाती हुई आसपास देख रही थी, क्योंकि आसपास देखने वाले लोग कुछ अजीब ही तरह से दोनों को देख रहे थे

इन दोनों की स्टोरी लोगों की समझ से बाहर थी ,जहां

एक तरफ लड़की प्रपोज करने के मूड में लग रही थी

वही लड़के को सिर्फ और सिर्फ खाने की पड़ी है ,दोनों के बीच का प्यार और केयर सबको समझ आ रही थी

पर उसके बाद भी डॉली का समझाना और राज का ना समझना ,सबकी समझ से परे था ,लोग सोच नही पा रहे थे, कि जब दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं

तो फिर लड़का जानकर अनजान क्यों बन रहा है ,और अगर लड़का प्यार ही नहीं करता ,तो वह लड़की का इतना ध्यान क्यों रख रहा है ,,,बिल्कुल बच्चों की तरह उसे खिलाने ,और उसे समझाने में लगा हुआ है खैर लोगों को इन सब से क्या

उन्हें तो जितना समझ में आता है

उतनी बात के मजे वह ले लेते हैं

बर्गर और ड्रिंक खत्म हो चुका था

लेकिन पॉपकॉर्न के पैकेट राज के हाथ में ही थे, दोबारा सिनेमा हॉल की लाइटें बंद हो चुकी थी ,और पिक्चर शुरू हो गई थी

राज जब भी डॉली से कुछ कहने की कोशिश करता, तो डॉली उल्टा जवाब ही देती ,,,,वह फिर चुपचाप बैठ जाते

राज को डॉली की बात समझ नहीं आ रही थी ,कि डॉली उससे ठीक से बात क्यों नहीं कर रही है,,,,

इस बार जब राज ने दोबारा डॉली को पॉपकॉर्न खिलाएं ,तो डॉली ने गुस्से से कहा यहां में पॉपकॉर्न खाने नहीं आई हूं

और प्लीज अब आप मुझे कुछ भी मत खिलाइए, मेरा

पेट फुल हो चुका है

राज ने मूवी छोड़कर डॉली की तरफ देखा और कहां ! महारानी मैं देख रहा हूं तू जब से सिनेमा हॉल के अंदर आई है, कुछ अजीब सी हरकतें कर रही है ,आखिर तुझे हुआ क्या है ,तू किस बात पर गुस्सा है

और किस बात का गुस्सा मुझ पर निकाल रही है ,अपन ने तो तेरे कहने के माफिक ही सब कुछ किया है, तेरे को मूवी दिखाने लाया तूने कहा था सिर्फ दो लोग चलेंगे

तो साला अपन के आगे पीछे कोई भी नहीं है दुकान का छोटू ,सोनू ,अपन सब को साथ लेकर आता है, लेकिन तेरे कहने पर अपन ने साला सब को मना कर दिया ,और एक तू है कि अभी भी मुंह फुला कर बैठी है

तू सीधे मुंह बात क्यों नहीं कर रही डॉली ने राज के मुंह पर उंगली रखते हुए कहा

राज ये हमारा घर नहीं है ,जो आप इतनी जोर जोर से कुछ भी बोले जा रहे हैं

ये सिनेमा हॉल है ,यहां हमारे आगे पीछे भी लोग हैं, प्लीज अब कुछ मत कहिए

चुपचाप बैठ जाइए ,ठीक है तू अपन को बोलने भी मत दे ,अब तुझे जो ठीक लगे वह कर,,, अब अपन तेरे से कुछ भी नहीं बोलेगा और हां एक बात और ,,,तूने सच ही कहा था कि मूवी में एक्शन मस्त है ,अब एक्शन ही आने वाला है ,

अब सच में पिक्चर में काफी एक्शन सीन आ रहे थे, जिसमें लड़ाई और सिर्फ लड़ाई ही थी ,और राज इन

सब का भरपूर मजा ले रहा था ,वहीं डॉली सारी कोशिश करके सिर पकड़ कर बैठ चुकी थी ,उसने कितना समझाने की कोशिश की थी ,कि वह भी राज के साथ किसी अकेली सुनसान जगह में जाना चाहती है ,उसके कंधे पर सर भी रखा ,उसका हाथ भी पकड़ा, पर पता नहीं राज को कैसे समझ आएगा

सारे मार धाड़ के सीन पर राज खुश होकर तालियां ,और सीटी बजा रहा था

तब डॉली मुंह बना कर चुपचाप बैठी थी थोड़ी देर बाद उसको भी राज की हरकतों पर हंसी आ गई थी, जब उसने देखा की राज उसकी तरफ देख रहा है तो

मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया

फिर भी राज डॉली को देख चुका था

उसने कहा,तू भी खुश हो गई ना

मस्त मूवी है ,,,,आखिरकार मूवी खत्म हुई और बुझे मन से डॉली राज के साथ सिनेमा हॉल से बाहर आ गई,, उसकी सारी कोशिशों पर पानी फिर चुका था

राज डॉली का हाथ पकड़ते हुए जल्दी-जल्दी सिनेमा हॉल से बाहर आ रहा था, क्योंकि वैसे भी रात के 900 बज चुके थे ,और एक से डेढ़ घंटा घर पहुंचने में भी लग जाता ,यही सोचकर लगभग भागता हुआ डॉली के साथ गाड़ी तक आया ,और डॉली से जल्दी से गाड़ी में बैठने के लिए कहा वैसे तो राज अकेला होता है ,तो कितनी भी रात तक शहर आता जाता रहता है

पर अभी वो डॉली के साथ था

और फिर काकी ने भी कहा था ,कि समय से घर आ

जाना, इसलिए दोनों गाड़ी में बैठ गए थे ,जब गाड़ी शहर से बाहर रोड पर आ गई ,तो राज ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा ,,,सहजादी अपन तेरी पसंद की मूवी देखने तेरे को लाया ,फिर भी तेरे चेहरे पर खुशी नहीं दिखी , बात क्या है

आखिर तू इतनी परेशान क्यों है

क्या मूवी तेरे को अच्छी नहीं लगी, अपन को तो मस्त लगी, डॉली ने बढ़बढ़ाते हुए कहा मूवी तो बहुत अच्छी थी

पर इस मूवी में जो मैं आपको समझाना चाहती थी ,वह नहीं समझा पाई

राज ने स्टेयरिंग से ध्यान हटाते हुए डॉली की तरफ देखा, और कहा क्याअपुन को तू क्या समझाना चाहती थी

और क्या नहीं समझा ,,,

कुछ नहीं ,अभी आप गाड़ी पर ध्यान दीजिए मैं ,मैं ,तो बस ऐसे ही कह रही थी

तेरा कुछ पता रहता भी है ,तू कभी भी कुछ भी ऐसे ही बोलती रहती है ,कुछ देर बाद दोनों घर पहुंच गए ,काकी दोनों का इंतजार कर रही थी ,राज ने काफी को फोन करके खाने के लिए पहले ही मना कर दिया था क्योंकि इंटरवल में दोनों का ही पेट भर चुका था ,काकी को थोड़ी बहुत तो समझ फिल्मों की थी ,क्योंकि टीवी पर वह अक्सर पुरानी फिल्में देखती रहती थी ,इसलिए आते साथ ही उसने डॉली से पूछा ,बेटा कैसी थी फिल्म डॉली ने एक ठंडी सांस ली,

और काकी की तरफ देखते हुए कहा ,काकी फिल्म तो अच्छी थी ,हीरो हीरोइन भी अच्छे थे

लेकिन इस पिक्चर का जो हीरो है ना

वह पता नहीं कैसा है ,कुछ समझता ही नहीं की हीरोइनों उसे क्या समझाना चाह रही है जब हीरोइन उससे कुछ बोलती है , तो बस खाने की ही बातें करता रहता है

काकी ने कहा ,क्या सिनेमा में यह सब था राज आया और डॉली की तरफ देखते हुए बोला, यह सब तू क्या बोले जा रही है

मूवी में ऐसा तो कुछ भी नहीं था ,और इसका हीरो वह तो एकदम मस्त था

एक नंबर ,अरे उसने तो हीरोइन के वास्ते अपनी मां से भी पंगा ले लिया था

और तू कह रही है ,कि हीरो कुछ समझता ही नहीं ,,तब तक काकी अंदर जा चुकी थी डॉली राज के पास आई और उसकी तरफ देख कर कहने लगी ,,,राज आपको मूवी अच्छी तरह से समझ में आई ना

हां अपन को तो बराबर ,,,

आपने यह भी समझा ना की हीरोइन क्या कहना चाहती थी ,और हीरो उसकी बात को कितनी अच्छी तरह से समझ जाता है

हां बराबर ,,,,

तो फिर मैं जो आपसे कहना चाहती हूं

आप उसे क्यों नहीं समझते,,,,

महारानी तू यह हर बात में अपुन को कायको बीच में ले आती है ,अरे वह फिल्म है हीरो है ,हीरोइन है,,,

तू ,,,तू ,,,है

और मैं ,,मैं ,,,हूं ,हम हीरो हीरोइन नहीं है

मैं पिछले 4,5 दिनों से देख रहा हूं

तू अपन से गोलमोल बातें करने लगी है

अरे जो भी है सीधा सीधा बोलने का!!!

डॉली ने राज के हाथ से टॉवल छीन कर वापस राज के ऊपर दे मारी

और पैर पटकती हुई अपने कमरे में चली गई राज भी उसके पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया ,उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा ,देख अब तू अपन का भेजा खराब मत कर ,सीधा सीधा बोल तेरे को चाहिए क्या

ऐसी कौन सी बात है, जिस पर तू जल के अंगारा हुई जा रही है ,अपन तेरे को शहर भी लेकर गया ,तेरे कहने पर मूवी दिखाई

अगर तेरे को कुछ और चाहिए, कुछ शॉपिंग करना है ,तो बोल अपन पर वह भी करवा देगा ,पर तेरा मुंह फुला कर घूमना

अपुन की समझ से बाहर है
 
राज मुझे कुछ नहीं चाहिए

मुझे कोई शॉपिंग नहीं करना

बस मैं यह चाहती हूं ,कि मैं जो कहना चाहती हूं ,आप वह समझ जाए

ठीक है ,अगर तू साफ-साफ नहीं बता सकती, तो भाड़

में जा ,,

अपन जा रहा है सोने ,,अपन को वैसे भी बहुत नींद आ रही है

और कमरे से बाहर निकल गया

डॉली जैसे ही बेड पर लेटने के लिए जाने लगी, कि दोबारा फिर कमरे में आया

और डॉली की दवाई की शीशी हाथ में पकड़ाते हुए बोला ,,,

पहले अपन के सामने ही ये दवा गटक ले अपन फिर जाएगा ,मैं जानता हूं तू अपना गुस्सा दवाइयों पर ही निकालेगी

तेरा नाम डॉली नहीं ,तेरा नाम तो लाल मिर्ची रखना चाहिए ,,,

जब निली ने दवाई पी ली ,तो वापस उसके हाथ से लेकर दवाई अलमारी में रखी और कमरे से निकल गया........

दूसरे दिन सुबह सोमवार था, गांव के बाहर एक बहुत ही खूबसूरत छोटा सा शिव मंदिर है ,डॉली का मन हो रहा था ,कि आज वह उस मंदिर में जाये , यह वही मंदिर था जहां पर काकी अक्सर जाती रहती थी

और पिछली बार डॉली और राज को लेकर गई थी ,और डॉली कि इस मंदिर के प्रति बहुत गहरी आस्था थी

वह जब भी मंदिर जाती ,उसको बहुत शांति मिलती थी ,आज उसने सुबह उठते साथ ही काकी से कह दिया था

की काकी आज मेरा मंदिर जाने का मन है मैं मंदिर जाऊंगी ,,डॉली की बात सुनकर काकी भी झट से तैयार हो गई

जब काकी ने राज से इस बारे में बताया

वैसे तो राज को आज बहुत काम थे

पर उसने डॉली के बारे में सोचते हुए कि उसका पता नहीं वैसे भी किसी बात पर मुंह फूला है ,अगर मेने ने मना कर दिया तो वह और भी नाराज हो जाएगी

इसलिए राज ने मंदिर जाने के लिए हां कह दिया ,और यह भी कहा कि जल्दी ही तैयार हो जाए जिससे मैं 1100 बजे तक वापस आ जाँऊ

डॉली एक बार फिर मंदिर के लिए अच्छे से तैयार होने लगु थी

कुछ ही देर में सभी तैयार हो गए, और पूजा की थाली लगाते हुए डॉली और काकी बाहर आ गई थी

राज ढाबे पर ही कुछ काम समझा रहा था राज ने देखा कि काफी और डॉली बाहर आ चुकी है ,तो वह भी ढाबे से निकलकर जीप निकालने लगा, एक बार फिर डॉली सपनों के ताने-बाने बुनने लगी थी , कि वह राज के हाथ में हाथ डाले हुये मंदिर जा रही हैं

जो वह पिछले तीन-चार दिनों से देख रही थी ,कि आखिर अपने भोलेनाथ को कैसे मनाए ,डॉली को तो अपनी तपस्या पार्वती से भी कठिन नजर आ रही थी

पार्वती ने तो चुपचाप वन में जाकर एकांत में रहकर तपस्या की, और शिव जी प्रसन्न हो गए थे ,पर डॉली के शिवजी तो ऐसे थे जो सब कुछ कहने के बाद

भी ,बताने के बाद भी कुछ समझने के लिए तैयार ही नहीं थे

कुछ ही देर में तीनों मंदिर पहुंच चुके थे मंदिर पहुंचकर काकी ने राज, डॉली से पूजा करवाई, खुद भी पूजा की और पंडित जी से दोनों को आशीर्वाद दिलवाया

पंडित जी ने ध्यान से डॉली का चेहरा देखते हुए उसे आशीर्वाद दिया ,और आरती देते हुए कहा मां जी आप दोनों बच्चों को सामने ही स्थित गणेश मंदिर के 11 परिक्रमा लगवा दें बच्चों के मन में जो भी इच्छा होगी बाबा गणपति जरूर पूरा करेंगे

शिव जी के ठीक सामने गणपति मंदिर था काकी तो इतना चल नहीं सकती थी

इसलिए कहा कि तुम दोनों ही 11 परिक्रमा लगा आओ ,,,

राज जानता था कि अगर भगवान को लेकर कोई कमिटमेंट की ,तो काकी बहुत नाराज होती है, इसलिए वह चुपचाप डॉली के साथ परिक्रमा लगाने चला गया ,पत्थरों से बना छोटा सा गणेश मंदिर ,

उसके चारों तरफ ऊंचे ऊंचे आम पीपल नीम और बरगद के वृक्ष ,क्यारियों में लगे हुए रंग बिरंगे फूल ,और चारों तरफ हरी भरी घास का मैदान, सुबह के टाइम मंदिर के धुले हुए पत्थर ,अगरबत्तीयों की खुशबू ,और हवन के धुंए से मंदिर में आकर बहुत अच्छा लग रहा था ,मंदिर की घंटियों की गूंज जब कानों में पड़ती ,तो सकारात्मक एनर्जी का संचार होने लगता ,ऐसे ही सुंदर और मधुर वातावरण में डॉली को एक बार फिर राज से अपनी बात कहने का मौका मिला था

परिक्रमा लगाते हुए डॉली ने धीरे से राज का हाथ पकड़ा ,

और उसके कदम से कदम मिलाकर चलने लगी, राज ने मुस्कुराते हुए डॉली की तरफ देखा ,और कहां सहजादी अब तू मुझसे नाराज तो नहीं है

डॉली ने राज की बात का कोई जवाब नहीं दिया

और कहा! राज आपको पता है

कि शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है हां पता है ,काकी जब भी इस मंदिर आती है तो कोई ना कोई बात शिव के बारे में जरूर बताती है ,,,,

और आपको यह भी पता है कि उन्हें नीलकंठ क्यों कहा जाता है

हां अपन को यह भी पता है क्योंकि,, क्योंकि भोला भंडारी ने बहुत सारा जहर पिया था और इस वजह से उनका कंठ नीला हो गया था ,इसलिए उन्हें नीलकंठ कहते हैं

राज एक बात पूछूं आपसे

अरे तू अपन से बार-बार कयको को पूछती हैं कि,एक बात पूछूँ,,,,

पूछ तेरे को जो कहना है ,बिंदास कह

आपको नहीं लगता की शिव जी गौरी मैया को प्यार से डॉली बुलाते होंगे

डॉली कि इस बात पर राज जोर से ठहाके मारकर हंसने लगा था

महारानी तू भी ना ,कुछ भी लॉजिक लगाती हैं ,,,अरे कायको बुलाते होंगे

उनका नाम तो पार्वती था, गौरी था ,सती था, तो उसी नाम से बुलाते होंगे

नहीं राज जैसे कि शिव जी का नाम नीलकंठ है ,तो नीलकंठ जिसको प्यार करते हैं ,और जिसको सात जन्मो तक अपना बना कर रखा था,,तो वह हो गई ना डॉली यानी कि अपने नीलकंठ के रंग में रंगने वाली डॉली नीलकंठ की डॉली ,,

जैसे कि विष्णु की विष्णु प्रिया ऐसे ही नीलकंठ की डॉली यानि की राज की डॉली..........

....................
 
डॉली ने राज का हाथ थाम रखा था

और उसकी आंखों में देखते हुए अपने दिल की बातें कहती जा रही थी

डॉली ने भगवान नीलकंठ के बारे में भी राज को अच्छी तरह से समझाते हुए अपने रिश्ते को समझाने की कोशिश की थी

राज ने निली की पूरी बात सुनी, और कहा महारानी, तेरी ट्यूब लाइट बहुत अच्छी चमकती है,तूने तो भगवान शिव का भी खुद से रिश्ता जोड़ लिया है, सही कहा तूने अगर शिव जी आज के टाइम में होते ,तो गौरी मैया को डॉली कहकर पुकारते, तू बहुत सोचती है अपन के भेजें मैं तो यह बात कभी आई ही नहीं ,कि रिश्तो का कनेक्शन हो कैसे जाता है ,तू कैसे किसी के दिल की बात समझ लेती है, और उसे जोड़ भी देती है,,,,

परिक्रमा गिनते हुये राज ने कहा गणपति बाबा के पूरे 11 परिक्रमा हो गये है

वह पंडित कह रहा था ,कि हम दोनों जो भी मन्नत मांगेंगे, यह बप्पा पूरी करेगा, तूने कौन सी मन्नत मांगी

है,,,

एक बार फिर राज डॉली कि बात को कहां से कहां ले आया था ,और डॉली जो कहना चाहती थी ,वो बात एक बार फिर पीछे छुट गई थी ,डॉली ने कहा जब मेरी मन्नत पूरी हो जाएगी ,तभी बताऊंगी

कहते हैं ,मन्नत पूरी होने से पहले अगर बता दी जाए ,तो फिर वह पूरी नहीं होती !

अच्छा ऐसा क्या फिर अपुन भी तेरे को नहीं बताएगा ......

ठीक है राज आप मुझे मत बताइए पर इतना तो बता सकते हैं, कि आपने किस बारे में मन्नत मांगी है अपने बप्पा से

नई-नई अपन तेरे को नहीं बताएगा

अपुन चाहता है कि मन्नत स्पीड से पूरी होनी चाहिए, अगर बता दिया तो साला कुछ न कुछ जरुर छूट जाएगा ,,,

महारानी तू भी अपनी मन्नत मुझे मत बता क्योंकि मैं चाहता हूं , कि तूने भी जो मन्नत मांगी है ,वह जल्द से जल्द 3 पूरी हो

और अगर तू अपनी मन्नत की अपुन को हिंट देगी ना, तो अपन उसे पूरी करने की कोशिश भी करेगा

राज की बात सुनकर डॉली पूरे जोर के साथ हंस पड़ी थी ,,,

मैं आपको हिंट दूंगी!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

डॉली ने राज से पूछा राज हिंट देने का मतलब समझते हैं ,किसी को इशारा करना अरे आप के सामने

तो पूरी रामायण भी पढ़ दो तो भी आप नहीं समझते

और आप कह रहे हैं, कि मैं आपको हिंट दूं मुझे समझ नहीं आता, कि आपके लिए हिंट देने का मतलब क्या है

राज चलते चलते अचानक रुक गया और डॉली को देख कर बोला !!

सहजादी तू अपन को बुदधु समझती है क्या अरे अपन तो सामने वाले की आंखों में देख कर समझ जाता है, कि वह क्या कहना चाहता है ,उसके दिल में क्या है

और तू कह रही थी अपन हिंट नहीं समझेगा जब तेरी तबीयत ठीक नहीं थी

तुझे बुखार आ रहा था

तब कैसे समझ गया था, कि तू बीमार है

और जब तू इस घर में नई-नई आई थी

तब भी अपन समझ गया था

कि तेरे को आगे पढ़ने का मन है

जब तुझे भूख लगती है, अपने समझ जाता है, कि तू बड़ी बड़ी आंखों से इधर-उधर देखने लगती है

अरे मेरे ढाबे पर जब छोटू या मखलू का काम करने का मन नहीं होता

अपन साला 2 मिनट में उसकी आंखों में पढ़ लेता है ,और उसको छुट्टी भी दे देता है

अरे और तो और एक दिन छोटू का पेट खराब था ,,,और उसे बहुत जोर से...

तू समझ रही है ना,,,, कि पूरा बिंदास बताऊँ मतलब..... उसकी हालत अपन बहुत अच्छे से समझ

गया था, और अपन ने उसे फटाक से घर जाने को बोल दिया था

और तू कह रही है, कि मैं समझता नहीं हूं तेरा नौकरी करने का मन है

अपुन समझा !

तेरा मूवी देखने का मन था

अपन समझा

लेकिन राज उस मूवी के बीच में जो आपको मैं समझाना चाह रही थी, आप वह तो नहीं समझे,,,,

निधि बहुत जोर से एक ही सांस में यह पूरी लाइन बोल गई थी

अरे तू अपन को साला कुछ समझाएगी तब तो समझूंगा ,,,

राज फिर वही बात ,मुझे आपसे कोई बात ही नहीं करनी,,,

और वैसे भी अब 11 परिक्रमा पूरे हो चुके है ,मैं काकी के पास जा रही हूं, और राज का हाथ छोड़कर डॉली दौड़ते हुए काकी के पास आ गई

थोड़ी ही देर में से राज भी निली के पीछे पीछे दौड़ता हुआ वहाँ आ गया और दोनों के साथ-साथ चलने लगा,,,

निली ने काकी को बताया कि मैंने 11 परिक्रमा पूरे कर लिए ,और गणपति बप्पा के सामने अपनी मन्नत भी रख दी

आप कहती हो ना, कि मन्नत बताई नहीं जाती ,तो जब मेरी मन्नत पूरी हो जाएगी मैं तभी आपको

बताऊंगी ,काकी ने कहा ठीक है ,मेरी बच्ची मैं यही चाहती हूं, कि जल्द से जल्द तेरी मन्नत पूरी हो ,,,

तब राज ने काकी से कहा, कभी मुझ से भी पूछ ले ,,,मैंने भी मन्नत मांगी

काकी ने कहा राज में अच्छी तरह से जानती हूं ,कि तूने क्या मन्नत मांगी होगी

में जानती हूं कि तू अपने लिए तो कभी कोई मन्नत मांग ही नहीं सकता

जरूर वह किसी और के लिए होगी

राज ने कहां काकी तू ही कहती हैं न कि दूसरों को खुशियां देने से खुद को खुशी अपने आप ही मिल जाती है

तो ऐसा ही समझ ले, मैंने जिसके लिए मन्नत मांगी है ,अगर वो खुश रहेगी तो मैं भी खुश हो जाऊंगा,,,

काकी ने कहा ठीक है ,,,

गणपति बप्पा तुम दोनों की ही मन्नत पूरी करेंगे,,, तीनो एक साथ गाड़ी तक जाने के लिए धीरे-धीरे मंदिर की सीढ़ियां उतरने लगे साथ चलते हुए भी राज काकी और डॉली से काफी आगे निकल गया था

डॉली के मन में तो राज का ही मंथन चल रहा था ,,निली ने काकी से पूछा

कि जब हमें दूसरों की खुशी में अपनी खुशी दिखने लगे ,तो इसे क्या समझना चाहिए डॉली जब उसकी खुशी में अपनी खुशी दिखने लगे तो

इसका मतलब कि वो हमारे बहुत करीब है, और हमसे प्यार करते हैं

हम उसी की खुशी में अपनी खुशी देखकर खुश होते हैं, जो हमारे बहुत करीब होते है ,जैसे ,हमारी मां ,पिता ,भाई, बहन ,दोस्त रिश्तेदार इतना सुनने के बाद

डॉली ने सिर्फ एक सवाल किया

काकी इन सब के अलावा भी तो कोई ऐसा हो सकता है ,जिस की खुशी में हम अपनी खुशी देख सकते हैं

काकी ने कहा डॉली तू साफ-साफ बता तू कहना क्या चाहती है

काकी मैं यह कहना चाहती हूं, कि आपने जिन रिस्तों के नाम लिए हैं ,उनके अलावा अगर हमें कोई अच्छा लगता है

जिससे हमारा कोई भी रिश्ता न हो

फिर भी हम उसकी खुशी मैं अपनी खुशी देखते हैं ,उसके आसपास रहने से हमें अच्छा लगता है ,हमेशा अपनी आंखें उसे देखना चाहती हैं ,तो ऐसे रिश्ते को क्या नाम देना चाहिए

काफी ने मुस्कुराते हुए कहा डॉली तू यह सब क्यों पूछ रही है ! कहीं तुझे तो किसी से प्रेम नहीं हो गया

मतलब ,,,,

मतलब कि ऐसे रिश्ते तो तभी बनते हैं जब हमें किसी से प्रेम हो जाता है, कि जिससे हमारा कोई रिश्ता ना हो ,और हमारी आँखे उसे देखना चाहें, हमारा दिल उसकी खुशी चाहे ,तो ऐसे रिश्ते को प्रेम कहते हैं
 
निली ने पूछा कि जब किसी से प्रेम हो जाए तो क्या करना चाहिए

काकी ने कहा यह भी कोई पूछने वाली बात है , अपने प्रेम का इजहार करना चाहिए मतलब कि हमें जिस से प्रेम हो हुआ है उसको बता देना चाहिए,,,,

काकी अगर वह बताने से भी ना समझे तो

अरे ऐसे कैसे ना समझेगा,,,

काकी मान लीजिये कि नहीं समझा तो

कैसे बताऊं ,,,,

डॉली तू कैसी बात कर रही है, मैं क्यों मान लूं ,कि नहीं समझा,, इसका मतलब है कि जो उसे समझा रहा है, उसे ठीक से समझाना नहीं आता ,,,

काकी बताइए ना कि प्रेम को कैसे समझाया जाता है ,,,,

निली पहले तू मुझे यह बता तुझे किसी से प्रेम हुआ है क्या

नहीं काकी, मुझे किसी से प्रेम नहीं हुआ

वो मेरी सहेली है ना ,अरे वह पूनम उसको हुआ है ,,वह उसे समझा समझाकर थक चुकी है, पर वो है कि समझना ही नहीं चाहता ,इसलिए पूनम मुझसे पूछ रही थी

पर मुझे भी नहीं पता तो मैंने आप से पूछा

निली प्रेम को समझाना कोई बड़ी बात नहीं है ,अरे प्रेम तो आंखों में देखकर समझ जाते हैं ,,,

पूनम से कहो कि जाकर सीधे-सीधे उसे अंग्रेजी में लव यू ,लव यू ,बोल दे

और इसके साथ ही काकी अपनी ही बात पर हंसने लगी ,,,

पर काकी पूनम एक लड़की है एकदम से ऐसे कैसे बोल सकती है

उसको भी तो चाहिए, कि वह इशारे से उसकू बात समझे,,,,

हां डॉली बात तो सही है, पर होगा कोई भोले भंडारी जैसा,, जो इशारे नहीं समझता फिर पूनम को साफ साफ शब्दो में ही अपने मन की बात उसे बताना चाहिए ,,,

डॉली सोचने लगी की काकी ने बात तो सही कही है ,,

जब काकी ने कहा डॉली तू कहां खो गई कुछ नहीं काकी, मैं यही सोच रही थी

कि आपने जो कहा वो बिल्कुल सही है

मैं पूनम से कहूंगी की वो उसे साफ साफ शब्दों में जाकर अपने दिल की बात बता दे......

//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svgडॉली पूरा मन बना चुकी थी ,अब तो वह राज से अपने दिल की बात कह कर ही रहेगी ,चाहे उसके लिए उसे काकी की बात ही क्यों ना मानना पड़े,अगर काकी के शब्दों में वह राज को समझा पाएगी फिर तो कुछ कहने के लिए बाकी ही नहीं रहेगा

क्योंकि अब निली भी राज के लिए तड़प रही थी , राज जितना उसकी बातों से दूर जा रहा था , डॉली उतना ही उसके करीब आती जा रही थी, वह जब भी राज को देखती ,अनायास ही उस पर प्यार आने लगता,, डॉली की फ़ीलिंग राज के लिए बढ़ती ही जा रही थी

उसका ,चलना ,बोलना ,उठना और डांटना डॉली को सब कुछ अच्छा लग रहा था

जहां पहले डॉली को राज में एक ऐसा शख्श नज़र आता था , जो उसकी बहुत केअर करता था ,वहीं अब डॉली को राज

में अपना प्यार नजर आने लगा था

डॉली खुदको आईने में देखती, तो खुद से ही शर्मा जाती, आजकल उसे सजना सवरना बहुत पसंद आने

लगा था

अपनी पसंद के नए-नए सूट घर में पहनती

बालों को अच्छे से बनाती, और और हल्का सा मेकअप भी उसके चेहरे पर रहता

पर एक राज है ,या तो डॉली को देखता नहीं और अगर कभी देखता तो उसका मजाक उड़ा देता,, डॉली सोचती रह जाती कि आखिर वह राज को आकर्षित क्यों नहीं कर पा रही है

आज सुबह जब डॉली सोकर उठी तो देखा की राज एक्सरसाइज कर रहा था

राज और काकी चाय पी चुके थे

डॉली ने अपनी चाय बनाई और राज के सामने ही बैठकर चाय पीने लगी

बहूत सारी एक्सरसाइज करने के बाद राज ने पुशअप्स लगाना भी स्टार्ट किया

जिसमें उसके डोले सोने और फिट बॉडी को देखकर डॉली मुस्कुराई और राज के पास जाते हुए बोली

राज आपने डोले तो बहुत अच्छे बना रखे हैं ,पर यह सिर्फ देखने के ही है

या फिर जैसे दिखते हैं इतनी पावर भी है

इनमें, राज ने एक हांथ को जमीन पर रखकर दूसरे हाथ को पीछे कर रखा था

और तेजी के साथ पुशअप्स लगाता जा रहा था ,राज ने पुशअप्स लगाते हुए ही डॉली ले से कहा ,तेरे कहने का मतलब क्या है

राज मेरे कहने का मतलब है कि मैं कैसे मान लूं कि

आप जितनी एक्सरसाइज करते हैं , आपकी बॉडी में उतनी पावर भी है

यह क्या तू फालतू की बात कर रही है पावर दिखती है क्या

और सुन यह डोले शोले मैंने दवाइयां खाकर नहीं अपनी मेहनत से ही बनाए हैं

डॉली मुस्कुराई, और राज के और पास आ गई, अच्छा फिर मैं आपका टेस्ट लूं

हां हां बोल क्या टेस्ट लेगी तू

एक काम करती हूं मैं आपकी पीठ पर बैठ जाती हूं ,और अगर मुझे बिठाकर आपने 10

पुस्प्स लगा लिए ,तो मैं मान जाऊंगी

कि आपमें कुछ बात है

अच्छा तू अपन को चैलेंज कर रही है

चल ठीक है, बैठ जा

डॉली हंसती हुई आराम से आल्थी पालथी मार कर राज की पीठ पर बैठ जाती है

और राज 10 क्या , 20 पुशअप्स लगा चुका था ,और जैसे ही 21 वी बार वह झुका तो डॉली लुढ़क कर नीचे आ गई से

राज जोर से हँसने लगा ,,,महारानी तूने अपुन की दम तो देख ली ,और तेरी दम का क्या, अरे तू तो ठीक से बैठ भी नहीं पाती बात करती है ,,,

डॉली अब भी जमीन पर लुढ़की हुई पड़ी थी और मुँह बनाकर राज को देखती जा रही थी ,राज वापस अपने एक्सरसाइज में मस्त हो गया ,और डॉली चुपचाप

उठकर अंदर चली गई

राज के कहे अनुसार डॉली ने अभी भी आंगनबाड़ी जाना स्टार्ट नहीं किया था

वह घर पर ही आराम कर रही थी

हां घर पर काकी के साथ छोटे-मोटे कामों में मदद करवा देती थी

काकी और डॉली किचन में खाना बना रही थी ,तभी पड़ोस की कमला बुआ काकी को आवाज देती हुई आई ,,,

ओ,,,, राज की काकी तैयार हो गई तू

जब उनकी आवाज काकी के कानों में पड़ी तो काकी ने जल्दी-जल्दी हाथ धोए और बोलते हुये बाहर चली आई

हे भगवान!!! मैं तो भूल ही गई

मुझे तो कमला बुआ के साथ उनके भाई के बेटे की शादी में जाना है

काकी बाहर निकली तो देखा कमला बुआ तखत पर बैठकर उनका इंतजार कर रही थी थोड़ी देर बाद डॉली भी बाहर आ गई

डॉली को देखते साथ ही कमला बुआ ने कहा डॉली देख तेरी काकी कितनी भुलक्कड़ है मैंने इसे 2 दिन पहले ही बता दिया था

कि तुझे मेरे साथ मेरे भाई के बेटे की शादी में चलना है ,अरे इसका दिमाग तो तेरे और राज के अलावा कहीं और लगता ही नहीं एक घंटे बाद ही बस का वक्त

हो रहा है जल्दी से जाओ और अपनी काकी के सामान लगवाने में उनकी मदद कर

अच्छा बुआ जाती हूँ ,मुझे तो पता ही नहीं था , डॉली ने भोलेपन से कहा

आप चिंता मत करो मैं अभी काकी का बैग लगवा देती हूं

और डॉली जाकर काकी की अच्छी-अच्छी साड़ियां बैग में रखने लगी ,डॉली बैग लगाने लगी,, और जब तक काकी हाथ मुँह धोकर तैयार हो चुकी थी

काकी के जाने का राज को भी पता नहीं था डॉली ने राज को फोन लगाकर घर बुलाया तो राज ने भी आकर पूछा

अभी तू कहां कहां जा रही है, कमला बुआ ने राज की तरफ देखते हुए कहा, राज तेरी काकी कहीं भाग ना जाएगी घर से

अरे मेरे साथ मेरे भाई के बेटे की शादी में जा रही है, इसने तो बचपन से उसे अपनी गोद में खिलाया था, तो भला ऐसे कैसे होगा कि उसी के ब्याह में ना जाए ,तो बस मैं उसको वहीं ले जा रही हूं ,और हां आज रात रुक के कल शाम की बस से हम वापस आ जाएंगे हां ठीक है ,कह के राज ने जेब से कुछ पैसे निकालते हुए काकी के बटुए में रख दीये और कहा ,चलिए मैं आप दोनों को बस तक छोड़ देता हूं ,काकी कमला बुआ के साथ जा चुकी थी

खाना खाने के बाद राज वापस अपने ढाबे पर चला गया ,शाम के 500 बज चुके थे काकी तो कल आने

वाली थी

डॉली शाम से ही किचन में चली गई कि

वह आराम से थोड़ा थोड़ा काम कर लेगी क्योंकि अगर भागा दौड़ी करते हुए राज ने उसे देखा तो फिर डांट पड़ जाएगी

डॉली फ्रिज में से सब्जियां उठा ही रही थी कि तेज हवा से घर की खिड़की और पर्दे फड़फड़ाने लगे थे ,उसने चाकू थाली और सब्जियां टेबल पर रखते हुए, जाकर सारे खिड़की और दरवाजे बंद किए

थोड़ी देर में ही बारिश भी शुरू होने लगी तूफान अब भी जारी था शाम से मौसम का बिगड़ना शुरू हुआ रात के 910 बजे तक काफी तेज बारिश और तेज तूफान आने लगा था ,तूफान की वजह से राज ने भी ढाबा समय से पहले ही बंद कर दिया था क्योंकि ऐसे मौसम में कस्टमर के आने का तो सवाल ही नहीं था

टीवी पर भी लगातार चेतावनी दी जा रही थी कि घर पर ही रहे तूफान की तीव्रता बढ़ सकती है
 
डॉली को तो तूफान ,और हवाओं से वैसे भी बहुत डर लगता था ,जब राज आया तो खाना लगाकर डॉली कमरे में राज के पास ही बैठ गई ,ढाबे से घर आने में राज की शर्ट कुछ-कुछ गीली हो गई थी उसने शर्ट उतारकर खूंटी पर टांग दी और हाथ मुंह धोकर खाना खाने लगा

बारिश और हवाओं के साथ साथ बीच-बीच में बिजली भी कड़क जाती थी

डॉली और राज खाना खा चुके थे डॉली ने तो बड़ी

मुश्किल से खाना खत्म किया

रात के 1100 बज चुके थे, अब तक डॉली खाना खाकर दवाइयां भी खा चुकी थी

और अब भी राज के पास कमरे में बैठी थी राज ने घड़ी में टाइम देखा तो डॉली से कहा जाकर अपने कमरे में सोजा

आज मैं अपने कमरे में नहीं ,यही बाहर वाले कमरे में सो जाता हूं

डॉली अभी भी डर रही थी, उसने कहा, नहीं मैं नहीं जाऊंगी ,कमरे में मुझे डर लगता है

तू पागल है क्या ,यही बैठी रहेगी रात भर

हां बैठी रहूंगी ,मैं सोफे पर सो जाऊंगी

आप तखत पर सो जाइए, राज ने कुछ नहीं कहा ,वह तो बस अपने मोबाइल में बिजी था राज डॉली को जितना इग्नोर करता

डॉली को उस पर उतना ही प्यार आ रहा था निली को बैठे ही बैठे नींद के झोंके आने लगे थे........….

राज उठा ,और डॉली के करीब आकर बैठ गया ,,जब डॉली ने राज की तरफ देखा तो राज उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर गहराई से उसकी आंखों में झांकने लगा राज का स्पर्श पाकर डॉली उसके और करीब आ गई थी, राज ने उसे अपनी डोले सोले वाली बाहों में कस के थाम लिया था डॉली ने भी राज के सीने से अपना सिर टिका लिया और पूरी शिद्दत से उसके गले लग गई ,दोनों इतने करीब थे ,कि एक दूसरे की धड़कने भी गिन सकते थे

जब एक दूसरे के करीब रहने का एहसास पूरा हुआ तो राज ने अपने होंठ डॉली के कान के पास लाकर कहा

शहज़ादी आई लव यू ........

जब डॉली की नींद खुली और देखा तो राज उसके कान पर जोर जोर से आबाज़ लगाकर उसे उठा रहा था

महारानी उठ तू यहां पर क्यों सो गई है

थोड़ी देर और सोती रही तो लुढ़क के नीचे आ जाएगी ,जब डॉली ने ध्यान से राज को देखा तो उसे समझ आया ,कि वह सपना देख रही थी

डॉली को सच में बहुत तेज नींद आ रही थी राज के उठाने के बाद भी उठने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था

वह पैर ऊपर करके और अच्छे से बैठ गई और सोफे पे आराम से सिर टिका लिया राज कहां मानने वाला था ,उसके बगल में बैठ कर दोबारा उसे उठाने लगा ,,

महारानी मैं कह रहा हूं ना ,अगर तुझे अपने कमरे में नहीं जाना तो तू तखत पर जाकर लेट जा ,,,

यहाँ में लेट जाऊंगा वरना पक्का से तू लुढ़क जायेगी

डॉली ने राज की बात का कोई जवाब नहीं दिया ,,रह रह के उसकी आंखों में नींद और भी चढ़ रही थी

लेकिन तभी पूरी जोरदार आवाज के साथ भयंकर वाली बिजली कड़की, और लाइट भी चली गई , बिजली शायद कहीं आस-पास ही गिरी थी ,डॉली बहुत बुरी तरह डर गई , उसकी सारी नींद उड़ चुकी थी

और वह एक चीख के साथ जोर से राज के गले लग

गई ,चारों तरफ अंधेरा हो गया था ,राज को पता था ,की डॉली बादलों की गड़गड़ाहट से डरती है

टेबल पर राज का मोबाइल रखा हुआ था वह अपना मोबाइल टटोलने लगा, मोबाइल उठाकर वह टॉर्च जलाता उससे पहले एक बार फिर जोरदार बिजली कड़की

इस बार डॉली सोफे से उठकर राज की गोद में आ चुकी थी ,और उसने कस के राज को बाहों में भर कर उसके कंधे पर अपना सिर रख दिया ,अब तक राज के हाथ में मोबाइल आ गया था ,उसने मोबाइल की टॉर्च जलाई और उसको टेबल पर रखते हुए डॉली का हाथ पकड़कर उसे अलग करने की कोशिश की ,,

महारानी तू काहे को डरती है ,अपुन है ना राज अपने हाथ से डॉली का हाथ गले से निकालने की कोशिश कर रहा था

पर डॉली ने राज के गले में अपनी बाहों की पकड़ को और मजबूत कर लिया था

डॉली की आंखें बंद थी ,राज के करीब आने से उसकी धड़कने भी बढ़ गई थी

वो और राज इतने पास थे कि डॉली की गर्म सांसे राज के बदन से टकरा रही थी राज जब डॉली की पकड़ को नहीं छुड़ा पाया ,तो उसने समझाते हुए कहा

महारानी तू डर मत मैं हूं

चुपचाप अपनी जगह पर बैठ जा ,राज के गले लगते हुए डॉली उसके कान के पास आकर कहती है , राज आप जानते हैं ना मुझे बादलों की गड़गड़ाहट से डर

लगता है प्लीज मुझे खुद से दूर मत करिए

तू पागल है बच्ची है छोटी सी बादलों की गड़गड़ाहट से डरती है

मैं बच्ची नहीं हूं ,बड़ी हो गई हूं ,मोबाइल की रोशनी में राज कुछ कुछ डॉली को देख पा रहा था ,उसके चेहरे पर डर था

और आंखों में एक अजीब सी कसक

अभी तक डॉली ने राज के मन के प्रेम को ही जाना था ,और वह बहुत गहरा था

लेकिन आज जब उसे राज के तन के प्रेम का एहसास हुआ ,तो उसमें भी एक अजीब सी कशिश थी ,उसके तन की खुशबू डॉली के मन में उतरती जा रही थी
 
कहते हैं जब किसी का मन पवित्र हो तो उसका तन भी पवित्र होता है, राज के तन में भी डॉली को यही एहसास हो रहा था अपनेपन का और , रूह को छू लेने वाला एहसास था ,अब डॉली पीछे हटना नहीं चाहती थी ,उसे पता था कि अगर आज उसने राज से अपने दिल की बात नहीं कही तो फिर वह कभी नहीं कह पाएगी

और न ही राज कभी समझ पाएंगे

राज ने एक बार फिर डॉली को नीचे बैठने के लिए कहा,,, डॉली के होंठ राज के कानों के पास थे, उसकी गर्म सांसे राज को छू रही थी

डॉली ने राज की आंखों में देखते हुए उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया ,और अपने दिल की बात राज से कह दी

राज आई लव यू ,,,,

डॉली की बात सुनकर राज ने अपनी गोद से उठाकर उसको गुस्से से सोफे पर बैठा दिया ,और उससे दूर जाकर खड़ा हो गया

शहज़ादी तू क्या बकवास कर रही है

तू पागल है क्या ,तेरा दिमाग ठिकाने पर नहीं है क्या

क्या बोले जा रही है ये सब

डॉली स्तब्ध रह गई थी ,उसे राज से इस बात की तो उम्मीद बिल्कुल नहीं थी... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

जैसे ही राज ने डॉली को अपनी गोद से गुस्से में उठाकर सोफे पर बैठाया

और दूर जाकर खड़ा हुआ ,तो डॉली स्तब्ध थी ,उसने यह नहीं सोचा था

कि राज उसकी इस हरकत पर इतना गुस्सा हो जाएगा, राज निली से दूर जाकर खड़ा हो गया,,,टेबल पर मोबाइल की रोशनी चारों तरफ फैल रही थी

कुछ डॉली के चेहरे पर ,और कुछ राज के रात अभी भी उतनी ही काली ,अंधेरी और भयानक थी, कुछ ऐसा ही राज का गुस्सा भी ,डॉली चुपचाप सोफे पर बैठ कर एकटक राज को देखे जा रही थी,और वह बोलता ही जा रहा था, राज चाहे डॉली को कितना भी डांटता ,पर उसकी डाँट में प्यार और अपनापन ही झलक रहा था

राज ,डॉली से यही कुछ 8,10 फीट की दूरी पर ,उसकी तरफ पीठ करके खड़ा था और वे दोनों एक दूसरे के चेहरे को नहीं देख सकते थे ,डॉली राज की सारी बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था की वह कहना क्या चाहते हैं

राज की बातें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी ,उसकी बातों में एक झूठा गुस्सा और डॉली के लिए समझाइस थी

जो लगातार उसके मुंह से निकल रही थी

शहज़ादी तुझे समझ में आ रहा है

तू क्या कह रही है, अरे जब इस घर में आई तो इत्ती सी थी तू ,ठीक से बोलना भी नहीं आता था ,अपुन के सामने तेरी आबाज़ भी नही निकलती थी

अपुन के सामने ही तू बड़ी हुई है

अभी तुझे अच्छे बुरे की समझ ही नहीं है और ये सब कचरा तेरे दिमाग में डाला किसने क्या कुछ भी बोले जा रही है

आई लव यू का मतलब भी समझती है तू अपन तेरे से पूरे 9 साल बड़ा है ,और अपुन के साथ ऐसी बात करती है

अगर किसी को इस बारे में पता चला तो अपन किसी को क्या मुंह दिखाएगा

माना कि अपन पढ़ा लिखा नहीं है, साला अपने मां-बाप का भी कोई पता नहीं है खानदान के नाम पर भी एक काकी ही है लेकिन फिर भी इस गांव में अपुन की इज्जत करते हैं लोग ,उन पूरा भरोसा है मेरे ऊपर अगर सब उनको पता चला तो उनकी नजर में तो अपुन की इज्जत का जीरो बटा सन्नाटा हो जाएगा,,,,

तू बच्ची है जरा सी ,,,,

तेरी उम्र अभी यह सब करने की नहीं है

तेरे आगे तेरी पूरी जिंदगी पड़ी है

करीब आधे घंटे तक राज लगातार डॉली को समझाता रहा ,,लेकिन उसने पलट कर एक बार भी नहीं नहीं देखा था

डॉली कुछ नहीं बोली ,,,,तब पलटते हुए राज मुड़ा और डॉली के पास आकर सोफे के नीचे ही घुटनों के बल बैठ गया

अब डॉली का चेहरा ठीक उसके सामने था उसने एक बार डॉली की आंखों में देख कर उसे फिर से समझाने की कोशिश की महारानी मैंने जो कहा तूने सुना

डॉली अभी भी चुप ही थी,उसके आंसू बहते हुए उसके गालों पर से लुढ़कते हुये उसके गले तक आ गए थे

वह किसी मोम की गुड़िया की तरह जम गई थी , न उसके होठों पर हंसी थी

न ही चेहरे पर गुस्सा,, वह भाव शून्य थी

बस दोनों आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे ,राज पास आकर एक बार फिर डॉली को समझाने लगा

महारानी! अपन जानता है कि अपन जो इतनी देर से बोले जा रहा है, तूने ठीक से सुना भी नहीं होगा ,क्योंकि तुझे जो अच्छा लगता है ना, तू वही करती है ,अपने आगे तो तो किसी की सुनती ही नहीं , लेकिन अब सुन जो हुआ सो हुआ, उस बात को भूल जा और अपनी जिंदगी में आगे बढ़

डॉली ने देखा अब भी राज की आंखों में डॉली के लिए ढेर सारे सपने थे

उसने बहुत प्यार से समझाते हुए कहा

शहज़ादी तेरे सामने तेरी बहुत खूबसूरत जिंदगी है ,तू अच्छे से पढ़ रही है

तेरी नौकरी भी लग गई ,और तूने बताया था ना कि तू जितना पढ़ती जाएगी ,तेरी नौकरी में भी तरक्की होती जाएगी, तू अपने भविष्य पर ध्यान दे ,उसको देख

उसके बारे में सोच,,,,

अपुन के साथ रहकर तेरी जिंदगी का कचरा हो जाएगा साला,,,, अपुन ठहरा ठरकी अनाथ ,यहां तक कि कुछ लोग तो अपन को हरामी भी कहते हैं,,, अभी तो तेरी जिंदगी शुरू हुई है ,तेरी जिंदगी बहुत अच्छी जगह जाकर जुड़ेगी,, इस गांव में यहां मेरे पास तेरा भविष्य नहीं है

तेरे पास तो तेरे मां-बाप का नाम है सर्टिफिकेट भी है, जिस पर तेरे मां बाप के होने का सबूत है ,देख तो तू बच्ची है

तुझे अच्छे बुरे की समझ नहीं है, फिर अपन ने साला बचपन से ही सारी दुनिया देखी है और इस दुनिया के बारे में अपन एक एक चीज समझ चुका है

अब तू अपने बारे में सोच, इन सब चीजों से निकल ,देख तू जो भी करना चाहेगी

आगे पढ़ना चाहेंगी, अपुन तेरे साथ खड़ा है तुझे कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होने देगा, तूने अपनी लाइफ को आगे बढ़ाने के लिए इतनी मेहनत की है

तेरी मेहनत रंग लाएगी ,एक दिन तू बहुत नाम करेगी ,मैं तुझे कोई भी गलत काम नहीं करने दूंगा ,जिससे तेरी जिंदगी बर्बाद हो राज की यह सारी बातें ,,,डॉली सच

में बहुत ध्यान से सुन रही थी,, अब बस समझ चुकी थी, कि वह जितना राज के बारे में सोचती है ,,जितना महसूस करती है, जितना प्यार उससे करती है ,,,उससे कई गुना ज्यादा प्यार राज डॉली से करता है

राज की एक-एक बात डॉली की समझ में अच्छी तरह से आ चुकी थी

वह समझ गई थी,

कि राज को यही लगता है, कि डॉली उसके साथ अपनी जिंदगी बर्बाद करेगी

और इसलिए सब कुछ जानते हुए भी राज उसके प्रेम को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं सारी बातें आईने की तरह साफ हो चुकी थी पर जो कुछ सामने आया ,इसके बाद तो राज से अपने प्रेम को मनवाना बहुत मुश्किल था,,,,

यह सारी बातें सोच कर कुछ ही पलों में राज के लिए डॉली का प्रेम चरम तक पहुंच गया था ,,अब तो एक पल भी राज से दूर रहना उसे गवारा नहीं था
 
वह पूरी तरह से राज के प्रेम में डूब जाना चाहती थी ,उसके लिए अपना इतना प्रेम देखकर ,और उसका इतना बड़ा त्याग देखकर ,,डॉली का मन आत्मग्लानि से भरा जा रहा था ,उसे राज के भोलेपन ,पर और उसके निश्चल प्यार पर और भी प्यार आने लगा था

आज उसे सच में अपने राज के अंदर शिव का रूप देखने को मिला था

जिसने खुद जहर पीकर दूसरों को दुखो से बचा लिया था

वह समझ गई थी, कि राज के प्रेम का जो एहसास उसे है

वो सच्चा है ,,,राज का प्रेम पानी की तरह निर्मल और , गंगा जल की तरह पवित्र है राज के निश्चल प्रेम के आगे डॉली निशब्द हो गई थी,,,

जहां ढूंढने से भी कोई खोट नज़र नहीं आ रही थी,,,

डॉली के लिए इतना प्रेम होते हुए भी राज ने डॉली की खुशी के लिए, उस प्रेम को अपने अंदर छुपा लिया था

राज जितना डॉली को समझा रहा था

डॉली उतना ही उसके प्रेम में डूबती जा रही थी,,,

राज की बातें खत्म हुई ,और उसने पानी का ग्लास भरकर डॉली को देते हुए कहा महारानी,, यह ले पानी पी, मुंह धो

और आराम से अपने कमरे में जाकर सो जा डॉली ले चुपचाप राज के हाथ से पानी का ग्लास लेकर पानी पिया ,,,

और पानी पीते हुए ही निश्चय कर लिया कि राज से दूर होना तो बहुत दूर की बात है बल्कि आज से उसकी तपस्या शुरू होती है अपने प्रेम को पाने के लिए

डॉली ने पानी पीकर ग्लास टेबल पर रखा और एक बार फिर तड़प कर राज के गले लग गई ,,,,

कुछ देर के लिए राज किसी स्टेचू की तरह शांत हो गया था ,,,ना डॉली ने कुछ कहा न और न ही राज ने ,,,,

डॉली के मोटे-मोटे आंसुओं से राज का पूरा कंधा भीग चुका था

जब राज ने एक बार फिर उसे समझाने की कोशिश की ,,,,

तो डॉली बिल्कुल शांत थी ,उसके चेहरे पर कोई हलचल नहीं थी ,,,,

और उसने उतने ही सदे हुये और शांत शादी शब्दों में राज से कहा ,,,,

राज आपने जो भी कहा ! मैंने सब कुछ सुना ,लेकिन सच बात तो यह है

कि कोई भी बात मेरी समझ में नहीं आई मेरी समझ में तो सिर्फ इतना आया है

कि मैं नीलकंठ की डॉली हूं!

और हमेशा उन्ही की रहूँगी!

राज की डॉली !

आपकी डॉली !

और आपके सिवा मेरे ऊपर किसी का अधिकार नहीं हो सकता, मेरी जिंदगी में किसी का होना तो बहुत दूर की बात है

मैं किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती इतना कहते हुए डॉली शांत हो गई थी

उसे खुद के अंदर एक शक्ति के होने का एहसास हो रहा था ,जो उसे टस से मस नहीं होने दे रही थी

राज, हैरान-परेशान सा डॉली की तरफ देख रहा था ,,डॉली राज की एक-एक बात को किसी खुली किताब की तरह पढ़ चुकी थी जिसमें साफ लिखा हुआ था

कि वह भी डॉली से अटूट प्रेम करता है लेकिन उसके

भविष्य को देखते हुए उस प्रेम की कुर्बानी दी रहा है,और साथ ही यह भी जतलाना नही चाहता कि वह प्रेम में है इजहार करना तो दूर उसको अपने सामने भी नहीं लाने देना चाहता ,पर उसके दिल की सच्चाई ,चेहरे का भोलापन, और आंखों की मासूमियत, डॉली के अंदर तक समा रही थी डॉली अभी भी सोफे पर बैठी थी

और राज उसके सामने अपने घुटनों पर दोनों एक दूसरे की फीलिंग को अच्छी तरह से समझ रहे थे

राज इस बात को भी समझ चुका था

कि डॉली जब अपनी ज़िद पर आती है

तो किसी की नहीं सुनती, फिर चाहे उसे कितना डांट लो ,कितना समझा लो ,वह वही करती है ,जो उसे करना होता है

पिछले कुछ घंटों में डॉली का प्रेम राज के लिए कई गुना बढ़ गया था

एक बार फिर राज की आंखों में गहराई से देखते हुए ,डॉली ने राज के गले में बाहें डाल दीं,,,,

राज कुछ कहता, इससे पहले ही अपने होंठ राज के गाल पर रख दिये,,,
 
राज को यह उम्मीद तो डॉली से कतई नहीं थी ,,,, अचानक की गई डॉली की इस हरकत से राज भड़भड़ाता हुआ ,खड़े होने की कोशिश में नीचे जमीन पर ही लुढ़क गया और इसके साथ ही एक जोरदार हंसी डॉली के मुंह से निकल गई,,,,

सारी बातें आईने की तरह साफ हो चुकी थी डॉली के

मन में अब कोई डर ,कोई भ्रम

कोई संशय ,कुछ भी नहीं था

अभी भी बारिश जारी थी

बिजली भी बीच-बीच में कड़क रही थी

और मोबाइल की लाइट डॉली और राज के ऊपर पढ़ रही थी

डॉली चुपचाप हंसते हुए सोफे पर बैठी थी और राज जमीन पर लुढ़का पड़ा था...... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

अभी राज और डॉली के बीच की बात खत्म नहीं हुई थी ,जैसे ही डॉली की एक जोरदार हंसी उसके मुँह से निकली कि जमीन पर लुड़का हुआ राज डॉली को घूरता हुआ उठा और खड़ा हो गया

लेकिन धीरे-धीरे डॉली की हंसी बढ़ती ही जा रही थी ,,वह और भी जोर से खिलखिला कर हंसने लगी, राज कुछ देर तक चुपचाप उसे घूरता रहा ,और एक डांट के साथ डॉली को चुप रहने के लिए कहा

तू समझती क्या है ,अब तो अपन के ऊपर हंसेगी भी ,अपनी हरकतों से बाज क्यों नहीं आ रही ,यह सब क्या था ,तू भी ना बहुत ज्यादा बिगड़ गई है ,और तुझे सही करने के तरीके भी मुझे आते हैं

तू यह मत समझना अपन तेरे से डर जाएगा अगर अपन ने तेरे को सर पर चढ़ाया है

तो ठीक करना भी आता है

अरे दांत निकालना बंद कर ,कब से देख रहा हूं हंसती ही जा रही है

इसमें हंसने वाली कौन सी बात है

डॉली को राज की मासूमियत पर और उसके और झूठे

गुस्से पर और भी प्यार आ रहा था

अब राज के लिए डॉली की शर्म ,डर और दूरियां , सब कुछ खत्म हो चुका था

अब तो वह पूरी तरह से राज में ही रम जाना चाहती थी

पर उनके बीच जो सबसे बड़ी दीवार थी

वह था खुद राज, और इस दीवार को तोड़ना बहुत मुश्किल था

लेकिन डॉली ने ठान लिया था ,एक ना एक दिन तो यह दीवार तोड़ कर ही रहेगी

इसके लिए उसे चाहे जो भी करना पड़े

वह राज के मन की बात उससे मनवा कर ही रहेगी,उसके अंदर छुपी फीलिग़ को बाहर निकलवा कर ही रहेगी

एक दिन राज उससे वो सारी बातें कहेगा जो डॉली सुनना चाहती है

जो उसके मन में चल रहा है ,चाहे वह डॉली से कितना भी दूर जाए ,कितना भी समय लग जाए ,लेकिन एक दिन वह आएगा

जब वह खुद अपने प्यार का इजहार मुझसे करेंगे ,,,,,

अब मैं पीछे हटने वाली नहीं हूं

राज के चेहरे से साफ दिख रहा था

कि वह समझ चुका है, कि अब डॉली उससे डरने वाली नहीं है

और उसे यह भी डर था कि अब पता नहीं डॉली क्या करने वाली है

राज के चेहरे से एक छुपा हुआ डर साफ-साफ झलक रहा था

पर भला राज अपने डर को बाहर आने दे ऐसा हो सकता है क्या //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

वह तो खुद को सबसे बड़ा सबा शेर समझता था ,लेकिन उसे यह पता नहीं था कि अब उसका पाला डॉली से पड़ा है

और राज को पाने के लिए डॉली किसी भी हद तक जा सकती थी

राज ने डॉली को समझाते हुए उससे दूर सामने डले हुए तखत पर बैठा था

उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह दोबारा डॉली के पास जाये,घड़ी में रात के 200 बज चुके थे, राज ने एक बार घड़ी देखी ,और कहा मुझे बहुत नींद आ रही है

तू अपने कमरे में सोने जा ,और मैं भी सोऊंगा डॉली उठी, और आगे कदम बढ़ाते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी

राज चोर निगाहों से डॉली को कमरे की तरफ जाता देख रहा था

और यह देखकर तखत पर पैर फैलाते हुए आराम से लेट गया ,लेकिन डॉली को अचानक ही शरारत सूझी, वह झटके के साथ मुड़ी और झट से राज के पास

तखत पर आकर बैठ गई

राज एक सेकंड में ही उठकर बैठ गया

तू क्या!!! एक भूतनी की तरह अपन को डराती है,

अभी तो अपने कमरे में जा रही थी अचानक से यहाँ बापस आ गई

डॉली ने बड़े ही भोलेपन से कहा

राज मैंने आपको बताया तो था

मुझे सच में अकेले में डर लगता है

हां अगर काकी होती!!!! तो मैं अच्छे से उनके गले में बाहें डाल कर उनके साथ सो जाती, फिर मुझे डर नही लगता

पर मुझे ऐसे तो बिल्कुल भी नींद नहीं आएगी ,और और आपको ही पता है कि डॉक्टर ने मुझसे अच्छी नींद लेने के लिए कहा है ,अगर मैं पूरी रात जागी तो मैं फिर से बीमार पड़ जाऊंगी ,अब आप ही सोच लो मैं अपने कमरे में जाकर पूरी रात जागू

या फिर यहाँ आपके साथ,,,,,,

डॉली इतना कहकर ही रुक गई

राज तो डॉली को ही दख रहा था

राज ने भवे चढ़ाकर हाथ से इशारा करते हुए कहा ,,,,फिर ,,फिर से तेरा क्या मतलब है मेरे साथ ,,,क्या मेरे साथ,,,,,

राज फिर से मेरा मतलब है ,,,,

या फिर मैं अभी आपके साथ सो जाऊं

डॉली एक ही सांस में झट से यह बात राज से बोल गई,,,,,

राज ने पीछे हटते हुए कहा

तू सरकी हुई है

यहां अपन के साथ सोने का कोई काम नहीं तू यहां

से ,कल्टी काट और अपने कमरे में जा ,,,अपन किसी के साथ नहीं सोता

अपन को पूरा वेड सिंगल ही लगता है

राज आप के बगल में जो यह थोड़ी सी जगह पड़ी है ना, मैं उतने में ही काम चला लूंगी ,पर प्लीज मुझे यही सोने दीजिए ना सहज़ादी मैंने तुझ से कह दिया है ना कि तू यहां नहीं सोएगी,,,,, मतलब नहीं सोएगी,,,

डॉली ने गुस्सा दिखाते हुए कहा ठीक है अगर आप मुझे यहां नहीं सोने देंगे

तो फिर मैं सोफे पर ही सो जाती हूँ

लेकिन मैं अपने कमरे में नहीं जाऊंगी

मुझे वहां डर लगता है ,अंदर से तो डॉली को भर भर के हंसी आ रही थी ,उसका मन कर रहा था कि वह पूरी रात राज को इसी तरह से चिढ़ाती रहे

राज की यह बचकानी हरकतें उसकी हंसी को और बढ़ा रही थी

इतना कहते हुये डॉली राज के ऊपर झुकने लगी,, यह देखते हुए राज पीछे हो रहा था राज के मुंह से कुछ निकलता

इससे पहले ही डॉली ने कहा में यहां से चादर उठा रही हूं ,आपके पास दो चादरे है

तो क्या एक में ले सकती हूं

आपको इतना डरने की जरूरत नहीं है

मैं आपको खा नहीं जाऊंगी, बुझे मन से डॉली ने चादर उठाया ,और राज की तरफ देखते हुए एक ,एक कदम पीछे हटाने लगी

सोफे पर जाकर चुपचाप लेटते हुये चादर ढक कर सोने की कोशिश करने लगी

राज को अभी भी डर था, कि कहीं डॉली उठकर आ ना जाए ,यह रात शायद राज के लिये उसकी जिंदगी के सबसे यादगार रात हो गई थी, जिसकी वजह से उसे नींद भी नहीं आ रही थी ,वह धीरे-धीरे डॉली को देख रहा था, कि वह सो रही है ,या नहीं और मन में सोच रहा था ,,,,

बस एक बार काकी आ जाए तो इस महारानी का चढ़ा हुआ भूत अपने आप ही ठीक हो जाएगा

यही सोच कर वह भी सोने की कोशिश करने लगा ,,,सुबह जब उसकी आंख खुली तो देखा कि घड़ी 630 बजा रही थी

वैसे तो राज साडे आठ 900 बजे से पहले कभी उठता नहीं था

पर आज तो पूरी रात उसे नींद ही नहीं आई और जब नींद आई तो सुबह भी जल्दी ही खुल गई ,,,चारों तरफ हल्का हल्का उजाला होने लगा था ,,पर रोज की तरह नहीं

क्योंकि अभी भी रुक-रुक कर बारिश हो रही थी , काफी बादल भी छाए हुए थे और बादलों की वजह से सुबह होने का एहसास पूरी तरह से नहीं हुआ था
 
राज ने देखा कि सुबह हो चुकी है

और डॉली अभी भी गहरी नींद में है

तो राज अपना चादर उठाकर अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद करके चैन की गहरी नींद में

सो गया

किसी के दरवाजा खटखटाने से जब डॉली की आंख खुली तो सुबह के 900 बज चुके थे, दरवाजे पर देखा तो ढाबे से छोटू और बंटी कुछ सामान लेने घर पर आए थे

डॉली ने दरवाजा खोल कर उन्हें सामान लेने ऊपर स्टोर रूम में भेज दिया

छोटू सामान लेकर नीचे आया ,और डॉली से पूछा !

राज भैया उठ गए क्या उनसे भी कुछ काम था, डॉली ने यहां वहां देखा क्योंकि रात को तो राज इसी कमरे में तखत पर सोया हुआ था ,लेकिन वह यहां नहीं था

जब उसके कमरे की तरफ नजर दौड़ाई तो दरवाजा बंद था ,डॉली समझ गई कि जरूर राज कमरे में ही होंगे, डॉली ने आंखें मलते हुए छोटू से कहा ,छोटू लगता है वो अभी सो रहे हैं ,अगर तुझे कुछ जरूरी काम हो तो जाकर उठा ले

छोटू ने आंखें फाड़ते हुए कहा

राज भैया को उठाना इतना आसान नहीं है मुझे सुबह से उनके जूते नहीं खाना

जब जाग जाए तो आप उन्हें बता देना

ठीक है छोटू, वो जैसे ही उठते हैं

मैं तुझे बता दूंगी, इतना कहते हुए डॉली जल्दी जल्दी घर के काम निपटाने लगी

उसने पूरे घर में झाड़ू लगाई ,जाकर नहाया धोया और जल्दी से चाय चढ़ा कर

पकोड़े के लिए बेसन भी घोल लिया ,क्योंकि ऐसे

मौसम में तो चाय पकौड़े का स्वाद ही कुछ अलग आता है

और फिर मिर्ची के पकोड़े तो राज की खास पसंद थी

तो भला डॉली राज की पसंद का ध्यान कैसे नहीं रखती,,,,,

डॉली ने पकौड़ीओ के लिए सब्जियां भी

धोकर रख दी थी ,सब्जियां काटने ही जा रही थी ,कि सोचा पहले राज को उठा तो दूँ

और थाली टेवल पर रख कर राज को उठाने उसके कमरे की तरफ चली गई

डॉली ने पहले राज को आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो जोर-जोर से कुंडी खटखटाने लगी

क्योंकि अब 930 बज चुके थे ,और अगर अब भी राज को नहीं उठाती, तो फिर राज के उठने के साथ ही डॉली को डांट खानी पड़ जाती ,कि इतनी देर तक उसे क्यों नहीं उठाया ,करीब तीन-चार मिनट उठाने के बाद राज दरवाजा खोल कर जमाई लेता हुआ डॉली के सामने खड़ा था

उसके बदन पर अब भी सिर्फ लोअर ही था डॉली ने एक नजर ऊपर से नीचे तक राज पर डाली ,,,

और कहा कुछ लोग ऐसे होते हैं ,जिन्हें अपने डोले शोले दिखाना बहुत अच्छा लगता है इसलिए वह सर्ट लैस ही घूमते रहते हैं

उन्हें शर्म भी नहीं आती ,,,,

डॉली की बात सुन राज ने चौक कर अपने ऊपर नजर

डाली और अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगा ,,,,

पहले बता मुझे अभी तक उठाया क्यों नहीं देख घड़ी में क्या टाइम हो रहा

क्या अपन के धंधा पानी की तेरे को कोई फिक्र नहीं है

अरे ऐसे मौसम में तो ढाबे पर लोगों का ज्यादा ही आना जाना लगा रहता है

जाकर जल्दी से मेरे लिए चाय बना, मैं ढाबे पर निकाल ही रहा हूं

दोपहर में आकर नहा लूंगा ,अभी वैसे भी लेट हो गया, डॉली ने त्योरियां चढ़ाते हुए कहा ,,,,

अच्छा जी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

एक तो खुद ही अपने कमरे में कुंडी लगा कर सो गए ,और मैं इतनी देर से उठा रही हूं

अब कहीं जाकर आप बाहर आए हैं

और मुझे ही डांट लगा रहे हैं ,वैसे मैं बता दूँ कि चाय नाश्ता तैयार है

अब जल्दी से कमरे से बाहर आइए

आपको सब कुछ टेबल पर ही मिलेगा

राज ने ब्रश में पेस्ट लगाया ,और दांत पर रगड़ते हुए किचन में आकर देखने लगा,,,कि महारानी सच बोल रही है या झूठ पर जब उसने देखा किस सच में एक तरफ चाय चढ़ी हुई है ,और दूसरी तरफ उसके मनपसंद मिर्ची की पकौड़ीयां तली जा रही है तो उसने ब्रश करने की स्पीड थोड़ी सी और बढ़ा दी ,और जल्दी से ब्रश किया

हाथ मुँह धोकर नाश्ते की टेबल पर आ गया जहाँ डॉली

ने एक बड़े से कप में

मस्त अदरक इलायची डालकर चाय

और सारी सब्जियों की अलग-अलग पकौड़ियाँ रखी हुई थी

इतना अच्छा नाश्ता देखकर राज को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था

उसने शर्ट के बटन लगाने से पहले ही एक बड़ी सी मिर्ची की पकौड़ी मुंह में डाली और चबाते हुए शर्ट के बटन लगाने लगा

अब तक डॉली भी अपनी प्लेट और कप लेकर राज के बगल में सोफे पर ही बैठ गई थी ,जैसे ही डॉली उसके पास बैठी

राज ने एक नजर उसे देखा और उससे दूर सरकते हुए अपनी चाय पीने लगा

डॉली और राज दोनों चुपचाप अपनी अपनी चाय के साथ पकौड़े खा रहे थे

राज को लगा कहीं डॉली फिर कोई हरकत शुरु ना कर दे ,इसलिए उसने काकी का टॉपिक लेकर बात शुरू की , शहज़ादी तेरी काकी से बात हुई है क्याआज शाम को आ जाएगी ना वह

डॉली ने पकौड़े खाते हुए लापरवाही से कहा राज जहां तक मुझे याद है ,काकी आज नहीं कल आने वाली हैं

क्या राज बुरी तरह चौक गया ,काकी कल आएगी ,वह तो 1 दिन की कह कर गई थी

आप बात कर लीजिए ना काकी से ,उनको बता दीजिए

फोन करके,, कि आप घर पर आ जाओ, आपको रात में उनके बिना डर लगता है ,तो शायद कल की जगह वह आज ही आ जाये,,,,,

राज ने डॉली की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा,,, ए तू अपन को चैलेंज मत कर

अरे अपन किसी से डरता ,,,वरता नहीं है

मुझसे भी नहीं

यह कहते हुए डॉली की आंखों में शरारत थी

राज ने नजरें चुराते हुए कहा हां हां अपन तुझसे क्यों डरेगा !!!

राज सच में आप को मुझ से डर नहीं लगता

ओय तू पागल है क्या, सरक गई अपनी जगह से ,,,,

राज इसका मतलब कि आप को सच में ही मुझ से डर नहीं लगता ,डॉली ने अपने शब्दों पर जोर देते हुए कहा

हां हां नहीं लगता

अच्छा फिर ठीक है अगर आपको मुझ से डर नहीं लगता तो एक बार मेरी आंखों में देखिए अगर आपने नजरें पहले हटाई तो समझो आप डर गए ,और अगर मैंने नजरे झुका ली तो मैं डर गई,,, बताइए चैलेंज

एक्सेप्ट है

हां हां तू मिला ले आँखे,,,

राज ने हकलाते हुए कहा

चाय के कुछ शिप लेने के बाद दोनों की चाय खत्म हो चुकी थी

डॉली संभलते हुए राज के ठीक सामने बैठ गई ,और उसकी आंखों में देखने लगी,

राज ने जब चैलेंज एक्सेप्ट कर ही लिया था तो अपनी शान दिखाते हुए वह भी डॉली की आंखों में देखने लगा ,,,

कुछ देर देखने के बाद डॉली मुस्कुराई और एक आंख दबा दी

राज अचानक खड़ा हुआ और डॉली पर बरस पड़ा ,,,महारानी। तू चीटिंग कर रही है

डॉली ने बड़ी शांति से कहा ,आप हार गए तो उसे एक्सेप्ट कर लीजिए, यह फालतू के बहाने मत बनाइये

कह दीजिए कि आप मुझसे डरते हैं

और अगर नहीं ,आप सच में मुझसे नहीं डरते तो ,,,,,

राज बीच में ही बोल पड़ा ,हां नहीं डरता

अच्छा एक बात बताइए, क्या आप छोटू से डरते हैं ,,

राज हंसा और बोला तू क्या बोल रही है अपन छोटू से कायकू डरेगा

अच्छा तो आप छोटू को पकड़ के उसकी आंखों में देख सकते हैं ,,,,

हां हां बिंदास

मतलब आप जिस से नहीं डरते उसको पकड़ के उसको बाहों में लेकर उसकी आंखों में देख सकते हैं

हां हां बिल्कुल

तो फिर मुझे भी अपनी बाहों में भर कर मेरी आंखों में देखिए, मैं तभी मानूंगी कि आप मुझ से नहीं डरते ,,,नहीं तो सीधे-सीधे बोल दीजिए ,कि आप मुझसे डरते हैं

डॉली कुछ और कहती या राज उसकी बात का जवाब देता ,तब तक छोटू दोबारा राज को बुलाने आ गया था

और राज छोटू के साथ ढाबे पर चला गया

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