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Guest
राज मुझे कुछ नहीं चाहिए
मुझे कोई शॉपिंग नहीं करना
बस मैं यह चाहती हूं ,कि मैं जो कहना चाहती हूं ,आप वह समझ जाए
ठीक है ,अगर तू साफ-साफ नहीं बता सकती, तो भाड़
में जा ,,
अपन जा रहा है सोने ,,अपन को वैसे भी बहुत नींद आ रही है
और कमरे से बाहर निकल गया
डॉली जैसे ही बेड पर लेटने के लिए जाने लगी, कि दोबारा फिर कमरे में आया
और डॉली की दवाई की शीशी हाथ में पकड़ाते हुए बोला ,,,
पहले अपन के सामने ही ये दवा गटक ले अपन फिर जाएगा ,मैं जानता हूं तू अपना गुस्सा दवाइयों पर ही निकालेगी
तेरा नाम डॉली नहीं ,तेरा नाम तो लाल मिर्ची रखना चाहिए ,,,
जब निली ने दवाई पी ली ,तो वापस उसके हाथ से लेकर दवाई अलमारी में रखी और कमरे से निकल गया........
दूसरे दिन सुबह सोमवार था, गांव के बाहर एक बहुत ही खूबसूरत छोटा सा शिव मंदिर है ,डॉली का मन हो रहा था ,कि आज वह उस मंदिर में जाये , यह वही मंदिर था जहां पर काकी अक्सर जाती रहती थी
और पिछली बार डॉली और राज को लेकर गई थी ,और डॉली कि इस मंदिर के प्रति बहुत गहरी आस्था थी
वह जब भी मंदिर जाती ,उसको बहुत शांति मिलती थी ,आज उसने सुबह उठते साथ ही काकी से कह दिया था
की काकी आज मेरा मंदिर जाने का मन है मैं मंदिर जाऊंगी ,,डॉली की बात सुनकर काकी भी झट से तैयार हो गई
जब काकी ने राज से इस बारे में बताया
वैसे तो राज को आज बहुत काम थे
पर उसने डॉली के बारे में सोचते हुए कि उसका पता नहीं वैसे भी किसी बात पर मुंह फूला है ,अगर मेने ने मना कर दिया तो वह और भी नाराज हो जाएगी
इसलिए राज ने मंदिर जाने के लिए हां कह दिया ,और यह भी कहा कि जल्दी ही तैयार हो जाए जिससे मैं 1100 बजे तक वापस आ जाँऊ
डॉली एक बार फिर मंदिर के लिए अच्छे से तैयार होने लगु थी
कुछ ही देर में सभी तैयार हो गए, और पूजा की थाली लगाते हुए डॉली और काकी बाहर आ गई थी
राज ढाबे पर ही कुछ काम समझा रहा था राज ने देखा कि काफी और डॉली बाहर आ चुकी है ,तो वह भी ढाबे से निकलकर जीप निकालने लगा, एक बार फिर डॉली सपनों के ताने-बाने बुनने लगी थी , कि वह राज के हाथ में हाथ डाले हुये मंदिर जा रही हैं
जो वह पिछले तीन-चार दिनों से देख रही थी ,कि आखिर अपने भोलेनाथ को कैसे मनाए ,डॉली को तो अपनी तपस्या पार्वती से भी कठिन नजर आ रही थी
पार्वती ने तो चुपचाप वन में जाकर एकांत में रहकर तपस्या की, और शिव जी प्रसन्न हो गए थे ,पर डॉली के शिवजी तो ऐसे थे जो सब कुछ कहने के बाद
भी ,बताने के बाद भी कुछ समझने के लिए तैयार ही नहीं थे
कुछ ही देर में तीनों मंदिर पहुंच चुके थे मंदिर पहुंचकर काकी ने राज, डॉली से पूजा करवाई, खुद भी पूजा की और पंडित जी से दोनों को आशीर्वाद दिलवाया
पंडित जी ने ध्यान से डॉली का चेहरा देखते हुए उसे आशीर्वाद दिया ,और आरती देते हुए कहा मां जी आप दोनों बच्चों को सामने ही स्थित गणेश मंदिर के 11 परिक्रमा लगवा दें बच्चों के मन में जो भी इच्छा होगी बाबा गणपति जरूर पूरा करेंगे
शिव जी के ठीक सामने गणपति मंदिर था काकी तो इतना चल नहीं सकती थी
इसलिए कहा कि तुम दोनों ही 11 परिक्रमा लगा आओ ,,,
राज जानता था कि अगर भगवान को लेकर कोई कमिटमेंट की ,तो काकी बहुत नाराज होती है, इसलिए वह चुपचाप डॉली के साथ परिक्रमा लगाने चला गया ,पत्थरों से बना छोटा सा गणेश मंदिर ,
उसके चारों तरफ ऊंचे ऊंचे आम पीपल नीम और बरगद के वृक्ष ,क्यारियों में लगे हुए रंग बिरंगे फूल ,और चारों तरफ हरी भरी घास का मैदान, सुबह के टाइम मंदिर के धुले हुए पत्थर ,अगरबत्तीयों की खुशबू ,और हवन के धुंए से मंदिर में आकर बहुत अच्छा लग रहा था ,मंदिर की घंटियों की गूंज जब कानों में पड़ती ,तो सकारात्मक एनर्जी का संचार होने लगता ,ऐसे ही सुंदर और मधुर वातावरण में डॉली को एक बार फिर राज से अपनी बात कहने का मौका मिला था
परिक्रमा लगाते हुए डॉली ने धीरे से राज का हाथ पकड़ा ,
और उसके कदम से कदम मिलाकर चलने लगी, राज ने मुस्कुराते हुए डॉली की तरफ देखा ,और कहां सहजादी अब तू मुझसे नाराज तो नहीं है
डॉली ने राज की बात का कोई जवाब नहीं दिया
और कहा! राज आपको पता है
कि शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है हां पता है ,काकी जब भी इस मंदिर आती है तो कोई ना कोई बात शिव के बारे में जरूर बताती है ,,,,
और आपको यह भी पता है कि उन्हें नीलकंठ क्यों कहा जाता है
हां अपन को यह भी पता है क्योंकि,, क्योंकि भोला भंडारी ने बहुत सारा जहर पिया था और इस वजह से उनका कंठ नीला हो गया था ,इसलिए उन्हें नीलकंठ कहते हैं
राज एक बात पूछूं आपसे
अरे तू अपन से बार-बार कयको को पूछती हैं कि,एक बात पूछूँ,,,,
पूछ तेरे को जो कहना है ,बिंदास कह
आपको नहीं लगता की शिव जी गौरी मैया को प्यार से डॉली बुलाते होंगे
डॉली कि इस बात पर राज जोर से ठहाके मारकर हंसने लगा था
महारानी तू भी ना ,कुछ भी लॉजिक लगाती हैं ,,,अरे कायको बुलाते होंगे
उनका नाम तो पार्वती था, गौरी था ,सती था, तो उसी नाम से बुलाते होंगे
नहीं राज जैसे कि शिव जी का नाम नीलकंठ है ,तो नीलकंठ जिसको प्यार करते हैं ,और जिसको सात जन्मो तक अपना बना कर रखा था,,तो वह हो गई ना डॉली यानी कि अपने नीलकंठ के रंग में रंगने वाली डॉली नीलकंठ की डॉली ,,
जैसे कि विष्णु की विष्णु प्रिया ऐसे ही नीलकंठ की डॉली यानि की राज की डॉली..........
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मुझे कोई शॉपिंग नहीं करना
बस मैं यह चाहती हूं ,कि मैं जो कहना चाहती हूं ,आप वह समझ जाए
ठीक है ,अगर तू साफ-साफ नहीं बता सकती, तो भाड़
में जा ,,
अपन जा रहा है सोने ,,अपन को वैसे भी बहुत नींद आ रही है
और कमरे से बाहर निकल गया
डॉली जैसे ही बेड पर लेटने के लिए जाने लगी, कि दोबारा फिर कमरे में आया
और डॉली की दवाई की शीशी हाथ में पकड़ाते हुए बोला ,,,
पहले अपन के सामने ही ये दवा गटक ले अपन फिर जाएगा ,मैं जानता हूं तू अपना गुस्सा दवाइयों पर ही निकालेगी
तेरा नाम डॉली नहीं ,तेरा नाम तो लाल मिर्ची रखना चाहिए ,,,
जब निली ने दवाई पी ली ,तो वापस उसके हाथ से लेकर दवाई अलमारी में रखी और कमरे से निकल गया........
दूसरे दिन सुबह सोमवार था, गांव के बाहर एक बहुत ही खूबसूरत छोटा सा शिव मंदिर है ,डॉली का मन हो रहा था ,कि आज वह उस मंदिर में जाये , यह वही मंदिर था जहां पर काकी अक्सर जाती रहती थी
और पिछली बार डॉली और राज को लेकर गई थी ,और डॉली कि इस मंदिर के प्रति बहुत गहरी आस्था थी
वह जब भी मंदिर जाती ,उसको बहुत शांति मिलती थी ,आज उसने सुबह उठते साथ ही काकी से कह दिया था
की काकी आज मेरा मंदिर जाने का मन है मैं मंदिर जाऊंगी ,,डॉली की बात सुनकर काकी भी झट से तैयार हो गई
जब काकी ने राज से इस बारे में बताया
वैसे तो राज को आज बहुत काम थे
पर उसने डॉली के बारे में सोचते हुए कि उसका पता नहीं वैसे भी किसी बात पर मुंह फूला है ,अगर मेने ने मना कर दिया तो वह और भी नाराज हो जाएगी
इसलिए राज ने मंदिर जाने के लिए हां कह दिया ,और यह भी कहा कि जल्दी ही तैयार हो जाए जिससे मैं 1100 बजे तक वापस आ जाँऊ
डॉली एक बार फिर मंदिर के लिए अच्छे से तैयार होने लगु थी
कुछ ही देर में सभी तैयार हो गए, और पूजा की थाली लगाते हुए डॉली और काकी बाहर आ गई थी
राज ढाबे पर ही कुछ काम समझा रहा था राज ने देखा कि काफी और डॉली बाहर आ चुकी है ,तो वह भी ढाबे से निकलकर जीप निकालने लगा, एक बार फिर डॉली सपनों के ताने-बाने बुनने लगी थी , कि वह राज के हाथ में हाथ डाले हुये मंदिर जा रही हैं
जो वह पिछले तीन-चार दिनों से देख रही थी ,कि आखिर अपने भोलेनाथ को कैसे मनाए ,डॉली को तो अपनी तपस्या पार्वती से भी कठिन नजर आ रही थी
पार्वती ने तो चुपचाप वन में जाकर एकांत में रहकर तपस्या की, और शिव जी प्रसन्न हो गए थे ,पर डॉली के शिवजी तो ऐसे थे जो सब कुछ कहने के बाद
भी ,बताने के बाद भी कुछ समझने के लिए तैयार ही नहीं थे
कुछ ही देर में तीनों मंदिर पहुंच चुके थे मंदिर पहुंचकर काकी ने राज, डॉली से पूजा करवाई, खुद भी पूजा की और पंडित जी से दोनों को आशीर्वाद दिलवाया
पंडित जी ने ध्यान से डॉली का चेहरा देखते हुए उसे आशीर्वाद दिया ,और आरती देते हुए कहा मां जी आप दोनों बच्चों को सामने ही स्थित गणेश मंदिर के 11 परिक्रमा लगवा दें बच्चों के मन में जो भी इच्छा होगी बाबा गणपति जरूर पूरा करेंगे
शिव जी के ठीक सामने गणपति मंदिर था काकी तो इतना चल नहीं सकती थी
इसलिए कहा कि तुम दोनों ही 11 परिक्रमा लगा आओ ,,,
राज जानता था कि अगर भगवान को लेकर कोई कमिटमेंट की ,तो काकी बहुत नाराज होती है, इसलिए वह चुपचाप डॉली के साथ परिक्रमा लगाने चला गया ,पत्थरों से बना छोटा सा गणेश मंदिर ,
उसके चारों तरफ ऊंचे ऊंचे आम पीपल नीम और बरगद के वृक्ष ,क्यारियों में लगे हुए रंग बिरंगे फूल ,और चारों तरफ हरी भरी घास का मैदान, सुबह के टाइम मंदिर के धुले हुए पत्थर ,अगरबत्तीयों की खुशबू ,और हवन के धुंए से मंदिर में आकर बहुत अच्छा लग रहा था ,मंदिर की घंटियों की गूंज जब कानों में पड़ती ,तो सकारात्मक एनर्जी का संचार होने लगता ,ऐसे ही सुंदर और मधुर वातावरण में डॉली को एक बार फिर राज से अपनी बात कहने का मौका मिला था
परिक्रमा लगाते हुए डॉली ने धीरे से राज का हाथ पकड़ा ,
और उसके कदम से कदम मिलाकर चलने लगी, राज ने मुस्कुराते हुए डॉली की तरफ देखा ,और कहां सहजादी अब तू मुझसे नाराज तो नहीं है
डॉली ने राज की बात का कोई जवाब नहीं दिया
और कहा! राज आपको पता है
कि शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है हां पता है ,काकी जब भी इस मंदिर आती है तो कोई ना कोई बात शिव के बारे में जरूर बताती है ,,,,
और आपको यह भी पता है कि उन्हें नीलकंठ क्यों कहा जाता है
हां अपन को यह भी पता है क्योंकि,, क्योंकि भोला भंडारी ने बहुत सारा जहर पिया था और इस वजह से उनका कंठ नीला हो गया था ,इसलिए उन्हें नीलकंठ कहते हैं
राज एक बात पूछूं आपसे
अरे तू अपन से बार-बार कयको को पूछती हैं कि,एक बात पूछूँ,,,,
पूछ तेरे को जो कहना है ,बिंदास कह
आपको नहीं लगता की शिव जी गौरी मैया को प्यार से डॉली बुलाते होंगे
डॉली कि इस बात पर राज जोर से ठहाके मारकर हंसने लगा था
महारानी तू भी ना ,कुछ भी लॉजिक लगाती हैं ,,,अरे कायको बुलाते होंगे
उनका नाम तो पार्वती था, गौरी था ,सती था, तो उसी नाम से बुलाते होंगे
नहीं राज जैसे कि शिव जी का नाम नीलकंठ है ,तो नीलकंठ जिसको प्यार करते हैं ,और जिसको सात जन्मो तक अपना बना कर रखा था,,तो वह हो गई ना डॉली यानी कि अपने नीलकंठ के रंग में रंगने वाली डॉली नीलकंठ की डॉली ,,
जैसे कि विष्णु की विष्णु प्रिया ऐसे ही नीलकंठ की डॉली यानि की राज की डॉली..........
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