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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

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डॉली तो राज के सामने शर्त रख के जा चुकी थी, अब राज का दिमाग खराब हो रहा था ।

एक तो साला मुँह फुला कर गई , और ऊपर से शादी के बाद वाली शर्त भी रख के चली गई ,,,,,,

अपनी तो साला कुछ समझ में ही नहीं आ रहा कि अपन करेगा क्या

कितनी मुश्किल से उसको सब कहने के वास्ते ,,,अपन ने खुद को रेडी किया था।

इस काकी को भी अभी आना था ,और उस पे भी सोने पर सुहागा,,,,

बुआ को साथ लाने की जरूरत थी।

अरे अपन यहां रहता महारानी के साथ

तो बिंदास उसको वह सब बोलता न

जो उसने अपन के गाल पे किया था ,,,,

तो वह भी अपन उसके साथ करता,,,

अपन उससे बात करने ही वाला था

अपन की तो किस्मत ही खराब है,,,,

जब शहज़ादी ये सब करना चाहती थी

तो अपन के भेजे में कुछ नहीं था।

और जब अपन ये सब चाहता है ,तो यह सब करने के लिए महारानी ही अपने पास नहीं है ऊपर से उसकी वो शादी से पहले कि तो ठीक है, बाद में भी शर्त रख दी,,,,कि पूरे आठ महीने तक वो अपने रूम में नहीं आएगी ,,,,,और अपन तो अच्छी तरह से जानता है,,, नंबर वन की जिद्दी लड़की है अगर कल उसने कह दिया कि वी अपन के रूम में नही आएगी,,,,,

तो काकी भी कुछ नहीं कर पाएगी ।

अब तो अपन को कोई मस्त प्लान बनाना ही होगा ,महारानी जो जो चाहती है ,अपन उसके साथ सेम टू सेम वो सब कुछ करे तो ही उसका मूड अच्छा होगा ,वरना सगाई और शादी में भी वो मुँह फुला के बैठी रहेंगी अपनी शादी के एल्बम का कचरा होगा वह अलग, ऊपर से उसकी शर्त,अब तो एक ही उपाय है,,,,

कल अपन को वी सगाई के वास्ते तो मिलेगी ना, जब यहां से शिवमंदिर जाएंगे, तो में शहज़ादी को अपने साथ अपुन की जीप में बैठा लेगा ,,,,,,और सबके लिए किसी दूसरी गाड़ी इंतजाम करेगा,,,

और फिर अपनी जीप को मस्त डेकोरेट करके उस के वास्ते गिफ्ट भी ले लेगा,

और रास्ते मे ही सब कुछ बोल भी देगा

और गाड़ी में साला अपुन के आगे पीछे कौन लगा होगा,,, तो अपन उसको अच्छी सी रसगुल्ले के माफिक ,मीठी और बड़ी-बड़ी किश भी कर लेगा,,,, //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60d.svg

हां यही सही रहेगा, शहज़ादी भी खुश हो जाएगी ,और अपन ने जो आज से पहले ज़िंदगी कभी किया नहीं ,,,,,

तो अपन को भी एक्सपीरियंस होना चाहिए यह सब करने का ,,,,,,,

सच में मुंह फुला कर महारानी कितनी क्यूट लग रही थी ,सच बात तो यह है, कि महारानी कुछ कहे ,न कहे ,अपन खुद भी उससे मिलना मांगता है ।

ये काकी कायको नई समझती,,,

कि अपुन भी हीरो के माफिक महारानी के साथ अकेले में टाइम स्पेंड करना मानता है उसे अपनी बाहों में भर के उसे किस करना मांगता है ।

ये बुड्ढे लोग भी ना,,,,पता नही क्यों, थोड़ी सरके हुए होते हैं ,अपनी काकी को ही देख लो पहले कितनी अच्छी थी ।

जब से पता चला है ,कि अपन शहज़ादी को प्यार करता है ,तो अपन को उससे दूर कर दिया ,,,,,,अरे यह कइको फटे में टांग अढ़ाती है।

अपन जो मांगता है ,अपन को करने दे ना। एक काम करता हूं, काकी के आने से पहले ही ,मैं अपने कमरे में जाकर सोने का नाटक करता हूं ।

वो समझेगी कि अपन सो गया है ।

तो वो भी जल्दी सो जाएंगी, और फिर अपन रात को महारानी से मिलने जाएगा ।

और वो कमला बुआ के घर की दीवाल तो इतनी है ,कि अपन आराम से दूसरी साइड जंप करेगा ना ,तो

भी उसके आंगन में पहुँच जाएगा,,,,,

कमला बुआ और फूफा जी तो सोते हैं नीचे के कमरे में ,,,,उनकी बहू का छोटा सा बेटा होगा ,और ज़रूर महारानी भी उसी के साथ ऊपर सो रही होगी,,,,

अपुन शहज़ादी से मिलेगा और अपना काम फिनिश कर के पीछे के दरवाजे से बापस!

हां यह सही है ,अब मुझे सो जाना चाहिए इससे पहले की काकी घर आए,,,,,,

राज अपने कमरे में पड़ा हुआ ,यह सारी बातें सोच रहा था ।

नींद का नामोनिशान तो आंखों से कोसों दूर था।

अब तो उसे बस डॉली से मिलने की तड़प थी ,,,,,जब उसे दरवाजे पर आवाज़ आई और काकी ने दरवाजा बंद किया ।

तो वह बिल्कुल चुप हो गया, खाना तो खा ही चुका था ।

काकी ने अंदर आकर राज के कमरे में झांका, तो वह गहरी नींद में सोया था ।

काकी जाने के लिए मुड़ी ,लेकिन उसे आज अपने राज पर कुछ ज्यादा ही प्यारा आ रहा था ।

उसे महसूस हो रहा था ,कि राज की खुशी तो डॉली ही थी, लेकिन वह डॉली के लिए यह सब कुछ छोड़ रहा था ।

भगवान ना करे ,अगर ऐसा होता डॉली की शादी विकास से हो जाती, तो मेरा राज एक बार फिर पूरी

ज़िंदगी अकेला रह जाता।

कान्हा जी तेरा लाख-लाख शुक्र है!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

तूने सब कुछ ठीक कर दिया ,इतना सोचते हुए काकी राज के सिरहाने बैठ गई

और उसका सिर सहलाने लगी ।

राज किसी मासूम बच्चे की तरह दिख रहा था ,जिसका मन बिल्कुल साफ था ।

काकी उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसकी आने वाली जिंदगी की खुशियों के बारे में सोच रही थी।

कितना अच्छा लगेगा, जब डॉली घर में राज की दुल्हन बनकर आएगी ।

तो छोटे-छोटे बच्चे होंगे ,मेरा राज भी घर गृहस्थी के सुख भोगेगा ।

बरसो की दबी हुई मेरी इच्छा पूरी होगी ।

डॉली के आने से यह मकान घर बन गया था लेकिन अब यह घर स्वर्ग बन जाएगा।

राज के साथ-साथ भगवान ने एक डॉली जैसी अच्छी बेटी भी दे दी मुझे ,हम तीनों का भले ही आपस में कोई रिश्ता ना ही ।

पर ऊपर वाले ने कितनी मजबूती से बांध रखा है ,हम तीनो ही एक दूसरे को कितना प्यार करते हैं ,और भगवान करें यह प्यार हमेशा ऐसे ही बना रहे ,,,,,,,,

यह सब सोचते हुए जब ख़ुशी के दो आंसू काकी की आँखों से ढरक कर राज के गाल पर गिरे ,,,,

तो उसने आंखें खोली ,,,,

वह जग तो बैसे भी रहा था।

उसने काकी को देखा तो वह अपने पल्लू से अपनी आंखें पोछती नजर आई,,,,,

राज जल्दी से उठ कर बैठ गया और काकी को देखते हुए पूछा

काकी क्या हुआ, तू कायको रोती है

जरूर उस बुआ ने ही कुछ कहा होगा

अरे ,,,नहीं ,,राज तू तो पागल है ,,,

बेमतलब बेचारी बुआ के पीछे पड़ा है ।

राज बुदबुदाया बेमतलब कहां!

मेरे सारे प्लान का कचरा तो, उस बुआ की वजह से ही हुआ है।

सारा गुड़ गोबर कर के गई , डॉली आज यहाँ होती ,तो अपन ऊपर के कमरे में अपनी शहज़ादी को प्रपोज कर रहा होता ।

राज तू क्या बोल रहा है

अरे कुछ नहीं काकी,,,,

अपुन तो पूछ रहा था ,कि तू क्यों रो रही है जरुर तुझे महारानी के जाने का बुरा लग रहा होगा,,,, तू एक बार बोल अभी के अभी लेकर आता है उसे,,,,,,

ये बात नही है राज,,,8 दिन बाद तो वह आने ही वाली है ।

हां काकी और आते ही उसकी बकवास शुरु हो जाएगी ,,,तुझे रोने का नहीं ,,,

राज बेटा ये आंसू तो तेरी और डॉली की खुशी के लिए है, जो सालों बाद भगवान ने मुझे दिए हैं ।

राज तू भी कितना भोला है

तू अपने प्यार को समझ नहीं पाया

अरे वो मासूम सी बच्ची सबकुछ समझ गई वी इतनी छोटी है तुझसे !

उसे तो अपने प्यार का एहसास हो गया था तेरी बुद्धि कहां गई थी

कि तू उसके समझाने के बाद भी क्यों समझना नहीं चाहता था बेटा

आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी

राज के चेहरे का सारा गुस्सा जा चुका था उसके चेहरे पर एक हल्की की सी मुस्कान थी

उसने काकी की तरफ देखते हुए कहा

काकी हमने उसे सहारा दिया ,,तूने उसकी हिम्मत बढ़ाई,,,,और वो अपनी मेहनत से इतने आगे गई ,काफी अपन नहीं चाहता था

वो इस बस्ती में अपन के साथ रहकर अपना

फ़्यूचर बर्बाद करे ।

सभी तो थी कहते कि, अपन ने उसको सहारा दिया तो ,उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उससे शादी कर ली।

अरे अपन तो कहीं से भी उसके लायक ही नहीं है, न अपन पढ़ा लिखा है ,ना उस की उम्र का है ,अपने तो साले खानदान का भी अता-पता नहीं है।

महारानी के मां बाप का नाम पता तो है। और इससे अपन ने महारानी के वास्ते विकास को चुना था।

कि विकास का साथ उसे मिलेगा तो वह बहुत ऊपर तक जाएगी ,बहुत तरक्की करेगी ।

राज की मासूमियत देख कर काकी का दिल और भी पिघल गया था ।

उसने राज के गाल पर हाथ रखते हुये समझाया ,,,,,,

बेटा सिर्फ पढ़ने लिखने से ,या नौकरी करने से हम किसी के लायक नहीं बन जाते

पूरे गांव के साथ-साथ ,भगवान भी जानता है , कि तू डॉली की हिम्मत है ।

उस का सहारा तू बना है ,तेरी वजह से डॉली आगे बढ़ी है ,तूने देखा नहीं था

जब परीक्षा देने जाती थी ,तो कैसे घबरा जाती थी ,और तू उससे पत्थर नहर में फेकने को देता था ।

और तब उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती थी जब डॉली का रिजल्ट आया था, तो पूरे गांव में मिठाई बाँटी थी तूने ।

जब उसकी नौकरी लगी थी ,तो पूरे ढाबे को दावत दी थी ,उसके लिए नई किताबें लाना नए कपड़े लाना ,उसके साथ स्कूल जाकर उसका हौसला बड़ाना।

बेटा डॉली को तूने आगे बढ़ाया है

विकास ने नहीं ,तेरी वजह से आज डॉली इस जगह पर है ,विकास की वजह से नहीं!

और मुझे पूरा विश्वास हमारी डॉली को तेरा साथ मिलेगा, तो वह बहुत आगे जाएगी।

तू तो डॉली की हिम्मत है, उस की ताकत है तेरे साथ बिखरेगी नहीं ,,,,

बल्कि निखर जाएगी ,,जैसे अभी तक निखर रही है।

राज तू बहुत भोला है, तूने सोचा भी केसे कि विकास

के साथ शहर में रहने से या नौकरी में तरक्की करने से डॉली का भविष्य बन जाएगा,,,,,

उसका भविष्य तू है ,तेरे साथ उसकी खुशियां है ,अगर डॉली खुश ही नहीं रहेगी तो उसकी तरक्की का क्या मतलब ,,,,

तू वो बात भूल गया ,जब डॉली इस घर में आई ,तो सिर्फ 16 साल की एक दरी सहमी और मासूम लड़की थी ।

उसका विश्वास इस दुनिया से उठ चुका था उसे तू मिला ,मैं मिली और धीरे-धीरे वह हम दोनों में ही रह गई,,, हम दोनों उसके लिए पूरी दुनिया है ।

हमसे मिलकर उसने सीखा कि विश्वास किसे कहते हैं

डॉली हमारे साथ रहने लगी,और 5 सालों में ही , 50 साल की तरह इस का रिश्ता हमसे बन गया है ।

क्या ये सब छोड़ के वह खुश रह पाएगी और से सबसे बड़ी बात ,उसे तुझसे अपने प्यार की अनुभूति का एहसास हो गया है और इस बात का एहसास डॉली के कान्हा जी ने उसे करवाया है, जो कभी गलत नहीं हो सकता ,,,,,

राज तू डॉली के रास्ते की रुकावट नहीं उसका सहारा है।

डॉली का भविष्य ,उसकी तरक्की तेरे साथ ही है ,,,,

क्या तू जानता है

अरे कैसे जानता होगा ,तुझे तो हमने कुछ बताया ही नहीं ,,,

काकी क्या

राज काकी को देखने लगा,,,
 
राज यह जो नौटंकी मैंने डॉली के साथ मिलकर की थी ना !

यह ऐसे ही नहीं हो गई ,,इसमें पूरे 15 दिन का प्लान शामिल था ।

काकी क्या मुझे तो कुछ भी नहीं पता! बताना !!!!

तो सुन,,,,

जिस दिन मैं और तू विकास के यहाँ से डॉली का रिश्ता पक्का कर के आए थे ।

वहां से आने के बाद ,डॉली मेरे गले लग कर रोने लगी थी ।

मैंने भी देखा, कि दूर-दूर तक उसके चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी , सिर्फ दुख ही थे।

मैं यह तो समझ रही थी ,कि डॉली इस रिश्ते से खुश नहीं है ,पर मुझे लगता था ,कि शायद हर लड़की के मन में ब्याह से पहले कुछ ऐसे ही भाव होते होगे,,,,,,

लेकिन कुछ देर बाद मैंने नीले के आंसुओं में इक अजीब सा दर्द देखा था,जो बहुत गहरा था ,और तुझे याद है, कि तू अपने दोस्त के यहाँ रुक गया था।

उस रात में और डॉली घर में अकेले ही थे,,

राज मेने डॉली को बेटी मानकर पाला है में समझ गई कि कोई तो बात है,,,,

मेरे पूछते ही ,,,,,

उसके सब्र का बांध टूट गया,,, उसने वो सारी बातें मुझे सुना दी ,,,जो उसने तेरे साथ की थी ,,,तूझे बताने के लिए कि वह तुझसे कितना प्यार करती है ।

तेरा उसको सिनेमा ले जाना ,,,

उसका तुझसे प्रेम का इजहार करना,,,,,

काकी महारानी तेरे को सब कुछ बता चुकी,,,,

हां वह मुझे खुद ही सब कुछ बता चुकी है उसने खुद मुझसे कहा था ,और उसने यह भी कहा था ,कि वह बहुत कोशिश कर चुकी है ,,,,

और तू इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है

और काकी मैं तो राज को ही सब कुछ मान चुकी हूं ।

अब मेरी शादी होगी ,तो सिर्फ राज से ही होगी,,,,या मैं पूरी ज़िंदगी कुवारी ही रहूंगी

मैं किसी और से शादी करना तो क्या!

उसके बारे में सोच भी नहीं सकती

यह मेरा फैसला है।

और तुझे पता ,,,,बुद्धू कहीं का!

कि उसने क्या कहा

हां काकी क्या कहा था

उसी रात उसने अपनी अटैची लगा ली थी और वह कह रही थी ,उसकी सुपरवाइजर की नौकरी तो लगी गई है ,और वह यहाँ के आसपास से किसी भी गांव ने अपना हैडक्वाटर बना सकती है ।

तो वह कल ही ये गाँव छोड़ कर जा रही है और अलग जाकर रहेगी ,,,,

अब राज को अपनी मनमानी करने दो

मैं भी देखती हूं ,कि वह कब तक मेरी बात नहीं मानते !

और जब तक मुझसे शादी नहीं करते

तब तक मैं इस घर मे वापस नहीं आऊंगी

मैं अकेले ही रहूंगी ,,,,,,,

यहां तक कि उसने फोन कर के विकास को भी सब कुछ बता दिया था ।

कि वो सिर्फ राज की है ।

क्योंकि वह नहीं चाहती थी ,कि विकास के साथ कोई धोखा हो ,या फिर उनसे झूठ बोले,,,,,,,,,,

पर काकी तूने मुझे बताया क्यों नही

कि डॉली ये सब कर रही है।

राज मेरी पूरी बात तो सुन ले ,तुझे बता के भी करती क्या

क्या तू डॉली को नहीं जानता ,जब अपनी पर आ जाती है।

तो भोलानाथ भी उसे रोक नहीं पाते उसका तो पूरा विचार था ,कि वह सुबह इस घर से निकल जाएगी ,पर भला मैं अपनी बच्ची को कैसे जाने देती।

मैं जितना डॉली को प्यार करती हूं

कहीं ना कहीं उससे ज्यादा मैं तुझे प्यार करती हूं।

मुझे इस बात का एहसास तो था ,कि तुम दोनों एक दूसरे को बहुत समझते हो लेकिन यह समझ में नहीं आता था।

कि डॉली तुम्हें अपना सब कुछ मान चुकी है ,और मैंने देखा कि सच में तू डॉली के बिना रह नहीं पाएगा ,और फिर मजबूरी में मुझे यह सारा नाटक करवाना पड़ा,,,,,

क्या

काकी ये सब तूने करवाया था

और नहीं तो क्या मैं अपनी बच्ची को जाता और तुझे ऐसा अकेला देख लेती क्या,,,,,,

फिर मैंने डॉली को कसम दी ,कि डॉली जिस तारीख में तेरी शादी तय हुई है

उसी तारीख में तेरी शादी में राज के साथ करवाऊंगी ,,,,,

निधि को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा था ।

पर वह मानने को तैयार नहीं थी,कि जब राज ने मेरी बात नहीं मानी ,तो आपकी बात कैसे मानेगे,,,,,

पर मैंने कहा, कि डॉली उम्र में और तजुर्बे मैं तुझसे बड़ी हूं ,और ये मत भूल कि राज की भी काकी हूँ।

अब बस तू देख, कि मैं क्या करती हूं

बस में जितना कह रही हूं , तू उतना कर लेकिन मैं अकेली ये सब नहीं कर सकती थी।

इसलिए मुझे विकास को पूनम को और छोटू को अपने साथ मिलाना पड़ा।

राज बहुत ध्यान से काकी को देख रहा था ।

हां सिवा और उसके बाद बातों के सिलसिले में विकास और पूनम भी कई बार मिले थे ।

और इसीलिए वह दोनो एक दूसरे को पसंद करने लगे ,और फिर हम लोगों ने सारा नाटक किया ,,,,

जब सुबह पूनम यहां से गई थी ना

तो थैले में मैंने कुछ बर्फ और शहद कि शीशी रख फ़ी थी,,,,,

जिस पर पूनम ने जहर लिख दिया

और पूनम ने जल्दी से उसके हाथ पैरों पर जाके बर्फ भी मल दी थी।

और जब तूने उसके हाथ छुए तो तू और भी डर गया ,और वह डॉक्टर

जो अपने गांव का नहीं था

काकी हंसते हुए बोली,,,,,

अरे वो डाक्टर नहीं था, वो तो विकास के ऑफिस का कोई कर्मचारी था

नकली डॉक्टर बन गया था ।

और इसी लिए उसने ऐसा बोला था।

और फिर मैंने तेरे मुंह से एक-एक बात सबके सामने उगलवाली थी ।

और तूने भी सबकुछ स्वीकार कर लिया मुझे तो तेरी और डॉली की खुशी चाहिए थी ।

जो मुझे मिल गई,,,,,

राज ध्यान से काकी को देखता रह गया काकी तू भी झक्कास है ।

बूढ़ी हड्डियो के साथ भी तेरा दिमाग कितना चलता है ,,,

अपुन तेरे को सलाम करता है,,,,,,,,,

हां राज कर ले सलाम ,,,,

क्योंकि अब तो तुझे डॉली को भी सलाम करने की आदत डालनी पड़ेगी।

तो तुझे क्या लगा था ,कि डॉली मर जाएगी ,जहर पी के अपनी जिंदगी खत्म कर लेगी ।

अरे ये बात बहुत गलत सोचता है तू हमारी डॉली ऐसी

नहीं है ।

वह बहुत हिम्मत और संघर्ष करने वाली लड़की है ,तूने देखा नहीं ,उसके मां बाप छोड़कर चले गये, उसने झाड़ू पोछे का काम किया ,अपने मामा और सौतेली मां से पीछा छुड़ाते हुये वह यहां आई ।

और हमने हिम्मत बढ़ाई ,पर आगे तो वही बड़ी ,,,,,,,

तुझे क्या लगा, कि वो अपनी जिंदगी को खत्म कर लेगी, यहां से चली जाएगी राज डॉली समझती है ,की आत्महत्या करना बहुत बड़ा पाप है ,आत्महत्या तो कायर लोग करते हैं, जो अपनी जिंदगी से लड़ नहीं पाते ,हमारी डॉली कायर नहीं है ,उसने तो तुझे पाने के लिए सब कुछ किया ,जब तू नहीं माना तो वह उसका तरीका था ।

कि वो अलग रहे के, तुझे तेरे प्यार का एहसास करवाये,,,,,,

लेकिन बेटा मेरी आंखें थक गई है

तेरी गृहस्थी बसते देखने के लीये,,,,

डॉली वहां रहती,कितने दिन बाद तू मानता ,,,,कब तेरा ब्याह होता ,,,

इसलिए मैंने जल्द ही तुम दोनों के ब्याह कराने का निश्चय कर लिया था ।

और मैं भी तो अपने नाती पोतों का मुँह देखना चाहती हूँ,,,;

अरे काकी पोतों का मुँह तो तू तब देखेगी जब महारानी मेरे पास आएगी, उसने तो अपुन के सामने ये शर्त रख दी है,,, अगर अपुन पूरी नहीं कर पाया ,तो 8 महीने तो

तुझे खुशखबरी सुनने को ही नहीं मिलेगी ,,,,,

काकी राज की तरफ देखते हुये बोली,,,,,ठीक से बता न क्या बड़बड़ाये जा रहा है।

काकी वो क्या है, कि शहज़ादी ने कहा है कि वह मेरे,,,,,,,

इतना कहते कहते राज रुक गया

अगर उसने काफी को बता दिया

और काकी ने कोई लफड़ा किया, फिर तो अपन उसे पूरा नहीं कर पाएगा।

काकी कुछ नहीं ,,बस ऐसे ही ,,

अरे कुछ कैसे नहीं राज,,,

मैं तेरे चेहरे से समझ चाहती हूं

कि तुझे कोई परेशानी है ।

हां काकी अपुन सोच रहा था, कि आजकल सगाई में कुछ गिफ्ट भी देते हैं ना

तो शहज़ादी को क्या देगा ,,,

तू कुछ आईडिया दे ना ,,,,

काकी ने प्यार से राज के गाल पर एक चपत लगाते हुए कहा,,,,

क्या राज कब तक बच्चा बना रहेगा, कल तेरी सगाई ,और 8 दिन बाद तेरी शादी के लिये मैंने इतना कर दिया है ।

अब मुझे बीच में मतलब ला।

तू जाने और डॉली जाने ,अरे अपनी भी तो कुछ बुद्धि लगा ,कि सब कुछ अपनी काकी से ही पूछता रहेगा।

बेटा अब सो जा ,सुबह भी जल्दी उठना है इतना कहते

हुए काकी अपने कमरे में चली गई ,और राज सोचने लगा ,कि आखिर वह डॉली को क्या दे

राज ने बहुत सोचा पर हर बार उसे एक ही बात याद आई ,एक थी वो चीज थी ।

जिससे डॉली को सबसे ज्यादा प्यार था।

तब राज ने डिसाइड कर लिया ,कि वह डॉली को वही देगा ,,,,

बहुत खुश था ,डॉली को उसकी मनपसंद की गिफ्ट मिल जाएगी ,,,,,

एक काम तो हो गया ,,,,

लेकिन अभी दूसरा काम बाकी था

और वो यही की डॉली की शर्त को कैसे पूरा

किया जाए ,,,,

राज की आंखों में नींद तो दूर ,दूर तक नहीं थी ।

उसे रह रह के वो सब कुछ याद आ रहा था जो डॉली ने उसके साथ किया था ।

और अब उसे वही सब डॉली के साथ भी करना था ।

जब उसने देखा , की काकी सो गई है

तो चुपचाप घर से निकला ,,,,

और बुआ के यहाँ पहुँच गया,,, रात के 1200 बज रहे थे,,,,

जब वहाँ जाकर देखा और जैसे ही सोचने लगा ,कि अंदर कैसे जाया जाए, तब तक बुआ के आंगन की लाइट जली ,और तभी बुआ दरवाजा खोलकर बाहर आ गई,,, राजनी सोचने लगा ,,,,ये साला बुआ के अंदर किसीकी आत्मा है ,, इसको कैसे पता कि अपन

दरवाजे पर है

एकदम से इसने तो अपन को डरा ही दिया बुआ ने ध्यान से राज को देखते हुए कहा

राज बेटा इतनी रात को यहां क्या करने आया है तू

अरे बुआ वो अपन को शहज़ादी से ना कुछ अर्जेंट था,,,मतलब वो अपना कुछ जरुरी सामान भूल गई थी, तो अपन बस उसे वही देने आया,,,, अपन अभी उसको दे कर आता है ।

बुआ कुछ कहती, इससे पहले राज भागता हुआ ऊपर के कमरे में चला गया ,,,

जहां जाकर देखा कि डॉली चादर ओढ़कर बेड पर सो रही है ,डॉली को देखकर राज की जान में जान आई, उसने खुद को रेडी किया , डॉली से वह सब कहने के लिए

और हाथ मलते हुए एक दो चक्कर यहां से वहां लगाने के बाद ,डॉली के पास आकर बैठ गया , वह धीरे-धीरे बोल कर प्रैक्टिस करने लगा था।

शहज़ादी आई लव यू ,,,,,

अपन तेरे से सच्चा वाला लव करता है

और देख यह तो अपन के उल्टे हाथ की बात है ,तेरे ने अपुन को चैलेंज दिया

और अपन आज के आज ही उसको फिनिश भी कर देगा ।

अपन तेरे को इंटरेस्ट के साथ तेरी किस वापस करने के वास्ते आया ,,,,

तूने अपन को एक ही बार किया था ना अपन तेरे को

9 गुना इंटरेस्ट देगा ।।

मतलब कि पूरे 10 किस एक साथ करने वाला है ।

अब तू रेडी हो जा अपने किस के लिए,,,,

राज बहुत एक्साइटिड था ।

धीरे-धीरे डॉली का चादर नीचे करते हुए अपने होठों को उसकी तरफ बढ़ा रहा था उसने सोचा पहले धीरे से उसके कान में

आई लव यू बोल देता है ।

शहज़ादी यार तू सो रही है,उठ न,अपुन तेरे से वो सब कहने के वास्ते आया है ।

उठना तू इतनी जल्दी सो गई ,,,,

और एक साला अपन है कि,अपनी आंखों से नींद कोसों दूर है ,,,,

सहजादी उठ ,,,,,

राजनी धीरे से डॉली का हाथ पकड़ा

और चादर खींचते हुए जैसे ,ही डॉली को किस करने के लिए झुका ,कि सामने बड़ी-बड़ी मूछों वाले फूफा जी का चेहरा आ गया, जो घोड़े बेचकर खर्राटे लेते हुए सो रहे थे।

अच्छा हुआ कि किस करने से पहले ही राज को उनकी ,भयानक शक्ल दिख गई ,राज डरते हुए पीछे हटा, और अपने सीने पे हाथ रख एक ठंडी सांस ली ओ,,,तेरी,,,,ये फूफा यहाँ कहाँ से आ गया,,,, अरे तू ऊपर कयके लिए आ गया ,,,,तुझे तो नीचे कमला बुआ के साथ होना चाहिए

क्या कमला बुआ ने भी तेरे सामने कोई शर्त रख दी है

तुझे अपने कमरे से कल्टी काट दिया है

राज की सांसें अब भी ऊपर नीचे हो रही थी,,,, फूफाजी गहरी नींद से जागते ,इससे पहले राज ने धीरे से उन्हें चादर उड़ाया

और वापस नीचे आ गया ।

नीचे देखा तो बुआ राज का इंतजार कर रही थी ।

राज को देखकर बोली,,, राज डॉली नीचे मेरे साथ सो रही है ।

अरे आठ दिन बाद उसकी शादी होने वाली है ,और बन्नो रानी को बड़े बूढ़ों के साथ सुलाया जाता है ।

उसे ऊपर अकेले कैसे सोने देती

ऊपर डॉली के फूफा जी और उसका भाई सो रहे हैं ।

और डॉली मेरे साथ नीचे सो रही है

राज के पास सामान तो कुछ था नहीं

जो वह उसको देता,,,
 
राज ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा

अपुन सामान लाना तो भूल ही गया,,,,,

पर महारानी कहा है

अपुन एक बार उससे मिल लेता है

वह क्या सोचेगी, कि अपन यहां तक आया और उससे मिले बिना ही चला गया ।

अच्छा नहीं लगता ना !☺

बुआ ने राज को देखते हुए कहा!

हां हां बेटा मिल ले ,अभी सोई नहीं है मोबाइल चला रही है ।

आजा मैं उसे तुझसे मिलवा देती हूं।

बुआ तू अपना काम कर ,मस्त ,जो भी तेरे पास काम है,,,,

अपन महारानी से मिलकर आता है

अरे बेटा 1200 बजे रात को मुझे कौन सा काम है ।

मुझे तो गाड़ी की आवाज सुनाई दी

तेरी bullet की,,, और मैं पहचानती हूं

उसकी आवाज ,,,, तो बस देखने चली आई थी ।

चल मिलवा देती हूं,,,,,

राज बुआ के पीछे ही बुरा सा मुँह बनाते हुए आ रहा था ।

तू साथ मे जाएगी तो अपन क्या खाक मिल पाएगा उस से ।

जैसे ही वह डॉली के पास आया,,,

जब देखा तो डॉली राज को देखकर भौचक्की रह गई थी ।

सिवा इतनी रात को आप यहां

शहज़ादी अपन तेरे से ही मिलने आया था ।तेरा कुछ जरुरी सामान छूट गया था न

जो तू ,,,,एक बार रात को तूने अपन को दिया था , तो बस अपन वहीं वापस करने के बास्ते आया था ।

पर देखना सामान लाना तो अपन भूल ही गया , पर तू चिंता मत ,कर अपन कल तेरे को दे जाएगा,,,,

ईतना कहते हुये वह थोड़ी देर यहां बैठा और वापस घर आ गया,,,,

उसका यह वाला वार भी खाली गया था।

राज की आंखों में अब तक फूफा का चेहरा घूम रहा

था ।

कहां अपन शहज़ादी को किस करने वाला था ।

और कहां वो खतरनाक फूफा निकला हे भगवान आज तूने ,बचा लिया ,,,,

यहीं सोचते हुए की अब कैसे शहज़ादी की शर्त को पूरा करेगा !

राज को नींद आ गई थी।

आज सुबह से ही राज और काकी तो उठ ही गए थे, क्योंकि सुबह सवेरे ही शिव मंदिर के लिए निकलना था,सगाई के लिये। आसपास के कुछ लोग भी काकी की मदद करवाने आ गए थे ,यही कोई 5,7 लोग बुआ की तरफ से थे ,और 10,12 काकी की तरफ से ,,,,,

डॉली भी बुआ के यहां तैयार हो चुकी थी काकी ने जो गुलाबी कलर की साड़ी उसे सगाई के लिए दिलाई थी , उसे पहनकर डॉली वो खुद को सबांर रही थी,,,,

लेकिन अभी भी डॉली के मन में शांति नहीं थी।

उसे एक ही बात की परेशानी थी ,कि पता नहीं राज उसकी शर्त पूरी कर भी पाएंगे कि नहीं ,और मन ही मन उसने गुस्सा होते हुए निश्चय भी कर लिया था ।

कि अगर राज ने अपनी शर्त पूरी नहीं की तो चाहे कुछ भी कर लें, पूरे 8 महीने मेरे पास भी नहीं आ पाएंगे ।

ऐसा कुछ सोचते हुए वह तैयार होती जा रही थी।

जब तैयार होकर खुद को आईने में देखा

तो सच में वो डॉली लग ही नहीं रही थी ।

चाहे भले ही राज के तन का प्यार उसे ना मिला हो,,,,पर राज के मन के प्यार का रंग डॉली के ऊपर चढ़ चुका था ।

और उसका निखार भी उसके चेहरे पर दिखने लगा था ।

उसने आज अच्छी तरह से मेकअप किया था, होठों पर

पिंक लिपस्टिक लगाई ,माथे पर बिंदी लगाई ,कानों में झुमके डाले,जैसे काकी देखना चाहती थी ।

बिल्कुल उसी तरह तैयार हुई थी वह।

काकी का फोन आया , डॉली बेटा तैयार है तू तो हम तुझे लेने आ जाये,,,,

डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा ,कि मैं तैयार हूं और एक बार आकर आप भी मुझे देख लो अगर कुछ कमी रह गई हो ,तो मुझे नहीं पता आप बता देना, मैं जल्दी से कर लूंगी।

ठीक है बेटा ,इतना कहते हुए काकी ने फोन रखा ,और जल्दी जल्दी सामान समैटते हुए गाड़ी में रखवाया ,,,,,,

राज ने अच्छी तरह से जीप को डेकोरेट कर लिया था ,,,,,

वह पूरे मूड में था ,कि सबको दूसरी गाड़ी से पहले निकाल देगा ।

काकी ने घर का ताला लगाया ,,,कन्हैया और मोहल्ले के कुछ लोग और भी साथ में थे दोनों गाड़ियां बुआ के घर की तरफ ले ली जैसे ही बुआ फूफा जी बाहर निकले,,,,

तुरंत दूसरी बड़ी बोलेरो का गेट खोलते हुए बुआ को बैठने के लिए कहा!

फूफा जी तो फटाफट आगे कि सीट पर जा बैठे ,,,काकी ,कन्हैया ,और छोटू बीच में ही बैठे हुए थे ,और पीछे डॉली की दो-तीन खास सहेलियां थी ,जिन्हें वह बचपन से ही अपनी पक्की सहेली मानती आई थी।

वह बैठी थी ,अब बीच में एक ही सीट खाली थी ,,,,,

राज ने फटाफट बुआ को बुलाया ,,,

बुआ !!! जल्दी आ हमें देर हो रही है

बुआ जी अपनी सरकती हुई साड़ी के पल्लू को समेटे हुए गाड़ी की तरफ बढ़ रही थी ,बगल में ही राज की जीप थी जिसमें पीछे सामान रखा था ,और सिर्फ ड्राइविंग सीट के साथ आगे की सीट खाली थी ,जिस पर राज डॉली को बैठाने वाला था बुआ जैसे ही बोलेरो में चढ़ने लगी ,,,,

कि उन्हें बगल में राज की खुली जीप दिखाई दी,,,,

और ये कहते हुए रुक गई ,,,,,

कि राज बंद गाड़ी में तो मुझे उल्टी होती है मैं बंद गाड़ी में नहीं बैठ सकती,,,,

अरे जब उसके गेट बंद हो जाते हैं ,तो ऐसे लगता है ,कि दम घुट रहा है ।

मैं सबके साथ साथ अपने कपड़े भी खराब कर लूंगी,,,,

इसलिए एक काम कर तू बंद गाड़ी में डॉली को बैठा दे,और तेरे बगल में जो सीट है

मैं उस में बैठ जाती हूं ,खुली हवा लगेगी तो मन भी अच्छा रहेगा,,,,उल्टी भी नही होगी। इतना सुनते ही राज की शक्ल पर 1200 बज गए थे ,,, खींजते हुए बोला,,,,

अरे बुआ तू काहे को जाते-जाते टंटे करती है ,,,,गाड़ी में बैठना मस्त ऐ सी भी लगा है

तेरे बाल भी खराब नहीं होंगे ,और साड़ी भी नहीं उड़ेगी ,,,,

खुली जीप में कहीं हवा से बीमार हो गई तो शादी का काम कैसे संभालेगी

अरे ना बेटा ,,,बीमार तो मैं बंद गाड़ी में हो जाऊंगी ,खुली जीप में नहीं ,,,,

तब तक फूफा जी भी आगे से रौब दार आबाज़ में बोले ,,,,,,

हां राज इस बुआ को तू अपने साथ ही बैठा ले वरना अपने साथ-साथ उल्टी कर कर के हम सब के कपड़े भी खराब कर देगी।

अरे कभी बंद गाड़ी में बैठी हो तब तो इसको बंद गाड़ी में बैठने का ढंग हो,,,

काकी भी उनका साथ देने लगी,,,

राज तू क्यों जिद पर अड़ा है

वह इसमे बैठना नहीं चाहती,,,,

तो तू क्यों जबरदस्ती कर रहा है ।

हम पहले ही लेट हो चुके हैं ,मुहूर्त पर पहुंचना है कि नहीं

डॉली चुपचाप राज की आंखों में देख रही थी ,उसे पता था कि,राज ने कोशिश तो की है पर वो फेल हो गई है,,,,

बुआ तो अड़ गई थी, कि वह बंद गाड़ी में नहीं बैठेगी ,,,,

और वह डॉली का कन्यादान लेने वाली थी तो भला एक मां होने के नाते ऐसा कैसे हो सकता था ,कि वह न जाए,,,,

राज कुछ नहीं बोल पाया, और मन ही मन पर

बढ़बढ़ाता हुआ,,,, आगे कि सीट पर बैठ गया ,,,,

वह मुड़ मुड़ के डॉली को देखता जा रहा था गुलाबी साड़ी में कितनी सुंदर लग रही थी डॉली ,,,,वह जैसे उसको देखना चाहता था बिल्कुल वैसे ही ,,,,सुर्ख मेकअप ,गुलाबी साड़ी ,और उसमें चमकता हुआ डॉली का गोरा रंग,,,,,,

राज इमैजिनेशन कर रहा था ,कि काश डॉली उसके साथ होती, तो कितना अच्छा होता,,,,,,,

पर अब तक डॉली सब के साथ बोलेरो में बैठ चुकी थी ।

और मजबूरन मोटी बुआ ,राज के बगल वाली आगे की सीट पर ,,,,,,

राज ने एक बार भी, ना तो बुआ को देखा ना ही उनसे कोई बात की ,,,,

वह बात न करते हुए खुन्नस निकाल रहा था सब कुछ धरा का धरा रह गया ।

थोड़ी देर बाद सभी शिव मंदिर पहुंच चुके थे पंडित जी इनका इंतजार ही कर रहे थे ।

पहले से राज ने 3,4 लड़कों को वहाँ भेज दिया था ,जिन्होंने मंदिर में फूलों से थोड़ी सी सजावट भी कर दी थी ।

भगवान के दर्शन कीए और भगवान के आशीर्वाद से ही मंत्र उपचार की विधि से पंडित जी ने दोनों की सगाई संपन्न करवाई

डॉली की गोद भराई हुई ,और काकी ने राज की मां होने के नाते डॉली को एक सुंदर सी गले की चैन पहना

दी।

अब बारी थी राज डॉली कि, दोनों ने एक दूसरे को रिंग पहनाई, और एक एक रसगुल्ला दोनों को खिलाया ,जब बारी आई गिफ्ट देने की ,तो राज ने गाड़ी की तरफ गया, और गाड़ी में से एक बड़ा सा कार्टून उठाते हुये, डॉली के पास आ गया ,,,

यही कोई दो Y दो का वर्गाकार कार्टून था ।

जब उसने डॉली को देना चाहा ,तो डॉली ठीक से उसे पकड़ ही नहीं पाई ,वह काफी भारी था।

डॉली ने दोनों हाथों से पकड़ने की कोशिश की ,तब कहीं जाकर मुश्किल से उस डिब्बे को संभाल पाई,,,,,

लेकिन अभी राज ने वो कार्टून डॉली के साथ पकड़ के रखा था ।

सब राज की तरफ देखने लगे ,,,,

राज भैया आखिर ऐसा क्या है इस कार्टून में जो इतना भारी है

डॉली भाभी इसे ठीक से पकड़ ही नहीं पा रही है ।

कौनसा खजाना ला कर दिया है डॉली भाभी को

राज ने कहा यह अपुन के लिए किसी खजाने से कम नहीं है ,और सहजादी के लिए भी ,,,,,,

अभी तो कार्टून खोलने के बाद ही पता चलेगा, कि उसमें क्या है ,सभी डॉली से कार्टून खोलने के लिए कहने लगे ,,,,

डॉली ने आंखों ही आंखों में राज से पूछा कि क्या वह सबके सामने कार्टून खोल सकती है और राज ने डॉली को हां में इशारा किया कि हां खोल सकती है ,,,,,,

बीच में रखी हुई टेबल पर वो कार्टून रखते हुये, डॉली उसे खोलने लगी,,,,,,

लेकिन इतनी देर के लिए भी किसी को सब्र नहीं हो रहा था ,,,,

सब लगातार एक ही बात पूछे जा रहे थे भैया ऐसा गिफ्ट तो पहली बार देखा है

कि कोई अपनी मंगेतर को इतना भारी गिफ्ट दे रहा है,,जो वह उठा भी नहीं पा रही हां छोटू !!!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg अपुन का स्टाइल ही कुछ ऐसा है ,और जो गिफ्ट अपन महारानी के बास्ते लाया है ना ,,,,

अपन हमेशा पूरी जिंदगी उसको वह गिफ्ट देना चाहेगा ,अपन ने कल ही शहर से आर्डर करके उसके बास्ते मंगवाया है यह गिफ्ट। शहर से महारानी के वास्ते इससे अच्छा गिफ्ट तो कोई हो ही नहीं सकता ,डॉली गिफ्ट खोल रही थी, और राज डॉली को देखकर एक बार फिर कहने लगा ,,,

महारानी खोल तेरे वास्ते झक्कास गिफ्ट लेकर आया है ,,,,

और हां जो मैं लाया हूं ,तू बराबर उसका यूज़ करेगी ,यह भी पहले ही समझ ले कान खोल कर सुन ले,,,,,,,

राज की बात पर काकी और बुआ सभी हंसने लगे ,,,,,

राज तू उसे गिफ्ट दे रहा है ,या कोई धमकी अरे आज तेरी सगाई है ,आज तो प्यार से बोल ले ,,,,

राज एक बार फिर बुदबुदाया ,,,,

बुआ काकी तुम लोग अगर महारानी के आसपास मडराओगी तो अपन खाक प्यार कर पायेगा उसे,,,,,

तब तक डॉली की गिफ्ट खुल चुकी थी ।

और जैसे ही उसने गिफ्ट खोली तो सभी एक साथ उस गिफ्ट में झांकने लगे ,,,,

और एक दूसरे का चेहरा देखते हुए

आपस में बातें करने लगे थे ,,,,

आखिर क्या है उस कार्टून में

डॉली वो कार्टून खोल चुकी थी।

और जब सभी एक साथ उस कार्टून में झांके तो देखा, कि वह दो Y दो का कार्टून प्रतियोगी परीक्षा की किताबों से भरा हुआ था ।

जिसमें महिला बाल विकास अधिकारी की परीक्षा के लिए जो किताबें पढ़ी जाती है ।

या जो काम में आती हैं ,वह सारी किताबें इस 2 Y 2 के कार्टून में अच्छी तरह से पैक थी ।

नई-नई किताबों की महक डॉली के अंदर तक समा गई ,,,कुछ छोटी कुछ बड़ी कुछ हिंदी में ,कुछ अंग्रेजी में ,कोई भी किताब ऐसी नहीं थी ,जो इस परीक्षा से संबंधित तैयारी से वंचित हो ।

राज ने बताया कि इसके बारे में उसे तो ज्यादा पता नहीं था ।

पर हां वो चाहता था ,कि शादी के बाद भी डॉली की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए ,वह डॉली को ऊंचाइयों तक देखना चाहता है।

पर उसने किताबों के बारे में जरूर विकास से बात की थी ,और विकास ने उसे जिन किताबों की लिस्ट दी, वह

सारी किताबें शहर जाकर राज ने इस कार्टून में पैक करवा ली थी ।

किताबें देखकर डॉली तो खुश हो ही गई थी क्योंकि राज का सपना उसका सपना था। और बचपन से ही डॉली का भी यही सपना था ,कि वह आगे बढे,,,,,,

राज ने डॉली को देखते हुए कहा!

महारानी तेरे को अपुन का गिफ्ट पसंद तो आया ना

डॉली पूरे मन से खुश थी ,वह मुस्कुराते हुए बोली, शायद इससे अच्छा गिफ्ट मेरे लिए कुछ और हो ही नहीं सकता।

आपने मुझे सबसे अच्छा गिफ्ट लाकर दिया है ,और सच में ,मैं अभी से बहुत उत्साहित हूं यह सारी किताबें पढ़ने के लिए, और आप यकीन मानिए कुछ ही दिनों में ये सारी किताबों को पढ़ भी लूंगी ,,,,,,

राज पर आपको कैसे पता कि मुझे सबसे ज्यादा यही गिफ्ट पसन्द आएगा ।

ठीक है ,फिर अपन बराबर तेरे से यही उम्मीद करता है ,की तू इन किताबों को अच्छे से पड़ेगी ,और अगले दो-तीन साल में इससे भी बड़ी वाली परीक्षा पास करके बताएंगी,,,,,हां मैं पूरी कोशिश करूंगी,,,

बस अपन को और क्या चाहिए, अगर तू यह परीक्षा पास कर लेगी ,तो अपना सपना पूरा हो जाएगा,,,,,

इतना कहने के साथ सभी तो जोर से तालियां बजाने लगे थे।

हालांकि बुआ और डॉली की कुछ पहेलियां राज से शिकायत भी कर रही थी

कि आपको तो कुछ भी अक्ल नहीं है

अरे सगाई के मौके पर कोई रोमांटिक सी गिफ्ट दी जाती है ,,,,

किताबें नहीं !

माना कि किताबों से बड़ा कोई धन नहीं है पर मौका भी तो होना चाहिए,,,,

राज ने डॉली की सहेली को डांटते हुए कहा ,,,,तुझे क्या पता यह क्या है ,,,,

रोमांटिक ,,,रोमांटिक,,,, तू महारानी को बिगाड़ मत ,अरे शादी हो गई ,तो इसका यह मतलब नहीं है ,कि वह पढ़ाई छोड़ दे

अपन जानबूझकर ये गिफ्ट लेके आया है जिससे कि महारानी के माइंड में पहले से यह बात बिठा दे ,,,,कि उसे अपनी पढ़ाई कंटिन्यू रखना है ।

साला अपुन के भेजे में यह बात नहीं उतरती की आखिर रोमांटिक गिफ्ट होती क्या है महारानी भी अपन से एक ही बात कहती रहती है ,,,,,,

तभी डॉली की सहेली ने आगे बढ़ते हुए कहा!

क्या कहती रहती है

वह ,,,कहती है की,,,,ये तू काम कर अपना अपन तेरे को कायको बताएगा,,,,,

कहती है कुछ यह अपनी पर्सनल बात है

हां ,,हां,,,,मेरे होने वाले जीजा जी मैं आपसे आपकी पर्सनल बातें तो जानना चाहती हूं शायद मैं आपकी कोई मदद कर पाऊँ।

तू अपनी क्या मदद करेगी, अपन को किसी की मदद

की जरूरत नहीं है

अपन को अपना काम अच्छी तरह से संभालना आता है

इसी तरह सबके बीच हंसी मजाक की बातें होती रही,,,,,
 
मंदिर में ही सबके खाने का इंतजाम किया गया था ,यही कोई 50 ,60 लोगों का भंडारा करवाया था ,राज ने इसमें पूरी ,सब्जी और बूंदी प्रसाद के रूप में थी।

सब लोग लाइन में बैठ कर पत्तलों पर भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने लगे ,,,

डॉली और राज को एक साथ ही बिठाया गया था ,पास पास बैठते हुए अच्छा था

कि राज को अपनी बात कहने का मौका मिल रहा है ।

पर वह जब भी कुछ कहने की कोशिश करता ,,,कि कोई ना कोई आ ही जाता

कभी गरम गरम पूरी ले लो ,तो कभी सब्जी और कभी जबरदस्ती बूंदी परोसे देते ।

जब तीसरी बार भी राज कुछ कह नहीं पाया ,,,,,तो समझ गया कि डॉली का गुस्सा अभी उसके चरम पर है ।

तो उसने धीरे से डॉली के पैर में चिकोटि काटते हुए कहा ,,,

शहज़ादी आज तो अपुन तेरे से कह कर ही रहेगा ,,,,,

अपना कान जरा पास ला ना !

तभी काकी ने आवाज लगाई ,,,,

राज बेटा अपने हाथों से डॉली को भी कुछ खिला दे ,,,,,सगाई वाले दिन लड़का लड़की एक दूसरे को खाना खिलाते हैं ,,,

और डॉली बेटा तू भी कुछ खिला देना

जी काकी,,,,,

काकी तू काहे को टेंशन लेती है

अपन महारानी का ध्यान रख रहा है ना! अपन खिलाएगा न उसे ,,,,,

चौथी बार फिर डॉली के कान के पास अपना मुंह करते हुए कहा महारानी!

ध्यान से मेरी बात सुन ,अब तो फाइनल अपन तेरे को बोलने वाला है !

डॉली ने बड़ी बड़ी आंखों से राज को देखा और कहा कोई जरूरत नहीं है ।

इतनी भीड़ भाड़ में ,वह भी मंदिर में

उस पर खाना खाने के समय ,,,,

क्या खाक बोलेंगे आप प्यार की बात !

ऐसे समय भी भला कोई प्यार की बात बोलता है ,,,अब तो आप अपने अलग सोने का इंतजाम कर ही लेना ।

अब मुझे आपसे बात ही नहीं करनी

ऐसा कहते हुए डॉली जल्दी-जल्दी खाना खाने लगी,,,,,

सभी लोग सगाई संपन्न करके मंदिर से वापस आ चुके

थे ,और डॉली बुआ के साथ उनके यहां चली गई।

राज को वापस अपने घर आना पड़ा

उस भीड़ भाड़ में कोई भी बात पूरी नहीं हो पाई थी ,अब तो डॉली से मिलने का कोई मौका भी नहीं था ,राज अपनी तरह से सारे ट्रायल कर चुका था ।

राज डॉली को लगातार फोन किये जा रहा था ।

पर डॉली ने राज का फोन भी पिक नहीं किया ,,,,

तब राज ने उसे मैसेज किया,,,,,

महारानी तू एक काम कर ,आज रात अपन तेरे से मिलने फिर आएगा ,तो फूफा जी को नीचे लिटा कर ऊपर लेट जाना ,और अपन तेरे से मिलने के बास्ते आएगा।

बस तू अपन का वेट करना ,,,,,

जरा भी देर नहीं लगी कि डॉली का वहां से मैसेज आ गया,,,

राज

आपको यहां आने की कोई जरूरत नहीं है मुझे समझ नहीं आ रहा ,कि मैं क्या कहूं आप मेरी इतनी सी भी विश पूरी नहीं कर सकते ,और हां मैं बुआ के साथ नीचे ही रहूंगी ,,,,,

राज परेशान हो चुका था ,कि वह क्या करे शाम का टाइम था ,उसने बुलेट उठाई और खेतों की तरफ

निकल गया ,जहां पर वह और कन्हैया अक्सर मिला करते थे ।

राज जब भी ढाबे के काम से पक जाता था या अपना माइंड फ्रेश करना चाहता था

तो कन्हैया से मिलने उसके खेतों पर ही पहुंच जाता, कन्हैया अपने खुद के खेतों में ट्रैक्टर से जुताई बूबाई के सारे काम करता था ।

और वहां का खुला वातावरण ,ठंडी हवा और हरियाली के बीच दोनों अच्छा टाइम व्यतीत कर पाते थे ।

कन्हैया तो उसका बचपन का पक्का वाला यार था ,देखते ही समझ गया, कि जरूर राज को कोई परेशानी है ।

जब उसने पूछा तो राज ने कुछ नहीं कहा क्योंकि उसकी अपनी प्रॉब्लम थी ।

और राज को फुल कॉन्फिडेंट था कि अपनी प्रॉब्लम यानी कि अपनी महारानी की शर्त वह अपनी तरह से ही पूरी करेगा ।

कन्हैया शादी के बारे में भी काफी सारी चीजों की बातें करनी थी ,जैसे कि खाना पीना ,इसमें से कुछ काम राज ने कन्हैया को ही दे रखे थे ।

उसकी बातें करते हुए दोनों खेत पर टहल रहे थे ,,,,,,,

खेत की दूसरी तरफ एक बड़ा सा तालाब उसके ऊपर उड़ते हुए पंछी ,और किनारे पर लगे हुए खजूर के पेड़ ,शाम का ढलता सूरज इन सबके बीच राज को डॉली कि सच में बहुत याद आ रही थी।

जब से उसे अपने प्यार का एहसास हुआ तब से 1 दिन

के लिए भी वह डॉली को अपने पास नहीं रख पाया था ।

वह उससे बहुत सारी बातें करना चाहता था बहुत कुछ कहना चाहता था

पर अब बेकरारी हद से ज्यादा हो रही थी जब अंधेरा होने लगा ,तो दोनों वापस घर आ गए।

अब तो सिवा ने डॉली को फोन भी नहीं किया था ।

काकी के कहने पर उसने थोड़ी सा खाना खाया ,और करवटें बदलता हुआ आगे के बारे में सोचने लगा।

आखिरकार बहुत देर बाद एक बहुत ही शानदार आईडिया राज के दिमाग में आ चुका था ।

और इस बार उसने सोच लिया था ।

कि वह फेल नहीं होएगा,,,,

इस काम को तो वह करके ही रहेगा।

और फिर देखना ,,,,महारानी ने जो अपुन को किया था,,,,,जब अपन शहज़ादी को इंटरेस्ट के साथ वह सब वापस करेगा ,,,,,

तो महारानी दुबारा अपुन को उसका भी इंटरेस्ट लगाकर वह सब वापस करेंगी क्योंकि अब जो उसने सोचा था ।

वह सपनों की दुनिया सा का था

बहुत ही खूबसूरत ,बिल्कुल डॉली के सपनों की तरह ,,,,,,,

रात बड़ी मुश्किल से कटी थी राज की 600 बजे सुबह ही उठकर बुलेट उठाकर बाहर चला गया ,,,,,,,

काकी पूछती रह गई ,,,पर उसने यही कहा काकी बस

अपन दो ,चार घंटे में आता है शादी का जरूरी काम है ,उसी के वास्ते जा रहा है,,,,,,,

काकी भी घर के कामों में लग गई ,और सच में राज 4 घंटे बाद वापस आया था ।

यानी कि लगभग 1000 बजे ,,,,

आते साथ ही उसने अच्छे से नहाया ,तैयार हुआ ,और अपने सबसे महंगे और ब्रांडेड कपड़े पहने ,जिसमें उसकी फेवरेट ब्लू जींस ब्लैक जैकेट ,और ब्लू टीशर्ट थी ।

स्पोर्ट्स शूज पहन के जब वह वापस बुलेट उठाकर जाने को हुआ ,,,,,

तो काकी ने उसे खाने के लिए कहा,,,,

राज ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए ही काकी की बात का जवाब दिया,,,,

काकी अपन शाम तक आता है ,किसी जरूरी काम के वास्ते शहर जाना है ।

मतलब की हलवाई ने कुछ लिस्ट बनाई थी उसमें से कुछ सामान रह गया था ,तो लेकर अपन आता है ।

काकी ने फिर पूछा!

राज तू बुलेट से सामान कैसे लेकर आएगा अरे काकी सामान अपन बस पर रखवा देगा वह क्या है ,कि आज अपन का बुलेट से जाने का ही मन है ,तो इसलिए अपन बुलेट से जा रहा है।

इतना कहते हुए तकरीबन 1100 बजे राज घर से निकल गया ,,,,राज रास्ते में ही था

कि उसे छोटू के साथ ,छोटू की हीरो होंडा पर डॉली पीछे बैठी दिखी ।

राज ने अपनी बुलेट छोटू की गाड़ी के आगे लगा दी,,, और बोला क्यों रे छोटू कहां जा रहा है तू इस वक्त

बुआ ने तो मना किया था ना

कि इसकी सगाई हो गई है, अब यह घर से बाहर नहीं जाएगी ।

सहजादी कहां घूम रही है तू इसके साथ

छोटू तुरंत गाड़ी से उतरते हुए बोला

राज भैया !

आंगनबाड़ी की जो बहन जी है ना ,उन्होंने अपन से बोला था ,कि उन्हें कोई जरूरी फाइल नहीं मिल रही ,,,,तो मैं डॉली दीदी को ले आऊ बस 10 मिनट ही लगेंगे ,वह फाइल ढूंढ कर दे देंगी, और मैं ही दीदी को वापस घर छोड़ दूंगा ,,,

मैं इसलिए ला रहा था ।

राज ने छोटू को एक चपत लगाते हुए कहा जा के ढाबे पर काम देख, तुझे तो बस घूमने का बहाना चाहिए, इधर से उधर ,उधर से उधर ,,,,,दिन भर काम चोरी करता है।

छोटू ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा राज भैया ऐसी बात नहीं है।

आप चाहो तो डॉली दीदी से पूछ लो

खुद ही उनके पास फोन आया था बहन जी का ,और इसीलिए तो डॉली दीदी को लेने के वास्ते आया था यहां ,,,,,,,

ठीक है तू जा ढाबे पर ग्राहक आ रहे हैं इसको मैं छोड़ देता हूं ,,,,सहजादी आ बैठ जा ,मैं तुझे आंगनवाड़ी लेकर चलता हूं डॉली चुपचाप खड़े होकर राज और छोटू का तमाशा देख रही थी ।

जव छोटू को डांट कर भगा दिया ,तो मजबूरन उसे राज के साथ बैठना पड़ा राज ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा !

शायद तू बुलेट पर अपुन के साथ पहली बार बैठ रही है ।

देख अपन पहले ही बता देता है ,कि अपनी बुलट हवा से बातें करके चलती है

तुझे डर लगता है ,तो अच्छे से पकड़ लेना मेरे साथ गाड़ी पर पीछे बैठकर चिल्लाने का नई,,,,,,,,,

डॉली ने कहा मुझे कोई डर नहीं लगता आपके साथ ना सही!

मैं छोटू के साथ मोटरसाइकिल पर कई बार बैठ चुकी हूं ,और मुझे पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ती, मैं गाड़ी को ही पकड़ लेती हूं।

मेरे लिए इतना काफी है,,,,

1,,,2,,,,,3,,, तो यह ले ,अब मेरी स्पीड देख सच में राज एक तेज स्पीड के साथ डॉली को अपने साथ ले जाने लगा था,उसकी गाड़ी हवा से बातें करने लगी,,,,,

राज एक तेज स्पीड के साथ डॉली को लेकर अपनी रॉयल इनफील्ड पर आगे बढ़ता जा रहा था ।

जब डॉली ने देखा, कि आंगनबाड़ी तो काफी पीछे छूट गई है ,तो उसने राज से रोकते हुए कहा !

राज मेरी आंगनबाड़ी तो पीछे निकल गई है

आप गाड़ी वापस लीजिए, लेकिन गाड़ी इतनी तेज थी,,,,

कि राज ने उसकी बात सुनी ही नहीं

डॉली ने फिर राज के हाथ को जोर से पकड़ कर हिलाते हुए कहा, राज आपने देखा नहीं आंगनबाड़ी कितना पीछे छूट गई है ।

और आंगनबाड़ी में मुझे कोई फाइल देना है तब राज ने मुस्कुराते हुए डॉली से कहा महारानी तुझे कोई आंगनवाड़ी नहीं जाना यह सब तो अपुन का फंडा था।

जो अपन ने छोटू के साथ मिलकर किया था क्या

गाड़ी की गड़गड़ाहट में दोनों एक दूसरे को ठीक से सुन नहीं पा रहे थे!

डॉली के बाल और उसका दुपट्टा बार-बार उसके सामने

आ रहे थे ,और सच में उसे राज को जोर से पकड़ना पड़ा ,उसने अपनी दोनों बाहें डालते हुए राज की कमर को जोर से पकड़ लिया था ।

उसने अपने होठों को राज के कान के पास ले जाते हुए कहा !

राज ये आप क्या कह रहे हैं

हां तो तू अपने कान खोल कर सुन, यही कह रहा हूं मैं ,कि वह जो फोन गया था ना

वह अपन ने ही करवाया था ।

कि तेरे को आंगनबाड़ी से कोई फाइल देना है और अपुन ने ही छोटू को भी लेने के वास्ते भेजा था ।

पर राज आप तो छोटू को डांट रहे थे

हा तो उसे प्यार करता क्या

पर आप टाइम पर आए केसे

टाइम पर मैं नहीं आया ,,,,,मैं तो काफी पहले से वहाँ खड़ा था।

जैसे ही छोटू वहां से निकला ,कि अपन ने उसके फटे में टांग अड़ा दी, और तुझे अपने साथ अपनी बुलेट पर बैठा लिया ।

लेकिन आप मुझे लेकर कहां जा रहे हैं राज ने डॉली ने एक बार फिर जोर से बोलते हुए कहा !

बस अब तू देखती जा ,कि अपन क्या करता है ,अरे तू अपन को ऐसा वैसा समझती है क्या

तूने अपन के वास्ते एक शर्त रखी थी ना

अब देख अपन उसको कैसे पूरा करता है अपुन का स्टाइल देखेगी ना, फिर कहना डॉली इस बात पर खुश

हो गई थी ।

राज पीछे तो देख नहीं रहा था, वह मुस्कुराने लगी और उसने कहा !

राज पर आप ऐसा क्या करने वाले हैं

बस तू देखती जा ,तेरे लिए एक झक्कास सरप्राइस रखा है।

बस मुझे जोर से पकड़ कर बैठ जा ।

यह,,,, हमारी ,,,वह,,,,, अंग्रेजी में क्या कहते हैं इसको ,,,,,,

क्या कहते हैं

डॉली ने मासूमियत से कहा!

अरे वह कुछ कहते हैं ना आजकल

लड़का लड़की शादी से पहले कहीं जाते हैं घूमने ,उसको कुछ कहते हैं अंग्रेजी में ,,,,

डेट,,,,,, हां तू सब जानती है ,यह हमारी एक बहुत ही झक्कास डेट है ,जिसमें अपुन ने तेरे वास्ते बहुत कुछ किया है, और अपन उम्मीद करता है ,कि शायद इसके बाद तेरी शिकायत दूर हो जाएगी,,,,,,

सहजादी अगर तुझे सब कुछ अच्छा लगा फिर तो अपन को अपने रूम में आने देगी ना डॉली इस बात पर दिल से मुस्कुरा गई थी।

पर उसने कुछ कहा नहीं ,बस इतना ही बोल पाई अभी देखती हूं ,आखिर आपने ऐसा क्या किया है !

जो मुझे पसंद आएगा,,,,

तो देखना अब तक राज खेतों की तरफ पहुंच गया था ।

खेत की पतली पतली पगडंडियों से निकलते हुए खेतों को पार करता हुआ, खेतों की दूसरी तरफ तालाब की ओर बढ़ रहा था ।

और इसीलिए वह बुलेट लेकर आया था कि इस जगह से आसानी से निकल पाए ।

करीब 10 मिनट खेतों को पार करने के बाद राज तालाब के किनारे भी पहुंच चुका था जहां पर उसका इंतजार कर रहा था ,उसका पक्का यार कन्हैया,,,,,

डॉली ने राज को देखते हुए पूछा !

राज आप कहां लाए हैं मुझे

अरे अभी तू देखना सही,,,

कितना बोलती है

जैसे ही राज डॉली को लेकर वहां पहुंचा कन्हैया इन दोनों को देख कर मुस्कुराया और कन्हैया ने जोर से एक आवाज लगाई ,,,,उसकी आवाज के साथ यही कोई 26,,28 वर्षीय युवक वहां पर आ गया। कन्हैया ने राज से उसका परिचय कराया कि यह अपने गांव का रंपत केवट है

इसे नाव खेना( नाव चलाना) बहुत अच्छी तरह से आती है ।

अरे एक तरफ से दूसरी तरफ मिनटों में ही पहुंचा देता है।

राज ने चौकते हुये कहा ,,,,,

क्यों रे कन्हैया तुझ से किसने कहा था इसको लाने के लिए

अरे अपुन की डेट है ,महारानी के साथ कोई तमाशा

नहीं है, जो तू सारे गांव को दिखा रहा है ,अरे अपन कुछ बातें करेगा,,

उससे अपन बहुत कुछ कहने वाला है ।

इसको रफा-दफा कर यहां से ,,,,

रही नाव खेने की बात ,तो वह अपन खुद कर लेगा ,अपन को अच्छे से आता है ,,,

क्या तू भूल गया

हम दोनों बचपन में यहां से वहां कितनी बार नाव खे चुके हैं ।

अरे राज तू काहे को चिंता करता है

कन्हैया ने राज का हाथ पकड़कर उसे साइड में लाते हुए कहा,,,,,

राज तू अंदर बैठकर डॉली से प्यारी प्यारी बातें करना ,,

राज ने आंखें फाड़ते हुए कहा,!

रम्पत अगर नाव खेता रहेगा तो क्या खाक बातें कर पाएगा अपन,,,,

कन्हैया ने राज को समझाया,,,,देख नाव को अच्छी तरह से डेकोरेट किया है ,उसमें पर्दे भी लगाए गए हैं, बाहर से तुम्हें कोई नहीं देख पाएगा,,,,,

और यह यह रंपत ,अरे यह न सुन सकता है और ना ही बोल सकता है ।

राज ने चौकते हुए कहा ,,,,

ओ तेरी इसकी दोनों मशीनें खराब है

हां कुछ ऐसा ही समझ ले !

जब ये तेरी और डॉली की बात सुनेगा ही नहीं ,तो

किसी को बताएगा क्या☺

तुझे इसकी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है फिर सही है ,,, इसके दोनों फ्यूज उड़े हुए हैं अब अपन को टेंशन वाली कोई बात नहीं है और तूने सही कहा है ,अगर अपन साला

नाव खेयेगा तो महारानी को सब कुछ कैसे बोल पाएगा ,,,,,,

हां हां चल मैं निकलता हूं और तू जा अपनी महारानी के साथ मस्त डेट पर ।

कन्हैया ने राज का कंधा थपथपाते हुए उसे बाय किया ,और चला गया,,,,,

तब तक पास ही खड़ा रंपत कन्हैया को गौर से देख रहा था।

उसने इशारों ही इशारों में ए,,,ओ,,आ करके राज से कुछ पूछा

राज ने भी उसे देखते हुए कहा तेरी बराबर दोनों मशीनें बंद है ना

या फिर तू अपन को बेवकूफ बना रहा है उसने एक बार फिर राज को ध्यान से देखा सिवा ने गाली देते हुए कहा ,,,,

अबे साले तेरी ऐसी की तैसी, अपन को तो लग रहा है तू नाटक ही कर रहा है

चल जा यहां से ,,,,लेकिन इस बार भी उसने कहा ए,,, ओ,,,आ,,,,अब राज को पक्का यकीन हो गया,,,, कि सच में इसकी दोनों मशीनो के स्क्रू ढीले ही पड़े हैं।

शिवां ने इशारे से कहा,,,,कि नाव में जाकर बैठ, हम अभी आते हैं वह आगे नाव में बैठ चुका था ,यही कोई

5 Y 10 फीट लंबी नाव थी, जिसको एक बहुत ही खूबसूरत से शिकारे की तरह सजाया गया था ।

उसमें चारों तरफ पर्दे भी लगाए गए थे

और उसके अंदर ढेर सारे पिंक कलर के बलून और कुछ फूलों की मालाएं भी लटकाई थी ,जो सारा इंतजाम राज ने कन्हैया से कह कर करवाया था ।

जब डॉली को उसमें बैठने के लिए कहा

तो नाव सच में घाट के पास नहीं आ पा रही थी ,और डॉली ने जैसे ही पैर बढ़ाया ,तो देखा नीचे घुटनों तक पानी था ।

डॉली ने उसमे उतरने की कोशिश की

इससे पहले कि वह पानी में अपना पैर रखती राज ने किसी फूल की तरह डॉली को अपनी गोद में उठा लिया, और बड़े आराम से नाव में बैठा दिया ,,,,,,

यह डॉली के लिए अद्भुत था ,आठवां अजूबा था ,,की राज कैसे उसके मन की बात पड़ गए ,,,,,,
 
बिल्कुल बाहुबली की मूवी याद आ गई उसे बल्कि उससे भी ज्यादा रोमांटिक उसे राज का यह स्टाइल लगा था।

डॉली को बैठाने के बाद से बाद राज भी नाव के अंदर आकर बैठ गया ।

जैसे राज नाव में बैठा कि केवट नाव को खेने लगा था ।

कन्हैया ने उसे समझा दिया था, कि जब तक राज इशारा ना करे,वह नाव को पानी के अंदर ही रखे, फिर क्या था ,,,,,

शुरू हुई डॉली और राज की रोमांटिक डेट कुछ गुलाबी ,कुछ नीले पर्दे ,,इसकी रोशनी छन छन के नाव के अंदर आ रही थी।

चारों तरफ ढेर सारे बलून ,फूलों की मालाएं और अंदर महकते हुए इत्र की खुशबू ।

जहां बैठने की जगह थी ,वहाँ बहुत ही तरीके से गड्ढे बिछे हुए थे।

उन पर कुछ मखमली कुशन रखे हुए थे राज आराम से बैठ गया ,,,,

और डॉली वह तो सारी चीजों को देखती ही जा रही थी ,उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सपना है ,या फिर सच ,,,,

वह कभी बलून को छूती तो कभी फूलों की मालाओ को,,,

और उसने धीरे से राज को भी छू लिया राज समझ गया ,,,,,

और डॉली की तरफ देखते हुए बोला

हां शहज़ादी तू बराबर सब कुछ देख सकती है।

और यह सब रियल है, अपुन का रियल लव अपन ने तेरे वास्ते सब किया है ।

तुझे पसंद तो है ना

डॉली के मुंह से तो शब्द ही नहीं निकल रहे थे, उसने नजरें झुकाते हुए कहा !

राज शायद सपनों की दुनिया से भी सुंदर है सब कुछ !!!!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

अच्छा यह बता जो तूने मूवी में देखा था ना अपुन वैसे ही कुछ तेरे वास्ते सोच कर आया था ,,,उतना तो नहीं,,, पर हां अपन ने कोशिश जरूर की है, कि तुझे सब कुछ पसंद आए !

राज यह सब मेरे लिए मूवी से भी कहीं अच्छा है, पर मुझे यकीन नहीं हो रहा

कि आपने यह सब किया है

सहजादी अपन झूठ तो बोलता नहीं

यह सब कुछ अपने माइंड का ही आईडिया है ,,,,,,

हां अपन कह सकता है ,की मूवी देखने के बाद ही अपन के माइंड में आईडिया आया है और तूने कहा था ना ,कि ऐसी ही कोई जगह हो ,जहां पर कोई ना हो ,,,,

और हमारे अलावा यहां कोई नहीं है।

डॉली सब कुछ देख रही थी ,और राज डॉली को देख रहा था।

जब नाव में बैठे हुए 1015 मिनट हो गए तो राज ने अचानक अपनी जैकेट से एक छोटा सा बॉक्स निकाला ,,,,

जो बहुत ही सुंदर तरीके से पैक किया गया था ।

उसने डॉली की तरफ बढ़ाते हुए कहा महारानी अपन तेरे वास्ते एक गिफ्ट भी लेकर आया है ।

यह हमारी पहली डेट का गिफ्ट है ,जो हमेशा तेरे पास रहेगा,,,,,,

डॉली आंखें फाड़कर उसको देखने लगी उसके चेहरे

की खुशी बता रही थी, कि आज वह सपनों की दुनिया में पहुंच चुकी है ।

उसने हाथ में लेते हुए पूछा,,,,

क्या मैं इसे खोल सकती हूं ,अरे इसमें पूछना कायको है ,

अपन तेरे वास्ते ही लेकर आया है ,,,

तो खोलना बिंदास,,,, खोलकर बता कैसा है डॉली ने धीरे-धीरे उसके रिबिन खोलते हुए जब देखा ,,,,तो उसके अंदर एक बहुत ही खूबसूरत सि टाइटन की गोल्ड चैन वॉच थी डॉली हाथ में लेकर उसे छूकर देखने लगी इतनी प्यारी वॉच तो उसने आज से पहले देखी ही नहीं थी।

या फिर ये कहे कि राज की दी हुई वॉच से सुंदर उसे कोई लग ही नही सकती थी।

उसने राज को देखते हुए कहा!

ये आप लाये है।

और नहीं तो क्या

तेरे वास्ते ही लाया है, अरे तू यह लोकल वॉच पहनती है ना ,,,,,

अब तो सुपरवाइजर बन गई है ,उसके बाद और भी बड़ी ऑफिसर बनेंगी, तो क्या ऐसे ही लोकल घड़ी पहनेगी,,,,,

ये अपुन की इज्जत का सवाल है।

राज की घरवाली लोकल वॉच पहनती है अपुन ने देखा है ,,,,

बड़े बड़े ऑफिसर होते हैं ना इनके पास ,,,मोबाइल,,

घड़ी और कंप्यूटर बहुत अच्छी क्वालिटी के रहते हैं ,,,,,

तो बस यही सोचकर अपन तेरे वास्ते लेकर आया,,,,,,, और देख इसमें डबल लॉक भी है जिससे ये गिरने का रिश्क नही है ।

और ये कभी खराब भी नहीं होगी।

राज ने डॉली के हाथ से वह वॉच ली और उसे पहनाने लगा,,,,,,

राज ने बहुत प्यार से डॉली को पहनाते हुए उसके लॉक बंद किए ।

और डॉली का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा महारानी यह वॉच तू हमेशा पहनना।

डॉली का दिल प्यार से तरबतर हो चुका था उसने राज की आंखों में देखते हुए कहा राज मेरे हाथ में हमेशा सिर्फ यही वॉच रहेगी ।

महारानी एक वादा भी कर मुझसे आज !

कि शादी के बाद भी तू अपनी पढ़ाई नहीं रोकेगी ,,,,,,,

हां राज में अपनी पढ़ाई नहीं रोकूँगी,,,

और सुन एक बात और,,,,,

वह जो ,,,,काकी ने ,,,वह बात कही थी ना कौन सी

अरे वही वाली,,,,

तू सब भूल जाती है, उन्होंने कहा था ना

कि वह अपने नाती पोते का मुंह देखना चाहती है ,,,कुछ ऐसा कहा था ना

डॉली हंस पड़ी हां मुझे याद है !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svgकाकी ने ऐसा कहा था ,,,,

हां ,,,तो ,,,तो ,,,,उस बारे में ,,,तू चिंता मत करना वह ना ,,,वह सब,,, अपन संभाल लेगा अपुन और काकी बराबर बच्चा पार्टी को संभाल लेगा।

बस तू अपनी पढ़ाई चालू रखना ,,,

डॉली ने राज का हाथ अपने हा हाथ में लिया ,और बोली राज मैं अपनी पढ़ाई भी करूंगी ,और यकीन मानिए कि आपको और काकी को इस खुशी से भी वंचित नहीं करूंगी ।

भगवान जब चाहेंगे हमारे घर में किलकारी गूँजेगी,,,,, हमारी तरफ से कभी कोई रोक टोक नहीं होगी ।

हां बस अपन यही सुनना चाहता था तुझसे और अपन है ना

संभालने के लिए ,उसका खाना-पीना और वह क्या ,,,पोट्टी अपन सब मैनेज कर लेगा

यह बात सुनकर डॉली हंस पड़ी,,,,

राज सच में आप बच्चे की पॉटी भी साफ कर लेंगे ,,,,,हां तो क्या, अपन करेगा ना ।

तू टेंशन लेने का नहीं ,,,,,,,

हां ,,,हां,,,, सिवा आपके और काकी के रहते हुए मुझे टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है भला मैं क्यों टेंशन लेने लगी

राज डॉली के और करीब आ गया ।

उसने डॉली को अपनी बांहों में भरते हुए कस के उसे अपने सीने से लगा लिया था ।

इस एक पल का इंतजार तो डॉली को पिछले कितने महीनों से था ।

वह सब कुछ भूल कर आंखें बंद कर राज के गले लग गई ,,,,,

राज ने धीरे से कहा ,,,,

डॉली अपुन चाहता है की बहुत जल्द अपुन को डैडी कहने वाले एक प्यारी सी बेटी अपने घर में आ जाए ,,,जो बिल्कुल तेरी तरह हो इतनी ही होशियार ,जिसका पढ़ने में इतना ही तेज दिमाग ही, और जो बिल्कुल तेरी तरह जिद्दी हो, और उसका नाम रखेंगे राजनी

डॉली मुस्कुरा उठी ,,,,,

लेकिन उसने झूठ मुठ का गुस्सा दिखाते हुए कहा ,,,,पर राज मुझे तो आपके जैसा बेटा चाहिए जो बिल्कुल आप ही की तरह बड़े दिल वाला हो ,जो आपकी तरह प्यार करना जानता हो,,,,,,

नहीं शहज़ादी यहां तेरी नहीं चलेगी ,,,

यहां अपन की ही चलेगी ,,,,,

दोनों ना,,,,ना ,,,करते हुए आखिरकार इस फैसले पर पहुंचे ,,,,

की एक राज और एक डॉली दोनों आएंगे लेकिन फिर भी राज ने अपनी बात रखी कि पहले तो राजनी ही आएगी ।

अच्छा ठीक है पहले राजनी आएगी

लेकिन उसके बाद उसका छोटा भाई

हां यह अपुन को मंजूर है ।

राज डॉली के थोड़ी और करीब आ गया उसने धीरे से कान में कहा ,,,,,

महारानी पर इस सब के लिए इससे पहले हमें कुछ और भी तो करना होगा ।

और उसके लिए तुझे अपन के रूम में ही रहना होगा ,,,,और तू अपन से गुस्सा होकर काकी के रूम में रहने वाली थी ना।

अब तेरा क्या सोचना है

डॉलीआंखें बंद कर के राज के और करीब आकर उसके सीने से लग गई ,,,,

राज अब तो में एक पल के लिए भी आपसे दूर नहीं रहूंगी,,,,

राज ने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लिया ,,,,,,

और इंटरेस्ट के साथ सब कुछ निली को वापस कर दिया,,,,,,

पर वह इंटरेस्ट कुछ ज्यादा ही था

शायद डॉली के मूल से 50 या 100 गुना ज्यादा ,,,,,,,,

और डॉली को ये इंटरेस्ट बहुत अच्छा लग रहा था ।

उसने राज को एक बार भी मना नहीं किया कि वह अपनी चीज का इतना सारा इंटरेस्ट लेती जा रही है।

उसका रोम रोम खिल उठा था ,आज उसने पूरी तरह से राज को पा लिया था।

राज के प्यार का एहसास उसे अच्छी तरह से हो गया था, दोनों गले लगे हुए घंटो तक बातें करते रहे ।

और रंपत पूरे तालाब में यहां से वहां पानी के ऊपर नाव को खेता रहा,,,,,

डॉली ने सोचा भी नहीं था ,,कि राज इतनी अच्छी तरह से उसकी विश पूरी करेगा। बिल्कुल बाहुबली के सपने

जैसे ,और शायद उससे भी कहीं अच्छी ।

आज उसे राज बहुत रोमांटिक लग रहा था वह सच में यकीन नहीं कर पा रही थी।

किस राज इतनी अच्छी डेट प्लान कर सकते हैं।

बिल्कुल उसके सपनों के जैसी ,जिसमें सब कुछ था ,,,,

एक प्यारी सी किस

एक बहुत ही खूबसूरत जगह

राज का ढेर सारा प्यार

लव और रोमांस

और वह सारी चीजें जो राज ने उसे सूद समेत वापस की थी ।

जो डॉली ने सिर्फ एक ही राज को दी थी शायद इससे अच्छा कुछ और हो ही नहीं सकता था ।

आज जी भर के दोनों ने एक दूसरे के नजदीकियों का स्पर्श पाया था ।

यह एक ऐसी डेट थी ,,,,जिसे डॉली अपनी जिंदगी में कभी नहीं भूलती,,,,

लेकिन साथ ही राज ने एक वादा भी डॉली से किया था ।

कि यह उनकी पहली डेट है ,आखरी नहीं इसके बाद वह हमेशा डॉली को इतनी ही खूबसूरत दुनिया की सैर करवाता रहेगा।

उन्हें जब भी लगेगा वह डॉली को ऐसी जगह ले जाएगा ,जहां उन दोनों के अलावा और कोई ना हो ,,,,,

उसने वादा किया था डॉली की जिम्मेदारी के साथ साथ

उसे खुश रखने का ।

बहुत सारी बातें करते हुए ,एक बार फिर से शिद्दत के साथ दोनों गले लग गए थे ।

जैसे ही सूरज ढलने को हुआ, राज ने रंपत को नाव वापस ले जाने का इशारा किया

और नाव किनारे पर आई ,तो एक बार फिर डॉली को गोद में लेकर उतारते हुए उसे खड़ा किया, और दोनों बुलेट पर बैठ कर गांव में वापस आ गए ।

वैसे तो जिन भी लोगों की निगाहें राज के ऊपर पड़ी थी, सबको यही लगा ,कि कहीं कोई काम होगा, राज ने कोशिश की थी

कि वह ने डॉली को बुआ के घर से कुछ दूरी पर ही छोड़ दे।

और डॉली वापस बुआ के यहां चली जाएगी लेकिन घर की कुछ दूरी पर जैसे ही राज ने बुलेट रोकी तभी , जादू के माफिक कमला बुआ आते दिखी उसने आते साथ ही बड़े गौर से राज को देखा ,और पूछा !

राज तू कहां लेकर घूम रहा है डॉली को

अरे इसकी सगाई हो गई है ,कितनी बार कह चुकी हूं, कि सगाई के बाद ऐसे बाहर नहीं घूमते ,,,,,,

वह तो अच्छा हुआ कि मैंने डॉली को काला धागा पहना दिया था ,अगर ऐसे ही चली जाती तो ,शगुन नहीं माना

जाता ,अरे बुआ तू काहे को रोना रोती है ,अपन साथ था ना और जब अपने साथ थी, तो तेरे को चिंता करने की क्या जरूरत

कोई इसके पास भी नहीं आने का

राज तू समझता क्यों नहीं बेटा !

दुल्हन को सब की नजर से बचा कर रखा जाता है ,और तू भी आज के बाद घूमना फिरना बंद कर ,खासकर कल से तो तुम दोनों को घर से बाहर ही नहीं निकलना

तुम दोनों की लगुन का शगुन भी हो जाएगा फिर खबरदार जो तूने घर से बाहर कदम भी रखा ,इतना कहते हुए बुआ ने डॉली का हाथ पकड़ा, और अपने साथ घर ले जाने लगी राज ने गाड़ी स्टार्ट की ,और वापस ढाबे पर जाने को हुआ,,,,,वैसे ही बुआ ने एक बार फिर राज को रोकते हुए कहा!

राज क्या मैं पूछ सकती हूं ,कि तू डॉली को लेकर गया कहां था

अपन डेट के वास्ते ले गया था इसको,,,

क्या तू क्या कहता रहता है, मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता,,,,,

अरे मेरे कहने का मतलब है बुआ ,की इसकी आंगनवाड़ी में कोई जरूरी फाइल देनी थी, तो बस उसके लिए अपन आंगनबाड़ी तक लेकर गया था इसको।

पर बेटे एक फाइल देने में इतना टाइम लगता है क्या

बुआ,,,,,तू कभी स्कूल गई हो,,,,तूने कभी नौकरी की हो ,तो तू जानेगी न कि कितना टाइम लगता है

महारानी से पूछ, वहां कितने सारे काम थे और एक साथ बहुत सारे कामों में टाइम तो लगता ही है !

अच्छा ठीक है ,यह बता कि सारे काम ठीक से तो हो गए ,,,,

अरे मस्त बुआ ,,,,,झक्कास सौ परसेंट परफेक्ट ,अपन जो भी करता है ना

बिंदास तरीके से करता है ,,,,,

शहज़ादी तू भी बता ना बुआ को कि सारे काम कितनी अच्छी तरह से हुए हैं ।

डॉली ने बुआ को देखते हुए कहा!

हां बुआ सब कुछ हो गया है ।

राज थे ना मेरी हेल्प करने के लिए ,,,,,

और क्या ,,,,

सब कुछ तो राज ने ही किया,,,,,,

हां ठीक है ,,,,अब चल ,,,घर चल ,,,अब तो सांझ भी ढ़लने को है।

अगर कहीं काकी ने देख लिया, कि तुम दोनों इस तरह से शाम के टाइम बाहर घूम रहे हो, तो मुझे डांट पड़ जाएगी ,,,,

कि मैं डॉली को अपने घर तो ले गई और ठीक से उसे रख ही नहीं पाई,,,,,

अरे बुआ तू काहे को अपना खून जलाती है ऐसा कुछ भी नहीं होगा ,अरे काकी को क्या पता अगर तू चुप रहेगी ,महारानी कुछ नहीं बताएगी ,,,,तो काकी को कैसे पता चलेगा ठीक है राज आज के बाद तू डॉली को किसी भी काम के लिए बाहर नहीं ले जाएगा अरे

नहीं ले जाएगा,,,,,,,,

जो काम था ,सारा हो गया,,,,

बस अब जो भी काम है, तो 8 दिन बाद तो सहजादी अपुन के घर आ ही रही है ना !

तो आराम से अपन वह सब करेगा ,,,,

क्यों सहजादी ठीक कहा ना मैंने!

अब बीच में कोई काम नहीं है।

डॉली ने शर्माते हुए इतना ही कहा ,,,,

जी बुआ,,,,,,

राज ने बुलेट वापस स्टार्ट की ,और अपने घर चला गया ,,,,

वहीं डॉली अपने घर आ गई, आज डॉली के सपनों को पंख लग गए थे, क्योंकि उसके सपने पूरे हो गए थे ,,,,,,

अब उसकी चाहते आसमान की ऊंचाई छू रही थीं।

राज की प्यार भरी बातें ,सुंदर सी नाव में वो और राज ,,, भीनी भीनी खुशबू ,और वहां पर सजे हुए बलून ,,और फूल ,,,,,

सब कुछ डॉली की रग रग में उतर चुका था राज के प्यार का एहसास पाकर ,,,

उसकी यादो से अब भी डॉली का रोम-रोम खिल रहा था ।

वह महसूस कर रही थी, जब राज ने उसे अपनी बांहों में भरा था।

और सच में उसकी सोच से भी ज्यादा प्यार था राज के स्पर्श में, एक अपनापन एक निश्चितता , और एक विश्वास ,,,जो राज की आंखों से ,उसकी बातों से ,और

उसके छूने से डॉली को महसूस हो रहा था।

अब तो डॉली के लिए यह चार-पांच दिन भी काटना मुश्किल हो रहे थे ,बस उसे लग रहा था कि यह 5 दिन पंख लगा के उड़ जाए और वह जल्दी से राज के पास पहुंच जाए।वह राज को पूरी तरह से पा लेना चाहती थी ।

ऐसे ही अच्छे सपने देखते हुए डॉली आज कुछ जल्दी ही सो गई थी।

उधर राज भी घर जाकर बहुत खुश था।

जब काकी ने उसकी खुशी का कारण पूछा तो उसके मुँह से एक ही बात निकली,,,

अपुन शहज़ादी को डेट के लिए लेकर गया था ना,,, इसलिए अपना मूड फ्रेश है। क्या-क्या लेकर गया था ,,,,

अरे वह क्या कहते हैं,,,, राज ने कहा ,,,

काकी कोई फाइल थी तो ,,,अपना कहने का मतलब है, कि उसको ठीक कराने के बास्ते आंगनबाड़ी में लेकर गया था ।

भगवान की कृपा से फाइल ठीक हो गई

नहीं तो क्या है ,कि अपनी महारानी को उसका जवाब देना पड़ता ,और सब कुछ अच्छे से हो गया ना ,,,,तो इसीलिए अपना मूड बहुत फ्रेश है ,,,,

इतना कहते हुए राज सीधा अपने कमरे में चला गया था ।

कि कहीं ऐसा ना हो ,कि कोई दूसरी बात उसके मुंह से निकल जाए ,और काकी उसकी गलती पकड़ ले ,वह

काकी के द्वारा डाँट खाना नहीं चाहता था ।

एक दूसरे के ख्यालों में डूबते हुए और शादी की तैयारियां करते हुए 5 दिन भी पूरे हो चुके थे ।

आज वो दिन आ गया था,जब राज घोड़ी पर चढ़कर बारात लेकर डॉली को लेने जा रहा था ।

राज के घर से कुछ ही दूरी पर काफी जगह थी, वहीं पर बड़े-बड़े टेंट लगाए गए ,और उसमें एक खूबसूरत सी स्टेज भी बनाई गई थी ,जिसमें सारे गांव वाले ,समय से पहले ही आ चुके थे,,,,,,

और सभी काम मे व्यस्त थे ,राज और डॉली की शादी के लिए।

राज ने नई शेरवानी पहनी उसकी मैचिंग की जूतियां ,माथे पर रेड कलर की पगड़ी सच में राज तो किसी फिल्मी हीरो की तरह ही दिख रहा था, बेहद हेंडसम, और स्मार्ट तैयार होकर बाहर निकला ,काकी ने सिर के ऊपर से पांच बार जूता घुमाते हुए उसकी नजर उतारी, और काजल का टीका उसके कान के पीछे लगा दिया ।

राज कुछ कहता ,तभी काकी ने उसे रोका आज तू कुछ नहीं बोलेगा ,जैसा मैं कहती हूं वैसा करेगा,,,,,

ठीक है कर ले ,तुझे जो भी करना है।

अपन कुछ नहीं बोलेगा,,,,,,

अपने खास रिश्तेदार ,और दोस्तों के साथ घोड़ी पर बैठकर बैंड बाजे के साथ बुआ के दरवाजे की तरफ बढ़ रहा था ,बुआ ने अपने दरवाजे पर फूल मालाओ से थोड़ी सी सजावट करवाई थी।

एक मां होने के नाते उसने अपना दामाद मानते हुए ,राज के माथे पर टीका किया अष्ट धातु के बड़े कटोरे में ,,,शगुन का सामान रखते हुए ,राज को भेंट की, जब दरवाजे पर सारे रस्मो रिवाज पूरे हो गए

तो राज अपने दोस्तों के साथ पंडाल में बनी स्टेज पर पहुंच गया था।

काकी के रिश्तेदार और कुछ डॉली की सहेलियां डॉली को लेकर भी पंडाल में आ चुकी थी, जहां पर राज पहले से स्टेज पर बैठकर डॉली का इंतजार कर रहा था ।

डॉली हाथों में वरमाला लेकर एक-एक कदम बढ़ाते हुए राज की तरफ जा रही थी।

रेड लहंगा ,नाक में बड़ी सी नथ ,माथे पर झूमर ,आंखों में काजल ,पैरों में महावर, डॉली दुल्हन के लिबास में बिल्कुल गुड़िया जैसी लग रही थी ।

उसके मन की खुशी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी ,जब स्टेज पर पहुंचे और सब के कहने पर राज ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए ,डॉली को स्टेज पर चढ़ा लिया दोनों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई

पूरे गांव की तालियों की गूंज पंडाल में थी। डॉली और राज के साथ-साथ इनकी शादी का इंतजार पूरे गांव को था।

जब वर माला पहना कर दोनो स्टेज पर बैठे तो एक-एक करके सारे गांव वालों ने उनके साथ फोटो खिंचवाई ,राज डॉली छुप छुप के एक दूसरे को देख रहे थे ।

एक दूसरे से आंखों ही आंखों में बातें कर रहे थे ।

जब स्टेज का कार्यक्रम खत्म हुआ ,तो पंडाल के नीचे बने हुए केले के पत्ते के मंडप में सात फेरे हुए, राज ने डॉली की मांग में सिंदूर भरा ,बुआ ने मां होने के नाते, डॉली का कन्यादान किया ,उसके पैर पूजे, काकी के बेटे ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए डॉली की धान बोने का शगुन भी किया ।

और जब इनकी शादी संपन्न हुई ,तो सुबह के 400 बज रहे थे ।

शादी संपन्न होने के बाद दूल्हा-दुल्हन को ध्रुवतारा दिखाया गया ,,,,

ध्रुव तारा देखने का मतलब यही होता है

कि ध्रुव तारे की तरह तुम्हारा विश्वास भी एक दूसरे पर अटल रहे।

कहते हैं ध्रुव तारा हमेशा एक ही जगह रहता है ,कभी अपनी जगह नहीं बदलता ।

ठीक उसी तरह पति पत्नी का विश्वास उनका प्रेम ,और उनका अपनापन ,बिल्कुल ध्रुव तारे की तरह ऊंचा ,चमकदार और अटल रहे ।

राज ने डॉली का हाथ अपने हाथ में लेकर ध्रुव तारे की ओर इशारा किया ,और हाथ जोड़कर अपने आने वाले जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा ।

सुबह भी सारे गांव वालों के चाय नाश्ते का इंतजाम पंडाल में ही किया गया था ।

सब ने चाय नाश्ता किया, हंसी मजाक किया और फिर बुआ के घर से डॉली की विदाई हुई डॉली भले ही 8

दिन के लिए यहां आई थी पर उसे बुआ में अपनी मां नजर आने लगी थी ।

कमला बुआ ने एक मां होने के सारे फर्ज निभाएं थे ,और विदाई के साथ-साथ उससे जितना बन पड़ा ,उसने डॉली को उपहार भी दिये,,,,जिसे डॉली ने आशीर्वाद मानकर अपने पास रखा, और डॉली से यह भी कहा कि एक मां के जो भी फर्ज होते हैं।

वह हमेशा निभाएगी ,,,डॉली जब भी कोई खुशी का मौका होगा ,,,,तो शगुन के तौर पर हमेशा एक मां की तरह डॉली के ससुराल में आएगी ,,,,,

विदाई के बाद राज की जीप में बैठकर डॉली हमेशा हमेशा के लिए राज के घर आ गई थी।

घर आकर भी काकी ने कुछ रस्मो रिवाज पूरे करवाए ,पूजा करवाई, जब सारी पूजा खत्म हुई ,तो रात को डॉली और राज को उनके रूम में भेजा गया ,जहां पर राज के दोस्तों ने पहले से ही कमरे में बहुत ही खूबसूरत फूलों की सजावट कर दी थी ।

इस बात की भनक डॉली को बिल्कुल भी नहीं थी ,यह तो उसके लिए दूसरा बड़ा सरप्राइस था ।

उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था ,कि राज यह सब करेंगे ,,,,,

एक-एक करके डॉली के सारे सपने पूरे हो रहे थे ,दोनों को कमरे में भेजते हुए राज की भाभियों और बहनों ने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ,,,,

इस पल राज के चेहरे पर एक शर्म की लाली थी ,उसे समझ नहीं आ रहा था

कि वह क्या कहे, एक जगह खड़ा होकर डॉली को देखने लगा,,,,

कुछ देर हो गई,तो उसने जाकर दरवाजे की कुंडी लगाई ,,,और डॉली का हाथ पकड़ते हुए उसे अपने बेड पर बैठा लिया ।
 
डॉली और राज के मिलन की यह रात बहुत खूबसूरत थी ,जहां बाहर आसमान में चांद तारे झिलमिला रहे थे, वही डॉली और राज के मन में भी खुशियों के दीपक चल रहे थे। बाहर अब भी सबके हंसी ठिठोली करने की आवाजे आ रही थी ।

पर राज डॉली को अपनी बाहों की गिरफ्त में ले चुका था ,दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब चुके थे ,और बाहर का शोरगुल उनसे बहुत दूर था, उनके लिए उनका एक छोटा सा कमरा ही उनकी पूरी दुनिया थी।

जहां पर वह एक दूसरे के प्यार में डूब जाना चाहते थे।

एक दूसरे को पूरी तरह से पा लेना चाहते थे और ऐसा ही हुआ,,,,

कुछ घंटों बाद ही, डॉली और राज एक हो चुके थे ।उनके मन के साथ-साथ उनका तन भी मिल चुका था ।

आज डॉली और राज एक दूसरे को पूरी तरह से पा चुके थे, उनके बीच कोई पर्दे, कोई दूरियां अब नहीं थीं,,,,,,,,

.........
 
छब्बीस साल बाद

Season 2

अधिकारी ( डॉली मैडम )

मे आई कम इन मैडम…….

यस कमिंग…….

चपरासी जब ऑफिस के अंदर जाता है तो सामने ही गोल्डन फ्रेम का चश्मा

पूरे बालों का पीछे बंधा हुआ जूड़ा

वॉर्डर वाली कॉटन की साड़ी

माथे पर छोटी सी बिंदी

और कानों में डायमंड के टॉप्स,,,,,

सामने कुर्सी पर बैठी हुई डॉली ने चपरासी को अंदर आने के लिए कहा !

मैडम जी आपसे मिलने कुछ लोग आए हैं ! शायद किसी योजना के तहत कोई बात करनी थी ,उन्होंने आप से अपॉइंटमेंट मांगा है ।

डॉली ने कलाई पर बंधी हुई अपनी वॉच को देखते हुए कहा !

अभी ऑफिस छूटने में सिर्फ 20 मिनट ही है ,और जहां तक मुझे लगता है यह मीटिंग इतनी जल्दी पॉसिबल नहीं हो पाएगी ,तो आप एक काम करिए ,उनसे कल

1200 बजे का अपॉइंटमेंट फिक्स कर दीजिए ,,,,,

और हां ड्राइवर से बोलो कि मेरी गाड़ी तैयार रखे, मैं बस 20 मिनट बाद ही निकलती हूं ,मुझे जल्द ही कॉलेज पहुंचना होगा ,,,,ऑलरेडी में लेट हो चुकी हूं !

जी मैडम ! चपरासी ने इतना ही कहा और धीरे से दरवाजा बंद करते हुए बाहर जाकर ड्राइवर को गाड़ी निकालने के लिए कहने लगा।

वहां पर बैठे हुए लोग चपरासी के पीछे गए ,जब उन्होंने जानना चाहा कि डॉली मैडम से मीटिंग के बारे में क्या बात हुई तो चपरासी ने उन्हें कल के बारे में इन्फॉर्म कर दिया,,,,

जब उन्होंने दोबारा डॉली से मिलने की बात कही ,तो चपरासी ने सख्त शब्दों में उनसे मना किया ,,,,

सर आप जानते हैं, कि डॉली मैडम टाइम की कितनी पंक्चुअल है ,अगर उन्होंने कह दिया कि वह 20 मिनट बाद बाहर आएंगी,,,,,मतलब 20 मिनट बाद वह अपनी गाड़ी के अंदर होंगी, और अगर कल उन्होंने आपसे 1200 बजे मिलने के लिए कहा है ,,,,

अगर आप 1210 पर यहां आए तो आपकी मीटिंग कैंसिल हो जाएगी !

प्लीज आप टाइम का विशेष ध्यान रखें ! और अब तो आप कल ही मैडम से मिल पाएंगे,,,,, इतना कहते हुए चपरासी वापस अपनी जगह पर जाकर बैठ गया डॉली जैसे ही जाने को हुई, एक बार उसने फिर से टाइम देखा ,,,,

घड़ी में ठीक 530 हो चुके थे ।

टाइम देखने के साथ ही डॉली ने अपनी टाइटन वॉच पर एक प्यारी सी नज़र डाली , और मुस्कुराते हुए उसे छूने लगी खैर यही टाइम था ,उसके ऑफिस से बाहर निकालने का ।

कभी-कभी वह कुछ देर तक भी रुक जाती थी ,लेकिन आज उसे जरूरी काम से कॉलेज जाना था ,इसलिए वह ऑन टाइम ही ऑफिस से निकल रही थी । मोबाइल उठाकर पर्स में डाला, पर्स को कंधे पर लटकाया ,और केबिन से बाहर आ गई,,,,,,,

;डॉली आज महिला बाल विकास अधिकारी की पोस्ट पर थी।

47 वर्षीय डॉली को सभी एक सख्त मिजाज टाइम की पावन्द और ईमानदार ऑफिसर के रूप में जानते थे ।

उसके काम करने का तरीका ,लोगों से बात करने का तरीका ,सबसे अलग था वह बहुत ही संजीदगी के साथ अपने ओहदे को ध्यान में रखते हुए अपनी नौकरी कर रही थी ।

किसी फाइल की कोई गड़बड़ी डॉली की नजर से बचके नहीं जा सकती थी ।

चाहे कैसी भी फाइल हो ,डॉली को हर हाल में उसे सही करना आता था।

और उसके इसी सख्त रवैया के चलते सारे ऑफिस के कर्मचारी डरने के साथ-साथ डॉली की इज्जत भी करते थे। क्योंकि वह एक ईमानदार ऑफिसर थी वह सिर्फ देश और समाज का भला ही चाहती थी ,अपना फायदा नहीं !

और इसीलिए बेझिझक सारे फैसले ,

सबके हितों को देखते हुए ही करती थी। अब तक डॉली गाड़ी में बैठ चुकी थी। चपरासी ने ड्राइवर को पहले ही बता दिया था ,कि मैडम जी को मेडिकल कॉलेज पहुंचना है ।

बस आधा घंटे बाद ही डॉली मेडिकल कॉलेज के गेट पर थी ।

उसने ड्राइवर को गाड़ी रोकने का इशारा किया ,और एक बार फिर मोबाइल हाथ में लेकर टाइम देखने लगी,,,,,

डॉली मोबाइल हाथ में लेकर नंबर डायल करने ही वाली थी , कि अचानक सामने से राजनी आती हुई दिखी,,,,,

बिल्कुल राज की परछाई

यानी कि अपने डैड की

चेहरे पर वैसे ही भोलापन

ऊंचा कद ,गेहूं चमकता हुआ रंग

राज की तरह ही घुंघराले घने घने बाल वह सीधी कॉलेज के गेट से निकली

और जल्दी से गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए गाड़ी के अंदर पीछे वाली सीट पर डॉली के पास आकर बैठ गई,,,,,,,

डॉली की तरफ देख कर बोली,,,

सॉरी मम्मा आई एम लेट,,,

मम्मा आपको पता है

अगर मैं आज ही अपनी फाइल सबमिट नहीं करती

ना ,तो मेरा प्रैक्टिकल तो गया अच्छा हुआ कि बस फाइल सबमिशन के 4 घंटे पहले ही मुझे मैसेज मिल गया। और मैंने जल्दी से अपनी इनकंप्लीट फाइल पूरी करते हुए उसे सबमिट भी कर दिया,,,,

थैंक गॉड मम्मा सब कुछ अच्छे से हो गया ,,,

और थैंक यू सो मच ,,कि आप टाइम पर मुझे पिक करने भी आ गई ,,,

बस अब जल्दी से चलिये मैं हॉस्टल से अपना बैग उठा लेती हूं ,और उसके बाद हम दोनों सीधे अपने घर,,,,,आपको पता है कल सेटरडे की छुट्टी है, परसों संडे है और नर्सों भी कॉलेज की छुट्टी मिल गई है ,क्योंकि हमारे कॉलेज में प्रोफेसर्स का कोई सेमिनार है ,और इसी के चलते स्टूडेंट को मंडे हॉलीडे भी दे दिया गया है।

मम्मा में पूरे 3 दिन आपके साथ रुक पाऊँगी,,,,,

डॉली ने एक नजर राजनी के चेहरे पर डाली और उसका गाल थपथपाते हुए कहा ,,,,,

ऑफकोर्स इन 3 दिनों के लिए मैं भी बहुत खुश हूं ।

पिछले 1 महीने से तू इतनी बिजी थी

कि गांव में आ ही नहीं पाई ,और काकी भी आंखें बिछाकर तेरा इंतजार कर रही है ,,,,

डॉली ने एक नज़र राजनी के चेहरे पर डाली,,,,और मुस्कुराते हुये कहा!

,,पहले तो रोज ही काकी तेरा चेहरा देखकर आँखे खोलती थी।

तुझे खाना खिलाने के बाद खाना खाती थी,,,धीरे-धीरे

यह आदत सैटरडे संडे तक पहुंच गई,,,,, लेकिन अब तो कॉलेज में तू इतनी बिजी हो गई है

कि पूरे 1 महीने बाद गांव आ रही है आज तो पता नहीं काकी ने क्या-क्या तैयारियां कर ली होगी तेरे आने की खुशी में ।

रियली//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg मम्मा वैसे गैस कीजिए कि काकी दादी ने मेरे लिए क्या-क्या बनाया होगा

डॉली धीरे से मुस्कुराती हुई बोली;

पता नहीं राजनी मैं तो गैस भी नहीं कर सकती, इतनी सारी चीजें बनाई होंगी जिनके नाम गिनना भी मुश्किल होगा। राजनी डॉली कि इस बात पर खिलखिला कर हंस पड़ी,,,,

मम्मा सच में

और यह तो काकी दादी का सबसे फेमस डायलॉग है ,जैसे ही मैं जाऊंगी तुरंत कहने लगेंगी,,,,,

कितनी दुबली हो गई है, ठीक से खाती है कि नहीं, और फिर मुझे ढेर सारा खाना खिलाएंगी, जैसे कि 1 दिन में खाना खाकर मैं वापस मोटी हो जाऊँगी,,,;हां राजनी तू जैसे बचपन में थी ना बिल्कुल गोलमोल ,मोटू, काकी दादी तुझे बैसा ही देखना चाहती है ,,,,,

मम्मा प्लीज मैंने कितनी मुश्किल से अपना वेट कंट्रोल किया है !

बट अब नहीं ,,,अब मैं ऐसे ही ठीक हूं आपको पता है

आज कल तो जीरो फिगर का जमाना है राजनी ! काकी दादी का कहना भी गलत नहीं है !

तू मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई कर रही है कितना प्रेशर

होता है तेरे ऊपर पढ़ाई का और अगर इस तरह से अपनी हेल्थ को इग्नोर करती रहेगी ,,,,,

तो बेटा तेरी हेल्थ पर भी असर पड़ेगा ।

वीकनेस आती है, तू समझती क्यों नहीं मम्मा अब आप भी शुरू हो गई

मम्मा रियली आप मुझे जो भी देती है ना वो घर के बने हुए लड्डू ,,,और बादाम मैं वह सब कुछ खाती हूं ।

और मुझे कोई वीकनेस नहीं है

मेरा वेट, मेरा हीमोग्लोबिन ,सब कुछ परफेक्ट है ।

लास्ट मंथ ही मैंने सारे टेस्ट करवाए थे आई मीन ,,,कॉलेज से ही सबको बोला गया था ,बॉडी फिटनेस टेस्ट करवाने के लिए ,,,,

एवरीथिंग इज परफेक्ट,,,,,

Ok राजनी ! पर चलकर काकी दादी से कोई बहस नहीं ,वह जैसा कहेंगी तू वैसा ही करेंगी,,,,,

ओके माय मम्मा डार्लिंग,,,,

मैं काकी दादी की सारी बातें मानूंगी

तब तक घर आ चुका था ।

घर तो वही था ,लेकिन उसमें काफी कुछ बदलाव आ गए थे।

जहां पहले बाहर खुली हुई जगह को पेड़ों से कवर किया गया था ।

वहीं पर अब काफी ऊंची ऊंची लोहे की रेलिंग लगवा दी गई थी ।

बाहर खुली जगह को काफी खूबसूरती से एक गार्डन का लुक दिया गया था

जहां पर पुराने पेड़ों के साथ-साथ कुछ नए पेड़ और लगाए गए थे।

घर वही था, पर उसको बहुत सुंदरता से फर्निश्ड किया गया था, मखमली पर्दे चमचमाती हुई डाइनिंग टेबल, नीचे बिछा मखमली कालीन ,मॉड्यूलर किचन, इन सारी चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा था ।

ऊपर की मंजिल पर भी एक शानदार पोर्शन बनाया गया था ।

जो स्पेसिली राजनी के लिए था

ऊपर उसके लिए सारा इंतजाम बखूबी था ।

उसके लिए एक बड़ी सी लैब, उसकी पसंद का बेडरूम, अटैच्ड लेट बाथ चेंजिंग रूम ,इन सब के साथ ही ,घर पर काकी की देखरेख के लिए एक लड़की को काकी के पास रखा गया था।

काकी उम्र के 75 वे पड़ाव को पार कर रही थी ।

और अब उसका शरीर इतना काम नहीं देता था, कि वह सारे घर की जिम्मेदारी उठा सके ,इसलिए डॉली ने सारा इंतजाम अच्छी तरह से कर रखा था।

कि डॉली के ऑफिस जाने के बाद काकी को कोई भी तकलीफ ना हो

डॉली घर का सारा काम करवाते हुए ऑफिस जाती, और उसके बाद पिंकी ही घर के सभी कामों को संभालती थी। पिंकी ढाबे पर काम करने वाले छोटू की 18 वर्षीय बेटी थी ।

जिसने इसी साल 12वीं की परीक्षा पास की थी ,और डॉली ने उसका एडमिशन कॉलेज में भी करवा दिया

था।

b.a. फर्स्ट ईयर का प्राइवेट फॉर्म भरकर वह घर पर ही पढ़ाई करती रहती थी ।

वैसे तो डॉली के यहां,,, झाड़ू पोछे साफ-सफाई ,बर्तन कपड़े ,सबके लिए मेड आती थी, हां लेकिन खाना आज भी डॉली अपने हाथों से ही बनाती थी ।

पिंकी का काम सिर्फ इतना होता था

कि वह डॉली के जाने के बाद घर को अच्छी तरह से संभाल सके ।

काकी को टाइम पर खाना खिलाना उनकी दवाइयां देना ,और उनकी देखरेख करना ।

कभी वह प्यार से काकी के सिर में तेल की मालिश कर देती ,तो कभी उनके हाथ पैरों की जब काकी नहा धोकर आती।

तो काकी की इच्छा अनुसार कभी रामायण ,कभी गीता ,तो कभी शिव पुराण पढ़ कर उन्हें सुनाती।

जिससे काकी का मन बहल जाता;

डॉली सुबह 900 बजे ही ऑफिस के लिए निकल जाती थी, और शाम को आते आते भी उसे 600 बज जाते । काकी दिन भर घर में अकेले कैसे रहती इसी को देखते हुए डॉली ने पिंकी को यहां रखना ठीक समझा था।

पिंकी एक बेटी की तरह इस घर में रहती थी, छोटे-मोटे काम भी कर देती ,और जब काकी आराम करती ,तो मन लगाकर अपनी पढ़ाई भी कर लेती थी। पिंकी को भी पता था ,कि आज राजनी दीदी पूरे 1 महीने के

बाद घर आ रही हैं राजनी ,पिंकी से पूरे 6 साल बड़ी थी यानी कि 24 साल की।

राजनी जब भी आती ,,,

पिंकी ,,,,,दीदी ,,,दीदी,,, कहते हुए उसके आगे पीछे घूमती रहती ।

वह शहर के कॉलेज की बातें राजनी से जानना चाहती थी ।

राजनी भी उसे सब कुछ बताती रहती तो बस जेसे ही काकी को पता चला

कि राजनी आ रही है ,तो पिंकी से कह के , उसकी पसंद की सारी चीज़ें बनवा ली,,,,,,और पिंकी भी खुशी-खुशी एक के बाद एक चीजे बनाती जा रही थी ।

शाम के 700 बज चुके थे ,जब डॉली ने राजनी को लिया ,उसके बाद एक ,दो काम और थे, इसलिए आने में थोड़ा सा लेट और हो गए थे ,,,

और 7 बजे फाइनली दोनों घर पहुंच चुकी थी। घर पहुंचकर जैसे ही दरवाजा खटखटाया तो देखा कि दरवाजा पहले से खुला है। राजनी घर के अंदर चली गई ,,,,

और डॉली ने हमेशा की तरह सबसे पहले ढाबे के अंदर जाकर ,एक नज़र चारों तरफ घुमाई ,किचिन, हॉल हर जगह, हर चीज ,का मुआयना किया,,

जब सब कुछ सही लगा ,तो कुछ देर छोटू से बात की, और डॉली भी घर के अंदर आ गई,,,,,,

लगभग आधा घंटे रुकने के बाद ,जब डॉली अंदर आई ,तो देखा की टेबल पर ढेर सारा नाश्ता रखा हुआ था ,और काकी मना मना कर राजनी को खिलाती; जा रही थी ।

कभी उसे पकौड़िया खिलाती, तो कभी हलवा ,और उसकी पसंद का पास्ता भी जो राजनी को पसंद था।

काकी ने सब कुछ बनवा लिया था राजनी नखरे करते हुए मुंह बिचका रही थी ,क्योंकि इस आधे घंटे में ऑलरेडी

;काकी उसे बहुत सारा खिला चुकी थी। पर फिर भी एक के बाद एक फरमाएशें चालू थी ,काकी की, जब तक वह खुद

तृप्त ना हो जाए ,राजनी को खिलाते हुए तब तक वह कहां मानने वाली थी। राजनी ना नुकूर करते हुए ,कभी किसी चीज का एक बाइट खा लेती, तो कभी काकी के हाथ से लेकर उनको ही खिला देती,,,,,,,

डॉली को पता था, कि इन 3 दिनों घर में यही सब चलने वाला है ।

काफी राजनी के पीछे पड़ी रहेगी ,और राजनी ऐसे ही नखरे दिखा कर इधर-उधर घूमती रहेगी,,,, लेकिन डॉली ने दोनों के बीच में ना पढ़ते हुए अपने कमरे में जाना ही ठीक समझा ।
 
डॉली की आदत में शुमार था ,कि वह जब भी ऑफिस से आती 2 मिनट काकी से हाल चाल पूछने के बाद ,सबसे पहले अपने रूम में जाकर हाथ मुंह धोकर चेंज करती, उसके बाद ही बाहर निकलती थी।;

कुछ ही देर बाद डॉली अपने रूम से बाहर आ गई थी।

उसने एक लाइट पिंक कलर का गाउन डाला हुआ था ।

और उसके हाथ में एक कॉपी और पेन था।

ऑफिस से आने के बाद चाय पीते हुये ही वह ढाबे का सारा हिसाब किताब कॉपी में लिखती जाती थी।

यह उसकी रोज की ही बात थी

उसने पेन हाथ मे लिया,,,,,,

और काकी के बगल में बैठ गई ,अब काकी ने डॉली को भी खिलाना शुरू कर दिया ,,,,,,,बेटा थोड़ी देर के लिए इस कॉपी पेन से छुट्टी पा लिया कर ।

सुबह की गई गई शाम को आई है;

तेरी आंदते पता नहीं कब बदलेंगी, सारा नाश्ता गरम है ,पहले अच्छे से खा ले फिर लिख लेना,,,,,,

ठीक है काकी, क्या मैंने आपको कभी शिकायत का मौका दिया है

आप जो भी मुझे नाश्ता देती है, मैं सारा खा लेती हूं ,और हां मुझे और राजनी को आपने बहुत खिला लिया ,अब आप जरा अपना भी ध्यान रख ले ,,,,,

बताइए शाम की दवाई खाई कि नहीं

तब तक पास ही बैठी पिंकी बोली डॉली आंटी दवाई तो मैंने काकी दादी को खिला दी ,लेकिन आपको पता है ,कितने नखरे कर रही थी ,बड़ी मुश्किल से खाई इन्होंने ।

वह भी तब जब मैंने इनको आपकी धमकी दी, कि मैं अभी मोबाइल लगाकर आपको बताती हूं ।

पूरा आधा घंटा लग गया मुझे दवाई खिलाने में ।

डॉली ने पेन टेबल पर रखते हुए काकी को देख कर कहा !

काकी आप क्यों बच्चों जैसी हरकते करती है !

क्या आप समझती नहीं

कि आपके लिए दवाइयां कितना जरूरी है ,अगर इस तरह से नानुकुर करती रही तो प्रॉब्लम हो सकती है ,अब तक राजनी भी उठ कर बैठ गई ,और उंगली दिखाते हुए काकी से बोली,,,,

काकी दादी एक डॉक्टर होने के नाते मैं आपको यह आर्डर देती हूं, कि आपको अपनी दवाई टाइम टू टाइम खानी है। काकी ने कहा हां बड़ी आई डॉक्टर अपनी सेहत तो देखती नहीं, मुझे चली दवाई बताने काकी दादी में बहुत फिट हूं काकी दादी मम्मा से पूछ लीजिए ,मेरी सारी रिपोर्ट परफेक्ट है ।

बस 3 महीने बाद ही मेरे फाइनल एग्जाम है ,और उसके बाद मुझे एमबीबीएस डॉक्टर की उपाधि मिल जाएगी ।

यानी कि आपकी राजनी,, डॉ राजनी,,

कहलाएगी ,,,,,,

काकी ने बलाये लेते हुये कहा !

;मेरी बच्ची इस दिन का तो मुझे कब से इंतजार था ।

जब मैं तुझे डॉक्टर की ड्रेस में देखूंगी हां काकी दादी बस कुछ महीने और ,फिर आपका इंतजार खत्म हो जाएगा ।

और हां अब मेरे ऊपर पढ़ाई का बहुत प्रेशर रहेगा ,तो शायद मैं एग्जाम के बाद ही आ पाऊँ,,,,,,

क्या पूरे 3 महीने के लिए जाएगी

तब तक डॉली राजनी को आंखें दिखाते हुए ,,,,,

काकी को समझाने लगी ,काकी ऐसा नहीं है ,आप चिंता मत कीजिए ,बीच में एक दो बार में राजनी को आपसे मिलाने जरूर ले आऊंगी ।

हां मम्मा पर सच में मेरे ऊपर पढ़ाई का बहुत प्रेशर रहने वाला है ।

राजनी ! यहां तुझे कोई रोक नहीं रहा पढ़ने से ,,तू यहां आकर भी अपनी पढ़ाई कंटिन्यू कर सकती है ।

और मैंने कहा था ना, कि दादी से कोई बहस नहीं ,,,,,

ओके मामा ,,,काकी दादी मैं आ जाऊंगी आपसे मिलने ठीक है ।

और काकी के गले में बाहें डाल दी

जब काकी ने राजनी के सिर पर हाथ फेरा ,तो बालों को ध्यान से छूते हुए कहा देख कैसे रूके हो गए हैं बाल

इस 1 महीने में एक बार भी तेल की मालिश नहीं की होगी ,,,,,

पिंकी जरा तू नारियल तेल की शीशी लेकर तो आ इसके बालों की अच्छे से मालिश कर दूँ,,,,, अरे पढ़ाई पढ़ाई पढ़ाई 24 घंटे पढ़ाई के अलावा और कोई काम ही नहीं है।

;राजनी ने उठते हुए कहा ,,,,

प्लीज काकी दादी मुझे चपडू मत बनाइए।

डॉली ने एक बार फिर राजनी को समझाया,,,,, राजनी तू घर में ही तो है अगर काकी दादी तेरी मालिश कर रही है तो करवा ले, कल सुबह बालों को धो लेना ,फिर तो और भी अच्छे हो जाएंगे। राजनी के ना चाहने के बाद भी काकी ने राजनी को सोफे पर नीचे ही अपने पास बैठा लिया, और अच्छे से उसके सिर की तेल मालिश करने लगी,,,,,,

अब राजनी के पास कोई और चारा नहीं था ,वह भी आराम से बैठ कर मालिश के मजे लेने लगी थी ।

काकी धीरे-धीरे उसके बालों में उंगलियां चला रही थी।

तब तक डॉली ने पिंकी को इशारा किया और पिंकी ने काकी से तेल की शीशी लेते हुए कहा !

काकी अब मैं राजनी दीदी की अच्छे से मालिश कर देती हूं ,आप जितनी देर कहेंगी, उतनी देर कर दूंगी,,,,,

;नहीं तो आपके हाथ थक जाएंगे ।

हां ठीक है तू ही कर दे ,काकी; तेल की शीशी पिंकी को दे दी ,और पिंकी बातें करते हुए राजनी के सिर में मालिश करने लगी।

राजनी ने पिंकी को डांटते हुए कहा पिंकी अपनी चपड़ चपड़ अभी बंद करेगी अभी आराम से मेरे सिर में

मालिश कर। बाद में मैं तुझे सब कुछ बताऊंगी ,,,,

ठीक है दीदी,,,,, पिंकी ने मुंह बनाते हुए कहा !

इस तरह से राजनी काकी डॉली और पिंकी ,चारों रात को 900 बजे तक हॉल में ही बैठकर बातें कर रही थी।

यानी कि इन्हें लगभग 2 घंटे हो चुके थे जब डॉली ने टाइम देखा ,तो रात के 900 बज चुके थे।

;डॉली ने उठते हुए पूछा !

काकी खाने में क्या बना लूँ

इतना कहना था ,कि राजनी पहले ही बोल उठी,,, मामा प्लीज मेरे लिए कुछ मत बनाना, मैं बहुत ज्यादा खा चुकी हूं एक बाइट भी नहीं खा सकती।

अब भूख तो डॉली को भी नहीं थी क्योंकि आज काकी ने कुछ ज्यादा ही नाश्ता बनवा लिया था ।

और काकी वह तो सुबह डॉली के जाने से पहले ही खा लेती ,,,यानी कि डॉली उसे खिला कर जाती थी ।

और शाम को 700 बजे,,,,,

उसके बाद काकी रात का खाना नहीं खाती थी ,जो उनके डाइजेशन के हिसाब से सही भी था।

;डॉली ने काकी का हाथ पकड़ा ,और धीरे-धीरे उन्हें उनके कमरे की तरफ ले गई ।

काकी !!!! राजनी तो 1200 बजे से पहले सोने वाली है नहीं ,लेकिन आपको अब सो जाना चाहिए, और हां अब आपकी जो भी बातें हो ,आप सुबह ही करना ,अभी नहीं, देर रात तक जागेंगी तो आपकी तबीयत खराब हो जाएगी। डॉली की बात मानने में ही भलाई थी काकी इस बात को अच्छी तरह से समझती

थी ।

उन्होंने डॉली से कुछ नहीं कहा ,और अपने कमरे में जाकर लेट गई ।

काकी को चादर उड़ाया, लाइट बंद की और वापस बाहर आ गई।

;राजनी को भी सख्त हिदायत दी ,कि वह हर हाल में 1200 बजे तक तो सो ही जाए ।

क्योंकि राजनी के लिए 1200 बजे सोना भी सही टाइम माना जाता था।

वरना तो वह देर रात तक अपनी पढ़ाई ही करती रहती थी ।

पिंकी डॉली से कुछ कहती,,, कि उसने तुरंत कह दिया आंटी जी आज मैं राजनी दीदी के साथ ऊपर उनके कमरे मैं ही रुकूँगी,,,,,,

पापा को फोन कर देती हूं ,,,,,

हां हां मुझे पता था ,कि आज तू यहीं रुकने वाली है, इसलिए मैंने छोटू से ढाबे पर शाम को ही बोल दिया था ।

तू एक बार जाकर दरवाजे अच्छी तरह से चेक कर के बन्द कर देना ,,,,और रुक जा ,और हां अगर रात को तुम दोनों को भूख लगेगी ,तो बहुत सारा नाश्ता रखा है गर्म करके खा लेना।

गुड नाइट ,,,,,इतना कहते हुए डॉली अपने कमरे में चली गई ।

राजनी और पिंकी अभी भी हाल में ही थी ,,,,,,,,,

हमेशा की तरह डॉली सुबह 600 बजे ही उठ

गई ,आज भी उसकी आदत में शुमार था, कि सबसे पहले उठकर बाहर गार्डन में जाकर पेड़ों को पानी देती थी वैसे तो डॉली ने माली लगा रखा था ।

फिर भी इस बहाने कुछ देर ताजी हवा उसे मिल जाती ,फिर तो दिन भर वह ऑफिस के काम में बिजी ही रहती थी

इसलिए वह 600 से 700 बजे तक का टाइम गार्डन में ही बिताती थी ।

नंगे पैर हरी हरी घास पर चलना ,पौधों को पानी देना ,थोड़ा सा योग प्राणायाम करना ,प्रकृति के नजदीक रहकर उसके मन को शांति मिलती थी ।

जब 7 बजते तब अंदर आकर नहा धोकर ,सबसे पहले अपने कान्हा जी को उठाती, उनकी पूजा करके उनको प्रसाद लगाती, और तब कहीं जाकर डॉली का दिन शुरू होता था।

उसके बाद थोड़ा सा किचन का काम काकी को उठाना, फिर चाय नाश्ता ,और कुछ देर काकी के साथ बैठकर बातें करने के बाद ,तैयार होते होते ऑफिस निकल जाना ,,,,,

बाद के सारे काम पिंकी ही संभालती थी कुछ ऐसी थी डॉली की रोज की दिनचर्या आज छुट्टी थी ।

पर आज भी डॉली 600 बजे ही उठ गई रोज की तरह जाकर गार्डन में पौधों को पानी दिया ,चहल कदमी की ,और 700 बजे अंदर आ गई ।

;राजनी हॉल में कोई सोफे पर ही सोई हुई थी, और पिंकी दीवान पर ,,,

डॉली समझ गई कि जरूर देर रात तक दोनों ने बाते की होगी ।

और फिर आलस करते हुए यह दोनों ऊपर गई ही नहीं ,डॉली ने उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा ,क्योंकि आज छुट्टी थी ,तो आराम से सारे काम हो सकते थे ।

छुट्टी के दिन डॉली सारे घर को एक बार अपने हाथों से साफ करती थी ।

चाहे ऊपर राजनी का कमरा हो ,या फिर पूरा नीचे वाला पोर्शन,,,,

;काकी की दवाइयां देखना ,,,कि कौन सी है कौन दी नही,,,,घर का कौन सा सामान खत्म हो रहा है ,इस बारे में पता करना ,,,, छुट्टी वाले दिन डॉली धीरे-धीरे सारे कमरों को देखते हुए साफ करती जा रही थी ।

तभी पिंकी भी उठ कर आ गई ,,,,

आंटी जी चाय बना लूँ,,,,,

हां पिंकी बना ले, और सुन वैसे तो अभी राजनी उठेगी नहीं ,फिर भी एक बार धीरे से उससे पूछ लेना ,अगर चाय पीते में आ गई ना ,तो उससे इतना भी कंट्रोल नहीं होगा ,कि हम बैठकर चाय पी ले फिर उसके लिए बीच में ही उठकर उसकी चाय बनानी होगी ।

काकी को भी उठा दे 730 बज गए हैं साथ में वह भी चाय पी लेंगी, आंटी जी मैंने काकी को उठा दिया है ,उन्होंने ब्रश भी कर लिया और वह ,,,,

हां हां समझ गई ,तुझे बताने की जरूरत नहीं है ,,जरूर राजनी के पास बैठ कर उसे देख रही होंगी,,,,,

जी,,,, पिंकी ने हंसते हुए कहा ,,,,

आंटी मुझे समझ नहीं आता काकी दादी सोते हुए भी राजनी दीदी को क्यों देखती रहती हैं

बेटा क्योंकि तुझे तो पता है, कि राजनी अब कितना कम आ पाती है यहां !

और काकी दादी का कभी दिल ही नहीं भरता राजनी से ,बस इसलिए वह ज्यादा से ज्यादा वक्त राजनी के पास ही बैठना चाहती हैं ।

ठीक है आंटी जी आप भी बाहर आ जाइए ,मैं बस चाय बना कर अभी लाती हूं।

डॉली की शादी को 26 साल पूरे हो चुके थे । इन छह 26 सालों में सच में डॉली ने कभी भी अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं

छोड़ी थी ।

घर हो ,ऑफिस हो, या ढाबा ,वह तीनों जगह बराबर नजर रखती थी ।

अपनी पढ़ाई करते हुए ,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बढ़ते बढ़ते ,आज डॉली महिला बाल विकास अधिकारी बन चुकी थी, बल्कि महिला बाल विकास अधिकारी बने हुए उसे 10 साल पूरे हो चुके थे ।

47वे साल के पड़ाव में भी डॉली उतनी ही एक्टिव थी, जितने कि आज से 26 साल पहले ,उसकी मेहनत और उसकी ईमानदारी में कहीं कोई कमी देखने को नहीं मिलती थी ।

वह हर काम को तरीके से , सुव्यवस्थित रूप दे देती थी।

घर ,परिवार, ढाबा और नौकरी संभालना उसे अच्छे से

आता था ।

डॉली की इकलौती बेटी राजनी, जो 24 साल की हो चुकी थी ,और बस 3 महीने बाद ही उसका एमबीबीएस का फाइनल एग्जाम भी होने वाला था।

राजनी पढ़ने में बहुत होशियार थी बिल्कुल डॉली के जैसी ,और दिखने में राज के जैसी ।

वैसा ही गोल भरा हुआ चेहरा ,घुंघराले बाल ,और गेहूंआ चमकता हुआ रंग आज से 10 साल पहले जब डॉली 12वीं कक्षा में थी।

उसने तभी निश्चय कर लिया था ,कि वह डॉक्टर बनेगी ,वह भी एक सफल सर्जन एक स्पेशलिस्ट ,उसने अपनी पढ़ाई इतने मन लगाकर की ,कि बस बारहवी के बाद 1 साल ड्रॉप लेकर ही दूसरे साल नीट का एग्जाम क्लियर कर लिया था ।

और उसे आसानी से शहर के गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन भी मिल गया था। अपनी एम बी बी एस की पढ़ाई में 5 साल तक उसने जी तोड़ मेहनत की थी। हर चीज को गहराई से जांचना ,समझना पड़ना और उसको इंटरेस्ट के साथ सीखना ,राजनी की आदत में शुमार था पढ़ाई में जो लगन डॉली की थी ।

बिल्कुल वैसे ही राजनी की भी,,,,,

वह कभी किसी चीज से हार नहीं मानती थी ।

लेकिन सिर्फ एमबीबीएस पास करना ही उसका सपना नहीं था, एमबीबीएस के बाद वह 2 साल का एमएस भी करना चाहती थी ।

और उसने पूरा मन बना लिया था

कि चाहे उसे ड्रॉप भी लेना पड़े ,पर वह उसे पूरा करके ही रहेगी ।

डॉली अच्छी तरह से जानती थी, कि राजनी जो ठान लेती है ,वह करके ही रहती है ,और उसे समझाना या मनाना किसी के बस की बात नहीं है ।

वैसे तो डॉली को राजनी की पढ़ाई से कोई दिक्कत नहीं थी ,कि वह जितना चाहे समय ले सकती है ।

बस एक ही वजह थी, जिसकी वजह से डॉली चाहती थी ,कि राजनी जल्दी अपनी पढ़ाई पूरी करे ,और शैलेश के साथ अपने घर गृहस्ती बसा ले ।

काकी की बूढ़ी आंखें भी तो तरस रही थी राजनी का घर संसार बस्ता देखने के लिए ।

शैलेश ,,,,, पूनम और विकास का 25 वर्षीय बेटा ,जो बचपन से ही राजनी के काफी करीब था ।

बचपन में दोनों एक साथ खेलते हुए पढ़ते हुए बड़े हुए ।

दोनों एक ही स्कूल में थे ,पूनम और विकास शहर में ही रहते थे, और जिस स्कूल में शैलेश पढ़ता था ,विकास ने जब बताया कि वह स्कूल बहुत अच्छा है। तो राज ने बिना देर किए राजनी का एडमिशन भी उसी स्कूल में करवा दिया था ।

और जब डॉली अपनी ड्यूटी के लिए शहर जाती ,तो राज डॉली के साथ राजनी को भी स्कूल छोड़ देता ,,,

और आते समय उसको स्कूल से ले लेते हां अगर कभी उससे जल्दी जाना है

या देर हो रही है, तो फिर राजनी को लेने की

जिम्मेदारी पूनम और विकास की ही थी।

जो दोनों बखूबी निभा रहे थे।

पूनम और विकास के दो बच्चे थे

शैलेश बड़ा बेटा जो 25 साल का था

और वह भी राजनी के साथ मेडिकल कॉलेज में ही था ।

वह राजनी से 1 साल आगे था ,और छोटी बेटी गौरी ,जो शैलेश से 5 साल छोटी थी ,जिसने अभी सीए करना स्टार्ट किया था।

शैलेश और राजनी की काफी अच्छी दोस्ती थी ,बचपन से बड़े तक दोनों साथ खेले, साथ पढ़े ,और कभी-कभी लड़े भी विकास और पूनम ने तो बचपन से ही यह सपना संजो लिया था, कि वह राजनी को अपनी बहू बनाएंगे ।

राजनी थी ही इतनी प्यारी ,मन की साफ और पढ़ने में काफी होशियार।

राजनी और विकास में कोई बात छुपी नहीं थी ,दोनों एक दूसरे के काफी करीब थे, और शैलेश इस रिश्ते के लिए पूरी तरह से तैयार था।

बस उसे इंतजार था, तो राजनी की हां कहने का ,,,,

शैलेश ही क्या

उसके साथ-साथ विकास , पूनम ,डॉली काकी और गौरी ,सभी पूरे दिल से चाहते थे ,कि राजनी की शादी शैलेश के साथ जल्द से जल्द हो जाए ,पर राजनी की आंखों में तो एक ही सपना था ।

वह सपना जो वह हर हाल में पूरा करना चाहती थी।

उसकी जिंदगी में इस सपने से बढ़कर कोई दूसरी जगह उसके लिए नहीं थी जब भी उसकी शादी की बात चलती

तो यही कह देती ,कि अभी उसे समय चाहिए ,यहां तक उसने तो यह भी कह दिया था ।

कि शैलेश कहीं और अपनी शादी कर सकता है ।

शैलेश राजनी का बहुत अच्छा दोस्त था और शायद उससे ज्यादा कोई राजनी को समझ भी नहीं पाता ,लेकिन राजनी की लाइफ में अभी प्रेम मोहब्बत के लिए कोई जगह नहीं थी।

सबसे पहले उसके लिए उसका सपना था ,जो उसे पूरा करना था ,और उस सपने की गहराई क्या है ।

शायद वह तो डॉली को भी पता नहीं था वह सपना सिर्फ राजनी की आंखों में था जो वह पूरा करना चाहती थी ।

और जब भी पूनम , डॉली से राजनी की शादी की बात करती ,तो वह यही कह देती थी, कि अभी थोड़ी रुकना पड़ेगा। शैलेश ने तो यहां तक कह दिया था

कि जितना चाहे शादी के बाद पढ़ सकती है ,,,,,

उसे कोई प्रॉब्लम नहीं ,उसके ऊपर कोई रोक-टोक नहीं होगी ,लेकिन राजनी अपने सपने को अपने दम पर ही पूरा करना चाहती थी ।

जो सपना उसने तबसे देखा था ,जब उसने ट्वेल्थ का एग्जाम दिया था।

डॉली कई बार तो राजनी से गुस्सा भी हो जाती, कि आखिर ऐसा कौन सा सपना है ,,,,,

वह क्यों खुलकर उसे नहीं बता सकती तेरा एमबीबीएस पूरा हो गया है ।

और विकास पूनम ने कहा है, की तू उनके घर रह कर भी एमएस पूरा कर सकती है ।

फिर आखिर कौन सी ऐसी मजबूरी है

कि तू अभी शादी नहीं करना चाहती कब से एक ही बात कहती है!

मां ! जिस दिन मेरा सपना पूरा होगा उस दिन आप सबको पता चल जाएगा,,,,

और प्लीज आप मुझसे बार-बार क्यों पूछती है ,बचपन में आप और डैड ही कहते थे ना

कि अगर हमारी कोई विश ही और उसको हम बता दें ,,तो वह पूरी नहीं होती ,,,,बस ऐसे ही कोई विश समझ लीजिए,,,,,

जो हर हाल में मुझे पूरी करनी ही है

और इसलिए मैं अपनी वह विश किसी को नहीं बता सकती,,,,

तो फिर मुझे फोर्स क्यों कर रही है

प्लीज राजनी के मुंह से जब ये बात सुनती तो,डॉली के पास कहने को कुछ नही रह जाता।

वो खामोश हो जाती,,,,,

आखिरकार उसने अब राजनी से शादी के बारे में कहना ही बंद कर दिया था। विकास और पूनम को भी स्पष्ट शब्दों में कह दिया था, कि अगर राजनी की आंखों में कोई सपना है ,वह उस सपने को अधूरा नहीं रहने देना चाहती ,,,,

तो वह अपनी बेटी को पूरी छूट देगी

कि वह अपने सपने को पूरा करे।

और अगर इस बीच आपको शैलेश के लिए कोई अच्छी लड़की मिलती है

तो आप लोग निसंकोच उसकी शादी कर लीजिए ,,हमें बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा ,,,,,

डॉली कि इस बात पर पूनम ने डॉली का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा !

डॉली अगर तू राजनी के साथ है !

उसका सपना पूरा करना चाहती है

तो हम तुझसे अलग नहीं है ,अरे राजनी को तो हमने कब का अपना बहू मान लिया है ,और फिर हमारे मानने से क्या होगा ,क्या तुझे पता नहीं कि शैलेश किसी और लड़की से शादी तो क्या किसी और लड़की के बारे में सोच भी नहीं सकता ।

उसे तो अपनी राजनी ही चाहिए ।

चाहे उसके लिए हमारे शैलेश को कितना भी इंतजार करना पड़े ।

हमें मंजूर है ,सबसे बड़ी प्रॉब्लम तो यह है ,कि राजनी अपना सपना किसी को बताती ही नहीं ,,,,

वरना शायद हम या शैलेश भी कुछ मदद कर पाते ।

यह बातें सब के बीच हो चुकी थी

और सब ने डिसाइड किया था, कि अब वह राजनी से शादी के बारे में कोई बात नहीं करेंगे ,,,,

शैलेश को राजनी का इंतजार करना मंजूर था ,चाहे वह कितना ही लंबा इंतजार क्यों ना हो।

और विकास पूनम ने भी इस बात को सहर्ष स्वीकार कर लिया था ।

कि उनके बेटे की जिंदगी राजनी है

और जब उनकी किस्मत में मिलना लिखा होगा, वह एक हो जाएंगे।

विकास पूनम और डॉली की बहुत अच्छी दोस्ती थी ।

वह हर संडे कोशिश करते , कि वह लंच या डिनर एक साथ ही करें।

कभी-कभी डॉली सैटरडे को वहीं रुक जाती थी ,और कभी विकास और पूनम गांव काकी और डॉली से मिलने आ जाते थे ।

और अब जब राजनी पूरे एक महीने बाद गाँव आई थी ,तो आज डॉली ने विकास और पूनम को अपने घर लंच पर इनवाइट किया था ।

यानी कि पूनम विकास शैलेश और गौरी चारों लोग एक साथ लंच पर आने वाले थे ।
 
तो डॉली आज उन्ही तैयारियों में लगी थी।

आज सेटरडे की छुट्टी थी ,और कल संडे तो मूड भी काफी रिलैक्स था।

अब तक पिंकी सब की चाय बना कर ले आई थी ,चाय के साथ कुछ हाई प्रोटीन बिस्किट और कुछ लो कैलोरी जो काकी और डॉली के लिए थे।

पिंकी ने जब चाय की ट्रे टेबल पर रखी डॉली ने प्यार से राजनी के सिर पर हाथ फेरते हुए उठाया ,,,,,,

राजनी बेटा चाय आ गई है,,,या अभी और सोना है

जब अदरक वाली चाय की महक राजनी की नाक

तक पहुंची तो बिना देर किए ,,,,

वह सोफे पर बैठ गई ,रात के तेल से चुपड़े हुए बाल ,उसके पूरे चेहरे पर आ रहे थे ।

जैसे ही उसने चाय का कप उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ,,,,,

डॉली ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे रखते हुए कहा,,,,,

राजनी दिस इज नॉट फेयर,,,,,

पहले आप जाकर ब्रश करके आइए उसके बाद ही आप चाय पिएंगी।

राजनी को पता था ,कि मम्मा ने जो कह दिया ,वह तो उसे करना ही पड़ेगा फटा फट गई और मुंह धोते हुए जल्दी से अंदर आ गई ।

चाय का कप उठाते हुए कहा!

मम्मा अब तो डेफिनेटली में इसे पी सकती हूं ।

अब आप इसे पी सकती है ! और हां चाय पी कर आपको दोबारा नहीं सोना है आज लंच पर पूनम और विकास शैलेश गौरी को लेकर आ रहे हैं ।

तो मैं चाहती हूं ,तू फटाफट उठ के नहा ले ,और अपने तेल से सने बाल भी धो ले ओ,,,,नो,,,, मम्मा आप भी न मुझे रिलैक्स नहीं करने दोगी।

पूनम आंटी विकास और गौरी तो ठीक है ,,,परे शैलेश यह फिर मेरे पीछे चिपकू की तरह पड़ जाएगा ।

और मुझे डिस्टर्ब करता ही रहेगा,राजनी बेटा ऐसे नहीं कहते ,,,वो कितना ध्यान रखता है तेरा, कॉलेज में किसी चीज की कमी होने देता है क्या तुझे कभी

तू ऐसे क्यों कहती रहती है उसके बारे में शैलेश एक

बहुत अच्छा लड़का है।

हां मम्मा तो मैंने कब कहा कि वह बुरा है पर अच्छे के साथ साथ वेरी-वेरी चिपकू

राजनी देख मैं शैलेश की कोई भी बुराई नहीं सुन सकती ।

मेरे लिए वह एक बेस्ट पर्सन है ।

उसमें ढूंढने से भी कोई बुराई नहीं निकाल सकते, और एक अच्छे इंसान के साथ साथ बहुत इंटेलिजेंट भी ,पूरे 5 साल तक हर बार उसी ने कॉलेज टॉप किया है ,और तेरी कितनी हेल्प करता है फिर भी तू उसके बारे में ऐसा बोलती रहती है।

ठीक है मेरी प्यारी मम्मा ,,,कुछ नहीं बोलूंगी ,,, डॉली ने बिस्किट की प्लेट राजनी की तरफ बढ़ाई ,,,,और जैसे ही सबकी चाय खत्म हुई डॉली टॉवल उठाकर नहाने बाथरूम में गई ।

लेकिन जाने से पहले राजनी से भी कह कर गई ,,,राजनी एक बार फिर से सुन ले सब लोग 100 बजे तक यहां आ जाएंगे ,और मैं चाहती हूं कि उससे पहले हमारे सारे काम रेडी हो जाए ।

डॉली ने इतना कहा ,कि पिंकी भी साथ में सारी बात समझ गई ,और वह फटाफट दोपहर के लंच की तैयारी करने लगी,,,,

डॉली जब नहा कर निकली ,तो देखा कि सुमन भी आ चुकी है ,सुमन यानी कि पिंकी की मां ,और छोटू की वाइफ, डॉली को जब भी कोई एक्स्ट्रा काम होता था तो वह सुमन को बुला लेती थी ।

और सुमन हंसी-खुशी फटाफट डॉली के साथ सारे काम करवा लेती ।

सुमन इंतजार कर ही रही थी ,कि डॉली आकर बताए, कि क्या करना है

डॉली बाथरूम से निकली, और किचन में गई, उसके पीछे-पीछे सुमन भी चली गई थी ।

डॉली ने सुमन को इशारा करते हुए सारे काम समझा दिए ,प्याज की कचोरीया बनेंगे, पुलाव बनेंगे ,कढ़ाई पनीर बनेगा और हां राजनी के फेवरेट दाल चावल तो बनना ही है।

जब वो लोग आ जाएंगे ,तो गरम-गरम चपाती भी सेक देना ।

और मीठे में क्या बनेगा डॉली दीदी

मीठे में तो तू काकी से ही पूछ ले, कि क्या क्या बनना है।

यह तो काकी ही बताएंगी, सुमन ने बड़े ध्यान से डॉली की सारी बातें सुनी ,और साथ में पिंकी को भी समझाया ,कि उन्हें क्या-क्या करना है ।

डॉली ने पूजा के लिए ताबे के लोटे में पानी भरा ,और कान्हा जी के मंदिर की तरफ जाने लगी, जाते-जाते उसने कहा कि तुम तैयारी करो ,मैं बस आधे घंटे में कान्हा जी को नहला कर और खाना खिला कर आती हूं ।

डॉली चली गई ,और सुमन ने काकी से पूछते हुये,कि मीठे में क्या बनेगा ,,,,

काकी ने दो तीन चीजों के फटाफट नाम बताए ,,,,कि हलवा हां ,,, शैलेश को अपने यहाँ का मेवे वाला हलवा बहुत पसंद है ।

और गौरी बिटिया को खीर, यह दोनों चीजें चाहिए, राजनी ! वह तो मीठे से दूरी भागती है, उसे तो बस उसके पसंद के दाल चावल खिला दो ,उसके बाद उसकी कोई तमन्ना ही नहीं रहती ,तीनों बच्चों की पसंद का खाना हो गया।

हम लोग तो उसी में कुछ ना कुछ खा लेंगे ,और फिर डॉली तो तुझे बता ही गई होगी ,कि क्या क्या बनना है ।

सुमन ने प्याज काटते हुए कहा ,,,,

जी काकी डॉली दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया है ।

और आप चिंता मत कीजिए, उनके आने से पहले ही मैं सब कुछ तैयार कर लूंगी और फिर डॉली दीदी तो आ

ही रही है। भला उन्हें चैन पड़ेगा कि वह बैठ जाए मुझसे पहले आधा काम वो ही कर लेंगी और शैलेश भाई को तो डॉली दीदी के हाथ का हलवा ही ज्यादा पसंद आता है। हां गोरी बिटिया को जरूर मेरे हाथ की खीर अच्छी लगती है ,,,,

तो खीर तो मैंने चढ़ा दी है ,काकी धीरे धीरे चलती हुई आई ,और एक बार किचन का मुआयना करने लगी, कि सब कुछ ठीक से हो रहा है या नहीं।

सुमन और पिंकी काफी साफ-सुथरे तरीके से ,और नहा धोकर ही रसोई में आती थी ,क्योंकि शुरू से ही जैसे ही रसोई बनती है ,तो पहली थाली कान्हा जी के लिए निकाली जाती है ,और काकी को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था, कि उनकी रसोई में कोई बिना नहाए धोए कदम भी रखे।

और फिर डॉली ,वह भला काकी के खिलाफ कभी जा सकती थी ,थोड़ी देर में डॉली भी पूजा करके आ गई थी ,खाने की खुशबू की महक पूरे घर में फैल रही थी ,अब तक मिक्स वेज ,कड़ाही पनीर दाल चावल, पुलाव ,खीर ,और हलवा सब कुछ बनाया जा चुका था ।

डॉली ने सुमन से कहा ,सुमन जल्दी से पूरियां तल दे ,तो सबसे पहले मैं कान्हा जी का भोग लगा दूँ ,,,दीदी कचोरियां भी टलनी है

सुमन ,तुझे याद नहीं रहता ,कान्हा जी को प्याज के खाने का भोग नहीं लगाया जाता ।

कचोरी हम बाद में तल लेंगे ,पहले तू पूरी निलाक दे,

मैंने थाली लगा ली है।

सुमन ने जल्दी से छोटी-छोटी चार पूरियां निकाल कर डॉली को दे दीं।

डॉली ने कान्हा जी के प्रसाद की थाली में पुरिया रखते हुए, एक बार फिर से जल का लोटा भरा ,और कान्हा जी का प्रसाद लगाने चली गई ।

अब तक सारा इंतजाम हो चुका था दोपहर के 100 बज गए थे, विकास और पूनम बस आने ही वाले थे ।

कहने को तो दोपहर के 100 बज गए थे ।

पर फरवरी का महीना था ,तो दिन भी काफी छोटी होते थे ,लेकिन हां इस समय की धूप अच्छी लग रही थी।

सारा काम हो गया ,तो डॉली ने गाउन चेंज करते हुए एक हल्का सा सूट ,और दुपट्टा पहन लिया था ।

राजनी अब तक ऊपर ही थी , डॉली ने नीचे से ही राजनी को आवाज लगाई राजनी तूने नहाया ,कि नहीं

कि अभी भी अपनी पढ़ाई में लगी है ।

इतना ही कहा ,कि राजनी फटाफट सीढियों से उतरती हुई नीचे आ गई।

मम्मा,,,,,राजनी ने घुटनों तक की एक फुल स्लीव्स फ्रॉक पहनी हुई थी।

जो काफी स्टाइलिश थी, उसके धुले हुए बाल इधर से उधर उड़ रहे थे ,और काले घुंघराले बालों में उसका चेहरा और भी खूबसूरत नजर आ रहा था ,डॉली ने एक नजर ऊपर से नीचे तक डाली, और कहा राजनी अभी मौसम इतना भी गरम नहीं है, कि तू एक हल्का सा

स्वेटर ना डाल पाए। बेटा एक पतला स्वेटर पहन ले

यह ठंड लग जाती है ,राजनी ने लापरवाही से डॉली की बात को इग्नोर करते हुए ,डॉली के गले में बाहें डाल दी,और कहने लगी, मम्मा मुझे ठंड नहीं लगेगी ,,,,रैयली आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

वेदर देखो ना, आपने देखा अभी दोपहर के 100 बजे हैं, 25 टेंपरेचर ! भला इस में ठंड कैसे लग सकती है

और फिर आप ही ने कहा ना, कि शैलेश आने वाला है ,तुम अच्छे से तैयार हो जाओ ,तो इसलिए मैंने स्वेटर नहीं पहना और अपनी ही बात पर खिलखिला कर हंसदी,,,,,,

डॉली ने घड़ी पर निगाह डालते हुए फोन उठाया ,और पूनम को फोन करने लगी पहली ही बैल में पूनम ने फोन उठा लिया हां डॉली बोल ! अरे क्या बोलूं ,तुम लोग अभी तक आए नहीं ,हम कब से वेट कर रहे हैं ,और अब तो मुझे भूख भी लगने लगी।

हम लोग रास्ते में हैं ,बस 10 मिनट के अंदर ही तुम्हारे घर के अंदर होंगे ।

ठीक है फिर जल्दी आ जा मैं खाना लगवाती हूं ,और सबसे पहले आकर खाना ही खाएंगे ।

उसके बाद कोई दूसरी बात होगी ,हां ठीक है मैडम जी तू खाना रेडी कर हम बस पहुंचते हैं।

डॉली ने सुमन और पिंकी से टेबल पर खाना लगाने के लिए कहा, और राजनी का हाथ पकड़कर ,खींचते हुए उसे गार्डन में ले आई ,राजनी जब तक वो लोग आ रहे हैं ,तब तक धूप में खड़ी हो जा ,तेरे बाल भी हल्के

हल्के गीले है।

सूख जाने देना अच्छे से ,राजनी कुछ कहती ,इससे पहले डॉली ने कस के उसके हाथ पर पकड़ बना रखी थी।

और गार्डन में पास ही लगी बेंच पर जबरदस्ती उसको अपने पास बैठा लिया उसके बालों में हाथ फिरा कर देखने लगी,,,,,, कितने अच्छे लग रहे हैं,तेरे बाल ।

सच में बिल्कुल रेशम की तरह चमक रहे है, तेल की अच्छी तरह से मसाज करने पर एक ही दिन में फर्क पड़ जाता है ।

तेरे बाल,,,,, राजनी डॉली में कुछ और बातें होती, तब तक विकास पूनम गौरी और शैलेश को साथ लेकर गार्डन के अंदर आ चुके थे ।

राजनी ने जैसे ही देखा ,दौड़कर जाकर पूनम के गले लग गई ,,,,

पूनम ने भी राजनी को कस के गले लगाया ,और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,राजनी डॉली सच ही कह रही थी ,सच में तू पहले से बहुत दुबली लग रही है, ठीक से खाती क्यों नहीं

पूनम कुछ और कहती इससे पहले गौरी भी आकर राजनी के गले लग गई ,दीदी मैंने आपको कितना मिस किया है ।

पिछले 1 महीने से तो आप हमारे घर पर भी नहीं आई ,हां गौरी सच में मैं बहुत बिजी थी ,यहां काकी भी मुझसे बहुत गुस्सा है ,और वहां तू भी मुझसे गुस्सा है। अब तक शैलेश प्यार भरी निगाहों से राजनी को देखे

जा रहा था ।

सब से मिलने के बाद राजनी मुस्कुराती हुई धीरे से शैलेश के पास गई, और बोली मिस्टर चिपकू आप भी तो कुछ कहिए! आपको तो जरूर में मोटी ही दिखूंगी । आप कभी कह ही नहीं सकते, कि मैं पतली हो गई हूं ,,,,हां मोटू तू हमेशा मोटी ही रहेगी, जैसी बचपन में थी गोल मटोल ,,,मोटू,,,,,

मम्मा देखो ना ,,,राजनी ने चिढ़ते हुए कहा ,,,,,

पूनम ने धीरे से शैलेश को एक चपत लगाई ,और उसे डांटने लगी,,,,

शैलेश! खबरदार जो मेरी राजनी को मोटू कहा ,देख ना वह कितनी पतली हो गई है ।

मैं तो कहती हूं उसे अपना थोड़ा सा वेट बढ़ाना चाहिए।

मैं ठीक हूं! पूनम आंटी प्लीज मैंने कितनी मुश्किल से अपना वेट कंट्रोल किया है , अब मुझे दोबारा मोटी नहीं होंना,,,,,,

ठीक है मत होना,,,,,

बातें चल रही थी, कि डॉली ने पूनम का हाथ पकड़ते हुए कहा ,अब अंदर भी चले लंच टेबल पर लग गया होगा ,और अब मुझसे और कंट्रोल नहीं हो रहा ,,,

और काकी को तू जानती है ना ,जब तक तुम लोग नहीं आ जाते ,तब वह एक और भी नहीं खाएगी ,वह तो बड़ी मुश्किल से मना कर मैंने उन्हें नाश्ते में थोड़ी सा दलिया खिला कर दवाई दे दी थी ।

वरना अभी तक तो दवाई के लिए भी बैठी रहती, इतना कहने के साथ ही शैलेश ,डॉली, पूनम, और गौरी

जल्दी से घर के अंदर आ गए।

राजनी जानबूझकर सबसे पीछे रुक गई थी ,जब उसने देखा, कि चारों लोग घर के अंदर जा चुके हैं ।

तो वह जल्दी से विकास के पास गई ,और कुछ बातें करने लगी ।

विकास डॉली की बातों का जवाब देते जा रहा था । दोनों जानबूझकर एक-एक कदम बढ़ाते हुए घर के अंदर आ रहे थे। क्योंकि उनके बीच कुछ जरूरी बातें हो रही थी ,शायद कुछ ऐसी बातें ,जो किसी को भी पता नहीं थी ।

जब राजनी ने देखा ,कि वह घर के अंदर ही आने वाले हैं ,तो उसने मुस्कुराकर कहा ,थैंक यू सो मच अंकल ,अगर आपका साथ रहा ,तो सब कुछ बहुत जल्द पॉसिबल हो पाएगा ।

विकास ने राजनी के सिर पर हाथ रखते हुये कहा, राजनी बेटा मैं हमेशा आपके साथ हूं ।

आपको जब भी मेरी जरूरत होगी, आप मुझे अपने सामने खड़ा पाओगी,और हां मैंने तुम्हें कुछ पेपर्स दिए थे ,उसके बारे में एक बार अच्छे से स्टडी कर लेना, क्योंकि मुझे वह फाइल आगे बढ़ानी होगी जी अंकल ! वैसे वह फाइल मैंने देख ली है, और अगर आपको ठीक लग रही हो तो इट्स ओके, मुझे तो ठीक ही लगी और दोनो ,अंदर आकर टेबल पर लंच करने बैठ गए थे ।

लंच टेबल पर भी शैलेश राजनी को चिढ़ाने से बाज नहीं आ रहा था।

कभी कुछ कहता ,तो कभी कुछ, सबकी नजर बचाते

हुए राजनी कभी शैलेश के पैर पर अपना पैर दे मारती, और कभी धीरे से उसे चिकोटि काट लेती,,,,

राजनी ने धीरे से कहा मिस्टर चिपकू तुम कभी सुधरोगे नहीं ,,,,,

सबके बीच लंच करते हुए बातें भी होती जा रही थी ,और जो सबसे मेन मुद्दा था वह यही था ,के एग्जाम के बाद राजनी के एम एस की क्या प्लानिंग है ।

एमएस के लिए शैलेश ने भी इस साल ड्राप लेकर तैयारी कर रहा था ।

और वह पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था तो बस इसी को लेकर सबके बीच बातें शुरू हो गई,,,,,,,,,,,,

( पार्ट-5 )

PG, की प्लानिंग

डॉली का यही मन था ,ms के लिए राजनी और शैलेश दोनों को एक ही कॉलेज एडमिशन मिल जाए ,तो कितना अच्छा होगा ,उसे राजनी की चिंता भी नहीं रहेगी ,फिर जब शैलेश उसके साथ रहेगा ,तो राजनी को भी हर तरह से हेल्प मिलती रहेगी।

लंबी बातें करने के बाद ,सब लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे ,कि MS की तैयारी के लिए राजनी को शहर में ही रहना चाहिए ,वो और शैलेश एक साथ पढ़ाई करेंगे ,तो तैयारी करना आसान हो जाएगा ,जैसे ही यह बात निकली ,,,साथ में गौरी भी बोल पड़ी, मां राजनी दीदी हमारे साथ रहेंगी तो कितना अच्छा लगेगा

में और दीदी मेरे रूम में !

हम दोनों साथ साथ रहेंगे, कितना मजा आएगा ,,,,,

गौरी की इस बात पर पूनम डॉली की तरफ देखने लगी, डॉली ने सबको खीर परोसेते हुए कहा ,,,,,,

पूनम इस बात के लिए मुझे थोड़ा वक्त चाहिए ,अभी तो राजनी के फाइनल एग्जाम मै भी 3 महीने बाकि है,तब तक इस बारे में,में काकी से भी बात करूंगी ,और

उसके बाद ही मैं कोई जवाब दे पाऊँगी,,, क्या फर्क पड़ता है राजनी तुम्हारे साथ रहे ,या आसपास कहीं pg में ,,,,तैयारी तो उसे शैलेस के साथ ही करनी है ।

इस तरह शादी के पहले तेरे यहाँ घर पर रहना ,कुछ अजीब लग रहा है।

पूनम ने भी कहा ,डॉली तुझे जैसा ठीक लगे,, तू समझ के बता देना ।

पर जरा जल्दी ही, डिसीजन ले लेना । क्योंकि 10 महीने बाद ही, ms का एग्जाम होने वाला है।

और मैं चाहती हूं ,इस एग्जाम में तो दोनों को निकल ही जाना चाहिए।

हमारे पास इतना समय नहीं है, कि ज़रा भी टाइम भी वेस्ट किया जाए।

इस बार राजनी जरा सीरियस हो गई थी ।

मम्मा मैं तो कह रही हूं ,,,पूनम आन्टी अभी से मेरे लिए अच्छा सा pg देख ही लें।

जो आंटी के घर के पास ही हो,

तो आने-जाने में भी प्रॉब्लम नही होगी सच बात है, अगर पढ़ाई शुरु करना है

तो फिर देर करना ठीक नही है ।

राजनी,,,, पहले लंच कर लो, एक बार काकी दादी से बात करके, हम भी डिसीजन ले लेते हैं।

Ok मॉम,,, कहते हुए सब लोग लंच करने लगे ।

लंच के बाद राजनी ,शैलेश, और गौरी ऊपर के रूम में चले गए थे ।

और पिंकी भी उनके पीछे पीछे ऊपर पहुंच गई,,,

डॉली,,, पूनम और विकास के साथ नीचे ही बैठी थी।

दोनों के बीच एक बार फिर से राजनी के रहने को लेकर बातें होने लगी।

डॉली ने साफ स्पष्ट शब्दों में कह दिया था,,,, कि पूनम, शायद राजनी का तुम्हारे साथ रहना ,काकी दादी को पसंद ना आये, इसलिए तुम अपने घर के पास ही उसके लिए कोई अच्छा सा pg देख लो ,,,ज़िम्मेदारी तो सारी तुम्हारी ही रहेगी राजनी की जिम्मेदारी !

तुम्हारे पास छोड़ रही हूँ उसे,,,, पूनम ने भी डॉली का हाथ, अपने हाथ में लेकर कहा तुम्हें कहने की जरूरत नहीं है डॉली,,,,राजनी मेरी ही है।

मैं उसका पूरा ध्यान रखूँगी, उनके बीच बातें चलती रहीं।

इसी बीच काकी भी वहाँ पर आ गई।

और डॉली ने काफी को भी राजनी के बारे में सब कुछ बता दिया ,काकी तो जानती ही थी,,, कि राजनी को पढ़ने शहर जाना है ।

उन्होंने भी अपनी हामी भर दी।

उन्हें भी विकास पूनम पर पूरा भरोसा था रात को विकास पूनम को निकालना था। राजनी ने कहा दिया था कि जब तक उसके फाइनल एग्जाम खत्म होंगे ,तब तक आँटी उसके लिए कोई pg भी देख लेगी।

यह सारी बातें सबके बीच हो चुकी थी। रात 800 बजे तक विकास पूनम जा चुके थे।

डॉली काकी और राजनी के बीच एक बार फिर से अपनी बातें होने लगी थी। काकी ने राजनी को

समझाते हुए कहा राजनी तू शहर पढ़ने तो जा रही है।

पर मुझसे वादा कर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान रखेगी।

और पूनम विकास जो कहेंगे वो करेगी।

हां काकी दादी अंकल जैसा कहेंगे मैं वैसा करुंगी ,डोंट वरी,,,,मम्मा आप एक काम कीजिए, काफी दादी को मेरे साथ ही भेज दीजिए।

ये मेरी मालिश करती रहेगी ,अपने हाथों से मुझे खिलाती रहेगी ,तो इनकी चिंता भी दूर हो जाएगी,,,,,

डॉली हस पड़ी, हां और तेरी चिंता करते करते काकी दादी खुद बीमार पड़ जाएंगी तू अपना ध्यान रख ले इतना ही काफी है।

दादी का क्या खास रखेगी

मम्मा पक्का में दादी का ध्यान रख लूँगी उनको टाइम पर दवाइयां देना, उनको खाना खिलाना ,हां यही करती रहेगी

और पढ़ाई पढ़ाई कब करेगी ।

हां मम्मा यह तो मैंने सोचा ही नहीं

लेकिन जब 2 साल बाद मैं अपना MS कम्प्लीट कर लूँगी , तब डेफिनेटली काकी दादी को अपने साथ ही रखूंगी और अच्छे से उनका ध्यान भी रखूँगी तब काकी भी बीच में बोल पड़ी।

रहने से 2 साल बाद तू पढ़ाई खत्म करके शैलेश के साथ शादी कर ले

और अपनी गृहस्थी बसा ले ,मेरे लिए इतना ही काफी है, मेरा ध्यान रखने के लिए तेरी मां है ,अब तो बस मेरी

बूढ़ी आंखें तेरी गृहस्थी बसते देखना चाहती हैं और एक छोटा सा नन्ना मुन्ना तेरी गोद में देखना चाहती हे।

इससे ज्यादा तो मेरी कोई इच्छा नहीं रही ।

काकी दादी अब फिर उसी बात को लेकर बैठ गई ।
 
मैंने कहा ना, कि जैसे ही मेरी पढ़ाई पूरी होती है ,आपको ये सब कुछ मिल जाएगा ।

लेकिन उससे पहले नहीं ,हां ठीक है बेटा तभी तो मैं कह रही हूं, कि तू मन लगाकर अपनी पढ़ाई कर ,और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे।

बातें करते हुए रात के 1000 बज चुके थे ।

डॉली हमेशा टाइम पर ही सो जाती थी और काकी को भी दवाई खिला कर टाइम पर ही सुला देती थी।

डॉली ने राजनी से भी कहा!

राजनी बेटा अब तुम्हें ऊपर जाना चाहिए ,अगर काकी दादी से इसी तरह बातें करती रही ,तो वह बीमार पड़ जाएंगी,,, हां मामा मैं जा ही रही हूँ।

गुड नाईट काकी दादी,,, गुड नाईट मम्मा राजनी में दोनों के गले के बाहे डालते होगे गुड नाईट किया ,और ऊपर चली गई ।

जैसे ही राजनी ऊपर गई कि पिंकी भी फटाफट काम समेटते हुए उसके पीछे ऊपर चली गई,,,,,,

दूसरे दिन सुबह डॉली तो हमेशा की तरह 600 बजे उठ गई थी ।

उसने अपनी दिनचर्या के अनुसार गार्डन के फूलों में पानी दिया, थोड़ी देरी योग प्राणायाम किया, और फिर अंदर आकर सबके लिए चाय भी बनने रख दी।

आज भी संडे था, तो ऑफिस जाने की कोई जल्दी नहीं थी ,डॉली ने जैसे ही काकी को आवाज़ लगाई ,कि तब तक पिंकी नीचे आ चुकी थी ।

डॉली ने कहा ,पिंकी मैंने चाय बनने रख दी है ,तू काकी दादी को उठा दे ,,,,

मैं भी राजनी को उठाने जाती हूं ।

तभी पिंकी ने रोकते हुए कहा ।

नहीं आँटी राजनी दीदी ने मना किया है कि उन्हें 10 बजे से पहले मत उठाना, क्योंकि रात को 400 बजे तक उन्होंने पढ़ाई की है ।

और उसके बाद ही सोई है।

सीढ़ियों पर जाते हुए डॉली के कदम वापस हॉल में आ गए ।

उसने कहा ,मैं जानती थी एग्जाम में अभी 3 महीने बाकि है ,कि ms की तैयारी करने के लिए यह लड़की अभी से सोचने लगी है ,,,,,सोने दे उसे, और तू भी मत उठाना,,,,,,

जी आंटी जी ,मैं ऊपर नहीं जाऊंगी ,,,,

सब लोग नीचे चाय पी चुके थे । साफ-सफाई डॉली ने कल ही कर ली थी तो आज कोई खास काम नहीं थे ।

बस आज तो उसे राजनी के साथ शहर जाने की तैयारियां ही लगानी थी ,क्योंकि एक बार फिर वह शहर जाकर फाइनल एग्जाम की पढ़ाई करने वाली थी।

छोटे-मोटे काम करते हुए 1100 बज चुके थे ,डॉली ने अब तो राजनी को उठाना ही ठीक समझा ,पिंकी नीचे नाश्ते की तैयारी कर रही थी ,काकी tv पर भजन सुन

रही थी ।

और डॉली राजनी को उठाने ऊपर चली गई ,,,ऊपर गई ,तो सीढ़ियों से ही डॉली के कानों में उसी गाने की लाइने सुनाई दी जो राजनी हमेशा सुनती रहती थी।

जब भी वह यहां आती, अपना फेवरेट सॉन्ग हमेशा सुनती थी ,,,,,

रोते रोते हंसना सीखो

हंसते हँसते रोना

जितनी चाबी भरी राम ने

उतना चले खिलौना ,,,,,,

रोते-रोते हंसना सीखो

हंसते हंसते रोना,,,,,,,,

डॉली धीरे-धीरे एक एक कदम ऊपर की तरफ़ बढ़ा रही थी ,जब उसने कमरे में जाना चाहा ,और दरवाजा खटखटाया तो देखा कि दरवाजा खुला ही है।

बह अंदर पहुंच गई,,,,जहाँ राजनी बिस्तर में उल्टी पड़ी हुई ,,,म्यूज़िक सिस्टम पर यह गाना सुन रही थी।

डॉली धीरे से उसके पास आकर बैठ गई और उसके बालों में अपनी उंगलियां घुमाने लगी, तब राजनी ने पलट कर देखा ,कि डॉली उसके सिरहाने बैठी है ,तो जल्दी से डॉली की गोद मे अपना सिर रख लिया ,औऱ कस के डॉली को पकड़ लिया ।

बहुत देर तक मां बेटी के बीच कुछ मौन बातें होती रही, दोनो ही समझ रही थी कि वह एक दूसरे से क्या कहना चाहती है ,और गाना एक बार खत्म होकर

ऑटोमेटिक दोबारा फिर शुरू हो गया था।

डॉली ने धीरे से म्यूज़िक सिस्टम ऑफ किया ,और राजनी की आंखों में देखकर कहने लगी ,राजनी मैं तुझसे यह नहीं कहूंगी ,तू यह सॉन्ग मत सुन क्योंकि यह तेरा और तेरे डैड का सबसे फेवरेट सॉन्ग है,,,,,

हां मम्मा मेरी और डैड की कितनी सारी बातें सेम है ना, हम दोनों का फेवरेट सॉन्ग एक ,हम दोनों का टेस्ट भी सेम हम दोनो ही हमेशा ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं ,और सब लोग कहते हैं मैं बिल्कुल अपने डैड की बेटी लगती हूँ।

मम्मा आपको याद है ,जब आपका मेरा मूड खराब होता था ,तो डैड हम दोनों को कहां ले जाते थे,,,,

डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा।

कैसे भूल सकती हूं,,,,,उसी तालाब पर उसी नाव में , जिस में बैठकर तुझे घूमना बहुत अच्छा लगता था ।

हां मम्मा डैड की तरह मेरी भी वो सबसे फेबरेट जगह थी।

इसी तरह बात करते हुए राजनी ने धीरे से कहा ,,,,

मेरा और डैड का सपना भी तो एक है।

राजनी तुम मुझे अपना सपना बताती क्यों नहीं

मम्मा क्योंकि मेरा और डैड का सीक्रेट है और में आपको ये सीक्रेट नही बता सकती ,,,,,, अच्छा ठीक है मत बताओ इसी तरह बातें करते हुए ,राजनी ने एक बार फिर से डॉली की गोद में अपना सिर रख लिया।

राजनी के सिर पर हाथ फिराते हुये डॉली के सामने सालों पुरानी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई,,,,,,,,,

एक बार फिर से डॉली अपने अतीत में पहुंच चुकी थी।

26 साल पहले

डॉली की शादी के दूसरे दिन की सुबह,,, डॉली तो हमेशा की तरह कैसे भी सुबह 600 बजे उठ गई ,और राज के मना करने के बाद भी ,वह जल्दी से अपनी साड़ी और अपने बालों को ठीक करते हुए ,बाहर आ गई ,,,,

जहां पर अभी भी पडौस के 4,6 लोग रुके हुये थे।

काकी और राज का रिश्तेदार तो कोई था नहीं , तो मोहल्ले के 4,6 भाभियों और अपनी सहेलियों को काकी ने अपने यहाँ रोक लिया था ।

क्योंकि आज भी डॉली और राज के बहुत सारे रस्मो रिवाज होने बाकी थे।

डॉली बाहर आ चुकी थी ,काकी ने डॉली को देखा तो डॉली ने निगाहे झुका लीं।

और मुस्कुराती हुई रसोई की तरफ बढ़ गई ,उसने रसोई में से ही काकी से कहा काकी, मैं चाय बनने रखती हूँ।

बेटा तू यह सब काम रहने दे, पहले तो तू जाकर नहा धो ले ,भले ही तू इस घर में पिछले 5 साल से रह रही है, लेकिन एक बहू होने के नाते ,तेरी इस घर में पहली सुबह है,कुछ मीठा बनाने का नेग करना ही, हमारे आस पास जो बड़े बूढ़े है,उनको अपने हाथ का बना कुछ मीठा खिला देना ।

सगुन तो पूरे करने ही होंगे, जी कहते हुए डॉली नहाने

चली गई।

नहा-धोकर आई ,तो रसोई में देखा कि काकी ने रसोई को पहले से ही साफ सुथरा करके रखा था ।

क्योंकि कान्हा जी का प्रसाद जो बनने वाला था ।

डॉली ने हलुआ ,खीर ,राज की पसंद की मिर्ची की पकौड़ी ,,सभी कुछ बना लिया था।

वह एक बहु होने के सारे फर्ज निभा रही थी । और बहुत खुश थी।

काकी जैसा उससे कहा रही थी ,वह बैसा करती जाती,,,,

अब तक 900 बज चुके थे ।

काकी ने डॉली से राज को उठाने के लिए भी कहा !

बेटा राज को भी उठा ले ,और तुम दोनों एक साथ जाकर कान्हा जी का प्रसाद लगाना ,और हां उसके बाद मंदिर जाकर हमें कथा भी करवानी है ,और भी कुछ रस्में है ,जो हम आज ही पूरी कर लेंगे क्योंकि उसके बाद कल तो,,,,

काकी कल क्या

मुझे ना पता राज कुछ कह रहा था,,

अब बेटा तू ही पूछना क्या कह रहा था डॉली सोचती रह गई ,कि अभी तो मेरी 8 दिन की छुट्टीयां और है ,उसके बाद ही में सुपरवाइजर की ड्यूटी जॉइन करूगी।

तो फिर कल क्या करना है खैर ,,,,

वह राज को उठाने उसके रुम में चली गई ,जब देखा तो राज तो हमेशा की तरह आराम से उल्टा पड़ा सो

रहा था

जब डॉली ने उठाना चाहा ,तो उसके कान पे तो जूं ही नहीं रेग रही थी।

डॉली ने धीरे से राज का कंधा पकड़कर हिलाते हुए कहा !

राज उठ जाइये हमें कान्हा जी का प्रसाद लगाना है ।

और मैं प्रसाद बनाकर भी रख आई हूं जैसे ही डॉली राज के करीब आई ,तो राज ने कस के डॉली को अपनी बाहों में भर लिया ,और मुस्कुराता हुआ बोला सहजादी तुझे क्या लगता ,,,अपुन सोया है,,,,,,,

अरे अपुन तेरे कमरे में से जाने के साथ ही उठ गया था ।

और अपुन को पता था ,कि डेफिनेटली तू उठाने आएगी ,और बस मे इसी बात का इंतजार कर रहा था ।

डॉली ने शर्माते हुये कहा,,, अच्छा जी अब आपका इंतजार खत्म हो गया,,, उठ कर नहा लीजिए और फिर हमें कान्हा जी को प्रसाद लगाने के बाद ,मंदिर भी जाना है ,काकी ने कहा है,,,,,

राज किसी अच्छे बच्चे की तरह नहा धोकर सफेद कुर्ता पजामा पहने हुए काकी के सामने आ गया था ,और काकी भी राज को देख कर खुश हो गई, इतना प्यारा लग रहा है मेरा बच्चा ।

तुझे नजर ना लगे किसी की ,काकी राज को निहार ही रही थी, कि तभी डॉली भी अपने कमरे से तैयार होकर बाहर आ गई पीले रंग की खूबसूरत सी चुन्नी प्रिंट की साड़ी, जिस पर बहुत ही खूबसूरत ज़री की लेस लगी हुई थी, उस पर रेड ब्लाउज कानों में झुमके, और एक बहू होने के नाते सिर पर पल्ला, डॉली के चेहरे पर खुशी तो बहुत थी ,लेकिन उसके साथ साथ शर्म उससे भी ज्यादा।

जहां तक अभी वह एक बेनाम रिश्ते के साथ 5 साल से इस घर में रह रही थी। वही अब राज की पत्नी बनने का गौरव उसे मिला था ,जो पिछले कई महीनों से उसका सपना था ,और आज जब बह राज को पूरी तरह से पा चुकी थी, तो एक मिली जुली फीलिंग उसके पूरे अस्तित्व पर दिख रही थी ।

चाहे वह उसका तन हो या उसका मन मोहल्ले की

भाभी और बहने आंखों ही आंखों में डॉली से हजार तरह के सवाल कर नहीं थी। वह जान लेना चाहती थी डॉली और राज के मिलन की रात के बारे में ,और डॉली उन्हें इशरी में चुप रहने के लिए कह रही थी ,क्योंकि उनके साथ साथ काकी और भी बड़े लोगों की निगाहें डॉली और राज पर थी, जब से दोनों की लव स्टोरी सबके सामने आई थी।

सब बड़े ही गौर से डॉली और राज के बारे में सब कुछ जान लेना चाहते थे। काकी के साथ जब राज की निगाहे डॉली पर गई, तो वह भी अपनी निगाहे उस पर से हटा नहीं पा रहा था ।

बार-बार घूम फिर के डॉली को ही देखने लगता। काकी का सपना आज पूरा हो रहा था, डॉली आज उनके आंगन में राज की नई नवेली दुल्हन बनकर आ गई थी ,पैरों में मेहंदी ,महावर, पायल बिछुडे साथ छम छम करती हुई पूरे घर में घूम रही थी।

उसकी पायल के घुघरुओ की मधुर ध्वनि पूरे घर में एक पॉजिटिव एनर्जी का संचार कर रही थी ।

वह काकी से पूछते हुए मंदिर जाने के लिए पूजा की थाली लगाने में व्यस्त थी और वही राज इस फिराक में, कि वह डॉली को एक पल के लिए भी अपनी आंखों से दूर ना होने दे।

जब उसने देखा कि काकी किसी से बात करने में व्यस्त हो गई है ,तो जल्दी से डॉली के पीछे रसोई में चला गया ,जहां पर डॉली क प्रसाद की थाली कान्हा जी के लिए लगा रही थी।

जब वह डॉली के पास पहुंचा, तो एक नज़र दरवाजे पर डाली ,और झट से डॉली को बाहों में ले लिया,,,,,

शहज़ादी तू ना अपुन को कुछ अलग रही है, वो क्या कहते हैं, इस घर की मालकिन और अपन को डिट्टो वही वाली फीलिंग आ रही है, जैसी फिल्मों में आती है!!!!

डॉली ने थाली लगाते हुए मुस्कुराकर कर कहा कैसी वाली

शहज़ादी वो शादी हो जाती है, तो फिर वो आती है ना वह अपनी बीवी की सारी बात मानता है, उसे उस को क्या कहते हैं

,,,,, हां जोरू का गुलाम अब तो तू अपन को भाव ही नहीं दे रही ,अपन साला कब से तेरे आगे पीछे घूमता है ,कि तू मुझसे बात कर ले,,, पर तू,,,,तू,,, अपने काम में ही बिजी है,,,, अब तेरे अंदर ना ,कोई डर नहीं दिख रहा आपने वास्ते ,,,,

तू एक बात बता ,तू भी अपन को जोरु का गुलाम तो नहीं बना लेगी

डॉली ने हंसते हुए कहा, राज पहले आप खुद से पूछिए, क्या आप जोरू का गुलाम बनना चाहते हैं

यह सब अपन को नहीं पता, पर इसका डेफिनेटली मीनिंग क्या होता है

पहले तू यह बता ,,,,

राज इसका सीधा सा मतलब होता है जो अपनी बीवी की सारी बातें मानता हो लोग उसको जोरू का गुलाम कहने लगते हैं। बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं ,और

बताइए कि आप मेरी बातें मानेगे कि नहीं महारानी तू यह घुमा फिरा के क्या बोल गई है, सीधा बोल ना, कि तू भी अपुन को जोरू का गुलाम बनाने का सोच रही है। डॉली ने जोर से खिलखिलाते हुये कहा,राज अभी तो हमारी शादी को एक ही दिन हुआ है, और आप इतना डरने लगे, तो आगे क्या होगा

अच्छा ठीक है अगर आप मेरी बात नहीं मानोगे ,तो मैं आपकी सारी बातें मान लूँगी, और पहली बार होगा सब कोई बीबी अपने शौहर की गुलाम बन जाएगी अब खुश

राज ने डॉली को एक बार फिर से अपनी बाहों में भर लिया,,,,,,

नहीं शहज़ादी पहले वाला ही ठीक है

वह जोरु का गुलाम,,,,,

देख तूने अपुन के वास्ते वो शर्त रखी अपन ने पूरी की ,,,,,,

अपन तेरी शर्त नहीं मानता, तो अपुन को वो वाली फीलिग़ कहां से आती

और तूने अपन से प्यार करने वाली बात कही थी, वो भी सही थी ,अगर तू नहीं कहती ,तो क्या आज तू मेरे पास होती

तो यह भी ठीक, और तीसरी बात तू 5 साल पहले अपुन के घर में आई, अपन के घर का सारा नक्शा ही पलट दिया और अपना घर ,घर लगने लगा ,पहले तो साल कबूतर खाना लगता था ।

यहां सामान वहां ,वहाँ का यहाँ,,,

तो तेरी यह बात भी सही,,,और चौथी,,,,,, डॉली ने बीच में रोकते हुए कहा,,, राज बाकी बातें बाद में पहले चलकर कान्हा जी को प्रसाद लगा देते हैं हां तो चलना,,,तू भी पता नहीं घंटे भर से क्या कर रही है ,,,,

पर सुन पहली वाली बात ही सही है।

अगर तू शौहर की गुलाम बन गई ना, तो साला सब उल्टा पुल्टा हो जाएगा ।

अपन जो कहेगा तू मानेगी तो गड़बड़ मामला होगा, इसलिए अपुन तेरा कहना ही मानेगा, और तभी अपनी गाड़ी सही चलेगी ,इसलिए आज से अपुन

जोरू का गुलाम,,,,,
 

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