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डॉली ने थाली पटे पर रखी और , राज की तरफ घूम कर राज का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा,,,,
राज मुझे आपको जोरू का गुलाम नहीं बनाना ,मैं तो आपके प्यार में डूब जाना चाहती हूं, हम दोनों ,,,हम दोनों, एक दूसरे के पूरक बनेगे, में हर कदम पर आपका साथ दूंगी,ठीक उसी तरह से जैसे आज तक बिना कहे, हर कदम पर आपने मेरा साथ दिया है।
डॉली ने दोनों पैर ऊपर करते हुए राज के माथे को चूमना चाहा,,,,
पर उसकी कोशिश बेकार गई,छोटी सी डॉली,,,,,, लंबे से राज तक कैसे पहुंच पाती,,, दो-तीन बार कोशिश करने के बाद भी, जब वह राज के माथे को नहीं चूम पाई,तो राज ने उसे अपनी बाहों में उठाते हुये ऊपर कर लिया ,और बोला महारानी अब तू अपना आइटम बिंदास अपन को दे दे ,जो तू देना चाहती है,डॉली ने
इधर-उधर देखते हुए राज के माथे को चूम लिया,,,,,
और जल्दी से नीचे खड़ी हो गई,,,,
तब तक काकी की आवाज आई ,,,राज डॉली,,,, अगर तुम लोगो की थाली लग गई हो ,तो जल्दी से बाहर आ जाओ।
डॉली थाली उठाते हुए जल्दी से बाहर आ गई,,,,पर ये क्या सब सिवा को ही देख कर हंस रहे थे।
राज ने भाभियों को डांटते हुये कहा ! क्या लगातार बेकार हंसते ही जा रहे हो अपुन क्या कोई जोकर है, जो इधर ही देखे जा रही हो,,,,,,
डॉली राज से आगे थी ,और उसने ठीक से राज को देखा ही नहीं,,,, कि डॉली के होठों की छाप, राज के माथे पर बन गई थी ।
और सब उसे ही देख रहे थे।
तभी एक भाभी ने छोटा सा सीसा उठा कर उसे राज के सामने कर दिया ,और उसमें डॉली के होंठो की लिपस्टिक के निशान अपने माथे पर राज को दिखे।
तब उसे समझ में आया, कि लोग क्यों उस पर हंस रहे थे ।
अरे ऐसा कुछ नहीं है,,,, जो तुम लोग समझ रही हो ना,,, वैसा कुछ नहीं है।
हां राज भैया तो कैसा है
अभी ये मत कहना ,कि डॉली की लिपस्टिक उठाके आपने अपने माथे पर लगा रखी है ,क्योंकि यह बात हजम होने वाली नही है, ,,राज ने झट से अपनी जेब से रुमाल निकाला ,और अपने माथे को साफ करते
हुए सबको डांटने लगा,,, तुम लोग भी न बस खुद को मत देखना अभी बोलूं क्या,,,,,
ठीक से पोल पट्टी खोलूँ क्या
यह बात सुनकर सच में सारी भाभियां डर गई ,,,,क्योंकि उन्हें पता था, कि यह राज है, किसी के सामने कुछ भी बोल सकते है ,,,और राज के ढावे से उनके हस्बैंड छुप-छुप के उनके लिए घर मे जो रबड़ी, रसगुल्ले ,और कचौड़ी ,समोसे अपने बीवीओ के लिए ले जाते थे।
वो किस्सा अभी तक किसी की सासोमाँ को पता नहीं था, और इससे सभी एक साथ ही चुप हो गई,,,,,,
काकी भी समझ गई थी, पर उसने बात संभालते हुए कहा,,,,
अब सभी दांत निकालना बंद करो, और जल्दी से मंदिर चलने की तैयारी लगाओ ,,,डॉली और राज कान्हा जी का प्रसाद लगा रहे है ।
बस इसके बाद ही हम मंदिर के लिए निकलेंगे,,, सत्यनारायण की कथा करवाने के लीये,,,,, हमें आज ही अपने सारे काम निपटाने होंगे ।
काकी के मुंह से एक बार फिर यह बात सुनकर ,कि आज ही सारे काम निपटाने होंगे ,,,,
डॉली सोच में पड़ गई,,, कि काकी को इतनी जल्दी क्यों हो रही है, मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं ,आराम से सब कुछ हो जाएगा ,,,,
राज डॉली ने कान्हा जी को साथ मे प्रसाद लगाया,,, और डॉली के लिए तो यह सबसे बड़ा दिन था ,उसने
जी भर के कान्हा जी को धन्यवाद दिया ,और अपने आने वाले जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा जब कान्हा जी का प्रसाद लग चुका ,तो सभी मंदिर के लिए बाहर आ गए ।
राज डॉली , काकी और दो भाभियां कन्हैया के साथ , मंदिर जाने के लिए जीप में बैठ रहे थे ।
थोड़ी देर बाद सभी मंदिर पहुंच गए पंडित जी ,,,भी पहले से वहाँ पर आ चुके थे।
शादी के बाद मंदिर में हाथे लगाए गए और पूजा समाप्त करके ,,3,,4 घंटे बाद सब घर वापस घर आ चुके थे।
घर आकर सबसे पहले डॉली के हाथ से सबको मीठा परोसा गया ,,,और काकी के आने से पहले ही, घर पर खाना भी बन चुका था ।
तो डॉली ने सब को खाना भी परोसा और इस तरह डॉली के सारे रस्मों रिवाज संपन्न हो चुके थे ।
यह होते-होते शाम के 600 बज चुके थे। जेसे ही सब काम से फ्री हो गए ,
तो सब लोग अपने घर जा चुके थे। राज ने छोटू को बुलाकर ,फटाफट सारे घर की साफ-सफाई करवाई ,और काकी को भी आराम करने के लिए कह दिया।
अब घर में कोई भी नहीं था।
राज डॉली भी काफी थक चुके थे।
सब के जाने के बाद डॉली ने चाय बनाई और दोनों बाहर के कमरे में ही चाय पीने लगे।
तभी विकास का फोन आया ,,,डॉली ने फोन उठाया ,,,क्योंकि फोन डॉली के फोन पर आया था ।
तो विकास ने कहा डॉली ,,,राज भैया फोन क्यों नहीं उठा रहे।
कब से लगा रहा हूं ,,,डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहां ।
सिवा का फोन तो यही है ,पर शायद उसमें आपका फोन आया ही नहीं,, बताइए ना बात क्या है
सिवा मेरे पास ही बैठे हैं!
डॉली राज तुम्हारे पास ही है
हां विकास, सिवा मेरे सामने ही बैठे हैं। डॉली तुम्हारी सारी तैयारी हो चुकी है तैयारी ,,,,मतलब
तब तक पूनम ने विकास के हाथ से फोन लेते हुए कहा ,,,
विकास लगता है डॉली को कुछ पता नहीं है, आप मुझे फोन दीजिए,,,
मैं डॉली को सब कुछ अच्छे से समझा देती हूं ,और डॉली ने विकास से फोन लेकर कहा,,,, डॉली लगता है राज तुम्हें बहुत बड़ा सरप्राइस देना चाहते थे।
और इसलिये अभी तक उनने तुम्हें कुछ नहीं बताया,,,,
तो सुनो ,मैं तुम्हें बताती हूं,, हम चारों ही यानी कि मैं, विकास, तू और राज अपने हनीमून के लिए दार्जिलिंग जाने वाले हैं ।
अब भले ही राज तुम्हे सरप्राइस देना चाहते हो ,,पर अब तो तुम्हें बताना ही होगा ।
और तुम फटाफट अपनी पैकिंग कर लो मैं तो कबसे
अपनी पैकिंग कर भी कर चुकी हूं ।
डॉली शादी के लिए मैंने भी छुट्टी ली है और तुमने भी 8 दिन की छुट्टी ली है ।
तो इससे अच्छा मौका हमारे पास दूसरा नहीं था ,,,
तो हम चारों ही एक साथ दार्जिलिंग जाने वाले हैं ,,,,डॉली मैं तो सोच कार ही बहुत एक्साइटिड हूं ,,,सो रोमांटिक,,,,
कितना अच्छा होगा वहां का मौसम ,अरे तुझे पता है ,हम चारों वहां पर प्लेन से जाने वाले हैं ,एरोप्लेन से,,,,,
डॉली में पहली बार प्लेन में बैठ रही हूँ मुझे तो सोच कर ही बहुत अच्छा लग रहा है ।
कि जब हम बादलों के बीच उड़ेंगे तो कैसा लगेगा ,,,,
चल अपने तुझसे ज्यादा बात नहीं करती अब जल्दी तू अपनी और राज की पैकिंग कर ले,,,,,
और हां वहां पर ठंड बहुत है ,, तो कपड़े भी अच्छे से रख लेना, हम पूरे पूरे 8 दिनों के लिए वहां पर जाने वाले हैं।
डॉली अब मैं फोन रखती हूं ,तू फटाफट अपनी पैकिंग कर,,,,
हां पूनम ठीक है निली ने कहा और फोन रख दिया ,,,,डॉली को सच में इस बारे में कुछ भी पता नहीं था ।
उसने राज की गोद में बैठते हुए उसके गले में अपनी बाहें डाल दी।
अच्छा जी,,,, तो आप मुझे इतना बड़ा सरप्राइज देने
वाले थे।
कि हम हनीमून पर जा रहे हैं,,, मुझे बताया क्यों नहीं ,मेरी जगह किसी और को लेकर जाने वाले थे क्या,
अरे शहज़ादी अपुन सच में तेरे को सरप्राइस देने वाला था ,,,
और सुन!!! रही पैकिंग की बात तो वह अपन ने मस्त कर ली है ।
अच्छा आपने पैकिंग में किया क्या है
मेरे सारे कपड़े तो मेरे पास ही है ।
अरे तू वह सब छोड़,,, तू वहां पर यह साड़ी वाड़ी नही पहनेगी,,, अपुन तेरे वास्ते मस्त जीन्स, फ्रॉक ,और भी बहुत सारे कपड़े ले के आया हूं ।
वहां पर तू वही सब पहनेगी ,,,जैसे फिल्मों में पहनते हैं । वह मस्त-मस्त कपड़े पहनते हैं ,तो अपन वह सब तेरे वास्ते ले आया है ।
अपन तुझे बिल्कुल अलग रुप मे देखना चाहता है,,,,जैसा तुझे कभी नहीं देखा। ,,,,वैसा ,,,,
डॉली ने हंसते हुए कहा ,,,,
राज मुझे यकीन नहीं हो रहा ,कि आपने ये सब किया है ।
आप इतना अच्छा कैसे सोच सकते हैं
एक और सरप्राइज,,,, एक के बाद दूसरा और अब इतना बड़ा तीसरा ,,,
मैं बहुत खुश हूँ,,,
मुझे ना आप पर बहुत प्यार आ रहा है। अच्छा तो
बिंदास तू अपना प्यार अपुन को दे डाल ,,,,,अब तो कोई फटे में टांग अढ़ाने वाला भी नहीं है ।
ऐसा कहते हुए राज ने डॉली को अपने और करीब खींच लिया ,,,,
और कुछ देर बाद डॉली को अपने साथ कमरे में ले गया,,,,
और वहां पर उसे वह सारे कपड़े दिखाने लगा ,,,जो उसने डॉली के लिए खरीदे थे
डॉली कपड़ों को देखकर खुश तो बहुत हो गई ,,,,साथ ही उसे शर्म भी आ रही थी ।
राज मैंने कभी यह कपड़े पहने है क्या
मैं कैसे पहनूंगी ,,,,
और फिर विकास पूनम भी हमारे साथ होंगे ,,,,
अरे तो वह तो हमारे दोस्त है ना ।
तू वह सब छोड़ ,तू यही सब पहनेगी
और मैं तुझे इन कपड़ों में देखना चाहता हूं ।
देख शादी एक बार होती है ।
हनीमून भी एक ही बार होता है ।
महारानी तुझे नहीं लगता ,कि जैसे फिल्म में हीरो हीरोइन अच्छे-अच्छे कपड़े पहनते हैं ,,, अच्छी-अच्छी जगहों पर घूमने जाते हैं। फ़ोटो खिंचवाते है।
तो हम भी बैसा ही करे,,,,,
देख शादी हो गई,,,बच्चा पार्टी भी आ जाएगी ,,,फिर तू अपनी नौकरी में बिज़ी मैं अपने ढाबे में ,,,,फिर इन सबके लिए अपने पास टाइम भी नहीं रहेगा,,,,
इसलिए अभी जो करना है, बिंदास कर ले ,,,,,
ठीक है राज अगर आपको अच्छा लग रहा है ,तो ये सब मैं पहन लूँगी।
देर रात दोनों की पैकिंग हो चुकी थी। काकी को तो राज ने पहले से बता ही दिया था ।
इसलिए काकी सुबह जल्दी उठ गई ,और रास्ते के लिए अच्छे से नाश्ता-पानी भी बना के रख दिया था।
सुबह 800 बजे ही कन्हैया डॉली और राज को छोड़ने शहर जा रहा था । विकास और पूनम सीधे एयरपोर्ट पर ही मिलने वाले थे। दोपहर तक चारों एयरपोर्ट पर भी पहुंच चुके थे, बस कुछ देर बाद उनका प्लेन उड़ान भरने वाला था ।
आखिरकार वो सब एयरपोर्ट पहुच चुके और कुछ देर बाद ही,उनका विमान ऊंचे आसमान में उड़ने लगा ,,,,
राज डॉली आगे कि सीट पर और उससे ठीक दो सीट पीछे पूनम और विकास आंख में हाथ डाले हुए ,अपने हनीमून के बारे में सोच सोच कर खुश हो रहे थे।
यह मौका होता ही इतना खूबसूरत है कि सभी की जिंदगी में एक अच्छी याद बन के रह जाता है।
कुछ घंटो बाद सभी यहां से एक अलग मौसम ,दार्जिलिंग की हरी-भरी वादियों में थे ।
एयरपोर्ट से बाहर निकलकर इन्होंने टैक्सी की और अपने बुक किए गए रिसॉर्ट में पहुंच गए ।
वो भी काफी सुंदर था, एक छोटा सा रिसोर्ट था।
या कहिये कि एक रिसोर्ट में वन BHK के कुछ फ्लैट बने हुए थे ।
एक बैडरूम ,किचन ,आगे बालकनी और बालकनी से दिखती ऊँछी ऊंची हरी-भरी पहाड़िया ,,,
होटल पहुंचते-पहुंचते शाम के 700 बज चुके थे ।
बालकनी से देखा, तो चारों तरफ छाया हुआ कोहरा ,उसके बीच में चमकती मद्धम लाइट ,,,,इतना सुंदर वातावरण था ,जिसने मन को मोह लिया था ।
डॉली और राज बालकनी में खड़े होकर इस खूबसूरत से मौसम के नजारे ले रहे थे ।
जब ठंडी हवा का झोका आता ,तो डॉली से राज के सीने से लग जाती ।
और राज ने भी उसे अपनी बाहों में छुपा रखा था । इन खूबसूरत लम्हों में दोनों एक दूसरे के साथ का एहसास पूरी तरह से पा लेना चाहते थे ।
अपने कंधे पर डाले हुये शॉल से राज ने अच्छे से डॉली को भी ढक लिया था।
एक ही शॉल में लिपटे हुए दोनो काफी देर तक बाहर देखते रहे,,,,
सब कुछ उनके मन के अनुरुप था बिल्कुल उनके सपनों की दुनिया के जैसे कभी-कभी तो डॉली की आंखें नम हो जाती थी,,,, ये सोचते हुए,,,कि उसकी सौतेली मां का साया ,,और इतना बुरा वो समय ,जब उसकी मां और मामू उसे बेच देना चाहते थे।
फिर कैसे उसे राज और काकी का साथ मिला ,और राज ,काकी भगवान के रूप में मिले उसे ।
उन्होंने उसकी पूरी दुनिया ही बदल दी आज डॉली कामयाब है,,, तो सिर्फ राज की बजह से,,,,
अगर राज उसके जीवन में नही होता तो
लेकिन अब जब उसे इतनी सारी खुशियां मिल गई है ,,तो भी कभी कभी तो उसे डर लगने लगता है,,,कि उनकी खुशियों को कहीं किसी की नजर न लग जाए। उसने टच वुड करते हुए वहां लगी लकडी की रेलिंग को कसके अपने हाथ में पकड़ लिया।
जब राज ने आंखों में देख कर उससे सवाल किया ! तो डॉली बिना कुछ कहे और भी कस के राज के गले लग गई। राज कभी-कभी तो मुझे डर लगने लगता है ,कि मेरी खुशियों को किसी की नजर ना लग जाए ।
मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था ,,
कि मुझ जैसी अनाथ लड़की को इतनी खुशियां मिलेंगी,,,,
राज आप मुझसे वादा कीजिए, आप मुझसे जिंदगी में कभी नाराज नहीं होगे कभी मुझसे दूर नहीं जाएंगे।
ऐ,,,शहज़ादी तू ये क्या बोले जा रही है अपुन ऐसा क्यों करेगा
और सुन यह कोई सपना नहीं है।
यह सब कुछ सच है ,,,अच्छा अपुन तेरे को इस बात का बिलीव दिलाता है।
और सिवा ने कसके एक किस डॉली के गाल पर कर लिया,,,,
अब तो तेरे को पक्का यकीन हो गया होगा ,कि यह सब सच है,,,,
अब अंदर चल, बहुत ठंड हो रही है
नहीं राज मुझे अच्छा लग रहा है।
अभी चल ,,,मैं जानता हूं कि ठंड तुझसे सहन नहीं होती ।
कहीं बीमार पड़ गई ना ,तो वह काकी अलग अपुन की जान खा जाएगी,,,
तूने अपननी डॉली को बीमार कर दिया यह कहते हुए,राज ने डॉली को गोद में उठा लिया,,,और अंदर ले गया,,,,,,
वहाँ पूनम और विकास भी एक दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे ।
सच में भगवान भी जोड़ियां ऊपर से बनाकर भेजता है,,, क्या होने वाला था और क्या हो गया ।
लेकिन जो हुआ, सब कुछ अच्छा ही हुआ ,,विकास पूनम एक दूसरे को दिल से पसंद करने लगे थे।
पूरे 8 दिनों तक चारों ने खूब घूमा,,
राज मुझे आपको जोरू का गुलाम नहीं बनाना ,मैं तो आपके प्यार में डूब जाना चाहती हूं, हम दोनों ,,,हम दोनों, एक दूसरे के पूरक बनेगे, में हर कदम पर आपका साथ दूंगी,ठीक उसी तरह से जैसे आज तक बिना कहे, हर कदम पर आपने मेरा साथ दिया है।
डॉली ने दोनों पैर ऊपर करते हुए राज के माथे को चूमना चाहा,,,,
पर उसकी कोशिश बेकार गई,छोटी सी डॉली,,,,,, लंबे से राज तक कैसे पहुंच पाती,,, दो-तीन बार कोशिश करने के बाद भी, जब वह राज के माथे को नहीं चूम पाई,तो राज ने उसे अपनी बाहों में उठाते हुये ऊपर कर लिया ,और बोला महारानी अब तू अपना आइटम बिंदास अपन को दे दे ,जो तू देना चाहती है,डॉली ने
इधर-उधर देखते हुए राज के माथे को चूम लिया,,,,,
और जल्दी से नीचे खड़ी हो गई,,,,
तब तक काकी की आवाज आई ,,,राज डॉली,,,, अगर तुम लोगो की थाली लग गई हो ,तो जल्दी से बाहर आ जाओ।
डॉली थाली उठाते हुए जल्दी से बाहर आ गई,,,,पर ये क्या सब सिवा को ही देख कर हंस रहे थे।
राज ने भाभियों को डांटते हुये कहा ! क्या लगातार बेकार हंसते ही जा रहे हो अपुन क्या कोई जोकर है, जो इधर ही देखे जा रही हो,,,,,,
डॉली राज से आगे थी ,और उसने ठीक से राज को देखा ही नहीं,,,, कि डॉली के होठों की छाप, राज के माथे पर बन गई थी ।
और सब उसे ही देख रहे थे।
तभी एक भाभी ने छोटा सा सीसा उठा कर उसे राज के सामने कर दिया ,और उसमें डॉली के होंठो की लिपस्टिक के निशान अपने माथे पर राज को दिखे।
तब उसे समझ में आया, कि लोग क्यों उस पर हंस रहे थे ।
अरे ऐसा कुछ नहीं है,,,, जो तुम लोग समझ रही हो ना,,, वैसा कुछ नहीं है।
हां राज भैया तो कैसा है
अभी ये मत कहना ,कि डॉली की लिपस्टिक उठाके आपने अपने माथे पर लगा रखी है ,क्योंकि यह बात हजम होने वाली नही है, ,,राज ने झट से अपनी जेब से रुमाल निकाला ,और अपने माथे को साफ करते
हुए सबको डांटने लगा,,, तुम लोग भी न बस खुद को मत देखना अभी बोलूं क्या,,,,,
ठीक से पोल पट्टी खोलूँ क्या
यह बात सुनकर सच में सारी भाभियां डर गई ,,,,क्योंकि उन्हें पता था, कि यह राज है, किसी के सामने कुछ भी बोल सकते है ,,,और राज के ढावे से उनके हस्बैंड छुप-छुप के उनके लिए घर मे जो रबड़ी, रसगुल्ले ,और कचौड़ी ,समोसे अपने बीवीओ के लिए ले जाते थे।
वो किस्सा अभी तक किसी की सासोमाँ को पता नहीं था, और इससे सभी एक साथ ही चुप हो गई,,,,,,
काकी भी समझ गई थी, पर उसने बात संभालते हुए कहा,,,,
अब सभी दांत निकालना बंद करो, और जल्दी से मंदिर चलने की तैयारी लगाओ ,,,डॉली और राज कान्हा जी का प्रसाद लगा रहे है ।
बस इसके बाद ही हम मंदिर के लिए निकलेंगे,,, सत्यनारायण की कथा करवाने के लीये,,,,, हमें आज ही अपने सारे काम निपटाने होंगे ।
काकी के मुंह से एक बार फिर यह बात सुनकर ,कि आज ही सारे काम निपटाने होंगे ,,,,
डॉली सोच में पड़ गई,,, कि काकी को इतनी जल्दी क्यों हो रही है, मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं ,आराम से सब कुछ हो जाएगा ,,,,
राज डॉली ने कान्हा जी को साथ मे प्रसाद लगाया,,, और डॉली के लिए तो यह सबसे बड़ा दिन था ,उसने
जी भर के कान्हा जी को धन्यवाद दिया ,और अपने आने वाले जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा जब कान्हा जी का प्रसाद लग चुका ,तो सभी मंदिर के लिए बाहर आ गए ।
राज डॉली , काकी और दो भाभियां कन्हैया के साथ , मंदिर जाने के लिए जीप में बैठ रहे थे ।
थोड़ी देर बाद सभी मंदिर पहुंच गए पंडित जी ,,,भी पहले से वहाँ पर आ चुके थे।
शादी के बाद मंदिर में हाथे लगाए गए और पूजा समाप्त करके ,,3,,4 घंटे बाद सब घर वापस घर आ चुके थे।
घर आकर सबसे पहले डॉली के हाथ से सबको मीठा परोसा गया ,,,और काकी के आने से पहले ही, घर पर खाना भी बन चुका था ।
तो डॉली ने सब को खाना भी परोसा और इस तरह डॉली के सारे रस्मों रिवाज संपन्न हो चुके थे ।
यह होते-होते शाम के 600 बज चुके थे। जेसे ही सब काम से फ्री हो गए ,
तो सब लोग अपने घर जा चुके थे। राज ने छोटू को बुलाकर ,फटाफट सारे घर की साफ-सफाई करवाई ,और काकी को भी आराम करने के लिए कह दिया।
अब घर में कोई भी नहीं था।
राज डॉली भी काफी थक चुके थे।
सब के जाने के बाद डॉली ने चाय बनाई और दोनों बाहर के कमरे में ही चाय पीने लगे।
तभी विकास का फोन आया ,,,डॉली ने फोन उठाया ,,,क्योंकि फोन डॉली के फोन पर आया था ।
तो विकास ने कहा डॉली ,,,राज भैया फोन क्यों नहीं उठा रहे।
कब से लगा रहा हूं ,,,डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहां ।
सिवा का फोन तो यही है ,पर शायद उसमें आपका फोन आया ही नहीं,, बताइए ना बात क्या है
सिवा मेरे पास ही बैठे हैं!
डॉली राज तुम्हारे पास ही है
हां विकास, सिवा मेरे सामने ही बैठे हैं। डॉली तुम्हारी सारी तैयारी हो चुकी है तैयारी ,,,,मतलब
तब तक पूनम ने विकास के हाथ से फोन लेते हुए कहा ,,,
विकास लगता है डॉली को कुछ पता नहीं है, आप मुझे फोन दीजिए,,,
मैं डॉली को सब कुछ अच्छे से समझा देती हूं ,और डॉली ने विकास से फोन लेकर कहा,,,, डॉली लगता है राज तुम्हें बहुत बड़ा सरप्राइस देना चाहते थे।
और इसलिये अभी तक उनने तुम्हें कुछ नहीं बताया,,,,
तो सुनो ,मैं तुम्हें बताती हूं,, हम चारों ही यानी कि मैं, विकास, तू और राज अपने हनीमून के लिए दार्जिलिंग जाने वाले हैं ।
अब भले ही राज तुम्हे सरप्राइस देना चाहते हो ,,पर अब तो तुम्हें बताना ही होगा ।
और तुम फटाफट अपनी पैकिंग कर लो मैं तो कबसे
अपनी पैकिंग कर भी कर चुकी हूं ।
डॉली शादी के लिए मैंने भी छुट्टी ली है और तुमने भी 8 दिन की छुट्टी ली है ।
तो इससे अच्छा मौका हमारे पास दूसरा नहीं था ,,,
तो हम चारों ही एक साथ दार्जिलिंग जाने वाले हैं ,,,,डॉली मैं तो सोच कार ही बहुत एक्साइटिड हूं ,,,सो रोमांटिक,,,,
कितना अच्छा होगा वहां का मौसम ,अरे तुझे पता है ,हम चारों वहां पर प्लेन से जाने वाले हैं ,एरोप्लेन से,,,,,
डॉली में पहली बार प्लेन में बैठ रही हूँ मुझे तो सोच कर ही बहुत अच्छा लग रहा है ।
कि जब हम बादलों के बीच उड़ेंगे तो कैसा लगेगा ,,,,
चल अपने तुझसे ज्यादा बात नहीं करती अब जल्दी तू अपनी और राज की पैकिंग कर ले,,,,,
और हां वहां पर ठंड बहुत है ,, तो कपड़े भी अच्छे से रख लेना, हम पूरे पूरे 8 दिनों के लिए वहां पर जाने वाले हैं।
डॉली अब मैं फोन रखती हूं ,तू फटाफट अपनी पैकिंग कर,,,,
हां पूनम ठीक है निली ने कहा और फोन रख दिया ,,,,डॉली को सच में इस बारे में कुछ भी पता नहीं था ।
उसने राज की गोद में बैठते हुए उसके गले में अपनी बाहें डाल दी।
अच्छा जी,,,, तो आप मुझे इतना बड़ा सरप्राइज देने
वाले थे।
कि हम हनीमून पर जा रहे हैं,,, मुझे बताया क्यों नहीं ,मेरी जगह किसी और को लेकर जाने वाले थे क्या,
अरे शहज़ादी अपुन सच में तेरे को सरप्राइस देने वाला था ,,,
और सुन!!! रही पैकिंग की बात तो वह अपन ने मस्त कर ली है ।
अच्छा आपने पैकिंग में किया क्या है
मेरे सारे कपड़े तो मेरे पास ही है ।
अरे तू वह सब छोड़,,, तू वहां पर यह साड़ी वाड़ी नही पहनेगी,,, अपुन तेरे वास्ते मस्त जीन्स, फ्रॉक ,और भी बहुत सारे कपड़े ले के आया हूं ।
वहां पर तू वही सब पहनेगी ,,,जैसे फिल्मों में पहनते हैं । वह मस्त-मस्त कपड़े पहनते हैं ,तो अपन वह सब तेरे वास्ते ले आया है ।
अपन तुझे बिल्कुल अलग रुप मे देखना चाहता है,,,,जैसा तुझे कभी नहीं देखा। ,,,,वैसा ,,,,
डॉली ने हंसते हुए कहा ,,,,
राज मुझे यकीन नहीं हो रहा ,कि आपने ये सब किया है ।
आप इतना अच्छा कैसे सोच सकते हैं
एक और सरप्राइज,,,, एक के बाद दूसरा और अब इतना बड़ा तीसरा ,,,
मैं बहुत खुश हूँ,,,
मुझे ना आप पर बहुत प्यार आ रहा है। अच्छा तो
बिंदास तू अपना प्यार अपुन को दे डाल ,,,,,अब तो कोई फटे में टांग अढ़ाने वाला भी नहीं है ।
ऐसा कहते हुए राज ने डॉली को अपने और करीब खींच लिया ,,,,
और कुछ देर बाद डॉली को अपने साथ कमरे में ले गया,,,,
और वहां पर उसे वह सारे कपड़े दिखाने लगा ,,,जो उसने डॉली के लिए खरीदे थे
डॉली कपड़ों को देखकर खुश तो बहुत हो गई ,,,,साथ ही उसे शर्म भी आ रही थी ।
राज मैंने कभी यह कपड़े पहने है क्या
मैं कैसे पहनूंगी ,,,,
और फिर विकास पूनम भी हमारे साथ होंगे ,,,,
अरे तो वह तो हमारे दोस्त है ना ।
तू वह सब छोड़ ,तू यही सब पहनेगी
और मैं तुझे इन कपड़ों में देखना चाहता हूं ।
देख शादी एक बार होती है ।
हनीमून भी एक ही बार होता है ।
महारानी तुझे नहीं लगता ,कि जैसे फिल्म में हीरो हीरोइन अच्छे-अच्छे कपड़े पहनते हैं ,,, अच्छी-अच्छी जगहों पर घूमने जाते हैं। फ़ोटो खिंचवाते है।
तो हम भी बैसा ही करे,,,,,
देख शादी हो गई,,,बच्चा पार्टी भी आ जाएगी ,,,फिर तू अपनी नौकरी में बिज़ी मैं अपने ढाबे में ,,,,फिर इन सबके लिए अपने पास टाइम भी नहीं रहेगा,,,,
इसलिए अभी जो करना है, बिंदास कर ले ,,,,,
ठीक है राज अगर आपको अच्छा लग रहा है ,तो ये सब मैं पहन लूँगी।
देर रात दोनों की पैकिंग हो चुकी थी। काकी को तो राज ने पहले से बता ही दिया था ।
इसलिए काकी सुबह जल्दी उठ गई ,और रास्ते के लिए अच्छे से नाश्ता-पानी भी बना के रख दिया था।
सुबह 800 बजे ही कन्हैया डॉली और राज को छोड़ने शहर जा रहा था । विकास और पूनम सीधे एयरपोर्ट पर ही मिलने वाले थे। दोपहर तक चारों एयरपोर्ट पर भी पहुंच चुके थे, बस कुछ देर बाद उनका प्लेन उड़ान भरने वाला था ।
आखिरकार वो सब एयरपोर्ट पहुच चुके और कुछ देर बाद ही,उनका विमान ऊंचे आसमान में उड़ने लगा ,,,,
राज डॉली आगे कि सीट पर और उससे ठीक दो सीट पीछे पूनम और विकास आंख में हाथ डाले हुए ,अपने हनीमून के बारे में सोच सोच कर खुश हो रहे थे।
यह मौका होता ही इतना खूबसूरत है कि सभी की जिंदगी में एक अच्छी याद बन के रह जाता है।
कुछ घंटो बाद सभी यहां से एक अलग मौसम ,दार्जिलिंग की हरी-भरी वादियों में थे ।
एयरपोर्ट से बाहर निकलकर इन्होंने टैक्सी की और अपने बुक किए गए रिसॉर्ट में पहुंच गए ।
वो भी काफी सुंदर था, एक छोटा सा रिसोर्ट था।
या कहिये कि एक रिसोर्ट में वन BHK के कुछ फ्लैट बने हुए थे ।
एक बैडरूम ,किचन ,आगे बालकनी और बालकनी से दिखती ऊँछी ऊंची हरी-भरी पहाड़िया ,,,
होटल पहुंचते-पहुंचते शाम के 700 बज चुके थे ।
बालकनी से देखा, तो चारों तरफ छाया हुआ कोहरा ,उसके बीच में चमकती मद्धम लाइट ,,,,इतना सुंदर वातावरण था ,जिसने मन को मोह लिया था ।
डॉली और राज बालकनी में खड़े होकर इस खूबसूरत से मौसम के नजारे ले रहे थे ।
जब ठंडी हवा का झोका आता ,तो डॉली से राज के सीने से लग जाती ।
और राज ने भी उसे अपनी बाहों में छुपा रखा था । इन खूबसूरत लम्हों में दोनों एक दूसरे के साथ का एहसास पूरी तरह से पा लेना चाहते थे ।
अपने कंधे पर डाले हुये शॉल से राज ने अच्छे से डॉली को भी ढक लिया था।
एक ही शॉल में लिपटे हुए दोनो काफी देर तक बाहर देखते रहे,,,,
सब कुछ उनके मन के अनुरुप था बिल्कुल उनके सपनों की दुनिया के जैसे कभी-कभी तो डॉली की आंखें नम हो जाती थी,,,, ये सोचते हुए,,,कि उसकी सौतेली मां का साया ,,और इतना बुरा वो समय ,जब उसकी मां और मामू उसे बेच देना चाहते थे।
फिर कैसे उसे राज और काकी का साथ मिला ,और राज ,काकी भगवान के रूप में मिले उसे ।
उन्होंने उसकी पूरी दुनिया ही बदल दी आज डॉली कामयाब है,,, तो सिर्फ राज की बजह से,,,,
अगर राज उसके जीवन में नही होता तो
लेकिन अब जब उसे इतनी सारी खुशियां मिल गई है ,,तो भी कभी कभी तो उसे डर लगने लगता है,,,कि उनकी खुशियों को कहीं किसी की नजर न लग जाए। उसने टच वुड करते हुए वहां लगी लकडी की रेलिंग को कसके अपने हाथ में पकड़ लिया।
जब राज ने आंखों में देख कर उससे सवाल किया ! तो डॉली बिना कुछ कहे और भी कस के राज के गले लग गई। राज कभी-कभी तो मुझे डर लगने लगता है ,कि मेरी खुशियों को किसी की नजर ना लग जाए ।
मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था ,,
कि मुझ जैसी अनाथ लड़की को इतनी खुशियां मिलेंगी,,,,
राज आप मुझसे वादा कीजिए, आप मुझसे जिंदगी में कभी नाराज नहीं होगे कभी मुझसे दूर नहीं जाएंगे।
ऐ,,,शहज़ादी तू ये क्या बोले जा रही है अपुन ऐसा क्यों करेगा
और सुन यह कोई सपना नहीं है।
यह सब कुछ सच है ,,,अच्छा अपुन तेरे को इस बात का बिलीव दिलाता है।
और सिवा ने कसके एक किस डॉली के गाल पर कर लिया,,,,
अब तो तेरे को पक्का यकीन हो गया होगा ,कि यह सब सच है,,,,
अब अंदर चल, बहुत ठंड हो रही है
नहीं राज मुझे अच्छा लग रहा है।
अभी चल ,,,मैं जानता हूं कि ठंड तुझसे सहन नहीं होती ।
कहीं बीमार पड़ गई ना ,तो वह काकी अलग अपुन की जान खा जाएगी,,,
तूने अपननी डॉली को बीमार कर दिया यह कहते हुए,राज ने डॉली को गोद में उठा लिया,,,और अंदर ले गया,,,,,,
वहाँ पूनम और विकास भी एक दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे ।
सच में भगवान भी जोड़ियां ऊपर से बनाकर भेजता है,,, क्या होने वाला था और क्या हो गया ।
लेकिन जो हुआ, सब कुछ अच्छा ही हुआ ,,विकास पूनम एक दूसरे को दिल से पसंद करने लगे थे।
पूरे 8 दिनों तक चारों ने खूब घूमा,,