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राजेश ने सेठ दौलतराम के सामने 'फोटोज' वाला लिफाफा रखा तो सेठ दौलतराम ने आश्चर्य से कहा-"यह क्या है?"
"वह फोटो और उनके नैगेटिव जिन द्वारा आपको पिछले दस बरसों से ब्लैकमेल किया जा रहा है।"
.
सेठ दौलतराम उछल पड़े। उन्होंने जल्दी से लिफाफा खोला तो उनके चेहरे का रंग खुशी से लाल हो गया। उन्होंने जल्दी से सारी तस्वीरें देखीं और कंपकंपाती आवाज में बोले
"य...यह सचमुच वही...वही फोटो और नैगेटिव हैं।"
"सेठजी! सब कुछ यही है-अब उस ब्लैकमेलर के पास आपके खिलाफ कुछ भी नहीं रहा है।"
"तुम...तुम...सच कह रहे हो?"
"जी हां, सेठजी...अब वह आगे आपको ब्लैकमेल करने का साहस भी नहीं कर सकता ।"
"मगर वह ब्लैकमेलर है कौन?"
"जिस पर मैंने पहले सन्देह किया था आपका मैनेजर प्रेम।"
"नहीं...! “सेठ दौलतराम उछला पड़े।
"सेठजी ! मुझे इसलिए विश्वास था कि जिस कारण से आपको ब्लैकमेल किया गया उसकी बुनियाद में सिवा प्रेम के और कोई शामिल नहीं था।
"तुम सच कहते हो।" और अचानक सेठ दौलमराम को गुस्सा आ गया और वह बोले-“मैं...मैं उस कमीने को अभी नौकरी से निकालता हूं।"
"नहीं सेठजी, आप ऐसा नहीं करेंगे।"
"क्यों?"
"क्योंकि आप इस तरह प्रेम के विरूद्ध कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकेगे। प्रेम अपनी जानकारी के अनुसार इस बात को चैक कर रहा है कि मैं अपने पिता की नाजायज सजा का आपसे बदला लेना चाहता हूं. इसीलिए मैं आपका दुश्मन बन गया हूं।"
"अच्छा ...!"
"मैं पहले सुनीता से मुहब्बत करके मास्टर जी के बंगले का मालिक बनूंगा और प्रेम अपने फाइनेंस
से वहां पन्द्रह माले की बिल्डिंग और शॉपिंग कम्पलैक्स बनवाएगा।
"बहुत खूब!"
"आपने यह तो पूछा ही नहीं कि प्रेम बिना कारण आपका दुश्मन क्यों बन बैठा है?"
"क्यों?"
"उसका कहना है कि कन्स्ट्रक्शन के कारोबार में उसके और आपके पिता फिफ्टी-फिफ्टी के पार्टनर थे लेकिन आपके पिताजी ने उसके पिता को धोखा देकर सारे कारोबार पर कब्जा कर लिया था।"
"आहो!"
"उसके पिता का हार्टफेल हो गया था और वे लोग फुटपाथ पर आ गए थे। उसकी मां ने बहुत दुःख झेले हैं।"
"बकवास...हमारा कारोबार पुरखों का चला आ रहा है हम लोग खानदानी दौलतमंद हैं...किसी से पार्टनरशिप का सवाल ही नहीं-मेरे पिताजी अकेले कम्पनी के मालिक थे।"
"तो प्रेम ने मुझे बहकाने के लिए कहानी गढ़ी है।"
"अब तुम क्या करोगे?"
"देखते जाइए. मैं क्या करता हूं-आप इन फोटोज
को फाड़कर फेंक दीजिए...या जला दीजिए।"
"राजेश! मैं तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा।"
"नहीं मालिक! मैं अपने बाबूजी को दिया हुआ वचन पूरा कर रहा हूं।"
"तुम बहुत अच्छे और साफदिल के हो।"
"सेठजी ! जिस सन्तान की मां अच्छी होती है वह अच्छे ही निकलते हैं-बच्चे के अच्छे-बुरे चरित्र की जिम्मेदार मां होती है और मुझे तो आपकी छत्रछाया में एक मां नहीं दो मांओ का शिक्षाश्रय प्राप्त हुआ है...बड़ी मालकिन ने मुझे इस योग्य बनाया है कि ड्राइवर का बेटा होते हुए इंजीनियर बना दिया है...जगमोहन मेरा बहुत प्यारा छोट भाई है, वह मुझे बड़ा भाई मानता है।
अच्छा सेठजी , अब मुझे इजाजत दें। सबसे पहले मुझे उस बंगले पर कब्जा करने का प्लान बनाना
है जिसके लिए आपको खन से हाथ रंगने पडे
और मेरे पिता को जेल जाना पड़ा।"
फिर उसने सेठ दौलतराम के चरण छुए. उन्होंने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरकर कहा
"जीते रहो बेटे...तुम्हारी मां अब सर्वेन्ट क्वार्टर में नहीं रहेंगी...बंगले ही के एक कमरे में रहेंगी...तुम इसकी चिन्ता मत करना ।"
"धन्यवाद सेठजी...जैसे ही बंगले पर मेरा कब्जा होगा, मैं कंस्ट्रक्शन कम्पनी खोलने के बहाने सारी रकम अपने नाम ट्रांसफर करा लूंगा जो उसने आपसे ठगी है और बाद में वह रकम और बंगला सब आप ही के होंगे।"
"शाबाश बेटा, तुम्हारी रगों में सचमुच पुरखों की वफादारी का लहू है।"
फिर राजेश कॉटेज से बाहर निकल आया तो सेठ
दौलतराम के होंठों पर एक भयानक मुस्कराहट फैट गई। उन्होंने हड़बड़ाने के ढ़ग में जैसे अपने आपसे कुछ कहा-" बेटे, जिस दिन तुम यह सब कर लोगे, उस दिन तुमको भी हरी झंडी दिखा दी जाएगी। सेठ दौलतराम एक छोटी-से उद्देण्डता को सहन नहीं करता और तुमने तो हमारे साथ बहुत अधिक गुस्ताखी की है। अब तुम उस समय का इन्तजार करो जब तुम अपनी मां के साथ फुटपाथ पर पहुंच जाओगे और हम तुम्हें नौकरी भी नहीं मिलने देंगे।"
।
फिर वह फोटोज के नैगेटिव जलाने लगा।
"वह फोटो और उनके नैगेटिव जिन द्वारा आपको पिछले दस बरसों से ब्लैकमेल किया जा रहा है।"
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सेठ दौलतराम उछल पड़े। उन्होंने जल्दी से लिफाफा खोला तो उनके चेहरे का रंग खुशी से लाल हो गया। उन्होंने जल्दी से सारी तस्वीरें देखीं और कंपकंपाती आवाज में बोले
"य...यह सचमुच वही...वही फोटो और नैगेटिव हैं।"
"सेठजी! सब कुछ यही है-अब उस ब्लैकमेलर के पास आपके खिलाफ कुछ भी नहीं रहा है।"
"तुम...तुम...सच कह रहे हो?"
"जी हां, सेठजी...अब वह आगे आपको ब्लैकमेल करने का साहस भी नहीं कर सकता ।"
"मगर वह ब्लैकमेलर है कौन?"
"जिस पर मैंने पहले सन्देह किया था आपका मैनेजर प्रेम।"
"नहीं...! “सेठ दौलतराम उछला पड़े।
"सेठजी ! मुझे इसलिए विश्वास था कि जिस कारण से आपको ब्लैकमेल किया गया उसकी बुनियाद में सिवा प्रेम के और कोई शामिल नहीं था।
"तुम सच कहते हो।" और अचानक सेठ दौलमराम को गुस्सा आ गया और वह बोले-“मैं...मैं उस कमीने को अभी नौकरी से निकालता हूं।"
"नहीं सेठजी, आप ऐसा नहीं करेंगे।"
"क्यों?"
"क्योंकि आप इस तरह प्रेम के विरूद्ध कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकेगे। प्रेम अपनी जानकारी के अनुसार इस बात को चैक कर रहा है कि मैं अपने पिता की नाजायज सजा का आपसे बदला लेना चाहता हूं. इसीलिए मैं आपका दुश्मन बन गया हूं।"
"अच्छा ...!"
"मैं पहले सुनीता से मुहब्बत करके मास्टर जी के बंगले का मालिक बनूंगा और प्रेम अपने फाइनेंस
से वहां पन्द्रह माले की बिल्डिंग और शॉपिंग कम्पलैक्स बनवाएगा।
"बहुत खूब!"
"आपने यह तो पूछा ही नहीं कि प्रेम बिना कारण आपका दुश्मन क्यों बन बैठा है?"
"क्यों?"
"उसका कहना है कि कन्स्ट्रक्शन के कारोबार में उसके और आपके पिता फिफ्टी-फिफ्टी के पार्टनर थे लेकिन आपके पिताजी ने उसके पिता को धोखा देकर सारे कारोबार पर कब्जा कर लिया था।"
"आहो!"
"उसके पिता का हार्टफेल हो गया था और वे लोग फुटपाथ पर आ गए थे। उसकी मां ने बहुत दुःख झेले हैं।"
"बकवास...हमारा कारोबार पुरखों का चला आ रहा है हम लोग खानदानी दौलतमंद हैं...किसी से पार्टनरशिप का सवाल ही नहीं-मेरे पिताजी अकेले कम्पनी के मालिक थे।"
"तो प्रेम ने मुझे बहकाने के लिए कहानी गढ़ी है।"
"अब तुम क्या करोगे?"
"देखते जाइए. मैं क्या करता हूं-आप इन फोटोज
को फाड़कर फेंक दीजिए...या जला दीजिए।"
"राजेश! मैं तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा।"
"नहीं मालिक! मैं अपने बाबूजी को दिया हुआ वचन पूरा कर रहा हूं।"
"तुम बहुत अच्छे और साफदिल के हो।"
"सेठजी ! जिस सन्तान की मां अच्छी होती है वह अच्छे ही निकलते हैं-बच्चे के अच्छे-बुरे चरित्र की जिम्मेदार मां होती है और मुझे तो आपकी छत्रछाया में एक मां नहीं दो मांओ का शिक्षाश्रय प्राप्त हुआ है...बड़ी मालकिन ने मुझे इस योग्य बनाया है कि ड्राइवर का बेटा होते हुए इंजीनियर बना दिया है...जगमोहन मेरा बहुत प्यारा छोट भाई है, वह मुझे बड़ा भाई मानता है।
अच्छा सेठजी , अब मुझे इजाजत दें। सबसे पहले मुझे उस बंगले पर कब्जा करने का प्लान बनाना
है जिसके लिए आपको खन से हाथ रंगने पडे
और मेरे पिता को जेल जाना पड़ा।"
फिर उसने सेठ दौलतराम के चरण छुए. उन्होंने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरकर कहा
"जीते रहो बेटे...तुम्हारी मां अब सर्वेन्ट क्वार्टर में नहीं रहेंगी...बंगले ही के एक कमरे में रहेंगी...तुम इसकी चिन्ता मत करना ।"
"धन्यवाद सेठजी...जैसे ही बंगले पर मेरा कब्जा होगा, मैं कंस्ट्रक्शन कम्पनी खोलने के बहाने सारी रकम अपने नाम ट्रांसफर करा लूंगा जो उसने आपसे ठगी है और बाद में वह रकम और बंगला सब आप ही के होंगे।"
"शाबाश बेटा, तुम्हारी रगों में सचमुच पुरखों की वफादारी का लहू है।"
फिर राजेश कॉटेज से बाहर निकल आया तो सेठ
दौलतराम के होंठों पर एक भयानक मुस्कराहट फैट गई। उन्होंने हड़बड़ाने के ढ़ग में जैसे अपने आपसे कुछ कहा-" बेटे, जिस दिन तुम यह सब कर लोगे, उस दिन तुमको भी हरी झंडी दिखा दी जाएगी। सेठ दौलतराम एक छोटी-से उद्देण्डता को सहन नहीं करता और तुमने तो हमारे साथ बहुत अधिक गुस्ताखी की है। अब तुम उस समय का इन्तजार करो जब तुम अपनी मां के साथ फुटपाथ पर पहुंच जाओगे और हम तुम्हें नौकरी भी नहीं मिलने देंगे।"
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फिर वह फोटोज के नैगेटिव जलाने लगा।