S
StoryPublisher
Guest
रजनी ने आगे बढ़कर खुरपी उठा ली। फिर दोनों लीन में, कोठी के पिछले भाग में, बारजे के समीप वाले कमरे की ओर बढ़ गए। कमरे की सीध में लीन के अंदर, कोठी की दीवार के समीप उन्होंने हरसिंगार की नींव डाली। चंद्रभाल ने अपने हाथों से गड्ढा खोदा, रजनी ने पौधे की जड़ रखी, फिर दोनों ने ही मिट्टी डालकर अपने भोले-भोले प्यार की याद मजबूत कर दी। उसके बाद रजनी प्रतिदिन ही हरसिंगार के पौधे में पानी देकर मानो अपने दिल की कली को पनप कर फूल बनाने लगी।
एक रात जब दोनों लीन के पिछले भाग में पत्थर की बेंच पर बैठे हुए थे तो चंद्रभाल ने उसे बताया जानती है रजनी, आज मेरा एक मित्र तेरे लिए क्या कह रहा था?
रजनी ने आश्चर्य - से देखा। उसकी चर्चा क्या कुंवर साहब के मित्रों में भी होने लगी है? परन्तु चंद्रभाल ने उसके दिल में उठते विचारों की चिन्ता नहीं की। उसने कहा, वह कह रहा था-यार तेरे माली की लड़की बहुत सुन्दर है। मैंने कहा-अरे, वह तो हमारे लीन का सबसे अधिक सुन्दर गुलाब का फूल है। उसने कहा, फूल सूंघने के लिए होता है, तुमने उसे सूंघा कभी? मैंने कहा-फूल कमरे की शोभा बढ़ाने के लिए होता है, घर की शोभा बढ़ाने के लिए होता है, वह घर जिसमें मनुष्य को सारा जीवन व्यतीत करना पड़ता है। मैंने उसे यह भी बताया कि फूल कोट के कॉलर में लगाने के लिए होता है, क्योंकि कॉलर के पास मनुष्य का दिल होता। फूल की समीपता से दिल को शांति मिलती है। फूल की सुगन्ध जब दिल की गहराई में उतर जाती है तो सोचने-समझने के ढंग में एक नशा-सा आ जाता है-मेरी बात सुनकर वह हंसने लगा। कहने लगा-जिस फूल की तुम बात कर रहे हो, वह फूल कोई और होगा। तुम्हारे माली की बेटी तो केवल सूंघने के लिए ह। क्षण भर के लिए उससे आनन्द उठाओ और फिर फेंक दो। बस इसी बात पर मुझे क्रोध आ गया तो मैंने उसे दे पटका। आज से हमारी मित्रता समाप्त हो गई।'
रजनी को एक हार्दिक प्रसन्नता, का आभास हुआ। चंन्द्रभाल उसका कितना अधिक ध्यान रखता था। परन्तु इसके साथ उसे दो मित्रों की मित्रता टूटने का भी दुःख हुआ। चंद्रभाल उसके लिए किस-किससे लड़ाई मोल लेता रहेगा और आखिर कब तक? परन्तु उस रात के बाद रजनी को अपनी सुन्दरता का पूरा-पूरा एहसास, हो गया। अगली सुबह से वह अपनी सुन्दरता की सुरक्षा करने लगी।
सुबह दर्पण के सामने बैठकर उसने स्वयं को घंटों संवारा। संवारकर स्वयं को देखा तो लजा गई। आखों में गुलाबी डोरे कांप गए। चंद्रभाल की बात याद करके, वह सोचने लगी कि क्या-वह वास्तव में लॉन का सर्वाधिक सुन्दर फूल है? कुंवर साहब कितनी प्यारी-प्यारी बातें करते हैं। अपनी बातों द्वारा पिछली रात तो उन्होंने उसका मन भी गुदगुदा दिया था। रजनी के सोचने-समझने के ढंग में बचपना था, अछूतापन था। उसके विचार बिल्कुल पवित्र थे।
20 94% 13:28 pm हरसिंगार उसी शाम रजनी लीन में लगे फूलों की क्यारियों के समीप खडी हुई थी। बहुत ध्यान से वह पौधों में लंगे गुलाबो को निहार रही थी, इस प्रकार मानो लॉन के सबसे सुन्दर फूल को तलाश करके उससे अपनी सुन्दरता की तुलना करना चाहती हो। क्या वह । वास्तव में इतनी सुन्दर है? कुंवर साहब की बातों में उसके प्रति कितना अधिक प्यार समाया हुआ था।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
एक रात जब दोनों लीन के पिछले भाग में पत्थर की बेंच पर बैठे हुए थे तो चंद्रभाल ने उसे बताया जानती है रजनी, आज मेरा एक मित्र तेरे लिए क्या कह रहा था?
रजनी ने आश्चर्य - से देखा। उसकी चर्चा क्या कुंवर साहब के मित्रों में भी होने लगी है? परन्तु चंद्रभाल ने उसके दिल में उठते विचारों की चिन्ता नहीं की। उसने कहा, वह कह रहा था-यार तेरे माली की लड़की बहुत सुन्दर है। मैंने कहा-अरे, वह तो हमारे लीन का सबसे अधिक सुन्दर गुलाब का फूल है। उसने कहा, फूल सूंघने के लिए होता है, तुमने उसे सूंघा कभी? मैंने कहा-फूल कमरे की शोभा बढ़ाने के लिए होता है, घर की शोभा बढ़ाने के लिए होता है, वह घर जिसमें मनुष्य को सारा जीवन व्यतीत करना पड़ता है। मैंने उसे यह भी बताया कि फूल कोट के कॉलर में लगाने के लिए होता है, क्योंकि कॉलर के पास मनुष्य का दिल होता। फूल की समीपता से दिल को शांति मिलती है। फूल की सुगन्ध जब दिल की गहराई में उतर जाती है तो सोचने-समझने के ढंग में एक नशा-सा आ जाता है-मेरी बात सुनकर वह हंसने लगा। कहने लगा-जिस फूल की तुम बात कर रहे हो, वह फूल कोई और होगा। तुम्हारे माली की बेटी तो केवल सूंघने के लिए ह। क्षण भर के लिए उससे आनन्द उठाओ और फिर फेंक दो। बस इसी बात पर मुझे क्रोध आ गया तो मैंने उसे दे पटका। आज से हमारी मित्रता समाप्त हो गई।'
रजनी को एक हार्दिक प्रसन्नता, का आभास हुआ। चंन्द्रभाल उसका कितना अधिक ध्यान रखता था। परन्तु इसके साथ उसे दो मित्रों की मित्रता टूटने का भी दुःख हुआ। चंद्रभाल उसके लिए किस-किससे लड़ाई मोल लेता रहेगा और आखिर कब तक? परन्तु उस रात के बाद रजनी को अपनी सुन्दरता का पूरा-पूरा एहसास, हो गया। अगली सुबह से वह अपनी सुन्दरता की सुरक्षा करने लगी।
सुबह दर्पण के सामने बैठकर उसने स्वयं को घंटों संवारा। संवारकर स्वयं को देखा तो लजा गई। आखों में गुलाबी डोरे कांप गए। चंद्रभाल की बात याद करके, वह सोचने लगी कि क्या-वह वास्तव में लॉन का सर्वाधिक सुन्दर फूल है? कुंवर साहब कितनी प्यारी-प्यारी बातें करते हैं। अपनी बातों द्वारा पिछली रात तो उन्होंने उसका मन भी गुदगुदा दिया था। रजनी के सोचने-समझने के ढंग में बचपना था, अछूतापन था। उसके विचार बिल्कुल पवित्र थे।
20 94% 13:28 pm हरसिंगार उसी शाम रजनी लीन में लगे फूलों की क्यारियों के समीप खडी हुई थी। बहुत ध्यान से वह पौधों में लंगे गुलाबो को निहार रही थी, इस प्रकार मानो लॉन के सबसे सुन्दर फूल को तलाश करके उससे अपनी सुन्दरता की तुलना करना चाहती हो। क्या वह । वास्तव में इतनी सुन्दर है? कुंवर साहब की बातों में उसके प्रति कितना अधिक प्यार समाया हुआ था।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,