Sitapur Ki Bus Me Mili Burke Wali Bhabhi

Discussion in 'Indian Housewife' started by sexstories, Jan 27, 2017.

  1. sexstories

    sexstories Administrator Staff Member

    मेरा नाम संजय है, लखनऊ का रहने वाला हूँ।
    लखनऊ में ही मेरा छोटा सा बिजनेस है।

    मेरी उम्र 25 साल है। मैं दिखने में बहुत आकर्षक हूँ मेरा जिस्म भी बहुत भरा हुआ है।

    मैंने पहले भी बहुत सी भाभियों को चोदा है।

    यह बात कुछ एक साल पुरानी फरवरी महीने की है।

    मुझे अपने बिजनेस के सिलसिले में पास ही के शहर सीतापुर जाना था।

    अभी ठंड कम ही हुई थी कि उसी दिन सुबह से धीमी-धीमी बारिश होने लगी और बारिश के बाद ठंडी-ठंडी हवाओं की वजह से ठंडक बढ़ गई।

    खैर.. बारिश रुकने के बाद मैं बस स्टेशन पहुँचा और जैसे ही मैं बस स्टेशन पहुँचा.. कि बारिश फिर शुरू हो गई।

    भागते हुए मैं सीतापुर की बस में चढ़ा।
    बस में बारिश की वजह से कुछ 7-8 लोग ही थे।

    बस में मिली देसी भाभी
    तभी मेरा ध्यान एक भाभी पर पड़ा।
    वो अकेले एक सीट पर बैठी थी और भीग जाने की वजह से वो कंपकंपा रही थी।

    यह देख कर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।

    मैं सीधा उसकी सीट पर गया और पूछा- क्या मैं बैठ सकता हूँ?

    उसने कुछ ना बोलते हुए अपना सर हिला दिया।
    मैं उसके पास बैठ गया और उसके शरीर को निहारने लगा।

    जैसे ही मेरी नज़र उसके मम्मों पर गई.. मैं तो जैसे देख कर पगला सा गया। उसने बुरका पहन रखा था.. पर उसमें से भी उसके दूध के उभार साफ़ नज़र आ रहे थे।
    यह देख कर मैं सोचने लगा कि काश मैं इसे चोद सकूँ।

    बस चली.. मैं यही सब सोचता रहा।

    जैसे ही बस शहर से बाहर निकली.. मैं उससे चिपक कर बैठ गया और उससे बातें करना शुरू कर दिया।
    ‘आप कहाँ जा रही हैं?’

    उसने बताया- मैं सीतापुर की रहने वाली हूँ और लखनऊ दवाई लेने आई थी।

    दवाई का नाम सुन मैंने उससे पूछा- किस बात के लिए.. क्या परेशानी है?
    वो पहले हिचकिचाई.. फिर बोली- मैं निसंतानपन को दूर करने की दवा लेने आती हूँ।

    आगे बात बातचीत में मालूम हुआ कि उसकी शादी को चार साल हो गए थे.. पर कोई बच्चा नहीं था।

    यह सुन कर तो जैसे मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, मुझे तो ऐसा लगा कि मेरे लौड़े की नौकरी लग गई हो।

    खैर.. हम बातें करते रहे और मैंने अपना काम स्टार्ट किया, मैं बोला- ठंडक तो कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।

    यह बोलते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और उसने इसका कोई विरोध नहीं किया।

    वो बोली- हाँ.. आज तो बहुत ठंडी हवा चल रही है।

    जब उसने मेरे हाथ का कोई विरोध नहीं किया तो फिर क्या था.. मुझे तो हरी झंडी मिल गई थी।

    अब मैंने धीरे-धीरे उसकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया।
    वो कुछ नहीं बोली।

    फिर मैंने उससे उसका नाम पूछा..
    उसने कहा- शबनम!

    क्योंकि बस में बहुत कम लोग थे और हम बीच में बैठे थे.. हमारे आगे की सीट पर और ना हमारे पीछे की सीट पर ही कोई बैठा था।

    अब मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पीठ की ओर बढ़ाया और उसे सहलाने लगा।
    यह अहसास पाकर शबनम ने आँख बंद कर लीं और शाल से मेरा हाथ ढक लिया।

    उसकी यह हरकत देख कर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मुझे हरी झंडी मिल गई।
     
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    अब मैंने अपना दूसरा हाथ अन्दर डाल कर उसके दूध को ऊपर से सहलाने लगा।
    मेरी तो आज जैसे लॉटरी लग गई थी।

    फिर मैंने धीरे-धीरे उसके बुर्के के बटन खोले और अपना हाथ अन्दर डाल कर उसके चूचियों को कसके दबाने लगा।

    अब शबनम ने अपने होंठ दबाने शुरू कर दिए और अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया।
    उसकी गर्म ‘आहों..’ को मैं महसूस कर सकता था।

    फिर मैंने एक हाथ नीचे बढ़ा कर उसकी सलवार के ऊपर ही उसकी चूत पर रख दिया।

    मैं सलवार के ऊपर से ही गर्मी महसूस कर सकता था, मैंने उसकी चूत को ऊपर से ही रगड़ना स्टार्ट कर दिया।
    यह देख शबनम का हाथ मेरे लोहा हो चुके लम्बे लौड़े पर चला गया।

    अब वो भी मज़े ले रही थी और मेरे सामान को ऊपर से सहला रही थी।

    खैर.. इतनी देर में सीतापुर आ गया और हम दोनों को उतरना पड़ा।
    जाते-जाते शबनम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे गई और मैं अपना काम निपटा कर वापस लखनऊ गया।

    उसी रात मैंने उसे कॉल किया तो उसने मुझे पहचान लिया और बोली- तुमने मुझे तड़पा कर छोड़ दिया।
    मैंने कहा- मेरी रानी लखनऊ आओ.. तुम्हारी सारी प्यास बुझा दूँगा।

    उसने कहा- मैं जुमेरात को फिर लखनऊ आऊँगी और तुमसे वहीं मिलूँगी।

    अब यह सुन में गुरूवार का इंतज़ार करने लगा।

    मैंने सारा इंतज़ाम कर लिया था, मेरे फ्रेंड का लखनऊ में एक होटल है, मैंने उसे फोन करके एक कमरा बुक करवा लिया।

    वो दिन भी आ गया और मैं अपने ऑफिस में बैठा शबनम के फोन का इंतज़ार कर रहा था।

    दोपहर एक बजे शबनम का फोन आया, उसने मुझे बस स्टेशन बुलाया।
    मैंने वहाँ पहुँच कर उसे बाइक पर बैठाया और सीधा होटल ले गया।

    रास्ते में उसने मुझसे पूछा- हम कहाँ जा रहे हैं।
    मैंने उससे कहा- परेशान ना हो।

    हम दोनों होटल पहुँचे और मैंने कमरे की चाबी ली।
    मैंने शबनम को सीधे कमरे की तरफ भेज दिया।
    शबनम कमरे में चली गई और मैं कमरे के बाहर खड़ा अपने दोस्त से बातें करने लगा।

    करीब 2-3 मिनट बाद में जब मैं कमरे में गया तो देखा कि शबनम कमरे में नहीं थी।
    मैंने टॉयलेट की तरफ देखा तो उसका दरवाज़ा खुला था।

    नंगी भाभी
    जब मैं अन्दर गया तो शबनम सिर्फ़ चड्डी और ब्रा में खड़ी अपना मुँह धो रही थी।

    यह देख कर मैंने पीछे से उसे पकड़ लिया और उसके कंधे और कान के पीछे किस करने लगा।
    वो ये देख पलट गई और मेरे होंठों को अपने होंठों में ले कर चूसने लगी।

    मुझे मज़ा आने लगा.. वो मेरे होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे बहुत प्यासी हो।

    मैं अब धीरे-धीरे उसके दूध भी सहलाता जा रहा था।
    कुछ देर तक वो मेरे होंठों को चूसती रही और फिर उसका हाथ मेरे सामान पर आ गया।

    मैं अब उसे गोद में उठा कर बिस्तर पर ले आया।
    उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मेरी चड्डी में से मेरे लौड़े को निकाल कर चूसने लगी।

    उसके मुँह की गर्मी पा कर मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था।

    वो मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चूस रही थी।
    कुछ ही मिनट में ही मैं उसके मुँह में झड़ गया और वो मेरा सारा पानी पी गई।

    पानी पीने के बाद शबनम बोली- मेरे राजा आज मेरी प्यास बुझा दो।
     
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    मैंने भी उसकी यह बात सुनते ही उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके नुकीले निप्पलों को चूसने लगा, साथ ही उसके बड़े-बड़े दूध दबाने लगा।

    वो तो जैसे पागल हो गई थी, वो मेरी पीठ पर एक हाथ से सहला रही थी और एक हाथ से अपने बाल नोंच रही थी।

    अब मैं अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया और उसकी चूत को सहलाने लगा।
    उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

    मैं उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी चूत पर आ गया.. चूत बहुत गीली हो गई थी।
    मैंने अपनी जुबान जैसे ही उसके दाने पर रखी.. वो एकदम से चिल्ला उठी- यअहह.. मेरे राजा.. ये मज़ा तो मुझे किसी ने नहीं दिया..

    मैंने अपनी जुबान उसकी चूत में डाल दी..
    वो मछली सी तड़पने लगी।

    थोड़ी देर बाद मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली.. तो वो और आवाजें निकालने लगी।

    मेरी आठ दस-बार ही उंगली करने के बाद उसने अपनी जाँघों से मेरे मुँह को दबाया और अपने हाथ से मेरे मुँह को चूत में और जोर से दबा कर मेरे मुँह में झड़ गई।

    वो झड़ने के बाद मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को फिर से चूसने लगी और अपने हाथ से मेरे लौड़े को सहलाने लगी।

    मेरा लौड़ा अब बिल्कुल खड़ा हो गया था।

    उसने मेरे लौड़े को एक बार फिर मुँह में लिया, एक-दो मिनट चूसने के बाद वो बोली- मुझे और ना तड़पाओ।

    यह सुनते ही मैंने उसे लेटा कर उसकी टाँगें फैला कर अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और एक झटका मार दिया.. जिससे मेरा आधा लण्ड उसकी छूट में घुस गया।

    मेरा लण्ड लंबा और मोटा होने की वजह से उसकी चीख निकल गई और आँख में आँसू भी आ गए, पर अब मैं कहाँ रुकने वाला था।
    मैंने और ज़ोर से झटका मारा और मेरा पूरा हथियार उसकी चूत में घुस गया, जिससे वो तड़पने लगी।

    यह देख कर अब मैं थोड़े आराम से झटके मारने लगा।

    पर जब शबनम मस्ती से मज़े लेने लगी.. तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

    कुछ ही झटकों के बाद शबनम चिल्ला रही थी- आआहह.. मेरे राजा चोदो.. और चोदो मुझे.. फाड़ दो इस चूत को।

    मैं भी बिल्कुल रंडी समझ कर उसे चोद रहा था। काफी देर तक अलग-अलग पोज़ में उसे चोदने के बाद अब मैं झड़ने वाला था।

    मैंने उससे पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ.. कहाँ लोगी?
    उसने कहा- अन्दर ही..
    क्योंकि उसे मुझसे संतान सुख भी चाहिए था।

    मैंने अपना गरम पानी उसकी चूत के अन्दर ही झाड़ दिया।
    झड़ने के बाद मैं उसके ऊपर ही लेट गया।

    उस दिन मैंने उसकी तीन बार चुदाई की.. और समय होने पर उसे मुझसे एक लड़का भी हुआ।
    आज भी जब भी शबनम को मौका मिलता है.. वो मुझसे चुदवाने के लिए आ जाती है।

    मेरी कहानी कैसी लगी.. प्लीज़ मेल और कमेन्ट कीजिएगा।
     
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