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Thriller आख़िरी सबूत

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37

मनहूस सोमवार से पहले रविवार को दक्षिणपश्चिमी गर्म हवाओं के साथ एकदम साफ सुबह थी। उस विषय पर कोई बातचीत किए बगैर वान वीटरेन और मुंस्टर ने पैदल पुलिस स्टेशन जाने का तय किया।

ये महज उन सुबहों में से एक थी, और मुंस्टर अपने और वान वीटरेन दोनों के कदमों में ढिलाई और अनिच्छा महसूस कर सकता था। जैसे ही वो वीवर्स ग्रांड से बाहर निकले, उसी वक़्त दिन की पहली प्रार्थना के लिए बंजेसकर्क की घंटियां बजने लगीं। वान वीटरेन उसके काले दरवाजों को देखने के लिए पल भर को ठिठका, और अबूझ सा कुछ बुदबुदाया। मुंस्टर ने अपने सामने फैले फलक पर विचार किया। भवन के भव्य हैनसिएटिक कोने। धीरे-धीरे टपकते पानी के साथ पीतल की पौराणिक मूर्तियां। घनघनाती घंटियों के नीचे शांति से फैला, कभी-कभार फड़फड़ाकर उड़ते पत्थरों के बीच खाना चुगते एकाध कबूतरों के अलावा एकदम सुनसान पड़ा तिरछा अहाता। और बुकशॉप के पास खड़ा, सीटी से वर्डी की धुन बजाता गहरी रंगत वाला एक सफाईकर्मी।

मुंस्टर ने अपने हाथ जेबों में डाल लिए और अपने पतले से ब्रीफकेस को बांह के नीचे दबा लिया, और जब उन्होंने ऊबड़-खाबड़ पत्थरों को पार किया तो अपने आसपास के माहौल की निरर्थकता का अहसास धीरे-धीरे उसके ऊपर हावी होने लगा। स्वाभाविक और अविवादित पागलपन। रविवार की ऐसी सुबह में इस उनीदा छोटे से तटवर्ती शहर में उनका काम और गतिविधियां हास्यास्पद लग रहे थे। किसी ने कभी कहा था कि दिन की रोशनी में एक कातिल कितना निस्तेज लगता है। और ये समझ पाना कितना नामुमकिन था कि नौंवी दफा, एक बार फिर वो लोग पुलिस स्टेशन के कॉन्फ्रेंस रूम में पड़ी गंदे पीले रंग की अंडाकार मेज के चारों ओर जमा होने के लिए जा रहे थे कि वहां बैठकर अपनी शर्ट की आस्तीनें चढ़ाकर वो एक बार और बहस करें कि ये पागल कौन हो सकता है।

वो आदमी इस छोटे से खूबसूरत शहर में अपने साथी निवासियों के सिर काटता फिर रहा है।

वो आदमी जिसकी वजह से एक पूरा समाज डर से कांपता हुआ जी रहा था, और जिसके काम सब लोगों की जबान पर थे क्योंकि असल में हफ़्ते दर हफ़्ते बातचीत का इकलौता विषय बस वही बना हुआ था।

वो आदमी, वास्तव में, जिसे ढूंढ़ना और उसकी शिनाख़्त करना उसका अपना, डीसीआई वान वीटरेन का और बाकी सबका फर्ज था ताकि इस दुनिया से आखिरकार इन गतिविधियों को बाहर किया जा सके।

और कल ये लोग क्या कहेंगे भला?

हां, इसके लिए इकलौता शब्द केवल हास्यास्पद है, मुंस्टर ने आंखें सिकोड़कर पुलिस स्टेशन की तांबई छत के ऊपर चमकते सूरज को देखते हुए सोचा। या शायद अजीबोगरीब, अगर बियाटे मोएर्क के शब्द को इस्तेमाल किया जाए तो ।

और, बेशक, ये जानना सबसे ज़्यादा मुश्किल, ये समझना सबसे ज़्यादा नामुमकिन था कि उसके साथ क्या हुआ हो सकता है।

क्या वाकई ऐसा हो सकता है कि इस वफ़्त शहर में या इसके आसपास कहीं वो कटे सिर के साथ पड़ी हो? तलाशे जाने काइंतजार करती धीरे-धीरे सड़ती एक लाश। क्या इसकी कल्पना करना मुमकिन था? वो, वो औरत जिसे वो लगभग...

उसने थूक गटका और सिगरेट के एक खाली पैकेट को ठोकर मारी जो बजाहिर सफाई कर्मचारी की निगाह से छूट गया था।

और आज दोपहर वो सिन और बच्चों से फिर मिलेगा।

उसे खुद से पूछना पड़ा था कि उसने बिना जरा सी भी चेतावनी दिए यहां आने का फैसला कैसे कर लिया--सहज आवेग, उसने फोन पर कहा था--और वो भी इस वक़्त?

पिछले शुक्रवार की शाम पौने आठ बजे।

कमोबेश लगबग यही समय रहा होगा जब...

इतने लंबे अरसे में जबसे वो साथ काम कर रहे थे, दो या तीन मौकों पर वान वीटरेन ने जिंदगी के पैटर्न के बारे में उससे बात की थी। छिपे हुए सूत्र, योजनाबद्ध घटनाएं और इसी तरह की चीजें--निर्धारक, वो जो भी होते हैं; लेकिन इसने तो यकीनन ज़्यादातर को पीछे छोड़ दिया था।

वो सिहर उठा और उसने भविष्यवाणी के लिए द्वार खुला छोड़ दिया।

"हमने उसे पकड़ लिया," बॉजेन ने कहा।

"किसे पकड़ लिया?" वान वीटरेन ने उबासी लेते हुए कहा।

"पॉडवस्की को, बेशक," क्रोप्के ने कहा। "वो नीचे एक कोठरी में है। हमने आधे घंटे पहले उसे हार्बर से उठाया था।" "हार्बर से?"

"हां। कल सुबह से वो वहां मछली पकड़ रहा है - या कम से कम उसका यही कहना है। ऐसा लगता है कि उसने सॉलिनेन से एक नाव किराए पर ली थी, बजाहिर जब-तब लेता रहता है।"

वान वीटरेन एक कुर्सी पर ढेर हो गया।

"उससे पूछताछ की?" उसने पूछा।

"नहीं," बॉजेन ने कहा। "उसे कुछ पता नहीं है कि ये सब किसलिए हो रहा है।"

"अच्छा है," वान वीटरेन ने कहा। "मैं कहूंगा कि उसे कुछ देर और पकने दें।"

"मैं पूरी तरह सहमत हूं," बॉजेन ने कहा। "मैं नहीं चाहता कि इस बार हम कोई जल्दबाजी करें।"

मिस डीविट कॉफी की ट्रे लेकर आईं।
 
"सिल्वी की शॉप तो इतवार को बंद रहती है," उन्होंने दो खुशबूदार रिलेन केक खोलते हुए कहा।

"ब्रैम्बल?" बॉजेन ने पूछा।

मिस डीविट ने हामी भरी और मुस्कुराहट दबाने की कोशिश करने लगीं ।

"इर्मगार्ड, तुम तो स्टार हो," बॉजेन ने कहा, और बाकी लोग भी सहमति में बुदबुदाए।

"कल से नया क्या हुआ है?" वान वीटरेन ने अपना मुंह पॉछते हुए कहा।

"मैंने मैलिनक से बात की है," बॉजेन ने कहा। "वो उस बाररूम के झगड़े के बारे में जानने में लगा हुआ है, बेशक, लेकिन उसे शक है कि वो बहुत ज़्यादा पता लगा नहीं पाएगा। ये कभी पुलिस केस भी नहीं बना था। वो केवल एक गवाह को खोज पाया है, एक औरत जो वहां मौजूद थी, लेकिन उसे ये पता नहीं कि झगड़ा शुरू किसने किया था। शायद वो केवल शराबियों का झगड़ा रहा हो, किसी बहुत मामूली सी बात को लेकर हुआ झगड़ा जो किसी वजह से हाथ से निकल गया। जो भी हो, निस्संदेह ये अच्छा होगा कि हम खुद इस मामले में पॉडवस्की से जानकारी निकालें।"

वान वीटरेन ने हामी भरी ।

"और स्पेन वाला मामला?" मुंस्टर ने पूछा।

बॉजेन ने कधे उचकाए और शंकालु दिखा।

"जैसा हमने कल कहा था, ये महज इतफाक मालूम देता है। ब्लूवे आरलाक में र्यूमे के करीबी लोगों में से नहीं था। उनमें से किसी का स्पेन से कोई ज्ञात संबंध नहीं था और बम विस्फोट पूरी तरह से आतंकवादी कार्रवाई मालूम देती है। ईटीए ने जिम्मेदारी ली थी, और अक्सर वो ऐसा केवल तभी करते हैं जब उसके पीछे वास्तव में उनका हाथ हो।

" और ग्रीट सिमेल को भी कुछ पता नहीं था कि बैंग क्या कह रहा था," क्रोप्के ने कहा ।

"इसका आवश्यक रूप से कोई खास मतलब नहीं है," बॉजेन ने कहा।

"यानी विशुद्ध संयोग," वान वीटरेन ने अपनी खाली प्लेट को तकते हुए कहा। "ये यहां काफी दिखाई देता है।"

बॉजेन ने अपना पाइप जलाया।

"पॉडवस् से पूछताछ करने से पहले और कुछ?"

क्रोप्के ने गला खखारा ।

"कुछ खास तो नहीं," उसने कहा। "मगर मैं मोएर्क के रास्ते पर वापस भी गया। आज सुबह मैंने उसी रास्ते पर जॉगिंग की।"

"और?" बॉजेन ने कहा ।

"मुझे कुछ भी नहीं मिला," क्रोप्के ने कहा।

"वाकई?" वान वीटरेन ने कहा।

"तो फिर, पाँडवस्र्की ," बॉजेन ने कहा। "हम इसे किस तरह करें?"

मुंस्टर ने मेज पर चारों ओर देखा--क्रोप्के, मूजर और बॉजेन। वान वीटरेन और वो खुद। कॉन्स्टेबल बैंग बजाहिर देर तक सोता रह गया था, या शायद पुलिस चीफ ने उसे आज की छुट्टी दे दीथी--इस बारे में सोचें तो ऐसी कोई चौंकाने वाली बात भी नहीं थी ।

वान वीटरेन बोला।

"अगर आपको कोई एतराज न हो," उसने कहा, "तो पहले राउंड की बात मैं करना चाहूंगा, मुंस्टर के साथ।"

मुमकिन है कि क्रोप्के को थोड़ा सा बुरा लगा हो, लेकिन बॉजेन ने महज सिर हिलाकर हामी भरी और टेप रिकॉर्डर लेने चला गया।
 
38

यूजीन पॉडवसर्की निश्चय ही ऐसा दिख रहा था मानो वो बहुत खराब मूड में हो। जब क्रोप्के और मूजर उसे पूछताछ कक्ष में लेकर आए, तो झुर्रियों से भरा उसका चेहरा घृणा से लाल हो रहा था और अपने बर्ताव को एकदम स्पष्ट करने के लिए उसने अपनी विशाल मुट्टियां मेज पर पटकीं।

"साली इन चीजों को मेरी कलाइयों से निकालो!" वो चिल्लाया।

वान वीटरेन ने संकेत किया। क्रोप्के ने हथकड़ी खोल दी और मूजर के साथ कमरे से चला गया।

"प्लीज बैठ जाओ," वान वीटरेन ने कहा। "मेरा नाम डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर वान वीटरेन है।"

"मुझे रती भर भी परवाह नहीं है कि तुम्हारा नाम क्या है," पॉडवसर्की ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा। ये सब क्या है आखिर?"

"मैं तुमसे हेन्ज एगर्स, अन्स्र्ट सिमेल और मॉरिस रयूमे के कत्लों के सिलसिले में कुछ सवाल पूछने वाला हूं।"

"क्या मुसीबत है?" पॉडवस्की ने कहा। फिर से?"

वान वीटरेन ने संकेत किया कि मुंस्टर टेप रिकॉर्डर चालू कर दे। मुंस्टर ने बटन दबा दिया और उसका सीनियर औपचारिकताएं पूरी करने लगा। पॉडवसर्की ने ज़्यादातर जवाब गुर्राकर या गालियों से दिए, लेकिन एक बार जब उसे सिगरेट जलाने की इजाजत दे दी गई तो वो थोड़ा ज़्यादा सहयोगात्मक हो गया-कम से कम जितना मुंस्टर देख सकता था।

"ठीक है," उसने कहा। "आगे बढ़ते हैं, और इसे रास्ते से हटाते हैं, मेरी आधा टन मछलियां खराब होने लगेंगी।"

शुक्रवार की शाम को तुम क्या कर रहे थे?" वान वीटरेन ने बातचीत शुरू करते हुए पूछा।

"पिछले शुक्रवार को?" पॉडवसर्की ने कहा। "तुम क्यों जानना चाहते हो आखिर कि मैं पिछले शुक्रवार क्या कर रहा था? उनमें से आखरी वाले को मरे हुए तो जमाना बीता गया, यकीनन--?"

"अगर मेरे सवालों को दोहराने के बजाय तुम उनका जवाब दो, तो ये कहीं ज़्यादा जल्दी निबट जाएगा," वान वीटरेन ने कहा। "मेरे ख्याल से तुमने कहा था कि तुम जल्दी में हो।"

पॉडवसर्की ने अपना मुंह खोला और फिर से बंद कर लिया।

"ठीक है," उसने कहा, और याद करता सा दिखाई दिया।

वान वीटरेन जरा भी नहीं हिला-डुला।

"शाम में कुछ खास नहीं," पॉडवसर्की ने आखिरकार तय किया। "दोपहर में मैं नाव के लिए सॉलिनेन से बात करने गया था--चाभी वगैरा ली। फिर ड्राइव करके घर आ गया। अगला सवाल, प्लीज!"

"जिस रात सिमेल का कत्ल हुआ, तब तुम क्या कर रहे थे?"

"ये मैं पहले ही उस औरत को बता चुका हूं जो पुलिसवाली कही जाती है। मैं घर पर सो रहा था। रात में आमतौर पर मैं यही करता हूं।"

"क्या कोई इसकी पुष्टि कर सकता है?" मुंस्टर ने पूछा।

"मेरी बिल्लियां," पॉडवसर्की ने कहा।

“और जब र्यूमे मरा था?" वान वीटरेन ने पूछा।

"वो कब हुआ था?"

"इस महीने की आठ और नौ तारीख के बीच की रात को।"

"भगवान ही जानता है। शायद, वही।"

"क्या तुम हेन्ज एगर्स को जानते थे?"

"नहीं।"

"एगर्स के कत्ल के लिए कोई एलिबाइ?"

"मैं चैडो में था। इधर-उधर की बातें और वो चीजें पूछना बंद करो जो मैं पहले ही तुम लोगों को बता चुका हूं!"

"ठीक है," वान वीटरेन ने कहा। मार्च 1983 में तुम आरलाक में क्या कर रहे थे?"

"कया?"

"तुमने सुन लिया।"

"1983 में आरलाक में?"

"मुझसे पंगे लेना बंद करो," वान वीटरेन फुफकारा। "तुम आखिर हफ्ते भर अस्पताल में रहे थे।"

“आह," पॉडवसर्की घुरघुराया। तुम्हारा मतलब साले उस धंधे से है। उसका साले इस सबसे क्या लेना-देना है?"

सवाल कौन पूछ रहा है, तुम या मैं?"

पॉडवसर्की ने आह भरी ।

"तुम वाकई बहुत कमीने हो!"

"मेरे ख्याल से हम यहां थोड़ा रुकेंगे," वान वीटरेन ने कहा। उसने अपनी कुर्सी खिसकाई और खड़ा हो गया। "मेरा ख्याल है कुछ देशों में सड़ी मछली भी खाते हैं--स्वीडन में, जब तक कि मैं गलत नहीं हूं।"

"रुको तो, भगवान के लिए!" पॉडवसर्की ने कहा। "आरलाकबेशक मैं तुम्हें उसके बारे में बता सकता हूं, अगर तुम इतनी ही जिद कर रहे हो तो। बैठ जाओ।"

वान वीटरेन बैठ गया। पॉडवसर्की ने एक और सिगरेट जलाई और सिर खुजाने लगा।

"तो?" वान वीटरेन ने कहा ।

"नाजायज शराब बनाने के लिए कार्रवाई पर क्या समय सीमा है?" पॉडवसर्की ने पूछा।

"तुम्हें कुछ नहीं होगा," वान वीटरेन ने कहा।

"पक्का?"

वान वीटरेन ने हामी भरी ।
 
"साले पुलिसवालों पर कभी भरोसा नहीं करना," पॉडवसर्की ने कहा। "इस साली मशीन को बंद कर दो!"

वान वीटरेन ने सिर हिलाया और मुंस्टर ने टेपरिकॉर्डर बंद कर दिया। पॉडवसर्की घुरघुराकर हंसा।

"ठीक है। अब सुनो। शराब की एक खेप मेरे हाथ लगी थी जिसे बेचना था--"

"हाथ लगी थी?" वान वीटरेन ने कहा।

"यही मान लेते हैं," पॉडवसर्की ने कहा।

"कितनी?”

"बहुत।"

वान वीटरेन ने हामी भरी ।

"और जानते हो, आरलाक में मेरा एक दोस्त था, एक डेन, जिसके पास एक खरीदार था, कोई डॉक्टर था साला, जैसा पता लगा, जो उन पैसों को देने का बहुत शौकीन नहीं था जो उसे देने थे।"

"उसका नाम क्या था?” मुंस्टर ने बीच में टोका।

"उसका नाम? भगवान जाने। मुझे याद नहीं है। हां, कुछ ब से शुरू होता था। ब्लो-कुछ--"

"ब्लूवे?" वान वीटरेन ने सुझाया।

"हां, शायद यही है-वो उन पढ़ाकू कमीनों में से था जो सोचते हैं कि अपने नशेड़ी दोस्तों को शराब बेचकर फटाफट पैसा कमा लेंगे। सारी बातों पर हमारी रजामंदी हो गई थी, डिलीवरी का इंतजाम हो गया था, सब तय हो गया था, अब बचा था तो बस पेमेंट--""और?" वान वीटरेन ने कहा ।

"उस पब में हम उसी को निबटाने वाले थे... और ये साला चूतिया वहां अपने दोस्त के साथ बैठा है और सोच रहा है कि मुझे धोखा दे लेगा! तुम इस पर कितने की शर्त लगाओगे, कॉन्स्टेबल?"

"हम कितने की बात कर रहे हैं?" मुंस्टर ने पूछा।

"बहुत ज़्यादा की, पॉडवसर्की ने कहा। "हमारा अच्छा-खासा पैसा लगा हुआ था, और मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया था, हां। मुझे बस एक बात का पछतावा है--"

"क्या?" वान वोटरेन ने कहा ।

"कि उनसे भिड़ने से पहले मैंने डेन के आने का इंतजार नहीं किया," पॉडवसर्की ने कहा, अचानक उसे खांसी का दौरा पड़ गया। उसे पलटना पड़ा और मुंह पर हाथों को रखकर वो दोहरा हो गया था, और ये करीब आधे मिनट चला। मुंस्टर ने वान वीटरेन को देखा। ये समझने की कोशिश की कि वो क्या सोच रहा है, लेकिन ये नामुमकिन था, हमेशा की तरह। जहां तक उसका अपना सवाल था, पॉडवसर्की की कहानी बहुत विश्वसनीय सी लग रही थी; कम से कम उसने सुनाते वक्त उसे गढ़ने का आभास नहीं छोड़ा था।

हालांकि आप पूरा यकीन कभी नहीं कर सकते, बेशक। वो इस तरह की चीजें पहले भी देख चुका है। और पहले भी गलत समझ बैठा था।

"उसके दोस्त का क्या नाम था?" जब पॉडवसर्की ने खांसना बंद किया तो वान वीटरेन ने पूछा।

"अह?"

"ब्लूवे का दोस्त। उसका क्या नाम था?"

"पता नहीं," पॉडवसर्की ने कहा।

"क्या उसने अपना परिचय दिया था?" मुंस्टर ने पूछा।

हो सकता है दिया हो, लेकिन अगर मुझे उस बंदे का नाम याद हो जिसे मैंने बारह साल पहले घूंसा मारा था तो मेरा नाश हो।"

"दस," वान वीटरेन ने कहा। "उसका क्या नाम था?"

"क्या मुसीबत है?" पॉडवसर्की ने कहा। "क्या तुम समझ नहीं रहे हो, और हो क्या रहा है?"

वान वीटरेन ने कुछ सैकड इंतजार किया जबकि पॉडवसर्की बारी-बारी से दोनों पर नजर डालते हुए उन्हें घूरता रहा मानो खुद से पूछ रहा हो कि आखिर वो दो पुलिसवालों की जगह इन दो मूखाँ के पल्ले कैसे पड़ गया।

ध्यान दें, इनकी दुनिया में फर्क शायद इतना बड़ा नहीं था, मुंस्टर ने माना।

"उसका नाम मॉरिस र्यूमे था," वान वीटरेन ने कहा।

पॉडवसर्की मुंह बाए उसे देखता रहा।

"उफ साला," उसने कहा।

वो अपनी कुर्सी पर टिक गया और कुछ देर सारी स्थिति पर सोचता रहा।
 
"ठीक है," आखिरकार उसने कहा। "हम एक बात तो साफ कर लेते हैं-उस मनहूस बार में मैं उस कमीने को मार नहीं पाया था, और तबसे मैं इसमें कामयाब भी नहीं रहा हूं। और कोई सवाल?

"फिलहाल नहीं," वान वीटरेन ने फिर से उठते हुए कहा। लेकिन तुम यहीं बैठ सकते हो और इसपे सोच सकते हो, हम तुमसे फिर बात करेंगे।" उसने दरवाजे पर दस्तक दी और क्रोप्के और मूजर हथकड़ी लेकर वापस आ गए।

"कमीनों," पॉडवसर्की चिल्लाया और इसमें कोई शक नहीं था कि वो वाकई ऐसा कह रहा था।

39

यूजीन पॉडवसर्की को छोड़ने, और जल्दी से जल्दी मीडिया को इंस्पेक्टर मोएर्क की गुमशुदगी की जानकारी देने का फैसला रविवार की रात करीब नौ बजे एक के मुकाबले तीन वोटों के बहुमत से लिया गया था। बॉजेन, मुंस्टर और वान वीटरेन पक्ष में थे, क्रोप्के विरोध में। मूजर ने भाग नहीं लिया, शायद इसलिए कि इस अचानक, और यकीनन एक ही दफा अपनाई गई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर वो अभिभूत था।

"मैं अब आज रात क्रुइकशैंक से बात करूंगा," वान वीटरेन ने कहा। "मैंने उससे कुछ खबर एडवांस में देने का वादा किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस कल दोपहर है न?"

बॉजेन सहमत था।

"तीन बजे," उसने तय किया। "और हम पूरी परेड की उम्मीद कर सकते हैं, जैसा मैंने पहले कहा था--टेलीविजन, रेडियो, सब। कातिल के लिए ये इतना आम नहीं है कि वो किसी पुलिसवाले को हथकड़ी पहनाए, ये तो आप कहेंगे ही।"

"आम पब्लिक तो समझती है कि इसका उल्टा ही होना चाहिए," वान वीटरेन ने कहा । "आप उनका पक्ष समझ सकते हैं, ये मानना ही होगा।"

"पॉडवस्कों के बारे में क्या कहेंगे?" क्रोप्के ने पूछा।

"कुछ भी नहीं," बॉजेन ने कहा। "मुंह बंद रखा जाए, यही सलाह है।" उसने मेज पर निगाह घुमाई। "डीसीआई वान वीटरेन और मैं प्रेस से बात करेंगे और कोई नहीं।"

"टिपिकल," क्रोप्के बड़बड़ाया।

"ये आदेश है," बॉजेन ने कहा। "अब घर जाओ और थोड़ा सो लो। कल एक नया दिन है, और हम यकीनी तौर पर टीवी पर होंगे। अगर हम सामान्य इंसानों की तरह दिखें तो अच्छा होगा। मैं पॉडवस्की को छोड़ दूंगा।"

"मैं आपके साथ चलता हूं," वान वीटरेन ने कहा। "वहां हमारा एक से ज्यादा का होना उपयोगी हो सकता है।"

ग्यारह बज चुके थे जब बच्चे आखिरकार सोने गए। उन्होंने वाइन की एक बोतल खोली और मोस्ताकीस का एक टेप लगाया, और कई नाकाम कोशिशों के बाद आखिरकार वो आग जलाने में कामयाब रहे। उन्होंने फर्श पर गद्दे बिछाए और एक-दूसरे के कपड़े उतारे।

"हम उन्हें जगा देंगे," मुंस्टर ने कहा।

"नहीं, नहीं जगाएंगे," सिन ने कहा। उसने उसकी पीठ थपथपाई और कबल के अंदर घुस गई। "मैंने उनके हॉट चॉकलेट में थोड़ी सी नोंद की दवा डाल दी थी।"

"नीद की दवा?" वो नाराज दिखने की कोशिश करते हुए चिल्लाया।

"बस थोड़ी सी। उन्हें कोई स्थायी नुकसान नहीं होगा। आ जाओ!"

"ठीक है," मुंस्टर ने कहा और अपनी पत्नी के साथ रिश्ता फिर से संवार लिया।

सोमवार ने अपने आगमन की सूचना लगातार और हठपूर्वक हो रही बारिश के साथ दी जो लग रहा था कि हमेशा ही होती रहेगी। वान वीटरेन करीब सात बजे उठा, कुछ देर उसने बारिश को देखा और उसने वापस सोने का फैसला किया। ये शहर तो इतनी जल्दी-जल्दी मौसम बदलता है जितनी जल्दी मैं अपनी शर्ट भी नहीं बदलता हूं, उसने सोचा।

सवा नौ बजे तक वो डाइनिंग रूम में क्रुइकशैंक के साथ नाश्ते की मेज पर बैठा हुआ था, जो उल्लेखनीय रूप से चुस्त और बहुत अच्छे मूड में दिख रहा था, बावजूद इतनी सुबह के और इस सच के कि वो रात के ज्यादातर हिस्से में काम करता रहा होगा।

"आज सुबह तीन बजे फोन से इसे भेज दिया," उसने उत्साह से बताया। शर्त लगा सकता हूं कि नाइट डेस्क तो प्रेस को रोक देना चाहती होगी, लेकिन फिर आखिरकार वो दोपहर के संस्करण के लिए मान गए। जैक द रिपर वाला हिस्टीरिया है!"

वान वीटरेन यकीनन परेशान दिख रहा था।

"खुश हो जाइए!" क्रुइकशैंक ने कहा। "आप जल्दी ही इसे हल कर लेंगे। इस बार वो हद से बाहर चला गया है। क्या इंस्पेक्टर मोएर्क को वाकई कुछ पता था कि वो कौन है?"

"शायद," वान वीटरेन ने कहा। "उसने तो यही सोचा होगा कम से कम।"

क्रुइकशैंक ने सिर हिलाया।

"आपने प्रेस विज्ञप्ति अभी भेजों या नहीं?" खाली डाइनिंग रूम को देखते हुए उसने पूछा। "मुझे शिकार पर हाथ मारने को लपकता अपना कोई सहयोगी दिखाई नहीं दे रहा है।"

वान वीटरेन ने घड़ी पर निगाह डाली।

"शायद और पौन घंटा है। नाश्ता खत्म करके मुझे लापता हो जाना चाहिए। बहुत हंगामा मचने वाला है।"

"हम्म," क्रुइकशैक ने क्रॉसां खाते हुए कहा। "वहां बड़ी मारामारी हो जाने वाली है।"

"वहां कहां?"

"समुद्र तट पर और जंगल में। सारे फोटोग्राफरों और प्राइवेट जासूसों के चलते।"

"शायद सही कहते हो," वान वीटरेन ने फिर गहरी सांस लेते हुए कहा। "खैर, शायद अब समय है कि मैं पुलिस स्टेशन जाऊं और अंदर बंद हो जाऊ ।"

"गुडलक, क्रुइकशैंक ने कहा। "दोपहर में मिलता हूं। उम्मीद है मैं अभी यहीं रहूंगा, अपने साथी यूनियन सदस्यों का इंतजार करता हूं।"

____
 
"तो, ये रहा," पुलिस चीफ ने लैदर के सोफे पर ढहते हुए कहा। "मुझे कहना पड़ेगा कि मुझे अखबार के लोग ज़्यादा पसंद हैं।"

वान वोटरेन सहमत था।

"टीवी के उन चिकने-चुपड़े बकवास करते लोगों से मुझे उल्टी आती है; सच में। उस भीड़ से आपका बहुत वास्ता पड़ता है?"

उसने अपने जूते उतार फेंके और उंगलियों को इतनी सावधानीसे हिलाया मानो वो अनिश्चय में हो कि वो अभी भी मौजूद हैं या नहीं।

"मैं कह नहीं सकता कि उन्हें बढ़ावा देने में मेरी ज़्यादा दिलचस्पी है," वान वीटरेन ने कहा। ईमानदारी से देखते हैं; ये मुनासिब ही है कि वो अपनी धारणाएं बनाएं। लेकिन मेरे ख्याल से आपने उन्हें बहुत अच्छी तरह संभाला।"

"शुक्रिया," बॉजेन ने कहा। "लेकिन हम यकीनन मुश्किल में हैं, ये बेमानी है कि आप इसे कैसे देखते हैं। हिलर ने आपसे बात की थी?"

वान वीटरेन पुलिस चीफ की डेस्क के पीछे अपनी कुर्सी पर बैठ गया।

"बिल्कुल," उसने कहा। "वो चाहता था कि दस लोगों को सैल्स्टाट से और दस और लोगों को ऊस्टवरडिंगेन से भेज दे--साथ ही जॉगिंग ट्रैक को बारीकी से खंगालने के लिए फॉरेंसिक अफसरों की एक टीम भी।" बॉजेन ने सिर के पीछे अपने हाथ बांध लिए और खिड़की से बाहर देखने लगा।

"बहुत अच्छा विचार है, ऐसे मौसम में," उसने कहा। "क्या वो चाहता है कि तुम पूरा चार्ज संभाल लो? मेरा मतलब, मेरे बस पांच दिन ही बचे हैं। शुक्रवार को मैं छोड़ रहा हूं, चाहे जो हो जाए। कल रात मैंने इरादा पक्का कर लिया था--मैं दो साल से हारते चले आ रहे फुटबॉल कोच की तरह महसूस करने लगा हूं।"

"लीडरशिप का सवाल तो कभी उठा ही नहीं," वान वीटरेन ने कहा। "वैसे भी, मैं वादा कर चुका हूं कि सारा मामला शुक्रवार तक साफ कर दूंगा।"

बॉजेन स्पष्ट रूप से शंकालु दिखा।

सुनकर खुशी हुई," उसने अपना पाइप भरते हुए कहा। इसे इसी पर छोड़ देते हैं। तुमने मोएर्क के माता-पिता से बात की?"

"मिसेज मोएर्क से, हां," वान वीटरेन ने कहा।

"ठीक-ठाक रही?"

"खासतौर से तो नहीं। क्यों होती?"

नहीं, कुछ भी ठीक-ठाक हुए बहुत अरसा हो गया है," बॉजेन ने कहा ।

"मैं टीवी देख रही थी, सिन ने कहा। "वो तुम लोगों को बहुत अच्छे अंक नहीं दे रहे हैं।"

"अजीब बात है," मुंस्टर ने कहा। "अच्छी खुशबू आ रही है; हम क्या खाने वाले हैं?"

"क्रियोल चिकन," उसकी पत्नी ने उसे चुंबन देते हुए कहा। "तुम्हें लगता है वो मारी गई होगी?" वो मुंस्टर के कान में फुसफुसाई, इस बात की एक सीमा है कि किसी पुलिस अफसर के बच्चों से कितना बदशित करने की उम्मीद की जा सकती है।

"मैं नहीं जानता," उसने कहा, और बस पल भर के लिए उसने एक बार फिर अपने अंदर सर्द निराशा उमड़ती महसूस की।

"मैंने डैड को टीवी पर देखा था," उसकी बेटी ने उनकी बातचीत में बाधा डालते और उसकी टांग पर लिपटते हुए कहा। "मैं बारिश में तैर रही थी।"

"तुम समुद्र में तैर रही थीं, बुद्धृ." उसके बेटे ने कहा।

"हमारे पास नीद की और गोलियां हैं?" मुंस्टर ने पूछा।

वान वीटरेन तकियों के सहारे टिका और उसने फिर से मैलिनक रिपोर्ट उठा ली। कुछ देर वो उसे अपने हाथ में तौलता रहा, आंखें बंद किए।

भयानक, उसने सोचा। एकदम भयानक।

या शायद इसे बयान करने के लिए तकलीफदेह शब्द ज़्यादा सही होगा। इन कागजों में ही कहीं जवाब छिपा था, लेकिन वो उसे ढूंढ़ नहीं पा रहा था। चौंतीस पन्ने, कुल पचहतर नाम। उसने उन्हें रेखांकित कर दिया था और दो बार गिन लिया था--औरतें,प्रेमी,और संभावित प्रेमी, अच्छे दोस्त, साथी छात्र, सहकर्मी, पड़ोसी, एक ही गोल्फ क्लब के सदस्य--बहुत सामान्य परिचितों, हाशिये पर रहने वाले लोगों तक जो कभी भी किसी वक्त मॉरिस रयूमे के संपर्क में आए थे। और फिर अवसर--यात्राएं, परीक्षाएं, अंतिम परीक्षाएं, नियुक्तियां, पार्टियां, नए पते, सम्मेलन, कोकीन मुक्ति क्लीनिकें--ये सब कुछ उसमें था, उन बारीकी से भरे पन्नों में डीसीआई मैल्निक की साफ-सुथरी और बोधगम्य शुष्क भाषा में दर्ज। ये डिटेक्टिव काम का नायाब नमूना था, इसमें कोई शक नहीं था; लेकिन फिर भी, वो इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पाया था। साला कुछ भी नहीं!

कया था वो?

बियाटे मोएर्क ने साला क्या देख लिया था?

या वो कुछ ऐसा जानती थी जो बाकी लोग नहीं जानते? क्या ऐसा हो सकता था? क्या ऐसा हो सकता था कि सब कुछ के बावजूद, वो खुद अभी बोर्कमान पॉइंट को पार नहीं कर पाया था?

उसकी बेडसाइड टेबल पर मोएर्क की नोटबुक रखी हुई थीं।

तीनों, जिन्हें उसने अभी तक देखा नहीं था ।
 
ये उसके मिजाज के खिलाफ था। अगर वाकई उनमें कोई महत्वपूर्ण बात दर्ज थी, तो वो कातिल उन्हें वहीं क्यों छोड़ गया? उसके पास अच्छा-खासा समय था, और वो ऐसा बंदा भी मालूम नहीं देता जो किसी भी चीज को इतेफाक पर छोड़ता हो।

और अगर वास्तव में वो अभी जिंदा थी, सब कुछ के बावजूद, तो क्या वो उसकी निजी जिंदगी के पाकीजा दायरे में घुसपैठ नहीं करेगा? उसके सबसे ज्यादा पवित्र धरातल को रौद नहीं देगा? उन्हें खोलने से पहले, उसे इस बात का तनिक भी इल्म नहीं हो सकता था कि उसने इन नोटबुकों में क्या राज लिखे हैं। वो उसके पढ़ने के लिए नहीं थीं, ये तो निश्चित था।

अगर वो अभी भी जिंदा थी, तो क्या ये रुकावटें तब भी लागू होतीं?

हां, बेशक। शायद तब और ज़्यादा ।

उसने आंखें बंद कर ली और बारिश की टपर-टपर सुनने लगा। बेरहम आसमान से, धुआधार और लगातार बारिश होते हुए करीब चौबीस घंटे से ज़्यादा बीत चुके थे। मूसलाधार और अभेद्य। क्या इस मनहूस जगह पर मौसम कभी बदलता नहीं है? उसने सोचा।

जो भी हो; वो जिसके खिलाफ थे उसे पेश करने का ये बुरा तरीका नहीं था। एक ही पॉइंट पर बिना रुके चोट करते रहना। समय को चिहित करना और कभी आगे न बढ़ना। मृत सागर में लहरें...

सेंट एना चर्च के घड़ियाल ने बारह बजाए। उसने गहरी सांस ली, आंखें खोलीं, फिर चौथी बार आरलाक की रिपोर्ट पर ध्यान केंद्रित कर दिया।

40

"ठीक है, आखिर मुझे करना क्या था?" लेआउट को ध्यान से देखते हुए विल्मॉटसेन ने कहा।

"हां," संपादक ने कहा। "अगर हमें डबल तादाद में छापना है तो हम सब कुछ ही डबल कर सकते हैं।"

इंस्पेक्टर मोएर्क के गायब होने की खबर और उन परिस्थितियों ने जिनमें ये हुआ था, साफतौर पर डे जरनल के हैडलाइन सैटर विल्मॉटसेन के पुरुषत्व को ही कटघरे में ला खड़ा किया था। विरोधी के भीतर समाना मुमकिन नहीं था, और अखबार के अस्सी साल के इतिहास में पहली बार उन्हें दो अलग-अलग प्लेकार्ड लगाने पर मजबूर होना पड़ा था।

पूरी जानकारी प्रदान करने के फर्ज को न छोड़ने की खातिर। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले नाटक की गरिमा को कम न आंकने की खातिर जो अब उनके शांतिपूर्ण गृहनगर कालब्रिंजेन में अपने चौथे (या ये पांचवां था?) अंक में प्रवेश कर रहा था।

अगली शिकार?

पहले प्लेकार्ड पर मुस्कुराती हुई बियाटे मोएर्क की थोड़ी सी धुंधली तस्वीर पर लिखा था।

क्या आपने लाल माज़्दा देखी है?

दूसरे पर पब्लिक से पूछा गया, जिसमें ये भी कहा गया था। कि हतप्रभ पुलिस ने सहायता की गुहार की।

अखबार के अंदर आधी से ज़्यादा जगह फरसामार मामले के नवीनतम विकास को समर्पित थी। देरों तस्वीरें थीं: स्मोकहाउस की पार्किंग के हवाई चित्र (उस जगह पर सफेद क्रॉस लगाकर जहां मोएर्क ने अपनी कार छोड़ी थी; रविवार शाम से उसे पुलिस स्टेशन के बेसमेंट में, सैल्स्टाट के फॉरेंसिक अफसरों द्वारा आठ घंटे जांच किए जाने के बाद सुरक्षित ढंग से खड़ा कर दिया गया था) और एक दूसरा समुद्र तट और जंगल का, और मोएर्क के दूसरे फोटो, साथ में प्रेस कॉन्फ़्रेंस में लिए गए बॉजेन और वान वीटरेन के फोटो। वान वीटरेन आंखें बंद किए टेक लगाए बैठा था, एक ऐसी मुद्रा जो आमतौर पर गहन शांति की स्थिति की याद दिलाती थी--पहली चीज जो दिमाग में आती थी वो ये कि वो कोई ममी या कोई आत्मलीन योगी था। जिंदगी की आपाधापियों और पागलपन से बहुत दूर, और शायद आप खुद से पूछ बैठते कि क्या ये लोग वाकई करने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हैं जिसे वो इस केस में तलाश रहे हैं।

यकीनन, क्या पहले कभी ऐसा कुछ हुआ था? एक पुलिस इंस्पेक्टर को अगवा, शायद कत्ल कर दिया गया था! एक जारी तफ़्तीश के बीच! सवाल न्यायसंगत था।

आलेख का मिजाज भी बहुत विभिन्नता भरा था, प्रमुख लेख के ठहराव भरे विश्लेषण कि स्थानीय काउंसिल के लिए मौजूदा हालात में अपनी साख बचाने का इकलौता रास्ता यही था कि फरसामार कांड की जिम्मेदारी ले और नए चुनावों की घोषणा करे, से लेकर विक्षिप्त, पागल (बेरहम मनोरोगी) या आतंकवादी (किसी अनसुने हत्यारे गुट से बुलाया भाड़े का हत्यारा) तक के भावपूर्ण, विभिन्न आकलनों--और, हां, उस बहुत लोकप्रिय थ्योरी तक जिसमें एक बिल्कुल सामान्य, ईमानदार नागरिक, परिवार का इज़्जतदार मुखिया, संदेहास्पद अतीत का उसी अपार्टमेंट में रहने वाला व्यक्ति था।
 
ज़्यादा विश्वसनीय चीजों में और ततीश के नजरिए से, आशाजनक रूप से सबसे ज़्यादा फलदायक आम पब्लिक से की बॉजेन की नई और अर्जेंट अपील थी कि अगर उनके पास कोई जानकारी हो तो वो सामने आएं।

विशेषकर, शुक्रवार शाम को सवा छह से सवा सात के बीच के महत्वपूर्ण समय को विस्तार से परखा जाना था--उस पल से इंस्पेक्टर मोएक की गतिविधियां जब वो सी वार्फ से निकली थीं वान वीटरेन ने उन्हें देखा था। अगर उन साठ मिनटों के दौरान बियाटे मोएर्क द्वारा, अपनी लाल माज़्दा के साथ या उसके बिना, लिए गए रास्ते का पता लगाना मुमकिन हो जाए, तो "अगर हम उस कमीने को न पकड़ पाएं तो ये बहुत बुरा स्कैंडल होगा," हरमन शाल्के ने पुलिस चीफ के शब्दों को उद्धृत करते हुए लिखा था।

उस मनहूस दोपहर को चार बजते न बजते, बॉजेन और क्रोप्के उन सारे सुराग और जानकारियों को, जो अब तक उन्हें मिली थीं--प्रत्यक्ष देखने के दावे बासठ से कम नहीं थे, इसके साथ ही बीस के करीब विभिन्न तरह की दूसरे दर्जे की जानकारियां थीं--देखने और उनका मिलान करने के लिए क्रोप्के के दफ़्तर में चले गए। मुंस्टर और मूजर को लगातार आ रहे उन गवाहों से मिलने और उनसे प्राथमिक बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिन्हें बैंग और मिस डीविट नीचे के दफ्तर में रोक रहे थे, सारे नाम और निजी ब्योरे उचित तरीके से दर्ज कर रहे थे।

किसी को बहुत स्पष्ट नहीं था कि डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर वान वीटरेन क्या कर रहा था। वो लंच के बाद कुछ पूछताछ करने" के लिए पुलिस स्टेशन से चला गया था, लेकिन उनके संदर्भ के बारे में उसने किसी को नहीं बताया था। दूसरी ओर, उसने वादा किया था कि निर्धारित विश्लेषण के लिए वो पांच बजे तक वापस आ जाएगा। फिर साढ़े सात बजे एक छोटी सी प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी; ये समय लोकल टेलीविजन कंपनी के लिए रिआयत था जिसका उस समय नियमित समाचार कार्यक्रम प्रसारित होता था। सीधे प्रसारण के अलावा और किसी भी चीज को दर्शक नाकामी की तरह लेते और ये प्रेस मूल्यों के खिलाफ एक अपराध होता, कंपनी ने निर्णयात्मक ढंग से तर्क दिया था, और हालांकि बॉजेन उस नौजवान मीडिया गुरु को कानून और न्याय के बारे में ज्ञान दे सकता था, लेकिन उसने अपनी आपत्तियों को अपने तक रखा और उनके निवेदन को मान लिया।

"साले पाखंडी!" मगर रिसीवर रखने के बाद उसने कहा था। "सिल्वर टाइयां पहनने वाले सवालिए, हह, नहीं, शुक्रिया!"

लेकिन हालात को देखते हुए, बेशक, ये बुरे काम से ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाने का सवाल था।

41

"ये साला क्या है?" वान वीटरेन ने मेज पर आगे झुकते हुए कहा।

"ये नक़्शा है," क्रोप्के ने समझाया। "ड्रॉइंग पिन इंस्पेक्टर मोएर्क और उनकी कार को देखे जाने को दर्शाती हैं--या कहें, सभी लाल माज़्दा कारों को।"

"कालब्रिंजेन में कई हैं," बॉजेन ने कहा। "अनुमान है कि शुक्रवार शाम को कम से कम दो कारें सड़कों पर थीं--मोएर्क की कार के अलावा ।"

"लाल और पीले सिरों वाली पिन कार को देखना दर्शाती हैं," क्रोप्के ने कहा, वो बातचीत का सूत्र हाथ में रखने और इस नमूने पर अपना स्वामित्व जताने के लिए उत्सुक था। "लाल सवा छह से पौने सात के समय के लिए, पीली पौने सात से सवा सात के लिए।"

वान वीटरेन मेज पर थोड़ा और आगे झुका।

"नीली और सफेद पिन वो गवाह हैं जिनका दावा है कि उन्होंने मोएर्क को देखा था--नीली ने पहले आधे घंटे में, सफेद ने दूसरे में। वो वाली डीसीआई वान वीटरेन हैं, मसलन।"

उसने समुद्र तट पर एक सफेद पिन को इंगित किया।

"मैं सम्मानित हुआ," वान वीटरेन ने कहा। कितने लोग हैं?"

"पच्चीस लाल और बीस पीले," क्रोप्के ने कहा। "वो कार है--और फिर बारह नीले और पांच सफेद हैं।"

" मुंस्टर अपने बॉस के पास आ गया और ड्राइंग पिनों के पैटर्न को देखने लगा। बुरा आइडिया नहीं है, उसे मानना पड़ा--हां, बशर्ते आपको पता हो कि उन्हें ठीक से समझना कैसे है। वो काफी बिखरी हुई दिख रही थीं; बजाहिर शहर के सभी हिस्सों में कार को देखा गया था, लेकिन ज़्यादातर में केवल एक अकेली पिन थी।

"पॉइंट ये है," क्रोप्के ने कहा, "कि हमें इस बात की चिंता नहीं करनी है कि एक अकेला गवाह काफी है या नहीं। वो जगहें जहां कई पिनें हैं, पर्याप्त रूप से स्पष्ट संकेतक होने चाहिएं।"

वो बाकी लोगों को पिन गिनने देने के लिए रुका और उसने इस तरीके की बुद्धिमता को महसूस किया।

"बहुत स्पष्ट है," मुंस्टर बुदबुदाया। "सफेद वाली भी।"

"बेशक," वान वीटरेन ने कहा। "इसमें कोई शक नहीं है।"

"बिल्कुल, क्रोप्के ने खुश होते हुए कहा। "जैसा कि आप देख सकते हैं, बस तीन समूह हैं--सी वार्फ के बाहर फिशरमैन्स स्क्वेयर, ग्रांड प्लेस, और स्मोकहाउस। सी वार्फ के बाहर चौबीस पिन हैं, यहां ग्यारह, स्मोकहाउस के पास आठ--बासठ में से तैंतालीस। बाकी सारे शहर में बिखरी हुई हैं, जैसा आपने देखा होगा। और ऐसा लगता है कि डीसीआई वान वीटरेन के देखने के बाद और किसी ने उन्हें नहीं देखा था। कातिल के अलावा, बेशक। समुद्र तट एकदम सूना रहा होगा।"

"सही है," वान वीटरेन ने कहा।

"हम्म," बॉजेन ने कहा। "मेरा अभी भी मानना है कि हमें इससे भटकना नहीं चाहिए--जहां तक मैं चीजों को समझता हूं, लोगों के देखे जाने में एक तिहाई गलत निकलेगा।"

"मगर", क्रोप्के ने कहा। "मेरे ख़्याल से आप जानते हैं--"

"और सी वार्फ और स्मोकहाउस दोनों जगहों के बारे में अखबारों में लिखा जा चुका है।"

"सही है," क्रोप्के ने कहा। "लेकिन मेरा ख़्याल है कि ये कहना

सही होगा कि इससे फर्क नहीं पड़ता। सबसे ज़्यादा दिलचस्प चीज, बेशक, ग्रांड प्लेस है--ग्यारह गवाह दावा करते हैं कि उन्होंने कमोबेश साढ़े छह और सात के बीच मोएर्क या उसकी कार को पुलिस स्टेशन के बाहर देखा था। दो ने उसे कार से उतरते देखा था... वहां वो दो सफेद ड्रॉइंग पिन।"

उसने इंगित किया, और बॉजेन ने सिर हिलाया। वान वीटरेन ने एक टूथपिक तोड़ी और उसे सेंट पीटर चर्चयार्ड में डाल दिया।

"वो किस दिशा में जा रही थीं?" उसने पूछा।

क्रोप्के ने बॉजेन को देखा ।

"इधर की ओर," उसने कहा ।

बॉजेन ने फिर सिर हिलाकर हामी भरी ।

"ठीक है," उसने कहा। "तो ऐसे संकेत हैं कि वो यहां आई थीं। वापस स्टेशन।"

"तो?" मुंस्टर ने कहा, उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी लंबे और पेचीदा चुटकुले के पॉइंट को चूक गया हो। वान वीटरेन ने कुछ नहीं कहा। उसने अपनी जेबों में हाथ डाल लिए, फिर से सतर खड़ा हो गया और दांतों के बीच से हल्की सी सीत्कार छोड़ी। मुंस्टर को अपने बॉस की पीठ की तकलीफ का ध्यान हो आया जो अक्सर मुखर हो उठती थी।
 
वो फिर से मेज के चारों ओर बैठ गए। क्रोप्के अभी भी अपने आपसे खुश नजर आ रहा था, मगर थोड़ा सा हैरान भी था, मानो उन निहितार्थों को न समझा पा रहा हो जो उसकी कोशिशों से उपजे थे। एक बार फिर मुंस्टर को अपनी कनपटियों में तितलियों की सी थरथराहट महसूस हुई--वो जो अक्सर संकेत देती थी कि कुछ होने वाला है, कि एक अहम बिंदु की ओर पहुंचा जा रहा है। कि कामयाबी किसी भी पल हासिल हो सकती है। उसने बेतरतीब कमरे पर नजर डाली। बैंग उसके ठीक सामने बैठा था, पसीने में नहाया। वान वीटरेन अधसोया सा दिख रहा था। बॉजेन अभी भी नक्शे और ड्राइंग पिनों को देख रहा था, अपने गाल सिकोड़े हुए और ऐसे दिखते हुए मानो सपना देख रहा हो।

अंततः कॉन्स्टेबल मूजर ने उस आम हैरानी को शब्द दिए जो कमरे में भरी मालूम दे रही थी।

"यहां?" उसने कहा। "वो भला यहां क्यों आई थीं?"

तीन सैकंड गुजरे। फिर क्रोप्के और मूजर दोनों ने आह भरी और लगभग एक साथ कहाः

"अपने दफ़्तर!"

"धत्तेरे की!" बॉजेन के मुंह से निकला और उसने अपनी अभी तक अनजली सिगरेट को फर्श पर गिरा दिया। "किसी ने उसके दफ़्तर की भी जांच की?"

मूजर और क्रोप्के पहले ही चल चुके थे। मुंस्टर खड़ा हो गया था, और बॉजेन ऐसा दिख रहा था मानो पुलिस के बुनियादी कामों का टैस्ट लेने वाली पहली ही परीक्षा में वो फेल हो गया हो। केवल वान वीटरेन ही अविचलित दिख रहा था और अपनी ऊपर की जेब में कुछ तलाश रहा था।

"बेशक," वो बड़बड़ाया। "वहां कुछ नहीं मिलेगा। लेकिन एक नजर तो जरूर ही देख लेना चाहिए; छह आंखें दो से ज़्यादा देखेंगी, या ऐसी उम्मीद कर सकते हैं।"

42

"मैं समझता हूं कि तुम जानती हो कि तुम कहां हो?" उसने कहा, उसकी आवाज बहुत ज़्यादा थकी हुई सुनाई दे रही थी।

"मुझे ऐसा लगता तो है," उसने अंधेरे में कहा।

वो खांसा।

"तुम समझती हो न कि बिना मदद पाए तुम्हारे लिए यहां से निकलने का कोई मौका नहीं है?"

"हां।"

"तुम मेरे कब्जे में हो। क्या हम इस बात पर सहमत हो सकते हैं?"

उसने जवाब नहीं दिया। वो अचानक सोच में पड़ गई कि इतना दृढ़ निश्च्य किस तरह उस गहरे दुख से भरा हो सकता है जो उसकी आवाज में साफ झलक रहा था। वो हैरान थी मगर साथ ही साथ ये भी समझ रही थी कि यही उस सारे मसले की कुंजी थी।

दुख और दृढ़संकल्प।

"क्या हम इस पर सहमत हो सकते हैं?"

"हां।"

वो रुका और उसने अपनी कुर्सी ठीक की। शायद अपनी टांगें एक के ऊपर एक रखी थीं, मगर वो केवल अंदाजा लगा रही थी। अंधकार बहुत गहरा था।

"मैं..." उसने कहना शुरू किया।

"नहीं," वो सपाट लहजे में बोला। "मैं नहीं चाहता कि तुम बेजरूरत बोलो। अगर मैं चाहूंगा कि तुम कुछ कहो, तो मैं तुमसे कह दूंगा। ये कोई बातचीत नहीं होने जा रही है; मेरा इरादा महज तुम्हें एक कहानी सुनाना है। मैं बस ये कह रहा हूं कि तुम सुनो।"

"एक कहानी," उसने दोहराया ।

उसने एक सिगरेट जलाई, और पल भर के लिए धुंधली लाल रोशनी से उसका चेहरा जगमगा गया था।

"मैं तुम्हें एक कहानी सुनाने वाला हूं," उसने तीसरी बार कहा। "इसलिए नहीं कि मैं तुमसे सहमति या माफी चाहता हूं--मैं इन चीजों से परे जा चुका हूं--बल्कि केवल इसलिए कि मैं एक बार और खुद को इसकी याद दिलाना चाहता हूं, इसके खत्म होने से पहले।"

"तुम मेरे साथ क्या करने वाले हो?" उसने पूछा।

"बीच में मत टोको मुझे." उसने कहा। मेरी तुमसे गुजारिश है कि इसे बर्बाद मत करना। शायद अभी तक मैंने इरादा नहीं किया है..."

घोर खामोशी और अंधेरे को चीरती उसकी सांसों की आवाज को वो सुन सकती थी। उससे बस नौ या दस फुट दूर, इससे ज़्यादा नहीं। उसने आखें बंद कर लीं, मगर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।

अंधकार वहां मौजूद था। गंध-बासी मिट्टी, तंबाकू के ताजा धुएं की। और कातिल ।

चार
 
43

बॉजेन ने अपने ब्रीफकेस से दो बीयर निकालीं, और उन्हें खोला । "हमें दूसरों द्वारा देखे जाने को भूलना नहीं चाहिए," उसने कहा। "सात या आठ दूसरे लोग और हैं जिन्हें यकीन है कि उन्होंने विभिन्न जगहों पर उसे देखा था। उसके पास कुछ और करने का समय भी रहा होगा। जिस गवाह ने उसे यहां स्टेशन पर देखा था, उसने कहा था कि ये साढ़े छह या पौने सात के बीच की बात थी, सही है ना?"

वान वीटरेन ने जवाब नहीं दिया। उसने एक सिगरेट सुलगाई और मोहरों को ठीक किया।

"क्रोप्के अपने घर जाने तक सौ से ज़्यादा ड्रॉइंग पिन लगा चुका था," बॉजेन ने कहा। "उसकी लाल वाली तो लगभग खत्म ही हो गई थीं। वास्तव में, इससे उसे थोड़ा सिरदर्द भी होने लगा था। खैर, आप क्या सोचते हैं?"

वान वीटरेन ने कंधे उचकाए।

"मान लेते हैं कि वो वास्तव में यहां आई थीं," उसने कहा। "और कुछ नहीं तो सादगी की खातिर। ठीक है, जनाब पुलिस चीफ, शुरू करने की आपकी बारी। सिसिलियन, मेरा अंदाजा है?"

"बिल्कुल," बॉजेन ने मुस्कुराते हुए अपने ई लाइन के प्यादे को चलते हुए कहा। "ठीक है, वो यहां आई थी। लेकिन आखिर उसने किया कया था?"

"मुझे नहीं पता," वान वीटरेन ने कहा, लेकिन मैं पता लगा लूंगा।"

"वाकई?" बॉजेन ने कहा। "कैसे? उसके दफ्तर से तो सुराग के नाम पर कुछ हाथ नहीं आया।"

वान वीटरेन ने कंधे उचकाए।

"मैं आपको ये अधिकार दूँगा," उसने कहा। "आपकी चाल। अगर मैं जीता तो मैं नेतृत्व करूंगा। उम्मीद है आपको ये बात पता है।"

"बिल्कुल," बॉजेन ने कहा। "क्या आपने सिसिलियन के खिलाफ भी कोई घरेलू सुरक्षा ईजाद कर ली है? ये जानना उपयोगी हो सकता है।"

"जल्दी ही जान जाएंगे," वान वीटरेन ने कहा, और अपने चेहरे पर मुस्कुराहट जैसा कुछ आने दिया, लेकिन उसे देखकर बॉजेन सोच में पड़ गया कि कहीं उसके दांत में दर्द तो नहीं है।

आह, सही है, जिदगी वैसे भी शतरंज की बिसात नहीं है। शतरंज के खेल में बहुत, बहुत सारी संभावनाएं निहित होती हैं।

चौक में अंधेरा और वीराना पसरा हुआ था। ग्यारह बजकर कुछ मिनट हुए थे; वो साठ मिनट की बाजी खेलने के लिए तैयार हुए थे, लेकिन कुछ पता नहीं... शतरंज की घड़ी घर पर बुककेस में थी, और अगर वो किसी रोमांचक स्थिति में पहुंच गए, तो दोनों में से कोई भी समय के दबाव में आकर उसे बर्बाद करने को तैयार नहीं होगा। इसका उलट ही था। कुछ स्थितियां ऐसी होती थीं जिन्हें कभी भी आगे नहीं ले जाना चाहिए। वो पहले ही इस पर बात कर चुके थे और इस विषय में उनमें रजामंदी भी थी। पैंतीसवी या पचासवी चाल के बाद बाजी जड़ हो जाती हैं और कभी पूरी नहीं होती। (जैसे कि लिंकोव्स्की बनाम क्वैलर, पेरिस, 1907 । बयालीसवीं के बाद। या मिकोयान बनाम एंडरसन, 1980--ब्रेस्ट में, अगर उसे ठीक याद था तो? पैंतीसवीं या सैंतीसवी, जो भी हो।) ऐसे गेम जिनमें स्थिति की खूबसूरती इतनी जबरदस्त होती थी कि और कोई चाल यकीनन उसे बर्बाद कर देती ।

ये जिंदगी की तरह ही था, जब आप चाहते हों कि समय थम जाए, कम से कम कुछ देर के लिए, वो सोच रहा था। हालांकि ऐसा कोई संकेत नहीं था कि ये गेम भी उन खास गेमों जैसा साबित होगा। कोई भी नहीं।

तीन दिन? तीन दिन में वो ये दफ्तर छोड़ देगा और फिर कभी उसमें कदम नहीं रखेगा...

कम से कम भी कहा जाए तो, ये अजीब सा महसूस हुआ, और वो सोचने लगा कि ये तीन दिन कैसे जाएंगे। जब उसने अपनी डेस्क के दूसरी ओर बैठे, एक हाथ बिसात के ऊपर घुमाते वान वीटरेन को देखा तो उसके अंदर आवाजें उठीं जो उससे कह रही थीं कि ये डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर वाकई अपना वादा पूरा करेगा और शुक्रवार से पहले फरसामार को सीखचों के पीछे डाल देगा। वो इसे किस तरह लेगा, ये तय कर पाना आसान नहीं था, लेकिन उसका सहकर्मी ऐसे संकेत दर्शा रहा था जिन्हें देखने में वो नाकाम नहीं रहा थाः लगातार बढ़ती आत्मलीनता, चिड़चिड़ेपन की प्रवृति जो पहले मौजूद नहीं थी, एक खास गोपनीयता--या आप इसे जो कहना चाहें--ये सब निश्चय ही दर्शाते थे कि वो किसी निष्कर्ष पर पहुंच रहा है। इस बारे में उससे कुछ कहलवा पाना असंभव सा ही मालूम होता था; मुंस्टर भी संकेतों को समझने लगा था और उसने बताया था कि वो असामान्य नहीं थे। जाने-पहचाने संकेत, बल्कि, ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए जो पहले भी उन्हें देख चुका था--स्पष्ट सूचक कि कुछ पक रहा है और कि डीसीआई वान वीटरेन मानसिक रूप से शीर्ष स्तर पर है। कि, दूसरे शब्दों में, स्थिति ठीक वैसी ही थी जैसा कि बॉजेन को संदेह था। ऐसा बहुत मुमकिन था कि पिघलाव बस निकट ही हो, और ये गंभीर पुलिस अफसर इस जटिल जिग्सों पजल के सभी टुकड़ों को जोड़ने के बहुत करीब हो ।

आह, ठीक है, बॉजेन ने सोचा। लेकिन तीन दिन? क्या ये वाकई काफी होंगे?

जब बात कमी की आती है तो, बेशक, मामला बस इन तीन दिनों का नहीं था; वो ऐसा मोहरा था जिसे शुक्रवार तक बिसात से हटा दिया जाएगा। वैसे भी, इस पिछले हफ्ते में, उसके मन में लगातार यही विचार पुख़्ता हुआ था कि ये सारा मसला समय के खिलाफ दौड़ का था। कातिल को एक दिसंबर से पहले पकड़ा जाना है। उन्होंने यही कहा था, और पहली तारीख शुक्रवार को है।

शुक्रवार को वो रिटायर होगा। बॉजेन बाहर। एक आजाद आदमी जिसे अपने समय को ऐसी किसी भी चीज से भरने का हक होगा जो वो चाहेगा। जो इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं करना चाहेगा कि फरसामार कौन है, और वो करना चाहेगा जो वो चाहता हो।

या शायद वो उस आजादी को लेकर बहुत ज़्यादा खुश ना हो? क्या ये केस उसके मेहनत से अर्जित भविष्य पर कलंक लगा देगा? ये नामुमकिन तो नहीं था। उसने अपने मयखाने और उसके कीमती सामान के बारे में सोचा |

तीन दिन?

उसने अपनी मेज के दूसरी ओर बैठे वान वीटरेन के भारी-भरकम शरीर को देखा, और निर्णय निकाला कि उसे कुछ पता नहीं है कि अगर जरूरी होता तो वो अपना दांव कहां लगाता ।

"आपकी चाल," वान वीटरेन ने बोतल को अपने होंठों से लगाते हुए कहा।

"आपका क्या नाम है?" क्रोप्के ने टेपरिकॉर्डर चालू करते हुए कहा। सामने बैठे मजबूत कद-काठी के आदमी ने गहरी सांस ली।

"तुम बहुत अच्छी तरह जानते हो साला मेरा नाम क्या है। आखिर,स्कूल में आठ साल हम एक ही क्लास में थे।"

"ये अधिकारिक पूछताछ है." क्रोप्के ने कहा। "हम औपचारिकताओं के अनुसार चलेंगे। तो?"
 
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