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Thriller हत्यारे को अंजाम तक पहुंचाया

मैंने अपना रुमाल उसकी और बढ़ाया। उसने मेरा रुमाल लेने की बजाय अपने पर्स से अपना रुमाल निकाला और अपनी गीली आँखों को पोंछा।

"मैंने सुना है कि रिंकी भी उसे समझाती थी,रिंकी की बातों का उसपर क्या असर होता था?"

"रिंकी को मेरी बहुत फ़िक्र रहती थी,वो चाहती थी की मै उससे ब्रेकअप करके अभी अपनी स्टडी पर ध्यान दूँ, उसने कई बार जय को ड्रग्स लेने के लिए लताड़ा भी था"

"कहीं ऐसा तो नहीं की रिंकी का तुम्हारे और उसके बीच में दखलंदाजी करना उसे पसंद न आया हो और उसने रिंकी को रास्ते से हटा दिया हो?

ये सुनकर रिंकी मेरी और अवाक नजरो से देखने लगी।

"ये क्या बोल रहे है सर आप? जय ऐसा कभी नहीं कर सकता"

"बुरा मत मानना!लेकिन एक नशे का आदि इंसान गुस्से में कुछ भी कर सकता है?"

"क्या जय और रिंकी के बीच में तुम्हे लेकर कोई कहासुनी या कोई लड़ाई झगडा कभी हुआ था" मैंने डॉली से पुछा।

"नहीं मेरी जानकारी में या मेरे सामने ऐसी लड़ाई झगड़े वाली तो कोई बात कभी सामने नहीं आई,हां जब कभी रिंकी उसे समझाने की कोशिश करती थी तो वो गुस्सा जरूर हो जाता था! लेकिन वो गुस्सा वो मुझ पर उतरता था! और रिंकी से दोस्ती खत्म करने को बोलता था"

"बिलकुल सच बोल रही हो" मैंने डॉली के चेहरे को पढ़ने की कोशिश की।

"बिलकुल सच बोल रही हूँ सर! आपकी कसम" ये बोलकर डॉली शरारत से मुस्करा दी। कॉलेज से लेकर अब तक पहली बार डॉली के चेहरे पर पहली बार मुस्कान आई थी।

"ठीक है मुझे लगता है कि तुम मेरी कसम झूठी नहीं खाओगी? ये बोलकर मै भी हल्का सा मुस्कराया।

"सर लोगो को ये प्यार व्यार क्यों हो जाता है,और अगर हो भी जाता है तो ये इंसान की जिंदगी को इतना बदल क्यों देता है"अचानक से डॉली गंभीर हो गयी थी।

"प्यार से ही ये संसार चलता है डॉली, अगर प्यार न हो तो ये संसार भी नहीं रहेगा। मैंने भी दार्शनिको वाले अंदाज में डॉली को जवाब दिया।

"मुझे बताओगे की जय को सुधारने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? "

"मेरा प्रेम के विषय में अनुभव बिलकुल जीरो है! मेरे दिल की घण्टी तो हर हसीन लड़की को देखकर बज उठती है और मुझे उस पल ऐसा लगता है कि जो लड़की इस समय मेरे सामने खड़ी है मुझे उससे प्यार हो गया है और इस तरह मुझे हर रोज लगभग 20-25 लड़कियो से तो प्यार हो ही जाता है और फिर वो सारी हसीनाएं मुझे सपनो में परेशान करती है" मैं डॉली की बातों को अनसुना करके प्यार की अपनी ही फ़िलॉसफ़ी बता रहा था।

मेरी बात सुनकर डॉली खिलखिला पड़ी।

"इसे प्यार नहीं फ़्लर्ट करना बोलते है सर"

" चाहे जो भी बोलते हो मेरे लिए तो यही प्यार है,और मै इससे आगे कभी बढ़ता भी नहीं हूँ,क्योकि मेरे लिए हर हसींन लड़की एक सुंदर प्रतिमा के सामान है और सुंदरता का कोई भी पुजारी कभी अपनी प्रतिमा को खंडित नहीं करता" आज मेरे अंदर का दार्शनिक रह रह कर बाहर आ रहा था।

"सर मैंने आपसे पुछा था कि मुझे जय को सुधारने के लिए क्या करना चाहिए"

"थोड़े दिनों के लिए अपना बॉयफ्रेंड बदल लो, फिर तेल देखो और तेल की धार देखो, अगर वो तुम्हारे पास आये तो बोल देना, या तो ड्रग छोडो या फिर मुझे"

"लगता है आप मेरा भी मर्डर करवाना चाहते हो,जय तो मुझे जान से ही मार डालेगा ?

"जैसे रिंकी को मार डाला वैसे ही तुम्हे भी मार डालेगा क्या? मैंने अचानक अपनी टोन बदल कर डॉली की आँखों में झाँका।

एक पल को मेरी बात सुनकर डॉली बिलकुल सहम गयी फिर अचानक बोली।

"सर गाडी रोको, मेरा घर आ गया है"

मैंने फ़ौरन गाडी रोकी और डॉली बिना कुछ बोले गाडी का दरवाजा खोल कर बिना मेरी तरफ देखे सीधा चली गई। मैंने शायद डॉली की किसी दुखती रग को दबा दिया था? मैंने अपनी गर्दन को हल्का सा झटका दिया और अपनी गाड़ी को वापस कमला नगर थाने की और दौड़ा दिया,जहाँ मुझे इंस्पेक्टर रंगीला से मिलना था।

लगभग एक घण्टे के बाद मै कमला नगर थाने में इंस्पेक्टर शर्मा के सामने बैठा था। मैंने सबसे पहले उन्हें राजेश के बारे में बताया। राजेश की बात सुनकर इंस्पेक्टर शर्मा की आँखे चमक गयी।

" मुझे लगता है कि इस केस में राजेश सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है" इंस्पेक्टर रंगीला बोले।

" लेकिन सर ?हम एकदम से इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते है कि राजेश ही रिंकी का क़त्ल करके फरार हुआ है,क्योकि अगर वो फरार होता तो वो रिंकी के क़त्ल के बाद रूबीना का फ़ोन नहीं उठाता?"मैंने रंगीला जी के सामने अपना तर्क रखा।

"वो तो इसलिए भी उठा लिया होगा की शायद वो जानना चाहता हो की कॉलेज में इस वक़्त क्या चल रहा है?

"नहीं सर ! ये सब कुछ इतना सीधा नहीं हैं ! जितना हम सोच रहे है? सबसे पहले तो हमें राजेश को खोजना चाहिए,कही ऐसा न हो की डॉली और राजेश दोनों ही किसी साजिश का शिकार हो गए हो? क्योकि उस दिन के बाद से राजेश का फ़ोन भी बंद आ रहा है" मैंने रंगीला जी के आगे आशंका जाहिर की।

"ठीक है मै राजेश का मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस करवाता हूँ , और उसकी कॉल हिस्ट्री भी चेक करवाता हूँ!इंस्पेक्टर रंगीला शायद मामले की गम्भीरता को समझ चुके थे।

"थैंक्यू राज,आपने इस ब्लाइंड केस में एक महत्वपूर्ण लीड हमे दी है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरा आभार जताते हुए कहा।

"सर अभी तो बहुत कुछ बाकी है इस केस में शायद थोड़ा सा वक़्त लगे इस केस को सुलझाने में लेकिन सुलझा लेगें सर" मैंने विश्वास पूर्वक कहा।

"सर एक बात और कॉलेज में एक ड्रग गैंग भी काम कर रहा है,और कोई वसीम भाई करके उस कॉलेज में ये धंधा चला रहा है,एक बार उसे भी धर लो सर !शायद इस केस में कुछ मदद मिल जाए? मैंने रंगीला जी को बोला।

"ठीक है मै कल ही शादी वर्दी में एक टीम कॉलेज में तैनात कर देता हूँ,जो इस वसीम को धर लेगी,लेकिन उसका इस केस से क्या वास्ता ?रंगीला जी ने मेरी और सवालिया निगाहों से देखा।

फिर मेरी मजबूरी बन गयी रिंकी डॉली और जय की पूरी कहानी इंस्पेक्टर रंगीला को सुनाने की। पूरी कहानी सुनने के बाद इंसेक्टर रंगीला गहरी सोच में डूब गए।

"सर हमे इस केस को और इन बच्चो को बहुत सावधानी से हैंडल करना होगा! इनके साथ सख्ती से नहीं प्यार से बातो बातो में सब कुछ पता करवाना है, मै इसी कोशिश में लगा हुआ हूँ,ये भी इस क़त्ल में एक एंगल हो सकता है" मैंने एक तरीके से रंगीला जी को बच्चो के साथ पुलिसिया तरीको से परहेज रखने को बोला।

"हम्म राज! मै भी समझता हूँ! तुम फ़िक्र मत करो तुम अपने तरीको से काम करो! मै अपने तरीको से इन पर नजर रखता हूँ!किसी को भी परेशान नही करेगे" मुझे रंगीला जी ने आश्वासन दिया।

अब मैंने इंस्पेक्टर साहब से विदा ली और अब अपनी गाड़ी को शास्त्री नगर की और दौड़ा दी,जहाँ अब उमेश थपलियाल के रिश्तेदारों को टटोलना था।

मै कोई 20 मिनट के बाद शास्त्री नगर में रिंकी के घर पहुंचा। उमेश जी मुझे घर के बाहर ही मिल गए। मुझे देखकर वो मेरे पास आ गए।

"जी कुछ पता लगा" उमेश जी की बेकरारी मै समझ सकता था।

"पता तो बहुत कुछ लगा है,लेकिन अभी मै उसका खुलासा नही कर सकता आपसे" मैंने उमेश जी को बोला।

"मुझे आपके भतीजे अनुज से कुछ बात करनी है,वो कहाँ मिलेगा अभी" मैंने उमेश जी से पुछा।

"जी वो अंदर ही है! बुलाऊ क्या उसे? उमेश जी ने मुझ से पुछा।

"यहाँ नही उसे ऊपर छत पर ही भेजिए, मै अभी उससे अकेले में बात करना चाहता हूँ" मैंने उमेश जी को बोला।

"ठीक है पहले मै आपको ऊपर छोड़, आता हूँ,फिर मै अनुज को ऊपर भेज देता हूँ" उमेश जी ने मुझे बोला।

मै उमेश जी के साथ ऊपर छत की और जाने लगा,उमेश जी मुझे छत पर छोड़कर अनुज को बुलाने नीचे चले गए। थोड़ी देर में चाय की ट्रे के साथ अनुज ऊपर आया। मेरे ख्याल से चाय के बहाने से उमेश जी ने अनुज को ऊपर भेजा था।

"क्या नाम है आपका" मैंने चाय का मग हाथ में लेते हुए कहा।

"जी अनुज" अनुज ने मुझे इतना ही बोला।

"क्या करते हो" मैंने बात करने के लिए थोड़ी भूमिका बांधनी चाही।

"जी अभी तो गांव में ही खेती का काम देखता हूँ,और एक छोटी सी दुकान भी है वहां" अनुज ने मुझे बताया।

"खेती और दूकान से गुजर बसर हो जाता है" मैंने अनुज को टटोलना चाहा।

"जी बस हो ही जाता है" अनुज ने बुझे से स्वर में कहा।

" महरोली कैसी लगती है तुम्हे" मैंने अनुज से पुछा।

"कभी यहाँ बसने का ख्याल नहीं आया की जब तुम्हारा आधा परिवार यहाँ महरोली में रहता है तो तुम भी आकर यहाँ रहो" मैंने अनुज के अरमानो को जानना चाहा।

"मन तो बहुत करता है लेकिन गांव में भी तो हमारा परिवार है उनका भी तो ख्याल रखना है" सुनिल ने कहा।

"अच्छा अब रिंकी तो रही नहीं फिर अब यहाँ तुम्हारे ताऊ और ताई का ख्याल कौन रखेगा?" मै असली बात पर आते हुए बोला।

"पता नहीं अभी मुझे?जैसे घर के बड़े चाहेंगे,वैसा ही होगा" अनुज ने समझदारी भरा जवाब दिया।

"अच्छा उस दिन रिंकी के कॉलेज का वो डांस प्रोग्राम कैसा लगा? जिस दिन रिंकी के साथ ये हादसा हुआ था" मैंने अचानक से अपना ब्रह्मास्त्र सुनिल के ऊपर चलाया।

"जी अच्छा.....???? बोलकर अनुज की जुबान मुंह में ही अटक गयी।

"क्या हुआ ? बोलते बोलते रुक क्यों गए,अच्छा नही था क्या वो प्रोग्राम ? मैंने अनुज की आँखों में अपनी आँखे डालकर पुछा।

"जी वो....वो...आप क्या पूछ रहे है मै समझा नहीं" अनुज अब कुछ सम्हलते हुए बोला।

"मैंने तो हिंदी में ही पुछा है,फिर भी समझ नहीं आया तुम्हे" अब मै अनुज को अपने सवालो के जाल में उलझा लेना चाहता था।

"मै कैसे जाऊँगा रिंकी के कॉलेज में, मै तो उस दिन गांव में था" अनुज ने साफ़ साफ़ झूठ बोला।

"देखो बेटा,अगर सच सच बताओगे तो शायद मै तुम्हे बचा लू,नही तो अगर मैंने तुम्हे सच बताया तो बहुत बुरे फसोगे" मैंने चेतावनी भरे अंदाज में अनुज को कहा।

"मै सच ही बोल रहा हूँ,मै उस दिन गांव में ही था" अनुज अभी भी सच नहीं बोल रहा था।

"मतलब तुम सच अपने मुंह से नहीं बताओगे,पुलिस स्टेशन पहुंच कर थर्ड डिग्री के इस्तेमाल के बाद ही बताओगे" मैने अब अनुज को डराना चाहा।

"मै सच बोल रहा हूँ सर,मै रिंकी के कॉलेज में नहीं गया था उस दिन" अनुज अभी भी अपनी बात पर अडिग था।

"रिंकी को क्यों मारा तुमने? सच सच बोलो? नहीं तो तुम्हे पता नहीं अगले कुछ पलों में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है? मैंने अब उससे सीधा सवाल किया।

"आप क्यों मुझ पर झूठा इल्जाम लगा रहे हो? मै क्यों मारूँगा अपनी ही बहन को?वो तो मुझ से सबसे ज्यादा प्यार करती थी" अनुज ने बोला।

"मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि तुम उस दिन रिंकी के कॉलेज में थे!जबकि तुम उस दिन यहाँ रिंकी के घर पर नहीं आये थे!फिर उसके कॉलेज क्या करने गए थे? मै इतनी आसानी से अनुज का पीछा नही छोड़ सकता था।

" मै सच बोल रहा हूँ सर मै उस दिन महरोली में ही नहीं था,चाहे तो मेरे पापा से पूछ लो,फिर मै कैसे रिंकी के कॉलेज पहुंच जाऊँगा?" अनुज या तो कोई मंझा हुआ खिलाड़ी था या वो सच में सच ही बोल रहा था,मुझे तो अब डॉली के दावे पर भी संदेह होने लगा था।

"ठीक है बरखुरदार!अभी के लिए तो मै तुम्हारी बात मान लेता हूँ,लेकिन बिना पुलिस की परमिशन के महरोली छोड़कर मत जाना" मै पुलिसिया अंदाज में उसे चेतावनी देकर नीचे की और चल दिया। वो बन्दा बस अवाक भाव से खड़े खड़े मुझे जाते हुए देखता रहा।

मै अभी डॉली से एक बार और इसकी शिनाख्त करवा लेना चाहता था,क्योकि उस दिन वो भी अपनी स्टेज परफॉर्मेन्स को लेकर बिजी थी, कही उसे कोई ग़लतफहमी हो गयी हो?

मै शास्त्री नगर से सीधा अपने घर पहुंचा और खाना खाकर खुद को बिस्तर के हवाले कर दिया। लेकिन मुझे क्या खबर थी की अगली सुबह इतनी बुरी खबर लेकर आएगी?

डॉली अपने कमरे में पंखे से लटकी पाई गई थी।

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जब सुबह उठते ही मुझे डॉली के बारें में ये मनहूस खबर मिली तो मै अंदर तक हिल गया। इतनी हँसमुख और हाजिरजवाब लड़की ऐसा कदम उठा लेगी,कभी सोचा नहीं था? मै फ़ौरन डॉली के घर के लिए रवाना हो गया।

लोकल थाने से एक एस आई जिसका नाम रमन था,आया हुआ था। फोरेंसिक टीम अपने काम में लगी हुई थी। मुझे एक कोने में खड़ा हुआ कौशल नजर आया। मै कौशल के पास जाकर खड़ा हो गया।

"कैसे हुआ ये सब?" मैंने कौशल से पुछा।

"पता नहीं सर? मै तो बस अभी आया हूँ!मेरे पास तो रूबीना और मेघा का फ़ोन आया था! उन्होंने बताया था कि डॉली ने ऐसा कर लिया" ये बोलते हुए कौशल की आँखे नम हो गयी थी।

"डॉली के मम्मी पापा को पहचानते हो तुम?" मैंने कौशल से पुछा।

"हां जानता हूँ सर,आइये मै उनसे मिलवाता हूँ आपको"ये बोलकर वो घर के अंदर की तरफ जाने लगा। मै भी उसके पीछे पीछे चलने लगा।

"अंकल ये मिस्टर राज है,ये आपसे मिलना चाहते है" कौशल ने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से मेरा परिचय करवाया।

"जी कहिए! मुझ से क्यों मिलना चाहते है आप" उन अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने मुझ से पुछा।

"सर मै एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ और अभी डॉली के कॉलेज में डॉली की एक फ्रेंड का मर्डर हो गया था,मै उस केस की जांच कर रहा हूँ,उसी सिलसिले में मै डॉली से भी मिला था" मैंने डॉली के पापा को बताया।

"डॉली की मौत का उसकी फ्रेंड के मर्डर से क्या वास्ता? डॉली के पापा ने मेरी और सवालिया नजरो से देखते हुए पूछा।

"ये एक लंबी कहानी है जो मै आपको बाद में अकेले में मिल कर बताऊंगा, अभी आप फिलहाल मुझे इतना बताइये की डॉली का कोई सुसाइड नोट भी मिला है क्या? मैंने डॉली के पापा से पुछा।

"नही न ही हमे और न ही पुलिस को कोई सुसाइड नोट मिला है,यही दुःख तो हमें सता रहा है कि हमे तो ये भी नही पता की हमारी फूल सी बच्ची ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया" ये बोलकर डॉली के पापा फफक उठे।

"मै समझ सकता हूँ सर, की आप पर कितना बड़ा दुख का पहाड़ टूट पड़ा है,लेकिन उस ऊपर वाले की मर्जी के आगे इस सिर को झुकाना ही पड़ता है" मैंने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा।

इतने मे एस आई रमन डॉली के पापा के पास आता हुआ दिखाई दिया।

"देखिये अभी हम बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज रहे है,अभी तक तो ये सुसाइड केस ही नजर आ रहा है बाकी बातो के बारे में पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा" रमन ने डॉली के पापा से बोला।

डॉली के पापा बिना कुछ बोले बस हाथ जोड़े खड़े थे,जैसे शायद भगवान से कोई प्रार्थना कर रहे हो।

मै रमन की ओर मुखातिब हुआ और उन्हें अपना परिचय दिया।

"सर मै एक बार घटनास्थल को देख सकता हूँ ? मैंने रमन जी को आग्रह किया।

"जी चलिए आपको भी दिखा देते है,वैसे हमारी टीम पूरी जांच कर चुकी है,सुसाइड के अलावा कुछ और नजर नहीं आया वहां पर" रमन ने थोड़े खीज भरे स्वर में बोला।

"जी सर"ये कहकर मै उसके पीछे पीछे चल दिया,मैंने उसके लहजे पर कोई विशेष ध्यान नही देना ही उचित समझा।वैसे भी "जब अपना काम बनता तो---------"

मै डॉली के रूम में पहुंचा,डॉली की लाश को पंखे से नीचे उतारा जा चुका था। मैंने एक सरसरी निगाह से डॉली के कमरे का निरीक्षण किया,लेकिन मुझे वहां कुछ ख़ास नजर नहीं आया। मै डॉली के कमरे की खिड़की के पास पहुंचा।खिड़की पूरी तरह खुली हुई थी।

"रमन जी जब आप यहाँ आये थे ये खिड़की तब भी ऐसे ही खुली हुई थी" मैंने रमन जी से पुछा।

"जी हां! ऐसे ही खुली हुई थी" रमन जी ने मेरी बात का जवाब दिया।

"ये बात आपको अजीब नहीं लगी की सुसाइड के वक़्त डॉली के रूम की खिड़की खुली हुई थी,जबकि आम तौर पर जब कोई इंसान सुसाइड जैसा कदम उठाता है तो अपने कमरे के सब खिड़की दरवाजे बंद करके उठाता है" मैंने अपना दिमाग दौड़ाया।

"आप सही कह रहे हो राज जी! लेकिन हमें इस तरफ से किसी की एंट्री के कोई निशान नही मिले फिर भी हमने यहां की फोरेंसिक जांच करवाई है अगर कुछ हुआ तो पता चल जाएगा"

"कोई सुसाइड नोट इत्यादि मिला है क्या आपको डॉली का" मैंने फिर से पुछा।

रमन जी ने सिर्फ इंकार में गर्दन हिलाई,कुछ मुंह से नहीं बोला।इसके बाद मै डॉली की लाश पर एक सरसरी निगाह दौड़ाई,जो लड़की कल तक इतनी चहकती थी आज पता नहीं किस कारणवस बिलकुल बेजान खामोश होकर निर्जीव पड़ी थी।उसे इस हालत में देखकर आपके इस खादिम की भी आँखे गीली हो आई। मै चुपचाप डॉली के कमरे से बाहर निकल आया। तभी सामने से मुझे उदास चेहरे के साथ शाजिया और मेघा को आते हुए देखा। उन्हें देखकर मै उन्ही की तरफ चल दिया।
 
" ये क्या हो रहा है राज सर! एक के बाद एक हमारे ग्रुप के लोग ही कम होते जा रहे है!एक हफ्ते में ही रिंकी और डॉली की मौत हो चुकी है और राजेश गायब है,अब तो हमें भी डर लगने लगा है" शाजिया मुझे देखते ही रुवांसे स्वर में बोल उठी।

"हम्म यही तो मै सोच रहा हूँ की सारी आफत तुम लोगो पर ही क्यों आ रही है" मैंने शाजिया को गम्भीर होकर बोला।

"डॉली ऐसा करेगी हमने तो कभी सोचा भी नहीं था? रूबीना उदास स्वर में बोली।

"ये डॉली का बॉयफ्रेंड जय कैसा लड़का है" मैंने सभी की और देख कर पूछा।

"एक दम पागल और नशेड़ी है सर,पता नहीं डॉली क्यों उस इंसान के चक्कर में पड़ी थी! मुझे तो लगता है कि ये सुसाइड भी उसने उसी लोफर की वजह से किया होगा" हमेशा की तरह शाजिया ही सभी सवालों का जवाब दे रही थी और मेघा और कौशल हमेशा की ही तरह खामोश खड़े थे।

"कल विवेके मुझे कॉलेज में तो नजर नही आया था,कुछ पता है कि वो कॉलेज क्यों नहीं आया था"मैंने फिर से पुछा।

"नही कल तो हमारी जय के बारे में डॉली से भी कोई बात नहीं हुई" शाजिया ने बताया।

"रिंकी की हत्या,डॉली की आत्महत्या और राजेश लापता! ये सब बाते कैसे एक दूसरे से जुडी है! राजेश का फ़ोन तुमने फिर से ट्राई किया था क्या? मैंने शाजिया से पुछा।

"मै तो बहुत बार ट्राई कर चुकी राज सर,लेकिन हर बार नॉट रिचेबल बताता है"

"कभी फ़ोन को स्विच ऑफ बताता है"

"नही हमेशा नॉट रिचेबल ही बताता है"

"इसका मतलब या तो उसके मोबाइल से ये सिम निकाल कर रखी हुई है, या फिर उसके मोबाइल में दो सिम है और एक सिम बंद कर रखी है और एक सिम चालू है" मैंने रूबीना को बोला।

"लेकिन हमारे पास तो सिर्फ एक ही नंबर है राजेश का" शाजिया ने बताया।

"ठीक है मै अभी कमला नगर थाने जा रहा हूँ,यहाँ तो अभी डॉली की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा है,बॉडी मिलते मिलते शाम हो जायेगी,तुम लोग जाओ अंदर उसके मम्मी पापा के पास बैठो,मुझे बहुत जरुरी काम है थाने में" ये बोलकर मै उन लोगो के पास अपनी गाड़ी की और चल पड़ा। मुझे इंस्पेक्टर रंगीला से मिलना था। मुझे रंगीला जी से राजेश की मोबाइल लोकेशन और हिस्ट्री का पता लगाना था और कल रात को डॉली ने सुसाइड करने से पहले किस किस से बात की थी ये हिस्ट्री भी अब निकलवानी थी। अनुज को सिर्फ डॉली ने कॉलेज में देखा था,और मै उसका आमना सामना डॉली से करवाता उससे पहले ही डॉली ने सुसाइड कर लिया। हालात तो बता रहे थे की ये सुसाइड ही है , लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि इसमें कुछ दाल में काला है,खैर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भीं कुछ न कुछ खुलासा हो जाना था। लेकिन इस केस को अब एक ही इंसान के हाथों से डील करने की जरूरत थी। रिंकी की हत्या का मामला कमला नगर थाने में था। राजेश की लापता की रिपोर्ट आदर्श नगर थाने में दर्ज थी,और अब रिंकी का केस भी एक अलग थाने में दर्ज हुआ था। इस सभी के बारे में मुझे इंसेक्टर रंगीला से बात करने की जरूरत थी।

मै यही सब सोचते सोचते कब कमला नगर पहुंच गया पता ही नही चला।कमला नगर थाने के सामने आते ही मेरी छठी इंद्री ने मुझे सचेत किया और मैंने तत्काल थाने के सामने ही अपनी गाड़ी के ब्रेक लगाए।

मै इंस्पेक्टर रंगीला के सामने गम्भीर मुद्रा में बैठा था।

"डॉली की सुसाइड के पीछे क्या कारण हो सकता है? रंगीला जी ने मुझ से पुछा।

"उसका बोयफ़्रेंड नशेड़ी है,मैंने इस बारे में कल डॉली से बात की थी! उसके बाद हो सकता है डॉली ने उससे बात की होगी!हो सकता है उन दोनों में कोई बात हुई हो और डॉली ने ऐसा जघन्य कदम उठा लिया हो? मैंने आशंका जाहिर की।

"हो सकता है? इंस्पेक्टर रंगीला ने सहमति जताई।

"इस ग्रुप में ही कोई बहुत भारी गड़बड़ नज"ठीक है! कल सुबह डॉली की कॉल डिटेल मिल जायेगी तुम्हे" रंगीला जी ने मुझे बोला।

"सर राजेश की कॉल डिटेल और उसकी मोबाइल की लोकेशन का पता चला" मैंने राजेश के बारे में पूछा।

"हां राजेश की डिटेल आ गई है"रंगीला जी ने एक लिफाफे से कुछ कागज निकाल कर मुझे देते हुए कहा।

मैंने उन कागजो को ध्यान से देखा,मैंने उन पेपर की अपने मोबाइल से फोटो खिंची और रागिनी के व्हाट्सअप पर भेज दी। मेरी समझदार रिसेप्शनिस्ट को मालूम था कि उसे क्या करना है।

"उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन धौला कुआँ की आ रही है,जो की शाजिया से बात करते वक़्त थी,उसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया है" रंगीला जी ने मुझे बताया।

"अगर इस हत्या के पीछे राजेश है तो धौला कुआँ तक पहुचने के लिए उसके पास पर्याप्त टाइम था,क्योकि क़त्ल की टाइमिंग से कोई पैंतालिस मिनट के बाद राजेश की शाजिया से बात हुई थी" मैंने एक अलग एंगल रंगीला जी के सामने रखा, हालांकि मै खुद भी नही मान रहा था कि राजेश इन सबके पीछे हो सकता है।

"धौला कुआँ से आगे जाने के उसके पास बहुत रास्ते है,वहां के सीसीटीवी कैमरो को खंगालना पड़ेगा" रंगीला जी ने बोला।

"कॉलेज में कोई ड्रग सप्लायर पकड़ में आया"मैंने रंगीला जी से पुछा।मुझे डॉली की भी काल डिटेल चाहिए सर!उसने सुसाइड करने से पहले किस किस से बात की वो जानना जरूरी है"

"ठीक है! कल सुबह डॉली की कॉल डिटेल मिल जायेगी तुम्हे" रंगीला जी ने मुझे बोला।

"सर राजेश की कॉल डिटेल और उसकी मोबाइल की लोकेशन का पता चला" मैंने राजेश के बारे में पूछा।

"हां राजेश की डिटेल आ गई है"रंगीला जी ने एक लिफाफे से कुछ कागज निकाल कर मुझे देते हुए कहा।

मैंने उन कागजो को ध्यान से देखा,मैंने उन पेपर की अपने मोबाइल से फोटो खिंची और रागिनी के व्हाट्सअप पर भेज दी। मेरी समझदार रिसेप्शनिस्ट को मालूम था कि उसे क्या करना है।

"उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन धौला कुआँ की आ रही है,जो की शाजिया से बात करते वक़्त थी,उसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया है" रंगीला जी ने मुझे बताया।

"अगर इस हत्या के पीछे राजेश है तो धौला कुआँ तक पहुचने के लिए उसके पास पर्याप्त टाइम था,क्योकि क़त्ल की टाइमिंग से कोई पैंतालिस मिनट के बाद राजेश की शाजिया से बात हुई थी" मैंने एक अलग एंगल रंगीला जी के सामने रखा, हालांकि मै खुद भी नही मान रहा था कि राजेश इन सबके पीछे हो सकता है।

"धौला कुआँ से आगे जाने के उसके पास बहुत रास्ते है,वहां के सीसीटीवी कैमरो को खंगालना पड़ेगा" रंगीला जी ने बोला।

"कॉलेज में कोई ड्रग सप्लायर पकड़ में आया"मैंने रंगीला जी से पुछा।

"नहीं अभी तो कोई हाथ नहीं लगा! लेकिन हमारी पुलिस टीम सादी वर्दी में वहां इस काम में लगी हुई है"

"ठीक है मुझे अभी वापस डॉली के घर जाना है,वहां जाकर उसके बोयफ़्रेंड की भी कुछ खोज खबर लेता हूँ"ये बोलकर मैंने इंस्पेक्टर रंगीला से विदा ली।

मै वहाँ से पहले अपने ऑफिस के लिए रवाना हुआ। मै आधा घण्टे में अपने ऑफिस में था।
 
रागिनी उस टाइम उसी काम में लगी हुई थी जो मैंने उसे व्हाट्सअप किया था। मै अपने केबिन में जाकर बैठ गया। रमेश तत्काल एक गिलास पानी मेरी टेबल पर रख गया। थोड़ी देर में रागिनी भी केबिन में आ गई।

"सर ये एक नंबर है जिस पर राजेश की लगभग रोजाना बात हो रही थी,और जिस दिन राजेश लापता हुआ उस दिन तो इस नंबर पर कोई बारह बार बात हुई है"

"इस नंबर को ट्राई किया कौन है ये?" मैंने रागिनी से पुछा।

"ये नंबर भी बंद आ रहा है सर" रागिनी ने असहाय स्वर में कहा।

"नंबर लिख कर दो मुझे ,मै पता लगाता हूँ ये नंबर किसका है।

पायल ने मुझे एक कागज पर नंबर लिख कर दिया। मैंने तत्काल उस नंबर को इंस्पेक्टर रंगीला को भेज दिया! साथ में उस नंबर के मालिक का भी पता लगाने के लिए सन्देश भेज दिया।तभी रमेश मेरे लिए चाय बना कर ले आया। मैंने चाय के कप में झांककर देखा तो उसमें दूध डला हुआ था। मेरे इस तरह से चाय के कप को देखने से रागिनी के चेहरे पर एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गयी और केबिन से बाहर जाकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गयी। मैंने चाय खत्म की और ऑफिस से बाहर आ गया। अब मेरी मंजिल डॉली का घर थी।

मै अभी डॉली के घर के रास्ते पर ही था कि इंस्पेक्टर रंगीला का फ़ोन मेरे फ़ोन पर आया।

"राज वो नंबर जय के नाम पर है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मुझे बताया।

जय का नाम सुनकर मेरा दिमाग भन्ना गया। राजेश के साथ जय,ये कहानी कुछ समझ नहीं आई।मै अभी सोच में ही डूबा हुआ था कि मुझे फ़ोन पर रंगीला जी की हेल्लो हेल्लो की आवाज सुनाई दी।मैंने हड़बड़ा कर रंगीला जी को जवाब दिया।

"सॉरी सर !वो जय का नाम सुनकर दिमांग सुन्न हो गया था" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को बोला।

"मै समझ सकता हूँ राज!मेरे भी अभी तो कुछ समझ नही आ रहा है कि अगला कदम क्या उठाऊ,मुझे तो लगता है सबसे पहले हमें अब जय को ही उठाना चाहिए" इंस्पेक्टर रंगीला ने बोला।

"बिलकुल सही कह रहे हो सर! जय को उठा लो! हम शायद इस केस को हल करने के बहुत करीब है सर" मैंने रंगीला जी के समक्ष आशा जताई।

"ठीक है राज!मै अभी एक टीम कॉलेज में और एक टीम उसके घर भेजता हूँ,अगर तुम्हे वो डॉली के घर पर या कही आसपास नजर आये तो मुझे खबर करना।

"ठीक है सर! मै बस डॉली के घर पहुंचने वाला हूँ" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को बोला।

"ठीक है राज तुम अपने काम पर ध्यान दो मै यहाँ पर देखता हूँ"रंगीला जी ने उत्साहित स्वर में कहा।

"ठीक है सर"ये बोलकर मैंने फोन काट दिया। मै डॉली के घर पहुंच चुका था। अभी पोस्टमार्टम के बाद बॉडी मिली नहीं थी। मेरी नजरे शाजिया मेघा और कौशल को ढूंढ रही थी।

घर के बाहर शोकाकुल लोग बैठे हुए थे,जो की डॉली की बॉडी आने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मुझे जय कही नजर नहीं रहा था। तभी मेरी नजर कौशल पर पड़ी और शायद कौशल ने भी मुझे देख लिया था। मैंने देखा की कौशल मेरी और ही आ रहा था।

"शाजिया और मेघा कहा है"मैंने कौशल से पुछा।

" वो दोनों अंदर डॉली की मम्मी के साथ बैठी है" कौशल ने बताया।

"जय आया था क्या यहाँ" मैंने कौशल से पुछा।

"नहीं जय तो दो तीन दिन से नजर नहीं आ रहा है" कौशल ने बोला।

"ये जय और राजेश के आपस में कैसे रिलेशन थे" मैंने कौशल से ही इन दोनों के बारे में कुछ जानकारी जुटानी चाही।

"जय और राजेश दोनों कज़न है" कौशल ने चौकाने वाली जानकारी दी।

"ओह्ह पहले बताया नही किसी ने" मैंने कौशल की और देखते हुए कहा।

"शायद कभी किसी ने पुछा ही नही था" कौशल ने भी एकदम से सही बात बोली थी।

तभी एक कोलाहाल सुनाई दिया। डॉली की डेडबॉडी को लेकर उसके पापा और उनके रिश्तेदार आ गए थे। मेरे कदम भी डॉली के शव वाहन की और बढ़ गए।

डेडबॉडी के साथ एस आई रमन भी था। मुझे देखकर रमन जी मेरे पास आये। उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी।

"आपके लिए इंस्पेक्टर रंगीला का फोन, आया था,उन्होंने इस केस में आपकी मदद करने को बोला है" रमन ने नरमी भरे स्वर में कहा।

" हां मै अभी मिलकर आ रहा हूँ इंस्पेक्टर रंगीला जी से,मैंने बताया था उन्हें की इस केस को आप हैंडल कर रहे हो,दरअसल उनके इलाके में एक मर्डर हुआ है जो इस केस से कही न कही जुड़ता है"

"वैसे अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तो आयी नही है लेकिन एक बात पता चली है कि ये लड़की प्रेग्नेंट थी,ये डॉक्टर ने बताया है।

मै अवाक सा एस आई रमन को देखता रह गया। पता नहीं अभी इस केस में और क्या क्या मोड़ आने बाकी थे।

*****************
 
डॉली का अंतिम संस्कार उसी दिन शाम को पीतमपुरा गांव स्तिथ श्मशान घाट में किया गया। अंतिम संस्कार के दरम्यान भी मुझे जय कही भी नजर नहीं आया। इंस्पेक्टर रंगीला से बात होने पर पता चला की पुलिस की टीमें उसके हर संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है,लेकिन अभी उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिली है। जय और राजेश दोनों चचेरे भाई और दोनों ही गायब थे? एक की प्रेयसी ने सुसाइड कर लिया था और दूसरे के क्रश की हत्या हो गयी थी। डॉली की प्रेग्नेंसी ने इस केस को लगभग शीशे की तरह साफ़ कर दिया था,लेकिन रिंकी की हत्या अभी भी एक अभुझ पहेली थी। जय और डॉली के चक्कर में रिंकी क्यों मारी गयी। अब तो पक्का जय और राजेश की मिलीभगत नजर आ रही थी इन सब कांडों में?

लेकिन एक सवाल और सुरसा के सिर की तरह मुंह बाये खड़ा था। अनुज उस दिन अपने गाँव से इतनी दूर कॉलेज में क्या करने आया था। हालाँकि अनुज इस बात से साफ़ मुकर रहा था कि वो उस दिन कॉलेज में मौजूद था? लेकिन डॉली ने उसको पहचाना था।दिमाग घूम गया था इन सभी बातों को याद कर कर के। अब सारा दारोमदार जय या राजेश के पकड़े जाने पर था।

पुलिस के हाथ भी बिलकुल खाली थे।जब चारो तरफ बिलकुल अँधेरा था तब ऐसे में मेरे खबरी की एक सुचना ने अँधेरे में एक किरण का काम किया।

मै इस वक़्त अपने खबरी की सूचना के आधार पर अभी नरेला जा रहा था। नरेला के राधा स्वामी सत्संग रोड पर आगे जाकर एक फार्म हाउस को मुझे ढूढ़ना था।नरेला पहुंचने में मुझे लगभग डेढ़ घण्टे का समय लग गया था। शाम के धुंधलके को रात के अंधियारे ने अपने आगोश में ले लिया था। जो फार्म हाउस मुझे बताया गया था,मेरे मोबाइल की लोकेशन के हिसाब से यही कही आसपास होनी चाहिए थी? तभी मेरी अँधेरे में एक फार्म हाउस के बोर्ड पर नजर पड़ी,उस बोर्ड को देखकर मैंने राहत की सांस ली। जिस फार्म हाउस को मै ढूंढ रहा था वो मेरे सामने था। मैंने अपनी गाड़ी को वहां से वापस मोड़ा और फार्म हाउस से कुछ दूर ले जाकर गाड़ी को पार्क किया। मै गाड़ी से उतरकर दोबारा से फार्म हाउस की और बढ़ा। मुझे नहीं पता था अंदर कितने लोग हो सकते थे।लेकिन जय और राजेश की मौजूदगी यहाँ हो सकती थी। जैसा की मेरे खबरी ने मुझे बताया था कि कल रात को उसके किसी आदमी को एक पब से इस प्रकार की सूचना मिली थी। वो पब एक हुक्का बार की शक्ल में बदल दिया गया था और हुक्का बार की आड़ मे अब वहां ड्रग का धंधा फल फुल रहा था।मेरे खबरी ने बताया था कि जय वहां का रेगुलर कस्टमर था।बस वही से जय के बारे में यहाँ के बारे में सूचना मिली थी। जिसकीं वजह से आपका खादिम इस वक़्त यहाँ मौजूद था।

मुझे पता नहीं था कि मै अकेले फार्म हाउस मे जाकर सही कर रहा था ? या गलत कर रहा था? मैंने अपनी पैंट में अपनी पिस्टल का जायजा लिया वो अपनी जगह सही सलामत थी। एक मन तो कर रहा था कि इंस्पेक्टर रंगीला को सारी वस्तुस्थिति से अवगत करा दूँ और यहां के लोकल थाने की पुलिस की मदद से फार्म हाउस में छापेमारी की जाए। लेकिन मेरी जानकारी के हिसाब से ये फार्म हाउस महरोली के एक बड़े राजनीतिज्ञ का था तो इतनी जल्दी मुझे पुलिस से छापेमारी की उम्मीद नही थी? इसलिए आपके खाकसार ने आज खुद ही ओखली में सर देने का फैसला कर लिया था।

फार्म हाउस के मेन गेट पर दो सेक्युरिटी गार्ड मौजूद थे और अंदर से कुत्तों के भोंकने की आवाज भी रह रह कर आ रही थी। मैंने फार्म हाउस की दीवारो को देखा लगभग 6 फुट की चारदीवारी के बाद उसपर 4 फुट के लगभग लोहे के कटीले तारो की फेसिंग भी की गई थी। मैंने निराश भाव से एक बार फिर से फार्म हाउस की दीवारों को देखा और वहां से आगे की और बढ़ गया। फार्म हाउस की अंदर की रौशनी के कारण बाहर भी हल्की हल्की रौशनी के कारण आँखों को देखने में कुछ कुछ राहत थी। मैंने एक चक्कर पूरे फार्म हाउस का लगाने की सोची। मै अंदर जाने का कोई जुगाड़ लगाने के चक्कर में फार्म हाउस की चारदीवारी को ध्यान से देखते हुए आगे बढ़ने लगा लेकिन जिसने भी उस फार्म हाउस की चारदीवारी का काम किया था उसने कही भी कोई कमी नहीं की हुई थी। लेकिन कहते है कि जहा चाह होती है वहां राह भी होती है? मुझे अचानक पीछे की दीवार के ऊपर की लोहे की फेसिंग में एक झोल, नजर आया, उसे देखकर मेरी उम्मीदों को नए पंख लग गए। इसके अलावा मुझे कोई और रास्ता फार्म हाउस में घुसने का नजर नहीं आ रहा था। लेकिन उस 6 फिट की दीवार पर चढ़ना भी आपके खादिम के लिए एक समस्या थी। मुझे अब अपनी कार की याद आई।मैंने देखा की पीछे से एक सड़क जो शायद सर्विस लेन के तौर पर काम में ली जाती होगी वो बाहर राधा स्वामी सत्संग वाले रोड तक जा रही रही थी। मै वापस उस जगह की और चलने लगा जहाँ आपके इस खाकसार ने अपनी गाड़ी को पार्क किया था। मैंने अपनी गाड़ी ली और उसे राधा स्वामी वाली सड़क की और दौड़ा दिया। मैंने गाडी को अब मेन सड़क से उस सर्विस लेन पर डाल दिया। गाडी आराम से उस लेन में चली गई। मैंने गाडी को फार्महाउस की उस दीवार के साथ लाकर सटा दिया। मै अभी गाडी से बाहर निकलने का उपक्रम कर ही रहा था कि मुझे फार्म हाउस के अंदर लगातर दो फायर चलने की आवाज सुनाई दी। मैंने फायर की आवाज सुनते ही गाडी से बाहर निकलने का इरादा छोड़कर फुर्ती से अपनी गाड़ी को फार्म हाउस के मेन गेट की और भगाया लेकिन मुझ से पहले ही एक गाड़ी पूरी रफ्तार से फार्म हाउस से बाहर निकली,अब आपके खादिम का पहला कर्तव्य था कि मै उस गाडी का पीछा करता। इसलिए मैंने भी अपनी गाड़ी को उसकी गाड़ी के पीछे लगा दिया। मैंने पीछा करते करते ही इंस्पेक्टर रंगीला को सारी बातों से अवगत करवाया और उनसे लोकल थाने से कॉर्डिनेट करने की रिक्वेस्ट की। इंस्पेक्टर रंगीला शायद कोई और मौका होता तो मेरी जमकर क्लास लगाते लेकिन चूंकि मै इस वक़्त उस गाडी का पीछा कर रहा था। इसलिए उन्होंने मौके की नजाकत को समझा और फ़ोन काट दिया। शायद वो अपनी कारवाई में मशगूल हो गए होंगे।
 
तभी मैंने देखा की आगे वाली गाडी नरेला से अलीपुर की तरफ मुड़ गयी,मैंने भी गाडी को उसकी गाड़ी के पीछे लगा दिया। जिस तरीके से आगे वाला ड्राइवर गाडी को चला रहा था, शायद उसे एहसास हो गया था कि मै उसका पीछा कर रहा हूँ। उसने अपने से आगे जाती हुई गाडी को बहुत बुरी तरह से ओवरटेक किया तभी उसकी गाड़ी हवा में लहराई और गाडी डिवाइडर से टकरा कर बिलकुल फ़िल्मी स्टाइल में ऊपर उछली और सड़क से दूसरी और से आते हुए एक ट्रक से टकरा कर सड़क के साथ घसीटते हुए चली गयी। मैंने अपनी गाड़ी को साइड में लगा कर रोका, और गाडी से तेजी से उतर कर उस गाडी की और दौड़ा तब तक इतना भयानक मंजर देख कर आती जाती गाडियो का रुकना शुरू हो गया था। थोड़ी ही देर में वहां जाम लगना तय था। मै भाग कर उस गाडी के पास पहुंचा। गाडी में दो लोग थे और शायद दोनों ही लोग दूसरी दुनिया के सफर पर निकल चुके थे।

मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को फ़ोन लगाया और उन्हें सारी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने भी मुझे एक चौकाने वाली बात बताई की फार्म हाउस में हुई गोलीबारी में जय मारा गया है जबकि राजेश का वहां कोई नामोनिशान नही मिला।जबकि मुझे पूरी उम्मीद थी की राजेश भी वहां मिलेगा। खैर तब तक उस दुर्घटना स्थल पर पुलिस की १००नंबर की गाड़ी पहुंच चुकी थी। मै उस गाडी में दुर्घटना का शिकार हुए किसी भी आदमी को नहीं पहचानता था। मै वहां लोकल पुलिस के आने का इंतज़ार करने लगा ताकि इन लोगो की नरेला के फार्म हाउस में हुई गोलीबारी और हत्या में इनकी संलिप्ता बता सकूँ। थोड़ी देर बाद लोकल पुलिस टीम पहुंच गयी थी जिसका नेतृत्व एसआई बलबीर सिंह कर रहे थे। ट्रैफिक पुलिस भी पहुंच चुकी थी जो ट्रैफिक को सामान्य बंनाने की दिशा में काम कर रही थी। मै एस आई बलबीर सिंह से मिला और अपना परिचय दिया और कार में सवार उन दोनों मृत लोगो के बारे में विस्तार से बताया। बलबीर सिंह जी को पूरी बात बता कर में नरेला फार्म हाउस के लिए रवाना हो गया। क्योकि वहां के हालातों का जायजा लेना ज्यादा जरुरी था। राजेश का अभी भी लापता होना अभी तक एक रहस्य बना हुआ था।

मै फार्म हाउस पहुंचा। वहां मेरी मुलाकात इंस्पेक्टर जसपाल भाटी से हुई। उनकी कड़क आवाज पूरे फार्म हाउस में गूँज रही थी। मैंने भाटी जी के पास जाकर अपना परिचय दिया उन्होंने गर्मजोशी से मुझ से हाथ मिलाया, शायद इंसपेक्टर रंगीला ने मेरे बारे में उन्हें बता दिया था। इस केस में मेरी खुशकिस्मती थी की इंस्पेक्टर रंगीला का मुझे हर जगह सहयोग मिल रहा था।

मैंने भाटी जी के साथ जाकर जहां जय की लाश पड़ी हुई थी उस जगह का मुआयना किया। घटनास्थल पर कुछ बियर की बोतल और स्नैक्स पड़ा हुआ था और 4 गिलास भी पड़े हुए थे। दो लोग एक्सीडेंट में मर चुके थे और तीसरा जय यहाँ मर चुका था। लेकिन 4 गिलास की मौजूदगी बता रही थी की वहां एक बंदा और भी था।

"सर अच्छे से पूरे फार्म हाउस की चेकिंग करवाओ,यहाँ कम।से कम 4 लोग थे और अभी 3 लोगो के बारे में ही पता चला है" मैंने भाटी जी को बोला।

3 लोग कौन मिले है? भाटी जी को अभी पूरे केस के बारे में नही पता था।

मैंने फिर यहाँ से गोलीबारी की घटना से लेकर उन दो बदमाशों का पीछा करना और उनका अलीपुर के पास हाईवे पर एक्सीडेंट में उन दोनों बदमाशो के मारे जाने की पूरी घटना बताई। भाटी जी पूरी बात सुनने के बाद मंत्रमुग्ध से मुझे देखते रहे।

"आप तो कानून की बहुत बड़ी मदद करते हो राज साहब, आप तो इस केस से बहुत गहराई से जुड़े हुए है,लेकिन आपको एक सलाह देता हूँ,की जिस भी थाने की परिधि में आप कोई इस तरह की परिस्थितयो में काम करते हो तो वहां के लोकल थाने को भी कॉन्फिडेंस में ले लिया करो,आपके लिए अच्छा रहेगा" भाटी जी ने मुझे बिलकुल उचित बात समझाई थी।

"जी सर !आप बिलकुल सही बोल रहे है लेकिन हालात ऐसे बन गए थे की मै इन्फॉर्म नही कर पाया, न आपको न रंगीला जी को"मैंने खेद प्रकट करते हुए कहा।

"ठीक है राज जी, मै पहले पूरे फार्म हाउस को सर्च करवाता हूँ,और उस चौथे आदमी को भीं ढूढ़ने का प्रयास करता हूँ? ये बोलकर इंस्पेक्टर भाटी ने अपने आदमियो को पूरे फार्म हाउस में दौड़ा दिया।

मै गेट पर तैनात दोनों गार्ड की और बढ़ गया जो की इस वक़्त अपनी ड्यूटी की बजाय अंदर क्या हो रहा है उसको दिलचस्पी से देख रहे थे।

"कब से ड्यूटी कर रहे हो यहां पर?" मैंने उन गार्डों से पुछा।

"जी 6 महीने के करीब हो गये साहब"

"इस फार्म हाउस में जो जो होता है वो सच सच बताओ" मैंने गार्ड से पुलिसिया लहजे में बोला।

"साहब अभी हम सब कुछ बड़े साहब को बताये है,हम तो यहाँ गेट पर रहते है साहब, अंदर क्या होता है ? उसके बारे में हमें ज्यादा कुछ नहीं पता होता है?" वो गार्ड घबराए स्वर में बोल रहा था।

"यहाँ कौन कौन आता जाता था ?" मैंने गार्ड से फिर से पुछा।

" साहब यहाँ पर जो बाबूजी अंदर मरे पड़े है पिछले 3-4 दिन से यही रह रहे थे,और जो लोग इन्हें मार के भागे है वो आज ही आये थे साहब" गार्ड ने बताया।

"यहाँ पर कम से कम 4 आदमी थे वो चौथा आदमी कहा है? मुझे राजेश की ज्यादा चिंता हो रही थी ।

"साहब जो चौथा आदमी था वो गोली चलने से कोई आधा घण्टा पहले ही यहाँ से चले गए थे उसके बाद यहाँ तीन ही आदमी रह गए थे" गार्ड ने बताया।

मैंने मोबाइल मै राजेश की फोटो उस गार्ड को दिखाई।

"क्या चौथा आदमी यही था?" मैंने गार्ड से पुछा।

गार्ड ने थोड़ी देर गौर से उस फोटो को देखा।

"नहीं साहब ये नहीं थे?"गार्ड ने मेरी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कहा।

"फिर चौथा आदमी कौन था? तुम जानते हो उसे? मैंने गार्ड से फिर पूछा।

"साहब वो तो हम नहीं जानते? कि वो कौन था?लेकिन ये नहीं थे" गार्ड ने बोला।

जो उम्मीद की किरण आज शाम को दिखाई दी थी की ये केस शायद आज सुलझ जाएगा वो रात होते होते अमावस की काली रात की भांति मुरझा गई थी।अब मै फिर से उस अंधी गली में खड़ा था,जहाँ से चला था। राजेश अब इस केस के सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका था। डॉली की मौत की वजह तो शायद हम समझ सकते थे। लेकिन रिंकी की हत्या अब भी एक पहेली बना हुआ था। राजेश की मौत ने एक बार फिर इस केस के रास्तो को अवरुद्ध कर दिया था। मै फिर से फार्म हाउस के अंदर की और गया।मैंने देखा वो दोनों कुत्ते जंजीरों से बंधे हुए अभी भी गुर्रा रहे थे।

इंस्पेक्टर भाटी ने बताया कि अंदर तलाशी के दौरान उन्हें कोई भी और शख्स नहीं मिला। जो की मेरे लिए निराशाजनक खबर थी।

रिंकी के क़त्ल के बाद राजेश की मोबाइल की आखिरी लोकेशन धौला कुआँ की दिखा रहा था। क्या राजेश सच में यहाँ नहीं था । क्या जांच को भटकाने के लिए ये सब किया गया।मेरे पास सिर्फ सवाल थे लेकिन जवाब अभी भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ था।

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मै इस बार खुद ही उस फार्म हाउस का चक्कर लगा रहा था। मुझे रह रह कर यही ख्याल आ रहा था,की हो न हो राजेश को भी यही कही होना चाहिए था? राजेश जय डॉली और रिंकी ये चारों किसी न किसी रूप में आपस में जुड़े हुए थे। राजेश और रिंकी हो सकता है जय के माध्यम से इस नशे के सौदागरों के बारे में कुछ ज्यादा ही जान गए हो ? और उनको इन ड्रग्स डीलरो ने अपना शिकार बना लिया हो? जय को भी इस सबकी कीमत चुकानी पड़ी हो? मै यही सब सोचते सोचते फार्म हाउस के अंदर बने उस कोठीनुमा मकान के पिछवाड़े में पहुंच चुका था।पीछे रौशनी का धुंधला सा साया था बस। उस हलके से अँधेरे में मै सावधानी से अपने कदम बड़ा रहा था। पुलिस बल की इतनी मौजूदगी के बावजूद मै इतनी सावधानी क्यू बरत रहा था?उस समय तो ये मुझे भी समझ नही आ रहा था? उस मकान में पीछे से भी अंदर जाने का एक रास्ता बना हुआ था।जिसमे लोहे का एक गेट बना हुआ था।

मैंने हल्का सा उस गेट पर जोर लगाया लेकिन मेरी उम्मीद के विपरीत वो गेट खुलता चला गया।मै दबे पाँव अंदर घुसा। हालांकि समझदारी ये कहती थी की मै इस समय इंस्पेक्टर भाटी को यहाँ के बारे में बताऊ और पुलिस की सहायता से आगे के कार्यक्रम को अंजाम दू।लेकिन आपको एक बात आज सच सच बताता हूँ की ऐसे मुश्किल भरे काम को अंजाम देते वक़्त दुनिया के हर जासूस के दिमाग में कही न कही शरलॉक होम्स की या जेम्स बांड की आत्मा घुस जाती है,और वो अकेले ही हर मुश्किल काम को अंजाम देने के जुगत में जुट जाता है, और यही गलती आपके इस खादिम से भी हो गयी और जिसका खामियाजा आपके इस खाकसार को उसी क्षण भुगतना भी पड़ गया। जैसे ही मै दरवाजा खोल कर अंदर घुसा उसी पल मेरे सर पर किसी ने किसी चीज़ से एक वार किया और आपका ये खिदमतगार उसी पल किसी कटे हुए वृक्ष की तरह फर्श पर धराशाई हो गया।

होश में आने के बाद मैंने अपने आपको एक हाल में बंधा हुआ पाया। पट्ठो ने मेरे हाथ पैरों की मुश्के अच्छी तरह से कसी हुई थी। मुझ से कुछ ही दूरी पर एक और शख्स बिल्कुल मेरी तरह ही पड़ा हुआ था। बस हमारे मुंह पर किसी जोर जुल्म की आजमाइश नही की गयी थी हमारे मुंह की स्वन्त्रता भारत की स्वन्त्रता की मानिंद आज़ाद थी। मैंने उस शख्स को धीरे से पुकारा। उस शख्स ने मेरी और जब अपनी गर्दन घुमाई तो मैंने उन हालात में भी राहत की सांस ली।क्योंकि गर्दन घुमाने वाला शख्स राजेश था।

"आप कौन हो ?आपको यहाँ क्यों लाया गया है?" राजेश ने मुझ से धीमी आवाज में पूछा।

मैंने राजेश को अपने बारे में बताया और ये भी बताया कि उसके पापा ने मुझे उसको ढूढ़ने के काम पर लगाया हुआ है,और उसे ढूढ़ंते हुए ही मै यहाँ तक पहुंचा हूँ।

"ये लोग बहुत खतरनाक है सर,बात बात मर्डर कर देते है"

"इन्हें तो मै देख लूंगा लेकिन ये बताओ की तुम लोग इन लोगो के चुंगल में कैसे फँस गए?"मैंने राजेश से पुछा।

"सर बहुत लंबी कहानी है और इसकी जड़ मे सिर्फ जय है"

"ह्म्म्म कोई नहीं अभी जब तक ये लोग आकर हमे नही मारते तब तक बहुत टाइम है हमारे पास! तुम आराम से सुनाओ"उन मुश्किल हालातों में भी मैंने उसे मुस्करा कर कहा।

अभी मैंने अपनी बात पूरी ही की थी की मुझे किसी के पदचाप की आवाज सुनाई दी। मैंने राजेश को चुप रहने का इशारा किया और फिर से बेहोशी का नाटक कर के लेट गया। वो दो लोग थे जो सीढियो से उतर कर आये थे। इसका मतलब हम फार्म हाउस में ही किसी तहखाने में थे।

"लो साला एक और चला आया मरने के लिए यहां" ये बोलकर वो आदमी हँस पड़ा।

"अभी दो-तीन दिन तक तो यहाँ पुलिस की दबिश रहेगी तो अभी तो कुछ भी करने से बॉस ने मना किया है,नहीं तो इस नए रंगरूट को तो आज ही रात को टपका डालते" दूसरा आदमी की आवाज सुनकर मुझे ऐसा लगा जैसे कोई लड़की बोल रही हो। मैंने हल्की सी अपनी आंखो को जुम्बिश दी तो मेरी ग़लतफहमी दूर हो गयी क्यों वो दूसरा भी आदमी ही था भले ही उसकी आवाज लड़कियों जैसी थी।

"चल यार इस कमरे को बाहर से ताला लगाओ और चल कर सोते है" जिसकीं आवाज मर्दानी थी उसने बोला।

"हां यार नींद तो मुझे भी आ रही है, उस जनानी आवाज वाले ने अलसाये स्वर में बोला।

"और राजेश बाबू !तुम्हारे होश ठिकाने आये है या नहीं अभी तक या तुम भी अपनी माशूका और भाई के पास जाना चाहते हो! बता दो माल कहां छुपा रखा है वरना बॉस 10 करोड़ के माल के लिए तुम्हारे पूरे खानदान को भी मार डालेगा" वो मर्दानी आवाज वाला बोला।

उसकी आवाज सुनकर भी राजेश के मुंह से कोई बोल नही फूटा। मेरी समझ में कुछ कुछ माजरा समझ में आ चुका था।लेकिन राजेश और रिंकी का ड्रग के माल से क्या वास्ता? जय तो इन सबमे शामिल हो सकता था लेकिन रिंकी और राजेश की कहानी मेरी समझ से अभी भी बाहर थी?

तभी मैंने उन दोनों जनाना मर्दाना आदमियो की कदमो की आवाज सुनी,जैसे वो वापस सीढ़िया चढ़ रहे हो?अब मैंने अपनी आँखे खोली। मैंने राजेश की और देखा,राजेश भी मेरी और ही देख रहा था।

"ये माल का क्या माजरा है?मैंने राजेश से पुछा।

"इस माल की वजह से ही तो सारा कोहराम मचा हुआ है सर" राजेश ने धीमी आवाज में कहा।

तुम्हारा इस माल से क्या वास्ता? क्या तुम भी ड्रग के धंधे में हो ? मैंने राजेश को शक्की निगाहों से देखते हुए कहा।

"नहीं सर क्या बात करते हो आप? मै तो बस जय की वजह से इस चक्कर में फंस गया हूँ, और मेरी वजह से रिंकी भी इस लफड़े में फंस गयी और बेचारी को बिना वजह अपनी जान गवानी पड़ी" राजेश की आँखों में शायद रिंकी की याद आने की वजह से आंसू आ गए थे।

"पूरा माजरा बताओ,बाकी किसी बात की चिंता मत करो हम सुबह से पहले! यहाँ से आज़ाद हो जॉएगे" मैंने राजेश को सांत्वना देते हुए कहा

"सर जय पहले ड्रग एडिक्ट बना! फिर जब अपनी ड्रग की जरूरतों को पूरा कर पाना उसके लिए सम्भव नही रहा तो वो भी इन सबके साथ मिलकर इस धंधे में उतर गया,मैंने उसे बहुत समझाया कि इस दुनिया से बाहर निकल नही तो उसका जीना मुश्किल हो जायेगा किसी दिन,लेकिन हर बार वो यही बोलता था कि बस एक बार एक लंबा हाथ मार लू उसके बाद ये देश ही छोड़कर किसी बाहर की कंट्री में सेटल हो जायेगा" ये बोलकर राजेश थोड़ी देर रुका।

"हम्म्म्म" मैंने ऐसे हुंकारा भरा जैसे हम बचपन में दादी माँ से कहानी सुनते हुए भरते थे। राजेश फिर से बोलना शुरू हुआ।

"एक दिन उसने मुझे एक पैकेट दिया और एक दो दिन सम्हाल कर रखने को बोला,मैंने भाई समझ कर उससे कोई ज्यादा पूछताछ नही की उस दिन मै और रिंकी एक साथ ही कैंटीन में अपने ग्रुप के दूसरे लोगो के साथ थे,वो एक छोटा सा पैकेट था वो मैंने रिंकी को रखने के लिए दे दिया क्योकि मै कॉलेज में बैग कम ही लेकर जाता हूँ,रिंकी ने वो पैकेट अपनी बैग में रख लिया,मुझे क्या पता था कि मै रिंकी की मौत उसके बैग में रखवा रहा हूँ" ये बोलकर राजेश फफक कर रो उठा।

"चुप हो जाओ! फिर क्या हुआ? ये बताओ!ये वक़्त अभी भावनाओ में बहने का नहीं है" मैंने राजेश को बोला।

"रिंकी को पता नहीं कैसे पता चल गया कि उसमे ड्रग है उसने बचपने में और गुस्से में उस सारी ड्रग को नाली में डाल दिया! बस उस दिन से हमारी उलटी गिनती शुरू हो गयी सर, हमें रोज रोज डराया जाता था,लेकिन रिंकी डरती नही थी उल्टा उन लोगो से भिड़ जाती थी, उस दिन फंक्शन से एक दिन पहले रिंकी का वसीम भाई से बहुत जबर्दस्त झगड़ा हुआ था,कॉलेज के पीछे वाले ग्राउंड में!वसीम भाई ने रिंकी को जान से मारने की धमकी भी दी थी उस दिन, मै और जय भी उस समय साथ में ही थे,लेकिन रिंकी ने उसे पुलिस में पकड़वाने की धमकी देकर और आग में घी डाल दिया" राजेश ये बोलकर खामोश हो गया।

"वसीम को रिंकी के बारे में तुमने बताया था? मैंने राजेश से पुछा।

"नही मै तो रिंकी के बारे में उन लोगो को कभी नहीं बताता,लेकिन डॉली ने ये बात जय को बता दी की रिंकी ने उसके सामने ड्रग का एक पैकेट खोल कर नाली में बहा दिया और आगे भी वो भी ऐसा ही करेगी अगर उसको जय के पास ड्रग मिली तो? जय ने ये सारी कहानी अपनी जान बचाने के लिए वसीम को बता दी" राजेश ने पूरा माजरा बता दिया था क्या क्या हुआ?

"जब वसीम ने रिंकी को मार ही दिया था तो फिर जय को क्यों मारा और अभी तक तुम्हारे पीछे क्यों पड़ा है?"

"क्योकि वसीम को यकीन ही नहीं हो रहा है कि कोई दस करोड़ का माल ऐसे नाली में बहा देगा? वो तो हम सब पर शक कर रहा है कि हमने दस करोड़ का माल हड़पने के लिए ये नाली में माल बहाने की झूठी कहानी रचाई है? लेकिन उसे क्या मालूम की एक 19 साल की नई नई कॉलेज में आई लड़की को क्या मालूम की ड्रग क्या होती है उसकी वैल्यू क्या होती है,उसने तो उसी तरह से लिया जैसे घरवाली अपने दारूबाज पति की दारु की बोतल नाली में बहा देती है" राजेश ने बिलकुल सही बात बोली थी।

"अब ये तुमसे क्या चाहते है?

"माल या दस करोड़? अगर यहाँ से नही निकल पाया तो शायद अगले दो तीन दिन में मेरा भी काम तमाम कर देंगे ये जय और रिंकी की तरह? राजेश के स्वर में अब मौत का ख़ौफ़ भी बोल रहा था।

"अच्छा मेरी एक बात समझ नहीं आई की उस दिन रिंकी का कज़न अनुज कॉलेज में क्या कर रहा था" मेरे मन में अभी तक अनुज वाली गुत्थी भी घूम रही थी"

"रिंकी और अनुज में बहुत लगाव है क्योंकि रिंकी का कोई सगा भाई नही है, इसलिए वो महीने दो महीने में घर पर बिना बताये रिंकी से कॉलेज में मिलने आ जाता था,उसे कॉलेज में घूमना बहुत पसंद था,शायद उसकी कोई अधूरी इच्छा हो जो वो इस तरह से पूरी करता हो, उस दिन भी रिंकी ने ही उसे कॉलेज का फंक्शन देखने के लिए बुलाया था क्योकि उसने कई बार रिंकी से उस फंक्शन को देखने की रिक्वेस्ट की थी" राजेश ने जो बताया उससे सुनिल पर से मेरे शक के बादल हटते हुए नजर आये।

पूरी कहानी में सभी इनोसेंट दिख रहे थे जो एक नासमझी में इतने बड़े खतरे में फंस गए थे जिसमें तीन लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी। लेकिन डॉली ने सुसाइड क्यू किया ये एक अबूझ पहेली थी मेरे लिए?

"अच्छा डॉली ने सुसाइड क्यू किया?

"डॉली को ये मालूम पड़ गया था कि जय अब ड्रग एडिक्ट ही नहीं ड्रग डीलर बन चुका है और ऊपर से उसे जय ने प्रेग्नेंट कर दिया था! ऊपर से ये भी पता चल गया था कि रिंकी की जान भी जय की वजह से ही गयी है! इसलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया!नहीं तो वो लड़की कभी ऐसा कदम नही उठाती वो बहुत जिंदादिल लड़की थी"राजेश की आँखों से एक बार फिर आंसू बरस पड़े।

"ठीक है ! ये बताओ तुम तो काफी दिन से यहाँ हो फिर तुम्हारा मोबाइल धौला कुआँ कैसे पहुंच गया? मैंने राजेश से फिर पूछा।

"मेरा मोबाइल तो उन्होंने उसी दिन अपने कब्जे में ले लिया था,फिर वो धौला कुआँ कैसे पहुंच गया? इसके बारे में मुझे नहीं पता?" राजेश ने बोला।

"वसीम भाई ने दस करोड़ की ड्रग्स जय को देदी!इतना भरोसा एक नशेड़ी पर वसीम जैसे खेले खिलाए आदमी ने कैसे कर लिया"ये एक स्वभावविक प्रश्न था जो काफी देर से मेरे जेहन में घूम रहा था।

"वो पैकेट वसीम भाई ने उसे नही दिया था बल्कि उसके एक गुर्गे से जय ने उड़ाया था और इसी वजह, से उसने वो पैकेट मुझे दिया था रखने को!क्योकि मेरे पास उस पैकेट के होने की तो कोई कल्पना भी नहीं करता? राजेश हर सवाल का जवाब सिलेसिलवार तरीके से दिया जा रहा था।मानो कोई स्टोरी की स्क्रिप्ट रटी हुई हो। मेरे होठो पर बरबस ही एक मुस्कान थिरक उठी।

"ठीक है बरखुरदार अब एक्शन के लिए तैयार हो जाओ, ये बताओ सुबह ये दरवाजा किस समय खुलता है?मैंने राजेश से पूछा।

"सुबह 7 बजे के करीब ये लोग आते है जब मुझे सुबह हेड ऑफिस जाना होता है,उसी समय ये मेरे हाथ पैर खोलते है एक बन्दा मेरी तरफ पिस्टल ताने रखता है,उसके बाद ये नास्ता देते है,फिर दोबारा से बाँध कर दाल देते है" राजेश ने सुबह की डिटेल बताई। मैंने उसकी बात सुनकर सुबह उनके चुंगल से कैसे छूटा जाए उसकी प्लानिंग अपने दिमाग में बनाने लगा।
 
अब मुझे अपने जासूसी दिमाग का इस्तेमाल करना था और साथ में सुबह होने का भी इंतज़ार करना था। लेकिन जैसा की सभी को पता है कि हर रात की सुबह होती है ऐसे ही उस काली रात की भी सुबह हो ही गयी और मुझे दरवाजे के खुलने की आवाज आई और दो जोड़ी कदमो की आवाज सीढियो से आती हुई सुनाई दी। मै अब अपनी आँखे खोल चुका था।

"चलो बे कौन जायेगा पहले? उस जनानी आवाज वाले ने बोला।

"मेरे पेट में ज्यादा गुड़गुड़ हो रही है मुझे ले चलो यार"मैंने कुछ सोचकर बोला।

"चल भाई तू चल ले!हमे तो आगे पीछे दोनों को ही ले जाना है" इस बार वो मर्दना स्वर वाला बोला।फिर मेरे हाथ पैर खोले जाने लगे,मैंने कोई हरकत नहीं की मैंने चुपचाप हाथ पैर खुलवाये और इज्जत के साथ मै उन लोगो के साथ सीढ़िया चढ़ कर ऊपर की और जाने लगा। एक बंदे ने आपके खादिम के हाथ बिलकुल पुलिसिया स्टाइल में पकड़े हुए थे और दूसरे ने अपनी पिस्टल मेरी और तान रखी थी। अंतिम सीढ़ी पर चढ़ते ही मैंने फुर्ती से घूम कर एक लात उस पिस्टल वाले पर मारी वो लात लगते ही बैलेंस नही संभाल पाया और सीढियो पर से लुढ़कता हुआ नीचे की और जाने लगा। दूसरे बंदे ने जिसकीं आवाज जनाना थी वो मेरे ऊपर झपटा लेकिन तब तक आपका ये खादिम बिलकुल दरवाजे के साथ चिपक चुका था,जिस कारण वो एक झोंके के समान सीढियो में समता चला गया। मैंने बाहर से दरवाजे की कुण्डी लगाई और फुर्ती से बाहर की और भागा अभी राजेश को छुटाने का समय नहीं था क्योकि वो दो लोग थे औरमै एक! दोनों साथ मिलकर मेरे ऊपर भारी पड़ सकते थे?अब मैं कोई फ़िल्मी हीरो तो था नहीं जो एक साथ बीस लोगो से निबट लेता। आपका खादिम तो एक साधारण जासूस था जो शौकिया इस धंधे में आ गया था। मैंने कुण्डी लगाकर अपने चारों तरफ नजर दौड़ाई।मुझे वहां पर कोई भी बाहर जाने का रास्ता नजर नही आया,लेकिन साथ में मुझे एक कमरा नजर आया। तब तक वो दोनों जनाना मर्दाना ऊपर सीढियो में आ चुके थे और दरवाजे को जोर जोर से पीट रहे थे।

मैंने उन दोनों को अनदेखा किया और साथ वाले कमरे में घुस गया। कमरा रात को उनकी अय्याशी की कहानी बयां कर रहा था चारो तरफ बियर और दारू की बोतलें बिखरी पड़ी थी। मुझे वहां एक अलमारी भी नजर आई। आपके खाकसार ने अपने पुराने आजमाएं हुए नुस्खों से उस अलमारी को खोला। सामने ही आपके खादिम की पिस्टल रखी हुई नजर आई और उस अलमारी में कुछ पैकेट भी रखे हुए थे। मैंने अंदाजा लगाया कि ये शायद ड्रग के पैकेट है। मैंने उन्हे सूंघ कर देखा तो मेरा अंदाजा सौ फीसदी सच निकला। मैंने अपनी पिस्टल को अपनी जेब के हवाले किया। तभी मैंने देखा की मेरा मोबाइल और उन दोनों बदमाशो के मोबाइल भी उनके बिस्तर के पास पड़े हुए थे। ये साले दोनों जो कोई भी थे कम से कम बदमाश बनने के लायक तो बिलकुल भी नहीं थे। इन्हें कोई छोटा मोटा जेबकतरा होना चाहिए था।मुझे ऐसा लग रहा था कि अब इन बदमाशो को भी मेरी कंसल्टेंसी की जरूरत पड़ने वाली थी। ताकि मै हर बदमाश को गाइड कर सकूँ की उसे बदमाशी के किस प्रोफेशन में जाना चाहिए। आपका ये खिदमतगार अपनी इस वाहियात सोच पर मन ही मन मुस्काया और वहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूढ़ने

लगा।
 
वो दोनों जनाना मर्दाना अब दरवाजा पिट पिट कर थक कर वही बैठ गए थे शायद। मुझे उस कमरे में भी कोई बाहर जाने का रास्ता नजर नही आया। मैंने अपना और उन दोनों का मोबाइल अपनी जेब के हवाले किया। मैंने एक बार उस कमरे की अच्छी तरह से तलाशी लेने की सोची लेकिन अब जबकि मेरा मोबाइल मुझे मिल चुका था तो मैंने सबसे पहले इंस्पेक्टर रंगीला को कॉल लगाया और उन्हें सारी सिचुएशन बताई उन्होंने वहां पर इंस्पेक्टर भाटी से बात कर फ़ौरन पुलिस भेजने की बात की और खुद भी वहां आने को बोला। अब काफी हद तक सिचुएशन मेरे कंट्रोल में थी। तभी उस कमरे में बिछे बिस्तर के नीचे मुझे कुछ हलचल सुनाई दी। मै दौड़ कर अलमारी के पीछे छुप गया। तभी बिस्तर हटा और वहां से दो आदमी अवतरित हुए। मै आँखे फाड़े उन लोगो को देख रहा था। एक कोई नेता टाइप आदमी था और एक अपनी दाड़ी के स्टाइल से लग रहा था कि वो कोई मुस्लिम है।

"तुमने कैसे निक्कमे लोगो की फौज पाल रखी है वसीम? वो आदमी कुछ गुस्से में लग रहा था।

"अरे नेताजी इस धंधे में सब शराबी कबाबी ही मिलते है, साले पड़े होंगे पीकर कही ?चलो नीचे चलते है उन लोगो को देखते है" वसीम ने उस नेता टाइप आदमी को बोला।

तभी उस नेता जी के मोबाइल की घण्टी बज उठी।उस नंबर को देखकर नेताजी ने तत्काल फ़ोन उठाया। दूसरी और से जो भी बताया गया उसे सुनकर नेताजी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। उन्होंने तत्काल फ़ोन रखा और घबराये हुए स्वर में वसीम से बोला।

"वसीम जल्दी निकलो यहाँ से यहाँ पुलिस की रेड पड़ने वाली है"

"क्या ?तुम्हे किसने बताया? वसीम भी अब घबरा उठा था।

" तुम अलमारी से माल निकालो और यहाँ से जल्दी निकलो पुलिस किसी भी टाइम यहाँ पहुचने वाली होगी" नेताजी ने वसीम को ऑर्डर दिया।

"जी निकालता हूँ माल,लेकिन अपने वो दोनों आदमी और वो जो दो लोग नीचे बंधे पड़े है उनका क्या करे? वसीम ने बोला।

"अरे मरने दो सालों को अगर में यहाँ पकड़ा गया तो फिर कुछ नही कर पाऊंगा,लेकिन बाहर रहकर पूरी सरकार को हिला सकता हूँ" वो नेताजी बोले।

वसीम उसकी बात सुनकर अलमारी की तरफ लपका, लेकिन जैसे ही उसने अलमारी खोलने की कोशिश करी तभी वो भलभला कर जमीन पर गिर पड़ा क्योकिं अब आपका खादिम अपने एक्शन में आ चुका था। मैंने अपनी पिस्टल की मुठ वसीम की कनपटी के पास ऐसी जगह मारी की उसका बेहोश होने लाजिमी था। वसीम के नीचे गिरते ही उन नेताजी ने फटी हुई आँखों से वसीम को देखा और फिर उसकी नजर मेरे ऊपर पड़ी।

"कौन हो तुम" वो नेताजी अब मुझ से मुखातिब हो चुके थे।

"हरामजादे जिस देश का खाता है उसी देश की नौजवान पीढ़ी को नशे के जाल में फंसा कर बर्बाद कर रहा है! आज तेरा खेल खत्म ,तेरी सारी राजनीती खत्म! चल जब तक पुलिस नही आती दीवार की तरफ मुंह कर और हाथ उठाकर खड़ा हो जा"मैंने उसकी तरफ पिस्टल तानते हुए कहा। उस नेता के पिछवाड़े से अब पसीना टपकने लगा था। मेरी एक नजर अभी भी जमीन पर पड़े हुए वसीम पर थी की कही ये होश में आकर मुझ पर हमला न कर दे।आपके खाकसार को आज अपनी दिलेरी पर खुद ही नाज हो रहा था। तभी मुझे पुलिस के सायरन की आवाज फार्म हाउस के नजदीक आते हुए सुनाई दी।

"सुनो मुझे जाने दो यहाँ से तुम जितने पैसे बोलोगे मै तुम्हे दे दूँगा,मेरी सारी उम्र की मेहनत आज मिटटी में मिल जायेगी तुम्हारी वजह से"

"साले कुत्ते मेरी वजह से नहीं तेरे अपने कर्मो की वजह से और उन लोगो की वजह से जिनके घर तेरी वजह से बर्बाद हो गए!उन लोगो की बद्दुआ की वजह से आज तू बर्बाद होगा" मैंने उसको जलील करने की सोच ली थी।

"चल अब नीचे उतर और रास्ता दिखा ताकि पुलिस टीम ऊपर आ सके" लेकिन अभी मै अपनी बात को पूरी ही कर पाया था कि उस नेता ने मेरे ऊपर छलांग लगा दी मै फुर्ती से एक तरफ हुआ और वो नेताजी अपनी ही झोंक में सीधा वसीम के ऊपर जाकर गिरे। मै फ़ौरन उसके सिर पर सवार हुआ और इस बार मेरी पिस्टल का वार नेताजी की कनपटी पर हुआ, और वो भी वसीम वाले अंजाम को भुगतने के बाद बेहोशी के आलम में खोता चला गया।उन दोनों को बेहोश देखकर मै फुर्ती से उस बिस्तर के नीचे वाली जगह की और लपका। मैंने देखा वहां से सीढ़िया नीचे की और जा रही थी। मै फ़ौरन उन सीढियो पर उतरता चला गया। सीढिया उतरने के बाद एक अंडर ग्राउंड गैलरी नजर आई मै उस गैलरी में बढ़ता चला गया। जब वो लगभग 200 गज लंबी गैलरी खत्म हुई तो वो एक कमरे में जाकर खत्म हुईं वहां से भी ऊपर जाने के लिए सीढियो का निर्माण किया गया था। मै फुर्ती से उन सीढियो को चढ़ता चला गया जब मै ऊपर पहुंचा तो ये सीढ़िया फार्म हाउस के बिलकुल कोने में जाकर खत्म हुई जहा फार्म हाउस का वेस्टेज डाला जाता था। तभी मेरे मोबाइल की घण्टी बजी। मैंने देखा की किसी अनजान नंबर से काल था। मैंने फ़ोन उठाया तो उधर से इंस्पेक्टर भाटी बोल रहे थे। वो मुझे ही ढूंढ रहे थे। मैंने अपनी फार्म हाउस के पीछे की अपनी लोकेशन उन्हें बताई और अपनी टीम के साथ वही आने को बोला।

भाटी साहब तुरन्त मेरे पास पहुंचे।

"आप ठीक तो है न"भाटी साहब ने मुझे देखते ही पुछा।

"मै तो ठीक हूँ सर आप जल्दी ऊपर चलिए वहां कुछ लोगो की हालत खराब है" मैंने मुश्कराते हुए कहा।

"चलो किधर से चलना है" भाटी जी ने पुछा।

मै मुड़कर, फिर सीढ़िया उतरने लगा पूरी पुलिस टीम मेरे पीछे थी। मै गैलरी से होता हुआ उन्हें तहखाने के उस ऊपर वाले कमरे में ले गया जहाँ वसीम भाई और वो नेताजी बेहोश पड़े हुए थे। नेताजी के ऊपर नजर पड़ते ही भाटी जी चौंक कर पड़े।

"राज जानते हो ये कौन साहब है" भाटी साहब ने नेताजी की और इशारा करके पुछा।

"नही सर, मै नही जानता" मैंने अनभिज्ञता जताई।

"ये एक मंत्री जी के समधी है और खुद भी इस इलाके के।काफी बड़े नेता है, इनके लिये बहुत प्रेशर आएगा मेरे ऊपर" भाटी साहब ने आशंका जताई।

"सर इनके खिलाफ इतना पुख्ता केस बनाना की ये बच ही ना पाए"

"वो तो मै करूँगा ही" भाटी जी ने बोला।

उसके बाद नीचे के हाल में जाकर राजेश को भी आज़ाद करवाया गया और उन दोनों जनाना मर्दाना आवाज वाले बदमाशो को भी अरेस्ट किया गया। उसके बाद वहां फार्म हाउस को सील करने के बाद हम सभी लोग थाने में वापस आ चुके थे। इंस्पेक्टर रंगीला भी नरेला थाने में पहुंच चुके थे ।

आखिरकर रिंकी का हत्यारा पकड़ा ही गया,लेकिन इस केस को हल करने का सेहरा सिर्फ तुम्हारे सिर पर है राज" रंगीला जी ने मेरी और प्रशंसा भरी नजरों से देखते हुए बोला।

"सर आपने भी मेरी हर कदम पर सहायता की है नहीं तो मै अकेला कुछ भी नही कर सकता था" मैंने भी रंगीला जी के प्रति आभार प्रकट किया ।

"अब पूरी स्टोरी बताओ इस केस की, काफी इंट्रेस्टिंग केस लग रहा है ये" भाटी जी ने केस में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा।
 
"अब पूरी स्टोरी बताओ इस केस की, काफी इंट्रेस्टिंग केस लग रहा है ये" भाटी जी ने केस में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा।

मैंने तकरीबन वही कहानी सुनाई जो राजेश ने मुझे बताई थी। सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुन रहे थे लेकिन सबसे आखिर मे मैने अपनी ही सुनाई कहानी पर सवाल उठाते हुए बोला !

"सर जो इंसान अपने दस करोड़ का माल वसूलने के लिए भरे कॉलेज में दिनदहाड़े एक लड़की का क़त्ल कर सकता है और जो अपने ही साथी की हत्या कर सकता है?उसकी कैद में राजेश 7 दिन तक रहा लेकिन राजेश को एक खरोंच तक नहीं आई,बस एक यही बात मेरे गले से नही उतर रही है?

इंस्पेक्टर रंगीला और इंस्पेक्टर भाटी मेरी और प्रश्न वाचक नजरो से देखने लगे।

"क्यों ?" ये बोलकर भाटी जी मेरी और देखने लगे।

"क्योकि इस सारी कहानी का सूत्रधार राजेश ही था" मैंने सभी की और देखकर मुस्कराते हुए कहा।

अब सभी की आँखे मेरी और उठ चुकी थी लेकिन अब उनमे हैरानी और जिज्ञासा का मिलाजुला भाव था।

"दरअसल कॉलेज में ड्रग्स का सारा कारोबार राजेश हैंडल करता था,और अपने भाई जय को नशे की लत भी उसी ने लगाईं थी!ये शख्स अपनी इस छोटी सी उम्र में बहुत बड़े बड़े कामो को अंजाम दे चुका है!जिस हुक्का बार का जय रेगुलर कस्टमर था उसी हुक्का बार के बेसमेंट में एक गैरकांनूनी कैसिनो भी चलता है,जहाँ का रेगुलर कस्टमर था राजेश! राजेश पर जुए में हारने पर 20 लाख का कर्ज हो गया था! हालाँकि उसके पापा की हैसियत इतनी हैं की वो इसका 20 लाख का कर्जा उतार सकते थे लेकिन वो अपने पिता से किस मुंह से पैसे मांगता? ये कोई किसी इज्जतदार बिज़नेस में हुआ नुक्सान तो था नहीं जो इसके पापा इसे मांगते ही इतनी बड़ी रकम दे देते" मैंने अपनी बातों का प्रभाव देखने के लिए कुछ देर के लिए अपनी वाणी को विराम दिया।

मेरे सभी श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर मुझे सुन रहा था। मैंने जल्दी से इस आशंका से फिर से बोलने लगा की कही कोई ये न कह दे।

जमाना बड़ी गौर से सुन रहा था अहले जुस्तजू।

तुम्ही सो गए दास्तान कहते कहते ।।

मै अपनी सोच पर मन ही मन मुस्कराया और फिर से बोलना शुरू किया।

"राजेश ने कोकीन का एक पैकेट जिसकीं मार्किट में कीमत कोई दस करोड़ के आसपास होगी वो गायब कर दिया और उसे मार्किट में बड़े सस्ते दामो पर बेच कर अपने कर्जे से मुक्ति पा ली! लेकिन अभी वसीम भाई का भूत भी तो उसके सर पर सवार था,वसीम भाई का दस करोड़ का तकाजा शुरू हो गया, अब इसने जय को अपना मोहरा बनाया और वसीम को बोला की जय ने वो पैकेट हुक्का बार से उड़ा दिया है! अब सभी को पता है कि नशेड़ी लोग अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकते है,चोरी चकारी के साथ साथ अपने रिश्तों का भी खून कर देते है" मैंने इस बार राजेश की और देखा लेकिन वो मुझ से अपनी नजरे नही मिला पा रहा था।

"लेकिन तुम्हे इसके जुए के कर्जे के बारे में और उस पैकेट को चोरी करने के बारे में किसने बताया"पहली बार रंगीला जी ने सवाल उठाया।

"सर जैसे पुलिस तंत्र में मुखबिरों का बहुत बड़ा रोल होता है ठीक उसी प्रकार हमारे धंधे में भी कुछ मुखबिर हमारे लिए भी काम करते है"मैंने मुस्करा कर रंगीला जी को जवाब दिया।

"मेरे पास कल रात को ये पक्की सुचना थी की राजेश वहां फार्म हाउस में है! इसलिए जय की लाश को ले जाने के बाद और पुलिस टीम के चले जाने के बाद भी मै वही फार्म हाउस में राजेश को ढूंढता रहा,आख़िरकार ये मुझे मिला उस फार्म हाउस के तहखाने में,जहाँ में बेहोश होने के बाद पहुंचा था!राजेश को भी वहाँ रस्सियों से बाँध कर डाल रखा था लेकिन ये सब पुलिस से इसकी बचने की चाल थी क्योकि अगर जय के मर्डर के चक्कर में पुलिस तहखाने तक पहुंच भी जाती तो ये खुद को इनोसेंट बताता और पुलिस को इसकी बात पर भरोसा भी हो जाता!लेकिन ये इसकी बदकिस्मती थी की वहां पर आपका ये खादिम पहुंच, गया।

"रिंकी को किसने मारा" रंगीला जी ने फिर से सवाल किया।

"रिंकी को भी इसने ही मारा! क्योकि वो लड़की अपने माँ बाप के सपनों को पूरा करने के लिए कॉलेज में आई थी लेकिन हर जगह कोई न कोई राजेश उनके सपनो की उड़ान को रोकने के लिए खड़ा हो जाता है फिर कोई न कोई रिंकी,प्रियदर्शिनी मुटू की भांति ऐसे लोगो का शिकार हो ही जाती है" मैंने घृणित नजरो से राजेश की और देखते हुए बोला।

"इसने 2 बजे के करीब देखा की रिंकी पीछे की तरफ जा रही है! जिस ऑडिटोरियम में फंक्शन चल रहा था उसके पीछें की तरफ टॉयलेट ब्लॉक बना हुआ है!ये भी उसके पीछे पीछे उस टॉयलेट में घुस गया और रिंकी से जबर्दस्ती अपनी बात मनवाने की कोशिश की,काफी देर की मशक्कत के बाद भी जब ये अपने इरादों में कामयाब न हो सका तो इसने एक धारधार चाक़ू से रिंकी के गले पर चाकू चलाया और वहां से फरार हो गया,ये पहले महरोली से बाहर भागने की फिराक में था लेकिन धौलाकुआं पहुचते पहुचते इसे नरेला का ये फार्म हाउस ही इसे ज्यादा मुफीद लगा क्योकि अगर ये महरोली से बाहर भागता तो ये वसीम भाई की नजरों में भी चोर साबित हो जाता,जिसका इल्जाम इसने जय के ऊपर डाला हुआ था।

"चल बेटा अब बाकी की उम्र तिहाड़ जेल में या रोहिणी की जेल में बिताना वैसे मेरी तो कोशिश रहेगी की तुझे फ़ासी से कम सजा न मिले" रंगीला जी ने राजेश को नफरत भरी नजर से देखते हुए बोला।

"रंगीला जी अपने अपने मुजरिमो का बंटवारा कैसे करे? क़त्ल आपके एरिया में हुआ और नशे का अड्डा हमारे इलाके में मिला? ये सुनकर सभी ने जोर का ठहाका लगाया।

एक बार फिर आपके खादिम से एक गलती हो गयी थी की अपने क्लाइंट की औलाद को ही फ़ासी के फंदे तक पहुंचा दिया था। लेकिन इस बार कोई सौम्या नही थी जो मेरी बची हुई फीस अदा कर देती। लेकिन इस केस में एक संतुष्टि थी की मैंने रिंकी के हत्यारे को उसके अंजाम तक पहुंचा ही दिया था जो कुछ हद तक डॉली की मौत का भी जिम्मेदार, था।

समाप्त।
 

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