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Thriller RISKI LOVE

रिस्की लव - 41

अलीशिया गुस्से में भरी बैठी थी। वह मीरा को किसी भी तरह अपने रास्ते से हटाने के बारे में सोच रही थी। वह मीरा से मिलकर उसे ‌धमकाना चाहती थी। वह अपने कमरे से बाहर निकली। सागर खत्री के बारे में पता किया। वह कहीं गया हुआ था। वह सीधा सिक्योरिटी रूम में गई। उसने सिक्योरिटी रूम में तैनात इंचार्ज से कहा कि उसे सागर खत्री का एक बहुत ज़रूरी मैसेज लेकर मीरा के पास जाना है। सिक्योरिटी इंचार्ज को पहले उस पर यकीन नहीं हुआ। अलीशिया ने गुस्सा ‌दिखाते हुए कहा कि वह सागर खत्री के आने पर उसे बता देगी कि उसे ‌मीरा के पास नहीं जाने दिया गया। कुछ सोचने के बाद ‌सिक्योरिटी इंचार्ज ने उसे जाने की इजाज़त दे दी।‌

मीरा बहुत परेशान थी। सागर खत्री उसे अपनी रखैल बनाना चाहता था। वह सोच रही थी कि ‌अगर उसने गलती ना की होती तो अंजन उसे अपनी पत्नी बनाता। पर अब तो वह खुद इतना मजबूर है। उसके लिए कुछ भी नहीं कर पाएगा। उसे घुट घुट कर सागर खत्री की कैद में रहना पड़ेगा।
डोरबेल बजी तो मीरा यह सोचकर सिहर गई कि सागर खत्री होगा। उसने डरते हुए दरवाज़ा खोला। सामने एक अंजान औरत खड़ी थी। अलीशिया उसे ढकेल कर अंदर चली गई। दरवाज़ा बंद कर दिया। बिना कुछ बोले मीरा को एक ज़ोरदार थप्पड़ लगा दिया। मीरा उसके इस व्यवहार से चकित थी। वह गुस्से में बोली,
"क्या बदतमीजी है ? कौन हो तुम ?"
अलीशिया ने उसके बाल पकड़कर कहा,
"मेरे सागर पर डोरे डाल रही हो। मुझे ‌बदतमीज़ कहती हो। तुमने अगर उसका पीछा नहीं छोड़ा तो तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूँगी।"
मीरा ने अपने आप को छुड़ाया। फिर गुस्से में बोली,
"कौन हो तुम ? यह क्या बकवास कर रही हो ?"
अलीशिया ने कहा,
"मेरा नाम अलीशिया है। सागर मेरा है। अभी तक वह मुझसे बहुत प्यार करता था। पर जबसे तुम आई हो उसने मेरी तरफ ध्यान देना ही छोड़ दिया। तुमने ‌उसे अपने जाल में फंसाकर मुझसे दूर कर दिया ‌है।"
मीरा समझ गई कि यह सागर खत्री की प्रेमिका होगी। सागर खत्री के उसकी तरफ आकर्षित होने के कारण अपने अाप को असुरक्षित महसूस कर रही है। उसने सोचा कि शायद वह उसके काम आ सके। उसने बड़ी शांति के साथ कहा,
"तुमको गलतफहमी हो रही है। मुझे सागर से कोई लेना देना नहीं है। मैं तो उसकी कैद में हूँ। मजबूर हूँ। वह मुझे अपनी रखैल बनाना चाहता है। मैं तो यहाँ से भाग जाना चाहती हूँ।"
अलीशिया ने गुस्से में कहा,
"झूठ बोल रही हो तुम। सागर मुझे बहुत चाहता है। तुम उसे अपनी ओर खींचना चाहती हो।"
मीरा ने बिना उत्तेजित हुए उसी तरह शांति से कहा,
"ज़रा सोचो.... मैं तो यहाँ से निकल नहीं पाती हूँ। फिर उसे अपने जाल में कैसे फंसाऊँगी। वही है जो मेरे पास आया था। उसने मेरे सामने प्रस्ताव रखा कि मैं उसकी बन जाऊँ। पर मैं ऐसा नहीं चाहती। मैं मजबूर ना होती तो पहले ही यहाँ से भाग गई होती। मेरा दम घुटता है यहाँ।"
अलीशिया पर मीरा की बात का कुछ असर हुआ। वह कुछ शांत पड़ी। मीरा ने मौके का फायदा उठाते हुए कहा,
"मेरी और तुम्हारी दोनों की किस्मत दांव पर लगी है। मैं तो मजबूर हूँ। सागर की कैद में हूंँ। तुम ही कुछ करो। मैं सागर की रखैल बनकर नहीं रहना चाहती हूँ।"
अलीशिया को अब इस बात का यकीन हो गया था कि मीरा सचमुच सागर खत्री से दूर भागना चाहती है। मीरा का यहाँ से चले जाना ही उसके लिए फायदेमंद था। पर वह भी मजबूर थी। उसने कहा,
"मेरी भी स्थिति तुम्हारे जैसी ही है। बड़ी मुश्किल से सिक्योरिटी इंचार्ज को झूठ बोलकर यहाँ आई हूँ। मैं क्या कर सकती हूँ।"
मीरा समझ गई कि इस समय अलीशिया जिस स्थिति में है उसका फायदा उठाकर यहाँ से निकला जा सकता है। उसने कहा,
"मुझे मजबूरी में ना चाहते हुए भी सागर की बात माननी पड़ेगी। फिर वो तुम्हारे ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देगा। फिर हम दोनों ही एक आदमी के कारण दुख भोगेंगे। मेरे लिए ना सही अपने लिए कुछ करो। फिलहाल तुम्हारी स्थिति ‌मुझसे अच्छी है।"
मीरा की यह बात अलीशिया को सही लगी। अगर उसे सागर खत्री के जीवन में जगह बनाए रखनी थी तो मीरा को यहाँ से भगाना ज़रूरी था। लेकिन इस काम में खतरा था। उसने कहा,
"मैं क्या कर सकती हूँ। तुम्हारे पास आने के लिए ही मुझे कितनी कठिनाई हुई। अगर सागर को पता चल गया तो मुझे मार डालेगा।"
मीरा ने कहा,
"वो तो तब भी नाराज़ होगा जब उसे पता चलेगा कि तुम यहाँ मेरे पास आई थी। अगर मुझे कोई रास्ता नहीं मिलेगा तो मुझे उसकी बात माननी पड़ेगी। हो सकता है कि बाद में उसकी रखैल बनकर मुझे इस सबकी आदत पड़ जाए। पर यह तय है कि तुम उसकी नज़रों से हट जाओगी। तब वह तुम्हें यहांँ से निकाल भी सकता है।"
यह सुनकर अलीशिया गुस्से में बोली,
"उससे पहले मैं तुम्हें मार दूँगी।"
मीरा ने सख्त लहज़े में कहा,
"बेवकूफी की बात मत करो। मुझे मार देना तुम्हारे लिए आसान नहीं होगा। मुझे मार देने से तुम्हारी समस्या हल नहीं होगी। सागर तुम्हें मार देगा। लेकिन अगर तुम भागने में मेरी मदद करो तो हो सकता है कि वह फिर से तुम्हारे नज़दीक आ जाए। मैंने तो अपने आप को भाग्य के हवाले कर दिया है। अब जो भी होगा सह लूँगी। तुम सोचकर देख लो।"
अलीशिया को मीरा की बात समझ आ रही थी। पर अभी इतनी जल्दी कुछ तय नहीं कर पा रही थी। उसे जल्दी जाना भी था। डर रही थी कि सागर खत्री ना आ जाए। उसने मीरा को कोई जवाब नहीं दिया। चुपचाप वहांँ से चली गई।
अलीशिया ने जाते समय कुछ कहा नहीं था। लेकिन मीरा समझ रही थी कि जो कुछ भी उसने कहा था उसका असर उस पर हुआ था। अब बस वह भगवान से मना सकती थी कि अलीशिया उसे भगाने का रिस्क लेने को तैयार हो जाए। एक बार वह यहाँ से निकल जाए तो फिर एक नई ज़िंदगी शुरू करने के बारे में सोचेगी।

अंजन सागर खत्री की राह देख रहा था। उसने तय कर लिया था कि वह बिना किसी संकोच के सीधी सीधी बात करेगा। सागर खत्री से पूँछेगा कि वह उसकी मदद करेगा या नहीं। लेकिन बहुत देर हो गई थी सागर खत्री अभी तक लौटकर नहीं आया‌ था। हार कर वह अपने कमरे में जा रहा था कि तभी अलीशिया आ गई। अंजन को देखकर उससे बोली,
"वह लड़की जो ऊपर है तुम्हारी गर्लफ्रेंड है ?"
अंजन समझ नहीं आया कि अचानक वह यह क्यों पूँछ रही है। उसने कहा,
"तुम्हारा मतलब मीरा से है। वो मेरी गर्लफ्रेंड थी। लेकिन उसने मुझे धोखा दिया।"
"जानती हूंँ। लेकिन अब उसकी वजह से मेरी जिंदगी पर असर आ रहा है।"
अंजन समझ गया कि वह ऐसा क्यों कह रही है। फिर भी उसने कहा,
"उसका तुम्हारी ज़िंदगी से क्या लेना देना ?"
अलीशिया चिढ़कर बोली,
"उसकी वजह से सागर मुझसे दूर हो रहा है। वह उसे अपनी रखैल बनाना चाहता है। तुम्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है ?"
यह सुनकर अंजन के दिल में दर्द हुआ। लेकिन उसे छिपाकर बोला,
"जिसने मुझे धोखा दिया उसके साथ कुछ भी हो। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
अलीशिया ने कहा,
"लेकिन मुझे फर्क पड़ रहा है। उसकी वजह से सागर के दिल में मेरे लिए कोई जगह नहीं रह जाएगी।"
अंजन यह समझ नहीं पा रहा था कि यह सारी बातें करके अलीशिया उससे चाहती क्या है। उसने कहा,
"साफ साफ बताओ। तुम मुझसे क्या चाहती हो ?"
"मैं चाहती हूँ कि तुम मीरा को यहाँ से ले जाओ। जिससे सागर का मन उसकी तरफ से हट जाए।"
एक क्षण के लिए अंजन ने उसकी बात पर विचार किया। फिर बोला,
"मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि तुम्हारे साथ या उस मीरा के साथ क्या होता है। मैं सागर से ‌दुश्मनी क्यों लूँ।"
अपनी ‌बात कहकर अंजन कमरे में चला गया।‌ अलीशिया को उम्मीद थी कि मीरा की खातिर शायद अंजन उसकी मदद करे। पर उसकी बात सुनकर वह निराश हो गई।

अपने कमरे में लौटकर अंजन अलीशिया की बात पर विचार करने लगा। सागर खत्री मीरा के साथ जो करना चाहता था वह उसे अच्छा नहीं लग रहा था।‌ उसे ऐसा लगता था कि यह उसकी हार है। पर वह कुछ नहीं कर पा रहा था। इस समय उसके लिए खुद को उस मुसीबत से निकालना ज़रूरी था जिसमें वह फंसा था। अभी उसे सागर खत्री की बहुत ज़रूरत थी। वह उसके खिलाफ नहीं जा सकता था।
हालांकि जब अलीशिया ने कहा कि ‌सागर खत्री मीरा को रखैल बनाना चाहता है तो उसे ऐसा लगा था कि जैसे सागर खत्री उसके आत्मसम्मान को पैरों तले कुचलना चाहता है। वह अंदर ही अंदर तड़प उठा था। पर अलीशिया के सामने उसने अपने दिल की बात उजागर नहीं की। उसने ऐसा दिखाया कि जैसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अपने कमरे में आने के बाद ‌उसका मन उसे धिक्कार रहा था। उसके मन में आ रहा था कि ‌क्या वह वही अंजन है जो कभी शेर की तरह जीवन जीता था। किसी की मजाल नहीं होती थी कि उसके साथ कुछ गलत बात कर सके। आज वह गीदड़ बना हुआ है। सागर खत्री उसके आत्मसम्मान को चुनौती दे रहा है। पर उसमें विरोध करने की हिम्मत नहीं है।
उसे लग रहा था कि भले ही मीरा उसकी ना हो। लेकिन उसके सामने ही अगर सागर खत्री उसे अपनी रखैल बना लेता है तो वह उसकी मर्दानगी पर एक गाली की तरह होगा।
यह विचार आते ही वह तड़प उठा।
 
रिस्की लव - 42

सागर खत्री सोफे पर पैर के ‌ऊपर पैर चढ़ाकर बैठा था। अंजन ‌उसके सामने खड़ा था। सागर खत्री ने उसे घूरकर देखा। फिर बोला,
"अंजन तुम मुझसे पूँछ रहे हो कि मैं तुम्हारा संपर्क उनसे करवाऊँगा कि नहीं जिनसे तुम मदद मांगना चाहते हो। पर तुम एक बार दिल में सोचकर देखो कि जिनसे तुम उम्मीद लगाकर बैठे हो क्या वह तुम्हारी मदद करेंगे ?"
अंजन ने पूरे विश्वास के साथ कहा,
"बिल्कुल करेंगे। मैंने उन्हें खुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।"
सागर खत्री के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह बोला,
"ठीक है....बताओ पहले ‌किससे संपर्क करूँ।"
अंजन ने सबसे पहले अपने क्षेत्र के विधायक से संपर्क करने को कहा। सागर खत्री ने नंबर मिलाया। फोन लाउड स्पीकर पर डालकर अंजन से बात करने को कहा। कुछ देर घंटी बजने के ‌बाद फोन ‌उठा। उधर से आवाज़ आई,
"आर डी कांबले बोल रहा हूँ। कहिए क्या काम है आपको ?"
"कांबले साहब नमस्कार। मैं अंजन बोल रहा हूँ।"
"कौन अंजन ?"
सागर खत्री की निगाहें अंजन के चेहरे पर टिकी थीं। यह सवाल सुनते ही उसके चेहरे पर परेशानी आ गई। सागर खत्री पर नज़र पड़ी तो वह खिसिया गया। बात बनाते हुए मुस्कुरा कर बोला,
"क्या कांबले साहब...अंजन विश्वकर्मा हूँ। विश्वकर्मा कंस्ट्रक्शन्स का मालिक।"
"ओह.... अंजन। भाई तुम्हारे लिए तो यहाँ फिजा अच्छी नहीं है। जहाँ भी हो वहीं रहो।"
अंजन के कुछ कहने से पहले ‌ही कांबले ने अपने हाथ खड़े कर दिए। वह एक बार फिर खिसिया गया। उसने कहा,
"कांबले साहब कुछ करिए। भला कब तक यहाँ पड़ा रहूँगा। उस एसीपी सत्यपाल वागले पर दबाव डलवाइए कि ठीक से रहे। बहुत उछल रहा है।"
"ऐसा है अंजन एसीपी यूं ही नहीं उछल रहा है। तुम्हारे खिलाफ बहुत सारे सबूत हैं उसके पास। इसलिए चुप तुम बैठो।"
उसके बाद उधर से कॉल काट दी गई। अंजन को बहुत धक्का लगा। कांबले से उसे सबसे अधिक उम्मीद थी। वह चुपचाप खड़ा रहा। सागर खत्री ने कहा,
"कोई बात नहीं। तुम्हारे पास तो बहुत सारे लोग हैं। बताओ अब किससे बात करनी है।"
अंजन ने पुलिस विभाग में कुछ लोगों से बात करी। किसी ने भी उसकी मदद करने की बात नहीं कही। सागर खत्री व्यंग भरी मुस्कान के साथ उसे देख रहा था। अंजन के लिए वहाँ खड़ा रहना कठिन हो रहा था। वह वहाँ से चलने को हुआ तो सागर खत्री ने कहा,
"मुझसे बहुत ताव दिखा रहे थे। अब बताओ। किसने की तुम्हारी मदद। तुम बर्बाद हो चुके हो। जैसे रेस में लंगड़े घोड़े पर दांव नहीं लगाया जाता है वैसे ही कोई तुम्हारी मदद नहीं करना चाहता है। मैंने तुम्हारी मदद की पर तुमने मेरा गिरेबान पकड़ने की हिमाकत की। आज ऊँची आवाज़ में मुझसे बात की। अब मैं भी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूँ। जितनी जल्दी हो सके यहाँ से दफा हो जाओ। ज्यादा से ज्यादा तरस खाकर मैं तुम्हें कुछ पैसे दे सकता हूँ।"
सागर खत्री की बात अंजन को चुभ रही थी। पर वह कुछ कह सकने की स्थिति में नहीं था। वह चुपचाप वहाँ से चला गया।

अंजन अपने कमरे में आ गया। इस समय वह जिस मनःस्थिति में था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे हर कोई उसका दुश्मन हो गया है। उसका मज़ाक उड़ा रहा है।
उसे उन लोगों पर गुस्सा आ रहा था जिन्हें वह हर तरह से खुश रखने की कोशिश करता था। ताकी आड़े समय में उनसे मदद मांग सके। आज वही बड़ी आसानी से ‌उससे किनारा कर गए। कांबले जिसे चुनाव में जीत दिलाने के लिए उसने पानी की तरह पैसा बहाया था उसने यह कहकर फोन काट दिया कि वह चुपचाप जहाँ है बैठा रहे। उसने मुंबई के अपने महंगे टावर में उसे एक लग्जरी फ्लैट दिया था। आज वह पूँछ रहा था कौन अंजन ? आज सबने ही उसे अंगूठा दिखा दिया।
उसे अपनी माँ कावेरी की याद आ रही थी। वह अक्सर उसे समझाती रहती थीं कि बुरे समय में साया भी साथ नहीं देता है। इसलिए किसी के भरोसे मत रहना। अपनी क्षमता पर यकीन रखना। उसी से नैया पार लगेगी। आज उसे अपनी माँ की बात समझ आ रही थी।‌ पहले ‌उसे लगता था कि उसने सबको अपने तरीके से तोहफे देकर दबा रखा है। ऐसे में वो मुश्किल समय में उसकी मदद ज़रूर करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।‌
उसका मन बहुत अशांत था। आज वह ‌एकदम अकेला था। उसकी आँखों में बेबसी के आंसू थे। उसे अपने आप से गुस्सा आ रहा था। वह जो अपने आप को बहुत काबिल समझता था। जिसे घमंड था कि वह परिस्थितियों को अपने अनुसार मोड़ सकता है। आज परिस्थितियों के आगे लाचार है। बिस्तर पर पड़ा आंसू बहा रहा है। सागर खत्री के एहसान के नीचे दबा है।‌
वह यह सब सोच रहा था तभी उसके मन ने उसे धिक्कारा। क्यों वह इस तरह घुटने टेक कर बैठा है। वह वही अंजन है जिसने मुंबई में अनाथ घूमते हुए लड़के से विश्वकर्मा कंस्ट्रक्शन्स के मालिक तक का सफर तय किया था। उसे अपनी माँ की सीख याद आई। मुश्किल समय में अपनी क्षमता पर यकीन रखना। वह सोचने लगा कि वह लाचार इसलिए है क्योंकी आज वह अपनी क्षमता को भूलकर दूसरों से उम्मीद लगाकर बैठा है। लेकिन अब वह अपने दम पर इस स्थिति से निकलने का प्रयास करेगा।
उसने सोच लिया कि बर्बाद होना ही है तो लड़कर होगा। सर पर कफ़न बांध लेगा और फिर रण में उतर जाएगा। फिर परिणाम जो भी हो। पर लाचारी में खुद को हालात के हवाले नहीं करेगा।
मन में यह विचार आते ही लाचारगी की भावना दूर हो गई। वह ऐसा महसूस कर रहा था जैसे कोई निडर योद्धा हो।

मीरा ‌ईश्वर से मना रही थी कि उसकी बात अलीशिया को समझ आ गई हो। वह अपने लिए उसे यहाँ से मुक्त कराने के लिए तैयार हो गई हो। वह बिस्तर पर लेटी यही सब सोच रही थी कि डोरबेल बजी। उसे लगा कि शायद अलीशिया होगी। उसने उठकर दरवाज़ा खोला तो सामने सागर खत्री खड़ा था। वह शराब के नशे में धुत था। उसकी लाल आँखों में वासना दिखाई पड़ रही थी।‌ उसका यह रूप देखकर मीरा डर गई।

अंजन के कमरे के दरवाज़े पर ज़ोर से दस्तक हुई। अलीशिया ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी,
"अंजन जल्दी दरवाज़ा खोलो।"
उसकी आवाज़ में घबराहट थी। अंजन फौरन उठा और दरवाज़ा खोल दिया। अलीशिया की हालत बहुत खराब थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे। दरवाज़ा खुलते ही वह बोली,
"सागर ने मुझे बुरी तरह पीटा है। वह मीरा के पास गया है। उसे बचा लो।"

सागर खत्री की इस हरकत पर अंजन को बहुत गुस्सा आया। वह फौरन ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की तरफ भागा। अलीशिया ने उसे रोका,
"अंजन रुको....."
अंजन रुक गया। अलीशिया ने उसे एक गन देते हुए कहा,
"सागर की है। काम आएगी।"
उसके बाद उसने मीरा के सुइट की चाभी पकड़ा दी।

सागर खत्री मीरा को धक्का देकर अंदर आ गया। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। मीरा डरकर कांप रही थी। वह उसे घसीटते हुए बेडरूम में ले गया। वहशी दरिंदे की तरह वह मीरा पर टूट पड़ा। मीरा इस तरह से छटपटा रही थी जैसे शेर के पंजों में फंसी हिरनी छटपटाती है। वह चीख चिल्ला रही थी। खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।

अंजन लिफ्ट से ऊपर पहुँचा। वहाँ सिक्योरिटी का एक आदमी पहरे पर था। उसने अंजन को रोकने की कोशिश की। अंजन ने उस पर गोली चला दी। उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला और अंदर चला गया। उसे बेडरूम से मीरा की आती चीखें सुनाई पड़ीं। वह बेडरूम में चला गया।
सागर खत्री के शिकंजे में मीरा छटपटा रही थी। अंजन के सर पर खून सवार हो गया। वह तेज़ी से आगे बढ़ा। फुर्ती से सागर खत्री को मीरा से अलग किया। उसके बाद उस पर घूसों की बौछार शुरू कर दी। नशे में चूर सागर खत्री संभल नहीं पाया। मीरा फौरन बिस्तर से उठकर एक कोने में खड़ी हो गई।
अंजन इतने गुस्से में था कि सागर खत्री को ताबड़तोड़ घूंसे मार रहा था। तभी सिक्योरिटी के और लोग वहाँ आ गए। उनके इंचार्ज ने अंजन पर गन तानकर कहा,
"लीव हिम....अदरवाइज़ आई विल शूट यू।"
सिक्योरिटी इंचार्ज की बात सुनकर अंजन शांत हुआ। लेकिन मौका देखते ही उसने सागर खत्री को अपनी गन के निशाने पर ले लिया। उसने गरज कर कहा,
"नाऊ यू मूव बैंक। लेट मी एंड मीरा गो।"
उसने मीरा की तरफ देखा। वह भागकर उसके बगल में आकर खड़ी हो गई। सागर खत्री अब कुछ संभल गया था। उसने कहा,
"कमीने.... अहसानफरामोश.... मैंने तेरी इतनी मदद की। तू मेरे साथ यह कर रहा है।"
अंजन ने गन उसकी कनपटी पर सटाते हुए कहा,
"तुमसे बड़ा अहसानफरामोश कौन होगा। याद है ना मैंने तुम्हारी जान बचाई थी। मैं मदद के लिए ना आया होता तो उस दिन तुम्हारा अंतिम दिन होता। लव चढ्ढा से सागर खत्री बनने में मदद की थी। नहीं तो तुम्हारे दुश्मन तुम्हें जीने ना देते। उस सबके बदले तुमने मीरा के बारे में इतनी गंदी बात कही थी। आज तुमने उस पर हाथ डालने की जुर्रत की।"
"तुम बेवकूफ हो। इस लड़की के लिए मेरी दुश्मनी मोल ले रहे हो जिसने तुम्हें धोखा दिया था। अभी भी इसका क्या भरोसा। ना जाने कब तुम्हें धोखा दे दे।"
"मैं मीरा को इसलिए नहीं बचा रहा हूँ कि मुझे उसके साथ रिश्ता कायम करना है। मैंने उसे प्यार किया था। उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था। अब उसे तुम्हारे जैसे दरिंदे के हाथों लुटने नहीं दे सकता।"
सागर खत्री ने कहा,
"तुम्हें लगता है कि इसे यहाँ से ले जा पाओगे। नहीं कुछ ही देर में पकड़े जाओगे। फिर तुम्हारी आँखों के सामने ही इसकी इज़्ज़त तार तार कर दूँगा।"
"मैं भी तुम्हें बता रहा हूँ कि मेरे जीते जी तुम मीरा को छू भी नहीं पाओगे।"
मीरा बड़े ध्यान से अंजन की तरफ देख रही थी।
 
रिस्की लव - 43

अंजन ने गौर किया। सिक्योरिटी इंचार्ज के अलावा दो लोग और थे। उसने अपनी गन सागर खत्री के सर से सटाकर कहा,
"मुझे मीरा को लेकर यहाँ से जाने दो नहीं तो इसका सर उड़ा दूँगा।"
सागर खत्री पहले ही नशे में था। मार खाने के बाद उसमें अंजन का विरोध करने की क्षमता नहीं बची थी।‌ पर उसका दिमाग चल रहा था। उसने सोचा कि अगर अंजन को रोकने की कोशिश करेगा तो वह उसे जान से मार सकता है। उसे जाने देना ही अक्लमंदी है। अंजन यहाँ किसी को जानता भी नहीं है। उसके पास साधन भी नहीं हैं। यहाँ से निकल भी गया तो कहाँ जाएगा। उसने सिक्योरिटी इंचार्ज से कहा,
"इसे इस लड़की के साथ जाने दो।"
सिक्योरिटी इंचार्ज और उसके साथी पीछे हट गए। अंजन ने उनसे कहा कि वह अपनी गन ज़मीन में रखकर पीछे दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं। उन्होंने अंजन की बात मान ली। उसके बाद अंजन ने मीरा से कहा कि वह एक गन उठा ले। अंजन ने उसे गन सागर खत्री के सर पर लगाने को कहा।
मीरा ने गन सागर खत्री के सर पर लगा दी। अंजन ने फुर्ती दिखाते हुए अपनी गन से सिक्योरिटी इंचार्ज और उसके साथियों को मार दिया। उसके बाद उसने गन सागर खत्री पर तान दी। वह घबरा गया। उसने कहा,
"ये क्या है ? मैंने तुम्हें जाने की इजाज़त दे दी थी। इन लोगों को क्यों मारा‌ ?"
"इन्हें छोड़ देता तो ये लोग मेरे पीछे आते। मैं अपने रास्ते में कोई खतरा नहीं छोड़ना चाहता हूँ।"
"अंजन.... तुम पहले ही मुसीबत से घिरे हुए थे। यह सब करके तुमने बड़ी गलती की है। तुमको क्या लगता है कि अब तुम्हारा रास्ता आसान हो गया। गोलियों की आवाज़ सुनकर सिक्योरिटी के दूसरे लोग ऊपर आते होंगे।"
अंजन ने कहा,
"सिक्योरिटी में पाँच लोग थे। एक को यहाँ आते समय मार दिया था। तीन अब मर गए। एक बचा है। निपट लूँगा। फिर तुम तो हो मेरी ढाल बनने के लिए।"
अंजन ने मीरा से कहा कि वह गन लेकर सावधान रहे। अंजन सागर खत्री को अपनी गन प्वाइंट पर लेकर दरवाज़े की तरफ बढ़ा। उसने मीरा से कहा कि वह सावधानी से दरवाज़ा खोले। मीरा ने दरवाज़ा खोला और उसकी आड़ में छिप गई। अंजन ने कहा,
"सागर ‌मेरे निशाने पर है। इसलिए अगर कोई घात लगाए बैठा है और उसने कोई हरकत की, तो समझ ले कि ‌सागर की मौत का ज़िम्मेदार वह होगा।"
अंजन ने मीरा को तैयार रहने के लिए कहा। वह सागर खत्री को लेकर दरवाज़े की तरफ बढ़ा। सागर खत्री को आगे किए हुए वह बाहर निकला। लॉबी में बचा हुआ सिक्योरिटी का आदमी था। वह अपनी गन उसकी तरफ तान कर बोला,
"सर को छोड़ दो।"
अंजन ने हंसकर कहा,
"छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है। लेकिन तुमने अगर कोई हिमाकत‌ की तो इसके लिए अच्छा नहीं होगा।"
इसी बीच मीरा ने बाहर आकर उस आदमी पर गोली चला दी। लेकिन गोली उसके बाजू पर लगी। गन उसके हाथ से छूटकर गिर गई। अंजन ने अपनी गन से उसे मार दिया। लेकिन इस बीच में मौका देखकर सागर खत्री ने अंजन को धक्का दिया। वह लड़खड़ा गया। सागर खत्री ने ज़मीन पर गिरी गन उठाकर उस पर तान दी।
सागर खत्री की तरफ मीरा और अंजन दोनों की गन्स का निशाना था। सागर खत्री अंजन पर निशाना लगाए खड़ा था। अंजन की निगाह सागर खत्री पर टिकी हुई थी। वह उस पल की राह देख रहा था जब सागर खत्री कुछ गलती करे। मीरा समझ रही थी कि अंजन बस एक मौके की तलाश में है। वह जानबूझकर सागर खत्री की तरफ बढ़ी। सागर खत्री की निगाह उसकी तरफ गई। अंजन ने कोई चूक नहीं की। सागर खत्री ज़मीन पर गिरा था। गोली उसके सर पर लगी थी।

अंजन मीरा के साथ नीचे आया। अलीशिया उसकी राह देख रही ‌थी। सागर खत्री के मारे जाने की बात सुनकर वह बहुत खुश हुई।

सागर खत्री मारा गया था। लेकिन अंजन जानता था कि उसके लिए यहाँ रहना उचित नहीं होगा। सागर खत्री के वफादार उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए उसने जल्दी से जल्दी वहाँ से निकलने के बारे में सोचा। पर समझ नहीं पा रहा था कि कहाँ जाए। मीरा ने उसे बताया कि किडनैप होने से पहले वह निर्भय के दिए घर में रह रही थी।‌ वहाँ उसका सामान और कुछ पैसे हैं। वो लोग वहाँ जा सकते हैं।
अंजन उसकी बात पर राजी हो गया। वह सागर खत्री के कमरे में गया। अलीशिया की मदद से उसकी अलमारी से कुछ पैसे निकाले। उसने अलीशिया को भी अपना कुछ ज़रूरी सामान रखने के लिए कह दिया। उसके बाद वह मीरा और अलीशिया के साथ निर्भय के घर के लिए निकल गया।

एसीपी सत्यपाल वागले ने हर उस व्यक्ति पर नज़र बना रखी थी जो अंजन से जुड़ा हुआ था। इनमें विधायक दिनेश कांबले भी था। एसीपी सत्यपाल वागले को विधायक दिनेश कांबले और अंजन के बीच हुई कॉल के डीटेल मिल गए। उस डीटेल के बल पर एसीपी सत्यपाल वागले ने विधायक दिनेश कांबले को पूँछताछ के लिए बुलाया।
विधायक दिनेश कांबले ने स्वीकार कर लिया कि ‌अंजन ने उससे मदद मांगने के लिए फोन किया था। लेकिन उसने मदद करने से इंकार कर दिया।
पुलिस ने उस नंबर के ज़रिए पता कर लिया कि कॉल सिंगापुर से आई थी। मुंबई पुलिस ने फौरन अंजन के डीटेल्स सिंगापुर भिजवाए ताकी अंजन को पकड़ने में मदद मिल सके। सिंगापुर पुलिस की तरफ से मदद का आश्वासन मिलने पर मुंबई पुलिस अपना एक दल सिंगापुर भेजने के लिए तैयार हो गई। एसीपी सत्यपाल वागले अपने कुछ चुने हुए लोगों के साथ सिंगापुर जाने की तैयारी करने लगा।

निर्भय के घर पहुँचने के बाद अंजन को एक ठिकाना मिल गया था। पर वह जानता था कि उसके लिए चैन से बैठने का समय नहीं है। उसे जल्द ही कुछ भी करके यहाँ से निकलना होगा। ताकी अपना सबकुछ फिर से पा सके। लेकिन उससे पहले उसे मीरा को सुरक्षित करना था। वह नहीं चाहता था कि उसके कारण मीरा पर कोई मुश्किल आए। उसका एक ही तरीका था। मीरा लंदन वापस चली जाए।

मीरा अपने कमरे में बैठी थी। उसके दिमाग में अंजन ही घूम रहा था। जिस बहादुरी के साथ उसने उसे सागर खत्री के जुल्म से बचाया था। उससे वह बहुत प्रभावित हुई थी। अंजन का यह कहना उसके दिल को छू गया था कि मीरा को वह इसलिए बचाना चाहता है क्योंकी उसने उससे प्यार किया था। उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था। इसलिए उसके रहते सागर खत्री उसे हाथ भी नहीं लगा सकता है।
उस पल के बाद से ही जैसे मीरा ने खुद को अंजन के लिए समर्पित कर दिया था। अब वह बाकी की ज़िन्दगी उसके साथ बिताना चाहती थी। उसे पता था कि अंजन इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लेकिन उसे इस बात का पूरा यकीन था कि एक दिन वह अपना सबकुछ दोबारा पा लेगा। वह उसके साथ आने वाले जीवन के सपने देखने लगी थी।
उसके कमरे के दरवाज़े पर नॉक हुई। उसने दरवाज़ा खोला तो अंजन था। अंजन ने उससे कहा,
"मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी।"
"तो अंदर आ जाओ।"
कहकर मीरा दरवाज़ा छोड़कर खड़ी हो गई। अंजन भीतर जाकर बैठ गया। मीरा उसके ‌पास बैठते हुए बोली,
"कहो क्या बात करनी है।"
अंजन सोचकर आया था कि उसे अपनी बात कैसे कहनी है। उसने सीधे सीधे कहा,
"मैं सोच रहा था कि अब तुम अलीशिया के साथ लंदन वापस चली जाओ। वहांँ तुम सुरक्षित रहोगी और अपना जीवन फिर से शुरू कर सकती हो। इसलिए जाने की तैयारी करो।"
उसकी बात सुनकर मीरा ने कहा,
"अंजन मानती हूँ कि मैंने तुम्हारे साथ धोखा किया था। लेकिन मुझे उस बात का बहुत पछतावा है। अब मैं तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताना चाहती हूंँ। क्या तुम मुझे माफ नहीं कर सकते ?"
अंजन गंभीर हो गया। कुछ सोचकर बोला,
"इस वक्त मैं यह सब सोच सकने की स्थिति में नहीं हूंँ। अभी तो मुझे अपने लिए ज़मीन तलाश करनी है। मेरा सबकुछ छिन गया है। जब तक उसे दोबारा पा ना लूँ इन सब बातों के बारे में सोचना ही नहीं है। इसलिए तुम यह सब छोड़कर चुपचाप लंदन जाने की तैयारी करो।"
मीरा को अच्छा नहीं लगा। उसने कुछ कहना चाहा तो अंजन ने उसे रोककर कहा,
"मीरा बात को समझो। अगर अभी भावनाओं में पड़ गया तो अपना कुछ भी वापस नहीं ले पाऊंँगा। ना खुद खुश रहूँगा और ना तुमको रख पाऊँगा।"
यह‌ कहकर अंजन उसके कमरे से चला गया।
मीरा उसकी इस बात पर विचार करने लगी। ढंग से सोचने पर उसे इस बात में अपने लिए एक उम्मीद नज़र आई। वह सोचने लगी कि अगर उसे अंजन का साथ चाहिए तो उसकी कमज़ोरी बनने की बजाय उसकई सहायता करनी चाहिए। वह उसे निश्चिंत छोड़ दे अभी यही उसके लिए सबसे बड़ी सहायता होगी।
वह लंदन वापस जाने को तैयार हो गई।

अलीशिया भी अब अपने आगे के जीवन के बारे ‌में सोच रही थी। वह सागर खत्री के साथ यह सोचकर आई थी कि वह उसे प्यार करता है। लेकिन सच तो यह था कि वह बस उसके शरीर को खिलौना मान कर खेलता था। अब वह एक नए सिरे से अपनी ज़िंदगी शुरू करना चाहती थी। अंजन ने जब उसे मीरा के साथ लंदन जाने को कहा तो वह मान गई।
 
रिस्की लव - 44

मीरा और अलीशिया लंदन वापस चली गई थीं। अंजन का मन मीरा के लिए दुखी था। विदा लेते समय मीरा ने उससे कहा था कि वह जा रही है, लेकिन उसे इस बात का इंतज़ार रहेगा कि कब वह अपना सबकुछ वापस हासिल कर उसके पास आएगा।
अंजन के दिल में मीरा के प्रति जो गुस्सा था वह खत्म हो गया था। अब वह भी जल्दी अपना पुराना रुतबा वापस हासिल कर मीरा के पास जाना चाहता था। वह उसके साथ एक नया जीवन शुरू करना चाहता था।
अंजन निर्भय के मकान में ही रह रहा था। मीरा यह कह गई थी कि अंजन उसका खास दोस्त है। निर्भय से बात हो गई है। वह कुछ दिन यहीं रहेगा।
अब अंजन किसी तरह से सिंगापुर से थाईलैंड जाने के बारे में सोच रहा था। वहाँ उसे कुछ सहायता मिलने की उम्मीद थी। पर वह यहाँ रमन सिंह के नाम से आया था। अब उसे लग रहा था कि इस पासपोर्ट पर यात्रा करना खतरनाक हो सकता है। उसे एक नए पासपोर्ट की आवश्यकता थी।
इस सिलसिले में उसके दिमाग में एक नाम अश्विन राहाणे था। कुछ साल पहले अश्विन राहाणे एक मुसीबत में फंस गया था। जिसके कारण वह बहुत परेशान था। अश्विन राहाणे एक लॉज में मैनेजर था। उस पर अपने दोस्त को अगवा करने का आरोप था। तब उसकी माँ के कहने पर अंजन ने अपनी जान पहचान के ज़रिए उसे मुसीबत से निकालने में मदद की थी। उसे कुछ पैसे भी दिए थे। बाद में उसने उसे सूचित किया था कि वह सिंगापुर के एक भारतीय रेस्टोरेंट में काम कर रहा है।
अंजन को उस भारतीय रेस्टोरेंट का नाम याद था। उसने इस कठिन समय में अश्विन राहाणे से मदद लेने का फैसला किया। वह रेस्टोरेंट लिटिल इंडिया नाम की जगह पर था। अंजन कार लेकर उस रेस्टोरेंट के लिए निकल गया।
रेस्टोरेंट के लिए जाते समय अंजन को डर था कि कहीं अश्विन राहाणे ने वह नौकरी छोड़ ना दी हो। ऐसे में यहाँ उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होगा। लेकिन उसकी किस्मत ने उसका साथ दिया। अश्विन राहाणे से उसकी मुलाकात हो गई। अंजन ने उसे अपनी सारी बात बताई। उससे कहा,
"आज मेरा बुरा समय चल रहा है। लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि अगर तुम मेरी मदद कर दो तो मैं जल्दी ही अपना सबकुछ वापस पा सकता हूँ। तब मैं एहसान चुकाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।"
अंजन ने आड़े वक्त में उसकी जो मदद की थी अश्विन राहाणे उसे अच्छी तरह से समझता था। उसने कहा,
"आपने मेरी जो मदद की थी उसे मैं भूला नहीं हूँ। अगर उस समय आपका साथ ना मिला होता तो मैं उस केस में फंस गया होता। इसलिए मैं आपकी मदद ज़रूर करूँगा। लेकिन मेरे जैसा छोटा आदमी आपकी क्या मदद कर सकता है।"
"अश्विन इस समय छोटी सी मदद भी बहुत बड़ी होगी। मैं किसी भी तरह से सिंगापुर से बाहर निकलना चाहता हूँ।"
"पर आप सिंगापुर से निकल कर कहाँ जाना चाहते हैं ? इंडिया वापस जाना तो खतरनाक होगा।"
"मुझे थाईलैंड जाना है। पर मुझे एक नया पासपोर्ट चाहिए। क्या तुम इस विषय में मेरी मदद कर सकते हो।"
उसकी बात सुनकर अश्विन ने कहा,
"मुश्किल काम है। पर मैं एक आदमी को जानता हूँ जो ऐसा कर सकता है।"
"तुम उससे मेरी मुलाकात करवा दो।"
अश्विन राहाणे ने कुछ सोचकर कहा,
"आप कुछ देर इंतज़ार कीजिए। मैं अपने मैनेजर से इजाज़त लेकर आता हूँ।"
कुछ देर के बाद अश्विन उसे उस आदमी से मिलने के लिए ले गया जो अंजन को नया पासपोर्ट बनवा कर दे सकता था। अंजन ने उस आदमी से कहा कि उसे एक नया पासपोर्ट बनवाना है। उस आदमी ने कहा कि पासपोर्ट बन जाएगा। लेकिन अच्छे पैसे लगेंगे। अंजन राज़ी हो गया। उस आदमी ने दो दिनों के बाद उसे आने के लिए कहा।
सागर खत्री के घर से निकलते समय अंजन को पैसों के साथ एक महंगा ब्रेसलेट, हीरे जड़े कफलिंक और दो अंगूठियां मिली थीं। उन्हें बेंचकर वह मतलब भर का पैसा एकत्र कर सकता था।
अंजन ‌अब आगे के बारे ‌में सोच रहा था। थाईलैंड में काम बन जाने की उसे कुछ उम्मीद थी। हालांकि जिनकी भी उसने मदद की थी उन्होंने उसे समय आने पर धोखा ही दिया था। सिवा अश्विन राहाणे के। जो उसकी मदद करने को तैयार हो गया था। लेकिन थाईलैंड वह एहसान मांगने के लिए नहीं जा रहा था। बल्की अपना हिस्सा लेने जा रहा था
सोम आर्य का थाईलैंड में होटल बिज़नेस था। उसमें अंजन की भी तीस फीसदी हिस्सेदारी थी। वह उसके आधार पर सोम आर्य से कुछ रकम लेना चाहता था। जिससे अपने लिए कुछ नया काम शुरू कर सके।
अंजन जानता था कि उसे अब एक नए सिरे से सबकुछ करना होगा। यह आसान नहीं होगा। उसने सोचा था कि सागर खत्री की तरह एक नए नाम के साथ कहीं दोबारा अपना नया अस्तित्व तलाश करेगा। एक बार अपनी नई पहचान बनाने के बाद कोशिश करेगा कि भारत में उसने जो कुछ भी खोया है दोबारा पा सके। फिलहाल तो उसे फिर से शुरुआत करने के लिए कमर कसनी थी। वह मन ही मन अपने आप को एक नए संघर्ष ‌के लिए तैयार कर रहा था।

मुंबई पुलिस से अंजन के डीटेल्स मिलने के बाद से ही सिंगापुर पुलिस भी एक्टिव हो गई थी। उन्होंने पता कर लिया कि अंजन रमन सिंह के नाम से सिंगापुर आया था। उन्होंने उसकी तलाश तेज़ कर दी थी।
भारतीय मूल का सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इस केस को देख रहा था। उसने अंजन की तस्वीर के साथ अपने कुछ साथियों को अलग अलग हिस्सों में भेजा था। वह अंजन के बारे में पूँछताछ कर रहे थे।

एसीपी सत्यपाल वागले चार लोगों की अपनी टीम के साथ सिंगापुर पहुँचा। उसने अंजन के केस के संबंध में सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज से मुलाकात की। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे बताया कि उसकी टीम अलग अलग इलाकों में नज़र बनाए हुई है। जल्दी ही अंजन का पता ‌लग जाएगा।‌
एसीपी सत्यपाल वागले पर उनके डिपार्टमेंट का दबाव था कि जल्दी ही अंजन को गिरफ्तार करके लाए। सिंगापुर आते समय अंजन का समर्थन कर रहे कुछ लोगों ‌ने एयरपोर्ट पर एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम के साथ बद्तमीजी की थी।‌ एसीपी सत्यपाल वागले के लिए यह ज़रूरी हो गया था कि किसी भी कीमत पर अंजन को कानून के शिकंजे में लाए।
वह जानता था कि उसके अपने डिपार्टमेंट के ही कुछ लोग हैं ‌जो नहीं चाहते हैं कि अंजन गिरफ्तार हो। उन्हें डर था कि अंजन के गिरफ्तार होने पर उनके और अंजन के बीच के रिश्तों का खुलासा हो जाएगा। एसीपी सत्यपाल वागले यह भी जानता था कि राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों का भी अंजन के काले कारनामों में हिस्सा है। सारे लोग मिलकर यही चाहते थे कि अंजन या तो कानून की गिरफ्त से दूर रहे या मारा जाए। एसीपी सत्यपाल वागले उन सबको भी बेनकाब करना चाहता था। लेकिन यह तभी संभव हो सकता था जब अंजन उसकी पकड़ में आए।
सिंगापुर के एक फ्लैट के कमरे में नागेश गुप्ता नाम का एक आदमी शराब पी रहा था। उसका फोन बजा। उसने सामने रखी ऐशट्रे में सिगरेट बुझाई। फोन रिसीव कर स्पीकर पर डाल दिया। उधर से आवाज़ ‌आई,
"नागेश.... एसीपी सत्यपाल वागले भी सिंगापुर में है। कोई चूक ना करना। अंजन उसके हाथ नहीं लगना चाहिए।"
नागेश ने शराब का एक बड़ा घूंट भरा। उसके बाद बोला,
"मैं अपने काम में माहिर हूँ। चूक शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं है। उस एसीपी से पहले यहाँ आ गया था। शिकार पर मेरी नज़र है। एसीपी की नज़र पड़ने से पहले शिकार का शिकार हो जाएगा।"
कहकर नागेश ने फोन काट दिया।
उसने अपने लिए एक और पैग बनाया और बड़े इत्मीनान के साथ पीने लगा।‌ कुछ देर में कमरे के दरवाज़े की घंटी बजी। वह मुस्कराया।‌ दो आदमी खड़े थे। इनमें से एक अश्विन राहाणे था। दूसरा आदमी उसे अंदर ले आया। नागेश दरवाज़ा बंद करके वापस सोफे पर बैठ गया। उसने अपने आदमी से कहा,
"पॉल बता दिया इसे क्या करना है।"
"हाँ सर.... यह भी बता दिया है कि बात मान ली तो तुम्हारा फायदा। नहीं तो जान से हाथ धोना पड़ेगा।"
अश्विन राहाणे घबराया सा खड़ा था। नागेश ने उससे कहा,
"क्या चाहते हो ? पैसा या गोली।"
अश्विन राहाणे ने कहा,
"मुझे अपनी जान प्यारी है। वही करूँगा जो कहा है।"
नागेश मुस्कुरा कर बोला,
"समझदार हो....अब वही करो जो कहा गया है।"
अश्विन राहाणे ने अपना फोन निकाला और अंजन को कॉल किया। फिर एक कोने में जाकर बात करने लगा।
नागेश ने पॉल को इशारा किया। वह उसके इशारे को समझ ‌गया। अश्विन राहाणे बात करके लौटा तो नागेश ने कहा,
"उसे अच्छी तरह से समझा दिया था।"
"हाँ सब समझा दिया।"
"तुम्हारी बात मानेगा ना ?"
"बिल्कुल मानेगा। उसने कहा था कि वह फौरन निकल रहा है।"
नागेश एक बार फिर मुस्कुराया। उसने कहा,
"जाओ.... जो तय हुआ था पॉल तुमको दे देगा।"
पॉल ने उसे अपने साथ आने का इशारा किया। वह अश्विन राहाणे को एक एकांत स्थान पर ले गया। पॉल वहाँ से चला गया। अश्विन राहाणे की लाश वहीं पड़ी थी।
 
रिस्की लव - 45

अश्विन राहाणे का फोन आने के बाद अंजन उसकी बताई गई जगह पर जाने की तैयारी करने लगा। अश्विन राहाणे ने उससे कहा था कि पासपोर्ट बनाने वाले ने उसे मिलने के लिए बुलाया है। उसने एक जगह बताई थी जहाँ पहुँचना था। अंजन को आश्चर्य हो रहा था कि उस आदमी ने उसे इस समय मिलने क्यों बुलाया था। वह भी किसी दूसरी जगह। उसने अश्विन राहाणे से इस बारे में पड़ताल की भी थी। अश्विन राहाणे ने उसे बताया था कि वह आदमी उस जगह ही अपना काम करता है। उसे काम करने की जल्दी है। इसलिए इस समय बुलाया है। वहाँ पासपोर्ट के लिए कुछ कार्यवाही करनी है।
अंजन उस जगह के लिए निकल रहा था तभी उसके मन में खयाल आया कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए साथ में गन रखनी चाहिए। उसने अपनी जैकेट के अंदर वाली पॉकेट में गन रख ली। गाड़ी की चाभी ली और निकल गया।
जीपीएस की मदद से वह उस जगह पर पहुँच गया।‌ यह एक सुनसान जगह थी। वह गाड़ी से उतरा और सामने बने एक पुराने से मकान की तरफ चल दिया। मकान के चारों तरफ कई पेड़ लगे हुए थे। मकान के सामने पहुँच कर उसने अश्विन राहाणे को फोन किया। तीन बार रिंग बजने के बाद फोन कट गया। अंजन को आश्चर्य हुआ। वह दोबारा फोन मिलाने जा रहा था तभी अश्विन राहाणे के नंबर से मैसेज आया 'कम इन'। अंजन को बात करने की जगह मैसेज भेजना अजीब लगा।
उसका माथा ठनका कि ज़रूर कोई गड़बड़ है। उसने अपनी गन निकाल ली। वह भागकर पास की झाड़ियों में छिप गया। कुछ देर बाद उसने देखा कि एक आदमी बाहर आया। उसने इधर उधर देखा। फिर मैसेज टाइप करने लगा।‌ अंजन के फोन पर अश्विन राहाणे का मैसेज था। उसने पूँछा था कि वह कहाँ है ? अंदर क्यों नहीं आया ? अंजन‌ समझ गया कि यह उसके लिए एक जाल है। उसने मैसेज करके कहा कि वह अपनी कार में बैठा है। उससे मिलना है तो वहीं आए।
वह आदमी अंजन की कार की तरफ बढ़ने लगा।‌ अंजन ने देखा कि चलते हुए उसका हाथ कोट की पॉकेट में था। वह समझ गया कि गन है। उस आदमी ने कार के पास पहुँच कर शीशे पर नॉक किया। अंजन फुर्ती से झाड़ियों के पीछे से निकल कर कार की तरफ भागा। कदमों की आहट पाकर वह आदमी जैसे ही घूमा अंजन ने उसके हाथ पर गोली चला दी। फिर उसे गन प्वाइंट पर लेकर घुटनों पर बैठने को कहा। वह घुटनों पर बैठ गया। उसके हाथ से तेज़ खून निकल रहा था। वह गन नहीं निकाल सकता था। अंजन ने उससे कहा,
"अपनी जान की सलामती चाहते हो तो सच सच बताओ कि तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ? अश्विन कहाँ है ?
"मेरा नाम पॉल है। अश्विन को मार दिया है। उसके फोन से तुम्हें मैसेज कर रहा था।"
"वो तो मैं समझ गया। यह बताओ कि मुझे धोखे से यहांँ बुलाने का क्या कारण है ? मुझसे क्या चाहते हो ?"
पॉल बहुत तकलीफ में था। अंजन ने उससे कहा,
"सच सच बताओ। नहीं तो इससे भी बुरी हालत कर दूँगा।"
पॉल ने कहा,
"मुझे मेरे बॉस ने तुम्हें जान से मारने के लिए कहा था।"
"क्यों ? तुम्हारा बॉस है कौन ?"
"मुझे नहीं पता कि तुम्हें क्यों मारना था। मेरे बॉस नागेश गुप्ता को किसी ने तुम्हें मारने की सुपारी दी थी। मैं कई दिनों से तुम्हारी तलाश कर रहा था। मैंने तुम्हें अश्विन राहाणे के रेस्टोरेंट में देखा था। उसके बाद तुम उसके साथ एक आदमी से मिलने गए थे। पर वहाँ तुम्हें मारना ठीक नहीं था। इसलिए बाद में अश्विन राहाणे को अगवा कर उसे हमारी बात मानने के लिए धमकाया और लालच दिया। वह मान गया। तुम्हें यहाँ बुला लिया। फिर मैंने उसे यहाँ लाकर मार दिया।"
सारी बात जानने के बाद अंजन के लिए उसका कोई उपयोग नहीं था। उसने पॉल को मार दिया। उसकी जेब से दो फोन मिले। एक अश्विन राहाणे का था और दूसरा उसका। उसने उसका फोन निकाला। उसमें एक नंबर बॉस के नाम से था। उसने वह नंबर अपने मोबाइल पर फीड कर लिया। पॉल का फोन वहीं फेंककर वह अपनी कार में बैठकर निकल गया।
कार चलाते हुए वह सोच रहा था कि आखिर उसे कौन मरवाना चाहता है। वह समझ गया कि मुंबई में बैठे कुछ लोग जिनके तार उससे जुड़े हैं उनमें से ही किसी ने उसकी सुपारी दी होगी। वह सोचने लगा कि उसके गिरफ्तार होने से सबसे अधिक नुकसान किसे होगा ? कौन इतना पावरफुल है कि वहाँ से बैठे हुए उसकी सुपारी दे सकता है।
उसके दिमाग में एक नाम उभरा। वन मंत्री अजय मोहते का। उसने ही उसे वन विभाग की ज़मीन रिज़ार्ट के लिए दिलवाई थी। बदले में अच्छी खासी रकम ली थी। उससे पहले भी कई मामलों में वह अंजन की मदद कर चुका था। जब एक पत्रकार ने ज़मीन को लेकर आवाज़ उठाई थी तो उसका भी नाम लिया था। तब अजय मोहते ने अपने रसूख से सारा मामला दबवा दिया था।‌ अजय ही हो सकता है जिसने उसे मरवाने की सुपारी दी होगी। क्योंकी उसके पकड़े जाने पर अजय का नाम सामने आ सकता था।
वह सोचने लगा कि अभी तक उसे पुलिस से खतरा था अब उसके दोस्त भी दुश्मन बनकर उसकी जान के पीछे पड़े हैं। आज उससे कितनी बड़ी गलती हो गई थी। वह अश्विन राहाणे के झांसे में आ गया था। अगर समय रहते उसका दिमाग ना चला होता तो वह उसी जंगल में पॉल की जगह पर पड़ा होता।
वह नागेश गुप्ता के बारे में सोचने लगा। उसकी नज़र उस पर है। जब उसे पता चलेगा कि वह बच गया है तो दोबारा कोशिश करेगा। अब उसे सावधान रहना पड़ेगा। जल्द से जल्द सिंगापुर से निकलना होगा। पर उससे पहले निर्भय का मकान छोड़ना होगा। क्योंकी हो सकता है कि नागेश गुप्ता वहाँ भी पहुँच जाए।

नागेश गुप्ता बार बार पॉल का नंबर मिला रहा था। लेकिन पॉल फोन नहीं उठा रहा था। चौथी बार भी जब उसने फोन नहीं उठाया तो नागेश गुप्ता को लगा कि ज़रूर पॉल ने कुछ गडबड कर दी है। तभी फोन नहीं उठा रहा है।
वह गुस्से से आग बबूला हो उठा। मन ही मन पॉल को गालियां देने लगा कि इतना सा काम भी नहीं कर सका। अब वह अपने ऊपर खीज रहा था कि उसने पॉल को यह काम दिया ही क्यों ? अब उसके लिए अपने क्लाइंट को जवाब देना कठिन हो जाएगा। उसने कार की चाभी उठाई और यह देखने के लिए निकल गया कि पॉल ने क्या गड़बड़ कर दी। जब वह उस जगह पहुँचा तो उसे पॉल की लाश मिली। शिकार उसके चंगुल से निकल गया था। अपनी बेवकूफी पर उसे बहुत गुस्सा आया। वह यह सोचकर लापरवाह हो गया था कि अब उसका शिकार किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। पर वह बहुत चालाक निकला।

एसीपी सत्यपाल वागले और सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आमने सामने बैठे थे। दोनों अंजन की गिरफ्तारी को लेकर ही बात कर रहे थे। राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"अंजन विश्वकर्मा हमारे देश में गलत पहचान और पास्पोर्ट के साथ आया था। उसके पकड़े जाने पर हमारे देश के कानून के हिसाब से उसे सज़ा दी जाएगी।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"हमारे देश में भी उसने बहुत से गलत काम किए हैं। हम कोशिश करेंगे कि आपकी सरकार से इजाज़त लेकर उसे भारत ले जाएं।"
राजेंद्र सेल्वाराज उठकर खड़ा हो गया। उसने कहा,
"हम हमारे देश में अनाधिकृत रूप से घुसने के लिए उसे सजा ज़रूर देंगे। पर उससे पहले उसका पकड़ा जाना ज़रूरी है।"
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आमने एकदम ठीक कहा। उसका पकड़ा जाना बहुत ज़रूरी है। हमें ऐसी खबर मिली है कि कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि वह ज़िंदा पकड़ा जाए। उन्होंने उसकी हत्या के लिए किसी को पैसे दिए हैं। अगर वह मारा गया तो आपकी और हमारी पुलिस फोर्स की बदनामी होगी।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने एसीपी सत्यपाल वागले को घूरकर देखा। वह बोला,
"हम उसे गिरफ्तार करेंगे और अपने कानून के हिसाब से सजा देंगे।"
यह कहकर वह चला गया। एसीपी सत्यपाल वागले को लग रहा था कि अंजन पकड़ा गया तो उसे यहाँ से ले जाना आसान नहीं होगा।

अंजन का शक सही था। राज्य सरकार में वन मंत्री अजय मोहते ने ही अपने एक खास आदमी के ज़रिए नागेश गुप्ता को उसकी सुपारी दिलाई थी। इस समय अजय मोहते का वह आदमी उसके सामने सर झुकाए खड़ा था। अजय मोहते उसे गुस्से से घूर रहा था। उसने कहा,
"उम्मीद करते हो कि मैं तुम्हें किसी बड़े काम में लगा दूँ। लेकिन एक छोटा सा काम नहीं कर पाए।"
उस आदमी ने कहा,
"भाऊ.... नागेश गुप्ता अपने काम में माहिर है। इस बार ना जाने....."
अजय मोहते ने डांटते हुए कहा,
"किसी काम के नहीं हो तुम। अंजन सावधान हो गया होगा। अब उसे मारना इतना आसान नहीं होगा। अगर वह पुलिस के हाथ लग गया तो ठीक नहीं होगा। उस बेवकूफ नागेश गुप्ता से कहो कि जल्दी उसे ढूंढ़ कर उसका काम तमाम कर दे।"
वह आदमी चला गया। अजय मोहते चिंता में अपना सर पकड़े बैठा था। अंजन का मारा जाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था।
 
रिस्की लव - 46

निर्भय के मकान में पहुँच‌कर अंजन सोचने लगा कि अब आगे क्या करे। पुलिस ही नहीं अब उसके पुराने दोस्त भी उसके पीछे पड़ गए थे। वह और अधिक परेशान हो गया था। उसे किसी भी तरह से इस स्थिति से निकलना था। लेकिन कोई राह नहीं दिख रही थी।
अपने लिए पेग बनाकर वह पीने लगा। शराब के कुछ घूंट अंदर जाने के बाद उसे अच्छा महसूस हुआ। अब उसने दिमाग दौड़ाना शुरू किया। उसके दो दुश्मन पैदा हो गए थे। एक पुलिस और दूसरा अजय मोहते। उसे उन दोनों से बचना था। पुलिस उसे किसी भी कीमत पर गिरफ्तार करना चाहती थी। अजय अपने स्वार्थ के लिए यह चाहता था कि वह पुलिस के हाथ ना लगे। इसलिए उसे मरवाने की सुपारी दी थी।
यह सोचते हुए एक बात उसके दिमाग में आई। उसके एक तरफ कुआं है दूसरी तरफ खाई। खाई यानी पुलिस के चंगुल में फंसकर वह निकल नहीं सकता। कुएं में कूदने पर एक उम्मीद हो सकती है। अजय उसे सिर्फ इसलिए मारना चाहता है कि उसके गिरफ्तार होने से उसके भी फंसने का खतरा है। उसे अपना डर छोड़कर उसके साथ सौदा करना होगा। उससे कहना होगा कि वह उसे सुरक्षित भागने में मदद करे। अगर वह पुलिस के हाथ आ गया तो पहला नाम उसका ही लेगा।‌
पर इसके लिए अजय मोहते को यह यकीन दिलाना ज़रूरी था कि दूर से बैठकर उसे मरवा देना आसान नहीं है।‌ अंजन सोचने लगा कि यह काम कैसे करे। बहुत सोचने पर उसने तय किया कि वह नागेश गुप्ता को मारकर अजय मोहते को संदेश देगा कि वह कमज़ोर नहीं पड़ा है।
अंजन अपना प्लान बनाने लगा।

नागेश गुप्ता बहुत गुस्से में था। अजय मोहते के आदमी ने उसे फोन करके बहुत कुछ सुनाया था। अपनी बेइज्जती उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। अब उसे किसी भी कीमत पर अंजन को मारना था।‌ वह नहीं जानता था कि सिंगापुर में अंजन कहाँ रह रहा है। यह बात अश्विन राहाणे को भी नहीं पता थी। उसके पास केवल अंजन का फोन नंबर था।
नागेश गुप्ता ‌वह जगह जानता था जहाँ अंजन पासपोर्ट के चक्कर में गया था। वह उस आदमी से मिला और कहा कि जब अंजन उसके पास आए तो उसे किसी तरह उलझा कर रखे। उसे फौरन फोन कर दे।‌
जो समय अंजन को दिया था वह उसमें उस आदमी से मिलने नहीं गया। नागेश अब और समय नहीं लगाना चाहता था। उसने उस आदमी से कहा कि वह फोन करके अंजन को मिलने बुलाए। उस आदमी ने खोजा पर उसे अंजन का नंबर नहीं ‌मिला। उसने नागेश से कहा कि शायद उससे नंबर खो गया ‌है।
पॉल की लाश के पास नागेश गुप्ता को अश्विन का फोन मिला था। उसमें से उसने भी अंजन का नंबर नोट कर लिया था।‌ उसने वह नंबर दे दिया।‌

अंजन के फोन की घंटी बजी। उसने फोन उठाया। उधर से उसी आदमी का फोन था जिससे वह पासपोर्ट के लिए मिला था। वह समझ गया कि कोई उससे फोन करवा रहा है। वह नागेश गुप्ता ही हो सकता है। क्योंकी उस आदमी को अंजन ने अपना नंबर दिया ही नहीं था। उसके पास तो अश्विन का नंबर था। अंजन ने उससे कहा,
"मैं इस समय खतरे में हूँ। इसलिए तुम्हारे पास नहीं आ सकता हूँ। लेकिन मेरे लिए पासपोर्ट बनवाना भी बहुत ज़रूरी है। मैं तुम्हें कुछ देर में फोन करके वह जगह बताऊँगा जहाँ तुम मुझसे आकर मिल सकते हो।"
अंजन जानता था कि उस आदमी की जगह नागेश गुप्ता ही आएगा। उसने ऐसी जगह के बारे ‌में सोचना शुरू कर दिया जहाँ वह नागेश गुप्ता का सामना कर सके। सागर खत्री उसे अपने एक जगह ले गया था। उसके आसपास जंगल था। वहाँ पास में एक बंद पड़ी फैक्ट्री थी। सागर ने वह जगह खरीद ली थी। उसका प्लान वहाँ एक गेस्टहाऊस बनाने का था।
अंजन ने उस आदमी को फोन करके उसी जगह आने को कहा। वह दिए गए समय से बहुत पहले ही वहाँ पहुँच गया और नागेश गुप्ता के आने की राह देखने लगा।

अंजन उस फैक्ट्री की छत पर चढ़कर बैठा था। यहाँ से वह कच्चा रास्ता दिखाई पड़ रहा था जो मुख्य सड़क से फैक्ट्री की तरफ आता था। गाड़ी फैक्ट्री के सामने नहीं आ सकती थी। जो भी आता उसे अपनी कार कोई सौ मीटर पहले ही छोड़कर पैदल आना पड़ता।
समय होने के कोई दस मिनट बाद अंजन को एक कार मुख्य सड़क से उतरकर कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ती हुई दिखाई पड़ी। वह सौ मीटर पहले ही उस कांटेदार बाड़ के पास रुक गई जहाँ से पैदल आना था। कार से वही आदमी उतरा जिससे वह पासपोर्ट के लिए मिला था। उस आदमी ने इधर उधर देखा। फिर फैक्ट्री की तरफ निगाह डाली। कुछ देर रुक कर वह फैक्ट्री की तरफ बढ़ गया।
अंजन को आश्चर्य हो रहा था कि नागेश गुप्ता की जगह वह क्यों आया है। लेकिन कार से कोई और नहीं उतरा था। अंजन को लगा कि वह अकेला ही आया है। पर उसे इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था। तेज़ी से छत से उतरकर नीचे आ गया। एक दीवार के पीछे छिप गया। कुछ ही समय में वह आदमी फैक्ट्री के आहते में था। उसने अपना फोन निकाला और अंजन को कॉल किया।
फोन उठाकर अंजन ने उससे बात की। उसे फैक्ट्री के पिछले हिस्से में आने को कहा। उसे लग रहा था कि यह एक चाल है। वह आदमी ‌अकेला नहीं आया है। उससे बात करके वह आदमी पिछले हिस्से की तरफ चला गया। अंजन भागकर फिर छत पर चढ़ गया। उसने देखा कि कार का पिछला दरवाज़ा खुला। एक अधेड़ आदमी नीचे उतरा। वह फोन पर किसी से बात कर रहा था। फोन काटकर वह फैक्ट्री की तरफ बढ़ा। उसे सारा मामला समझ आ गया। वह नागेश गुप्ता था। वह उसी आदमी से बात कर रहा था। वह तेज़ी से अपना दिमाग दौड़ाने लगा।
वह भागकर छत के दूसरी तरफ गया। यहाँ पत्थर के कुछ स्लैब एक के ऊपर एक रखे हुए थे। उसने अंदाज़ लगाया कि वह यहाँ से सबसे ऊपर वाले स्लैब पर कूद सकता है। ऐसा करके वह जल्दी फैक्ट्री के पिछले हिस्से में पहुँच जाएगा। वह ऊपर से उस स्लैब पर कूदा। उसके बाद स्लैब के नीचे उतरा और भागकर फैक्ट्री के पीछे पहुँच गया।
वह उस आदमी के पास पहुँचा। उसे आया देखकर वह आदमी इधर उधर देखने लगा। अंजन ने कहा,
"किसे देख रहे हो ?"
यह सुनकर वह आदमी घबरा गया। अंजन चीते की फुर्ती से उस पर लपका। उसे गर्दन से पकड़ लिया। उसके पास एक छोटा सा चाकू था। उससे उस आदमी का गला काट दिया। उसके बाद उसकी लाश झाड़ियों में छिपाकर खुद भी छिप गया।
कुछ ही देर में नागेश गुप्ता वहाँ पहुँच गया। उसके हाथ में गन थी। लेकिन उसे वहाँ ना तो अपना आदमी दिखाई पड़ा और ना ही अंजन। गन लेकर वह सीधे कदमों से आगे बढ़ा। उसे झाड़ियों के पीछे से खून की धार निकलती हुई दिखाई दी। वह समझ गया कि खतरा है। जैसे ही वह भागने के लिए घूमा अंजन की ज़ोरदार लात उसे पड़ी। वह गिर पड़ा। गन भी छिटक कर दूर गिर गई। जब तक वह कुछ समझता अंजन उसकी छाती पर चढ़कर बैठ गया। उसने उसके सर पर गन लगा दी। अंजन ने उससे कहा,
"मुझे मारना चाहते हो। पहले अश्विन राहाणे के ज़रिए मुझे फंसाकर पॉल को मुझे मारने भेजा था। अब उस आदमी के ज़रिए मुझे फंसाना चाहते थे। लेकिन तुम्हारा खेल मैं समझ गया था। मैं तुम्हारे जाल में नहीं फंसा। लेकिन तुम मेरे जाल में फंस गए।"
अंजन ने बिना देर किए माथे के बीच में गोली मार दी। नागेश गुप्ता मर गया। अंजन ने नागेश की जेब से उसका फोन निकाला।‌ उससे उसकी लाश का एक वीडियो बनाया। फिर उसका फोन लेकर वहाँ से चला गया। वह तेज़ी से भागते हुए फैक्ट्री के अगले हिस्से में आया। वह एक पत्थर पर बैठकर नागेश गुप्ता का फोन बजने का इंतज़ार करने लगा। उसे पता था कि अजय मोहते यह जानने की कोशिश करेगा कि नागेश गुप्ता ने उसे मारा या नहीं।‌
उसका अंदाज़ा सही था। करीब पंद्रह मिनट के बाद ही नागेश गुप्ता का फोन बजा। अंजन ने कॉल रिसीव कर ली। उधर से अजय मोहते के आदमी की आवाज़ आई। वह पूँछ रहा था कि अंजन का काम तमाम हुआ कि नहीं। अंजन ने कहा,
"अपने आका अजय मोहते को कह देना कि अंजन को मारना आसान नहीं है।"
बदली हुई आवाज़ सुनकर उस आदमी ने कहा,
"कौन हो तुम ? नागेश कहाँ है ?"
"अभी एक वीडियो आएगा। साथ में एक मैसेज भी। अपने आका को दिखा देना।"
अंजन ने फोन काट दिया। नागेश गुप्ता की लाश का वीडियो एक मैसेज के साथ भेज दिया। उसके बाद उसने नागेश गुप्ता के फोन का सिम निकाल कर बर्बाद कर दिया। फोन को पत्थर से कुचल कर तोड़ दिया।
अपना काम करने के बाद अंजन भागकर मुख्य सड़क पर उस जगह आया जहाँ उसकी कार खड़ी थी। वह उसमें बैठकर चला गया।

अजय मोहते के आदमी ने अंजन का भेजा हुआ वीडियो और मैसेज उसे दिखाया। नागेश गुप्ता की लाश देखकर अजय मोहते के माथे पर पसीना आ गया। उसने अंजन का मैसेज पढ़ा।
'वन मंत्री श्रीमान अजय मोहते नमस्कार....आप इतने दिनों में मुझे पहचान नहीं पाए....किन लोगों को भेजा था मुझे मारने के लिए....खैर अब इतना जान लीजिए कि मुझे मारना आसान नहीं है..... इसलिए मेरी बात सुनिए....दिए हुए नंबर पर बात कीजिएगा....'
अजय मोहते ने मैसेज में लिखा नंबर अपने मोबाइल पर फीड कर लिया। उसके बाद सामने सर झुकाए खड़े अपने आदमी को घूरकर देखा। फिर उसका फोन उसके मुंह पर फेंक दिया।
 
रिस्की लव - 47

एसीपी सत्यपाल वागले चाहता था कि अंजन सिंगापुर पुलिस की जगह उसके हाथ लगे। इसके लिए उसने अपनी कोशिशें तेज़ कर दी थीं। उसने अपनी टीम को कहा था कि सिंगापुर के अलग अलग हिस्सों में जाकर अंजन के बारे में पता करें।
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी उसकी टीम में शामिल था। वह सिंगापुर के विभिन्न डिस्को, पब्स, रेस्टोरेंट्स में अंजन के बारे में पता करते हुए घूम रहा था। लेकिन कहीं से भी कुछ पता नहीं चला था। उसने दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी अंजन के बारे में पता करने की कोशिश की। एक ज्वैलरी शॉप से उसे अच्छी खबर मिली। उस ज्वैलरी शॉप के एक कर्मचारी ने अंजन की तस्वीर देखकर बताया कि उसे ऐसा लगता है कि शायद वह आदमी उस ज्वैलरी शॉप में आया था। उसके पास कुछ सामान था जिसे वह बेचना चाहता था। उस कर्मचारी ने नदीम अंसारी से कहा कि वह उसके मैनेजर से बात करे। वह सही तरह से बता सकते हैं। क्योंकी जब कोई कुछ बेचने आता है तो बिना मैनेजर की अनुमति के हम उसका सामान नहीं खरीदते हैं।
नदीम अंसारी फौरन मैनेजर से मिला। उसे अंजन की तस्वीर दिखाते हुए उससे कहा,
"यह आदमी आपकी ज्वैलरी शॉप में कुछ कीमती सामान बेचने आया था। क्या आप उसके बारे में कुछ बता सकते हैं ?"
मैनेजर ने ध्यान से अंजन की तस्वीर को देखा। पर नदीम की बात का जवाब देने की जगह उसने कहा,
"आप कौन हैं ? यह सारी पूँछताछ क्यों कर रहे हैं ?"
नदीम अंसारी ने उसे अपना आईडी कार्ड दिखाते हुए कहा,
"मैं मुंबई पुलिस में इंस्पेक्टर नदीम अंसारी हूँ। यहाँ हमारी टीम अंजन विश्वकर्मा नाम के एक अपराधी को तलाश कर रही है। जिसकी तस्वीर मैंने आपको दिखाई है।"
मैनेजर ने एक बार फिर तस्वीर को ध्यान से देखकर कहा,
"यह आदमी हमारी शॉप पर आया था। लेकिन इसने अपना नाम जेम्स फर्नांडिस बताया था।"
"मैंने आपको बताया था कि वह अपराधी है। इसलिए नाम बदल लेना कोई बड़ी बात नहीं है। आपने उसका सामान खरीदा था।"
"हाँ.... हमने जांच करके देखा था। खरा माल था।‌ हमने उसकी उचित कीमत दे दी।"
"उसके पास सामान की रसीद थी।"

इस सवाल पर मैनेजर चुप हो गया। नदीम अंसारी ने कहा,
"आप मुझे उसकी सीसीटीवी फुटेज दिला सकते हैं।"
मैनेजर तैयार हो गया। सीसीटीवी फुटेज लेकर नदीम अंसारी एसीपी सत्यपाल वागले के सामने हाजिर हुआ।
एसीपी सत्यपाल वागले ने सीसीटीवी फुटेज देखी। उसके बाद नदीम अंसारी की तारीफ करते हुए कहा,
"वेलडन...यह ज्वैलरी शॉप किस इलाके में है ?"
"सर सिंगापुर सिटी में ही है।"
"तो फिर अंजन को इस इलाके में ही खोजो।"
"ठीक है सर.... लेकिन हमें सिंगापुर पुलिस की मदद भी लेनी पड़ेगी।"
"अभी अपने स्तर पर काम करो। जब ज़रूरत होगी तो उनकी मदद भी लेंगे।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी चला गया। एसीपी सत्यपाल वागले को उसके सूत्रों से पता चला था कि किसी नागेश गुप्ता को अंजन को मारने की सुपारी दी गई है। इस खबर के बाद उसने अपने आदमी से नागेश गुप्ता के बारे में पता करने को कहा था। उसके आदमी ने ईमेल के ज़रिए उसे नागेश गुप्ता के बारे में कुछ अहम जानकारियां भेजी थीं। इंस्पेक्टर नदीम अंसारी के जाने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले ईमेल देखने लगा।
ईमेल में नागेश गुप्ता की एक तस्वीर के साथ कुछ बातें लिखी हुई थीं। नागेश गुप्ता उत्तर प्रदेश का रहने वाला था।‌ छोटी उम्र में ही उसने अपराध करने शुरू कर दिए थे। लेकिन बीस साल की उम्र में अपने पहले कत्ल के बाद उसने पैसे लेकर कत्ल करने को अपना रोज़गार बना लिया। इस काम में इतनी महारत हासिल की कि उत्तर प्रदेश से निकल कर मुंबई आ गया। अपनी लाइफ स्टाइल के कारण उसका बड़ी बड़ी पार्टियों ‌में आना जाना था।

पुरानी फैक्ट्री के पास पुलिस की गाड़ी आकर रुकी। एक आदमी भागकर उसके पास गया। उसने पुलिस को सूचना दी थी कि फैक्ट्री में दो लाशें पड़ी हैं। इंस्पेक्टर चेंग ली उसके साथ ‌उस जगह पर पहुँचा जहाँ दोनों लाशें थीं। कुछ देर में फौरेंसिक टीम भी वहाँ पहुँच गई। वह अपना काम करने लगे। इंस्पेक्टर चैंग ली उस आदमी को एक तरफ ले जाकर पूँछताछ करने लगा।
उस आदमी ने बताया कि वह कहीं जा रहा था। इस रास्ते में नेचर कॉल के लिए रुका। फिर कुछ देर यहाँ चहलकदमी करने लगा। टहलते हुए फैक्ट्री तक आया। पुरानी को देखने लगा। जब पिछले हिस्से में पहुँचा तो एक लाश दिखाई दी। कुछ दूर झाड़ियों के पास खून दिखा। वहाँ जाकर देखा तो उसके पीछे भी लाश थी। पहले तो वह घबरा गया और भागने के बारे में सोचने लगा। फिर बाद में उसे लगा कि पुलिस को खबर देना ठीक रहेगा।
उस आदमी के जाने के बाद इंस्पेक्टर चैंग ली ने दोनों लाशों को ध्यान से देखा। उनमें से एक भारतीय था। उसे सूचना मिली थी कि भारत से पुलिस की एक टीम किसी अपराधी को तलाश करने आई है। उसे लगा कि इस आदमी का संबंध उस अपराधी से हो सकता है।‌
उसे पता था कि उस अपराधी का केस की जांच सिंगापुर पुलिस की तरफ से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को सौंपी गई है। उसने राजेंद्र सेल्वाराज को फोन मिलाया। उसे सारी बात की खबर दी। राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे सारे डीटेल्स भेजने को कहा।

अंजन का मोबाइल उसके सामने रखा था। वह अजय मोहते के फोन ‌का इंतज़ार कर रहा था।‌ वह जानता था कि नागेश गुप्ता की लाश का वीडियो देखकर अजय मोहते परेशान हो गया होगा। मैसेज में लिखे उसके नंबर पर फोन ज़रूर करेगा।
उसने भी सोच लिया था कि उसे कैसे और क्या बात करनी है। वह अजय मोहते से इस तरह बात करना चाहता था कि उसे यह लगे कि अंजन बेखौफ है। इसलिए उसने बिना डरे नागेश गुप्ता का भी कत्ल कर दिया।
उसके फोन की घंटी बजी। वह समझ गया कि यह फोन अजय मोहते का ही है। फोन उठाकर उसने कहा,
"नमस्कार वन मंत्री जी....."
अजय मोहते ने इधर उधर किए बिना सीधा सवाल किया,
"क्या बात करनी है तुम्हें।"
अंजन ने पहले जैसे स्वर में ही जवाब दिया,
"यही वन मंत्री जी कि आप मुझे मरवाने के लिए बेकार की मेहनत मत कीजिए। वीडियो देखा होगा आपने। आपके उस नागेश मेहता का क्या हाल हुआ। इसलिए यह सब छोड़कर वह कीजिए जो आपके फायदे में हो।"
दूसरी तरफ कुछ सेकेंड्स ‌के लिए शांति रही। फिर अजय मोहते ने कहा,
"मेरा फायदा किस चीज़ में है ?"
"मेरा साथ देने में आपका फायदा है।"
"अगर साथ ना दिया तो।"
अजय मोहते बड़े शांत तरीके से बात कर रहा था। वह दिखाना चाहता था कि जैसे अपने आदमी के मारे जाने से उसे कोई फर्क ही ना पड़ा हो। अंजन जानता था कि अजय मोहते भले ही कुछ भी दिखाने का प्रयास करे लेकिन अंदर से वह डरा हुआ है। उसने अपना वही अंदाज़ बरकरार रखते हुए कहा,
"वन मंत्री महोदय आप अच्छी तरह से जानते हैं कि ऐसा होने पर मैं भी कोई लिहाज़ नहीं करूँगा। मेरा भी मुंह खुलेगा।"
दूसरी तरफ से अजय मोहते इस बार कुछ कड़क स्वर में बोला,
"धमकी दे रहे हो....मत भूलो कि मैं अभी भी सरकार में मंत्री हूँ और तुम अब कुछ नहीं रह गए हो।"
अंजन पहले तो ज़ोर से हंसा। उसके बाद ‌बोला,
"वन मंत्री जी इसे धमकी समझिए या चेतावनी। लेकिन मेरे पास आपके बारे में पुलिस से बातचीत करने के लिए बहुत कुछ है। आपने सही कहा मैं कुछ नहीं बचा। पर डूबते हुए अगर मैंने आपका कॉलर पकड़ लिया तो आपका भी सबकुछ डूब जाएगा।"
अजय मोहते ने गुस्से से कहा,
"दो कौड़ी का गुंडा मुझे धमकी दे रहा है।"
इस बार अंजन ने भी गुस्से से कहा,
"अजय मोहते....इस दो कौड़ी के गुंडे के साथ कई शामें शराब पीते हुए बिताई हैं। मेरे दम पर बहुत ऐश भी किया है। माल भी बनाया है। अगर बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी।"
कुछ क्षण दोनों लोग चुप रहे। अंजन ने कहा,
"अजय मोहते मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है। बस मुझे सिंगापुर से निकलने में मदद कर दो। फिर मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंँगा। तुम भी निश्चिंत रहना।"
अजय मोहते कुछ नरमी के साथ बोला,
"कहाँ जाना चाहते ‌हो ?"
"थाईलैंड जाना ‌है मुझे। अगर सिंगापुर से सुरक्षित निकल गया तो पुलिस के हाथ नहीं आऊँगा।"
कुछ रुक कर अजय मोहते ने कहा,
"ठीक है देखता हूँ...."
"वन मंत्री जी मुझे मरवाने के लिए आदमी भेजने की जगह मेरी यह मदद कर दीजिए।"
अजय मोहते ने उस तरफ से फोन काट दिया।

फोन काटने के बाद अजय मोहते का चेहरा एकदम लाल हो गया था। अंजन ने उसे खुले शब्दों में धमकी दी थी। वह उसे धमका कर अपना काम करवाना चाहता था। यह बात अजय मोहते से बर्दाश्त नहीं हो रही थी।
लेकिन वह भी उसके सामने हार नहीं मानना चाहता था। उसने अपना दिमाग दौड़ाना शुरू किया। वह कुछ ऐसा करना चाहता था कि अंजन पुलिस के हाथ ना आए पर वह उसे उसकी उद्दंडता की सज़ा दे सके।
वह उठकर कमरे में इधर से उधर चक्कर लगाने लगा। कुछ देर में उसके दिमाग में एक बात आई। उसके चेहरे पर मुस्कान खिल गई। उसने कहा,
"अंजन विश्वकर्मा तुम मुझे अपने इशारों पर नचाना चाहते हो। अब मैं तुम्हें ऐसी मात दूँगा कि याद रखोगे।"
उसने अपना फोन उठाया और एक नंबर मिलाया।
 
रिस्की लव - 48

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इंस्पेक्टर चैंग ली द्वारा भेजी गई जानकारी लेकर एसीपी सत्यपाल वागले के पास गया। उसे तस्वीरें दिखाकर बोला,
"इन दोनों की लाश शहर के बाहरी हिस्से में एक पुरानी फैक्ट्री के पिछले हिस्से में मिली हैं। एक तो नेटिव है। लेकिन दूसरा भारतीय लग रहा है। क्या आप इसे जानते हैं ?"
नागेश की लाश की तस्वीर देखने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले ईमेल में मिली तस्वीर को याद करने लगा। ईमेल से मिली तस्वीर कुछ साल पुरानी थी। लेकिन लाश की शक्ल से मिल रही थी। एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"मुझे खबर मिली थी कि भारत में कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि अंजन पुलिस के हाथ लगे। उन्होंने अंजन को मरवाने की सुपारी दी थी। जिस आदमी को सुपारी दी गई थी उसका नाम नागेश गुप्ता है। मुझे ऐसा लगता है कि यह लाश नागेश गुप्ता की है।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को एसीपी सत्यपाल वागले का यह दोस्ताना व्यवहार अच्छा लगा। उसने कहा,
"थैंक्यू एसीपी सत्यपाल वागले। आपने हमारी मदद की। आपको भी जिस तरह की मदद की ज़रूरत हो हम करने को तैयार हैं। अंजन हम दोनों ही मुल्क का अपराधी है।"
कुछ सोचकर एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज एक और मदद की है हमने आपकी। मेरी टीम के इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने अंजन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"यह तो बहुत अच्छी बात है। आप जानकारी हमारे साथ साझा कीजिए। हम अंजन को पकड़ने में मदद करेंगे।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को वह सारी बात बता दी जो इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने पता की थीं। उसके बाद उसने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज जिस ज्वैलरी शॉप में अंजन गया था वह सिंगापुर सिटी में बही है। आपके हिसाब से फैक्ट्री के बाहरी हिस्से में है। इसका मतलब अंजन भी सिंगापुर सिटी के आसपास ही है।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"एसीपी सत्यपाल वागले नागेश का कत्ल अंजन ने ही किया होगा। इसका मतलब है कि उसे खबर मिल गई है कि कुछ लोग उसे जान से मारना चाहते हैं।"
"बिल्कुल सही अनुमान लगाया आपने। वह कीमती सामान बेचकर पैसे जुटा रहा है। इसका मतलब है कि वह सिंगापुर से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है।"
"अंजन जो भी करे एसीपी सत्यपाल वागले पर हमारे हाथों से बचकर भाग नहीं पाएगा।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने एसीपी सत्यपाल वागले से हाथ मिलाते हुए कहा,
"थैंक्यू फॉर कोऑपरेशन। हम एक दूसरे की मदद करेंगे तब ही उसे पकड़ पाएंगे।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज चला गया। एसीपी सत्यपाल वागले कमरे में टहलते हुए कुछ सोचने लगा।

अंजन आश्वस्त था कि अजय मोहते उसकी सहायता ज़रूर करेगा। वह जल्द से जल्द थाईलैंड जाना चाहता था ताकी उसकी ज़िंदगी आगे बढ़ सके। उसने सोम आर्य से अब तक कोई संपर्क नहीं किया था। वह सीधा थाईलैंड पहुँचकर उससे मिलना चाहता था। इसलिए अब उससे और इंतज़ार नहीं हो रहा था।
सबकुछ खोकर उसके सीने में एक आग जल रही थी। यह आग तभी बुझ सकती थी जब वह फिर से वही मुकाम हासिल कर ले जो उसने खोया है। उसे अपने ऊपर यकीन था कि अगर उसे थोड़ी सी भी मदद मिल गई तो वह अपना मुकाम हासिल कर लेगा। उसकी मदद केवल सोम आर्य ही कर सकता था।
वह खुश था कि उसने सोम आर्य के साथ पार्टनरशिप की थी। उसका यह फैसला आज अंधेरे में उसके लिए उजाले की एक किरण था। कुछ एहसान भी थे जो उसने सोम आर्य पर किए थे। अब वह उन्हीं एहसानों का बदला चाहता था।
उसने तय कर लिया था कि सोम आर्य से मदद मिलने के बाद वह कौन सा रास्ता होगा जिस पर चलकर वह अपना मुकाम हासिल करेगा। सही गलत का भेद उसके लिए कभी रहा ही नहीं था। उसे बस तेज़ क़दमों से चलकर अपनी मंज़िल तक पहुँचना था।
वह तरुण काला के फिशिंग बिज़नेस की आड़ में मानव तस्करी करता था। उसने अपना खोया हुआ मुकाम पाने के लिए यही राह चुनी थी। इस बिज़नेस के बारे में उसके पास अनुभव और जान पहचान दोनों थी। वह उसका प्रयोग करके खूब पैसा कमाना चाहता था।
उसने तय कर लिया था कि अपना सबकुछ पा लेने के बाद उन लोगों से हिसाब चुकता करेगा जिन्होंने इस समय में उसे धोखा दिया था।
उसने अपने लिए एक बड़ा सा पेग बनाया और इत्मीनान से बैठकर पीने लगा। इस समय वह अच्छे मूड में था। शराब पीते हुए उसे मीरा की याद आई। उसके साथ जब वह पहली बार मिला था तो उसके लिए एक आइस टी ऑर्डर की थी। मीरा अपनी आइस टी पी रही थी और वह उसे निहार रहा था।

उसका मन हुआ कि वह मीरा से बात करे। जबसे वह लंदन वापस गई थी सिर्फ एक बार ही उससे बात हुई थी। उसके बाद ना तो मीरा ने उसे फोन किया और ना ही वह उसे फोन कर पाया। उसने अपना फोन उठाकर लंदन मीरा को कॉल लगाई। कुछ देर रिंग होने के बाद मीरा ने फोन उठाया। उसने बहुत धीमे स्वर में हैलो कहा। अंजन को उसका इस तरह बात करना ठीक नहीं लगा। उसने मीरा से पूँछा की क्या उसकी तबीयत ठीक नहीं है। मीरा ने उसे बताया कि उसे बुखार है। लेकिन घबराने की बात नहीं है। उसने डॉक्टर को दिखा लिया है।‌ दवाएं ले रही है। बाकी सब ठीक है। वह उस दिन का इंतज़ार कर रही है जब वह उसके पास लंदन आएगा।
मीरा ने फोन रख दिया। उसने बार बार यह बात तो की थी कि उसे बस बुखार है जो ठीक हो जाएगा। लेकिन अंजन को कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वह परेशान हो गया था। मीरा से मिलने के लिए तड़प उठा था। पर इस समय वह उसके पास जाने की स्थिति में नहींं था।

अजय मोहते ने अपने एक आदमी को फोन मिलाया था। वह आदमी उसके कहने पर छोटे छोटे काम करता था। अजय मोहते जो काम उससे करवाना चाहता था वह अच्छी ‌तरह से कर सकता था।
उसके आदमी ने फोन उठाया तो उसने आदेश दिया कि वह अंजन के जासूस एंथनी को उठाकर लाए। उसने अंजन के मुंह से कई बार उसका नाम सुना था। अंजन ने उसे बताया था कि जब भी उसे किसी की जासूसी करवानी होती है तो वह एंथनी को ही यह काम सौंपता है।
अजय मोहते को यह पता था कि अपने ऊपर हमला होने के बाद अंजन ने एंथनी को ही हमलावर के बारे में पता करने के लिए बुलाया था। अब अजय मोहते चाहता था कि एंथनी से उस हमले के बारे में पता कर अंजन के दुश्मनों को अपने साथ मिला लिया जाए।

निर्भय और मानवी का पता अंजन को बताने के बाद एंथनी अपने पैसे लेकर कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश अपने घर चला गया था। वहाँ कुछ दिन ठहर कर वह वापस लौटा तो उसे अंजन के बारे में पता चला। वह मुंबई से फरार था और पुलिस उसके पीछे थी।
एंथनी जब तक किसी के लिए काम करता था तब तक ही उससे मतलब रखता था। उसका काम खत्म हो जाने के बाद उस शख्स के साथ क्या होता है उससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था। इसलिए अंजन के बारे में जानकर भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा था।
इस समय वह एक नए क्लाइंट के केस पर काम कर रहा था। वह अपने काम के लिए अपने घर से निकल ही रहा था कि कुछ लोग जबरन उसके घर में घुस गए। एक ने उसके सर पर गन रखकर कहा,
"हमारे साथ चलो।"
एंथनी ने बिना घबराहट दिखाए बड़ी शांति के साथ कहा,
"कौन हो तुम लोग ? कहाँ ले जाना चाहते हो ?"
जिस आदमी ने गन तान रखी थी वह बोला,
"चुपचाप चलो। अपने आप पता चल जाएगा।"
एंथनी को उनके साथ जाना ही ठीक लगा। वह बिना किसी प्रतिरोध के उनके साथ चला गया।
उसे एक वैन में बैठा कर ले जाया जा रहा था। उसने एक दो बार जानने की कोशिश भी की पर किसी ने उसे कुछ नहीं बताया।

वैन कुछ देर बाद अजय मोहते के फार्म हाउस में घुसी। अजय मोहते एंथनी के आने की राह देख रहा था। उसके आदमी ने फोन करके उसे बता दिया था कि वह एंथनी को लेकर आ रहे हैं।
एंथनी को वैन से उतारा गया। उसने आसपास देखा और मुस्कुरा दिया। वह पहचान गया कि यह अजय मोहते का फार्म हाउस है। एक बार वह अंजन से मिलने यहाँ आ चुका था।
उसे अजय मोहते के पास ले जाया गया। अजय मोहते को देखकर एंथनी ने मुस्कुरा कर कहा,
"अब मंत्रियों को भी मेरे जैसे अदना इंसान की आवश्यकता पड़ने लगी।"
अजय मोहते ने उसे घूरकर देखा। फिर कहा,
"तुम अंजन के लिए जासूसी करते थे।"
"तो आपको मुझसे जासूसी करवानी है। इसके लिए इन आदमियों को भेजकर अगवा कराने की क्या ज़रूरत थी। वैसे मैं एक बार में एक ही केस लेता हूँ। इस समय मैं एक केस पर काम कर रहा हूँ।"
अजय मोहते ने डांटते हुए कहा,
"चुप करो... बहुत बोलते हो तुम। मुझे तुमसे अंजन के बारे में जानना है।"
फार्म हाउस में आते ही एंथनी जान गया था कि उसे अंजन के बारे में जानने के लिए बुलाया गया है। वह जानबूझकर इधर उधर की बातें कर रहा था।
अजय मोहते की बात सुनकर वह मुस्करा दिया।
 
रिस्की लव - 49

एंथनी अजय मोहते की बात सुनकर मुस्कुरा रहा था। उसे इस तरह मुस्कुराते हुए देखकर अजय मोहते को गुस्सा आ रहा था। वह सोच रहा था कि किस जोकर को अंजन ने अपना जासूस बनाया था। उसने गुस्से में कहा,
"दांत क्या निकाल रहे हो ?"
एंथनी ने उसी तरह मुस्कुराते हुए कहा,
"सोच रहा था कि राज्य सरकार में इतने बड़े मंत्री को आज मुझसे पूँछताछ करने की जरूरत पड़ गई। वैसे किस अंजन की बात कर रहे हैं आप ? मैं जासूस हूँ। कई लोगों के लिए काम करता हूँ। कई लोगों से मुलाकात होती है। सबके नाम याद नहीं रहते हैं।"
अजय मोहते ने उसे घूरकर देखा। फिर गुस्से में कहा,
"मेरे आदमी याद दिला देंगे। अच्छा होगा कि तुम ही याद कर लो।"
"सर क्यों अपने आदमियों को परेशान करेंगे। वैसे मैं सोच रहा था कि अंजन से आप जैसे बड़े आदमी को क्या खतरा हो सकता है। मेरे जैसे अदना जासूस को बुलवा कर आप उसके बारे में जानना चाहते हैं।"
एंथनी की इस बात ने अजय मोहते के गुस्से की आग को और अधिक भड़का दिया। वह उठकर खड़ा हुआ और एंथनी को एक थप्पड़ जड़ कर बोला,
"बकवास मत करो। मुझे बताओ कि अंजन विश्वकर्मा पर जो हमला हुआ था वह किसने करवाया था ?"
एंथनी ने उसी तरह से जवाब दिया,
"थप्पड़ से यह तो समझ आ गया कि आप बहुत परेशान हैं। लेकिन मैं नहीं जानता हूँ कि अंजन विश्वकर्मा पर हमला किसने करवाया।"
"झूठ मत बोलो। अंजन ने यह पता करने का काम तुम्हें सौंपा था।"
"मैं अपने क्लाइंट की जानकारी किसी और को नहीं देता हूँ।"
अजय मोहते को समझ आ गया था जिसे वह जोकर समझ रहा था वह बहुत ही घाघ है। उससे आसानी से कुछ पता नहीं किया जा सकता है। उसने नरमी के साथ कहा,
"देखो यह जानना बहुत ज़रूरी है। मेरे लिए भी और अंजन के लिए भी। तुम्हें पता है कि अंजन मुश्किल में है। मैं उसकी मदद करना चाहता हूँ।"
एंथनी एक बार फिर मुस्कुराने लगा। वह बड़ी अजीब तरह से अजय मोहते को देख रहा था। उसने कहा,
"आप अंजन विश्वकर्मा की मदद करेंगे ?"
"हाँ...."
"कैसे ? आपको पता है कि वह कहाँ है ?"
अजय मोहते इस सवाल पर कुछ सकपका गया। उसने कहा,
"हाँ मेरी बात अंजन से हुई थी।"
एंथनी हंसा। अजय मोहते उसकी इस हंसी का कारण नहीं समझ पाया। उसने कहा,
"हंसने की क्या बात है ?"
"मैं सोच रहा था कि जब आप अंजन के संपर्क में हैं तो फिर मुझे यहाँ बुलाने की तकलीफ क्यों की। मैं जब कोई केस पूरा करता हूँ तो फईनल रिपोर्ट देकर ही अपनी फीस लेता हूँ। अंजन को मैंने फाइनल रिपोर्ट दे दी थी। आप उससे पूँछ सकते हैं कि हमला करवाने वाला कौन था।"
अजय मोहते कुछ देर तक उसके चेहरे को देखता रहा। वह सोच रहा था कि एंथनी बहुत ही चालाक इंसान है। वह आसानी से हाथ आ गया है। पर बात इतनी आसानी से नहीं मानेगा। अजय मोहते को अपनी तरफ घूरते देखकर एंथनी ने कहा,
"मतलब यह है कि ज़रूरत आपकी है। मैं फीस लेकर अपने क्लाइंट्स के लिए काम करता हूँ। आप मेरी फीस देकर मेरे क्लाइंट बन सकते हैं।"
अजय मोहते ने कहा,
"मुझसे सौदेबाज़ी करना चाहते हो।"
"नहीं सीधा सीधा लेनदेन। मेरी जानकारी की कीमत चुका दीजिए। मैं जानकारी आपको दे दूँगा।"
इस बार अजय मोहते हंसते हुए बोला,
"मैं अपने आदमियों पर छोड़ दूँ तो सारी जानकारी बिल्कुल मुफ्त मिल जाएगी।"
"आप तो धमकी देने लगे। पर क्यों कुछ पैसों के लिए अपनी मुसीबत बढ़ाना चाहते हैं। आपके आदमियों के हाथों अगर मैं मारा गया तो मेरी लाश को ठिकाने लगाने का झंझट। फिर जब मेरी तलाश शुरू होगी तो तार आपसे जुड़ेंगे। वैसे भी वन विभाग की जमीन अंजन को दिलवाने के मामले में भी आपका नाम जुड़ रहा है। इतना पैसा कमाया है आपने। थोड़ा मेरी जानकारी के बदले में दे दीजिए।"
उसका इस तरह धमकी देना अजय मोहते को बहुत बुरा लगा। उसने कहा,
"यह फार्म हाउस और इसके आसपास का बड़ा हिस्सा मेरी संपत्ति है। एक गोली तुम्हारे भेजे में जाएगी और उसके बाद तुम मेरी प्रॉपर्टी के किसी हिस्से में ज़मीन के नीचे दबे होंगे। कोई नहीं जान पाएगा।"
"आपको लगता है कि इतने बड़े और चालाक मंत्री को मैं खेल खेल में धमकी दूँगा। आप मुझे मारकर गाड़ सकते हैं लेकिन अपने आप को बचाना मुश्किल हो जाएगा। आपके आदमी मुझे लेकर जब घर से निकले थे तो उनकी तस्वीर सामने की बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी कैमरे में आ गई होगी। फिर जब मैं फार्म हाउस के अंदर आ रहा था तो मैंने चुपचाप लास्ट कॉल वाले नंबर पर मिस कॉल दिया था। वह नंबर उस क्लाइंट का है जिसका बहुत ज़रूरी केस मेरे पास है‌। उस मिस्ड कॉल की लोकेशन का पता आपका फार्म हाउस ही होगा।"
अजय मोहते ने कहा,
"देखने में बेवकूफ लगते हो। पर अक्लमंद हो। क्या चाहिए तुम्हें।"
"सर आप जैसे समझदार इंसान से मुझे यही उम्मीद थी। पाँच लाख रुपए। आप पैसे दीजिएगा और मैं जानकारी।"
अजय मोहते ने कुछ सोचा। उसके बाद बोला,
"तुम्हारी जानकारी गलत हुई तो ?"
"अभी आपने ही मुझे समझदार कहा। फिर मैं ऐसी बेवकूफी क्यों करूँगा जो मेरे लिए घातक हो।"
अजय मोहते ने कहा,
"ठीक है..... पैसे मिल जाएंगे। अब बताओ।"
"ऐसे नहीं। लेन देन एक साथ होगा। मैं पैसे लूँगा और उसी समय जानकारी दूँगा।"
"ठीक है....ठहरो मैं कुछ देर में आता हूँ।"

अजय मोहते सीढियां चढ़कर ऊपर चला गया।‌ ऊपर एक कमरे में जाकर उसने दरवाज़ा बंद कर लिया। उसके बाद एक कबर्ड ‌खोलकर उसमें एक बटन दबाया। बटन दबाते ही कबर्ड के बगल की दीवार कुछ खिसक गई। वह एक गुप्त कमरे में चला गया। वहाँ भी एक अलमारी थी। उसे खोलकर दो हज़ार के नोटों की कुछ गड्डियां एक बैग में डालीं। फिर गुप्त कमरे के बाहर निकल कर दरवाज़ा बंद कर दिया।‌ पैसे लेकर एंथनी के पास चला गया।
एंथनी ने पैसे लेकर अजय मोहते को मानवी और निर्भय के बारे में सबकुछ बता दिया।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय पर अंजन विश्वकर्मा के ऊपर जानलेवा हमला करने के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उसके बाद मानवी ने अपने और निर्भय की बेल के लिए अपील की थी। बड़ी मुश्किल से उनकी बेल को मंजूरी मिल पाई थी।
उनका केस मार्वल डिसूज़ा के परिचित बैकुंठ आगरकर ने लड़ा था। बैकुंठ आगरकर के पिता पहले डिसूज़ा परिवार के घर पर काम करते थे। उसकी लॉ की पढ़ाई का खर्च डिसूज़ा परिवार ने ही उठाया था। मानवी और निर्भय के अगवा होने से पहले बैकुंठ मानवी से आकर मिला था। उसने कहा था कि अगर उसे किसी भी तरह की ज़रूरत पड़ेगी तो वह मदद के लिए तैयार है।
मानवी ने अपने और निर्भय की बेल के लिए उसे वकील चुना था।

बेल मिलने के बाद मानवी और निर्भय डिसूज़ा विला वापस आ गए थे। अब दोनों इस बात के लिए परेशान थे कि आगे क्या करें। किस तरह केस लड़ें और साबित करें कि उन पर झूठे इल्ज़ाम लगाए गए हैं। उन दोनों ने अंजन विश्वकर्मा पर हमला नहीं किया था।
निर्भय बहुत परेशान था। उसे लग रहा था कि उसका सबकुछ लुट गया। उन पर यह केस चल रहा है। अंजन इसके बावजूद भी पुलिस की गिरफ्त से बचकर बाहर भाग गया है। वह और मानवी परेशान हैं और अंजन किसी दूसरे देश में मौज कर रहा है यह सोचकर उसे बहुत तकलीफ हो रही थी।
बेल पर बाहर आने के बाद निर्भय ने सबसे पहले मीरा को फोन किया। लेकिन उसका नंबर नहीं लगा। उसे मैसेज मिला कि यह नंबर मौजूद नहीं है। मीरा की आखिरी बार जब बातचीत हुई थी तब वह उससे कह रही थी कि उसका इंतज़ाम कहीं और कर दे। उसे वहाँ डर लग रहा है। निर्भय के मन में आया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि वह किसी मुसीबत में हो।
उसने मीरा का इंतज़ाम अपने एक छोटे से घर में करवा दिया था। वह उस घर का इस्तेमाल नहीं करता था। अपने मैनेजर को उसने निर्देश दिया था कि मीरा को ज़रूरत पड़ने पर कुछ पैसे दे दे। उसने अपने मैनेजर को फोन किया कि शायद उसे मीरा की कोई खबर हो। मैनेजर से पता चला कि मीरा कुछ दिन पहले उससे कुछ पैसे लेकर लंदन वापस चली गई। जब निर्भय ने पूँछा कि घर की चाभी किसके पास है तो मैनेजर ने बताया कि उसने ही तो मीरा के दोस्त रमन सिंह को घर में रहने की इजाज़त दी थी।
उसके घर में मीरा का कोई दोस्त रह रहा है यह जानकर निर्भय को बहुत गुस्सा आया। पर उसने मैनेजर से कुछ कहा नहीं। बस इतना निर्देश दिया कि ना तो मीरा को और ना ही उसके दोस्त को पैसे दे। साथ में कुछ पैसे गोवा भिजवाने का भी निर्देश दिया।
वह सोच रहा था कि मीरा आखिर किस रमन सिंह को उसके घर पर ठहरा कर गई है। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे मीरा ने उसे भी धोखा दिया है जैसे उसने अंजन को दिया था। अंजन का नाम याद आते ही एक बात उसके मन में आई। लेकिन वह उस पर यकीन नहीं कर पा रहा था।
मानवी भी परेशान थी। अभी तो उसने अपनी कुछ ज्वैलरी बेचकर बेल के लिए पैसे इकट्ठे किए थे। अब वह सोच रही थी कि आगे के लिए पैसों का इंतज़ाम कैसे किया जाए।
तभी निर्भय ने आकर उसे अपने मन की बात बताई। उसे सुनकर उसे भी यकीन नहीं हो रहा था।
 
रिस्की लव - 50

निर्भय के मन में जो बात आई थी उसके बारे में सुनकर मानवी सोच में पड़ गई थी। कुछ देर तक वह भी उस पर विचार करती रही। उसके बाद बोली,
"तुमको लगता है कि यह रमन सिंह अंजन है। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है। मीरा ने उसके ऊपर हुए हमले में हमारी मदद की थी। अब वह उसकी मदद क्यों करेगी।"
"यह बात मेरे मन में भी आई थी। मैंने इस पर बहुत सोचा। मुझे ऐसा लगता है कि अंजन ने बड़ी चालाकी से उसे इस बात का यकीन दिलाया होगा कि वह उसे अभी भी प्यार करता है। मीरा पिघल गई होगी। उसकी मदद करने को तैयार हो गई होगी।"
मानवी कुछ सोचकर बोली,
"मीरा को अपने प्यार का यकीन दिलाने के लिए अंजन उससे मिला होगा। पर उसे कैसे पता चला कि मीरा सिंगापुर में है। दूसरी बात कि वह खुद लंदन क्यों चली गई।"
"अंजन को कैसे पता चला कि मीरा सिंगापुर में है कहना कठिन है। जहाँ तक मीरा के लंदन जाने की बात है तो हो सकता है कि वह अंजन के कहने पर किसी खास काम से वहाँ गई हो।"
मानवी को निर्भय की बातों पर यकीन नहीं हो पा रहा था। निर्भय उसका संशय समझ रहा था। उसने कहा,
"मानवी मैं अभी कुछ भी यकीन से नहीं कह पा रहा हूँ। पर एक बात पर मेरे मन को पूरा यकीन है।‌ रमन सिंह कोई और नहीं अंजन है।"
मानवी एक बार फिर सोचने लगी। कुछ क्षणों के बाद वह बोली,
"चलो मैं भी तुम्हारे इस यकीन पर भरोसा कर लेती हूँ। अब यह बताओ कि तुम क्या करना चाहते हो।"
"यह सोचकर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है कि हमारा दुश्मन मेरे घर में मज़े से छिप कर बैठा है।"
"निर्भय गुस्से से काम नहीं चलेगा। एक बार वह हमारे हाथों बचकर निकल चुका है। उसका खामियाज़ा हमको भुगतना पड़ रहा है। इस बार एकदम सटीक वार करना है।"
"मैं ऐसा करता हूँ कि पहले यह पक्का कर लेता हूँ कि रमन सिंह ही अंजन है। मैंने सोचा है कि सिक्योरिटी गार्ड से कहूँ कि वह चुपके से रमन सिंह की तस्वीर खींच कर भेज दे। पक्का होने के बाद हम सिंगापुर पुलिस को सूचना दे देंगे।"
"जो भी करना है जल्दी करो। ऐसा ना हो कि अंजन वहाँ से निकल जाए।"
निर्भय को मानवी की बात सही लगी। तभी नौकर ने आकर सूचना दी कि कोई लोकेश कुमार उन लोगों से मिलने के लिए आया है। निर्भय और मानवी किसी लोकेश कुमार को नहीं जानते थे। उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह कौन शख्स है जो उनसे मिलने आया है।

लोकेश कुमार अजय मोहते का विश्वासपात्र आदमी था। एंथनी से निर्भय और मानवी के बारे में पता चलते ही अजय मोहते ने गोवा में रहने वाले लोकेश कुमार से संपर्क किया। लोकेश ने मानवी और निर्भय के बारे ‌में पता किया। उसे खबर मिली की दोनों ही बेल पर छूटकर आए हैं। वह फौरन डिसूज़ा विला आ गया।
निर्भय और मानवी जब हॉल में पहुँचे तो लोकेश ने खड़े होकर उन्हें नमस्ते किया। फिर अपना परिचय दिया,
"मैं लोकेश कुमार हूँ। मैं काजू की खेती करता हूँ। उन्हें रोस्ट करके अलग स्वाद में देश और विदेश में भेजने का करोबार भी करता हूँ। इसके अलावा इंडिया पब्लिक राजनैतिक दल का सेवक भी हूँ।"
निर्भय ने उससे हाथ मिलाया और उसे बैठने को कहा। वह लोकेश कुमार के आने का कारण समझ नहीं पाया था। लोकेश कुमार बैठने के बाद बोला,
"आप हैरान हैं कि जो कुछ मैंने बताया उससे आपका क्या लेना देना। मैं आपके पास क्यों आया हूँ।"
निर्भय ने मानवी की तरफ देखकर कहा,
"सही कहा आपने....अब आप यह बताइए कि आप यहाँ क्यों आए हैं ?"
"मुझे महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री अजय मोहते जी ने भेजा है।"
यह बात मानवी और निर्भय के लिए और अधिक चौंकाने वाली थी। लोकेश कुमार ने कहा,
"आप दोनों का और मंत्री जी का एक ही दुश्मन है।"
मानवी ने कहा,
"हमारा कोई दुश्मन नहीं है।"
"मानवी उर्फ जेनिफर जी अंजन विश्वकर्मा की बात कर रहा हूँ मैं।‌ वही अंजन विश्वकर्मा जिस पर जानलेवा हमला कराने का इल्ज़ाम आप लोगों पर लगा है।"
निर्भय ने बात आगे बढ़ाई,
"पहली बात तो वह केस झूठ है। फिर यदि अंजन मंत्री जी का दुश्मन है तो हम क्या कर सकते हैं।"
"बात आपके भले की है। आप अगर मंत्री जी की मदद करेंगे तो वह भी आपकी मदद करेंगे।"
निर्भय ने कहा,
"हम उनकी क्या मदद कर सकते हैं।"
लोकेश कुमार ने मुस्कुरा कर कहा,
"अब बातचीत सही राह पर आई है। अंजन विश्वकर्मा पुलिस से भागा हुआ है। उसके पास मंत्री जी की कुछ गोपनीय बातें हैं।‌ वह नहीं चाहते हैं कि अंजन विश्वकर्मा पुलिस के हाथ लगे और उनके राज़ पुलिस को बताए। अंजन विश्वकर्मा सिंगापुर में है। आप अगर उसकी किसी कमज़ोरी या किसी खास व्यक्ति के बारे में बता दें तो हम उसके ज़रिए अंजन विश्वकर्मा तक पहुँच कर उसे शांत कर सकते हैं। बदले में आपका केस हम संभल लेंगे।"
अंजन सिंगापुर में है यह सुनकर मानवी और निर्भय का शक यकीन में बदल गया था कि रमन सिंह ही अंजन है। कौशल कुमार की बात मान लेने पर उनके दो लाभ थे। एक तरफ उनके दुश्मन से बदला लेने का अच्छा मौका मिलता। दूसरा केस से बाहर निकलने का अवसर मिलता। निर्भय ने मानवी की तरफ देखा। उसने इशारे से सहमति दे दी। लेकिन निर्भय एकदम से बात आगे नहीं बढ़ाना चाहता था। उसने कहा,
"हमें यह यकीन कैसे हो कि आप अपना मतलब निकलने के बाद हमारी मदद करेंगे।"
लोकेश कुमार कुछ देर चुप रहा। उसके बाद बोला,
"विश्वास तो एक दूसरे पर करना ही पड़ेगा। आप हमारी मदद करके अपने दुश्मन से बदला ले सकेंगे। एक फायदा तो यही हो गया। मंत्री जी अपना वादा अवश्य निभाएंगे।"
निर्भय ने लोकेश कुमार को रमन सिंह और मीरा वाली बात बता दी। उसके बाद बोला,
"अब तो पूरा यकीन है कि रमन सिंह ही अंजन है। मीरा उसकी गर्लफ्रेंड है। उसने ही उसे सिंगापुर बुलाया होगा।"
लोकेश कुमार कुछ सोचकर बोला,
"आप अपनी तरफ से अंजन को इस बात की भनक ना लगने दीजिएगा कि उसके ठिकाने की भनक हमें है। हम उसे सबक सिखाएंगे। आपकी तसल्ली के लिए मैं आपकी बात मंत्री जी से करवा देता हूँ।"
लोकेश कुमार ने निर्भय की बात अजय मोहते ‌से करा दी। अजय मोहते ने भी उससे कहा कि अंजन को किसी भी तरह से भनक ना लगने दे। साथ ही आश्वासन दिया कि वह उसकी पूरी मदद करेगा।

अंजन यह सोचकर निर्भय के घर पर रुक गया था क्योंकी उसे जानकारी थी कि उन दोनों को उस पर जानलेवा हमला करने के इल्ज़ाम में हिरासत में लिया गया है। उसे लगा था कि कुछ दिनों तक तो निर्भय केस में ही फंसा रहेगा। उसे कुछ पता नहीं चलेगा। तब तक वह यहाँ से निकल कर थाईलैंड चला जाएगा।
लेकिन अब वह परेशान हो रहा था। उसके अपने प्रयास बेकार गए थे। अजय मोहते पर उसने दबाव ज़रूर बनाया था पर वह उसकी मदद करेगा या नहीं इस बात की उम्मीद अब धूमिल पड़ रही थी।‌ वह अब चाहता था कि किसी भी तरह से सिंगापुर से निकल कर आगे की ज़िंदगी के बारे ‌में सोचे। वह छटपटा रहा था पर उसके पास कोई चारा नहीं था। उसे निर्भय के मकान में छिप कर रहना पड़ रहा था।
इसके अलावा एक और चीज़ उसे परेशान किए हुए थी। मीरा से कल फिर बात हुई थी। उसकी आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बहुत बीमार हो। उसके बार बार पूँछने पर भी वह यही कह रही थी कि कुछ खास नहीं है। थोड़ा बुखार रहता है। जल्दी ठीक हो जाएगी। अंजन ने जब वीडियो कॉल की तो उसने कॉल नहीं उठाई। स्पष्ट था कि बात गंभीर थी।
इस बात ने इंजन की परेशानी को और बढ़ा दिया था। वह बहुत बेचैन हो गया था।‌ उसका आत्मविश्वास डोलने लगा था। कुछ ना कर पाने की विवशता के चलते उसके मन में अपने लिए गुस्सा भर रहा था।

यह एक सुनसान सा इलाका था। एंथनी यहाँ अपने केस के सिलसिले में किसी से मिलने आया था। जिससे उसे मिलना था वह अभी तक नहीं आया था।
अजय मोहते से पैसे मिलने के बाद वह बहुत खुश था। जब वह अपने घर गया था तो अपनी छोटी बहन की हालत देखकर बहुत दुखी हुआ था।‌ अपने पति की मौत के बाद वह अपने दो बच्चों की परवरिश के विषय चिंतित थी। उसे पैसों की ज़रूरत थी। जिससे वह कोई कारोबार कर सके। जो पैसे उसे मिले थे उसमें से आधे उसने अपनी बहन को देने का मन बनाया था।
उसे इंतज़ार करते हुए देर हो गई थी। पर अभी तक वह आदमी नहीं आया था। उसने घड़ी देखी। दिए गए समय से बीस मिनट अधिक हो गए थे। उसे लोगों की यह बात पसंद नहीं थी। लोग समय का खयाल नहीं रखते थे। वह मन ही मन भुनभुनाया। उसने पाँच मिनट और इंतज़ार करने का फैसला किया।
एक मोटरसाइकिल एंथनी के पास आकर रुकी। जब तक वह कुछ समझता पीछे की सीट पर बैठे आदमी ने दो गोलियां चलाईंं। गोली चलाने वाले व्यक्ति ने किसी को फोन कर काम हो जाने की सूचना दी। मोटरसाइकिल तेज़ी से चली गई। एंथनी ज़मीन पर गिरा हुआ था। उसके प्राण निकल चुके थे।
अजय मोहते की आँखों में अजीब सी चमक थी। पैसे जाने का उसे उतना अफसोस नहीं था। लेकिन एंथनी ने उससे सौदेबाज़ी की थी यह बात वह सब नहीं पा रहा था।
 

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