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'उसके सिर में जुएं पड़ गई थीं । वह समझती थी कि जिसके सिर में जुएं पड़ जाएं, वह मालदार हो जाता है । वह छत पर बैठकर मालदार होने का सपना देखती हुई जुएं निकाल रही थी। तभी वह रुपयों का बैग आन गिरा और वह समझी कि मालदार हो गई।'
नौजवान डॉली को संदेह भरी नजरों से देखता रहा।
डॉली ने थोड़ा-सा शरमाकर कहा 'तुमने मेरा नाम तो पूछ लिया । अपना नाम नहीं बताया ।'
'मेरा नाम जानकर क्या करोगी तुम?'
'यह जानना चाहती हूं कि तुम्हारा नाम भी वही है?'
'क्या मतलब?'
डॉली ने चेहरे पर और ज्यादा शर्म पैदा की और बोली-'मैं बचपन से सपने देखती थी-सफेद घोड़े पर सवार एक बांका-सजीला नौजवान, जो बिल्कुल तुम्हारा हमशक्ल था, दूर से हाथ में तलवार लिए आता है। 'मुझे बड़ी-बड़ी मूंछों वाले बदमाशों ने पकड़ रखा है । वह उनसे छुड़ाकर मुझे घोड़े पर बिठा लेता है और कहीं दूर ले जाता है।
'हुं। और आज वह नौजवान तुम्हें पुलिस के गुण्डों से बचाकर घोड़े की जगह म्मेंटरसाइकिल पर उड़ाकर ले आया।'
__ 'सपने तो पुराने जमाने के होते है जब मोटरसाइकिलें नहीं होती थी।'
'तुमने कहां तक पढ़ा है?'
'बी० कॉम. फाइनल कर लिया है । अभी रिजल्ट नहीं निकली।'
'हूं...और कौन-कौन से आर्ट जानती हो?'
'जूडो, कराटे, कुंग-फू...बाक्सिंग...!'
'तुम्हारे आश्रम की सब लड्कियां जानती हैं?'
'सब लड़कियां ! आंटी ने हम सबको खूब ट्रेड किया है।'
'तो यह कहो आंटी ही तुम्हारे गैंग की लीडर है।'
'नहीं, लीडर तो मैं हूं । आंटी सिर्फ संरक्षिका हैं।'
___ 'यानी चोरी, डाके और फ्रॉड तुम्हारी लीडरशिप में होते हैं।'
डॉली ने आंखें फाड़कर कहा 'चोरी, डाके, फ्रॉड ? यह तुम क्या कह रहे हो?'
'तुमने सेठ गोपालदास के साथ जो फ्रॉड किया था ?'
'अरे, वह सब तो मैंने एक फिल्म में से सीखा था।'
'और मुरली मनोहर के यहां डाका?'
डॉली ने चौंककर उसे देखा और सोचा 'इसका मतलब है, यह अपना जुर्म मेरे सिर थोपना चाहता है।' _ 'खैर, कोई बात नहीं । मुझे तो इसे सुधारना 'यूं भी इसका अपराध मैं खुद ही अपने सिर लेने वाली थी।'
इतने में वेटर ने नाश्ता रख दिया और पर्दा बराबर करके चला गया ।
नौजवान ने कहा 'चलो, शुरू करो।'
'ऐसे नहीं।'
'फिर कैसे?'
'जब तक तुम्हारा नाम न मालूम हो जाए, मैं कैसे तुम्हारा निमंत्रण स्वीकार करू?'
'मेरा नाम राज है।'
डॉली ने खुशी से उछलकर कहा 'सच...?'
नौजवान ने उसे घूरकर कहा
'मेरा नाम राज है-इसमें इतना खुश होने की क्या बात है?'
'वह...उसका नाम भी राज ही था ।'
'किसका नाम...?'
'वह जो मेरे सपनों में राजकुमार बनकर आता था ।'
'अच्छा ...!'
'सच मानो...।'
'अगर मैं कहूं कि मैंने तुम्हें अपना नाम गलत बताया है । मेरा असली नाम तो आनंद है ।'
'हां, उसका पूरा नाम राज आनंद ही था ।'
'राज आनंद एम.एम.सी. !'
-
-
'हां, वह भी एम.एम.सी. ही था ।'
राज ने उसे घूरकर कहा
'हूं, जिस जमाने में मोटरसाइकिल नहीं होती थी, उस जमाने में एम.एम.सी. की डिग्रियां जरूरी होती थीं?'
डॉली चकराती हुई अपना सिर खुजाकर बोली-'शायद मैंने गलत सुना हो । वह 'ऐ मेरी डॉली' कह रहा हो । मैं एम.एस.सी. समझी हूं।'
'चलों, नाश्ता शुरू करो ।'
दोनों ने नाश्ता शुरू कर दिया और राज ने कहा-एक और एक कितने होते है?'
'ग्यारह!'
'अगर हम दोनों मिलकर काम करें?'
'कं...क...क्या...काम...?'
'वही, जो तुमने सेठ गोपालदास के साथ किया था ।'
'फ्रॉड!'
'हां, जाहिर है कि अब तुम अनाथ-आश्रम तो जा नहीं सकती । पुलिस ने वहां इंक्वायरी की होगी और अगर किसी और को नहीं पकड़ा होगा तो तुम्हारे लिए सादा लिबास वाले जरूर तैनात कर दिए होंगे।'
नौजवान डॉली को संदेह भरी नजरों से देखता रहा।
डॉली ने थोड़ा-सा शरमाकर कहा 'तुमने मेरा नाम तो पूछ लिया । अपना नाम नहीं बताया ।'
'मेरा नाम जानकर क्या करोगी तुम?'
'यह जानना चाहती हूं कि तुम्हारा नाम भी वही है?'
'क्या मतलब?'
डॉली ने चेहरे पर और ज्यादा शर्म पैदा की और बोली-'मैं बचपन से सपने देखती थी-सफेद घोड़े पर सवार एक बांका-सजीला नौजवान, जो बिल्कुल तुम्हारा हमशक्ल था, दूर से हाथ में तलवार लिए आता है। 'मुझे बड़ी-बड़ी मूंछों वाले बदमाशों ने पकड़ रखा है । वह उनसे छुड़ाकर मुझे घोड़े पर बिठा लेता है और कहीं दूर ले जाता है।
'हुं। और आज वह नौजवान तुम्हें पुलिस के गुण्डों से बचाकर घोड़े की जगह म्मेंटरसाइकिल पर उड़ाकर ले आया।'
__ 'सपने तो पुराने जमाने के होते है जब मोटरसाइकिलें नहीं होती थी।'
'तुमने कहां तक पढ़ा है?'
'बी० कॉम. फाइनल कर लिया है । अभी रिजल्ट नहीं निकली।'
'हूं...और कौन-कौन से आर्ट जानती हो?'
'जूडो, कराटे, कुंग-फू...बाक्सिंग...!'
'तुम्हारे आश्रम की सब लड्कियां जानती हैं?'
'सब लड़कियां ! आंटी ने हम सबको खूब ट्रेड किया है।'
'तो यह कहो आंटी ही तुम्हारे गैंग की लीडर है।'
'नहीं, लीडर तो मैं हूं । आंटी सिर्फ संरक्षिका हैं।'
___ 'यानी चोरी, डाके और फ्रॉड तुम्हारी लीडरशिप में होते हैं।'
डॉली ने आंखें फाड़कर कहा 'चोरी, डाके, फ्रॉड ? यह तुम क्या कह रहे हो?'
'तुमने सेठ गोपालदास के साथ जो फ्रॉड किया था ?'
'अरे, वह सब तो मैंने एक फिल्म में से सीखा था।'
'और मुरली मनोहर के यहां डाका?'
डॉली ने चौंककर उसे देखा और सोचा 'इसका मतलब है, यह अपना जुर्म मेरे सिर थोपना चाहता है।' _ 'खैर, कोई बात नहीं । मुझे तो इसे सुधारना 'यूं भी इसका अपराध मैं खुद ही अपने सिर लेने वाली थी।'
इतने में वेटर ने नाश्ता रख दिया और पर्दा बराबर करके चला गया ।
नौजवान ने कहा 'चलो, शुरू करो।'
'ऐसे नहीं।'
'फिर कैसे?'
'जब तक तुम्हारा नाम न मालूम हो जाए, मैं कैसे तुम्हारा निमंत्रण स्वीकार करू?'
'मेरा नाम राज है।'
डॉली ने खुशी से उछलकर कहा 'सच...?'
नौजवान ने उसे घूरकर कहा
'मेरा नाम राज है-इसमें इतना खुश होने की क्या बात है?'
'वह...उसका नाम भी राज ही था ।'
'किसका नाम...?'
'वह जो मेरे सपनों में राजकुमार बनकर आता था ।'
'अच्छा ...!'
'सच मानो...।'
'अगर मैं कहूं कि मैंने तुम्हें अपना नाम गलत बताया है । मेरा असली नाम तो आनंद है ।'
'हां, उसका पूरा नाम राज आनंद ही था ।'
'राज आनंद एम.एम.सी. !'
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'हां, वह भी एम.एम.सी. ही था ।'
राज ने उसे घूरकर कहा
'हूं, जिस जमाने में मोटरसाइकिल नहीं होती थी, उस जमाने में एम.एम.सी. की डिग्रियां जरूरी होती थीं?'
डॉली चकराती हुई अपना सिर खुजाकर बोली-'शायद मैंने गलत सुना हो । वह 'ऐ मेरी डॉली' कह रहा हो । मैं एम.एस.सी. समझी हूं।'
'चलों, नाश्ता शुरू करो ।'
दोनों ने नाश्ता शुरू कर दिया और राज ने कहा-एक और एक कितने होते है?'
'ग्यारह!'
'अगर हम दोनों मिलकर काम करें?'
'कं...क...क्या...काम...?'
'वही, जो तुमने सेठ गोपालदास के साथ किया था ।'
'फ्रॉड!'
'हां, जाहिर है कि अब तुम अनाथ-आश्रम तो जा नहीं सकती । पुलिस ने वहां इंक्वायरी की होगी और अगर किसी और को नहीं पकड़ा होगा तो तुम्हारे लिए सादा लिबास वाले जरूर तैनात कर दिए होंगे।'