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अंदाज़

'नही...!'

'तो फिर...?'

'उस वक्त तुम्हारे! पास रिवाल्वर था और तुमने कहा था कि मेरा प्रेमी आ गया तो उसे मार डालोगे । मैं डर गई थी।'

'अगर यह सचमुच तुम्हारे ही गैग का कोई आदमी होता तो...?'

'म...म...मैं क्या बताऊं?'

.

'तुम्हें जाल में ले जाकर...'

'नहीं...।'

डॉली कांपकर राज की छाती से लग गई। राज ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और

बोला 'कब तक तुम यह जीवन गुजारोगी?'

'जब तक अपना दंड न पूरा कर लूं?'

'वह गंजा आदमी तुम्हारे पीछे क्यों लगा है

डॉली ने ठंडी सांस जी और बोली

'यह तो वही बता सकता है।'

'क्या वह तुम्हारे गैंग का आदमी नहीं है ?'

'नहीं...?'

राज उसे ध्यान से देखता रहा।

फिर बोला

'जब मैं इंस्पेक्टर मेहरा के कमरे में गया था तो क्या क्या वह तुम्हारे कमरे में नहीं आया था ?'

'आया था ।'

'किसलिए आया था ?'

'पूछ रहा था, वे पच्चीस लाख रुपये कहां हैं

'तुमने क्या जवाब दिया ?'

'उसने यह नहीं माना कि वे रुपये मैं पुलिस को सौंप चुकी हूं।'

'और वह तुम्हें जिन्दा छोड़ गया ?'

__ 'उसने मुझे मारना चाहा था । मैंने कहा कि मुझें मार डालोगे तो वे रुपये कैसे मिलेंगे ?'

'फिर...?'

'फिर मुझे धमकी देकर चला गया कि एक-न-एक दिन मुझे बताना पड़ेगा कि वे रुपये कहां रखे है, वरना वह मुझे मार डालेगा ।'

'हर्गिज नहीं।'

राज ने उसे खींचकर लिपटा लिया।

'तुम्हारी तरफ कोई आंख उठेगी तो मैं उसे जिन्दा जमीन में गाड़ दूंगा।'

डॉली उसकी छाती से लगकर फिर से रो पड़ी।

किचन में खाना बनाते-बनाते डॉली की निगाहें खिड़की से बाहर गई तो उसके हाथों से फ्राईपेन छूटते-छूटते बचा। बिकुल सामने ही उसने उस गंजे को देखा, जो कम्पाउंड के अदर खड़ा हुआ माली से बातें कर रहा था । डॉली के शरीर में भय से सनसनी दौड़ गई।

माली किसी तरफ चला गया ।

डॉली ने खिड़की बंद करने का इरादा किया ही था कि अचानक गंजे ने खिड़की की ही तरफ देखा

और डॉली ज्यु की ज्यूं खड़ी रह गई।

___ गंजा इत्मीनान से चलता हुआ और कानाफूसी में बोला

'तुम हमें डॉज देकर होटल से निकल आई थी

डॉली के होंठ कांपकर रह गए ।

गंजे ने अपने सिर पर हाथ फेरा और निर्मम स्वर में गुर्राने के अंदाज में बोला

'तुम संसार के किसी भी छोर पर चली जाओ । हमारी नजरों से ओझल नहीं हो सकती।'

'मम...मम...मैं...'

'तुमने देखा । हमने कितनी जल्दी पता लगा लिया कि तुम कहां हो?'

डॉली ने दिल में सोचा

'तुमने पता लगा लिया कि राज ने तुम्हें पता दे दिया?'

गंजे ने कहा

'वैसे यह बंगला होटल से ज्यादा उपयुक्त है । यहां से तुम्हें रातों को बाहर निकलते हुए कोई नहीं देख सकेगा।'

डॉली ने सोचा 'शायद इसीलिए उसे राज यहां लाया है।'

गंजे ने फिर से कहा 'मैं भी यहां माली का दूर का संबंधी बनकर आ गया हूं।'

'जज...जी...!'

'जो फैसला करने के लिए तुमने एक सप्ताह की मोहलत मांगी थी । वह फैसला आजकल में ही कर डालो तो आच्छा है।'

डॉली ने थूक निगलकर पूछा 'कक...क्यों...?'

गंजे ने कहा

'इसलिए कि एक बहुत बड़ा हाथ मारने का बेहतरीन मौका हमारे पास है । लेकिन वह मौका दो दिन से ज्यादा का नहीं ।'

'मम...मगर...।'

'अगर-मगर कुछ नहीं । तुम्हें अपने प्रेमी का जीवन प्यारा है तो तुम्हें इस काम में हमारा साथ देना ही होगा।'

फिर उसने एक डिबिया निकालकर डॉली की तरफ बढ़ाई और बोला

'लो, यह डिबिया अपने पास रखो ।'

डॉली ने थूक निगलकर बड़ी मुश्किल से कहा

'कक...क्या है इसमें?'

'घबराओ मत...जहर नहीं...सिर्फ नींद की गोलियां है।'

'मम...मैं क्या करू इनका?' 'डिबिया तो लो।'

.

डॉली ने कंपकंपाता हाथ आगे बढ़ाकर डिबिया ले ली।

गंजे ने कहा

'छुपा लो । कोई देख न ले ।'

डॉली ने जल्दी से डिबिया गिरेहबान में ठूस ली

गंजे ने फिर से कहा 'जिस रात तुम्हें हमारे साथ चलना होगा, उस रात तुम दो गोलियां किसी बहाने अपने प्रेमी को पानी या दूध में मिलाकर दे देना । वह गहरी नींद सो जाएगा। फिर तुम सारी रात हमारे साथ रह सकती हो ।'

डॉली कुछ न बोली।

गंजे ने गुस्से से कहा

'समझ रही हो ?'

डॉली चौक पड़ी। वह झट बोली

'हां, समझ गई ।'

'और सुनो, कल रात ही हम निकलेंगे।'

'कल..कल...रात...?'

'हां, कल रात-खाने के बाद तुम अपने साथ को अचेत कर देना ।'

'मम..मगर...माली...'

'वह शराबी है । उसका इंतजाम मैंने कर दिया है । उसे शराब में नींद की गोली दे दूंगा।

चाबियां उसके पास रहती है।'

डॉली कुछ न बोली। वह थर-थर कांप रही थी।

उसे यह नहीं मालुम था कि किचन के बाहर दरवाजे की आड़ मे खड़ा हुआ राज अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्करा रहा है।
 
रात के खाने के बाद जब राज दांत मांजने बाथरूम में गया तो गिलास में भरे पानी में जल्दी से डॉली ने दो गोलियां डाल दी, जो तुरंत धुल गई।

राज बाथरूम में से बाहर आया और गिलास उठाता हुआ बोला

'आज बहुत ज्यादा ठंड नहीं है-क्यों?'

डॉली ने जवाब दिया 'नहीं है ।

तुम तो बाल्कनी में सोओगे।'

'बेशक! जब तक मैं तुम्हारी मांग में सिन्दूर नहीं भरता, हम दोनों के बीच यह लक्ष्मण-रेखा तो खिंची ही रहेगी।'

डॉली चुपचाप बाथरूम में आ गई ।

उसने शीशे में देखा, राज गिलास का पानी एक गमले में खाली कर रहा था ।

_ 'डॉली के होंठों पर फीकी-सी मुस्कान फैल गई । उसने सोचा

'आखिर, कब तक करोगे यह नाटक राज?'

'अगर तुम्हें सचमुच मुझसे प्यार है तो खुलकर क्यों सामने नहीं आ जाते?'

'मैंने जो प्रतिज्ञा की है, उसे तो मैं एक दिन पूरी ही करके ही छोडूंगी।'

__ 'चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान से ही क्यों न खेलना पड़े।

अचानक राज ने लड़खड़ाती आवाज में कहा

'अच्छा, डॉली डार्लिंग । मुझे नींद आ रही है

डॉली में ठंडी सांस ली और ऊंची आवाज में उससे बोली

'मैं भी बस अब सोऊंगी।'

'ओ० के०...गुड नाइट!'

'गुड नाइट!'

कुछ देर बाद डॉली बाहर आई तो बाल्कनी में राज इस तरह जोर-जोर से खर्राटि ले रहा था, जैसे वह बहुत गहरी नींद सो रहा है।

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डॉली कुछ देर निचला होंठ दांतों में दबाए खड़ी रही । फिर मुड़ी तो उसे दरवाजे में गंजा खड़ा नजर आया । डॉली सिर से पांव तक दहल गई। गंजे ने कानाफूसी में पूछा 'सो गया तुम्हारा प्रेमी?'

'हां...!'

'चलो जल्दी से तैयार होकर नीचे आओ । मैं इंतजार कर रहा हूं।'

'और...वह...माली?'

'उसे भी मैंने लुढ़का दिया है। अब सुबह ही जागेगा

'मगर हमें जाना कहां है?'

'अब क्या सब-कुछ यही पूछ लोगी

'मम...मैं आती हूं।'

'जल्दी करना ।'

फिर वह पलटकर चला गया।

डॉली ने झटपट कपड़े उठाए और बाथरूम में घुस गई । कुछ देर बाद वह कपड़े पहनकर बाहर निकली। बाल्कनी में से खर्राटों की आवाजें आ रही थी।

डॉली ने बाहर निकलकर दरवाजा भेड़ दिया ।

दूसरे ही समय राज जल्दी से उठा । एक डोरी बाल्कनी की रेलिंग से बांधकर नीचे लटकाई उसके द्वारा नीचे उतरने लगा।

बंगले से बाहर अंधेरे में एक लम्बी-चपटी सी गाड़ी खड़ी थी। जिसके अंदर तीन आदमी और भी मौजूद थे । दो पिछली सीट पर, एक अगली सीट पर

गंजे ने पिछली सीट का दरवाजा खोला । एक नीचे उतर आया और गंजे ने डॉली से कहा-'चलो बैठो।'

डॉली बैठ गई।

अब वह अपने दिल से डर निकाल चुकी थी और सोच रही थी कि अगर करांटे वाले हाथ दिखाने की जरूरत भी पड़ गई तो भी नहीं चूकेगी।'
 
दरवाजा बंद करके गंजा ड्राइविंग सीट पर बैठ गया । पिछली सीट वाले ने गंजे से पूछा

'लड़की को सब-कुछ समझा दिया है ?'

गंजे ने जवाब दिया

'इतना मौका नहीं था ।'

'ठीक है, पहले ठिकाने पर चलो । इसके कपड़े बदलवाने हैं । वहीं सब बता दिया जाएगा।'

फिर गाड़ी स्टार्ट होकर सड़क पर दौड़ने लगी

पता नहीं कौन-सी जगह होगी ।

लेकिन डॉली अपने दिमाग में वे दिशाएं और समय निर्धारित करती गई थी जिन दिशाओं में गाड़ी बार-बार मुड़कर जितनी-जितनी देर चली । जब गाड़ी रुकी तो सब-कुछ उसके दिल-दिमाग में इस तरह सुरक्षित था कि वह कभी भी बैठकर कागज पर नक्शा बना सकती थी।

वह सब इसलिए था कि उसकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी, वरना उसकी भी जरूरत नहीं थी। इसके अलावा उसे गंजे के सिवाय किसी की शक्ल नहीं मालूम थी । बाकी लोगों को उसने अंधेरे में देखा था । बाद में उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी।

पता नहीं किस जगह कार रुकी ।' डॉली को संभालकर उतारा गया । एक आदमी ने उसकी भुजा पकड़ ली और उसे बताता हुआ चलने लगा।

'ये बरामदे की सीढ़ियां है।'

'बस, यह दरवाजा है।'

किसी ने बटन दबाया।

घंटी की अवाज अंदर गूंजी । किसी ने दरवाजा खोला । फिर जिसने डॉली की बांह पकड़ रखी षी वह बोला-'चलो, अंदर कालीन बिछा है।'

डॉली ने सोचा

'यह तो कोई शानदार बंगला है । इसका मतलब है कि यह बहुत बड़े बदमाशों का गैंग है ।'

एक जगह किसी ने कहा 'बस, यही रोक दो।'

डॉली को रोक दिया गया।

उसका दिल बहुत जोर-जोर से धड़क रहा था । किसी ने दूसरे से पूछा

'बॉस कहां है ?'

'अंदर-बस, आते ही होंगे।'

तभी जूतों की आहटें सुनाई दीं।

डॉली के दिल की धड़कनें और भी ज्यादा तेज हो गई । फिर एक आवाज गुंजी

'लड़की को प्लान समझा दिया गया है ?'

डॉली का दिल उछलकर जैसे कंठ में आ अटका हो । उसका रोम-रोम चीख रहा था 'राज...राज...!'

'यह शत-प्रतिशत राज ही है ।'

गंजे की आवाज गूंजी

'अभी नहीं, बॉस । यहां बैठकर शांति से समझाया जाएगा ।'

राज की आवाज फिर से सुनाई दी

'ठीक है समझा दो । प्लान पर अमल के बाद लड़की को इज्जत के साथ उसके ठिकाने पर पहुंचा दिया जाए।'

'यस, बॉस!'

'दूसरी बात, प्लान पर अमल के दौरान लड़की की इज्जत को रक्षा की जिम्मेदारी तुम लोगों की है क्योंकि हमें अपने काम के लिए अगर किसी ऐसी-वैसी लड़की की जरूरत होती तो यहां वेश्याओं की कमी नहीं थी।'

'यस, बॉस ।'

'तीसरी बात-लड़की अगर गद्दारी पर उतर आए तो फिर यह तुम लोगों के बैडरूम का खिलौना है।'

'यस, बॉस ।'

'आखिरी बात, प्लान की सफलता केबाद लड़की का हिस्सा किस नाम से कहां के बैंक में जमा करना है या कैश भुगतान करना है-यह बात लड़की से खुद ही पूछ लेना।'

'यस, बॉस ।'!"

तभी डॉली ने थूक निगलकर कहा

'बॉस! क्या आप मुझे अब भी अपने गैंग की सदस्या नहीं समझ रहे?'

बॉस की आवाज आई

'क्यों....?'

'मेरी आंखों पर से पट्टी अब क्यों नहीं खोली जा रही है।'

'पट्टी तब खोली जाएगा, जब तुम इस गैंग की स्थायी सदस्या बन जाओगी । स्यायी सदस्या तब बनोगी जब हमें तुम पर विश्वास हो जाएगा।

'आज तो तुम पहली बार हमारे लिए काम रही हो और अभी यह भी अनुभव नहीं हुआ कि तुम सफल होती हो या नहीं?'

फिर बॉस की ऊंची आवाज आई

'स्टार्ट-वर्क!'

फिर वापस जाते हुए जूतों की आहटें विलीन हो गई । फिर कुछ देर बाद किसी की आवाज आई

'लड़की की आंखे खोल दो ।'

एक आदमी ने डॉली की आंखों की पट्टी खोल दी।

तेज रोशनी में पहले उसकी आंखें चुंधिया-सी गई।
 
फिर उसने एक-दो बार आंखें मली । तब उसकी आंखे रोशनी से परिचित हुई।

उसने अपने आसपास के चारों आदमियों को देखा । एक तो वही गंजा था । दूसरे को देखकर डॉली उछल पड़ी क्योंकि वह पुणे के होटल का काउंटर-क्लर्क राजेन्द्रनाथ था, जिसकी आंखे इस प्रकार भटक रही थीं, जैसे कुछ कहना-चाहती हों।

तीसरा वह आदमी था, जिसने मुम्बई में लाल मारुति कार की नंबर प्लेट पर दूसरे नंबर डाले थे । उस समय वह सूरत से ही महाधूर्त नजर आ रहा था ।

और चौथा?

चौथे को देखकर डॉली के दिमाग में धमाका-सा हुआ क्योंकि वह सी. आई. डी. इंस्पेक्टर मेहरा था । वह क्रूर मुस्कान के साथ कह रहा था

'पहचाना मुझे, बेबी?'

डॉली ये कंपकंपाती आवाज में कहा

'आ...आप तो...?'

वह वैसी ही मुस्कान के साथ बोला 'सी. आई. डी. इंस्पेक्टर मेहरा!'

'आप सी. आई. डी. इंस्पेक्टर और इस गैंग में?'

! यह गैंग ठोस और प्रतिष्ठत लोगों का है । यूं तो बड़े-बड़े मिनिस्टर और उच्च अधिकारीगणों में भी चोर होते है। 'लेकिन वे मगरमच्छ होते हैं, जो छोटी मछलियों को निगल जाते हैं । बहरहाल, तुम इस चक्कर में मत पड़ों । इस गैंग में एक सी. आई. डी इंस्पेक्टर की उपस्थिति का मतलब तुम्हारी और सबकी सुरक्षा भी है। 'क्योंकि अंतत: इन्वेस्टीगेशन का काम सी. आई. डी. इंस्पेक्टर को ही सौंपा जाता है-जैसे पच्चीस लाख रुपयों के बैग की इन्वेस्टीगेझन! इस इन्वेस्टीगेशन में हमें रुपये तो वापस नहीं मिले। लेकिन तुम जैसे हीरे पर नजर पड़ गई और तुम्हारी खूबियां जानने के बाद मैंने ही मुम्बई तुम्हारे लिए फरारी का मौका जुटाया था । जो पुलिसवाले तुम्हारे पीछे दौड़ रहे थे, उनके साथ मैं भी था।

___ 'तुमने और तुम्हारे साथी ने एक होटल से कार उठाई । जब तुम लोग कार के नम्बर बदलवा रहे थे, तब जो पुलिस की गाड़ी लाल मारुति के बारे में घोषणा करती जा रही थी, उस पुलिस की जीप में मैं भी मौजूद था।

'मैं पुणे में तुम्हें ढूंढता फिर रहा था। संयोगवश पुलिस इंस्पेक्टर खुराना के साथ तुम अपने सहयोगी के साथ नजर आ गई।

'तब मैन तुम्हें होटल पहुंचवाया । तुम वहां से भागी तो मेरी नजरें तुम दोनों पर थीं । मैंने अपने गंजे साथी को बंगले का पता बताकर भेज दिया।

'और अब तुम यहां हो । और हां, मैं चाहता तो यह गंजा साथी तुम्हें होटल में ही मार डालता। लेकिन तुम्हें गैंग में शामिल करने के लिए इसी साथी के द्वारा तुम्हें आफर दी गई थी।'

डॉली सन्नाटे में खड़ी थी। । फिर वह होंठों पर जुबान फेरकर बोली

'मम....मेरा साथी भी तो वही करता है, जो मैं...'

'हमें मालुम है...।'

.

'तो फिर उसे क्यों गैंग में शामिल नहीं कर लेते ?'

'मर्द इस मामले में ज्यादा विश्वसनीय नहीं होते । लेकिन हम पहले तुम पर प्रयोग कर रहे हैं । अगर तुम हमारी परख पर पूरी उतरी तो फिर तुम्हारे साथी को भी तुम्हारे द्वारा मिला लिया जाएगा क्योंकि शायद वह तुमसे प्यार करता है।'

.

.

कहते-कहते मेहरा अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्कराया ।

डॉली ने पुछा

'और तुम लोगों का बॉस ?'

'उसके बारे में तुम तभी जान सकोगी, जब तुम अपना विश्ववास बना लो ।'

फिर राजेन्द्रनाथ ने उसे एक लिबास लाकर दिया और मेहरा ने कहा

_ 'यह लिबास पहनकर आओ। फिर हम तुम्हें प्लान बताते हैं।'

डॉली ने लिबास उठाया।

राजेन्द्रनाथ ने उसे ड्रेस-रूम के दरवाजे पर पहुंचा दिया और ड्रेस-रूम में प्रवेश करने के बाद जब दरवाजा बंद हो गया तो इंस्पेक्टर मेहरा, राजेन्द्रनाथ पेंटर और गंजे ने मुस्कराकर ऊपर की दिशा में देखा ।
 
बाल्कनी में राज व्हिस्की का गिलास हाथ में लिए एक अधनंगी सोसायटी गर्ल की कमर में हाथ डाले खड़ा हुआ अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्करा रहा था।

उन लोगों को यह नहीं मालूम था कि ड्रेस-रूम के दरवाजे में थोड़ी-सी झिरी करके डॉली झांक रही थी।

'राज का वह रूप देखकर उसके दिल को जैसे किसी ने मुट्ठी में कसकर भींच लिया हो । वह कठोरता से होंठे भींचकर अपने आंसुओं और हिचकियों को रोकने की कोशिश करती हुई कपड़े बदलने लगी।

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सिर पर सुनहरे माडर्न केशों की व्हिग, आंखों की पुतलियों में गहरे हरे कान्टेक्ट लैस, शरीर पर एक झिलमिल करता स्कर्ट ब्लाउज, पैरों में घुटनों तक रुपहले ऐंकल शू, हाथ में व्हिस्की का गिलास और आंखों में नशा-उस पर होंठों पर निमंत्रण देने वाली मुस्कान !

डॉली को उस रूप में देखकर शायद डॉली आंटी और उसके बचपन की साथी लड़कियां भी न पहचान पाती। वह एक फाइव-स्टार होटल के रिक्रिएशन हॉल में एक मेज पर इंस्पेक्टर मेहरा के साथ बैठी बी । इंस्पेक्टर मेहरा के चेहरे पर उस समय फ्रेंच-कट खिचड़ी दाढ़ी और बदन पर काला सूट थे-आंखों पर चश्मा!

.

.

.

राजेन्द्रनाथ बदस्तूर काउंटर-क्लर्क बना खड़ा था । गंजा लाउंज में अखबार लिए बैठा था । पेंटर उस समय होटल का वेटर बना हुआ था। और उन सबसे दूर एक कोने की मेज पर काला चश्मा लगाए, काली नाइट-कैप का छोर झुकाए, कोट के कालर खड़े किए सामने एक बड़ा पैग स्कॉच का लिए बैठा था ।

इंस्पेक्टर मेहरा ने अचानक डॉली को इशारा किया-'वह रहा शिकार ।'

डॉली ने मुड़कर देखा।

एक अधेड़ उम्र का सूटेड-बूटेड तेजस्वी चेहरे वाला आदमी अभी-अभी एक ब्रीफकेस लेकर होटल में प्रवेश कर रहा था।

राजेन्द्रनाथ ने उसे बड़ी विनम्रता से सलाम किया और बोर्ड पर से एक चाबी उतारकर उसे दे दी वह आदमी लिफ्ट की तरफ बढ़ा ही था कि एक वेटेर ने बड़े आदरपूर्वक लिस्ट का दरवाजा खोल दिया । वह आदमी अंदर चला गया । लिफ्ट बंद होकर ऊपर जाने लगी।

इंस्पेक्टर मेहरा ने डॉली से कहा

'जानती हो, यह कौन है?'

डॉली ने थूक निगलकर धीरे-से कहा 'नहीं...!'

'यह मुम्बई का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट किंग है। सक्सेना एन्टरप्राइजेज का मालिक ।'

डॉली चौंक पड़ी। उसे तुरंत याद आया कि राज ने उसी को अपना अंकल बताकर डॉली के सामने प्रकट में मेहरा को मूर्ख बनाया था । अचानक इंस्पेक्टर मेहरा ने गुर्राकर कहा

'तुम सुन रही हो?' डॉली उछल पड़ी।

तुरंत संभलकर बैठती हुई बोली 'हां, सुन रही हूं।'

इंस्पेक्टर मेहरा ने कहा

___ पहले इसका बैक-ग्रउंड सुनो । बाईस वर्ष पहले इसने एक क्रिश्चियन महिला ने विवाह कर लिया था । लेकिन इसके करोड़पति बाप ने जब इसे अपनी धन-संपत्ति से वंचित करने की धमकी दी तो इसने पत्नी को ठुकराकर दौलत को अपना लिया ।'

डॉली का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था ।

मेहरा ने फिर से कहा 'लेकिन कुछ ही दिनों बाद इसे भूल का अहसास हुआ । अपनी पत्नी से असीम प्रेम का भी अहसास हुआ । इसके फादर का उन्हीं दिनों हार्ट-अटैक में देहांत हो गया था ।'

'ओह...!'

'बहरहाल! उसके बाद इसने अपनी पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की । लेकिन इसकी पत्नी ने दोबारा इसे स्वीकार नहीं किया!

'हालांकि वह भी इससे बहुत प्यार करती है। जब इसने अपनी पत्नी को छोड़ा था, उस समय इसकी पत्नी गर्भवती थी। इसकी पत्नी ने इसके बच्चे को कहां जन्म दिया? कहां रखा? इसे कुछ नहीं मालूम । यह अपनी संतान की सूरत देखने को तरसता था ।

___ 'फिर इसने दूसरी शादी नहीं की । पत्नी और संतान का दुःख भुलाने के लिए इसने एक अनाथ लड़के को गोद लेकर उसकी परवरिश की । लेकिन वह लड़का आवारा और विलासी निकल गया । _ 'वह लाखों रुपये एक-एक दिन में जुए में हार जाता । हर दिन एक नई लड़की बैडरूम के लिए चाहिए होती थी।

'सेठ नरोत्तम सक्सेना ने जब लेपालक बेटे की हरकते देखी तो उन्होने उसे घर से निकालकर अपनी धन-संपत्ति से वंचित कर दिया ।

'अब सेठ नरोत्तम सक्सेना इस आशा पर जी रहा है कि एक न एक दिन उसकी पत्नी उसे जरूर माफ कर देगी और खुद भी उसके पास लौट आएगी और उसकी संतान को भी घर में ले आएगी।
 
डॉली का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था । वह सोच रही थी

'इसका मतलब है, सेठ नरोत्तम की पत्नी कहीं यशोदा आंटी तो नहीं?'

'यशोदा आंटी ने अपने बेटे को यह बताए बिना कि वह नरोत्तम का बेटा है, सेठ नरोत्तम तक पहुंचा दिया हो और वह बेटा राज है।'

'जिसे यशोदा आंटी दर से देख लेती थीं। संभव है, यशोदा आंटी को यह पता न हो कि राज को नरोत्तम सेठ ने निकाल दिया है और वह चोर बन गया है।'

'और राज ने यह गैंग शायद इसीलिए बनाया है कि वह अपने मुंहबोले बाप की दौलत पर फिर से अधिकार जमा सके।'

'जरूर यही बात है।'

इंस्पेक्टर मेहरा बोला

'तुम समझ रही हो ना ।'

डॉली ने थूक निगलकर कहा

'जी, हां । सुन रही हूं।'

'तो अब तुम्हें सेठ नरोत्तम की बेटी का रोल निभाना है, जो अपने बाप से इसलिए नफरत करती है कि उसने तुम्हारी मां को दौलत के लिए ठुकरा दिया था ।

'अब तुम धन-दौलत प्राप्त करने के लिए खुद को बेचती फिर रही हो। आज तुम व्हिस्की पीकर सेठ नरोत्तम की ग्राहक बनने की कोशिश करोगी ।'

डॉली ने कहा

'और बातों-बातों में उन पर मैं प्रकट करूंगी कि मैं उनकी बेटी हूं, जब उन्हें पता चलेगा कि मैं उन्हीं की बेटी हूं तो वह मेरे शरीर को छुएंगे भी नहीं और मैं उनसे मुंहमांगी रकम भी वसूल कर लुंगी ।'

'करेक्ट! तुम सचमुच विवेकशील हो ।'

'फिर वह मझे अपनाने की कोशिश करेंगे। मैं उनकी मुंह-बोली बेटी बनने को तैयार हो जाऊंगी

'करेक्ट!'

'लेकिन मेरी मां का नाम क्या होगा?'

इंस्पेक्टर मेहरा ने क्रूर मुस्कान के साथ कहा 'यशोदा...यशोदा ।'

डॉली ने ठंडी सांस ली और बोली

'शायद तुम लोगों ने मुझे इसीलिए चुना था ।'

'बेशक! यशोदा के बारे में तुमसे ज्यादा कौन जान सकता है ?'

'और सेठ नरोत्तम सक्सेना का मुंह बोला बेटा शायद राज सक्सेना है।'

'करेक्ट! तम्हारा साथी...और अब तुम्हारी ही तरह चोर और फ्राड भी । लेकिन हम उसे इस प्लान से इसलिए अलग रख रहे है कि सेठ नरोत्तम उसे देखते ही बिदक जाएगा । तुम चाहोगी तो हम किसी दूसरे प्लान में उसे साथ मिला लेंगे।'

'आगे का प्लान क्या होगा?'

'अगर तुम्हें सेठ नरोत्तम अपने साथ मुम्बई ले जाना चाहें तो तुम अपने प्रेमी से मिलने के लिए बंगले वापस जाओगी । राज को कुछ भी समझाकर तुम कल सेठ केसाथ मुम्बई चली जाओगी।'

'और मुम्बई पहुंचकर मुझे क्या करना होगा?'

'इंतजार...! और सेठ नरोत्तम पर अपना विश्वास बनाना । अगर सेठ नरोत्तम अपनी वसीयत तुम्हारे नाम लिख दे, फिर तो समझ लो हम सबके लिए किसी अगले हाथ की जरूरत ही नहीं ।

_ 'सेठ नरोत्तम किसी एक्सीडेंट में मर सकता है। फिर तुम उसकी धन-संपत्ति की वारिस । ऐसी स्थिति में तुम राज को भी अपना सकती हो। लेकिन तुम्हें मिलेगा सिर्फ दस प्रतिशत, जिसके हिसाब से ही इतना बन जाएगा कि तुम और राज एक शानदार जिन्दगी शरू कर सकते हो ।'

'ठीक है।'

'बस, तो फिर एक्शन शुरू ।'

डॉली ने गिलास खाली किया और उठ गई । उसके गिलास में व्हिस्की की जगह कैम्पाकोला थी। इंस्पेक्टर मेहरा ने मुड़कर राज को अंगुठा दिखाया, राज ने भी अंगूठा दिखाया और मस्करा दिया ।

सेठ नरोत्तम सक्सेना ने दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनी और चौंककर ऊंची आवाज में बोला

'कौन....?'

बाहर खड़ी हुई डॉली ने अपनी आवाज मे नशे की लडखड़ाहट पैदा करते हुए कहा

'हम...हैं...और कौन ?'

लिफ्ट के पास खड़ा गंजा देख रहा था।

सेठ ने जैसे ही दरवाजा खोला, डॉली लड़खड़ाती अंदर घुसी और नरोत्तम सक्सेना झट पीछे हट गया । डॉली ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ।

फिर वह मुड़कर लड़खड़ाती आवाज में बोली 'लो, हम आ गए ।'

'कौन हो तुम ?' क्यों आई हो?'

डॉली लड़खड़ाती आगे बड़ी।

उसके गले में बाहें डालकर नशे में डूबी आवाज में बोली

_ 'एक्टिंग नहीं चलेगा, सेठ । तुम अपुन कू ऐंगेज किया, अपुन का सैक्रेटरी तुम्हारा नम्बर बताया और अपुन इधर आ गई।

___ गंजे ने कि-होल से अंदर झांका और सिर हिलाकर मुस्कराता हुआ लौट गया ।

सेठ नरोत्तम ने डॉली को अलग हटाने की कोशिश करते हुए कहा

'क्या बकवास है । हमने किसी को ऐंगेज नहीं किया।'

डॉली ने कानाफूसी में कहा

'मैं जानती हूं, अंकल । आप मेरे पिता समान हैं । मैं आपको सब-कुछ बता दूंगी। पहले आप झांककर बाहर यह देख लीजिए कि कमरे के आसपास तो कोई नहीं?'

सेठ नरोत्तम भौंचक्का -सा रह गया।

डॉली ने विनीत स्वर में कहा

'प्लीज अंकल! मुझे गलत मत समझिए । मैं आपकी बेटी के बराबर हूं। मुझ पर विश्वास कीजिए फिर वह लड़खड़ाकर बैड पर जा गरी ।

सेठ नरोत्तम ने कुछ सोचा । फिर दरवाजे के पास आकर चुपके से दरवाजा खोला।

बाहर झांका।

हर तरफ मैदान साफ था ।

सेठ दरवाजा बंद करके मुड़ता हुआ बोला-'कोई नहीं, कारीडोर खाली है ।'

डॉली जल्दी से उठकर बैठ गई। वह बोली

'अंकल! एक उच्च-स्तर का ठगों का दल आपकी दौलत के पीछे पड़ा है । वे लोग मुझे आपकी बेटी बनाकर आपकी धन-संपत्ति पर कब्जा करके आपको खत्म करना चाहते है ।'

सेठ ने हैरत से कहा 'यह क्या कह रही हो तुम?'

'मेरी बात का विश्वास कीजिए, सेठजी । क्या आपने कभी किसी यशोदा मजूमदार नामक महिला से शादी की थी और उसे दौलत के लिए छोड़ दिया था?'

सेठ चौंक पड़ा।

फिर हैरत से बोला 'तुम्हें कैसे मालुम ?'

'मैं उसी अनाथ आश्रम की लड़की डॉली हूं-यह देखिए ।'

डॉली ने व्हिग उतारकर, कान्टेक्ट लैस भी निकाल दिए और अपना वास्तविक रूप दिखाया । फिर फटाफट वही बहरूप धर लिया ।

सेठ हैरान खड़ा था।
 
डॉली ने सेठ नरोत्तम को सारा ब्यौरा दिया और नरोत्तम की आंखें फटी रह गई । डॉली ने इस दौरान राज का नाम नहीं लिया था ।

खुद सेठ ने कहा 'कहीं यह सब कुछ राज ने तो नहीं किया है?'

डॉली के दिल को धचका-सा लगा । उसने बनावटी विस्मय से पूछा

'कौन राज?'

'मेरा एक लेपालक नालायक बेटा, जिसे मैंने उसकी हरकतों के कारण निकाल दिया था ।'



'मैंने उन लोगों में किसी का नाम राज नहीं सुना ।'

'खैर । अब तुम बताओ क्या करना है?'

'आप चाहें तो अभी पुलिस को खबर कर दें। लेकिन मैं चाहती थी कि उनके पूरे दल और मुम्बई में मौजूद अड्डे के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद ही अचानक उच्च स्तर पर उन पर रैड करानी चाहिए। 'क्योंकि उन लोगों के बीच एक सी. आई. डी. इंस्पेक्टर भी मौजूद है और इस होटल में काउंटर-क्लर्क से भी होशियार रहिएगा।'

'बेटी! मुझे हैरत है कि मेरी इतनी दौलत पर भी तुम्हारी नीयत डावांडोल नहीं हुई और तुमने मुझे एक बड़े गैंग के हाथों न सिर्फ लुटने से बचा लिया, बल्कि मेरी जान भी बचा ली।'

डॉली की आंखें भीग गई। वह सुधे गले से बोली 'अंकल! दुनिया में प्यार की दौलत से बढ़कर कौन-सी दौलत हो सकती है? आपने इस दौलतके लिए प्यार को ठुकरा दिया।

'फिर आपने दूसरी शादी क्यों नहीं की? ।

'क्यों आज तक आप यशोदा आंटी को अपने दिल से नहीं निकाल सके? क्यों यशोदा आंटी ने जवानी में अपना घर दूसरी बार नहीं बसा लिया?

'क्यों वह एक अनाथ-आश्रम चलाकर लावारिस लड़कियों का भविष्य अंधकार में डूबने से बचा रही हैं? क्योंकि मेरी जैसी अनाथ लड़कियों की आखिरी मंजिल तो वेश्याओं का अड्डा ही होती है ना?'

सेठ नरोत्तम उसके करीब आया ।

उसके कंधे पर हाथ रखा । उसकी आंखें छलक रही थी। उसने भारी आवाज में कहा

'काश! मैंने राज की जगह तुम्हें अपनाया होता या तुम मेंरी बेटी होतीं । अब तुम जैसा कहोंगी मैं वैसा ही करूंगा । मुम्बई पहुंचकर विधिवत् तुम्हें अपनी बेटी बना लूंगा । जब उन बदमाशों का दल खत्म हो जाएगा, उसके बाद भी तुम मेरी बेटी ही रहोगी।'

'नहीं, अंकल । मैं अपनी यशोदा आंटी और ग्यारह सहेलियों को नहीं छोड़ सकती।'

'बेटी ! अगर शब्द प्यार पर तुम्हें इतना ही विश्वास है तो क्या तुम यह विश्वास यशोदा आंटी के मन में नही पैदा कर सकतीं कि मैं उसके लिए आज भी उतना ही तड़प रहा हूं, जितना बाईस वर्ष पहले । 'दौलत के लिए उसे छोड़ने के बाद अपनी भूल का अहसास होने पर रात-दिन तड़पा था ।'

'अंकल! अगर आपकी तड़प सच्ची हैं तो मैं आपको विश्ववास दिलाती हूं कि मैं यशोदा आंटी के मन तक आपकी तड़प की आहट फैचाऊंगी।

-

___ 'आप मेरे लिए पिता समान हैं और डॉली आंटी को तो मैंने होश संभालते ही अपनी सगी मां के समान समझा है।'

सेठ नरोत्तम डॉली के सिर पर हाथ फेरकर रो पड़े।

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डॉली ब्रीफकेस लेकर विजयी मुद्रा में लिफ्ट से निकली और इंस्पेक्टर मेहरा की मेज पर आ गई। मेहरा ने उसे ध्यान से देखकर पूछा 'क्या हुआ?'

डॉली ने ब्रीफकेस मेज पर रखकर कहा

'प्लान सफल! मुझे कल ही सेठ के साथ मुम्बई जाना है और जाते ही वह मुझे बेटी अनाउंस कर देगा । यह पचास हजार रुपये उसने मुझे शापिंग वगैरह के लिए दिए हैं।'

'वैरी गुड!' इंस्पेक्टर मेहरा ने ब्रीफकेस अपने कब्जे में लेकर कहा-'चलो, तुम्हें वापस बंगले पहुंचा दें ।'

कुछ देर बाद डॉली उन लोगों के साथ कार में वापस बंगले जा रही थी। एक तरफ उसका दिमाग बड़ी तेजी से काम कर रहा था । दूसरी तरफ उसे बार-बार राज का ख्याल आ जाता था। वह सोच रही थी

'राज सेठ नरोत्तम का लेपालक बेटा बनकर पहुंचा था।'

'शायद यह स्कीम यशोदा आंटी की ही होगी।'

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-

'उन्होंनें सेठ नरोत्तम के बेटे को उनके पास पहुंचा दिया लेकिन यह नहीं बताया कि राज उनका सगा बेटा है।'

'राज, जो सेठ नरोत्तम और यशोदा आंटी का बेटा है ।'

__ 'यह सच्चाई शायद खुद राज को भी नहीं मालूम ।'

'इसलिए राज गलत रास्तों पर निकल गया

'और अब वह अपने ही बाप की दौलत पाने के लिए एक पूरा गैंग बनाए बैठा है।'

'अगर मेरी जगह उन लोगों ने किसी और को ऐगंजे किया होता तो यकीनन राज अनजाने में खुद अपने ही बाप का खून करा देता ।'

अचानक गाड़ी झटके से रुकी और वह चौक पड़ी । गाड़ी में से डॉली के साथ गंजा भी उतरा । मेहरा ने कहा

'टोबरी तुम्हरी निगरानी पर रहेगा।'

डॉली कुछ न बोली।

वह गंजे के साथ फाटक की खिड़की से अंदर घुसी । पीछे देखे बिना वह बरामदे में आई । दरवाजा खुला हुआ था ।

__ डॉली अंदर घुसी और दरवाजा बंद करके सीढ़ियां चढ़ने लगी। अपने कमरे का दरवाजा खोलकर उसने भीतर प्रवेश किया तो बाल्कनी में से खर्राटों की आवाज आ रही थी । सामने ही राज कम्बल ओढ़े लेटा था।

वह राज जिसे उसने बदमाशों के अड्डे पर देखा था, कब वह बाल्कनी से उतरा? कब वहां पहुंचा?

-

डॉली दरवाजा बंद करके उससे पीठ लगाए खड़ी रही । यह सोच-सोचकर उसका दिल भर भरकर आ रहा था कि जब वह गैंग को पकड़वाएगी तो क्या राज को बचा सकेगी? क्या राज के बारे में इंस्पेक्टर मेहरा, पेटर, राजेन्द्रनाथ और टोबरी पुलिस को नहीं बताएंगे?

उसकी आंखें भी गई और दोनों हाथों से मुंह छुपाकर सिसक पड़ी। वह सोच रही थी

'क्या गुजरेगी यशोदा आंटी और नरोत्तम अंकल पर जब उन्हें अपने बेटे की असलियत का पता चलेगा? जब मालूम होगा कि उनका बेटा ही बाप को दौलत के लिए खत्म करना चाहता था ।'

अचानक डॉली के कंधे पर किसी ने हाथ रखा और डॉली बुरी तरह उछल पड़ी।

उसने चेहरे से हाथ हटाए तो राज सामने खड़ा था । डॉली के होंठों से कंपकंपाती आवाज निकली 'राज...!'

राज के होंठों पर मुस्कान फैल गई । वह धीरे-से बोला

_ 'अपने जुर्म के लिए रो रही हो या मेरे प्यार के लिए?'

'राज!'

'मैं जानता हूं, डॉली । दौलत बहुत बुरी चीज है। आदमी का ईमान खरीद लेती है। फिर तुम तो एक अनाथ-आश्रम में पली हुई वह लड़की हो, जिसे कीमती कपड़े पहनकर इंगलिश स्टाइल में बर्थ-डे मनाने का शौक है।'

'राज...!'

'तुम्हारी जैसी लड़कियां धनवान बनने के चक्कर में अपना सब-कुछ खो बैठती हैं । मगर मैंने तुम्हारी आंखों में अक्सर एक पुण्य-आत्मा की झलक देखी है।

_ 'मैं तुम्हें एक अपराधी समझकर तुम्हारे पीछे लगा था । लेकिन अब...अब मैं तुमसे प्यार करता हूं | इतना ही कि तुम्हारे लिए अपने प्राण भी दे सकता हूं | भगवान के लिए इन पापों और अपराधों की दुनिया से निकल आओ।'

डॉली ने कंपकंपाती आवाज में कहा

'यह...यह तुम कह रहे हो, राज?'

'हां, डॉली । जब सेठी मुरली मनोहर के यहां से पच्चीस लाख रुपये की चोरी हुई तो मैं उस चोर के पीछे दौड़ रहा था, जिसने तुम्हारे आश्रम की छत पर बैग फेंक दिया था।

'अगर उस बैग का भेद तुम्हारी सहेलियों को मालूम न होता तो तुम पुलिस को वह रुपये लौटानें न जाती।

'तुम पुलिस स्टेशन से सेठ गोपालदास को देखकर भागी थी । मैंने तुम्हें इसलिए मोटरसाइकिल पर लिफ्ट दी और तुम्हें पुलिस से बचाया कि तुम्हारे गैंग तक पहुंच सकुँ ।'

'नहीं...!'

'हां, डॉली । यहां तुमने गंजे के द्वारा अपने गैंग से सम्पर्क बनाए रखा । तुम लोग सेठ नरोत्तम सक्सेना को लूटने और खत्म करने का जो षड्यंत्र रच रहे तो, उसका मुझे पूरा ज्ञान है । कल तुम सेठ नरोत्तम की बेटी बनकर जा रही हो ना मुम्बई?'

डॉली ने कंपकंपाती आवाज में कहा

'तत...तुम सेठ नरोत्तम के आवारा बेटे नहीं हो?'

___'मैं सेठ नरोत्तम का ही लेपालक बेटा हूं | मैंने कई बार एक अजनबी छाया को पापा का खून करने की कोशिश करते देखा। 'तब मैंने आवारा बेटा होने का नाटक करके खुद को उनसे अलग कराया, ताकि मैं उनके दुश्मन को पकड़ सकू ।'

'तो...तुम...तुम...'

राज ने एक कार्ड निकालकर दिखाया और बोला 'मैं एक सी. बी. आई आफीसर राज सक्सेना हूं।'

'नहीं...।'

'यह सच है, डॉली । मेरी पढ़ाई-लिखाई के दौरान पापा के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट के बिजनेस की आड़ में उनके एक मैनेजर ने स्मगलिंग शुरू कर दी थी।

_ 'एक बार स्मगलिंग का माल पकड़ा गया और पापा गिरफ्तार होते-होते बचे । अगर उनका मैनेजर फरार न हो जाता और एक कर्मचारी सच्चाई न बता देता तो पापा को ही अपराध ही समझा जाता।'

उसने ठंडी सांस ली और आगे बोला

'मुझे पापा से बहुत प्यार है । ऐसा लगता है, जैसे उनसे मेरा खून का रिश्ता हो । हालांकि उन्होंने मुझे भी एक अनाथ-आश्रम से लेकर पाला-पोसा था । मैंने इस विभाग में इसलिए नौकरी की थी कि मैं अपने पापा के बिजनेस पर कभी आंच न आने दूं ।

'मुझे संदेह था कि पापा का फरार मैनेजर ही उनसे दुश्मनी पर उतारू है । अत: मैं बुरा आदमी बनकर इसलिए पापा से अलग हों गया कि वह मैनेजर और उसके साथी अपराधी पापा को अकेला समझकर हर हथकंडा इस्तेमाल करें और मैं उन्हें रंगे हाथों पकड़ सकू ।'
 
'और उन्होंने अंतत: पापा की कमजोरी पकड़कर उनकी दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश की । तुम्हें उनकी बेटी बनकर, खत्म करके उनकी धन-संपत्ति पर अधिकार करना भी उन हथकंडों में से एक है, जिसके लिए उन्होंने तुम्हें हथियार बनाया है।

'संभव है, उन्होंन तुम्हें बाद में खोज निकाला हो । पहले तुम छोटे-मोटे फ्राड ही करती रही हो ।'

कुछ पल रुककर वह पन: आगे बोलो

'जब मैं स्कूल से कॉलेज में आया तब मेरे साथ एक लड़की पड़ती थी । उसका नाम नीमा था । हम दोनों कम्बाइंड स्टडी करते-करते एक-दूसरे के बहुत निकट आ गए थे । हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे।

'नीमा ने कहा था कि जब वह और मैं डिग्री ले चुकेंगे, तब वह मुझे अपने डैडी से मिलवाएगी। 'बाद में मुझे अपने पापा से अलग होना पड़ा । सर्विस के दौरान मैंने टैक्सी भी चलाई । उस दौरान मुझे नीमा के डैडी ने एक टैक्सी ड्राइवर के रूप में देखा।

'जब नीमा ने मझे अपने डैडी से मिलवाया तो मैंने उन्हें यही बताया कि मैं नरोत्तम सक्सेना का ले-पालक बेटा हूं और एक अनाथ हूं । अब उन्होंने मुझे निकाल दिया है और मैं टैक्सी चलाता हूं।

'नीमा के डैडी ने मुझे दुत्कार दिया । बाद में नीमा ने आत्महत्या करनी चाही । तब मजबूरन मैंने उससे मंदिर में शादी कर ली।

'नीमा के डैडी को किसी ने खबर कर दी। वह ऐन शादी के वक्त पहुंच गए । लेकिन उन्होंने रोष प्रकट नहीं किया । हम दोनों को आशीर्वाद दिया और पुणे के इस बंगले की चाबी दी कि हम यहां हनीमून मनाएं ।'

डॉली उछल पड़ी।

उसके चेहरे का रंग बदला तो राज फीकी-सी मुस्कान के साथ बोला

'घबराओ मत । मैं भूत नहीं हूं । डैडी ने हमारी गाड़ी के ब्रेक फेल कर दिए । एक्सीडेंट हुआ, जिसमें नीमा और मैं बुरी तरह घायल हुए ।

'तब मैंने नीमा के डैडी को सच्ची बात बताई कि मै सी. बी. आई. आफीसर हूं । पापा के दुश्मनों का पता-लगाकर, जब मैं उन्हें सच्चाई बताऊंगा तो वह मुझे अपना लेंगे।

'डैडी खुश हो गए । लेकिन घायल नीमा न बच सकी । उसकी मौत का पापा को ऐसा भीषण आघात पहुंचा कि उन्होंने कार खड्डे में गिराकर आत्महत्या कर ली।'

राज ने ठंडी लम्बी सांस लेकर फिर से आगे कहना शुरू किया

_ 'नीमा के डैडी राय बहादुर यह बंगला और अपनी सारी संपत्ति-धन मेरे नाम कर गए हैं । मैं जब तुम्हारे साथ पुणे के लिए रवाना हुआ तो मेरी योजना यही थी कि तुम्हें निकट लाकर तुम्हारे गैंग का पता लगाऊंगा।

'उसके लिए मैंने रायबहादुर के घायल मिलने का नाटक किया । वह रायबहादुर नहीं एक सी. बी. आई. आफीसर थे, जो बंगले में हनीमून के लिए हमें लाए और गायब हो गए । चौकीदार गायब हुआ । वह भी एक सी. बी. आई. इंस्पेक्टर है और माली से पहले मेरा भेदी।

'यहां के पुलिस इंस्पेक्टर से मेरा पहले ही से सम्पर्क था । तुम्हें राय बहादुर की आत्मा की कहानी का विश्वास दिलाने के लिए मैंने इंस्पेक्टर को कार के बहाने बुलवाया था।

'इंस्पेक्टर के साथ सी. आई. डी. इंस्पेक्टर मेहरा भी था । मगर वह गद्दार है । दुश्मनों के हाथों बिका हुआ है । यह रहस्य मुझे आज मालूम हुआ। वरना मेहरा ने जब हम दोनों को होटल में रूम दिलवाया था, उस समय तक मैं उसे एक ईमानदार आफीसर समझता था ।

.

.

राज ने डॉली की दोनों भुजाएं पकड़कर कहा

'डॉली! मैं तुम्हें यह सब इसलिए बता रहा हूं कि तुम्हारे द्वारा मुजरिमों तक पहुंचने की कोशिश करते-करते मैं तुमसे सचमुच प्यार करने लगा हूं। 'मैंने तुम्हारे अंदर बहुत सारी बातें नीमा से मिलती-जुलती देखी हैं । मगर मैं अपनी ड्यूटी से भी मुंह नहीं मोड़ सकता । अगर तुम वायदामाफ गवाह बन जाओ और अपने गैंग को पकड़वाने में मेरी मदद करो तो तुम बच जाओगी दंड से और...और तुम जैसी भी हो..मैं...मैं तुम्हें अपनी छाती से लगा लुंगा।'

डॉली थर-थर कांप रही थी। उसे खुशी की झुर-सुरियां-सी आ रही थीं । अचानक वह राज की छाती से लगकर बरबस रो पड़ी और सिसकते-सिसकते बोली

'राज! आज तुमने मुझे नया जीवन दिया है। तुमने...तुमने मुझे गहरे अंधेरे से निकालकर ऐसी रोशनी दी है, जिसने मेरी आत्मा तक को ज्योतिर्मय कर दिया है।'

'डॉली...!'

'हां, राज । यह सच है । मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम इतने अच्छे आदमी और इतने बड़े अफसर हो । मैं तो आज तक खुद तुम्हें मुजरिम और उस गैंग का सदस्य समझती रही, जिस गैंग की सदस्या तुम मुझे समझ रहे हो?'

'डॉली, यह तुम क्या कह रही हो?'

डॉली ने आंसू पोंछकर कहा

'मेरा सपना कभी धनवान बनने का नहीं रहा । मुझे यशोदा आंटी से उतना ही प्यार है, जितना सगी मां से । मैंने इस गैंग की सदस्या बनकर सेठ नरोत्तम सक्सेना की बेटी बनने के षड्यंत्र में शामिल जरूर हुई थी। ___ 'लेकिन जब मैं सेठ नरोत्तम सक्सेना के कमरे में सोसायटी-गर्ल बनकर गई तो मैंने उन्हें बता दिया कि मुझे एक गैंग ने उनकी बेटी बनाकर उनकी वारिस बनने और बाद में उन्हें मार डालने के लिए भेजा है । तुम चाहो तो सेठ सक्सेना से पूछ सकते हो

'नहीं...!'

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___ 'यह सच है, राज । मैं खुद उनके बचाव के लिए अप-राधियों की साथी बनी हूं और उनकी बेटी बनकर मुम्बई जा रही हूं । मैंने उन सबके चेहरे पहचान लिए हैं। 'सेठ सक्सेना और मैं उन्हें रंग हाथों पकड़वाने वाले थे। लेकिन मैंने उन लोगों के साथ तुम्हें भी देखा था, राज । तुम उनके बंगले पर भी थे। मैंने तुम्हारी आवाज पहचानी थी।'

राज ने उसे ध्यान से देखकर कहा 'मैं...मैं...उन लोगों के साथ...?'

'हां, राज । लेकिन मुझे लगता है, शायद वह तुम्हारा कोई हम शक्ल है।'

राज ने ठंडी सांस ली और बोला 'उधर देखो।'

डॉली ने दरवाजे की तरफ देखा तो एक दूसरा राज खड़ा नजर आया।

डॉली बरबस उछल पड़ी। राज ने मुस्कराकर कहा

'कुछ समझी...?'

'यह...यह तो वही है ।'

'नहीं, यह माली है।'

माली ने राज के चेहरे का मास्क उतार दिया और राज ने मास्क ले लिया ।

माली चला गया।

डॉली हक्का-बक्का-सी खड़ी रही।

राज ने कहा

'वे लोग तुम्हें जिस बंगले में ले गए थे, मैंने उस बंगले तक तुम्हारा पीछा किया था। लेकिन मैं अंदर नहीं पहुंच सका क्योंकि चारों तरफ पहरा था।

_ 'फिर जब सब लोग वहां से चले गए, तब मैं अंदर गया और मुझे यह मास्क पड़ा मिला, जो शायद उनसे गिर गया होगा।

'वह बंगला, एक ऐसे बड़े आदमी का है, जो इन दिनों देश से बाहर गया हुआ है और वे लोग उसका बंगला इस्तेमाल कर रहे हैं।

'लेकिन...तुम...तुम किसी बड़े षड़यंत्र में शामिल नहीं होना चाहती तो फिर तुम इस गैंग के इशारों पर क्यों नाच रही हो?'

'तुम्हें सुधारने के लिए।

'क्या मतलब?'

डॉली ने ठंडी सांस ली और बोली

'यशोदा आंटी के बारे में तुम क्या जानते हो?'

'वह एक अनाष-आश्रम की संचालिका हैं।'

और सेठ नरोत्तम की वह पत्नी भी, जिनसे सेठ नरोत्तम सक्सेना ने प्रेम-विवाह किया । फिर जब उनके पिता ने दौलत या यशोदा में से एक को चुनने को कहा तो सेठ सक्सेना ने यशोदा आंटी को छोड़कर अपने पिता की दौलत को चुन लिया ।'

'नहीं...।'

'यह सच है, राज । यशोदा आंटी सेठ नरोत्तम की पत्नी हैं । जब यह सेठ सक्सेना से अलग हई तो गर्भ धारण कर चकी थी।

'सेठ सक्सेना को कुछ ही दिनों बाद अनुभव हुआ कि दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत प्यार की दौलत का बदल नहीं हो सकती।

'उन्हीं दिनों सेठ सक्सेना के पिता हार्ट-अटैक से मर गए । सेठ नरोत्तम ने आंटी को दोबारा अपनाना चाहा लेकिन वह उन्हें नहीं अपना सके । 'उधर उन्होंने यशोदा आंटी का स्थान किसी और को देना नही पसंद किया । इसलिए दूसरी शादी नहीं की और यशोदा आंटी ने अपने बच्चे को किसी अनाथ-आश्रम में छोड़ दिया और शादी के बिना उम्र गुजार दी। ___'यशोदा आंटी और सेठ सक्सेना में अब भी बहुत प्यार है । सेठ सक्सेना अपना दुःख भुलाने के लिए तुम्हें लेपालक बेटा बनाकर लाए । लेकिन वह नहीं जानते थे कि तुम यशोदा आंटी और उनके असली बेटे हो।'

'नही...!'

राज बुरी तरह हड़बड़ा गया।
 
डॉली ने आंसू पोंछकर कहा

'यह सच है, राज । यशोदा आंटी ने तुम्हें लेपालक बनाकर तुम्हारे पापा तक पहुंचा दिया । लेक्मि उन्हें सच्चाई नहीं मालूम होने दी ।

_ 'हमें भी सच्चाई मालूम न होती । लेकिन यशोदा आंटी हमें झूठी कहानी सुनाती थी । वह तुम्हें देखने जाती और वापस आकर तुम्हारे लिए बहुत तड़पती और रोती थी। 'हमसे उनका दुख सहन नहीं हुआ। हम सब लड़कियों ने मिलकर फैसला किया कि तुम्हें ढुढेंगे और मां-बेटे को मिलाएगें।

'उस रात जब तुम पच्चीस लाख के चोर का पीछा कर रहे थे, हमें यशोदा आंटी की दराज से तुम्हारा फोटो मिल चुका था। तुमने जब हमारी एक साथी से बात की तो मैंने सोचा कि अगर मैं पकड़ी गई तो तुम्हें कैसे ढूंढूगी। 'इसलिरा मैं भाग खड़ी हुई और तुमने अपनी मोटरसाइकिल पर मुझे इसलिए फरारी में मदद दी तुम मुझे अपराधियों की गैंग की सदस्या समझते रहे थे।

_ 'मैं तुम्हें सुधारने की कोशिश करते-करते तुमसे सचमुच प्यार करने लगी । इसीलिए मैंने फैसला किया था कि जब मैं तुम्हारा गैंग पकड़वा दूंगी तो तुम्हारे सारे अपराध अपने सिर ले लूंगी और तुम्हें बताऊंगी की यशोदा आंटी तुम्हारी मां हैं । वह तुम्हारे लिए तड़प रही हैं। 'गैंग के लोग तक तक मुझसे नहीं मिले थे। जब हम दोनों होटल में रहे तो सबसे पहले मुझे गंजा मिला । और उस समय जब तुम्हें इंस्पेक्टर मेहरा की ओर से नीचे बुलाया गया, शायद यह मेहरा की ही चाल थी।

'गंजे ने मुझे अपने गैंग में शामिल होने का प्रस्ताव किया । मैं समझी थी कि तुम जान-बूझकर पीछे हटे हो और गंजे के द्वारा मुझे गैंग में शामिल करना चाहते हो।

'तुम जब मौलाना बनकर मुझे निकाल कर ला रहे थे तो मैं तुम्हें गैंग का ही आदमी समझी थी। फिर हमारे दोबारा उस बंगले में पहुंचते ही गंजा यहां पहुंच गया तो मेरा संदेह विश्वास में बदल गया कि तुमने ही गंजे को यहां बुलवाया है।'

राज ने कहा

'हालांकि मैंने इंस्पेक्टर मेहरा को बताया था कि मैं यहां हूं। कोई खास बात हो तो खबर करना । उसे इस तरह पता चला होगा।

_ 'शायद ऐसा ही हुआ हो । गंजे ने कहा था कि आज मुझे पहला काम करना है। उसने मुझे नींद की गोलियां दी कि मैं तुम्हें बेहोश कर दूं।

'तुमने वह गोलियों मिला पानी गमले में फेंक दिया तो मेरा संदेह और सुदृढ़ हो गया । फिर वे लोग मुझे बंगले पर ले गए। "ड्रेस-रूम में जब मैं कपड़े बदलने गई तो मैंने किवाड़ में झिरी करके देखौ और तुम्हें बाल्कनी में व्हिस्की का गिलास लिए एक अधनंगी लड़की की कमर में हाथ डाले देखा । फिर किसी संदेह का स्थान ही कहां रहता था।'

राज ने धीरे-से कहा

'और वह व्हिस्की के गिलास और अधनंगी लड़की वाला मेरे चेहरे का मास्क पहने था ।'

'शायद ऐसा ही था ।'

'इससे यह साबित होता है कि गैंग लीडर बहुत बुद्धिमान है । वे लोग समझ चुके है तुम मुझसे प्यार करती हो और मुझे भी अपराधी समझते है ।'

'इसलिए उन्होंने तुम्हारे प्यार की कमजोरी का लाभ उठाने की कोशिश की । लेकिन इस प्रकार जैसे मैं अपनी असलियत तुम पर नहीं प्रकट करना चाहता, ताकि तुम कभी मुझसे न कह सको और मुझे तो वे बेखबर समझते ही है।'

'यही बात होगी।'

राज ने उसके कंधे पकड़कर कहा 'मगर क्या यह सच है यशोदा आंटी मेरी मम्मी हैं और नरोत्तम सक्सेना मेरे पिता!'

डॉली की आंखें भी गई

'इस सच्चाई की ही खातिर तो मैंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, राज | यशोदा आंटी की तड़प तो मैंने तब से देखी है, जब से मैंने होश संभाला है। 'लेकिन अपनी पत्नी और संतान के लिए सेठ नरोत्तम सक्सेना की तड़प मैंने आज रात देखीं । आज उनके पास जितनी दौलत है, उससे वह सारी दुनिया घूमकर एय्याशी कर सकते है। 'मगर उन्हें तो अनुभव हो चुका है कि प्यार की दौलत से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती और न ही प्यार के नशे से ज्यादा कोई नशा । इसीलिए वह शराब तक को हाथ नहीं लगाते । 'वह दौलत इकट्ठी कर रहे है । लेकिन इस आशा पर न कि एक दिन अपनी पत्नी और संतान को वापस पा लेंगे और अपनी संतान और पत्नी को वह दुनिया का हर सुख दे सकेंगे।'

राज ने कंपकंपाती आवाज में कहा

'डॉली! तुमने मेरे ऊपर जो उपकार किया है, उसके लिए हर जन्म में तुम्हारा ऋणी रहूंगा । तुमने मुझे मेरे सगे मां-बाप तक पहुंचा दिया ।'

'राज! जिनके मां-बाप नहीं होते, उन्हीं को यह अनुभव होता है कि मां-बाप कितनी बड़ी दौलत होते हैं । और मुझे यह अनुभव है। 'इसीलिए मैंने जीवन का एक ही लक्ष्य बनाया था, यशोदा आंटी को उनके बेटे से मिलाना । तब तक तो मुझे यह भी नहीं मालूम था कि सेठ नरोत्तम सक्सेना यशोदा आंटी के पति और तुम्हारे बाप हैं।'

'डॉली! तुम सचमुच महान हो ।' |

'प्यार करने वालों का जीवन एक-दूसरे के लिए होता है राज । मेरा जीवन अब तुम्हारे लिए है

'और मेरा जीवन तुम्हारे लिए ।'

'अब हम दोनों मिलकर इस गैंग का खात्मा करेंगे जो पापा के लिए मौत और बरबादी की छाया बना हुआ है।'

__ 'हां, डॉली । तब तक हर बात गुप्त रहेगी । वे लोग मुझे और तुम्हें जो कुछ समझ रहे हैं, समझने दो | कल तुम पापा के साथ उनकी बेटी बनकर जाओगी 'पापा से कहना कि वह जल्दी-से-जल्दी तुम्हें कानूनन अपनी बेटी बनाने की घोषणा करके अपनी वसीयत तैयार करा ले, ताकि वे लोग जल्दी से जल्दी पापा को खत्म करने की स्कीम बनाएं और हम उन्हें चूहों की तरह जाल में फांस लें ।'



फिर उसने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लेकर कहा-'और हम हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो जाएं।'

डॉली खुशी से सिसककर राज की छाती से लग गई।

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