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'नही...!'
'तो फिर...?'
'उस वक्त तुम्हारे! पास रिवाल्वर था और तुमने कहा था कि मेरा प्रेमी आ गया तो उसे मार डालोगे । मैं डर गई थी।'
'अगर यह सचमुच तुम्हारे ही गैग का कोई आदमी होता तो...?'
'म...म...मैं क्या बताऊं?'
.
'तुम्हें जाल में ले जाकर...'
'नहीं...।'
डॉली कांपकर राज की छाती से लग गई। राज ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और
बोला 'कब तक तुम यह जीवन गुजारोगी?'
'जब तक अपना दंड न पूरा कर लूं?'
'वह गंजा आदमी तुम्हारे पीछे क्यों लगा है
डॉली ने ठंडी सांस जी और बोली
'यह तो वही बता सकता है।'
'क्या वह तुम्हारे गैंग का आदमी नहीं है ?'
'नहीं...?'
राज उसे ध्यान से देखता रहा।
फिर बोला
'जब मैं इंस्पेक्टर मेहरा के कमरे में गया था तो क्या क्या वह तुम्हारे कमरे में नहीं आया था ?'
'आया था ।'
'किसलिए आया था ?'
'पूछ रहा था, वे पच्चीस लाख रुपये कहां हैं
'तुमने क्या जवाब दिया ?'
'उसने यह नहीं माना कि वे रुपये मैं पुलिस को सौंप चुकी हूं।'
'और वह तुम्हें जिन्दा छोड़ गया ?'
__ 'उसने मुझे मारना चाहा था । मैंने कहा कि मुझें मार डालोगे तो वे रुपये कैसे मिलेंगे ?'
'फिर...?'
'फिर मुझे धमकी देकर चला गया कि एक-न-एक दिन मुझे बताना पड़ेगा कि वे रुपये कहां रखे है, वरना वह मुझे मार डालेगा ।'
'हर्गिज नहीं।'
राज ने उसे खींचकर लिपटा लिया।
'तुम्हारी तरफ कोई आंख उठेगी तो मैं उसे जिन्दा जमीन में गाड़ दूंगा।'
डॉली उसकी छाती से लगकर फिर से रो पड़ी।
किचन में खाना बनाते-बनाते डॉली की निगाहें खिड़की से बाहर गई तो उसके हाथों से फ्राईपेन छूटते-छूटते बचा। बिकुल सामने ही उसने उस गंजे को देखा, जो कम्पाउंड के अदर खड़ा हुआ माली से बातें कर रहा था । डॉली के शरीर में भय से सनसनी दौड़ गई।
माली किसी तरफ चला गया ।
डॉली ने खिड़की बंद करने का इरादा किया ही था कि अचानक गंजे ने खिड़की की ही तरफ देखा
और डॉली ज्यु की ज्यूं खड़ी रह गई।
___ गंजा इत्मीनान से चलता हुआ और कानाफूसी में बोला
'तुम हमें डॉज देकर होटल से निकल आई थी
डॉली के होंठ कांपकर रह गए ।
गंजे ने अपने सिर पर हाथ फेरा और निर्मम स्वर में गुर्राने के अंदाज में बोला
'तुम संसार के किसी भी छोर पर चली जाओ । हमारी नजरों से ओझल नहीं हो सकती।'
'मम...मम...मैं...'
'तुमने देखा । हमने कितनी जल्दी पता लगा लिया कि तुम कहां हो?'
डॉली ने दिल में सोचा
'तुमने पता लगा लिया कि राज ने तुम्हें पता दे दिया?'
गंजे ने कहा
'वैसे यह बंगला होटल से ज्यादा उपयुक्त है । यहां से तुम्हें रातों को बाहर निकलते हुए कोई नहीं देख सकेगा।'
डॉली ने सोचा 'शायद इसीलिए उसे राज यहां लाया है।'
गंजे ने फिर से कहा 'मैं भी यहां माली का दूर का संबंधी बनकर आ गया हूं।'
'जज...जी...!'
'जो फैसला करने के लिए तुमने एक सप्ताह की मोहलत मांगी थी । वह फैसला आजकल में ही कर डालो तो आच्छा है।'
डॉली ने थूक निगलकर पूछा 'कक...क्यों...?'
गंजे ने कहा
'इसलिए कि एक बहुत बड़ा हाथ मारने का बेहतरीन मौका हमारे पास है । लेकिन वह मौका दो दिन से ज्यादा का नहीं ।'
'मम...मगर...।'
'अगर-मगर कुछ नहीं । तुम्हें अपने प्रेमी का जीवन प्यारा है तो तुम्हें इस काम में हमारा साथ देना ही होगा।'
फिर उसने एक डिबिया निकालकर डॉली की तरफ बढ़ाई और बोला
'लो, यह डिबिया अपने पास रखो ।'
डॉली ने थूक निगलकर बड़ी मुश्किल से कहा
'कक...क्या है इसमें?'
'घबराओ मत...जहर नहीं...सिर्फ नींद की गोलियां है।'
'मम...मैं क्या करू इनका?' 'डिबिया तो लो।'
.
डॉली ने कंपकंपाता हाथ आगे बढ़ाकर डिबिया ले ली।
गंजे ने कहा
'छुपा लो । कोई देख न ले ।'
डॉली ने जल्दी से डिबिया गिरेहबान में ठूस ली
गंजे ने फिर से कहा 'जिस रात तुम्हें हमारे साथ चलना होगा, उस रात तुम दो गोलियां किसी बहाने अपने प्रेमी को पानी या दूध में मिलाकर दे देना । वह गहरी नींद सो जाएगा। फिर तुम सारी रात हमारे साथ रह सकती हो ।'
डॉली कुछ न बोली।
गंजे ने गुस्से से कहा
'समझ रही हो ?'
डॉली चौक पड़ी। वह झट बोली
'हां, समझ गई ।'
'और सुनो, कल रात ही हम निकलेंगे।'
'कल..कल...रात...?'
'हां, कल रात-खाने के बाद तुम अपने साथ को अचेत कर देना ।'
'मम..मगर...माली...'
'वह शराबी है । उसका इंतजाम मैंने कर दिया है । उसे शराब में नींद की गोली दे दूंगा।
चाबियां उसके पास रहती है।'
डॉली कुछ न बोली। वह थर-थर कांप रही थी।
उसे यह नहीं मालुम था कि किचन के बाहर दरवाजे की आड़ मे खड़ा हुआ राज अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्करा रहा है।
'तो फिर...?'
'उस वक्त तुम्हारे! पास रिवाल्वर था और तुमने कहा था कि मेरा प्रेमी आ गया तो उसे मार डालोगे । मैं डर गई थी।'
'अगर यह सचमुच तुम्हारे ही गैग का कोई आदमी होता तो...?'
'म...म...मैं क्या बताऊं?'
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'तुम्हें जाल में ले जाकर...'
'नहीं...।'
डॉली कांपकर राज की छाती से लग गई। राज ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और
बोला 'कब तक तुम यह जीवन गुजारोगी?'
'जब तक अपना दंड न पूरा कर लूं?'
'वह गंजा आदमी तुम्हारे पीछे क्यों लगा है
डॉली ने ठंडी सांस जी और बोली
'यह तो वही बता सकता है।'
'क्या वह तुम्हारे गैंग का आदमी नहीं है ?'
'नहीं...?'
राज उसे ध्यान से देखता रहा।
फिर बोला
'जब मैं इंस्पेक्टर मेहरा के कमरे में गया था तो क्या क्या वह तुम्हारे कमरे में नहीं आया था ?'
'आया था ।'
'किसलिए आया था ?'
'पूछ रहा था, वे पच्चीस लाख रुपये कहां हैं
'तुमने क्या जवाब दिया ?'
'उसने यह नहीं माना कि वे रुपये मैं पुलिस को सौंप चुकी हूं।'
'और वह तुम्हें जिन्दा छोड़ गया ?'
__ 'उसने मुझे मारना चाहा था । मैंने कहा कि मुझें मार डालोगे तो वे रुपये कैसे मिलेंगे ?'
'फिर...?'
'फिर मुझे धमकी देकर चला गया कि एक-न-एक दिन मुझे बताना पड़ेगा कि वे रुपये कहां रखे है, वरना वह मुझे मार डालेगा ।'
'हर्गिज नहीं।'
राज ने उसे खींचकर लिपटा लिया।
'तुम्हारी तरफ कोई आंख उठेगी तो मैं उसे जिन्दा जमीन में गाड़ दूंगा।'
डॉली उसकी छाती से लगकर फिर से रो पड़ी।
किचन में खाना बनाते-बनाते डॉली की निगाहें खिड़की से बाहर गई तो उसके हाथों से फ्राईपेन छूटते-छूटते बचा। बिकुल सामने ही उसने उस गंजे को देखा, जो कम्पाउंड के अदर खड़ा हुआ माली से बातें कर रहा था । डॉली के शरीर में भय से सनसनी दौड़ गई।
माली किसी तरफ चला गया ।
डॉली ने खिड़की बंद करने का इरादा किया ही था कि अचानक गंजे ने खिड़की की ही तरफ देखा
और डॉली ज्यु की ज्यूं खड़ी रह गई।
___ गंजा इत्मीनान से चलता हुआ और कानाफूसी में बोला
'तुम हमें डॉज देकर होटल से निकल आई थी
डॉली के होंठ कांपकर रह गए ।
गंजे ने अपने सिर पर हाथ फेरा और निर्मम स्वर में गुर्राने के अंदाज में बोला
'तुम संसार के किसी भी छोर पर चली जाओ । हमारी नजरों से ओझल नहीं हो सकती।'
'मम...मम...मैं...'
'तुमने देखा । हमने कितनी जल्दी पता लगा लिया कि तुम कहां हो?'
डॉली ने दिल में सोचा
'तुमने पता लगा लिया कि राज ने तुम्हें पता दे दिया?'
गंजे ने कहा
'वैसे यह बंगला होटल से ज्यादा उपयुक्त है । यहां से तुम्हें रातों को बाहर निकलते हुए कोई नहीं देख सकेगा।'
डॉली ने सोचा 'शायद इसीलिए उसे राज यहां लाया है।'
गंजे ने फिर से कहा 'मैं भी यहां माली का दूर का संबंधी बनकर आ गया हूं।'
'जज...जी...!'
'जो फैसला करने के लिए तुमने एक सप्ताह की मोहलत मांगी थी । वह फैसला आजकल में ही कर डालो तो आच्छा है।'
डॉली ने थूक निगलकर पूछा 'कक...क्यों...?'
गंजे ने कहा
'इसलिए कि एक बहुत बड़ा हाथ मारने का बेहतरीन मौका हमारे पास है । लेकिन वह मौका दो दिन से ज्यादा का नहीं ।'
'मम...मगर...।'
'अगर-मगर कुछ नहीं । तुम्हें अपने प्रेमी का जीवन प्यारा है तो तुम्हें इस काम में हमारा साथ देना ही होगा।'
फिर उसने एक डिबिया निकालकर डॉली की तरफ बढ़ाई और बोला
'लो, यह डिबिया अपने पास रखो ।'
डॉली ने थूक निगलकर बड़ी मुश्किल से कहा
'कक...क्या है इसमें?'
'घबराओ मत...जहर नहीं...सिर्फ नींद की गोलियां है।'
'मम...मैं क्या करू इनका?' 'डिबिया तो लो।'
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डॉली ने कंपकंपाता हाथ आगे बढ़ाकर डिबिया ले ली।
गंजे ने कहा
'छुपा लो । कोई देख न ले ।'
डॉली ने जल्दी से डिबिया गिरेहबान में ठूस ली
गंजे ने फिर से कहा 'जिस रात तुम्हें हमारे साथ चलना होगा, उस रात तुम दो गोलियां किसी बहाने अपने प्रेमी को पानी या दूध में मिलाकर दे देना । वह गहरी नींद सो जाएगा। फिर तुम सारी रात हमारे साथ रह सकती हो ।'
डॉली कुछ न बोली।
गंजे ने गुस्से से कहा
'समझ रही हो ?'
डॉली चौक पड़ी। वह झट बोली
'हां, समझ गई ।'
'और सुनो, कल रात ही हम निकलेंगे।'
'कल..कल...रात...?'
'हां, कल रात-खाने के बाद तुम अपने साथ को अचेत कर देना ।'
'मम..मगर...माली...'
'वह शराबी है । उसका इंतजाम मैंने कर दिया है । उसे शराब में नींद की गोली दे दूंगा।
चाबियां उसके पास रहती है।'
डॉली कुछ न बोली। वह थर-थर कांप रही थी।
उसे यह नहीं मालुम था कि किचन के बाहर दरवाजे की आड़ मे खड़ा हुआ राज अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्करा रहा है।