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अधूरी हसरतें

रीता घर के मुख्य द्वार पर पहुंच चुकी थी ।उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वह गुस्से में है,,,, उसने डोर बेल के बटन को दबाकर घंटी बजाई घर के अंदर आराम से कुर्सी पर बैठकर मधु के बारे में सोचते हुए अशोक अपना वक्त गुजारना था इस तरह से अचानक घंटी बजने की वजह से उसे लगा कि शायद निर्मला या तो शुभम घर आ चुका है इसलिए बेमन से वह दरवाजे को खोलने के लिए उठा।, उधर दूसरी तरफ शुभम प्लीज धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए अपने घर के गेट तक पहुंच गया था और चुपके से मुख्य दरवाजे की तरफ देख रहा था जहां पर रीता खड़ी थी,,। रीता बार-बार डोर बेल बजाया जा रहे थे ऐसा लग रहा था कि आज वह फैसला करके ही आई थी कि,, अशोक को पूरी तरह से बदनाम कर देगी शुभम वहीं छुप़ कर उसके अंदर जाना का इंतजार करने लगा,,। जो बार-बार घंटी बजाने की वजह से अशोक चीढ़ता हुआ जोर से बोला,,,,।

अरे आ रहा हुं,,, क्या घंटी तोड़ दोगी,,,,,( वह समझ रहा था कि निर्मला दरवाजे पर खड़ी है,,, इतना कहने के साथ ही वह दरवाजे तक पहुंच कर उसे खोलते हुए बोला,,,,।)

क्या करती हो पागल हो, ग,,,,,, ( रीता को सामने खड़ा देखते ही उसके शब्द गले में ही अटक गए उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रिता उसके घर अाई है,,,, वह लगभग हकलाते हुए बोला)

ततततत,,, तुम,,, यहां,,,,

हां मैं सोचा कि तुम मेरी खबर नहीं ले रहे हो तो मैं ही तुम्हारी खबर ले लूं,,,,( इतना कहने के साथ ही वह घर में प्रवेश करी,, उस पर किसी और की नजर ना पड़ जाए इसलिए अशोक ने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया,,,,)

तुम यहां क्या लेने आई हो मुझे ऑफिस में भी तो बात कर सकती थी,,,।

तुम्हारे व्यवहार से लगता है कि अब बातचीत करने का समय खत्म हो चुका है,,,,।

हां सब कुछ ख़त्म हो चुका है,,,,। मैं अब तुमसे किसी भी प्रकार का संबंध रखना नहीं चाहता,,,,,

( दरवाजा बंद होते ही शुभम जल्दी से गेट खोल कर अंदर की तरफ आ गया और दरवाजे से कान लगाकर अंदर की बातों को सुनने लगा,,,,)

यह तो मुझे पता ही था कि तुम्हारा मन मुझसे भर गया है इसलिए तो तुम मेरी जरूरतों को पूरा करने से आनाकानी कर रहे हो,,,,

देखो नीता तुम चाहे जो समझो लेकिन आप मेरा और तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है तुम जा सकती हो,,,,

अशोक तुमने जो मेरे साथ किया है यह मत समझना कि मैं दूसरी औरतों की तरह शांत हो जाऊंगी,,,, और मुझसे इस तरह इतनी आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते तुम,,, मैं आज तुम्हारी मैडम से मिलकर ही जाऊंगी,,,, कहां है वो देखूं तो,,,

(इतना कहकर वह सीढ़ियों की तरफ बड़ी ही रही थी कि अशोक बोला)

घर पर कोई नहीं है वह बाहर गई है,,,,

तो यह बात है तभी मैं सोचूं कि तुम इतना दहाड़ क्यों रहे हो,,

कोई बात नहीं मैं इंतजार करूंगी मैं भी आज मैडम से मिलकर ही जाऊंगी और तुम्हारी जिंदगी का काला चिट्ठा तुम्हारी मैडम के सामने खोल कर ही दम लूंगी,,, तुम मुझे यूं झूठे बर्तन की तरह उपयोग नहीं कर सकते कि जब मन आया उसे खा लिया और उसे फेंक दिया,,,, मैं वह हस्ती हूं जय बार गले में फंस जाओ तो फिर उसे कोई नहीं बचा सकता,,,,

( अशोक बार-बार दरवाजे की तरफ देख रहा था कि कहीं निर्मला ना जाए उसे डर लग रहा था और जिस तरह से रीता उससे धमकी भरी बातें कर रही थी उससे तो उसके घबराहट और ज्यादा बढ़ रही थी उस के पसीने छूटने लगे थे,,,, उसे लगने लगा कि आज वह निर्मला को सब कुछ बता कर ही दम लेगी अगर ऐसा हुआ तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा अभी तक तो सुबह महाराज जानता था लेकिन उसने यार आज अपनी मां को नहीं बताया था लेकिन आज यह रिश्ता उसके काले करतूतों को उसकी बीवी को बता कर उसकी जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद कर देगी,,, समाज में उसकी क्या इज्जत रह जाएगी अड़ोस पड़ोस के लोग क्या कहेंगे यही सब सोचकर उसके पसीने छूटने लगे,,, और वह बोला,,,।

रीता तुम चाहती क्या हो,,,,?

मुझ से पीछा छुड़ाने कि रकम मुझे सौंप दो इसके बाद दूर-दूर तक मेरा और तुम्हारा कोई वास्ता नहीं होगा,,,

नहीं बेटा अब मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा तुम अच्छी तरह से जानती हो कि मैंने अच्छी-खासी संपत्ति तुम पर लुटा चुका हूं तुम्हें फ्लैट दिलाया गाड़ी दीलाया,,, अपने शौक मौज पूरे करने के लिए महीने में लाखों रुपया लेती हो तुम,,, लेकिन अब मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सकता,,,,

माेज शौक कीस मोज सौक की बात कर रहै हो,,, मौज शौक तो तुम करते आ रहे हो मेरे साथ,,,, और उसके बदले में तुम मुझ पर आपने कैसे मिटा दिया रहे हो कोई मुफ्त का मेरे पर खर्च नहीं कर रहे हो,,, यह बात अच्छी तरह से अपने दिमाग में बैठा लो,,,, और अगर तुम्हें ऐसा लगता है तो आज मैं तुम्हारी बीबी से कौन किसके साथ मौज सौक करते आ रहा है सब कुछ बता कर ही जाऊंगी,,,,

( शुभम दरवाजे से कान लगाए सब कुछ सुन रहा था,,, उसने जानकर बड़ी हैरानी हो रही थी कि काफी समय से उसके पापा उस औरत के साथ शारीरिक संबंध बना रहे थे और उसके ऊपर लाखों रुपए खर्च कर चुके थे,,,,। शुभम को इस बात से भी डर लग रहा था कि अगर वह औरत उसके और उसके पापा के बीच में शारीरिक संबंध के बारे में उसकी मां को बता दे तो उसकी मां पर क्या बीतेगी क्योंकि उसकी मां से यही सोचती आ रही थी कि अशोक सिर्फ उस पर ध्यान नहीं देता बाकी उसका चरित्र खराब नहीं है लेकिन यह जानकर कि वह दूसरी औरत के साथ शारीरिक संबंध रखता है तभी उसके साथ किसी भी प्रकार का शारीरिक संबंध बनाने से कतराता है,,,, यह सोचकर शुभम का मन थोड़ा घबरा रहा था उसे भी इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां ना आ जाए और जिस तरह से वह औरत उसके पापा को धमकी दे रही थी इससे तो ऐसा ही लग रहा था कि वह उसकी मां को सब कुछ बता देगी,,, इस बात से अशोक भी काफी परेशान नजर आ रहा था,,,।)

देखो रीता तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगी तुम भी अब तक मेरा ज्यादा ऊपयोगं कर चुकी हो,,, तुम इधर से चुपचाप चली जाओ इसी में तुम्हारी भलाई है,,, वर्ना मैं अभी पुलिस को फोन लगाऊंगा और एक ईज्जतदार बिजनेसमैन को बदनाम करने के जुर्म मे तुम्हें अंदर करवा दूंगा,,,

( अशोक की यह बात सुनकर रीता जोर-जोर से हंसने लगी अशोक को यही लगा था कि उनकी ऐसी धमकी सुनकर रीता डर जाएगी लेकिन उस के विपरीत रीता जोर-जोर से हंसे जा रही थी,, और उसे हंसता हुआ देखकर अशोक का कलेजा सूखने लगा था,,,,। वह हंसते हंसते एकाएक खामोश हो गई और जोर से दहाड़ते हुए बोली,,,।)

अशोक इस तरह की बेवकूफी भरी गलती करने की कोशिश भी मत करना क्योंकि तुम्हारी यही गलती तुम्हारे लिए ही भारी पड़ जाएगी और जो तुम बहुत इज्जत दार इज्जत दार बिजनेसमैन की डींगे हांक रहे हो,,,, सब कुछ खत्म हो जाएगा तुम्हें भी अच्छी तरह से जानते हो कि इतना की हालत में पुलिस अक्सर औरतों की नहीं सुनती है,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह अपने पर्स में से मोबाइल. निकालते हुए) यह मोबाइल देख रहे हो ,,, इस मोबाइल में मेरे और तुम्हारे बीच के शारीरिक संबंध की बहुत सारी क्लीपे है,,, और अगर यह सारी क्लिप मैं पुलिस को दिखाकर मुझे क्या दोगी तो मुझे बहला-फुसलाकर जबरदस्ती मेरे साथ शारीरिक संबंध कई महीनों से बनाते आ रहे हो तो जानते हो,, क्या होगा यह तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि तुम भी अच्छी तरह से जानते हो कि क्या होगा और अगर मैं यही तुम्हारी बीवी तो बता दूं तब तो तुम्हारी हंसती खेलती जिंदगी में आग लग जाएगी,,,,,,

( रीता की धमकी सुनकर अशोक का चेहरा उतर गया मैं समझ गया कि वो पूरी तरह से रीता के घेरे में आ चुका था और के चुंगल से बच पाना बेहद मुश्किल था ऐसे में उसकी हर बात मानने में ही उसकी भलाई थी,,,,। इसलिए वह बोला,,)

रीता,,,, तुम इतनी चालाक निकलोगी है मुझे पता नहीं था तुम मेरे और तुम्हारे बीच की शारीरिक संबंध वाली क्लीप को अपने मोबाइल में रख कर अपनी बेशर्मी का पूरी तरह से सबूत दे चुकी हो,,,,।

देखो अशोक अगर मैं बेशर्म ना होती तो तुम्हारे साथ इस तरह के अनैतिक संबंध के लिए कभी भी तैयार नहीं होती,,,, रही बात बेशर्मी की तो यह तो मैं अपनी सेफ्टी के लिए अंतरंग संबंधों के नजारों को अपने मोबाइल में कैद करके रखी हैं क्योंकि मैं जानती थी कि तुम मर्द लोगो की चाहत एक जैसी होती है तुम मर्दों का भरोसा कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि जब तक औरतों से तुम लोगों का मन नहीं भर जाता तब तक उसे चुसते रहते हो,,, और जैसे ही मन भर जाता है तो चाय में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते हैं इसीलिए मैंने इसी दिन के लिए,,, तुम्हारे खिलाफ सारे सबूत इकट्ठे करके रखी थी और देखो आज वह सबूत मेरे बहुत काम आ रहा है,,,,,। और हां अशोक बेशर्मी पन मैं तो तुम भी किसी से कम नहीं हो,,, घर में खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी घर के बाहर दूसरी औरतों के पीछे लार टपकाते फिरते रहते हो,,,, अपनी बीवी को धोखा देकर बाहर की औरतों से संबंध रखते हो,,,,,, मैं तो मजबुरी मै यहं सब काम करती हूं क्योंकि मैं जानती हूं कि मेरा पति कमाने वाला नहीं,,, इसलिए मुझे इस तरह से कमाना पड़ता है,,,।

बेकार की बहस बाजी छोड़ो और ठीक-ठीक बताओ कि तुम चाहती क्या हो,,,,,,,

कभी आए ना लाइन पर,,,,, अशोक तुम मुझे 20 लाख रुपया दे दो,,,, इसके बाद ना तो तुम मुझे जानते हो ना मैं तुम्हें जानती हूं और यह मोबाइल भी तुम रख लेना,,,,

सरिता तुम पागल तो नहीं हो गई हो 20 लाख रुपया जानती हो कितनी बड़ी रकम है,,,।

मुझ से पीछा छुड़ाने के लिए तो यह रकम तुम्हारे लिए बहुत मामूली है वरना इससे भी कहीं ज्यादा चुकाना पड़ जाता,,,

रीता थोड़ा कम करो इतनी बड़ी रकम मैं नहीं दे सकता,,,

तुम दे सकते हो,,,, ओर ये रकम मुझे आज ही चाहिए उसके बाद तुम आराम से अपनी नई जिंदगी शुरु कर सकते हो,,,

इतनी बड़ी रकम आज के दिन में कैसे एडजस्ट कर सकता हूं देखो रिता तुम कुछ ज्यादा ही मांग रही हो,,,

कुछ ज्यादा नहीं है अशोक,,,,,,,,,

रीता लगभग चिल्लाते हुए बोली और यह सब दरवाजे के पीछे खड़ा होकर शुभम सुन रहा था और जान चुका था कि उसके बाप ने उस औरत के पीछे लाखों रुपए बर्बाद कर चुका था। और अब 20 लाख रुपए और उसे चुकाना था,,

तुम अगर यह चाहते हो कि तुम्हारी हंसती खेलती जिंदगी यूं ही अच्छे से चलती रहे तो मुझे देखना करो के आज के आज चाहिए वरना मैं तुम्हारी काली करतूतें तुम्हारी बीवी को अपने मोबाइल से जरूर दिखा दूंगी,,,,

रीता तुम कितनी बदजात और बेशर्म औरत हो,,,,

हां हो और इसमें तुम्हें कोई भी किसी भी प्रकार का शक नहीं होना चाहिए वरना मैं अपनी बेशर्मी पूरी तरह से दिखा दूंगी तो समाज में उठना बैठना भारी पड़ जाएगा,,,,

( अशोक पूरी तरह से खराब हो चुका था कि उसकी इज्जत पूरी तरह से रीता के हाथों में है,,, रीता से संबंध बनाने से पहले वाणी बारे में कभी नहीं सोचा था उसे यही लग रहा था कि पहले की तरह यह औरत भी बड़े आराम से और आसानी से उसका पीछा छोड़ देगी लेकिन ऐसा नहीं था।,,,, अशोक पूरी तरह से हार चुका था और उसके पास 20 लाख रुपए चुकाने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था। वह लगभग हताश होते हुए बोला,,,,।

मैं तैयार हूं तुम्हें 2000000 रुपए देने के लिए,,,,

शुभम यह बात सुनकर एकदम से हड़बड़ा गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके पापा उस औरत को 2000000 रुपए देने के लिए तैयार हो चुके हैं,,,। और इसी हड़बड़ाहट में वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और दरवाजे पर उसका पूरा वजन आ गया,,, जल्दबाजी में अशोक ने दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया था इसलिए दरवाजा खुल गया और शुभम गिरते-गिरते बचा इस तरह से शुभम को आता देखकर अशोक की तो सांसे ही बंद हो गई क्योंकि वह उस दिन ऑफिस में रीता के साथ उसे रंगरेलियां मनाते हुए देखा था और आज तो वहां उस औरत को अपने घर पर ही देख रहा था। शुभम को देखते ही,,,

बबबब,,,, बेटा,,, तुम,,,,,

हां मैं पापा अच्छा हुआ कि मैं ही हूं कहीं मेरी जगह मम्मी होती थी उन पर ना जाने तुम्हारी इस रंगरेलियों का कैसा कहर बरसता,,,, यह सब देखकर तो उनकी हालत खराब हो जाती है उनका विश्वास टूट जाता।
 


( शुभम लगभग बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपने बाप से बोले जा रहा था और इस तरह से दरवाजा खोलकर घर में घुस आने से रहता शुभम को देखती रह गई थी,,, दोनों के बीच की वार्तालाप को देखकर वह समझ गई थी कि दोनों बाप बेटे हैं और उसे यह भी याद आ गया था कि उस दिन ऑफिस का दरवाजा जिस लड़के ने खोला था वह यही है,,, इसलिए वह आश्चर्य के साथ बोली।)

अच्छा तो यह तुम्हारा बेटा है तभी इसे देखकर तुम्हारे धक्के रुक गए थे तभी मैं सोचूं कि ईतनी जल्दी तुम्हारा जॉश कैसे खत्म हो गया,,,,,

बकवास बंद करो रीता तुम्हें क्या कहना चाहिए क्या नहीं कहना चाहिए या तो जरा देख कर बोला करो,,,,

अशोक तुम्हारा बेटा कोई दूध पीता बच्चा नहीं है देख नहीं रहे हो इसके हट्टे-कट्टे शरीर को,,, यह पूरी तरह से जवान हो गया है,,,( रीता शुभम के करीब जाकर उसके चारों तरफ चक्कर काटते हुए बोले जा रहीे थी।)

रीता चुप रहो,,,,

अरे अशोक इसमें क्या शर्माना यह तो तुम्हें रंगे हाथों मुझे चोदते हुए पकड़ भी लीया ं है। क्यों बेटा मैं सच कह रही हूं ना,,, बेटा नहीं क्या नाम है तुम्हारा,,,

शशशश शुभम,,,, व

हां शुभम तो तुम ही थे ना उस दिन ऑफिस का दरवाजा खोल दिए थे,,,,( शुभम हां में सिर हिलाते हुए) ओर यह भी अच्छे तरीके से देख लिए होगे,,, तुम्हारे पापा कैसे मेरी चुदाई कर रहे थे और वाह भी ऑफिस में,,,,

( रीता एकदम बेशर्मी पर उतर आई थी,,, उसकी बातों को सुनकर अशोक को शर्म आ रही थी क्योंकि वह उसके बेटे से यह सब बातें बोल रही थी लेकिन शुभम को उसकी बातें सुनकर मजा आ रहा था और उसके लंड में हरकत होना शुरू हो गया था रीता कि खुली बातें उसके लंड पर हथौडे चला रही थी।)

देखें देना तुम कि कैसे तुम्हारे पापा जोर-जोर से मेरी बुर में अपना लंड पेल रहे थे,,,,।

( रीता की गर्म बातें सुनकर शुभम की सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी वह मुंह से कुछ बोल नहीं पाया लेकिन हां मे सिर हीला दिया),,,,

तब तो तुम यह बात अपनी मां से जरूर बताएं होगे,,,,

नहीं मैंने नहीं बताया,,,

क्यों नहीं पता क्योंकि तुम्हारी जगह कोई और लड़का देखा होता तो अपने बाप की करतूतों को जरूर बता देता,,,,

मेरी मां बहुत सेंसिटिव है अगर उन्हे इस बारे में जरा सी भी भनक लगती तो उनका दिल टुट जाता ।

वांह शुभम वाह तुम्हारे जैसा समझदार बेटा अगर जिसका होगा तो उसका बाप तो रंगरेलियां मनाएगा ही,,,,, मुझे तो लगा था कि तुम घर पर सब कुछ बता दिए होंगे और घर में बवाल मच गया होगा तभी तो मैं अशोक से इतने दिन पैसे के बारे में बात तक नहीं की,,,, देख लो अशोक तुम्हारा बेटा कितना समझदार है उसकी मां का दिल ना टूट जाए इसलिए वह तुम्हारी करतूतों के बारे में कुछ भी नहीं बताया और तुम

अपनी सीधी साधी भोली भाली बीबी को धोखा देकर,,, दूसरी औरतों के साथ रंगरेलियां मनाते हो अपनी प्यास बुझाते हो और उन औरतों को धोखा देते हो,,,( रीता की यह बात सुनकर शर्म के मारे अशोक अपना सिर नीचे झुका कर खड़ा था लेकिन शुभम बड़े ध्यान से रीता की बातों को सुन रहा था। )

जानते हो शुभम तुम्हारे पापा तुम्हारी मम्मी के बारे में क्या कहते हैं,,,, यह कहते हैं कि बिस्तर में तुम्हारी मम्मी एकदम ठंडी औरत है। ठंडी औरत का मतलब शायद तुम नहीं जानते हो ओके मैं तुम्हें बताती हु।

शट् अप रीता,,,,, बकवास बंद करो,,,,,( अशोक रीता को चुप कराने के इरादे से बोला लेकिन रीता के ऊपर अशोक की बातों का बिल्कुल भी असर नहीं हुआ।)

बकवास नहीं कर रही हूं हकीकत बता रही हूं और वैसे भी अब तुम्हारा लड़का बड़ा हो चुका है जो अपने बाप की रंगरेलियां अपनी मां से छुपा ले जाए तो वह लड़का समझदार भी होता है। शुभम ठंडी औरत का मतलब होता है बिस्तर में बिल्कुल भी साथ ना देना और यही ख्याल तुम्हारी मम्मी के बारे में तुम्हारे पापा का है। अगर खुल के कहूं तो,,, तुम्हारे पापा जब भी तुम्हारी मम्मी को लंड चूसने के लिए कहते हैं तो तुम्हारी मम्मी ऊनका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने के लिए इंकार कर देती है,,,।

( शुभम एक औरत के मुंह से उसकी मां के बारे में यह बात सुनकर एकदम से सन्न रह गया हालांकि उसे बेहद आनंदित महसूस हो रहा था। लेकिन फिर भी वह बनावटी गुस्सा करते हुए बोला,,,।)

पापा यह क्या कह रही है क्या यह सब बातें आप बाहर जा कर के बताते हो।

नहीं बेटा यह झूठ बोल रही है,,,,, रीता यह क्या बकवास कर रही हो तुम,,,

नहीं सुबह मैं झूठ नहीं बोल रही हूं यह बिल्कुल सच है यह कहते हैं कि तुम्हारी मम्मी बिस्तर पर उनका बिल्कुल भी साथ नहीं देती मतलब यह है कि खुलकर नहीं चुदवाती,, इसलिए तू यह मेरे पास आते हैं और जो काम तुम्हारी मम्मी नहीं कर पाती वह मुझसे करवाते हैं।

( रीता के गरम बातें सुनकर शुभम की हालत खराब होने लगी थी क्योंकि वह ईतने से समझ गया था कि रीता एकदम खुली हुई औरत थी। उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था जो कि पैंट में तंबू बना रहा था। जिस पर रीता की नजर पड़ चुकी थी। और वह शुभम के बिल्कुल करीब जाकर बिना किसी शर्म लिहाज के सीधे शुभम के पेंट में बने तंबू को अपनी हथेली में दबोच ली,,,, रीता एकदम खेली खाई औरत थी,,, पेंट के ऊपर से ही लंड को पकड़ते ही उसे समझ में आ गया कि पैंट के अंदर छिपा हुआ हथियार बेहद दमदार और मरदाना है। लेकिन रीता के इस व्यवहार से शुभम के साथ साथ अशोक भी चौक गया था,,, लेकिन वह दोनों कुछ बोल पाते इससे पहले ही रीता बोल पड़ी,,,,,

वाहहहहह शुभम तुम्हारा हथियार तो बहुत जानदार है,,,, देख रहे हो अशोक तुम्हारे बेटे का लंड ऊसकी मा की बातें सुनकर ही किस तरह से खड़ा हो गया है। तुम्हारे लंड से तो कई गुना बड़ा तुम्हारे बेटे का लंड है। सच कहूं तो तुम्हारे बेटे के लंड को पेंट के ऊपर से ही पकड़कर मेरी बुर कुलबुलाने लगी है,,,, अगर सच में इसकी मां अगर ईसके लंड को देख ली तो तुम्हारी तो उसे जरूरत ही नहीं पड़ेगी,,,,

बकवास बंद करो रीता कैसी बातें कर रही हो तुम,,,,

अरे सच कह रही हूं जो हकीकत है वही तो कह रही हूं औरत को तो बड़े लंड से मजा आता है छोटा लंड चाहे कितना भी कूद ले बुर की गहराई नहीं नाप पाता,,, बुर की गहराई सिर्फ लंबा लंड ही नाप पाता है,,,, और जिस तरह से अपनी ही मां की बातें सुनकर इसका लंड खड़ा हुआ है मुझे तो लगता है अगर इसकी मां ने इसे जरा सा भी इशारा दिया तो यह अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करेगा,,,,,

( एक औरत के मुंह से अपनी मर्दाना ताकत की बखान सुनकर और वह भी उसकी खुद की मां के बारे में उसकी चुदाई के बारे में सुनकर गर्व से शुभम का सीना चौड़ा हो गया लेकिन वहां वह जानबूझ कर शर्मिंदा हुए खड़ा था। क्योंकि अभी भी रीता पेंट के ऊपर से ही उसके लंड को दबा रही थी

शुभम को बहोत. मजा आ रहा था। अगर इस समय उसके पापा वहां नहीं होते तो सीता की हरकत देखते हुए वह उसे वही पटक कर अपने लंड की ताकत को दिखा दिया होता।

अशोक रीता के इस व्यवहार से पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था और वह बोला।

तुम एकदम बेशर्म हो रीता,,,,

हां मैं एकदम बेशर्म हूं( शुभम के लंड को पेंट के ऊपर से छोड़ते हुए) यही ततबताना चाहती थी यह जो कुछ भी मैं बोली यह सब मैं तुम्हारी बीवी से भी बोल सकती हूं। इसलिए आज शाम को 2000000 रुपए मुझे मिल जाना चाहिए वरना यह सारी बाते में तुम्हारी बीवी से बता दूंगी,,,,

मैं दे दूंगा लेकिन (इतना कहकर अशोक शुभम की तरफ देखने लगा,,, अशोक के इशारे को रीता अच्छी तरह से समझ गई और वह बोली)

मैं जानती हूं तुम्हारा लड़का बहुत समझदार है और तुम्हारी बीबी को यह कुछ भी नहीं बताएगा,,,( इतना कहकर रीता फिर से पैंट के ऊपर से तने हुए शुभम के लंड को पकड़ ली, इस बार शुभम की सिसकारी निकल गई।) नहीं बताओगे ना सुभम,,,,,

नहीं मैं अभी भी कुछ नहीं बताऊंगा।

अपने बेटे की बात सुनकर अशोक को थोड़ी राहत हुई और रीता मुस्कुराने लगे कभी बाहर कार रुकने की आवाज आई और उसकी आवाज सुनकर शुभम और अशोक दोनों हड़बड़ा गए क्योंकि वह जानते थे कि निर्मला घर आ चुकी है।,,, उन दोनों की हालत देखकर रीता बोली,,,

क्या हुआ?

देखो मेरी बीवी निर्मला आ गई है तुम ऊससे कुछ भी मत बताना,,,,

तुम बेफिक्र रहो मैं कुछ नहीं बताऊंगी,,,,, लेकिन शाम को मेरा 2000000 रुपए मिल जाना चाहिए वरना,,,,

तुम चिंता मत करो मिल जाएगा,,,,

( तभी डोर बेल बजी और दोनों के चेहरे फीके पड़ने लगे,,, शुभम अपने बाप को हौसला दिलाते हुए बोला,,,।)

आप निश्चिंत रहो पापा मैं सब कुछ संभाल लूंगा,,,, आप दोनों आराम से कुर्सी पर बैठ जाईए ताकि किसी को कुछ भी शक ना हो,,,, (और शुभम की बात सुनकर दोनों आराम से कुर्सी पर बैठ गए,, शुभम जैसे ही दरवाजा खोला उसकी मां गेट के आगे खड़ी कार के बारे में ही बोलने हीं जा रही थी कि शुभम झट से बोल पड़ा,,,।)

मम्मी पापा के ऑफिस से उनकी कर्मचारी आई हैं कोई जरूरी काम था।

ओहहहहह,,, तो तुमने चाय बगैरा दिया कि नहीं,,,

नहीं मम्मी वह अभी अभी ही आई है,,,,।

( इतना कहकर निर्मला घर में प्रवेश की और शुभम दरवाजा बंद कर दिया,,, निर्मला रीता को देखते ही हाथ जोड़ते हुए नमस्ते की और रीता भी कुर्सी से खड़ी होकर उसे नमस्ते करने लगी लेकिन उसकी नजर निर्मला की खूबसूरती और उसके बदन की बनावट पर ही टिकी थी। उसकी खूबसूरती देखकर रीता आश्चर्य में पड़ गई थी कि इतनी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी हो उसके पीछे क्यों दीवाना हो गया था।

रूको मैं चाय बना कर लाती हूं (और इतना कहकर निर्मला किचन में चली गई)

यार अशोक तुम लगता है सबसे बड़े बेवकूफ हो तुम्हारे पास तो खूबसूरती का खजाना है फिर भी इधर उधर मुंह मारते फिरते हो,,,

( शुभम रीता की बातें सुनकर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मम्मी की खूबसूरती की तारीफ कर रही थी,,,,।)

तुम पागल हो अशोक यह मैंने आज देख ली,,, देखना कहीं तुम्हारी बीवी अपने ही बेटे से कहीं चुदवाना ना शुरू कर दे,,

चुप रहो रीता,,,

क्यो शुभम तेरी मम्मी सच में बहुत सेक्सी है।

( शुभम कुछ बोला नहीं बस खामोश रहा)

कभी अपनी मम्मी पर ट्राई करना देखना बहुत मजा आएगा,,

( शुभम को रीता की बातें सुनने में मजा आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था तब तक उसकी मां चाय ले करके आ गई,, अशोक अपने बेटे की चालाकी से बहुत खुश था।)

 
निर्मला चाय बना कर ले आई और अपने हाथों से सबको चाय का कप थम आने लगी रीता की नजर निर्मला की खूबसूरती पर ही टिकी हुई थी। उसे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि रूप और खूबसूरती से भरा हुआ खजाने का पिटारा अशोक के पास था फिर भी वह उसके साथ क्यों शारीरिक संबंध बनाते आ रहा था यह बात उस को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही थी हालांकि यह बात जरूर थी कि अशोक के बताए अनुसार निर्मला पूरी तरह से एक ठंडी औरत थी लेकिन जिस तरह से वह निर्मला की खूबसूरती और उसकी बदन के बनावट को उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और भरावदार गांड के उभार को देख रही थी,,,, इससे उसे बिल्कुल भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि, निर्मला कहीं से भी ठंडी औरत है उसके अंदर वैसे ही जवानी की चिंगारी भड़क रही थी। और निर्मला के जवानी किए चिंगारी मर्दों के बदन में आग लगाने के लिए काफी थी।,,, रीता की टकटकी बंधी आंखों को देख कर शुभम समझ गया कि वह भी उसकी मां की खूबसूरती से पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी है यह देखकर वह मन ही मन खुश हो रहा था जब एक औरत एक औरत की खूबसूरती देखकर इस कदर आकर्षित हो सकती है तो उस औरत की खूबसूरती के आगे किसी भी मर्द की क्या विषाद थी की निर्मला की खूबसूरती के आगे घुटने टेक कर उसका गुलाम ना बन जाए। और ऐसी खूबसूरत औरत का गुलाम बनने के लिए तो दुनिया का हर मर्द तैयार रहता है। खैर ईस समय रीता की गर्म बातों ने शुभम के बदन में खलबली मचाई हुई थी। जिस तरह से वहां उसके बाप के सामने ही शुभम को उसकी मां के साथ संबंध बनाने के लिए उकसा रही थी यह देखकर शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी क्योंकि यह बात उसके पापा के कानों में जरूर पड़ रही थी लेकिन वह इस समय कुछ भी बोल सकने की हालत में बिल्कुल भी नहीं थे। और इसी हालात का तो शुभम पूरी तरह से फायदा उठाने के लिए ही अपने बाप का साथ दे रहा था ताकि वक्त आने पर वह अपने बाप के सामने खड़ा हो सके क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा तो था ही कि एक ना एक दिन उसके और उसकी मां के बीच के संबंध के बारे में उसके पापा को जरूर पता चल जाएगा लेकिन उस दिन के तूफान से पहले वह अपनी कश्ती को मजबूत कर लेना चाहता था। क्योंकि जवानी के समंदर में समुंदर के रुख को जाने बगैर उतरना बेवकूफी होती है। और शुभम ऐसी बेवकूफी नहीं करना चाहता था। वह मन ही मन इस बात से और ज्यादा खुश नजर आ रहा था कि उसका बाप पूरी तरह से उसके कब्जे में आ चुका था क्योंकि उसके बाप की नजर में तो वह ऊसके राज को उसकी मां से छिपाकर,,, एक अच्छा बेटा होने का फर्ज निभा रहा था लेकिन अशोक इस बात से बिल्कुल अनजान था कि शुभम उसकी मदद उसके राज को वह अपने मतलब के लिए छुपा रहा था।,,,

चाय नाश्ता करने के बात अशोक को ऑफिस के काम के लिए शाम को मिलने के लिए बोल कर वह दरवाजे की तरफ जाने लगी तो निर्मला औपचारिक रूप से उसे दरवाजे तक छोड़ने गई,,,, और जाते-जाते निर्मला की खूबसूरती की तारीफ करती गई,,,, एक औरत के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर निर्मला को भी काफी अच्छा महसूस हो रहा था।

अशोक निराला की गहराई में शुभम को धन्यवाद किया क्योंकि जो काम शुभम ने उसके लिए किया था शायद दूसरा बेटा होता तो ऐसा कभी नहीं करता। अशोक अपने बेटे से काफी खुश था इसलिए गांव जाने के लिए उसे जेब खर्च के तौर पर ₹5000 अपने पास रखने के लिए दे दिया ताकि वह खर्च कर सके इतनी ज्यादा रकम उसने पहली बार जेब खर्च के लिए लिया था लिया क्या था बिना मांगे ही मिल गया था इसलिए वह भी बहुत खुश था।।

गांव जाने के लिए शुभम और निर्मला तैयार हो चुके थे,,। कार से जाना था इसलिए निर्मला ने,,, खाने पीने का सामान पैक कर के गाड़ी में रख ली थी निर्मला फूलों वाली साड़ी पहनी थी जिसमें उसका बदन फूल की तरह महक उठा रहा था।

ब्लाउज में कैद बड़ी बड़ी चूचियां बाहर आने के लिए गदर मचा रही थी वह तों बड़ी मुश्किल से निर्मला ने ब्लाऊज के बटन लगा कर उन्हें ब्लाउज के अंदर ठुंस रखी थी। निर्मला को तैयार हुआ देखकर शुभम का नंबर ठुनकने लगा,,, निर्मला आगे आगे चल रही थी और सुभम पीछे पीछे शुभम की नज़र तों अपनी मां की मदमस्त मटकती हुई गांड पर ही टिकी हुई थी, अपनी मां की मटकती हुई गांड को देख कर शुभम का मन उसे चोदने को कर रहा था। लेकिन वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था क्योंकि ऊन दोनों को निकलना था। घर के बाहर आकर हमें मिला घर के दरवाजे को लॉक करने लगी तो,, शुभम अपनी मां की गांड पर एक चपत लगाते हुए बोला,,,

मम्मी तुम तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो एकदम माल लग रही हो,,,,

तो ईससे पहले खूबसूरत नहीं लग रही थी क्या,,( दरवाजे पर ताला लगाते हुए बोली)

नहीं ऐसा नहीं है खूबसूरत तो तुम हमेशा ही लगती हो लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही हो,,,,

चल अब बातें मत बनाओ हमें जल्दी निकलना है शाम तक हमें अपने गांव पहुंच जाना है कहीं बातों में उलझ गए तो यही देर हो जाएंगी,, ( अपने बेटे की बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोली,, अभी सुबह के 6:00 ही बज रहे थे और निर्मला शुभम के साथ अपने गांव के लिए निकल रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि तकरीबन 12 14 घंटे का रास्ता है और अगर वह सुबह जल्दी नहीं निकलेगी तो काफी रात हो जाएगी और गांव का मामला होने से मुश्किल भी लग रहा था इसलिए वह जल्दी निकल रही थी। और वैसे भी निर्मला कम स्पीड में और संभाल कर गाड़ी चलाती थी इसलिए उन लोगों का जल्दी निकलना भी बहुत जरूरी था। अशोक यह जानते हुए भी कि उसके बीवी और बच्चे गांव जा रहे हैं लेकिन फिर भी वह घर पर नहीं आया था। क्योंकि घर की चाबी एक अशोक के पास ही होती थी। गाड़ी में बैठते बैठते शुभम बोला,,

सच मम्मी तुम आज बेहद हॉट लग रही हो मन तो कर रहा है कि कार में ही तुम्हारी चुदाई कर दूं।,,,,,

धत्,,,,, बदमाश,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला भी ड्राइवर सीट पर बैठ गई और गाड़ी स्टार्ट करके गैर बदलकर अपने नाजुक पैरों से एक्सीलेटर दबा दी गाड़ी का पहिया रफ्तार पकड़ने लगा,,, शुभम बार-बार मुस्कुराकर अपनी मां की तरफ ही देखे जा रहा था उसे इस तरह से अपनी तरफ देखकर निर्मला को थोड़ा शर्म सी महसूस होने लगी और वह बोली,,,,।

ऐसी क्या देख रहा है ऐसा लग रहा है कि आज मुझे पहली बार देख रहा है।

मम्मी तुम्हें चाहे जितनी बार देखो ऐसा लगता है कि पहली बार ही देख रहा हुं।,,,

तुझे अब बहुत बातें आने लगी है पहले तो काफी खामोश रहता था लेकिन अब तो बस टपर टपर बस बोलता ही जाता है।

क्या करूं मम्मी तुम्हारी संगत ने मुझे ऐसा कर दिया है।,,,

मेरी संगत तुझे खराब लग रही है क्या,,,( स्टीयरिंग को संभालते हुए)

ऐसी संगत तो मुझे जिंदगी में नहीं मिलने वाली,,,,,

( अपनी बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुरा दी,,, कुछ ही देर में निर्मला की कार मुख्य हाईवे पर दौड़ने लगी,,,,, निर्मला की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह गांव में खासकर के खेतों में अपने बेटे से चुदवाना चाहती थी,,,, क्योंकि खेतों से उसकी कुछ यादें जुड़ी हुई थी जब वह गांव में रहकर पढ़ाई करती थी तब उसकी सहेलियां जो कि काफी खुली हुई थी निर्मला से वह लोग अपनी अतरंग बातें भी बता दिया करती थी। आने से काफी सहेलियों ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ खेतों में चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे शौच जाने के बहाने अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाने का आनंद ले चुकी थी और यह बात जब वह लड़कियां निर्मला से बताती तो अनजाने में ही उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगती। उसके मन में भी इस बात को लेकर बेहद उत्सुकता मच जाती थी लेकिन वह अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाती थी बस कुछ पल के लिए ही उसके मन में खेतों में चुदवाने की उत्सुकता बनी रहती थी इसके बाद वह खुद भूल जाती थी सब कुछ क्योंकि वह ज्यादातर पढ़ाई मे हीं ध्यान देती थी,,,, लेकिन वह मैंने सोचती थी कि जब उसकी शादी होगी तो वह किसी न किसी बहाने अपने पति से खेतों में जरूर जरूर चुदवाएगी लेकिन उसकी शादी शहर में हो गई,,, और अपने संस्कार की वजह से वह अपने पति से अपने मन की बात बता भी नहीं पाई लेकिन आज जाकर उसका सपना ऐसा लगने लगा था कि पूरा होगा,,,, और वह भी इस सपने को वह अपने बेटे के लंड से चुदवा कर पूरा करेंगी। निर्मला मन ही मन में यह सब सोचकर बेहद प्रसन्न हो रही थी,,,, उसको इस तरह से मुस्कुराते देखकर शुभम बोला,,,

क्या बात है मम्मी तुम बहुत खुश नजर आ रही हो,,,

सारी खुशी की बात तो है यही आज कितने बरसों के बाद में अपने गांव जा रही हुं। क्या तू खुश नहीं हो?

मैं भी बहुत खुश हूं मम्मी लेकिन मैं इसलिए भी खुश हूं कि मैं तुम्हें गांव में खेतों के बीच चोदना चाहता हूं। मैं महसूस करना चाहता हूं कि, खुले आसमान के नीचे खेतों के बीच में चुदाई करने में कैसा मजा आता है।,,

( निर्मला के मन में जो चल रहा था वही बात वह अपने बेटे के मुंह से सुनकर एकदम रोमांचित हो उठी रोमांचित होते हुए बोली)

बहुत मजा आएगा बेटा,,,

क्या मम्मी तुम पहले भी खेतों में चुदवा चुकी हो,,?

सच कहूं तो बिल्कुल नहीं( स्टेरिंग घुमाते हुए) लेकिन मेरे मन में बरसों से यह बात कभी हुई है कि मैं भी खेतों में चुदवाऊं

सच मम्मी,,,,

हां शुभम यह सब तो सोच-सोच कर मेरा तन बदन कसमसा जा रहा है।,,,,,,

( अपनी मां की यह बात सुनकर शुभम की नजर निर्मला की बड़ी बड़ी छातियों पर चली गई जिस परसे से साड़ी धीरे धीरे नीचे सरक रही थी। शुभम तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मा की चूची दबाते हुए बोली,,,

हां मम्मी सच में ऐसा लग रहा है कि तुम्हारी दोनों लंड लेने के लिए तड़प रही है।

(। शुभम के द्वारा इस तरह के चूची पकड़ने की वजह से निर्मला के बदन में गुदगुदी होने लगी,,, और वह हंसते हुए बोली।)

शुभम हाथ हटा ले मेरा ध्यान भटक जाएगा,,,,

और जो इस तरह से मेरा ध्यान भटका रही हो ऊसका क्या?

अब मैं क्या कर रही हुं।

अपनी साड़ी का पल्लू क्यों नीचे गिरा रही हो?

अरे तू पागल हो गया है क्या मैं गिरा रही हूं कि अपने आप खुद ही हवा से नीचे सरक रहा है।

नहीं तुम ही गिरा रही हो,,,,

भला मैं क्यों गिराऊंगी अपना पल्लू,,,

अपनी चूची दिखाने के लिए,,,,

हां,,,,, हांंं ऐसा लग रहा है कि तूने जैसी मेरी चूची देखा ही नहीं है।

देखा हूं लेकिन इस समय तुम. मुझे जानबूझकर अपनी चूची दिखा कर ऊकसाना चाहती हो,,,, ( शुभम लगातार ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की चूची दबाते हुए बोला,,,)

अरे मैं तुझे क्यों अपनी चूची दिखाऊंगी और वह भी कार में,, और वैसे भी कौन सा ब्लाउज का बटन खुला हुआ है जो तुझे मेरी चूची नजर आ रही है।( स्टीयरिंग संभालते हुए)

अरे बटन खुला हुआ नहीं है तो क्या हुआ ब्लाउज पहनने के बाद भी तो तुम्हारी आधी से ज्यादा चुची बाहर को ही नजर आती है। और देखो तो सही (ब्लाउज के ऊपर से चूची को दबाते हुए) मेरे इस तरह से दबाने से तुम्हारी चूची को साइज भी बढ़ने लगा है। तुम मुझसे उस दिन कि तरह फिर से लगता है कि कार मे चुदवाना चाहती हो,,,

धत्त,,, पागल मुझे ठीक से गाड़ी चलाने दे,,,,( निर्मला शुभम को बार-बार हाथ हटाने के लिए बोल रही थी लेकिन खुद उसका हाथ नहीं हटा रही थी क्योंकि उसे भी बेहद मजा आ रहा था।)

पागल नहीं मैं सच कह रहा हूं और मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि तुम्हारी बुर ईस समय पानी छोड़ रही है तुम्हारी पैंटी भी गीली हो रही होगी,,,,।

शुभम तु मुझे गाड़ी चलाने दे वरना मेरा ध्यान इधर उधर हो गया तो गाड़ी टकरा जाएगी,,,,,

कुछ नहीं होगा मम्मी तुम आराम से चलाओ,,, कहों तोे मै तुम्हारी साड़ी उठाकर देख लु की तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही है या नहीं अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा,,

( अपने बेटे की ऐसी चीज और उसकी बातें सुनकर वह जोर से हंसने लगी कि तभी उसकी नजर हाइवे के किनारे उसी पेड़ के ऊपर गई जिस पेड़ के नीचे उस रात को शुभम के साथ निर्मला ने अपनी सारी मर्यादा को तोड़ दी थी उस पर नजर पड़ते ही उसके बदन में रोमांच की लहर दौडने़ लगी,, और वह झट से बोली,,,

शुभम वह देख वह वही पेड़ है जिसके नीचे कार के अंदर हम दोनों ने रात गुजारी थी,,,

( शुभम अपनी मां की बात सुनते ही उस तरफ देखने लगा)

 
जैसे ही निर्मला ने शुभम को उस जगह को ऊंगली के निर्देश से दिखाने लगी जहां की पहली बार कार के अंदर उन दोनों ने अपने मां बेटे की पवित्र रिश्ते को खत्म करके आपस में शारीरिक संबंध बनाया था। उस जगह पर नजर पड़ते ही निर्मला के साथ-साथ शुभम के बदन में भी उत्तेजना की गुदगुदी होने लगी। शुभम की आंखों के सामने उस रात को भी था एक एक पल किसी फिल्म की तरह आंखों से गुजरने लगा। निर्मला जी उस जगह पर नजर पड़ते ही रोमांचित हो उठी।,,,, निर्मला अपनी कार की रफ्तार को एकदम धीमी कर दी दोनों की नजर बराबर ऊस. घने पेड़ के ऊपर टिकी हुई थी। तभी अचानक निर्मला कार को साइड में लगाकर कार खड़ी कर दी और तुरंत कार से बाहर आ गई अपनी मां को इस तरह से कार के बाहर ज्यादा देखकर शुभम से भी रहा नहीं गया और वह भी कार से उतरकर बाहर खड़ा हो गया,,,,।

हाईवे पर आती-जाती कार अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी इसलिए किसी का भी ध्यान इन लोगों पर नहीं था। वैसे भी अगर किसी का भी ध्यान इन लोगों पर पड़ता इस बात की फ़िक्र इन दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि कोई भी इस तरह से हाइवे के किनारे कार खड़ी करके हरियाली का नजारा लेता रहता था। वैसे भी हाइवे के किनारे काफी खली झाड़ियां उगी हुई थी जो कि बेहद आंखों को ठंडक प्रदान करने वाली भी लगती थी। दोनों सड़क के किनारे खड़े होकर उस घने पेड़ की तरफ देख रहे थे जंगली झाड़ियां होने की वजह से हवाएं एकदम ठंडी बह रही थी और वैसे भी सुबह का समय था इसलिए इधर का नजारा काफी खूबसूरत लग रहा था। तेरी चलती हवाओं के साथ साथ निर्मला के रेशमी मखमली बाल भी हवा से उलझ रहे थे। बार-बार निर्मला के बालों की लट है उसके गोरे गालों पर झूम जा रही थी जिसे निर्मला अपनी नाजुक उंगलियों के सहारे कान के पीछे ले जा कर उन्हें शांत करने की कोशिश करती थी लेकिन हवा इतनी बेशर्म थी कि बालों के साथ-साथ उसके कंधे पर से उसका आंचल भी खींच ले रही थी जिसकी वजह से कुछ पल के लिए उसकी भरावदार छातिया ऊजागर होकर अपनी खूबसूरती बिखेरने लगती थी। लेकिन इस खूबसूरती का रसपान केवल शुभम ही कर पा रहा था क्योंकि निर्मला के ऊपर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा था वैसे भी हाईवे पर अभी गाड़ियों की भीड़ नहीें थी इक्का-दुक्का गाड़ियां ही गुजर रहे थी।,,,, बार-बार बेशर्म हवाएं पूरी ताकत लगाकर निर्मला के साड़ी के पल्लू को उसके कंधे से हटा दे रही थी,,,

मानव की ऐसा लग रहा था कि यह हवाएं भी निर्मला की बड़ी बड़ी चूचीयों के दर्शन करना चाह रही हो और जबरदस्ती उसका पल्लू हटाकर अपनी नजरें गड़ाने की कोशिश कर रही हो। हवाओं का कोई आकार नहीं था वरना सचमुच यह कामातुर हो चली हवाएं निर्मला को अपनी बाहों में जकड़ कर अपने अंग को उसके कोमल अंग में ऊतार दीया होता।,,, कभी हवा का एक तेज झोंका इतनी तेजी से निर्मला के बदन से टकराया की,,, झोंके के साथ हवा का पूरा गुबार निर्मला के पैरों पर इतनी जोर से टकराया की सारी की सारी हवा पैरों से टकराकर उपर की तरफ उठी जिसकी वजह से निर्मला की साड़ी हवा के साथ ऊपर की तरफ उठने लगी और एकाएक उसकी गाड़ी उठकर जांघो तक आ गई,,, निर्मला की जागो तक का बदन पूरी तरह से नग्नावस्था में नजर आने लगा कुछ पल के लिए निर्मला टांगो से बिल्कुल नंगी हो गई,,,, किसी दूसरे की नजर पड़ती इससे पहले ही निर्मला झटलसे अपनी साड़ी को नीचे की तरफ दबाकर वापस अपनी टांगों को ढंक ली। हाईवे पर आते-जाते किसी की भी नजर इस बेहद अतुल्य और दुर्लभ नजारे पर नहीं पढ़ी थी लेकिन शुभम हवाओं की इस गुस्ताखी को देख चुका था वह देख चुका था कि हवा के झोंके ने किस तरह से उसकी मां की टांगो और जांघों को एकदम नंगी कर दिया था,,, शुभम के चेहरे पर यह नजारा देखकर मुस्कुराहट फैल गई,,,। इस बेशर्म हरकत में हवा की गुस्ताखी थी इसलिए शुभम नाराज नहीं हुआ अगर हवा की जगह कोई और होता तो शुभम कब का आग बबूला हो गया होता। कुछ सेकंड के लिए साड़ी उठने की वजह से निर्मला भी पूरी तरह से झेंप गई थी और अपने चारों तरफ नजर दौड़ाकर यह तसल्ली कर रही थी कि किसी की नजर तो नहीं पड़ी,,, हालांकि किसी की भी नजर उस पर नहीं पड़ी थी इस बात से उसे राहत महसूस हुई। लेकिन ऐसा लग रहा था कि हवाओं को जो नजारा देखने का अरमान था उसमें यह हवाएं कामयाब हो चुके थे। हवाओं की इस गुस्ताखी को को देख कर तो ऐसा ही लग रहा था कि वह लोग भी निर्मला के नंगे जिस्म का रसपान करना चाहते थे उसके जिस्म को छूकर गुजारना चाहते थे। और निर्मला के खास अंग की गर्माहट को अपनी शीतल लहरों पर महसूस करना चाहते थे और इसमें भी यह गुस्ताख हवाएं कामयाब हो चुकी थी। क्योंकि निर्मला को अपनी जांघों के बीच अपनी तपती हुई रसीली बुर पर हवा का झोंका लगने से ठंडक महसुस हो रही थी। यह हवाएं निर्मला की बुर को ही चूमना चाहती थी। और जैसे ही इन हवाओं का मकसद पूरा हो गया वैसे ही तेज चलने वाली हवाएं एकाएक एकदम शांत हो गई। वैसे भी हर शख्सियत की इच्छा औरत की टांगों के बीच चुंबन लेने की ही होती है। शुभम अपनी मां की हालत पर गौर करते हुए उसे छेड़ते हुए बोला।

मम्मी यह हवाएं भी तुम्हारे नाम के जितने का दर्शन करना चाहती थी तुम्हारी बुर देखना चाहती थी और देखो कैसे तुम्हारी साड़ी उठाकर और बुर देखकर सरपट यहां से भाग गई,

( अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर निर्मला एकदम से शर्मा गई और शर्मा कर मुस्कुराते हुए बोली)

धत्त पागल कुछ भी बोलता रहता है बातें बनाना तो कोई तुझसे सीखे,,,,

अरे सच कह रहा हूं मम्मी तभी तो देखो हवा केसे शांत हो गई जब तक तुम्हारी बूर नहीं देखी थी, तब तक इतनी तेजी से बह रही थी।

चल अब बस भी कर यह हवा खुद नहीं देखना चाहती थी यह तुझे दिखाना चाहती थी क्योंकि बहुत देर से मेरे बेटे ने मेरी बुर के दर्शन नही किए हैं।,,,( तभी निर्मला उस घर में पेड़ को देखते हुए) जरा देखो तो यह पेड़ कितना घना है और इसके नीचे की जमीन कितनी हरी-भरी है जमीन का छोटा सा टुकड़ा भी नहीं दिख रहा है चारों तरफ बड़ी-बड़ी घांसें ही नजर आ रही है। मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि हम दोनों ने इस पेड़ के नीचे इतनी घनी झाड़ियों में रात बिताई थी।

हां मम्मी सच कह रही हो तुम देखो तो सही कितना घना है और रात में और तूफानी बारिश में तो यह और भी भयानक लग रहा होगा उस समय तो हम दोनों मे से कीसी ने भी ईस पर गौर ही नही कीया ।

सच कह रहा है तू,,,, ( इतना कहकर निर्मला एकदम शांत होकर उस जगह को देखने लगी जहां पर उन दोनों ने कार के अंदर तूफानी बारिश में रात गुजारी थी और निर्मला ने जिंदगी में पहली बार अपनी मर्यादाओं की चादर को अपने ऊपर से दूर करके अपने ही बेटे के मोटे लंड को अपनी बुर मे लेकर चुदाई के परम आनंद को महसूस की थी।,,, निर्मला के साथ-साथ शुभम के लिए भी वह पल एकदम अविश्वसनीय था। क्योंकि शीतल की पार्टी में जाने से पहले दोनों को बिल्कुल भी ऐसा आभास नहीं था कि रास्ते में उन दोनों के साथ इस तरह की सुखद घटना हो जाएगी। निर्मला तो मन ही मन उस पल को बार-बार धन्यवाद देती है क्योंकि उस पल में ही उसकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया था। दोनों एक टक उसी तरफ देखे जा रहे थे। निर्मला और शुभम दोनों मां बेटे के लिए वह घना पेड़ और उसके नीचे फेलीे जंगली झाड़ियां इस समय किसी पर्यटक स्थल से कम नहीं लग रहा था।,, वह दोनों मां बेटे ऊस स्थल को देखने में मशगूल थे कि तभी उनके करीब से एक ट्रक होरन बजाता हुआ गुजरा और उनकी आवाज सुनकर दोनों की तंद्रा भंग हुई,,,,, तो निर्मला बोली,,,, काफी समय हो रहा है चल गाड़ी में बात करते हैं और इतना कहने के साथ दोनों वापस कार में बैठ गए और निर्मला गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी,,,, गाड़ी फिर से हाईवे पर भागने लगी। निर्मला के चेहरे पर संतुष्टि भरा अहसास साफ झलक रही थी। कुछ देर तक दोनों खामोश रहे ऐसा लग रहा था कि मानो वे दोनों उस रात के एहसास को इस समय अपने अंदर महसूस कर रहे हो, और करे भी क्यों नहीं वह पल इन दोनों के लिए बेहद उन्मादक और अद्भुत था। ऐसा कुछ हो जाएगा इन दोनों को बिल्कुल भी आशा ही नहीं थी।

शुभम को क्या मालूम था कि उसका कुंवारापन उसकी मां के ही हाथों से टूटना लिखा था। और निर्मला भी इस बात से कहां वाकिफ थे कि जिंदगी की दोबारा शुरुआत उसके ही बेटे के हाथों से शुरू होगी क्या पता था कि उसकी बुर में उसके खुद के बेटे का मोटा लंड घुसने वाला है और वह अपने ही बेटे के लंड से चुद कर संतुष्टि का अनुभव करेगी। गाड़ी अपनी रफ्तार से हाईवे पर भागे चली जा रही थी सब कुछ पीछे छूटता चला जा रहा था तभी निर्मला बोली,,,,

सच बताऊं तो शुभम मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है कि हम दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता होने के बावजूद भी एक मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो चुका है।

पति पत्नी जैसा,,,( शुभम तपाक से बोला)

हां ऐसा ही तू सच कह रहा है । देखना,,,,, जो संतुष्टि जो सुख तेरे पापा मतलब कि मेरे पति नहीं दे सके वह तू दे रहा है। जो सुख जो एहसास एक पति को अपनी पत्नी को देना चाहिए,,

उस तरह का एहसास और सुख मुझे अपने बेटे से मिल रहा है। अब तो लगता ही नहीं है कि तू मेरा बेटा है मुझे तो तुझ में मेरा प्रमीं मेरा पति नजर आता है। जिस तरह से हम दोनों आपस में इतना खुल चुके हैं इस तरह से तो एक प्रेमी प्रेमिका या पति और पत्नी ही खुलते हैं।,,,,( स्टेरिंग पर अपनी हथेली का पकड़ जमाते हुए) सच शुभम मैं बहुत खुश हूं अच्छा ही हुआ कि ऊस रात कार में हम दोनों के बीच जो नहीं होना चाहिए था वह हो गया,,, और इसीलिए मैं आज इस तरह की जिंदगी जी सकने में सक्षम हो गई हो,,।

उस रात कार में जो कुछ भी हुआ वह भला कैसे नहीं होता,,,

( अपनी मां की बात सुनते ही शुभम बोला) जरा तुम ही सोचो मम्मी बरसती बारिश में हाइवे के किनारे घने पेड़ के नीचे जंगली झाड़ियों के बीच कार के अंदर अगर एक खूबसूरत औरत और एक जवान लड़का हो तो क्या कुछ नही हो सकता।

इसका मतलब तुझे मालूम था कि यह सब होने वाला है।

( निर्मला आश्चर्य के साथ बोली)

नहीं ऐसा कुछ तो लगा नहीं था।,, लेकिन मम्मी तुम ही सोचो जब एक खूबसूरत औरत यह कहे कि उसे पेशाब लगी है तब तो उस जवान लड़के का इतना सुनते ही उसके बदन में ना जाने कैसे-कैसे अरमान मचलने लगे होंगे।

उस समय तुझे ऐसा ही लग रहा था क्या?

और क्या जरा तुम ही सोचो यह कैसा लड़का जिसने कभी जिंदगी में औरत की खूबसूरत बदन को नग्नावस्था में ना देखा हो और ऐसे लड़के के सामने एक खूबसूरत औरत पेशाब लगने की बात करें जो कि औरत कभी भी मर्दों के सामने नहीं कहती है,,, खास करके अपने ही बेटे के सामने,,, और तो और जब उसके ही आंखों के सामने साड़ी उठाकर अपने खूबसूरत अंग को दिखाते हुए,,,, अपनी रसीली बुर से पेशाब की धार को बड़ी तेजी से मारने लगे,,, तो उस नजारे को देखने वाले लड़के पर क्या बीत रही होगी,,,,

( शुभम जिस तरह से उस रात को हुई घटना के बारे में उत्तेजित होकर बता रहा था यह देखकर निर्मला के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसे भी अपने बेटे की यह बात बड़ी ही रोमांचकारी लग रही थी। )

तो तू जा मुझे कार की विंडो में से अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करते हुए देखा तो उसे कैसा लग रहा था।( निर्मला स्टेरिंग संभालते हुए और अपनी नजरों को सामने टीकाकर बोली।)

अरे कैसा क्या लग रहा था मेरा तो लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था,,जी मे आ रहा था कि मैं भी तुम्हारे पीछे खड़े होकर तुम्हारी बुर में लंड पेल दूं।,,,,

तो पेला क्यों नहीं?( निर्मला उत्सुकता के साथ बोली।)

अरे उस समय मैं ऐसा कैसे कर सकता था।

क्यों नहीं कर सकता था,,,,?

कोई अपनी मां को चोदता है क्या,,? और वैसे भी मुझे चोदना कहां आता था।

अगर तुझे चोदना आता तो क्या तू मुझसे पूछे बिना ही मुझे चोदने,, लगता,,,( निर्मला स्टेरिंग संभालते हुए शुभम की तरफ देखते हुए बोली)

नहीं शायद मैं ऐसा नहीं कर सकता हां लेकिन इच्छा तो मेरी बहुत हो रही थी।

ईससे पहले से ही बहुत इच्छा हो रही थी या उस समय रात के समय बारिश के माहौल में और मुझे पेशाब करते हुए देखकर तेरी इच्छा होने लगी थी,,,।

सच कहूं तो पहले से ही ऐसी इच्छा होती थी लेकिन उस समय कार में तुम्हें अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करते हुए देखकर मेरा लंड फड़फड़ाने लगा था। सच अगर मुझे पता होता कि, तुम मुझसे चुदवाने के लिए तैयार हो तो मैं जरूर तुम्हारी इजाजत लिएे बिना ही चोदना शुरू कर देता,,,, लेकिन क्या तुम भी पहले से ही तैयार थी या कार में ही तुम्हारे मन में यह ख्याल आया,,,,,

( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि इस तरह की बातों में उसे बेहद मजा आ रहा था और सफर भी अपने आप कटते चला जा रहा था। अपने बेटे के साथ इस तरह की खुली चर्चा करने में उसे बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था। वह भी खुले तौर पर अपने बेटे के सवाल का जवाब देते हुए बोली ।)

पहले तो मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन धीरे-धीरे जब मैं तेरे पेंट में बना तेरा तंबू देखती तो ना जाने मुझे क्या होने लगता था। तेरे पेंट में बने तंबू को देखकर मुझे इतना तो यकीन हो गया था कि तेरा लंड बहुत दमदार है और तब से मेरी बुर में ना जाने कैसी हलचल सी मचने लगी थी,,,,

( शुभम बड़े गौर से और मजे लेकर अपनी मां की बात सुन रहा था इस तरह की गरम बातें सुनकर उसके लंड में जान आ रही थी उसके पेट में फिर से तंबू बनना शुरू हो गया था।)

मैं शुरु से ही अपने आप पर बहुत कंट्रोल करती आ रही थी लेकिन मुझे लगता नहीं था कि मैं ज्यादा दिन तक अपने आप पर कंट्रोल कर पाऊंगी क्योंकि वैसे भी मेरा तन बदन पहले से ही प्यासा था। मेरी बुर पहले से ही एक मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही थी लेकिन मैं यह बात किसी से कह नहीं पा रही थी। लेकिन उस रात को हाइवे के किनारे और घने पेड़ के नीचे बरसती बारिश में मेरे सब्र का बाद एक दम से टूट गया था,,, मैं जानबूझकर तुझे उकसाने के लिए विंडो से अपनी बुर दिखाते हुए पेशाब कर रही थी। क्योंकि मैं जानती थी कि तुम मुझे जब पेशाब करते हो इतनी नजदीक से मेरी बुर देखेगा तो तेरा मन एकदम से चुदवासा हो जाएगा,,,, मैं चाहती तो कार के बाहर जाकर भी पेशाब कर सकती थीै लेकिन उस रात को ना जाने मुझे क्या हो गया था मैं चुदवाने के लिए एकदम से तड़प उठी थी।,,, और जब तू भी पेशाब करने के लिए विंडो से अपने नंगे खड़े लंड को बाहर निकाल दो पेशाब करने लगा दो कुछ गरम नजारे को देखकर मेरे सब्र का बांध एकदम से टूट गया। मैं उसी समय फैसला करने की आज की रात में तेरे लंड का स्वाद चख कर रहूंगी,,, मैं उस समय एकदम से भूल गई कि तू मेरा बेटा है और मैं तेरी मां हूं उस पल में मां बेटे के संबंध को पूरी तरह से अपने दिमाग से निकाल चुकी थी बस मेरे दिमाग में यही था कि तु एक जवान मर्द है जिसके पास बहुत ही मोटा तगड़ा औरतों को संतुष्टि प्रदान करने वाला लंड है। और मैं प्यासी औरत हूं जिसके पास मर्दों को अपने बस में करने के लिए उसकी रसीली बुर है,,, जो की बहुत प्यासी है और उसे एक दमदार तगड़े लंड की जरूरत है,,।बस फिर क्या था मैं तेरा लंड को पकड़कर अपनी बुर पर रख दी और तू भी मां बेटे के रिश्ते को पूरी तरह से भुलकर अपने लंड को मेरी बुर के अंदर उतारता चला गया।,,,

( निर्मला को इस तरह की बातें करने मैं बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और सुभम की हालत ख़राब हुए जा रही थी उसका लंड पूरी तरह से तैयार हो चुका था।,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था वह थुक से अपने गले को गीला करते हुए और पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला।)

लेकिन तुम्हें कैसे मालूम था कि मैं तुम्हें चोदने के लिए तैयार हो जाऊंगा,,,,,

बेटा अपनी मां को देखकर लंड खड़ा हो जाए,,, और वह अपनी मां को पेशाब करते हुए बड़े ही कामुक नजरों से देखता हो,, तो कैसे पता नहीं चलेगा कि वह इशारा मिलने पर अपनी मां को चोदेगा नहीं देखा था ना तूने जैसे ही मैं तेरे लंड को पकड़कर अपनी बुर पर रखी थी,,, तू बिना रुके एकदम सांड की तरह एक ही रफ्तार में किस तरह से मेरी बुर के अंदर अपने लंड को धड़ाधड़ अंदर-बाहर कर रहा था।

( इतना कहने के साथ ही निर्मला हंसने लगी और साथ में शुभम भी हंसने लगा,,,, दोनों को बहुत मजा आ रहा था सफर धीरे-धीरे करता चला जा रहा था दोपहर हो चुकी थी 3:00 बज रहा था अब दोनों को भूख भी लगना शुरू हो गई थी,,,।

हाइवे के किनारे ढेर सारे ढाबे बने हुए थे निर्मला उसी एक ढाबे पर अपनी कार खड़ी कर दी खाना तो वह साथ में लाई गई थी लेकिन फिर भी वह एक ढाबे में गई जहां पर कुछ फैमिली और कुछ सवारियां बैठकर भोजन कर रहे थे। शुभम और निर्मला दोनों कुर्सी पर बैठकर खाने को मंगाए और साथ में घर से लाया भोजन भी निकाल कर बैठ गए थोड़ी ही देर में खाना खाने के बाद,,,, निर्मला और शुभम वहीं रुक कर बाकी सवारियों के साथ आराम करने लगी क्योंकि लगातार निर्मला चार-पांच घंटे से कार चला रही थी उसकी कमर दुखने लगी थी करीब आधे घंटे तक आराम करने के बाद वह निकलने के लिए उठी,,,, वह पहले तो इधर उधर देख कर लेडीज बाथरूम देखने लगी लेकिन उधर पर ऐसा कुछ भी सुविधा नहीं था उसे जोरों की पेशाब लगी थी,,। तभी उसकी नजर कुछ औरतों पर पड़ी जो की ढाबे के पीछे की तरफ से आ रही थी और जा रही थी उसे यकीन हो गया कि वह औरते भी शौच करने के लिए ही ढाबे के पीछे जा रही हैं, तो वह भी धीरे से उठी और पीछे की तरफ जाने लगी तो वहां पर सच में औरतें पेशाब करने के लिए ही जा रही थी यह जानकर के चेहरे पर सुकून के भाव नजर आने लगे क्योंकि उसे बहुत जोरों से पेशाब लगी थी। अपनी मां को पीछे की तरफ जाते देखकर शुभम समझ गया कि वह पेशाब करने जा रही है उसे भी पेशाब लगी थी लेकिन उस साइड से नहीं जा सकता था क्योंकि वह औरतें ही आ जा रहे थे इसलिए वह ढाबे के दूसरे तरफ से पीछे की तरफ जाने लगा,,,,, निर्मला ढाबे के पीछे की तरफ जाते समय उसकी नजर थोड़ी ही दूर पर गई तो वहां पर कुछ आदमी बैठे हुए थे जोकि औरतों को ही पेशाब करते हुए देखकर आपस में हंसी ठिठोली कर रहे थे एक बार तो निर्मला के मन में हुआ कि वह उधर पेशाब करने ना जाए,,, लेकिन वह ज्यादा देर तक पेशाब को रोक भी नहीं सकती थी इसलिए उसे जाना ही पड़ा वह जानती थी कि उन मर्दों की निगाहें उसके ऊपर ही टिकी हुई है क्योंकि मर्दों की नजर हमेशा गोरी चमड़ी पर कुछ ज्यादा ही फीसलती है। लेकिन निर्मला इसमें बिलकुल मजबूर हो चुकी थी क्योंकि पेशाब की तीव्रता कुछ ज्यादा ही थी और उसे पेशाब करना बहुत जरूरी था वैसे मैं वह अपने मन को मजबूर करके झाड़ियों के बीच पेशाब करने जाने लगी,, कभी उसके करीब से एक औरत पेशाब करने के लिए जाते हुए निर्मला से बोली,,,

देख रही हो बहन इतना बड़ा डाटा खोल रखा है लेकिन औरतों के लिए पेशाब करने के लिए एक छोटा सा बाथरूम नहीं बनवा रखा है।,,,

बनवा दिया होता तो औरतो को पेशाब करते हुए कहा देख पाता, इसीलिए तो उसने बनवाया नहीं ताकि आराम से औरतों की गांड को देख कर मजा ले सकें,,,,( निर्मला भी उस औरत के सुर में सुर मिलाते हुए बोली लेकिन उस औरत की वजह से उसमें थोड़ी हिम्मत आ गई थी और वह दोनों झाड़ियों के बीच पेशाब करने के लिए आगे बढ़ चली,,, वहां पहुंचते ही उस औरत ने तुरंत अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाइ और पेसाब करने बैठ गई उसे भी बड़े जोरों से पेशाब लगी हुई थी,,, उसे देखकर निर्मला भी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,, दूसरी तरफ बैठ कर औरतों के पेसाब करने के नजारे को देखकर मदमस्त हो रहे मर्दों की आंखें जब निर्मला की गोरी गोरी टांगों पर पड़ी तो उनके होश उड़ गए,,,, वह लोग टकटकी बांधे बस निर्मला को ही देखे जा रहे थे निर्मला यह जान रही थी कि वह लोग उसे ही देख रहे हैं लेकिन वह उन लोगों की तरफ नहीं देखना चाहती थी वरना उन लोगों को ऐसा लगता है कि वह जानबूझकर उन लोगों को अपनी गांड का दर्शन करा रही है।

इसलिए वह भी बेझिझक उस औरत की तरह अपनी सारी को कमर तक उठा ली और पेंटी को जांघो तक. नीचे कर दी,,, और तुरंत नीचे बैठ कर पेशाब करने लगी उन मर्दों की तो होश ऊड़ गएे जब उन लोगों की नजर निर्मला की बड़ी-बड़ी और गोरी गांडशपर पड़ी,,, सभी के लंड एक साथ खड़े हो गए थे, इतनी ज्यादा उत्तेजना का असर ऊन लोगों में होना लाजिमी था,, क्योंकि उन लोगों ने अभी तक इतनी खूबसूरत औरत ना तो देखी थी और ना ही इतनी खूबसूरत औरत की नंगी गांड का कभी दर्शन किए थे। ऐसी खूबसूरत गांड को देखते देखते उन लोगों का पानी निकल जाने का डर बना हुआ था,,,, उनमें से ही एक ने अपने लंड को मसलते हुए बोली,,,

यार कसम से मैंने तो अपनी जिंदगी में ऐसी खूबसूरत औरत नहीं देखी और ना ही इतनी खूबसूरत गांड देखि है मेरे लंड का तो बुरा हाल हो गया है।,,,,,

तेरा ही नहीं हम लोगों का भी यही हाल हो रहा है कसम से ऐसी औरत मिल जाए तो,, रात भर इसकी बुर में लंड डालकर पड़े रहे,,,,

( निर्मला की मस्त मस्त गांड के दर्शन करके यह लोग मस्त हुए जा रहे थे और आपस में ख्याली पुलाव पका रहे थे दूसरी तरफ से शुभम झाड़ियों के पास पहुंच गया था और जल्दी से अपने लंड को बाहर निकालकर मुतना शुरू कर दिया था उन औरतों से करीब 2 मीटर की दूरी पर खड़ा होकर वह पेशाब कर रहा था जहां से निर्मला के बगल में बैठ कर पेशाब कर रही औरत की नजर उस पर पड़ गई,, उस औरत की नजर सीधे शुभम के खड़े लंबे झूलते हुए लंड पर ही पड़ी और उसके मोटे-ताजे लंड को देखकर वह दांतो तले उंगली दबा ली,,, और ना चाहते हुए भी आखिरकार उसके मुंह से निकल ही गया,,,

बाप रे बाप इंसान का हा या गधे का,,, जिस औरत की बुर में जाएगा उसके तो परखच्चे उड़ा देगा,,,

उस औरत की बात सुन रही निर्मला एकदम से सकपका गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या कहे जा रही है। जब वह अभी नजरें उठाकर चकर पकऱ देखने लगी तो,, करीब 2 मीटर की दूरी पर झाड़ियों के बीच खड़ा शुभम उसे नजर आ गया जोकि पेशाब कर रहा था निर्मला की भी नजर उसके झुलते लंड पर पड़ी तो वह समझ गई कि सारा मामला क्या है। अपने बेटे के हथियार की तारीफ दूसरी औरत के मुंह से सुनकर वह मन ही मन खुश होने लगी।

थोड़ी ही देर बाद शुभम निर्मला अपनी कार में आकर बैठ गए थे और निर्मला कार को फिर से हाईवे पर दौड़ाने लगी थी।

 
निर्मला और शुभम अपनी कार में बैठ गए और निर्मला ने तुरंत गाड़ी का गियर बदलते हुए आगे की तरफ बढ़ गई। निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी क्योंकि जिस तरह के हालात इस समय उसके सामने आए थे, शायद इस तरह के हालात उसके आंखों के सामने पहले कभी भी नहीं आया था। इस तरह से खुले में किसी ढाबे के पीछे बैठ कर पेशाब करने का अनुभव उसे बड़ा ही उत्तेजनात्मक और कामोत्तेजना से भरपूर लग रहा था ऐसा नहीं था कि पहले वह किसी आंखो के सामने अपने नितंबों का प्रदर्शन करते हुए पैशाब की हो, क्योंकि अभी तक स्कूल में रोज ही उसे इस तरह के हालात का सामना करना पड़ता था या यूं कह सकते थे कि निर्मला को इस तरह के हालात में ही पेशाब करने का अपना अलग ही मजा मिल रहा था।,,, वह रोड पर स्टीयरिंग को इधर-उधर घूमाते हुए उस पल को याद करके पूरी तरह से गंनगना जा रही थी। वास्तव में यह भी एक बड़ा ही अजीब पन होता है जब एक औरत मजबूर होकर ऐसे हालात में खुले में पेशाब करती है जबकि उसे यह पता होता है कि उसे

उसे तीन चार लोग पेशाब करते हुए देखकर उत्तेजना के चरम शिखर पर पहुंच चुके होते हैं और ना जाने कैसे-कैसे ख्यालात उसके बड़े-बड़े नितंबों को देखकर मन ही मन में करते रहते हैं। निर्मला यही सब सोचते हुए बड़ी सफाई से अपने हाथ को स्टेरिंग पर घुमा रहे थे बार-बार उसके मन में वह पल याद आ जा रहा था जब वह यह सब जानते हुए भी कि ढाबे पर बैठे हुए कुछ लोग उसकी तरफ देख रहे हैं फिर भी मजबूरीवश वह उन लोगों के सामने अपनी साली को उठाकर और अपनी बड़ी-बड़ी गोरी गांड के दर्शन उन लोगों को कराते हुए पेशाब करना पड़ रहा था । यह सब मन ही मन सोचते हुए वह मुस्कुरा रहीे थी,, निर्मला को इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर शुभम बोला।

क्या हुआ मम्मी ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो?

क्या करूं बात ही कुछ ऐसी है कि ना चाहते हुए भी हंसी आ रही है।

क्या बात है मुझे तो बताओ।

अरे जब मुझे बहुत जोर की पेशाब लगी थी तो मुझे ढाबे के पीछे मूतने के लिए जाना पड़ गया था,।

तो इसमें क्या हुआ ? (शुभम अपनी मां की तरफ आश्चर्य से देखता हुआ बोला ।)

अरे पहले सुन तो सही ऐसे तो मैं वहां जाने वाली नहीं थी। लेकिन एक औरत उस तरफ जा रही थी तो मुझे भी थोड़ी हिम्मत हुई ओेर मै भी उसके पीछे पीछे चल दी। लेकिन जैसे ही मैं पेशाब करने के लिए अपनी साड़ी को कमर तक उठाने के लिए हुई की,, मेरी नजर ऊन बेशरम आदमियों पर पड़ी जो कि मेरी तरफ ही देख रहे थे और आपस में कुछ फुसफुसा रहे थे। मुझे पहले तो बहुत शर्म आई लेकिन तभी मुझे पेशाब कभी प्रेशर इतनी जोरो से लगा था कि उन लोगों के सामने खुलकर मूतने के सिवाय मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था।

(शुभम अपनी मां की ऐसी बातों को सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था और साथ ही उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिससे कि उसके पेंट के आगे वाला हिस्सा अपने आप उठने लगा था)

फिर तुमने क्या की मम्मी?

मैंने क्या किया मुझे थोड़ी ना अपनी पेंटिं गीलीं करना था मैं भी कुछ देर के लिए एकदम बेशर्म बन गई और ना चाहते हुए भी अपनी साड़ी को कमर तक उठा कर मुतने में बैठ गई।

( ऐसा कहकर निर्मला फिर से मुस्कुराने लगी और अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर शुभम ंबोला)

तुम सच में मम्मी एकदम बेशर्म हो लेकिन एक बात तो एकदम तय है कि तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड को देखकर उन लोगों का लंड खड़ा हो गया होगा और उन लोगों में से कितनों का तो पानी निकल गया होगा।

हां हो सकता है । क्योंकि मेरी बुर भले ही पेशाब की धार फेंक रही थी लेकिन मेरी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी ना जाने मेरे बदन में कैसी हलचल मची हुई थी उन लोगों के सामने पेशाब करते समय,,( ऐसा कहते हुए निर्मला की नजर शुभम की पेंट की तरफ गई जिसमें तंबू बन चुका था और एक बार फिर से अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए निर्मला बोली।)

तेरा भी तो खड़ा हो चुका है।

मेरा तो हमेशा ही खड़ा रहता है ना जाने कब जरूरत पड़ जाए।

कैसी और किसको जरुरत पड़ जाए। ( निर्मला जानबूझकर अनजान बनते हुए बोली।)

अरे उसी को जिसकी बूर इस समय एकदम गीली हो चुकी है।

नहीं ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है । (निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,, निर्मला अपनी बुर की गीलेपन को भाप गई थी इसलिए वह बार-बार अपने हाथ से अपनी पैंटी को एडजस्ट कर रही थी।)

अब इतना भी अनजान मत बनो मेरी जान अब तो मैं तुम्हारी नस नस से वाकिफ हो चुका हूं मैं जानता हूं कि तुम्हारी बुर ईस समय पानी फेंक रही है और एकदम लंड के लिए तैयार हो चुकी है।

अब तो सच में तू बहुत बड़ा हो चुका है।

तो क्या मेरी रानी ऐसी मद मस्त बुर को चोद चोद कर पानी निकाल देना किसी बच्चे का खेल नहीं है।

( अपने बेटे की जैसी मर्दाना भरी बात को सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी और गर्वित होने लगी।)

मुझे तो सच में इस समय तेरे लंड की बहुत जरूरत हो रही है जी में आ रहा है कि गाड़ी का स्टेरिंग छोड़कर तेरी लंड पर बैठ जाऊं।

तो आजा मेरी जान मेरी रानी देर किस बात की है । (इतना कहने के साथ ही सुबह जल्दी से अपने पैंट की चैन खोलकर लंड को बाहर निकालकर हिलाने लगा यह देखकर निर्मला से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह एक हाथ से स्टेरिंग को संभालते हुए दूसरे हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़कर मुठीयाने लगी। )

सच में रैं तु तो बहुत गर्म हो चुका है।

ईतने करीब बेहद गर्म जवान बदन वाली औरत बैठी हो तो कौन गरम नहीं हो जाएगा।( उत्तेजना से अपने सुखते गले को थुक से गीला करने की कोशिश करते हुए बोला।)

चल बहुत बातें बनाता है।( इतना कहते हुए निर्मला एक हाथ से स्टेरिंग को संभाल रही थी तो दूसरे हाथ से गेयर की जगह अपने बेटे के मोटे लंबे लंड को इधर-उधर घूमाते हुए मसल रही थीे । निर्मला जिस जोश के साथ अपने बेटे के लंड को मसल रही थी और इधर-उधर घुमा रही थी इतनी गर्म जोशी के साथ तो वह आज तक कार के गियर को भी नहीं बदली थी। हां इधर इतना फर्क जरूर था कि गाड़ी के गियर बदलने से गाड़ी के हालात उसकी रफ्तार उसकी चाल में उतार चढ़ाव आता है और इधर लंड को इधर उधर ऐंठने से निर्मला के बदन में भी गजब का मादक उतार-चढ़ाव आ रहा था उसकी सांसो की गति तेज होती जा रही थी और बुर से पानी का रिसाव निरंतर बढ़ता जा रहा था। लंड की मोटाई को अपनी हथेलियों में मापते हुए जैसे कि उसे कुछ याद आया हो और वह तुरंत बोली।

अरे तुझे एक बात बताना तो मैं भूल ही गई।

कौन सी बात मेरी जान ( शुभम एकदम मस्त होता हुआ अपने दोनों हाथ को पीछे सीट पर टीकाते हुए अंगड़ाई लेने के अंदाज में बोला।)

अरे जब मैं वहां बैठकर पेशाब कर रही थी तो बिल्कुल मेरे करीब एक और औरत बैठकर उस झाड़ी में पेशाब कर रही थी। लेकिन जब वह पेशाब करते करते यह बोली कि " बाप रे बाप इंसान का लंड है या गधे का" तब मैं बिल्कुल हैरान हो गई कि आखिर वह बोल क्या रही है । (निर्मला लगातार अपने बेटे के लंड को मुठ्ठीयाते हुए बोल रही थी।)

लेकिन जब में उसकी नजरों का पीछा करते हुए कुछ ही दूर पर झाड़ियों की तरफ देखी तो मैं हैरान हो गई क्योंकि उन झाड़ियों के पीछे खड़े होकर तु पेशाब कर रहा था। और सच कहूं तो उस समय उस औरत की बात को सुनकर मुझे बड़ा गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि वह जिस दिन की तारीफ कर रही थी वह मेरे बेटे का लंड था ।और उसी लंड पर मेरा पूरी तरह से हक और कब्जा हो चुका था।( निर्मला ऐसी बातें करते हुए जोर-जोर से अपने बेटे के लंड को मसल रही थी और अपनी मां के नरम नरम उंगलियो और गर्म हथेलियों की रगड़ पाकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था। और गर्म सांसे छोड़ते हुए बोला।

ओहह मम्मी ऐसे तो तुम मेरा पानी निकाल दोगी।

आंह हां,,,,,, ऐसा मत करना अपना यह पानी संभाल कर रखो अभी बहुत काम आएगा। देखो शाम ढल चुकी है। अंधेरा होने वाला है और रात को मैं गाड़ी

नहीं चला पाऊंगी क्योंकि सुबह से चलाते चलाते थक चुकी हूं।

थोड़ी ही देर में शहर शुरू हो जाएगा और हम अच्छा सा होटल देख कर वहीं रुक जाएंगे और आराम करने के बाद सुबह निकलेंगे तब तक हम लोगों को थोड़ा सुकून भी मिल जाएगा और तुम्हारा जो यह पानी है बेकार नहीं जाएगा (निर्मला लंड की तरफ इशारा करते हुए बोली)

थोड़ी ही देर में शहर आ गया गांव जाने के लिए इस शहर से होकर गुजरना पड़ता था जिसका पूरी तरह से निर्मला को पता था और वैसे भी रात को अक्सर निर्मला बहुत जरूरी होता है तभी ड्राइविंग करती है। उन दोनों को भूख भी लगी थी सड़क के दोनों तरफ छोटी-छोटी होटल में बनी हुई थी जिसके मीनारें पर जगमगाती हुई लाइटें उस होटल का नाम बयां कर रही थी। या छोटी छोटी होटल लगभग गेस्ट हाउस ही था जिसमें लोग घंटे 2 घंटे के लिए ही कमरा बुक करते थे और अक्सर इनमें कॉल गर्ल्स ही आाती थी। निर्मला भी एक अच्छे से होटल में अपनी कार को प्रवेश करा कर पार्किंग में खड़ी कर दी। कार से बाहर निकलकर निर्मला और शुभम दोनों होटल के अंदर प्रवेश करने लगे। होटल के इर्द-गिर्द खड़े लोगों की नजर निर्मला और शुभम पर ही टिकी हुई थी। निर्मला का गदराया बदन और उसकी खूबसूरत उफनती जवानी को देख कर उन लोगों की अाह ही निकल जा रही थी

निर्मला को देखकर सभी लोग आपस में खुशर फुसर करने लगे ज्यादातर की नजरें निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड पर ही टीकी हुई थी। लड़के और लड़कियों का जमावड़ा अगल-बगल देखकर शुभम को कुछ ज्यादा समझ में नहीं आ रहा था लेकिन निर्मला कुछ-कुछ समझ रही थी कि यह सब क्या है आनन फानन में वह काउंटर तक पहुंच गई। काउंटर मेन की नजर जैसे ही निर्मला पर पड़ी वह तो हक्का-बक्का रह गया और उसकी खूबसूरत चेहरे को तो कभी साड़ी में से झांकती हुई इसकी बड़ी-बड़ी दोनों जवानियों को देख कर पिघलने लगा था। अपने थूक को गले में गटकते हुए काउंटर मेन बोला।

मे आई हेल्प यू मैम।

मुझे कमरा चाहिए।

कितने घंटे के लिए?

मतलब (निर्मला नर्वस होते हुए बोली)

मेरा मतलब1 घंटे के लिए या 2 घंटे के लिए या फिर 3 घंटे के लिए

निर्मला को उस काउंटर में उनकी बात सुनते ही सारा मामला समझ में आ गया था वह समझ गई थी यहां अक्सर लोग अपनी प्यास बुझाने ही आते हैं तभी तो यहां घंटे के हिसाब से कमरा बुक करता है निर्मला की हालत खराब होने लगी थी यहां से वापस जाना भी ठीक नहीं था। क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि यहां पर जितने भी होटल है सभी इसी तरह की है। पर यहां तो वहां अनजाने में आ गई है लेकिन अगर इधर से किसी दूसरी होटल की तरफ करी तो उस होटल में कदम रखने के लिए उसके पास अब इतना हिम्मत बिल्कुल भी नहीं है इसलिए वहां सारा मामला समझते हुए भी अनजान बनते हुए बोली।

2 घंटा 3 घंटा क्या होता है मुझे पूरी रात के लिए कमरा चाहिए।

( निर्मला की बात सुनते ही उस काउंटर मेन का मुंह खुला का खुला रह गया और वह ज्यादा कुछ बोल नहीं पाया बस इसके मुंह से इतना ही निकला।)

बाप रे और इतना कहते हुए वहां निर्मला से उसका नाम पुछकर कमरे की चाबी उसे थमाते हुए बोला।

मैं ज्यादा तो कुछ नहीं पूछ लूंगा मैडम बस इतना जानना जरूरी चाहूंगा कि इस लड़के ने तुम्हें लाया है या तुम इसे लाई हो।

( उस काउंटर मेन की बात सुनकर निर्मला के बदन में हलचल सी मच ने लगी एक अजीब सा एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था। उसकी बात सुनते ही उसके तन बदन में रंगीनियां छाने लगी और वह मन ही मन में सोचने लगी कि जब ओखली में सर दे ही दिया है तो घबराने से क्या फायदा इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली

मैंने इसे लाई हो।( इतना कहने के साथ ही वह मुस्कुराते हुए सीढ़ियों की तरफ जाने लगी जहां पर काउंटर मेन ने उंगली से इशारा किया था। लेकिन जाने से पहले वहां खाने का ऑर्डर भी दे चुकी थी ज्योति काउंटर मैंने उसे 15 मिनट में ही खाना उसके कमरे में पहुंच जाएगा इतना कहकर उसे तसल्ली दिया था। शुभम कि समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब मामला क्या है वह बस अपनी मां के पीछे पीछे चला जा रहा था जैसे ही निर्मला कमरे के सामने पहुंची तो वह उत्तेजना के मारे पूरी तरह से गनगना गई। आज जिंदगी में पहली बार इस अद्भुत एहसास से वहां गुजर रही थी उसे पूरी तरह से समझ में आ रहा था कि वह काउंटर मेन और इर्द गिर्द खड़े लोग उसकी तरफ देखकर उसे क्या समझ रहे थे। इसलिए तो उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और पैंटी की भी हालत खराब हो चुकी थी। निर्मला जल्दी से चाबी लगाकर दरवाजा खोलकर कमरे में प्रवेश करी और पीछे-पीछे शुभम भी कमरे में आ गया। मम्मी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है आखिर यह सब हो क्या रहा है।

( निर्मला अपने बेटे की तरफ देखी जो की पूरी तरह से आश्चर्य में ही था उसे देख कर मुस्कुराते हुए बोली।)

बेटा तू जानता है यह होटल, लहोटल ना हो करके एक गेस्ट हाउस ही है। और यहां पर लोग अक्सर घंटे 2 घंटे के लिए ही कमरा बुक करते हैं।

( शुभम को कुछ कुछ समझ में आ रहा था लेकिन पूरी तरह से कुछ भी क्लियर नहीं था इसलिए अभी भी उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव साफ नजर आ रहे थे इसलिए निर्मला बोली)

शुभम ईधर पर मर्द लोग लड़कियों और औरतों को कमरे में लेकर आते हैं और उन्हें चोदकर अपनी प्यास बुझाते हैं। और इसलिए ही यहां पर कमरा घंटे 2 घंटे के लिए बुक होता है।

और तू जानता है कि वह मुझे क्या समझ रहा था?

( शुभम आश्चर्य से ना में सिर हिलाते हुए निर्मला की तरफ देखते हुए जवाब दिया।)

वह मुझे धंधेवाली समझ रहा था। और सबसे बड़ी बात यह कि यहां पर तो अक्सर आदमी लोग ही औरतों को लाते हैं उसे ऐसा लग रहा था कि मैं तुझे यहां लेकर आई हूं इसलिए तो यह सोचकर ही उसकी हालत खराब हो रही थी और वह भी पूरी रात के लिए।

( यह सुनते ही शुभम का मुंह कैसे खुला का खुला रह गया और उत्तेजना की वजह से उसका लंड पैंट में गदर मचाने लगा। शुभम कुछ कह पाता इससे पहले ही कमरे की घंटी बजने लगी बाहर वेटर खाना लेकर आया था।)

 
कमरे के बाहर वेटर खाना लिए खड़ा था ।दो तीन बार घंटी बजाने के बाद निर्मला खुद आगे बढ़कर कमरे का दरवाजा खोली और वेटर को देख कर मुस्कुरा दी, वेटर बहुत ही वासना माई आंखों से निर्मला के खूबसूरत बदन का ऊपर से नीचे तक जायजा लेते हुए बिना कुछ बोले ही एक नजर कमरे के अंदर खड़े शुभम पर डालकर मंद मंद मुस्कुराने लगा,,, शायद वह शुभम की उम्र को देखकर यही सोच रहा था की, इतनी भारी भरकम मशीन को यह कैसे चला पाएगा इसलिए तो वह कमरे में खाना टेबल पर रखते हुए एक नजर निर्मला पर डालते हुए धीरे से बोला,,,

मैडम अगर जरूरत पड़े तो मुझे बुला लेना।

( और इतना कहकर वह बेहतर मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर चला गया निर्मला भी जवाब में मुस्कुरा दी, वह चाहती तो वेटर को छोटे से उम्र के शुभम की मर्दाना ताकत को वह अपने खूबसूरत होठों से बयां कर के उसकी कुटिल हंसी को बंद कर सकती थी । लेकिन इस तरह की बयानबाजी के लिए उस वेटर से बहस में उतरना उसे उचित नहीं लगा। वेटर जा चुका था उसके जाते ही निर्मला ने कमरे का दरवाजा भी बंद कर दी। निर्मला मुस्कुराते हुए शुभम की तरफ देखने लगी तो शुभम उस बेटर की बात को अच्छी तरह से समझते हुए बोला।

मम्मी यहां लगता है सब मौके की तलाश में ही है,, देख नहीं रही थी वह वेटर कैसे तुम्हें प्यासी नजरों से देख रहा था।

जानती हो शुभम अच्छी तरह से जानतेी हूं, यह होटल ही कुछ दूसरी ही तरह का है, तभी तो सब की प्यासी नजरें औरत की खूबसूरत बदन पर मंडराती रहती हैं। और तो और उसने तो बातों ही बातों में मुझे खुला ऑफर भी दे दिया। तुझे पता है वह वेटर यह सोच रहा था कि मेरे खूबसूरत गदराई बदन की प्यास को शायद तू नहीं बुझा पायेगा,,,, साला हरामी उसे क्या पता है कि मेरे बेटे का लंड किसी गधे के लंड से कम नही है।

( निर्मला की ऐसी बात सुने तो एक ही शुभम हंसने लगा और को हंसता हुआ देखकर निर्मला बोली।)

तू क्यो दांत निकाल रहा है?

तुम्हारे मुंह से साला हरामी सुनकर मुझे अच्छा लग रहा है इसके लिए।

क्या करूं माहौल का असर तो कुछ तो होना ही है।

एक बात कहूं मम्मी अगर बुरा ना मानो तो।

बोल मुझे तेरी बात का कुछ भी बुरा नहीं लगता (इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाकर अपनी साड़ी खोलने लगी,,, और शुभम साड़ी के हटते ही अपनी मां की बड़ी बड़ी छातियों की तरफ देखते हुए बोला।)

आज सच में तुम इस होटल के कमरे में एकदम रंडी लग रही हो।

( अपने बेटे के मुंह से अपने लिए रंडी शब्द सुनकर निर्मला कनखियों से शुभम की तरफ देखने लगी, एकटक देखते हुए शुभम को शायद ऐसा लगा कि उसकी मां उसकी बात का बुरा मान गई है लेकिन तभी निर्मला मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली।)

तू सच कह रहा है मुझे भी ऐसा ही लग रहा है । होटल के नीचे खड़े औरत के प्यासे मुझे जिस तरह से प्यासी नजरों से देख रहे थे मुझे तो ऐसा ही लग रहा था कि कहीं कोई आकर मेरी कीमत ना पूछ ले,,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपनी कमर पर बंधी साड़ी को पूरी तरह से खोलकर नीचे फर्श पर गिरा दी और इस समय उसके बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट ही रह गया था जिसमें से उसका दूधिया बदन ट्यूब लाइट की रोशनी में भी अपनी चमक बिखेर रहा था। निर्मला कुछ सोचते हुए)

शुभम यह सब देख कर और इधर माहौल के हिसाब से मेरे दिमाग में एक आइडिया आया है ।

कैसा आईडिया मम्मी!

क्यों ना हम वही करें जो कि होटल के लोग हम दोनों के बारे में सोच रहे हैं।

मैं कुछ समझा नहीं!

अरे इसमें समझने वाली क्या बात है, बात बिल्कुल सीधी सी है यहां के लोग और वह काउंटर मेन यही सोच रहे हैं कि मैं एक धंधे वाली हूं और मैं पूरी रात के लिए तुझे कमरे में लेकर आई हूं।,,,

तो? ( आश्चर्य के साथ शुभम बोला)

तो क्या चल आज की रात ऐसा करते हैं कि तू समझ कि मैं सच में तुझे आज की रात के लिए कमरे में लेकर आई हूं और मैं एक धंधे वाली हूं और पूरी रात,, तुझे अपना गुलाम बनाकर तुझ से चुदवाऊंगी।

( इतना सुनते ही शुभम मुस्कुराने लगा)

वाह सच में बहुत ही मस्त आईडिया है। सच में ऐसा लग रहा है कि तुम मुझे कमरे में पूरी रात के लिए लेकर आई हो और मुझसे छुपाना चाहती हो सच मेरे पूरे बदन में ना जाने कैसी हलचल सी मचने लगी है।

( शुभम का इतना कहना था कि तभी निर्मला ने झट से पेटीकोट की डोरी अपने हाथों से खींची और पेटिकोट पूरी तरह से कमर से एकदम ढीली होकर अगले ही पल निर्मला की पेटीकोट उसके बदन को छोड़ते हुए नीचे उसके कदमों में गिर गई,,, निर्मला की माल चिकनी दूधिया जांघे चमकने लगी। निर्मला कि लाल रंग की पेंटिं अपना अलग कहर ढा रही थी क्योंकि उस छोटी सी पेंटिं के अंदर दुनिया भर का खजाना छुपा हुआ था। निर्मला को अगले ही पल ब्लाउज के बटन खोलते हुए देखकर शुभम का लंड पूरी तरह से टन टनाकर खड़ा हो गया। निर्मला अपनी बाहों में से ब्लाउज के बटन खोलकर ब्लाउज को निकाल ही रही थी कि ब्रा से झांकते हुए दोनों बड़े बड़े दूध को देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर जैसे ही दोनों दूध को पकड़ने को चला ही था कि निर्मला पीछे की तरफ से हंसते हुए शरारती अंदाज में बोली।

आं,,,,,,हां,,,,, हां,,,,,,,, इतनी जल्दी भी क्या है पहले चलो चल कर बात करने नहा लेते हैं और उसके बाद जो करना है,,,,( और इतना कहने के साथ ही आगे के शब्द को कहे बिना ही निर्मला अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर खुद ही शुभम को पकड़ कर अपनी बाहों में खिच ली,,, यह हरकत इस बात का सबूत था कि माहौल के हिसाब से निर्मला खुद पर ही नियंत्रण नहीं रख पा रही थी और वास्तव में जैसे कि एक प्यासी औरत खास करके कॉल गर्ल अपने ग्राहक को रिझाने के लिए इस तरह की हरकत करती है ठीक उसी तरह से निर्मला भी शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों को चूमने लगी,,,।

शुभम भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और उसका लंड पेंट से बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहा था। वह भी उत्तेजना बस कस कर अपनी मां को अपनी बाहों में भींचने लगा,, जिसकी वजह से पेंट में बना तंबू सीधे निर्मला की बुर से टकरा रहा था और इस कारण दोनों की कामोत्तेजना में निरंतर बढ़ोतरी होती जा रही थी। दोनों एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रहे थे लेकिन निर्मला शुभम को अपनी बांहों में फंसे हुए हैं धीरे-धीरे करके उसे बाथरूम की तरफ ले जाने लगे और जैसे ही बाथरूम के दरवाजे के करीब पहुंचे तो एक हाथ आगे बढ़ा कर बाथरूम के दरवाजे का हैंडल घुमा कर दरवाजा खोल दी और दोनों बाथरूम में घुस गए। बाथरूम में घुसते ही निर्मला ने एक हाथ से बाथरूम का दरवाजा बंद है करने के तुरंत बाद ही अपने बदन पर बचे बाकी कपड़े भी निकालकर पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई। कुछ ही सेकंड में शुभम भी निर्मला की तरह पूरी तरह से नंगा हो गया दोनों के बदन की शोभा बढ़ा रहे उनके अंगों का कठोर पन बढ़ने लगा था।

 
निर्मला एक पल भी गंवाए बिना तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और शुभम का तना हुआ लंड अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी। निर्मला ने आरंभ में ही शुभम पर हावी होना शुरू कर दी, शुभम की तो हालत खराब होने लगी कुछ ही पल में उसके मुख से गर्म सिसकारी छूटने लगी। वह भी धीरे-धीरे करके अपनी कमर को आगे पीछे हिलाने लगा मुखमैथुन का भरपूर आनंद लेते हुए निर्मला एक हाथ से अपनी कचोरी की तरह फुल़ी हुई बुर को मसल रही थी।

जिससे उसका आनंद दुगुना होता जा रहा था शुभम जल्दी से एक हाथ ऊपर की तरफ बढ़ा कर बाथरूम का पावर ऑन कर दिया और ठंडे पानी की बौछार बारिश की बूंदों की तरह दोनों के तपते तन बदन को

संतुष्टि जनक ठंडक प्रदान करने लगी। दोनों पूरी तरह से कामातुर हो चुके थे । शुभम अपनी मां के होटो के बीच अपने मोटे तगड़े लंड को इस तरह से अंदर-बाहर कर रहा था कि मानो जैसे कि वह उसके मुंह में नहीं बल्कि उसकी गुलाबी पत्तियों के बीच बुर की पतली दरार में लंड को अंदर बाहर करते हुए चोद रहा हो। दोनों को भरपूर आनंद मिल रहा था। कुछ ही देर बाद उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचते हुए एक हाथ से अपनी रसीली बुर को जोर-जोर से मसलते हुए उसके मदन रस को बाहर निकाल रही थी, और साथ ही अपने बेटे के तगड़े लंड को मुंह की गहराई में उतारते हुए अपने गले में लंड से निकलने वाली गरम पिचकारी को महसूस करना चाहती थी। जिस तरह से निर्मला लैंड को मुंह में आइसक्रीम कौन की तरह इधर-उधर जीभ घुमाकर चाट रही थी इस हरकत की वजह से शुभम को अपने ऊपर और ज्यादा कंट्रोल कर पाना बेहद नामुमकिन सा लग रहा था, इसलिए वह भी जोर-जोर से मुंह में धक्के लगाना शुरु कर दिया और अगले ही पल एक चीख के साथ उसने अपना सारा लावा पिचकारी के तौर पर गले में उतारना शुरू कर दिया,,, जबरदस्त प्रेशर के साथ निकली हुई गरम पिचकारी को अपने गले में महसूस करके निर्मला पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में गोते लगाते हुए अपनी बुर से भी पानी की बौछार करने लगी। शॉवर से बरस रही कृत्रिम बारिश और दोनों के बदन से पानी की बौछार कुल मिलाकर दोनों को पूरी तरह से अपनी आगोश में लेते हुए आनंदित कर रही थी। दोनों झड़ कर चरम स्खलन का आनंद ले चुके थे दोनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में स्नान करने के बाद बाथरुम से बाहर आ गए लेकिन दोनों के अभी भी कपड़े का रेशा तक नहीं था,, दोनों उसी तरह से नग्न अवस्था में ही डिनर करने के बाद अपने असली कार्यक्रम की तरफ आगे बढ़ने लगे।

शुभम आज की रात हम दोनों के लिए एक अद्भुत रात है क्योंकि मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से हमें किसी होटल में रुकना पड़ेगा और कोई मुझे कॉल गर्ल समझेगा मैं तो अभी तक यकीन नहीं कर पा रही हूं कि मुझे देखकर कोई यह कह सकता है।

तुम बहुत खूबसूरत हो इसलिए तो सबकी नजर तुम पर ही टिकी हुई थी तुम्हारा गदराया जिस्म तुम्हारी जवानी देखकर उन लोगों के भी होश उड़ गए हैं।,, तभी तो वह लोग तुम्हें खा जाने वाली नजर से देखकर गर्म आहे भर रहे थे।

अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर निर्मला पूरी तरह से गदगद हुए जा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली।

चल अब ज्यादा चापलूसी मत कर,,, जिस काम के लिए तुझे लाई हूं वह काम शुरू कर,,,,

( अपनी मां का बदलता हुआ अंदाज और बोलने का ढंग देख कर आश्चर्य से वह अपनी मां की तरफ देखने लगा लेकिन अगले ही पल वह समझ गया और मुस्कुराने लगा और मुस्कुराते हुए बोला।)

चल तु भी मुझे ज्यादा मत सिखा मुझे मालूम है कि तु मुझे यहां किसलिए लाई है और मुझे क्या करना है।,,,

( शुभम की बातें सुनते ही निर्मला समझ गई थी अब बहुत मजा आने वाला है इसलिए मुस्कुराते हुए बोली)

क्या पता है रे तुझे बातें तो ऐसीे करता है जैसे कि बहुत बड़ा हो गया है।

बड़ा नहीं हुआ तो क्या हुआ लेकिन तुझे जिस काम के लिए मुझे यहां लेकर आई है मेरा वह हथियार तो बहुत बड़ा है तभी तो तू अपनी प्यास बुझाने के लिए मुझे लेकर आई है।

बड़ा घमंड है तुझे अपने हथियार पर दिखा तो सही कितना तगड़ा हथियार है तेरा।( बिस्तर पर उसी तरह से नग्न अवस्था में ही आराम से लेटते हुए बोली।)

अगर देख लेगी ना,,,, तो ही तेरी बुर पीनी छोड़ देगी, वैसे भी लगता है कि तेरी बुर में बहुत पानी भरा हुआ है तभी तो उसे बाहर निकलवाने के लिए इतना तड़प रही है।,,,( शुभम एक बार पानी छोड़ चुके अपने ढीले लंड को हांथ मे पकड़कर हीलाते हुए बोला,, अपने बेटे की ढीले पड़े झूलते लंड की तरफ देखकर मुस्कान बिखेरते हुए बोली।)

ओहहह बड़ा नाज है तुझे अपने लंड पर लेकिन देख तो सही कैसा झूल गया है, जरा सा भी टाइट नहीं है लगता है कि तुझे यहां लाकर मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी,,,,

( अपनी मखमली जांघो पर उंगलीया फिराते हुए बोली)

टाइट भी हो जाएगा मेरी जान और ऐसा टाईट होगा कि तेरी बुर के परखच्चे उड़ा देगा, बस एक बार जरा सा इसको प्यार तो कर, यह प्यार करने से दुगुना बड़ा हो जाता है ।इसमे ईतनी जान आ जाती है कि तेरी बुर का सारा रस निचोड़ डालेगा लेकिन फिर भी इसकी प्यास नहीं बुझेगी।

तो यह बात है चल तेरे ढीले लंड को प्यार भी करूंगी, लेकिन तुझे उससे पहले अपनी जीभ से मेरी बुर साफ करना पड़ेगा और वह भी अच्छे से चाट चाट कर ताकी ईसकी मलाई का स्वाद तू अच्छी तरह से ले सके,,,,, चल मादरचोद अब ज्यादा देर मत कर शुरू कर अपना काम.

( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपनी दोनों टांगों को चौड़ा करके अपनी हथेली को बुर पर रगड़ने लगी,, और गर्म सिसकारी लेते हुए शुभम को ऊकसाने लगी,, शुभम एक हाथ में अपने लंड को पकड़ कर आगे बढ़ने लगा। अगले ही पल वहां अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को अपने हाथों से खिलाते हुए बुर को एकटक निहारते हुए बोला,,,।)

वाह रे मेरी छम्मक छल्लो तेरी बुर तों रसमलाई का कटोरा लग रहा है इसमें तो डूबने का मन कर रहा है।

तो डूब जा रे हरामी तुझे रोका किसने है।

बड़ी उतावल लग रही है तुझे कुत्तिया, लगता है कि तुझे कुतिया बनाकर चोदना पड़ेगा।,,,

चोदना बाद में भोसड़ी के पहले तो मेरी बुर का रस मलाई चाट कर साफ कर,,,,,

( दोनों पूरी तरह से धंधेदारी चरित्र में ढल चुके थे दोनों को इस तरह से वार्तालाप करके बेहद कामोत्तेजना का अनुभव हो रहा था। एक दूसरे को गाली देने में एक गजब का अनुभव दोनों को प्राप्त हो रहा था। दोनों टांगों को अपने हाथों से फैला कर शुभम बुरनुमा कटोरी में अपना मुंह डाल दिया,,,, और जैसे ही तपती बुर मे प्यासे होठो का स्पर्स हुआ निर्मला के तन-बदन में चिंगारियां फूटने लगी।

सससहहहहहहहहह,,,,, हरामी तू तो आग लगा दिया मेरे बदन में बस अब अपनी जीभ का कमाल दिखा तब मुझे लगेगा कि से सच में बड़ा हो गया है।

तू चिंता मत कर मेरी रंडी रानी तेरी बुर ईस तरह से चाटूंगा कि तू एकदम से तड़प उठेगी मेरे लंड को अपनी बुर मैं डलवाने के लिए (और इतना कहने के साथ ही शुभम अपना कार्यक्रम आगे बढ़ाने लगा शुभम की जीत कुछ ही सेकंड में निर्मला की बुर की गहराई नापने लगी जिस तरह से शुभम के लंड में ज्यादा दम था उसी तरह से उसकी जीभ भी उसके लंड से कम नहीं थी,,, वह भी बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ते हुए अंदर बाहर हो रही थी। शुभम तो लपालप मीठी खीर की तरह बुर से झर रही मदन रस की बूंदों को चटखारे लगाकर गटक जा रहा था। निर्मला की तो हालत खराब होने लगी थी उत्तेजना के मारे वह दाएं बाएं अपना सिर पटक रही थी साथ ही दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शुभम के बालों को अपनी मुट्ठी में भींचते हुए जोर-जोर से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उचका रही थी। ऐसा लग रहा था वह जैसे खुद ही अपनी बुर से अपने बेटे का मुंह चोद रही हो,,,, साथ ही अपनी गर्म शिसकारियों से पूरे कमरे में शोर मचा रही थी।

सससहहहहहहह,,,,, आहहहहहहहह,,,,,, सच में रे तू तो पूरा का पूरा मादरचोद है तुझे यहां लाकर मैंने कोई गलती नहीं की बड़ा जान है तुझमें,,,, बस ऐसे ही चाट और जोर से चाट मेरी बुर की पूरी मलाई निकाल ले,,,,

आहहहहहहहह,,,,,, बड़ा मजा आ रहा है।

तू भी तो बहुत मस्त माल है एकदम छिनार है मैंने आज तक तेरे जैसी गर्म औरत नहीं देखा तभी तो तेरी बुर चाटने में इतना मजा आ रहा है।

दोनों के बीच का यह वार्तालाप,,, कमरे के वातावरण को और भी ज्यादा जोशीला बना रहा था बंद कमरे में मां बेटे दोनों संपूर्ण रूप से नग्नावस्था होकर के एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। निर्मला नीचे से अपनी कमर को उपर की तरफ बार-बार दे रही थी यह उसका जवाबी कारवाही था। जिससे शुभम को और भी ज्यादा उत्तेजन दे रहा था थोड़ी ही देर में चीख के साथ निर्मला बंद बनाकर पानी भरने लगी जिसे अमृत समझ कर शुभम गटागट अपने गले से नीचे उतार ले गया।

लेकिन इतने से निर्मला कहां मानने वाली थी उसकी बुर में तो अब आग लग चुकी थी, जोकि अपने बेटे के लंड के लिए पूरी तरह से तड़प रही थी। शुभम भी अपनी मां की रसीली बुर को चाट कर पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था उसका लंड किसी लोहे के रोड की तरह तन कर खड़ा हो गया था। जिसे देखकर निर्मला बोली।

वाह रे मादरचोद तेरा लंड तो फिर से खड़ा हो गया है। लगता है कि सच में आज ये मेरी बुर के परखच्चे उड़ा देगा।,,,, चल भोंसड़ी के देखु क्या सच में तू एक औरत को अच्छे से चोद पाता है कि नहीं,,,,,,

ए रंडी भोसड़ी चोदी तुने अभी मेरे लंड की ताकत देखी कहां है तू क्या तेरी जेसी 3 4 औरत एक साथ चुदना चाहे तो उन्हें भी मैं उन चारों को एक जैसा ही मजा दूंगा वह भी बिना झड़े,,,,, बस अब तैयार हो जा मेरी रानी देख तेरा राजा तेरी बुर का कैसा बजाता है बाजा।

मादरचोद लगता है सच में तुम आकर चोदना को जरूर अपनी मां को चोदकर इतना ताकतवर हुआ है तभी तो तुम इतना विश्वास के साथ कह रहा है सच-सच बताना तुने अपनी मां को चोदा है कि नहीं।

( निर्मला सच में एक धंधे धारी रंडी की तरह गंदी बातें करके अपने बेटे को और भी ज्यादा उकसा रही थी,,,, अपनी मां की मां की बातें सुनकर शुभम अपने लंड को हिलाता हुआ बोला।)

 
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