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अहसान complete

अपडेट-26

ख़ान : वाह भाई क्या रौब है वो भी शेरा पर....(हैरान होते हुए) क्योंकि मैने तो सुना था वो आदमी पैदा नही हुआ जो शेरा को झुका सके (अपने साथ वाले पोलीस वाले को देखते हुए)

मैं : (अपने हाथ जोड़ते हुए) देखिए जनाब मेरे बाबा की तबीयत ठीक नही है आप मेहरबानी करके यहाँ से जाइए.

ख़ान : चले जाएँगे मेरी जान इतनी भी क्या जल्दी है पहले तसल्ली तो कर लूँ

मैं : कैसी तसल्ली

ख़ान : अगर तुम शेरा नही हो तो अपनी कमीज़ उतारो क्योंकि हम जानते हैं कि शेरा के कंधे के पिछे एक शेर का टट्टू गुदा हुआ है.

मैं : अगर नही हुआ तो फिर आप यहाँ से चले जाएँगे

ख़ान : जी बिल्कुल हज़ूर आप बस हमारी तसल्ली करवा दे फिर हम आपको चेहरा तक नही दिखाएँगे.

मैं : ठीक है (कमीज़ उतारते हुए) देख लीजिए ऑर तसल्ली कर लीजिए. (मैं नही जानता था कि मेरी पीठ पर इस क़िस्म का कोई निशान है भी या नही इसलिए मैने ख़ान के कहने पर फॉरन कमीज़ उतार दी)

ख़ान : (चारो तरफ मेरे गोल-गोल घूमते हुए) हमम्म (मेरे कंधे पर हाथ रखकर) तू शातिर तो बहुत है लेकिन आज फँस गया बच्चे तेरा शेर ही तुझे मरवा गया..... हाहहहहहाहा (तालियाँ बजाते हुए)

मैं : जी क्या मतलब (घूमकर ख़ान की तरफ देखते हुए)

ख़ान : तूने मुझे भी इन भोले गाँव वालो की तरह चूतिया समझा है जो तेरी बातो मे आ जाउन्गा

मैं : मैं आपका मतलब नही समझा आप कहना क्या चाहते हैं.

ख़ान : मतलब तो हवालात मे मैं तुझे अच्छे से सम्झाउन्गा

बाबा : (खड़े होते हुए) देखिए जनाब ये मेरा बेटा नीर ही है सिर्फ़ शक़ल एक जैसी हो जाने से करम एक जैसे नही होते हैं ये बिचारा तो खेत मे मेहनत करता है बहुत सीधा लड़का है कभी किसी से ऊँची आवाज़ मे बात भी नही करता मेरी हर बात मानता है आप गाँव मे किसी से भी पूछ लीजिए बहुत भला लड़का है इसने कोई गुनाह नही किया.

ख़ान : (मुझे कंधो से पकड़कर घूमाते हुए) ये देखिए जनाब आप जिसे अपना बेटा कह रहे थे वो एक अंडरवर्ल्ड का मोस्ट वांटेड गॅंग्स्टर शेरा है इसने बहुत से लोगो का क़त्ल किया है ये इतना शातिर है किसी इंसान की जान लेने के लिए इसको किसी हथियार की भी ज़रूरत नही हर तरह का हथियार चला लेता है ये इसका सटीक निशाना इसकी अंडर्वर्ड मे पहचान है. अब इस टॅटू ऑर ये गोलियों के निशान को देखकर तो आपको तसल्ली हो गई होगी कि ये आपका बेटा नीर नही बल्कि शेरा है जिसको हम इतने महीनो से ढूँढ रहे हैं.

बाबा : देखिए साहब मैं आपको सब सच-सच बता दूँगा लेकिन आपको वादा करना होगा कि आप ये बात किसी को नही बताएँगे.

ख़ान : (कुर्सी पर वापिस बैठ ते हुए) मैं सुन रहा हूँ कहिए क्या कहना है आपको.

जब बाबा ने इनस्पेक्टर ख़ान को मेरे बारे मे बताना शुरू किया तो मैं भी उनके पास ही कमीज़ पहनकर बैठ गया. क्योंकि अक्सर मैं जब भी नाज़ी ऑर फ़िज़ा से अपने बारे मे कुछ भी पुछ्ता तो वो अक्सर टाल जाती ऑर मुझे मेरे बारे मे सच नही बताती ऑर मेरे सीने पर जो निशान थे वो गोलियो के थे ये बात भी मुझे आज ही पता चली थी क्योंकि नाज़ी ऑर फ़िज़ा ने मुझे यही बताया था कि मुझे आक्सिडेंट मे चोट लगने से ये सीने पर निशान मिले थे. अब आख़िर मुझे भी अपने जानना था कि मैं कौन हूँ ऑर मेरा सच क्या है. तभी बाबा ने पहले फ़िज़ा को ऑर फिर नाज़ी को एक साथ आवाज़ देकर बाहर बुलाया दोनो मुँह को ढक कर बाहर आ गई ऑर जहाँ मैं बैठा था मेरे पिछे आके चुप-चाप खड़ी हो गई. मैने पलटकर दोनो को एक नज़र देखा ऑर फिर सीधा होके बैठ गया.

बाबा : बेटा इनस्पेक्टर साहब को नीर के बारे मे सब सच-सच बता दो.

फ़िज़ा : लेकिन बाबा वो....मैं...वो..... (कुछ सोचते हुए)

ख़ान : जी आप घबरईए नही खुलकर बताइए मैं जानना चाहता हूँ कि आप मुझे क्या सच बताना चाहती है.

फ़िज़ा : (एक लंबी साँस छोड़ते हुए) ठीक है साहब लेकिन वादा कीजिए कि उसके बाद आप नीर को कुछ नही कहेंगे.

ख़ान : (अपना कोट सही करते हुए) मैं कोई वादा नही करूँगा लेकिन हाँ अगर ये बे-गुनाह है तो इससे कुछ नही होगा.

फ़िज़ा : ठीक है ख़ान साब.....नाज़ी जाओ वो बॅग ले आओ जो हमने छुपा कर रखा था.

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा भाभी...

ये सुनकर मुझे भी झटका लगा कि ये कौन्से बॅग के बारे मे बात कर रही है जिसके बारे मे मैं नही जानता ऑर इन्होने मुझे कभी क्यो नही बताया. फिर फ़िज़ा ने बोलना शुरू किया ऑर ख़ान साब हमे नही पता नीर का असल नाम क्या है ऑर ये कौन है हाँ ये सच है कि हमारा इससे ज़ाति कोई ताल्लुक नही है. हम को जब ये मिला तो ये बुरी तरह खून मे लथ-पथ था ऑर इसे पाँच गोलियाँ लगी हुई थी ऑर अपनी आखरी साँसे गिन रहा था इसको हम इंसानियत के नाते घर ले आई फिर इसकी गोलियाँ निकाली ऑर इसकी मरहम पट्टी करके इसका इलाज किया. 3 महीने तक ये बेहोश था उसके बाद इसको होश आया लेकिन तब तक ये अपनी याददाश्त खो चुका था ऑर इससे अपने बारे मे कुछ भी याद नही था. (तभी नाज़ी एक काला बॅग ले आई)

नाज़ी : ये लो भाभी. (बॅग फ़िज़ा को देते हुए)

फ़िज़ा : (नाज़ी को देखते हुए) टेबल पर रख दो बॅग को.... (घूमकर ख़ान से बात करते हुए) ख़ान साहब हमें ये बॅग नीर के कंधे पर लटका मिला था ये बेहोश था इसलिए हमने इसकी अमानत को संभाल कर रख दिया था (बॅग खोलते हुए) जब हमने इसके बारे मे मालूम करने के लिए बॅग खोला तो इसमे ये हथियार ऑर ये ढेर सारे पैसे पड़े मिले ये देखकर हम एक बार तो घबरा गई थी कि जाने ये कौन है ऑर इसके पास ऐसा समान क्या कर रहा है लेकिन फिर भी इंसानियत के नाते हमारा ये फ़र्ज़ था कि हम इसकी जान बचाते इसलिए हमने पोलीस मे खबर ना करके पहले इसको बचाना ज़रूरी समझा... हमने सोचा था क़ि जब ये होश मे आ जाएगा तो इसको हम जाने के लिए कह देंगे.

ख़ान : (बॅग मे देखते हुए) वाआह क्या बात है इतना सारा पैसा, ये ऑटोमॅटिक हथियार...ऑर आप लोग कहते हैं कि ये शेरा नही है.

फ़िज़ा : जनाब मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए वही तो मैं आपको बता रही हूँ.... जब ये हमे मिला तो बहुत बुरी तरह ज़ख़्मी था मैं ऑर नाज़ी (उंगली से नाज़ी की तरफ इशारे करते हुए) इसको उठाकर अपने घर ले आई थी ताकि इसकी जान बचाई जा सके 3 महीने तक ये बेहोश पड़ा रहा उसके बाद जब ये होश मे आया तब इसने पहला लफ्ज़ जो बोला वो था "बाबा आपका बेटा आ गया..." जब बाबा इसके पास गये तो इनके परिवार के बारे मे ऑर इनका नाम पूछा लेकिन इसको कुछ भी याद नही था ये सब कुछ भूल चुका था क्योंकि इसके सिर मे काफ़ी गहरी चोट आई थी इसलिए.

मेरे शोहार भी एक शराबी ऑर जुवारि किस्म के इंसान है ऑर वो आज कल जैल मे सज़ा काट रहे हैं. बाबा हमेशा मेरे शोहर से दुखी रहते हैं लेकिन जब इसने मेरे ससुर को (बाबा की तरफ इशारा करते हुए) बाबा कहा तो बाबा का दिल पिघल गया ऑर इन्होने नीर को अपना बेटा बना लिया बाबा ने हम से कहा कि इसको पिच्छला कुछ भी याद नही है ऑर जाने ये कौन है तो क्यो ना इसको हम अपना लें ऑर ये हमारे ही घर मे रहे क्योंकि बाबा को इसमे अपना बेटा नज़र आता है जैसा बेटा वो हमेशा से चाहते थे. तब से लेके आज तक ये इस घर का बेटा बनकर एक बेटे के सारे फ़र्ज़ निभा रहा है हमें नही पता कि इनके अतीत मे ये कौन थे ऑर इन्होने क्या किया है. लेकिन आज की तारीख मे ये एक मेहनती इंसान है जो अपना खून-पसीना एक करके अपने परिवार का पेट भरने के लिए के लिए दिन रात खेत मे मेहनत करता है आज ये एक मासूम इंसान है कोई अपराधी नही. जनाब आपका मकसद तो ज़ुर्म को ख़तम करना है ना तो इनके अंदर का शेरा तो कब का मर चुका है क्या आप एक मासूम इंसान को एक अपराधी की सज़ा देंगे?

ख़ान : आपने जो किया वो इंसानियत की नज़र से क़ाबिल-ए-तारीफ है लेकिन जिसको आप एक भोला-भला मासूम इंसान कह रही हो वो एक पेशावर अपराधी है. आज मैं इसको छोड़ भी दूं तो कल अगर इसकी याददाश्त वापिस आ गई तो इसकी क्या गारंटी है कि ये अपनी दुनिया मे वापिस नही जाएगा ऑर कोई गुनाह नही करेगा आप नही जानती इसने कितने लोगो का क़त्ल किया है ये आदमी बहुत ख़तरनाक है इसको मैं ऐसे खुला नही छोड़ सकता.

बाबा : साहब मैं मानता हूँ कि औलाद के दुख ने मुझे ख़ुदग़र्ज़ बना दिया था लेकिन ये बुरा इंसान नही है.... मैं आपसे वादा करता हूँ कि अगर अब ये कोई भी गुनाह करे तो आप मुझे फाँसी पर चढ़ा देना. नीर मेरा बेटा है इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मैं लेता हूँ (मेरा हाथ पकड़कर)

ख़ान : (अपने सिर पर हाथ फेरते हुए) पता नही मैं ठीक कर रहा हूँ या ग़लत लेकिन फिर भी मैं इसको एक मोक़ा ज़रूर दूँगा.

बाबा, नाज़ी, फ़िज़ा : (एक आवाज़ मे अपने हाथ जोड़कर) आपका बहुत अहसान होगा साहब.

ख़ान : अहसान वाली कोई बात नही बस इसको कल मेरे साथ एक बार शहर चलना होगा मैं डॉक्टर से इसके दिमाग़ का चेक-अप करवाना चाहता हूँ साथ मे इसका लाइ डिटेक्टोर टेस्ट भी करूँगा. क्योंकि मुझे आप पर तो भरोसा है लेकिन इस पर नही.

फ़िज़ा : किस बात का चेक-अप साहब (हैरानी से) ऑर ये लाई क्या है (फ़िज़ा को लाइ डिटेक्टोर कहना नही आया)

ख़ान : लाइ डिटेक्टोर टेस्ट से हम ये पता कर सकते हैं कि इंसान झूठ बोल रहा है या सच ऑर इसका चेक-अप मैं इसलिए करवाना चाहता हूँ कि मुझे जानना है इसकी याददाश्त कब तक वापिस आएगी उसके बाद इसको मेरी मदद करनी होगी.

मैं : (जो इतनी देर से खामोश सब सुन रहा था) कैसी मदद साहब.

ख़ान : तुमको क़ानून से माफी इतनी आसानी से नही मिलेगी इसके बदले मे तुमको हमारी मदद करनी होगी तुम्हारे बाकी गॅंग वालो को पकड़वाने मे.

मैं : ठीक है साहब अब जो भी है यही मेरे अपने है ऑर इनके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ.

ख़ान : तो ठीक है फिर अभी मैं चलता हूँ सुबह मुलाक़ात होगी तैयार रहना ऑर हाँ अगर भागने की कोशिश की तो याद रखना मुजरिम को पनाह देने वाला भी मुजरिम ही होता है तुम्हारे घरवालो ने तुम्हारी गारंटी ली है अगर तुम भागे तो तुम सोच नही सकते मैं इनका क्या हाल करूँगा.

बाबा : ये कही नही जाएगा साहब आप बे-फिकर होके जाए.... मैने कहा ना मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ.

ख़ान : ठीक है फिर मैं चलता हूँ.

मैं : ख़ान साहब ये बॅग भी ले जाइए ये अब मेरे भी काम का नही है.

ख़ान : (हैरान होते हुए) लगता है शेरा सच मे मर गया.

उसके बाद ख़ान ऑर उसके साथ जो पोलीस वाले आए थे वो सब मेरा बॅग लेकर चले गये ऑर हम सब उनको जाता हुआ देखते रहे. फिर बाबा ने मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर फ़िज़ा ऑर नाज़ी मुझे देखकर मुस्कुरा भी रही थी ऑर साथ मे रो भी रही थी मैं भी उनको देखकर मुस्कुरा रहा था.

बाबा : बेटा हमें माफ़ करना हमने तुमसे तुम्हारी असलियत छुपाइ.

मैं : बाबा कैसी बात कर रहे हैं माफी माँग कर शर्मिंदा ना करे मुझे आपने जो मेरे लिए किया उसका अहसान मैं मरते दम तक नही चुका सकता.

बाबा : (मेरे सिर पर हाथ रखकर मुझे दुआ देते हुए ) बेटा तुम हमेशा खुश रहो ऑर आबाद रहो.

फिर बाबा अपने कमरे मे चले गये ऑर मैं फ़िज़ा ऑर नाज़ी के पास ही बैठ गया. वो दोनो मुझे लगातार देख रही थी लेकिन कुछ बोल नही रही थी.

मैं : ऐसे क्या देख रही हो तुम दोनो.

फ़िज़ा : कुछ नही आज एक पल के लिए लगा जैसे हमने तुमको खो दिया (फिर से रोते हुए)

मैं : अर्रे तुम रोने क्यो लगी (फ़िज़ा के दोनो हाथ पकड़ते हुए ऑर नाज़ी की तरफ देखकर) नाज़ी पानी लेके आओ

नाज़ी : अभी लाई.

नाज़ी के जाते ही फ़िज़ा ने मुझे गले से लगा लिया ऑर फिर से रोने लगी

मैं : अर्रे क्या हुआ रोने क्यो लग गई.

फ़िज़ा : जान तुम नही जानते मैं बहुत डर गई थी.

मैं : इसमे डरने की क्या बात है मैं हूँ ना तुम्हारे पास कहीं गया तो नही ऑर फिकर ना करो अब मैं कही जाउन्गा भी नही अब सारी जिंदगी मैं नीर ही रहूँगा.

इतने मे नाज़ी पानी ले आई ऑर हम दोनो जल्दी से अलग होके बैठ गये. उसके बाद कोई खास बात नही हुई रात को हमने खामोशी से खाना खाया ऑर सोने चले गये. नाज़ी की नींद की दवाई की वजह से तबीयत खराब हो गई थी इसलिए फ़िज़ा ने दुबारा उसको वो गोली नही दी और उस रात हम सब सुकून से सो गये. बाबा ने मुझे नाज़ी के कमरे मे नही सोने जाने दिया ऑर अपने पास ही सुलाया. अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो सब जाग रहे थे नाज़ी ऑर फ़िज़ा रसोई मे थी ऑर बाबा बाहर सैर कर रहे थे. मैं जब उठकर बाहर आया तो नाज़ी ऑर फ़िज़ा नाश्ता बना रही थी ऑर साथ ही फ़िज़ा नाज़ी के पास खड़ी उसको कुछ समझा रही थी.

मैं : अर्रे आज इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बना लिया.

फ़िज़ा : अर्रे भूल गये तुमने आज शहर जाना है ना इसलिए तुम्हारे लिए बनाया है जाओ तुम जल्दी से नहा कर तेयार हो जाओ फिर मैं नाश्ता लगा देती हूँ.

मैं : लेकिन शहर जाना क्यों है मैं नही जाउन्गा शहर मुझे खेत मे काम है.

फ़िज़ा : खेत की तुम फिकर ना करो एक दिन नही जाओगे तो आसमान नही टूट जाएगा पहले तुम शहर जाओ ऑर ख़ान के साथ जाके अपना इलाज कर्वाओ उनका सुबह आदमी आया था वो कह रहा था कि ख़ान साहब 8 बजे तुमको लेने आएँगे.

मैं : मुझे उससे कोई वास्ता नही रखना मैं नही जाउन्गा

फ़िज़ा : बच्चों जैसे ज़िद्द ना करो नीर मैं भी तो हूँ तुम्हारे साथ.

मैं : तुम भी... क्या मतलब

फ़िज़ा : अर्रे मैं भी तुम्हारे साथ ही चलूंगी वापसी मे हम दोनो साथ ही आएँगे

नाज़ी : (बीच मे बोलते हुए) देखो ना नीर मैं मना कर रही हूँ भाभी को लेकिन ये सुन ही नही रही इस हालत मे इनका शहर जाना ठीक है क्या मैने तो कहा है तुम्हारे साथ मैं अकेली ही चली जाउन्गी लेकिन नही मेरी बात ही नही सुन रही.

मैं : तुम दोनो ही खामोश हो जाओ ऑर अपना काम करो कोई शहर नही जाएगा ना तुम ना मैं समझी.

Update-26

Khan : Waah bhai kya roub hai wo bhi shera par....(hairaan hote hue) kyonki maine to suna tha wo aadmi paida nahi hua jo shera ko jhuka sake (apne sath wale police wale ko dekhte hue)

Main : (Apne hath jodte hue) dekhiye janab mere baba ki tabiyat thik nahi hai aap meharbani karke yahan se jayiye.

Khan : chale jayenge meri jaan itni bhi kya jaldi hai pehle tasalli to kar loo

Main : kaisi tasalli

Khan : agar tum shera nahi ho to apni kameez utaro kyonki hum jante hain ki shera ke kandhe ke pichhe ek sher ka tatoo guda hua hai.

Main : Agar nahi hua to fir aap yahan se chale jayenge

Khan : ji bilkul hazoor aap bas hamaari tasalli karwa de fir hum aapko chehra tak nahi dikhayenge.

Main : thik hai (kameez utarte hue) dekh lijiye or tasalli kar lijiye. (main nahi janta tha ki meri peeth par iss qism ka koi nishaan hai bhi ya nahi isliye maine khan ke kehne par foran kameez utaar di)

Khan : (charo taraf mere gol-gol ghumte hue) Hhhmmm (mere kandhe par hath rakhkar) tu shatir to bahut hai lekin aaj phas gaya bache tera sher hi tujhe marwa gaya..... Hahahahahahaha (taaliyaan bajate hue)

Main : ji kya matlab (ghumkar khan ki taraf dekhte hue)

Khan : tune mujhe bhi inn bhole gaav walo ki tarah chutiya samjha hai jo teri baato me aa jaunga

Main : main apka matlab nahi samjha aap kehna kya chahte hain.

Khan : matlab to hawaalat me main tujhe achhe se samjhaunga

Baba : (khade hote hue) dekhiye janab ye mera beta Neer hi hai sirf shaqal ek jaisi ho jane se karam ek jaise nahi hote hain ye bichara to khet me mehnat karta hai bahut seedha ladka hai kabhi kisi se oonchi awaz me baat bhi nahi karta meri har baat manta hai aap gaav me kisi se bhi puch lijiye bahut bhala ladka hai isne koi gunah nahi kiya.

Khan : (mujhe kandho se pakadkar ghumate hue) ye dekhiye janab aap jise apna beta keh rahe the wo ek underworld ka most wanted gangster shera hai isne bahut se logo ka qatl kiya hai ye itna shatir hai kisi insaan ki jaan lene ke liye isko kisi hathiyaar ki bhi jarurat nahi har tarah ka hathiyaar chala leta hai ye iska sateek nishana iski underword me pehchaan hai. ab iss tatoo or ye goliyon ke nishaan ko dekhkar to apko tasalli ho gai hogi ki ye aapka beta Neer nahi balki shera hai jisko hum itne maheeno se dhundh rahe hain.

Baba : dekhiye sahab main aapko sab sach-sach bata dunga lekin aapko vaada karna hoga ki aap ye baat kisi ko nahi batayenge.

Khan : (kursi par wapis baith te hue) main sunn raha hun kahiye kya kehna hai apko.

Jab Baba ne inspector khan ko mere bare me batana shuru kiya to main bhi unke pass hi kameez pehankar baith gaya. kyonki aksar main jab bhi nazi or fiza se apne bare me kuch bhi puchhta to wo aksar taal jati or mujhe mere bare me sach nahi batati or mere seene par jo nishaan the wo goliyo ke the ye baat bhi mujhe aaj hi pata chali thbi kyonki nazi or fiza ne mujhe yhi bataayaa tha ki mujhe accident me chot lagne se ye seene par nishan mile the. Ab akhir mujhe bhi apne janna tha ki main kaun hun or mera sach kya hai. Tabhi baba ne pehle fiza ko or fir nazi ko ek sath awaz dekar bahar bulaya dono munh ko dhak kar bahar aa gai or jahan main baitha tha mere pichhe aake chup-chap khadi ho gai. maine palatkar dono ko ek nazar dekha or fir sidha hoke baith gaya.

Baba : beta inspector sahab ko Neer ke bare me sab sach-sach bata do.

Fiza : lekin baba wo....main...wo..... (kuch sochte hue)

Khan : ji aap ghabrayiye nahi khulkar batayiye main janna chahta hun ki aap mujhe kya sach batana chahti hai.

Fiza : (ek lambi saans chodte hue) thik hai sahab lekin vaada kijiye ki uske baad aap Neer ko kuch nahi kahenge.

Khan : (apna coat sahi karte hue) main koi vaada nahi karunga lekin haa agar ye be-gunah hai to isse kuch nahi hoga.

Fiza : thik hai khan saab.....Nazi jao wo bag le aao jo hamane chhupake rakha tha.

Nazi : (haa me sir hilate hue) achha bhabhi...

Ye sunkar mujhe bhi jhatka laga ki ye kounse bag ke bare me baat kar rahi hai jiske bare me main nahi janta or inhone mujhe kabhi kyo nahi bataayaa. Fir fiza ne bolna shuru kiya or khan saab hume nahi pata Neer ka asal naam kya hai or ye kaun hai haa ye sach hai ki hmara isse zaati koi talluk nahi hai. Ham ko jab ye mila to ye buri tarah khun me lath-path tha or isse paanch goliyaan lagi hui thi or apni aakhri saanse gin raha tha isko hum insaniyat ke naate ghar le aayi fir iski goliyaan nikali or iski maraham patti karke iska ilaaj kiya. 3 maheene tak ye behosh tha uske baad isko hosh aaya lekin tab tak ye apni yaddasht kho chuka tha or isse apne bare me kuch bhi yaad nahi tha. (tabhi nazi ek kala bag le aayi)

Nazi : ye lo bhabhi. (bag fiza ko dete hue)

Fiza : (nazi ko dekhte hue) Table par rakh do bag ko.... (ghumkar khana se baat karte hue) Khan sahab hume ye bag Neer ke kandhe par latka mila tha ye behosh tha isliye hamane iski amaanat ko sambhaal kar rakh diya tha (bag kholte hue) jab hamane iske bare me malum karne ke liye bag khola to isme ye hathiyaar or ye dher sare paise pade mile ye dekhkar hum ek baar to ghabra gai thi ki jane ye kaun hai or iske pass aisa samaan kya kar raha hai lekin fir bhi insaniyat ke naate hmara ye farz tha ki hum iski jaan bachate isliye hamane police me khabar na karke pehle isko bachana jaruri samjha... hamane socha tha ki jab ye hosh me aa jayega to isko hum jane ke liye keh denge.

Khan : (bag me dekhte hue) Waaah kya baat hai itna sara paisa, ye Automatic hathiyaar...or aap log kehte hain ki ye shera nahi hai.

Fiza : janab meri poori baat to sun lijiye wahi to main aapko bata rahi hun.... jab ye hume mila to bahut buri tarah zakhmi tha main or nazi (ungali se nazi ki taraf ishare karte hue) isko uthakar apne ghar le aayi thi taki iski jaan bachayi jaa sake 3 maheene tak ye behosh pada raha uske baad jab ye hosh me aya tab isne pehla lafz jo bola wo tha "Baba aapka beta aa gaya..." jab baba iske pass gaye to inke parivaar ke bare me or inka naam puchaa lekin isko kuch bhi yaad nahi tha ye sab kuch bhul chuka tha kyonki iske sir me kaafi gehri chot aayi thi isliye.

Mere shohar bhi ek sharabi or juwaari kism ke insaan hai or wo aaj kal jail me saza kaat rahe hain. Baba hamesha mere shohar se dukhi rehte hain lekin jab isne mere sasur ko (baba ki taraf ishara karte hue) baba kaha to baba ka dil pighal gaya or inhone Neer ko apna beta bana liya baba ne humse kaha ki isko pichhla kuch bhi yaad nahi hai or jane ye kaun hai to kyo na isko hum apna le or ye hamaare hi ghar me rahe kyonki baba ko isme apna beta nazar aata hai jaisa beta wo hamesha se chahte the. tab se leke aaj tak ye iss ghar ka beta bankar ek bete ke sare farz nibha raha hai hume nahi pata ki inke ateet me ye kaun the or inhone kya kiya hai. lekin aaj ki tareekh me ye ek mehanti insaan hai jo apna khun-paseena ek karke apne parivaar ka pet bharne ke liye ke liye din raat khet me mehnat karta hai aaj ye ek masoom insaan hai koi apradhi nahi. Janab aapka maksad to zurm ko khatam karna hai naa to inke andar ka shera to kab ka mar chuka hai kya aap ek masoom insaan ko ek apradhi ki saza denge?

Khan : aapne jo kiya wo insaniyat ki nazar se qabil-e-tareef hai lekin jisko aap ek bhola-bhala masoom insaan keh rahi ho wo ek peshawar apradhi hai. Aaj main isko chod bhi doo to kal agar iski yaddasht wapis aa gai to iski kya garenty hai ki ye apni duniya me wapis nahi jayega or koi gunah nahi karega aap nahi janti isne kitne logo ka qatl kiya hai ye aadmi bahut khatarnaak hai isko main aise khula nahi chod sakta.

Baba : sahab main manta hun ki aulaad ke dukh ne mujhe khudgarz bana diya tha lekin ye bura insaan nahi hai.... main aapse vaada karta hun ki agar ab ye koi bhi gunah kare to aap mujhe faansi par chadha dena. Neer mera beta hai iski poori jimmedari main leta hun (mera hath pakadkar)

Khan : (apne sir par hath ferte hue) pata nahi main thik kar raha hun ya galat lekin fir bhi main isko ek moqa jarur dunga.

Baba, Nazi, Fiza : (ek awaaz me apne hath jodkar) aapka bahut ahsaan hoga sahab.

Khan : ahsaan wali koi bat nahi bas isko kal mere sath ek baar shehar chalna hoga main doctor se iske dimaag ka check-up karwana chahta hun sath me iska lie ditector test bhi karunga. kyonki mujhe aap par to bharosa hai lekin iss par nahi.

Fiza : kis baat ka check-up sahab (hairani se) or ye laayi kya hai (fiza ko lie ditector kehna nahi aaya)

Khan : Lie ditector test se hum ye pata kar sakte hain ki insaan jhooth bol raha hai ya sach or iska check-up main isliye karwana chahta hun ki mujhe janna hai iski yaddasht kab tak wapis aayegi uske baad isko meri madad karni hogi.

Main : (jo itni der se khamosh sab sunn raha tha) kaisi madad sahab.

Khan : tumko kanoon se maafi itni asani se nahi milegi iske badle me tumko hamaari madad karni hogi tumhare baki gang walo ko pakadwane me.

Main : thik hai sahab ab jo bhi hai yhi mere apne hai or inke liye main kuch bhi karne ko tiyaar hun.

Khan : To thik hai fir abhi main chalta hun subah mulaqat hogi teiyaar rehna or haa agar bhagne ki koshish ki to yaad rakhna mujrim ko panah dene wala bhi mujrim hi hota hai tumhare gharwalo ne tumhari garenty lee hai agar tum bhaage to tum soch nahi sakte main inka kya haal karunga.

Baba : ye kahi nahi jayega sahab aap be-fikar hoke jaye.... maine kaha naa main iski jimmedari leta hun.

Khan : thik hai fir main chalta hun.

Main : khan sahab ye bag bhi le jayiye ye ab mere bhi kaam ka nahi hai.

Khan : (hairaan hote hue) lagta hai shera sach me mar gaya.

Uske baad khan or uske sath jo policewale aaye the wo sab mera bag lekar chale gaye or hum sab unko jata hua dekhte rahe. Fir baba ne mujhe apne gale se laga liya or fiza or nazi mujhe dekhkar muskura bhi rahi thi or sath me rou bhi rahi thi main bhi unko dekhkar muskura raha tha.

Baba : beta hume maaf karna hamane tumse tumhari asaliyat chhupayi.

Main : baba kaisi baat kar rahe hain maafi maang kar sharminda na kare mujhe aapne jo mere liye kiya uska ahsaan main marte dam tak nahi chuka sakta.

Baba : (mere sir par hath rakhkar mujhe dua dete hue ) beta tum hamesha khush raho or abaad raho.

Fir baba apne kamre me chale gaye or main fiza or nazi ke pass hi baith gaya. wo dono mujhe lagatar dekh rahi thi lekin kuch bol nahi rahi thi.

Main : Aise kya dekh rahi ho tum dono.

Fiza : kuch nahi aaj ek pal ke liye laga jaise hamane tumko kho diya (fir se rote hue)

Main : arre tum rone kyo lagi (fiza ke dono hath pakdte hue or nazi ki taraf dekhkar) nazi paani leke aao

Nazi : abhi laayi.

Nazi ke jate hi fiza ne mujhe gale se laga liya or fir se rone lagi

Main : arre kya hua rone kyo lag gai.

Fiza : jaan tum nahi jante main bahut darr gai thi.

Main : Isme darne ki kya baat hai main hun naa tumhare pass kahi gaya to nahi or fikar na karo ab main kahi jaunga bhi nahi ab sari jindagi main Neer hi rahunga.

Itne me nazi pani le aayi or hum dono jaldi se alag hoke baith gaye. uske baad koi khas bat nahi hui raat ko hamane khamoshi se khana khaya or sone chale gaye. nazi ki neend ki dawayi ki wajah se tabiyat kharab ho gai thi isliye fiza ne dubara usko wo goli nahi di or uss raat hum sab sukoon se so gaye. baba ne mujhe nazi ke kamre me nahi sone jane diya or apne pass hi sulaya. Agle din subah jab main utha to sab jaag rahe the nazi or fiza rasoyi me thi or baba bahar sair kar rahe the. main jab uthkar bahar aaya to nazi or fiza nashta bana rahi thi or sath hi fiza nazi ke pass khadi usko kuch samjha rahi thi.

Main : arre aaj itni jaldi nashta kaise bana liya.

Fiza : arre bhul gaye tumne aaj shehar jana hai naa isliye tumhare liye banaya hai jao tum jaldi se nahakar teiyaar ho jao fir main nashta laga deti hun.

Main : lekin shehar jana kyo hai main nahi jaunga shehar mujhe khet me kaam hai.

Fiza : khet ki tum fikar na karo ek din nahi jaoge to asmaan nahi toot jayega pehle tum shehar jao or khan ke sath jake apna ilaaj karwao unka subah aadmi aaya tha wo keh raha tha ki khan sahab 8 baje tumko lene aayenge.

Main : mujhe usse koi vasta nahi rakhna main nahi jaunga

Fiza : bacho jaise zidd na karo Neer main bhi to hun tumhare sath.

Main : tum bhi... kya matlab

Fiza : arre main bhi tumhare sath hi chalungi wapsi me hum dono sath hi aayenge

Nazi : (bich me bolte hue) dekho na Neer main mana kar rahi hun bhabhi ko lekin ye sunn hi nahi rahi iss halat me inka shehar jana thik hai kya maine to kaha hai tumhare sath main akeli hi chali jaungi lekin nahi meri baat hi nahi sunn rahi.

Main : tum dono hi khamosh ho jao or apna kaam karo koi shehar nahi jayega naa tum naa main samjhi.

 


अपडेट-27

अभी हम बात ही कर रहे थे कि एक जीप हमारे दरवाज़े के सामने आके रुक गई. जिसमे से ख़ान बाहर निकला ऑर बाहर खड़ा होके दरवाज़ा खट-खटाने लगा.

मैं : कौन है (दरवाज़े की तरफ देखते हुए)

ख़ान : जल्दी चलो लेट हो रहा है.

मैं : (रसोई से बाहर निकलते हुए) जी साहब आप

ख़ान : अर्रे तुम अभी तक तैयार नही हुए

मैं : मुझे कही नही जाना मैं यही रहूँगा

ख़ान : अर्रे तुमको अरेस्ट नही कर रहा हूँ यार तुमको बस डॉक्टर को दिखाना है ऑर शाम तक वापिस घर छोड़ जाउन्गा तुम्हारे ऑर कुछ नही. डरो मत कुछ करना होता तो कल ही तुम्हारा नंबर लग जाना था.

मैं : लेकिन ख़ान साहब मैं एक दम ठीक हूँ फिर आप मुझे शहर क्यो ले जा रहे हैं ऑर वैसे भी बिना याददाश्त के मैं आपके किस काम का हूँ बताओ.

ख़ान : अर्रे अजीब पागल आदमी है यार ये (नाज़ी की तरफ देखते हुए) अब आप ही समझाइये इसको मैं बाहर वेट कर रहा हूँ 10 मिनिट मे तैयार होके बाहर आ जाओ.

नाज़ी : हाँ नीर ये ठीक कह रहे हैं ज़रा ये भी तो सोचो तुम ठीक हो जाओगे इलाज करवाने से फिर तुमको जो घबराहट से चक्कर आते हैं वो भी आना बंद हो जाएँगे.

मैं : लेकिन नाज़ी अब भी तो मैं ठीक ही हूँ ना

नाज़ी : बहस ना करो जैसा कहती हूँ चुप-चाप करो ऑर फिर तुम डर क्यो रहे हो मैं भी तो चल रही हूँ तुम्हारे साथ.

ख़ान : हाँ ये ठीक रहेगा आप भी साथ ही चलो.

नाज़ी : (खुश होते हुए) मैं अभी तैयार होके आती हूँ चलो नीर तुम भी जाओ ऑर जाके तैयार हो जाओ.

इतने मे बाबा आ गये सैर करके जिनको ख़ान ने अदब से सलाम किया ऑर फिर बाबा को मेरे शहर ना जाने के बारे मे बताया तो बाबा के इसरार पर मैं शहर जाने के लिए राज़ी हो गया ऑर फिर मैं ऑर नाज़ी, इनस्पेक्टर ख़ान के साथ उसकी जीप मे बैठकर शहर के लिए रवाना हो गया. फ़िज़ा दरवाज़े पर खड़ी मुझे देखती रही हो ऑर मुस्कुराकर हाथ हिलाकर अलविदा कहती रही. जीप मे बैठ ते ही ख़ान के सवाल-जवाब शुरू हो गये.

ख़ान : यार शेरा कल तुम्हारे पास इतना अच्छा मोका था तुम भागे क्यो नही.

नाज़ी : (बीच मे बोलते हुए) इनका नाम नीर है शेरा नही बेहतर होगा आप भी इनको नीर कहकर ही बुलाए.

ख़ान : जी माफ़ कीजिए...हाँ तो नीर साहब रात को आप भागे क्यो नही.

मैं : साहब मैं मेरे परिवार को छोड़कर कैसे जा सकता था.

ख़ान : परिवार....हाहहहाहा अच्छा है...वैसे तुम मेरे पहले इम्तिहान मे पास हो गये हो अब मैं तुम पर भरोसा कर सकता हूँ.

मैं : जी कौनसा इम्तेहान

ख़ान : कल मेरे आदमियो ने पूरे गाव को घेर रखा था अगर तुम भागने की कोशिश भी करते तो वो लोग तुमको वही भुन देते लेकिन तुम नही भागे मुझे अच्छा लगा.

मैं : जब बाबा ने कहा था कि मैं नही जाउन्गा तो कैसे जाता.

ख़ान : हमम्म अब तो बस तुम एक बार ठीक हो जाओ तो मैं तुम पर अपना दाँव खेल सकता हूँ.

मैं : कौनसा दाँव

ख़ान: यार तुम जल्दी मे बहुत रहते हो सबर करो धीरे-धीरे सब पता चल जाएगा.

मैं : अब हम कहाँ जा रहे हैं?

ख़ान : पहले तुम्हारा लाइ डिटेक्टोर टेस्ट होगा उसके बाद तुम्हारे चेक-अप के लिए जाएँगे.

मैं : ठीक है.

उसके बाद कोई खास बात नही हुई पिछे मैं ऑर नाज़ी एक दूसरे के साथ बैठे थे नाज़ी पूरे रास्ते मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर बैठी रही ऑर मेरा हाथ पकड़कर रखा. फिर हम को ख़ान एक अजीब सी जगह ले आया जो बाहर से तो किसी दफ़्तर की तरह लग रहा था जहाँ बहुत से मुलाज़िम काम कर रहे थे. फिर हम चलते हुए एक दरवाज़े के पास पहुँच गये जिसके सामने कुछ नंबर लिखे थे ख़ान ने कुछ नंबर दबाए ऑर गेट खुद ही खुल गया. अंदर अजीब सा महॉल था वहाँ बहुत से लोग बंदूक ताने खड़े थे मैं ऑर नाज़ी सारी जगह को देखते हुए ख़ान के पिछे-पिछे जा रहे थे.

तभी एक पोलीस वाला दौड़ता हुआ आया ऑर मुझ पर हमला कर दिया ख़ान ने जल्दी से नाज़ी को अपनी तरफ खींच लिया जो मेरा हाथ पकड़े चल रही थी. मुझे समझ नही आ रहा था कि ये क्या हुआ उस पोलिसेवाले ने लातें ऑर मुक्के मुझ पर बरसाने शुरू कर दिए मैं कुछ देर ज़मीन पर लेटा रहा ऑर मार ख़ाता रहा फिर जाने मुझे क्या हुआ मैने उस पोलिसेवाले का पैर पकड़ लिया ऑर ज़ोर से घुमा दिया वो हवा मे पलट गया ऑर धडाम से ज़मीन पर गीरा फिर मैने अपनी दोनो टांगे हवा मे उठाई ऑर झटके से दोनो पैरो पर खड़ा हो गया इतने मे 3 पोलीस वाले मेरी ओर लपके जिसमे से एक ने मुझे पिछे से पकड़ लिया बाकी जो 2 सामने से आए उनको मैने गले से पकड़ रखा था मैने सामने वाले दोनो आदमियो की दीवार की तरफ धक्का दिया ऑर पिछे वाले के मुँह पर ज़ोर से अपना सिर मारा जिससे वो अपना नाक पकड़कर वही बैठ गया तभी एक ऑर पोलीस वाला भागता हुआ आया जिसके हाथ मे लोहे का सरिया था जैसे ही वो मुझे सरिये से मारने लगा मैने सरिया पकड़ लिया ऑर घूमकर उसके कंधे पर वही सरिया ज़ोर से मारा इतने मे एक पोलीस वाला जो ज़मीन पर गिरा पड़ा था वो उठा ऑर उसने एक काँच के बर्तन जैसा कुछ उठा लिया ऑर पिच्चे से मेरे सिर मे मारा. मैं फॉरन उस ओर पलट गया ऑर गुस्से से उसको देखने लगा तभी मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे सिर से खून निकल रहा है मैने अपने सिर पर हाथ लगाया ऑर अपने खून को उंगलियो पर लगाकर उसका मुक्का बना लिया ऑर ज़ोर से उस आदमी के मुँह पर मारा फिर उसको कंधे पर उठाकर अलमारी पर फेंक दिया जिससे अलमारी के दोनो दरवाज़े अंदर को धँस गये फिर मैने पास पड़ी एक चेयर उठाई ऑर सामने गिरे हुए दोनो पोलीस वालो को खड़ा करके उनके सिर वो चेयर मारी जिससे चेयर टूट गई ऑर मेरे हाथ मे उसका एक टूटा हुआ डंडा सा रह गया अब मैने चारो तरफ देखा लेकिन मुझ पर हमला करने वाले तमाम लोग ज़मीन पर गिरे पड़े थे ऑर दर्द से कराह रहे थे मैं हाथ मे कुर्सी की टूटी हुई टाँग पकड़े ऑर आदमियो के आने का इंतज़ार करने लगा कि अब कौन आएगा लेकिन तभी पूरा कमरा तालियो की गड़-गड़ाहट से गूँज उठा मैने पलटकर देखा तो ये ख़ान था जो मुझे देखकर खुश हो रहा था ऑर तालियाँ ब्जा रहा था.

ख़ान : वाहह क्या बात है लोहा आज भी गरम है.

मैं : ख़ान साहब ये कौन लोग है जिन्होने मुझ पर हमला किया.

ख़ान : ये मेरे लोग है इनको मैने ही तुम पर हमला करने को कहा था.

मैं : लेकिन क्यो (गुस्से मे)

ख़ान : (अपने नाख़ून देखते हुए) कुछ नही मैने शेरा की ताक़त के बारे मे सुना था देखना चाहता था बस इसलिए.(मुस्कुराकर)

मैं : (गुस्से से ख़ान को देखते हुए) हहुूहह ये कोई तरीका है किसी की ताक़त आज़माने का.

नाज़ी : (ख़ान से अपना हाथ छुड़ा कर चिल्लाते हुए) तुम एक दम पागल हो कल बाबा ने कहा था ना कि ये पहले जैसे नही है अब बदल गये हैं फिर भी तुमने इन पर हमला करवाया देखो सिर से खून आ रहा है इनके (अपने दुपट्टे से मेरा सिर का खून सॉफ करते हुए) हमें कोई इलाज नही करवाना नीर चलो यहाँ से ये सब के सब लोग पागल है.

ख़ान : देखिए माफी चाहता हूँ लेकिन इसको आज़माना ज़रूरी था अब ऐसा नही होगा मैं वादा करता हूँ चलिए आइए मेरे साथ.

इतना कहकर वो एक कमरे मे चला गया ऑर हाथ से हम को भी पिछे आने का इशारा किया हम बिना कुछ बोले उसके पिछे चले गये नाज़ी ने अपना दुपट्टा मेरे सिर पर ही पकड़कर रख लिया ऑर दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया ऑर हम दोनो ख़ान के पिछे चले गये जहाँ बड़ी-बड़ी मशीन पड़ी थी. तभी एक औरत मुस्कुराते हुए मेरे पास आई जिसने सफेद कोट पहना था ऑर देखने मे डॉक्टर जैसी लग रही थी.

डॉक्टर : हल्लो माइ सेल्फ़ डॉक्टर रेहाना करिशी. (अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए)

मैं : जी क्या

डॉक्टर : माफी चाहती हूँ मैं भूल गई थी आपको अँग्रेज़ी नही आती मेरा नाम डॉक्टर रेहाना है ऑर आप.

मैं : (हाथ मिलाते हुए) नीर अली.

डॉक्टर : (कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए) बैठिए जनाब.

मैं : (बिना कुछ बोले कुर्सी पर बैठ ते हुए) आप मेरा इलाज करेंगी?

डॉक्टर : (मेरा चेहरा पकड़कर मेरे सिर का ज़ख़्म देखते हुए) हमम्म हंजी मैं ही करूँगी लेकिन पहले आपके ज़ख़्म का इलाज कर दूं खून निकल रहा है (मुस्कुराते हुए)

फिर डॉक्टर रेहाना ने मेरे जखम पर पट्टी बाँधी ओर मैं बस बैठा उसको देखता रहा वो मुझे देखकर लगातार मुस्कुरा रही थी ऑर मैं उसकी बड़ी-बड़ी नीली आँखो मे देख रहा था एक अजीब सी क़शिष थी उसके चेहरे मे मैं बस उसके चेहरे को ही लगा तार देखे जा रहा था. फिर उसने मेरी बाजू पकड़ी ऑर एक इंजेक्षन सा लगा दिया जो मुझे लगा शायद मेरे सिर के दर्द के लिए होगा लेकिन इंजेक्षन के लगते ही मुझ पर एक अजीब सा नशा छाने लगा ऑर मेरी आँखो के आगे अंधेरा छाने लगा मुझे बहुत तेज़ नींद आने लगी जैसे मैं कई रातो से सोया ही नही हूँ. उसके बाद मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया ऑर मुझे जब होश आया तो मैं एक बेड पर लेटा हुआ था मेरे पास मेरा हाथ पकड़कर नाज़ी बैठी हुई थी ऑर रेहाना ऑर ख़ान मेरे सामने खड़े मुस्कुरा रहे थे.

मैं : मैं यहाँ कैसे आया मैं तो कुर्सी पर बैठा था ना.

ख़ान : माफी नीर जी माफी आप सच कह रहे थे लाइ डिटेक्टोर टेस्ट के बाद हम को भरोसा हो गया जनाब (हाथ जोड़कर) लेकिन क्या करे भाई हमारी भी ड्यूटी है शक़ करने की बीमारी सी पड़ गई है अच्छा तुम अब रेस्ट करो कुछ चाहिए हो तो डॉक्टर रहना को बोल देना ठीक है.

फिर ख़ान तेज़ कदमो के साथ कमरे से बाहर निकल गया ऑर हम सब उसको देखते रहे. फिर मैने बिस्तर से खड़े होने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ पैर जवाब दे रहे थे जैसे उनमे कोई जान ही ना हो मैं चाह कर भी उठ नही पा रहा था इसलिए मैने सबसे एक के बाद एक सवाल पुच्छने शुरू कर दिए.

मैं : लाइ डिटेक्टोर टेस्ट हो भी गये ऑर मुझे पता भी नही चला. ऑर अब मैं कहा हूँ ऑर यहाँ आया कैसे?

रेहाना : आपको हमारे लोग यहाँ लाए हैं आप घबरईए नही आप एक दम महफूस है (मुस्कुराते हुए)

मैं : क्या अब मैं घर जा सकता हूँ (बिस्तर से उठ ते हुए)

रहना : अर्रे लेटे रहिए अभी दवा का असर है तो कुछ देर बॉडी मे कमज़ोरी रहेगी हो सकता है चक्कर आए लेकिन थोड़ी देर मे ठीक हो जाओगे तो आप घर चले जाना.

मैं : (नाज़ी का हाथ पकड़ते हुए) तुम ठीक हो

नाज़ी : (मुस्कुरा कर हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

मैं: हम कितनी देर से यहाँ है

नाज़ी : सुबह से

मैं : अब वक़्त क्या हुआ है

नाज़ी : शाम होने वाली है

मैं : क्या मैं इतनी देर सोया रहा.

रेहाना : बाते बाद मे कर लेना पहले कुछ खा लो (मुस्कुराते हुए) बताओ क्या खाओगे

मैं : (नाज़ी की तरफ देखते हुए) तुमने खाना खाया

नाज़ी : नही तुम्हारे साथ खाउन्गी.

रेहाना : आप बाते करो मैं आपके लिए कुछ खाने को भेजती हूँ

फिर रेहाना चली गई ऑर मैं उसको जाते हुए देखता रहा तभी नाज़ी को जाने क्या हुआ वो अपनी जगह से खड़ी हुई ऑर बेड पर मेरे उपर आके लेट गई ऑर मुझे गले से लगा लिया.

मैं : नाज़ी क्या हुआ

नाज़ी : (ना मे सिर हिलाते हुए) कुछ नही बस तुमको गले लगाने का दिल कर रहा था सो लगा लिया.

मैं : वो तो ठीक है लेकिन वो डॉक्टरनी आ गई तो.

नाज़ी : एम्म्म बस थोड़ी देर फिर सही होके बैठ जाउन्गी.

मैं : नाज़ी एक पप्पी दो ना

नाज़ी : (मेरी छाती पर थप्पड़ मारते हुए) खड़ा हुआ नही जा रहा फिर भी सुधरते नही बदमाश.

मैं: (हँसते हुए) लो यार अब तुमसे नही तो क्या डॉक्टरनी से पप्पी मांगू.

नाज़ी : (मेरा गला दबाते हुए) माँगकर तो दिखाओ किसी ऑर से पप्पी.... तुम्हारा गला नही दबा दूँगी बड़े आए डॉक्टर से पप्पी माँगने वाले (मुस्कुराते हुए)

मैं: तो फिर पप्पी दो ना

नाज़ी : म्म्म्मीम ठीक है लेकिन सिर्फ़ एक.

मैं : हाँ ठीक है एक ही दे दो बाकी घर जाके ले लूँगा. (मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : तुम सुधर नही सकते ना (हँसते हुए)

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए ऑर मुस्कुराते हुए) उउउहहुउऊ

Update-27

Abhi hum baat hi kar rahe the ki ek jeep hamaare darwaze ke samne aake ruk gai. Jisme se khan bahar nikla or bahar khada hoke darwaza khat-khatane laga.

Main : kaun hai (darwaze ki taraf dekhte hue)

Khan : jaldi chalo late ho raha hai.

Main : (rasoyi se bahar nikalte hue) ji sahab aap

Khan : arre tum abhi tak teiyaar nahi hue

Main : mujhe kahi nahi jana main yhi rahunga

Khan : arre tumko arrest nahi kar raha hun yaar tumko bas doctor ko dikhana hai or sham tak wapis ghar chod jaunga tumhare or kuch nahi. daro mat kuch karna hota to kal hi tumhara number lag jana tha.

Main : lekin khan sahab main ek dam thik hun fir aap mujhe shehar kyo le jaa rahe hain or waise bhi bina yaddasht ke main aapke kis kaam ka hun bataao.

Khan : arre ajeeb pagal aadmi hai yaar ye (nazi ki taraf dekhte hue) ab aap hi samjhayiye isko main bahar wait kar raha hun 10 minute me teiyar hoke bahar aa jao.

Nazi : ha Neer ye thik keh rahe hain zra ye bhi to socho tum thik ho jaoge ilaaj karwane se fir tumko jo gabhrahat se chakkar aate hain wo bhi aana band ho jayenge.

Main : lekin nazi ab bhi to main thik hi hun naa

Nazi : behas na karo jaisa kehti hun chup-chap karo or fir tum darr kyo rahe ho main bhi to chal rahi hun tumhare sath.

Khan : Haa ye thik rahega aap bhi sath hi chalo.

Nazi : (khush hote hue) main abhi tiyaar hoke aati hun chalo Neer tum bhi jao or jake taiyaar ho jao.

Itne me baba aa gaye sair karke jinko khan ne adab se salaam kiya or fir baba ko mere shehar na jane ke bare me bataayaa to baba ke israr par main shehar jane ke liye raazi ho gaya or fir main or nazi, inspector khan ke sath uski jeep me baithkar shehar ke liye rawana ho gaya. fiza darwaze par khadi mujhe dekhti rahi ho or muskurakar hath hilakar alvida kehti rahi. jeeb me baith te hi khan ke swal-jawab shuru ho gaye.

Khan : yaar shera kal tumhare pass itna achha moka tha tum bhage kyo nahi.

Nazi : (bich me bolte hue) inka naam Neer hai shera nahi behtar hoga aap bhi inko Neer kehkar hi bulaye.

Khan : ji maaf kijiye...haa to Neer sahab raat ko aap bhagey kyo nahi.

Main : sahab main mere parivaar ko chodkar kaise jaa sakta tha.

Khan : parivaar....hahahahaha achha hai...waise tum mere pehle imtehaan me pass ho gaye ho ab main tum par bharosa kar sakta hun.

Main : ji kounsa imtehaan

Khan : kal mere aadmiyo ne poore gaav ko gher rakha tha agar tum bhagne ki koshish bhi karte to wo log tumko wahi bhunn dete lekin tum nahi bhagey mujhe achha laga.

Main : jab baba ne kaha tha ki main nahi jaunga to kaise jata.

Khan : Hhhmmm ab to bas tum ek bar thik ho jao to main tum par apna daav khel sakta hun.

Main : kounsa daav

Khan: yaar tum jaldi me bahut rehte ho sabar karo dheere-dheere sab pata chal jayega.

Main : ab hum kaha jaa rahe hain?

khan : pehle tumhara lie ditector test hoga uske baad tumhare check-up ke liye jayenge.

Main : thik hai.

Uske baad koi khas baat nahi hui pichhe main or nazi ek dusre ke sath baithe the nazi poore raste mere kandhe par apna sir rakhkar baithi rahi or mera hath pakadkar rakha. fir ham ko khan ek ajeeb si jagah le aaya jo bahar se to kisi daftar ki tarah lag raha tha jahan bahut se mulazim kaam kar rahe the. fir hum chalte hue ek darwaze ke pass pohonch gaye jiske samne kuch number likhe the khan ne kuch number dabaye or gate khud hi khul gaya. andar ajeeb sa mahol tha wahan bahut se log bandook taane khade the main or nazi sari jagah ko dekhte hue khan ke pichhe-pichhe jaa rahe the.

Tabhi ek police wala daudta hua aaya or mujh par hamla kar diya khan ne jaldi se nazi ko apni taraf khinch liya jo mera hath pakde chal rahi thi. mujhe samjh nahi aa raha tha ki ye kya hua uss policewale ne laate or mukke mujh par barsane shuru kar diye main kuch der zameen par leta raha or maar khata raha fir jane mujhe kya hua maine uss policewale ka pair pakad liya or jor se ghuma diya wo hawa me palat gaya or dhadaam se zameen par geera fir maine apni dono taangey hawa me uthayi or jhatke se dono pairo par khada ho gaya itne me 3 police wale meri or lapke jisme se ek ne mujhe pichhe se pakad liya baki jo 2 samne se aaye unko maine gale se pakad rakha tha maine samne wale dono aadmiyo ki deewar ki taraf dhakka diya or pichhe wale ke munh par jor se apna sir mara jisse wo apna naak pakadkar wahi baith gaya tabhi ek or policewala bhagta hua aaya jiske hath me lohe ka sariya tha jaise hi wo mujhe sariye se marne laga maine sariya pakda liya or ghumakar uske kandhe par wahi sariya jor se mara itne me ek policewala jo zameen par gira pada tha wo utha or usne ek kaanch ke bartan jaisa kuch utha liya or pichhe se mere sir me mara. main foran uss or palat gaya or gusse se usko dekhne laga tabhi mujhe aisa mehsoos hua jaise mere sir se khun nikal raha hai maine apne sir par hath lagaya or apne khun ko ungaliyo par lagakar uska mukka bana liya or jor se uss aadmi ke munh par mara fir usko kandhe par uthakar almari par fenk diya jisse almari ke dono darwaze andar ko dhans gaye fir maine pass padi ek chair uthayi or samne gire hue dono police walo ko khada karke unke sir wo chair maari jisse chair toot gai or mere hath me uska ek toota hua danda sa reh gaya ab maine charo taraf dekha lekin mujh par hamla karne wale tamaam log zameen par gire pade the or dard se karahaa rahe the main hath me kursi ki tooti hui taang pakde or aadmiyo ke aane ka intzaar karne laga ki ab kaun aayega lekin tabhi poora kamra taaliyo ki gad-gadahat se gunj utha maine palatkar dekha to ye khan tha jo mujhe dekhkar khush ho raha tha or taliyaan bja raha tha.

Khan : waahhhh kya baat hai loha aaj bhi garam hai.

Main : khan sahab ye koun log hai jinhone mujh par hamla kiya.

Khan : ye mere log hai inko maine hi tum par hamla karne ko kaha tha.

Main : lekin kyo (gusse me)

Khan : (apne nakhun dekhte hue) kuch nahi maine shera ki taqat ke bare me suna tha dekhna chahta tha bas isliye.(muskurkar)

Main : (gusse se khan ko dekhte hue) hhhuuuhhhh ye koi tareeka hai kisi ki taqat azmane ka.

Nazi : (khan se apna hath chudhakar chillate hue) tum ek dam pagal ho kal baba ne kaha tha naa ki ye pehle jaise nahi hai ab badal gaye hain fir bhi tumne inn par hamla karwaya dekho sir se khun aa raha inke (apne dupatte se mera sir ka khun saaf karte hue) hume koi ilaaj nahi karwana Neer chalo yahan se ye sab ke sab log pagal hai.

Khan : dekhiye maafi chahta hun lekin isko azmana jaruri tha ab aisa nahi hoga main vaada karta hun chaliye aayiye mere sath.

Itna kehkar wo ek kamre me chala gaya or hath se ham ko bhi pichhe aane ka ishara kiya hum bina kuch bole uske pichhe chale gaye nazi ne apna dupatta mere sir par hi pakadkar rakh liya or dusre hath se mera hath pakad liya or hum dono khan ke pichhe chale gaye jahan badi-badi machine padi thi. tabhi ek aurat muskurate hue mere pass aayi jisne safed coat pehna tha or dekhne me doctor jaisi lag raha thi.

Doctor : hallo my self Doctor Rehana qureshi. (apna hath aagey badhate hue)

Main : ji kya

Doctor : maafi chahti hun main bhul gai thi aapko angrezi nahi aati mera naam doctor rehana hai or aap.

Main : (hath milate hue) Neer ali.

Doctor : (kursi ki taraf ishara karte hue) baithiye janab.

Main : (bina kuch bole kursi par baith te hue) aap mera ilaaj karengi?

Doctor : (mera chehra pakadkar mere sir ka zakham dekhte hue) Hhhmmm hanji main hi karungi lekin pehle aapke zakham ka ilaaj kar doo khun nikal raha hai (muskurate hue)

Fir Doctor rehana ne mere jakham par patti bandhi or main bas baitha usko dekhta raha wo mujhe dekhkar lagatar muskura rahi thi or main uski badi-badi neeli aankho me dekh raha tha ek ajeeb si qashish thi uske chehre me main bas uske chehre ko hi laga tar dekhe jaa raha tha. fir usne meri baaju pakadi or ek injection sa laga diya jo mujhe laga shayad mere sir ke dard ke liye hoga lekin injection ke lagate hi mujh par ek ajeeb sa nasha chhane laga or meri aankho ke aagey andhera chhane laga mujhe bahut tez neend aane lagi jaise main kai raato se soya hi nahi hun. uske baad meri aankhon ke samne andhera chha gaye or mujhe jab hosh aaya to main ek bed par leta hua tha mere pass mera hath pakadkar nazi baithi hui thi or rehana or khan mere samne khade muskura rahe the.

Main : main yahan kaise aaya main to kursi par baitha tha na.

Khan : maafi Neer ji maafi aap sach keh rahe the lie ditector test ke baad ham ko bharosa ho gaya janab (hath jodkar) lekin kya kare bhai humari bhi duty hai shaq karne ki bimari si pad gai hai achha tum ab rest karo kuch chahiye ho to doctor rehana ko bol dena thik hai.

Fir khan tez kadmo ke sath kamre se bahar nikal gaya or hum sab usko dekhte rahe. fir maine bistar se khade hone ki koshish ki lekin mere hath pair jawab de rahe the jaise unme koi jaan hi naa ho main chah kar bhi uth nahi pa raha tha isliye maine sabse ek ke bad ek swaal puchhne shuru kar diye.

Main : Lie ditector test ho bhi gaye or mujhe pata bhi nahi chala. or ab main kaha hun or yahan aaya kaise?

Rehana : aapko hamaare log yahan laye hain aap ghabrayiye nahi aap ek dam mehfoos hai (muskurate hue)

Main : kya ab main ghar jaa sakta hun (bistar se uth te hue)

Rehana : arre lete rahiye abhi dawa ka asar hai to kuch der body me kamjori rahegi ho sakta hai chakkar aaye lekin thodi der me thik ho jaoge to aap ghar chale jana.

Main : (nazi ka hath pakadte hue) tum thik ho

Nazi : (muskurakar haa me sir hilate hue) Hhhmmm

Main: hum kitni der se yahan hai

Nazi : subah se

Main : ab waqt kya hua hai

Nazi : sham hone wali hai

Main : kya main itni der soya raha.

Rehana : baate baad me kar lena pehle kuch kha lo (muskurate hue) bataao kya khaoge

Main : (nazi ki taraf dekhte hue) tumne khana khaya

Nazi : nahi tumhare sath khaungi.

Rehana : aap baate karo main aapke liye kuch khane ko bhejti hun

Fir rehana chali gai or main usko jate hue dekhta tha tabhi nazi ko jane kya hua wo apni jagah se khadi hui or bed par mere upar aake let gai or mujhe gale se laga liya.

Main : nazi kya hua

Nazi : (na me sir hilate hue) kuch nahi bas tumko gale lagane ka dil kar raha tha so laga liya.

Main : wo to thik hai lekin wo doctorni aa gai to.

Nazi : mmmm bas thodi der fir sahi hoke baith jaungi.

Main : nazi ek pappi do naa

Nazi : (meri chaatee par thappad marte hue) khada hua nahi jaa raha fir bhi sudharte nahi badmash.

Main: (hansate hue) loh yaar ab tumse nahi to kya doctorni se pappi mangu.

Nazi : (mera gala dabate hue) maangkar to dikhao kisi or se pappi.... tumhara gala nahi daba dungi bade aaye doctor se pappi mangne wale (muskurate hue)

Main: to fir pappi do na

Nazi : Mmmmm thik hai lekin sirf ek.

Main : haa thik hai ek hi de do baaki ghar jake le lunga. (muskurate hue)

Nazi : tum sudhar nahi sakte naa (hansate hue)

Main : (na me sir hilate hue or muskurate hue) uuuhhhuuu

 
अपडेट-28

तभी गेट खट-खटाने की आवाज़ आई तो नाज़ी जल्दी से अपनी जगह पर बैठ गई. रेहाना एक नर्स के साथ अंदर आई नर्स के हाथ मे एक बड़ी सी ट्रे थी जिसमे शायद वो हमारे लिए खाना लाई थी. नाज़ी ने खड़ी होके नर्स से प्लेट पकड़ ली ऑर फिर नर्स ऑर रेहाना ने मिलकर मुझे बिस्तर पर बिठा दिया फिर एक कटोरे मे रेहाना मुझे खिचड़ी खिलाने लगी जो शायद नाज़ी को अच्छा नही लग रहा था इसलिए वो अजीब से मुँह बनाके कभी रेहाना को कभी मुझे घूर-घूर के देख रही थी.

नाज़ी : डॉक्टरनी जी लाइए मैं खिला देती हूँ आप रहने दीजिए.

डॉक्टर : (मुस्कुराते हुए) ठीक है ये लो. (मुझे देखते हुए) नीर आप आराम से खाना खा लो उसके बाद आपके कुछ टेस्ट करने है नर्स यही है जब आप खाना खा लो तो बता देना फिर मैं आपके कुछ टेस्ट करूँगी ठीक है.

मैं : (खाते हुए हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

उसके बाद मैने ऑर नाज़ी ने मिलकर खाना खाया अब मैं काफ़ी बेहतर महसूस कर रहा था कमज़ोरी भी महसूस नही हो रही थी मैं अब बिना कोई सहारे के अपने पैरो पर खड़ा हुआ ऑर नर्स हम को एक ठंडे से कमरे मे ले गई जहाँ एक बड़ी सी मशीन थी ऑर उसके पास डॉक्टर रेहाना फाइल्स हाथ मे लिए ही खड़ी थी. उसने एक नज़र मुझे मुस्कुराकर देखा ऑर फिर मशीन पर लेटने का इशारा किया मैं चुप-चाप उस मशीन पर लेट गया.

डॉक्टर : नीर कोई लोहे की चीज़ तो नही तुम्हारे पास मेरा मतलब है कोई घड़ी चैन या अंगूठी पहनी है तुमने इस वक़्त.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) जी नही

डॉक्टर : अच्छा चलो अब अपनी आँखें बंद करके कुछ देर के लिए लेट जाओ

फिर मैं आराम से वहाँ लेटा रहा ऑर एक रोशनी मेरे सिर से लेके पैर तक बार-बार गुज़रती रही कुछ ही पल मे मुझे एक टीच की आवाज़ आई ऑर उसके बाद अगली आवाज़ रेहाना की थी जो मेरे कानो से टकराई.

डॉक्टर : बस हो गया नीर अब आप उठ सकते हैं.

मैं : बस इतना ही था ऑर कुछ नही.

डॉक्टर : (मुस्कुराकर ना मे सिर हिलाते ) उऊहहुउ... चलो अब आप बाहर जाके बैठो मैं ख़ान से बात करके अभी आती हूँ

उसके बाद मैं वहाँ से खड़ा हुआ ऑर नर्स मुझे ऑर नाज़ी को एक कमरे मे छोड़ गई जहाँ सामने पड़े सोफे पर हम दोनो बैठ गये ऑर डॉक्टर रेहाना का इंतज़ार करने लगे. कुछ देर बाद ही डॉक्टर रेहाना ऑर ख़ान दोनो एक साथ कमरे मे आए जिनके हाथ मे कुछ पेपर्स थे ऑर वो आपस मे किसी बात पर बहस कर रहे थे. कमरे मे आते ही मेरे सामने दोनो नॉर्मल हो गये ओर मुझे मुस्कुरकर देखने लगे.

ख़ान : चलिए जनाब आपको घर छोड़ आता हूँ.

मैं : बस इतना सा ही काम था.

ख़ान : हंजी बस इतना सा ही काम था बाकी आपका ऑर कुछ ज़रूरत होगी तो फिर आना पड़ेगा.

मैं : आ तो मैं जाउन्गा लेकिन मेरे खेत.

ख़ान : अर्रे उसकी फिकर तुम मत करो कुछ दिन के लिए नये आदमी रख लो ना यार.

मैं : साहब आदमी रखने की हैसियत होती तो मैं खुद काम क्यो करता

ख़ान : अर्रे तुम फिकर मत करो अब तुम मेरे साथ हो पैसे की फिकर मत करो तुमको जो भी चाहिए हो मुझे फोन कर देना तुम्हारा काम हो जाएगा.

उसके बाद उसने मुझे अपना कार्ड दिया जो मैने जेब मे डाल लिया फिर रेहाना ने नाज़ी को मेरे लिए कुछ दवाइयाँ भी साथ दी ऑर साथ ही कुछ हिदायतें भी दी कि किस वक़्त मुझे कौनसी दवाई देनी है.

डॉक्टर : नीर वैसे तो मैने नाज़ी को सब समझा दिया है वो तुमको वक़्त पर दवा देती रहेगी फिर भी मैं हफ्ते मे एक बार या तो तुम खुद अपने चेक-अप के लिए यहाँ आ जाओ या फिर मुझे तुम्हारे गाँव आना पड़ेगा बताओ कैसे करना पसंद करोगे.

मैं : जी मैं हर हफ्ते शहर नही आ सकता बेहतर होगा आप ही आ जाए.

डॉक्टर : (मुस्कुरकर) कोई बात नही

फिर मैं ख़ान ऑर नाज़ी उसी दरवाज़े से बाहर निकल गये जहाँ से आए थे. लेकिन हैरत की बात ये थी कि सुबह जब हम यहाँ आए थे तो बाहर बहुत से मुलाज़िम काम कर रहे थे लेकिन अब वहाँ कोई आदमी मोजूद नही था पूरा दफ़्तर खाली पड़ा था

मैं : ख़ान साहब यहाँ सुबह कुछ लोग काम कर रहे थे ना वो कहाँ गये.

ख़ान : वो यही काम करते हैं अब उनके घर जाने का वक़्त हो गया था इसलिए चले गये अंदर हमारा अपना सीक्रेट हेडक्वॉर्टर है. अंदर मेरी मर्ज़ी के बिना कोई नही जा सकता.

मैं : अच्छा ठीक है.

ऐसे ही बाते करते हुए हम बाहर निकल गये ऑर जीप मे बैठ गये ख़ान ड्राइवर की साथ वाली सीट पर आगे बैठा था जबकि मैं ओर नाज़ी फिर से पिछे ही बैठ गये नाज़ी वापिस मेरे साथ चिपक कर बैठी थी ऑर मेरे कंधे पर सिर रखा था पूरे रास्ते कोई खास बात नही हुई.

जब हम घर आए तो फ़िज़ा बाहर ही खड़ी थी जो शायद हमारा ही इंतज़ार कर रही थी जीप को देखते ही उसका चेहरा खुशी से खिल उठा ऑर जीप के रुकते ही वो तेज़ कदमो के साथ हमारी तरफ आई ऑर जीप के अंदर देखने लगी. फिर हम सब घर के अंदर चले गये जहाँ बाबा हॉल मे ही कुर्सी पर बैठे थे शायद वो भी मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

बाबा : आ गये बेटा. (ख़ान की तरफ देखते हुए हाथ जोड़कर) ख़ान साहब आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने मुझे मेरा बेटा वापिस कर दिया.

ख़ान : बाबा जी आप बुजुर्ग है शर्मिंदा ना करे हाथ जोड़कर (बाबा के हाथो को पकड़ते हुए) मैने आपसे कहा ही था कि अगर ये बे-गुनाह है तो इसे कुछ नही होगा.

फ़िज़ा : ख़ान साहब आप बैठिए मैं चाय लेके आती हूँ (नाज़ी को इशारे से बुलाते हुए)

फिर मैं बाबा ओर ख़ान वही हॉल मे ही कुर्सियो पर बैठ गये ऑर ख़ान मेरे बारे मे बाबा से पुछ्ता रहा.

ख़ान : बाबा जी मुझे आपसे अकेले मे कुछ बात करनी है.

बाबा : जी ज़रूर....(मेरी तरफ देखते हुए) बेटा जाके देखो चाय का क्या हुआ.

मैं : जी बाबा (ऑर मैं उठकर रसोई मे चला गया)

ख़ान ऑर बाबा मे क्या बात हुई मुझे नही पता लेकिन रसोई मे घुसते ही फ़िज़ा फिकर्मन्दि से मेरा मुँह पकड़कर मेरे सिर की चोट देखने लगी उसको शायद आते ही नाज़ी ने सब कुछ बता दिया था इसलिए उसके चेहरे पर भी मेरे लिए फिकर सॉफ झलक रही थी.

फ़िज़ा : ये ख़ान कितना कमीना है देखो कितनी चोट लग गई.

मैं : अर्रे तुम तो ऐसे ही घबरा जाती हो कुछ नही हुआ मैं एक दम ठीक हूँ ज़रा सी खराश है ठीक हो जाएगी.

फ़िज़ा : ऑर कही तो चोट नही लगी.

मैं : (मुस्कुराकर ना मे सिर हिलाते हुए) उऊहहुउ....

फिर हम कुछ देर ऐसे ही रसोई मे खड़े रहे ऑर नाज़ी दिन भर क्या-क्या हुआ वो सब फ़िज़ा को बताती रही मैं बस पास खड़ा दोनो की बाते सुनता रहा ऑर मुस्कुराता रहा तभी मुझे बाबा की आवाज़ आई तो मैं फॉरन बाहर चला गया जहाँ बाबा ऑर ख़ान बैठे थे.

बाबा : बेटा ख़ान साहब कह रहे हैं कि अब तुम आज़ाद हो लेकिन जब भी इनको तुम्हारी मदद की ज़रूरत होगी तो तुमको जाना पड़ेगा तुमको कोई ऐतराज़ तो नही है.

मैं : बाबा आप हुकुम कीजिए आप जो कहेंगे वही मेरी मर्ज़ी होगी.

बाबा : ठीक है बेटा.... देखिए ख़ान साहब मैने कहा था ना आपसे. (मुस्कुराकर)

ख़ान : जी जनाब आप सही थे. मैं सोच भी नही सकता था कि शेरा जैसा इंसान इतना बदल सकता है आज सच मे मुझे बेहद खुशी है कि ये एक नेक़ इंसान की जिंदगी गुज़ार रहा है.

अभी हम बाते ही कर रहे थे कि एक काले रंग की कार हमारे दरवाज़े के सामने आके रुक गई. जिससे हम सब का ध्यान बाहर की तरफ गया. ये कार तो हीना की थी जिसमे मैं उसको कार चलाना सिखाता था. तभी कार के पिछे वाला गेट खुला ऑर हीना बाहर निकली मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई ऑर वो सीधा ही अंदर चली आई. उसने आते ही अदब से सबको सलाम किया फिर बाबा से दुआ ली.

हीना : बाबा देख लो आज फिर नीर नही आए मुझे गाड़ी सिखाने के लिए. (रोने जैसा मुँह बनाके)

बाबा : अर्रे बेटी वो आज कुछ काम था इसलिए शहर जाना पड़ा नीर को.

ख़ान : ये मोहतार्मा कौन है (घूरते हुए)

बाबा : ये हमारे गाव के सरपंच की बेटी हैं जिनको नीर कार चलानी सिखाता है.

ख़ान : अच्छा ये तो बहुत नेक़ बात है. बाबा जी अब मुझे भी इजाज़त दीजिए फिर कभी मुलाक़ात होगी.

बाबा : अच्छा बेटा आते रहना.(मुस्कुराकर)

फिर ख़ान ऑर बाबा बाते करते हुए दरवाज़े तक चले गये ऑर मैं हीना के पास ही बैठा रहा इतने मे नाज़ी चाय लेके आ गई ऑर हीना को देखते ही उसका पारा चढ़ गया. लेकिन फिर भी उसने हीना को सलाम किया ऑर टेबल पर चाय रख दी.

नाज़ी : आप यहाँ कैसे हीना जी.

हीना : वो आज नीर जी हवेली नही आए तो मैने सोचा मैं ही चली जाती हूँ. यहाँ आई तो पता चला कि आप लोग भी अभी शहर से आए हो.

नाज़ी : जी अभी आए हैं ऑर बहुत थके हुए हैं.

हीना : ये सिर मे क्या हुआ नीर .

मैं : कुछ नही बस छोटी सी चोट लग गई थी (मैने हीना को कुछ भी नही बताया था अपने बारे मे इसलिए ये बात भी छुपानी पड़ी)

हीना : ख्याल रखा करो ना अपना. दिखाओ कितनी चोट लगी है.

नाज़ी : उसकी कोई ज़रूरत नही है चोट लगी थी पट्टी हो चुकी है अब क्या पट्टी खोलकर दिखाएँगे.

हीना : मेरा मतलब था कि इनका ठीक से ख़याल रखा करो.

नाज़ी :(गुस्से मे) हम ठीक से ही ख्याल रखते हैं.

हीना : हाँ वो तो मैं देख ही रही हूँ तुम कितना ख्यालो रखती हो तभी इतनी चोट लग गई है.

मैं : (दोनो को शांत करने के लिए) अर्रे तुम हर वक़्त लड़ने क्यों लग जाती हो. कुछ नही हुआ ज़रा सी खराश है बस ऑर हीना मैं अगर तुमको कल गाड़ी चलानी सिखाउ तो कोई समस्या तो नही.

हीना : जी नही कोई समस्या नही है पहले आप ठीक हो जाइए गाड़ी सीखने के लिए तो सारी उम्र पड़ी है मुझे पता होता कि आपको चोट लगी है तो मैं डॉक्टर साथ ही लेके आती. (मेरा हाथ पकड़ते हुए)

मैं : नही उसकी कोई ज़रूरत नही अब मैं एक दम ठीक हूँ (मुस्कुराते हुए)

नाज़ी को शायद हीना का इस तरह मेरा हाथ पकड़ना अच्छा नही लगा था इसलिए उसने चाय का कप हीना पर गीरा दिया.

हीना : (दर्द से कराहते हुए) ससस्स आयईयीई....

नाज़ी : ओह्ह माफ़ करना कप हाथ से फिसल गया

मैं : हीना ज़्यादा तो नही लगी (हीना के घुटने से सलवार पकड़कर झाड़ते हुए)

हीना : कोई बात नही मैं ठीक हूँ (फीकी मुस्कान के साथ)

मैं : नाज़ी ये क्या किया तुमने

नाज़ी : मैं जान-बूझकर नही किया माफ़ कर दो.

हीना : कोई बात नही.... बाथरूम कहाँ है

मैं : नाज़ी इनको बाथरूम ले जाओ ऑर सॉफ करो अच्छे से.

नाज़ी : (गुस्से से मुझे देखते हुए हीना को अंदर लेके चली गई) इस तरफ आओ

तभी बाबा भी ख़ान को रुखसत करके अंदर आ गये.

बाबा : ये हीना बेटी कहाँ गई अभी तो यही थी.

मैं : कुछ नही बाबा वो ज़रा नाज़ी के हाथ से कप फिसल गया था इसलिए हीना पर चाय गिर गई बस वही धुल्वाने लेके गई है.

बाबा : अच्छा... ये नाज़ी भी ना इसको ख्याल रखना चाहिए घर आए मेहमान पर कोई चाय गिराता है भला.

मैं : कोई बात नही बाबा उसने जान-बूझकर तो गिराई नही ऑर फिर ग़लती तो किसी से भी हो सकती है.

कुछ देर बाद हीना ऑर नाज़ी बाहर आ गई ऑर मैं हीना को देखकर हँसे बिना नही रह सका क्योंकि उसने मेरे कपड़े पहने थे जो उसको काफ़ी बड़े थे. हीना को देखकर बाबा भी हँसने लगे ऑर हीना खुद भी मुस्कुराए बिना ना रह सकी. नाज़ी गुस्से से लाल हुई पड़ी थी ऑर वो बिना कुछ बोले ही अंदर चली गई.

बाबा : अर्रे बेटी ये नीर के कपड़े क्यो पहन लिए.

हीना : बाबा वो मेरे कपड़े खराब हो गये थे तो धोने से मेरी सारी सलवार गीली हो गई थी ऑर मुझे अंदर इनके ही कपड़े नज़र आए तो मैने वही पहन लिए.

बाबा : कोई बात नही.

हीना : अच्छा बाबा मैं अब चलती हूँ (मुस्कुराते हुए)

बाबा : अच्छा बेटा....माफ़ करना वो नाज़ी मे थोड़ा बच्पना है इसलिए उसने तुम्हारे कपड़े खराब कर दिए.

हीना : कोई बात नही बाबा इसी बहाने मुझे नीर के कपड़े पहने का मोक़ा मिल गया (हँसते हुए) ऐसा लग रहा है अब्बू के कपड़े पहने हो बहुत ढीले ऑर बड़े है.

मैं : अर्रे कोई बात नही घर तक तो जाना है वैसे भी तुमने कौनसा पैदल जाना है बाहर कार मे ही तो जाना है फिकर मत करो कोई नही देखेगा. (मुस्कुराते हुए)

हीना : कैसे जाउ... आज तो लगता है पैदल ही जाना पड़ेगा.

मैं : (हैरानी से) क्यो बाहर कार है ना

हीना : सिर्फ़ कार ही है ड्राइवर नही है मुझे लगा आप आज भी कार चलानी सिख़ाओगे इसलिए ड्राइवर को मैने तब ही भेज दिया था.

बाबा : अर्रे कोई बात नही बेटी नीर तुमको गाड़ी मे घर छोड़ आएगा फिर तो ठीक है ना.

हीना : हाँ ये ठीक रहेगा. (मुस्कुराते हुए) चलो नीर फिर चलते हैं (कार की चाबी मेरी ओर बढ़ाते हुए)

मैं : (कार की चाबी पकड़कर) हाँ चलो... (मुस्कुराते हुए) बाबा मैं ज़रा हीना को घर तक छोड़कर अभी आता हूँ.

बाबा : अब बेटा जब जा ही रहे हो तो गाड़ी चलानी भी सीखा देना इसी बहाने ये भी खुश होके जाएगी.

हीना : अर्रे वाह ये तो ऑर भी अच्छा है चलो आज मैं भी नीर बनके ही गाड़ी चलाउन्गी. (हँसते हुए)

मैं : ठीक है पहले चलो तो सही.

Update-28

Tabhi gate khat-khatane ki awaz aayi to nazi jaldi se apni jagah par baith gai. Rehana ek nurse ke sath andar aayi nurse ke hath me ek badi si tray thi jisme shayad wo hamaare liye khana layi thi. nazi ne khadi hoke nurse se plate pakad lee or fir nurse or rehana ne milkar mujhe bistar par bitha diya fir ek katore me rehana mujhe khichadi khilane lagi jo shayad nazi ko achha nahi lag raha tha isliye wo ajeeb se munh banake kabhi rehana ko kabhi mujhe ghur-ghur ke dekh rahi thi.

Nazi : doctorni ji layiye main khila deti hun aap rehne dijiye.

Doctor : (muskurate hue) thik hai ye lo. (mujhe dekhte hue) Neer aap aram se khana kha lo uske baad aapke kuch test karne hai nurse yhi hai jab aap khana khaa lo to bata dena fir main aapke kuch test karungi thik hai.

Main : (khate hue haa me sir hilate hue) Hhhmmm

Uske baad maine or nazi ne milkar khana khaya ab main kaafi behtar mehsoos kar raha tha kamjori bhi mehsoos nahi ho rahi thi main ab bina koi sahare ke apne pairo par khada hua or nurse ham ko ek thande se kamre me le gai jahan ek badi si machine thi or uske pass doctor rehana files hath me liye hi khadi thi. usne ek nazar mujhe muskurakar dekha or fir machine par letne ka ishara kiya main chup-chap uss machine par let gaya.

Doctor : sikandar koi lohe ki chij to nahi tumhare pas mera matlab hai koi ghadi chain ya anguthi pehni hai tumne iss waqt.

Main : (naa me sir hilate hue) ji nahi

Doctor : achha chalo ab apni aankhen band karke kuch der ke liye let jao

Fir main araam se wahan leta raha or ek roshni mere sir se leke pair tak bar-bar guzarti rahi kuch hi pal me mujhe ek tichhh ki awaz aayi or uske baad agli awaz rehana ki thi jo mere kaano se takrayi.

Doctor : bas ho gaya Neer ab aap uth sakte hain.

Main : bas itna hi tha or kuch nahi.

Doctor : (muskurakar naa me sir hilate ) uuhhuu... chalo ab aap bahar jake baitho main khan se baat karke abhi aati hun

Uske baad main wahan se khada hua or nurse mujhe or nazi ko ek kamre me chod gai jahan samne pade sofe par hum dono baith gaye or doctor rehana ka intzaar karne lage. kuch der baad hi doctor rehana or khan dono ek sath kamre me aaye jinke hath me kuch papers the or wo apas me kisi bat par behas kar rahe the. kamre me aate hi mere samne dono normal ho gaye or mujhe muskurakar dekhne lage.

Khan : chaliye janab aapko ghar chod aata hun.

Main : bas itna sa hi kaam tha.

Khan : hanji bas itna sa hi kaam tha baki aapka or kuch jarurat hogi to fir aana padega.

Main : aa to main jaunga lekin mere khet.

Khan : arre uski fikar tum mat karo kuch din ke liye naye aadmi rakh lo naa yar.

Main : sahab aadmi rakhne ki haisiyat hoti to main khud kaam kyo karta

Khan : arre tum fikar mat karo ab tum mere sath ho paise ki fikar mat karo tumko jo bhi chahiye ho mujhe phone kar dena tumhara kaam ho jayega.

Uske baad usne mujhe apna card diya jo maine jeb me daal liya fir rehana ne nazi ko mere liye kuch dawayiyaan bhi sath di or sath hi kuch hidayaten bhi di ki kis waqt mujhe kounsi dawayi deni hai.

Doctor : Neer waise to maine nazi ko sab samjha diya hai wo tumko waqt par dawa deti rahegi fir bhi main hafte me ek baar ya to tum khud apne check-up ke liye yahan aa jao ya fir mujhe tumhare gaav aana padega bataao kaise karna pasand karoge.

Main : ji main har hafte shehar nahi aa sakta behtar hoga aap hi aa jaye.

Doctor : (muskurakar) koi baat nahi

Fir main khan or nazi usi darwaze se bahar nikal gaye jahan se aaye the. lekin hairat ki baat ye thi ki subah jab hum yahan aaye the to bahar bahut se mulazim kaam kar rahe the lekin ab wahan koi aadmi mojud nahi tha poora daftar khali pada tha

Main : khan sahab yahan subah kuch log kaam kar rahe the naa wo kaha gaye.

Khan : wo yhi kaam karte hain ab unke ghar jane ka waqt ho gaya tha isliye chale gaye andar hmara apna secret headquarter hai. Andar meri marzi ke bina koi nahi jaa sakta.

Main : achha thik hai.

Aise hi baate karte hue hum bahar nikal gaye or jeep me baith gaye khan driver ki sath wali seat par aagey baitha tha jabki main or nazi fir se pichhe hi baith gaye nazi wapis mere sath chipak kar baithi thi or mere kandhe par sir rakha tha poore raste koi khas baat nahi hui.

Jab hum ghar aaye to fiza bahar hi khadi thi jo shayad hmara hi intzaar kar rahi thi jeep ko dekhte hi uska chehra khushi se khil utha or jeep ke rukte hi wo tez kadmo ke sath hamaari taraf aayi or jeep ke andar dekhne lagi. fir hum sab ghar ke andar chale gaye jahan baba hall me hi kursi par baithe the shayad wo bhi mera hi intzaar kar rahe the.

Baba : aa gaye beta. (khan ki taraf dekhte hue hath jodkar) khan sahab aapka bahut-bahut shukriya jo aapne mujhe mera beta wapis kar diya.

Khan : baba ji aap bujurg hai sharminda na kare hath jodkar (baba ke hatho ko pakadte hue) maine aapse kaha hi tha ki agar ye be-gunah hai to isse kuch nahi hoga.

Fiza : khan sahab aap baithiye main chaye leke aati hun (nazi ko ishare se bulate hue)

Fir main baba or khan wahi hall me hi kursiyo par baith gaye or khan mere bare me baba se puchhta raha.

Khan : baba ji mujhe aapse akele me kuch baat karni hai.

Baba : ji jarur....(meri taraf dekhte hue) beta jake dekho chaye ka kya hua.

Main : ji baba (or main uthkar rasoyi me chala gaya)

Khan or baba me kya baat hui mujhe nahi pata lekin rasoyi me ghuste hi fiza fikarmandi se mera munh pakadkar mere sir ki chot dekhne lagi usko shayad aate hi nazi ne sab kuch bata diya tha isliye uske chehre par bhi mere liye fikar saaf jhalak rahi thi.

Fiza : ye khan kitna kameena hai dekho kitni chot lag gai.

Main : arre tum to aise hi ghabra jati ho kuch nahi hua main ek dam thik hun zra si kharash hai thik ho jayegi.

Fiza : or kahi to chot nahi lagi.

Main : (muskurakar naa me sir hilate hue) uuhhuu....

Fir hum kuch der aise hi rasoyi me khade rahe or nazi din bhar kya-kya hua wo sab fiza ko batati rahi main bas pass khada dono ki baate sunta raha or muskurata raha tabhi mujhe baba ki awaz aayi to main foran bahar chala gaya jahan baba or khan baithe the.

Baba : beta khan sahab keh rahe hain ki ab tum azaad ho lekin jab bhi inko tumhari madad ki jarurat hogi to tumko jana padega tumko koi aitraaz to nahi hai.

Main : baba aap hukum kijiye aap jo kahenge wahi meri marzi hogi.

Baba : thik hai beta.... dekhiye khan sahab maine kaha tha na aapse. (muskurakar)

Khan : ji janab aap sahi the. main soch bhi nahi sakta tha ki shera jaisa insaan itna badal sakta hai aaj sach me mujhe behad khushi hai ki ye ek neq insaan ki jindagi guzaar raha hai.

Abhi hum baate hi kar rahe the ki ek kaale rang ki car hamaare darwaze ke samne aake ruk gai. jisse hum sab ka dhyaan bahar ki taraf gaya. ye car to heena ki thi jisme main usko car chalani seekhata tha. tabhi Car ke pichhe wala gate khula or heena bahar nikli mujhe dekhte hi uske chehre par ek muskaan aa gai or wo seedha hi andar chali aayi. usne aate hi adab se sabko salaam kiya fir baba se dua lee.

Heena : baba dekh lo aaj fir Neer nahi aaye mujhe gaadi sikhane ke liye. (rone jaisa munh banake)

Baba : arre beti wo aaj kuch kaam tha isliye shehar jana pada Neer ko.

Khan : ye mohtarma kaun hai (Ghurte hue)

Baba : ye hamaare gaav ke sarpanch ki beti hain jinko Neer car chalani seekhata hai.

Khan : achha ye to bahut neq baat hai. baba ji ab mujhe bhi ijajat dijiye fir kabhi mulaqat hogi.

Baba : achha beta aate rehna.(muskurakar)

Fir khan or baba baate karte hue darwaze tak chale gaye or main heena ke pass hi baitha raha itne me nazi chaye leke aa gai or heena ko dekhte hi uska para chadh gaya. lekin fir bhi usne heena ko salaam kiya or table par chaye rakhdi.

Nazi : aap yahan kaise heena ji.

Heena : wo aaj Neer ji haveli nahi aaye to maine socha main hi chali jati hun. yahan aayi to pata chala ki aap log bhi abhi shehar se aaye ho.

Nazi : ji abhi aaye hain or bahut thake hue hain.

Heena : ye sir me kya hua Neer .

Main : kuch nahi bas choti si chot lag gai thi (maine heena ko kuch bhi nahi bataayaa tha apne bare me isliye ye baat bhi chhupani padi)

Heena : khyaal rakha karo naa apna. dikhao kitni chot lagi hai.

Nazi : uski koi jarurat nahi hai chot lagi thi patti ho chuki hai ab kya patti kholkar dikhayenge.

Heena : mera matlab tha ki inka thik se khayaal rakha karo.

Nazi :(gusse me) hum thik se hi khyaal rakhte hain.

Heena : haa wo to main dekh hi rahi hunn tum kitna khyaalo rakhti ho tabhi itni chot lag gai hai.

Main : (dono ko shant karne ke liye) arre tum har waqt ladne kyo lag jati ho. kuch nahi hua zra si kharash hai bas or heena main agar tumko kal gaadi chalani sikhaau to koi samasya to nahi.

Heena : ji nahi koi samasya nahi hai pehle aap thik ho jayiye gaadi seekhne ke liye to saari umer padi hai mujhe pata hota ki aapko chot lagi hai to main doctor sath hi leke aati. (mera hath pakadte hue)

Main : nahi uski koi jarurat nahi ab main ek dam thik hun (muskurate hue)

Nazi ko shayad heena ka iss tarah mera hath pakadna achha nahi laga tha isliye usne chaye ka cup heena par geera diya.

Heena : (dard se karahate hue) ssss aayyiiiii....

Nazi : ohh maaf karna cup hath se fisal gaya

Main : heena jyaadaa to nahi lagi (heena ke ghutne se salwar pakadkar jhadte hue)

Heena : koi baat nahi main thik hun (fiki muskaan ke sath)

Main : nazi ye kya kiya tumne

Nazi : main jan-bujhkar nahi kiya maaf kar do.

Heena : koi baat nahi.... bathroom kaha hai

Main : nazi inko bathrrom le jao or saaf karo achhe se.

Nazi : (gusse se mujhe dekhte hue heena ko andar leke chali gai) iss taraf aao

Tabhi baba bhi khan ko rukhsat karke andar aa gaye.

Baba : ye heena beti kaha gai abhi to yhi thi.

Main : kuch nahi baba wo zra nazi ke hath se cup fisal gaya tha isliye heena par chaye gir gai bas wahi dhulwane leke gai hai.

Baba : achha... ye naazi bhi na isko khyaal rakhna chahiye ghar aaye mehman par koi chaye girata hai bhala.

Main : koi baat nahi baba usne jaan-bujhkar to girayi nahi or fir galati to kisi se bhi ho sakti hai.

kuch der baad heena or nazi bahar aa gai or main heena ko dekhkar hasse bina nahi reh saka kyonki usne mere kapde pehne the jo usko kaafi badi thi. Heena ko dekhkar baba bhi hasne lage or heena khud bhi muskuraye bina naa reh saki. nazi gusse se laal hui padi thi or wo bina kuch bole hi andar chali gai.

Baba : arre beti ye Neer ke kapde kyo pehan liye.

Heena : baba wo mere kapde kharab ho gaye the to dhone se meri saari salwar geeli ho gai thi or mujhe andar inke hi kapde nazar aaye to maine wahi pehan liye.

Baba : koi bat nahi.

Heena : achha baba main ab chalti hun (muskurate hue)

Baba : achha beta....maaf karna wo nazi me thoda bachpana hai isliye usne tumhare kapde kharab kar diye.

Heena : koi baat nahi baba isi bahane mujhe Neer ke kapde pehane ka moqa mil gaya (hansate hue) aisa lag raha hai abbu ke kapde pehne ho bahut dheele or bade hai.

Main : arre koi baat nahi ghar tak to jana hai waise bhi tumne kounsa paidal jana hai bahar car me hi to jana hai fikar mat karo koi nahi dekhega. (muskurate hue)

Heena : kaise jau... aaj to lagta hai paidal hi jana padega.

Main : (hairani se) kyo bahar car hai naa

Heena : sirf car hi hai driver nahi hai mujhe laga aap aaj bhi car chalani sikhaoge isliye driver ko maine tab hi bhej diya tha.

Baba : Arre koi baat nahi beti Neer tumko gaadi me ghar chod aayega fir to thik hai naa.

Heena : haa ye thik rahega. (muskurate hue) chalo Neer fir chalte hain (car ki chabi meri or badhate hue)

Main : (car ki chaabi pakadkar) haa chalo... (muskurate hue) baba main zra heena ko ghar tak chodkar abhi aata hun.

Baba : ab beta jab jaa hi rahe ho to gaadi chalani bhi seekha dena isi bahane ye bhi khush hoke jayegi.

Heena : arre waah ye to or bhi achha hai chalo aaj main bhi Neer banke hi gaadi chalaungi. (hansate hue)

Main : thik hai pehle chalo to sahi.

 
अपडेट-29

घर से निकलते हुए मैने पलटकर देखा तो नाज़ी मुझे रसोई मे खड़ी गुस्से से देख रही थी. जिसके गुस्से का मेरे पास कोई जवाब नही था इसलिए मैने वापिस गर्दन सीधी की ऑर हीना के साथ उसकी कार की तरफ चल पड़ा. आज जाने क्यो इस तरह नाज़ी का बर्ताव मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था क्योंकि वो एक खुश-मिज़ाज़ ऑर तमीज़दार लड़की थी लेकिन आज जाने उसको क्या हो गया था जो वो हीना के साथ ऐसे पेश आ रही थी. अभी मैं अपनी इन्ही सोचो मे गुम था कि मुझे हीना की आवाज़ आई...

हीना : जनाब अब सारी रात कार के सामने ही खड़ा रहना है या चलना भी है.

मैं : (हीना की तरफ चोंक कर देखते हुए) क्या..... हाँ चलो बैठो.

हीना : आप भी ना...(मुस्कुराते हुए)

मैं : मैं भी क्या....

हीना : कुछ नही जल्दी बैठो.

मैं : अच्छा

उसके बाद मैं ओर हीना कार मे बैठे ऑर मैने कार स्टार्ट कर दी ऑर कुछ देर बिना कुछ बोले कार चलता रहा थोड़ी देर मे ही हम हवेली के पास आ गये.

हीना : अर्रे हवेली क्यो ले आए मुझे (रोने जैसी शक़ल बनाके)

मैं : घर नही जाना आपने.

हीना : बाबा ने कुछ ऑर भी कहा था ना आप भूल गये क्या (मुस्कुराते हुए)

मैं : ऑर क्या कहा था बाबा ने यही कहा था कि हीना को घर छोड़ आओ बस...

हीना : (अपने सिर पर हाथ रखते हुए) ओुंओ... बाबा ने ये भी तो कहा था कि कार चलानी भी सीखा देना मुझे... भूल गये क्या.

मैं : अर्रे हाँ मैं तो भूल ही गया था.

हीना : अब चलो गाड़ी घूमाओ मैदान की तरफ अभी इतनी जल्दी नही मैने घर जाना .

मैं : अच्छा.... (मुस्कुराते हुए)

उसके बाद मैने कार को मोड़ लिया ऑर वही से ही हम मैदान की तरफ निकल गये हीना मुझे बार-बार देखकर आज मुस्कुरा रही थी ऑर काफ़ी खुश लग रही थी. मैने कार चलाते हुए देखा कि वो बार-बार मेरी पहनी हुई कमीज़ को देख रही थी...

मैं : एक बात बोलू हीना जी अगर आपको बुरा ना लगे तो...

हीना : आज तक आपकी कोई बात का बुरा माना है जो अब मानूँगी बोलो...(मुस्कुराते हुए)

मैं : आप पर मेरे कपड़े बहुत अच्छे लग रहे हैं...(मुस्कुराते हुए)

हीना : अगर आपको बुरा ना लगे तो ये कपड़े मैं रख लूँ.

मैं : क्यो नही ज़रूर अगर आपको पसंद है तो.... लेकिन आप मेरे कपड़ो का करेंगी क्या...

हीना : शुक्रिया... पसंद भी आए हैं ऑर....

मैं : ऑर क्या...

हीना : इन कपड़ो मे आपकी महक भी है जो मुझे बहुत पसंद है (नज़रे झुका कर मुस्कुराते हुए)

मैं : लेकिन आप इनका करेंगी क्या ये तो मर्दाना कपड़े है....

हीना : आप पास होते हो तो खुद को बहुत महफूज़ महसूस करती हूँ... ये कपड़े जब मेरे पास होंगे तो ऐसा लगेगा आप मेरे पास हो.

मैं : अच्छा जैसा आपको अच्छा लगे (मुस्कुराते हुए)

हीना : नीर दवाई तो टाइम पर ले रहे हो ना जो हमने शहर से ली थी.

मैं: कौनसी दवाई (कुछ सोचते हुए) अर्रे हाँ याद आया

हीना : शूकर है याद तो आ गया (मुस्कुराते हुए) अब बताओ दवाई ली या नही.

मैं : (उदास मुँह बनाके ना मे सिर हिलाते हुए) भूल गया.

हीना : ऊओुंओ.... क्या करूँ मैं तुम्हारा (रोने जैसा मुँह बनाके)

मैं : कुछ नही करना क्या है (मुस्कुराते हुए) अब याद नही रहता तो क्या करू मैं भी.

हीना : अच्छा तुम एक काम कर सकते हो

मैं : क्या

हीना : कल से अपनी दवाइयाँ मुझे लाके देदो मैं आपको रोज़ दवाई दे जाया करूँगी

मैं: लेकिन अगर आप रोज़ घर आएँगी तो शायद नाज़ी ऑर फ़िज़ा को अच्छा नही लगेगा.

हीना : (कुछ सोचते हुए) हम्म..ये तो है... ऐसा करूँगी सुबह आप खेत मे अकेले होते हो ना दिन मे आपको खेत मे आके आपकी दवाई दे जाया करूँगी ऑर शाम को कार मे दे दिया करूँगी फिर तो ठीक है....वैसे भी हम मिलते तो रोज़ ही है. (मुस्कुराते हुए)

मैं : हाँ ये ठीक रहेगा.

ऐसे ही बाते करते हुए हम कुछ ही देर मे हम उसी कच्चे रास्ते पर पहुँच गये जो रास्ता मैदान की तरफ जाता था. हीना भी उस रास्ते को देखकर एक दम खामोश हो गई शायद उसको उस दिन वाली बात याद आ गई थी जब वो मेरी गोद मे बैठी थी ऑर उसके उच्छलने से मेरा लंड उसकी गान्ड मे ज़ोर से चुभा था. मैने एक नज़र हीना की तरफ देखा ऑर फिर गाड़ी उसी कच्चे रास्ते पर बढ़ा दी कुछ देर उच्छलने के बाद हम मैदान मे आ गये इसलिए मैने कार रोक दी.

मैं : हीना जी मैदान आ गया अब आप मेरी सीट पर बैठ जाएँ ऑर कार चलानी शुरू करें जैसा मैने आपको उस दिन सिखाया था.

हीना : उस दिन जैसे गाड़ी नही सीखा सकते.

मैं : उस दिन जैसे कैसे मैं समझा नही.

हीना बिना कुछ बोले मेरे दोनो हाथ स्टारिंग व्हील से हटा कर धीरे से सरक कर मेरे पास आई ऑर थोड़ी सी कार के अंदर ही खड़ी होके मेरी एक टाँग पर बैठ गई ऑर फिर अपनी गान्ड को थोड़ा सा खिसका कर मेरी दोनो टाँगो पर बैठ गई.

हीना : ऐसे सीखने को कह रही थी...

मैं : अच्छा ठीक है अब आप चलाओ.

हीना के मेरी गोद मे बैठ ते ही उसके नाज़ुक बदन का वही गरम अहसास मुझे अपनी टाँगो पर होने लगा. मैने अपने दोनो हाथ उसकी कमर से निकाले ऑर वापिस स्टारिंग व्हील पर उसके हाथो के उपर रखे दिए उसकी नरम ऑर नाज़ुक टांगे मेरी टाँगो के साथ जुड़ी हुई थी जो मुझे बेहद मज़ा दे रही थी. कुछ देर ऐसे ही कार चलाने के बाद उसने खुद ही मेरे हाथ स्टारिंग व्हील से हटाकर अपनी जाँघो पर रख दिए जिसे मैने फॉरन थाम लिया मेरे हाथो के छुने से शायद उसको झटका सा लगा जिससे वो थोड़ा सा हिल गई लेकिन बिना कुछ बोले वो कार चलाती रही अब मुझसे भी सबर नही हो रहा था इसलिए मैने धीरे-धीरे उसकी जाँघो पर हाथ फेरना शुरू कर दिया जिससे उसने अपनी टांगे चौड़ी कर ली. मेरा चेहरा उसकी गर्दन पर था जिससे चूमने का मुझे बार-बार मन कर रहा था इसलिए मैने अपने चेहरे को हल्का सा नीचे की तरफ झुकाया ऑर अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए उसको भी शायद मेरे होंठों का अहसास अपनी गर्दन पर हो गया था लेकिन वो बिना कुछ बोले गाड़ी चलाती रही नीचे से मेरे लंड ने भी जागना शुरू कर दिया था जो उसके टांगे फैला लेने की वजह से सीधा उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था वो भी शायद मेरे लंड को नीचे से महसूस कर रही थी इसलिए बार-बार अपनी गान्ड को हिला कर उसको अपनी चूत के उपर अड्जस्ट करने की कोशिश कर रही थी. तमाम अमल मे हम दोनो ही खामोश थे मैं लगातार उसकी जाँघो पर हाथ फेर रहा था ऑर वो बिना कुछ बोले गाड़ी चला रही थी तभी उसकी धीमी सी आवाज़ मेरे कानो से टकराई....

हीना : एक हाथ से आप भी स्टारिंग पकड़ लो मुझसे अकेले संभाला नही जा रहा

मैं : (बिना कुछ बोले एक हाथ उसकी जाँघ (रान) से उठाकर स्टारिंग पकड़ते हुए) हमम्म...

अब उसने अपना दायां हाथ नीचे कर लिया ऑर मेरा बायां हाथ जो उसकी जाँघ (रान) पर था उस पर रख दिया. मुझे लगा शायद उसको मेरा छुना बुरा लगा है इसलिए उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा है इसलिए मैने अपना हाथ वही उसकी जाँघ पर ही रोक दिया ऑर बिना कोई हरकत किए वही रखा रहने दिया जबकि बाएँ हाथ से मैं गाड़ी चला रहा था. लेकिन मैं ग़लत था जब मैने हाथ रोका तो उसने खुद ही मेरे हाथ को पकड़कर अपनी जाँघ पर उपर-नीचे फेरना शुरू कर दिया ऑर हाथ को उपर की तरफ ले जाने लगी जिससे मेरा हाथ उसके पेट पर आ गया मैने अपना हाथ उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया तभी मुझे उसकी नाभि का छेद महसूस हुआ जिस पर मैने अपनी उंगली रोक दी ऑर नाभि के चारो तरफ गोल-गोल घुमाने लगा जिससे उसकी साँस एक दम तेज़ हो गई ऑर उसने अपनी गर्दन उपर की तरफ करके अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया. अब उसने खुद ही बिना कुछ बोले अपना दूसरा हाथ भी स्टारिंग से हटा लिया ऑर अपनी कमीज़ थोड़ी सी उपर उठाके मेरा हाथ पकड़कर अपनी कमीज़ मे डाल दिया. उसके पेट का गरम ऑर नाज़ुक लंज़ मेरे हाथो को मिलते ही मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ उसका पेट बेहद नाज़ुक ऑर किसी मखमल की तरह मुलायम था. अब मैं सीधा उसके पेट पर हाथ फेर रहा था ऑर वो आँखें बंद किए मेरे कंधे पर सिर रखे बैठी थी.

धीरे-धीरे मेरा हाथ उपर की तरफ जाने लगा जिससे उसकी साँस ऑर तेज़ चलने लगी अब उसका गाड़ी चलाने पर कोई ध्यान नही था इसलिए मैने गाड़ी को रोक दिया ऑर बंद कर दिया लेकिन वो अब भी वैसे ही बैठी रही. मैने अपना दूसरा हाथ भी स्टारिंग से हटा लिया ऑर उसकी जाँघो (जाँघो) पर रख दिया ऑर हाथ उपर से नीचे फेरने लगा. अब जो हाथ मेरा उसकी कमीज़ के अंदर था उसको मैने उपर की जानिब बढ़ाना शुरू किया ऑर थोड़ा सा उपर जाके मेरे हाथ उसकी ब्रा तक पहुँच गया जिसके उपर से ही मैने उसके दाएँ मम्मे को थाम लिया ऑर धीरे से दबा दिया जिससे उसको एक झटका सा लगा ऑर उसके मुँह से एक तेज़ सस्सस्स आअहह निकल गई. शायद मेरा हाथ उसको अपने मम्मों पर अच्छा लगा था उसके मम्मे काफ़ी बड़े थे जो मेरे एक हाथ मे पूरे नही आ रहे थे लेकिन फिर भी मम्मा जितना हाथ मे आ रहा था मैं उसको लगातार दबाए जा रहा था. तभी मैने अपना दूसरा हाथ उसकी जाँघो के दरम्यान चूत के उपर रख दिया उसको मेरे इस हमले की उम्मीद नही थी इसलिए उसने अपने दोनो हाथो से मेरे हाथ को पकड़ लिया ऑर अपनी दोनो टांगे बंद कर ली. मैने अपने होंठों से धीरे-धीरे उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया ऑर उसकी गर्दन से बढ़ते हुए मेरे होंठ उसके गालों पर आ गये ऑर अब मैं वहाँ धीरे-धीरे चूम रहा था वो अपनी आँखें बंद किए मेरी गोद मे बैठी थी मेरे कंधे पर सिर रख कर ऑर मेरे हाथ उसके बदन पर अपना कमाल दिखा रहे थे.

Update-29

Ghar se nikalte hue maine palatkar dekha to nazi mujhe rasoyi me khadi gusse se dekh rahi thi. jiske gusse ka mere pass koi jawab nahi tha isliye maine wapis gardan seedhi ki or heena ke sath uski Car ki taraf chal pada. Aaj jane kyo iss tarah nazi ka bartaav mujhe kuch ajeeb sa lag raha tha kyonki wo ek khush-mizaz or tameezdar ladki thi lekin aaj jane usko kya ho gaya tha jo wo heena ke sath aise pesh aa rahi thi. Abhi main apni inhi socho me gumm tha ki mujhe heena ki awaz aayi...

Heena : janab ab saari raat car ke samne hi khada rehna hai ya chalna bhi hai.

Main : (heena ki taraf chonk kar dekhte hue) kyaa..... haa chalo baitho.

Heena : Aap bhi naa...(muskurate hue)

Main : main bhi kya....

Heena : kuch nahi jaldi baitho.

Main : Achha

Uske baad main or heena car me baithe or maine car start kar di or kuch der bina kuch bole car chalata raha thodi der me hi hum haveli ke pass aa gaye.

Heena : Arre haveli kyo le aaye mujhe (rone jaisi shaqal banake)

Main : ghar nahi jana aapne.

Heena : baba ne kuch or bhi kaha tha naa aap bhul gaye kya (muskurate hue)

Main : Or kya kaha tha baba ne yhi kaha tha ki heena ko ghar chod aao Bas...

Heena : (apne sir par hath rakhte hue) Ohhuno... baba ne ye bhi to kaha tha ki car chalani bhi sikha dena mujhe... bhul gaye kya.

Main : arre haa main to bhul hi gaya tha.

Heena : Ab chalo gaadi ghumao maidaan ki taraf abhi itni jaldi nahi maine ghar jana .

Main : Achha.... (muskurate hue)

Uske baad maine car ko mod liya or wahi se hi hum maidaan ki taraf nikal gaye Heena mujhe bar-bar dekhkar aaj muskura rahi thi or kaafi khush lag rahi thi. maine car chalate hue dekha ki wo bar-bar meri pehni hui kameez ko dekh rahi thi...

Main : ek baat bolu heena ji agar aapko bura na lage to...

Heena : aaj tak aapki koi baat ka bura mana hai jo ab manungi bolo...(muskurate hue)

Main : aap par mere kapde bahut achhe lag rahe hain...(muskurate hue)

Heena : agar aapko bura na lage to ye kapde main rakh loo.

Main : kyo nahi jarur agar aapko pasand hai to.... lekin aap mere kapdo ka karengi kya...

Heena : shukriya... pasand bhi aaye hain or....

Main : Or kya...

Heena : inn kapdo me aapki mehak bhi hai jo mujhe bahut pasand hai (nazre jhuka kar muskurate hue)

Main : Lekin aap inka karengi kya ye to mardana kapde hai....

Heena : aap pass hote ho to khud ko bahut mehfooz mehsoos karti hun... ye kapde jab mere pass honge to aisa lagega aap mere pass ho.

Main : achha jaisa aapko achha lage (muskurate hue)

Heena : Neer dawayi to time par le rahe ho naa jo hamane shehar se lee thi.

Main: kounsi dawayi (kuch sochte hue) Arre haa yaad aaya

Heena : shukar hai yaad to aa gaya (muskurate hue) ab bataao dawayi lee ya nahi.

Main : (Udaas munh banake naa me sir hilate hue) Bhul gaya.

Heena : ooohhhuno.... kya karu main tumhara (rone jaisa munh banake)

Main : kuch nahi karna kya hai (muskurate hue) ab yaad nahi rehta to kya karu main bhi.

Heena : achha tum ek kaam kar sakte ho

Main : kya

Heena : kal se apni dawayiyaan mujhe lake dedo main aapko roz dawayi de jaya karungi

Main: lekin agar aap roz ghar aayengi to shayad nazi or fiza ko achha nahi lagega.

Heena : (kuch sochte hue) Hhhmm..ye to hai... aisa karungi subah aap khet me akele hote ho naa din me apko khet me aake aapki dawayi de jaya karungi or shaam ko car me de diya karungi fir to thik hai....waise bhi hum milte to roz hi hai. (muskurate hue)

Main : haa ye thik rahega.

Aise hi baate karte hue hum kuch hi der me hum usi kache raste par pohonch gaye jo rasta maidaan ki taraf jata tha. Heena bhi uss raste ko dekhkar ek dam khamosh ho gai shayad usko uss din wali baat yaad aa gai thi jab wo meri god me baithi thi or uske uchhalne se mera lund uski gaanD me jor se chubha tha. Maine ek nazar heena ki taraf dekha or fir gaadi usi kache raste par badha di kuch der uchhalne ke baad hum maidaan me aa gaye isliye maine car rok di.

Main : heena ji maidaan aa gaya ab aap meri seat par baith jaye or car chalani shuru kare jaisa maine aapko uss din sikhaya tha.

Heena : Uss din jaise gaadi nahi seekha sakte.

Main : uss din jaise kaise main samjha nahi.

Heena bina kuch bole mere dono hath stairing wheel se hata kar dheere se sarak kar mere pass aayi or thodi si car ke andar hi khadi hoke meri ek taang par baith gai or fir apni gaanD ko thoda sa khiskakar meri dono taango par baith gai.

Heena : Aise seekhane ko keh rahi thi...

Main : achha thik hai ab aap chalao.

Heena ke meri god me baith te hi uske nazuk badan ka wahi garam ahsaas mujhe apni taango par hone laga. maine apne dono hath uski kamar se nikale or wapis stairing wheel par uske hatho ke upar rakhe diye uski naram or nazuk taange meri taango ke sath judi hui thi jo mujhe behad maza de rahi thi. kuch der aise hi car chalane ke baad usne khud hi mere hath stairing wheel se hatakar apni jaangho par rakh diye jise maine foran tham liya mere hatho ke chhune se shayad usko jhataka sa laga jisse wo thoda sa hil gai lekin bina kuch bole wo car chalati rahi ab mujhse bhi sabar nahi ho raha tha isliye maine dheere-dheere uski jaangho par hath ferna shuru kar diya jisse usne apni taangey choudi kar lee. mera chahre uski gardan par tha jisse chumne ka mujhe bar-bar mann kar raha tha isliye maine apne chehre ko halka sa niche ki taraf jhukaya or apne honth uski gardan par rakh diye usko bhi shayad mere honthon ka ahsas apni gardan par ho gaya tha lekin wo bina kuch bole gaadi chalati rahi niche se mere lund ne bhi jagna shuru kar diya tha jo uski taangey faila lene ki wajah se seedha uski chut par dastak de raha tha wo bhi shayad mere lund ko niche se mehsoos kar rahi thi isliye bar-bar apni gaanD ko hila kar usko apni chut ke upar adjust karne ki koshish kar rahi thi. Tmam amal me hum dono hi khamosh the main lagatar uski jaangho par hath fer raha tha or wo bina kuch bole gaadi chala rahi thi tabhi uski dheemi si awaz mere kaano se takrayi....

Heena : ek hath se aap bhi stairing pakad lo mujhse akele sambhala nahi jaa raha

Main : (bina kuch bole ek hath uski jangh (raan) se uthakar stairing pakadte hue) Hhhmmm...

Ab usne apna dayaan hath niche kar liya or mera bayaan hath jo uski jangh (raan) par tha uss par rakh diya. mujhe laga shayad usko mera chhuna bura laga hai isliye usne apna hath mere hath par rakha hai isliye maine apna hath wahi uski jangh par hi rok diya or bina koi harkat kiye wahi rakha rehne diya jabki baayen hath se main gaadi chala raha tha. Lekin main galat tha jab maine hath roka to usne khud hi mere hath ko pakadkar apni jangh par upar-niche ferna shuru kar diya or hath ko upar ki taraf le jane lagi jisse mera hath uske pet par aa gaya maine apna hath uske pet par ferna shuru kar diya tabhi mujhe uski nabhi ki ched mehsoos hui jis par maine apni ungali rok di or nabhi ke charo taraf gol-gol ghamane laga jisse uski saans ek dam tez ho gai or usne apni garden upar ki taraf karke apna sir mere kandhe par rakh diya. ab usne khud hi bina kuch bole apna dusra hath bhi stairing se hata liya or apni kameez thodi si upar uthake mera hath pakadkar apni kameez me daal diya. uske pet ka garam or nazuk lamz mere hatho ko milte hi mujhe bahut achha mehsoos hua uske pet behad nazuk or kisi makhmal ki tarah mulayam tha. ab main seedha uske pet par hath fer raha tha or wo aankhen band kiye mere kandhe par sir rakhe baithi thi.

Dheere-dheere mera hath upar ki taraf jane laga jisse uski saans or tez chalne lagi ab uska gaadi chalane par koi dhyaan nahi tha isliye maine gaadi ko rok diya or band kar diya lekin wo ab bhi waise hi baithi rahi. Maine apna dusra hath bhi stairing se hata liya or uski jangho (jaangho) par rakh diya or hath upar se niche ferne laga. ab jo hath mera uski kameez ke andar tha usko maine upar ki janib badhana shuru kiya or thoda sa upar jake mere hath uski Bra tak pohonch gaye jiske upar se hi maine uske daayen mamme ko tham liya or dheere se daba diya jisse usko ek jhatka sa laga or uske munh se ek tez sssss aaahhhh nikal gai. shayad usko mere hath usko apne mummo par achha laga tha uske mamme kaafi bade the jo mere ek hath me poore nahi aa rahe the lekin fir bhi mumma jitna hath me aa raha tha main usko lagatar dabaye jaa raha tha. tabhi maine apna dusra hath uski jangho ke darmyaan chut ke upar rakh diya usko mere iss hamle ki ummeed nahi thi isliye usne apne dono hatho se mere hath ko pakad liya or apni dono taangey band kar lee. Maine apne honthon se dheere-dheere uski gardan ko chumna shuru kar diya or uski gardan se badhte hue mere honth uski gaal par aa gaye or ab main wahan dheere-dheere chum raha tha wo apni aankhen band kiye meri god me baithi thi mere kandhe par sir rakh kar or mere hath uske badan par apna kamaal dikha rahe the.

 
अपडेट-30

कुछ देर बाद मैने धीरे से अपना हाथ उसकी सलवार के अंदर डालने की कोशिश की लेकिन अज़रबंद बँधा होने की वजह से हाथ अंदर नही जा पा रहा था इसलिए उसने खुद ही अपना पेट अंदर की तरफ सिकोड लिया ताकि हाथ अंदर जाने की जगह मिल सके अब मेरा हाथ धीरे-धीरे अंदर की तरफ जाने लगा ऑर मेरी उंगलियों पर अब उसकी चूत के बाल टकराने लगे. अब मैने अपना हाथ थोड़ा ऑर आगे को सरकाया तो मेरा हाथ उसकी नर्म ऑर नाज़ुक चूत तक पहुँच गया जिससे उसको एक झटका सा लगा ऑर उसके मुँह से सिर्फ़ सस्सस्स हमम्म्मम ही निकल पाया. मेरा अब एक हाथ उसके ब्रा के उपर से मम्मों को दबा रहा रहा ऑर दूसरा हाथ उसकी सलवार मे घुसा उसकी चूत के साथ छेड़-छाड़ कर रहा था. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी जिससे मेरे पूरे हाथ की उंगलियाँ गीली हो चुकी थी. लेकिन मैं फिर भी उसकी चूत के दाने पर अपनी उंगली से कमाल दिखाता रहा. कुछ ही देर मे उसकी टांगे काँपने लगी उसने अचानक मेरी तरफ अपना चेहरा किया ऑर मेरे गालो को हल्के-हल्के चूमना शुरू कर दिया ऑर फिर अचानक जैसे उसकी साँस रुक गई हो उसने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर ली ऑर अपनी गान्ड को उपर की तरफ उठा दिया मेरा पूरा हाथ उसकी चूत के निकलने वाले पानी से भीग चुका था अब कुछ देर गान्ड को हवा मे उठाए झटके खाने के बाद एक दम से मेरी गोद मे वापिस गिर गई ऑर तेज़-तेज़ साँस लेने लगी मैने भी अपना हाथ उसकी चूत पर रोक लिया लेकिन दूसरे हाथ से हल्के-हल्के उसके मम्मों को दबाता रहा. अब वो आँखें बंद किए मेरे कंधे पर अपना सिर रखे बैठी ऑर मुस्कुरा रही थी शायद वो फारिग हो गई थी. मैने अब अपना बायाँ हाथ उसकी सलवार मे से दायां हाथ उसकी कमीज़ मे से निकाल लिया ऑर उसे उसकी कमर से पकड़कर थोड़ा उपर उठा दिया ताकि मैं उसकी सलवार खिचकर थोड़ा नीचे कर सकूँ. जैसे ही मैने उसकी सलवार को थोड़ा नीचे की तरफ खिचा उसने मेरे दोनो हाथो पर अपने हाथ रख दिए ऑर मेरी आँखो मे देखने लगी उसकी आँखें उस वक़्त नशे ऑर वासना से एक दम नशीली हुई पड़ी थी. अचानक उसने अपना दाया हाथ उपर किया ऑर मेरे सिर के पीछे ले जाकर मेरे चेहरे को अपने चेहरे पर झुका दिया ऑर मेरे होंठों पर उसने अपने होंठ रख दिए उसके होंठ एक दम गुलाब की पंखुड़ियो के जैसे नाज़ुक ऑर रस भरे थे. मैने फॉरन अपना थोड़ा सा मुँह खोलकर उसके दोनो नाज़ुक होंठों को अपने मुँह मे क़ैद कर लिया ऑर जबरदस्त तरीके से चूसने लगा कुछ देर तो वो अपना मुँह सख्ती से बंद करके बैठी रही फिर उसने भी अपना मुँह खोल दिया जिससे मेरी जीभ को उसके मुँह मे जाने का रास्ता मिल गया. वो किसी भूखी शेरनी की तरफ मेरी जीभ पर टूट पड़ी ऑर बहुत ज़ोर से मेरी ज़ुबान को चूसने लगी.

ऐसा नही था कि मैने पहले किसी के होंठ नही चूसे थे लेकिन जो क़शिष उसके होंठ चूसने मे आ रही थी वैसा मज़ा ना फ़िज़ा के होंठों मे आया था ना ही नाज़ी के होंठों से वो लगातार मेरे होंठों को बुरी तरफ चूस ऑर काट रही थी. अचानक उसने खुद ही अपनी गान्ड थोड़ी सी उपर की ऑर मेरी गोद मे बैठे-बैठे ही अपनी सलवार को घुटने तक खींचकर उतार दिया. अब उसने खुद ही मेरा हाथ अपनी नरम ऑर हद से ज़्यादा गोरी टाँगो पर रख दिया उसका बदन मेरी सोच से भी ज़्यादा गोरा था. हलकी जहाँ हम थे वहाँ एक दम अंधेरा था लेकिन फिर भी उसका बदन इस कदर चमक रहा था कि मुझे उसकी गोरी जांघे अंधेरे मे भी सॉफ नज़र आ रही थी. मैं उसकी चूत देखना चाहता था लेकिन उसने मेरी पहनी हुई कमीज़ को आगे की तरफ किया हुआ था जिससे मैं उसकी चूत नही देख पा रहा था. लेकिन उसकी गान्ड नीचे से लगातार अपना कमाल दिखा रही थी जिसने मेरे लंड को एक दम लोहे जैसा खड़ा कर दिया था. अब की बार मैने उसकी जाँघो को सहलाते हुए अपना हाथ कमीज़ के अंदर लेजा कर अपना हाथ उसकी नरम ऑर नाज़ुक किसी गुलाब के फूल की तरह खिली हुई चूत पर रख दिया जो हद से ज़्यादा पानी छोड़ रही थी मैने कुछ देर उसकी चूत को सहलाया जिससे उसके मुँह मे से एक म्म्म्म म सस्स्सस्स की आवाज़ निकली जो मेरे मुँह मे ही दब गई. अब मैने हीना को उसकी कमर से पकड़ा ऑर थोड़ा उपर किया ताकि अपना पाजामा भी नीचे कर सकूँ. मेरे इशारे को समझते हुए उसने जल्दी से अपनी कमर को थोड़ा सा हवा मे उठा दिया जिससे मैने जल्दी से अपना पाजामा ऑर अंडरवेर नीचे कर दिया.

लंड आज़ाद होते ही किसी भूखे शेर की तरह सिर उठाए खड़ा हो गया जो किसी स्प्रिंग की तरह उपर को हुआ ऑर सीधा हीना की चूत को चूम कर नीचे आ गया. मेरे लंड का अपनी चूत पर अहसास होते ही उसने फिर से एक ऊऊऊओ किया सख्ती से मेरे बाजू को पकड़ लिया जो मैने उसकी कमर पर डाला था. अब मैने उसकी कमीज़ को गान्ड से थोड़ा उपर किया ऑर उसे फिर से अपनी गोद मे बिठा लिया अब मेरा लंड सीधा उसकी चूत के मुँह पर दस्तक दे रहा था ऑर अंदर जाने के लिए मुझसे बग़ावत कर रहा था शायद उस साले को मुझसे भी ज़्यादा जल्दी थी. इसलिए मैने भी उससे ज़्यादा इंतज़ार करवाना मुनासिब नही समझा ऑर अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी ऑर अपनी टाँगो को पूरी तरह फैला दिया ताकि लंड ऑर चूत का मिलन हो सके ऑर साथ ही अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया. हीना की चूत मेरी उम्मीद से भी ज़्यादा पानी छोड़ रही थी. जिसने कुछ ही पॅलो मे मेरे लंड को एक दम गीला कर दिया. हम दोनो मे ये जो कुछ भी हो रहा था एक दम खामोशी से हो रहा था ना वो कुछ बोल रही थी ना मैं. जब कुछ देर तक मैं अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ता रहा तो उसका सबर जवाब देने लगा ऑर आख़िर उसने मेरे कान मे धीरे से कहा...

हीना : नीर पिछे की सीट पर चले अब मुझसे ऑर बर्दाश्त नही हो रहा.

मैं : हमम्म चलो.

उसके बाद हम दोनो आगे वाली सीट को थोड़ा नीचे करके कार के अंदर से ही पिछे वाली सीट पर आ गये. हीना को मुझसे ज़्यादा जल्दी थी इसलिए वो मुझसे पहले पिछे चली गई ऑर जल्दी से अपनी कमीज़ उपर करके पिछे से अपनी ब्रा को भी खोल दिया ऑर अपने बड़े-बड़े मम्मों आज़ाद कर दिया जो ब्रा की क़ैद से आज़ाद होते ही किसी खरगोश की तरह उच्छल कर बाहर आ गये. उनको देखकर मेरे भी मुँह मे पानी आ गया ऑर मैं पिछे जाते ही उसके मम्मों पर टूट पड़ा मैने उसका एक मम्मा अपने हाथ से पकड़ लिया ऑर दूसरा मम्मा अपने मुँह मे लेके चूसने लगा ऑर वो मेरे नीचे लेटी मेरे सिर पर हाथ फेर रही थी ऑर अपने मुँह से सस्सस्स ऊऊऊहह आआआआहह नीईएरर्र्र्र्र्र्ररर करते रहो हो ऑर पता नही क्या-क्या बोले जा रही थी. मैं बारी-बारी उसके दोनों मम्मो के साथ इंसाफ़ कर रहा था क्योंकि मैं नही चाहता था कि दोनो मे से कोई भी मुझसे नाराज़ हो कि मैने किसी एक पर ज़्यादा मेहनत की ऑर दूसरे पर कम मेहनत की.

उस वक़्त कार मे काफ़ी अंधेरा था उपर से मेरी हाइट ज़्यादा होने की वजह से मैं कार मे पूरा भी नही आ रहा था इसलिए मैने पिछे का दरवाज़ा खोल दिया ऑर नीचे बैठकर उसकी चूत को देखने की कोशिश करने लगा. मैं चाहता तो था कि मैं उसके खूबसूरत बदन के एक-एक हिस्से के साथ खेलु लेकिन एक तो हमारे पास वक़्त कम था ऑर दूसरा अंधेरा भी काफ़ी था इसलिए मुझे कुछ भी नज़र नही आ रहा था. इसलिए मैं अंदाज़े से उसकी टाँगो के बीच बैठ गया ऑर उसकी चूत जिस पर थोड़े-थोड़े बाल उगे हुए थे उससे चूम लिया जिसका असर हीना पर काफ़ी हुआ ऑर उसके मुँह से एक तेज़ सस्स्स्स्स्स्सस्स आआआआहह न्ईएरर्र्ररर निकली अब मैने उसकी टांगे थोड़ा फोल्ड की ऑर उन्हे खोल दिया ऑर नीचे बैठकर उसकी चूत को चूसने लगा अभी मुझे कुछ ही मिनिट हुए थे उसकी चूत को चूस्ते हुए कि उसने एक दम से मुझे बालों से पकड़ लिया ऑर उपर की तरफ खींच लिया उसका पूरा बदन किसी सूखे पत्ते की तरह काँप रहा था उसने अंदाज़े से मेरा चेहरा पकड़ा ऑर फिर से मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया ऑर फिर मुझे अपने गले से लगा लिया साथ ही हीना की एक मीठी से आवाज़ मेरे कानो मे मुझे सुनाई दी.

हीना : नीर मुझे अपनी बना लो मैं तुम्हारे प्यार के लिए कब से तड़प रही हूँ.

मैं : पक्का....

हीना (हां मे सिर हिलाते हुए) हमम्म पक्का... जल्दी करो मुझसे अब ऑर बर्दाश्त नही हो रहा.

मैने भी उसे ऑर इंतज़ार करवाना मुनासिब नही समझा ऑर अपना एक हाथ नीच ले जाकर उसे उसकी चूत के मुँह पर रख दिया लंड का टोपा चूत पर टच होते ही हीना ने मुझे अपनी बाहों मे कस के पकड़ लिया ऑर फिर से मेरे कान मे उसकी धीरे से आवाज़ आई.

हीना : नीर आराम से करना मैं अब तक कुँवारी हूँ.

मैं : अच्छा.

उसके बाद मैं अपने घुटनो पर बैठ गया ऑर अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगा लिया वैसे तो उसकी चूत से इतना पानी बह रहा था कि मुझे मेरे लंड को ऑर गीला करने की कोई ज़रूरत नही थी लेकिन फिर भी एहतियात के लिए मैने अपने लंड को गीला कर लिया ऑर उसकी चूत के मुँह पर रखकर हल्का सा ज़ोर लगाया जिससे उसके मुँह से फिर एक सस्स्सस्स आराम से नीर.... निकला. उसकी चूत काफ़ी तंग थी जिससे मेरा टोपा फिसल कर नीचे की तरफ चला गया. मैने फिर से अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा ऑर अंदाज़े से हल्का सा झटका लगाया जिससे लंड का टोपा अंदर चला गया साथ ही उसके मुँह से फिर एक आआययययीीईईईई आराम से नीर दर्द हो रहा है.... की आवाज़ निकली मैने उसकी तरफ कोई ध्यान ना देकर अपने टोपे को चूत मे ही रहने दिया ऑर उसके कुछ नॉर्मल होने के इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद जैसे ही वो थोड़ा नॉर्मल हुई मैं उसके उपर लेट गया ऑर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी तभी मैने एक ऑर झटका मारा ऑर मेरा 1/4 लंड अंदर चला गया उसने जल्दी से मेरे मुँह से अपना मुँह हटाया ऑर फिर से चीखना शुरू कर दिया साथ ही मुझे धक्का देकर अपने उपर से हटाने लगी..

हीना : आआययईीीई..... नीर बहुत दर्द हो रहा है मुझसे नही होगा जल्दी से बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा है.

मैं : (उसके सिर पर हाथ फेरते हुए) बस हो गया थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो फिर मज़ा आने लगेगा. अगला झटका मैं तब ही मारूँगा जब तुम खुद बोलोगि..... जब तक दर्द कम नही होता तब तक हम ऐसे ही रहेंगे.

हीना : ऑर अंदर मत करना कुछ देर ऐसे ही रहो बहुत दर्द हो रहा है.

उसके बाद मैं कुछ देर वैसे ही रहा ऑर उसके दोनो मम्मों को चूस कर उसका दर्द कुछ कम करने लगा कुछ ही देर मे उसकी भी दर्द भरी चीखे आहो मे बदलने लगी ऑर वो फिर से मुझसे अपने मम्मे चुस्वकार गरम होने लगी साथ ही मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए मेरे सिर को अपने मम्मों पर दबाने लगी.

हीना : अब कुछ आराम है नीर अब करो लेकिन धीरे करना अभी भी दर्द हो रहा है.

मैं : अच्छा

उसके इतना कहते ही मैने अपने दोनो हाथ उसके मोटे मम्मों पर रखे ऑर एक ऑर ज़ोरदार झटका मारा जिससे मेरा लंड उसकी चूत की सील तोड़ता हुआ आधे से ज़्यादा अंदर चला गया. इसके साथ ही उसने कार मे अपने पैर पटकने शुरू कर दिए लेकिन मेरे समझाने पर वो फिर से नॉर्मल हो गई ऑर मैं उसका दर्द कम करने के लिए फिर से उसके मम्मे चूसने लगा. कुछ देर बाद जब वो नॉर्मल हुई तो मैने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला जो उसकी चूत के खून ऑर ढेर सारे पानी से नहाया हुआ था.

मैं : हीना कोई गंदा कपड़ा होगा कार मे?

हीना : हाँ शायद होगा कार की सीट के नीचे चेक करो.

मैने अंधेरे मे अंदाज़े से कार की सीट के नीचे हाथ घुमाया तो मुझे एक कपड़ा मिल गया अब जाने वो क्या था लेकिन मैने उससे अपना लंड ऑर हीना की चूत अच्छे से सॉफ की ऑर फिर से अपने लंड पर थूक लगाके हीना की चूत मे अपना आधा लंड डाल दिया. जिससे उसके मुँह से फिर एक तेज़ आआआययययीीई सस्स्स्स्सस्स आराम से करो दर्द हो रहा है..... की आवाज़ निकली जिस पर मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया ऑर फिर से उसके मम्मे चूसने लगा कुछ ही देर मे उसे भी मज़ा आने लगा तो उसने भी नीचे से अपनी गान्ड को उपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया जिसके जवाब मे मैने भी अपना आधा लंड उसकी चूत मे धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. कुछ ही देर मे हीना फिर से मेरा साथ देने लगी. अब मेरा लंड करीब 3/4 हीना की चूत के अंदर बाहर हो रहा था ऑर वो हल्के फुल्के दर्द ऑर मज़े के साथ चुदाई का मज़ा ले रही थी साथ मे सस्स्सस्स आआअहह ऊऊओह जैसी आवाज़े निकाल रही थी. कुछ ही धक्को के बाद उसका बदन अकड़ने लग गया ऑर उसने मुझे कस कर गले से लगा लिया साथ ही फिर से मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए अब वो भी अपनी गान्ड उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी इसलिए मैने भी अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी जिससे कुछ ही देर मे मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा. जैसे ही मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे गया उसकी चूत ने एक जबरदस्त झटके खाना शुरू कर दिया ऑर कुछ ही धक्को मे वो झड गई. अब मैने उसकी चूत से लंड बाहर निकाला ऑर उसे डॉगी स्टाइल मे कर लिया ऑर पिछे से अपना लंड उसकी चूत पर अड्जस्ट करके उसकी चूत मे धक्के मारने लगा. उसकी मोटी गान्ड अब मेरे हाथ मे थी ऑर मेरा लंड उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ा रहा था. मैं उस वक़्त कार के बाहर खड़ा था ऑर वो कार के अंदर डॉगी स्टाइल मे चुदवा रही थी साथ ही उसके मुँह से लगातार सस्सस्स आआअहह ज़ोर से करो न्ईएरररर....... जैसी आवाज़े निकाल रही थी. मैं अब पूरी रफ़्तार से उसकी चूत मे धक्के लगा रहा था ऑर उसके नीचे की तरफ बड़े-बड़े मम्मों को पकड़कर मसल रहा रहा था तभी उसका बदल फिर से अकड़ने लगा ऑर उसकी सिसकारियाँ भी बढ़ने लगी कुछ ही देर मे वो फिर से झड गई जिससे उसकी टांगे काँपने लगी ऑर वो कार के अंदर ही पेट के बल लेटकर लंबे-लंबे साँस लेने लगी हम दोनो के ही बदन उस वक़्त पसीने मे नहाए हुए थे. अब वो फिर से सीधी होके पीठ के बल लेट गई ऑर उसने खुद ही अपने दोनो हाथो से अपनी टांगे पकड़कर कार की छत से लगा दी मैने अब अपनी दोनो टांगे कार की सीट पर रखी ऑर फिर से अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया ऑर धक्के मारने लगा उसने मुझे फिर से अपने उपर खींच लिया ऑर मेरे मुँह को अपने मम्मों पर दबाने लगी मैं भी किसी भूखे बच्चे की तरह उसके मम्मों पर टूट पड़ा. अब मेरा मुँह उसके मम्मों पर कमाल दिखा रहा था ऑर नीचे मेरा लंड उसकी चूत मे अपना जलवा दिखा रहा था. तभी हमें दूर से एक हेड लाइट चमकती हुई नज़र आई ऑर एक हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी जिसे हीना ने फॉरन पहचान लिया.

हीना : ये तो अब्बू की जीप का हॉर्न है.

मैं : जल्दी से कपड़े पहनो

साथ ही मैने कार का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया ऑर हम दोनो जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहनने लगे. (उस वक़्त दोस्तो यक़ीन करो अगर मेरे हाथ मे बंदूक होती तो गोली मार देता कमीनो को सालो ने क्या टाइम पर एंट्री मारी थी पूरे मूड की ऐसी तैसी करके रख दी थी. मेरा ये दर्द मेरा वही रीडर भाई समझ सकता है जिसके साथ ऐसा हुआ हो बाकी सब को तो इस वक़्त हँसी आ रही होगी कि बिचारे के साथ केएलपीडी हो गया)

Update-30

Kuch der baad maine dheere se apna hath uski salwar ke andar dalne ki koshish ki lekin azarband bandha hone ki wajahan se hath andar nahi jaa paa raha tha isliye usne khud hi apna pet andar ki taraf sikod liya taki hath andar jane ki jagah mil sake ab mera hath dheere-dheere andar ki taraf jane laga or meri ungaaliyan par ab uski chut ke baal takrane lage. Ab maine apna hath thoda or aggey ko sarkaya to mera hath uski narma or nazuk chut tak pohonch gaya jisse usko ek jhatka sa laga or uske munh se sirf sssss hhhmmmmm hi nikal paya. mera ab ek hath uske bra ke upar se mummo ko daba raha raha or dusra hath uski salwaar me ghusa uski chut ke sath ched-chhad kar raha tha. Uski chut lagatar paani chod rahi thi jisse mera poora hath ke ungaaliyan geeli ho chuki thi. Lekin main fir bhi uski chut ke daane par apni ungali se kamaal dikhata raha. kuch hi der me uski taangey kaampne lagi usne achanak meri taraf apna chehra kiya or meri gaalo ko halke-halke chumna shuru kar diya or fir achanak jaise uski saans ruk gai ho usne apni aankhen jor se band kar lee or apni gaanD ko upar ki taraf utha diya mera poora hath uski chut ke nikalne wale paani se bheegh chuka tha ab kuch der gaanD ko hawa me uthaye jhatke khane ke baad ek dam se meri god me wapis gir gai or tez-tez saans lene lagi maine bhi apna hath uski chut par rok liya lekin dusre hath se halke-halke uske mummo ko dabata raha. Ab wo aankhen band kiye mere kandhe par apna sir rakhe baithi or muskura rahi thi shayad wo farig ho gai thi. Maine ab apna bayaan hath uski salwar me se dayaan hath uski kameez me se nikal liya or usse uski kamar se pakadkar thoda upar utha diya taaki main uski salwar khichkar thoda niche kar saku. jaise hi maine uski salwar ko thoda niche ki taraf khicha usne mere dono hatho par apne hath rakh diye or meri aankho me dekhne lagi uski aankhen uss waqt nashe or wasna se ek dam nasheeli hui padi thi. achanak usne apna daya hath upar kiya or mere sir ke piche le jakar mere chehre ko apne chehre par jhuka diya or mere honthon par usne apne honth rakh diye uske honth ek dam gulaab ki pankhudiyo ke jaise nazuk or rassbhare the. maine foran apna thoda sa munh kholkar uske dono nazuk honthon ko apne munh me qaid kar liya or jabardast tareeke se chusne laga kuch der to wo apna munh sakhti se band karke baithi rahi phir usne bhi apna munh khol diya jisse meri jibh ko uske munh me jane ka rasta mil gaya. wo kisi bhukhi sherni ki taraf meri jibh par toot padi or bahut jor se meri jubaan ko chusne lagi.

Aisa nahi tha ki maine pehle kisi ke honth nahi chuse the lekin jo qashish uske honth chusne me aa rahi thi waisa maza na fiza ke honthon me aaya tha naa hi nazi ke honthon se wo lagataar mere honthon ko buri taraf chus or kaat rahi thi. Achanak usne khud hi apni gaanD thodi si upar ki or meri god me baithe-baithe hi apni salwar ko ghutne tak khinchkar utaar diya. ab usne khud hi mera hath apni naram or had se jyaadaa gori taango par rakh diya uska badan meri soch se bhi jyaadaa gora tha. halaki jahan hum the wahan ek dam andhera tha lekin phir bhi uska badan iss kadar chamak raha tha ki mujhe uski gori jaanghe andhere me bhi saaf nazar aa rahi thi. main uski chut dekhna chahta tha lekin usne meri pehni hui kameez ko aagey ki taraf kiya hua tha jisse main uski chut nahi dekh paa raha tha. lekin uski gaanD nihe se lagataar apna kamaal dikha rahi thi jisne mere lund ko ek dam lohe jaisa khada kar diya tha. ab ki baar maine uski jaangho ko sehlate hue apna hath kameez ke andar lejakar apna hath uski naram or nazuk kisi gulaab ke phunl ki tarah khili hui chut par rakh diya jo had se jyaadaa paani chod rahi thi maine kuch der uski chot ko sehlaya jisse uske munh me se ek mmmmm ssssss ki awaaz nikali jo mere munh me hi dab gai. ab maine heena ko uski kamar se pakda or thoda upar kiya taaki apna pajama bhi niche kar saku. mere ishaare ko samajhte hue usne jaldi se apni kamar ko thoda sa hawa me utha diya jisse maine jaldi se apna pajama or underwear niche kar diya.

Lund azaad hote hi kisi bhukhe sher ki tarah sir uthaye khada ho gaya jo kisi spring ki tarah upar ko hua or sidha heena ki chut ko chum kar niche aa gaya. Mere lund ka apni chut par ahsaas hote hi usne phir se ek ooooooo kiya sakhti se mere baju ko pakad liya jo maine uski kamar par daala tha. ab maine uski kameez ko gaanD se thoda upar kiya or usse phir se apni god me bitha liya ab mera lund seedha uski chut ke munh par dastak de raha tha or andar jaane ke liye mjhse bagaawat kar raha tha shayad uss sale ko mujhse bhi jyaadaa jaldi thi. Isliye maine bhi usse jyaadaa intzaar karwana munasib nahi samjha or apna hath niche le jakar uski or apni taango ko poori tarah phaila diya taaki lund or chut ka milan ho sake or sath hi apne lund ko uski chut par ragadna shuru kar diya. Heena ki chut meri ummeed se bhi jyaadaa paani chod rahi thi. jisne kuch hi palo me mere lund ko ek dam geela kar diya. Hum dono me ye jo kuch bhi ho raha tha ek dam khamoshi se ho raha tha na wo kuch bol rahi thi na main. Jab kuch der tak main apne lund ko uski chut par ragadta raha to uska sabar jawab dene laga or akhir usne mere kaan me dheere se kaha...

Heena : Neer pichhe ki seat par chale ab mujhse or bardasht nahi ho raha.

Main : Hhhmmm Chalo.

Uske baad hum dono aagey wali seat ko thoda niche karke car ke andar se hi pichhe wali seat par aa gaye. Heena ko mujhse jyaadaa jaldi thi isliye wo mujhse pehle pichhe chali gai or jaldi se apni kameez upar karke pichhe se apni bra ko bhi khol diya or apne bade-bade mamme azaad kar diya jo bra ki qaid se azaad hote hi kisi khargosh ki tarah uchhal kar bahar aa gaye. unko dekhkar mere bhi munh me paani aa gaya or main pichhe jate hi uske mummo par toot pada maine uska ek mumma apne hath se pakad liya or dusra mumma apne munh me leke chusne laga or wo mere niche leti mere sir par hath fer rahi thi or apne munh se sssss oooooohhhhhh aaaaaaaahhhhh Neeeeerrrrrrrrrr karte raho ho or pata nahi kya-kya bole jaa rahi thi. main baari-baari uske doono mummo ke sath insaaf kar raha tha kyonki main nahi chahta tha ki dono me se koi bhi mujhse naraz ho ki maine kisi ek par jyaadaa mehnat ki or dusre par kam mehnat ki.

Uss waqt car me kaafi andhera tha upar se meri height jyaadaa hone ki wajah se main car me poora bhi nahi aa raha tha isliye maine pichhe ka darwaza khol diya or niche baithkar uski chut ko dekhne ki koshish karne laga. Main chahta to tha ki main uske khubsurat badan ke ek-ek hisse ke sath khelu lekin ek to hamaare pass waqt kam tha or dusra andhera bhi kaafi tha isliye mujhe kuch bhi nazar nahi aa raha tha. isliye main andaze se uski taango ke bich baith gaya or uski chut jis par thode-thode baal uge hue the usse chum liya jiska asar heena par kaafi hua or uske munh se ek tez ssssssssss aaaaaaaahhhhhh Neeerrrrrr nikali ab maine uski taange thoda fold ki or unhe khol diya or niche baithkar uski chut ko chusne laga abhi mujhe kuch hi minute hue the uski chut ko chuste hue ki usne ek dam se mujhe baalo se pakad liya or upar ki taraf khinch liya uska poora badan kisi sookhe patte ki tarah kaamp raha tha usne andaze se mera chehra pakda or phir se mere honthon ko chusna shuru kar diya or phir mujhe apne gale se laga liya sath hi heena ki ek meethi se awaaz mere kaano me mujhe sunayi di.

Heena : Neer mujhe apni bana lo main tumhare pyaar ke liye kab se tadap rahi hun.

Main : pakkaa....

Heena (Haa me sir hilate hue) Hhhmmm pakka... jaldi karo mujhse ab or bardasht nahi ho raha.

Maine bhi usse or intzaar karwana munasib nahi samjha or apna ek hath nich le jakar usse uski chut ke munh par rakh diya lund ka topd chut pa touch hote hi heena ne mujhe apni baaho me kass ke pakad liya or phir se mere kaan me uski dheere se awaaz aayi.

Heena : Neer araam se karna main ab tak kunwari hunn.

Main : Achha.

Uske baad main apne ghutno par baith gaya or apne lund par dher sara thook laga liya waise to uski chut se itna paani beh raha tha ki mujhe mere lund ko or geela karne ki koi jarurat nahi thi lekin phir bhi ehtiaat ke liye maine apne lund ko geela kar liya or uski chut ke munh par rakhkar halka sa zor lagaya jisse uske munh se phir ek ssssss araam se neer.... nikla. Uski chut kaafi tang thi jisse mera topa phisal kar niche ki taraf chala gaya. maine phir se apna lund uski chut ke munh par rakha or andaaze se halka sa jhatka lagaya jisse lund ka topa andar chala gaya sath hi uske munh se phir ek aaayyyyiiiiiiii araam se neer dard ho raha hai.... ki awaaz nikali maine uski taraf koi dhyaan naa dekar apne tope ko chut me hi rehne diya or uske kuch normal hone ke intzaar karna laga. kuch der baad jaise hi wo thoda normal hui main uske upar let gaya or uske honthon ko chusna shuru kar diya wo bhi mera poora sath dene lagi tabhi maine ek or jhatka mara or mera 1/4 lund andar chala gaya usne jaldi se mere munh se apna munh hataya or phir se cheekhna shuru kar diya sath hi mujhe dhakka dekar apne upar se hatane lagi..

Heena : Aaayyyiiiii..... neer bahut dard ho raha hai mujhse nahi hoga jaldi se bahar nikalo bahut dard ho raha hai.

Main : (Uske sir par hath pherte hue) bas ho gaya thoda sa bardasht kar lo phir maza aane lagega. agla jhatka main tab hi marunga jab tum khud bologi..... jab tak dard kam nahi hota tab tak hum aise hi rahenge.

Heena : Or andar mat karna kuch der aise hi raho bahut dard ho raha hai.

Uske baad main kuch der waise hi raha or uske dono mummo ko chus kar uska dard kuch kam karne laga kuch hi der me uski bhi dard bhari cheekhe aaho me badalne lagi or wo phir se mujhse apne mamme chuswakar garam hone lagi sath hi mere sir par hath pherte hue mere sir ko apne mummo par dabane lagi.

Heena : Ab kuch araam hai Neer ab karo lekin dheere karne abhi bhi dard ho raha hai.

Main : Achha

Uske itna kehte hi maine apne dono hath uske mote mummo par rakhe or ek or zordaar jhatka maara jisse mera lund uski chut ki seal todta hua adha se jyaadaa andar chala gaya. iske sath hi sune car me apne pair patakne shuru kar diye lekin mere samjhane par wo phir se normal ho gai or main uska dard kam karne ke liye phir se uske mamme chusne laga. kuch der baad jab wo normal hui to maine apna lund uski chut se bahar nikala jo uske chut ke khun or dher sare paani se nahaya hua tha.

Main : Heena koi ganda kapda hoga car me?

Heena : Haa shayad hoga Car ki seat ke niche chek karo.

Maine andhere me andaze se car ki seat ke niche hath ghumaya to mujhe ek kapda mil gaya ab jane wo kya tha lekin maine usse apna lund or heena ki chut achhe se saaf ki or phir se apne lund par thook lagake heena ki chut me apna adha lund daal diya. jisse uske munh se phir ek tez aaaaaayyyyiiiii ssssssss aaraam se karo dard ho raha hai..... ki awaz nikali jis par maine jyaadaa dhyaan nahi diya or phir se uske mamme chusne laga kuch hi der me usse bhi maza aane laga to usne bhi niche se apni gaanD ko upar ki taraf uthana shuru kar diya jiske jawab me maine bhi apna 1.2 lund uski chut me dheere-dheere andar bahar karna shuru kar diya. kuch hi der me heena phir se mera sath dene lagi. ab mera lund kareeb 3/4 heena ki chut ke andar bahar ho raha tha or wo halke phulke dard or maze ke sath chudayi ka maza le rahi thi sath me ssssss aaaaahhhhhhhh ooooohhhhhhhh jaisi aawaze nikaal rahi thi. kuch hi dhakko ke bad uska badan akadne lag gaya or usne mujhe kass kar gale se laga liya sath hi phir se mere honth chusne shuru kar diye ab wo bhi apni gaan utha-uthakar mera sath de rahi thi isliye maine bhi apne dhakko ki aftaar badha di jisse kuch hi der me mera poora lund uski chut ke andar bahar hone laga. jaise hi mera poora lund uski chut me gaya uski chut ne ek jabardast jhatke khana shuru kar diya or kuch hi dhakko me wo jhad gai. ab maine uski chut se lund bahar nikala or usse doggy style mer kar liya or pichhe se apna lund uski chut par adjust karke uski chut me dhakke marne laga. uski moti gaanD ab mere hath me thi or mera lund uski chut ki dhajjiyaan udaa raha tha. main uss waqt car ke bahar khada tha or wo car ke andar doggy style me chudwa rahi thi sath hi uske munh se lagataar sssss aaaaahhhhhhhh Zor se karo neeerrrr....... jaisi awaze nikal rahi thi. main ab poori raftaar se uski chut me dhakke laga raha tha or uske niche ki taraf bade-bade mummo ko pakadkar masal raha raha tabhi uska badal phir se akadne laga or uski siskaariyaan bhi badne lagi kuch hi der me wo phir se jhad gai jisse uski taange kaampne lagi or wo car ke andar hi pet ke bal letkar lambe-lambe saans lene lagi hum dono ka hi badan uss waqt paseene me nahaye hue the. ab wo phir se seedhi hoke peeth ke bal let gai or usne khud hi apne dono hatho se apni taange pakadkar car ki chhat se laga di maine ab apni dono taangey car ki seat par rakhi or phir se apna lund uski chut me daal diya or dhakke maarne laga usne muje phir se apne upar khinch liya or mere munh ko apne mummo par dabane lagi maine bhi kisi bhukhe bache ki tarah uske mummo par toot pada. Ab mera munh uske mummo par kamaal dikha raha tha or niche mera lund uski chut me apna jalwa dikha raha tha. Tabhi hume door se ek head light chamakti hui nazar aayi or ek horn ki awaaz sunayi di jise heena ne foran pehchaan liya.

Heena : Ye to abbu ki jeep ka horn hai.

Main : Jaldi se kapde pehno

Sath hi maine car ka darwaza andar se band kar liya or hum dono jaldi se apne-apne kapde pehanne lage. (Uss waqt dosto yaqeen karo agar mere hath me bandook hoti to goli maar deta kameeno ko salo ne kya time par entry maari thi poore mood ki aisi taisi karke rakh di thi. mera ye dard mera wahi Reader bhai samajh sakta hai jiske sath aisa hua ho baaki sab ko to iss waqt hassi aa rahi hogi ki bichare ke sath KLPD ho gaya)

 
अपडेट-31

हीना जल्दी से उठकर कार के अंदर से ही आगे वाली सीट पर चली गई ऑर जल्दी से अपनी सलवार पहनने लगी ऑर अपने कपड़े ठीक करने लगी तब तक मैं भी अपने कपड़े पहन कर आगे वाली ड्राइविंग सीट पर आ चुका था...

हीना : ये तो अब्बू की जीप है ये यहाँ कैसे आ गये अब क्या होगा.

मैं : डर लग रहा है (मुस्कुरा कर)

हीना : जब आप साथ होते हो तब डर नही लगता (मुस्कुरा कर)

इतना मे वो जीप हमारे पास आके रुकी ऑर उसमे से एक आदमी निकलकर बाहर आया.

आदमी : (गाड़ी के दरवाज़े पर हाथ से नीचे इशारा करते हुए) छोटी मालकिन आप अभी तक गाड़ी सीख रही है बड़े मालिक आपको बुला रहे हैं उन्होने कहा है कि बाकी कल सीख लेना.

हीना : अच्छा... तुम चलो हम इसी कार मे आ रहे हैं

आदमी : जी जैसी आपकी मर्ज़ी मालकिन...

फिर वो आदमी वापिस जीप मे बैठ गया ऑर हमने भी उसके पिछे ही अपनी कार दौड़ा ली. हीना पूरे रास्ते मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर बैठी रही ऑर मुझे देखकर मुस्कुराती रही ऑर कभी-कभी मेरे गाल पर चूम लेती. कुछ देर मे हवेली आ गई तो बाहर खड़े दरबान ने हमारी कार देखते ही बड़ा दरवाजा जल्दी से खोल दिया मैं गाड़ी हवेली के अंदर ले गया ऑर गाड़िया खड़ी करने की जगह पर गाड़ी रोक दी. तभी सरपंच वहाँ आ गया. जिसे देखते ही हीना जल्दी से कार से उतर गई. हालाकी उसे चलने मे तक़लीफ़ हो रही थी लेकिन उसने अपने अब्बू पर कुछ भी जाहिर नही होने दिया.

सरपंच : बेटी आज तो बहुत देर करदी मुझे फिकर हो रही थी.

हीना : अब मैं बच्ची नही हूँ अब्बू... बड़ी हो गई हूँ ऐसे फिकर ना किया करो ऑर वैसे भी नीर मेरे साथ ही तो थे. (मुस्कुरा कर)

सरपंच : अर्रे ये किसके कपड़े पहने है. हाहहहहहाहा

हीना : वो मैं इनको लेने इनके घर गई थी तो वहाँ बाबा जी चाय पी कर जाने की ज़िद्द करने लगे वहाँ चाय पकड़ते हुए मेरे हाथ से चाय का कप गिर गया था जो मेरे कपड़ो पर गिर गया (हीना ने झूठ बोला) इसलिए इन्होने मुझे अपने कपड़े दे दिए पहन ने के लिए.... अच्छे है ना (मुस्कुराते हुए)

सरपंच : अच्छा...अच्छा अब तारीफे बंद करो ऑर चलो मैने खाना नही खाया तुम्हारी वजह से. (हीना के सिर पर हाथ फेरते हुए)

मैं गाड़ी से उतरते हुए दोनो बाप बेटी को बाते करते हुए देख रहा था ऑर उन दोनो की बाते सुनकर मुस्कुरा रहा था.

मैं : माफ़ कीजिए सरपंच जी आज थोड़ा देर हो गई. ये लीजिए आपकी अमानत की चाबी.

सरपंच : (चाबी पकड़ते हुए) कोई बात नही.... अर्रे ये तुम्हारे सिर मे क्या हुआ

मैं : कुछ नही वो ज़रा चोट लग गई थी.(अपने माथे पर हाथ फेरते हुए)

सरपंच : (मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए) अपना ख्याल रखा करो

मैं : जी ज़रूर...

हीना : अब्बू वो गाड़ी वाली बात भी तो करो ना इनसे.

सरपंच : अर्रे हाँ मैं तो भूल ही गया.... बेटा वो हीना कितने दिन से पिछे पड़ी है इसको नयी गाड़ी लेके देनी है... तो मुझे समझ नही आ रहा था कि कौनसी गाड़ी इसे लेके दूं तुम बताओ इसके लिए कौनसी गाड़ी अच्छी रहेगी.

मैं : कोई भी गाड़ी ले दीजिए... बस इतना ख़याल रखना कि गाड़ी छोटी हो जिससे इनको (हीना को) भी चलाने मे आसानी रहेगी.

हीना : अब्बू आप असल बात तो भूल ही गये ये वाली नही साथ जाने वाली बात पुछो ना.....

सरपंच : आप खुद ही पूछ लो महारानी साहिबा... (हीना के आगे हाथ जोड़ते हुए)

हीना : नीर जी वो मैं सोच रही थी कि आप को हम से ज़्यादा समझ है गाडियो की तो आप भी हमारे साथ ही शहर चलें ना नयी गाड़ी लेने के लिए (मुस्कुराते हुए)

मैं : (चोन्कते हुए) मैं... मैं कैसे.... नही आप लोग ही ले आइए मुझे खेतो मे भी काम होता है ना.

सरपंच : अर्रे बेटा मान जाओ नही तो ये सारा घर सिर पर उठा लेगी. जहाँ तक खेतो की बात है तो मैं अपने मुलाज़िम भेज दूँगा 1-2 दिन के लिए वो लोग तुम्हारे खेत का ख्याल रखेंगे जब तक तुम हमारे साथ शहर रहोगे.

मैं : ठीक है.. लेकिन एक बार बाबा से पूछ लूँगा तो बेहतर होगा.

सरपंच : तुम्हारे बाबा की फिकर तुम ना करो मैं हूँ ना मैं कल ही जाके बात कर आउगा फिर परसो हम शहर चलेंगे. अब तो कोई ऐतराज़ नही तुमको.

मैं : जी नही... अच्छा सरपंच जी अब इजाज़त दीजिए काफ़ी रात हो गई है सब लोग खाने पर इंतज़ार कर रहे होंगे.

सरपंच : ठीक है.... रूको तुमको मानसिंघ छोड़ आएगा... मानसिंघ... (अपने मुलाज़िम को आवाज़ लगाते हुए)

मानसिंघ : जी मालिक (दौड़कर सरपंच के सामने आते हुए)

सरपंच : नीर को उनके घर छोड़ आओ जीप पर.

मानसिंघ : जी... ठीक है मालिक.

उसके बाद मानसिंघ मुझे जीप पर घर तक छोड़ गया ऑर मेरे घर आते ही नाज़ी मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर-घूर कर देखने लगी लेकिन वो बोल कुछ नही रही थी ऑर ऐसे ही गुस्से से मुझे घुरती हुई चुप-चाप फ़िज़ा के कमरे मे चली गई. तभी फ़िज़ा भी रसोई मे से आ गई...

फ़िज़ा : आ गये नीर बहुत देर करदी.(मुस्कुराते हुए)

मैं : कुछ नही वो ज़रा हीना को गाड़ी सीखा रहा था तो देर हो गई.

फ़िज़ा : तुम्हारे इतनी चोट लगी है एक दिन नही सीखते तो क्या हो जाना था.

मैं : नही वो बाबा ने हीना को बोल दिया था तो मैं मना कैसे करता इसलिए सोचा जब आ गया हूँ तो गाड़ी चलानी भी सीखा ही देता हूँ.

फ़िज़ा : वो सब तो ठीक है लेकिन कुछ अपना भी ख्याल रखा करो.

मैं : (चारो तरफ देखते हुए) तुम हो ना मेरा ख्याल रखने के लिए...(मुस्कुराकर)

फ़िज़ा : अच्छा अब ज़्यादा प्यार दिखाने की ज़रूरत नही है चलो जाओ जाके नहा लो फिर साथ मे खाना खाएँगे.

मैं : अच्छा....

उसके बाद मैं नहाने चला गया ऑर फ़िज़ा भी वापिस रसोई मे चली गई. कुछ देर बाद मैं जब नहा कर बाहर आया तो फ़िज़ा अकेली ही खाने का सब समान टेबल पर रख रही थी.

मैं : नाज़ी दिखाई नही दे रही वो कहाँ है.

फ़िज़ा : वो अंदर है कमरे मे कह रही थी भूख नही है इसलिए खाना नही खाएगी. अब तुम तो जल्दी आओ मुझे बहुत भूख लगी है चलो आज हम दोनो खाना खा लेते हैं.(मुस्कुरा कर)

मैं : तुम खाना शुरू करो मैं ज़रा नाज़ी को देखकर आता हूँ.

फ़िज़ा : अच्छा...

मैं जब फ़िज़ा के कमरे मे गया तो नाज़ी अंदर उल्टी होके गान्ड उपर करके लेटी थी ऑर बार-बार तकिये को तोड़-मरोड़ रही थी. मैने एक नज़र उसको देखा ऑर वापिस खाने के टेबल के पास आ गया.

मैं : फ़िज़ा ज़रा नाज़ी की खाने की थाली बना दो मैं अभी उसको खाना खिला कर आता हूँ.

फ़िज़ा : ठीक है...लेकिन वो तो कह रही थी भूख नही है.

मैं : तुम खाना तो लगाओ बाकी मैं खिला लूँगा उसको

फ़िज़ा : ठीक है.

फिर फ़िज़ा ने नाज़ी की खाने की थाली मुझे दे दी ऑर मैं वो थाली लेके कमरे मे चला गया अंदर अभी भी नाज़ी वैसी ही उल्टी होके लेटी हुई थी.

मैं : लगता है आज बहुत गुस्सा हो (मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : तुमसे मतलब...

मैं : अच्छा तो मुझसे गुस्सा हो...

नाज़ी : मैं क्यो किसी से गुस्सा होने लगी.

मैं : अच्छा... तो फिर खाना खाने क्यो नही आई...

नाज़ी : मुझे भूख नही है

मैं : ठीक है थोड़ा सा खा लो मैं तुम्हारे लिए खाना लेके आया हूँ.

नाज़ी : (उठकर बैठते हुए) किसने बोला था खाने लाने को नही खाना मुझे तुम जाओ यहाँ से.

मैं : ऐसे कैसे जाउ तुमको खाना खिलाए बिना तो नही जाउन्गा. (मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : अब मेरे पास क्या लेने आए हो जाओ उसी बंदरिया को जाके खाना खिलाओ जिसके साथ बड़ी हँस-हँस के बाते हो रही थी.

मैं : अच्छा....तो इसलिए नाराज़ हो...हाहहहहाहा

नाज़ी : हँसो मत मुझे बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ है.

मैं : ठीक है गुस्सा मुझ पर उतारो ना फिर खाने ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है देखो कैसे मायूस होके थाली मे पड़ा है बिचारा.

नाज़ी : (हँसते हुए) नीर तुम जाओ ना मुझे भूख नही है.

मैं : अच्छा चलो आज सुबह जैसे करते हैं.

नाज़ी : सुबह जैसे क्या

मैं : जैसे तुमने मुझे खाना खिलाया था अपने हाथो से मैं भी तुमको वैसे ही खिलाता हूँ फिर तो ठीक है.

नाज़ी : तुम जाओ ना नीर मुझे नही खाना.

मैं : (बेड पर बैठ ते हुए ऑर थाली मे से रोटी का टुकड़ा तोड़कर नाज़ी के मुँह के सामने करते हुए) मैने तुमसे पूछा नही कि तुमको भूख है या नही चलो अब मुँह खोलो....

नाज़ी : (मुस्कुराकर मुँह खोले हुए) आपने खाया...

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए)

नाज़ी : क्या... चलो आप भी मुँह खोलो मैं खिलाती हूँ (मुस्कुराकर)

उसके बाद ऐसे ही हमने एक दूसरे को खाना खिलाया ऑर एक दूसरे को प्यार से देखते रहे.

मैं : वैसे तुम हीना से किस बात पर गुस्सा थी.

नाज़ी : जानते हो उस कमीनी ने कौन्से कपड़े पहने थे मेरे चाय गिराने के बाद.

मैं : मेरे कपड़े पहने थे तो क्या हुआ.

नाज़ी : ना सिर्फ़ आपके कपड़े पहने थे बल्कि उसने वो कपड़े पहने थे जो मैने खुद आपके लिए

बड़े प्यार से सिले थे. इसलिए मुझे गुस्सा आ रहा था.

मैं : कोई बात नही उसको कपड़ो से खुश हो लेने दो तुम्हारे पास तो तुम्हारा नीर खुद है फिर किसी से जलन कैसी....है ना

नाज़ी : (खुश हो कर मुझे गले से लगाते हुए) अब गुस्सा नही करूँगी.

मैं : चलो अब जल्दी से खाना ख़तम करो फिर सोना भी है बहुत रात हो गई है ना.

नाज़ी : एक बात बोलूं बुरा नही मनोगे तो....

मैं : हाँ बोलो

नाज़ी : वो जब आपके साथ होती है तो मुझे ऐसा लगता है जैसे आप मुझसे दूर हो गये हो.

मैं : किसी से बात कर लेने का मतलब ये नही होता नाज़ी कि मैं उसका हूँ... मैं सिर्फ़ ऑर सिर्फ़ इस घर का हूँ बॅस मुझे इतना पता है.

नाज़ी : मतलब सिर्फ़ मेरे हो. (मुस्कुराते हुए)

मैं : अच्छा अब दूर होके बैठो फ़िज़ा देख लेगी तो क्या सोचेगी.

नाज़ी : (दूर होके बैठ ते हुए) ये तो मैने सोचा ही नही...हाहहाहा

मैं : इसलिए कहता हूँ तुम मे अभी बच्पना है

नाज़ी : (नज़रे झुकाकर मुस्कुराते हुए)

मैं : अच्छा अब मैं चलता हूँ ठीक है बहुत रात हो गई है तुम भी सो जाओ अब.

नाज़ी : मेरे वाले कमरे मे जाके सोना आज ठीक है.

मैं : हम्म अच्छा... (थाली लेके खड़ा होते हुए)

नाज़ी : अर्रे ये आप क्यो लेके जा रहे हो छोड़ो मैं ले जाउन्गी (थाली मुझसे लेते हुए)

मैं : ठीक है

उसके बाद मैं खड़ा हुआ ऑर जैसे ही कमरे से बाहर जाने लगा नाज़ी की आवाज़ मेरे कानो से टकराई जिसने मेरे कदम रोक दिए.

नाज़ी : आज मुँह मीठा नही करना (मुस्कुरा कर)

मैं : करना तो है लेकिन....फ़िज़ा देख सकती है इसलिए अभी रहने देते हैं (मुस्कुराकर)

नाज़ी : सोच लो.... ऐसा मोक़ा फिर नही दूँगी (मुस्कुराते हुए)

मैं : कोई बात नही मुझे कुछ करने के लिए मोक़े की ज़रूरत नही सिर्फ़ मर्ज़ी होनी चाहिए.

इतने मे फ़िज़ा की आवाज़ आ गई तो हम दोनो चुप हो गये....

फ़िज़ा : (कमरे मे आते हुए) अर्रे नाज़ी ने खाना खाया या नही.

मैं : खा लिया (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : क्या बात है जब मैने बोला था तो नही खाया तुम आए तो खा भी लिया.

नाज़ी : ऐसा कुछ नही है भाभी वो बस ये ज़िद्द करके बैठ गये तो खाना पड़ा.

फ़िज़ा : अच्छा अब चलो रसोई मे थोड़ा काम करवा दो मेरे साथ फिर सोना भी है.

नाज़ी : अच्छा अभी आई भाभी.

मैं : मेरे लिए ऑर कोई हुकुम सरकार....(मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : जी... आप जाइए ऑर जाके अपने नये कमरे मे सो जाइए आराम से (मुस्कुरा कर)

मैं : जो हुकुम.... आज बाबा के पास नही सोना क्या.

फ़िज़ा : नही वो बाबा कह रहे थे कि अगर नीर दूसरे कमरे मे सोना चाहे तो सुला देना नही तो यहाँ भी (बाबा के कमरे मे) सोएगा तो मुझे कोई ऐतराज़ नही.

मैं : तो मैं कहा सो फिर...

फ़िज़ा : जहाँ तुम चाहते हो सो जाओ आज तो सारा दिन मैं अकेली ही लगी रही नाज़ी भी तुम्हारे साथ शहर चली गई थी तो मुझे भी बहुत नींद आ रही है.

नाज़ी : तो भाभी आप सो जाओ ना वैसे भी बाबा ने ज़्यादा काम करने से मना किया है ना आपको.

फ़िज़ा : तो फिर घर का बाकी बचा हुआ काम कौन करेगा.

नाज़ी : मैं हूँ ना संभाल लूँगी आप जाओ जाके सो जाओ.(मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : अच्छा... ठीक है (मुस्कुराते हुए) नाज़ी सोने से पहले याद से नीर को दूध गरम करके दे देना मैने उसमे दवाई डाल दी है.

नाज़ी : अच्छा भाभी.

उसके बाद नाज़ी रसोई मे चली गई ऑर फ़िज़ा अपना बिस्तर करने लगी मैं भी अपने नये कमरे मे जाके लेट गया ऑर सोने की कोशिश करने लगा ऑर दिन भर हुए सारे कामो के बारे मे सोचने लगा. थोड़ी देर मैं ऐसे ही बिस्तर पर लेटा करवटें बदलता रहा लेकिन मुझे नींद नही आ रही थी. कुछ देर बाद नाज़ी भी दूध का लेके मेरे कमरे मे आ गई.

नाज़ी : सो गये क्या.

मैं : नही जाग रहा हूँ क्या हुआ

नाज़ी : ये दवाई वाला दूध लाई हूँ आपके लिए पी लो.

Update-31

Heena jaldi se uthkar car ke andar se hi aagey wali seat par chali gai or jaldi se apni salwar pehanne lagi or apne kapde thik karne lagi tab tak main bhi apne kapde pehan kar aagey wali driving seat par aa chuka tha...

Heena : ye to abbu ki jeep hai ye yahan kaise aa gaye ab kya hoga.

Main : darr lag raha hai (muskurakar)

Heena : jab aap sath hote ho tab darr nahi lagta (muskurakar)

Itna me wo jeep hamaare pass aake ruki or usme se ek aadmi nikalkar bahar aaya.

Admi : (gaadi ke darwaze par hath se niche ishara karte hue) Choti malkin aap abhi tak gaadi seekh rahi hai bade malik aapko bula rahe hain unhone kaha hai ki baaki kal seekh lena.

Heena : Achha... tum chalo hum isi car me aa rahe hain

Admi : Ji jaisi aapki marzi malkin...

Fir wo aadmi wapis jeep me baith gaya or hamane bhi uske pichhe hi apni car douda lee. Heena poore raste mere kandhe par apna sir rakhkar baithi rahi or mujhe dekhkar muskurati rahi or kabhi-kabhi mere gaal par chum leti. Kuch der me haveli aa gai to bahar khade darbaan ne hamaari car dekhte hi bada dawaza jaldi se khol diya main gaadi haveli ke andar le gaya or gaadiya khadi karne ki jagah par gaadi rok di. tabhi sarpanch wahan aa gaya. jise dekhte hi heena jaldi se car se utar gai. halaki usse chalne me taqleef ho rahi thi lekin usne apne abbu par kuch bhi jaahir nahi hone diya.

Sarpanch : beti aaj to bahut der kardi mujhe fikar ho rahi thi.

Heena : ab main bachi nahi hun abbu... badi ho gai hun aise fikar na kiya karo or waise bhi Neer mere sath hi to the. (muskurakar)

Sarpanch : Arre ye kiske kapde pehne hai. hahahahahahaha

Heena : wo main inko lene inke ghar gai thi to wahann baba ji chaye pee kar jane ki zidd karne lage wahan chaye pakadte hue mere hath se chaye ka cup gir gaya tha jo mere kapdo par gir gaya (heena ne jhooth bola) isliye inhone mujhe apne kapde de diye pehan ne ke liye.... Achhe hai naa (muskuraate hue)

Sarpanch : achha...achha ab tareefe band karo or chalo maine khana nahi khaya tumhari wajah se. (heena ke sir par hath ferte hue)

Main gaadi se utarte hue dono baap beti ko baate karte hue dekh raha tha or unn dono ki baate sunkar muskura raha tha.

Main : Maaf kijiye sarpanch ji aaj thoda der ho gai. ye lijiye aapki amanat ki chaabi.

Sarpanch : (chaabi pakadte hue) koi baat nahi.... arre ye tumhare sir me kya hua

Main : kuch nahi wo zara chot lag gai thi.(apne mathe par hath ferte hue)

Sarpanch : (mere kandhe par hath rakhte hue) apna khyaal rakha karo

Main : ji jarur...

Heena : abbu wo gaadi wali baat bhi to karo na inse.

Sarpanch : arre haa main to bhul hi gaya.... beta wo heena kitne din se pichhe padi hai isko nayi gaadi leke deni hai... to mujhe samajh nahi aa raha tha ki kounsi gaadi isse leke doo tum bataao iske liye kounsi gaadi achhi rahegi.

Main : koi bhi gaadi le dijiye... bas itna khayaal rakhna ki gaadi choti ho jisse inko (heena ko) bhi chalane me asani rahegi.

Heena : abbu aap asal baat to bhul hi gaye ye wali nahi sath jane wali baat puchho naaa.....

Sarpanch : Aap khud hi puch lo maharani sahiba... (heena ke aagey hath jodte hue)

Heena : Neer ji wo main soch rahi thi ki aap ko humse jyaadaa samajh hai gaadiyo ki to aap bhi hamaare sath hi shehar chalen naa nayi gaadi lene ke liye (muskurate hue)

Main : (chonkte hue) Main... main kaise.... nahi aap log hi le aayiye mujhe kheto me bhi kaam hota hai naa.

Sarpanch : arre beta maan jao nahi to ye sara ghar sir par utha legi. jahan tak kheto ki baat hai to main apne mulazim bhej dunga 1-2 din ke liye wo log tumhare khet ka khyaal rakhenge jab tak tum hamaare sath shehar rahoge.

Main : thik hai.. lekin ek baar baba se puch lunga to behtar hoga.

Sarpanch : tumhare baba ki fikar tum na karo main hun na main kal hi jake baat kar aauga fir parso hum shehar chalenge. Ab to koi aitraaz nahi tumko.

Main : ji nahi... Achha sarpanch ji ab ijajat dijiye kaafi raat ho gai hai sab log khane par intzaar kar rahe honge.

Sarpanch : thik hai.... Ruko tumko mansi chod aayega... Mansiiii... (apne mulazim ko awaz lagate hue)

Mansi : ji malik (daudkar sarpanch ke samne aate hue)

Sarpanch : Neer ko unke ghar chod aao jeep par.

Mansi : ji... thik hai malik.

Uske baad mansi mujhe jeep par ghar tak chod gaya or mere ghar aate hi nazi mujhe khaa jane wali nazaro se ghur-ghur kar dekhne lagi lekin wo bol kuch nahi rahi thi or aise hi gusse se mujhe ghurti hui chup-chap fiza ke kamre me chali gai. tabhi fiza bhi rasoyi me se aa gai...

Fiza : aa gaye Neer bahut der kardi.(muskurate hue)

Main : kuch nahi wo zra heena ko gaadi seekha raha tha to der ho gai.

Fiza : Tumhare itni chot lagi hai ek din nahi seekhate to kya ho jana tha.

Main : nahi wo baba ne heena ko bol diya tha to main mana kaise karta isliye socha jab aa gaya hun to gaadi chalani bhi seekha hi deta hun.

Fiza : wo sab to thik hai lekin kuch apna bhi khyaal rakha karo.

Main : (charo taraf dekhte hue) tum ho naa mera khyaal rakhne ke liye...(muskuakar)

Fiza : achha ab jyaadaa pyaar dikhane ki jarurat nahi hai chalo jao jake naha lo fir sath me khana khayenge.

Main : achha....

Uske baad main nahane chala gaya or fiza bhi wapis rasoyi me chali gai. Kuch der baad main jaba nahake bahar aaya to fiza akeli hi khane ka sab samaan table par rakh rahi thi.

Main : Nazi dikhayi nahi de rahi wo kaha hai.

Fiza : Wo andar hai kamre me keh rahi thi bhukh nahi hai isliye khana nahi khayegi. Ab tum to jaldi aao mujhe bahut bhukh lagi hai chalo aaj hum dono khana khaa lete hain.(muskurakar)

Main : Tum khana shuru karo main zra nazi ko dekhkar aata hun.

Fiza : achha...

Main jab fiza ke kamre me gaya to nazi andar ulti hoke gaanD upar karke leti thi or bar-bar takiye ko tod-marod rahi thi. maine ek nazar usko dekha or wapis khane ke table ke pass aa gaya.

Main : fiza zra nazi ki khane ke thali banado main abhi usko khana khilake aata hun.

Fiza : thik hai...lekin wo to keh rahi thi bhukh nahi hai.

Main : tum khana to lagao baki main khila lunga usko

Fiza : Thik hai.

Fir fiza ne nazi ki khane ki thali mujhe de di or main wo thali leke kamre me chala gaya andar abhi bhi nazi waisi hi ulti hoke leti hui thi.

Main : lagta hai aaj bahut gussa ho (muskurate hue)

Nazi : tumse matlab...

Main : achha to mujhse gussa ho...

Nazi : main kyo kisi se gussa hone lagi.

Main : achha... to fir khana khane kyo nahi aayi...

Nazi : mujhe bhukh nahi hai

Main : thik hai thoda sa kha lo main tumhare liye khana leke aaya hun.

Nazi : (uthkar baithte hue) kisne bola tha khane lane ko nahi khana mujhe tum jao yahan se.

Main : aise kaise jau tumko khana khilaye bina to nahi jaunga. (muskurate hue)

Nazi : ab mere pass kya lene aaye ho jao usi bandriya ko jake khana khilao jiske sath badi has-has ke baate ho rahi thi.

Main : achhhaaa....to isliye naraz ho...Hahahahahaha

Nazi : hasso mat mujhe bahut gussa chadha hua hai.

Main : thik hai gussa mujh par utaro na fir khane ne tumhara kya bigada hai dekho kaise mayus hoke thali me pada hai bichara.

Nazi : (hansate hue) Neer tum jao na mujhe bhukh nahi hai.

Main : achha chalo aaj subah jaise karte hain.

Nazi : subah jaise kya

Main : jaise tumne mujhe khana khilaya tha apne hatho se main bhi tumko waise hi khilata hun fir to thik hai.

Nazi : tum jao na Neer mujhe nahi khana.

Main : (bed par baith te hue or thali me se roti ki burki todkar nazi ke munh ke samne karte hue) maine tumse pucha nahi ki tumko bhukh hai ya nahi chalo ab munh kholo....

Nazi : (muskurakar munh khole hue) aapne khaya...

Main : (naa me sir hilate hue)

Nazi : kyaaa... chalo aap bhi munh kholo main khilati hun (muskurakar)

Uske baad aise hi hamane ek dusre ko khana khilaya or ek dusre ko pyaar se dekhte rahe.

Main : waise tum heena se kis baat par gussa thi.

Nazi : Jante ho uss kameeni ne kounse kapde pehne the mere chaye girane ke baad.

Main : mere kapde pehne the to kya hua.

Nazi : na sirf aapke kapde pehne the balki usne wo kapde pehne the jo maine khud aapke liye

bade pyaar se seele the. isliye mujhe gussa aa raha tha.

Main : koi baat nahi usko kapdo se khush ho lene do tumhare pass to tumhara Neer khud hai fir kisi se jalan kaisi....hai naa

Nazi : (khush ho kar mujhe gale se lagate hue) ab gussa nahi karungi.

Main : chalo ab jaldi se khana khatam karo fir sona bhi hai bahut raat ho gai hai naa.

Nazi : ek baat bolu bura nahi manoge to....

Main : haa bolo

Nazi : wo jab apke sath hoti hai to mujhe aisa lagta hai jaise aap mujhse door ho gaye ho.

Main : kisi se baat kar lene ka matlab ye nahi hota nazi ki main uska hun... main sirf or sirf iss ghar ka hun bass mujhe itna pata hai.

Nazi : matlab sirf mere ho. (muskurate hue)

Main : achha ab door hoke baitho fiza dekh legi to kya sochegi.

Nazi : (door hoke baith te hue) ye to maine socha hi nahi...hahahaha

Main : isliye kehta hun tum me abhi bachpana hai

Nazi : (nazre jhukakar muskurate hue)

Main : achha ab main chalta hun thik hai bahut raat ho gai hai tum bhi so jao ab.

Nazi : mere wale kamre me jake sona aaj thik hai.

Main : Hhhhmm achha... (thali leke khada hote hue)

Nazi : arre ye aap kyo leke jaa rahe ho chodo main le jaungi (thali mujhse lete hue)

Main : thik hai

Uske baad main khada hua or jaise hi kamre se bahar jane laga nazi ki awaz mere kano se takrayi jisne mere kadam rok diye.

Nazi : aaj munh meetha nahi karna (muskurakar)

Main : karna to hai lekin....fiza dekh sakti hai isliye abhi rehne dete hain (muskurakar)

Nazi : soch lo.... aisa moqa fir nahi dungi (muskurate hue)

Main : koi baat nahi mujhe kuch karne ke liye moqe ki jarurat nahi sirf marzi honi chahiye.

Itne me fiza ki awaaz aa gai to hum dono chup ho gaye....

Fiza : (kamre me aate hue) arre nazi ne khana khaya ya nahi.

Main : khaa liya (muskurate hue)

Fiza : kya baat hai jab maine bola tha to nahi khaya tum aaye to khaa bhi liya.

Nazi : aisa kuch nahi hai bhabhi wo bas ye zidd karke baith gaye to khana pada.

Fiza : achha ab chalo rasoyi me thoda kaam karwa do mere sath fir sona bhi hai.

Nazi : achha abhi aayi bhabhi.

Main : mere liye or koi hukum sarkaar....(muskurate hue)

Fiza : ji... aap jayiye or jake apne naye kamre me so jayiye aram se (muskurakar)

Main : jo hukum.... Aaj baba ke pass nahi sona kya.

Fiza : nahi wo baba keh rahe the ki agar Neer dusre kamre me sona chahe to sula dena nahi to yahan bhi (baba ke kamre me) soyega to mujhe koi aitraaz nahi.

Main : to main kaha so fir...

Fiza : jahan tum chahte ho so jao aaj to sara din main akeli hi lagi rahi nazi bhi tumhare sath shehar chali gai thi to mujhe bhi bahut neend aa rahi hai.

Nazi : to bhabhi aap so jao naa waise bhi baba ne jyaadaa kaam karne se mana kiya hai na aapko.

Fiza : to fir ghar ka baki bacha hua kaam kaun karega.

Nazi : main hun naa sambhal lungi aap jao jake so jao.(muskurate hue)

Fiza : achha... thik hai (muskurate hue) nazi sone se pehle yaad se Neer ko doodh garam karke de dena maine usme dawayi daal di hai.

Nazi : achha bhabhi.

Uske baad nazi rasoyi me chali gai or fiza apna bistar karne lagi main bhi apne naye kamre me jake let gaya or sone ki koshish karne laga or din bhar hue sare kamo ke bare me sochne laga. thodi der main aise hi bistar par leta karwate badalta raha lekin mujhe neend nahi aa rahi thi. kuch der baad nazi bhi doodh ka leke mere kamre me aa gai.

Nazi : so gaye kya.

Main : nahi jaag raha hun kya hua

Nazi : ye dawayi wala doodh layi hun aapke liye pee lo.

 
अपडेट-32

मैने बिना कुछ बोले दूध पकड़ लिया ऑर पीने लगा. ऑर नाज़ी ऐसे ही मेरे पास खड़ी मुझे देखती रही ऑर मुस्कुराती रही.

मैं : लो जी ये दूध तो हो गया अब आपके दूध की बारी है.

नाज़ी : (चोन्कते हुए) मेरा कौनसा दूध

मैं : पास आओ

नाज़ी : (ना मे सिर हिलाते हुए) अब कोई शरारत मत करना भाभी जाग ना जाए.

मैं : जाके देख कर आओ अगर वो सो गई तो वापिस आ जाना. (मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : मैं अभी देखकर आई हूँ भाभी तो कब की सो गई है

मैने जल्दी से नाज़ी की बाजू पकड़कर अपनी तरफ खींचा जिससे वो खुद को संभाल नही सकी ऑर मेरे उपर आके गिरी जिसको मैने अपनी दोनो बाजू मे थाम लिए.

नाज़ी : क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे भाभी जाग जाएगी.

मैं : नही जागेगी अभी तुम खुद ही तो देखकर आई हो.

नाज़ी : फिर भी जाग गई तो...मुझे डर लगता है छोड़ो ना

मैं : अच्छा मुँह मीठा करवाओ फिर जाने दूँगा.

नाज़ी : लेकिन सिर्फ़ एक ठीक है.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हम्म...

नाज़ी मेरे उपर लेटी हुई थी ऑर उसने भी अपनी सहमति मे आँखें बंद कर ली फिर मैने उसके चेहरे को अपने हाथ से पकड़ा ऑर अपने होंठ उसके नाज़ुक ऑर रसीले होंठों पर रख दिए. मेरे होंठ उसके होंठों के साथ मिलते ही उसने अपना पूरा बदन ढीला छोड़ दिया जिससे मैने उसके होंठ चूस्ते हुए अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख दिए ऑर सख्ती से उसको अपनी बाजू मे क़ैद कर लिया अब मैं कभी उसके नीचे वाला होंठ चूस रहा था कभी उसके उपर वाला होंठ चूस रहा था वो बस अपनी आँखें बंद किए हुए मेरे उपर लेटी हुई थी ऑर अपने दोनो हाथ मेरी छाती पर रखे हुए थे. मुझे उसका नाज़ुक ऑर नरम बदन मदहोश सा करता जा रहा था जिससे मैं खुद पर काबू नही कर पा रहा था इसलिए मैने उसके होंठ चूस्ते हुए ही उसको पलटाया ऑर बिस्तर की दूसरी तरफ गिरा दिया ऑर खुद उसके उपर आ गया उसकी साँस लगातार तेज़ चल रही थी ऑर अब वो भी मेरी पीठ पर अपने हाथ फेर रही थी. मैं हीना के साथ हुई चुदाई से वैसे ही गरम था उस पर मुझे नाज़ी जैसा नाज़ुक बदन फिर से मिल गया इसलिए मैं बहुत जल्दी गरम हो गया.

अब मेरा एक हाथ नाज़ी की गर्दन पर घूम रहा था ऑर दूसरा हाथ उसके सिर के नीचे था जिससे मैने उसके सिर को उपर उठा रखा था ताकि होंठ चूसने मे आसानी रहे. नीचे मेरा लंड भी पूरी तरह खड़ा हो चुका था जो नाज़ी की टाँगो के बीच मे फसा हुआ था अब मैने अपने एक हाथ जो उसकी गर्दन पर था उससे नीचे ले जाना शुरू किया ऑर उसके एक मम्मे को पकड़ लिया जिसे नाज़ी ने फॉरन अपने हाथ से झटक दिया मैने फिर से अपना हाथ उपर ले जाकर दुबारा उसके मम्मे को थाम लिया ऑर दबाने लगा जिसे एक बार फिर नाज़ी ने पकड़ लिया ऑर नीचे को झटक दिया साथ ही आँखें खोल कर मेरी आँखो मे देखा ऑर ना मे इशारा किया लेकिन मैं उस वक़्त इतना गरम हो गया था कि कुछ भी समझने की हालत मे नही था इसलिए मैने एक बार फिर नाज़ी के मम्मे को सख्ती से थाम लिया इस बार नाज़ी ने कुछ नही कहा ऑर मेरी आँखों मे देखकर मुझे ना इशारा करती रही.

फिर मैने अपना हाथ नीचे ले जाकर नाज़ी की कमीज़ ज़रा उपर की ऑर अपना हाथ अंदर डालने की कोशिश करना लगा जिससे नाज़ी ने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग किए ऑर अपने दोनो हाथो से मेरा हाथ पकड़ लिया.

नाज़ी : मत करो ना

मैं : कुछ नही होता मेरा दिल है.

उसके बाद मैने नाज़ी के दोनो हाथो को अपने एक हाथ से पकड़ लिया ऑर उपर कर दिया साथ ही दूसरा हाथ नीचे लेजा कर ज़बरदस्ती उसकी कमीज़ मे डाल दिया ऑर उसके पेट पर फेरने लगा साथ ही दुबारा उसके होंठ चूसने लगा. मेरा हाथ जैसे ही उसकी ब्रा तक पहुँचा उसने अपना एक हाथ छुड़ा लिया ऑर मेरे मुँह पर थप्पड़ मार दिया साथ ही डर कर अपना एक हाथ अपने मुँह पर रख लिया.

नाज़ी : नीर माफ़ कर दो मैने जान-बूझकर नही मारा वो ग़लती से हाथ उठ गया.

मैं : (नाज़ी के उपर से हट ते हुए) जाओ यहाँ से...

नाज़ी : नीर माफ़ कर दो मैने जान बूझकर नही मारा.

मैं : (गुस्से मे) मैने बोला ना जाओ यहाँ से.

इतना बोलने के साथ ही मैने उसकी बाजू पकड़ी ऑर अपने बिस्तर से उसको खड़ा कर दिया.

नाज़ी : नीर ज़्यादा ज़ोर से लगा क्या.

मैं : जाओ यहाँ से ग़लती मेरी थी जो तुम पर अपना हक़ जाता रहा था.

नाज़ी : (रोते हुए) ऐसा मत बोलो नीर ग़लती तो मुझसे हो गई माफ़ कर दो. (मेरा हाथ पकड़ते हुए) मुझे वहाँ किसीने कभी छुआ नही इसलिए ग़लती से हाथ उठ गया. अब कुछ भी कर लो मैं कुछ नही कहूँगी.

मैं : मुझे बहुत नींद आई है तुम जाओ ऑर जाके सो जाओ मुझे अब कुछ नही करना जो मिला इतना काफ़ी है.(अपना हाथ नाज़ी के हाथ से झटकते हुए)

उसके बाद मैं वापिस अपने बिस्तर पर लेट गया ऑर नाज़ी रोती हुई कमरे से चली गई. मुझे उस वक़्त सच मे बहुत गुस्सा आ गया था क्योंकि मैने नाज़ी से ऐसे-कुछ की कभी उम्मीद नही की थी लेकिन उसके इस तरह मुझ पर हाथ उठाने से जाने क्यो मुझे बहुत बुरा लगा. कुछ देर ऐसे ही मैं बिस्तर पर लेटा रहा ओर फिर थोड़ी ही देर मे मुझे नींद आ गई लेकिन आधी रात को अचानक मुझे अजीब बैचैनि सी महसूस होने लगी ऑर मेरी नींद खुल गई मेरा पूरा बदन पसीने से भीगा पड़ा था मेरे सिर मे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था जैसे अभी फॅट जाएगा ऑर मुझे बहुत तेज़ चक्कर भी आ रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे पूरा कमरा घूम रहा हो. मेरा पूरा बदन टूटने लगा मैं हिम्मत करके उठा लड़खड़ाते हुए पास पड़े मटके से थोड़ा सा पानी पी लिया ऑर कुछ अपने सिर मे भी डाल लिया थोड़ी देर बार मुझे एक उल्टी आई तो थोड़ा सुकून आया उसके बाद मैं आके फिर से बिस्तर पर लेट गया. पानी पीने से मुझे कुछ सुकून मिला ऑर कुछ ही देर मे मुझे फिर से नींद आ गई.

सुबह किसी के हिलाने से मेरी नींद खुली तो देखा फ़िज़ा मुझे उठा रही थी मेरे सिर मे अब भी तेज़ बहुत दर्द था ऑर मेरा पूरा बदन टूट रहा था मुझसे आँखें खोली नही जा रही थी ओर उनमे तेज़ जलन हो रही थी. जब मैने आँखें खोली तो बाबा नाज़ी ऑर फ़िज़ा मेरे पास ही खड़े थे. वो तीनो बड़ी फिकर-मंदी से मुझे देख रहे थे.

फ़िज़ा : नीर तुम्हे तो बहुत तेज़ बुखार है

मैं : पता नही हो गया होगा मेरे सिर मे भी बहुत दर्द हो रहा है.

फ़िज़ा : ये लो दवाई खा लो ठीक हो जाओगे.

नाज़ी : मैं सिर दबा दूँ.

मैं : ज़रूरत नही है.

बाबा : आज बेटा खेत नही जाना ऑर घर पर ही आराम करना.

मैं : जी बाबा.

उसके बाद मैने दवाई खाई ऑर सबने मुझे खेत नही जाने दिया ऑर घर मे ही आराम करने का बोल दिया. इसलिए अब मैं बाहर नही जा सकता था ओर दिन भर घर मे अपने कमरे मे ही बैठा रहा. कुछ देर फ़िज़ा मेरा सिर अपनी गोद मे रखकर दबाती रही जिससे मुझे काफ़ी आराम मिल रहा था फिर जब मुझे थोड़ा सुकून मिला तो मैने फ़िज़ा को रोक दिया ऑर वो भी बाहर चली गई ऑर घर के बाकी कामो मे लग गई. नाज़ी बार-बार मेरे सामने आ रही थी ऑर अपने कान पकड़कर माफी माँग रही थी लेकिन रात का वाक़या याद आते ही मेरे चेहरे पर उसके लिए गुस्सा आ जाता ऑर मैं उसकी तरफ देखता भी नही था. दुपहर को हीना मुझसे मिलने घर आ गई जिसे फ़िज़ा ने सीधा मेरे कमरे मे ही भेज दिया.

हीना : क्या हुआ नीर आज खेत नही गये आप मैं तो आपको दवाई देने खेत गई थी.

मैं : कुछ नही वो ज़रा बुखार आ गया था इसलिए...

हीना : क्या.... ओर आपने मुझे बताना भी ज़रूरी नही समझा.

मैं : अर्रे इसमे बताने जैसा क्या था हल्का सा बुखार था शाम तक ठीक हो जाएगा.

हीना : दवाई ली?

मैं : हाँ सुबह फ़िज़ा ने दे दी थी.

हीना : अच्छा आप आराम करो शाम को मैं फिर आउन्गि.(मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए)

उसके बाद हीना चली गई ऑर मैं उसको कमरे से बाहर निकलते हुए देखता रहा. सारा दिन ऐसे ही कमरे मे गुज़र गया ऑर शाम को हीना अपने वादे के मुताबिक़ फिर आ गई लेकिन इस बार उसके साथ एक डॉक्टर भी था. कुछ देर वो लोग बाहर बाबा के पास बैठे रहे ऑर फिर डॉक्टर , हीना, ऑर फ़िज़ा कमरे मे आ गये. ये वही डॉक्टर था जिसके पास हीना मुझे शहर मे दिखाने के लए लेके गई थी जिसको मैने देखते ही पहचान लिया. डॉक्टर ने आते ही पहले मेरा चेक-अप किया ऑर फिर मुझ दी हुई दवाई के बारे मे पुच्छने लगा जो डॉक्टर रिज़वाना ने मुझे रोज़ खिलाने के लिए दी थी.

डॉक्टर : आपको ये दवाइयाँ किसने दी है.

फ़िज़ा : जी शहर से इनके एक दोस्त आए थे उनके साथ एक डॉक्टर आई थी उसने दी है...क्यो क्या हुआ.

डॉक्टर : आप जानती है ये दवाई किस काम के लिए हैं.

फ़िज़ा : हंजी डॉक्टर ने इनकी याददाश्त के लिए इन्हे ये दवाइयाँ दी है ये हर बात भूल जाते हैं इसलिए....

डॉक्टर: (मुस्कुराते हुए) ये दवाइयाँ याददाश्त वापस लाने के लिए नही बल्कि दिमाग़ की तमाम याददाश्त को ख़तम करने के लिए है.

फ़िज़ा : (चोन्कते हुए) क्या.....

डॉक्टर : ये तो अच्छा हुआ कि इनके ब्लड मे शराब इतनी ज़्यादा है जिस वजह से जब इन्होने दवाई खाई तो दवाई इनको सूट नही हुई ऑर इनकी तबीयत खराब हो गई नही तो ये अगर रोज़ ऐसे ही ये दवाई लेते रहते तो इनको जो अब थोड़ा बहुत याद है वो भी सॉफ हो जाना था.

ये बात हम सब के लिए किसी झटके से कम नही थी. सबके दिमाग़ मे एक ही बात थी कि क्यो डॉक्टर रिज़वाना ने मुझे ग़लत दवाई दी. आख़िर क्यो ख़ान जैसा नेक़ ऑर ईमानदार इंसान मेरे साथ ऐसा कर रहा है. अब मेरी समझ मे आ रहा था कि रात को मुझे इतनी बचैनि क्यो हुई आख़िर क्यो मेरे सिर मे इतना जबरदस्त दर्द हुआ ये सब डॉक्टर रिज़वाना की दी हुई दवाई का ही कमाल था. अभी मैं इसी बात पर सोच ही रहा था कि हीना की आवाज़ आई.

हीना : ये कौन्से बेफ़्कूफ़ डॉक्टर के पास लेके गये थे आप लोग नीर को अगर इन्हे कुछ हो जाता तो कभी सोचा है.

फ़िज़ा : (परेशान होते हुए) मुझे तो खुद कुछ समझ नही आ रहा नही तो इनका बुरा तो हम सोच भी नही सकते.

डॉक्टर : कोई बात नही अभी तो सिर्फ़ एक ही डोज अंदर गई थी इसलिए ज़्यादा कुछ असर नही हुआ. ये मैं आपको कुछ दवाई लिखकर देता हूँ आप लोग ले आइए ऑर इन्हे देना शुरू कर दीजिए ऑर बाकी ये वाली दवाई इन्हे दुबारा मत देना.

हीना : (दवाई की पर्ची पकड़कर हाँ मे सिर हिलाते हुए) कोई बात नही मैं किसी को भेज कर अभी शहर से मंगवा लेती हूँ.

फ़िज़ा : हमें माफ़ कर दो नीर हमे नही पता था कि उस खबीज ने तुमको ग़लत दवाई दी है हम तो उससे नेक़ इंसान समझकर भरोसा कर बैठे.

मैं : कोई बात नही इसमे आपका क्या कसूर है. अब जवाब तो ख़ान को देना है.

फ़िज़ा : अब घर मे घुसकर तो दिखाए कमीना टांगे तोड़ दूँगी उसकी.

मैं : कोई कुछ नही बोलेगा उसको... अभी मुझे ये बात जानने दो कि उसने ऐसा क्यो किया.

फिर डॉक्टर ने मुझे एक इंजेक्षन लगाया जिससे कुछ ही देर मे मेरा बुखार भी उतर गया उसके बाद हीना ने भी अपने ड्राइवर को डॉक्टर को शहर छोड़ने के लिए भेज दिया साथ ही वो दवाई की पर्ची भी उसको दे दी. जब तक ड्राइवर नही आया हीना ऑर फ़िज़ा मेरे पास ही बैठी रही लेकिन नाज़ी कमरे के बाहर ही खड़ी रही उसको सब अंदर बुलाते रहे लेकिन वो अंदर नही आई बस दरवाज़े पर खड़ी मुझे देखती रही.

मेरे दिमाग़ मे बस इनस्पेक्टर ख़ान ऑर डॉक्टर रिज़वाना का ही ख़याल था मेरे दिमाग़ मे इस वक़्त एक साथ कई सवाल चल रहे थे. फिर अचानक इस डॉक्टर की कही हुई बात याद आई कि मुझे मेरे खून मे मिली शराब ने बचाया. लेकिन मैं तो शराब पीता ही नही फिर मेरे खून मे शराब कैसे आई. ऐसे ही कई सवाल थे जिनके जवाब मुझे चाहिए थे मुझे सिर्फ़ एक ही इंसान पता था जो मेरी बीती हुई जिंदगी के बारे मे जानता था जिससे मैं अपने बारे मे जान सकता था कि मैं कौन हूँ ओर मेरी असलियत क्या है इसलिए मैने सोच लिया था कि अब इनस्पेक्टर ख़ान से ही अपनी असलियत पता करूँगा.

हीना ऑर फ़िज़ा मेरे पास बैठी रही ऑर मेरे बारे मे ही बाते करती रही लेकिन मैं बस अपने ही ख्यालो मे गुम था ऑर आने वाले वक़्त के बारे मे सोच रहा था. जाने कब मुझे नींद आ गई ऑर मैं सो गया मुझे पता ही नही चला. रात को जब मेरी नींद खुली तो मैं उठकर बैठ गया मेरे पास ही कुर्सी पर फ़िज़ा बैठी-बैठी ही सो गई थी मैं उठ कर खड़ा हुआ तो मैने खुद को बहुत ताज़ा महसूस किया जैसे मुझे कुछ हुआ ही नही. मैने फ़िज़ा को उठाना सही नही समझा इसलिए उसको धीरे से सीधा करके कुर्सी पर बिठाया ऑर एक बाजू उसकी गर्दन मे डाली ऑर दूसरी उसकी टाँगो के नीचे से लेजा कर उसे गोद मे उठा लिया ऑर बेड पर अच्छे से लिटा दिया वो अब भी नींद मे थी ऑर सोई हुई बहुत मासूम लग रही थी. उसके चेहरे पर आने वाली लट उसकी खूबसूरती को ऑर निखार रही थी मैने उसके खूबसूरत चेहरे से वो बाल की लट को उंगली से साइड पर किया ऑर उसके मासूम चेहरे को देखने लगा ऑर दिन भर हुए सारे हालात के बारे मे सोचने लगा कि कैसे फ़िज़ा ने सारा दिन मेरी खिदमत की. वो शायद ठीक ही कहती थी कि दुनिया के लिए उसका शोहार क़ासिम था लेकिन असल मे वो मुझे अपना शोहार मानती थी. एक वाफ्फ़ादर बीवी की तरह हमेशा मेरा इतना ख्याल रखती थी. मैने हल्के से उसके होंठों को चूम लिया जिससे उसकी आँखें खुल गई ऑर वो मुस्कुरा कर मुझे देखने लगी.

Update-32

Maine bina kuch bole doodh pakad liya or peene laga. or nazi aise hi mere pass khadi mujhe dekhti rahi or muskurati rahi.

Main : Loh ji ye doodh to ho gaya ab aapke doodh ki baari hai.

Nazi : (chonkte hue) mera kounsa doodh

Main : pass aao

Nazi : (na me sir hilate hue) ab koi shararat mat karna bhabhi jaag na jaye.

Main : jake dekh kar aao agar wo so gai to wapis aa jana. (muskurate hue)

Nazi : main abhi dekhkar aayi hun bhabhi to kabki so gai hai

Maine jaldi se nazi ki baaju pakadkar apni taraf khincha jisse wo khud ko sambhaal nahi saki or mere upar aake giri jisko maine apni dono baaju me thaam liye.

Nazi : kya kar rahe ho chodo mujhe bhabhi jaag jayegi.

Main : nahi jagegi abhi tum khud hi to dekhkar aayi ho.

Nazi : fir bhi jaag gai to...mujhe darr lagta hai chodo naa

Main : achha munh meetha karwao fir jane dunga.

Nazi : lekin sirf ek thik hai.

Main : (haa me sir hilate hue) Hhhmm...

Nazi mere upar leti hui thi or usne bhi apni sehmati me aankhen band kar lee fir maine uske chehre ko apne hath se pakda or apne honth uske nazuk or raseele honthon par rakh diye. mere honth uske honthon ke sath milte hi usne apna poora badan dheela chod diya jisse maine uske honth chuste hue apne dono hath uski kamar par rakh diye or sakhti se usko apni baju me qaid kar liya ab main kabhi uske niche wala honth chus raha tha kabhi uske upar wala honth chus raha tha wo bas apni aankhen band kiye hue mere upar leti hui thi or apne dono hath meri chaatee par rakhe hue the. Mujhe uska nazuk or naram badan madhosh sa karta jaa raha tha jisse main khud par kaboo nahi kar paa raha tha isliye maine uske honth chuste hue hi usko paltaya or bistar ki dusri taraf gira diya or khud uske upar aa gaya uski saans lagatar tez chal rahi thi or ab wo bhi meri peeth par apne hath fer rahi thi. main heena ke sath hui chudayi se waise hi garam tha uss par mujhe nazi jaisa nazuk badan fir se mil gaya isliye main bahut jaldi garam ho gaya.

Ab mera ek hath nazi ki gardan par ghum raha tha or dusra hath uske sir ke niche tha jisse maine uske sir ko upar utha rakha tha taaki honth chusne me asani rahe. Niche mera lund bhi poori tarah khada ho chuka tha jo nazi ki taango ke bich me phasa hua tha ab maine apne ek hath jo uski gardan par tha usse niche le jana shuru kiya or uske ek mamme ko pakad liya jise nazi ne foran apne hath se jhatak diya maine fir se apna hath upar le jakar dubara uske mamme ko thaam liya or dabane laga jise ek baar fir nazi ne pakad liya or niche ko jhatak diya sath hi aankhen khol kar meri aankho me dekha or naa me ishara kiya lekin main uss waqt itna garam ho gaya tha ki kuch bhi samjhne ki haalat me nahi tha isliye maine ek baar fir nazi ke mamme ko sakhti se thaam liya iss baar nazi ne kuch nahi kha or meri aankhon me dekhkar mujhe naa ishara karti rahi.

Fir maine apna hath niche le jakar nazi ki kameez zra upar ki or apna hath andar daalne ki koshish karna laga jisse nazi ne apne honth mere honthon se alag kiye or apne dono hatho se mera hath pakad liya.

Nazi : mat karo naa

Main : kuch nahi hota mera dil hai.

Uske baad maine naazi ke dono hatho ko apne ek hath se pakad liya or upar kar diya sath hi dusra hath niche lejakar jabardasti uski kameez me daal diya or uske pet par ferne laga sath hi dubara uske honth chusne laga. mera hath jaise hi uski Bra tak pohoncha usne apna ek hath chuda liya or mere munh par thappad maar diya sath hi darr kar apna ek hath apne munh par rakh liya.

Nazi : Neer maaf kar do maine jaan-bujhkar nahi mara wo galti se hath uth gaya.

Main : (nazi ke upar se hat te hue) jao yahan se...

Nazi : Neer maaf kar do maine jaan bujhkar nahi mara.

Main : (gusse me) maine bola na jao yahan se.

Itna bolne ke sath hi maine uski baaju pakdi or apne bistar se usko khada kar diya.

Nazi : Neer jyaadaa jor se laga kya.

Main : jao yahan se galti meri thi jo tum par apna haq jata raha tha.

Nazi : (rote hue) aisa mat bolo Neer galti to mujhse ho gai maaf kar do. (mera hath pakdte hue) mujhe wahan kisine kabhi chuwa nahi isliye galti se hath utha gaya. ab kuch bhi kar lo main kuch nahi kahungi.

Main : mujhe bahut neend aayi hai tum jao or jake so jao mujhe ab kuch nahi karna jo mila itna kaafi hai.(apna hath nazi ke hath se jhatakte hue)

Uske baad main wapis apne bistar par let gaya or nazi roti hui kamre se chali gai. mujhe uss waqt sach me bahut gussa aa gaya tha kyonki maine nazi se aise-kuch ki kabhi ummeed nahi ki thi lekin uske iss tarah mujh par hath uthane se jane kyo mujhe bahut bura laga. kuch der aise hi main bistar par leta raha or fir thodi hi der me mujhe neend aa gai lekin adha raat ko achanak mujhe ajeeb baichaini si mehsoos hone lagi or meri jaag khul gai mera poora badan paseene se bheega pada tha mere sir me bahut tez dard ho raha tha jaise abhi phat jayega or mujhe bahut tez chakkar bhi aa rahe the aisa lag raha tha jaise poora kamra ghum raha ho. mera poora badan tootne laga main himmat karke utha ladkhadate hue pass pade matke se thoda sa paani pee liya or kuch apne sir me bhi daal liya thodi der baar mujhe ek ulti aayi to thoda sukoon aaya uske baad main aake fir se bistar par let gaya. paani peene se mujhe kuch sukoon mila or kuch hi der me mujhe fir se neend aa gai.

Subah kisi ke hilane se meri jaag khuli to dekha fiza mujhe utha rahi thi mere sir me ab bhi tez bahut dard tha or mera poora badan toot raha tha mujhse aankhen kholi nahi jaa rahi thi or unme tez jalan ho rahi thi. jab maine aankhen kholi to baba nazi or fiza mere pass hi khade the. wo teeno badi fikar-mandi se mujhe dekh rahe the.

Fiza : Neer tumhe to bahut tez bukhaar hai

Main : pata nahi ho gaya hoga mere sir me bhi bahut dard ho raha hai.

Fiza : ye lo dawayi kha lo thik ho jaoge.

Nazi : main sir daba doo.

Main : jarurat nahi hai.

Baba : aaj beta khet nahi jana or ghar par hi araam karna.

Main : ji baba.

Uske baad maine dawayi khayi or sabne mujhe khet nahi jane diya or ghar me hi araam karne ka bol diya. isliye ab main bahar nahi jaa sakta tha or din bhar ghar me apne kamre me hi baitha raha. kuch der fiza mera sir apni god me rakhkar dabati rahi jisse mujhe kaafi aram mil raha tha fir jab mujhe thoda sukoon mila to maine fiza ko rok diya or wo bhi bahar chali gai or ghar ke baki kaamo me lag gai. Nazi bar-bar mere samne aa rahi thi or apne kaan pakadkar maafi maang rahi thi lekin raat ka waqeya yaad aate hi mere chehre par uske liye gussa aa jata or main uski taraf dekhta bhi nahi tha. dupehar ko heena mujhse milne ghar aa gai jise fiza ne seedha mere kamre me hi bhej diya.

Heena : kya hua Neer aaj khet nahi gaye aap main to aapko dawayi dene khet gai thi.

Main : kuch nahi wo zra bukhaar aa gaya tha isliye...

Heena : kya.... or aapne mujhe batana bhi jaruri nahi samjha.

Main : arre isme batane jaisa kya tha halka sa bukhaar tha shaam tak thik ho jayega.

Heena : dawayi lee?

Main : haa subah fiza ne de di thi.

Heena : Achha aap aram karo sham ko main fir aaungi.(mere hath par apna hath rakhte hue)

Uske baad heena chali gai or main usko kamre se bahar nikalte hue dekhta raha. sara din aise hi kamre me guzar gaya or shaam ko heena apne vaade ke mutabiq fir aa gai lekin iss bar uske sath ek doctor bhi tha. kuch der wo log bahar baba ke pass baithe rahe or fir doctor , heene, or fiza kamre me aa gaye. Ye wahi doctor tha jiske pass heena mujhe shehar me dikhane ke lie leke gai thi jisko maine dekhte hi pehchaan liya. Doctor ne aate hi pehle mera check-up kiya or fir mujh di hui dawayi ke bare me puchhne laga jo Doctor rizwana ne mujhe roz khilane ke liye di thi.

Doctor : aapko ye dawayiyaan kisne di hai.

Fiza : ji shehar se inke ek dost aaye the unke sath ek doctor aayi thi usne di hai...kyo kya hua.

Doctor : aap janti hai ye dawayi kis kam ke liye hain.

Fiza : hanji doctor ne inki yaddasht ke liye inhe ye dawayiyaan di hai ye har baat bhul jate hain isliye....

Doctor: (muskurate hue) ye dawayiyaan yaddasht wapas lane ke liye nahi balki dimaag ki tamaam yaddasht ko khatam karne ke liye hai.

Fiza : (chonkte hue) kyaaaa.....

Doctor : ye to achha hua ki inke blood me sharab itni jyaadaa hai jis wajah se jab inhone dawayi khayi to dawayi inko suit nahi hui or inki tabiyat kharab ho gai nahi to ye agar roz aise hi ye dawayi lete rehte to inko jo ab thoda bahut yaad hai wo bhi saaf ho jana tha.

Ye baat hum sab ke liye kisi jhatke se kam nahi thi. Sabke dimaag me ek hi baat thi ki kyo doctor rizwana ne mujhe galat dawayi di. Akhir kyo khan jaisa neq or imaandar insaan mere sath aisa kar raha hai. ab meri samajh me aa raha tha ki raat ko mujhe itni bachaini kyo hui akhir kyo mere sir me itna jabardast dard hua ye sab doctor rizwana ki di hui dawayi ka hi kamaal tha. abhi main isi baat par soch hi raha tha ki heena ki awaz aayi.

Heena : ye kounse befkuf doctor ke pas leke gaye the aap log Neer ko agar inhe kuch ho jata to kabhi socha hai.

Fiza : (pareshaan hote hue) mujhe to khud kuch samajh nahi aa raha nahi to inka bura to hum soch bhi nahi sakte.

Doctor : koi baat nahi abhi to sirf ek hi dose andar gai thi isliye jyaadaa kuch asar nahi hua. ye main aapko kuch dawayi likhkar deta hun aap log le aayiye or inhe dena shuru kar dijiye or baki ye wali dawayi inhe dubara mat dena.

Heena : (dawayi ki parchi pakadkar haa me sir hilate hue) koi baat nahi main kisi ko bhej kar abhi shehar se mangwa leti hun.

Fiza : hume maaf kar do Neer hume nahi pata tha ki uss khabeez ne tumko galat dawayi di hai hum to usse neq insaan samajhkar bharosa kar baithe.

Main : koi baat nahi isme apka kya kasoor hai. ab jawab to khan ko dena hai.

Fiza : ab ghar me ghuskar to dikhaye kameena taangey tod dungi uski.

Main : koi kuch nahi bolega usko... abhi mujhe ye baat janne do ki usne aisa kyo kiya.

Fir doctor ne mujhe ek injection lagaya jisse kuch hi der me mera bukhaar bhi utar gaya uske baad heena ne bhi apne driver ko doctor ko shehar chodne ke liye bhej diya sath hi wo dawayi ki parchi bhi usko de di. jab tak driver nahi aaya heena or fiza mere pass hi baithi rahi lekin nazi kamre ke bahar hi khadi rahi usko sab andar bulate rahe lekin wo andar nahi aayi bas darwaze par khadi mujhe dekhti rahi.

Mere dimaag me bas inspector khan or doctor rizwana ka hi khayaal tha mere dimaag me iss waqt ek sath kai sawaal chal rahe the. fir achanak iss doctor ki kahi hui baat yaad aayi ki mujhe mere khun me mili sharab ne bachaya. Lekin main to sharab peeta hi nahi fir mere khun me sharab kaise ayi. aise hi kai sawaal the jinke jawab mujhe chahiye the mujhe sirf ek hi insaan pata tha jo meri beeti hui jindagi ke bare me janta tha jisse main apne bare me jaan sakta tha ki main kaun hun or meri asaliyat kya hai isliye maine soch liya tha ki ab inspector khan se hi apni asaliyat pata karunga.

Heena or fiza mere pass baithi rahi or mere bare me hi baate karti rahi lekin main bas apne hi khyaalo me gum tha or aane wale waqt ke bare me soch raha tha. jane kab mujhe neend aa gai or main so gaya mujhe pata hi nahi chala. Raat ko jab meri jaag khuli to main uthkar baith gaya mere pass hi kursi par fiza baithi-baithi hi so gai thi main uth kar khada hua to maine khud ko bahut taaza mehsoos kiya jaise mujhe kuch hua hi nahi. maine fiza ko uthana sahi nahi samjha isliye usko dheere se seedha karke kursi par bithaya or ek baju uski gardan me daali or dusri uski taango ke niche se lejakar usse god me utha liya or bed par achhe se lita diya wo ab bhi neend me thi or soyi hui bahut masoom lag rahi thi. uske chehre par aane wali latt uski khubsurati ko or nikhaar rahi thi maine uske khubsurat chehre se wo bal ki latt ko ungali se side par kiya or uske masoom chehre ko dekhne laga or din bhar hue sare halaat ke bare me sochne laga ki kaise fiza ne sara din meri khidmat ki. wo shayad thik hi kehti thi ki duniya ke liye uska shohar qasim tha lekin asal me wo mujhe apna shohar manti thi. ek waffadar biwi ki tarah hamesha mera itna khyaal rakhti thi. maine halke se uske honthon ko chum liya jisse uski aankhen khul gai or wo muskurakar mujhe dekhne lagi.

 
अपडेट-33

फ़िज़ा : आप उठ गये जान... अब कैसा महसूस कर रहे हैं.

मैं: बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ जैसे कुछ हुआ ही नही मुझे. लेकिन यार तुम क्यों जाग गई सो जाओ अभी बहुत रात बाकी है.

फ़िज़ा : मैं तो आपके पास ही बैठी थी.... जान पता ही नही चला कब आँख लग गई.

मैं : कोई बात नही अब तुम आराम करो.

फ़िज़ा : नही आप यहाँ सो जाओ मैं अब उस कमरे मे जाके सो जाउन्गी.

मैं : क्यो यहाँ सो जाओगी तो कुछ हो जाएगा.

फ़िज़ा : होगा तो कुछ नही पर अभी आपको आराम की ज़रूरत है.

मैं : तुम्हारे उपर लेट जाता हूँ ना इससे ज़्यादा आराम तो दुनिया मे नही होगा.

फ़िज़ा : (मेरे दोनो गाल पकड़ कर खींचते हुए)ठीक होते ही बदमाशी शुरू करदी (मुस्कुराते हुए) अब आप उपर लेटना तो भूल ही जाइए कुछ वक़्त के लिए.

मैं : क्यों.....

फ़िज़ा : वो इसलिए क्योंकि अब मेरे साथ कोई ऑर भी है...मैं नही चाहती मेरे छोटे नीर को आपकी किसी शरारत की वजह से तक़लीफ़ हो. (मुस्कुराते हुए) लेकिन हाँ साथ ज़रूर लेट सकती हूँ.

मैं : अच्छा मतलब अब प्यार करना भी बंद...(रोने जैसा मुँह बनाते हुए)

फ़िज़ा : सिर्फ़ कुछ महीनो के लिए उसके बाद जैसे चाहे प्यार कर लेना. (मेरे होंठ चूमते हुए)

उसके बाद हम ऐसे ही कुछ देर बाते करते रहे ऑर फिर फ़िज़ा अपने कमरे मे जाके सो गई ओर मैं भी वापिस अपने बिस्तर पर आके लेट गया ऑर कुछ देर मे दवाई के नशे की वजह से दुबारा सो गया. मेरे 2-3 दिन ऐसे ही गुज़रे बाबा ने मुझे खेत पर भी नही जाने दिया ऑर मैं सारा दिन घर पर ही बैठा रहता. लेकिन नाज़ी से अब मैं दूरी बनाके रखने लगा था वो हर वक़्त मुझसे बात करने की कोशिश करती लेकिन मैं हर बार उसकी बात को अनसुना कर देता. हाँ इतना ज़रूर था कि रोज़ शाम को हीना मेरा पता लेने आती ऑर मेरे साथ थोड़ा वक़्त गुज़ारती मेरी वजह से वो नयी गाड़ी लेने भी नही गई क्योंकि वो चाहती थी कि मैं ठीक होके उसके साथ शहर चल सकूँ. जितने दिन मैं खेत नही गया उतने दिन हीना ने अपने मुलाज़िमो को मेरे खेत मे लगाए रखा ताकि मेरी गैर-मोजूदगी मे वो लोग मेरे खेत का ख्याल रखे.

मुझे अब घर मे पड़े हुए 3 दिन हो गये थे ऑर फिर अगली सुबह डॉक्टर रिज़वाना आ गई मेरा चेक-अप करने के लिए. उस वक़्त बाबा सैर करने गये हुए थे इसलिए फ़िज़ा ने ऑर नाज़ी ने आते ही उसको सुनानी शुरू करदी. मैं भी उस वक़्त सो रहा था लेकिन फ़िज़ा ऑर नाज़ी की ऊँची आवाज़ से मेरी नींद खुल गई ऑर मैं उठकर अपने कमरे से बाहर चला गया तो वहाँ फ़िज़ा ऑर नाज़ी डॉक्टर रिज़वाना से झगड़ रही थी ऑर रिज़वाना नज़रे झुकाकर सब सुन रही थी.

मैं : क्या हुआ शोर क्यो मचा रखा है.(आँखें मलते हुए)

फ़िज़ा : तुम अंदर जाओ नीर मुझे बात करने दो. (गुस्से मे)

रिज़वाना : अब आप कैसे हैं.

मैं : अर्रे डॉक्टर आप... जी मैं एक दम ठीक हूँ. (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : ये झूठी हम-दरदी अगर आप ना दिखाए तो ही अच्छा है अगर आपको नीर की इतनी ही फिकर होती तो आप उसको कभी ग़लत दवाई ना देती. हमने आप पर ऑर इनस्पेक्टर ख़ान पर इतना भरोसा किया ऑर आपने हमारे साथ कितना फरेब किया. कभी आपने सोचा अगर आपकी ग़लत दवाई से इनको कुछ हो जाता तो....

रिज़वाना : जी कुछ नही होता इनको.... आप लोग एक बार मेरी बात सुन लीजिए.

नाज़ी : हमे अब आपकी कोई बात नही सुननी मेहरबानी करके आप यहाँ से चली जाओ.

रिज़वाना : (परेशान होके अपने पर्स से मोबाइल निकलते हुए) अच्छा ठीक है मैं चली जाउन्गी लेकिन एक बार मेरी बात सुन लीजिए प्लज़्ज़्ज़.

नाज़ी : अब क्या झूठी कहानी सुननी है.

रिज़वाना : (फोन पर नंबर डायल करते हुए) बस 2 मिंट दीजिए मुझे.

रिज़वाना : (फोन पर) कहाँ हो तुम..... जल्दी से शेरा के घर आओ.... मुझे नही पता.... हाँ ठीक है.... अच्छा..... ओके (फोन रखते हुए)

फ़िज़ा, नाज़ी ऑर मैं हम तीनो रिज़वाना के जवाब का इंतज़ार कर रहे थे ऑर सवालिया नज़रों से उसकी तरफ देख रहे थे.

रिज़वाना : देखिए मैने कोई भी काम ग़लत नही किया मैने वही किया जो मुझे इनस्पेक्टर ख़ान ने कहा. नीर जैसा अब है वैसा ही सारी उम्र रहे इसलिए इसकी पुरानी याददाश्त मिटनी ज़रूरी थी क्योंकि अगर इसकी यादशत वापिस आती है तो फिर ये आज जैसा नही रहेगा मुमकिन है फिर ये नीर भी ना रहे ऑर फिर से शेरा बन जाए. क्योंकि इसकी पुरानी जिंदगी मे ये एक बहुत बड़ा अपराधी है. ख़ान को भी इसकी ऐसे ही ज़रूरत है वो पुराने शेरा पर भरोसा नही कर सकता लेकिन नीर पर कर सकता है क्योंकि वो इसको एक ऐसे मिशन पर भेजना चाहता है जहाँ ये जाएगा शेरा बनकर लेकिन होगा नीर ही.

फ़िज़ा : मेरी तो कुछ समझ नही आ रहा आप क्या कह रही है. (परेशान होते हुए)

रिज़वाना : नीर आज एक नेक़-दिल इंसान है इसमे कोई शक़ नही मैने ही इसका लाइ डिटेक्टर टेस्ट किया था उसमे इसने मुझे वही सब बताया जो आप लोगो ने ख़ान को बताया था. लेकिन इसके दिमाग़ की स्कॅनिंग करके मुझे पता चला कि इसकी याददाश्त वापिस आ सकती है अगर इसको इसकी पुरानी जिंदगी याद करवाई जाए तो ऑर आज भी इसके दिमाग़ के सिर्फ़ एक हिस्से से याददाश्त ख़तम हुई है अगर इसको इसकी पुरानी जिंदगी मे वापिस लेके जाया जाए तो इसकी वो याददाश्त वापिस आ सकती है ऑर इसी वजह से आज भी इसको अपनी पुरानी जिंदगी की काफ़ी चीज़े आज ही याद है ऑर इसके दिमाग़ के इंटर्नल मेमोरी मे स्टोर है इसलिए आज भी ये लड़ाई करना, गाड़ी चलाना, हथियार चलाना ऑर बाकी काम जो ये बचपन से करता आया है इसको आज भी याद है ऑर आज भी ये वैसे ही बहुत महारत के साथ सब काम कर लेता है अगर ये वहाँ जाके शेरा बन गया तो फिर ये हमारे किसी का काम नही रहेगा.

फ़िज़ा : इनको भेजना कहाँ है (सवालिया नज़रों से)

रिज़वाना : वही तो मैं बता रही हूँ कि ख़ान इसको इसके गॅंग तक पहुँचा देगा जहाँ ये ख़ान का इनफॉर्मर बनकर इसके गॅंग की खबर हम तक पहुँच जाए. इससे ख़ान इसके सारे गॅंग को ख़तम कर सकता है.

अभी रिज़वाना बात ही कर रही थी कि घर के सामने एक जीप आके रुकी ऑर सब लोग एक साथ दरवाज़े के बाहर देखने लगे. जीप मे से ख़ान उतरा ऑर सीधा घर के अंदर आ गया फ़िज़ा ऑर नाज़ी अब भी उससे गुस्से से देख रही थी.

रिज़वाना : अच्छा हुआ तुम आ गये इनको दवाई के ऑर मिशन के बारे मे बताओ. (गुस्से से)

ख़ान : माफ़ कीजिए मैने आपसे कुछ बाते राज़ रखी लेकिन मैने आपके बाबा को सब बता दिया था ऑर उनकी इजाज़त से ही इसको याददाश्त की दवाई दिलवाई थी.

फ़िज़ा : (हैरानी से) बाबा जानते थे ग़लत दवाई के बारे मे.

ख़ान : जी जानते थे... मैने ही उनको मना किया था कि अभी किसी से कुछ ना कहे.

नाज़ी : आने दो बाबा को भी इनसे तो हम बात करेंगी पहले तुम ये बताओ ये डॉक्टरनी क्या कह रही है नीर के बारे मे इनको कहाँ भेजना है तुमने.

ख़ान : मैने आपसे पहले ही कहा था कि आज नीर कुछ भी है लेकिन इसके पुराने पाप इसको इतनी आसानी से नही छोड़ेंगे इसको क़ानून की मदद करनी पड़ेगी तभी ये आज़ाद हो सकता है.

मैं : (जो इतनी देर से खामोश सबकी बाते सुन रहा था) क्या करना होगा मुझे.

ख़ान : हमारी मदद करनी होगी तुम्हारे गॅंग का सफ़ाया करने मे.

मैं : गॅंग कौनसा गॅंग

ख़ान : (अपने कोट का बटन बंद करते हुए) ये लोग हर बुरा काम करते हैं ड्रग्स बेचने से लेके हथियार बेचने तक हर गुनाह मे इनका नाम है. इनके नाम अन-गिनत केस हैं लेकिन कोई सबूत नही है इसलिए हमेशा बरी हो जाते हैं.

मैं : तो आप मुझसे क्या चाहते हैं.

ख़ान : मुझे सबूत चाहिए जो मुझे सिर्फ़ तुम ही लाके दे सकते हो.

मैं : मैं ही क्यो आपके पास तो इतने लोग है किसी को भी शामिल कर दीजिए उन लोगो मे....

ख़ान : क्योंकि तुम इनके पुराने आदमी हो तुम पर वो लोग आसानी से भरोसा कर लेंगे नये आदमी को वो अपने पास तक नही आने देते. तुम अपनी पुरानी जिंदगी मे शेख साहब या तुम्हारे लिए बाबा के राइट-हॅंड थे इसलिए जहाँ तुम पहुँच सकते हो मेरा कोई आदमी नही पहुँच सकता.

मैं : ठीक है लेकिन उसके लिए मेरी याददाश्त ख़तम करने क़ी क्या ज़रूरत थी मैं तो वैसे भी आपका काम करने के लिए तैयार था.

रिज़वाना : क्योंकि तुम्हारे दिमाग़ की स्क़ेनिंग करके मुझे पता चला कि अगर तुमको तुम्हारी पुरानी ज़िंदगी मे लेके जाया जाए तो तुम्हारी याददाश्त लौट सकती है फिर ना तुम नीर रहोगे ना ही ये तुम्हारे घरवाले. मतलब सॉफ है फिर तुम उन लोगो मे जाके हमारी मदद नही करोगे अपनी पुरानी जिंदगी मे ही लौट जाओगे बस इसलिए तुम्हारी पुरानी याददाश्त मिटा रहे थे ताकि तुमको तुम्हारे ये घरवाले ओर तुम्हारी नेक़ी याद रहे.

ख़ान : सीधी सी बात है हम को नीर पर ऐतबार है शेरा पर नही.

तभी बाबा भी घर आ गये....

बाबा : अर्रे ख़ान साहब आप कब आए.

ख़ान : (अदब से सलाम करते हुए) जी बस अभी वो थोड़ा समस्या हो गया था.

नाज़ी : बाबा आपको सब पता था तो हम को क्यो नही बताया (गुस्से से)

बाबा : बेटी मैने जो किया इसके भले के लिए किया मैं नही चाहता था कि ये भी क़ासिम की तरह जैल मे अपनी जिंदगी गुज़ारे.

मैं : बाबा आपने जो किया ठीक किया लेकिन मुझे इस दवाई की ज़रूरत नही है मैं आपका बेटा हूँ ऑर आपका ही बेटा रहूँगा ऑर यक़ीन कीजिए मैं ख़ान का हर हालत मे साथ दूँगा.

ख़ान : सोच लो.. तुम पर मैं बहुत बड़ा दाव खेलने जा रहा हूँ कुछ गड़बड़ हुई तो....

मैं : (बीच मे बोलते हुए) आप को मुझ पर भरोसा करना होगा.

ख़ान : ठीक है... वैसे भी मेरे पास ऑर कोई रास्ता है भी नही....

मैं : तो कब जाना है मुझे फिर...

ख़ान : अर्रे इतनी जल्दी भी क्या है तुम अभी इस लायक़ नही हो कि वहाँ तक भेज दूँ उसके लिए पहले तुमको ट्रेंड करना पड़ेगा हर चीज़ सीखनी पड़ेगी.

रिज़वाना : क्यो ना आप कुछ दिन के लिए हमारे पास शहर आ जाए वहाँ हम आपको सब कुछ सिखा भी देंगे.

फ़िज़ा : कितने दिन का काम है. (परेशान होते हुए)

ख़ान : ज़्यादा नही बस कुछ ही दिन की बात है.

बाबा : ख़ान साहब आपको हम से एक वादा करना होगा

ख़ान : (सवालिया नज़रों से बाबा को देखते हुए) कैसा वादा जनाब...

बाबा : यही कि आपका मिशन पूरा हो जाने के बाद आप सही सलामत नीर को वापिस भेज देंगे. अब ये हमारी अमानत है आपके पास.

ख़ान : जी बे-फिकर रहिए मेरा काम होते ही मैं खुद इसे आज़ाद कर दूँगा ऑर यहाँ तक कि पोलीस रेकॉर्ड्स से इसका नाम भी मिटा दूँगा. उसके बाद पोलीस रेकॉर्ड्स मे शेरा मर जाएगा ऑर फिर ये नीर बनके अपनी सारी जिंदगी चैन से आप सब के साथ गुज़ार सकता है.

बाबा : ठीक है.

ख़ान : कुछ दिन के लिए नीर को मेरे पास भेज दीजिए ताकि इसको मैं इसका काम सीखा सकूँ उसके बाद इसको मैं मिशन पर भेज दूँगा.

मैं : मेरे जाने के बाद इनका ख्याल कौन रखेगा.

ख़ान : तुम इनकी बिल्कुल फिकर ना करो ये अब मेरी ज़िम्मेदारी है इनको किसी चीज़ की कमी नही होगी ये मैं वादा करता हूँ.

मैं : ठीक है फिर मैं कल ही आ जाता हूँ

ख़ान : जैसा तुम ठीक समझो. अच्छा जनाब (बाबा की तरफ देखते हुए) अब इजाज़त दीजिए.

बाबा : अच्छा ख़ान साहब.

उसके बाद डॉक्टर रिज़वाना ऑर ख़ान दोनो चले गये ऑर मैं दोनो को जाते हुए देखता रहा. बाबा एक दम शांत होके कुर्सी पर बैठे थे जैसे वो किसी गहरी सोच मे हो.

मैं : क्या हुआ बाबा

बाबा : बेटा मुझे समझ नही आ रहा कि तुमको ऐसी ख़तरनाक जगह पर भेजू या नही.

मैं : अर्रे बाबा आप फिकर क्यो करते हैं अपने बेटे पर भरोसा रखिए कुछ नही होगा.

बाबा : एक तुम पर ही तो भरोसा है बेटा....लेकिन तुम्हारी फिकर भी है कही तुमको कुछ हो गया तो मुझ ग़रीब के पास क्या बचेगा.

मैं : कुछ नही होगा बाबा.

फ़िज़ा : बाबा आपको इतने ख़तरनाक काम के लिए ख़ान को हाँ नही बोलना चाहिए था जाने वो लोग कैसे होंगे.

बाबा : शायद तुम ठीक कह रही हो बेटी लेकिन मैं भी क्या करता एक बेटा आगे ही जैल मे बैठा है दूसरे को भी जैल कैसे भेज देता इसलिए मजबूर होके मैने हाँ कहा था.

नाज़ी : लेकिन बाबा अगर वहाँ नीर को कुछ हो गया तो....

फ़िज़ा : (बीच मे बोलते हुए) ऐसी बाते ना करो नाज़ी वैसे ही मुझे डर लग रहा है.

मैं : अर्रे आप सब तो ऐसे ही घबरा रहे हो कुछ नही होगा... मुझे बस आप लोगो की ही फिकर है.

बाबा : तुम बस अपना ख्याल रखना बेटा..... हमें ऑर कुछ नही चाहिए (मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए)

ऐसे ही हम काफ़ी देर तक बाते करते रहे शाम को हीना फिर से मेरा पता लेने आ गई मैने उससे कुछ दिन इलाज करवाने का बता कर शहर जाने का बहाना बना दिया जिस पर पहले वो नाराज़ हुई लेकिन फिर वो मान गई ऑर कुछ वक़्त उसके साथ बिताने के बाद वो भी चली गई. अगले दिन वादे के मुताबिक़ सुबह ख़ान ने जीप भेजदी मुझे लेने के लिए. बाबा नाज़ी ऑर फ़िज़ा ने मुझे बहुत सारी दुआएँ ऑर भीगी आँखों के साथ रुखसत किया. मैं तमाम रास्ते नाज़ी. बाबा, फ़िज़ा ऑर हीना के बारे मे ही सोचता रहा ऑर इनके साथ बिताए वक़्त के बारे मे ही याद करता रहा. मुझे नही पता था कि जहाँ मैं जेया रहा हूँ वहाँ से वापिस आउन्गा या नही लेकिन इन लोगो के साथ बिताए वक़्त ने मेरे दिल मे इन लोगो के लिए बे-इंतेहा प्यार पैदा कर दिया था. वैसे तो ये लोग मेरे कोई नही थे लेकिन फिर भी ये मुझे मेरे अपनो से बढ़कर थे ऑर आज मैं जो कुछ भी करने जा रहा था इन लोगो के लिए ही करने जा रहा था. आज मेरे पास जो जिंदगी थी वो इन लोगो का ही "अहसान" था. ऐसी ही मैं अपनी ही सोचो मे गुम्म था कि मुझे पता ही नही चला कब हम शहर आ गये ऑर कब एक घर के बाहर गाड़ी रुकी.

मैं : ये कौनसी जगह है ये तो ख़ान का दफ़्तर नही है.

ड्राइवर : आपको ख़ान साहब ने यही बुलाया है.

मैं : अच्छा...

उसके बाद मैं जीप से उतरा ऑर उस घर मे चला गया जो देखने मे सरपंच की हवेली जैसा बड़ा नही था लेकिन काफ़ी शानदार बना हुआ था. गेट के बाहर 2 पोलीस वाले बंदूक थामे खड़े थे जिन्होने मुझे देखते ही छोटा गेट खोल दिया. मैं जब अंदर गया तो घर के चारो तरफ लगे खुश्बुदार फूलों ने मेरा वेलकम किया सामने एक काँच का बड़ा सा गेट लगा था जिसे मैं धकेल्ता हुआ अंदर चला गया. घर काफ़ी खूबसूरती से सजाया गया था मैं चारो तरफ नज़रें घूमाकर घर की खूबसूरती देख रहा था तभी एक मीठी सी आवाज़ मेरे कानो से टकराई....

रिज़वाना : घर अच्छा लगा (मुस्कुराते हुए)

मैं : जी बहुत खूबसूरत घर है....क्या ये ख़ान साहब का घर है (चारो तरफ देखते हुए)

रिज़वाना : जी नही ये मेरा घर है...अर्रे आप खड़े क्यो हो बैठो.

मैं : लेकिन मुझे तो ख़ान साहब ने बुलाया था

रिज़वाना : अब कुछ दिन आपको भी यही रहना है यही हम आपकी ट्रैनिंग भी मुकम्मल करवाएँगे ऑर ये एक सीक्रेट मिशन है इसलिए ख़ान ने दफ़्तर मे किसी को भी इसके बारे मे नही बताया.

मैं : अच्छा... लेकिन ख़ान साहब है कहा.

रिज़वाना : आप बैठिए वो आते ही होंगे.

मैं : ठीक है.

रिज़वाना : यहाँ आपको रहने मे कोई ऐतराज़ तो नही.

मैं : जी नही मुझे क्या ऐतराज़ होगा मैं तो कहीं भी रह लूँगा.

अभी मैं ऑर रिज़वाना बाते ही कर रहे थे कि ख़ान भी अपने हाथ मे एक फाइल थामे हुए आ गया ऑर आते ही टेबल पर फाइल फेंक दी ऑर धम्म से सोफे पर गिर गया.

ख़ान : हंजी जनाब आ गये

मैं : जी... बताइए अब मुझे क्या करना है

ख़ान : यार तुम हर वक़्त जल्दी मे ही रहते हो क्या....

मैं : नही...वो आपने काम के लिए बुलाया था तो सोचा पहले काम ही कर ले.

ख़ान : कुछ खाओगे....

मैं : जी नही मेहरबानी.

ख़ान : यार शरमाओ मत अपना ही घर है....

मैं : जी नही मैं घर से खा कर आया था...

ख़ान : चलो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी... अच्छा ये देखो तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ.

मैं : (सवालिया नज़रों से ख़ान को देखते हुए) जी क्या...

ख़ान : (उठकर मेरे साथ सोफे पर बैठ ते हुए) ये तुम्हारे पुराने दोस्तो की तस्वीरे हैं जिनके साथ अब तुमको काम क्रना है. (फाइल खोलते हुए)

यहाँ से दोस्तो मे कुछ नये लोगो का इंट्रोडक्षन आप सब से करवा दूँ ताकि आगे भी आपको कहानी समझ आती रहे:-

Update-33

Fiza : aap uth gaye jaan... ab kaisa mehsoos kar rahe hain.

Main: bahut achha mehsoos kar raha hun jaise kuch hua hi nahi mujhe. lekin yaar tum kyo jaag gai so jao abhi bahut raat baki hai.

Fiza : main to aapke pass hi baithi thi.... jaan pata hi nahi chala kab aankh lag gai.

Main : koi baat nahi ab tum aram karo.

fiza : nahi aap yahan so jao main ab uss kamre me jake so jaungi.

Main : kyo yahan so jaogi to kuch ho jayega.

Fiza : hoga to kuch nahi par abhi aapko aaram ki jarurat hai.

Main : tumhare upar let jata hun naa isse jyaadaa araam to duniya me nahi hoga.

Fiza : (mere dono gaal pakad kar khinchte hue)thik hote hi badmashi shuru kardi (muskurate hue) ab aap upar letna to bhul hi jayiye kuch waqt ke liye.

Main : kyo.....

Fiza : wo isliye kyonki ab mere sath koi or bhi hai...main nahi chahti mere chhote neer ko aapki kisi shararat ki wajah se taqleef ho. (muskurate hue) Lekin haa sath jarur let sakti hun.

Main : achha matlab ab pyaar karna bhi band...(rone jaisa munh banate hue)

Fiza : sirf kuch maheeno ke liye uske baad jaise chahe pyaar kar lena. (mere honth chumte hue)

Uske baad hum aise hi kuch der baate karte rahe or fir fiza apne kamre me jake so gai or main bhi wapis apne bistar par aake let gaya or kuch der me dawayi ke nashe ki wajah se dubara so gaya. mere 2-3 din aise hi guzre baba ne mujhe khet par bhi nahi jane diya or main sara din ghar par hi baitha rehta. Lekin nazi se ab main doori banake rakhne laga tha wo har waqt mujhse baat karne ki koshish karti lekin main har baar uski baat ko ansuna kar deta. Haa itna jarur tha ki roz sham ko heena mera pata lene aati or mere sath thoda waqt guzarti meri wajah se wo nayi gaadi lene bhi nahi gai kyonki wo chahti thi ki main thik hoke uske sath shehar chal saku. jitne din main khet nahi gaya utna din heena ne apne mulazimo ko mere khet me lagaye rakha taaki meri gair-mojudgi me wo log mere khet ka khyaal rakhe.

Mujhe ab ghar me pade hue 3 din ho gaye the or fir agli subah Doctor rizwana aa gai mera Check-up karne ke liye. Uss waqt baba sair karne gaye hue the isliye Fiza ne or Nazi ne aate hi usko sunani shuru kardi. Main bhi uss waqt so raha tha lekin fiza or naazi ki oonchi awaz se meri jaag khul gai or main uthkar apne kamre se bahar chala gaya to wahan fiza or nazi Doctor rizwana se jhagad rahi thi or Rizwana nazre jhukakar sab sunn rahi thi.

Main : Kya hua shor kyo macha rakha hai.(Ankhen malte hue)

Fiza : Tum andar jao neer mujhe baat karne do. (gusse me)

Rizwana : Ab aap kaise hain.

Main : Arre doctor aap... ji main ek dam thik hun. (muskurate hue)

Fiza : ye jhoothi ham-dardi agar aap naa dikhaye to hi achha hai agar aapko neer ki itni hi fikar hoti to aap usko kabhi galat dawayi na deti. Hamane aap par or Inspector khan par itna bharosa kiya or aapne hamaare sath kitna fareb kiya. kabhi aapne socha agar aapki galat dawayi se inko kuch ho jata to....

Rizwana : Ji kuch nahi hota inko.... aap log ek baar meri baat sunn lijiye.

Nazi : Hume ab aapki koi baat nahi sunni Meharbani karke aap yahan se chali jao.

Rizwana : (pareshan hoke apne purse se mobile nikalte hue) Achha thik hai main chali jaungi lekin ek baar meri baat sunn lijiye plzzz.

Nazi : Ab kya jhoothi kahani sunani hai.

Rizwana : (phone par number dail karte hue) Bas 2 mint dijiye mujhe.

Rizwana : (phone par) Kaha ho tum..... jaldi se shera ke ghar aao.... mujhe nai pata.... Haa thik hai.... Achha..... Ok (phone rakhte hue)

Fiza, Nazi or main hum teeno Rizwana ke jawab ka intzaar kar rahe the or sawaliya nazaro se uski taraf dekh rahe the.

Rizwana : dekhiye maine koi bhi kaam galat nahi kiya maine wahi kiya jo mujhe inspector khan ne kaha. neer jaisa ab hai waisa hi sari umer rahe isliye iski purani yaddasht mitni jaruri thi kyonki agar iski yaadashat wapis aati hai to fir ye aaj jaisa nahi rahega mumkin hai fir ye neer bhi na rahe or fir se shera ban jaye. kyonki iski purani jindagi me ye ek bahut bada apradhi hai. Khan ko bhi iski aise hi jarurat hai wo purane shera par bharosa nahi kar sakta lekin neer par kar sakta hai kyonki wo isko ek aise mission par bhejna chahta hai jahan ye jayega shera bankar lekin hoga neer hi.

Fiza : meri to kuch samajh nahi aa raha aap kya keh rahi hai. (pareshaan hote hue)

Rizwana : neer aaj ek neq-dil insaan hai isme koi shaq nahi maine hi iska Lie ditector test kiya tha usme isne mujhe wahi sab bataayaa jo aap logo ne khan ko bataayaa tha. Lekin iske dimaag ki scanning karke mujhe pata chala ki iski yaddasht wapis aa sakti hai agar isko iski purani jindagi yaad karwayi jaye to or aaj bhi iske dimag ke sirf ek hisse se yaddasht khatam hui hai agar isko iski purani jindagi me wapis leke jaya jaye to iski wo yaddasht wapis aa sakti hai or isi wajah se aaj bhi isko apni purani jindagi ki kaafi chije aaj hi yaad hai or iske dimaag ke internal memory me store hai isliye aaj bhi ye ladayi karna, gaadi chalana, hathiyaar chalana or baaki kaam jo ye bachpan se karta aaya hai isko aaj bhi yaad hai or aaj bhi ye waise hi bahut maharat ke sath sab kaam kar leta hai agar ye wahan jake shera ban gaya to fir ye hamaare kisi ka kaam nahi rahega.

Fiza : Inko bhejna kaha hai (sawaliyaa nazaro se)

Rizwana : wahi to main bata rahi hun ki khan isko iske gang tak pohoncha dega jahan ye khan ka informer bankar iske gang ki khabar hum tak pohonchayega. isse khan iske saare gang ko khatam kar sakta hai.

Abhi Rizwana baat hi kar rahi thi ki ghar ke samne ek Jeep aake ruki or sab log ek sath darwaze ke bahar dekhne lage. Jeep me se khan utra or seedha ghar ke andar aa gaya Fiza or nazi ab bhi usse gusse se dekh rahi thi.

Rizwana : achha hua tum aa gaye inko dawayi ke or mission ke bare me bataao. (gusse se)

Khan : maaf kijiye maine aapse kuch baate raaz rakhi lekin maine aapke Baba ko sab bata diya tha or unki ijajat se hi isko yaddasht ki dawayi dilwayi thi.

Fiza : (hairani se) Baba jante the galat dawayi ke bare me.

Khan : ji jante the... maine hi unko mana kiya tha ki abhi kisi se kuch na kahe.

Nazi : aane do baba ko bhi inse to hum baat karengi pehle tum ye bataao ye doctorni kya keh rahi hai neer ke bare me inko kaha bhejna hai tumne.

Khan : Maine aapse pehle hi kaha tha ki aaj neer kuch bhi hai lekin iske purane paap isko itni asani se nahi chodenge isko kanoon ki madad karni padegi tabhi ye azad ho sakta hai.

Main : (jo itni der se khamosh sabki baate sunn raha tha) kya karna hoga mujhe.

Khan : hamaari madad karni hogi tumhare gang ka safaya karne me.

Main : Gang kounsa gang

Khan : (apne coat ka button band karte hue) Ye log har bura kaam karte hain Druggs bechne se leke hathiyaar bachne tak har gunaah me inka naam hai. Inke naam an-ginnat case hain lekin koi saboot nahi hai isliye hamesha bari ho jate hain.

Main : to aap mujhse kya chahte hain.

Khan : mujhe saboot chahiye jo mujhe sirf tum hi lake de sakte ho.

Main : main hi kyo apne pass to itne log hai kisi ko bhi shamil kar dijiye unn logo me....

Khan : kyonki tum inke purane aadmi ho tum par wo log asani se bharosa kar lenge naye aadmi ko wo apne pass tak nahi aane dete. Tum apni purani jindagi me sheikh sahab ya tumhare liye baba ke right-hand the isliye jahan tum pohonch sakte ho mera koi aadmi nahi pohonch sakta.

Main : thik hai lekin uske liye meri yaddasht khatam karne ki kya jarurat thi main to waise bhi aapka kaam karne ke liye teiyaar tha.

Rizwana : kyonki tumhare dimaag ki sccaning karke mujhe pata chala ki agar tumko tumhari purani zindagi me leke jaya jaye to tumhari yaddasht laut sakti hai fir na tum neer rahoge na hi ye tumhare gharwale. Matlab saaf hai fir tum unn logo me jake hamaari madad nahi karoge apni purani jingadi me hi laut jaoge bas isliye tumhari purani yaddasht mitaa rahe the taki tumko tumhare ye gharwale or tumhari neqi yaad rahe.

Khan : Seedhi si baat hai ham ko neer par aitbaar hai Shera par nahi.

Tabhi baba bhi ghar aa gaye....

Baba : arre khan sahab aap kab aaye.

Khan : (Adab se salaam karte hue) ji bas abhi wo thoda samasya ho gaya tha.

Nazi : baba aapko sab pata tha to ham ko kyo nahi bataayaa (gusse se)

Baba : beti maine jo kiya iske bhale ke liye kiya main nahi chahta tha ki ye bhi qasim ki tarah jail me apni jindagi guzaare.

Main : baba aapne jo kiya thik kiya lekin mujhe iss dawayi ki jarurat nahi hai main aapka beta hun or aapka hi beta rahunga or yaqeen kijiye main khan ka har haalat me saath dunga.

Khan : Soch lo.. tum par main bahut bada daav khelne jaa raha hun kuch gadbad hui to....

Main : (bich me bolte hue) aap ko mujh par bharosa karna hoga.

Khan : thik hai... waise bhi mere pass or koi rasta hai bhi nahi....

Main : to kab jana hai mujhe fir...

Khan : Arre itni jaldi bhi kya hai tum abhi iss layaq nahi ho ki wahan tak bhej doo uske liye pehle tumko trained karna padega har chij seekhani padegi.

Rizwana : kyo naa aap kuch din ke liye hamaare pass shehar aa jaye wahan hum aapko sab kuch seekha bhi denge.

Fiza : Kitne din ka kaam hai. (pareshan hote hue)

Khan : jyaadaa nahi bas kuch hi din ki baat hai.

Baba : khan sahab aapko humse ek vaada karna hoga

Khan : (sawaliya nazaro se baba ko dekhte hue) kaisa vaada janab...

Baba : yhi ki aapka mission poora ho jane ke baad aap sahi salamat neer ko wapis bhej denge. ab ye hamaari amaanat hai aapke pass.

Khan : ji be-fikar rahiye mera kaam hote hi main khud isse azaad kar dunga or yahan tak ki police records se iska naam bhi mita dunga. uske baad police records me shera mar jayega or fir ye neer banke apni saari jindagi chain se aap sab ke sath guzaar sakta hai.

Baba : thik hai.

Khan : kuch din ke liye neer ko mere pass bhej dijiye taki isko main iska kaam seekha saku uske baad isko main mission par bhej dunga.

Main : mere jane ke baad inka khyaal koun rakhega.

Khan : tum inki bilkul fikar na karo ye ab meri jimmedari hai inko kisi chij ki kami nahi hogi ye main vaada karta hun.

Main : thik hai fir main kal hi aa jata hun

Khan : jaisa tum thik samjho. Achha janab (baba ki taraf dekhte hue) ab ijajat dijiye.

Baba : Achha khan sahab.

Uske baad Doctor rizwana or khan dono chale gaye or main dono ko jate hue dekhta raha. baba ek dam shaant hoke kursi par baithe the jaise wo kisi gehri soch me ho.

Main : kya hua baba

Baba : beta mujhe samajh nahi aa raha ki tumko aisi khatranaak jagah par bheju ya nahi.

Main : arre baba aap fikar kyo karte hain apne bete par bharosa rakhiye kuch nahi hoga.

Baba : ek tum par hi to bharosa hai beta....lekin tumhari fikar bhi hai kahi tumko kuch ho gaya to mujh gareeb ke pass kya bachega.

Main : kuch nahi hoga baba.

Fiza : baba aapko itne khatarnaak kaam ke liye khan ko haa nahi bolna chahiye the jane wo log kaise honge.

Baba : shayad tum thik keh rahi ho beti lekin main bhi kya karta ek beta aagey hi jail me baitha hai dusre ko bhi jail kaise bhej deta isliye majboor hoke maine haa kaha tha.

Nazi : lekin baba agar wahan neer ko kuch ho gaya to....

Fiza : (bich me bolte hue) aisi baate na karo nazi waise hi mujhe darr lag raha hai.

Main : arre aap sab to aise hi gabhra rahe ho kuch nahi hoga... mujhe bas aap logo ki hi fikar hai.

Baba : tum bas apna khyaal rakhna beta..... hume or kuch nahi chahiye (mere sir par hath ferte hue)

Aise hi hum kaafi der tak baate karte rahe shaam ko heena fir se mera pata lene aa gai maine usse kuch din ilaaj karwane ka bata kar shehar jane ka bahana bana diya jis par pehle wo naraz hui lekin fir wo maan gai or kuch waqt uske sath bitane ke baad wo bhi chali gai. Agle din vaade ke mutabiq subah khan ne jeep bhejdi mujhe lene ke liye. Baba Nazi or fiza ne mujhe bahut saari duayen or bheegi aankhon ke sath rukhsat kiya. Main tamam raste nazi. baba, fiza or heena ke bare me hi sochta raha or inke sath bitaye waqt ke bare me hi yaad karta raha. Mujhe nahi pata tha ki jahan main jaa raha hun wahan se wapis aaunga ya nahi lekin inn logo ke sath bitaye waqt ne mere dil me inn logo ke liye be-intehaa pyar paida kar diya tha. Waise to ye log mere koi nahi the lekin fir bhi ye mujhe mere apno se badhkar the or aaj main jo kuch bhi karne jaa raha tha inn logo ke liye hi karne jaa raha tha. Aaj mere pass jo jindagi thi wo inn logo ka hi "Ahsaan" tha. Aisi hi main apni hi socho me gumm tha ki mujhe pata hi nahi chala kab hum shehar aa gaye or kab ek ghar ke bahar gaadi ruki.

Main : ye kounsi jagah hai ye to khan ka daftar nahi hai.

Driver : aapko khan sahab ne yhi bulaya hai.

Main : achha...

Uske baad main jeep se utra or uss ghar me chala gaya jo dekhne me sarpanch ki haveli jaisa bada nahi tha lekin kaafi shandar bana hua tha. Gate ke bahar 2 policewale bandook thame khade the jinhone mujhe dekhte hi chhota gate khol diya. Main jab andar gaye to ghar ke charo taraf lage khushbudaar phunlon ne mera Welcome kiya samne ek kaanch ka bada sa gate laga tha jise main dhakelta hua andar chala gaya. ghar kaafi khubsurati se sajaya gaya tha main charo taraf nazare ghumakar ghar ki khubsurati dekh raha tha tabhi ek meethi se awaaz mere kaano se takrayi....

Rizwana : ghar achha laga (muskurate hue)

Main : ji bahut khubsurat ghar hai....kya ye khan sahab ka ghar hai (charo taraf dekhte hue)

Rizwana : ji nahi ye mera ghar hai...arre aap khade kyo ho baitho.

Main : lekin mujhe to khan sahab ne bulaya tha

Rizwana : ab kuch din aapko bhi yhi rehna hai yhi hum aapki training bhi mukammal karwayenge or ye ek secret mission hai isliye khan ne daftar me kisi ko bhi iske bare me nahi bataayaa.

Main : achha... lekin khan sahab hai kaha.

Rizwana : aap baithiye wo aate hi honge.

Main : thik hai.

Rizwana : yahan aapko rehne me koi aitraaz to nahi.

Main : ji nai mujhe kya aitraaz hoga main to kahi bhi reh lunga.

Abhi main or rizwana baate hi kar rahe the ki khan bhi apne hath me ek file thaame hue aa gaya or aate hi table par file fenk di or dhaad se sofe par gir gaya.

Khan : Hanji janab aa gaye

Main : ji... batayiye ab mujhe kya karna hai

Khan : yaar tum har waqt jaldi me hi rehte ho kya....

Main : nai...wo aapne kaam ke liye bulaya tha to socha pehle kaam hi kar le.

Khan : kuch khaoge....

Main : ji nahi meharbani.

Khan : yaar sharmao mat apna hi ghar hai....

Main : ji nahi main ghar se kha kar aaya tha...

Khan : chalo jaisi tumhari marzi... achha ye dekho tumhare liye kuch laya hun.

Main : (sawaliya nazaro se khan ko dekhte hue) ji kya...

Khan : (uthkar mere sath sofe par baith te hue) ye tumhare purane dosto ki tasveere hain jinke sath ab tumko kaam krna hai. (file kholte hue)

Yahan se dosto me kuch naye logo ka introduction aap sab se karwa doo taaki aagey bhi aapko kahani samajh aati rahe:-

 
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