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अपडेट-26
ख़ान : वाह भाई क्या रौब है वो भी शेरा पर....(हैरान होते हुए) क्योंकि मैने तो सुना था वो आदमी पैदा नही हुआ जो शेरा को झुका सके (अपने साथ वाले पोलीस वाले को देखते हुए)
मैं : (अपने हाथ जोड़ते हुए) देखिए जनाब मेरे बाबा की तबीयत ठीक नही है आप मेहरबानी करके यहाँ से जाइए.
ख़ान : चले जाएँगे मेरी जान इतनी भी क्या जल्दी है पहले तसल्ली तो कर लूँ
मैं : कैसी तसल्ली
ख़ान : अगर तुम शेरा नही हो तो अपनी कमीज़ उतारो क्योंकि हम जानते हैं कि शेरा के कंधे के पिछे एक शेर का टट्टू गुदा हुआ है.
मैं : अगर नही हुआ तो फिर आप यहाँ से चले जाएँगे
ख़ान : जी बिल्कुल हज़ूर आप बस हमारी तसल्ली करवा दे फिर हम आपको चेहरा तक नही दिखाएँगे.
मैं : ठीक है (कमीज़ उतारते हुए) देख लीजिए ऑर तसल्ली कर लीजिए. (मैं नही जानता था कि मेरी पीठ पर इस क़िस्म का कोई निशान है भी या नही इसलिए मैने ख़ान के कहने पर फॉरन कमीज़ उतार दी)
ख़ान : (चारो तरफ मेरे गोल-गोल घूमते हुए) हमम्म (मेरे कंधे पर हाथ रखकर) तू शातिर तो बहुत है लेकिन आज फँस गया बच्चे तेरा शेर ही तुझे मरवा गया..... हाहहहहहाहा (तालियाँ बजाते हुए)
मैं : जी क्या मतलब (घूमकर ख़ान की तरफ देखते हुए)
ख़ान : तूने मुझे भी इन भोले गाँव वालो की तरह चूतिया समझा है जो तेरी बातो मे आ जाउन्गा
मैं : मैं आपका मतलब नही समझा आप कहना क्या चाहते हैं.
ख़ान : मतलब तो हवालात मे मैं तुझे अच्छे से सम्झाउन्गा
बाबा : (खड़े होते हुए) देखिए जनाब ये मेरा बेटा नीर ही है सिर्फ़ शक़ल एक जैसी हो जाने से करम एक जैसे नही होते हैं ये बिचारा तो खेत मे मेहनत करता है बहुत सीधा लड़का है कभी किसी से ऊँची आवाज़ मे बात भी नही करता मेरी हर बात मानता है आप गाँव मे किसी से भी पूछ लीजिए बहुत भला लड़का है इसने कोई गुनाह नही किया.
ख़ान : (मुझे कंधो से पकड़कर घूमाते हुए) ये देखिए जनाब आप जिसे अपना बेटा कह रहे थे वो एक अंडरवर्ल्ड का मोस्ट वांटेड गॅंग्स्टर शेरा है इसने बहुत से लोगो का क़त्ल किया है ये इतना शातिर है किसी इंसान की जान लेने के लिए इसको किसी हथियार की भी ज़रूरत नही हर तरह का हथियार चला लेता है ये इसका सटीक निशाना इसकी अंडर्वर्ड मे पहचान है. अब इस टॅटू ऑर ये गोलियों के निशान को देखकर तो आपको तसल्ली हो गई होगी कि ये आपका बेटा नीर नही बल्कि शेरा है जिसको हम इतने महीनो से ढूँढ रहे हैं.
बाबा : देखिए साहब मैं आपको सब सच-सच बता दूँगा लेकिन आपको वादा करना होगा कि आप ये बात किसी को नही बताएँगे.
ख़ान : (कुर्सी पर वापिस बैठ ते हुए) मैं सुन रहा हूँ कहिए क्या कहना है आपको.
जब बाबा ने इनस्पेक्टर ख़ान को मेरे बारे मे बताना शुरू किया तो मैं भी उनके पास ही कमीज़ पहनकर बैठ गया. क्योंकि अक्सर मैं जब भी नाज़ी ऑर फ़िज़ा से अपने बारे मे कुछ भी पुछ्ता तो वो अक्सर टाल जाती ऑर मुझे मेरे बारे मे सच नही बताती ऑर मेरे सीने पर जो निशान थे वो गोलियो के थे ये बात भी मुझे आज ही पता चली थी क्योंकि नाज़ी ऑर फ़िज़ा ने मुझे यही बताया था कि मुझे आक्सिडेंट मे चोट लगने से ये सीने पर निशान मिले थे. अब आख़िर मुझे भी अपने जानना था कि मैं कौन हूँ ऑर मेरा सच क्या है. तभी बाबा ने पहले फ़िज़ा को ऑर फिर नाज़ी को एक साथ आवाज़ देकर बाहर बुलाया दोनो मुँह को ढक कर बाहर आ गई ऑर जहाँ मैं बैठा था मेरे पिछे आके चुप-चाप खड़ी हो गई. मैने पलटकर दोनो को एक नज़र देखा ऑर फिर सीधा होके बैठ गया.
बाबा : बेटा इनस्पेक्टर साहब को नीर के बारे मे सब सच-सच बता दो.
फ़िज़ा : लेकिन बाबा वो....मैं...वो..... (कुछ सोचते हुए)
ख़ान : जी आप घबरईए नही खुलकर बताइए मैं जानना चाहता हूँ कि आप मुझे क्या सच बताना चाहती है.
फ़िज़ा : (एक लंबी साँस छोड़ते हुए) ठीक है साहब लेकिन वादा कीजिए कि उसके बाद आप नीर को कुछ नही कहेंगे.
ख़ान : (अपना कोट सही करते हुए) मैं कोई वादा नही करूँगा लेकिन हाँ अगर ये बे-गुनाह है तो इससे कुछ नही होगा.
फ़िज़ा : ठीक है ख़ान साब.....नाज़ी जाओ वो बॅग ले आओ जो हमने छुपा कर रखा था.
नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा भाभी...
ये सुनकर मुझे भी झटका लगा कि ये कौन्से बॅग के बारे मे बात कर रही है जिसके बारे मे मैं नही जानता ऑर इन्होने मुझे कभी क्यो नही बताया. फिर फ़िज़ा ने बोलना शुरू किया ऑर ख़ान साब हमे नही पता नीर का असल नाम क्या है ऑर ये कौन है हाँ ये सच है कि हमारा इससे ज़ाति कोई ताल्लुक नही है. हम को जब ये मिला तो ये बुरी तरह खून मे लथ-पथ था ऑर इसे पाँच गोलियाँ लगी हुई थी ऑर अपनी आखरी साँसे गिन रहा था इसको हम इंसानियत के नाते घर ले आई फिर इसकी गोलियाँ निकाली ऑर इसकी मरहम पट्टी करके इसका इलाज किया. 3 महीने तक ये बेहोश था उसके बाद इसको होश आया लेकिन तब तक ये अपनी याददाश्त खो चुका था ऑर इससे अपने बारे मे कुछ भी याद नही था. (तभी नाज़ी एक काला बॅग ले आई)
नाज़ी : ये लो भाभी. (बॅग फ़िज़ा को देते हुए)
फ़िज़ा : (नाज़ी को देखते हुए) टेबल पर रख दो बॅग को.... (घूमकर ख़ान से बात करते हुए) ख़ान साहब हमें ये बॅग नीर के कंधे पर लटका मिला था ये बेहोश था इसलिए हमने इसकी अमानत को संभाल कर रख दिया था (बॅग खोलते हुए) जब हमने इसके बारे मे मालूम करने के लिए बॅग खोला तो इसमे ये हथियार ऑर ये ढेर सारे पैसे पड़े मिले ये देखकर हम एक बार तो घबरा गई थी कि जाने ये कौन है ऑर इसके पास ऐसा समान क्या कर रहा है लेकिन फिर भी इंसानियत के नाते हमारा ये फ़र्ज़ था कि हम इसकी जान बचाते इसलिए हमने पोलीस मे खबर ना करके पहले इसको बचाना ज़रूरी समझा... हमने सोचा था क़ि जब ये होश मे आ जाएगा तो इसको हम जाने के लिए कह देंगे.
ख़ान : (बॅग मे देखते हुए) वाआह क्या बात है इतना सारा पैसा, ये ऑटोमॅटिक हथियार...ऑर आप लोग कहते हैं कि ये शेरा नही है.
फ़िज़ा : जनाब मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए वही तो मैं आपको बता रही हूँ.... जब ये हमे मिला तो बहुत बुरी तरह ज़ख़्मी था मैं ऑर नाज़ी (उंगली से नाज़ी की तरफ इशारे करते हुए) इसको उठाकर अपने घर ले आई थी ताकि इसकी जान बचाई जा सके 3 महीने तक ये बेहोश पड़ा रहा उसके बाद जब ये होश मे आया तब इसने पहला लफ्ज़ जो बोला वो था "बाबा आपका बेटा आ गया..." जब बाबा इसके पास गये तो इनके परिवार के बारे मे ऑर इनका नाम पूछा लेकिन इसको कुछ भी याद नही था ये सब कुछ भूल चुका था क्योंकि इसके सिर मे काफ़ी गहरी चोट आई थी इसलिए.
मेरे शोहार भी एक शराबी ऑर जुवारि किस्म के इंसान है ऑर वो आज कल जैल मे सज़ा काट रहे हैं. बाबा हमेशा मेरे शोहर से दुखी रहते हैं लेकिन जब इसने मेरे ससुर को (बाबा की तरफ इशारा करते हुए) बाबा कहा तो बाबा का दिल पिघल गया ऑर इन्होने नीर को अपना बेटा बना लिया बाबा ने हम से कहा कि इसको पिच्छला कुछ भी याद नही है ऑर जाने ये कौन है तो क्यो ना इसको हम अपना लें ऑर ये हमारे ही घर मे रहे क्योंकि बाबा को इसमे अपना बेटा नज़र आता है जैसा बेटा वो हमेशा से चाहते थे. तब से लेके आज तक ये इस घर का बेटा बनकर एक बेटे के सारे फ़र्ज़ निभा रहा है हमें नही पता कि इनके अतीत मे ये कौन थे ऑर इन्होने क्या किया है. लेकिन आज की तारीख मे ये एक मेहनती इंसान है जो अपना खून-पसीना एक करके अपने परिवार का पेट भरने के लिए के लिए दिन रात खेत मे मेहनत करता है आज ये एक मासूम इंसान है कोई अपराधी नही. जनाब आपका मकसद तो ज़ुर्म को ख़तम करना है ना तो इनके अंदर का शेरा तो कब का मर चुका है क्या आप एक मासूम इंसान को एक अपराधी की सज़ा देंगे?
ख़ान : आपने जो किया वो इंसानियत की नज़र से क़ाबिल-ए-तारीफ है लेकिन जिसको आप एक भोला-भला मासूम इंसान कह रही हो वो एक पेशावर अपराधी है. आज मैं इसको छोड़ भी दूं तो कल अगर इसकी याददाश्त वापिस आ गई तो इसकी क्या गारंटी है कि ये अपनी दुनिया मे वापिस नही जाएगा ऑर कोई गुनाह नही करेगा आप नही जानती इसने कितने लोगो का क़त्ल किया है ये आदमी बहुत ख़तरनाक है इसको मैं ऐसे खुला नही छोड़ सकता.
बाबा : साहब मैं मानता हूँ कि औलाद के दुख ने मुझे ख़ुदग़र्ज़ बना दिया था लेकिन ये बुरा इंसान नही है.... मैं आपसे वादा करता हूँ कि अगर अब ये कोई भी गुनाह करे तो आप मुझे फाँसी पर चढ़ा देना. नीर मेरा बेटा है इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मैं लेता हूँ (मेरा हाथ पकड़कर)
ख़ान : (अपने सिर पर हाथ फेरते हुए) पता नही मैं ठीक कर रहा हूँ या ग़लत लेकिन फिर भी मैं इसको एक मोक़ा ज़रूर दूँगा.
बाबा, नाज़ी, फ़िज़ा : (एक आवाज़ मे अपने हाथ जोड़कर) आपका बहुत अहसान होगा साहब.
ख़ान : अहसान वाली कोई बात नही बस इसको कल मेरे साथ एक बार शहर चलना होगा मैं डॉक्टर से इसके दिमाग़ का चेक-अप करवाना चाहता हूँ साथ मे इसका लाइ डिटेक्टोर टेस्ट भी करूँगा. क्योंकि मुझे आप पर तो भरोसा है लेकिन इस पर नही.
फ़िज़ा : किस बात का चेक-अप साहब (हैरानी से) ऑर ये लाई क्या है (फ़िज़ा को लाइ डिटेक्टोर कहना नही आया)
ख़ान : लाइ डिटेक्टोर टेस्ट से हम ये पता कर सकते हैं कि इंसान झूठ बोल रहा है या सच ऑर इसका चेक-अप मैं इसलिए करवाना चाहता हूँ कि मुझे जानना है इसकी याददाश्त कब तक वापिस आएगी उसके बाद इसको मेरी मदद करनी होगी.
मैं : (जो इतनी देर से खामोश सब सुन रहा था) कैसी मदद साहब.
ख़ान : तुमको क़ानून से माफी इतनी आसानी से नही मिलेगी इसके बदले मे तुमको हमारी मदद करनी होगी तुम्हारे बाकी गॅंग वालो को पकड़वाने मे.
मैं : ठीक है साहब अब जो भी है यही मेरे अपने है ऑर इनके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ.
ख़ान : तो ठीक है फिर अभी मैं चलता हूँ सुबह मुलाक़ात होगी तैयार रहना ऑर हाँ अगर भागने की कोशिश की तो याद रखना मुजरिम को पनाह देने वाला भी मुजरिम ही होता है तुम्हारे घरवालो ने तुम्हारी गारंटी ली है अगर तुम भागे तो तुम सोच नही सकते मैं इनका क्या हाल करूँगा.
बाबा : ये कही नही जाएगा साहब आप बे-फिकर होके जाए.... मैने कहा ना मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ.
ख़ान : ठीक है फिर मैं चलता हूँ.
मैं : ख़ान साहब ये बॅग भी ले जाइए ये अब मेरे भी काम का नही है.
ख़ान : (हैरान होते हुए) लगता है शेरा सच मे मर गया.
उसके बाद ख़ान ऑर उसके साथ जो पोलीस वाले आए थे वो सब मेरा बॅग लेकर चले गये ऑर हम सब उनको जाता हुआ देखते रहे. फिर बाबा ने मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर फ़िज़ा ऑर नाज़ी मुझे देखकर मुस्कुरा भी रही थी ऑर साथ मे रो भी रही थी मैं भी उनको देखकर मुस्कुरा रहा था.
बाबा : बेटा हमें माफ़ करना हमने तुमसे तुम्हारी असलियत छुपाइ.
मैं : बाबा कैसी बात कर रहे हैं माफी माँग कर शर्मिंदा ना करे मुझे आपने जो मेरे लिए किया उसका अहसान मैं मरते दम तक नही चुका सकता.
बाबा : (मेरे सिर पर हाथ रखकर मुझे दुआ देते हुए ) बेटा तुम हमेशा खुश रहो ऑर आबाद रहो.
फिर बाबा अपने कमरे मे चले गये ऑर मैं फ़िज़ा ऑर नाज़ी के पास ही बैठ गया. वो दोनो मुझे लगातार देख रही थी लेकिन कुछ बोल नही रही थी.
मैं : ऐसे क्या देख रही हो तुम दोनो.
फ़िज़ा : कुछ नही आज एक पल के लिए लगा जैसे हमने तुमको खो दिया (फिर से रोते हुए)
मैं : अर्रे तुम रोने क्यो लगी (फ़िज़ा के दोनो हाथ पकड़ते हुए ऑर नाज़ी की तरफ देखकर) नाज़ी पानी लेके आओ
नाज़ी : अभी लाई.
नाज़ी के जाते ही फ़िज़ा ने मुझे गले से लगा लिया ऑर फिर से रोने लगी
मैं : अर्रे क्या हुआ रोने क्यो लग गई.
फ़िज़ा : जान तुम नही जानते मैं बहुत डर गई थी.
मैं : इसमे डरने की क्या बात है मैं हूँ ना तुम्हारे पास कहीं गया तो नही ऑर फिकर ना करो अब मैं कही जाउन्गा भी नही अब सारी जिंदगी मैं नीर ही रहूँगा.
इतने मे नाज़ी पानी ले आई ऑर हम दोनो जल्दी से अलग होके बैठ गये. उसके बाद कोई खास बात नही हुई रात को हमने खामोशी से खाना खाया ऑर सोने चले गये. नाज़ी की नींद की दवाई की वजह से तबीयत खराब हो गई थी इसलिए फ़िज़ा ने दुबारा उसको वो गोली नही दी और उस रात हम सब सुकून से सो गये. बाबा ने मुझे नाज़ी के कमरे मे नही सोने जाने दिया ऑर अपने पास ही सुलाया. अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो सब जाग रहे थे नाज़ी ऑर फ़िज़ा रसोई मे थी ऑर बाबा बाहर सैर कर रहे थे. मैं जब उठकर बाहर आया तो नाज़ी ऑर फ़िज़ा नाश्ता बना रही थी ऑर साथ ही फ़िज़ा नाज़ी के पास खड़ी उसको कुछ समझा रही थी.
मैं : अर्रे आज इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बना लिया.
फ़िज़ा : अर्रे भूल गये तुमने आज शहर जाना है ना इसलिए तुम्हारे लिए बनाया है जाओ तुम जल्दी से नहा कर तेयार हो जाओ फिर मैं नाश्ता लगा देती हूँ.
मैं : लेकिन शहर जाना क्यों है मैं नही जाउन्गा शहर मुझे खेत मे काम है.
फ़िज़ा : खेत की तुम फिकर ना करो एक दिन नही जाओगे तो आसमान नही टूट जाएगा पहले तुम शहर जाओ ऑर ख़ान के साथ जाके अपना इलाज कर्वाओ उनका सुबह आदमी आया था वो कह रहा था कि ख़ान साहब 8 बजे तुमको लेने आएँगे.
मैं : मुझे उससे कोई वास्ता नही रखना मैं नही जाउन्गा
फ़िज़ा : बच्चों जैसे ज़िद्द ना करो नीर मैं भी तो हूँ तुम्हारे साथ.
मैं : तुम भी... क्या मतलब
फ़िज़ा : अर्रे मैं भी तुम्हारे साथ ही चलूंगी वापसी मे हम दोनो साथ ही आएँगे
नाज़ी : (बीच मे बोलते हुए) देखो ना नीर मैं मना कर रही हूँ भाभी को लेकिन ये सुन ही नही रही इस हालत मे इनका शहर जाना ठीक है क्या मैने तो कहा है तुम्हारे साथ मैं अकेली ही चली जाउन्गी लेकिन नही मेरी बात ही नही सुन रही.
मैं : तुम दोनो ही खामोश हो जाओ ऑर अपना काम करो कोई शहर नही जाएगा ना तुम ना मैं समझी.
Update-26
Khan : Waah bhai kya roub hai wo bhi shera par....(hairaan hote hue) kyonki maine to suna tha wo aadmi paida nahi hua jo shera ko jhuka sake (apne sath wale police wale ko dekhte hue)
Main : (Apne hath jodte hue) dekhiye janab mere baba ki tabiyat thik nahi hai aap meharbani karke yahan se jayiye.
Khan : chale jayenge meri jaan itni bhi kya jaldi hai pehle tasalli to kar loo
Main : kaisi tasalli
Khan : agar tum shera nahi ho to apni kameez utaro kyonki hum jante hain ki shera ke kandhe ke pichhe ek sher ka tatoo guda hua hai.
Main : Agar nahi hua to fir aap yahan se chale jayenge
Khan : ji bilkul hazoor aap bas hamaari tasalli karwa de fir hum aapko chehra tak nahi dikhayenge.
Main : thik hai (kameez utarte hue) dekh lijiye or tasalli kar lijiye. (main nahi janta tha ki meri peeth par iss qism ka koi nishaan hai bhi ya nahi isliye maine khan ke kehne par foran kameez utaar di)
Khan : (charo taraf mere gol-gol ghumte hue) Hhhmmm (mere kandhe par hath rakhkar) tu shatir to bahut hai lekin aaj phas gaya bache tera sher hi tujhe marwa gaya..... Hahahahahahaha (taaliyaan bajate hue)
Main : ji kya matlab (ghumkar khan ki taraf dekhte hue)
Khan : tune mujhe bhi inn bhole gaav walo ki tarah chutiya samjha hai jo teri baato me aa jaunga
Main : main apka matlab nahi samjha aap kehna kya chahte hain.
Khan : matlab to hawaalat me main tujhe achhe se samjhaunga
Baba : (khade hote hue) dekhiye janab ye mera beta Neer hi hai sirf shaqal ek jaisi ho jane se karam ek jaise nahi hote hain ye bichara to khet me mehnat karta hai bahut seedha ladka hai kabhi kisi se oonchi awaz me baat bhi nahi karta meri har baat manta hai aap gaav me kisi se bhi puch lijiye bahut bhala ladka hai isne koi gunah nahi kiya.
Khan : (mujhe kandho se pakadkar ghumate hue) ye dekhiye janab aap jise apna beta keh rahe the wo ek underworld ka most wanted gangster shera hai isne bahut se logo ka qatl kiya hai ye itna shatir hai kisi insaan ki jaan lene ke liye isko kisi hathiyaar ki bhi jarurat nahi har tarah ka hathiyaar chala leta hai ye iska sateek nishana iski underword me pehchaan hai. ab iss tatoo or ye goliyon ke nishaan ko dekhkar to apko tasalli ho gai hogi ki ye aapka beta Neer nahi balki shera hai jisko hum itne maheeno se dhundh rahe hain.
Baba : dekhiye sahab main aapko sab sach-sach bata dunga lekin aapko vaada karna hoga ki aap ye baat kisi ko nahi batayenge.
Khan : (kursi par wapis baith te hue) main sunn raha hun kahiye kya kehna hai apko.
Jab Baba ne inspector khan ko mere bare me batana shuru kiya to main bhi unke pass hi kameez pehankar baith gaya. kyonki aksar main jab bhi nazi or fiza se apne bare me kuch bhi puchhta to wo aksar taal jati or mujhe mere bare me sach nahi batati or mere seene par jo nishaan the wo goliyo ke the ye baat bhi mujhe aaj hi pata chali thbi kyonki nazi or fiza ne mujhe yhi bataayaa tha ki mujhe accident me chot lagne se ye seene par nishan mile the. Ab akhir mujhe bhi apne janna tha ki main kaun hun or mera sach kya hai. Tabhi baba ne pehle fiza ko or fir nazi ko ek sath awaz dekar bahar bulaya dono munh ko dhak kar bahar aa gai or jahan main baitha tha mere pichhe aake chup-chap khadi ho gai. maine palatkar dono ko ek nazar dekha or fir sidha hoke baith gaya.
Baba : beta inspector sahab ko Neer ke bare me sab sach-sach bata do.
Fiza : lekin baba wo....main...wo..... (kuch sochte hue)
Khan : ji aap ghabrayiye nahi khulkar batayiye main janna chahta hun ki aap mujhe kya sach batana chahti hai.
Fiza : (ek lambi saans chodte hue) thik hai sahab lekin vaada kijiye ki uske baad aap Neer ko kuch nahi kahenge.
Khan : (apna coat sahi karte hue) main koi vaada nahi karunga lekin haa agar ye be-gunah hai to isse kuch nahi hoga.
Fiza : thik hai khan saab.....Nazi jao wo bag le aao jo hamane chhupake rakha tha.
Nazi : (haa me sir hilate hue) achha bhabhi...
Ye sunkar mujhe bhi jhatka laga ki ye kounse bag ke bare me baat kar rahi hai jiske bare me main nahi janta or inhone mujhe kabhi kyo nahi bataayaa. Fir fiza ne bolna shuru kiya or khan saab hume nahi pata Neer ka asal naam kya hai or ye kaun hai haa ye sach hai ki hmara isse zaati koi talluk nahi hai. Ham ko jab ye mila to ye buri tarah khun me lath-path tha or isse paanch goliyaan lagi hui thi or apni aakhri saanse gin raha tha isko hum insaniyat ke naate ghar le aayi fir iski goliyaan nikali or iski maraham patti karke iska ilaaj kiya. 3 maheene tak ye behosh tha uske baad isko hosh aaya lekin tab tak ye apni yaddasht kho chuka tha or isse apne bare me kuch bhi yaad nahi tha. (tabhi nazi ek kala bag le aayi)
Nazi : ye lo bhabhi. (bag fiza ko dete hue)
Fiza : (nazi ko dekhte hue) Table par rakh do bag ko.... (ghumkar khana se baat karte hue) Khan sahab hume ye bag Neer ke kandhe par latka mila tha ye behosh tha isliye hamane iski amaanat ko sambhaal kar rakh diya tha (bag kholte hue) jab hamane iske bare me malum karne ke liye bag khola to isme ye hathiyaar or ye dher sare paise pade mile ye dekhkar hum ek baar to ghabra gai thi ki jane ye kaun hai or iske pass aisa samaan kya kar raha hai lekin fir bhi insaniyat ke naate hmara ye farz tha ki hum iski jaan bachate isliye hamane police me khabar na karke pehle isko bachana jaruri samjha... hamane socha tha ki jab ye hosh me aa jayega to isko hum jane ke liye keh denge.
Khan : (bag me dekhte hue) Waaah kya baat hai itna sara paisa, ye Automatic hathiyaar...or aap log kehte hain ki ye shera nahi hai.
Fiza : janab meri poori baat to sun lijiye wahi to main aapko bata rahi hun.... jab ye hume mila to bahut buri tarah zakhmi tha main or nazi (ungali se nazi ki taraf ishare karte hue) isko uthakar apne ghar le aayi thi taki iski jaan bachayi jaa sake 3 maheene tak ye behosh pada raha uske baad jab ye hosh me aya tab isne pehla lafz jo bola wo tha "Baba aapka beta aa gaya..." jab baba iske pass gaye to inke parivaar ke bare me or inka naam puchaa lekin isko kuch bhi yaad nahi tha ye sab kuch bhul chuka tha kyonki iske sir me kaafi gehri chot aayi thi isliye.
Mere shohar bhi ek sharabi or juwaari kism ke insaan hai or wo aaj kal jail me saza kaat rahe hain. Baba hamesha mere shohar se dukhi rehte hain lekin jab isne mere sasur ko (baba ki taraf ishara karte hue) baba kaha to baba ka dil pighal gaya or inhone Neer ko apna beta bana liya baba ne humse kaha ki isko pichhla kuch bhi yaad nahi hai or jane ye kaun hai to kyo na isko hum apna le or ye hamaare hi ghar me rahe kyonki baba ko isme apna beta nazar aata hai jaisa beta wo hamesha se chahte the. tab se leke aaj tak ye iss ghar ka beta bankar ek bete ke sare farz nibha raha hai hume nahi pata ki inke ateet me ye kaun the or inhone kya kiya hai. lekin aaj ki tareekh me ye ek mehanti insaan hai jo apna khun-paseena ek karke apne parivaar ka pet bharne ke liye ke liye din raat khet me mehnat karta hai aaj ye ek masoom insaan hai koi apradhi nahi. Janab aapka maksad to zurm ko khatam karna hai naa to inke andar ka shera to kab ka mar chuka hai kya aap ek masoom insaan ko ek apradhi ki saza denge?
Khan : aapne jo kiya wo insaniyat ki nazar se qabil-e-tareef hai lekin jisko aap ek bhola-bhala masoom insaan keh rahi ho wo ek peshawar apradhi hai. Aaj main isko chod bhi doo to kal agar iski yaddasht wapis aa gai to iski kya garenty hai ki ye apni duniya me wapis nahi jayega or koi gunah nahi karega aap nahi janti isne kitne logo ka qatl kiya hai ye aadmi bahut khatarnaak hai isko main aise khula nahi chod sakta.
Baba : sahab main manta hun ki aulaad ke dukh ne mujhe khudgarz bana diya tha lekin ye bura insaan nahi hai.... main aapse vaada karta hun ki agar ab ye koi bhi gunah kare to aap mujhe faansi par chadha dena. Neer mera beta hai iski poori jimmedari main leta hun (mera hath pakadkar)
Khan : (apne sir par hath ferte hue) pata nahi main thik kar raha hun ya galat lekin fir bhi main isko ek moqa jarur dunga.
Baba, Nazi, Fiza : (ek awaaz me apne hath jodkar) aapka bahut ahsaan hoga sahab.
Khan : ahsaan wali koi bat nahi bas isko kal mere sath ek baar shehar chalna hoga main doctor se iske dimaag ka check-up karwana chahta hun sath me iska lie ditector test bhi karunga. kyonki mujhe aap par to bharosa hai lekin iss par nahi.
Fiza : kis baat ka check-up sahab (hairani se) or ye laayi kya hai (fiza ko lie ditector kehna nahi aaya)
Khan : Lie ditector test se hum ye pata kar sakte hain ki insaan jhooth bol raha hai ya sach or iska check-up main isliye karwana chahta hun ki mujhe janna hai iski yaddasht kab tak wapis aayegi uske baad isko meri madad karni hogi.
Main : (jo itni der se khamosh sab sunn raha tha) kaisi madad sahab.
Khan : tumko kanoon se maafi itni asani se nahi milegi iske badle me tumko hamaari madad karni hogi tumhare baki gang walo ko pakadwane me.
Main : thik hai sahab ab jo bhi hai yhi mere apne hai or inke liye main kuch bhi karne ko tiyaar hun.
Khan : To thik hai fir abhi main chalta hun subah mulaqat hogi teiyaar rehna or haa agar bhagne ki koshish ki to yaad rakhna mujrim ko panah dene wala bhi mujrim hi hota hai tumhare gharwalo ne tumhari garenty lee hai agar tum bhaage to tum soch nahi sakte main inka kya haal karunga.
Baba : ye kahi nahi jayega sahab aap be-fikar hoke jaye.... maine kaha naa main iski jimmedari leta hun.
Khan : thik hai fir main chalta hun.
Main : khan sahab ye bag bhi le jayiye ye ab mere bhi kaam ka nahi hai.
Khan : (hairaan hote hue) lagta hai shera sach me mar gaya.
Uske baad khan or uske sath jo policewale aaye the wo sab mera bag lekar chale gaye or hum sab unko jata hua dekhte rahe. Fir baba ne mujhe apne gale se laga liya or fiza or nazi mujhe dekhkar muskura bhi rahi thi or sath me rou bhi rahi thi main bhi unko dekhkar muskura raha tha.
Baba : beta hume maaf karna hamane tumse tumhari asaliyat chhupayi.
Main : baba kaisi baat kar rahe hain maafi maang kar sharminda na kare mujhe aapne jo mere liye kiya uska ahsaan main marte dam tak nahi chuka sakta.
Baba : (mere sir par hath rakhkar mujhe dua dete hue ) beta tum hamesha khush raho or abaad raho.
Fir baba apne kamre me chale gaye or main fiza or nazi ke pass hi baith gaya. wo dono mujhe lagatar dekh rahi thi lekin kuch bol nahi rahi thi.
Main : Aise kya dekh rahi ho tum dono.
Fiza : kuch nahi aaj ek pal ke liye laga jaise hamane tumko kho diya (fir se rote hue)
Main : arre tum rone kyo lagi (fiza ke dono hath pakdte hue or nazi ki taraf dekhkar) nazi paani leke aao
Nazi : abhi laayi.
Nazi ke jate hi fiza ne mujhe gale se laga liya or fir se rone lagi
Main : arre kya hua rone kyo lag gai.
Fiza : jaan tum nahi jante main bahut darr gai thi.
Main : Isme darne ki kya baat hai main hun naa tumhare pass kahi gaya to nahi or fikar na karo ab main kahi jaunga bhi nahi ab sari jindagi main Neer hi rahunga.
Itne me nazi pani le aayi or hum dono jaldi se alag hoke baith gaye. uske baad koi khas bat nahi hui raat ko hamane khamoshi se khana khaya or sone chale gaye. nazi ki neend ki dawayi ki wajah se tabiyat kharab ho gai thi isliye fiza ne dubara usko wo goli nahi di or uss raat hum sab sukoon se so gaye. baba ne mujhe nazi ke kamre me nahi sone jane diya or apne pass hi sulaya. Agle din subah jab main utha to sab jaag rahe the nazi or fiza rasoyi me thi or baba bahar sair kar rahe the. main jab uthkar bahar aaya to nazi or fiza nashta bana rahi thi or sath hi fiza nazi ke pass khadi usko kuch samjha rahi thi.
Main : arre aaj itni jaldi nashta kaise bana liya.
Fiza : arre bhul gaye tumne aaj shehar jana hai naa isliye tumhare liye banaya hai jao tum jaldi se nahakar teiyaar ho jao fir main nashta laga deti hun.
Main : lekin shehar jana kyo hai main nahi jaunga shehar mujhe khet me kaam hai.
Fiza : khet ki tum fikar na karo ek din nahi jaoge to asmaan nahi toot jayega pehle tum shehar jao or khan ke sath jake apna ilaaj karwao unka subah aadmi aaya tha wo keh raha tha ki khan sahab 8 baje tumko lene aayenge.
Main : mujhe usse koi vasta nahi rakhna main nahi jaunga
Fiza : bacho jaise zidd na karo Neer main bhi to hun tumhare sath.
Main : tum bhi... kya matlab
Fiza : arre main bhi tumhare sath hi chalungi wapsi me hum dono sath hi aayenge
Nazi : (bich me bolte hue) dekho na Neer main mana kar rahi hun bhabhi ko lekin ye sunn hi nahi rahi iss halat me inka shehar jana thik hai kya maine to kaha hai tumhare sath main akeli hi chali jaungi lekin nahi meri baat hi nahi sunn rahi.
Main : tum dono hi khamosh ho jao or apna kaam karo koi shehar nahi jayega naa tum naa main samjhi.
ख़ान : वाह भाई क्या रौब है वो भी शेरा पर....(हैरान होते हुए) क्योंकि मैने तो सुना था वो आदमी पैदा नही हुआ जो शेरा को झुका सके (अपने साथ वाले पोलीस वाले को देखते हुए)
मैं : (अपने हाथ जोड़ते हुए) देखिए जनाब मेरे बाबा की तबीयत ठीक नही है आप मेहरबानी करके यहाँ से जाइए.
ख़ान : चले जाएँगे मेरी जान इतनी भी क्या जल्दी है पहले तसल्ली तो कर लूँ
मैं : कैसी तसल्ली
ख़ान : अगर तुम शेरा नही हो तो अपनी कमीज़ उतारो क्योंकि हम जानते हैं कि शेरा के कंधे के पिछे एक शेर का टट्टू गुदा हुआ है.
मैं : अगर नही हुआ तो फिर आप यहाँ से चले जाएँगे
ख़ान : जी बिल्कुल हज़ूर आप बस हमारी तसल्ली करवा दे फिर हम आपको चेहरा तक नही दिखाएँगे.
मैं : ठीक है (कमीज़ उतारते हुए) देख लीजिए ऑर तसल्ली कर लीजिए. (मैं नही जानता था कि मेरी पीठ पर इस क़िस्म का कोई निशान है भी या नही इसलिए मैने ख़ान के कहने पर फॉरन कमीज़ उतार दी)
ख़ान : (चारो तरफ मेरे गोल-गोल घूमते हुए) हमम्म (मेरे कंधे पर हाथ रखकर) तू शातिर तो बहुत है लेकिन आज फँस गया बच्चे तेरा शेर ही तुझे मरवा गया..... हाहहहहहाहा (तालियाँ बजाते हुए)
मैं : जी क्या मतलब (घूमकर ख़ान की तरफ देखते हुए)
ख़ान : तूने मुझे भी इन भोले गाँव वालो की तरह चूतिया समझा है जो तेरी बातो मे आ जाउन्गा
मैं : मैं आपका मतलब नही समझा आप कहना क्या चाहते हैं.
ख़ान : मतलब तो हवालात मे मैं तुझे अच्छे से सम्झाउन्गा
बाबा : (खड़े होते हुए) देखिए जनाब ये मेरा बेटा नीर ही है सिर्फ़ शक़ल एक जैसी हो जाने से करम एक जैसे नही होते हैं ये बिचारा तो खेत मे मेहनत करता है बहुत सीधा लड़का है कभी किसी से ऊँची आवाज़ मे बात भी नही करता मेरी हर बात मानता है आप गाँव मे किसी से भी पूछ लीजिए बहुत भला लड़का है इसने कोई गुनाह नही किया.
ख़ान : (मुझे कंधो से पकड़कर घूमाते हुए) ये देखिए जनाब आप जिसे अपना बेटा कह रहे थे वो एक अंडरवर्ल्ड का मोस्ट वांटेड गॅंग्स्टर शेरा है इसने बहुत से लोगो का क़त्ल किया है ये इतना शातिर है किसी इंसान की जान लेने के लिए इसको किसी हथियार की भी ज़रूरत नही हर तरह का हथियार चला लेता है ये इसका सटीक निशाना इसकी अंडर्वर्ड मे पहचान है. अब इस टॅटू ऑर ये गोलियों के निशान को देखकर तो आपको तसल्ली हो गई होगी कि ये आपका बेटा नीर नही बल्कि शेरा है जिसको हम इतने महीनो से ढूँढ रहे हैं.
बाबा : देखिए साहब मैं आपको सब सच-सच बता दूँगा लेकिन आपको वादा करना होगा कि आप ये बात किसी को नही बताएँगे.
ख़ान : (कुर्सी पर वापिस बैठ ते हुए) मैं सुन रहा हूँ कहिए क्या कहना है आपको.
जब बाबा ने इनस्पेक्टर ख़ान को मेरे बारे मे बताना शुरू किया तो मैं भी उनके पास ही कमीज़ पहनकर बैठ गया. क्योंकि अक्सर मैं जब भी नाज़ी ऑर फ़िज़ा से अपने बारे मे कुछ भी पुछ्ता तो वो अक्सर टाल जाती ऑर मुझे मेरे बारे मे सच नही बताती ऑर मेरे सीने पर जो निशान थे वो गोलियो के थे ये बात भी मुझे आज ही पता चली थी क्योंकि नाज़ी ऑर फ़िज़ा ने मुझे यही बताया था कि मुझे आक्सिडेंट मे चोट लगने से ये सीने पर निशान मिले थे. अब आख़िर मुझे भी अपने जानना था कि मैं कौन हूँ ऑर मेरा सच क्या है. तभी बाबा ने पहले फ़िज़ा को ऑर फिर नाज़ी को एक साथ आवाज़ देकर बाहर बुलाया दोनो मुँह को ढक कर बाहर आ गई ऑर जहाँ मैं बैठा था मेरे पिछे आके चुप-चाप खड़ी हो गई. मैने पलटकर दोनो को एक नज़र देखा ऑर फिर सीधा होके बैठ गया.
बाबा : बेटा इनस्पेक्टर साहब को नीर के बारे मे सब सच-सच बता दो.
फ़िज़ा : लेकिन बाबा वो....मैं...वो..... (कुछ सोचते हुए)
ख़ान : जी आप घबरईए नही खुलकर बताइए मैं जानना चाहता हूँ कि आप मुझे क्या सच बताना चाहती है.
फ़िज़ा : (एक लंबी साँस छोड़ते हुए) ठीक है साहब लेकिन वादा कीजिए कि उसके बाद आप नीर को कुछ नही कहेंगे.
ख़ान : (अपना कोट सही करते हुए) मैं कोई वादा नही करूँगा लेकिन हाँ अगर ये बे-गुनाह है तो इससे कुछ नही होगा.
फ़िज़ा : ठीक है ख़ान साब.....नाज़ी जाओ वो बॅग ले आओ जो हमने छुपा कर रखा था.
नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा भाभी...
ये सुनकर मुझे भी झटका लगा कि ये कौन्से बॅग के बारे मे बात कर रही है जिसके बारे मे मैं नही जानता ऑर इन्होने मुझे कभी क्यो नही बताया. फिर फ़िज़ा ने बोलना शुरू किया ऑर ख़ान साब हमे नही पता नीर का असल नाम क्या है ऑर ये कौन है हाँ ये सच है कि हमारा इससे ज़ाति कोई ताल्लुक नही है. हम को जब ये मिला तो ये बुरी तरह खून मे लथ-पथ था ऑर इसे पाँच गोलियाँ लगी हुई थी ऑर अपनी आखरी साँसे गिन रहा था इसको हम इंसानियत के नाते घर ले आई फिर इसकी गोलियाँ निकाली ऑर इसकी मरहम पट्टी करके इसका इलाज किया. 3 महीने तक ये बेहोश था उसके बाद इसको होश आया लेकिन तब तक ये अपनी याददाश्त खो चुका था ऑर इससे अपने बारे मे कुछ भी याद नही था. (तभी नाज़ी एक काला बॅग ले आई)
नाज़ी : ये लो भाभी. (बॅग फ़िज़ा को देते हुए)
फ़िज़ा : (नाज़ी को देखते हुए) टेबल पर रख दो बॅग को.... (घूमकर ख़ान से बात करते हुए) ख़ान साहब हमें ये बॅग नीर के कंधे पर लटका मिला था ये बेहोश था इसलिए हमने इसकी अमानत को संभाल कर रख दिया था (बॅग खोलते हुए) जब हमने इसके बारे मे मालूम करने के लिए बॅग खोला तो इसमे ये हथियार ऑर ये ढेर सारे पैसे पड़े मिले ये देखकर हम एक बार तो घबरा गई थी कि जाने ये कौन है ऑर इसके पास ऐसा समान क्या कर रहा है लेकिन फिर भी इंसानियत के नाते हमारा ये फ़र्ज़ था कि हम इसकी जान बचाते इसलिए हमने पोलीस मे खबर ना करके पहले इसको बचाना ज़रूरी समझा... हमने सोचा था क़ि जब ये होश मे आ जाएगा तो इसको हम जाने के लिए कह देंगे.
ख़ान : (बॅग मे देखते हुए) वाआह क्या बात है इतना सारा पैसा, ये ऑटोमॅटिक हथियार...ऑर आप लोग कहते हैं कि ये शेरा नही है.
फ़िज़ा : जनाब मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए वही तो मैं आपको बता रही हूँ.... जब ये हमे मिला तो बहुत बुरी तरह ज़ख़्मी था मैं ऑर नाज़ी (उंगली से नाज़ी की तरफ इशारे करते हुए) इसको उठाकर अपने घर ले आई थी ताकि इसकी जान बचाई जा सके 3 महीने तक ये बेहोश पड़ा रहा उसके बाद जब ये होश मे आया तब इसने पहला लफ्ज़ जो बोला वो था "बाबा आपका बेटा आ गया..." जब बाबा इसके पास गये तो इनके परिवार के बारे मे ऑर इनका नाम पूछा लेकिन इसको कुछ भी याद नही था ये सब कुछ भूल चुका था क्योंकि इसके सिर मे काफ़ी गहरी चोट आई थी इसलिए.
मेरे शोहार भी एक शराबी ऑर जुवारि किस्म के इंसान है ऑर वो आज कल जैल मे सज़ा काट रहे हैं. बाबा हमेशा मेरे शोहर से दुखी रहते हैं लेकिन जब इसने मेरे ससुर को (बाबा की तरफ इशारा करते हुए) बाबा कहा तो बाबा का दिल पिघल गया ऑर इन्होने नीर को अपना बेटा बना लिया बाबा ने हम से कहा कि इसको पिच्छला कुछ भी याद नही है ऑर जाने ये कौन है तो क्यो ना इसको हम अपना लें ऑर ये हमारे ही घर मे रहे क्योंकि बाबा को इसमे अपना बेटा नज़र आता है जैसा बेटा वो हमेशा से चाहते थे. तब से लेके आज तक ये इस घर का बेटा बनकर एक बेटे के सारे फ़र्ज़ निभा रहा है हमें नही पता कि इनके अतीत मे ये कौन थे ऑर इन्होने क्या किया है. लेकिन आज की तारीख मे ये एक मेहनती इंसान है जो अपना खून-पसीना एक करके अपने परिवार का पेट भरने के लिए के लिए दिन रात खेत मे मेहनत करता है आज ये एक मासूम इंसान है कोई अपराधी नही. जनाब आपका मकसद तो ज़ुर्म को ख़तम करना है ना तो इनके अंदर का शेरा तो कब का मर चुका है क्या आप एक मासूम इंसान को एक अपराधी की सज़ा देंगे?
ख़ान : आपने जो किया वो इंसानियत की नज़र से क़ाबिल-ए-तारीफ है लेकिन जिसको आप एक भोला-भला मासूम इंसान कह रही हो वो एक पेशावर अपराधी है. आज मैं इसको छोड़ भी दूं तो कल अगर इसकी याददाश्त वापिस आ गई तो इसकी क्या गारंटी है कि ये अपनी दुनिया मे वापिस नही जाएगा ऑर कोई गुनाह नही करेगा आप नही जानती इसने कितने लोगो का क़त्ल किया है ये आदमी बहुत ख़तरनाक है इसको मैं ऐसे खुला नही छोड़ सकता.
बाबा : साहब मैं मानता हूँ कि औलाद के दुख ने मुझे ख़ुदग़र्ज़ बना दिया था लेकिन ये बुरा इंसान नही है.... मैं आपसे वादा करता हूँ कि अगर अब ये कोई भी गुनाह करे तो आप मुझे फाँसी पर चढ़ा देना. नीर मेरा बेटा है इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मैं लेता हूँ (मेरा हाथ पकड़कर)
ख़ान : (अपने सिर पर हाथ फेरते हुए) पता नही मैं ठीक कर रहा हूँ या ग़लत लेकिन फिर भी मैं इसको एक मोक़ा ज़रूर दूँगा.
बाबा, नाज़ी, फ़िज़ा : (एक आवाज़ मे अपने हाथ जोड़कर) आपका बहुत अहसान होगा साहब.
ख़ान : अहसान वाली कोई बात नही बस इसको कल मेरे साथ एक बार शहर चलना होगा मैं डॉक्टर से इसके दिमाग़ का चेक-अप करवाना चाहता हूँ साथ मे इसका लाइ डिटेक्टोर टेस्ट भी करूँगा. क्योंकि मुझे आप पर तो भरोसा है लेकिन इस पर नही.
फ़िज़ा : किस बात का चेक-अप साहब (हैरानी से) ऑर ये लाई क्या है (फ़िज़ा को लाइ डिटेक्टोर कहना नही आया)
ख़ान : लाइ डिटेक्टोर टेस्ट से हम ये पता कर सकते हैं कि इंसान झूठ बोल रहा है या सच ऑर इसका चेक-अप मैं इसलिए करवाना चाहता हूँ कि मुझे जानना है इसकी याददाश्त कब तक वापिस आएगी उसके बाद इसको मेरी मदद करनी होगी.
मैं : (जो इतनी देर से खामोश सब सुन रहा था) कैसी मदद साहब.
ख़ान : तुमको क़ानून से माफी इतनी आसानी से नही मिलेगी इसके बदले मे तुमको हमारी मदद करनी होगी तुम्हारे बाकी गॅंग वालो को पकड़वाने मे.
मैं : ठीक है साहब अब जो भी है यही मेरे अपने है ऑर इनके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ.
ख़ान : तो ठीक है फिर अभी मैं चलता हूँ सुबह मुलाक़ात होगी तैयार रहना ऑर हाँ अगर भागने की कोशिश की तो याद रखना मुजरिम को पनाह देने वाला भी मुजरिम ही होता है तुम्हारे घरवालो ने तुम्हारी गारंटी ली है अगर तुम भागे तो तुम सोच नही सकते मैं इनका क्या हाल करूँगा.
बाबा : ये कही नही जाएगा साहब आप बे-फिकर होके जाए.... मैने कहा ना मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ.
ख़ान : ठीक है फिर मैं चलता हूँ.
मैं : ख़ान साहब ये बॅग भी ले जाइए ये अब मेरे भी काम का नही है.
ख़ान : (हैरान होते हुए) लगता है शेरा सच मे मर गया.
उसके बाद ख़ान ऑर उसके साथ जो पोलीस वाले आए थे वो सब मेरा बॅग लेकर चले गये ऑर हम सब उनको जाता हुआ देखते रहे. फिर बाबा ने मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर फ़िज़ा ऑर नाज़ी मुझे देखकर मुस्कुरा भी रही थी ऑर साथ मे रो भी रही थी मैं भी उनको देखकर मुस्कुरा रहा था.
बाबा : बेटा हमें माफ़ करना हमने तुमसे तुम्हारी असलियत छुपाइ.
मैं : बाबा कैसी बात कर रहे हैं माफी माँग कर शर्मिंदा ना करे मुझे आपने जो मेरे लिए किया उसका अहसान मैं मरते दम तक नही चुका सकता.
बाबा : (मेरे सिर पर हाथ रखकर मुझे दुआ देते हुए ) बेटा तुम हमेशा खुश रहो ऑर आबाद रहो.
फिर बाबा अपने कमरे मे चले गये ऑर मैं फ़िज़ा ऑर नाज़ी के पास ही बैठ गया. वो दोनो मुझे लगातार देख रही थी लेकिन कुछ बोल नही रही थी.
मैं : ऐसे क्या देख रही हो तुम दोनो.
फ़िज़ा : कुछ नही आज एक पल के लिए लगा जैसे हमने तुमको खो दिया (फिर से रोते हुए)
मैं : अर्रे तुम रोने क्यो लगी (फ़िज़ा के दोनो हाथ पकड़ते हुए ऑर नाज़ी की तरफ देखकर) नाज़ी पानी लेके आओ
नाज़ी : अभी लाई.
नाज़ी के जाते ही फ़िज़ा ने मुझे गले से लगा लिया ऑर फिर से रोने लगी
मैं : अर्रे क्या हुआ रोने क्यो लग गई.
फ़िज़ा : जान तुम नही जानते मैं बहुत डर गई थी.
मैं : इसमे डरने की क्या बात है मैं हूँ ना तुम्हारे पास कहीं गया तो नही ऑर फिकर ना करो अब मैं कही जाउन्गा भी नही अब सारी जिंदगी मैं नीर ही रहूँगा.
इतने मे नाज़ी पानी ले आई ऑर हम दोनो जल्दी से अलग होके बैठ गये. उसके बाद कोई खास बात नही हुई रात को हमने खामोशी से खाना खाया ऑर सोने चले गये. नाज़ी की नींद की दवाई की वजह से तबीयत खराब हो गई थी इसलिए फ़िज़ा ने दुबारा उसको वो गोली नही दी और उस रात हम सब सुकून से सो गये. बाबा ने मुझे नाज़ी के कमरे मे नही सोने जाने दिया ऑर अपने पास ही सुलाया. अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो सब जाग रहे थे नाज़ी ऑर फ़िज़ा रसोई मे थी ऑर बाबा बाहर सैर कर रहे थे. मैं जब उठकर बाहर आया तो नाज़ी ऑर फ़िज़ा नाश्ता बना रही थी ऑर साथ ही फ़िज़ा नाज़ी के पास खड़ी उसको कुछ समझा रही थी.
मैं : अर्रे आज इतनी जल्दी नाश्ता कैसे बना लिया.
फ़िज़ा : अर्रे भूल गये तुमने आज शहर जाना है ना इसलिए तुम्हारे लिए बनाया है जाओ तुम जल्दी से नहा कर तेयार हो जाओ फिर मैं नाश्ता लगा देती हूँ.
मैं : लेकिन शहर जाना क्यों है मैं नही जाउन्गा शहर मुझे खेत मे काम है.
फ़िज़ा : खेत की तुम फिकर ना करो एक दिन नही जाओगे तो आसमान नही टूट जाएगा पहले तुम शहर जाओ ऑर ख़ान के साथ जाके अपना इलाज कर्वाओ उनका सुबह आदमी आया था वो कह रहा था कि ख़ान साहब 8 बजे तुमको लेने आएँगे.
मैं : मुझे उससे कोई वास्ता नही रखना मैं नही जाउन्गा
फ़िज़ा : बच्चों जैसे ज़िद्द ना करो नीर मैं भी तो हूँ तुम्हारे साथ.
मैं : तुम भी... क्या मतलब
फ़िज़ा : अर्रे मैं भी तुम्हारे साथ ही चलूंगी वापसी मे हम दोनो साथ ही आएँगे
नाज़ी : (बीच मे बोलते हुए) देखो ना नीर मैं मना कर रही हूँ भाभी को लेकिन ये सुन ही नही रही इस हालत मे इनका शहर जाना ठीक है क्या मैने तो कहा है तुम्हारे साथ मैं अकेली ही चली जाउन्गी लेकिन नही मेरी बात ही नही सुन रही.
मैं : तुम दोनो ही खामोश हो जाओ ऑर अपना काम करो कोई शहर नही जाएगा ना तुम ना मैं समझी.
Update-26
Khan : Waah bhai kya roub hai wo bhi shera par....(hairaan hote hue) kyonki maine to suna tha wo aadmi paida nahi hua jo shera ko jhuka sake (apne sath wale police wale ko dekhte hue)
Main : (Apne hath jodte hue) dekhiye janab mere baba ki tabiyat thik nahi hai aap meharbani karke yahan se jayiye.
Khan : chale jayenge meri jaan itni bhi kya jaldi hai pehle tasalli to kar loo
Main : kaisi tasalli
Khan : agar tum shera nahi ho to apni kameez utaro kyonki hum jante hain ki shera ke kandhe ke pichhe ek sher ka tatoo guda hua hai.
Main : Agar nahi hua to fir aap yahan se chale jayenge
Khan : ji bilkul hazoor aap bas hamaari tasalli karwa de fir hum aapko chehra tak nahi dikhayenge.
Main : thik hai (kameez utarte hue) dekh lijiye or tasalli kar lijiye. (main nahi janta tha ki meri peeth par iss qism ka koi nishaan hai bhi ya nahi isliye maine khan ke kehne par foran kameez utaar di)
Khan : (charo taraf mere gol-gol ghumte hue) Hhhmmm (mere kandhe par hath rakhkar) tu shatir to bahut hai lekin aaj phas gaya bache tera sher hi tujhe marwa gaya..... Hahahahahahaha (taaliyaan bajate hue)
Main : ji kya matlab (ghumkar khan ki taraf dekhte hue)
Khan : tune mujhe bhi inn bhole gaav walo ki tarah chutiya samjha hai jo teri baato me aa jaunga
Main : main apka matlab nahi samjha aap kehna kya chahte hain.
Khan : matlab to hawaalat me main tujhe achhe se samjhaunga
Baba : (khade hote hue) dekhiye janab ye mera beta Neer hi hai sirf shaqal ek jaisi ho jane se karam ek jaise nahi hote hain ye bichara to khet me mehnat karta hai bahut seedha ladka hai kabhi kisi se oonchi awaz me baat bhi nahi karta meri har baat manta hai aap gaav me kisi se bhi puch lijiye bahut bhala ladka hai isne koi gunah nahi kiya.
Khan : (mujhe kandho se pakadkar ghumate hue) ye dekhiye janab aap jise apna beta keh rahe the wo ek underworld ka most wanted gangster shera hai isne bahut se logo ka qatl kiya hai ye itna shatir hai kisi insaan ki jaan lene ke liye isko kisi hathiyaar ki bhi jarurat nahi har tarah ka hathiyaar chala leta hai ye iska sateek nishana iski underword me pehchaan hai. ab iss tatoo or ye goliyon ke nishaan ko dekhkar to apko tasalli ho gai hogi ki ye aapka beta Neer nahi balki shera hai jisko hum itne maheeno se dhundh rahe hain.
Baba : dekhiye sahab main aapko sab sach-sach bata dunga lekin aapko vaada karna hoga ki aap ye baat kisi ko nahi batayenge.
Khan : (kursi par wapis baith te hue) main sunn raha hun kahiye kya kehna hai apko.
Jab Baba ne inspector khan ko mere bare me batana shuru kiya to main bhi unke pass hi kameez pehankar baith gaya. kyonki aksar main jab bhi nazi or fiza se apne bare me kuch bhi puchhta to wo aksar taal jati or mujhe mere bare me sach nahi batati or mere seene par jo nishaan the wo goliyo ke the ye baat bhi mujhe aaj hi pata chali thbi kyonki nazi or fiza ne mujhe yhi bataayaa tha ki mujhe accident me chot lagne se ye seene par nishan mile the. Ab akhir mujhe bhi apne janna tha ki main kaun hun or mera sach kya hai. Tabhi baba ne pehle fiza ko or fir nazi ko ek sath awaz dekar bahar bulaya dono munh ko dhak kar bahar aa gai or jahan main baitha tha mere pichhe aake chup-chap khadi ho gai. maine palatkar dono ko ek nazar dekha or fir sidha hoke baith gaya.
Baba : beta inspector sahab ko Neer ke bare me sab sach-sach bata do.
Fiza : lekin baba wo....main...wo..... (kuch sochte hue)
Khan : ji aap ghabrayiye nahi khulkar batayiye main janna chahta hun ki aap mujhe kya sach batana chahti hai.
Fiza : (ek lambi saans chodte hue) thik hai sahab lekin vaada kijiye ki uske baad aap Neer ko kuch nahi kahenge.
Khan : (apna coat sahi karte hue) main koi vaada nahi karunga lekin haa agar ye be-gunah hai to isse kuch nahi hoga.
Fiza : thik hai khan saab.....Nazi jao wo bag le aao jo hamane chhupake rakha tha.
Nazi : (haa me sir hilate hue) achha bhabhi...
Ye sunkar mujhe bhi jhatka laga ki ye kounse bag ke bare me baat kar rahi hai jiske bare me main nahi janta or inhone mujhe kabhi kyo nahi bataayaa. Fir fiza ne bolna shuru kiya or khan saab hume nahi pata Neer ka asal naam kya hai or ye kaun hai haa ye sach hai ki hmara isse zaati koi talluk nahi hai. Ham ko jab ye mila to ye buri tarah khun me lath-path tha or isse paanch goliyaan lagi hui thi or apni aakhri saanse gin raha tha isko hum insaniyat ke naate ghar le aayi fir iski goliyaan nikali or iski maraham patti karke iska ilaaj kiya. 3 maheene tak ye behosh tha uske baad isko hosh aaya lekin tab tak ye apni yaddasht kho chuka tha or isse apne bare me kuch bhi yaad nahi tha. (tabhi nazi ek kala bag le aayi)
Nazi : ye lo bhabhi. (bag fiza ko dete hue)
Fiza : (nazi ko dekhte hue) Table par rakh do bag ko.... (ghumkar khana se baat karte hue) Khan sahab hume ye bag Neer ke kandhe par latka mila tha ye behosh tha isliye hamane iski amaanat ko sambhaal kar rakh diya tha (bag kholte hue) jab hamane iske bare me malum karne ke liye bag khola to isme ye hathiyaar or ye dher sare paise pade mile ye dekhkar hum ek baar to ghabra gai thi ki jane ye kaun hai or iske pass aisa samaan kya kar raha hai lekin fir bhi insaniyat ke naate hmara ye farz tha ki hum iski jaan bachate isliye hamane police me khabar na karke pehle isko bachana jaruri samjha... hamane socha tha ki jab ye hosh me aa jayega to isko hum jane ke liye keh denge.
Khan : (bag me dekhte hue) Waaah kya baat hai itna sara paisa, ye Automatic hathiyaar...or aap log kehte hain ki ye shera nahi hai.
Fiza : janab meri poori baat to sun lijiye wahi to main aapko bata rahi hun.... jab ye hume mila to bahut buri tarah zakhmi tha main or nazi (ungali se nazi ki taraf ishare karte hue) isko uthakar apne ghar le aayi thi taki iski jaan bachayi jaa sake 3 maheene tak ye behosh pada raha uske baad jab ye hosh me aya tab isne pehla lafz jo bola wo tha "Baba aapka beta aa gaya..." jab baba iske pass gaye to inke parivaar ke bare me or inka naam puchaa lekin isko kuch bhi yaad nahi tha ye sab kuch bhul chuka tha kyonki iske sir me kaafi gehri chot aayi thi isliye.
Mere shohar bhi ek sharabi or juwaari kism ke insaan hai or wo aaj kal jail me saza kaat rahe hain. Baba hamesha mere shohar se dukhi rehte hain lekin jab isne mere sasur ko (baba ki taraf ishara karte hue) baba kaha to baba ka dil pighal gaya or inhone Neer ko apna beta bana liya baba ne humse kaha ki isko pichhla kuch bhi yaad nahi hai or jane ye kaun hai to kyo na isko hum apna le or ye hamaare hi ghar me rahe kyonki baba ko isme apna beta nazar aata hai jaisa beta wo hamesha se chahte the. tab se leke aaj tak ye iss ghar ka beta bankar ek bete ke sare farz nibha raha hai hume nahi pata ki inke ateet me ye kaun the or inhone kya kiya hai. lekin aaj ki tareekh me ye ek mehanti insaan hai jo apna khun-paseena ek karke apne parivaar ka pet bharne ke liye ke liye din raat khet me mehnat karta hai aaj ye ek masoom insaan hai koi apradhi nahi. Janab aapka maksad to zurm ko khatam karna hai naa to inke andar ka shera to kab ka mar chuka hai kya aap ek masoom insaan ko ek apradhi ki saza denge?
Khan : aapne jo kiya wo insaniyat ki nazar se qabil-e-tareef hai lekin jisko aap ek bhola-bhala masoom insaan keh rahi ho wo ek peshawar apradhi hai. Aaj main isko chod bhi doo to kal agar iski yaddasht wapis aa gai to iski kya garenty hai ki ye apni duniya me wapis nahi jayega or koi gunah nahi karega aap nahi janti isne kitne logo ka qatl kiya hai ye aadmi bahut khatarnaak hai isko main aise khula nahi chod sakta.
Baba : sahab main manta hun ki aulaad ke dukh ne mujhe khudgarz bana diya tha lekin ye bura insaan nahi hai.... main aapse vaada karta hun ki agar ab ye koi bhi gunah kare to aap mujhe faansi par chadha dena. Neer mera beta hai iski poori jimmedari main leta hun (mera hath pakadkar)
Khan : (apne sir par hath ferte hue) pata nahi main thik kar raha hun ya galat lekin fir bhi main isko ek moqa jarur dunga.
Baba, Nazi, Fiza : (ek awaaz me apne hath jodkar) aapka bahut ahsaan hoga sahab.
Khan : ahsaan wali koi bat nahi bas isko kal mere sath ek baar shehar chalna hoga main doctor se iske dimaag ka check-up karwana chahta hun sath me iska lie ditector test bhi karunga. kyonki mujhe aap par to bharosa hai lekin iss par nahi.
Fiza : kis baat ka check-up sahab (hairani se) or ye laayi kya hai (fiza ko lie ditector kehna nahi aaya)
Khan : Lie ditector test se hum ye pata kar sakte hain ki insaan jhooth bol raha hai ya sach or iska check-up main isliye karwana chahta hun ki mujhe janna hai iski yaddasht kab tak wapis aayegi uske baad isko meri madad karni hogi.
Main : (jo itni der se khamosh sab sunn raha tha) kaisi madad sahab.
Khan : tumko kanoon se maafi itni asani se nahi milegi iske badle me tumko hamaari madad karni hogi tumhare baki gang walo ko pakadwane me.
Main : thik hai sahab ab jo bhi hai yhi mere apne hai or inke liye main kuch bhi karne ko tiyaar hun.
Khan : To thik hai fir abhi main chalta hun subah mulaqat hogi teiyaar rehna or haa agar bhagne ki koshish ki to yaad rakhna mujrim ko panah dene wala bhi mujrim hi hota hai tumhare gharwalo ne tumhari garenty lee hai agar tum bhaage to tum soch nahi sakte main inka kya haal karunga.
Baba : ye kahi nahi jayega sahab aap be-fikar hoke jaye.... maine kaha naa main iski jimmedari leta hun.
Khan : thik hai fir main chalta hun.
Main : khan sahab ye bag bhi le jayiye ye ab mere bhi kaam ka nahi hai.
Khan : (hairaan hote hue) lagta hai shera sach me mar gaya.
Uske baad khan or uske sath jo policewale aaye the wo sab mera bag lekar chale gaye or hum sab unko jata hua dekhte rahe. Fir baba ne mujhe apne gale se laga liya or fiza or nazi mujhe dekhkar muskura bhi rahi thi or sath me rou bhi rahi thi main bhi unko dekhkar muskura raha tha.
Baba : beta hume maaf karna hamane tumse tumhari asaliyat chhupayi.
Main : baba kaisi baat kar rahe hain maafi maang kar sharminda na kare mujhe aapne jo mere liye kiya uska ahsaan main marte dam tak nahi chuka sakta.
Baba : (mere sir par hath rakhkar mujhe dua dete hue ) beta tum hamesha khush raho or abaad raho.
Fir baba apne kamre me chale gaye or main fiza or nazi ke pass hi baith gaya. wo dono mujhe lagatar dekh rahi thi lekin kuch bol nahi rahi thi.
Main : Aise kya dekh rahi ho tum dono.
Fiza : kuch nahi aaj ek pal ke liye laga jaise hamane tumko kho diya (fir se rote hue)
Main : arre tum rone kyo lagi (fiza ke dono hath pakdte hue or nazi ki taraf dekhkar) nazi paani leke aao
Nazi : abhi laayi.
Nazi ke jate hi fiza ne mujhe gale se laga liya or fir se rone lagi
Main : arre kya hua rone kyo lag gai.
Fiza : jaan tum nahi jante main bahut darr gai thi.
Main : Isme darne ki kya baat hai main hun naa tumhare pass kahi gaya to nahi or fikar na karo ab main kahi jaunga bhi nahi ab sari jindagi main Neer hi rahunga.
Itne me nazi pani le aayi or hum dono jaldi se alag hoke baith gaye. uske baad koi khas bat nahi hui raat ko hamane khamoshi se khana khaya or sone chale gaye. nazi ki neend ki dawayi ki wajah se tabiyat kharab ho gai thi isliye fiza ne dubara usko wo goli nahi di or uss raat hum sab sukoon se so gaye. baba ne mujhe nazi ke kamre me nahi sone jane diya or apne pass hi sulaya. Agle din subah jab main utha to sab jaag rahe the nazi or fiza rasoyi me thi or baba bahar sair kar rahe the. main jab uthkar bahar aaya to nazi or fiza nashta bana rahi thi or sath hi fiza nazi ke pass khadi usko kuch samjha rahi thi.
Main : arre aaj itni jaldi nashta kaise bana liya.
Fiza : arre bhul gaye tumne aaj shehar jana hai naa isliye tumhare liye banaya hai jao tum jaldi se nahakar teiyaar ho jao fir main nashta laga deti hun.
Main : lekin shehar jana kyo hai main nahi jaunga shehar mujhe khet me kaam hai.
Fiza : khet ki tum fikar na karo ek din nahi jaoge to asmaan nahi toot jayega pehle tum shehar jao or khan ke sath jake apna ilaaj karwao unka subah aadmi aaya tha wo keh raha tha ki khan sahab 8 baje tumko lene aayenge.
Main : mujhe usse koi vasta nahi rakhna main nahi jaunga
Fiza : bacho jaise zidd na karo Neer main bhi to hun tumhare sath.
Main : tum bhi... kya matlab
Fiza : arre main bhi tumhare sath hi chalungi wapsi me hum dono sath hi aayenge
Nazi : (bich me bolte hue) dekho na Neer main mana kar rahi hun bhabhi ko lekin ye sunn hi nahi rahi iss halat me inka shehar jana thik hai kya maine to kaha hai tumhare sath main akeli hi chali jaungi lekin nahi meri baat hi nahi sunn rahi.
Main : tum dono hi khamosh ho jao or apna kaam karo koi shehar nahi jayega naa tum naa main samjhi.