ऋषि मुस्कुराते हुए गाड़ी चलाता हुआ धीरे-धीरे फैक्टरी के अंदर तक ले आया था और आफिस बिल्डिंग के सामने खड़ी करके खुद बाहर निकला और दौड़ता हुआ साइड की ओर बढ़ा ही था कि आरती दरवाजा खोलकर बाहर आ गई थी
ऋषि की ओर मुस्कुराते हुए
आरती- क्या कर रहे थे में दरवाजा नहीं खोल सकती क्या
ऋषि- ही ही ही नहीं नहीं वो बात नहीं है में तो बस ऐसे ही पहली बार आपको ले के आया हूँ ना इसलिए
आरती- तुम ड्राइवर नहीं हो ठीक है
ऋषि धीरे-धीरे उसके साथ होकर चलता हुआ उसके केबिन की ओर बढ़ता जा रहा था
ऋषि- ठीक है
आरती को उसका साथ अच्छा लग रहा था भोला भाला सा था और शायद इतनी इज़्ज़त उसे कभी नहीं मिली थी जो उसे मिल रही थी घर में छोटा था और कुछ लजाया सा था इसलिए भी हो सकता था पर अच्छा था
आरती अपने आफिस में घुसते ही अपने टेबल पर आ गई थी और वहां रखे हुए बहुत से बिल और वाउचर्स को ठीक से देखने लगी थी ऋषि भी उसके सामने वाली सीट पर बैठा हुआ था और बड़े गौर से आरती की हर हरकतों को देख रहा था आरती भी कभी-कभी उसे ही देख लेती थी और एक बार नज़रें चार होने से ऋषि बस मुस्कुरा देता था और आरती उसे और समर्थन भी देती थी
बहुत देर तक जब आरती उन कागजों में ही उलझी हुई थी तो ऋषि से नहीं रहा गया
ऋषि - भाभी कितना काम कर रही हो
बड़े ही नाटकीय और लड़कपन सी आवाज निकालते हुए उसने भाभी को कहा था आरती की हँसी फूट पड़ी थी उसके इस अंदाज से
आरती- तो यहां काम ही करने आए है
ऋषि- अरे यार यह तो बहुत बोरिंग काम है क्या खाली साइन कर रही हो आप कब से
आरती- हाँ… यह सब खर्चे है जो कि किए हुए है और होंगे भी वोही तो देखना है तुमको हम को
ऋषि- अरे यार में तो बोर होने लगा हूँ अभी से चलिए ना बाहर घूमते है
आरती- क्या
ऋषि- तो क्या कितनी देर से आप तो काम कर रही है और में बैठा हुआ हूँ
बड़े ही नाटकीय तरीके से अपने हाथों को घुमाकर और अपनी बड़ी-बड़ी आखों को मटकाकर उसने बड़े ही उत्तावलेपन से कहा आरती उसकी ओर बड़े ही प्यार से और एक अजीब सी नजर से देखने लगी थी सच में बिल्कुल लड़कियों जैसा ही था बातें करते समय उसकी आखें और होंठों को बड़े ही तरीके से नचाता था ऋषि और साथ-साथ में अपनी हथेलियो को भी गर्दन को भी कुछ अजीब तरीके से
हँसती हुई आरती का ध्यान फिर से अपने काम में लगा लिया था और ऋषि की बातों को भी सुनते हुए उसकी ओर देखती भी जा रही थी
ऋषि- भाभी प्लीज ना ऐसे काम से तो अच्छा है कि में घर पर ही रहूं क्या काम है यह बस बैठे रहो और साइन करो कुछ मजा ही नहीं
आरती- ही ही ही क्या मजा करना है तुम्हें हाँ…
ऋषि अपनी हथेलियो को थोड़ा सा मटकाता हुआ अपनी ठोडी के नीचे रखता हुआ आरती की ओर अपनी बड़ी-बड़ी आखों से देखता रहा और बोला
ऋषि- यहां से चलिए ना भाभी कितनी बोरिंग जगह है यह
आरती- हाँ हाँ… चलते है अभी तो शोरुम जाना है जरा सा और बचा है फिर चलते है ठीक है अभी उनकी बातें खतम भी नहीं हुई थी कि डोर पर एक थपकी ने उनका ध्यान खींच लिया वो दोनों ही दरवाजे की ओर देखने लगे थे
पीओन अंदर घुसा और वही खड़े होकर बोला
पीओन- जी मेडम वो भोला आया है
आरती के मुख से आनयास ही निकला
आरती- क्यों
पीओन- जी कह रहा है कि मेमसाहब से मिलना है
वो कुछ और कहता कि भोला पीछे से अंदर घुस आया और दरवाजे को और पीओन को पास करते हुए टेबल तक आ गया
पीओन वापस चला गया पर आरती की नजर भोला की ओर नहीं देख पाई थी वो ऋषि की ओर देख रही थी और भोला के बोलने की राह देख रही थी ऋषि भी भोला को देखकर दूसरी तरफ देखने लगा था
इतने में भोला की आवाज आई
भोला- जी मेमसाहब वो दरखास्त देनी थी
उसके हाथों में एक कागज था और वो अब भी उसमें कुछ लिख रहा था और धीरे से एक बार आरती की ओर देखता हुआ आरती की ओर कागज को सरका दिया
आरती ने एक बार उस कागज को देखा फोल्डेड था पर उसकी मोटी-मोटी उंगलियों के नीचे से उस कागज को देखते ही नहीं जान पाई थी कि कैसी दरखास्त थी वो
भोला- जी सोच रहा था कि कल से ड्यूटी जाय्न कर लूँ खोली में पड़ा पड़ा थक गया हूँ और ड्यूटी जाय्न कर लूँगा तो आते जाते लोगों को देखूँगा तो मन लगा रहेगा और एक आवाज उसके पास से निकली जो कि किसी क्लिप के चटकने से हुई हो
आरती का ध्यान उसकी हथेलियो की ओर गया वो चौक गई थी उसकी एक उंगलियों में उसका ही वो क्लुचेयर था जिसे की वो एक हाथों से दबाता हुआ अपनी एक उंगली में लगाता था और खींचकर निकालता था आरती सहम गई थी और अपने हाथों को बढ़ा कर उस कागज को अपनी ओर खींचा और एक नजर ऋषि की ओर भी डाली जो कि अब भी अपनी ठोडी में कलाईयों को रखकर दूसरी ओर ही देख रहा था
बड़े ही संभालते हुए आरती ने उस कागज जो अपनी ओर खिचा था और खोलकर उस दरखास्त को पढ़ने लगी कि भोला की आवाज आई
भोला- साइन कर दो मेमसाहब अकाउंट्स में दे दूँगा नहीं तो तनख़्वाह बनते समय पैसा काट जाएगा
और फिर से वही क्लिप चटकने की आवाज गूँज उठी आरती भी थोड़ा सा संभली और उस पेपर को साइन करने के लिए अपना पेन उठाया पर वो सन्न रह गई उसको पढ़ कर लिखा था
आपको फूल कैसे लगे बताया नहीं बड़ी याद आ रही थी आपके जाने के बाद से ही इसलिए भेज दिए थे
और नीचे थोड़ा सा टेडी मेडी लाइन में भी कुछ लिखा था आप साड़ी में ज्यादा सुंदर दिखती है कसम से
आरती का पूरा शरीर एक अजीब सी सिहरन से भर उठा था सिर से लेकर पाँव तक सन्न हो गया था वो उस सिहरन को रोकने की जी जान कोशिश करती जा रही थी पर उसके हाथों की कपकपि को देखकर कोई भी कह सकता था कि उसका क्या हाल था पर भोला चालाक था आगे झुक कर उसने उसकागज को अपनी हथेलियो में वापस ले लिया और थोड़ा सा पीछे होकर कहा
भोला- जी में कल से काम पर आ जाउन्गा मेमसाहब और बाहर चला गया
आरती की सांसें अब भी तेज ही चल रही थी टांगों की भी अजीब हालत थी काप गई थी वो बैठी नहीं रहती तो पक्का था कि गिर ही जाती वो कुछ कहती पर ऋषि की आवाज उसे सुनाई दी
ऋषि- भाभी यह भैया का ड्राइवर है ना
आरती- हाँ…
ऋषि-आपकी तबीयत तो ठीक है भाभी
आरती- हाँ… क्यों
ऋषि नहीं वो आप हाफ रही थी ना इसलिए
आरती- नहीं ठीक है तुम इसे कैसे जानते हो
ऋषि- भोला को एक दिन ना वो भैया के साथ हमारे घर में आया था
आरती- क्यों
ऋषि- वो पापा से मिलने तब देखा था बड़ा ही गुंडा टाइप का है ना यह
आरती- क्यों तुम्हें क्यों लगा
आरती को ऋषि का भोला को गुंडा कहना अच्छा नहीं लगा जो भी हो पर गुंडा नहीं है।
ऋषि- असल में ना जब वो आया था तब ना रीना दीदी को बड़े ही घूर-घूर कर देख रहा था
आरती- यह रीना दीदी कॉन
ऋषि- अरे मेरी सबसे छोटी बहन रीना दीदी को नहीं जानती आप आपकी शादी में भी आए थे हम तो
आरती- अच्छा अच्छा अब कहाँ है
ऋषि- बिचारी की शादी हो गई
आरती के मुख से अचानक ही हँसी का गुबार निकल गया
और हँसते हँसते पूछा
आरती- बिचारी क्यों शादी तो सबकी होती है
ऋषि- हाँ… पर रीना दीदी मुझे बहुत मिस करती है फोन करती है ना तब कहती है
और ऋषि भी थोड़ा सा उदास हो गया था आरती को एक भाई का बहन के प्रति प्यार को देखकर बड़ा ही अच्छा और अपनी संस्कृति को सलाम करने का मन हुआ अपने को थोड़ा सा संभाल कर आरती ने कहा
- अरे रीना दीदी नहीं है तो क्या हुआ में तो हूँ तुम मुझे ही अपना दीदी मान लो है ना
ऋषि- हाँ… मालूम रीना दीदी ना मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी और में उनसे कभी भी कुछ नही छुपाता था मुझे बहुत प्यार करती थी वो हमेशा ही मेरा ध्यान रखती थी
आरती- चलो चलो अब इतने सेंटिमेंटल मत हो अब तुम बड़े हो गये हो और इतना सेंटिमेंटल होगे तो आगे कैसे बढ़ोगे चलो मुझे शोरुम छोड़ दो
आरती अब नार्मल थी पर उसकी नज़र उसकी उंगलियों पर पड़ गई थी शायद एक उंगली में नेल पोलिश लगाया हुआ था ऋषि ने और वो अपने शो रूम की ओर जाने को बाहर निकली थी जैसे ही आफिस को क्रॉस करती एक आदमी दौड़ता हुआ उसके पास आके खड़ा हो गया
वो आदमी- मेडम
आरती- हाँ…
वो आदमी- जी मेडम भोला को क्या काम देना है
एक बार फिर से एक सनसनी सी मचा दी, भोला के नाम से ही
आरती- पता नहीं बोलना भैया से बात करले
वो आदमी- जी मेडम
और आरती पलटकर बाहर हो गई ऋषि भी उसके साथ था और बराबरी पर ही चल रहा था दौड़ता हुआ आगे बढ़ कर गाड़ी कर डोर खोलकर अपनी ओर चला गया
और गाड़ी शोरुम की ओर भागने लगी थी शोरुम में मिश्रा जी बाहर ही काउंटर पर किसी पुराने ग्राहक को अटेंड कर रहे थे पर वो वहां नहीं रुक कर सीधे अपने केबिन की ओर ही बढ़ी पीछे-पीछे ऋषि भी था केबिन के अंदर जाते ही वो एक बार चौंक उठी अंदर रवि बैठा हुआ था
आरती-अरे आप कब आए और फोन भी नहीं किया
रवि- अरे बाबा एक साथ इतने सवाल बैठो तो और ऋषि कैसा है
ऋषि- जी अच्छा हूँ भैया आप कैसे है
आरती और ऋषि भी वही बैठ गये आरती रवि की ओर ही देख रही थी कि कुछ तो कहे
रवि- सर्प्राइज नहीं दे सकता क्या कहा तो था कि दो दिन में आ जाऊँगा
आरती- हाँ… पर फोन तो करते
रवि- फोन करते तो सरप्राइज क्या होता हाँ…
ऋषि बैठे बातें दोनों को नोकझोक बड़े ही शालीनता से देख रहा था और एक मंद सी मुश्कान उसके चहरे पर दौड़ रही थी कितना प्यार था भैया भाभी में
रवि- और ऋषि सुना है तू आज कल आरती को लेने जाता है घर
ऋषि- हाँ… ना
बड़े ही नाटकीय तरीके से उसने जबाब दिया रवि और आरती भी अपनी हँसी नहीं रोक पाए थे
रवि- चलो बढ़िया है मुझे तो फुरसत नही अबसे एक काम किया कर तू ही आरती को लाया और ले जाया करना ठीक है कोई दिक्कत तो नहीं
आरती- क्यों इस बच्चे को परेशान करते हो
ऋषि- नहीं नहीं भैया कोई परेशानी नहीं मुझे तो अच्छा है एक कंपनी मिल जाएगी
रवि- कंपनी तेरी, मेरी बीवी है पता है
ऋषि- जी हाँ… पता है मुझे पर मेरी तो भाभी है ना और वैसे भी मुझे अकेला अच्छा नहीं लगता
रवि और आरती ऋषि की बातों पर हँसे भी जा रहे थे और मज़े भी लेते जा रहे थे रवि कहता था कि ऋषि लड़कियों की तरह ही बिहेव करता है पर देख आज रही थी आरती
पर था सीधा साधा भैया भाभी के साथ वो भी मजे लेरहा था उसे कोई बुरा नहीं लग रहा था वैसे ही हाथ नचाते हुए और आखें मटकाते हुए वो लगातार जबाब दे रहा था
रवि- तो ठीक है तो अब क्या करेगा कहाँ जाएगा तू
ऋषि- क्यों
तोड़ा सा आश्चर्य हुआ और रवि और आरती की ओर देखने लगा
आरती- अरे बैठने दो ना यही अभी घर जाके क्या करेगा
ऋषि तपाक से बोला
ऋषि- अरे फिल्म देखूँगा ना घर पर कोई नहीं है
रवि- हाँ… पता है कौन सी फिल्म देखेगा और यह तूने धोनी जैसे बाल क्यों बढ़ा रखे है
ऋषि- बाडी गार्ड सलमान खान वाली जी वैसे ही
रवि- क्यों उसमें तो करीना कपूर भी तो है
ऋषि मचलते हुए सा जबाब देता है
ऋषि- हाँ… पर सलमान खान कितना हैंडसम लगा है ना इस फिल्म में क्या बाडी है है ना भाभी
आरती अपनी हँसी नहीं रोक पा रही थी और हाँ में मुन्डी हिलाकर रवि की ओर देखने लगी थी और इशारे से ऋषि को छेड़ने से मना भी करती जा रही थी
रवि- क्या यार करीना भी तो क्या लगी है उसमें उधर ध्यान नहीं गया क्या तेरा
ऋषि- नहीं वो बात नहीं है हाँ… कितनी सुंदर लगी है ना वो और एक बार फिर से आरती का समर्थन लेना चाहता था वो आरती ने भी हाँ में अपना सिर हिला दिया था पर हँसी को कोई नहीं रोक पा रहा था
रवि- अच्छा ठीक है जा जाके सलमान खान को देख और सुन कल में तेरी भाभी को ले आउन्गा तू यहां से ले जाना फैक्टरी ठीक है
ऋषि जैसे बिचलित सा हो उठा था
ऋषि- क्यों आप क्यों
रवि- अबे काम है ना थोड़ा सा बैंक जाना है इसलिए और क्या और सुन हम परसो बॉम्बे जा रहे है
ऋषि उठते उठते फिर से बैठ गया उसका चहरा उदास हो गया था
आरती की हँसी बड़े जोर से फूट पड़ी और उसका साथ रवि ने भी दिया हँसते हँसते आरती का एक हाथ ऋषि के कंधे पर गया और उसे सांत्वना देने लगी थी
आरती- अरे ऋषि में तुम्हें फोन कर दूँगी अभी तुम जाओ ठीक है
ऋषि- पर आप चली जाएँगी तो में तो फैक्टरी नहीं जाऊँगा
रवि- अरे बाबा मत जाना घर में बैठकर फिल्म देखना पर रो तो मत
ऋषि- रो कहाँ रहा हूँ
और आरती की ओर पलट कर
ऋषि - बॉम्बे क्यों जेया रही है भाभी आप्
आरती रवि की ओर देखने लगी थी
रवि- अरे यार वो इम्पोर्ट एक्सपोर्ट वाले बिज़नेस के लिए एक अकाउंट खोलना है एक फॉरेन बैंक में इसलिए
आरती ने एक बार ऋषि की ओर देखा
ऋषि का मन टूट गया था पर अचानक ही उसके मुख से निकला
ऋषि- में भी चलूं भाभी और कस्स कर उसका हाथ को पकड़ लिया आरती की हथेलियो को
रवि और आरती की हँसी अब तो उनके आपे से बाहर थी पर आरती ने बातों को संभाला और
- हाँ… हाँ… चलो क्यों
रवि- अरे यार घूमने नहीं जा रहे है चल ठीक है धरम पाल जी से पूछ लेता हूँ ठीक है
ऋषि आरती की ओर बड़ी ही गुजारिश भरी नजरों से देख रहा था जैसे कि कह रहा हो कि मुझे छोड़ कर मत जाना पर भैया से हिम्मत नहीं पड़ रही थी
रवि ने धरम पाल जी को फोन लगाया
रवि- कैसे हैं आप
धरम पाल जी की आवाज तो वहां बैठे लोगों तक नहीं पहुँची पर
रवि- अच्छा ठीक है हाँ… वो ऋषि को भी ले आता हूँ
रवि- अरे नहीं सुनिए तो अगर मान लीजिए कि आरती को कोई दिक्कत हुई तो कम से कम ऋषि के सिग्नेचर तो चलेंगे ना इसलिए सोचा था
रवि- ठीक है तो हम परसो सुबह की फ्लाइट पकड़ते है हाँ… ठीक है
और फोन काट कर वो ऋषि की ओर मुस्कुराते हुए देखा
रवि- चल तुझे बॉम्बे घुमा लाता हूँ ही ही
ऋषि जैसे खुशी से पागल हो उठा था बड़े ही नाटकिये तरीके से
ऋषि ऊह्ह थॅंक यू भैया थॅंक यू आप कितने अच्छे है (और भाभी की ओर देखते हुए) कितना मजा आएगा ना भाभी है ना
आरती और रवि की हँसी एक साथ फूट पड़ी और जोर-जोर से हँसते हुए दोनों ने ऋषि को किसी तरह विदा किया और शोरुम के काम में लग गये कब रात हो गई और घर जाने का समय हो गया पता भी नहीं चला रात को खाने के बाद जब दोनों अपने कमरे में पहुँचे तो आरती ही रवि पर टूट पड़ी और एक अग्रेसिव खेल फिर शुरू हो गया आरती की हर हरकत मे रवि की जान निकलती जा रही थी इस बार भी रवि को दो बार झुकना पड़ा आरती को संतुष्ट करने के लिए
पर उसके जेहन में एक बात घर कर गई थी कि आरती उसके बिना नहीं रह सकती थी वो यह सोचकर उतावला हो रहा था कि दो दिन बाद मिलने से आरती कितनी उतावली हो जाती है पर एक पति को और क्या चाहिए था वो तो चाहता ही था की उसकी पत्नी उसे मिस करे और आते ही अपने मिस करने का गवाह इस तरीके से प्रस्तुत करे और आरती के लिए तो रवि था ही अपने शरीर की आग को बुझाने के लिए जो आग रामु लाखा और भोला ने लगाई थी वो उसे ही बुझानी थी भोला की हरकतों से वो इतनी उत्तेजित हो गई थी आज कि जैसे ही अपने पति के आगोश में गई थी वो
बस उस राक्षस के बारे में सोचती रह गई थी और रवि पर चढ़ाई कर दी थी रात को आरती ने रामु को कपड़े भी नहीं पहनने दिए और अपनी बाहों में कस कर उसे वैसे ही सोने को मजबूर किया
रात तो कट गई और सुबह भी जैसे तैसे और फिर बैंक के चक्कर और फिर शो रूम ऋषि भी आया पर रवि के सामने कोई ज्यादा हरकत नहीं की बस चुपचाप बैठा रहा और काम देखता रहा
फैक्टरी में भी गया था पर वैसे हो लौट आया था शोरुम में आरती और रवि को देखते ही बोला
ऋषि- आज फैक्ट्री नहीं आई आप भाभी
आरती- हाँ… सीधे यही आ गई थे शाम को भैया के साथ चली जाऊँगी क्यों
ऋषि- नहीं में गया था आप नहीं थी तो चला आया
इतने में पास में बैठे रवि का फोन बजा
रवि- हेलो हाँ… अरे यार तुझे बड़े काम की पड़ी है
रवि- अच्छा एक काम कर गेट पर रहना और गाड़ी का हिसाब देख लेना ऊपर-नीचे मत होना और घाव कैसे है ठीक है
आरती- कौन था
रवि- भोला काम की पड़ी है ठीक हो जाता फिर आता नहीं
रवि अपने काम में लग गया पर भोला नाम से ही आरती का शरीर एक बार फिर से सुन्न पड़ गया था सिर से पाँव तक सिहरन सी दौड़ गई थी पर बैठी हुई अपने आपको संभालने की कोशिश करती रही
आरती- आपने भी तो उसे सिर पड़ चढ़ा रखा है
रवि- अरे यार तुम जानती नहीं उसे साले का सिर कट जाएगा पर काम चोरी नहीं करेगा मर जाएगा पर नमक हलाली नहीं करेगा
आरती- हाँ…
पर वो तो कुछ और ही सोचने में व्यस्त थी ऋषि भी वही बैठा रहा कोई काम नहीं था पर हर बार जब भी आरती या फिर रवि की नजर उससे मिलती तो अपने दाँत निकलकर एक मुश्कान जरूर छोड़ देता था आरती को उसके भोलेपन पर बड़ा ही प्यार आ रहा था अपनी रीना दीदी को मिस करता था वो घर पर भी अकेला था और साथ देने को कोई नहीं
खेर जैसे तैसे शाम भी हो गई ऋषि को उन्होंने सुबह 5 बजे तक एयरपोर्ट पहुँचने को कह कर रवाना किया और वो भी रात होने तक घर पहुँचे पर सुबह के इंतेजार और जाने का टेन्शन के चलते कोई भी ऐसा सर्प्राइज नहीं हुआ जो कि इस कहानी में नया मोड़ ला सके।
सुबह होते ही रवि और आरती जब एरपोर्ट पहुँचे तो ऋषि भी वही था मस्त सा काटन शर्ट और पैंट पहने था देखने में किसी अच्छे घर का लड़का लगता था और पढ़ालिखा भी बस खराबी थी तो जब वो बोलता था या फिर इठलाता था रवि और आरती को देखते ही मचल सा गया था और जल्दी से उनके पास आके नमस्कार करते हुए
ऋषि-कितनी देर करदी भाभी कब से खड़ा हूँ अकेला
वो अब उससे पूरी तरह से लड़कियों जैसा ही बिहेव करने लगा था उसकी बातें भी इसी तरह से निकलने लगी थी और हरकतें तो थी ही
तीनो फ्लाइट में बॉम्बे पहुच जाते है रवि उनको होटल में छोड़कर बाहर निकल जाता है,
आरती और ऋषि दोनो होटल के रूम में बैठे है, और हंसी मजाक करते हुए टाइम पास कर रहे थे। ऋषि आरति से उसे साड़ी पहनाने को कहता कि उसे साड़ी बहुत अच्छी लगती है, आरति ऋषि को बिलुकल एक लड़की की तरह रेडी कर देती है,जिसमे ऋषि बहुत ही कामुक ओरत लगती है, ऋषि एक लैस्बियन लड़की की तरह आरति के साथ हरकतें करने लगता है, ऋषि की छेड़छाड़ से आरती गर्म होती रहती है, तभी
बिना कुछ कहे ही ऋषि ने आरती की पीठ पर अपने हाथों के लेजाकर पीठ पर से उसके पिन को खोलकर उसकी साड़ी को आजाद कर दिया और फिर से उसके पिन को वही ब्लाउस में लगा दिया और आरती की ओर देखकर मुस्कुराने लगा था और झुक कर एक हल्की सी पप्पी उसके गालों में दे डाली
कोई पूछना नहीं ना कोई ओपचारिकता और नहीं कोई शरम हाँ शरम थी तो बस
ऋषि को छूने से,
पर जैसे ही आरती ने ऋषि को मुस्कुराते हुए देखा और उसे अपने करीब खींचा तो
ऋषि- उउउहह क्या है
आरती- मेरे पास आना
ऋषि सरक कर आरती के करीब हो गया आरती का चेहरा उसके कंधों के पास था और वो थोड़ा सा ऊपर
आरती- और पास शरमाता क्यों है हाँ
ऋषि- और कितना पास हूँ तो और नहीं बस
आरती का उल्टा हाथ उसकी बगल से निकाल कर उसके कंधों और पीठ पर घूमने लगे थे ऋषि को शायद गुदगुदी हो रही थी पर अच्छा लग रह आता
ऋषि- उउउंम्म मत करो ना
आरती- ही ही क्यों
ऋषि- उउंम्म गुड गुडी होती है
और उसकी सीधी हथेली आरती के गालों पर घूमने लगी और बड़े ही प्यार से आरती की नजर से नजर मिलाए हुए वो बोला
ऋषि- मालूम रीना दीदी भी मुझे ऐसे ही प्यार करती थी
आरती- हाँ और बता तेरी रीना दीदी क्या-क्या करती थी
वो ऋषि से सट कर लेट गई थी उसकी साड़ी उसकी चूची के ऊपर से हट गई थी और वो एकदम से बाहर की ओर देखने लगी थी ऋषि की हथेली अब धीरे-धीरे उसके गालों से लेकर उसके गले तक और फिर उसके सीने की ओर बढ़ रही थी आरती की सांसो से साफ पता चल रहा था कि अब वो किसी भी कंडीशन में रुकने वाली नहीं थी उसे जो चाहिए था पता नहीं वो उसे मिलेगा कि नहीं पर हाँ… वो ऋषि की हरकतों को तो मना नहीं कर सकती थी अब
ऋषि की हथेली अब उसके गले और ब्लाउज के खुले हुए हिस्से को छूती जा रही थी और उसके होंठों से निकले शब्द आरती के कानों तक पहुँच रहे थे
ऋषि- कितनी साफ्ट स्किन है भाभी आपकी आअह्ह, कितनी साफ्ट हूँ आप और कितनी कोमल हो
उसका हाथ अब आरती के ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को छू रहा था उसका हाथ ना तो उसकी चुचियों को दबा रहा था और नहीं उसे पिंच कर रहा था
जो उतावला पन आज तक आरती ने अपने जीवन में सहा था हर मर्द के साथ वो कुछ भी नहीं बस ऋषि के हाथ उसके आकार और गोलाइओ को नापने का काम भर कर रहे थे बड़े ही कोमल तरीके से और बड़े ही नजाकत से कोई जल्दी नहीं थी उसे जैसे उसे पता था कि आरती उसके पास से कही नहीं जा सकती या फिर कुछ और
आरती- अया उूउउंम्म क्या कर रह अहैइ उउउम्म्म्म
पर रोकने की कोई कोशिश नहीं हाँ… बल्कि अपने को और उसके पास धकेल जरूर दिया था
ऋषि- कुछ नहीं भाभी बस देख रहा था कि आपकी चुचे कितने सुंदर है ना मेरे तो है नही
आरती- लड़कों के नहीं होते पगले
ऋषि ---हां पर मुझे तो बहुत अच्छे लगते है ये
आरती- हाँ… प्लीज ऋषि अब मत कर
उसका एक हाथ ऋषि के हाथों के ऊपर था पर हटाने को नहीं बल्कि उससे वो ऋषि को इशारा कर रही थी कि थोड़ा सा जोर लगाकर दबा पर ऋषि तो बस आकार और प्रकार लेने में ही मस्त था उसके हाथ अब उसके ब्लाउसको छोड़ कर उसके रिब्स के ऊपर से होते हुए नीचे की ओर जाने लगे थे आरती का शरीर अब तो अकड़ने लगा था वो कमर के बल उठने लगी थी घुटनों के ऊपर उसकी साड़ी आ गई थी और कमर पर ऋषि के हाथों के आने से एक लंबी सी सिसकारी उसके
होंठों से निकली थी
ऋषि- अच्छा लगा रहा है भाभी
आरती- हाँ… हाँ… सस्स्स्स्स्स्स्स्शह
ऋषि---आप बहुत प्यारी है भाभी मन करता है में आपको इसी तरह प्यार करता रहूं कितनी साफ्ट हो आप
और उसके हाथों का स्पर्श अब तो आरती के लिए एक पहेली बन गया था आज जो आग ऋषि लगा रहा था क्या वो इसे भुझा पाएगा पर आरती तो उस आग में जल उठी थी उसे तो अब अपने आपको शांत करना ही था वो अपने चेहरे को ऋषिके सीने में सटा ले रही थी और अपनी लेफ्ट हाथ को ऋषि की पीठ पर घुमाते हुए उसे अपनी ओर खींचने लगी थी उसकी हथेली ऋषि की खुली हुई पीठ पर से धीरे-धीरे अंदर की ओर जाने और ऋषि ने उसके ब्रा की
स्ट्रॅप्स को छू लिया था
आरती एकदम से मूडी और ऋषि से लिपट गई थी ऋषि ने भी भाभी को अपने से सटा लिया था नहीं जानता था कि क्यों पर आरती का लपेटना उसे अच्छा लगा था ऋषि की हथेलिया अब उसके ब्लाउज के खुले हुए हिस्से से उसकी ब्रा को छूते थे तो वो उसके और पास हो जाता था
आरति के जीवन का यह एहसास वो कभी भी भूल नहीं पाएगी यह वो जानती थी पर ऋषि के थोड़ा सा अलग होने से वो थोड़ा सा चिड गई थी
आरती- क्या
ऋषि -- भाभी
आरती- क्या है रुक क्यों गया
ऋषि --आप बहुत उत्तेजित हो गई है है ना
आरती---हां क्यों तू नहीं हुआ
ऋषि कुछ कहता इससे पहले ही आरती ने उसे अपनी ओर खींचा और अपने होंठों से उसके होंठों को चूमने लगी ऋषि ने भी थोड़ी देर वैसे ही अपने होंठों को आरती के सुपुर्द करके चुपचाप उसे स्वाद लेने दिया फिर हटते हुए लंबी-लंबी सांसें छोड़ने लगा था
आरती- क्या हुआ हाँ…
ऋषि- कुछ नहीं एक बात कहूँ भाभी गुस्सा तो नहीं होंगी नाराज तो नहीं होंगी ना
आरती- क्या नाराज क्यों बोल ना
ऋषि साहस जुटा कर जैसे तैसे शब्दों को जोड़ कर आरती की ओर नजर गढ़ाए हुए एक विनती भरी आवाज में कहा
ऋषि--- जी भाभी कन आई टच यू, आइ वान्ट यू भाभी व्हाट टू लव यू प्लीज भाभी प्लीज यू आर सो साफ्ट भाभी आइ जस्ट वाना महसूस यू
आरती- यू जस्ट फेल्ट मी ऋषि
ऋषि- नो भाभी नोट दिस वे दा वे आई वॉंट प्लीज भाभी आई प्रॉमिस यू
आरती के पास जबाब नहीं था उसकी हालत खराब थी पर जिस तरह से ऋषि उससे गुजारिश कर रहा था वो एक अजीब सा तरीका था
आरती- आई म नोट गेटिंग यू ऋषि हाउ
ऋषि- जस्ट डू ऐज आई से भाभी प्लीज यू विल सी हाउ प्लेसुरबले इट ईज़ आई प्रॉमिस
आरती- प्लीज ऋषि आई म स्केर्ड व्हाट शुड आई डू प्लीज ऋषि
आरती ऋषि के गालों को छूते हुए उसके पास थी और ऋषि भी तेज सांसें लेता हुआ उसके बालों को छूता हुआ उसे बड़े प्यार समझा रहा था
ऋषि- भाभी प्लीज स्ट्रीप युवर साड़ी और ले डाउन आंड सी व्हाट आई डू जस्ट एंजाय
आरती- उूउउम्म्म्म ऋषि यू नो व्हाट यू आर सेयिंग कॅन यू मनेज आई म नोट शुवर अबाउत इट बॅट इफ यू से सो बट प्लीज ऋषि
आरती धीरे से ऋषि की ओर देखती हुई बेड से उतरी और साइड में खड़ी हुई ऋषि की ओर देखती हुई कमर से एक साथ ही पूरी साड़ी को खींच लिया और वही नीचे ही गिरने दिया वो अपनी पेटीकोट को उँचा करती हुई लगभग घुटनों तक उठाकर अपने आपको वापस बेड पर चढ़ा लिया और ऋषि की ओर देखती हुई उसके पास लेट गई
दोनों एक दूसरे को बड़े ही ध्यान से देख रहे थे आरती को श्योर नहीं था जो ऋषि ने उससे कहा था पर उसके पास अपनी काम अग्नि को बुझाने का कोई और रास्ता भी नहीं था ऋषि एक मर्द था शायद उसके अंदर का कोई चीज अब भी जिंदा हो या फिर वो सिर्फ़ दिखावा कर रहा हो असल में वो भी रवि रामु और लाखा के जैसा ही हो
पर ऋषि अपनी जगह पर ही बैठा रहा और मुस्कुराता हुआ आरती को बेड पर लेटा हुआ देखता रहा वो अभी साड़ी पहना था
आरती- तू नहीं उतारेगा साड़ी हाँ…
ऋषि---आप कितनी सुंदर हो भाभी कितनी गोरी कितनी कोमल हो भाभी
वो अपनी हथेली आरती की टांगों से लेकर धीरे-धीरे ऊपर उसकी जाँघो तक ले जा रहा था बड़े ही संभाल कर बड़े ही कोमलता से कही कोई ताकत का इश्तेमाल नहीं कर रहा था और नहीं कोई उतावलापन बड़े ही शांत और नजाकत से ऋषि उसके शरीर की सुदोलता का एहसास कर रहा था आरती का पूरा शरीर जल रहा था वो जानती थी कि जो ऋषि कर रहा है वो एक छलावा है पर वो मजबूर थी उसे ऋषि का इस तरह से उसे छुना अच्छा लग रहा था वो आजाद थी इधर उधर होने को अपने आपको तड़पने को उसे ऋषि के मजबूत हाथ नहीं रोक रहे थे वो तो बस उसके शरीर की रचना को देख रहा था उसकी कोमलता का एहसास भरकर रहा था
आरती की पेटीकोट उसके कमर तक आ पहुँची थी और उसकी पैंटी उसके कमर पर कसी हुई और उसकी जाँघो के बीच में जाकर गुम हो गई थी वो अपनी कमर के सहारे अपनी टांगों को खोलकर बंद करके और इधार उधर होकर अपनी उत्तेजना को छुपा रही थी और ऋषि अपने हाथों से उसकी कमर के पास उसके पेट को सहलाता जा रहा था
आरती का हाथ एक बार ऋषि के चहरे तक गया और उसे अपनी ओर खींचने लगी थी वो उसे किस करना चाहती थी
ऋषि ने एक बार उठकर उसे देखा और मुस्कुराता हुआ उसके पास आ गया और अपने होंठों को धीरे से आरती के होंठों पर रखा आरती झट से उसके होंठों पर टूट पड़ी पर ऋषि उससे अलग हो गया
ऋषि- आआअम्म्म्म ऐसे नहीं बी जेंटल भाभी बी जेंटल
और धीरे से अपने होंठों से आरती के होंठों को किस किया और फिर अपनी जीब को निकाल कर धीरे-धीरे उसके होंठों पर फेरने लगा था कोई जल्दी नहीं कोई ताकत नहीं बस एहसास सिर्फ़ स्पर्श और कुछ नहीं आरती की जिंदगी का पहला किस्स जो की इतना मधुर और सौम्य था वो अपनी आखें खोलकर ऋषि की ओर देखती रही उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी उसकी एक हथेली ऋषि के पीछे उसके बालों से लेकर उसके गले से होते हुए उसके ब्लाउज के खुले हिस्से में घूम रही थी वो जान बूझ कर अपनी हथेली को उससे भी नीचे ले गई और उसके ब्लाउज के खुले हिस्से से उसके अंदर डाल दिया और ऋषि को फिर से अपनी ओर खींच लिया ऋषि ने भी कोई संघर्ष नहीं किया और चुपचाप अपने होंठों को फिर से उसके होंठों पर रख दिया इस बार बारी आरती की थी