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आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

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शागली ने घडी देखी फिर सामने बैठे होशाग को देखा।

~ होशाग सोच भरे अदाज में सिगरेट के कश ले रहा था ।

"मेरे ख्याल मेँ उसे वहा अकेला छोडकर हमने ठीक नहीं किया I " शागली बोला I

"हमने नहीं छोडा उसे । उसने खुद कहा था छोडने को । " होशाग ने कहा I

"एक ही बात है I हम तो वहा से निकल आए । " होशाग ने कश लेकर, कघो को झटक दिया I ~

"वह हिंदुस्तान से यहां आई हे, चियाग से फिल्म हासिल करने । " होशाग ने उसकी की आखो मे झाका'--"हमें भी देखना है कि वह कुछ कर गुजरने के काबिल. है या महज सिर्फ खूबसूरती की ही मालकिन है । "

शामली ने बेचैनी से पहलू बदला ।

"होशाग वहा पर करीब आठ दस पुलिसमैन थे I इतने पुलिसमैनों को तो हम दोनों भी मिंलकर निबटाना चाहें तो एकबारगी यह काम अस्भव लगने लगेगा I " शागली ने शब्दों को चबाकर कहा-"और फिर वह तो अकेली है I और युवती है I मैं नहीं समझता कि अब पुलिसमैनों से बचकर यहा पहुच पाएगी I " . .

होशाग के चेहरे पर अजीब से भाव फैले I "इतनी जल्दी कोई फैसला कायम मत करो शागली। " होशाग कह उठा I

"क्या मतलब? ?” …

"जिसने इतने विश्वास के साथ हमें जाने को कहा और खुद I पुलिसमैनों से अकेले निबटने का फैसला कर लिया उसमें कुछ दम तो होगा I कुछ कर गुजरंने का हौसला रखती होगी I "

शागली ने होशाग को घूरा I

"तुम्हारा मतलब कि वह सही सलमात वहा से निकल आएगी यहा पहुचेगी' ?"

"दावा तो नहीं करता परतु उसके विश्वास को देखकर कह सकता हू क्रि शायद वह यहा पहुचे । यह जुदा बात है कि एक दो गोलिया उसे लगीं हौं I वह घायल हो I ” होशाग ने होठ काटते हुए कहा ।~

शागली ने घडी पर निगाह मारकर पुन पहलू बदला I

"लेकिन अब तक तो मोना चौधरी क्रो पहुच जाना चाहिए था ।"

होशग्ग शांगली की इस बात से सहमत था I परतु जवाब नहीँ दिया I

शागली ने सिगरेट सुलगाई और उठकर टहलने लगा I तभी दरबाजा खुला और सिगापुरी लोकल व्यक्ति ने भीतर प्रवेश किया I

" जनाब I सव तैयारी हो गई है I सिर्फ रवाना होने की देर है । "

शांगली ने ठिठककर उसे देखा ।

"तुम जाओ I " होशाग कह उठा…"तैयारी को तेयार रखो I हमारा एक साथी आने बाला है I समझें I”

"समझा I " कहने के साथ ही वह पलटकर चला गया I

शांगली के चेहरे पर व्याकुलता की छाप थी I

"अगर मोना चौधरी को कुछ हो गया तो सारी मेहनत व्यर्थ जाएगी I ”

"और दौलत भी हाथ नहीं आएगी I" होशग्ग ने कहा ।

"पूरी न सही आधी तो आ ही जाएगी I जो उसका साथी हमें एडवास दे जाएगा I "

“ एडवांस? ?" होशाग ने सोच भरी निगाहों से शागली की देखा --"ना दिया तो ?"

"उसका साथी पीछे से दे देगा I ”

"माना I पंरतु अगर ना दिया तो ?" .

"तो I" शांगली का चेहरा कठोर हो गया---'"मोना,चौघरी ~ चियाग से फिल्म लेकर अपने पास नहीं रख पाएगी I वह मैं ले जाऊगा और तब तक लेकर रखूगा जब तक कि वह पूरी रकम नहीं दे देगा I ”

"ठीक कह रहे हो शागली I ऐसा ही होना चाहिए I " होशाग ने कश लेकर सिर हिलाया…"

"लेकिन इन सब बातों के साथ ही एक सवाल और भी पैदा होता हे । "

"वह क्या ...?"

" यू मानकर चलो कि मोना चौधरी का साथी दौलत नहीं देता । और उधर मोना चौधरी भी चियाग से फिल्म हासिल नहीं कर पाती तो तब हमारी स्थिति क्या होगी ?" .

शागाली एकाएक कुछ न कह सका I

"यानी कि ना तो हमें फिल्म मिलेगी, और नां ही दौलत I हमारी सारी मेहनत बेकार जाएगी I"

शागली ने कश लेकर होशाग को देखा I

"तुम ठीक कहते हो I परंतु हम जिस धघे में हैं वहा रिस्क तो लेना हीँ पडता हे।"

"रिस्क दौलत ना मिलने का नहीँ है I चियाग का भी हे I अगर हम चियाग की निगाहो में आ गए और उसे इस बात का एहसास हो गया कि मोना चौधरी के पीछे हम हैं तो वह हमें छोडने वाला नहीं I "

शांगली ने सिर को झटका दिया ।

"बेकार की बातें ना तो सोचो और ना ही करो । जो होगा देखा जाएगा । "

"यह बेकार की बात नहीं I "

तभी दरवाजे पर आहट हुई ।।

दोनों की निगाहें घूमी' ।

उनके आदमी. के साथ मोना चौधरी खडी थी होठो पर मुस्कान लिए । दोनों कई पल तों उसे देखते ही रह गए । तभी उनका साथी बोला ।

"यह आप लोगों से मिलना..... I "

"तुम जाओ I " शांगली ने हाथ उठाकर कहा I वह -चला गया । मोना चौधरी भीतर आई I

"तुम ठीक हो ?” शागली गहरी निगाहों से उसे देख रहा था।

"ह्म । " मोना. चौधरी के होठो पर बराबर मुस्कान फैली थी ।

"घायल तो नही-हो ?"

' "नही I "

शागली और होशाग की निगाहे मिलीं I

"वहा क्या हुआ था ?"

"कुछ खास नहीं I " आगे बढकर कुर्सी पर बैठते हुए मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया कुल मिलाकर बहा आठ पुलिस वाले थे I उन्हे शूट _ करके आ गई I "

“आठ...? तुम आठों पुलिस वालों को शूट कर आई? ?" शागली के होठो से निकला I

"हा I ”

"और तुम्हें एक भी गोली नही लगी?" शागली ने अपनी हैरानी पर काबू पाया I

शामली अविश्वास भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा ।

जबकि… होशाग मन-ही-मन मुस्करा रहा था । क्योकि मोना चौधरी का खूनी रूप वह देख चुका था और जानता था कि मोना चौधरी जो कह रही है सही कह रही हे I बहुत खतरनाक है यह जो कर जाए वहीँ कम हे।

शागली ने गहरी सास लेकर होशाग को देखा I

" तुम बाहर जाकर तैयारी पर निगाह मारो । देखो कोई कमी तो नहीँ रह गई I मैं मोना चौधरी से कुछ जरूरी बातें का लू I बीस-पच्चीस मिनट तक हम यहा' से रवाना होगे' ।

होशाग बिना कुछ कहे बाहर निकल गया I शागली ने आगे बढकर दरवाजा बद किया और सिकटनी चढाकर पलटा । उसके होठो पर मधुर मुस्कान नाच रही थी I वह कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के पास पहुँचा ।

" तुम बहुत बहादुर हो I बहुत ही बहदुर I " शागली ने कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के गले में बाहें डाल दी I

मोना चौधरी हसी I अब उसे समझ आया कि शागली उससे क्या खास बात करना चाहता है I चाहकर भी मोना चौधरी उसे इनकार नहीं कर सकती थी क्योकि शागली इस समय उसके काम का साबित हो रहा था । और आगे भी उसने काम आना था I अगर शागली फिर गया तो चियाग तक पहुचने में उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पडेगा I

"मुझे तो अभी भी यकीन नही हो रहा कि तुम सही-सलामत आ गई हो । ”

"देख लो I तुम्हारे सामने हू । " मोना चौधरी खिलखिलाई ।

शांगली ने अपना हाथ उसकी कमीज में डाल दिया । आले ही पल मोना चौधरी की छाती शागली की हथेली की गिरफ्त में कैद थी I दिखावे के तौर पर मोना चौधरी कसमसाई I

"क्या करते हो, कोई आ जाएगा I "

"काईं नहीं आता I दरवाजा बद है I " शामली की सासो में तेजी सी आने लगी थी I

"प्लीज I. मत करो… ! हमें अभी सफर पर रवाना होना है I " मोना चौधरी ने उसका हाथ कमीज से बाहर निकालना चाहा I

परतु शागली की हथेली मोना चौधरी की छाती से खेलती रही I मोना चौधरी ने खुद को ढीला छोड दिया ।
 
" शांगली I हमें सफर पर रवाना होना हे I “ मोना चौधरी कुर्सी से खडे होते हुए बोली ।

"यह भी सफ़र की तैयारी है I थोडा-सा तरोताजा हो ले ।"

शामली उससे लिपट गया I

"हमें देर हो जऐगी-और फिर बाहर होशाग हमारा इतजार कर रहा है ।"

"अब चुप रहो I बोलो मत I"

तभी दरवाजे पर थपथपाहट गुजी I '

मोना चौधरी ने फौरन खुद को सभाला परंतु शागली उसे जकड़े रहा I

"छोडो I बाहर कोई है । " मोना चौधरी ने उसे पीछे हटाने की चेष्टा की I

"चुप रहो I " शागली जैसे नशे में अपने होश गुम किए हुए था I ~

"बाहर कोई दरबाजा खटखटा रहा है । " मोना चौधरी कहते हुए खडी हो गई।

शागली उसे बाहों के घेरे में लिए रहा I ~

"होश मे आओ । " मोना चौधरी झल्लाईं ।

"तंग मत करो । करने दो... उसके बाद .. I"

तभी पुन दरवाजा खटखटाया गया I शागली को जैसे अब होश आया I

"बाहर कोई हैं I ”

"तो मैं क्या कह रही थी ? " मोना चौधरी झल्लाई ।

"साला I" शागली दात भीचकर बोला--- "कौन उल्लू का पट्ठा आ गया ? मैं...।"

"उठो, दरवाजा खोलो I " मोना चौधरी अपनी कमीज के बटन वद करती हुई बोली ।

"आने वाले को अभी दफा... । "

"शागली I" मोना चौधरी उखड़े लहजे में बोली--"हमैं यहाँ से चलना है I हमारे पास वक्त कम है I "

"दस मिनट की देरी में कोई आफत नहीं आ जाती। मैं... !"

"नहीं I इस समय कुछ नहीं होगा ।" मोना चौधरी का स्वर सख्त-सा हो उठा I

शागली के चेहरे पर नाराजगी के भाव उभरे I

"तुम मुझे ! शागली को इनकार कर रही हो । "

मोना चौधरी एकाएक मुस्कराई, उसने बाहे शागली' के गले में डाल दी ।

"शागली I माई डार्लिंग I वक्त को भी समझो I यह तो हम रास्ते में कहीं भी कर सकते हैं ।"

"रास्ते में ?"

"हा I वहा तो और भी अच्छी तरह होगा ।याद करागे कि । "

"रास्ते में यह भी तो हो सकता है कि हमें मौका ही ना.....!"

"क्यों नहीं मिलेगा मौका I तुम तो I "

तभी पुन दरवाजा खटखटाया गया ।

साथ ही पुकारा भी गया I पुकारने वाली आवाज होशाग की थी I

शागली के चेहरे पर कढ़वे भाव फैल गए I

" उल्लू का पटठा I"

"डार्लिग" I नाराज नही I " मोना चौधरी ने उसका गाल थपथपाया I

"दरअसल I ” शागली ने गहरी सासं लेकर कहा-"तुम हो ही ऐसी कि सामने वाला खुद को रोक ना सके I " कहने के साथ ही शागली दरवाजे की तरफ बढा ।

दरवाजा खोला होशाग खडा था I शांगली अपने भावो पर काबू पा चुका था I

"हा । "

"तैयारी हो चुकी है I " होशांग ने कहते हुए मोना चौधरी पर निगाह मारी…और फौरन समझ गया कि भीतर शागली मोना चौधरी से क्या खास बात कर रहा था---"चलना चाहिए ।"

"चलो I " शागली ने तुरत सिर हिलाया I

होशाग ने मोना चौधरी पर निगाह मारी और पलटकर चला गया I

"चलो I " शागली ने मोना चौधरी को देखा I

मोना चौधरी आगे बढी I दरवाजे के बीच शागली खडा था ।

"याद हे ना ? रास्ते में मौका मिला तों हमने क्या करना है ?"

"ऐसी बातें तो मैँ कभी भी नहीं भूलती I " मोना चौधरी खिलखिलाई I

दोनों कमरे से बाहर निकल आए I

जब वह मकान के बाहर निकले तो साथ में होशाग भी था I

… होशाग खामोश हो चुका था । वह उतना ही बोल रहा था जितने की जरूरत थी I अन्यथा अपने काम से मतलब रख रहा था I वे तीनों उस बस्ती की पतली और लबी गलियों को पार कर रहै थे । रात आधी से ज्यादा बीत चुकी थी । चारों तरफ गहरा अधेरा छाया हुआ था I रोशनी का हल्का नामोनिशान नहीँ था I उन अंधेरी गलियों में सबसे आगे होशाग चल रहा था I वह उन सारे रास्तों से ठीक तरह से वाकिफ था I

एकाएक शागंली ठिठका l

गलियों मेँ से बस्ती के चौराहे पर निकल आए थे I शागली की निगाहे चौराहे पर मौजूद पब्लिक बूथ के बाक्स पर जा टिकी I एकाएक वह बोला I

"एक मिनट I मैं फोन करके आता हू I"

मोना चौधरी और होशाग की निगाहें आपस में मिलीं I

शागंली ने एक कदम ही आगे बढाया होगा कि मोना चौधरी ने उसकी बाह' को अपनी बाह मे फसा लिया । शागली ठिठका I पलटकर उसने मोना चौधरी को देखा I

मोना चौधरी के होठो पर जानलेवा मुस्कान फेल गई ।

"शागली डियर I." मोना चौधरी की छातियां शागली की बाह से रगड खाने लगी थी ।

शागली ने बेहद कठिनता से खुद पर काबू पाया वर्ना मोना चौधरी की छातियों की खैर नहीं थी ।

"हूं। " शागली ने मुस्कराकर मोना चौधरी को देखा।

"यह वक्त किसी को फोन करने का नहीं है I पहले ही हमारा बहुत वक्त वर्बाद....!"

"एक मिनट लगेगा मोना डार्लिग I ओनली वन मिनट । "

"फिरकर लेना...! अब ।"

"नहीं फोन करना जरूरी हे I" शागली के स्वर से झलक रहा था कि इस बारे में वह किसी की बात मानने वाला नहीं--" मैं अभी आया I" कहने के साथ ही शागली बूथ की तरफ बढ गया I

होशाग के दात मिच गए । मोना चौधरी की आखों मेँ कठोरता भर आई थी I

"यह कुत्ता तुम्हारे बारे में मालूम करने गया है I अब इसका आदमी इसे रिपोर्ट देगा I "

"इसका फोन करना हमारे लिए खतरनाक हो सकता हे । " मोना चौधरी की सख्त निगाह शागली की पीठ पर थी I

. "लेकिन हम कुछ कर भी नहीँ सकते I ” होशाग ने दात पीसते हुए कहा l

"फोन करने के बाद अगर शागली ने कुछ करने की चेष्टा की तो I " मोना चौधरी की आखों में चिगारियां भडकी' I

"तो मैं तुम्हारे साथ हू I " होशाग की आवाज में मोत लिपटी हुई थी I

उनके देखते ही देखते शागली फोन बूथ में प्रवेश कर गया I

मोना चौधरी और होशाग की आखें मिलीं I

मोना चौधरी के चेहरे और आखों मे शांगली के प्रति दरिंदगी के भाव सिमट आए थे I

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"क्या मालूम किया ??" शागली माऊथपीस में बोला । I

"बहुत कुछ I "

“बको !"

"होटल में इस युवती ने दो पुलिसमैनों क्रो दो बदमाशों को और एक टैक्सी ड्राइवर को शूट किया I वह एशियन युवती थी । हिंदुस्तानी I होटल के रजिस्टर में उसका नाम मोना चौधरी दर्ज है ।"

" मोना चौधरी !” शागली के दात मिच गए ।

"जी हा I "

शांगली ने बूथ के बाहर कुछ दूर खडी मोगा चौधरी पर निगाह मारी ।

"पूरा मामला क्या है ?" ~

"शागंली साहब I" आवाज पुन आई…" इस घटना के धटा भर पहले वह मोना चौधरी उस बस्ती में थी जहा होशांग रहता हे I वहा कुछ दादाओं ने मोना चौधरी से जबरदस्ती करने की चेष्टा की तो मोना चौधरी ने दो बदमाशों को शूट कर दिया l उसके बाद वह होटल पहुची तो उन बदमाशों के साथी पुलिसमैनों को लेकर वहा पहुच गए I खुद को बचाने के लिए मोना चौधरी ने उन लोगों को शूट कर दिया ।"

शागली के चेहरे पर कठोरता छा गई थी ।

"मोना चौधरी होशाग की बस्ती में गई थी?" शागंली ने शब्द चबाए ।

"जी हा । "

"किससे मिलने गई थी ?”

"मालूम नहीँ हो सका !!"

" होशाग से मिलने गई हो सकती है मोना चौधरी I"

दूसरी तरफ से कोई ज़वाब नहीं आया । शागली ने रिसीवर रख दिया ।

चेहरे पर सख्ती के भाव फैले … हुए थे I होशाग ने कहा था कि मोना चौधरी उसे रेस्टोरेट में मिली थी I परंतु अब कोई और ही तस्वीर सामने आ रहीँ थी I

शामली और मोना चौधरी पहले से ही एक दूसरे को जानते थे I मोना चौधरी शामली से मिलने ही बस्ती में गई थी I परतु यह बात होशाग या मोना चौधरी ने उससे क्यों छिपाई ।

शागली बुथ से बाहर आ गया I अब उसका चेहरा पहले की ही तरह सामान्य और शात था I उनके पास पहुचते पहुचते शागंली ने सिगरेट सुलगाई और मुस्कराकर बोला I

"चलो I अब देर करना ठीक नहीं' I"

दिखावे के तौर पर मोना चौधरी और होशाग के चेहरे भी सामान्य थे I

परंतु उनके मस्तिष्क के भीतर खलबली मची हुई थी I एक बारगी तो उन्हें लगा कि वे कुछ गलत-तो नहीं सोच रहे ।

“चलो । " मोना चौधरी ने सिर हिलाया ।

वे तीनों आगे बढ गए ।

होशाग पहले की ही तरह उनके आगे चल रहा था और वे दोनों पीछे I

"हम कब तक चियाग तक पहुच जाएगे ?” एकाएक मोना चौधरी ने पूछा I

"देखती जाओ । " शागंली ने छोटा सा जवाब दिया ।

मोना चौधरी के मस्तिष्क में जाने क्यों खटका सा हुआ I उसे शांगली की आवाज मे जाने क्यो बदलाव सा लगा । मस्तिष्क में खत्तरे की घटी बजी । वह कुछ सतर्क सी हो गई । शागली का दूसरी बार इस तरह फोन करना उसके प्रति कोई जाल भी हो सकता है I शागंली उसके खिलाफ़ कुछ करता हुआ हो सकता है I होशाग की सोच गलत भी हो सकती है कि वह उसके बारे में मालूम करने की चेष्टा कर रहा है I मोना चौधरी को आने घाला वक्त घुधला ही नजर आया , स्पष्ट नहीँ । बहरहाल शागली को लेकर अब खतरे की सुई मोना चौधरी के मस्तिष्क में चुभने लगी थी । उसे लग रहा था जैसे उसके और शागंली के बीच घात प्रतिघात के सिलसिले का दौर आरभ हो चुका है ।

उस बस्ती को पार करके जब वे लोग बाहर निकले तो सामने खुला संमदर पाया । जिसका किनारा तो दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा था ।

चद्रमा की रोशनी में समदर की लहरें उछाल मार रही थी' I संमदर के किनारे पर अवश्य थोडी बहुत इसानी हलचल थी I

वे मछुआरे थे जोकि मछली पकढ़ने के' लिए समदर में जाने की तैयारी कर रहे थे I और भोर हो जाने के इतजार में थे ।

तीनों ठिठके ।

"हमारी नौका उधर है I " होशाग ने कहा ।

तीनों उस दिशा की तरफ बढे ।

पाच मिनट चलने के पश्चात उन्हें छोटी स्री एक नाव बड़े से पत्थर से बधी नजर आई I वे उसके करीब पहुचकर ठिठके I

मोना चौधरी की पैनी निगाह चारों तरफ घूम रही थी I परंतु उसे ऐसा कुछ भी निगाह में ना आया कि जो शागंली के प्रति उसके शक को बढावा देता I

तीनो' नाव मे सवार हुए I

होशांग और शागंली ने नाव में मौजूद चप्पू उठाए और नाव खेने लगे I

देख़त्ते हीँ द्रेखते नाव किनारे से हटकर समंदर के ब्रीच में सरकती चली गई I समदर से टकराकर आती ठडी हवा बदन को वहुत भली लग रही थी I शरीर पर बहता पसीना जेसे ठडा पानी लग रहा था ।

धीरे धीरे नाव इतनी दूर हो गई क्रि समदर का किनारा भी नजर आना बद हो गया I अलबत्ता बस्ती की दो चार चमकती रोशनिया किसी चमकते जुगनू की तरह लग रही थी I

मोना चौधरी नाव के छोटे से फट्टे पर बैठी और सिगरेट सुलगाकर कश लिया I

"होशाग I" मोना चौधरी के होठ खुले I . चप्पू चलाते होंशांग ने गरदन घुमाकर मोना चौधरी को देखा।

"कुछ मुझे भी तो चले कि तुम लोगों ने क्या प्रोग्राम बनाया है सफ़र कैसा है और I "

"मैं कुछ नहीं जानता।" होशाग ने गरदन सीधी कर ली-"'और ना ही इन बातों का मुझे कुछ खास पता हे I जो I कुछ पूछना हे शागली से पूछो । "

"शांगली बता नहीं रहा I " मोना चौधरी ने शागली पर निगाह मारी I

"ठीक तो है I " होशाग ने कहा-"तुम्हें कुछ जानने की जरूरत भी क्या है! अपने काम से वास्ता रखो I तुम् 'चियाग तक पहुचना' चाहती हो और हम तुम्हे' पहुचा' रहे है' I "

मोना चौधरी ने कुछ नहीं कहा I कश लेते हुए उसने. कलाई पर बधी' घडी पर निगाह मारी I अब दिन की रोशनी फैलने में ज्यादा देर नहीं थी और वह जानती थी कि उनकी नाव किनारे की सीमा से इत्तनी दूर आती जा रही है कि उसे देख पाना सभव नहीं होगा I

करीब पौन घटा नाव की पानी मे दौड़ाने के बाद उन्होनै चप्पू चलाने बद कर दिए I

"होशाग I यह बोट है । इस तक ही हमेँ आना था ।” मोना चौधरी. ने तुरत अपनी निगाह दौड़ाई ।

कुछ आगे समदर में अधेरे में डूबी बोट नजर आ रही थी जिसका इजन बद था और समदर के हिलते पानी के साथ वह धीरे धीरे हिल रही थी ।

शागंली कई पलो तक बोट को देखता रहा ।

मोना चौधरी के मस्तिष्क को तीव्र झटका लगा । परंतु वह तुरत ही खुद पर काबू पा गई ।

शागली ने नाव के कोने में मौजूद टार्च उठाई और उसका रुख बोट की तरफ करके ठस' टार्च को जलाने बुझाने लगा I दो पल भी न बीते होगे कि मोटरबोट से वैसा ही सिग्नल मिला I

शागलीं की आखों ने' तीव्र चमक उभरी I उसने टार्च एक तरफ रख दी। . . .

"होशाग I नाव आगे बढाओ I "

फिर शागली और होंशाग नाव को खेने लगे I

मोना चौधरी की सिकुड चुकी आखें अधेरे में डूबी बोट पर टिकी थीं I कुछ ही मिनटों में वे बोट के करीब थे I ऊपर वालों ने सहारा देकर उन्हे ऊपर चढाया I जिस नाव से वे यहा तक पहुचे' थे I खाली होत्ते-ही उसे समदर की लहरे अपने साथ ले गई I मोना चौधरी ने जब सहारा देकर ऊपर चढाने वाले को ध्यानपूर्वक देखा तो वह हक्की बक्की रह गई I वे चीनी सैनिक थे, I

अंधेरे में मोना चौधरी का, हाथ तुरत अपने कपडों में 'छिपी‘ रिवाॅल्बर

पर पहुच गया I उसके दात भिच गए I

चेहरे पर खतरनाक भावों की चादर चढ आई थी । चीनी वर्दी के साथ साथ उन दोनों के हाथों में खतरनाक हथियार थमे थे ।

मौत की आधी मोना चौधरी की मस्तिष्क में नाट उठी । यानी कि शागंली के प्रति उसका शक सही था I

मोना चौधरी की निगाह तुरत होशाग की तरफ़ धूमी I

होशाग' को शात खडा देखकर वह असमजस में घिर गई ।

शांगली फौरन मोना चौधरी के' मन में पैदा हो रहे भावो को पहचान गया. और ठठाकर हस पडा । कई क्षणों तक हसता ही रहा I मोना चौधरी की सर्द निगाह शांगली पर ही टिकी रही ।

"तुम इन्हें चीनी सैनिक समझ रही हो I " शांगली हसंते हुए बोला……"'इसमें तुम्हारा कुसूर नहीं हे I तुम्हारी जगह कोई और भी होता तो वह भी ऐसा ही सोचता । ऐसा ही सोचता वह । "

मोना चौधरी की आखें सिकुढ़ गई।

"तो फिर कौन हैं यह ?” मोना चौधरी ने दात भीचकर एक एक शब्द चबाते हुए कहा l

"मेरे आदमी I "

मोना चौधरी के मस्तिष्क को तीव्र झटका लगा ।

" तुम्हारे आदमी ?"

"हा चीनी सैनिकों की वर्दी का इस्तेमाल करना जरूरी था क्योकि आगे जाकर समदंर का वह हिस्सा शुरू हो जाएगा जहा , चीनी सेनिक समय में घूमते रहते हैं I ये चीनी बर्दिया हमे उनसे बचाएगी I "

शांजली ने जहरीले स्वर में हसते हुए कहा I ~

मोना चौधरी कुछ न कह सकी ।

"आओ भीतर चलें I "

वे सब बोट के भीतरी केबिन मेँ पहुचे ।

वहा उनके लिए भी बर्दिया मौजूद थी।उन्होने भी बर्दिया पहनीं I मोना चौधरी समझ नहीं पा रही थी कि हालात को किस नजरिए से देखे I

किसे झूठ और किसे सच समझे I

कुछ ही देर में होशाग और शागंली भी चीनी सैनिक लग रहे थे । मोना चौधरी हाथ में थमा रिवाल्वर अपने कपडों में फसा चुकी थी I शागंली के आदेश पर बोट स्टार्ट हुई तो उसके इजन की आवाज ने वहा के सन्नाटे को भग कर दिया I फिर रफ्तार के साथ बोट आगे बढ गई I मोना चौधरी चुप सावधान और सतर्क थी I

"आओ I जरा बाहर चक्कर लगा आएं I " शागली ने होशाग से कहा. I

" चलो ?"

दोनों बाहर निकल गए ।
 
मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया और सोचों में डूब गई । यह ठीक था कि उसे जो दिखाया जा रहा था वह किसी भी तरह शक के दायरे से कहीं दूर था I परतु उसके मस्तिष्क में जो भी खटका हो रहा था…वह बेवजह नहीँ था I ~ कहीं-न-कहीं गड़बढ़ अवश्य थी I और वह गड़बढ़ कहां थी, मोना चौधरी क्रो यहीँ बात समझ में नहीं आ रही थी । मोना चौधरी ने एक बार फिर शागली की रवानगी पर ध्यान दिया । उसके कहते ही बिना किसी आनाकानी के शागंली तेयार हो गया उसे चियाग तक` ले जाने के लिए I फौरन तैयार हो गया I चलने की कोई तैयारी भी नहीं थी I परंतु हर बात देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे सारी तैयारी ठीक ठाक ढग से शाति से गई है I कार से होशाग और उसके साथ फौरन रवाना हो गया I समदर में नाव खडी मिली उनके लिए I उसके बाद समदर के बीच बोट और चीनी सैनिकों की वर्दी पहने उसके साथी I अभी जाने क्या क्या तैयारी हुई पडी थी ।

यह सब तैयारी दो पल में हो जाने वाली नहीं थी I मोना चौधरी ने शागली' को किसी भी व्यक्ति को किसी तरह के इत्तजाम के लिए कोई आर्डर देते न देखा था I मुलाकात होने के बाद शागली अमूमन उसकी आखों के सामने ही रहा था । यानी कि शागली पर शक करने की उसके पास मुनासिब वजह थी ।

मोना चौधरी को महसूस हुआ कि उसे बहुत सावधान रहने की आवश्यकता हे I होशाग की तो उसे कोई चिता नहीं थी I परतु शागली उसे शैतान से कम नहीं लग रहा था I कुछ पूछने पर भी वह किसी बात का जबाब. ठीक ढग से नहीं दे रहा था ।

मोना चौधरी ने ढीले छोड रखे अपने मस्तिष्क मे ठूंस ठूंसकर भर लिया कि अब उसे किसी तरह से लापरवाह नहीं होना है I दिमाग से भी नहीं शरीर से भी नहों।

तभी शागली ने भीतर प्रवेश किया I उसके होठो पर मुस्कान फैली हुई थी ।

मोना चौधरी के चेहरे पर भी गहरी मुस्कराहट फैलती चली गई ।

"हाय I कैसी हो ?” शागंली रोमाटिक मूड मैँ लग रहा था I

"एकदम फर्स्ट क्लास I”

शागली घूमना । पलटकर दस्वाजा भीतर से बद कर लिया ।

"यह क्या ? " मोना चौधरी जानबूझकर चेहरे पर घबराहट के भाव लं आई ।

"वही I" शागली ने आखें नचाई' I

"क्या वही ?"

"वही जो होता है I आदमी और औरत के बीच I"

"यहा ?" मोना चौधरी… ने आखें फार्डी I

"क्यो यहा क्या हे ? ”

शागंली' उसके करीब पहुचा ।

"बाहर आदमी हैं I होशाग है I वह क्या सोचेगा ?" मोना चौधरी जल्दी से बोली ।

शागंली ठठाकर हसा I

"वह कुछ नहीं सोचेगा । "

"क्या मतलब? " . .

"मत भूलो कि मैं उसका लीडर हू। वह किसी भी हाल में मेरे खिलाफ नही जा सकता I कम आन मोना डार्लिग I क्या अच्छा मौसम है यहा बाहर भोर का उजाला फैल रहा है I बोट का केबिन I समदर की नम हवा I यादगार रह जाएगा आज का वक्त जो हम दोनों के बीच बीतूने वाला है।"

मोना चौधरी ने शागंली का हाथ थाम लिया I

शांगली की आखों में तीव्र चमक भर आई I उसने मोना चौधरी को बाहों में लेना चाहा, परंतु मोना चौधरी ने तुरत खुद को बचाया और बोली।

"ऐसे नहीं ।"

"तो फिर कैसे ?" शागली हसा' I

"पहले दोर शोर हो जाए I "

"दौर I "

मोना चौधरी ने सिर हिलाया I

शागली ठठाकर हस पड़ा I

"तो यह बात हे I" मोना चौधरी से हाथ छुड़ाकर शागंली आगे बढा और कमरे के कोने मेँ रखी लकडी की छोटी सी अलमारी खोलकर उसमें से बोतल और दो गिलास निकाले I

"यही न !"

मोना चौधरी ने मुस्कराकर सिर हिलाया ।

शागली ने हसते हुए गिलास और बोतल तिपाई पर रखे और बोला I I

"मैं अभी आया । " शागंली ने दरवाजा खोला और बाहर निकल गया I आधे मिनट में ही वापस आया तो हाथ में प्लास्टिक का छोटा सा केन था ।

दरबाजा बद करने के पश्चात शागंली ने कहा I "और तो कुछ है नहीं I पानी सै काम चला लेगे I "

"पानी न होता तो वेसे भी काम चले लेते । " मोना चौधरी ने शोख स्वर मे कहा ।

शांगली हसा I आगे बढ़कर उसने कुर्सी को तिपाई के करीब खीचा और कुर्सी पर बैठते हुए केन नीचे रख लिया I फिर पैग . . बनाने में व्यस्त हो गया I

"तुम उतारो I " पैग बनाने में व्यस्त शांगली बोला I

" क्या ?"

"कपडे तब . . . त्तक... I

~ "बहुत जल्दबाज हो I "

"क्या मतलब? ”

"अमी तो पैग बनना शुरू भी नहीं हुआ और तुम मामला खत्म करने क्रो कह रहे हो I हौसला रखो और जल्दबाजी मत करो ! ,मैँ यहौं हूँ भागी नहीं जा रही I " मोना चौधरी ने शब्दों' मे अदा का इस्तेमाल किया I

शागंली हंस पडा I जोर-से ठठाकर हंस पडा l

"ठीक कहती हो I बिल्कुल ठीक कहती हो ! तुम भी यहां, मैं भी यहां. ! फिर जल्दी दोड लगाने की क्या ज़रूरत' है ?" कहते हुए शागली कुर्सी से उठा I हाथ में दो पैग थे । एक उसने मोना चौधरी को थमाया और दूसरा खुद थामे ईजी चेयर पर बैठकर अपनी टागो पर हाथ मारकर बोला…"आओ यहां बैठो I प्यार मोहब्बत से मारेंगे I पैग !" कहने के साथ ही उसने विल्की का तगड़ा घूट लिया I इससे पहले मोना चौधरी आगे बढती दरवाजे पर थपथपाहट हुई I

शामली के दात भिच गए ।

"साला I कौन आ मरा । आराम भी नहीं करने देत्ते । "

"जाकर देखो । " मोना चौधरी ने बेहद शात अवस्था में घुट भरा I

शागली ने क्रोध भरे अदाज में एक ही सास में विस्की का गिलास समाप्त किया और उसे एक तरफ रखकर उठकर आगे बढा और दरवाजा खोला I

बाहर होशाग खडा था ।

"क्या है ? ” शागली ने फाड खाने वाले स्वर में पूछा I

"अगर कोई काम न हो तो मैं आराम कर लू ?" होशाग बोला ।

"तो मना किसने किया है ?" शागंली पूर्ववत लहजे मे ही बोला ।

"मैने कहा है अगर कोई काम न हो तो ?” होशाग ने अपने शब्दों पर जोर दिया ।

"कोई काम नहीं हे जाओ। "

"तुम ठीक तरह से बात नहीं कर रहे शागली I " होशाग ने तीखे स्वर में कहा I

"मै" ठीक तरह से बात कर रहा हू I ” शागंली ने फौरन खुद को संभाला I

"नहीं तुम्हारी आवाज मे टेढापन हे! " होशाग ने शामली के चेहरे पर निगाहें टिकाकर कहा-"यह बात हम बाद मे करेगे' I मुझे भीतर आने दो I दरवाजे पर इस तरहे क्यों खडे हो कि मैँ भीतर हीं न आ सकू?"

"भीतर ?" शांगली मुस्कराया-भीतर आराम करोगे ? कहीँ और कर लो।"

"यह जहाज नहीं है जहा सैकडों केबिन हों I छोटी सी यही जगह है और वहा तुम कब्जा जमाए हुए हो I"

"मैं व्यस्त हूं तुम कहीँ और जाकर आराम कर लो I जगह नहीं है तो थोडी-बहुत बना लो कहीं I "

हौशाग के चेहरे पर कड़वे भाव फैले I

"भीतर मोना चौधरी है ?"

"हां I ”

"उसके साथ तुम क्या व्यस्त हो? " होशाग का स्वर तीखा था । ~ ~

" चियाग के बारे में कुछ खास बातचीत कर रहा हू I "

वह बात तो मेरे सामने भी हो सकती है ।" शामली के चेहरे पर कठोरता नाची I

"लेकिन मै अकेले मे उससे बात करना चाहता हूं। " शागली ने सख्त…स्वर में कहा ।

"ज्यादा सबाल-जवाब मत करो I मत भूलो कि मै तुम्हारा लीडर हू। " .

"मेरे नही गैग के।"

" एक ही बात है I तुम्हें मेरी बात माननी चाहिए I मैँ... I "

"मैं तुम्हारा नौकर नहीं हू कि… तुम्हारी बात मानू। जो बात गैग के हित में होगी, वही मै' मानूंगा I और तुम जो कर रहे हो, मेरे साथ जिस तरह पेश आ रहे हो उसके लिए तुम्हें गैग के ओहदेदारो के सामने जवाबदेह होना पड सकता हैं I तब तुम्हें जवाब देने मे दिक्कत हो सकती है I "

" मैने ऐसा कुछ नहीं किया कि तुम वापस पहुचकर मेरी बात उठा सको I "

"यह क्या कम बात है कि कोई जगह न होने पर भी तुम मुझें बाहर सोने क्रो कह रहे हो और खुद भीतर I "

" क्या भीतर ?"

"भीतर अपनी मर्दानगी का दौर चलाने की चेष्टा मे हो ।”

होशाग ने कड़वे स्वर मे कहा I

" भीतर अहम बातों और बिस्की के अलावा और कोई दौर नहीं चल रहा I यह तुम्हारे खराब दिमाग का ख्याल है कि भीतर और कुछ भी हो रहा है । "
 
"अच्छी बात है I वापस पहुचकर गैग के ओहदेदारों के सामने इस बारे में बात करूंगा । " तीखे स्वर में कहने के पश्चात होशाग वहा से हट गया ।

शागंली ने भडाक से दरवाजा बद किया ।

"उल्लूका पट्ठा ।"

"क्या हुआ ?" मोना चौधरी ने अनजान बनते हुए पूछा I

"कुछ नहीं ! साला-मूड खराब कर गया I साला दूसरे को खाता देख नहीं सकता I छोडो इन बातों को I साले का कोई' भरोसा नहीं दोबारा लौटकर दरवाजा खटखटा दे I जल्दी से काम निबटा लेते हैं आओ I "

"बिस्की ???? " मोना चौधरी ने जानबूझकर कहा I

"छोडो विस्की को बाद में पी लेगे पहले टिग....टाग हो जाए I " कहने के साथ ही शागली ने आगे बढकर मोना चौधरी को बाहों में भर लिया I

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"मोना डियर I” फुर्सत पाते ही शागली मदहोश निगाहों से उसे देखता हुआ ब्रोला-"तुम वास्तव में कमाल की चीज हो I मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी होता है जबकि मैं सिगापुर की गली गली की खाक छान चुका हूं। रियली यू आर ग्रेट.. ग्रेट…ग्रेट !"

मोना चौधरी हस पडी I . .

" हंस क्यों रही हो ???"

" तुम्हारे तारीफी शब्द सुनकर I "

"कुछ गलत कह दिया ?"

"नहीं ठीक कहा I " मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगा ली I

"मैने तुम जैसी पहले कभी नहीं देखी । " शागली की हालत अजीब हो रही थी ।

"ग़लत रास्तों पर चलोगे तो ठीक कहा देख पाओगे I”

मोना चौधरी ने लापरवाही से कहा--"शागली इस वक्त हम कहा जा रहे हैँ ?"

"चियाग के टापू पर । "

"कब तक पहुंचेगे ।"

"शाम ढलने तक I " शामली हाथ बढाकर उसकी टाग सहलाने लगा-"लेकिन । "

"क्या लेकिन ?"

"पहले तो मेरा इरादा तुम्हें चियाग के टापू पर भेजकर वापस आ जाने का था जैसाकि हममें तय हो चुका है परतु अब मेरा इरादा क्रुछ और हीँ हे।"

"कुछ और? ”

"हा I " शागली उसकी टागों को देखता हुआ बोला--- "मैं तुम्हें चियाग के टापू पर अकेला छोढ़कर नहीं आऊँगा I बल्कि तुम्हारे साथ रहुगा I होशाग और वाकी के दोनो आदमियो को भी ले जाऊँगा I जहां तक हों सकेगा, तुम्हारी हर भरपूर सहायता करूगा कि तुम सफल हो सको I "

" ’मुझ पर इतनी मेहरबानी क्यों ? " मोना चौधरी हसी' I

"क्योकि मैं तुम जैसी करामाती सुदर हसीना को खोना नहीं चाहता I " शागली ने उसकी टाग दबाई…"तुमने तो जैसे मेरे होशोहवास छीन लिए हैं I पागल कर दिया हे मुझ जैसे इसान को I "

मोना चौधरी ने अपनी टाग पर रेंगता उसका हाथ थपथपाया ।

"चिता मत करो I अभी और पागल करूगी जो मेरे लिए कुछ करता है उसके लिए मै सब कुछ करती हूं। "

जबाब में शामली खुशी से हस पडा।

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~ होशाग बोट पर कुर्सी बिछाए समदर को निहार रहा था I उसके होठो में सिगरेट फसी हुईं थी चेहरे पर सोच के भाव विद्यमान थे I धूप चारों और किसी हुई थी I समदर का पानी भी गर्मसा हो रहा था । पानी से टकराकर आती हवा मे तपिश का एहसास था ।

बोट पर अगर छोटी.-सी छंत न होती...... तो समंदर का यह गर्म वक्त निकाल पाना वेहद कठिन था । होशाग ने कलाई पर बथी घडी पर निगाह मारी I

तभी कदमों की आहट सुनकर होशाग ने गर्दन घुमाई । शागली उसकी तरफ बढा आ रहा था । होशाग ने मुह फेर लिया I

" हेलो I ” शागली करीब पहुचकर बोला । होशाग ने कोई जबाब नहीं दिया I

"सुना नहीं तुमने I” शागली की आवाज में कठोरता भर आईं थी ।

" सुना I तुमने हैलो कहा है I " होशाग ने उसे बिना देखै कहा ।

"तो जचाब क्यो नहीं दिया तुमने ?"

"यह कोई ऐसी बात नहीं थी कि मै' तुम्हे' जवाब दू। " होशाग खडा हुआ और उसे घूरकर जहर भरे स्वर में कह उठा-"'और कान खोलकर सुन लो कि तुम गैग के नेता हो मेरे बाप नहीं हो जो अपना हुक्म मुझ पर दागते फिरो I काम ,की वात है तो करो नहीँ तो चलते बनो।"

शागली ने कहर भरी निगाहों से होशाग को देखा I होशाग के चेहरे के भाव नहीँ बदले ।

शामली ने खुद पर काबू पाया-"तुम्हें आगें का प्रोग्राम बताने आया हू।"

" बोलो I "

"हम मोना चौधरी को चियाग के टापू पर छोड़ेगे नहीं . बल्कि उसके साथ जाएगे और पूरी कोशिश करेगे कि चियाग से वह फिल्म मोना चौधरी को दिलवा सकें I " शागली ने कहा ।

होशाग की आखों में कहर के भाव उभरे !!

"खूब I तो मोना चौधरी ने दरवाजा बद करके तुम्हे तगडे झटके दिए हैँ जिन्हें कि तुम अभी तंक बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हो और उसके हक मेँ सोचने लगे हौ।"

"शटअप I " शागंली गुर्राया…"मैँ गैंग के हित में काम ~ कर रहा हूंI "

"इसमे गैग का हित कहा से आ गया ?"

"हमें मोना चौधरी से एक करोड रुपया मिलेगा, जिससे हम अपने गैग को अच्छी तरह सवार सकते हैं । अपनी जरूरतों कों पूरा करके दूसरे गैगस पर हावी हो सकते हैँ I दरवाजा बद काके मैं मोना चौधरी से सौदेबाजी की ही बात कर रहा था और तुम गलत सोच रहे हो I" शागली ने कहा ।

"मैँ कुछ भी गलत नहीं सोच रहा यह तुम बखूबी जानते हो शागंली I"

शागली होठ भीचकर होशाग को घूरने लगा ।

होशाग बापस कुर्सी पर बैठ गया I

"एक बात तो बताओ होशांग ?" शागली का लहजा सर्द हो उठा I

होशाग खामोश रहा I

"तुमने कहा कि मोना चौधरी' को तुम रेर्स्टरिट मेँ मिले थे r" शांगली ने एक एक शब्द चबाकर कहा…"लेक्लि मेरा मालूम किया जाहिर करता है कि मोना चौधरी को तुम पहले से ही जानते हो I वह तुमसे मिलने तुम्हारी बस्ती मे गई थी ।"

होशाग ने कुछ नहीं कहा I

" और इस बारे में तुमने गैग से झूठ बोला I अगर यह बात. . सबको मालूम हो जाए तां तुम्हें शूट कर दिया जाएगा I "

होशाग ने खामोश और ठडी निगाहों से शामली को देखा I

"इसलिए यह सोचना भी छोड दो…कि मैं दरवाजा बद करके मोना चौधरी के साथ किस मुद्दे पर बात कर रहा था । तुम सिर्फ इस बात पऱ ध्यान रखो कि हमने मोना चौधरी के साथ टापू पर जाना है I"

होशाग गर्दन धुमाकर, समदर की लहरों को देखने लगा I जो शात थी I सतह पर थी । परतु कभी कभी इतनी जोरों से उछलती थीं कि जैसे सारा समदर हिल उठता हो I होशाग की आखो' में जहरीले भाव नाच रहे थे I ओर चेहरे से लग रहा था जैसे वह कठिनता से खुद पर काबू पाए हुए हो I

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पश्चिम की तरफ झुकते सूर्य की रोशनी जैसे समदर के पानी क्रो भी पीला किए दे रहीँ थी I ऐसे में समदर को देखने पर आखे चौंधिया. सी जातीं र्थी I

दिन-भर खामोश शात पडा समदर अब शोर डालने लगा था I लहरें अब उछलनी शुरू हो गई थीं। जैसेकि अब समदर की आखें खुली हों।

सामने ही किनारा नज़र आ रहा था । मोटरबोट की गति धीमी हो चुकी थी ।

शामली होशाग मोना चौधरी और अन्य दोनों की निगाहें किनारे की ही तरफ थीं I किनारा शात्त और सुनसान नजर आ रहा था । बडे बडे घने पेडों ने उस जगह काफी बडा हिस्सा अपनी आड़ में ले रखा था I

यह टापू या I

चियाग का टापू I

"यहा तो कोई भी नजर नहीं आ रहा था I " मोना चौधरी बोली ।

"यह टापू का पिछला हिस्सा हे I " होशाग ने कहा I

शागली ने होशाग को देखा I
 
"तुम्हें केसे मालूम कि यह टापू का पिछला हिस्सा है ?” शागली ने पूछा I

“हर समझदार इसान यही बात कहता जो मैने कहीं है ।" होशाग ने कहा ।

"साफ कहो I "

"अगर यह टापू का सामने वाला हिस्सा होता तो इस तरह सुनसान नहीं होता यहा हलचल होती I अब तक कई लोग हमें नजर आ गए होते और कइयों ने हमे देख लिया होता I" होशाग ने कहा I

"होशाग का कहना सही है I " मोना चौधरी ने सहमति से सिर हिलाया I

बोट का इजन बद था I वह पानी में हिलती हुई हौले होले आगे बढती हुई किनारे पर आ रुकी थी I शागंली ने अपने दोनो' आदमियों को देखा ।

. . "बोट को बाघ देना I कही लहरे इसे साथ न ले जाएं I " शागंली ने कहा और बोट से पानी में कूद गयाI नीचे पिडलियो तक पानी था I पानी में कदम उठाता हुआ शागली किनारे तक आ पहुचा I मोना चौधरी और होशाग भी इसी तरह पानी मे से निकलकर किनारे पर आ गये ।

शागंली के दोनो आदमियों ने बोट क्रो रस्सी से बाधा ओर दूसरा कोना टापू पर लकडी का छोटा-सा खूंटा गाढ़कर वहा बाध दिया । अब बोट के समदर में खिसक जाने के चास नहीं थे I

पाचों इक्टठे हुए । शाम ढलती जा रही थी I

" अब ?" शागंली सोचपूर्ण निगाह टापू पर दौडाता हुआ बोला I

"सोचने की जरूरत नहीँ आगे बढो I " मोना चौधरी ने कहकर सिगरेट सुलगाई--- "हम यहा छिपकर आक्रमण करने नहीं आए। चियाग से फिल्म लेने आए है' और वह तभी ले सकते हैं जबकि उसके सामने पहुच जाए।"

"मोना चौधरी ठीक कहती हे I " होशांग ने फौरन कहा-"लेकिन सामने जाने में खत्तरा है I चियाग हमें छोडने वाला नही'।"

"आगे बढकर पीछे हटना हम् लोगों को शोभा नहीं देता I " शागंली बोला I "

होशाग मुस्काराया l

"मेने पीछे हटने को तो नहीँ कहा I"

शांगली ने सब पर निगाह मारी I

"आओ I ”

वे सब आगें बढ गए ।

शाम ढलती जा रही थी I पेडों के साए लवे होंकर अब समाप्त हो गए थें I पेडों के तने में से गुजरकर वे आगे बढते रहे। पेडों की छाव ने जैसे अधेरा कुछ पहले ही कर दिया था I

"टापू के किस हिस्से पर चियाग ने ठिकाना बना रखा होगा ?” शागंली बोला I

"चलते रहो सब कुछ सामने आ जाएगा I ” मोना चौधरी ने शात स्वर मे कहा ।

और अभी वे लोग सौ कदम ही चले होगे किं कड़कती खतरनाक आवाज़ उनके कानों में पडी I

" खबरदार! !!! रूक जाओ ।।"

उनके पैर जडबत हो गये ।

उनकी एक दूसरे से निगाहे मिली I हर ताफ पेड के तने थे मोटे मोटे I और कुछ भी नजर नहीं आ रहा था l

" कौन है ? " दोबारा आवाज ना आने पर. शागली ने ऊँचे स्वर मे कहा ।

"फालतू के सवाल मत करो…तुम लोगों के पास हथियार है ?"

"हा हैं l"

"हथियार निकालो और दूर फेक दो I "

"नहीं । " शागंली सख्त स्वर में बोला-"ऐसा नहीं हो सकता। देख नही रहे हम कौन हैँ ?"

" तुम लोगों के जिस्म पर पडी वर्दिया यहीँ दर्शा रही हैं कि तुम चीनी सेनिक हो।"

"हा हम चीनी सैनिक ही हैँ !" . .

"तो यहा क्यों आए हो ?"

"भटकते-भटकते आ गए I रास्ता नहीं मिल पा रहा था हमे चीन की तरफ़ जाने का I लेकिन तुम कौन हो और इस निर्जन टापू पर क्या कर रहे हो ?" शागंली ने अधिकार भरे स्वर में कहा I ~

"यह निर्जन टापू नहीं हे l चियाग साहब का टापू, हे I" आवाज आई I

~ "चियाग ?" शाग़ली ने चौंकने का अभिनय किया I

"हा I अब तुम I "

"यह तो बहुत अच्छी बात बताई तुमने I चियाग का टापू I चियाग चीन का दोस्त है और चीन चियाग का I हम यू ही घबरा रहे थे । लेकिन अब तो हमें ऐसा लगता है जैसे हम चीन की ही धरती पर है !"

"हम भी इसे चीन की ही धरती समझते हैँ I अब तुम लोग चियाग के नाम पर हथियार फेक दो I"

"नहीं हम चीनी सैनिक हैं और सैनिक कभी भी अपने हथियार जुदा नहीं करते I "

"तुम हमारी बात मानने से इनकार कर रहे हो I .."

"हा क्योकि तुम्हारी बात ही गलत हे तुम दोस्तो पर शक कर रहे हो I "

कई पलो तक उनके बीच खामोशी रही ।

बोलने वाला कही नजर नहीं आ रहा था ।

"यह लडकी कौन है ?"

"मेरी बीवी है I समदर में गश्त पर निकले ये इसे भी घुमाने के इरादे से साथ ले लिया I "

"इसकी लवाई तो बहुत ज्यादा है I"

"हा | पूरे छ: फीट हैं I" शागली नें छाती फुलाकर कहा-"इसकी लवाई देखकर ही तों मैने इससे शादी क्री थी I अब इन बातों को छोडो दोस्त I सामने आ जाओ मुझसे ऊचा नहीं बोला जा रहा I "

~ और फिर अगले ही पल पेडों के पीछे से तीन खतरनाक से नजर आने वाले चीनी निकले I तीनों के हाथों मेँ गने थीं।

सामने चीनियों को देखकर वे तीनों कुछ लापरवाह अवश्य हो गए थे ।

"यहा से जाने से पहले तुम लोगों को चियाग साहब से अवश्य मिलना पड़ेगा I ऐसा चियांग साहव का आदेश है । " कहते हुए चीनी की कामुकता भरी निगाह मोना चौधरी पर फिर रही थी और मोना चौधरी ने उस पर ऐसी मुस्कराहट फैंकी थी भ कि उसकी घंटी बजनी शुरु हो गई I

"हमें कोई एतराज नहीं I " शागंली ने कहा…"बल्कि -चियाग सै मिलकर हमेँ खुशी होगी I "

" आओ' I "

वे तीनों आगे और बाकी सब पीछे थे । शागंली और मोना चौधरी की निगाहे मिलीं I अंधेरा सिर पर सवार होने जा रहा था I इन लोगों के साथ आगे बढने में खतरा था I वे पाचों एक साथ चियाग के चगुल में पहुच जाते और ऐसे मेँ चियाग उनकी असलियत भापकर उनके साथ वुरा सलूक भी कर सकता था I

उन्हें शूट भी का सकता था I

इसलिए बेहत्तर यही था कि वह लोग अलग अलग दिशा के ठिकाने की तरफ बढें I

~ मोना चौधरी ने आखों हीं आखों में शागली को इशारा ~ किया I और फिर अगले पल जैसे कयामत से भरे थे I शागंली और मोना चौधरी के हाथों मेँ रिवाल्यर चमके तीन गोलिया चलीं I तीन धमाके हुए । आगे जा रहे चियांग के तीनों आदमियों की खोपडिया उड गई' I यह सब होने पर होशांग चौका ।

"यह तुम लोगों ने क्या किया ? "

"क्यों ?" शागंली, ने होठ सिकोढ़कर उसे धूरा…"तेरे रिश्तेदार थे वह? "

"बकवास मत करो शागली I मुझे तुमसे इतनी बडी बेवकूफी की उम्मीद नहीँ थी I ”

"तुम कहना क्या चाहते हो होशाग ?" मोना चौधरी ने. पूछा I

"इन पर फायर करन की क्या जरूरत थी…अगर इन्हें खत्म ही करना था तो वेसे ही झपट पड़ते I हम पाच है । आसानी से इनका गला दबाकर इन्हें खत्म कर सकते थे I" होशाग सख्त स्वर में कह रहा था--""इस सुनसान जगह पर गोलियों की आबाजें दूर दूर तक गई होगीं। "

होशाग की बात सबको ठीक लगी ।

"यह _ठीक कहता हे I " मोना चौधरी के होठो से निकला-"इस तरफ हमने पहले नहीं सोचा ।"

शागली ने गभीरता भरे अदाज में सिगरेट सुलगाकर कश लिया I

"लेकिन जो होना या वह तो हो ही चुका I अब हमे आगे को सोचनी चाहिए । " शागली ने कहा I

शागंली की बात भी ठीक थी I

अधेरा होना शुरू हो गया था I

मोना चौधरी ने कहा-“ अभी ताजा ताजा गोलियों की आवाजे गूजी हैं । कुछ देर यही' रुककर हमेँ देखना चाहिए कि फायरिंग की आबाजे कोई रग लाती है' कि नही' I "

किसी ने कुछ नहीं कहा I
 
"अगर आवाज अन्य लोगों ने सुनी होगीं तो वे लोग कुछ ही देर में अवश्य यहा होगे…हम खतरे में हैं या नहीं यह तसल्ली करके ही आगे बढेगें I " मोना चौधरी ने गभीर स्वर में कहा-"आओ यहा से हटकर थोड़ सा उस तरफ़ चलें इन लाशों के ज्यादा करीब रहना भी ठीक नहीं I

अंधेरा पूरी तरह फैल गया ।

★★★

★★





★★

★★★

चद्रमा की रोशनी में सब कुछ चादी के समान स्पष्ट नजर आ रहा था । समदर से टकराकर आत्ती ठडी हवा पेडों के पत्तों को हिलाती खड़खडाहट पेदा कर रही थी…दिन-भर क्री गर्मी से ~ अब राहत सी महसूस हो रही थी I पसीना सूख गया था I जिस्म खुश्क-सा हो गया था ।

शागंली के दोनो साथियों ने ब्रैग उठाकर रखा था उन सबने बैग में से एक एक गन निकालकर हाथ मेँ ले ली थी I इस तरह छिपे अब लगभग उन्हे एक घटा होने को आ रहा था I

"मेरे ख्याल में सब ठीक है I अब हमें चलना चाहिए I " होशाग ने कहा-"'इस तरह कब तक हम अपना वक्त बर्बाद करते रहेगे I रात ही-रात में सब कुछ कर गुजरना हे I "

"कुछ देर और रुको । " मोना चौधरी ने कहा I

"मेरे ख्याल में हमें चलने की तैयारी करनी चाहिए I" होशाग ठीक कहता है I "

“नहीं-थोड्री देर बाद यहा से रवाना ....!" मोना चौधरी के शब्द मुह मे ही रह गए I आखे सिकुड गई' I चेहरे पर खतरनाक भाव उजागर हो उठे उसकी पैनी . . निगाह उन सायों पर जा टिकी जो चद्रमा की रोशनी में स्पष्ट नजर आने लगे थे ।

~ मोना चौधरी की निगाह घूमी I

उस तरफ ही नहीं, अन्य तरफ भी चद्रमा कीं रोशनी ने चमकते साए थे I

अन्यो ने भी यह सब देख लिया था I

"ओह I” शागंली के होठो से निकला I

मोना चौधरी के दांत भिच गए,. उनका अंदाज' बता रहा था कि उन्हें बाखूवीं मालूम हे कि वे कहां छिपे है और बहुत अच्छे . . ‘ढग' से उन्हें घेरा जा रहा था I

"‘य...ये तो हमें घेर. रहे हैं I " होशाग के होठो से निकला I

"कही-न-कहीँ गढ़बढ़ अवश्य हैI” मोना चौधरी खतरनाक लहजे में कह उठी…"वरना' इस अंधेरे में इन लोगों को यह कैसे पता चला कि हम ठीक किस जगह पर कहा छिपे हैँ ?"

"तो इसमें कोई गडबड़ कैसी ?” शागंली के होठो से निकला I

~ "वही तो समझ में नहीं आ रहा I” मोना चौधरी की .उगलिया गन पर सख्ती से लिपट चुकी थी-"क्योकि उन तीनों को शूट करने के बाद हम सब लोग एक साथ ही रहे। हममें से गद्दार कौन है कह नहीँ सकती I"

"गद्दार !!" शागंली चौका I

मोना चौधरी गन थामे दात भीचे निगाहें घुमाती रही ।

"दिमाग खराब हो गया है इसका भला हममें गद्दार कौन हो सकता हे ?"

"कोई तो हे ही l तुम दोनों मे से कोई एक या फिर तुम दोनो I अगर ऐसा न होता तो ये लोग इस अघेरे में भी हमें इस जगह पर आकर नहीं घेरते I” मोना चौधरी ने दात किटकिटाए I

"मोना तुम्हारी बात सहीं हे I ” होशाग ने व्यग्य से कहा…"लेकिंन अब यह भी तो बता दो कि हम सब पास पास ही रहे है-तो फिर हममे से किसने और कैसे चियांग तक यहा की स्थिति की खबर पहुचाई है ।'"

"यही बात तो समझ में नही आ रही I "

होशाग हसा I

" शागली I इसकी बात सुनो क्या कह रही है यह ? "

"मै तुम दोनो में से किसी की भी बकवास नहीं सुन रहा I " शागंली मुस्कराया---" और तुम लोग भी बकवास बद करो I"

" यह सोचो कि अब क्या करना है I इन लोगों से केसे बचना है I "

"कोई फायदा नहीं I " मोना चौधरी ने सिर हिलाया I

" क्या मतलब? ”

"ये लोग बीस से तीस तक है I अगर हम इनसे मुकाबला भी करें तो खुद हो सोचो कितनों की जान ले लेगें I

पाच-दस पद्गह की I लेकिन बाद में हमे ही जान से हाथ धोना पडेगा।"

"में मोना चौधरी की इस बात से संहमत हूं I " होशाग ने अघेरे में निगाह घुमाते हुए कहा I

"तो फिर क्या किया जाए ? ” शागंली ने शब्दों को चबाकर . कहा I

"इन लोगों से मुकाबला करना ठीक नहीं ।"

" मै खुद को इन लोगों के हवाले नहीं करूगा । " शागंली ने सख्त स्वर में कहा I

"जिद मत करो शागंली I इसी में हमारी भलाई है । और अगर तुम लोग आत्मसमर्पण नहीं करना चाहते. तो मत्त करो । कर लो मुकाबला I लेकिन उससे पहले मुझे आत्मसमर्पण करने दो । "

"तुम......! "

"हा I " मोना चौधरी ने कठोर स्वर मेँ कहा…"अभी तो जान बचेगी बाद की बाद में सोची जाएगी कि.....!"

मोना चौधरी के शब्द पूरे होने से पहले ही खतरनाक-सा स्वर गूंजता हुआ उनके कानो में पडा I

"तुम सब लोगों को हमने घेर रखा हे I समझदारी इसी में हैं कि खुद को हमारे हवाले कर दो ।"

जवाब में कोई भी स्वर न गूजा ।

" चुप रहने से तुम लोग बच नही सकते ! हमें बखूबी मालूम है कि तुम लोग यहीँ पर हो I बेशक तुम लोगों के पास हथियार होगे I परतु हम लोगों का. मुकाबला नहीं किया जा सकता I हम वहुत सारे हैं, हर एक के हाथ में गन है I " शब्दो मे दरिदगी कूटकूटकर भरी पडी---"हमें बार बार वार्निंग देने की आदत नहीं हे I कम आन बाहर जा जाओ हाथ उठाकर I "

मोना चौधरी धीमे स्वर में फुसफुसाई ।

"मेरा इन लोगों से मुकाबला करने का कोई इरादा नहीं . है । "

"तुम खुद को इनके हवाले करने जा रही हो ?" शागंली ने होठे भीचकर कहा I

"हा I तुम लोगों ने मुकाबला करना हो तो बेशक करो I . लेकिन तब तक तुम लोग फायरिंग नहीं करोगे जब तक कि मैं खुद क्रो उन लोगों के हवाले नहीं कर देती I ” रिवाल्बर थामे मोना चौधरी ने कहा I

शांगली के कुछ कहने से पहले ही होशाग कह उठा I

"मैं भी तुम्हारे साथ हू मोना चौधरी I हालात को देखते हुए, इन लोगों से टक्कर लेना बेवकूफी ही है I "

"तो मैं अकेला इन लोगों का क्या बिगाड लूगा ? " शांगली ने झल्लाकर कहा ।

"इस वक्त समझदारी यही है शागली कि खुद को इन लोगों के हवाले कर दिया जाए और आने वाले वक्त में जो हालात पैदा हों, उन्हे' देखते हुए किसी तरह अपनी जान बचाई जाए I " मोना चौधरी ने गभीर स्वर में कहा…"वेहतर होगा, अपने दोनों आदमियों के साथ तुम भी आत्मसमर्पण कर दो I "

शागली ने होठ भीचकर सहमति से सिर हिलाया I

तभी वह खतरनाक आवाज गूंजी I

"यह लास्ट वार्निंग है । अगर एक मिनट के भीतर ही तुम लोगों ने खुद को हमारे हवाले नहीं किया तो हम लोग शुटिंग शुरू कर देगे I सिर्फ एक मिनट I अब कोई वार्निंग नहीं दी जाएगी I"

अगले ही पल मोना चौधरी की आवाज वातावरण में गूज उठी I

"हम लोग आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं । "

"गुड ! हथियारों को वहीं छोडकर, हाथ ऊपर उठाए, हमारे सामने आ जाओ। याद रखो, कही' भी, कोई भी चालाकी न हो I वरना वक्त से पहले तुम लोगों को मौत नसीब हो जाऐगी ।

मोना चौधरी I होशाग I शागली ओर उसके दोनों साथियों ने कही' भी कोई' चलाकी इस्तेमाल नहीं की और सबने खुद को उन लोगों के हवाले कर दिया I . .

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चियाग !

पाच फीट लबाईं' कुल I सिर से पाव' तक देखने पर फुटबाल जैसे -आकार का लगता था I सिर के वेहद छोटे-छोटे बाल I भौहें तो जैसे बिल्कुल ही' …साफ थीं I बेहद गौर से ध्यानपूर्वक देखने पर भौहों के चद बाल नजर आ ही जाते थे I पतली हल्की हल्की सी मूंछे ।मूंछो के बाल बीच चीच में से गायब थे । रही बात दाढी की…तो शेव कर रखी थी उसने । परतु देखने पर स्पष्ट मालूम. हो जाता था कि गालों पर बाल भी गिनती के ये I

'मीतर धसी आखें । पोपटे भारी ।

भिचे होठ I इसी कारण क्रूरता का दूसरा रूप लगता था वह I आदत से मजबूर चियाग हर समय कमीज पैट और टाई बाधे रहता था I मौसम के मुताबिक जरूरत पड़ती तो कोट भी डाल लेता था I पावो में हर समय जूते पहने रहता था । टाई, कपडे और जूते वह कब उतारता, कब पहनता. यह बात शायद ही कोई जान पता हो, अन्यथा देखने वालों को तो यहीं लगता कि वह जैसें चौबीसों घटे यहीँ सब पहने रखता हो I

यह था चियाग !

और चियाग इतना खतरनाक था कि कई देश चियाग से दुश्मनी मोल लेना पसद नही करते थे जिनमें से प्रमुख तो चीन था I कई देशों मे चियाग के आदमी स्थायी तौर पर रहते थे और वक्त आने पर जरुरत के मुताबिक हर काम कर गुजरते थे I किस देश में किस नेता या उद्योगपति की हत्या करवानी है या अपहरण करवाना है या किसी से कोई बात मनबानी है, या एक देश कौ दूसरे देश के गुप्त राज चाहिए, कैसा भी काम हो यह सव कर गुजरना चियांग के बाए' हाथ का खेल था I दरिंदगी और कहर का जीता जागता दूसरा रूप था चियांग I

इन सब कामों के बदले वह भरपूर कीमत बसूलता था I आदमियों की खतरनाक फौज हर समय. चियाग के साथ रहती । किसी में इतनी हिम्मत नहीँ थी कि चियाग की तरफ आख भी टेढी करके देख ले।

चियाग की दो आदतें र्थी I जिसे उसकी कमजोरी भी कहा जा सकता था ।

बढिया से बढिया शराब और बढिया से बढिया औरत I

-चियाग के बारे में शराब तो बढिया से बढिया हर समय हाजिर रहती थी, परतु बढिया-से…बढिया औरत कभी कभार ही नसीब हो पाती थी । किसी तबाही औरत की खबर मिलती तो उसे अपने आदमियों को आदेश देकर टापू पर उठवा मगवाता

था I वैसे भी इस बारे में उसके बारह आदमियों का ग्रुप था जो चियाग के लिए तोपमार औरत की तलाश में रहते और नजर आते ही, देखते ही उसे जैसे तैसे टापू पर चियाग के… पास पहुचा देते I

चियांग तब तक उसका इस्तेमाल करता, जब तक कि उससे तबीयत . नहीं भर जाती, उसके बाद वह उस तोपमार औरत को अपने आदमियों के हवाले कर देता I इतने आदमियों के बर्दाश्त ना कर पाने के कारण ही कुछ घटों के पश्चात ही उसकी लाश समदर में तैर रही होती और उसके शरीर के मांस को समदर की मासाहारी मछलियां नोच चोचकर खा रही होतीं I

और' तब तक चियाग के लिए अगली तोपमार चीज का इतजाम हो रहा होता I

बही चियाग इस समय टापू के छोटे से महल के विशाल ड्राइगरूम में कमीज पैट टाई और जूते पहने टहल रहा था I

कमरे में पर्याप्त रोशनी जगमगा रही थी I

दस गनमैन, जोकि बेहद खूंखार नजर आ रहे ये, वहा खडे थे ।
 
आखिरकार चियांग ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया और सिहासननुमा कुर्सी. पर आराम से भरी मुद्रा में बैठकर कश लेने लगा । उसकी पैनी निगाह चारों तरफ फिर रही थी । ठीक उसी पल उस हाल के प्रवेश द्धार पर आहट हुई I

छ हथियारबंद दरिदो जैसे नजर आने बाले चीनियों से घिरे मोना

चौधरी , होशाग , शागंली और उसके दोनों साथियों ने भीतर प्रवेश किया ।

चियाग. की सर्द निगाह पल-भर में ही उन सब पर घूम गई । चियाग की निगाह मोना चौधरी पर जा टिकी एकाएक वह मुस्कराया और सिहासननुमा कुर्सी से उठकर उनकी तरफ बढा ।

उसकी चाल हैं शाहाना अंदाज था I

सबकी एकटक निगाह चियाग पऱ थी । चियाग मोना चौधरी कैं करीब पहुचकर ठिठका । मोना चौधरी ने चियाग को देखते ही पहचान लिया था, क्योकि पहाडिया ने उसकी फाइल और तस्वीर दिखाई थी और इस समय मोना चौधरी शोख निगाहो, से चियाग को देख रही थी ।

"तुम तो वास्तव में बहुत खुबसूस्त हो I ” चियाग ने होले से हंसकर मोना चौधरी के गाल पर उगली ठकठकाई I

"और तुम्हें मुझ जैसी खूबसूरत युवतियाँ पंसद हैं I " मोना चौधरी भी हसी I भाषा उसकी चीनी थी ।

"खूब ! बहुत खुब ।" चियाग' ठहाका लगा उठा-"मेरे बारे में बहुत खबर रखती हो "

"चियांग जैसे इंसान के पास आना हो तो ऐसी जानकारी रखनी ही पढ़ती है I "

"तुम खूबसूरत ही नहीं बहादुर भी हो । अगर तुम्हारा मेकअप हटा दिया जाए तो मेरे ख्याल मेँ तुम और भी खूबसूरत निकलोगी । मेकअप ने तुम्हारी खूबसूरती दबा दी हे ।"

मोना चौधरी मन-हीँ-मन चौकी फिर तुरंत ही सभल गई ।

"तुम्हे कैसे मालूम मेरे चेहरे पर मेकअप है ?" मोना चौधरी के होठों से निकला ।

गहरी मुस्कान के साथ चियाग ने जेब से तस्वीर. निकालकर उसे दिखाई ।

मोना चौधरी को आश्चर्य का सामना करना पड़ा I वह तस्वीर उसकी अपनी थी और उन कपडों में थी, जिनमें वह सिंगापुर पहुची थी , यानी कि उसकी जानकारी-में नहीं आया कि उसकी तस्वीर ली जा रही है और वह तस्वीर चियाग के पास । वास्तव में हैरत में डाल देने वाली बात थी । मोना चौधरी की निगाह चियाग़ पर जा टिकी ।

"हम कब से तुम्हारे आने की राह देख रहे थे जानेमन I " चियाग' ने हस्रकऱ तस्वीर जेब में डाल ली---"'फिर भी ज्यादा इतजार नहीँ करना पडा हमे । "

" तो तुम्हे मालूम था कि मैं आ रही हूं ?”

"मुझे सब कुछ मालूम है । सब कुछ I मेरे हाथ बहुत -लंबे हैँ तुम सोच भी नहीं सकती ।"

मोना चौधरी के होठ सिकुढ़ गए ।

"तुम्हारे लवे हाथो का छोर होशाग है या शागंली I इन दोनों में से कोई है । "

चियाग हसा फिर सिर हिलाकर बोला I

"करेगे । तुमसे फुर्सत में बात करेगे I पहले जरा इन सबको तो चलता कर दू I " कहने के साथ हीँ चियाग की निगाह अन्यो पर घूमती हुई शागली पर जा टिकी ।

शांगली का चेहरा और भी फक्क पड़ गया । वह इस बात को तों एक पल के लिए भी नहीं भूला या कि उसके सामने चियाग जैसी हस्ती मौजूद है और वह उसके खिलाफ कदम-उठा चुका है I वह कितना भी खतरनाक सही परंतु चियाग के सामने उसकी हैसियत, छोटे से बच्चे की तरह थी I

"तुम ? " चियाग गुर्राया-"तुम शागंली हो ना ?"

शागली सूखे होठो पर जीभ फेरकर सिर हिलाने लगा I

"मै माफी चाहता हू I " शागंली का स्वर घबराहट से काप उठा I

"किस बात की ?" चियाग हसा I

~ "में फिर कभी आपके खिलाफ नहीं चलूगा I आपकी सरपरस्ती में तमाम उम्र I "

"मेरे पास तुम जैसे बहुत हैं जो हर समय मेरे तलवे चाटते रहते हैँ I बैसे भी आस्तीन मे साप पालने की आदत चियाग को नहीं है । " चियाग का स्वर वहशी हो उठा-" जो इंसान एक बार मेरे खिलाफ कदम उठा दे, उसे जिदा छोडना मैं वैसे भी पसद नही' करता I तुम मेरे सामने हो इससे बढिया और क्या बात हो सकती है I नहीं तो तुम्हें शूट करने का आदेश मुझे जारी करना पडता । "

"नहीं ऐसा मत कीजिए। मैं l"

तभी चियांग के हाथ में रिवाॅल्बर चमकी I

एक साथ तीन गोलियाँ चली ।

शागंली और उसके दोनों साथी शूट हो गए ।

"गुड I" मीना चौधरी के होठो से ज़हरीली आबाज निकली…"इनका खत्म हो जाना ही ठीक था क्योकि मेरी निगाहों में इनका इस्तेमाल और नहीं बचा था । "

चियाग हसा I

रिवाॅल्बर जेब में डालकर उसने होशाग को देखा I

"यहा तुम्हारी जरूरत नहीं तुम जाओ बोट तुम्हें छोड आएगी I "

"जी I" होंशागं' ने मुस्कराकर सिर हिलाया मोना ~ चौधरी को अगर जिदा छोडा गया तो इससे मेरी भी जान को खतरा पैदा हो सकता है I "

" औरत से घबराते हो ?” चियाग हंसा ।

"यह बहुत खतरनाक है I"

मैं देखूंगा कितनी खतरनाक है I तुम जाओ I "

टहलते हुए होशाग की निगाह मोना चौधरी से टकराई।

होशाग ने फौरन निगाहें फेर ली I क्योकि मोना चौधरी की … आखो में बरसती मौत के भाव उसने पहचान लिए थेI

होशाग के बाहर निकलते ही चियाग ने कहा I

"इसके चेहरे का मेकअप साफ करके इसे मेरे बेडरूम तक पहुचा दो ।

चार गनमैन मोना चौधरी को बहा से ले गए।

बाकी के दो वहा मौजूद लाशों को उठाने में व्यस्त हो गए I

चियाग तेज तेज़ कदमो से ऊपर जाने वाली सीढियों की तरफ बढ़ गया।

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मोना चौधरी का मेकअप साफ करा दिया गया I उसके बाद उसने नहाने की इच्छा व्यक्त की तो उसे वेहद खूबसूरत, कमरे जित्तने' बडे बाथरूम तक पहुचा दिया गया I

नहाने के बाद वह खुद को हल्का महसूस कर रही थी I लगता था, जैसे सारे सफर की थकान गायब हो गई हो I हिंदुस्तान से रवाना होने के बाद अब कही जाकर उसे चैन मिला था I दुश्मन के घर में चैन I

. मोना चौधरी का चेहरा बता रहा था कि वह कहीं भी, किसी भी तरफ से व्याकुल नहीं है I यहां पर जैसे उसे किसी चीज की परवाह ही नहीं । जैसे वह अपनो में हो । अलबत्ता चेहरे पर … सोच के भाव मडराते अवश्य दिखाई पड रहे थे I उसके बाबजूद चेहरा सपाट था I

शागंली की मौत को वह भूल नहीं पा रही था I चियाग ने कितनी आसानी से बिना किसी दिक्कत के शागंली को शूट कर दिया था और होशाग ने कितनी आसानी से उन्हे मौत के मुंह में ला झोका था ! मोना चौधरी को इस बात का एहसास तो हो रहा था कि कही कोई गडबढ़ है, कोई गद्दारी कर रहा हे परंतु होशाग की गद्दारी पर उसे यकीन नही था I पहले उसने ऐसा कोई काम भी नहीं किया था कि उसका शक यकीन में बदलता । चियाग उसे वास्तव में बेहद खतरनाक लगा था I उसकी

फाइल में उसकी दरिंदगी के कारनामे¸ जो पढे थे । शांगली और

उसके दोनों साथियों को शूट करने का अदाज़ बता रहा था कि उसकी फाइल में जो कुछ भी पढा था सहीं पढा था । और. तो और होशाग ने जाने कब…कैंसे उसकी तस्वीर भी चियाग तक पहुचा थी कि उसके लिए खूबसूरत युवती को लाया जा रहा था I मोना चौधरी के होठो पर मौत की मुस्कान फैलती चली गई । खूबसूरत युवती नहीं बल्कि खूबसूरत मौत को लाया जा रहा है । जो हिंदुस्तान से चलकर उसके पास आ रही है ।

मोना चौधरी ने सिर को झटका देकर यह सब विचार बाहर किये ।

इस समय उसे सिर्फ चियाग और हिंदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म के बारे में सोचना था I वह दुश्मनों के घेरे मे थी । मौत अपने कूर पजे के साथ उसके सिर पर मडरा रही थी परंतु इन बातों की तरफ तो सोचना भी उसे गवारा नहीं था I वह जानती थी कि उसकी मर्जी के खिलाफ उसे रोक पाना आसान नहीं, बेशक उसके उठने वाले हर कदम के तले मौत ही क्यों न बिछी हो ।

कपडे डालकर वह बाथरूम से बाहर आ गई । बाथरूम में लगे शीशे में ही उसने अपने बालों को सवार लिया था । बाथरूम के बाहर ही चारों गनमैन मोजूद थे I

.. "अब आपको चियाग साहब के पास चलना है I" एक गनमैन ने कहा I

"चलो । "

"लेकिन उससे पहले आपकी तलाशी लेनी होगी I " एक गनमैन ने अपने साथी गनमैन को अपनी गन थमाई और आगे बढकर मोना चौधरी की तलाशी लेने लगा I

तलाशी के दोरान उसने बाखूबी मोना चौधरी की छातिया भी टटोलीं और नीचे भी उसकी उगलियों ने कमाल दिखाया I मोना चौधरी . क्रो भला क्या एतराज हो सकता था!

एक मिनट बाद वह अपने काम से फारिग हुआ ।

"इसके पास कोई हथियार नहीं है । "

"शकं की कोई गुजाइश? " दूसरे ने पूछा I

"नहीँ । " आगे बढकथ उसने अपनी गन सभाल ली I

वे लोग मोना चौधरी को लिए वहा से बाहर निकल गए I

" यह टापू तो बहुत बडा है I " मोना चौधरी जानबूझकर बोली I

"हा I"

"चियाग' का हे ?"

" हा चियाग साहब का ही है । " ~

"कितने घर हैँ यहा ?”

"पूरी कालोनी बसी हुई हे I सुबह देख लेना ।" गनमैन ने जवाब दिया I

"फिर तो वहुत लोग रहते होगे यहा ?"

“ हा I तीन-चार सौ I जिनमें से दो ढाई सौ आदमी हैं । " मोना चौधरी जो जानना चाहती थी जान लिया था । अगर वह सीधे तौर पर पूछती कि यहा कितने आदमी हैं तो उसे जबाब कभी भी नहीं मिलना था ।

"यह तुम्हारे चियाग साहब केसे आदमी हैं ? " मोना चौधरी ने पूछा ।

"बहुत अच्छे आदमी हैं I ” दूसरे ने कड़वे स्वर में कहा-" दो मामलों में चियाग साहब का कोई मुकाबला नहीं कर सकता I एक तो बेड पर वह बहुत अच्छे खिलाडी हैँ I दूसरे वह बहुत अच्छे निशानेबाज हैं । और मुझे पूरा यकीन है कि बहुत जल्द तुम्हें इन दोनो मुकामों से गुजरना पडेगा । "

मोना चौधरी हसी ।

~ "फिर तो बहुत मजा आएगा I ”

वे चारों मोना चौधरी को लिए एक बद दरवाजे के समीप पहुच कर ठिठके I

"इस दरवाजे से भीतर चली जाइए I चियागं साहब आपकी राह देख रहे हैं I "

मोना चौधरी बिना एक क्षण की… देरी के दरबाजा खोलकर भीतर प्रवेश कर गई । बाहर, मौजूद गनमैनों ने दरवाजे को पहले की तरह बद किया और वहा से चले गए I उनकी ड्यूटी यहीं तक थी ।

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चियाग के हाथ में बिस्की का गिलास था जिसमेँ से वह छोटे छोटे घुट भर रहा था I मोना चौधरी को उसने तौलने वाली निगाहो से देखा I

"इसमें कोई शक नहीं कि तुम्हारी खूबसूरती लाजबाब है । "

चियांग हसा I

जवाब में मोना चौधरी' होठो पर शोख मुस्कान ले आईं I

"बेड पर कैसी हो ? " चियाग ने पूछा-" ठंडी या गर्म ?"

"उबलती हुई I"

चियांग ठहाका लगा कर हंसा ।

"खूब I बहुत खूब I क्या जवाब है I उबलती हुईं। "

"मुझे डर है कि कहीँ मेरी उबलन में तुम ना उबल जाओ I "

"चिता मत करो ,लोहे का हूं । मामूली तपिश से मेरा कुछ नहीं बिगढ़ता है ।"

"देखते हैं किसका क्या बिगड़ता हैं I"

चियाग ने एक ही साँस में गिलास खाली किया और बार काउटर की तरफ बढा l

"मेरे लिए भी बना देना I " मोना चौधरी ने कहा और आगे बढकर. कुर्ती पर जा बैठी।

चियाग ठिठका I पलटकर उसने मोना चौधरी को देखा फिर हस पडा I

'"श्योर I खूबसूरती की सेवा करके मुझे अक्सर खुशी होती | बार काउटर पर पहुचकर उसने दो पैग तैयार किए और आगे बढकर एक मोना चौधरी के हबाले किया ।

मोना चौधरी ने घुट भरा I

विस्की वास्तव में लाजवाब थी ।

"तुम हिंदुस्तानी वास्तव में बेवकूफ होते हो I " टहलते हुए चियाग ने धूट भरा I

"अच्छा I” मोना चौधरी मुस्कराई I

"हा I " चियाग सिर हिलाते हुए ठिठका और पलटकर मोना चौधरी को देखा…"तुम लोग उस सीक्रेट फिल्म को लेने की कोशिश कर रहे हो जो मेरे आदमियो ने चीनी एजेट से हासिल की थी I आखिर तुम लोगों को इतनी तो समझ होनो चाहिए कि चियाग से कोई चीज हासिल कर पाना असभव है ।"

मोना चौधरी ने एक साथ दो बड़े घूट भरे I

चियाग पुन बोला I

" इसी सिलसिले में आए हिदुस्तानी एजेट कौ मेरे आदमियो ने सिंगापुर में खत्म किया । "

"उसके बारे में तुम्हे होशांग ने ही खबर कर दी थी ?"

मोना चौधरी एकाएक बोली ।

"हा | होशाग डबल ऐजेट है । कहने को वह कुछ करता हैं परंतु काम उसका मेरे हक में होता है I "

"वह तो मैंने देख ही लिया है I " मोना चौधरी हंसी I

"उसके बाद उस खूबसूस्त रूबी को भेज दिया मेरा विस्तर गर्म करने के लिए I अच्छा बिस्तर गर्म किया उसने मेरा । इसमे कोई शक नहीं' I हिदुस्तान सा हुस्न दुनिया में कही नहीं l कही नहीं !"

मोना चौधरी पुन हँसी।

आखो में कहर के भाव थे।

"और अब मरने के लिए तुम्हें भेज दिया हे I इस मामले में हिंदुस्तानी बेवकूफ हैं । "

"किसने भेजा मुझे ?"

चियाग ने पलटकर मोना चौधरी को देखा ।

"हिदुस्तानी' मिलिटरी सीक्रेट सर्विस के चीफ मिस्टर पहाडिया ने I " चियाग ने शब्दों को चबाकर कहा I

"दिमाग खराब है तुम्हारा । "

"क्या मतलब? " चियाग के होठे मिच गए I

मोना चौधरी नें एक ही सास में पैग समाप्त किया और गिलास चियाग की तरफ बढाया I

"एक और बनाना I "

"उठो और खुद बनाओ I " चियांग का स्वर कठोर हो गया-"मेँ खूबसूरती का पुजारी अवश्य हू परंतु गुलाम नहीं । अगर तुम सोचती हो कि मैं तुम्हारे पाव दबा दूगा तो यह भूल है तुम्हारी I "

मोना चौधरी हसी । कुर्सी से उठकर बार काउटर की तरफ़ बढी I

"जब मैँ तुम्हें कहुंगी कि मेरी ब्रा का हुक खोल दो तो क्या यह गुलामी होगी ?" "

~ "वह दूसरी बात हे I ब्रा का हुक तो मैं बिना कहै ही खोल दूगा I"

"ठीक इसी तरह पैग बनाकर मुझे देना भी दूसरी बात है । मेरे बिना कहे ही तुम्हें पैग बनाकर मेरे सामने पेश कर देना चाहिए । आखिर जल्द ही हम दोनों बेड पर जाने वाले हैं I "

चियांग मोना चौधरी। को घूरता रहा।

. . "सारे चीनी ही बेवकूफ़ होते हैं या सिर्फ तुम ही हो चियाग ?"

" जिस तरह । “ क्रोध में आने की अपेक्षा चियाग मुस्करा कर कह उठा…"सारी हिंदुस्तानी युवतियां तुम्हारी तरह खुवसूस्त नही होतीं उसी तरह सारे चीनी मेरी तरह बेवकूफ नहीं होते जो तुम जैसी खुबसुरत को पैग बनाकर नहीं देते और खुद बनाने को कहते है !"

मोना चौधरी ने बार काउटर पर अपना गिलास रखा और बोत्तल उठाकर पेग तैयार किया I थोडी सी कोल्ड ड्रिक डाली फिर घुट भरकर गिलास काउटर' पर ही रखा और सिगरेट सुलगाने के पश्चात कश लेकर वह पलटी ओर चियाग' क्रो देखा ।

"चीनी नस्ल छोटी क्यों होती है ? लबा मिलता ही नहीं । "

"तुम्हें क्या चाहिए, लंबा ?“

"क्या मतलब ?"

" आदमी लबा चाहिए चीनी नस्ल का ? " चियाग तीखे स्वर I में बोला I"

" छोडो !" मोना चौधरी ने पलटकर घूट भरा जो तुम लोगों में है ही नहीं वह कहा सें लाओगे ?"

चियाग के दात भिच' गए ।

"बहुत ज्यादा बकवास कर रही हो तुम I अपनी मौत से डर नहीं लगता तुम्हें ? "

मोना चौधरी ने सर्द निगाहों से चियाग को घूरा I

"नहीं I " मोना चौधरी ने सिर हिलाया---"मुझे मौत से कभी भी डर नही लगता ।"

एकाएक चियांग के होठो पर मुस्कान फैल गई ।

" तुम्हारी मेरी आदतें कितनी मिलती है I मुझे भी मौत से डर नहीं लगता I "

"शायद इसलिए कि मौत को तुमने अपने सामने कभी नहीं देखा I" मोना चौधरी ने बेहद शात स्वर में कहा और एक ही सास में पैग समाप्त करके उसे बार काउटर पर रखा फिर सिगरेट का कश लिया I .

… . चियाग ने छोटा-सा धूट विस्की का भरा फिर वोला ।

"जिसकी खातिर तुम यहा आई हो आखिर तुम्हें उसके दर्शन तो करा दू I" चियाग ने ठहाका लगाकर कहा फिर उस तरफ आगे बढा जहा तिजोरी रखी नजर आ रही थी । देखने पर ही स्पष्ट मालूम होता था कि वह कोई मामूली तिजोरी नहीं है । कम्बीनेशन के जरिए चियाग ने उस तिजोरी को खोला ।

मोना चौधरी बार काउटर से टेक लगाए, शात _निगाहौं से उस तरफ देखती रही । फिर पलटकर पैग तैयार करने लगी । ऐसा करके वह अपने मनोभावों पर काबू पाने की चेष्टा का रही थी I

तिजोरी से चियाग पलटा I परतुं मोना चौधरी का ध्यान अपनी तरफ ना पाकर मन हीँ-मन हैरान हुआ I पैग समाप्त करने के पश्चात मोना चौधरी पलटी I

तव तक चियाग अपना पैग समाप्त कर चुका था I वह बार काउटर के पास पहुचा और मोना चौधरी. ने हाथ बढाकर उसका गिलास थामा ।

"लाओ तुम्हारा पैग तैयार कर दू I " मोना चौधरी ने चियांग का पैग तैयार किया ।

चियाग' ने बाए' हाथ की बद मुटठी मोना चौधरी के सामने करके खोली I

पल-भर के लिए मोना चौधरी की चमकपूर्ण निगाह चियाग की हथेली पर जा टिकी ।

अगले ही पल वह सामान्य हो गई और पैग चियाग की तरफ़ बढाया I

चियाग ने पैग थामकर धूट भरा I उसकी खुली हथेली में चने के दाने जितना चपटा सा कुछ पडा था I चियाग के होठो पर व्यग्य से भरी मुस्कान फैली थी I

" जानती हो यह क्या हे ?" चियाग ने तीखे लहजे में कहा !

" क्या ?"

" हिन्स्तानी सीक्रेट की फिल्म I ले लो I "

"मैनै सिर में मारना है इसे I"

"क्या मतलब? " चियाग की आखें सिकुड गई ।

मोना चौधरी ने अपना पैग उठाया और वापस कुर्सी पर आ बैठी I बाए हाथ की उगलियों में फसी सिगरेट से कश लेकर घुआ उगला फिर घूट भरकर लापरवाही से बोली ।

"तुम इस समय बहुत बडी गलतफहमी में हों चियाग I "

"क्या कहना चाहती हो ?"

" तुम मुझे जो समझ रहे हो मै वह नहीं हूं I " मोना चौधरी ने कहा ।

" तो फिर कौन हो तुम?"

"मोना चौधरी।" कहते हुए मोना चौधरी के होठो पर मुस्कान फैलती चली गई ।।

"और मुझे मालूम है कि तुम मोना चौधरी ही हो I " चियाग ने कड़वे स्वर मे कहा ।

"लेकिन मैं हिदुस्तान की मिलिटरी सीक्रेट सर्विस की एजेट नहीं हू I हिंदुस्तानी. सरकार से मेरा कोई वास्ता नहीं है I मै सिर्फ मोना चौधरी हूं I अपने मन और इच्छा की मालिक हूं I तुम जो फिल्म या चने का दाना मुझे दिखा रहे हो मेरे लिए वह राख के समान है । इस समय तुम सोचो के गलत फेरे में हो I मैँ वह हू ही नहीं जो तुम मुझें समझ रहे हो चियाग I" मोना चौधरी ने शात स्वर में कहा I

चियाग मोना चौधरी को घूरता रहा I

"कल सुबह चीनी सरकार के आदमी यह फिल्म लेने आ रहे हैँ चीन से सौदा तय हो चुका है । "

"यह तो और भी खुशी की बात है I " मोना चौधरी हंसी ।

चियांग के होठ भिच गए ।

मोना चौधरी ने बड़ा-सा घूट भरकर गिलास टेबल पर रखा और उठकर टहलने लगी I

"गलती तुम्हारी नहीं चियाग I तुम वही कहोगे-जो तुम्हे बताया जाएगा I मतलब कि होशाग तुम्हें वही बात कहेगा जो I मेरे मुह से सुनेगा और मेरे मुह से उसने सरासर झूठ सुना है I ”

"मसलन l"

"मैं हिंदुस्तान के काइम वर्ल्ड की मोना चौधरी हिंदुस्तानी पुलिस में वाटेड हू I अगर पुलिस के हाथ पड जाती हूं तो फासी का फदा ही मेरे नसीब मे होगा I ” मोना चौधरी ने गभीर स्वर मे कहा-"हिदुस्तान में मेरी अब यह हालत है कि कभी भी पुलिस के हाथों पढ़ सकती हू I यानी कि वहा मेरे लिए खतरा-ही खतरा है I बहुत सोच समझकर मैने देश को छोड़ने की सोची। हिंदुस्तान से बाहर कहीं चली जाऊं। तभी मुझें तुम्हारे बारे में खबर मिली I मुझे लगा कि तुम्हारे साथ काम कर सकती हूं I परंतु तुम तक पहुचना कठिन था I मेरा वहा एक खास दोस्त है । उसने ही भीतर की खबर दी कि किस तरह चीनी एजेंट मिलिटरी सीक्रेट की फिल्म ले गया है I

जो कि तुम्हरि हाथ लग गई हे I तुमसे वह सीक्रेट लेने के चक्कर में मिलिटरी सीक्रेट सर्विस के दो एजेट अपनी 'जान से भी हाथ धो बेठे हैँ । उसी ने मुझे होशांग के बारे में बताया I मुझे तुम तक' पहुचना था I तुमसे बात करनी थी I इसलिए मैने यही रास्ता अपनाया । किसी तरह नकली पासपोर्ट पर हिन्दुस्तान से निकलकर सिगापुर पहुची और हिंदुस्तानी एजेट के रूप मे होशाग से मिली I अब तो तुम समझ गए होगे मिस्टर चियाग कि असलियत क्या है I"

"समझ गया I " चियाग ने कड़वे स्वर में कहा…"परतु इसमें झूठ कितना है ?”

"जरा भी नहीं । "

" मतलब कि तुम हिंदुस्तानी क्राइम वर्ल्ड से तालुक रखती हो I"

" हा l"

चियाग ने एक ही सास में गिलास खल्ली किया और मुह साफ करता हुआ बोला I

"अभी मालूम हो जाता है I " कहने के साथ ही चियाग एक तरफ नजर आ रही सपाट दीवार की तरफ बढा I दीवार के करीब पहुचकर दीवार के एक खास हिस्से को दबाया तो दीवार एक तरफ सरक गई ।

सामने ही एक खाने में बायरलेस सेट और कई तरह के यत्र रखे हुए थे । और एक टी बी स्क्रीन अन्य खाने में फिट थी । चियाग की उगलिया वायरलेस सेट से खेलने लगीं I

वायरलेस सेट को सैट करने लगा । करीब पांच -मिनट बाद वायरलेस सेट पर उसकी किसी से बात हुई ।

'हेलो I हैलो हिंदुस्तान I हिदुस्तान I" चियाग जल्दी से बोला I हेडफोन उसने सिर पर लगा रखा था I छोटासा माउथपीस उसके होंठो के सामने आ रहा था ।

करीब आधे मिनट के बाद उसके कानों में आवाज पडी' I

"यस I हिंदुस्तान स्पीकिंग I हिदुस्तान स्पीकिंग । "

" चियाग दिस साइड I"

!आँर्डर सर I "

"जो मैं कह रहा हू । वह सुनो और पद्रह मिनट के भीतर मुझे रिपोर्ट चाहिए । मैं दुबारा काल करूगा I "

कहने के साथ ही चिंयाग नै मोना चौधरी के बारे में उसे बताया-"उसके बारे में मुझे जानना है और अगर हो सके तो नबर चार पर इसकी तस्वीर भी मुझे दिखाओ । "

"सर I मोना चौधरी का रिकार्ड हमारे पास है I " दूसरी तरफ से आवाज आई…“ऐसी बडी बड़ी और खतरनाक हस्तियों का रिकार्ड तो हमें रखना ही पड़ता है I “

"तुम्हारा मतलब कि हिंदुस्तान के क्राइम वर्ल्ड में मोना चौधरी का वजूद है ?"

"सरासर हे जनाब । क्राइम वर्ल्ड का थंब है वह I एक मिनट मैं अभी उसकी फाइल लाकर बताता हू I "
 
इसके बाद चियांग पाच मिनट तक वायरलेस सेट पर व्यस्त रहा I

"गुड I" आखिरकार चियागं ने कहा---"अब मोना चौधरी की स्थिति पुलिस के सामने क्या हे ? "

"पुलिस से मोना चौधरी को तगडा खतरा है I वह जब भी पुलिस के हाथ लगी पुलिस उसे फासी के फ़दे तक नहीँ पहुंचने देगी किसीं न किसी बहाने उसे पहले ही शूट कर देगी I"

. . "हू ठीक है I तुम नबर चार पर मुझे मोना चौधरी की तस्वीर दिखाओ I उसके बाद र्जरूरत पडी तो मैं तुमसे सबध बनाऊगा I " चियाग ने तसल्ली भरे स्वर में कहा ।

"लेकिन सर आप मोना चौधरी के वारे में क्यों पूछ रहे हैँ ?"

"तुम अपने काम से मतलब रखो । "

"यस सर ! लेकिन मोना चौधरी के बारे में इतना बताना चाहूगा कि वह बेहद खतरनाक है अगर कभी सामने पडे तो लापरवाह मत हो जाइएगा I वह I"

"नबर चार पर उसकी तस्वीर.... हैंI"

"अखबार की कटिंग वाली तस्वीर मेरे पास है !"

"वही दिखाओ I " कहने के साथ ही चियाग ने वायरलेस सैट आँफ किया और टीवी. स्क्रीन के करीब लगा छोटासा बदन दबा दिया I

टीवी स्क्रीन रोशन हो उठी।

चियाग ने गर्दन घुमाकर मोना चौधरी को देखा I

~ मोना चौधरी विश्वास-भरे अदाज में मुस्कराई I

चियाग की निगाह पुन स्क्रीन पर ठहरी ।

फिर एकाएक रोशन स्क्रीन पर मोना चौधरी का अख़बार में छपा चेहरा उजागर हुआ I हालाकि' वह चेहरा स्पष्ट नही' था, परंतु चिंयाग की तसल्ली के लिए तो काफी था I स्क्रीन पर _ उभरे चेहरे वाली तस्वीर देखकर चियाग को पूरा विश्वास हो गया कि उसके पास मौजूद युवती मोना चौधुरी ही है और उसने जो कहा हे अपने बारे में सही कहा हे ।

~ चियाग ने टीबी.. स्क्रीन ऑफ की और पलटा I

अगले ही पल चियाग स्तब्ध रह गया I खुली आखें खुली रह गई I पलके तक नहीं झपका पाया कई पलों तक I दिमाग ने तो जैसे काम करना ही बद कर दिया था।

मोना चौधरी अपनी जगह ही खडी थी ।

परतु उसके कपडे कुछ हटकर चद कदमों के फासले पर पडे थे I. .

हक्का-बक्का सा चियाग देख्ता हीं रह गया I

अपनी जिदगी' मे जलवे बहुत देखे थे उसने I वहुत मूरतें देखी थी I सतुष्ट था कि इस मामले में कभी पीछे नहीँ रहा I परंतु इस समय उसे जाने क्यो' इस बात का एहसास हो रहा था कि अभी बहुत कुछ वाकी हे, और इस बात का अहसास कराया था मोना चौधरी के तपते सुरमई, जिस्म ने I

जो बिना कपडों के उसके सामने चद कदमों के फासले पर मौजूद था ।

चियाग की निगाह बार बार सिर से लेकर पाव तक फिसल रही थी I

मोना चौधरी कमर पर हाथ रखे किसी वुत की तरह खडी थी I वह बुत ही लग रही थी, अगर सांसें लेने के दोरान उसकी छातिया होले हौले ऊपर नीचे न उठ रही होती या फिर कश लेने के दौरान छातिया वाटर बॉल की ताह दाए बाए न हिलने लगतीं ।

चियाग बार बार सूखे होठो पर जीम फेर रहा था I

" चियाग I" मोना चौधरी की मीठी आवाज सुनकर चियाग के मस्तिष्क को झटका लगा I परंतु उसकी निगाह फिर भी मोना चौधरी के चेहरे पर नहीँ गई I नीचे ही अटकी रही ।

"अगर तुम्हें मेरी कही बातों पर विश्वास आ गया हो तो

आओ मेरे करीब आजाओ।"

चियाग का जिस्म हिला I हाथ में दबी हिंदुस्तानी सीक्रेट फिल्म बरबस ही उसने जेब में डाल ली I फिर निगाह छातियों पर टिकाए वह धीरे धीरे आगें बढा ।

" उल्लू के पट्ठे जल्दी का I " मोना चौधरी ने प्यार से झिड़की दी…"दौलत और बिना कपडों की औरत को कभी भी ज्यादा देर खुली हवा मे नहीं छोडना चाहिए । "

चियाग उसके करीब आ पहुचा I

"माईगाड ! मैने तुम जैसी कभी भी...कभी भी...नहीँ देखी मोना चौधरी I"

'चियाग' जैसे हाफ' रहा था I

"अभी तो तुमने देखा ही क्या है I" मोना चौधरी की आवाज में अजीब से भाव आ गए-""कुछ देर और बीत जाने दो, फिर तो तुम वाह-वाह करने के काबिल भी नहीं बचोगे । "

चियाग को फुर्सत ही कहा थी मोना चौधरी के शब्दों को सुनने की l एकाएक वह बाज की तरह झपटा और मोना चौधरी के जिस्म से चिपक गया I

मोना चौधरी ने कठिनता से खुद पर काबू पाया और किसी तरह चियाग को खुद से अलग किया I चियाग का चेहरा आवेश में लाल हो रहा था I 'वह जैसे हाफ रहा था ।

"मैँ मैँ शुरू होने के बाद रूकना पसद नहीं करता हूं !" चियांग तड़पकर बोला ।

" क्या चीन मैँ लोग टाई और जूत्तों सहित बेड पर जाते हैं ?" मोना चौघरी मुस्काई I

उसके बाद चियांग पल-भर के लिए भी नहीं रुका! रफ्तार के साथ उसने कपडे उतारने शुरू कर दिए-जूत्ते टाई कमीज़ मैंट फिर पुन मोना चौधरी के साथ जा चिपका।

उसकी पीठ पर फिरते फिरते मोना चौधरी के दोनों हाथ उसकी गदन पर आ ठहरे थे I हाथों को हल्का सा झटका देने की देर थी ।

चियाग का किस्सा खत्म हो जाना था I

परतु इसमें एक ख़तरा… था ।

चियाग चीख सकता था, अगर लेटी मुद्रा में उसकी गर्दन क्रो झटका देने की चेष्टा की और झटका ठीक न लगा तो I मोना चौधरी के दोनों हाथ उसकी गर्दन से फिसलकर पीठ पर आ गए। उसने यह खेल बीत जाने के समय तक सब्र करने का फैसला किया I वह नहीं चाहती थी कि उसको छोटी सी गलती के कारण चियाग के गले से चीख निकले और उस चीख को सुनकर चियाग के आदमी वक्त से पहले सतर्क हो जाए I

चियाग व्यस्त था।

बेहद व्यस्त |।!

मोना चौधरी ने हाथ बढाया और सिगरेट सुलगा ली I

"एक मुझे भी I " चियाग बोला I~

"उठकर सुलगा लो । ”

चियाग ने गहरी सास लेकर पुन आखें बद कर ली ।

"मोना डियर ? " चियाग ने कहा ।

"मैँ तुमसे हार गया l " चियाग ने पुन आखें खोलकर मोना चौधरी क्रो देखा-"तुम बहुत खूबसूरत हो । "

"अब तो तुम्हें मेरी हकीकत पर बिश्वास आ गया कि मैं कौन-सी मोना चौधरी हू ?"

"हा I आ गया विश्वास I तुम मेरे काम की मोना चौधरी हो I"

" मुझे अपने साथ काम करने का मौका दोगे ?"

" क्यो नहीं डियर I तुम. तो पार्टनर बनकर रहोगी मेरे I साथ l“

" सच ?" मोना चौधरी जैसै खुश हो I

"सच ही I चियाग कभी झूठ नहीं बोलता I "

मोना चौधरी ने सिगरेट चियाग के हाथों में थमाई और उठते हुऐ बोली " तुम कश लो । मै नहाकर आती हूं। फिर प्यार-भरी बातें करेगे । " कहने के साथ ही मोना चौधरी बेड से उतरी और देखते-ही-देखत्ते बाथरूम में प्रवेश कर गई ।

पाच'-सात मिनट बाद मोना चौधरी बाथरूम से बाहर निकली तो खिले कमल की भाती लग रही थी I पानी की बूदें मोतियों के समान उसके वदन से चिपटी हुई थी सिर से पाव तक वह बिना कपडों के थी । पर अधलेटे चियाग की आखो में चमक लहरा उठी I

"तुम जैसी पहले कभी नहीं मिली I " चियांग ने गहरी सास ली ।

" हिन्दुस्तान आते तो शायद मुलाकात हो जातो I " मोना चौधरी खिलखिलाईं और आगे बढकर कपडे पहनने लगी । उसकी खूवसूस्ती वास्तव में जन्नत का ही हिस्सा लग रहीँ थी !

"तुमने तो जान ही निकाल दी I दस घटे के लिए तो कम से कम मुर्दनी छाई रहेगी । "

"उठो । बाथरूम ने' जाकर फ्रेश ही जाओ I " मोना चौधरी शर्ट के बटन वद' करते हुए बोली-"अभी हमे कई बाते करनी हैं, आपस में तालमेल बिठाना जो भी करना हो दस घटे बाद कर लेना । "

चियांग हंसा ।

मोना चौधरी ने आगे बढ़कर चियांग की बाह पकडी और उसे बाथरूम की तरफ सरका दिया । बाथरूम में पहुचकर चियाग ने दरबाजा बंद कर लिया I

मोना चौधरी ने एक पल की भी देरी नहीं की ! वह उस तरह तपकी जहा चियांग के कपडे पडे थे I कपडे उठाकर वह फुर्ती के साथ पेंट की जेबे टटोलने लगी I उसे तलाश थी उस सीक्रेट फिल्म की, जो कि उसे पेट की बाई जेब से हासिल हुई ।

उस फिल्म को उसने जेब में डाला !

फिर चियांग के कपडों से उसने रिवाॅल्बर वसूल की और कपडे नीचे फ्रैंक दिए I रिवॉल्वर का चेंबर खोलकर देखा, उसमे तीन गोलियां थी I

शेष तीन गोलियां शागंली और उसके साथियों पर इस्तेमाल हो चुकी थी ।

रिवाल्वर जेब में डाल ली और आगे बढकर कुर्सी पर जा बैठी ।

विचार भरी मुद्रा में मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाई और कश लेने लगी । I चियाग फिल्म को तिजोरी की अपेक्षा जेब में रखकर भारी

गलती कर चुका था I देखा जाए तो इसमें चियाग की भी गलती नहीं थो । चियांग' की खोपडी तो मोना चौधरी… ने खराब कर दी थी I हिंदुस्तान स्थित अपने. आदमी से जब चियाग ने उसके बारे में बात करके तसल्ली की तो मोना चौधरी. अच्छी तरह जानती थी कि. चियाग सबसे पहला काम फिल्म को तिजोरी में रखने का करेगा I अगर फिल्म उस तिजोरी में

चली गई तो दिक्कतें पैदा हो जाएगी I तिजोरी तगडी लग रही थी, उसे खोल पाना सभव नहीं था और ना ही चियांग' किसी कीमत पर फित्म उसके हवाले करता I और फिर दिन निकलते ही चीन सरकार के आदमियों ने फिल्म लेने आ जाना था I ऐसा चियाग ने ही कहा था, यानी

कि चियाग को फोरन रोकने का जो एकमात्र हथियार मोना चौधरी के पास था उसने उसी हथियार का इस्तेमाल किया ।

-इससे पहले…कि चियाग बात खत्म करके पलटता I मोना चौधरी ने अपने कपडे उतार दिए थे । और फिर वही हुआ, जैसाकि मोना चौधरी ने सोचा था I चियांग जव पलटा तो मोना चौधरी का नग्न रुप देखकर ठगासा रह गया था I मुट्ठी में फिल्म दबी थी, जो खुद-ब-खुद जेब में सरक गई यी और वह मोना चौधरी की तरफ सरक आया था ऐसा ही तो चाहती थी मोना चौधरी ! बैसे भी उसके प्रति सहीं जानकारी पाकर चियाग' तसल्ली से भरकर,

कुछ लापरवाह भी हो गया था I ऐसा न होता तो चियाग" पहले फिल्म कभी जेब में न रखता I

और अब हिंदुस्तानी. सीक्रेट की फिल्म मोना चौधरी के कब्जे में थी । मोना चौधरी को विश्वास नहीं आ रहा था कि इतनी आसानी से उसका काम हो गया है-फित्म हाथ आ गई हैं ।

और ऐसा इसलिए हुआ कि चियाग को खुद पर अपने साम्राज्य पर और अपने आदमियों पर पूरा भरोसा था कि यहा आकर कोई उसकी मर्जी के बिना बाहर नहीं जा. सकता I यहा कोई भी अपनी मनमानी नहीं कर सकता । परंतु मोना चौधरी जानती थी कि अभी खतरा टला नहीं है । शुरू होगा I यहा पहुच पाना इत्तना कठिन नहीं था जितना कि यहां से निकलना I यहा से निकलने के रास्ते को मोना

अपनी सोचो' में फिट करने लगी I आने वाले खतरे के प्रति पहले ही खुद को सचेत करने लगी I

तभी दरवाजा खुला और चियाग बाहर निकला I वह नहा चुका. था और नगा था । आगे बढ़कर चियाग नीचे पडे अपने कपडे उठाने लगा I

~ उसी क्षण मोना चौधरी को हैरत का तीव्र _झटका लगा I

. चियग्ग का… चेहरा तप रहा था, जैसे बाथरूम नहीं, आग के 'कुएं से बाहर आया हो I चट्टान की तरह कठोर था चेहरा I भिचे होठ जैसे जिदा' नाग निगलकर मुह बद कर लिया हो कि कही' नाग बाहर ना निकल जाए I उसकी आखों में मौत के भाव नाच रहे थे ।

मोना चौधरी के होठ एकाएक मुस्कराहट के रूप में फैल गए I

मोनां चौघरी को ही घूर रहा था बह ।

"क्या बात है डियर I बाथरूम में क्या है जो लाल-पीले होकर निकले हो ?’"

चियाग कपडे पहनकर हटा और सिगरेट सुलगाई ।

"बाथरूम में वीडियों कैमरा लगा हे और जब मैं बाथरूम जाता हू…और जब मेरा कोई खास अजीज मेहमान यहा होता हैं तो बाथरुम में जाकर वीडियो कैमरा चला लेता हू ताकि मुझे

हर पल की जानकारी मिलती रहे स्क्रीन के ज़रिए कि मेरा अजीज मेरे बिना किस काम में व्यस्त है।"' ~

मोना चौधरी के मस्तिष्क को झटका लगा I उसको मास पेशिया तन गई I और फिर अगले ही पल ठठाका हस पडी I

चियांग होंठ भीचे मोना चौधरी को देखता रहा I

" वास्तव मेँ तुम तो मेरी अपेक्षाओं से कही ज्यादा समझदार निकले I"

"तुम हो कौन ?"

" मैं वही’ हू जिसके बारे में तुमने हिदुस्तान से जानकारी हासिल की है !"

"तो फिर मेरी जेब से फिल्म निकालकर अपनी जेब मे डालने का क्या मतलब? "

"माई डियर चियाग I" मोना चौधरी ने कश लिया और मुस्कराई---" जिस तरह तुम अपराधी होकर अपने देश चीन के लिए काम कर सकते हो ठीक उसी तरह मैं भी तो अपने देश हिंदुस्तान' के लिए काम कर सकती हू। " .

"ओह ।” चियाग के होठ' सिकुड़कर गोल हो गए-"तो यह बात है I"

दोनो' कईं पल मौत की सी निगाहो' से एकदूसरे को देखते रहे ।

"लाओ वह दिचात्वरं और फिल्म मेरे हवाले करो । " चियाग बोला ।
 
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