S
StoryPublisher
Guest
शागली ने घडी देखी फिर सामने बैठे होशाग को देखा।
~ होशाग सोच भरे अदाज में सिगरेट के कश ले रहा था ।
"मेरे ख्याल मेँ उसे वहा अकेला छोडकर हमने ठीक नहीं किया I " शागली बोला I
"हमने नहीं छोडा उसे । उसने खुद कहा था छोडने को । " होशाग ने कहा I
"एक ही बात है I हम तो वहा से निकल आए । " होशाग ने कश लेकर, कघो को झटक दिया I ~
"वह हिंदुस्तान से यहां आई हे, चियाग से फिल्म हासिल करने । " होशाग ने उसकी की आखो मे झाका'--"हमें भी देखना है कि वह कुछ कर गुजरने के काबिल. है या महज सिर्फ खूबसूरती की ही मालकिन है । "
शामली ने बेचैनी से पहलू बदला ।
"होशाग वहा पर करीब आठ दस पुलिसमैन थे I इतने पुलिसमैनों को तो हम दोनों भी मिंलकर निबटाना चाहें तो एकबारगी यह काम अस्भव लगने लगेगा I " शागली ने शब्दों को चबाकर कहा-"और फिर वह तो अकेली है I और युवती है I मैं नहीं समझता कि अब पुलिसमैनों से बचकर यहा पहुच पाएगी I " . .
होशाग के चेहरे पर अजीब से भाव फैले I "इतनी जल्दी कोई फैसला कायम मत करो शागली। " होशाग कह उठा I
"क्या मतलब? ?” …
"जिसने इतने विश्वास के साथ हमें जाने को कहा और खुद I पुलिसमैनों से अकेले निबटने का फैसला कर लिया उसमें कुछ दम तो होगा I कुछ कर गुजरंने का हौसला रखती होगी I "
शागली ने होशाग को घूरा I
"तुम्हारा मतलब कि वह सही सलमात वहा से निकल आएगी यहा पहुचेगी' ?"
"दावा तो नहीं करता परतु उसके विश्वास को देखकर कह सकता हू क्रि शायद वह यहा पहुचे । यह जुदा बात है कि एक दो गोलिया उसे लगीं हौं I वह घायल हो I ” होशाग ने होठ काटते हुए कहा ।~
शागली ने घडी पर निगाह मारकर पुन पहलू बदला I
"लेकिन अब तक तो मोना चौधरी क्रो पहुच जाना चाहिए था ।"
होशग्ग शांगली की इस बात से सहमत था I परतु जवाब नहीँ दिया I
शागली ने सिगरेट सुलगाई और उठकर टहलने लगा I तभी दरबाजा खुला और सिगापुरी लोकल व्यक्ति ने भीतर प्रवेश किया I
" जनाब I सव तैयारी हो गई है I सिर्फ रवाना होने की देर है । "
शांगली ने ठिठककर उसे देखा ।
"तुम जाओ I " होशाग कह उठा…"तैयारी को तेयार रखो I हमारा एक साथी आने बाला है I समझें I”
"समझा I " कहने के साथ ही वह पलटकर चला गया I
शांगली के चेहरे पर व्याकुलता की छाप थी I
"अगर मोना चौधरी को कुछ हो गया तो सारी मेहनत व्यर्थ जाएगी I ”
"और दौलत भी हाथ नहीं आएगी I" होशग्ग ने कहा ।
"पूरी न सही आधी तो आ ही जाएगी I जो उसका साथी हमें एडवास दे जाएगा I "
“ एडवांस? ?" होशाग ने सोच भरी निगाहों से शागली की देखा --"ना दिया तो ?"
"उसका साथी पीछे से दे देगा I ”
"माना I पंरतु अगर ना दिया तो ?" .
"तो I" शांगली का चेहरा कठोर हो गया---'"मोना,चौघरी ~ चियाग से फिल्म लेकर अपने पास नहीं रख पाएगी I वह मैं ले जाऊगा और तब तक लेकर रखूगा जब तक कि वह पूरी रकम नहीं दे देगा I ”
"ठीक कह रहे हो शागली I ऐसा ही होना चाहिए I " होशाग ने कश लेकर सिर हिलाया…"
"लेकिन इन सब बातों के साथ ही एक सवाल और भी पैदा होता हे । "
"वह क्या ...?"
" यू मानकर चलो कि मोना चौधरी का साथी दौलत नहीं देता । और उधर मोना चौधरी भी चियाग से फिल्म हासिल नहीं कर पाती तो तब हमारी स्थिति क्या होगी ?" .
शागाली एकाएक कुछ न कह सका I
"यानी कि ना तो हमें फिल्म मिलेगी, और नां ही दौलत I हमारी सारी मेहनत बेकार जाएगी I"
शागली ने कश लेकर होशाग को देखा I
"तुम ठीक कहते हो I परंतु हम जिस धघे में हैं वहा रिस्क तो लेना हीँ पडता हे।"
"रिस्क दौलत ना मिलने का नहीँ है I चियाग का भी हे I अगर हम चियाग की निगाहो में आ गए और उसे इस बात का एहसास हो गया कि मोना चौधरी के पीछे हम हैं तो वह हमें छोडने वाला नहीं I "
शांगली ने सिर को झटका दिया ।
"बेकार की बातें ना तो सोचो और ना ही करो । जो होगा देखा जाएगा । "
"यह बेकार की बात नहीं I "
तभी दरवाजे पर आहट हुई ।।
दोनों की निगाहें घूमी' ।
उनके आदमी. के साथ मोना चौधरी खडी थी होठो पर मुस्कान लिए । दोनों कई पल तों उसे देखते ही रह गए । तभी उनका साथी बोला ।
"यह आप लोगों से मिलना..... I "
"तुम जाओ I " शांगली ने हाथ उठाकर कहा I वह -चला गया । मोना चौधरी भीतर आई I
"तुम ठीक हो ?” शागली गहरी निगाहों से उसे देख रहा था।
"ह्म । " मोना. चौधरी के होठो पर बराबर मुस्कान फैली थी ।
"घायल तो नही-हो ?"
' "नही I "
शागली और होशाग की निगाहे मिलीं I
"वहा क्या हुआ था ?"
"कुछ खास नहीं I " आगे बढकर कुर्सी पर बैठते हुए मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया कुल मिलाकर बहा आठ पुलिस वाले थे I उन्हे शूट _ करके आ गई I "
“आठ...? तुम आठों पुलिस वालों को शूट कर आई? ?" शागली के होठो से निकला I
"हा I ”
"और तुम्हें एक भी गोली नही लगी?" शागली ने अपनी हैरानी पर काबू पाया I
शामली अविश्वास भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा ।
जबकि… होशाग मन-ही-मन मुस्करा रहा था । क्योकि मोना चौधरी का खूनी रूप वह देख चुका था और जानता था कि मोना चौधरी जो कह रही है सही कह रही हे I बहुत खतरनाक है यह जो कर जाए वहीँ कम हे।
शागली ने गहरी सास लेकर होशाग को देखा I
" तुम बाहर जाकर तैयारी पर निगाह मारो । देखो कोई कमी तो नहीँ रह गई I मैं मोना चौधरी से कुछ जरूरी बातें का लू I बीस-पच्चीस मिनट तक हम यहा' से रवाना होगे' ।
होशाग बिना कुछ कहे बाहर निकल गया I शागली ने आगे बढकर दरवाजा बद किया और सिकटनी चढाकर पलटा । उसके होठो पर मधुर मुस्कान नाच रही थी I वह कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के पास पहुँचा ।
" तुम बहुत बहादुर हो I बहुत ही बहदुर I " शागली ने कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के गले में बाहें डाल दी I
मोना चौधरी हसी I अब उसे समझ आया कि शागली उससे क्या खास बात करना चाहता है I चाहकर भी मोना चौधरी उसे इनकार नहीं कर सकती थी क्योकि शागली इस समय उसके काम का साबित हो रहा था । और आगे भी उसने काम आना था I अगर शागली फिर गया तो चियाग तक पहुचने में उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पडेगा I
"मुझे तो अभी भी यकीन नही हो रहा कि तुम सही-सलामत आ गई हो । ”
"देख लो I तुम्हारे सामने हू । " मोना चौधरी खिलखिलाई ।
शांगली ने अपना हाथ उसकी कमीज में डाल दिया । आले ही पल मोना चौधरी की छाती शागली की हथेली की गिरफ्त में कैद थी I दिखावे के तौर पर मोना चौधरी कसमसाई I
"क्या करते हो, कोई आ जाएगा I "
"काईं नहीं आता I दरवाजा बद है I " शामली की सासो में तेजी सी आने लगी थी I
"प्लीज I. मत करो… ! हमें अभी सफर पर रवाना होना है I " मोना चौधरी ने उसका हाथ कमीज से बाहर निकालना चाहा I
परतु शागली की हथेली मोना चौधरी की छाती से खेलती रही I मोना चौधरी ने खुद को ढीला छोड दिया ।
~ होशाग सोच भरे अदाज में सिगरेट के कश ले रहा था ।
"मेरे ख्याल मेँ उसे वहा अकेला छोडकर हमने ठीक नहीं किया I " शागली बोला I
"हमने नहीं छोडा उसे । उसने खुद कहा था छोडने को । " होशाग ने कहा I
"एक ही बात है I हम तो वहा से निकल आए । " होशाग ने कश लेकर, कघो को झटक दिया I ~
"वह हिंदुस्तान से यहां आई हे, चियाग से फिल्म हासिल करने । " होशाग ने उसकी की आखो मे झाका'--"हमें भी देखना है कि वह कुछ कर गुजरने के काबिल. है या महज सिर्फ खूबसूरती की ही मालकिन है । "
शामली ने बेचैनी से पहलू बदला ।
"होशाग वहा पर करीब आठ दस पुलिसमैन थे I इतने पुलिसमैनों को तो हम दोनों भी मिंलकर निबटाना चाहें तो एकबारगी यह काम अस्भव लगने लगेगा I " शागली ने शब्दों को चबाकर कहा-"और फिर वह तो अकेली है I और युवती है I मैं नहीं समझता कि अब पुलिसमैनों से बचकर यहा पहुच पाएगी I " . .
होशाग के चेहरे पर अजीब से भाव फैले I "इतनी जल्दी कोई फैसला कायम मत करो शागली। " होशाग कह उठा I
"क्या मतलब? ?” …
"जिसने इतने विश्वास के साथ हमें जाने को कहा और खुद I पुलिसमैनों से अकेले निबटने का फैसला कर लिया उसमें कुछ दम तो होगा I कुछ कर गुजरंने का हौसला रखती होगी I "
शागली ने होशाग को घूरा I
"तुम्हारा मतलब कि वह सही सलमात वहा से निकल आएगी यहा पहुचेगी' ?"
"दावा तो नहीं करता परतु उसके विश्वास को देखकर कह सकता हू क्रि शायद वह यहा पहुचे । यह जुदा बात है कि एक दो गोलिया उसे लगीं हौं I वह घायल हो I ” होशाग ने होठ काटते हुए कहा ।~
शागली ने घडी पर निगाह मारकर पुन पहलू बदला I
"लेकिन अब तक तो मोना चौधरी क्रो पहुच जाना चाहिए था ।"
होशग्ग शांगली की इस बात से सहमत था I परतु जवाब नहीँ दिया I
शागली ने सिगरेट सुलगाई और उठकर टहलने लगा I तभी दरबाजा खुला और सिगापुरी लोकल व्यक्ति ने भीतर प्रवेश किया I
" जनाब I सव तैयारी हो गई है I सिर्फ रवाना होने की देर है । "
शांगली ने ठिठककर उसे देखा ।
"तुम जाओ I " होशाग कह उठा…"तैयारी को तेयार रखो I हमारा एक साथी आने बाला है I समझें I”
"समझा I " कहने के साथ ही वह पलटकर चला गया I
शांगली के चेहरे पर व्याकुलता की छाप थी I
"अगर मोना चौधरी को कुछ हो गया तो सारी मेहनत व्यर्थ जाएगी I ”
"और दौलत भी हाथ नहीं आएगी I" होशग्ग ने कहा ।
"पूरी न सही आधी तो आ ही जाएगी I जो उसका साथी हमें एडवास दे जाएगा I "
“ एडवांस? ?" होशाग ने सोच भरी निगाहों से शागली की देखा --"ना दिया तो ?"
"उसका साथी पीछे से दे देगा I ”
"माना I पंरतु अगर ना दिया तो ?" .
"तो I" शांगली का चेहरा कठोर हो गया---'"मोना,चौघरी ~ चियाग से फिल्म लेकर अपने पास नहीं रख पाएगी I वह मैं ले जाऊगा और तब तक लेकर रखूगा जब तक कि वह पूरी रकम नहीं दे देगा I ”
"ठीक कह रहे हो शागली I ऐसा ही होना चाहिए I " होशाग ने कश लेकर सिर हिलाया…"
"लेकिन इन सब बातों के साथ ही एक सवाल और भी पैदा होता हे । "
"वह क्या ...?"
" यू मानकर चलो कि मोना चौधरी का साथी दौलत नहीं देता । और उधर मोना चौधरी भी चियाग से फिल्म हासिल नहीं कर पाती तो तब हमारी स्थिति क्या होगी ?" .
शागाली एकाएक कुछ न कह सका I
"यानी कि ना तो हमें फिल्म मिलेगी, और नां ही दौलत I हमारी सारी मेहनत बेकार जाएगी I"
शागली ने कश लेकर होशाग को देखा I
"तुम ठीक कहते हो I परंतु हम जिस धघे में हैं वहा रिस्क तो लेना हीँ पडता हे।"
"रिस्क दौलत ना मिलने का नहीँ है I चियाग का भी हे I अगर हम चियाग की निगाहो में आ गए और उसे इस बात का एहसास हो गया कि मोना चौधरी के पीछे हम हैं तो वह हमें छोडने वाला नहीं I "
शांगली ने सिर को झटका दिया ।
"बेकार की बातें ना तो सोचो और ना ही करो । जो होगा देखा जाएगा । "
"यह बेकार की बात नहीं I "
तभी दरवाजे पर आहट हुई ।।
दोनों की निगाहें घूमी' ।
उनके आदमी. के साथ मोना चौधरी खडी थी होठो पर मुस्कान लिए । दोनों कई पल तों उसे देखते ही रह गए । तभी उनका साथी बोला ।
"यह आप लोगों से मिलना..... I "
"तुम जाओ I " शांगली ने हाथ उठाकर कहा I वह -चला गया । मोना चौधरी भीतर आई I
"तुम ठीक हो ?” शागली गहरी निगाहों से उसे देख रहा था।
"ह्म । " मोना. चौधरी के होठो पर बराबर मुस्कान फैली थी ।
"घायल तो नही-हो ?"
' "नही I "
शागली और होशाग की निगाहे मिलीं I
"वहा क्या हुआ था ?"
"कुछ खास नहीं I " आगे बढकर कुर्सी पर बैठते हुए मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया कुल मिलाकर बहा आठ पुलिस वाले थे I उन्हे शूट _ करके आ गई I "
“आठ...? तुम आठों पुलिस वालों को शूट कर आई? ?" शागली के होठो से निकला I
"हा I ”
"और तुम्हें एक भी गोली नही लगी?" शागली ने अपनी हैरानी पर काबू पाया I
शामली अविश्वास भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा ।
जबकि… होशाग मन-ही-मन मुस्करा रहा था । क्योकि मोना चौधरी का खूनी रूप वह देख चुका था और जानता था कि मोना चौधरी जो कह रही है सही कह रही हे I बहुत खतरनाक है यह जो कर जाए वहीँ कम हे।
शागली ने गहरी सास लेकर होशाग को देखा I
" तुम बाहर जाकर तैयारी पर निगाह मारो । देखो कोई कमी तो नहीँ रह गई I मैं मोना चौधरी से कुछ जरूरी बातें का लू I बीस-पच्चीस मिनट तक हम यहा' से रवाना होगे' ।
होशाग बिना कुछ कहे बाहर निकल गया I शागली ने आगे बढकर दरवाजा बद किया और सिकटनी चढाकर पलटा । उसके होठो पर मधुर मुस्कान नाच रही थी I वह कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के पास पहुँचा ।
" तुम बहुत बहादुर हो I बहुत ही बहदुर I " शागली ने कुर्सी पर बैठी मोना चौधरी के गले में बाहें डाल दी I
मोना चौधरी हसी I अब उसे समझ आया कि शागली उससे क्या खास बात करना चाहता है I चाहकर भी मोना चौधरी उसे इनकार नहीं कर सकती थी क्योकि शागली इस समय उसके काम का साबित हो रहा था । और आगे भी उसने काम आना था I अगर शागली फिर गया तो चियाग तक पहुचने में उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पडेगा I
"मुझे तो अभी भी यकीन नही हो रहा कि तुम सही-सलामत आ गई हो । ”
"देख लो I तुम्हारे सामने हू । " मोना चौधरी खिलखिलाई ।
शांगली ने अपना हाथ उसकी कमीज में डाल दिया । आले ही पल मोना चौधरी की छाती शागली की हथेली की गिरफ्त में कैद थी I दिखावे के तौर पर मोना चौधरी कसमसाई I
"क्या करते हो, कोई आ जाएगा I "
"काईं नहीं आता I दरवाजा बद है I " शामली की सासो में तेजी सी आने लगी थी I
"प्लीज I. मत करो… ! हमें अभी सफर पर रवाना होना है I " मोना चौधरी ने उसका हाथ कमीज से बाहर निकालना चाहा I
परतु शागली की हथेली मोना चौधरी की छाती से खेलती रही I मोना चौधरी ने खुद को ढीला छोड दिया ।