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उलझन मोहब्बत की

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थोड़ी देर बाद राजेश जब रिया के पास से केबिन से बाहर निकला तो देखा कि साहिल अभी भी नैना, सारा के पास ही बैठा उनके साथ हंसी मजाक कर रहा है । राजेश ने एक बार उन्हें देखा और अपने कैबिन में जाकर बैठ गया ।

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राजेश के चुपचाप चले जाने पर नैना परेशान हो गई - इसे क्या हुआ? मुझे तो लगता था कि गुस्सा करेगा।

सारा - लगा तो मुझे भी यही था पर यह तो चुपचाप चले गए।

नैना (खड़े होकर) - मैं अभी जाकर देखती हूं , शायद कुछ परेशान है ।

साहिल - नहीं , उसे दिखाओ कि तुम्हें उससे फर्क नहीं पड़ता। दूर रहो उससे

नैना अब उदासी से राजेश को देखने लगी ।

साहिल - अगर तुम ऐसे ही करोगी तो फिर मिल गया तुम्हें राजेश ?

नैना वापस सीट पर बैठ गई।

कुछ वक्त तक राजेश खामोश बैठा रहा फिर अपने काम में लग गया । उसने साहिल से प्रेजेंटेशन मंगवाई और काम लग रहा था कि नैना वहां किसी काम से आई । वह जब जाने लगी तो राजेश बोला - साहिल के साथ तुम कुछ ज्यादा ही , खुश नहीं रहती?

नैना ( मुस्कुराते हुए ) - हां क्योंकि वह मेरा बहुत ख्याल रखता है और सबसे अच्छी बात है कि वह औरों की तरह (राजेश) बात बात पर मुंह नहीं फुलाता ।

राजेश ने अब नैना की ओर देखा - अच्छा ? यह तो बहुत अच्छी बात है वैसे यह तुम्हारे गले में स्कार्फ सुबह तो नहीं था?

नैना - अच्छा है ना ? साहिल ने ला कर दिया । उसकी पहली गिफ्ट है , यह तो संभाल कर रखूंगी ।

राजेश - अच्छी बात है पर मुझे जहां तक याद है त कि तुम्हें तो ऐसे गिफ्ट लेना देना पसंद ही नहीं थी।

नैना - वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है ।

राजेश - सही कह रही हो,आजकल वक्त के साथ लोगों की पसंद तो क्या वह खुद ही बदल जाते हैं ।अच्छा दिखाओ तो देखने में तो काफी सॉफ्ट लग रहा है ।

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नैना हैरानी से -तुम्हें पसंद आया?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - हां बिल्कुल।

नैना अब मन ही मन सोचने लगी - क्या राजेश भूल गया है कि मुझे यह वाला शेड पसंद ही नहीं है , यह तो तारीफ कर रहा है ।

राजेश - दिखाओ तो , मैं भी तो देखूं कैसा है ?अगर अच्छा हुआ तो रिचा के लिए भी ऐसा ही लूंगा कहते हुए उसने हाथ आगे बढ़ा दिया ।

नैना ने हैरानी से राजेश को देखते हुए अपने गले से स्कार्फ निकाल राजेश के हाथ में थमा दिया ।

राजेश स्कार्फ को देखते हुए - कपड़ा तो कॉफी साफ्ट है सच में पर एक बात समझ में नहीं आई ?

नैना - क्या?

राजेश - तुम्हें तो यह शेड पसंद ही नहीं है फिर ....अच्छा समझ गया कि वक्त के साथ सब बदल जाता है ।

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नैना - हां वही, अब पसंद है मुझे यह।

राजेश - अच्छी बात है वैसे तुम ने इसको टेस्ट किया?

नैना (सवालिया नजरों ) - किसका टेस्ट ?

राजेश - इस स्कार्फ का

राजेश खड़े होकर नैना के पास आ गया और टेबल पर बैठ गया - अरे यही कि यह सुंदर तो है पर क्या टिकाऊ भी है? ज्यादा दिनों तक चलेगा भी या फिर कुछ ही दिनों में फट जाएगा ?

नैना - इस बात काे चैक कैसे कर सकते हैं हम भला?

राजेश ( मुस्कुराते हुए ) - बहुत सिंपल है , देखो मैं दिखाता हूं कहते हुए उसने स्कार्फ के दो कोनों को पकड़ा और जोर से उन्हें अलग-अलग दिशा में खींच दिया जिससे उस स्कार्फ के दो टुकड़े हो गए ।

राजेश ( हँसी को दबाते हुए ) - ओह, मै तो बस चैक कर रहा , था पर ये तो फट गया। घटिया क्वालिटी का निकला ।

स्कार्फ के फटते ही नैना गुस्से में राजेश से बोली - यह क्या किया तुमने? इसे फाड़ दिया? आज ही साहिल ने गिफ्ट किया था और आज ही फाड़ दिया ? उसे कितना बुरा लगेगा।

राजेश (गुस्से में ) - बुरा लगे तो लगे , मुझे इसकी परवाह नहीं और क्या मतलब है तुम्हारा आज ही ? तो क्या मैं बैठ कर इंतजार करता कि तुम रोज इसे गले में डाल कर घूमती रहो?

नैना गुस्से में राजेश को देखने लगी ।

राजेश - ऐसे क्या देख रही हो ? यह याद रखो कि अगर तुमने साहिल के साथ रिश्ता बढ़ाने की कोशिश की तो उसका भी यही हाल करूंगा और यूं ही टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा क्योंकि ना तो तुम्हारे रिश्ते की और ना ही इस कपड़े की अच्छी क्वालिटी है।

नैना - तुम्हारी परेशानी क्या है ? तुम ...तुम जलते हो मेरे और साहिल के रिश्ते से ।

राजेश - हां , क्योंकि यह रिश्ता बेमेल है और एक ही बात , बार-बार नहीं कहूंगा कि साहिल लड़का सही नहीं है । जितना जल्दी हो यह सब खत्म करो वरना फिर मैं अपने तरीके से तो खत्म कर ही लूंगा ।

नैना - मै ऐसा कुछ नहीं करूंगी । मुझे साहिल पसंद है और उसे मैं , बाकी दुनिया इस बारे में क्या सोचती है मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता - कहते हुए राजेश की हाथ से स्कार्फ के टुकड़े ले लिए । सच तो यह है कि तुम जलते हो मेरी खुशियों से क्योंकि मैं खुश हूं पर तुम चाहते हो कि मैं बस तुम्हारी याद में रोती रहूं पर मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी, तुम्हारी चाल कामयाब नहीं होने दूंगी । मैं आज रात साहिल के साथ डिनर पर जा रही हूं और तुम अपनी शादी की तैयारियां करो - कहते हुए नैना वहां से बाहर निकल गई।

राजेश गुस्से में नैना को जाते हुए देखने लगा - इतनी जिद्दी लड़की मैंने कभी नहीं देखी । जिस काम की मना करो , जानबूझ कर वही काम करती है ।
 
नैना अब बाहर आकर अपनी चेयर पर बैठ गई और फटे स्कार्फ को देखने लगी । यह तो फट गया , बेचारा साहिल बुरा मान जाएगा। कहीं मैं गुस्से में ज्यादा तो नहीं बोली राजेश से? कह तो आई हूं कि डिनर पर जा रही हूं साहिल के साथ पर साहिल तो शाम को कुछ काम से बाहर जा रहा है । कहीं , राजेश को पता चल गया कि मैं झूठ बोल रही थी तो मेरी पोल खुल जाएगी।... क्या करूं? हां , मैं रिचा के यहां चली जाऊंगी । उसकी तबीयत ठीक नहीं है, थोड़ी बातें भी हो जाएंगी । 2 साल बाद मिली पर सुकून से बैठ कर बात नहीं कर पाए। हां , यह सही रहेगा और विशाल भी यहाँ नहीं है तो उसका भी डर नहीं है । अगर राजेश घर पर चेक करने भी आएगा तो मैं उसे वहां मिलूंगी नहीं फिर वह बेचारा आसपास के सभी रेस्टोरेंट और होटल्स में चक्कर लगाता फिरेगा - मुस्कुराते हुए नैना ने अपना बैग उठाया और ऑफिस से बाहर निकल गई ।

उधर राजेश केबिन में बैठा सोच रहा था - ठीक है , करो डिनर। मुझे भी कौन सा फर्क पड़ता है तुम्हारे इस डिनर से से । विशाल तो बेंगलुरु में है , एक काम करता हूं कि रात को रिचा से मिलने चला जाता हूं । उससे हाल-चाल भी पूछ लूंगा और कोशिश करूंगा कि वह बता दें कि उसके दिमाग में शादी वाली बात किसने डाली थी ? घर जाकर भी मुझे कौन सा कुछ करना है, वहां तो मिसेज मल्होत्रा पहले से ही डेरा डाल कर बैठी है ।

साहिल शाम को कैफे में बैठा फोन पर बातें कर रहा था - अरे हां , पहले तो मुझे लगा कि मेरा सारा प्लान चौपट हो जाएगा पर यहां तो सारा मामला ही उल्टा निकला। मिसेज मल्होत्रा ने , मुझको खुद कहा कि वह राजेश को बर्बाद करना चाहती है। थोड़ी देर मे वह मुझे कुछ पेपर देने वाली है जिन पर राजेश के साइन चाहिए। थोड़ी देर में आती होंगी ....नहीं , अभी तो नहीं पता कि किसके पेपर्स है? जब हाथ में आएंगे तब बताता हूं देख कर । हाँ मैं सावधान रहूंगा । जो औरत अपने बेटे की नहीं हुई , वह मेरी क्या हो जाएगी - कहते हुए साहिल ने फोन काट दिया और सोच में पड़ गया। वह तो अपना खेल खेलने आया था पर मिसेज मल्होत्रा ने तो पूरा पासा ही पलट दिया , बहुत बड़ी शातिर निकली । मैं तो बाहर वाला हूं लेकिन वह आस्तीन का सांप है । क्या वह सच में रिया की शादी मुझसे करा देंगी ? भरोसा करने को दिल तो नहीं चाहता उन पर लेकिन चलो देखते हैं कि किस चीज के पेपर हैं उनके पास जिन पर वह राजेश के साइन चाहती हैं कि तभी उसे सामने से मिसेज मल्होत्रा आती दिखाई दी । मिसेज मल्होत्रा ने आते ही कुछ पेपर्स साहिल के हाथ में थमा दिए ।

साहिल ने जब पेपर्स पढ़े तो हैरानी से मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा - आप राजेश को बर्बाद करना चाहती हैं या आबाद?

यह सुनकर मिसेज मल्होत्रा मुस्कुरा दी, साहिल सवालिया नजरों से उन्हें देखने लगा.....,

साहिल - आप तय लीजिए कि आप चाहती क्या है?

मिसेज मल्होत्रा - समझाती हूँ- पहले रिया को राजेश से अलग करना और फिर उसकी बर्बादी ।

साहिल (हैरानी से ) - पर ऐसे ?

मिसेज मल्होत्रा (मुस्कुराते हुए) - मेरा यकीन करो , यह कदम बिल्कुल सही है । अगर ज्यादा के फायदे के लिए कुछ नुकसान उठाना हो तो बुरा ही क्या है ?

साहिल - ठीक है, जैसा आपको सही लगे ।

मिसेज मल्होत्रा - वैसे एक बात पूछूं ?

साहिल - जी कहिए?

मिसेज मल्होत्रा - तुम्हारी क्या दुश्मनी है राजेश से ?

साहिल (मुस्कुराकर ) - माफ कीजिए, आप का इससे कोई लेना-देना नहीं ।

मिसेज मल्होत्रा ( कुछ देर सोचते हुए) - कहीं जान से तो नहीं मारने वाले हो ना उसे ?

साहिल अब उन्हें खामोशी से एक पल को देखता रहा फिर हंसते हुए बोला - आप कहें तो मार भी सकता हूं ।

मिसेज मल्होत्रा यह सुनकर हंसने लगी - मुझे उससे कोई फर्क नही पडता पर मेरे पति की जान बसती है उसमें।

साहिल - चलो छोड देते है उस्, वैसे भी मौत तो आसान होगी जो एक बार में ही खत्म कर दे राजेश को पर मैं उसे तोड़ना चाहता हूं , उसकी जिंदगी में एक दर्द बांध देना चाहता हूं जिसे वह ताउम्र झेले।

मिसेज मल्होत्रा - लगता है कुछ ज्यादा ही गहरी दुश्मनी है तुम्हारी ।

साहिल - बहुत गहरी लेकिन एक बात बताइए कि आपको मेरे बारे में कैसे पता चला ?

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मिसेज मल्होत्रा - मैंने रिया को फोन पर राजेश से बातें करते हुए सुना था। मुझे लगा कि एक बार तुमसे मिलना चाहिए लेकिन जब यहां आकर तुम्हें देखा तो चौंक गई पर फिर दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है ।

साहिल ( थोड़ा परेशान होकर ) -अगर रिया को याद आ गया कि उसने मुझे कहां देखा है तो कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए?

मिसेज मल्होत्रा - नहीं , मैं सब संभाल लूंगी ।

साहिल - ठीक है।

मिसेज मल्होत्रा - वैसे एक बात है जो शायद तुम्हारे फायदे की हो ।

साहिल - क्या ?

मिसेज मल्होत्रा - क्या तुम जानते हो कि राजेश की एक गर्लफ्रेंड थी.. क्या नाम था उसका ? हां नैना । राजेश उससे बहुत ज्यादा प्यार करता था या यूं कहो कि अभी भी करता है। तुम चाहो तो उसे ढूंढ कर राजेश के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हो , राजेश की बर्बादी में आसानी हो जाएगी ।

साहिल - क्या आप उसे कभी मिली नहीं और फिलहाल कहां है वह ?

मिसेज मल्होत्रा - नहीं मैं उससे कभी नहीं मिली और ना ही उसके बारे में कुछ ज्यादा जानती हूं लेकिन इतना पता है कि अगर वह हाथ लग गई तो तुम राजेश को कठपुतली की तरह नचा सकते हो ।

साहिल - हम्म वैसे एक शख्स और भी है हमारे पास जिसके दम पर हम राजेश को काबू में कर सकते हैं ।

मिसेज मल्होत्रा (हैरानी से ) - कौन?

साहिल (हंसते हुए ) - रिया , राजेश की लाडली बहन।

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से में ) - खबरदार उससे दूर ही रहना और फिर तुम तो उसे पसंद करते हो ?

साहिल - हाँ लेकिन रिया को अगर गिरफ्त में कर ले तो भी वह आसानी से मान जाएगा और हमें कौन सी रिया को चोट पँहुचानी है?

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मिसेज मल्होत्रा - कैसे इंसान हो ? जिसे पसंद करते हो , उसी का फायदा उठाना चाहते हो ?

साहिल - तो आप भी तो यही कर रही हैं बचपन से , राजेश सोतेला ही सही पर बेटा है आपका - कहकर साहिल मुस्कुराने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा - क्या तुम सच में रिया को नुकसान पहुंचाना चाहते हो ?

साहिल यह सुनकर हंसने लगा - मैं बस मजाक कर रहा था। वैसे सोच कर देखिएगा इस मामले मे

मिसेज मल्होत्रा - वैसे कब तक साइन करवा लोगे इन पेपर्स पर ?

साहिल - देखते हैं , कल पूरी कोशिश करूंगा।

मिसेज मल्होत्रा उठकर अब अपने घर चली गई ।

साहिल वहीं बैठा सोचता रहा - यह औरत भरोसे के बिल्कुल भी काबिल नहीं । आज यह अपने बेटे को धोखा दे रही है , अगर कल इसने मुझको धोखा दे दिया तो ?

मुझे नैना को आगे के लिए संभाल कर ही रखना होगा। अगर इन्होंने कोई चालाकी की तो फिर मैं नैना का इस्तेमाल इनके खिलाफ करूंगा।

उधर नैना रिचा के घर पहुंची तो वहां घर पर रिचा के अलावा और कोई नहीं था। नैना और रिचा अब कमरे में बैठे हुए बात कर रही थी ।

रिचा - सब अच्छा चल रहा है ना?

नैना - क्या अच्छा यार।

नैना ने रिचा को बताया कि उसने कितनी कोशिश कि पर राजेश अपने दिल की बात नहीं कर रहा है।

रिचा यह सुन हँसने लगी - तुम दोनों बिल्कुल एक जैसे हो, जिद्दी एक शेर है तो दूसरा सवाशेर ।

नैना (मुस्कुराते हुए ) - अच्छा ठीक है । अब कैसी तबीयत है तेरी ?

, रिचा - एक बात कहूं ?

नैना - हां बोल।

रिचा - दरअसल मैं बिल्कुल ठीक हूं , वह तो मैं इसलिए नाटक कर रही थी कि राजेश का सामना ना करना पड़े । उस दिन उसने विशाल को भेजा था कि वह मुझसे पता लगा सके कि मुझे किसने कहा है शादी वाली बात कहने को पर मैं सब समझ गई थी तो मैंने भी तबीयत खराब होने का नाटक किया कि कुछ दिन ही सही पर कम से कम बच कर तो रहूंगी ।

नैना (हैरानी से ) - तू कब से इतनी होशियार हो गई? वैसे बिल्कुल सही किया ।

रिचा - हां लेकिन पर बिस्तर पर पड़े पड़े कमर दुखती है और कई दिन से वही खिचड़ी और उबला खाना खाना पड़ रहा है।

नैना (हंसते हुए) - बस इतनी सी बात? चलो अभी हम अपनी दोस्त के लिए पिज़्ज़ा मंगाते हैं और साथ में उसकी फेवरेट कोल्ड ड्रिंक भी ।

रिचा (खुशी से चहकते हुए ) - सच्ची? जल्दी मंगा यार , बहुत मन कर रहा है मेरा । ये आईडिया मेरे दिमाग में क्यों , नहीं आया पहले?

नैना - क्योंकि तु झल्ली है।

नैना और रिचा अब हँसने लगी। नैना ने अब फोन कर पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक का ऑर्डर दिया और दोनों बैठ कर आपस में गप्पे लड़ाने लगी। नैना रिचा को बताने लगी कि उसके पीछे ऑफिस में क्या-क्या हुआ और कैसे मिसेज मल्होत्रा ने आकर बवाल मचाया आज ऑफिस में।

उधर राजेश रिचा के घर के लिए निकल पड़ा, रास्ते में कुछ काम था तो वह थोड़ा लेट हो गया।

इधर नैना और रिचा साथ बैठ कर आराम से पिज़्ज़ा का मजा ले रही थी ।

रिचा - यार , सच में दिल खुश हो गया । मैं तो बस तरस गई थी यह सब खाने को , तुम्हारी दोस्ती के चक्कर में पता नहीं क्या-क्या करना पड़ता है ।

अभी दोनों मिलकर अपनी पार्टी एंजॉय कर ही रही थी कि राजेश वहां पहुंच गया और डोर बैल बजाई।

, नैना - अंकल आंटी आ गए क्या ?

रिचा ( हैरानी से ) -नहीं तो , वो कल आएंगे।

नैना - रुक, मैं देख कर आती हूं - कहते हुए वह अब कमरे से निकल बाहर मेन डोर के करीब आई ।

उधर राजेश को किसी का फोन आ गया तो वह उससे बातें करते हुए दरवाजे से थोड़ा अलग हट उस ओर से मुँह फेर कर खडा हो गया।

नैना न जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने राजेश को देखते ही उसके होश उड़ गए कि यह यहाँ कैसे? उसने ध्यान दिया कि राजेश अभी भी फोन पर बातें कर रहा है, उसने नैना को नहीं देखा था। नैना ने अब झट से दरवाजा बंद कर लिया।

वह घबरा गई कि ये यहां क्या कर रहा है इस वक्त ? कहीं इसे पता तो नहीं चल गया कि मैं यहां हूं पर कैसे?

राजेश को महसूस हुआ कि अभी किसी दरवाजा खोला हो तो उसने पलट कर देखा तो दरवाजा बंद था। उसने फोन काट दोबारा डोरबेल बजाई ।

, नैना अब भाग कर रिचा के पास पँहुची।

रिचा - क्या हुआ ? कौन है ?

नैना - यार राजेश है।

रिचा (घबराकर ) - राजेश ? लेकिन वह यहाँ क्या कर रहा है?

नैना - पता नहीं पर उसने अगर मुझे तेरे साथ देख लिया तो पक्का समझ जाएगा कि हम दोनों मिले हुए हैं। क्या करूं? यहां से बाहर जाने का कोई और रास्ता है क्या?

रिचा - नहीं

नैना - अब तो हम बुरी तरह से फंस गए । उधर राजेश बार-बार डोर बैल बजा रहा था।

नैना (कुछ सोच कर ) - मैं एक काम करती हूं कि मैं छुप जाती हूं - कहते हुए वह छुपने की जगह ढूंढने लगी पर उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि छुपे तो छुपे कहाँ?

रिचा - यार मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं वह हमें पकड , ना ले । एक काम कर , तू यहीं इसी कमरे में छुप जा जिससे मेरी हिम्मत बनी रहे ।
 
नैना- अच्छा ठीक है, एक काम कर । तू दरवाजा खोल और घबराना नहीं - कहते हुए नैना जल्दी से वॉशरूम में चली गई।

रिचा दरवाजा खोलने बाहर आई। उसने दरवाजा खोला तो सामने राजेश परेशान खड़ा था - कब से बैल बजा जा रहा हूं, कितना टाइम लगा दिया । तुम ठीक तो हो?

रिचा - हां , मैं ठीक हूं ।

राजेश - बाकी घर वाले कहां है?तुम क्यों आईं दरवाजा खोलने?

रिचा - वो सब बाहर गए हैं कल आएंगे ।तुम यहां अचानक? सब ठीक है ना।

राजेश - हां ,सब ठीक है । दरअसल आज फ्री था तो सोचा थोड़ा तुम्हारे पास आकर बैठ लूँ, तुम्हारा हाल भी पूछ लूँगा क्योंकि पहले तो आ नहीं पाया था।

रिचा -नहीं मै समझ सकती हूँ। आओ अंदर - कहते हुए रिचा उसे घर के अंदर ले गई ।

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नैना वॉशरूम के अंदर छुपी खड़ी थी वह रिचा और राजेश की आवाज साफ साफ सुन रही थी।

राजेश - यही ड्रॉइंग रूम में बैठ जाते हैं?

रिचा (यह सोचकर घबराने लगी कि नैना तो मेरे रूम में है और मुझे अकेले इसका सामना करने की हिम्मत नहीं है) - नहीं वह मुझे थोड़ी सी थकान है। चलो मेरे कमरे में चल कर आराम से बैठते हैं ।

राजेश - जैसा तुम्हें ठीक लगे । अब दोनों कमरे की ओर बढ़ने लगे।

नैना को अब याद आया कि कमरे में टेबल पर पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक रखे हैं ।अगर राजेश ने देख लिया तो उसे शक हो जाएगा क्योंकि रिचा तो तबीयत खराब होने का बहाना बना रही है ।

नैना वापस वॉशरूम से बाहर निकल कमरे में आई और जल्दी से सारा सामान उठाकर बेड के नीचे की तरफ खिसका दिया और वापस वाँशरूम में भाग गई ।

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इतने में ही राजेश और रिचा वहां आ गए ।

रिचा - आओ बैठो - कहते हुए उसने अब वॉशरूम की ओर देखा।

नैना दरवाजे को थोड़ा सा खोल कर रिचा को देखने लगी और उसे ना घबरा का इशारा किया । राजेश और रिचा सोफे पर बैठ गए।

राजेश - सॉरी , मैंने तुम्हें खामखाँ परेशान किया।

रिचा - नहीं ,।कोई बात नहीं ।

राजेश - अच्छा अब तुम्हारी तबीयत कैसी है ?

रिचा - पहले से काफी अच्छी हूं पर अभी भी दवाई ले रही हूं कुछ दिन और, फिर बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी।

राजेश - हम्म , नैना का कोई फोन या मैसेज नहीं ..

रिचा - वह तो नाराज है मुझसे फिर इस सबका कोई मतलब नहीं है ।

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राजेश - मैं समझ सकता हूं कि मेरी वजह से तुम दोस्तों में नाराजगी चल रही है । नैना अब एक-एक दिन गिन रही है शादी का , समझ नहीं आ रहा कि कैसे इस मुसीबत से छुटकारा पाऊं ? कोई रास्ता नजर भी नहीं आ रहा कहते हुए राजेश ने रिचा की ओर देखा । वह रिचा को डराना चाहता था जिससे रिचा खुद ब खुद बता दे कि उसे शादी का आईडिया किसने दिया था ।

रिचा (घबराकर)- अब?

राजेश - पता नहीं , कहीं ऐसा ना हो कि हमें सच में शादी करनी पड़ जाए ।

रिचा हडबडाते हुए खडी हो गई - क्या कह रहे हो?

राजेश - क्या जरूरत थी तुम्हें शादी की बात करने की। मैं नैना को हराने के लिए कुछ भी कर सकता हूं और तुमसे शादी भी।

अंदर वाँशरूम में खडी नैना यह सुन दंग रह गई।

, रिचा - पर मैं तो विशाल से प्यार करती हूं और उसकी मंगेतर हूं ना ?

राजेश - बस यही बात मुझे रोक रही है , कुछ तो हल निकालना होगा इसका।

रिचा - मैंने पहले ही कहा था कि राजेश यह आईडिया बुरा है

राजेश - पहले तो ठीक था लेकिन तुमने शादी की बात कर सब खराब कर दिया . चलो सोचते हैं कि क्या करना है आगे इतनी मुसीबत कम थी कि मिसेज मल्होत्रा भी यहां गई।

रिचा अचानक से बोल उठी - हां और फिर बिना बात इतना बड़ा तमाशा हो गया ।

राजेश अब हैरानी से रिचा को देखने लगा - तुम्हें यह सब कैसे पता?

रिचा को ध्यान आया कि वह क्या कह गई है - वह मुझे विशाल ....

राजेश - पर विशाल तो यहां है ही नहीं और ना ही उसे कुछ पता है ?

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रिचा - नहीं मेरा मतलब है कि विशाल ने नहीं रिया ने अभी थोड़ी देर पहले फोन करके बताया।

( नैना वाँशरूम में खड़ी खड़ी भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि रिचा कोई गड़बड़ ना करें , प्लीज बचा लो ।)

रिचा - अच्छा मैं अभी आई - कहते हुए वह उठकर वॉशरूम में आई और घबराने लगी - यार इसे कहीं शक तो नहीं हो गया ? मेरे तो बस मुंह से ऐसे ही निकल गया ।

नैना - नहीं सब ठीक है , तू जा और इसे जल्दी से भेज यहां से।

रिचा - कोशिश करती हूं । वह वॉशरूम से बाहर आई - राजेश तुम्हें कहीं कोई काम तो नहीं है कि कहीं मेरी वजह से लेट हो जाओ ।

राजेश (मुस्कुराकर) - नहीं आज मैं फ्री हूं , थोड़ा समय यही रुकूंगा। तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं ?

रिचा - नहीं नहीं मुझे क्या परेशानी हो सकती है ? एक काम करो , तुम बैठो । मैं तुम्हारे लिए काँफी बना कर लाती हूं ।

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राजेश - रहने दो, तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है।

रिचा - नहीं कॉफी में कितना टाइम लगता है , मैं बस अभी लाई - कहते हुए रिचा कमरे से बाहर निकल गई और राहत की सांस ली । उधर नैना घबरा रही थी कि कमरे से कहीं राजेश इधर आ गया तो

राजेश अब खड़ा हो गया और कमरे में इधर-उधर टहलने लगा कि उसके हाथ से गाड़ी कीचाबी नीचे गिर गई। राजेश अब जैसे ही चाबी लेने के लिए नीचे झुका कि उसे बेड के नीचे रखा पिज़्ज़ा और कोल्ड ड्रिंक दिखाई दिए।

तभी रिचा वहाँ कॉफी लेकर आ गई और टेबल पर रख दी। राजेश रिचा को हैरानी से देखने लगा - इसकी तो तबीयत खराब है फिर यह सब क्यों खा रही थी और इसने मुझसे ऐसे क्यों छुपाया ?

यहां मिसेज मल्होत्रा ने जब राजेश को घर पर नहीं पाया तो रिया को राजेश के खिलाफ भड़काने लगी।

रिया - मॉम आपने बहुत गलत किया ,आपने भाई से अपने सैंडल साफ करवाए।

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मिसेज मल्होत्रा - तो इसमें गलत ही क्या है ? तुम हमेशा ही उसकी तरफदारी करती हो लेकिन मुझसे हमेशा लड़ती रहती हो। बेटा खून के रिश्ते से बढ़कर कुछ नहीं होता। देख लेना, एक दिन तुम्हें राजेश जरूर धोखा देगा और धीरे-धीरे सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कर लेगा ।

रिया (गुस्से में ) - आप यह क्या सगा सोतेला करते हो ? रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं ,खून से नहीं । रही बात प्रॉपर्टी की तो ना मुझे इसका कोई लालच है और ना ही भाई को।

मिसेज मल्होत्रा (हंसते हुए) - हां, तुम्हें लालच नहीं है पर उसे है । वह बस तुम्हारे सामने दिखाता है कि उसे कोई परवाह नहीं, पूरा बिजनेस तो वही हैंडल करता है । तुम्हारे पापा ने सब कुछ उसीं पर छोड़ रखा है । कहीं ऐसा ना हो कि भरोसे की आड़ में वह सब कुछ हमसे छीन ले और हम सड़क पर आ जाए ।

रिया ( हैरानी से ) - आप कितना गलत सोचती है भाई के बारे में , अरे वह खुद सड़क पर आ जाएंगे पर हमें तकलीफ नहीं होने देंगे । आपसे तो बात करना ही बेकार है मॉम - कहते हुए रिया वहां से चली गई।

, मिसेज मल्होत्रा (चिल्लाते हुए ) - देख लेना , कभी ना कभी उसका असली चेहरा तुम्हारे सामने आकर रहेगा। वह मन ही मन सोचने लगी कि साहिल जल्दी ही राजेश से उन पेपर पर साइन ले ले तो रिया के दिल में शक की दरार पैदा करना आसान हो जाएगा फिर मैं और रिया उससे अपना अपना हिस्सा लेंगे । तब साहिल उसे बर्बाद कर देगा , फिर वह बेचारा दर-दर की ठोकरें खाता फिरेगा - सोच कर मिसेज मल्होत्रा मुस्कुराने लगी ।

राजेश अब हैरान सा रिचा को देखे जा रहा था।

रिचा- क्या हुआ, कहां खो गए ?

राजेश - नहीं कुछ नहीं - कहते हुए वापस सोफे पर आकर बैठ गया । आखिर क्या छुपा रही है यह मुझसे ? कहीं इसने तबीयत खराब होने का झूठ तो नहीं बोला ?

राजेश इसी सोच में डूबा हुआ था , रिचा के हाथ घबराहट से कांप रहे थे ।

राजेश -तुम्हारा डाईट क्या चल रहा है ? मेरा मतलब बीमार हो ना ।

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रिचा - हां, बिल्कुल लाइट खाना खा रही हूं जैसे सूप खिचड़ी वगैरह , तला और हैवी तो बिल्कुल ही बंद है । सच कहूं तो अच्छा लगता है यह सब हल्का खाने से शरीर भी अच्छा रहता है । मै तो सोच रहू हूँ कि हमेशा यही खाँऊ - कहते हुए रिचा मुस्कुरा दी।

राजेश को अब पूरा विश्वास हो चला था कि यहां जरूर कोई खिचड़ी पक रही है रिचा के दिमाग में, जिसका एहसास उसे तो पहले ही हो गया था पर आज भरोसा भी हो गया लेकिन विशाल? क्या विशाल भी रिचा के साथ मिला हुआ है या उसे भी मेरे साथ पागल बना रही है ?

रिचा ने अब टेबल से कॉफी उठाई और घबराहट को छुपाते हुए राजेश की ओर बढ़ा दी । जैसे ही राजेश ने सोचते हुए हाथ बढ़ाया कि रिचा के हाथ से कॉफी छूट गई और सीधा राजेश के हाथ पर गिरी जिससे वह उठ खड़ा हुआ उठा और रुमाल निकाल अपना हाथ साफ करने लगा। रिचा बुरी तरह घबरा गई - सॉरी, सॉरी मेरा ध्यान नहीं था । गलती से गिर गई।

राजेश जलने के दर्द को छुपाते हुए - कोई बात नहीं , ठीक है बस थोड़ा सा जला है । ठीक हो जाएगा। इधर नैना ने जब , उनकी आवाजें सुनी तो दरवाजा खोल चुपके से देखा। जब उसने राजेश के हाथ को जला देखा तो वह बुरी तरह घबरा गई , वह जल्दी से वाँशरूम से बाहर निकल कर राजेश के पास आकर बैठ उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और वहीं पास में रखे पानी के जग में उसका हाथ डाल दिया - दर्द हो रहा है क्या ज्यादा? रिचा एक काम ढंग से नहीं कर सकती, जा जल्दी जाकर आईसपैक लेकर आ। राज ठीक हो जाएगा बस थोड़ी देर में - कहते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे ।

नैना ने महसूस किया कि कोई हरकत ही नहीं हुई है। उसने अब नजरें उठा कर देखा कि राजेश और रिचा उसे हैरानी से देख रहे है। अब नैना को याद आया कि उसने अनजाने में ही सही पर कितनी बड़ी गलती कर दी है।

राजेश कभी नैना को तो कभी रिचा को हैरानी से देख रहा था....,
 
राजेश अब हैरानी से कभी नैना को तो कभी रिचा को देखता। नैना और रिचा अब एक दूसरे को देखने लगी कि अब तो बुरे फँसे।

राजेश ने झटके से नैना के हाथ से अपना हाथ छुड़ा लिया , अब उसके चेहरे पर हैरानी की जगह गुस्सा साफ झलकने लगा । राजेश के गुस्से को देख नैना खड़ी हो गई , अब डर की वजह से रिचा भी काँपने लगी । उसे साफ साफ नजर आ रहा था कि राजेश को हम दोनों में से किसी को भी नहीं छोड़ेगा , वह डर की वजह से उससे थोड़ा पीछे हट गई।

राजेश अब गुस्से में खड़ा हुआ और रिचा की और बढ़ा कि नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया - राजेश मेरी बात...

राजेश ने उसका हाथ एक झटके से खुद से दूर कर दिया - तुम्हें तो मैं बाद में देख लूंगा पर पहले इसे तो देख लूँ जिसने दोस्ती के नाम पर मुझे धोखा दिया।

रिचा (घबराते हुए ) - मेरी बात तो सुनो । मेरी तबीयत खराब है , ऊपर से तुम गुस्सा कर रहे...

राजेश ( गुस्से में) - बस करो अपना ये नाटक बीमार होने का और बहुत हो गया , तुम दोनों मिलकर मुझे ना जाने कब से पागल बना रही हो ? इस नैना से तो धोखे की आदत है मुझे पर तुम भी? क्यों किया ? क्या मिला तुम्हें सब करके ? क्या सिर्फ यही दोस्त है तुम्हारी ? मैं कुछ नहीं लगता?

रिचा रोने लगी - मेरी कोई गलती नहीं है ।

राजेश - गलती है तुम्हारी कि तुम मेरे साथ धोखा कर रही थी।

अब नैना आगे बढ़कर रिचा और राजेश के बीच में आ गई - गलती उसकी नहीं , तुम्हारी है । तुम क्यों परेशान कर रहे हो उसे ? मत तंग करो उसे ? मुझसे कहो जो कहना है, वह , बीमार है।

राजेश (हंसते हुए ) - अच्छा बीमार है ? आओ तुम्हें कुछ दिखाता हूं - कहते हुए नैना को पकड़ कर बैड के पास ले गया । इसके नीचे देखो क्या रखा है ?

नैना अब बुरी तरह से झेंप गई , रिचा भी अब आगे बढ़ी और बेड के नीचे झुक कर देखा कि पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक को हैरानी से देखने लगी - नैना, तुमने यहां छुपाए थे ये सब? मुझे लगा कि तुम खा...

राजेश अब गुस्से से रिचा की ओर देखा, नैना ने उसे चुप रहने का इशारा किया।

नैना - ये हम दोनों की आपस की लड़ाई है राजेश, रिचा को दूर रखो।

राजेश - गलत। यह मेरे बीच की बात है , हम दोस्तों के बीच की बात है । तुम दूर रहो इससे ?

राजेश अब रिचा की ओर मुड़ा - हां तो तुम क्या कहोगी इस बारे में ? क्या यही है तुम्हारा खिचड़ी और सूप ? कब से चल रहा है तुम दोनों का यह सब ? क्या प्लानिंग है तुम्हारी ? , अभी थोड़ी देर पहले तो तुम कह रही थी कि नैना का कोई मैसेज या फ़ोन नहीं आया ? आएगा भी कैसे ,वह तो खुद ही यहाँ है ।

रिचा - ऐसा नहीं..

राजेश (लगभग चिल्लाते हुए ) - तुम मुझे धोखा देकर इस नैना के साथ मिल गईं? मेरी दोस्ती कोई मायने नहीं रखती तुम्हारे लिए ?

रिचा बार-बार नैना की तरफ देख रही थी।

राजेश - उसे क्या देख रही हो? मुझसे बात करो।

नैना एक बार फिर आगे बढी - राजेश गुस्सा नहीं करो, आराम में बैठकर बात करते हैं । देखो तुम्हारा हाथ भी जल गया है , दवा लगा दूं प्लीज - कहते हुए उसने राजेश को शांत करने की कोशिश की ।

राजेश अब नैना की ओर मुडा - ओह, तुम्हें इस चोट की फिक्र है और जो हर बार धोखा देकर तुमने मुझे चोट पहुंचाई हैं उस पर कौन सी दवा लगाओगी?

, नैना - राजेश तुम...

राजेश - तुम अकेली कम थी कि इसे भी धोखा देने की ट्रेनिंग देने लगी? सब कुछ बिगाड़ देना चाहती हो मेरी जिंदगी में?

नैना ( झल्लाकर) - तो क्या करूं ऐसा कि सब कुछ ठीक हो जाए । हो गई गलती मुझसे , माफी भी मांग चुकी हूं पर तुम सुनते कहां हो मेरी ?

राजेश - अच्छा तुम्हारी सुनू? मेरी मर्जी , मैं जो चाहे वो करूं। तुम्हारे हिसाब से नहीं चलूंगा ।

रिचा अब उन दोनों को झगडते हुए देख रही थी - हे भगवान, यहां तो दूसरा महाभारत शुरू हो गया । आज तो दिन ही खराब है, इससे अच्छा तो यह दोनों मुझसे मिलने ही नहीं आते ।

इधर राजेश और नैना आपस में बहस कर रहे थे ।

नैना - तुम भी तो अपने दोस्तों का फायदा उठाते हो।

राजेश - बस बहुत बोल लिया तुमने, तुमसे नहीं सीखना मुझे कि कैसे रिश्ते निभाए जाते हैं । कहते हुए वह रिचा का हाथ , पकड उसे साथ ले जाने लगा।

नैना - प्लीज राजेश, अब बस भी करो। छोड़ो रिचा का हाथ, कहां ले जा रहे हो उसे ?

राजेश - तुमसे मतलब ? दूर ले जा रहा हूं तुमसे जिससे कि ये मुझे बता सके कि तुम दोनों ने मिलकर किया क्या है ?

नैना - राजेश तुम ...

अब रिचा गुस्से में चीख कर बोली - बस करो तुम दोनों ?

नैना और राजेश अब हैरानी से रिचा को देखने लगे ।

रिचा - बस , बहुत हो गया नैना । मैं सब कुछ बता रही हूं राजेश को कि तुम्हारी क्या प्लानिंग थी । यह नैना है ना, बहुत चालाक है यह मुझे पहले प्यार से और फिर डराकर बहला फुसला रही थी कि मैं तुमसे शादी तोड़ दूं ।

नैना हैरानी से रिचा को देखने लगी।

रिचा - वह जो मिसेज मल्होत्रा वाली बात किसी और ने नहीं खुद नैना ने मुझे बताई थी । यह मेरे पास पिज़्ज़ा वगैरह , लेकर आए मुझे मक्खन लगाने के लिए कि मैं इसकी बहुत अच्छी दोस्त हूं और मिसेज मल्होत्रा बहुत बुरी है तो तुम कैसे रह पाओगी उनके साथ ? वह चैन से जीने नहीं देंगी ,घर के सारे काम करवाएंगे जब तुम ऑफिस हुआ करोगे ।

राजेश हैरानी से बोला -नैना ने कहा ये सब? कहते हुए वह गुस्से से नैना को देखने लगा।

नैना एकटक रिचा को देख रही थी कि यह क्या कह रही है?

रिचा (रोते हुए) - राजेश यह हमारी शादी तुडवाना चाहती है, इसे मेरी खुशी सहन नहीं हो रही । यह चाहती है कि मैं इसकी मीठी मीठी बातों में आ जाऊं। (रिचा ने चुपके से नैना को चुप रहने का इशारा किया और फिर रोने का नाटक करने लगी)

नैना अब मन ही मन खुश हो गई - अच्छा हुआ वरना मेरा और साहिल का नाटक भी राजेश जल्दी पकड़ लेता ।

राजेश गुस्से नें नैना की ओर देखा - शर्म आनी चाहिए तुम्हें जो दूसरे की जिंदगी में आग लगाने की कोशिश कर रही हो। ऑफिस में तो बड़ा कह रही थी मुझसे कि मैं तुम्हारी खुशी जलता हूं , अब तुम क्या कर रही हो ? याद रखो , रिचा से दूर रहना । उसके दिमाग में कुछ भी उल्टा सीधा भरने की , जरूरत नहीं है तुम्हें ।

नैना - मैंने सच कहा है और कुछ नहीं। वह तुम्हारे साथ कभी खुश नहीं रहेगी और ना ही तुम रहोगे । शादी है भी या नहीं क्योंकि मुझे तो कोई भी तैयारी नहीं दिख रही?

राजेश - तुमसे मतलब? मैं जब चाहूं ,जैसे चाहूं शादी करूं और तुम....

इतने में रिचा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी ।

नैना, राजेश यह देख हैरान रह गये , राजेश ने फटाफट से रिचा को उठाया और बैड पर लेटाया और उसे होश में लाने की कोशिश करने लगा - रिचा, रिचा आँखें खोलो पर उसने आँखें नहीं खोली।

राजेश - इसे क्या हुआ नैना, ये आँखें क्यों नहीं खोल रही?

नैना - मुझे देखने दो, कहते हुए वह रिचा के पास बैठ गई - रिचा, क्या हुआ? पर रिचा अब भी बेहोश थी।

नैना ने अब घबराकर राजेश की ओर देखा - ये तो होश में ही नहीं आ रही है? ये ठीक है ना?

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राजेश (गुस्से में ) - मुझे क्या पता? रूको डाँक्टर को फोन करता हूं अभी - कहते हुए अब वह फोन लगाने लगा।

इधर नैना रिचा के पास बैठी थी कि रिचा ने चुपके से आँखें खोली और नैना को देख हँस दी।

यह देख नैना समझ गई रिचा का नाटक- तुमने तो डरा ही दिया । राजेश अभी फोन लगा ही रहा था कि रिचा ने होश में आने का नाटक किया ।

नैना - क्या हुआ रिचा ? ठीक तो हो? तुम बेहोश कैसे हो गई?

राजेश अब जल्दी से रिचा दे पास आया - डाँक्टर को बुला लेता हूँ, तुम ठीक तो हो ?

रिचा - नहीं उसकी जरूरत नहीं है। मुझे थकान थी और अब तुम लोगों को लड़ते देख बहुत टेंशन हो गई । शायद इसी वजह से ..... मैं बहुत कमजोर महसूस कर रही हूं , सो जाऊंगी तो ठीक हो जाऊंगी।

राजेश हां हां तुम आराम करो ।

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रिचा ने नैना की ओर देखा।

नैना - मैं यही हूं , कहीं नहीं जा रही तुम आराम से सो जाओ।

रिचा - ठीक है ,कहते हुए वापस सोने का नाटक करने लगी।

नैना उठ कर राजेश के पास आई - तुम जाओ, मै यहाँ हूँ इसके पास।

राजेश - मै भी यहीं हूँ, ऐसे अकेले नहीं छोड़ कर जा सकता और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है ।

नैना (हैरानी से ) - मेरी वजह से? मैंने कहा था तुमसे आने को यहां पर ?

राजेश - अच्छा हुआ आ गया, तुम्हारा एक और चेहरा देख लिया मैने।

नैना - क्या चेहरा? मैंने कुछ झूठ नहीं बोला रिचा से। मैं बस उसे सच बताना चाहती थी ,दोस्त है वो मेरी।

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राजेश - बस अब दोबारा शुरू मत हो , मैं बाहर हूं। कोई जरूरत हो तो बता देना - कहते हुए कमरे से बाहर निकल गया ।

राजेश के जाते ही नैना ने फटाफट से कमरे का दरवाजा बंद किया और रिचा की ओर भागी। रिचा भी अब उठ गई और दोनों खुशी से गले मिल गई ।

नैना - यार तूने तो गेम ही ही पलट दिया । सच है कभी-कभी खोटा सिक्का भी काम आ जाता है - कहते हुए वह हँसने लगी।

रिचा - बाल बाल बचे यार वरना आज हम दोनों ती जान आफत में थी।

नैना - सच में पर एक बात बता कि ये आईडिया तेरे दिमाग में आया कैसे?

रिचा - मेरी माँ की वजह से। एक बार पापा किसी बात पर मुझे जोर से डाँट रहे थे , तब माँ ने ऐसे ही बेहोश होने का नाटक कर मुझे उनके गुस्से से बचाया था। माँ की सीख काम आ गई।

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नैना - मै तो घबरा ही गई थी।

रिचा - यह सब छोड़ , तू जा राजेश के पास। मेरी बेवकूफी की वजह से उसका हाथ जल गया। वह अकेला बाहर बैठा है , एक और कोशिश कर उसे मनाने की।

नैना - राजेश गुस्से में है और नाराज भी। पता नहीं मेरी बात सुनेगा भी या नहीं।

रिचा - तो थोड़ी देर बाद चले जाना ।

नैना - नहीं , मुझे जाना है अभी - कहते हुए वह कमरे से बाहर निकल गई।

राजेश गुस्से में बाहर बरामदे में खुले आसमान के नीचे बैठा था कि नैना वहां आ गई। राजेश ने उसे देखा तो दूसरी ओर मुंह फेर लिया।

नैना - देखो , हमारी लड़ाई अपनी जगह है पर तुम्हें चोट लगी है , लाओ दवा लगा दूं ।

राजेश (बेरूखी सें) - कोई जरूरत नहीं है । मै ठीक हूँ।
 
नैना आकर उसके पास बैठ गई - हाँ पता है कि तुम ठीक हो। ये तो मै बस अपनी तसल्ली के लिए लगा रही हूँ- कहते हुए उसने राजेश का हाथ अपने हाथ में लेना चाहा कि राजेश ने अपना हाथ हटा लिया- एक बार में समझ नही आता? मना किया है ना।

नैना (गुस्से से ) - हर बार तुम्हारी नहीं चलेगी। चुपचाप लगवा लो दवा वरना..

राजेश - वरना क्या? ये धमकी किसी और को दो जाकर।

नैना - हम्म तो ठीक है, मै अभी मिसेज मल्होत्रा को फोन कर बता देती हू कि मैं ही तुम्हारी काँलेज वाली ...

राजेश - पागल हो गई हो? कौन भला अपने पैर पर कुल्हाडी मार रही हो?

नैना - तुम्हें क्या फर्क पडता है?कहते हुए उसने राजेश के पास रखा उसका फोन उठा लिया कि राजेश ने उसे वापस झटके से वापस छीन लिया- मेरे फोन को हाथ भी कैसे लगाया तुमने?

, नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी - ऐसा भी क्या हो गया ?

राजेश - कुछ नही।

नैना (मुस्कराते हुए) - पहले ही मान जाते प्यार से तो ऐसा कहने की जरूरत नहीं पडती।

राजेश (हैरानी से ) - कमाल हो तुम भी। दर्द भी तुम ही देती हो और दवा भी तुम ही लगाती हो ।

नैना - तुम गलत समझ रहे हो , इस बार दर्द मैनें नहीं तुम्हारी मंगेतर ने दिया है तुम्हें । मैं तो तुम्हारी भलाई चाहती हूं ।

राजेश - बस, मुझे इस बारे में और कोई बात नहीं करनी है ।

नैना - सही कहा था मैंने , तुम बात बात पर मुँह फुलाते हो।

राजेश - मैं मुँह फुलाता हूं ?

नैना - और नहीं तो क्या देखो तो ? हाथ जल गया है , मैं बस इतना ही कह रही हूं कि लाओ दवा लगा दूं पर तुम इससे भी गुस्सा हो रहे हो ?

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राजेश अब चुप हो गया।

नैना ने अब फिर से राजेश का हाथ अपने हाथों में लिया पर राजेश ने फिर हाथ खींच लिया।

नैना - लगा दूं ? दर्द हो रहा होगा ना ? अब रिचा होश में होती तो वह लगा देती पर अब मुझसे ही काम चला लो - कहते हुए वह मुस्कुराने लगी। वैसे अब चोट वगैरह की आदत डाल लो क्योंकि तुम रिचा से शादी जो करने वाले हो। अब तो यह रोज का होगा , रोज घर में कुछ ना कुछ टूटेगा ही और अगर कोई कसर बची तो फिर वह तुमसे पूरी की जाएगी । आज केवल हाथ जला कर ट्रेलर दिया है , शादी के बाद पता नहीं क्या पिक्चर दिखाएगी। मेरी मानो तो अब एक हेलमेट और डाल कर रखा करो सर पर , पता नहीं उसका अगला निशाना तुम्हारा सर ही हो- कहते हुए नैना जोर से हंस पड़ी ।

राजेश को भी हंसी आ रही थी पर वह हँसना नहीं चाहता था, वह दूसरी ओर मुँह कर मुस्कुराने लगा।

नैना - लाओ भी हाथ दो?

राजेश ने हाथ आगे बढ़ा दिया।

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नैना राजेश के हाथ पर दवा लगाने लगी - अगर तुम ऐसे बात बात गुस्सा करोगे तो रिचा तो क्या कोई भी लडकी वैसे भी शादी से मना कर देगी और मुझे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

राजेश - क्या मैं पहले भी ऐसा ही था ?

नैना (मुस्कराते हुए) - नहीं, पहले तुम गुस्सा ना के बराबर करते थे लेकिन अब तो तुम्हारे नाक पर गुस्सा रखा रहता है।

राजेश थोड़ी देर तक नैना को खामोश सा देखता रहा फिर मुस्कराते हुए बोला - तो फिर तुमने मुझे तब क्यों छोड़ दिया? तब तो मै गुस्सा भी नहीं होता था ।

नैना ने यह सुनकर राजेश की ओर देखा तो वह उसे ही देख रहा था । नैना अब उदास हो गई।

राजेश (मुस्कुराते हुए)- मैं भी पता नहीं गड़े मुर्दे उखाड़ने बैठ गया ।

नैना सही कह रहे हो , भूल जाओ सब कुछ और एक नई शुरुआत करो जिंदगी की । पहले जो हुआ, उसे गलती समझ , कर माफ कर दो ।

राजेश - गलती वह होती है जो अनजाने में हो, जिसे पूरे होशो हवास में किया जाए वह गुनाह है और अगर गुनाह वह करें जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हो तो वह भुलाए नहीं भूलता - कहते हुए राजेश ने नैना को देखा। नैना की आँखें नम थी।

राजेश ( नाराजगी से) - बड़ा हैरान हो जाता हूं यह देखकर कि आज भी तुम्हें मेरे दर्द से फर्क पड़ता है । क्या यह सच है या कोई दिखावा? पल भर में तुम कुछ और होती हो और अगले ही पल कुछ और - कहते हुए राजेश ने उसके हाथों से अपना हाथ हटा लिया । मै इन सब से पिघलने वाला नहीं।

राजेश की बेरूखी से नैना की आँखों से आँसू बह निकले, यह देख राजेश की आँखें भर आई और उसने दूसरी ओर मुँह फेर लिया । दोनों ना जाने कितनी देर तक अब यूँ ही चुपचाप बैठे रहे।

राजेश अब उठा और अंदर की ओर बढा - रिचा को किसी चीज की जरूरत हो तो बताना।

, नैना - तुम घर चले जाओ , वहां सुकून से थोड़ा आराम करो, मैं यहां हूं ।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - पता नहीं , यह सुकून कभी मेरी जिंदगी में आएगा भी या नहीं।मैं यहीं ठीक हूं । कल सुबह जल्दी निकल जाऊंगा यहां से ।

नैना - जैसा तुम्हें ठीक लगे ।

नैना उदास सी रिचा के पास आ गई ।

रिचा - क्या हुआ ? उदास क्यों हो ?

नैना अब उसकी गोद मे सर रख कर रोने लगी -मुझे आज राजेश की नजरों में अपने लिए नफरत दिखी। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने बहुत देर कर दी है और मैंने उसे सच में खो दिया?

रिचा ( मुस्कुराते हुए ) - तुम्हें जो राजेश की आंखों में दिखा, वह नफरत नहीं गुस्सा है ।अब जहां प्यार गहरा हो तो गुस्सा भी लेट ही जाएगा । तू बस हार मत मानना। तुम दोनों के प्यार को शुरू से देखा है मैंने, तुम दोनों बस एक दूसरे के , लिए ही बने हो । जब मेरे जैसे झल्ली यह बात समझ सकती है तो तुम क्यों नहीं और वैसे आज तो तू भी झल्ली हो गई। कैसे दौड़ कर आई तू राजेश के पास आज मरते-मरते बचे हैं हम ।

नैना के चेहरे पर मुस्कान तैर गई - हाँ, माँ की सीख की वजह से ।

उधर राजेश सोच रहा था कि कुछ गड़बड़ तो है , मेरा मन नहीं मानता । लगता है मैंने जो सोचा था, वह करना ही पड़ेगा लेकिन विशाल के आने तक रुकना होगा क्योंकि इतना बडा कदम उठाने से पहले उसकी हाँ जरूरी है।

सुबह सभी ऑफिस में अपने अपने काम पर लग गए।

साहिल - नैना , क्या बात है? कुछ बुझी बुझी सी लग रही हो।

नैना - हां ,वह रात को ढंग से नींद नहीं आई ।

साहिल - तो चलो , तुम आराम करो ।आज मैं तुम्हारे हिस्से का काम कर दूंगा।

नैना (हंसते हुए ) - नहीं , तुम बताओ कल तुम शाम को कहां , गए थे ?

साहिल - मैं तो अपने पुराने दोस्त से मिलने गया था , काफी अच्छी गुजरी शाम मेरी - कहकर साहिल मुस्कुराने लगा।

नैना अच्छा तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है ?

साहिल - एक है जिससे एक तरफा मोहब्बत है पर कभी कह नहीं पाया।

नैना (हैरानी से ) - क्यों ?

साहिल - पहले हिम्मत नहीं थी ,अब हिम्मत है तो समय खराब चल रहा है ।

नैना - अगर तुमने उसे प्रपोज किया और उसने मना कर दिया तो ?

साहिल - करे तो करे फिर हम भी कहीं दूर हिमालय की वादियों में चले जाएंगे ।

साहिल और नैना हँसने लगे।

, तभी सारा वहां आई - यार नैना , यह कुछ फाइल है जो राजेश सर ने कहा है कि एक बार तुम चेक कर लो , वह तभी साइन करेंगे ।

नैना - ठीक है ,लाओ ।

अंदर राजेश कैबिन में बैठा काम कर रहा था कि विशाल वहां पहुंचा - कैसे हो यार?

राजेश - ठीक । तुम बताओ ? कब आए ?

विशाल - 2 घंटे पहले । घर पर मन ही नहीं लग रहा था तो यहां आ गया। यह क्या सुन रहा हूं मैं मिसेज मल्होत्रा के बारे में ?

राजेश - सही सुना ।

विशाल (गहरी सांस लेकर ) - यह यहां भी आ गई, इनको जरा भी चैन नहीं है । जब तक तुम से लड़ ना लें , इनका खाना हजम नहीं होता ।

राजेश - विशाल एक बात कहूं ?

, विशाल - हां ।

राजेश - तुम कुछ छुपा तो नहीं रहे मुझसे ?

विशाल ( हैरानी से ) - ऐसा क्यों लगा तुम्हें ?

राजेश - बहुत सवाल है दिमाग में पर जवाब नहीं मिल रहे ।

रिचा पक्का कुछ गड़बड़ कर रही है , तुम्हें क्या लगता है कि उसकी तबीयत सच में खराब है ?

विशाल - अब यार ,यह मैं कैसे बता सकता हूं ?

राजेश - तो ठीक है । अब सबसे पहले इस रिचा को ही तोड़ना है , तभी कुछ तस्वीर साफ होगी।

विशाल - यार कुछ उल्टा सीधा ....

राजेश (हंसकर ) - घबराओ नहीं , तुमसे पहले मेरी दोस्त है वो। राजेश ने अब कल का पूरा किस्सा उसे कह सुनाया ।

विशाल - यह हो क्या रहा है, सब कुछ उथल पुथल हो रहा है।

, राजेश - पता नहीं क्या होगा ?

नैना अब सारी फाइल चेक कर राजेश के पास ले आई। उसे यह नहीं पता था कि साहिल ने उनमें से एक फाइल निकाल कर रख ली थी ।

राजेश ने सारी फाइलें बिना देखे ही साइन कर दी, यह साहिल चुपके से देख रहा था । वह जानता था कि आज दोपहर को राजेश की मीटिंग है , तभी वह कोशिश करेगा।
 
दोपहर को जब मीटिंग का टाइम हुआ तो साहिल ने उस एक फाइल में मिसेज मल्होत्रा वाले पेपर सबसे पीछे लगाकर नैना को देते हुए कहा - अरे एक ये फाइल रह गयी है । जल्दी से जाकर साइन करवा लो ।

नैना अब जल्दी से फाइल लेकर राजेश के कैबिन की ओर बढ़ी कि राजेश केबिन से बाहर निकलकर मीटिंग रूम के लिए जाने लगा।

नैना - यह एक फाइल रह गई थी बस 2 मिनट लगेंगे ।

राजेश (खींझते हुए ) -पहले ध्यान नहीं रख सकती थी ?, जल्दी दो ।

साहिल अब उन से कुछ ही दूरी पर खड़ा हो उन्हें देख रहा था ।

राजेश फाइल पर साइन करने लगा ।

नैना - साँरी, ये टेबल पर छूट गई थी पता नहीं कैसे । अभी साहिल को मिली तो उसने मुझे दी।

साहिल का नाम सुनते ही अब राजेश ने साइन करना बंद कर दिया और साहिल की ओर सवालिया नजरो से देखने लगा

अब साहिल मन ही मन थोड़ा घबरा गया कि कहीं राजेश इन पेपर्स को ना देख ले।

राजेश ने अब फाईल को शुरू से पढ़ना शुरू कर दिया...,

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साहिल राजेश को फाईल पढते देख घबरा गया कि अगर इसने यह फाइल पढ ली तो सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा - मेरा काम भी और रिया भी । क्या करूं ? कैसे रुकूं इसे फाइल पढने से ।

तभी विशाल वहां आया - चलो राजेश, मीटिंग है ।

राजेश - तुम चलो, मैं अभी आता हूं कहते हुए वह वापस फाइल चेक करने लगा ।

नैना - मैंने फाइल चेक कर ली है, तुम आराम से साइन कर सकते हो।

राजेश - पर मुझे तुम पर भरोसा नहीं ।

यह सुनकर नैना अब उदास हो गई ।राजेश अब उन पेपर्स से कुछ ही पेज दूर था कि साहिल आगे बढ़कर नैना के पास आ खड़ा हुआ और उसने नैना के हाथ को अपने हाथ में थाम लिया ।

नैना अब हैरानी से साहिल को देखने लगी तो साहिल ने उसे राजेश की तरफ देखने को इशारा किया । नैना ने अब राजेश की तरफ देखा जो अभी भी फाइल पढ़ रहा था। राजेश का ध्यान अब नैना और साहिल के हाथों पर गया तो वह गुस्से से नैना की ओर देखा।

नैना ने बड़े भोलेपन से उसे एक मुस्कान दी - कुछ परेशानी है सर?

राजेश गुस्से से नैना के हाथ को देखने लगा पर नैना ने साहिल से अपना हाथ अलग नहीं किया ।

साहिल - नैना , शाम को क्या कर रही हो ?

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नैना ( राजेश की ओर देखते हुए) - फ्री हूं ।

साहिल - तो चलो कहीं पास ही में घूमने का प्लान बनाते हैं।

नैना - ठीक है, मैं तैयार हूं ।

राजेश को अब वहाँ खड़ा होना बहुत भारी महसूस होने लगा, उसने गुस्से में बाकी बचे पेपर्स पर भी बिना पढ़े साइन किए और नैना को फाइल एक झटके से पकड़ा कर वहां से निकल गया ।

साहिल की अब जान में जान आई ।

नैना - साहिल तुमने तो डरा ही दिया था एक बार को मुझे।

साहिल - देखो कितना बुरा लग रहा था उसे हम दोनों को हाथ पकड़े देख और कहता है कि प्यार नहीं करता - कहते हुए साहिल ने नैना के हाथ से फाइल ले ली। लाओ, इसे मैं रख देता हूं ।

नैना उदास होकर बोली - मुझे अच्छा नहीं लगता राजेश को , तंग करना । वह पहले से ही मिसेज मल्होत्रा की वजह से परेशान है ।

साहिल - तुम टेंशन मत लो , सब ठीक हो जाएगा । बस एक बार राजेश मान जाए । दोनों बातें करते हुए अपनी टेबल पर आ बैठे। साहिल ने अब चुपके से वह पेपर फाइल से निकाल अपने बैग में रख लिए और फाइल को नैना के पास टेबल पर रख दिया। तुम बैठो, मैं अभी आया - कहकर वो मुस्कुराता हुआ वहां से चला गया ।

अकेले में जाकर उसने मिसेज मल्होत्रा को फोन किया - आपका काम हो गया है मैम ।

मिसेज मल्होत्रा (हैरानी से ) -हो गया ? इतनी जल्दी ?

साहिल - यह तो मैंने भी नहीं सोचा था लेकिन सब कुछ बड़ी आसानी से हो गया ।

मिसेज मल्होत्रा - राजेश को शक तो नहीं हुआ ?

साहिल- नहीं ।

मिसेज मल्होत्रा - वह पेपर्स कहां है ?

, साहिल - मेरे पास मेरे बैग में, बताइए कहां दू आपको आकर?

मिसेज मल्होत्रा - तुम कहीं मत आओ , मैं खुद वहां पहुंच रही हूं कुछ घंटों में रिया को लेकर । आज पहली दरार डालने का वक्त आ गया है इन भाई बहन के रिश्ते में ।

उधर राजेश और विशाल अपनी मीटिंग में बिजी थे । राजेश इस बात से बेखबर था कि अनजाने में ही सही , उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है ।

सारा और नैना आपस में बातें कर रहे थे । नैना ने सारा को बताया कि कैसे वह कल बाल-बाल राजेश के सामने रंगे हाथों पकड़े जाने से बची।

सारा - राजेश सर, एकदम शांत है । शादी में बस कुछ ही दिन बचे हैं और उन्हें देखकर लगता नहीं है कि उनकी नाराजगी खत्म हो गई है ।

नैना - वह तो है लेकिन राज फँस चुका है , उसे अब कुछ ही दिनों में अपना और रिचा के रिश्ते का झूठ मानना ही पड़ेगा।

सारा - उम्मीद तो यही है यार ।

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दोपहर का वक्त था, राजेश और विशाल अपनी मीटिंग से बाहर आ चुके थे । दोनों आपस में कुछ बातें करते आ रहे थे कि नैना को सामने से आता देख दोनों चुप हो गए और राजेश के केबिन में चले गए ।

नैना को यह देख अब उन पर शक हुआ कि आखिर दोनों ऐसी क्या बात कर रहे थे , जो मुझे देख कर चुप हो गए । नैना अब जाकर अपनी टेबल पर बैठ गई और टेंशन में आ गई ।

उसके पास ही बैठे साहिल ने जब उसे परेशान देखा तो बोला - क्या हुआ?

नैना - कुछ नहीं।

साहिल ने अब सारा को इशारा किया ।

सारा - बात क्या है ? कुछ तो कहो?

नैना अब कुछ देर शांत रही फिर बोली - यह विशाल और राजेश में कुछ खिचड़ी जरूर पक रही है , अभी थोड़ी देर पहले मुझे देखकर बात करना बंद कर एकदम से चुप हो गए , थे । पता नहीं क्या इनके दिमाग में चल रहा है ?

साहिल मन ही मन सोचने लगा - थोड़ी देर की बात है फिर यह कुछ करने लायक रहेगा ही कहां , एक जोर का झटका जो लगेगा - ऐसे सोचते ही साहिल मुस्कुरा दिया।

सारा ( साहिल को मुस्कुराते हुए देख) - यहां नैना परेशान है और तुम मुस्कुरा रहे हो ? ऐसा क्या मिल गया तुम्हें ?

साहिल - कुछ नहीं , मैं सोच रहा था कि नैना कितना प्यार करती है राजेश से जो जरा जरा सी बात पर परेशान हो जाती है उसके लिए ।

सारा - हम्म , अब यहां ध्यान दो । यह कैसे पता लगाएं कि करना क्या है ।

नैना - सारा तुम एक काम करो , किसी बहाने से उनके केबिन में जाओ और देखो कि क्या बात कर रहे हैं ?

सारा (घबराकर) - मैं ? मैं कैसे जाऊं ?

साहिल - मैं बताता हूं , सुनो मेरा प्लान ।

, उसने सारा को कुछ समझाया , यह सुनते ही सारा और नैना दोनों मुस्कुराने लगे ।

राजेश और विशाल आपस में कुछ बात कर ही रहे थे कि सारा वहां आ गई ।

राजेश - हां बोलो ।

सारा अब राजेश की टेबल के पास जाकर खड़ी हुई - आपने बुलाया सर?

राजेश ( हैरानी से ) - मैंने ? मैंने कब बुलाया ?

सारा - वह जगन ने कहा , लगता है कोई गलती हो गई उससे - कहते हुए वापस बाहर चली गई ।

बाहर आकर सारा ने बताया कि साहिल के कहने पर वह अपना फोन वहां आँन कर छोड़ आई है ।

साहिल ने अपने फोन का स्पीकर ऑन किया - राजेश तुमने वकील से बात कर ली ना?

विशाल - हां पेपर्स आज शाम तक मिल जाएंगे - कहते हुए , उदास हो गया ।

राजेश - उदास क्यों हो? बस कुछ दिन की बात है । क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं ? मै तुम्हारी अमानत को सम्भाल कर रखूंगा ।

विशाल (मुस्कुराकर ) - तुम पर तो मुझे खुद से ज्यादा भरोसा है ।

राजेश - तो ठीक है फिर, और सुनो यह बात सिर्फ हम दोनों के बीच में ही रहनी चाहिए।

विशाल - समझ रहा हूं ।

अब विशाल केबिन से बाहर निकल गया ।

नैना यह क्या बात कर रहे थे ? कुछ समझ नहीं आया।

सारा - इतना तो पक्का है कि यह दोनों दोस्त मिलकर कुछ कांड करने वाले हैं यार ।

नैना - कैसे पता करूं कि क्या चल रहा है इनका?

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साहिल - तुम रिचा से पूछो , क्या पता उसे कुछ जानकारी हो?

नैना ने अब रिचा को फोन मिलाया पर उसने फोन नहीं उठाया ।

सारा कोई बात नहीं , इनका प्लान कल का है । तुम शाम को फिर फोन करके देख लेना ।

साहिल - सारा जाओ ,अपना फोन ले आओ ।

सारा अपना फोन लेने राजेश के कैबिन में गई - सर मेरा फोन रह गया था - कहते हुए उसने फोन उठाया और चली गई।

राजेश अब थोड़ा परेशान हो गया यह देख कि कहीं इन्हें मेरे प्लान की भनक तो नहीं लग गई ? इससे पहले कि ये कुछ करें , मुझे ही कुछ करना होगा ।

राजेश ने अब विशालको मैसेज किया - तुम तैयार रहना , मैं अपना काम शुरू कर रहा हूं । अब तुम्हारी बारी है । राजेश केबिन से बाहर निकला और सारे स्टाफ को एक साथ कॉन्फ्रेंस हॉल में आने को कहा ।

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सभी लोग अब कॉन्फ्रेंस हॉल में जमा हुए , राजेश ने विशाल को मीटिंग आगे बढ़ाने को कहा और अपनी सीट पर ना बैठते हुए जाकर सारा के बगल वाली खाली सीट पर बैठ गया । सारा यह भी खुशी से फूली नहीं समा रही थी क्योंकि एक सीट नैना के बगल में भी खाली थी पर राजेश बस उसी के पास आकर बैठा था ।
 
राजेश को अब महसूस हुआ कि सारा उसे ही देख रही है, उसने राजेश ने सारा की ओर देखा और एक बड़ी ही प्यारी सी स्माइल दी । यह देख सारा तो बस खुशी के मारे बेहोशी होने वाली थी कि दूसरी तरफ से नैना ने उसे ज़ोर से कोहनी मारी । सारा अब बुरा सा मुंह बनाने लगी नैना को देख ।

इन दोनों दोस्तों की हरकतों को देख राजेश अब मुस्कुराए बिना नहीं रह सका । नैना ने अब साहिल को इशारे से अपने पास वाली सीट पर बुला लिया और राजेश को गुस्से में देखने लगी पर राजेश ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं देखा।

विशाल सभी को नए प्रोजेक्ट के बारे में डिटेल दे रहा था पर उसका ध्यान राजेश की ओर था । सभी उसे सुन रहे थे सिवाय साहिल , नैना ,,सारा और राजेश के। साहिल बार-बार , अपने घड़ी देख रहा था कि पता नहीं मिसेज मल्होत्रा कहां रह गई।

नैना अब राजेश के सारा को अटेंशन देने पर अंदर ही अंदर जल भुन रही थी । राजेश बार-बार धीरे से सारा के कान में कुछ कहता और सारा तो बस मुस्कुराए जा रही थी।

नैना मन ही मन बड़बडाने लगी - पता नहीं , ऐसी कौन सी बातें हो रही है इनकी जो बंद ही नहीं हो रही ।

राजेश ने कुछ देर में विशाल को मीटिंग खत्म करने का इशारा किया और नैना को पूरी तरह इग्नोर कर वहां से चला गया । राजेश अपने कैबिन में आ गया और बड़े आराम से सोफे पर जाकर बैठ गया - मिस नैना शर्मा , अब मैं बताता हूं तुम्हें कि राजेश के साथ आंख मिचोली खेलने की क्या सजा होती है ?

साहिल मीटिंग से बाहर निकलते हुए - नैना मैं तुम्हें बता रहा हूं यह लड़की सारा ठीक नहीं है । तुमने देखा कि राजेश ने कैसे इसे एक पल में ही अपने कंट्रोल में कर लिया? अरे यह तो ऐसी पागल है कि अगर उसने इसे थोड़ा और बडावा दिया तो यह हमारे कामों की लिस्ट बनाकर राजेश को सौंप देगी।

, सारा - क्या यार साहिल , तुम ना राजेश सर से जलते हो क्योंकि तुम उनसे हमेशा 19 ही रहोगे । अरे अगर उनके साथ थोड़ा बहुत हंसी तो क्या हो गया?

नैना (हैरानी से ) -थोड़ा बहुत ? आधे घंटे की मीटिंग में तुम 1 घंटे के बराबर मुस्कुराई हो । वैसे ऐसा क्या कह रहे थे वह तुमसे ?

सारा - कुछ नहीं , कुछ भी तो नहीं।

नैना (गुस्से से )- तुम मेरी तरफ हो या उसकी तरफ?

सारा -यार मैं ना ..

साहिल - रहने दो नैना, यह हमारी तरफ तब तक है जब तक राजेश चाहता है। सारा भूलना मत, राजेश सिर्फ नैना का है तो अब तुम और उलझन मत बढ़ाओ ।

सारा (गुस्से में ) - अरे अगर उन्होंने मुझसे थोड़ी देर बात कर भी ली तो ऐसा क्या गजब हो गया ? अब अगर वह किसी भी लड़की से ऐसे प्यार से बात करेंगे तो भला कोई कैसे मना करेगी ? मै भी नहीं कर पाई बस। यह अच्छा है यार नैना, , तुम उन पर कंट्रोल क्यों नहीं रखती कि मेरे अलावा और किसी लड़की से बात मत किया करो । तुम ना एक काम करो, राजेश सर के गले में बोर्ड टांगो कि वो नैना की प्रॉपर्टी है, सभी इनसे दूर रहे - कहते हुए सारा वहां से नाराज हो कर चली गई।

नैना - हे भगवान, क्या करूं इसका ? मुझे लग रहा है कि राजेश ने जानबूझकर किया है यह कि हम आपस में लड़ाई करें, वह बस हमारा ध्यान भटकाना चाहता है । एक बार पहले भी सारा को अटेंशन देकर मुझे परेशान कर चुका है वो।

साहिल - हाँ, हो सकता है। चलो चल कर पहले तुम्हारी पागल दोस्त समझाते हैं कि राजेश इसे इस्तेमाल कर रहा है।

नैना और साहिल के जाने के बाद उनसे पीछे कुछ ही दूर पर खड़ा विशाल मुस्कुरा दिया - कमाल कर दिया यार राजेश, एक तीर से दो शिकार । विशाल ने राजेश को मैसेज कर दिया - बिल्कुल वही हुआ , जैसा तुम चाहते हो।

राजेश अब आराम से सोफे पर बैठा मुस्कुरा रहा था - अब देखता हूं कि तुम दोस्तों की दोस्ती कब तक टिकती है ? तुम यहां उलझे रहो और वहां मैं कल अपना काम कर दूंगा। वह , उठकर केबिन से बाहर निकला। उसने देखा कि सारा नाराज बैठी है और साहिल,नैना उसके पास खड़े उसे समझाने की कोशिश कर रहे हैं ।

राजेश ( मुस्कुराते हुए) - सारा 1 मिनट में केबिन में आओ ।सारा राजेश के साथ केबिन में आ गई ।

राजेश - बैठो ।

सारा उदास सी चेयर पर बैठ गई राजेश उसके पास ही टेबल पर बैठ गया - क्या बात है सारा, तुम कुछ उदास लग रही हो?

सारा - कुछ नहीं सर , मैं ठीक हूं।

राजेश ने अब अपनी मेज पर रखा पानी का ग्लास सारा की ओर बढ़ा दिया - नैना से लड़ाई हुई?

सारा पानी पीकर बोली - कोई समझता ही नहीं है मुझे।

राजेश कोई बात नहीं , होता है ऐसा तो क्या सोचा है तुमने?

सारा ( शर्माते हुए ) - सर आप मजाक कर रहे हैं ना?

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राजेश (मुस्कुराकर ) - यही तो परेशानी है तुम खूबसूरत लड़कियों की कि हर बात मजाक लगती है ।

सारा खुद के लिए खूबसूरत शब्द सुनकर बस बेहोशी होने वाली थी कि राजेश की आवाज आई - मैं तुम्हें खुद पिक कर लूंगा शाम को । थोड़ा बैठते हैं एक साथ, गपशप करते हैं। एक तुम ही तो हो जिससे बात करके मेरा मन हल्का हो जाता है । तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं है ना ?

सारा - नहीं , बिल्कुल नहीं । मैं तैयार रहूंगी सर ।

राजेश - अच्छा तुम अभी जाओ वरना तुम्हारे दोस्त बेवजह शक करेंगे ।

सारा के चेहरे पर मुस्कुराहट हटने का नाम ही नहीं ले रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की वही है और राजेश सर ने भी तो कहा है कि सिर्फ मुझसे बात करके उनका मन हल्का हो जाता है। सारा अब ऐसे ही मुस्कुराते हुए कैबिन से बाहर आ गई और अपनी सीट पर बैठ गई है।

नैना साहिल उसे ही देख रहे थे।

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नैना - यह तो गई काम से ।

साहिल - राजेश ने ऐसा दांव खेला है कि हम बस तमाशा देखने के सिवाय कुछ और नहीं कर सकते हैं । पता नहीं क्या बातें हो रही हैं इनकी ।

साहिल ने अब रिया और मिसेज मल्होत्रा को ऑफिस आते देखा तो वह अंदर ही अंदर खुश हो गया कि चलो अब हमारे खेलने की बारी शुरु ।

राजेश अब कैबिन में बैठा कुछ सोच ही रहा था कि रिया ने दरवाजे पर दस्तक दी ।

राजेश - कम इन।

रिया अंदर आते हुए - भूल गए ना अपनी बहन को, कल से मिले ही नहीं ।

राजेश (मुस्कुरा कर) - मैंने मैसेज छोड़ा था रात को ।

रिया - हां तो अब आप अपने बिजी शेड्यूल से 1 दिन सिर्फ मेरे निकाल लो फिर हम दोनों भाई बहन साथ घूमेंगे और ढेर , सारी मस्ती करेंगे ।

राजेश - जरूर।

रिया - तो कल का दिन फाइनल करें ?

राजेश - नहीं ,कल नहीं ।कल मुझे बहुत जरुरी काम है ।

रिया - अच्छा भाई , मॉम आई है। विशाल भाई के कैबिन में है, कुछ काम है उनसे ।

राजेश (गुस्से से ) - काम बाद में भी तो हो सकता था , क्या जरूरत है इन्हें यहां बार बार आने की।

रिया अब चुप हो गई । इतने में साहिल वहां आया -राजेश आज वाली मीटिंग की सारी डिटेल्स मैंने तुम्हें मेल कर दी है - कहते हुए उसने रिया को देखा और अगले ही पल राजेश की तरफ देखने लगा।

साहिल - मैं चलता हूं ।

राजेश (मुस्कुरा कर) - ऐसे कैसे ? जरा बैठो तो । तुमसे कुछ बात करनी है।

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साहिल अब वही रिया के बगल वाली कुर्सी पर बैठ, गया, वह अब थोड़ा घबरा रहा था ।

राजेश चुपचाप उसे ही देख रहा था कि किस तरह उसके चेहरे के हावभाव बदल रहे हैं ।

राजेश - क्या हुआ साहिल? तुम ठीक तो हो ?

साहिल - हां हां ,मैं ठीक हूं ।

रिया अब चुपचाप अपने मोबाइल में लगी हुई थी ।

राजेश- इससे मिलो ,मेरी छोटी बहन रिया ।

साहिल ( मुस्कुराकर) - हेलो ।

रिया - हलो। उसने ने अब देखा कि राजेश तो सब जानता है फिर ऐसा कैसे कह रहा है ?

राजेश - तुम दोनों तो मिल ही चुके हो एक दूसरे से कुछ साल पहले ।

, अब रिया ने हां और साहिल ने ना में जवाब दिया फिर दोनों एक दूसरे को देखने लगे ।

रिया -मैं आपसे मिल चुकी हूं कॉलेज में ।आप सीनियर थे मेरे।

साहिल - नहीं ,मुझे तो याद नही।

राजेश - मैं याद दिला देता हूं कि तुम दोनों ने डीआरएस कॉलेज में पढ़ाई की है । साहिल रिया का सुपर सीनियर था। एक दिन तुम दोनों अच्छे से मिले हो । तुम्हें याद है ना साहिल कि तुम एक लड़के से टकराकर मेरी बहन के पैरों में जाकर गिरे थे - कहते हुए राजेश का लहजा थोड़ा सख्त हो गया।

साहिल अब हैरानी से राजेश को देखे जा रहा था कि आखिर यह इतना सच कैसे जानता है ?
 
राजेश - तुम्हारे हाथ में एक लव लेटर था जो रिया ने तुम्हें उठा कर दिया था , कुछ याद आया ?

साहिल - हां याद आया , मैं तो बिल्कुल भूल ही गया था। तुमने याद दिलाया , तब जाकर अब याद आया है कि वह , रिया थी। कितना अजीब इत्तेफाक है ना - कहकर वह मुस्कुराने लगा ।

रिया को अब राजेश ने बाहर जाने का इशारा किया , वह उठकर केबिन से बाहर चली गई ।

राजेश - तो चलो साहिल, तुम्हें कुछ और भी याद दिला दिया जाए । उस दिन तुम्हें मिसेज मल्होत्रा भी मिली थी ?

साहिल -हां ,सही कहा । इन दोनों से मैं एक साथ ही मिला था, वह भी एक बार। अब इतना याद कहां रहता है ?

राजेश( हंसते हुए ) - अब यह मत कहना कि तुम्हें यह भी याद नहीं कि मिसेज मल्होत्रा ने तुम्हें बीच सड़क रोक कर कितना जलील किया था।

साहिल (गुस्से में ) - तो तुम इतना जान ही गए मेरे बारे में।

राजेश (मुस्कुरा कर) - जान तो बहुत कुछ चुका हूं पर सही वक्त का इंतजार है ।

साहिल - कितना भी जानते हो पर रोक नहीं पाओगे मुझे । जो करने आया हूं , वह करके ही जाऊंगा । तुम्हें तोडूंगा और , नैना को अपने साथ ले जाऊंगा

राजेश या सुनकर हंसने लगा ।

साहिल हैरानी से उसे देखने लगा - हंस क्यों रहे हो ?

राजेश अब शांत होकर उसे देखने लगा और बोला - माफ करना दोस्त ,तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। ना तुम मुझे तोड़ पाओगे, ना ही तुम नैना को यहां से ले जा पाओगे और ना ही...

साहिल सवालिया नजरों से राजेश को देखने लगा - और?

राजेश ( गुस्से में - और ना ही रिया तुम्हें मिलेगी ।

रिया का नाम सुनते ही साहिल हैरानी से राजेश को देखने लगा ।

राजेश के चेहरे पर अब गुस्सा बढने लगने लगा था - हाँ, नैना और रिया यह दोनों मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है और यही दोनों मेरी सबसे बड़ी ताकत भी है । बहुत हो गया तुम्हारा यह खेल , अब अपना सामान बाँधना शुरू कर दो क्योंकि बहुत , जल्द वापस भेजने वाला हूं तुम्हें।

साहिल (हैरानी से ) - तुम्हें कैसे पता कि ...

राजेश - तुम्हारे दोस्त हैं कुछ बेंगलुरु में , बस उनसे ही पता कर लिया । तुम्हें क्या लगा कि बस तुम ही मेरे बारे में पता लगा सकते हो ?

साहिर अब गंभीर होकर बोला - मैं रिया से बहुत प्यार करता हूं ।

राजेश गुस्से में उसके पास आ गया - खबरदार जो अपनी गंदी जुबान से मेरी बहन का नाम लिया तो।

साहिल ( मुस्कुराकर ) - अब तुम जान ही गए हो तो सुन लो, मैं रिया और नैना दोनों को यहां से बहुत दूर ले जाऊंगा। रिया मेरी लाइफ पार्टनर बनेगी और नैना को तुम कभी नहीं ढूंढ नहीं पाओगे ।

राजेश ने अब गुस्से में साहिल को कॉलर पकड़ एक ही झटके से कुर्सी से उठा लिया - मेरी बहन की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो .. कि तभी मिसेज मल्होत्रा विशाल और रिया के साथ वहां केबिन में आ गई ।

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मिसेज मल्होत्रा - क्या हो रहा है यहां ?

रिया और विशाल हैरान से उन दोनों को देख रहे थे ।

राजेश मिसेज मल्होत्रा के सामने कोई तमाशा नहीं बनाना चाहता था , उसने अब साहिल का कॉलर छोड़ दिया और पीछे हट गया।

रिया ( हैरानी से ) - भाई यह सब..

राजेश - कुछ नहीं , तुम दूर रहो इन सबसे । जाओ यहां से।

रिया अब वापस जाने को हुई कि मिसेज मल्होत्रा ने उसका हाथ पकड़ा - तुम यहीं रुको रिया।

साहिल ने अपना काँलर ठीक किया ।

मिसेज मल्होत्रा - राजेश तुम अब गुंडागर्दी भी करने लगे।

साहिल ( मुस्कुराकर) - सॉरी मैम, ऐसा कुछ नहीं है । यह तो हम दोस्तों की बीच की बात है , होता रहता है ऐसा दोस्ती में -कहते हुए वह केबिन से बाहर चला गया और मन से कैबिन , का दरवाजा खोल दिया ।

मिसेज मल्होत्रा सोचने लगी कि कैसे साहिल ने मौका देखकर चुपके से वह पेपर्स उन्हें लिफ्ट में थमा दिये थे और जब उन्होंने उन्हें खोलकर देखा तो उसमें राजेश के साइन देखकर खुशी से फूली न समाई । उन्होंने साहिल से कहा कि कैसे भी करके राजेश के केबिन का दरवाजा खोल देना मौका मिलते ही जिससे सारा स्टाफ राजेश की बेइज्जती देखें ।

मिसेज मल्होत्रा ने अब जैसे ही कैबिन का खुला दरवाजा देखा तो वह मुस्कुरा उठी ।

मिसेज मल्होत्रा - राजेश तुम तो कहते थे कि अपनी बहन से बड़ा प्यार करते हो ,उसे कभी धोखा नहीं दोगे ।

विशाल ( थोड़ा आगे बढ़कर ) - मिसेज मल्होत्रा, प्लीज यह ऑफिस है । आप लोग घर जाकर अपने पर्सनल मामले में डिस्कस कर सकते हैं , यहाँ स्टाफ है तो अच्छा नही लगेगा।

मिसेज मल्होत्रा - तुम चुप रहो विशाल । तुमसे किसी ने राय नहीं मांगी है और तुम तो इसका साथ दोगे ही क्योंकि कुछ हिस्सा तुम्हें भी मिलेगा ना?

, राजेश (गुस्से में ) - मिसेज मल्होत्रा , आपको जो कहना है मुझसे कहे और साफ-साफ कहें। विशाल को कुछ कहने की ना तो जरूरत है और ना ही आपका हक है ।

रिया - माँम, भाई सही कह रहे हैं और आप क्या बार-बार भाई को ताना मारती हो ?

मिसेज मल्होत्रा - हां , मैं जानती थी कि तुम तो अपने भाई के खिलाफ कुछ भी सुनोगी नहीं , हर बार मुझे ही चुप लगाना पड़ता था पर यादज रहे, मैंने पहले ही कहा था तुमसे कि सौतेला हमेशा सौतेला होता है पर तुमने मेरी नहीं सुनी। तुमसे कोई प्यार व्यार नहीं करता ये, यह तो तुम्हें पिछले कुछ सालों से बेवकूफ बना रहा है जिससे तुम इस पर भरोसा करो और यह मौका देखकर सारी प्रॉपर्टी हथिया ले।

मिसेज मल्होत्रा की आवाज अब केबिन से बाहर आ रही थी , नैना परेशान से हो मुझे खड़ी हो गई। सारा, साहिल और बाकी स्टाफ भी उनकी बातें सुन रहा था ।

राजेश (मुस्कराते हुए) - ऐसा आपको लगता है । अपनी बहन को मैं कितना प्यार करता हूं , यह मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं है । मेरा ना सही कम से कम अपनी बेटी के बारे में ही सोच लिया कीजिए। क्यों आप बार-बार हम दोनों , के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करती हैं ? पता है आपको कि आप कभी कामयाब नहीं हो पाएंगी।

रिया - मैं और भाई हमेशा साथ रहेंगे , आप बेकार ही कोशिश कर रही हैं ।

मिसेज मल्होत्रा - यही तो तुम्हारी परेशानी है रिया , इस लड़के ने तुम्हारी आंखों पर ऐसी पट्टी बांधी है कि तुम्हें सच दिखता ही नहीं । यह बस एक धोखेबाज इंसान है , भाई के नाम पर धोखा दे रहा है ।

राजेश कितनी बार एक ही बात को बार बार कहेंगी आप? आप कुछ भी कर लीजिए मुझसे मेरी बहन को नहीं छीन सकती।

मिसेज मल्होत्रा - और तुम मेरी बेटी को मुझसे छीन लोगे?

रिया - आप घर चलिए मां , आपको यहां रोज का तमाशा करने की आदत हो गई है ।

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से में ) - देख रहे हो राजेश, आज मेरी बेटी मुझसे किस तरह से बात कर रही है ? यह सब तुम्हीं ने सिखाया है ना इसे ? इसलिए नहीं चाहती मैं कि मेरी बेटी , तुम्हारे साथ रहे । आज मैं पूरी तैयारी के साथ आई हूं क्योंकि तुम्हारी चोरी पकड़ी गई है ।

राजेश और रिया हैरानी से एक दूसरे को देखने लगे कि यह कह क्या रही हैं ।
 
राजेश (गुस्से से) - साफ-साफ कहें जो भी कहना है ,

कहना क्या चाहती हैं आप ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम्हें याद है ना , मैंने दिल्ली में एक बंगला देखा था रिया के लिए ?

राजेश अच्छी तरह से याद है ।

मिसेज मल्होत्रा - और तुम्हें यह भी याद होगा कि तुमने उस बंगले की जुड़ी सारी जानकारी मांगी थी ?

राजेश - हां , यह भी याद है पर इस बात से क्या साबित होता है ?

मिसेज मल्होत्रा - रिया बेटा, तुमने सुना ना ? ये इंसान जानता था कि वह बंगला मै तुम्हारे लिए खरीदना चाहती हूं। , इसने मुझ से जानकारी मांगी पर मैंने नहीं दी क्योंकि मुझे तो शुरू से ही इस पर भरोसा नहीं है । तुम जानती हो इसने क्या किया?

रिया - क्या किया?

मिसेज मल्होत्रा - मैं वह बंगला खरीद लू, उससे पहले ही इसने उसे खरीद लिया अपने लिए। क्यों ? क्या पूरी दिल्ली में एक वही बंगला था और वो भी तब,जब यह अच्छे से जानता था कि वह बंगला में तुम्हारे लिए लेना चाहती हूं ।

राजेश (हैरानी से )- क्या बकवास है यह? मैंने कब बंगला खरीदा? रिया यह झूठ बोल रही हैं। मैं भला ऐसा क्यों करूंगा ? तुम अच्छे से जानती हो , मुझे ऐसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है और अगर खरीदना भी होता तो वह क्यों खरीदूंगा जो तुम्हारे लिए लिया जाना है ।

रिया - भाई मैं जानती हूं कि आप ...

मिसेज मल्होत्रा( हंसते हुए) - देखा रिया , इसके मन में खोट है । अगर बंगला लिया है तो लिया है । इसमें छुपाने की क्या जरूरत है ? सच तो यह है कि इसने ऐसे ही न जाने कितनी प्रॉपर्टी हमसे छुपा कर खरीद रखी है और कहां-कहां कितना , कुछ जमा कर रखा होगा इसने ।

विशाल - आपके पास क्या सबूत है ? ऐसे आप राजेश पर इल्जाम नहीं लगा सकती । सच क्या है , यह सब जानते हैं।

मिसेज मल्होत्रा - हां मैं जानती हूं , तुम लोगों ने मेरी बेटी की आगे मुझे ही बुरा बना रखा है इसलिए आज सबूत भी लायी हूं ।

रिया ( खीझते हुए ) -मां बंद कीजिए तमाशा । अगर भाई ने खरीद भी लिया तो क्या हुआ?

मिसेज मल्होत्रा - बात खरीदने की नहीं धोखे की है । अगर इसके दिल में चोर नहीं है तो इसनें यह बात छुपाई क्यों और वही बंगला क्यों लिया जो तुम्हारे लिए लिया जाना था। यह जलता है तुमसे रिया ।

रिया अब राजेश को देखने लगी, राजेश ने अब रिया की ओर पूरे आत्मविश्वास से देखा और कहा - मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है , मैं नहीं जानता कि मिसेज मल्होत्रा किस सबूत की बात कर रही हैं और रही बात जलने की तो सबको पता है कि कौन किससे जलता है - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की तरफ गुस्से से देखा।

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पूरा स्टाफ दरवाजे के बाहर खड़ा होकर तमाशा देखने लगा।

मिसेज मल्होत्रा - आओ , सब देखो अपने बॉस का असली चेहरा । कल तो तुम लोगों को सजा से बचाने के लिए भगवान बन रहा था पर सच तो यह है कि यह किसी का सगा नहीं है ।

साहिल यह सुन मुस्कुराने लगा , नैना अब आगे बढ़ने को हुई कि साहिल ने उसका हाथ पकड लिया- अगर तुम कुछ भी बोली तो मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा और राजेश यह नहीं चाहता । नैना मजबूर सी खड़ी रह गई।

मिसेज मल्होत्रा ने अब वो पेपर्स निकाल उस पर राजेश के साइन रिया को दिखाएं - यह देखो , तुम्हारे भाई के ही साइन है ना इस पर?

रिया ( साइन देख) - हां भाई के है पर..

मिसेज मल्होत्रा विशाल की ओर बढ़ी - तुम बताओ , तुम्हारे दोस्त के साइन है या नहीं इन पर ?

विशाल ने हां में सिर हिला दिया ।

,

राजेश हैरान सा मिसेज मल्होत्रा को देख रहा था , मिसेज मल्होत्रा ने अब फाइल राजेश की हाथों में थमा दी, तुम बताओ कि यह किसके साइन है ? राजेश ने साइन देखे तो सच में ही उसके साइन थे - हां , यह मेरे ही साइन है पर मैंने ऐसा कुछ भी पेपर साइन नहीं किया ।

मिसेज मल्होत्रा ( हँसते हुए) - तो क्या यह साइन अपने आप ही चलकर यहां आ गया?

राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि उसने कब साइन किए ये पेपर्स? क्या उससे धोखे से साइन लिए गए? पर कब? राजेश ने अब फटाफट से फाइल को पढ़ना शुरू किया, फाइल पढ़ते ही राजेश अब हैरानी से मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा ने वह फाइल राजेश के हाथ से ली और रिया को थमा दी - लो , तुम भी पढ़ लो इस फाइल में क्या लिख रहा है ? जो मैं कह रही हूं , वह सच है या नहीं?

रिया ने वह फाइल पड़ी तो हैरान रह गई।

अब मिसेज मल्होत्रा और साहिल तैयार थे दोनों भाई बहन में , पहली दरार देखने को ।

राजेश और रिया अब एक दूसरे को खामोशी से देख रहे थे...,
 
नैना अब मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी - हे भगवान, कुछ भी हो जाए पर इन भाई बहन के रिश्ते में दरार नहीं आने देना।

रिया और राजेश अब एक दूसरे को खामोशी के साथ देख रहे थे ।

मिसेज मल्होत्रा - अब क्यों चुप हो रिया? अब तो सबूत भी है तुम्हारे हाथ में । जिसे तुम दिन भर भाई भाई कहते नहीं थकती थी , पूछो इससे कि क्यों किया इसनें ऐसा?

रिया अब आगे बढ़कर राजेश के पास जाकर खड़ी हो गई - क्या है यह सब ? अब आपके पास कुछ जवाब है ?

राजेश ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा - आज कोई जवाब नहीं है मेरे पास।

रिया ने अब पलटकर मिसेज मल्होत्रा की ओर देखा - सही कहती हैं आप , ये मेरे सौतेले भाई हैं और आप मेरी सगी मां है और सगे से बढ़कर दुनिया में कोई और रिश्ता नहीं होता। पता नहीं क्यों , मैं आज तक आप को नजरअंदाज करती रही? आप तो इतना कुछ करती है मेरे लिए ।

मिसेज मल्होत्रा के चेहरे पर अब जीत की एक मुस्कान तैर गई।

रिया - आज मुझे बहुत शर्म आ रही है खुद पर कि मैंने एक ऐसे इंसान को तवज्जो दी , प्यार और सम्मान दिया जो शायद इसके लायक था ही नहीं - कहते हुए रिया ने अब गुस्से में राजेश को देखा ।

राजेश एकदम शांत खड़ा था उसकी नजरें झुकी हुई थी।

रिया - आज मेरे अपने ने ही मुझे शर्मसार किया, भरोसा तोड़ा गया है मेरा। आप क्यों खामोश है भाई , कुछ कहिए ना?

राजेश अब चुपचाप केबिन से बाहर निकलने को हुआ कि रिया ने आगे बढ़कर उसे रोक लिया - इस बार आपको ऐसे नहीं जाने दूंगी। जो गलत है, वह गलत है फिर चाहे गलती किसी की भी क्यों ना हो । अगर पूरे स्टाफ के सामने इज्जत , उछाली गई है तो माफी भी मांगनी पड़ेगी इस घटिया हरकत की ।

नैना की आंखें नम हो गई यह सोच कि क्या कह रही है रिया? अपने भाई पर बस इतना ही भरोसा था इसे ?

साहिल अब पीछे खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था।

रिया - बस बहुत हो गया , खत्म करते हैं यही सब - कहते हुए वह जैसे ही मिसेज मल्होत्रा की ओर बढ़ी कि राजेश ने रिया का हाथ पकड़ लिया ।

राजेश में अपनी नजरें उठाई उसकी आंखों में एक बेबसी साफ नजर आ रही थी - ऐसा मत करो रिया , यह गलत है ।

रिया - अच्छा, यह गलत है और जो अभी तमाशा हुआ उसका क्या ?

मिसेज मल्होत्रा अब असमंजस की स्थिति में दोनों को देखने लगी कि आखिर हो क्या रहा है?

रिया - भाई आप चलिए, आज माँम को आपसे माफी मांगनी ही होगी ।

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यह सुनकर वहाँ सभी लोग हैरानी से रिया को देखने लगे।

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से में ) - रिया होश में तो हो? क्या कह रही हो तुम?

रिया - होश में तो आप नहीं है । आपने बिना वजह भाई को उनके ही स्टाफ के सामने इतना बुरा भला कह दिया । कितना शर्मिंदा किया उन्हें । अगर सौतेला भाई ऐसा हो तो मुझे हर जन्म में सौतेला भाई चाहिए । आपके दिमाग में बस भाई को कैसे परेशान करना है , यही चलता रहता है तभी आज आप इतनी बड़ी गलती कर बैठी।

मिसेज मल्होत्रा - गलती ? कैसी गलती?

रिया - लो, आपको तो यह भी नहीं पता। अगर भाई चाहते तो इसी बात का फायदा उठाकर आपको अभी दोगुना बेइज्जत कर सकते थे पर वह तो आपकी इज्जत की खातिर यहां से चुपचाप अपराधियों की तरह जा रहे थे । यही फर्क है आप में और मेरे भाई में । एक आप है जो हर वक्त हमें एक दूसरे से दूर करने की कोशिश करती हैं , दूसरी तरफ भाई हैं जो हर वक्त मुझे आपकी इज्जत करने को बोलते हैं ।

, मिसेज मल्होत्रा - मैंने तुम्हें सबूत दिया , उसके बाद भी तुम...

रिया - एक बार आप इन पेपर्स को पढ़ तो लीजिए कि ये है किस चीज के - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की ओर वो पेपर्स कर दिए ।

मिसेज मल्होत्रा ने वो पेपर्स चैक किए तो पाया वो तो ऑफिस के काम से जुड़े कुछ जरूरी कागजात थे जिन पर राजेश के साइन थे ।

मिसेज मल्होत्रा हैरानी से साहिल को देखने लगी - इस साहिल ने मुझे गलत पेपर क्यों पकड़ाए है ?

साहिल गहरी सोच में डूब गया कि आखिर माजरा क्या है?

रिया - अब कुछ समझ में आया आपके , अगर ऐसे पेपर्स पर भाई के साइन नहीं होंगे तो किसके होंगे ।

यह सुन नैना की जान में जान आई।

रिया - अगर गलती आप से हुई है तो माफी भी आप ही मांगेंगी, वह भी सबके सामने ।

, मिसेज मल्होत्रा कुछ बोल पाती , उससे पहले ही राजेश बोल उठा - बंद करो यह सब रिया। यहां पहले ही बहुत तमाशा हो चुका है , मैं अब और मजाक उडवाना नहीं चाहता यहां किसी का भी - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की ओर गुस्से से देखा ।

रिया - नहीं भाई , माफी तो माननी पड़ेगी । आप हर बार इन्हें यूं ही छोड़ देते हो इसलिए बार-बार वही हरकतें करती हैं वो, इनको भी पता चले कि जब कोई सबके सामने बेइज्जत होता है तो कैसा लगता है फिर इनकी तो गलती भी थी ।

मिसेज मल्होत्रा - जुबान संभाल कर बात करो रिया , मां हूँ तुम्हारी ।इस तरह बात नहीं कर सकती तुम मुझसे। तुम मुझे माफी मांगने को कह रही हो ?

रिया - तो ठीक है , भूल जाइए कि आपकी कोई बेटी भी है।

राजेश और मिसेज मल्होत्रा हैरानी से रिया को देखने लगे।

राजेश (गुस्से में ) - बस करो रिया ,बाद में बात करते हैं ।

रिया - नहीं भाई , मैं इस बार पीछे नहीं हटूंगी । मां को माफी मांगनी हीं होगी - कहते हुए उसने गुस्से में मिसेज मल्होत्रा , को देखा ।

मिसेज मल्होत्रा को अब साहिल पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि इस बेवकूफ ने यहां सब कुछ बिगाड़ दिया । गलती तो उनकी भी थी जो बस साइन पर ही ध्यान दिया, यह नहीं देखा कि वह पेपर्स है किस चीज के ?

इस वक्त उन्हें माफी मांगना ही सबसे सही लगा वरना वो रिया से भी हाथ धो बैठती।

मिसेज मल्होत्रा आगे बढ़कर राजेश के सामने खड़ी हो गई, राजेश ने एक बार भी उनकी तरफ नहीं देखा क्योंकि वह भी जानता था कि यह उनकी मजबूरी है , पछतावा नहीं ।

मिसेज मल्होत्रा - मुझे माफ कर दो , मुझसे गलती हो गई - कहते हुए वह ऑफिस से निकल गई। अब स्टाफ वापस अपने अपने काम पर लग गया।

रिया (मायूसी से) - आई एम सॉरी भाई , मॉम की वजह से..

राजेश (मुस्कुराकर ) - कोई बात नहीं , होता है ऐसा ।

, रिया - मॉम को पता नहीं क्या मिलता है यह सब करने में , मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता जब वह आपके साथ ऐसा करती है - कहते हुए रिया की आंखें नम हो गई।

राजेश ने बड़े प्यार से रिया को गले से लगा लिया - बस ऐसे ही अपने भाई पर भरोसा करते रहना हमेशा । मैं कभी तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं करूंगा , जो भी है जैसा भी है और जितना भी है हम दोनों साथ मिलकर बाँटेंगे और साथ मिलकर रहेंगे । मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकता हूं पर तुम्हारी आँखों में खुद के लिए शक नहीं और शायद इसीलिए मिसेज मल्होत्रा को भी बर्दाश्त कर रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि तुम मेरे साथ हो ।

रिया (मुस्कुराकर) - जानती हूं ।

नैना अब एक कोने में खड़ी उन दोनों भाई बहन के प्यार को देखकर बहुत खुश थी कि चलो राजेश के साथ मैं ना सही पर इतना प्यार करने वाली बहन तो है ।

विशाल जो दोनों भाई बहन के प्यार को देख रहा था , आगे बढ कर आया - क्या बात है , आज तो हमारी रिया ने मिसेज मल्होत्रा की छुट्टी कर दी ।

, रिया - क्यों नहीं , कोई भी मेरे भाई के बारे में कुछ भी बोलेगा तो ऐसे ही थोड़ी जाने दूंगी कहते हुए रिया हंसने लगी। उसे यूं हंसते देख राजेश और विशाल भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके ।

साहिल अपनी चेयर पर बैठा बैठा सोच रहा था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है ? कल मिसेज मल्होत्रा ने जब पेपर दिए थे तो उसने वह पड़े थे और उन्हीं पेपर्स को फाइल में लगाया था तो यह पेपर्स कहां से बीच में आ गए ? मैं भी कितना बेवकूफ हूं जो बस साइन पर ध्यान दिया लेकिन पेपर्स है किस चीज के, इस पर ध्यान देना भूल ही गया। मिसेज मल्होत्रा क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में ।

तभी नैना उसके पास आकर अपनी चेयर पर बैठ गई ।

नैना - थैंक गॉड , सब कुछ ठीक हो गया वरना मिसेज मल्होत्रा तो आज पूरी प्लानिंग के साथ राजेश को नीचा दिखाने की तैयारी करके आई थी। भला कोई मां कैसे अपने बच्चे के साथ ऐसा कर सकती है ? हां सौतेला ही सही पर है तो बेटा ही ना । वह तो शुक्र है कि रिया इनके बहकावे में नही आई और पेपर्स गलत निकले । साहिल तुम क्या कहते हो?

साहिल - मैं क्या कहूं ? अब इनका फैमिली मैटर है , इसमें , हम कर भी क्या सकते हैं ।

नैना - मिसेज मल्होत्रा जितने विश्वास से बोल रही थी , उससे तो ऐसा लग रहा था कि उनकी बात सही है । उन्होंने कहीं से तो राजेश के साइन लिए होगे वरना इतनी बड़ी बेवकूफी क्यों की?

साहिल - पता नहीं , वह भी हो सकता है ।

नैना अब उठ कर किसी काम से दूर चली गई, साहिल की नजर अब टेबल पर रखी उस फाइल पर गई जिसमें उसने पेपर्स रखकर राजेश के साइन करवाए थे ।

साहिल ने वह फाइल उठाई और उसको जल्दी से पलटने लगा । वह अब हैरान रह गया फाइल को देखकर - असली पेपर उस फाइल में ही रखे थे । साहिल अब अपनी बेवकूफी पर हैरान रह गया, इसका मतलब मैंने हीं जल्दबाजी में फाइल से गलत पेपर निकाल लिए थे । मुझसे इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है ? वह सोच में डूब गया। उसने इतना अच्छा मौका अपने हाथों से निकाल दिया।

राजेश चुपचाप कैबिन में बैठा था। आज जो भी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था । आज दिस तरह उसे बेइज्जत करने

, की कोशिश की गई, यह बात उसे अंदर तक कचोट गई थी। भले ही वह रिया के सामने मुस्करा रहा था पर ठेस तो लगी ही थी गहरी।

नैना अब कैबिन मे आई। राजेश चुपचाप बैठा था।

नैना - तुम ठीक हो ना?

राजेश - तुम्हें मेरी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है ।

नैना - जरूरत है। आखिर कब तक सहन करोगे ये सब तुम। थक नहीं जाते ये सब झेलते हुए?

राजेश ने अब नैना को देखा - हम्म, आदत है मुझे। मेरे हिस्से की नफरत मुझे ही झेलनी होगी। तुम परेशान मत हो, तुमको साहिल के साथ शाम को बाहर जाना है ना । उसी पर फोकस करो ।

नैना - राजेश तुम हर बात पर घूम फिर कर वहीं पहुंच जाते हो ।

राजेश (गुस्से मे ) - क्योंकि मैं ऐसा ही हूं । मेरे आगे नाटक करने की जरूरत नहीं है ।

,

नैना - मेरी चिंता तुम्हे नाटक लगती है ।

राजेश - जाओ यहाँ से, मुझे और परेशान मत करो।

नैना - अगर मै मिसेज मल्होत्रा को अपनी सच्चाई बता दूँ तो वो तुम्हें छोड़ कर मुझे तंग करने लग जाएंगी, तुम तब तक सुकून से तो रह पाओगे तब तक - कहते हुए नैना राजेश को देखने लगी।

राजेश ने यह सुन अब नैना की ओर देखा।

नैना - इतना तो कर ही सकती हूँ मै तुम्हारे लिए- कह नैना एक पल को रूकी और कैबिन के दरवाजे की ओर चली।

राजेश अब सीट से उठ खड़ा हुआ - बेेेेशक वो तुम्हारे पीछे पड जाएंगी पर क्या तुम्हें सच मे लगता है कि तब मै सुकून से रह पाऊंगा?

नैना उदास होकर बोली - नहीं।

राजेश - मै अपने हिस्से की तकलीफ किसी को भी नहीं दे सकता। जब तक सहन कर सकता हूँ, कर रहा हूँ अपनों की , खातिर। जब किसी दिन पानी सर से ऊपर चला जाएगा तो निकल जाऊँगा कहीं दूर, जहाँ कम से कम कुछ वक्त सुकून से तो रह पाऊंगा ।

नैना - रह पाओगे अपनों के बिना?

राजेश यह सुनकर मुस्कुरा दिया - ये जो इंसान के पैरों में अपनों के नाम की बेडी होती है, यह वक्त के साथ साथ उस इंसान को और जकडती चली जाती है और जब इंसान इसे तोडने की कोशिश करता है तो अक्सर खुद ही टूट जाया करता है पर ये बेडियाँ मौत तक उसे जकड कर ही रखती है - कहते हुए राजेश केबिन से बाहर निकल गया।

नैना चुपचाप खड़ी रह गई ।
 
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