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उलझन मोहब्बत की

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नैना ने बड़े प्यार से उसके आंसुओं को पोंछा और उसके बिखरे हुए बालों को अपने हाथों से सँवारते हुए बोली - तुम्हें पता है, तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो और एक बहुत अच्छे बेटे भी जिसने अपने पिता के कंधे से कंधा मिला उनकी सारी जिम्मेदारियां हल्की कर दी और उनका सहारा बने । तुम एक बहुत ही अच्छे भाई हो जो हर वक्त अपनी बहन की खुशियों के बारे में सोचता है। तुम एक सच्चे दोस्त हो , जो हर वक्त अपने दोस्तों के साथ उनके अच्छे बुरे में उनके साथ खड़ा रहता है । अगर गुस्सा करते हो तो प्यार भी करते हो , अगर डांटते भी हो तो संभालते भी हो । तुम से बेहतर इंसान मैंने आज तक नहीं देखा । सच कहूँ तो मुझे जलन होती है उन सब से जिनके पास तुम्हारा साथ है - कहते हुए नैना चुप हो गई । दोनों एक दूसरे को बस चुपचाप देखे जा रहे थे, उनके पास लफ्ज ही नहीं थे कुछ कहने को क्योंकि प्यार लफ्जों मे बयाँ होने वाली चीज ही नहीं है।

गाना अब दोबारा बज उठा था -

" हमको मिली है आज यह घड़ियां नसीब से

जी भर के देख लीजिए हमको करीब से

फिर आप के नसीब में यह बात हो ना हो

शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो ना हो

लग जा गले "

, नैना ने अब राजेश के चेहरे को अपने हाथों में बडे प्यार से थाम लिया - राजेश तुम ही हो जिसने मुझे प्यार करना सिखाया। मै कभी भी इस प्यार के खूबसूरत एहसास को समझ ही नहीं पाती अगर तुम मुझे प्यार करना नही सिखाते - कहते हुए नैना अब राजेश के करीब बढने लगी।

राजेश ने जब नैना को खुद के करीब आते देखा तो एकदम से सोफे से उठ खड़ा हुआ और हडबडाते हुए बोला -म.. मैं ठीक हूं , चलो तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूं - कहते हुए वह जैसे ही चलने को हुआ कि नैना ने उसका हाथ पकड़ उसे वापस झटके से सोफे पर बैठा दिया । नैना की यह हरकत देख राजेश हैरान सा उसे देखता रह गया ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई है ।

राजेश की बोलती नैना के इस बदले रूप को देख बंद हो गई, उसने सपने में भी नैना का यह अंदाज नहीं सोचा था। आज वह बदली बदली सी नजर आ रही थी । वह अब हिम्मत कर बोला - नैना ,तुम ठीक तो हो ?

नैना - तुम्हें कैसी नजर आ रही हूं मैं ? क्या हुआ है मुझे ? मैं बिल्कुल ठीक हूं - कहते हुए नैना ने अपने दोनों हाथों को राजेश के कंधों पर रख दिया और मुस्कराते हुए बड़े प्यार से उसे देखने लगी ।

, राजेश नैना के इस बदले रूप को देख सोच मे पड गया - जब कभी मैं नैना के करीब जाने की कोशिश करता था तो वह शादी के बाद कह कर दूर हो जाती थी पर आज जब वह दूर जा रहा है तो वह खुद ही करीब आने की कोशिश कर रही है।

नैना - तुम ही वो इंसान हो जिसने मुझे समझाया कि सच्चा प्यार बहुत खुशनसीबो को ही मिलता है और मैं उनमें से एक हूं लेकिन शायद मैं तुम्हारे लायक नहीं थी पर फिर भी मेरे लिए तुम बेस्ट हो । तुम खुद को मेरी नजरों से देखोगे तो तुम्हें पता चलेगा कि मेरी नजरों में दुनिया के सबसे अच्छे इंसान हो - कहते हुए नैना ने राजेश के चेहरे को एक बार फिर अपने दोनों हाथों से थाम लिया - तुम्हें पता है , मैं आज बहुत खुश हूं क्योंकि आज आखिरकार तुमने वह बात मुझसे शेयर की जो तुम आज तक किसी से नहीं कर पाए । इस भरोसे के लिए शुक्रिया - कहते हुए नैना अब राजेश के थोड़ा और करीब आ उसकी आँखों में देखने लगी।

राजेश ने अब अपनी आंखें बंद कर ली क्योंकि वह नहीं चाहता था कि नैना के लिएउसके दिल में जो नाराजगी है , वह सब खत्म हो जाए और नैना कहीं उसकी आंखों के जरिए उसके दिल में ना झांक ले कि वह आज भी सिर्फ और सिर्फ नैना से ही प्यार करता है । वह खुद को समझाने लगा कि कमजोर नहीं पडना राजेश।

, नैना - थैंक्स मुझे समझाने के लिए कि रिश्ते चाहे कैसे भी हो पर उन्हें पूरी ईमानदारी के साथ ही जीना चाहिए । मेरी तरफ देखो राजेश ।

अब नैना के खुद के करीब होने के एहसास से ही राजेश की धड़कन तेज होने लगी , उसका दिल उसे दिमाग पर हावी होने लगा ( जो वह नहीं चाहता था) जो उसे बार-बार कह रहा था कि अपने दिल की बात कह भी दो राजेश, नैना को माफ कर दो । उस पर एक बार फिर भरोसा करो ।

नैना - आँखें खोलो ना।

राजेश अब आंखें खोल कर नैना को देखने लगा। नैना ने देखा कि उसके चेहरे पर अजीब सी कश्मकश थी - क्या बात है , लगता है तुम्हारा दिल तुम्हारा साथ नहीं दे रहा ? नैना ने अब अपने एक हाथ को उसके सीने पर रख दिया - अगर तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो तो फिर तुम्हारा दिल इतने जोरो से क्यों धड़क रहा है ?

राजेश अब अलग हटने को हुआ कि नैना ने उसे फिर वहीं रोक लिया - तुम्हें याद है , तुमने कॉलेज में कहा था कि तुम मुझसे प्यार करते हो और जब भी मेरे पास होते हो तो तुम्हारा दिल जोरो से धड़कने लगता है फिर आज ऐसा क्यों हो रहा है तुम्हारे साथ?

, राजेश अब इधर उधर देखने लगा क्योंकि नैना की और देखना नहीं चाहता था। वह जानता था कि अगर उसने अब नैना की ओर देखा तो बहुत जल्द कमजोर पड़ जाएगा ।

उसे यूँ देख नैना मुस्कुराते हुए बोली - क्या हुआ ? मेरी तरफ देखोगे भी नहीं या फिर तुम्हें डर है कि मेरे लिए जिस प्यार को तुम अपने अंदर छुपा कर बैठे हो, कहीं वह बाहर ना आ जाए।

राजेश - नैना ऐसा कुछ....

नैना - तुम रिचा से शादी करने जा रहे हो पर क्या सच में तुम्हें कभी भी उसके लिए ऐसा एहसास महसूस हुआ है जो आज और अभी तक मेरे साथ महसूस करते हो ? राजेश अब एक बार फिर खामोश हो गया ।

नैना - तुमसे एक बात कहूं - हाँ,पहले तुम हैंडसम थे लेकिन अब वक्त के साथ साथ तुम और भी हैंडसम हो गए हो और हाँ, मुझे पहले वाले राजेश से ज्यादा यह वाला अकड़ू राजेश ज्यादा पसंद है - कहते हुए नैना हँसने लगी।

राजेश को अब लगने लगा कि किसी भी वक्त उसका दिल उसके दिमाग पर हावी हो सकता है, जो वह होने नहीं देगा - सोचकर उसने नैना को एक झटके से खुद से दूर किया और , खड़ा हो जैसे ही केबिन से बाहर जाने को हुआ कि नैना ने आकर उसे पीछे से गले से लगा लिया ।

राजेश ने जब नैना को अलग करने की कोशिश की तो उसने पकड और मजबूत कर दी । राजेश चाहता तो थोड़ी ताकत लगा नैना से अलग हो सकता था पर वह नैना पर ताकत आजमाकर उसे चोट नहीं पँहुचाना चाहता था।

राजेश को अब नैना की धड़कने महसूस होने लगी। उसका दिल भी जोरों से धडक रहा था । राजेश खुद को संभालते हुए बोला - नैना, तुम शायद भूल रही हो कि जल्द ही मेरी शादी रिचा से .....

नैना ने अब पीछे हट राजेश से अलग हो उसे अपनी ओर घुमाया - पर हुई तो नहीं है ना ।

राजेश - होश मे आआे नैना, ये....

नैना - श्शश.... तुम बस मेरी बात सुनो और कहीं ध्यान मत दो राजेश । मैं जानती हूं कि तुम आज भी मुझसे ही प्यार करते हो। तुम बस एक बार हां कर दो फिर रिचा को पीछे हटने के लिए मैं मना लूंगी । पहले कॉलेज में तो तुम कहते थे कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो , मैं जिंदगी हूं तुम्हारी और अब कहते हो नफरत करते हो । आज बोल भी दो अपने दिल की बात और कुछ मत सोचो। जो भी है जैसा भी है , कह दो , बस एक बार । राज सिर्फ एक बार बता दो कि तुम मुझसे प्यार करते हो या नफरत ?

कहते हुए नैना राजेश के बहुत करीब आ गई। राजेश कुछ समझ पाता कि उसे नैना के होठों का एहसास अपने माथे पर हुआ । नैना के उस प्यार में एक अपनापन, भरोसा और सम्मान था ।

अब राजेश पिघल गया, उसके दिमाग पर उसका दिल पूरी तरह हावी हो गया । रही सही कसर नैना के उसे पुराने दिनों की तरह प्यार से राज बुलाने और उसके प्यार भरे स्पर्श से पूरी हो गई ।

राजेश अब भावनाओं में बह चला - नैना मैं ...

नैना (मुस्कुराकर ) - हां बोलो , बस एक बार बता दो कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार है या नफरत?

नैना को अब लग रहा था कि आज उसने राजेश को उसके दिल की आवाज सुनने के लिए इस तरह प्यार से मनाया है, वह बस अपने दिल की बात बोल दे जिससे सारा नाटक यहीं खत्म हो जाए । नैना को यह सब करते हुए बहुत ही अजीब लग रहा था पर वह राजेश के लिए कुछ भी कर सकती थी। उसे पूरा भरोसा था कि राजेश अपनी मर्यादा को कभी नहीं , तोड़ेगा इसलिए उसने इतना बडा कदम उठाया।

नैना (उसका दिल अब घबराहट में जोरों से धडकने लगा कि पता नहीं वह अपने काम में सफल रही या नही ) - बोलो राजेश , क्या है तुम्हारे दिल में?

राजेश - नैना मैं तुमसे बहुत....,
 
राजेश अपने दिल के आगे हार चुका था । नैना को उसकी आंखों में सिर्फ प्यार ही प्यार दिख रहा था ।

राजेश - नैना मैं तुमसे ..

नैना - हां बोलो ।

राजेश - नैना मैं तुमसे बहुत प्..

कि तभी नैना का फोन बज उठा ।

राजेश और नैना अब फोन की तरफ देखने लगे ।

राजेश - नैना तुम्हारा फोन ।

नैना - बजने दो। तुम जो कह रहे थे , वह कहो ।

राजेश - नैना , पहले फोन देखो । हो सकता है , किसी का जरूरी फोन हो ।

नैना - पर..

राजेश - जाओ।

नैना अब जल्दी से सोफे के पास रखे अपने बैग की तरफ चली। उसने फटाफट से फोन निकालकर रिसीव किया तो पता चला रांग नम्बर था। नैना ने अब झुँझलाते हुए फोन काट उसे स्विच ऑफ कर दिया - जब फोन मिलाना आता ही नही है तो क्यों मिलाते है लोग, कम से कम नम्बर तो सही मिलाया करें- कहते हुए वह राजेश की तरफ मुड़ी और फिर से उसके पास पहुंच गई।

नैना - तुम कुछ कह रहे थे ना ? कहो ।

, राजेश - कुछ नहीं,चलो घर छोड़ दूं तुम्हें - कहते हुए वह सोफे से अपना कोट उठा कर कैबिन से बाहर निकल गया। नैना उसे आवाज देती रह गई पर वह नहीं रूका।

नैना अब अपनी किस्मत को दोष देने लगी - मेरा तो नसीब ही खराब है। ये रांग नम्बर को भी अभी फोन करना था। इतनी मुश्किल से हिम्मत कर मैंने यह कदम उठाया था कि इसने सब गड़बड़ कर दिया , 2 मिनट और रुक जाते तो क्या हो जाता। क्या करूँ? एक बार और कोशिश करूँ क्या ? हां, एक बार और देखती हूँ।

इतनी मुश्किल से लड़का लाइन पर आया था कि बना बनाया खेल बिगड़ गया - सोचते हुए वह ऑफिस से बाहर निकल नीचे बिल्डिंग के बाहर चल पडी।

उसने दरवाजे के पास खड़े राजेश को देखा कि वह किसी गहरी सोच में डूबा है । अब धीरे-धीरे उस ओर चल दी।

उधर राजेश खड़ा हुआ सोच रहा था - यह क्या कर रहा था मैं ? अगर फोन नहीं आता तो मैं नैना को अपने प्यार का इजहार कर देता । मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं ? नहीं, मैं कमजोर नहीं पढ़ूंगा।

, एक बार फिर राजेश के दिमाग ने उस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली ।

नैना राजेश के पास पँहुची - राजेश वो...

राजेश के चेहरे पर अब बेरूखी थी और उसने नैना की तरफ देखा भी नहीं - गाडी के पास पँहुचो, मै दरवाजा लाँक कर के आता हूँ ।

नैना समझ गई कि सारी मेहनत खराब हो गई थी और अब दोबारा कोशिश करने का कोई फायदा नहीं । वह मुरझाये चेहरे के साथ गाड़ी के पास जाकर खड़ी हो उसका इंतजार करने लगी । थोड़ी ही देर में राजेश वहां आया और गाड़ी स्टार्ट की - आओ बैठो ।

थोड़ी देर बाद गाडी में बैठी नैना ने उसे कई बार देखा पर वह चुपचाप गाड़ी चला रहा था । ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

नैना - राजेश तुम कुछ कह रहे थे ना?

राजेश (हैरानी से) - मैंने तो कुछ नहीं कहा ?

, नैना - नहीं , मैं अभी नहीं थोड़ी देर पहले की बात कर रही हूं, वह तुम कुछ ऑफिस में कहने वाले थे ।

राजेश ( बेरूखी से ) - पता नहीं ,मैं भूल गया ।

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी - कितना झूठा लड़का है यह ? ऐसे कैसे याद नहीं है ।

नैना (खीझते हुए) - क्या तुम्हें सच में कुछ याद नहीं ?

राजेश - नहीं , मुझे कुछ भी याद नहीं है ।

नैना - वह मैंने पूछा था ना तुमसे कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए....

राजेश - नफरत है ।

यह सुनकर नैना अब खामोश हो गई , उसे पता था कि राजेश फिर से दिमाग की सुनने लगा है । कुछ देर तक कार में खामोशी रही ।

नैना सोच में पड गई कि करे तो क्या?

, नैना ने अब धीरे से अपना हाथ बढा राजेश के हाथ पर रखना चाहा कि राजेश का फोन बज उठा । नैना ने अब अपने हाथ को वापस खींच लिया। उसका मन कर रहा था कि दुनिया से मोबाइल का नामोनिशान ही मिटा दे, हर बार गलत वक्त पर ही बजता है।
 
राजेश ने गाड़ी साइड में लगाई और फोन उठा कर गाड़ी से बाहर निकल गया । नैना थोड़ी दूर खड़े राजेश को फोन पर बाता करते हुए देख रही थी , वह किसी से हँसते हुए बात कर रहा था ।आखिर किस से बात कर रहा है राजेश जो मेरे सामने बात नहीं कर पाया और देखो तो, कितना हंस के बात कर रहा है ? मेरे साथ तो ऐसे बैठा था कि पता नहीं किसी की तेरहवीं से आ रहे हैं ।

थोड़ी देर में राजेश वापस आया और गाड़ी चलाने लगा ।

नैना अपने गुस्से को काबू करते हुए बोली - किसका फोन था?

राजेश ने नैना की ओर देखा - तुम क्यों पूछ रही हो?

नैना - नहीं वो तुम ऐसे चले गए थे मेरे पास से और काफी , खुश भी लग रहे थे।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - आजकल तुम अपना दिमाग कुछ ज्यादा ही चलाने लगी हो । क्या हर कॉल डिटेल मैं तुम्हें बताता रहूं कि कब किससे बात करता हूं ?

नैना झेपंकर कर चुप हो गई । राजेश ने नैना के घर जाकर गाड़ी रोक दी, नैना अब गाड़ी से उतर कर गुमसुम सी बढ चली।

राजेश अब उसके पीछे गाड़ी से उतरकर आया - नैना?

नैना (पीछे मुड़कर ) - हां ,कहो।

राजेश - थैंक्स मेरी हेल्प के लिए।

नैना यह सुनकर मुस्कुराते हुए बोली - तो तुमने थैंक्स बोल ही दिया ।

राजेश - हम्म । एक बात और , जितना जल्दी हो सके, साहिल से अलग हो जाओ वरना..

नैना - वरना क्या?

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राजेश - वरना यह शुभ काम मुझे अपने हाथों से ही करना पडेगा।

नैना चुपचाप उसे देखती रही।

राजेश - मैं चलता हूं , कहते हुए वहां से चला गया।

नैना वहीं खड़ी खड़ी सोचती रही कि भले ही राजेश उससे अपने दिल की बात नहीं कर पाया पर आज नहीं तो कल, कह ही देगा । कुछ भी हो, आज का दिन काफी अच्छा था। आखिर राजेश ने अपने दिल की बात मेरे सामने जो रखी, जो उसन पहले किसी को नहीं बताई - यह सोच नैना मुस्कुराते हुए घर के अंदर चली गई ।

राजेश अब घर पहुंचा तो देखा कि रिया नजर नहीं आ रही थी। वह उसके कमरे की ओर बढ़ा और वहां जाकर देखा तो पाया कि रिया काम करते हुए सो चुकी थी । यह देख राजेश ने धीरे से उसका लैपटाँप और पेपर्स हटा दूर मेज पर रख दिये और कमरे की लाईट आँफ कर अपने कमरे में वापस आया ।

वह अब कुछ देर बिस्तर पर बैठा कुछ सोच ता रहा फिर , किसी को फोन मिलाया - मेरी बात ध्यान से सुनो, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए । हां, उस वक्त खुलकर बात नहीं कर पाया, पर याद रहे कि यह बात तुम्हारे और मेरे बीच में रहेगी। मैं जैसा कहूं वैसा ही करना - कहते हुए राजेश ने अब फोन वापस रखा और बिस्तर पर लेट गया।

वह सोचने लगा कि आज पूरे दिन में उसके साथ क्या-क्या हुआ , नैना की याद आते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई। वह खुद को आज काफी हल्का महसूस कर रहा था क्योंकि आज उसने अपने दिल के बोझ को हल्का कर लिया था अपनी माँ के बारे में नैना से बात कर ।

राजेश ने विशाल को फोन किया -सो गए थे क्या ?

विशाल - नहीं , कुछ काम कर रहा था ।

राजेश - मैंने जो डिटेल्स दी थी साहिल के बारे में, कुछ पता चला?

विशाल - हां , उसके घर का एड्रेस पता चल गया है । वह बेंगलुरु का रहने वाला है ।

, राजेश - एक काम करो , मुझे साहिल का एड्रेस भेज दो । मैं कल खुद जाऊंगा वहां।

विशाल - तुम्हें वहां जाने की क्या जरूरत है ? मैं कल भेज दूंगा किसी को ।

राजेश - नहीं , मुझे लगता है कि खुद ही काम करना होगा।

विशाल - मेरी बात ध्यान से सुनो , तुम कहीं नहीं जा सकते क्योंकि साहिल यहाँ नैना के साथ है। अगर उसे पता चला कि तुम यहाँ नहीं हो तो वह तुम्हारी गैरमौजूदगी का फायदा उठा सकता है क्योंकि हम अभी तक उसका प्लान नहीं जान पाए हैं ।

राजेश (गुस्से में) - तो क्या तमाशा देखूँ ?

विशाल ( कुछ देर सोच कर) - एक काम करते हैं । कल मैं खुद जाता हूं बेंगलुरु और साहिल के बारे में जानने की कोशिश करता हूं ।

राजेश - पक्का?

विशाल - हां यार, इतना तो कर ही सकता हूं मैं ।

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राजेश - ठीक है पर संभलकर। अच्छा सुनो रिचा कैसी है ?

विशाल - वह ठीक है ।

राजेश - चलो कल तुम बेंगलुरु निकलो लेकिन हां साहिल का एड्रेस मुझे भी सेंड कर दो - कहते हुए उसने फोन रख दिया ।
 
राजेश अभी विशाल का भेजा एड्रेस पढ़ ही रहा था कि उसे कुछ याद आया- रिया ने भी तो बेंगलुरु में पढ़ाई की है और उसने कहा भी था कि शायद उसने साहिल को कहीं देखा है। साहिल का रिया को देख कर चुपचाप चले जाना , क्या यह सब मेरा भ्रम है या कुछ और ?

अगले दिन सुबह जब रिया सो कर उठी तो वह तैयार होकर नीचे आई । उसने देखा कि डाइनिंग टेबल पर नाश्ता पहले से ही लगा रखा है - क्या यह भाई ने ? पर वह तो गुस्सा है ना?

गुस्सा हूँ नहीं , था - यह कहते हुए राजेश मुस्कुराता हुआ वहां आया और रिया को कुर्सी पर बैठाया ।

रिया - आपको क्या जरूरत थी इसकी ? मैं कर लेती ।

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राजेश मुस्कुराते हुए रिया के पास बैठ गया - देखो रिया , मैं तुम पर गुस्सा नहीं करना चाहता पर तुमने मुझे मजबूर कर दिया कल। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम्हारे और मिसेज मल्होत्रा के बीच में कोई भी परेशानी हो । वह कैसी भी है पर है तो तुम्हारी माँ ही ।

रिया - वह आपकी भी मां है ना भाई, सगी हो या सौतेली -क्या फर्क पड़ता है ?

राजेश यह सुनकर चुप हो गया ।

रिया - अब आप ही बताइए भाई कि अगर वह आपकी सगी मां होती और मेरे साथ ऐसा करती तो आप क्या करते ? चुप बैठे रहते ?

राजेश - हम्म। बात तो तुम्हारी सही है पर क्या तुम्हें अच्छा लगता कि अगर तुम्हारी वजह से हम मां-बेटे आपस में लड़ते?

रिया अब उदास होकर बोली - नहीं ।

राजेश (मुस्कुराकर ) - तो यही समझाना चाहता हूं मैं कि वह , भी हमारे घर की सदस्य हैं और अगर वह पैसे मांगती हैं तो देने में बुराई क्या है ? उनका भी बराबर हक है , तो बस एक बात याद रखो । वह जो कहती हैं या करती हैं - उन्हें करने दो पर इससे हमारे रिश्ते में कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए ।

रिया - मैं ध्यान रखूंगी इस बात का।

राजेश - तुम कह रही थी कि तुमने साहिल को कहीं देखा है, कहां देखा है ? कुछ याद आया या नहीं ?

रिया - भाई पता नहीं क्यों , मुझे लगता है कि इस लड़के से पहले मिल चुकी हूं ।

राजेश (उत्सुकता से ) - कहां दिल्ली में या बेंगलुरु में या फिर कहीं और ?

रिया - नहीं भाई , कुछ याद नहीं आ रहा ।

राजेश - अच्छा चलो , मैं ऑफिस के लिए निकलता हूं । अगर तुम्हें कुछ याद आये तो मुझे बताना - कहते हुए वह उठकर ऑफिस के लिए निकल गया ।

राजेश के चले जाने के कुछ ही देर बाद दरवाजे पर किसी ने , दस्तक दी। रिया ने दरवाजा खोला तो सामने खड़े इंसान को देखकर हैरान रह गई - आप ? आप यहां?

दूसरी ओर राजेश ऑफिस पहुंचा तो उसकी नजर नैना की टेबल पर गई - नैना वहां नहीं थी ।

राजेश ने अपनी घड़ी देखी - ऑफिस टाइम तो हो गया है लेकिन यह लड़की कहां रह गई? अभी तक आई क्यों नहीं कि तभी उसे महसूस हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है।

उसने पलट कर देखा तो मुस्कुराती हुई नैना खड़ी थी - गुड मॉर्निंग सर ।मेरे ख्याल से ये मेरा टेबल है और आपकी उधर केबिन में ।

राजेश ( झेप कर ) - हाँ तो मैं वहीं जा रहा था। वो मुझे कुछ काम था तुमसे इसलिए ...

नैना - क्या काम था ?

राजेश (हडबडाते हुए) - वो.. मैं भूल गया । जब याद आएगा तो बता दूंगा - कहते हुए वह कैबिन में चला गया ।

नैना (मुस्कुराते हुए ) - झूठा कहीं का ।

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राजेश को एक मीटिंग में जाना था, तो वह थोड़ी देर में ही आँफिस से निकल गया ।

राजेश अपनी मीटिंग में बैठा था, रिया बार बार उसे फोन मिला रही थी। राजेश ने फोन साइलेंट मोड पर कर रखा था तो उसे पता नही चला।
 
दोपहर जब वह मीटिंग से बाहर निकला और फोन देखा तो सोच में पड गया कि रिया ने उसे इतने फोन क्यों किए? उसने अब रिया को फोन किया।

राजेश - हलो, क्या बात है। इतने सारे फोन कुछ ही समय में? सब ठीक है ना ?

रिया परेशान सी थी - भाई कहाँ हो, अब उठा रहे हो फोन? जल्दी आँफिस आओ । यहाँ सब गडबड हो रहा है ।

राजेश - हो क्या रहा है वहाँ? कुछ बताओगी भी?

रिया - भाई वो माँम....

राजेश (झल्लाकर) - क्या माँम ? खुल के बताओ।

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रिया -भाई, माँम यहाँ है आँफिस में। सुबह आपके जाने के बाद ही वह घर आ गई थी मुझसे मिलने । वो आँफिस देखने की जिद करने लगी, मैंने मना भी किया था पर मॉम नहीं मानी । वह जबरदस्ती ऑफिस आ गईं हैं।

राजेश यह सुन हैरान रह गया कि वो यहाँ क्यों आईं है? वह अब मन ही मन सोचने लगा कि जरूर इनकेे दिमाग में कुछ चल रहा है, ऐसे कैसे ऑफिस देखना चाहती हैं ।

रिया - क्या हुआ भाई ? कुछ बोलो ना।

राजेश - मेरी बात ध्यान से सुनो रिया, यहां सबको लगता है कि रिचा मेरी मंगेतर है । यह बात मिसेज मल्होत्रा के सामने आई तो बहुत बड़ी गडबड हो जाएगी। तुम.. तुम जल्दी जाओ और उन्हें रुको लोगों से बातचीत करने के करने से।

रिया - पर भाई मैं कैसे ?

राजेश - कुछ भी करो पर जल्दी जाओ । मै बस यहाँ से निकल रहा हूँ ।

रिया - ठीक है, मैं कोशिश करती हूँ।

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राजेश - रिया सुनो ।

रिया - जल्दी बोलो ना।

राजेश - वो नैना को मिसेज मल्होत्रा से दूर रखना।

रिया - मैं कोशिश करूँगी- कहते हुए उसने फोन रख दिया।

राजेश अब जल्दी से बिल्डिंग से निकल कर अपनी कार की तरफ भागा । उसका दिल अब जोरों से धडक रहा था कि अगर मिसेज मल्होत्रा को नैना का पता चल गया कि वह इसी ऑफिस में काम करती है तो वो उसे कुछ सुनाये बिना नहीं छोड़ेंगी । मिसेज मल्होत्रा को मुझसे और मुझ से जुड़ी हर चीज से परेशानी है । वह नैना को कुछ कहे या सबके सामने कुछ तमाशा बनाए बिना नहीं रह पाएंगी । मुझे उन्हें रोकना होगा ।

राजेश अब फटाफट से कार स्टार्ट कर अपने आँफिस की ओर तेजी से बढ चला ।

तकरीबन एक घंटे में अाँफिस पँहुच गया। राजेश जल्दी से , अंदर की ओर भागा और सामने का नजारा देख उसकी साँस ही अटक गई - जिस बात का डर था, वही हुआ।

नैना और मिसेज मल्होत्रा आमने सामने खड़ी थी। सारा नैना के पास ही खडी थी और सारा स्टाफ उन्हें घेर कर खडा था। वहीं खड़ी रिया की नजर जब राजेश पर पडी तो वह उसे कातर नजरों से देखने लगी । राजेश ने अब खुद को संभाला और बोला - क्या हो रहा है यहाँ.....,
 
राजेश - क्या हो रहा है यहां ?

राजेश की आवाज सुनकर सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे । मिसेज मल्होत्रा ने राजेश को नफरत की निगाहों से देखा, कुछ वैसा ही हाल राजेश का भी था।

राजेश अब आगे बढ़ सभी लोगों के पास पहुंचा - क्या मैं जान सकता हूं कि आप सभी लोग यहां पर काम छोड़कर कर यहाँ क्या कर रहे है - कहते हुए राजेश ने नैना की ओर देखा । उसे नैना की नजरों में एक उम्मीद नजर आई जो उसे राजेश को देख बँधी थी।

रिया - भाई वो...

मिसेज मल्होत्रा - मै बताती हूं सब। राजेश कैसे लोग रखें है तुमने नौकरी पर ? इनसे अच्छे तो सर्कस के जानवर भी होते हैं । इन लोगों को ना तो कोई स्टैंडर्ड है और ना ही कोई तमीज ।

यह देखो तुम्हारी दो कौड़ी की एमप्लाई ने मेरी कितनी महँगी सैंडिल्स खराब कर दी , इसने जानबूझकर काँफी गिरा दी इन पर । मेरा नुकसान हो गया राजेश।

राजेश ने अब नैना की ओर देखा तो नैना बस चुपचाप शांत भाव से उसे देखे जा रही थी कि सारा की आवाज ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचा - सॉरी मैम, मेरा पैर फिसल गया था और आप अचानक से सामने आ गये। मैंने जानबूझकर.....

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से से ) - चुप करो तुम ,अपनी नौटंकी किसी और को दिखाना।

राजेश को अपने स्टाफ के सामने मिसेज मल्होत्रा का यह , व्यवहार बिल्कुल अच्छा नहीं लगा पर वह वहाँ सबके सामने कोई तमाशा नहीं बनाना चाहता था इसलिए चुपचाप खड़ा रहा ।

मिसेज मल्होत्रा - और यह इसकी दोस्त ( नैना ) इसे समझाने की जगह मुझसे बहस कर रही है अब तुम बताओ राजेश कि जिसने गंदा किया है, वहीं साफ करेगा ना । मैंने इस लड़की को कहा कि मेरे सैंडल साफ करें जल्दी तो इसकी दोस्त कहती है कि वह एम्पलाई है कोई नौकर नहीं । इसकी इतनी हिम्मत कि मुझसे बदतमीजी कर रही है , शायद भूल गई है यह कि मैं यहां की मालकिन हूँ और सैलरी देते हैं हम इन्हें ।

नैना ( गुस्से से) - साँरी मैम, हमारी बाँस आप नहीं राजेश सर है और रही बात सैलरी की तो बदले में हम लोग काम भी तो करते हैं । आप जबसे यहां आईं है, सबको अपनी खातिरदारी में लगा रखा है , ऐसा कौन सा ऑफिस है जहाँ अकाउंटेंट को कॉफी बनाने के लिए कहा जाता है , किसी को पानी , किसी को कुर्सी लाने के लिए तो किसी को सैंडल साफ करने के लिए कहा जाता है। आपकी सैंडिल्स कीमती होंगे पर किसी की इज्जत से ज्यादा नहीं - कहते हुए उसने राजेश को देखा ।शायद वह उसे बताना चाहती थी कि उसकी पीठ पीछे मिसेज मल्होत्रा ने क्या बवाल मचाया है ।

, राजेश का गुस्सा अब बढ़ने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा - तमीज से बात करो वरना अभी तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगी ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - सॉरी मैम पर आप बॉस नहीं है हमारी। अगर वो चाहेंगे तो मैं नौकरी छोड़ दूंगी ।

मिसेज मल्होत्रा - देखा राजेश, तुम्हारे सामने यह किस तरह की बात कर रही है ? इसे अभी निकालो नाैकरी से बल्कि मैं तो कहती हूं इन सब को निकालों, यहाँ तमाशा देख रहे है सब। कुछ दिन तक तो अफोर्ड कर ही सकते हैं हम, जब तक नए एमप्लाईज आने तक ।

सभी लोगों के चेहरे पर चिंता साफ दिखने लगी। नैना राजेश को खामोश देख हैरान पड़ गई कि क्या उसे समझ नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है यहाँ।

रिया - रहने दीजिए ना माँम, बात को मत बडाइए । वह गलती से ...

मिसेज मल्होत्रा - मैं बात को बडा रही हूं ? मेरी बेइज्जती हुई है यहाँ..

,

रिया - प्लीज आपको मेरी कसम।

मिसेज मल्होत्रा ( थोड़ा शांत होते हुए ) - ठीक है । अगर तुम कहती हो तो ..- कहते हुए पास ही रखी चेयर पर बैठ गई और अपने पैर लिए बाहर की तरफ कर दिए । मेरी सैंडिल्स को साफ कर दिया जाए तो मैं बात यहीं खत्म कर दूंगी। अगर यह लडकी (नैना) मुझसे बहस नहीं करती तो शायद बात यहाँ तक नहीं पँहुचती।

स्टाफ को घबराया सा देख नैना आगे बढ़ते हुए बोली - ठीक है , मैंने आपसे बहस की है तो मैं साफ करती हूं क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से सभी को सजा मिले ।

नैना नाराजगी से राजेश को देखते हुए आगे बढी कि सारा ने उसका हाथ पकड़ लिया - नहीं गलती मेरी थी । कॉफी मुझसे गिरी थी इसलिए साफ भी मै ही करूंगी ।

सारा जैसे ही मिसेज मल्होत्रा के पैरों में बैठने को हुई कि राजेश आगे बढ़ा - सारा तुम पीछे हटो ।

सारा - पर सर यह ...

, राजेश - जानता हूं लेकिन सबसे बड़ी गलती है तो वह मेरी है क्योंकि मुझे आप लोगों को पहले ही मिसेज मल्होत्रा के बारे में बता देना चाहिए था जिससे आप सब उनकी खातिरदारी में तैयार रहते जो कि मैं नहीं कर पाया ।

मिसेज मल्होत्रा राजेश को माफी मांगते देख बहुत खुश हुई - लेकिन मेरी सैंडिल्स कौन..

राजेश - घबराए नहीं , गलती मेरी है तो सजा भी मैं ही भुगतूंगा - कहते हुए वह मिसेज मल्होत्रा के सामने जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया और अपना रुमाल निकाल मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा । उनकी आंखों में एक चमक थी कि जो राजेश को उनके सामने कभी नहीं झुका था , आज आसानी से झुक गया। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था इस पर।

नैना (आगे बढ़कर ) - सर वो..

राजेश ने उसे चुप रहने का इशारा किया तो वह मन मसोस कर रह गई ।

रिया (उदास होकर) - भाई आप ....

, मिसेज मल्होत्रा - बेटा है वह मेरा ,इतना कर सकता है - कहते हुए राजेश को मुस्कुरा कर देखने लगी ।

राजेश बेटा शब्द सुन खून के घूंट पीकर रह गया और उनकी सैंडिल्स साफ करने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा - सो स्वीट ऑफ यू राजेश । ये लोग कितने लकी है कि तुम्हारे जैसा बॉस मिला इन्हें। है ना रिया ?

यह सुन रिया ने उनकी तरफ से नजरें फेर ली ।

नैना बस एकटक राजेश को देख रही थी, वह जानती थी कि राजेश को इस वक्त कितना बुरा लग रहा होगा ।

राजेश अब जैसे ही उठने को हुआ कि मिसेज मल्होत्रा बोल उठी -1 मिनट, यह थोड़ा साइड में भी है निशान। प्लीज इसे भी कर दो ना ।

राजेश अब चुपचाप वापस बैठ उसको साफ करने लगा।

रिया (गुस्से में ) - मॉम आप...

मिसेज मल्होत्रा -चुप रहो।

,

राजेश अब खड़ा हो गया ।

मिसेज मल्होत्रा - अच्छा किया तुमने , पहले मैं सोच रही थी कि आज लौट जाऊं पर अब सोच रही हूं कि कुछ दिन रुक कर जाऊं । देखूं तो सही , मेरा बेटा यहां कैसे काम हैंडल करता है - कहते हुए वह मुस्कुरा कर वहां से चली गई ।

राजेश ने स्टाफ की ओर देखा तो सब ने शर्म से नजरें नीचे कर ली ।

राजेश - आप लोग अपना काम कीजिए , उनकी तरफ से मैं आपसे माफी मांगता हूं - कहते हुए राजेश अपने केबिन की ओर बढ़ा कि सारा ने आगे बढ़ उसके हाथ से रुमाल ले लिया - थैंक यू सर , इसे मै साफ कर दूंगी । आप सच में बहुत अच्छे हो पर मैं सच कह रही हूं कि मैंने जानबूझकर ...

राजेश - मैं जानता हूं ।

राजेश ने नैना की ओर देखा तो उसकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर शर्मिन्दगी । शायद वह दुखी थी कि उसकी वजह से मिसेज मल्होत्रा को आज सबके सामने राजेश को नीचा दिखाने का मौका मिल गया ।

,

राजेश अब कुछ कहने ही वाला था कि मिसेज मल्होत्रा वापस आई और रिया से बात करते हुए गुस्से में नैना को देखने लगी । नैना चुपचाप नजरें नीचे किए खड़ी थी।

राजेश ( मिसेज मल्होत्रा को देख ) - मिस शर्मा , अभी इसी वक्त नीचे जाओ इनवेंटरी में, वहां मैने टेबल पर कुछ फाईल्स निकलवाई है , उन्हें जाकर चेक करो कि सब ठीक है या नहीं । शाम तक वहीं बैठ कर काम करो , यही तुम्हारी सजा है ।

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी कि इसे क्या हो गया?

राजेश - जाओ इसी वक्त ।

नैना चुपचाप नीचे इनवेंटरी में चली गई । नैना वहाँ पहुंची तो उसने देखा कि टेबल पर कुछ भी नहीं था । वह समझ गई कि राजेश ने उसे मिसेज मल्होत्रा से दूर रखने के लिए यहाँ भेजा है।

नैना सोच में पड़ गई - राजेश मुझसे कितना नाराज है पर फिर भी मेरा कितना ख्याल रखता है । मिसेज मल्होत्रा के , गुस्से का सामना करने से बचाने के लिए उसने मुझे यहां भेज दिया और वहां खुद ने उनकी सैंडिल्स साफ की। कैसी माँ है यह मिसेज मल्होत्रा कि राजेश इनकी बेटी को पलकों पर बिठा कर रखता है लेकिन उसके बदले इनके मुंह से 2 ढंग की बातें तक नहीं निकलती।

उधर राजेश कैबिन में परेशान सा बैठा था -क्या करूं इन दोनों का? कैसे दूर रखूँ इनको एक दूसरे से । मिसेज मल्होत्रा कुछ किए बिना नहीं मानेगी और नैना कुछ जवाब दिए बिना।

अभी तो मैंने नैना को इनवेंटरी में भेज दिया है पर रोज तो नहीं भेज सकता वरना मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा।
 
राजेश की नजरों के सामने अब नैना का उदास चेहरा घूमने लगा , उसने नैना को फोन किया पर उसने नहीं उठाया ।राजेश ने अब एक्सटेंशन पर भी फोन मिलाया पर नैना ने वह फोन भी नहीं उठाया । राजेश का दिल जोरो से धड़कने लगा कि ये मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही है ?

वह अब खुद ही उठकर इन्वेंटरी की ओर बढ़ चला राजेश इन्वेंटरी में अंदर आया कि तभी उसे सामने चुपचाप खड़ी नैना दिखाई दी।

,

राजेश गुस्से में नैना की ओर बढ़ा - पागल हो क्या ? कब से फोन पर फोन मिला रहा हूं तुम्हें और एक्सटेंशन पर भी मिलाया, उठाया क्यों नहीं तुमने ?

नैना अब राजेश को देखने लगी ।

राजेश - और क्या ज़रूरत थी तुम्हें मिसेज मल्होत्रा से बहस करने की ? तुम अच्छी तरह से जानती हो कि वह किस तरह की इंसान है ।

नैना अभी भी खामोश थी और चुपचाप राजेश को देख रही थी।

राजेश अब थोड़ा परेशान हो गया कि यह कुछ बोल क्यों नहीं रही है - क्या बात है ,ठीक हो ?

नैना (उदास होकर) - आई एम सॉरी कहते हुए रोने लगी।

राजेश - तुम रो क्यों रही हो?

नैना - वह मिसेज मल्होत्रा को मेरी वजह से तुम्हें नीचा दिखाने का मौका मिल गया ।अगर मुझे पता होता तो मैं सच , में कभी भी उनसे नहीं लड़ती पर सब गड़बड़ हो गया । आई एम सो सॉरी , हर बार कोशिश करती हूं तुम्हें तकलीफ ना पहुंचाऊं पर देखो हर बार वही हो जाता है और आज तो सैंडिल्स भी... कहते हुए नैना रोने लगी ।

राजेश - अच्छा ठीक है, आगे थोड़ा ध्यान रखना और यह कोशिश करना कि उन्हें यह बात ना पता चले कि तुम ही वो नैना हो जो कॉलेज में मेरे साथ थी ।

नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी ।

राजेश - इसलिए कह रहा हूं कि वो तंग करेंगी तुम्हें । ध्यान रखना इस बात का - कहते हुए राजेश अब वापस जाने को मुडा कि नैना ने हाथ पकड लिया ।

राजेश ( पलटकर) - क्या है ?

नैना (सुबकते हुए ) - वह मैं रुमाल नहीं लाई आज तो आँसू कैसे पोंछू?

राजेश - सॉरी मेरा रुमाल सैंडल्स में ही...

नैना - तो मैं आंसू कैसे ...?

,

राजेश - अपने हाथों से और किससे ?

नैना - पर मेरे हाथों गंदे है ना , इन पर धूल लगी है - कहते उसने अपने हाथ राजेश की ओर कर दिए।

राजेश - तो ?

नैना ने राजेश के हाथों की तरफ इशारा किया और मुस्कुराने लगी ।

राजेश - तुम लोगों को आज मैं सफाई वाला नजर आ रहा हूं क्या कि कभी किसी की सैंडल तो कभी किसी के आंसू ?

नैना - प्लीज ।

राजेश - बिल्कुल नहीं , ये तो तुम्हें रोने से पहले देखना चाहिए कि रूमाल है या नहीं।

नैना - फिर ठीक है - कहते हुए उसने एक फाइल उठाई और उसमें से पेज फाडने को हुई कि राजेश ने जल्दी से फाइल उसके हाथ से खींच ली - यह क्या कर रही हो ?

, नैना - आंसू ...

राजेश - दिमाग से पैदल हो गई हो आज?

नैना ( मुस्कराते हुए ) - हाँ।

राजेश ने अब नैना के आँसू पोंछे और फिर जाने लगा कि नैना ने फिर हाथ पकड लिया ।

राजेश - अब क्या सेवा करूँ तुम्हारी?

नैना - तुम्हारी तबियत कैसी है अब।

राजेश - पहले से ठीक हूँ।

नैना - ओके। जाओ।

राजेश अब बोला - एक बार और याद कर लो।

नैना - नहीं, हो गया।

राजेश फिर मुडकर आगे बढा कि एक बार फिर नैना ने उसका हाथ पकड लिया ।

,

राजेश ने अब झुँझलाते हुए नैना को देखा और जाकर एक चेयर पर बैठ गया - एक काम करो, तुम्हें जो कहना है कह दो। मै यहीं बैठा हूँ आराम से।

नैना हँसी को छुपाते हुए बोली - वो तुम्हारी शादी है बारह दिन बाद और मिसेज मल्होत्रा यहाँ है ।

राजेश - तो?

नैना - तो मै जाकर पूछती हूँ उनसे कि किसी हेल्प की जरूरत तो नहीं है, इससे हमारे बीच आज जो झडप हुई है, वो संभल जाएगी - कहते हुए नैना अब दरवाजे की ओर चली कि राजेश अब खडा हो गया - रूको।

नैना - क्या हुआ और एक बात बताओ कि रिचा से मिसेज मल्होत्रा को कोई परेशानी नहीं है क्या?

राजेश अब सोच में पड गया - वो... मै..

नैना - ओह, समझ गई। तुमसे या तुम्हारी जिंदगी के किसी भी फैसले ले उन्हें कोई मतलब नहीं है। है ना?

, राजेश ( राहत की साँस लेते हुए ) - हाँ , ऐसा ही समझ लो। उनसे मेरी शादी या रिचा के बारे में कोई बात नहीं करना। मै नहीं चाहता ऐसा।

नैना - ठीक है।

राजेश - तो मै जाँऊ?

नैना - हाँ।

राजेश - पक्का?

नैना - पक्का।
 
राजेश अब जैसे ही दो चार कदम आगे बढा कि रूक गया, उसने पीछे पलटकर देखा तो नैना दूर खड़ी हँस रही थी - अगर जाने का मन नहीं है तो रूक सकते हो। ये तुम्हारा ही आँफिस है।

राजेश (झेंपकर) - नहीं वो मुझे लगा कि तुम फिर रोकोगी तो...

नैना - रोकना था क्या? कह कर हँसने लगी।

,

राजेश - तुम्हारा दिमाग सच में ही कुछ ज्यादा चलने लगा है - कहकर वो मुस्कराते हुए इनवेंटरी से बाहर निकल गया।

राजेश जैसे ही अपने कैबिन में आया तो मिसेज मल्होत्रा को अपनी सीट पर बैठे हुए पाया ।

मिसेज मल्होत्रा (मुस्कुराते हुए) - आओ बेटा ।

मिसेज मल्होत्रा के मुंह से अपने लिए बेटा शब्द राजेश को गाली समान चुभता था।

राजेश ( गुस्से में ) - यह नाटक करने की जरूरत नहीं है अब। आप को क्या जरूरत थी बाहर इतना तमाशा करने की? क्या मैं नहीं समझता कि आप यह सब सिर्फ मुझे परेशान करने के लिए कर रही हैं । बंद कीजिए ये बेटा कहना।

मिसेज मल्होत्रा ( गुस्से में ) - तो मैं कौन सी तुम्हारी मां कहलाने के लिए मरी जा रही हूं ? तुम्हें क्या लगा कि मेरी बेटी को मेरे खिलाफ भड़का कर तुम खुश रहोगे ? कैसी लगी तुम्हें अपनी बेइज्जती ? चेहरा देखने लायक था तुम्हारा। मानना पड़ेगा तुम्हें , एक एम्पलाई के लिए तुम मेरे सामने , झुक गए?

राजेश - अगली बार ध्यान रखना ऐसा कुछ भी करने से क्योंकि अब मैं चुप नहीं बैठूंगा फिर ना तो आपकी इज्जत का ख्याल करूंगा और ना ही रिया का लिहाज - कहते हुए वह अपनी चेयर के पास आकर खड़ा हो गया - और एक बात याद रखिएगा, ये ऑफिस मेरा है ।यहां का बॉस मैंं हूं और यहां वही होगा ,जो मैं चाहूंगा ।

अगर आपको अपनी खातिरदारी का इतना ही शौक है तो अपने पीछे 4-5 नौकर लेकर घुमा कीजिए। मेरा स्टाफ यहां काम करने आता हैं , आप की खातिरदारी करने नहीं ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम भूल रहे हो कि तुम किस से बात कर रहे हो ?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - जी नहीं , मुझे अच्छे से याद है कि आप मेरे पापा की दूसरी बीवी है । अगर आप का तमाशा हो गया हो तो प्लीज मेरी सीट से उठिए ,मुझे काम करना है। आपकी तरह बातें बनाने और चालें चलने से तो काम नहीं चलने वाला ना।

,

सेज मल्होत्रा झल्लाकर सीट पर से उठ गई - बैठ लो ।मुझे भी कोई शौक नहीं है तुम्हारी किसी भी चीज को हाथ लगाने का या इस्तेमाल करने का क्योंकि मुझे उन चीजों से भी उतनी ही नफरत होगी जितनी तुमसे है - कहते हुए वह कैबिन से बाहर निकल गई और मन में सोचने लगी कि देखती हूँ , कब तक इस कुर्सी पर बैठे रहते हो ?

मिसेज मल्होत्रा अब बिल्डिंग से बाहर निकली तो सामने से साहिल आता हुआ दिखाई दिया...,
 
मिसेज मल्होत्रा (मुस्कराते हुए) - मैं तो अपनी बेटी से मिलने आई थी लेकिन देखो कौन मिल गया ? तुम यहाँ कैसे?

साहिल - मै यहाँ जाँब करता हूँ।

मिसेज मल्होत्रा - मजाक कर रही थी, जानती हूँ। कैसे हो ?

साहिल - ठीक हूं ।

मिसेज मल्होत्रा ( कुछ देर सोच कर) - अच्छा एक बात बताओ , क्या तुम अब भी मेरी बेटी से प्यार करते हो या वह बस एक दिखावा था?

साहिल - करता तो आज भी हूं लेकिन मेरी हैसियत नहीं है जैसा कि आपने पहले बताया था मुझे ।

मिसेज मल्होत्रा (हंसते हुए )- तो तुम अभी तक इस बात पर नाराज बैठे हो ? दरअसल मिलने तो मैं तुमसे ही आई थी ।एक काम है , कर पाओगे ?

साहिल - कैसा काम?

मिसेज मल्होत्रा - अभी तो एक छोटा सा काम है लेकिन तुमने , कर दिया तो आगे भी काफी काम करना है।

साहिल (मुस्कुराते हुए ) - कर तो सकता हूं पर कीमत क्या होगी ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम तो पूरे व्यापारी बन गए हो , चलो अच्छा है । एक काम करो , शाम को तो मैं कुछ पेपर दूंगी। तुम्हें उस पर कैसे भी करके राजेश के साइन लेने हैं ।

साहिल (हैरानी से) - किस पर साइन लेने है और आप खुद क्यों उससे साइन नहीं ले लेती?

मिसेज मल्होत्रा - मै अगर कहूँगी तो इस जन्म तो क्या अगले सात जन्मों में भी वह मेरे दिए हुए किसी भी कागज पर साइन नहीं करेगा । उसके साइन हमें चुपके से लेने है।

साहिल (मुस्कुराते हुए) - वह बॉस है मेरा और दोस्त भी।उसके साथ धोखा नहीं कर सकता ।

मिसेज मल्होत्रा (हंसते हुए ) - बेवकूफ किसी और को बनाना, मैं सब जानती हूं कि तुम यहां राजेश से बदला लेने आए हो। तुम्हारी उससे जो भी दुश्मनी है , मुझे उससे कोई मतलब नहीं पर मैं भी उसकी बर्बादी चाहती हूं । बताओ, ले , पाओगे साइन या कोई और रास्ता ढूंढ लूँ?

साहिल - लेकिन वह मेरी असलियत जानता है तो क्यों करेगा वह किसी भी पेपर पर साइन ? आप रिया से क्यों नहीं करवाती यह काम , अपनी बहन के दिये किसी भी पेपर पर वो आसानी से साइन कर देगा।

मिसेज मल्होत्रा - हां लेकिन रिया भला क्यों करवाएगी उससे ऐसे पेपर्स पर साइन? तुम यहां ऑफिस में रहते हो, कई फाइल साइन होती है । किसी में भी लगा देना वह पेपर्स। कोई तो होगा जिस पर वह बहुत भरोसा करता हो और बिना पढ़े साइन कर देता हो फाईल्स पर जैसे विशाल।

साहिल अब सोच में पड़ गया कि तभी उसे नैना की याद आई - हां , नैना है जिस पर आंख बंद कर राजेश भरोसा करता है और वैसे भी उसकी ज्यादातर फाईल्स पर राजेश बिना देखे ही साइन कर देता है ।

मिसेज मल्होत्रा - किस सोच में पड़ गए ?

साहिल एक बार को तो मिसेज मल्होत्रा को नैना के बारे में बताने को हुआ फिर यह सोचकर चुप पड़ गया कि नैना मेरा हुकुम का इक्का है इसे अभी नहीं खोलूंगा - कुछ नहीं, , आपका काम हो जाएगा पर मुझे क्या फायदा मिलेगा इससे।

मिसेज मल्होत्रा - बहुत से रूपये और अगर राजेश को बर्बाद करने में कामयाब रहे तो मैं तुम्हारी शादी रिया से करा दूंगी।

साहिल यह सुनकर हंसने लगा - आप मुझे पागल समझती हैं, रिया मेरी राजेश से दुश्मनी की वजह से वैसे ही पसंद नहीं करती मुझे और जब मैं उसे बर्बाद कर दूंगा तो वह तो मेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहेगी ।

मिसेज मल्होत्रा - और अगर कुछ ऐसा हो कि रिया राजेश की शक्ल देखना भी ना चाहे तो ?

साहिल ( हैरानी से ) - ऐसा कैसे हो सकता है ? मतलब क्या है आपका?

मिसेज मल्होत्रा - मतलब यह है कि रिया को राजेश से दूर करना होगा । वह मुझसे मेरी बेटी को छीने ,उससे पहले मुझे उससे उसकी बहन छीननी होगी ।आज तक मैं उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाई क्योंकि उसके साथ रिया खड़ी है ।

अगर मैं कुछ भी करती हूं तो वह मुझसे दूर हो जाएगी।

साहिल - ठीक है , मैं आपके साथ हूं ।

,

मिसेज मल्होत्रा - तो ठीक है सौदा तय हुआ ।

शाम होने को आई, राजेश अपने केबिन में बैठा हुआ था कि विशाल का उसके पास एक मैसेज आया। राजेश ने वो मैसेज पढ़ा तो कुछ देर तक खामोशी से बैठा रहा, उसने विशाल को जवाब भेजा और उठकर केबिन की एक दीवार जो पूरी काँच थी और बाहर सड़क की ओर थी , उसके पास जाकर खड़ा हो गया । वह गहरी सोच में डूबा हुआ बिल्डिंग के बाहर सड़क की ओर देखने लगा कि मिसेज मल्होत्रा किसी से बात करती दिखाई दी लेकिन किससे? यह वह नहीं देख पा रहा था । यह इतना घुलमिल कर मुस्कुराते हुए किससे बात कर रही है ? इनके साथ तो रिया भी नहीं है ।

राजेश के दिमाग में कुछ आया , उसने फटाफट से साहिल को फोन मिलाया ।

साहिल राजेश का फोन देखकर - मिसेज मल्होत्रा 1 मिनट खामोश रहिएगा , राजेश का फोन है ।

साहिल (फोन उठाकर) - हां राजेश।

राजेश - वह मैंने तुम्हें प्रेजेंटेशन बनाने को दी थी, बना ली?

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साहिल - हां बना ली, बस 2 मिनट में पहुंचता हूं । राजेश की नजर मिसेज मल्होत्रा पर ही थी । उसने गौर किया कि जब तक उसने साहिल से बात की , वह चुपचाप खड़ी थी और जैसे ही उसने फोन रखा तो उनकी बातें शुरू हो गई। आखिर चक्कर क्या है ? क्या मेरा शक सही है ?

यह सोचते हुए वह तेजी से केबिन से बाहर निकला और ऑफिस से बाहर निकल गया। ग्राउंड फ्लोर पर पहुंच जैसे ही बिल्डिंग से बाहर निकला तो देखा कि मिसेज मल्होत्रा जा चुकी थी । यह कहां चली गई ? राजेश ने देखा कि वहां कोई नहीं था। वह अब लौट लिफ्ट में जाने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उसे याद आया कि नैना इनवेंटरी में सुबह से अकेली बैठी है, बेचारी का मन भी नहीं लग रहा होगा। नैना को ऊपर बुला लेता हूं , मिसेज मल्होत्रा जा चुकी है और ऑफिस बंद होने वाला है 1 घंटे में , सोचते हुए इनवेंटरी के पास पहुंचा तो उसे नैना की हंसने की आवाज आ रही थी । वह खिलखिला कर हँस रही थी - किससे बात कर रही है यह? वह जैसे ही इनवेंटरी के दरवाजे के सामने बढ़ा तो वहां साहिल को देख हैरान रह गया।
 
नैना साहिल के कंधे पर हाथ रख कर जोर जोर से हंस रही थी और कह रही थी - तुम्हें पता है ? मैं तुम्हें कितना मिस कर , रही थी , सुबह से बोर हो रही थी कि तुमने आते ही माहौल खुशनुमा कर दिया । सच में तुम जहां भी जाते हो , रौनक ले आते हो ।

साहिल (मुस्कुराते हुए) - थैंक्यू । अच्छा चलो , अब चलते हैं ऑफिस में । राजेश को पता चल गया कि हम दोनों काम छोड़ मस्ती कर रहे हैं तो वह गुस्सा हो जाएगा । वैसे मैं जानता हूं कि मेरी नैना का मेरे बिना मन नहीं लगता।

नैना - वैसे राजेश को कैसे पता चलेगा कि हम दोनों यहां साथ में है ? उसे तो बस काम और गुस्सा करने के अलावा और कुछ आता ही नहीं ? तुम कभी उसके साथ गाड़ी में बैठना, इतना बोरिंग है कि ऐसा लगता है कि पता नहीं कितने जन्मों से गाड़ी में ही बैठे हैं ।

राजेश अब उन दोनों की बातें सुन गुस्से से लाल होने लगा - इस साहिल से तो मुझे उम्मीद थी पर नैना इसके सामने मेरा मजाक बना रही है कि मैं बोरिंग हूं ? और साहिल उसे मेरी नैना कह रहा है , तब भी इसने उसे टोका नहीं ?

राजेश अब वापस जाने को मुडा कि दरवाजे से उसका हाथ टकरा गया । उसकी आवाज सुनकर नैना , साहिल दोनों राजेश को देखने लगे।

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साहिल - अरे राजेश तुम ? आओ ना।

राजेश - तुम कब आए ?

साहिल - हो गया होगा आधा घंटा, आओ तो यार।

राजेश ( नैना की ओर गुस्से से देखते हुए) - नहीं, मैं अपनी कम्पनी से तुम्हें बोर नहीं करना चाहता । लगता है तुम दोनों एक दूसरे की कम्पनी काफी एंजाए करते हो ? कहते हुए राजेश ने नैना के हाथ की ओर देखा जो साहिल के कंधे पर रखा था ।

नैना ने धीरे से अपना हाथ हटा लिया ।

साहिल - नैना ने बताया जो आज ऑफिस में हुआ और तुमने सारा की सजा खुद पूरी की । तुम बहुत अच्छे हो यार वरना कौन करता है आज के टाइम में ऐसा वो भी अपने एमप्लाई के लिए? और हां , थैंक्स मेरी नैना को मिसेज मल्होत्रा के गुस्से से बचाने के लिए।

साहिल जब भी नैना को मेरी नैना कहता, राजेश का मन करता कि उसे एक थप्पड खींच कर दे कि नैना उसकी नहीं है , और ना ही कभी होगी।

राजेश की नजर अब नैना के गले में पडे एक स्कार्फ पर गई, वह मन ही मन सोचने लगा कि यह सुबह तो नहीं था फिर अब कहाँ से आया?

साहिल - क्या हुआ? किस सोच में डूबे हो ?

राजेश - कुछ नहीं , चलो अपनी प्रेजेंटेशन दो जल्दी से । राजेश एक बार को नैना को गुस्से में देख आगे बढ़ गया। साहिल नैना का हाथ पकड़ के राजेश के पीछे पीछे चल दिया।

राजेश ने पीछे पलट कर देखा तो साहिल और नैना के हाथ में हाथ देख वापस मुड जल्दी से आगे बढ़ गया

राजेश को गुस्से में आगे बढ़ते देख नैना अपनी हंसी रोक नहीं पा रही थी ।

साहिल - उसे शक हो जाएगा ।

नैना - मुझे बहुत मजा आ रहा है राजेश को तंग करने में।

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साहिल - हम्म, तुम जितना दूर जाओगी , वह उतना ही जल्दी टूटेगा । राजेश से थोड़ी दूरी बनाया करो , उसे खुद की कमी महसूस होने दो । उसे महसूस होने दो कि वह अधूरा सा है तुम्हारे बिना ।

नैना - वह तो अच्छा है कि तुमने उसे आते देख लिया पर तुमने उसे झूठ क्यों बोला कि तुम आधे घंटे पहले आए थे?

साहिल ( मुस्कुरा कर ) - वो इसलिए कि राजेश को जलन हो कि तुम अपना टाइम मेरे साथ बिता रही हो । अगर उसे पता चलता कि मैं अभी आया हूं तो क्या वो इतना जलता ?

नैना (सोचते हुए) - बात तो तुम सही कह रहे हो।

राजेश अब सीधे विशाल के केबिन में बैठी रिया के पास पहुंचा - रिया, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है ।

रिया - हां भाई बोलो ना।

राजेश - क्या तुम्हें अभी भी याद नहीं आया कि तुम ने साहिल को कहां देखा?

,

रिया - नहीं भाई।

राजेश - ठीक है , मैं याद दिलाता हूं कि तुमने साहिल को अपने बेंगलुरु वाले कॉलेज में देखा होगा क्योंकि वह तुम्हारा वहां सुपर सीनियर था ।

रिया को यह सुनते ही सब याद आ गया - हां भाई, याद आया। आप सही कह रहे हैं - कहते हुए रिया ने उसे उस दिन कॉलेज वाली बात बताई कि कैसे साहिल उसके पास गिरा और रिया ने लव लेटर साहिल को वापस दिया।

राजेश - किसके लिए था वो लैटर?

रिया - पता नहीं भाई, मैंने पूछा भी था कि तभी माँम वहां आ गई ।

राजेश (हैरानी से ) - मिसेज मल्होत्रा वहां ?

रिया - हा, मुझसे मिलने आई थी । मैं सच कह रही हूं भाई, मैं तो बस उसे उसी दिन मिली थी ।

राजेश मुस्कुरा कर बोला - मैं जानता हूं लेकिन अगर तुम्हें , कभी कोई भी लड़का पसंद आता है तो मुझसे एक बार कह जरूर देना।

रिया (उदास होकर ) - पर मुझे नहीं लगता कि कभी मुझे प्यार होगा । अब डर लगता है मुझे इस शब्द से भी।

राजेश ( हैरानी से ) - डर ? पर क्यों ? तुम तो प्यार में भरोसा करने वाली लड़की थी जो बस लव मैरिज मे हीं विश्वास करती थी फिर ऐसे ....

रिया - आपको देखकर भाई ।आपको देखकर मेरी सोच ही बदल गई , आप और नैना भी तो एक दूसरे से प्यार करते थे और सच कहूं तो आज भी करते हैं पर क्या आप दोनों खुश हैं ? नहीं ना? मैंने देखा है आपको 2 साल तक दर्द से जूझते हुए । मैं इतना दर्द अपनी जिंदगी में नहीं लाना चाहती ।

राजेश अब यह सुनकर चुप हो गया।
 
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