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घर के काम निबटाना सबकी मजबूरी थी, वरना आजकल टी.वी. सीरियल के मुकाबले उन्हें ऋचा की कहानी में ज्यादा मज़ा आ रहा था।
थाने में ऋचा को देख इन्स्पेक्टर कुलकर्णी हक्का-बक्का रह गया।
“आप……….. खुद यहाँ आई हैं?”
“जी हाँ, मैं जानना चाहता हूँ, केस की क्या स्थिति है? तीनों अभियुक्त कहाँ हैं?”
“जी…….. उन्हें तो कल ज़मानत पर छोड़ दिया गया है। उनपर मुकदमा चलाया जाएगा।” इन्स्पेक्टर हड़बड़ा-से गए।
“ज़मानत पर छोड़ दिया गया ताकि बाहर जाकर किसी और लड़की का बलात्कार करें?” ऋचा की आँखों से चिनगारियाँ छूट रही थीं।
“देखिए, कोर्ट के आर्डर के सामने हमारी बात नहीं चल सकती।”
“ठीक है मि. कुलकर्णी, मैं देखती हूँ, क्या किया जा सकता है।”
उत्तेजित ऋचा सीधी चीफ़ जस्टिस गर्ग के घर पहुँच गई। दरबान के रोकने की परवाह न कर, डोर-बेल बजाती गई। दरवाजा खुलते ही ऋचा अन्द प्रविष्ट हो गई।
चीफ जस्टिस गर्ग ब्रेकफास्ट ले रहे थे। ऋचा को देख चेहरे पर नाराज़गी-सी उभर आई। नाराज़गी की परवाह न कर, संक्षेप में ऋचा ने अपना केस सुना दिया।
“आप मुझसे क्या चाहती हैं? अन्ततः हर बात का एक तरीका होता है। इस तरह बिना इजाज़त घर में घुस आना अपराध है। आपको सज़ा दी जा सकती है। कानून का अपना नियम है। हर फैसला नियम-कानून के अधीन किया जाता है।”
“किस कानून की बात आप कर रनहे हैं, सर? जहाँ एक लड़की का तीन-तीन युवक सामूहिक बलात्कार करने के बाद खुले घूम रहे हैं और फ़रियादी लड़की को कानून के नियम-कायदे समझाए जाते हैं?”
“कोर्ट के फ़ैसलों में वक्त तो लगता ही है। तुम्हें सब्र से काम लेना चाहिए।”
“सब्र रखने की बात कहना बहुत आसान है, अगर यही हादसा आपकी अपनी बेटी के साथ होता तो क्या आप इसी सब्र से काम लेते? नहीं सर, नहीं। जब तक बलात्कार झेलनेवाली लड़की के साथ आप जुड़ाव न महसूस करेंगे, तब तक रोज़ किसी शीला, मीना, लीला, रमा का बलात्कार होता रहेगा। कुछ देर के लिए मुझमें अपनी बेटी को देख लीजिए, सर, तब आप उस पिता के हाहाकार को समझ सकेंगे, जो आज मेरे पिता सह रहे हैं।”
चीफ़ जस्टिस गर्ग मौन रह गए। उनकी पत्नी की आँखों में आँसू आ गए।
“मैं तुम्हारा दर्द समझ रही हूँ, बेटी। मुझे खुशी है, तुमने हिम्मत नहीं हारी। मेरा आशीर्वाद है, तुम्हें कामयाबी मिले।”
“ठीक हैं, तुम अपना मुकदमा दाखिल कराओ। विश्वास रखो, तुम्हारे साथ अन्याय नहीं होगा।”
“थैंक्यू, सर!”
ऋचा का चेहरा चमक उठा। रास्ते में महिलाओं का जुलूस जोरदार नारों के साथ सड़क पर उतर आया था। एक बार जुलूस में शामिल होने की इच्छा हो आई, पर अब उसे अपने केस के लिए वकील ढॅूँढ़ना है।