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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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मैं जब वापस आया तब रुखसार बिस्तरमें मेरा इंतजार कर रही थी। मैं जानता था की वह वह मुझसे वहाँ क्या हुआ यह सुनने के लिए बेताब थी। मैंने भी हाथ मुंह धोया और बिस्तर में उसके पास जाके अपने कपडे निकाल के लेट गया। उसने जब महसूस किया की मैं तो बिल्कुल नंगा बिस्तर में घुसा हुआ हूँ तो बोली, “लगता है आज कुछ तीर मार के आये हो तुम। बोलो, चिड़िया जाल में फँसी या नहीं।”

मैने रुखसार को अपनी बाँहों में घेर लिया। मैं उसके नाइट गाउन को उतारने में लग गया। उसके नाइट गाउन को खोल कर उसे बाजू में रख कर फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मुंह पर मुंह लगा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मेरा खड़ा लंड उसकी फुद्दी को टक्कर मार रहा था। वह कुछ बोलना चाहती थी, पर चूँकि मैंने उसके होठ होंठ कास कर दबाये हुए थे इसलिए वह कुछ बोल नहीं पायी।

मैंने धीरे से अपने होंठ हटाये और बोला, “चिड़िया जाल में तो फंस सकती थी, पर मैंने उसे नहीं फंसाया। मैं उसे आसानी से फंसा लूंगा अगर तुम सपोर्ट करो तो।”

“तुम्हे मुझसे सपोर्ट चाहिए, एक दूसरी औरत को फ़साने के लिए?” बड़े आश्चर्य से उसने पूछा।

मैंने उसे सहलाते हुए कहा, “हाँ। मुझे तुम्हारा सपोर्ट ऐसे चाहिए की हम कुछ ऐसा करें की जिससे ऐसा ना लगे की राज पर या तुम पर पर कोई ज्यादती हो रही है।”

रुखसार बड़ी उत्सुकता से मेरी बात सुन रही थी। मैंने कहा, “अगर में आज डॉली के साथ कुछ करता और अगर तुम्हे या राज को वह मालूम पड़ता, तो क्या तुम्हें मनमें एक तरह की रंजिश न होती? क्या राज इससे आहत न होता?” रुखसार मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने अपना सर हिलाके हामी भरी।

मैंने फिर मेरी बीबी को सारा किस्सा सुनाया। मैंने उससे कुछ भी नहीं छुपाया। मैंने कहा, “शायद यदि मैं चाहता तो डॉली को अपनी बाँहों में आज जक़ड सकता था, चुम भी सकता था, और शायद चोद भी सकता था। पर मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। मैं तुम्हे बताये बिना कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिससे तुम्हे चोट पहुंचे। ”

मेरी बात सुनकर रुखसार भावुक हो गयी और बोली,” यही बात तुम्हारे दोस्त पर भी लागू होती है। तुम उस दिन राज के बारे में मुझे खरी खोटी सूना रहे थे न? तुम्हारे कहने पर मैं जब राज के सामने तौलिया पहन के आयी तो उसने मुझे छुआ भी नहीं। वह चाहता तो सब कुछ कर सकता था..

मैं भी उसे शायद रोक नहीं पाती। हम एकदूसरे के इतने करीब खड़े थे। तब भी उसने कुछ नहीं किया। हाँ वह बादमें थोड़ा भावुक हो गया और मुझे बाहों में ले लिया। पर तुरंत उसने मुझसे माफ़ी भी मांगी। हाँ, मैं ये मना नहीं करुँगी के अगर मैं उसे और ज्यादा लिफ्ट देती तो वह मुझे छोड़ता नहीं। शायद मुझे वहीँ चोद देता। पर वह तो हर मर्द करता।“

एक तरफ मेरी बीबी यह कह रही थी की राज ने उसे छुआ भी नहीं पर तुरंत वह कह रही थी की राज ने उसे अपनी बाहों में ले लिया था। मैं समझ गया की रुखसार राज का पक्ष ले रही थी।

रुखसार मेरे पास आयी और मुझे अपने हाथों से मेरी छाती पर पिटनेका नाटक करती हुई बोली, “यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है । न तुम मुझे राज को उकसाने के लिए कहते और न यह सब होता। मुझे आज इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है।” यह बोलते हुए भी मेरी बीबी का मुंह शर्म से जैसे लाल हो गया।

मैंने महसूस किया की तब मेरी बीवी इतनी कामान्ध हो गयी की उसने अपनी पोजीशन बदली और मेरे पॉव के बीच पहुँच कर मेरा लण्ड अपने मुंह में डाल कर बड़े प्यार से चाटने लगी। फिर धीरे से वह मेरे लण्ड को मुंह के अंदर बाहर करने लगी जैसे वह मुंहसे अपनी चुदाई करवा रही हो। मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मेरे लण्ड में गरम खून दौड़ रहा था। उत्तेजना के मारे मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पा रहा था।

जो मेरी प्यारी बीबी ने हमारी शादी के इतने सालों से नहीं किया था, वह आज कल वह आसानी से मुझे खुश करने के लिए कर रही थी। आजतक उसने मेरे कई बार कहने पर भी मेरा लण्ड कभी भी अपने मुंह में नहीं डाला था।

आजकल वह मेरे आग्रह किये बिना ही मुझे खुश करने के लिए वह मरे लण्ड को न सिर्फ मुंह में डालती थी पर उसे बड़े प्यार से चूसती भी थी। उसे पता था की ऐसे करने से मैं बहुत उत्तेजित हो जाता हूँ। मेरी प्यारी बीबी के साथ मैं अब वैवाहिक जीवन का वह आनंद उठा रहा था जो मुझे शादी के आठ सालों में भी नसीब नहीं हुआथा। कहीं ना कहीं इसमें राज का भी योगदान था इसमें कोई शक नहीं था।

मैंने उसे मेरी टांगो के बीच से उठाकर अपने सीने से लगाया और बोला, “डार्लिंग, मैं तुम्हे इतना चाहता हूँ की जिसकी कोई सीमा नहीं। मैं तुम्हें जीवन के सब सुख अनुभव करवाना चाहता हूँ। एक मर्द जीवन में कई औरतों को चोदता है। मैंने भी तुम्हारे अलावा कुछ लड़कियों को और औरतों को शादी से पहले चोदा है..

अगर तुम मुझसे इतना प्यार नहीं करती तो मैं शादी के बाद भी किसी न किसी औरत को चोदता होता। मैं तुम्हें भी ऐसे आनंद का अनुभव करवाना चाहता हूँ। अपनी बीबी या अपने पति के अलावा और किसीको चोदने में या और किसीसे चुदवाने में कुछ अनोखा ही आनंद आता है। यह मैं जानता हूँ। वही आनंद मैं चाहता हूँ की तुम अनुभव करो।“

मुझे तब ऐसा लगा जैसे मेरी बात सुनकर रुखसार कुछ रिसिया गयी। वह मेरा हाथ छुड़ा कर बोली, “जानू, मैं सच बोलती हूँ। मुझे मात्र तुमसे ही सेक्स का आनंद लेनाहै। मैं तुम से बहुत ही खुश हूँ। पर लगता है तुम मुझ से खुश नहीं हो इसीलिए ऐसा सोचते हो। मैंने तुम्हें पूरी छूट दे रखी है। जहां चाहे जाओ, जिस किसीको चोदना है चोदो। मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी।”

फिर मैंने रुखसार की चिबुक पकड़ कर कहा, “मेरी प्यारी डार्लिंग मेरी कसम है यदि तू ज़रा सा भी झूठ बोली तो। सच सच बताना, राज ने जब तुझे बाँहों में लेकर डांस किया था और जब तुम राज के ऊपर धड़ाम से गिरी और उस समय जब राज ने तुम्हे बाहों में लिया और तुम्हारे बूब्स दबाये तो क्या तुम उत्तेजित नहीं हुयी थी? आज सिर्फ सच बोलना।”

रुखसार जैसे सहम गयी। उसने कभी सोचा भी नहीं था की इस तरह कभी उसे भी कटहरे में खड़ा होना पड़ेगा। उसके गाल शर्म के मारे लाल हो गये। थोड़ी देर सोच कर वह बोली, “हां यह सच है। मैं झूठ नहीं बोलूंगी। उसे छू कर मेरे जिस्म में रोमांच सा हो रहा था। पर मैंने कभी भी उसके या किसी और के बारे में ऐसा वैसा नहीं सोचा। एक बात और भी है..

शादी का बंधन एक नाजुक धागे से बंधा हुआ है। कभी कभी उसे ज्यादा खींचने से वह धागा टूट सकता है। ऐसे पर पुरुष सम्बन्ध का मतलब उस धागे को ज्यादा खींचना। एक बात और। अपनी बीबी को पर पुरुष से जातीय सम्बन्ध के लिए उकसाना खतरनाक भी हो सकता है। हो सकता है मुझे दुसरेसे चुदवाने में मझा आने लगे और मैं बार बार दूसरे मर्द से चुदवाना चहुँ तो?”

बातों बातों में मेरी सीधी सादी बीबी ने मुझे वैवाहिक सम्बन्ध की वह बात कह डाली जो एक सटीक खतरे की और इंगित करती थी। मेरी बीबी ने मुझसे राज का नाम लिए बगैर यह भी कह दिया की एक बार चुदने के बाद हो सकता है वह राज से बार बार चुदवाना चाहे..

तब फिर मुझे इसकी इजाज़त देनी होगी। पर मैंने इस बारे में काफी सोच रखा था और मेरी बीबी के लिए मेरे पास भी सटीक जवाब था। हालांकि मेरी बीबी की बातों से मुझे एक बात साफ़ नजर आयी की पिछले कुछ दिनों में रुखसार और राज के थोड़े करीब आने से मेरी बीबी का राज के प्रति जो भय अथवा वैमनस्य था, वह नहीं रहा था। मुझे अब हमारा रास्ता साफ़ नजर आ रहाथा।

तब मैंने कहा, ” डार्लिंग, मुझे एक बात बताओ, मानलो आज दिन में राज ने तुम्हे यदि चोद दिया होता, तो क्या तुम मुझे छोड़ देती? या क्या मैं तुम्हें छोड़ देता? मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ की सेक्स और प्रेम में बहुत अन्तर है। आज हम पति बीबी मात्र इस लिए नहीं हैं क्योंकि हम एक दूसरे से सेक्स करते हैं..

बल्कि हम पति बीबी इस लिए भी हैं क्योंकि हम न सिर्फ एक दूसरे से प्यार एवं सेक्स करते हैं पर एक दूसरे की जिम्मेदारियां, खूबियाँ और कमियां हम मिलकर शेयर करते हैं और उसका फायदा या नुक्सान हम क़बूल करते हैं। यदि हम अपने इस बंधन से वाकिफ हैं तो ऐसी कोई बात नहीं जो हमें जुदा कर सके। मैं तो एक जातीय अनुभव करने के मात्र के लिए ही कह रहा हूँ।” रुखसार कुछ न बोली और चुपचाप मुझे देखने लगी।

 
उस रात को रुखसार बहुत खिली हुई लग रही थी। मैंने मेरी बीबीको इतनी बार झड़ते हुए कभी नहीं देखा। शायद वह हमारी बातों को याद करके अपने ही तरंगों में खोयी हुई थी।

मेरी ज़िन्दगी में बहार सी आ गयीथी। अब मैं पहले से कई गुना खुश था। दूसरी और राज भी अपने सपनों में था। उस दिन जब रसोई में वह रुखसार के इतने करीब आ पाया था, यह सोचने से ही उत्तेजित हो रहा था। पहले उसने जब रुखसार को देखा था तो वह उसे एक मात्र सपनों में आनेवाली नायिका के सामान लग रही थी।

वह नायिका जो मात्र सपनों में आती है और जिसके छूने कि कल्पना मात्र करने से पुरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। वह वास्तव में भी कभी इतने करीब आएगी यह सोचने से ही उसके बदन में एक आग सी फ़ैली जा रही थी।

एकदिन शाम को हम दोनों दोस्त एक क्लब में जा बैठे। राज उसी दिन अपने टूर से वापस आया था। मैं वास्तव में बहुत खुश था। पिछली रात को रुखसार ने मुझे गले लगा कर इतना प्यार कियाथा की मैं उसके नशे में तब तक झूम रहा था। राज ने मुझे इतने खुश होने का कारण पूछा।

मैंने उसे कहा की इसका कारण वह खुद ही था। राज एकदम अचम्भे में पड़ गया। उस से जो मैं कहना चाहता था कह नहीं पाया और चुप हो गया। राज ने तब कहा, “खैर, मुझे यह बताओ की मेरे घरमें तुम्हारी विजिट कैसी रही? डॉली ने मुझे कहा की उसने एक बार तुम्हे रात को घर बुलाया था।”

मैंने फिर वही सारी कहानी पूरी सच्ची राज को सुनाई। जब राज ने सुना की डॉली मुझसे लिपट गयी थी तो वह जोर से हंस पड़ा और बोला, “देखा, मेरी बीबी ने भी यह बात मुझसे छुपाई थी। पर तुमने मुझसे नहीं छुपाई। अरे यार, तुम तो बड़े सच्चे और कच्चे निकले। तुम्हारी जगह अगर मैं होता न तो मैं तो डॉली की बजा ही देता।”

मैंने उसके मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, “यार, मैं कोई साधू नहीं। पर तू मेरा पक्का दोस्त है। देख मैंने भी बड़ी मुस्श्किल से संयम रखा था। मन तो मेरा भी उछल रहा था। पर मैं तुम्हें आहत करना नहीं चाहता था।”

राज ने तब मुझे एक बात कही। उसने कहा, “यार, तू क्या समझता है? मैं क्या अपनी बीबी को तेरे बारे में बताता नहीं हूँ? मैं डॉली को दिन रात तेरे बारे में बताता हूँ। मैंने तो मेरी बीबी से यहां तक कह दिया है, की यदि समीर तुमसे थोड़ी बहुत छेड़खानी भी करे तो बुरा मत मानना। वैसे सच बताओ यार, तुम्हे मेरी बीबी कैसी लगी?”

मैं यह सुनकर हक्काबक्का सा रह गया। तब फिर मरी झिझक थोड़ी कम हुई। मैंने राज से पास जाते हुए कहां, “राज, सच कहूं। जब डॉली मेरे इतनी करीब बैठी ना तो मेरे तो छक्के छूट गए। मैं तो पसीना पसीना हो गया। बाई गॉड यार, भाभी जान तो कमाल है।”.

राज ने तब मुझे एक बात कही। उसने कहा, “यार, तू क्या समझता है? मैं क्या अपनी बीबी को तेरे बारे में बताता नहीं हूँ? मैं डॉली को दिन रात तेरे बारे में बताता हूँ। मैंने तो मेरी बीबी से यहां तक कह दिया है, की यदि समीर तुमसे थोड़ी बहुत छेड़खानी भी करे तो बुरा मत मानना। वैसे सच बताओ यार, तुम्हे मेरी बीबी कैसी लगी?”

मैं यह सुनकर हक्काबक्का सा रह गया। तब फिर मरी झिझक थोड़ी कम हुई। मैंने राज से पास खिसकते हुए कहां, “राज, सच कहूं। जब डॉली मेरे इतनी करीब बैठी ना, तो मेरे तो छक्के छूट गए। मैं तो पसीना पसीना हो गया। बाई गॉड यार, भाभी जान तो कमाल है।”

राज ने मुझे एक धक्का मारते हुए कहा, “यह क्यों नहीं कहते की वह माल है। यार वह है ही ऐसी। कॉलेज मैं तो हम सब उस पे मरते थे। सब लड़के उसे देख कर सिटी बजाते थे। बेटा तू आगे बढ़ मैं तेरे साथ हूँ।”

मैंने भी अपनी झिझक को बाहर निकाल फेंका और बोला, “एक बात कहूं? मैं और रुखसार भी तुम्हारे बारेमें बहुत बातें करते हैं। मैं उसे तेरे करीब लाने की कोशिश करता हूँ। वह भी तुझे अच्छा मानती तो है, पर उससे आगे कुछ भी बात नहीं करना चाहती।”

राज ने तब मेरा कन्धा थपथपाते हुए कहा, “दोस्त, अब हम एक दूसरे के सामने जूठा ढ़ोंग ना करें। सच बात तो यह है की हम दोनों एक दूसरे की बीवी से सेक्स करना चाहते हैं। शायद बीबियों को भी हम पसंद है। पर वह अपनी कामना जाहिर नहीं कर सकती और चुप रह जाती है। हमारी बीबियाँ एक असमंजस मैं है। तूने जो अब तक किया वही बहुत है। अब इसके आगे मुझे कुछ करने दे। बस मुझे तेरी इजाजत और सपोर्ट चाहिए।“

मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मैं तेरे साथ हूँ। अब तो आगे बढ़ना ही है। ”

पर इस बातचित के बाद काफी समय तक हम एक दूसरे से मिल नहीं पाए, हालांकि हमारी फ़ोन पर बात होती रहती थी। राज और मैं अपने ऑफिस के काम में व्यस्त हो गए और एक दूसरे के घर आना जाना हुआ नहीं। कई बार रुखसार राज के बारेमें पूछ लेती थी, तब मैं मेरी राज से हुयी टेलीफोन पर बातचीत का ब्यौरा दे देता था।

ऐसे ही कुछ हफ्ते बीत गए। समय को बितते देर नहीं लगती। सर्दियाँ जानेको थी। गर्मी दरवाजे पर दस्तक दे रही थी। शहर के लोग मस्ती में होली के त्यौहार की तैयारियां कर रहे थे। हर साल हम होली के दिन एक दोस्त के वहां मिलते थे। सारे दोस्त वहीं पहुँच कर एकदूसरे को और एक दूसरे की बीबियों को रंगते थे।

 
माहौल एकदम मस्ती का हुआ करता था। थोड़ी बहुत शराब भी चलती थी। रुखसार और मैं करीब सुबह ग्यारह बजे उस दोस्त के घर पहुंचे तो देखा की राज भी वहां था। हम सबने एक दूसरे को अच्छी तरह से रंगा और फिर राज और मैं लॉन में बैठ कर गाने बजाने के कार्यक्रम में जुड़ गए। रुखसार घर में दूसरी महिलाओं के साथ थी।

तब मैंने देखा की राज उठकर घर में चला गया। मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। ऐसे ही गाने बजाने में आधा घंटा बीत गया था। तब राज वापस आ गया। वह खुश नजर आरहा था। वह निकलने की जल्दी में था। उसने मुझे बाई बाई की और चल पड़ा।

थोड़ी ही देर में रुखसार और दूसरी औरतें आ गयी और हम सब घर जाने के लिए तैयार हुए। पहले तो मैं रुखसार को पहचान ही नहीं सका। दूसरी औरतों के मुकाबले वह पूरी रंग से भरी हुई थी। खास तौर से छाती और मुंह पर इतना रंग मला हुआ था की वह एक भूतनी जैसी लग रही थी। उसके कपडे भी बेहाल थे।

मैं उसे देख कर हंस पड़ा। मैंने पूछा, “लगता है मेरी खूबसूरत बीबी को सब लोगों ने इकठ्ठा होकर खूब रंगा है।“

तब रुखसार ने झुंझलाहट भरी आवाज में पूछा, “डॉली को नहीं देखा मैने। वह आयी नहीं थी क्या?”

मैंने कहा, “मैंने भी आज उसे देखा नहीं। शायद आज वह यहां नहीं आयी।“

तब रुखसार एकदम धीरे से बड़बड़ाई, “तभी में सोचूं, की जनाब इतने फड़फड़ा क्यों रहे थे। ”

मैंने पूछा, “किसके बारेमे कह रही हो?” मेरी बीबी ने कोई उत्तर नहीं दिया। हम तुरंत ही मेरी बाइक पर सवार हो कर चल दिए।

घर पहुँच कर मैंने देखा तो रुखसार कुछ हड़बड़ाई सी लग रही थी। मैंने जब पूछा तो मुझे लगा की रुखसार अपने शब्दों को कुछ ज्यादा ही सावधानी से नापतोल कर बोली, “देखिये, ऐसी कोई ख़ास बात नहीं है। आप किसी को कुछ बताइएगा नहीं। पर आपके दोस्त राज ने मरे साथ क्या किया मालुम है? तुम्हारे दोस्त के घर में राज मुझे कुछ बहाना बना कर पीछे के कमरे में ले गया और उसने मुझ पर ऐसा रंग रगड़ा ऐसा रंग रगडा की मेरी साड़ी ब्लाउज यहां तक की ब्रा के अंदर भी रंग ही रंग कर दिया।

होली के बहाने उसने मुझसे बड़ी बद तमीज़ी की। मैं आप को क्या बताऊँ उसने मेरे साथ क्या क्या किया। उसने मेरी ब्रैस्टस दबाई और उनमें रंग रगड़ता रहा। आप उसे बताइये की यह उसने अच्छा नहीं किया। समीर, मैं चिल्लाती तो सब लोग इकठ्ठा हो जाते। मैंने उसे कहा राज ये क्या कर रहे हो। पर उसने मेरी एक न सुनी।“

मैंने जैसे ही यह सूना तो मेरा तो लण्ड अपनी पतलून में फ़ुफ़कार ने लगा। मैंने मन ही मन में सोचा, “अरे वाह, मेरे शेर! तुम ने तो मैच शुरू होने से पहले ही गोल दागना शुरू कर दिया।“

रुखसार को ढाढस देते हुए मैंने कहा, “देखो डार्लिंग यह होली का त्योहार है। एक दूसरे की बीबियों को छेड़ना उनपर रंग डालना, उनसे खेल खेला करना, मजाक करना और कभी कभी सेक्सी बातें करना होता है। इस पर बुरा नहीं मानना चाहिए। पर तुम तो काफी नासमीर लग रही हो। मुझे पक्का नहीं पता पर आज डॉली शायद अपने मायके गयी है।

दो तीन दिन पहले मुझे राज ने बताया था की उसकी बीबी होली में शायद मायके जाएगी। उसके घर में राज अकेला है। मैं आज शाम को उसे महा मुर्ख सम्मलेन में हमारे साथ जाने के लिए आमंत्रित करने का सोच रहा था। अब तो मैं उसको थोड़ा डाँटूंगा तो वह वैसे भी नहीं आएगा। तुम कहो मैं क्या करूँ?” मैंने रुखसार से ही उसके मन की बात जाननी चाही।

मेरी भोली भाली बीबी एकदम सोच में पड़ गयी। वह थोड़ी घबरायी सी भी थी। थोड़ी देर बाद वह धीरे से बोली, “बाप रे, राज शाम को भी आएगा? वह भी अकेले? अम्मा, मेरी तो शामत ही आ जायेगी।”

फिर रुखसार एकदम चुप सी हो गयी। रुखसार की सूरत कुछ गुस्सेसे, कुछ शर्म से और बाकी रंग से एकदम लाल हो रही थी।

वह रोनी सी सूरत बना कर फिर दोबारा बोली, “देखिये, मुझे आप को कहना था सो मैंने कह दिया। अब आगे आप जानो। पर हाँ, आप बात का बतंगड़ मत बनाना। आप राज को कुछ मत कहिये । डांटने का तो सोचना भी मत। मैं नहीं चाहती के इस बात पर आप दोनों घने दोस्तों में कुछ अनबन पैदा हो। अगर होली में आम तौर से ऐसा होता है तो फिर ठीक है। अब तो मैं सोच रही हूँ की अगर मैंने आप को यह सब नहीं बताया होता तो अच्छा होता। बल्कि आप यह समझो की मैंने आप को कुछ नहीं बताया। मैं अपनी शिकायत वापस लेती हूँ। आप उसे जरूर बुलाओ। जो मैंने कहा उसे भूल जाओ। आज शायद उसको शराब चढ़ गयी थी। इसी लिए उसने यह हंगामा किया। बात यहीं खत्म करो। जाने दो। उसको डांटना मत, प्लीज?”

मेरी सीधी सादी बीबी की बात सुनकर मैं मन में हंसने लगा। मैंने मन ही मन हंसकर लेकिन बाहर से गम्भीरता दिखाते हुए बोला, “अगर तुम इतना कहती हो तो चलो मैं राज को नहीं डाँटूंगा और उसे बुला लूंगा। पर एक शर्त है। देखो तुम राज को तो जानती हो। वह रंगीली तबियत का है। उपरसे आज होली का त्यौहार है। आज तुम अकेली औरत हो। डॉली भी नहीं है। तो और किसको छेड़ेंगे हम? यदि वह तुम्हे और छेड़ता है तो चिल्लाना मत। हो सकता है मैं भी तुम्हारे साथ थोड़ी शरारत कर लूँ। हम थोड़ी शराब भी पी सकते हैं, तो प्लीज बुरा मत मानना और हंगामा मत करना। मैं चाहता हूँ की हम सब मिल कर खूब मौज करें और होली मनाएं। ठीक है ना? तुम गुस्सा तो नहीं करोगी ना?”

जब रुखसार ने भांप लिया की मैं सुबह वाली बात को लेकर राज से ऐसी कोई लड़ाई झगड़ा नहीं करूँगा तो उसकी जान में जान आयी। तब वह होली के मूड में आ गयी। रुखसार ने आँख नचाते हुए कहा, “मैंने गुस्सा किया भी तो तुम मेरी सुनोगे थोड़े ही? खैर मैं गुस्सा नहीं करुँगी बस?”

“और बाद में हर होली की तरह बादमें देर रात को फिर तुम मौज करवाओगी ना?” मैंने रुखसार को आँख मारते हुए पूछा।

रुखसार ने हंसकर आँख मटक कर कहा, “जरूर करवाउंगी। निश्चिंत रहो। अगर नहीं करवाई तो तुम मुझे छोड़ोगे क्या?” मुझे ऐसा लगा की मेरी रूढ़िवादी बीबी को भी तब होली का थोड़ा रंग चढ़ चूका था।

जैसे की आप में से कई लोगों को पता होगा, राजपुर एक कल्चरल शहर है और उसमे कई अच्छे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। होली के समय रामनिवास बाग़ में एक कार्यक्रम होता था जिसका नाम था “महां मुर्ख सम्मेलन” यह कार्यक्रम रात दस बजे शुरू होता था एवं पूरी रात चलता था और उसमे बड़े बड़े हास्य कवी पुरे हिंदुस्तान से आते थे। वह अपनी व्यंग भरी हास्य रस की कविताएं सुनाते थे और लोगों का खूब मनोरंजन करते थे। कार्यक्रम खुले मैदान में होता था और चारों तरफ बड़े बड़े लाउड स्पीकर होते थे। पूरा मैदान लोगों से भर जाता था।

 
मैं और मेरी बीबी हर साल इस कार्यक्रम में जाते थे और करीब करीब पूरी रात हास्य कविताओं का आनंद उठाते थे। मेरी बीबी रुखसार बड़े चाव से यह कार्यक्रम सुनती और बहुत खुश होती थी। इस कार्यक्रम सुनने के बाद मुझे खास वीआईपी ट्रीटमेंट मिलती और उस रात हम खूब चुदाई करते।

रुखसार की अनुमति मिलने पर मैंने राज को फ़ोन करके पूछा, “क्या तुम और डॉली रात को दस बजे हमारे साथ महा मूर्ख सम्मलेन में चलोगे? पूरी रात का कार्यक्रम है।”

राज ने कहा, “मैंने तो तुम्हे बताया था न, की डॉली एक हफ्ते के लिए अपने मायके गयी है? मैं घर में अकेला हूँ। मैं अपनी एम्बेसडर कार लेकर जरूर आऊंगा। हम उसी मैं चलेंगे। पर क्या रुखसार भाभी जान को पता है की तुम मुझे बुलाने वाले हो? क्या उन्हें पता है की आज मैं अकेला हूँ?” मैं समझ गया की दुपहर की शरारत का रुखसार पर कैसा असर हुआ है वह जानने के लिए राज लालायित था।

मैंने कहा, “हाँ भाई। मैंने रुखसार को बताया, और उसकी सम्मति से ही मैं तुमको आमंत्रित कर रहा हूँ।” मैं कल्पना कर रहा था की फ़ोन लाइन की दूसरे छौर पर यह सुनकर राज कितनी राहत का अनुभव कर रहा होगा।

मैंने राज को एक गहरी साँस लेते हुए सुना। फिर राज ने धीमी आवाज में बोला, ‘यार एक बात बुरा न मानो तो कहूँ। क्या मैं रुखसार भाभी जान के साथ थोड़ी छेड़छाड़ कर सकता हूँ? और मुझे तुम दोनों से एक बहुत जरुरी बात भी करनी है, पर वह थोड़ी बोरिंग है।”

तब मैंने राज को कहा, “तुम कमाल हो यार। दुपहर को तुमने जब मेरी बीबी को इतना छेड़ा था तो क्या मुझसे पूछा था? आज होली है। आज तो तुम्हारे पास छेड़ने का पूरा लाइसेंस है। तुम रुखसार को छेड़ो उसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है। बल्कि मैं भी आज तुम्हारे साथ उसको जरूर छेडूंगा और जीतनी हो सके उतनी तुम्हारी सहायता भी करूँगा। पर तुम्हारी भाभी जान आज तुम्हारी दोपहर की हरकत से नासमीर थी। खैर, मैंने उसे समझाया की होली में सब लोग एक दूसरे की बीबियोँ से थोड़ी सेक्सुअल छेड़छाड़ करते ही हैं..

ऐसा करके वह अपने मन की छुपी हुई इच्छाओं का प्रदर्शन करके कुछ संतुष्टि लेते हैं।, ऐसा मौक़ा उन्हें कोई और दिन नहीं मिलता। पर अगर तुम्हारी छेड़छाड़ की वजह से उसका हैंडल छटक गया तो फिर उसको मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा। वह फिर तुम सम्हालना। जहाँ तक तुम्हारी बोरिंग बात का सवाल है तो अगर बहुत जरुरी है तो वह तुम आखिर में सुनाना। आज होली है और मस्ती का माहौल है। माहौल बिगड़ना नहीं चाहिए। आगे तुम जानो। माहौल बनाने का काम तुम्हारा है।”

राज ने कहा, “वह तुम मेरे पर छोड़ दो। बस तुम मुझे सपोर्ट करते रहना बाकी मैं देख लूंगा।“

मैंने फ़ोन रखा और रुखसार से कहा, “डॉली अपने मायके गयी है। राज अकेला है। उसने चलने के लिए हाँ कही है। वह अपनी गाडी में रात दस बजे आएगा और हम उसकी गाडी में ही चलेंगे। हम फिर सुबह ही वापस आएंगे।”

रुखसार ने अपने कंधे हिला कर सहमति दे दी। तब मैंने रुखसार से कहा, “डार्लिंग आज आप मेरे लिए कुछ ऐसे भड़कीले सेक्सी कपडे पहनो की होली का मझा आ जाए। सारे लोग देखते रह जाए की मेरी बीबी लाखों में एक है।”

तब मेरी बीबी ने पूछा, “क्यों, क्या बात है? सब लोगों में मेरी नुमाईश करवाना चाहते हो क्या? या फिर राज को मुझे और छेड़ने के लिए प्रोत्साहन देना चाहते हो?”

मैंने तपाक से जवाब देते हुए कहा, “तुम्हारी बात सच है। मैं सब लोगों के बीच में मेरी बीबी की नुमाइश करना चाहता हूँ। मैं सब को दिखाना चाहता हूँ की मेरी बीबी उन सब की बीबीयों से ज्यादा सुन्दर है। अब बात रही राज की, तो वह तुम्हारे मम्मों को पहले भी दो तीन बार तो सेहला ही चूका है। वह तुमको और क्या छेड़ेगा? उसने जो देखना था वह देख लिया, जो कुछ करना था वह तो कर लिया। उससे ज्यादा और वह क्या देख सकता है और क्या कर सकता है भला? अब उससे क्या छुपाना? पर मेरी आँखें तो तुम्हे देखते कभी नहीं थकती। मैं तो तुम्हें अपने लिए तैयार होने को कह रहा हूँ।”

इतना कहना ही मेरी बीबी के लिए काफी था। थोड़ा सोच कर उसने मेरी बात मानी। शायद रुखसार राज को भीअपने सौंदर्य का दर्शन कराना चाहती थी। उस रात वह ऐसे सेक्स की रानी की तरह सज कर तैयार हुई जैसे मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा। कई सालों के बाद पहली बार मेरी बीबी को उस ब्लाउज में देखा जो वह शर्म के मारे कभी न पहनती थी।

वह डीप कट ब्लाउज था जिसमें मेरी रूढ़िवादी बीबी के भरे और तने हुए मम्मों (स्तनों) का उभार काफी ज्यादा नजर आता था। उसने स्लीवलेस ब्लाउज पहना था। उसका ब्लाउज चौड़ाई में छोटा था और जैसे वह उसके उरोज को बस ढके हुए था। रुखसार के स्तन ब्लाउज में बड़ी कठिनाई से समाये हुए थे।उसने आपनी साड़ी भी अपनी कमर से काफी नीचे तक बाँधी थी। ऐसा लगता था की कहीं वह पूरी नीचे उतर न जाय और उसे नंगी न करदे।

रुखसार का ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ था। सिर्फ दो धागे उसके ब्लाउज को पकड़ रखे हुए थे। रुखसार की पीठ एकदम खुली थी और ब्रा की पतली पट्टी उसमें दिख रही थी। ब्रा भी तो उसने जाली वाली पहनी थी। ब्लाउज खुलने पर उसके स्तन आधे तो वैसे ही दिखने लगेंगे यह मैं जानता था। रुखसार की कमर में उसकी नाभि खूब सुन्दर लग रही थी।

रात दस बजे राज अपनी पुरानी अम्बेसडर कार में हमें लेने पहुंचा। जैसे उसने हॉर्न बजाया, रुखसार सबसे पहले बाहर आयी।

राज तो देखते ही रह गया। रुखसार की साडी का पल्लू उसके उरोजों को नहीं ढक पा रहा था । उसके रसीले होँठ लिपस्टिक से चमक रहे थे। उसके भरे भरे से गाल जैसे शाम के क्षितिज में चमकते गुलाबी रंग की तरह लालिमा बिखेर रहे थे।
 
सबसे सुन्दर रुखसार की आँखे थीँ। आँखों में रुखसार ने काजल लगाया था वह एक कटार की तरह कोई भी मर्द के दिल को कई टुकड़ों में काट सकता था। आँखे ऐसी नशीली की देखने वाला लड़खड़ा जाए। उसके बाल उसके कन्धों से टकराकर आगे उन्नत स्तनों पर होकर पीछे की तरफ लहरा रहे थे।

रुखसार ने जैसे ही राज को देखा तो थोड़ी सहमा सी गयी। उसे दोपहर की राज की शरारत याद आयी। आजतक किसीने भी ऐसी हिमत नहीं दिखाई थी की रुखसार की मर्जी के बगैर इसको छू भी सके।

पर राज ने आज सहज में ही न सिर्फ कोने में दीवार से सटा कर उसे रंग लगाया, बल्कि उसने रुखसार के ब्लाउज के ऊपर से अंदर हाथ डाल कर उसकी ब्रा के हूको को अपनी ताकत से तोड दिए और स्तनों को रंगों से भर दिए।

रुखसार को देख कर राज तुरंत कार का दरवाजा खोल नीचे उतरा और फुर्ती से रुखसार के पास आया। उस समय आँगन में सिर्फ वही दोनों थे।

राज रुखसार के सामने झुक और अपने गालों को आगे कर के बोला, “रुखसार भाभी जान, मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ। आज मैंने बहुत घटिया हरकत की है। आप मुझे मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारिये। मैं उसीके लायक हूँ। रुखसार एकदम सहमा गयी और एक कदम पीछे हटी और बोली, “राज ये तुम क्या कर रहे हो?”

राज ने झुक कर अपने हाथ अपनी टांगों के अंदर से निकाल कर अपने कान पकडे और रुखसार से कहा, “रुखसार आप जबतक मुझे माफ़ नहीं करेंगे मैं यहां खुले आंगन में मुर्गा बना ही रहूँगा। मुझे प्लीज माफ़ कर दीजिये।”

रुखसार यह सुनकर खुलकर हंस पड़ी और बोली, “अरे भाई, माफ़ कर दिया, पर यह मुरगापन से बाहर निकलो और गाडी में बैठो और ड्राइवर की ड्यूटी निभाओ।“

राज ने तब सीधे खड़े होकर रुखसार को ऊपर से नीचे तक देखा और कहा, “रुखसार भाभी जान, आप तो आज कातिलाना लग रही हैं। पता नहीं किसके ऊपर यह बिजली गिरेगी।”

रुखसार हंस पड़ी और बोली, “राज आज तुम ज्यादा ही रोमांटिक नहीं हो रहे हो क्या? और आज डॉली भी नहीं हैं।”

राज तुरंत लपक कर बोला, “तो क्या हुआ? आप तो है न?” यह सुन रुखसार थोड़ी सकपका गयी और कुछ भी बोले बिना राज की कार मैं जा बैठी। मैं मेरे पिता और माताजी को प्रणाम कर और मुन्ना को प्यार करके बाहर आया और आगे की सीट में रुखसार के पास बैठ गया।

राज अपनी पुरानी एम्बेसडर में आया था। उस कार में आगे लम्बी सीट थी जिसमें तिन लोग बैठ सकते थे। राज कार के बाहर खड़ा मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं गाडी मैं बैठा, राज भी भागता हुआ आया और ड्राइवर सीट पर बैठ गया। रुखसार की एक तरफ मैं बैठा था और दूसरी तरफ राज ड्राइवर सीट में बैठा था और रुखसार बीच में।

जैसे ही राज ने कार स्टार्ट की, उसके फ़ोन की घंटी बजी। राज ने गाडी रोड के साइड में रोकी और थोड़े समय बात करता रहा। जब बात ख़त्म हुई तो रुखसार ने पूछा, “किस से बात कर रहे थे राज?”

राज ने रुखसार की तरफ देखा और थोड़ा सहम कर बोला, ” यह अंकित का फ़ोन था। बात थोड़ी ऐसी है की आपको शायद पसंद ना आये। थोड़ी सेक्सुअल सम्बन्ध वाली बात है।”

तब मैंने रुखसार के ऊपर से राज के कंधे पर हाथ रखा और बोला, “देखो राज, हम सब वयस्क हैं. रुखसार कोई छोटी बच्ची नहीं। वह एक बच्चे की माँ है। आज होली का दिन है, थोड़ी बहुत सेक्सुअल बातें तो वह भी सुन सकती है। जब रुखसार ने पूछ ही लिया है तो बता दो। ठीक है ना रुखसार?” मैंने रुखसार के सर पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा।

रुखसार ने राज की तरफ देखा और सर हिलाते हुए हाँ का इशारा किया।

राज ने कहा, “अंकित मेरा पुराना दोस्त है। उसकी पोस्टिंग जब जोधपुर में हुई थी तब उसका एक पुराना कॉलेज समय का दोस्त भी वहाँ ही रहता था। वह दोस्तकी बीबी भी कॉलेज के समय में अंकित की दोस्त थी। उस समय अंकित और उसकी होनी वाली बीबी के बीच में प्रेम संदेशों का आदान प्रदान भी अंकित करता था। यूँ कहिये की उनकी शादी ही अंकित के कारण हो पायी थी। अंकित के दोस्त की बीबी को अंकित के प्रति थोड़ा आकर्षण तो था पर आखिर में उसने अंकित के दोस्त के साथ ही शादी करनेका फैसला लिया।“

मैंने देखा की राज अपनी कार को मुख्य मार्ग से हटाकर शहर के बाहरी वाले रास्ते से ले जा रहा था। रास्ते में पूरा अँधेरा था। वह कार को एकदम धीरे धीरे और घुमा फिरा कर चला रह था। मैंने राज से पूछा क्या बात है। राज ने कहा उसने रात का खाना नहीं खाया था, और वह कहीं न कहीं खाने के लिए कोई ढ़ाबे पर रुकना चाहता था।

यह तो मैं बता ही चूका हूँ की मेरी सुन्दर बीबी रुखसार राज और मेरे बीच में सटके बैठी हुयी थी। राज की कहानी सुनने के लिए मैं काफी उत्सुक हो गया था। राज की धीमी और नरम आवाज को सुननेमें मुझे थोड़ी कठिनाई हो रही थी। मैंने इस कारण रुखसार को राज की तरफ थोड़ा धक्का दे कर खिसकाया। मेरी बीबी बेचारी मेरे और राज के बीच में पिचकी हुयी थी। राज ने अपना गला साफ़ किया और आगे कहने लगा।

“शादी के करीब पांच साल के बाद अंकित का दोस्त बिज़नस बगैरह के झंझट में व्यस्त था और बीबी घरबार और बच्चों में। उनके दो बच्चे थे। अंकित और उसकी बीबी में कुछ मनमुटाव सा आ गया था। अंकित अपनी बीबी को समय नहीं दे पाता था। उसकी बीबी सेक्स के लिए व्याकुल होती थी तो अंकित थका हुआ लेट जाता था। जब अंकित गरम होता था तब उसकी बीबी थकी होने बहाना करके लेट जाती थी। सेक्स में अब उनको वह आनंद नहीं मिल रहा था जो शादी के पहले चार पांच सालों तक था।“

अब राज की कहानी सेक्स के गलियारों में प्रवेश कर चुकी थी। मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया और रुखसार का एक हाथ मेरे हाथ में लेकर उसे दबाने लगा। तब मैंने थोड़ा सा ध्यान से देखा की राज भी गाडी चलाते चलाते और गियर बदलते अपनी कोहनी रुखसार के स्तनों पर टकरा रहा था।

थोड़ी देर तक तो ऐसा चलता रहा और रुखसार ने भी शायद नोटिस नहीं किया, पर फिर उसने अपनी कोहनी को रुखसार के स्तन के उपर दबा ही दिया। अंदर काफी अँधेरा था और मुझे साफ़ दिखने में भी कठिनाई होती थी। मैंने रुखसार के मुंह से एक टीस सी सुनी। उसने राज की कोहनी को जरूर महसूस किया था। पर वह कुछ बोली नहीं।

राज ने अपनी कहानी को चालु रखते हुए कहा, “जब अंकित उनसे मिला तो भांप गया की उन पति बीबी के बीच में कुछ ठीक नहीं है। जब अंकित ने ज्यादा पूछताछ की तो दोनों ही उससे शिकायत करने लगे। दोनों ने अपनी फीकी सी सेक्स लाइफ के लिए एक दूसरे पर दोष का टोकरा डालना चाहा। अंकित ने तब दोनों को एकसाथ बिठाया और बताया की उनके वैवाहिक जीवन का वह दौर आया है जहां जातीय नवीनता ख़त्म हो गयी है और नीरसता आ गयी है। उसने उनको कहा की उनको चाहिए की सेक्सुअल लाइफ में कुछ नवीनीकरण लाये।“

राज ने तब कार को एक जगह रोका जहाँ थोडा सा प्रकाश था। उसने अपनी कहानी का क्या असर हो रहा है यह देखने के लिए हमारी और देखा। उसने देखा की मैंने रुखसार का हाथ अपनी गोद में ले रखा था। राज की कहानी मुझे गरम कर रही थी। रुखसार मेरे और राज के बीचमें दबी हुई बैठी थी। वह कुछ बोल नहीं रही थी। राज मुस्कराया और उसने कार को आगे बढ़ाते हुए कहानी चालु रखी।

“जब उन पति बीबी ने अंकित से पूछा की वह सेक्सुअल लाइफ में नवीनीकरण कैसे लाएं, तब अंकित ने कहा की कई पति बीबी सामूहिक सेक्स, थ्रीसम अथवा बीबियों की अदलाबदली द्वारा अपने वैवाहिक जीवन में नवीनता और उत्तेजना लाते हैं। जैसा समय अथवा संजोग वैसे ही इसको व्यावहारिक रूप में अपनाया जा सकता है। परंतु इसमें पति बीबी की सहमति और एकदूसरे में पूरा विश्वास आवश्यक है।“

तब मुझे अहसास हुआ की रुखसार ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और उसे जोर से दबाने लगी थी। मैं असमंजस में था। रुखसार ऐसा क्यों कर रही थी? क्या राज उसके साथ कोई और शरारत तो नहीं कर रहा था? या फिर रुखसार भी राज की बात सुनकर गरम हो गयी थी? मैंने अनायास ही मेरा हाथ थोड़ा ऊपर किया और रुखसार के स्तनों पर रखा।

वास्तव में मैंने महसूस किया की रुखसार के दिल की धड़कन तेज हो रही थी। अचानक मेरा हाथ शायद राज के हाथसे टकराया। क्या वह भी रुखसार के स्तनों को छूने की कोशिश कर रहा था? मैं इस बात से पूरा आश्वस्त नहीं था। मैं चुप रहा और आगे क्या होता है उसका इंतजार करने लगा।
 
राज बोल रहा था, “अंकित उस समय उन्हीं के घर में रुका हुआ था। उस रात को अंकित के दोस्त ने उसे अपने बैडरूम में बुलाया। जब अंकित उनके बैडरूम में दाखिल हुआ तो उसने देखा की उसका दोस्त अपनी बीबी को अपनी गोंद में बिठाकर उसके स्तनों से खेल रहा था। उसकी बीबी के स्तन खुले थे और उसने अपनी ब्लाउज और ब्रा निकाल फेंकी थी। अंकित स्तब्ध सा रह गया और क्षमा मांगते हुए वापस जाने लगा। तब अंकित के दोस्तने उसे अपने पास बुलाया और अपनी बीबीके स्तनों को दबाकर उन्हें चूसने को कहा..

उसकी बीबी भी अंकित को उकसाने लगी और अंकित को सेक्स के लिए आमंत्रित करने लगी। ऐसा लग रहा था की अंकित की बात उन लोगों को जँच गयी थी और उन्होंने अंकित को ही थ्रीसम के लिए चुना था। अंकित को भी दोस्त की बीबी के प्रति आकर्षण तो था ही। वह उससे सेक्स करनें तैयार हो गया। उस रात अंकित और उसके दोस्त दोनों ने मिलकर दोस्त की बीबी के साथ जमकर सेक्स किया।“

राज की कहानी उसकी पराकाष्ठा पर पहुँच रही थी। मैं तो काफी गरम हो ही रहा था, पर रुखसार भी काफी उत्तेजित लग रही थी। उस पर राज की कहानी का गहरा असर मैं अनुभव कर रहा था, क्यूंकि वह अपनी सिट पर अपने कूल्हों को इधर उधर सरका रही थी। अँधेरे में यह कहना मुश्किल था की क्या वही कारण था या फिर राज की कोई और शरारत? जरूर राज स्वयं भी काफी गरम लग रहा था। उसकी आवाज में मैं कम्पन सा महसूस कर रहा था।

तब हम शहर के प्रकाशित क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे। रुखसार का एक हाथ मेरे हाथ में था और तब राज ने भी रुखसार का एक हाथ पकड़ा और अपने हाथ के नीचे अपनी एक जांघ पर रखा। दूसरे हाथ से वह ड्राइविंग कर रहा था। रुखसार ने मेरी तरफ देखा, मैं मुस्कुराया और आँखे मटका कर उसे शांत रहने के लिए इशारा किया। वह बेचारी चुप होकर राज से आगेकी कहानी सुनने लगी।

राज ने कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा, “अंकित की बीबी अपने पति के प्रति बड़ी आभारी थी क्यूंकि उसने अपनी बीबीको उसके दोस्तके साथ सेक्स करनेको कहा। तब से उन पति बीबी में खूब जमती है और वह कई बार अंकित के साथ थ्रीसम का आनंद ले चुके हैं। वैसे भी अब उन पति बीबी को एक दूसरे के साथ सेक्स करने में भी बड़ा आनंद मिलता है, क्यूंकि उस समय वह अपने थ्रीसम के आनंद के बारेमें खुल कर बात करते हैं।“ राज ने अपनी कहानी का समापन करते हुए एक जगह गाडी रोकी।

राज की कहानी सुनते हुए मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं खासा उत्तेजित हो रहा था। मैंने रुखसार के हाथ में हाथ डाला तो उसने भी मेरा हाथ जोरों से दबाया। मुझे लगा की वह भी काफी उत्तेजित होगयी है। कार में भी अँधेरा था। मैंने उसका हाथ मेरी टांगों के बीच रख दिया। रुखसार धीरे धीरे मेरे टांगों के बीच से मेरी पतलून की ज़िप पर हाथ फ़ैलाने लगी। मैंने भी रुखसार की टांगो के बीच अपना हाथ दाल दिया। रुखसार ने अपनी टाँगे कसके दबायी और मेरे हाथ को टांगो के बीच दबा दिया।

मैंने देखा की मेरी रूढ़िवादी बीबी भी राज की सेक्स से भरी कहानी सुनकर उत्तेजित हो गयी थी। तब राज ने पूछा, “समीर, बताओ, क्या अंकित और उसके दोस्त पति बीबी ने जो किया वह सही था?”

मैंने कहा, “मैं क्या बताऊँ? रुखसार से पूछो।”

तब रुखसार ने जो कहा वह तो मैंने सोचा भी नहीं था। रुखसार ने कहा, “उन्होंने सही किया या गलत, ये कहने वाले हम कौन होते हैं? अरे वह पति बीबी ने अपने बारें में सब तरह सोच कर यदि ये फैसला लिया तो सही किया। और बात तो गलत नहीं है। शादी के कुछ सालों बाद हम सब पति बीबी एक दूसरे से सेक्स करने से थोड़े से ऊब जाते हैं..

इसका कारण यह है की सेक्स में जो नवीनता पहले थी वह नहीं रहती। उत्सुकता चली जाती है। शादी के पहले मन सोचता है सेक्स कैसा होगा? और शादी के बाद मन कहता है. सेक्स कैसा होगा मुझे पता है। इन हालात में उन्होंने जो किया वह सही किया। और फिर उसका फायदा भी तो मिला उनको। उनका विवाहक जीवन सुधर जो गया। क्यों समीर, मैंने गलत तो नहीं कहा?”

मैं क्या बोलता। मैंने अपनी मुंडी हिला कर रुखसार का समर्थन किया। मैं मेरी बीबी का एक नया रूप देख रहा था। अबतक जो बीबी मुझ से आगे सोचती नहीं थी वह आज थ्रीसम का समर्थन कर रही थी। तब मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी मंशा सफल हो सकती है।

राज ने दोनों हाथों से तालियां बजायी और बोला, “माय गॉड रुखसार, तुमने कितना सटीक और सही जवाब दिया। मैं तुम्हें इस जवाब के लिए सलूट मारता हूँ। ”

तब हम कार्यक्रम वाले स्थान के करीब पहुँच चुके थे। राज ने एक ऐसी जगह कार रोकी जहां प्रकाश था। उसने पीछे मुड़कर कार की सीट पर चढ़कर पीछे की सीट पर रखा एक बक्शा खोला। मैंने देखा की उसमें उसने दो बोतलें और कुछ गिलास रखे हुए थे। उसने तीन गिलास निकाले और उसमें एक बोतल में से व्हिस्की डालनी शुरू की। रुखसार ने एकदम विरोध करते हुए कहा की वह नहीं पीयेगी।

मैं भी जानता था की रुखसार शराब नहीं पीती थी। सबके साथ वह कभी कभी जीन का एकाध घूंट जरूर ले लेती थी। शायद राज को भी यह पता था। उसने रुखसार से कहा, “रुखसार भाभी जान, आप निश्चिन्त रहो। मैं आपको व्हिस्की नहीं दूंगा। प्लीज आज हमें साथ देने के लिए थोडीसी जीन तो जरूर पीजिए। मैं बहुत थोड़ी ही डालूंगा। देखिये होली है। रुखसार ने घबड़ाते हुए मेरी और देखा।

मैंने उसे हिम्मत देते हुए कहा, “अरे इसमें इतना घबड़ाने की क्या बात है? भई जीन तो वैसे ही हल्की है और तुम जीन तो कभी कभी पी लेती हो। राज इतने प्यार से जो कह रहा है।” मैंने फिर राज कीऔर देखते हुए कहा, “देखो राज, बस एकदम थोड़ी ही डालना। ”

राज ने मुस्कुराते हुए सीट पर पीछे मुड़कर सीट पर चढ़कर लंबा होकर रुखसार के लिए जीन से गिलास को खासा भरा और फिर दिखावे के लिए उसमें थोड़ा पानी डाल कर रुखसार के हाथ में पकड़ा दिया। जीन वैसे ही पानी की तरह पारदर्शक होती है। देखने से यह पता नहीं लग पाता की गिलास में जीन ज्यादा है या पानी।

मेरी भोली बीबी ने समझा की उसमें बस पानी ही है, जीन तो नाम मात्र ही है। रुखसार उसे पीने लग गयी। जीन का टेस्ट मीठा होता है। रुखसार को अच्छा लगा। वह उसे देखते ही देखते पी गयी। जब हम सबने अपने ड्रिंक्स ख़तम किये तब राज कार को कार्यक्रम के स्थान पर ले आया। मैं जानता था की जीन भी तगड़ी किक मारती है।
 
जीन पीने के पश्चात रुखसार काफी तनाव मुक्त लग रही थी। जो तनाव शुरू में राज की हरकतों की वजह से वह महसूस कर रही थी वह नहीं दिख रहा था। राज ने शुरू में जब यह कहा था की वह कुछ सेक्सुअल विषय के बारे में बताने जा रहा था, तो रुखसार डर रही थी की कहीं वह गंदे शब्द जैसे लुंड, फुद्दी, चोदना इत्यादि शब्दों का प्रयोग तो नहीं करेगा।

परन्तु राज का बड़े मर्यादित रूप में सारी सेक्सुअल बातों को बताना तथा गंदे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना रुखसार को अच्छा लगा। इसी कारण वश जब राज ने रुखसार का हाथ थामा और अपनी जांघ पर रखा तो वह कुछ न बोली।

कार्यक्रम शुरू होचुका था। मैदान लोगों से खचाखच भरा था। एक के बाद एक शायर, कभी लोगों पर, कभी समीरनेताओं पर, कभी अमीरों पर यातो कभी मंच पर बैठे दूसरे कविओं पर जम कर ताने कसते हुए हास्य कविताएं एवं शायरी सुना रहे थे। लोग हंस हंस के पागल हो रहे थे।

राज ने कार को मंच से काफी दूर एक कोने में एक पेड़ के पीछे दीवार के पास खड़ी की। हम उसी तरह कार में ही बैठे रहे। बड़े लाउड स्पीकरो के कारण हमें दूर भी साफ़ सुनाई दे रहा था। बल्कि इतनी तेज आवाज थी की हम बात भी नहीं कर पा रहे थे।

जहां हम रुके थे वहां काफी अँधेरा था। आते जाते कोई भी हमें बाहर से देख नहीं पाता था। कार के अंदर भी अँधेरा था। राज अब एक तरह से ̣रुखसार का हाथ हमेशा के लिए अपनी जांघों पर रखे हुए था और अपना हाथ उसने रुखसार के हाथ के ऊपर रखा हुआ था।

तब एक शायर ने महिलाओं की शिक्षा और काबिलियत के बारेंमे एक कविता सुनाई। यह सुन कर रुखसार मेरी और मुड़ी और बोली, “देखा, मिस्टर समीर, मैं आपको क्या कहती थी? आज की महिलाऐं आदमियों से कोई भी तरह कम नहीं हैं। वह कमा भी सकती हैं और घर भी चला सकती हैं। कुछ मामलों में तो वह आदमियों से भी आगे है। मैं तो यह कहती हूँ के महिलाओं को पुरुष के बरोबर तनख्वाह मिलनी चाहिए।”

मुझे उसकी आवाज में थोड़ी सी थरथर्राहट सी सुनाई दे रही थी। लगता था जैसे थोड़ा नशा उसपर हावी हो रहा था।

मैंने उसकी बात को काटते हुए कहा, “महिलाऐं कभी भी आदमियों का मुकाबला नहीं कर सकती। महिलाऐं नाजुक़ और कमजोर होती हैं और उनमें साहस की कमी होती है। वह छोटी छोटी बातों में पीछे हट जाती हैं। जैसे की अभी तुम्हीने व्हिस्की पीने से मना कर दिया था। भला वह आदमियों का मुकाबला कैसे कर सकती हैं?” मैंने एक तीर मारा और रुखसार के जवाब का इन्तेजार करनेकरने लगा।

रुखसार ने तुरंत पलट कर कहा, “तो क्या हुआ? मैं भी व्हिस्की पी सकती हूँ। पर मैं आप लोगों की तरह बहक ना नहीं चाहती। तुम पुरुष लोग क्या समझते हो अपनेआपको? क्या हम कमजोर हैं?” रुखसार ने तब राज की और देखा।

राज ने तुरंत कहा, “समीर, रुखसार बिलकुल ठीक कह रही है। आज की नारी सब तरह से आदमियों के समान है। वह ज़माना चला गया जब औरतें घर में बैठ कर मर्दों की गुलामी करती थी। अब वह आदमियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल सकती है। अब वह कोई भी तरह आदमियों से पिछड़ी नहीं है। जो हम पुरुष करते हैं उसमे वह जरूर सहभागिनी बनती है।”

मैंने देखा की राज के सपोर्ट करने से रुखसार खिल सी गयी। रुखसार ने ख़ुशी के मारे राज के हाथ को अपनी जांघ पर रखा और उस पर अपने हाथ फेरने लगी। वह बोली, “समीर, तुम अपने दोस्त से कुछ सीखो। वह कितना सभ्य है।” मैं चुप हो गया।

हम फिर थोड़ी और देर तक कविताएं सुनते रहे। उस दौरान मैंने महसूस किया की राज ने रुखसार को अपने पास खीच लिया था। मैंने अँधेरे में भी ध्यान से देखा तब पता लगा की अब राज का हाथ रुखसार की साडी पर जांघ के ऊपर था और वह जांघ को साडी के ऊपर से सहला रहा था।

उस समय शायद रुखसार का हाथ राज की जांघों पर था। मुझे शक हुआ के कहीं राज ने रुखसार का हाथ अपनी टांगों के बीच तो नहीं रख दिया था। मेरी प्यारी बीबी इतना कुछ होते हुए भी जैसे कविताएं सुनने में व्यस्त लग रही थी।

राज को मैंने कहा, “अरे राज, यार इस कार्यक्रम से तो तुम्हारी कहानी ही ठीक थी। चलो कार को कहीं और ले लो। यहां बहुत शोर है।“

राज ने कार को मोड़ा और वहाँ से दूर मुख्य रास्ते से थोड़ा हटकर कार को एक जगह खड़ा किया। बाहर दूर दूर कहीं रौशनी दिखती थी, पर कार में तो अँधेरा ही था। आँखों पर जोर देनेसे थोड़ा बहुत दिखता था।

कार रुकने पर पीछे की बात को जारी रखते हुए मैंने कहा, “राज तुम्हारी कहानी सटीक तो थी, एक बात कहूँ? तुमने तो कहानी को बिलकुल फीका ही कर दिया। सारा मझा ही किरकिरा कर दिया। ना तो तुमने कोई सेक्स कैसे हुआ यह बताया, ना तो सारी बातें स्पष्ट रूप से खुली की। शायद मेरी प्यारी और नाजुक़ बीबीके डर से तुमने तो सारे मज़े का लुत्फ़ ही नहीं पर उजागर किया। मेरे ख्याल से मेरी बीबी में इतनी तो हिम्मत है की वह आदमियों के साथ बैठ के ऐसे सेक्सुअल बातें भी सुन सकती है। क्यों डार्लिंग? क्या तुम थोड़ी और खुली बातें सुनने से पीछे तो नहीं हट जाओगी?”

तब राज ने बड़ी सम्यता से कहा, “नहीं समीर, हमें महिलाओं के सम्मान का ख्याल रखना चाहिए। मैं नहीं चाहता की रुखसार भाभी जान के मन को मेरी बातों से कोई ठेस पहुंचे।” राज की इतनी शालीन बात सुनकर रुखसार और भी प्रसन्न हुई।

अब तो रुखसार राज को बड़े सम्मान और अपने प्रेम से देख रही थी। रुखसार ने राज के दोनों हाथों को अपने हाथों में लिया और उन्हें प्रेम से सहलाने लगी। पर वह मेरे ताने को भूली नहीं थी।

रुखसार ने मुझसे नाजुक शब्द सूना था तो उसे तो जवाब देना ही था। वह जोश में आ कर और बोली, “नहीं राज, तुम जरूर वह कहानी पूरी सुनाओ। मैं क्यों भला हिचकिचाउंगी? आखिर सेक्स भी तो हमारी ज़िंदगी का एक स्वाभाविक ऐसा हिस्सा है जिसको हम नजर अंदाज़ नहीं कर सकते। राज तुम बे झिझक कहो। मेरी वजह से मत हिचकिचाओ। अगर पुरुष लोग सेक्स की बातें करते हैं और सुनते हैं तो भला स्त्रियां क्यों नहीं सुन सकती? मेरे पति को अगर उसे सुनना है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। उन के दिमाग पर तो हमेशा सेक्स ही छाया रहता है।” रुखसार ने मुझ पर अपने गुस्से की झड़ी जैसे बरसा दी।

तब तक राज ने अंकित और उसके दोस्त दम्पति की कहानी थोड़ी दबा छिपा कर सुनाई थी। उसने कहीं भी अभद्र कहे जाने वाले शब्दों का उपयोग नहीं किया था। ना ही उसने मैथुन का स्पष्ट रूप से वर्णन कियाथा। जब मैं ने उसे उकसाया और उसको रुखसार की भी अनुमति मिल गई तब वह उसी बात को और स्पष्ट रूप से बताने लगा।

अब राज ने स्पष्ट रूप से अंकित के दोस्त और उसकी पर्त्नी के सेक्स के बारे में विस्तार से बताने लगा। अंकित ने कैसे उसके दोस्त की बीबी की फुद्दी को चाटा और कैसे उसकी फुद्दी के झरते हुए पानी को चूसने लगा।
 
अंकित के दोस्त की बीबी ने अपने पति और अंकित दोनों के लण्ड को अपने दोनों हाथोंमे सहलाती थी, और उसने दोनों के लण्ड को कैसे बारी बारी से चूसा यह सुन कर हम तीनों उत्तेजित हो उठे।

तब राज ने कहा की जब पहली बार अंकित ने अपनी बीबी का ब्लाउज और ब्रा खोली तब उसने उस के ब्लाउज के नीचे अपनी ऊँगली डाली। यह कहते हुए, राज ने भी रुखसार के ब्लाउज के नीचे अपनी एक ऊँगली डाली और उसके ब्लाउज को ऊपर खींचने लगा।

जैसे ही रुखसार को इस बात की समझ आई तो वह एकदम गुस्साई आँखों से मेरी और देखने लगी। मैं समझ गया की अगर कुछ नहीं किया तो रुखसार जरूर बरस पड़ेगी और शामका सारा मज़ा और हमारे प्लान पर पानी फिर जायेगा।

मैंने तुरंत रुखसार को मेरी और पूरी ताकत से अपनी तरफ खींचा और उसके रसीले होठों पर अपने होंठ रख कर उसे किस करने लगा। रुखसार को मेरी तरफ घूमना पड़ा।

किस करते करते मैंने रुखसार की साडी को उसकी जांघों से ऊपर खींचते कहा, “राज, तुम्हारी कहानी इतनी उत्तेजित करती है की मैं अपने आप को कंट्रोल में रख नहीं पा रहा हूँ। रुखसार भी उतनी उत्तेजित हो गयी थी की वह मुझसे लिपट कर जोश से चुम्बन करने लगी और मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल कर मुझसे अपनी जीभ चुस्वाति रही। उसे अब राज के देखने की कोई चिंता नहीं थी। राज की उंगली रुखसार के घूमने से रुखसार की पीठ पर जा पहुंची। नेना की पीठ खुली हुई थी और रुखसार की ब्रा की पट्टी का हुक राज की उंगली में आ गया।

तब रुखसार मुझे पूरी तरह जकड़ कर मुझे अपने पुरे जोश से चुंबन कर रही थी। शायद राज ने अपनी हथेली मेरी बीबी की ब्रा के अंदर घुसेड़ दी थी और वह राज इस बात का फायदा उठाकर अपनी उँगलियों से रुखसार की भरी मद मस्त चुंचियों को सहलाता जा रहा था। उस चुम्बन के जोश में शायद रुखसार को इस बात का अहसास नहीं था की राज क्या कर रहा है।

थोड़ी देर बाद रुखसार ने घूम कर देखा तो पाया की राज रुखसार और मेरे चुम्बन को देख रहा था। उसे बेचारेराज पर थोड़ा सा तरस आया। रुखसार ने राज का सर अपने हाथों पकड़ा और अपने कन्धों पर रखकर राज के बालों में अपनी उंगलियां डाल कर ऐसे सहलाने लगी जैसे की कंघी कर रही हो। ।

रुखसार का अनुमोदन पाकर राज फुला नहीं समा रहा था। उसने मेरी तरफ अपनी दो उँगलियों से अपनी सफलता का ‘V’ का निशान मुझे दिखाया। मैंने भी उसे अंगूठा दिखाकर आगे बढ़ने के लिए इशारा किया।

राज ने फिर कार रोक कर मुझसे पूछा, “क्या यार अब वह कवी सम्मलेन में वापस जाना है क्या?”

मैंने कहा, “मुझे तो कवी सम्मलेन से तेरी बातों में ज्यादा रस आ रहा है। भाई अब तेरे दोस्त की अधूरी बात तो पूरी कर।“

रुखसार ने मेरी बात को बीच में काटते हुए कहा, “राज अब अपने दोस्त से पूछो की मैंने तुम्हारी सेक्स वाली बात पूरी सुनी के नहीं? अब तो वह मेरी बात को कबुल करें की स्त्रियां आदमियों से बिल्कुल कम नहीं। “

मैंने तब कहा, “मैं अब भी नहीं मानता। तुमने बात जरूर सुनी, पर जैसे ही थोड़ा सा नाजुक वक्त आएगा तो तुम भाग खड़ी हो जाओगी।”

राज ने मेरी बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “तू क्या बकवास कर रहा है समीर? तुझे पता है तू कितना भाग्यशाली है रुखसार को पाकर? इतनी अक्लमंद, इतनी सुन्दर, इतनी सयानी और इतनी हिम्मत वाली बीबी बड़े भाग्य से मिलती है। मैंने आजतक रुखसार भाभी जान के समान अक़्लमंद, सुन्दर, सेक्सी, हिम्मत वाली स्त्री कहीं नहीं देखि। इसमें तू मेरी बीबी डॉली को भी शामिल कर सकता है।”

रुखसार ने शायद राज ने उसे सेक्सी कहा वह सुना नहीं या फिर अनसुना कर दिया। पर राज की बात सुनकर रुखसार को और जोश आया। वह मेरी तरफ देख के बोली, “देखा? तुम्हारा अपना दोस्त क्या कह रहा है? सच कहा है, घर की मुर्गी दाल बराबर। तुम्हे मेरी कद्र कहाँ?”

मैं अपने मन में राज की बड़ी तारीफ़ कर रहाथा। वह क्या एक के बाद एक तीर दाग रहा था और हर एक तीर उसके निशाने पर लग रहा था। अब रुखसार की समझ से राज जैसा सभ्य और समझदार इंसान और कोई नहीं था। मैं, भी नहीं। मैंने राज से कहा, “भाई अपनी वह कहानी तो पूरी करो। और हाँ, तुम एक बात कहना चाहते न? फिर वह भी बतादो की क्या बात थी?”

मेरी बात सुनते ही जैसे अचानक राज के चेहरे का रंग एकदम फीका पड़ गया था। वह कुछ कहना चाहता था, पर कह नहीं पा रहाथा। जब मैंने उसे टोका तब राज ने बड़ी गंभीरता से रुखसार को कहा, “रुखसार भाभी जान, आपसे मेरी एक अर्ज है। मैं आप को कुछ बताना चाहता हूँ। पर उसके लिए आपको मेरे घर चलना पड़ेगा।”
 
राज ने रुखसार को इतनी महत्ता दी उससे रुखसार बड़ी खुश नजर आ रही थी। पर राज के चहरे पर मायूसी का साया देख कर मेरी बीबी थोड़ी सकपका गयी । मैंने रुखसार से कहा, “अब तो हमें सुबह ही घर लौटना है। फिर यहां बाहर देर रात में बात करने से लोगों का ध्यान भी हमारी और जाता है। राज के घर में और कोई है भी नहीं। चलो चलते हैं। ” उस पर रुखसार ने भी अपनी सम्मति दे दी और राज ने कार अपने घर की और मोड़ी।

पुरे रास्ते में राज के मुंह पर जैसे ताला लगा था। मैंने रुखसार के कान में कहा, “लगता है कोई गंभीर बात है। अबतक जो फुदकता रहता था उसे एकदम यह क्या हो गया? हम राज के घर जा कर बात करते हैं। उसको थोड़ी पिलायेंगे तो उसका मूड ठीक हो जाएगा।“

रुखसार की नजर में राज एक निहायत शरीफ और सीधा सादा इंसान बन चुका था। उसकी छेड़ खानी और शरारत को भी रुखसार राज की सरलता का ही नमूना मान रही थी। हम जैसे ही राज के घर पहुंचे तो रुखसार ने राज की कमर में हाथ डाला और बोली, “आज मैं एक आझाद पंछी की तरह अनुभव कर रही हूँ। इसका श्रेय तुम्हे जाता है।” मैं जानता था की रुखसार का आझाद पंछी की तरह अनुभव करने का कारण तो वह जीन से भरा हुआ गिलास था।

राज को तो उस समय बड़ा खुश होना चाहिए था। पर राज की शक्ल रोनी सी हो रही थी। रुखसार बड़ी उलझन में थी। राज के मूड में यह परिवर्तन मेरी और रुखसार की समझ में नहीं आया। मैंने राज से पूछा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। रुखसार ने तब मुझे मुझे इशारा किया की मैं जा कर हम सब के लिए एकएक पेग बना के लाऊं।

राज ने मेरी बीबी का इशारा देख लिया था। राज ने तब तुरंत फुर्ती से उठकर अपने बार से एक व्हिस्की और एक जीन की बोतल निकाली और दो गिलास में व्हिस्की और एक गिलास में जीन डालने लगा तो रुखसार ने जोर से कहा, ” राज, रुको, मेरे गिलास में भी व्हिस्की डालो। आज मैं अपने पति को दिखाना चाहती हूँ के एक स्त्री भी पुरुष का मुकाबला कर सकती है। ”

रुखसार ने राज के हाथ से व्हिस्की की बोतल ले कर अपने गिलास में भी व्हिस्की डाली। राज भौंचक्का सा देखता ही रह गया। मेरे भी आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। मैंने देखा तो रुखसार वह गिलास को देखते ही देखते साफ़ कर गयी। मैंने सोचा हाय, आज तो जीन और व्हिस्की का खतरनाक मिलन हो गया था। आज तो क़यामत आने वाली है।

मैंने और राज ने भी अपने गिलास खाली किये। राज ने फिर अपनी गंभीर आवाज में कहा, “देखो हमारे पास पूरी रात पड़ी है। आज हमें बहु बात करनी है। बातें करने से पहले क्यों न हम अपने कपडे बदलें और फिर आराम से बात करें। समीर, तुम मेरे नाईट सूट को पहनलो। रुखसार क्या मैं तुम्हे डॉली की कोई नाईटी दूँ?”

मैंने रुखसार की और इशारा करते हुए राज को बोला, “भाई मैं तो एक मर्द हूँ। मुझे तेरे कपडे खुले में पहनमें कोई झिझक नहीं है। तुम इस मैडम को पूछो, क्या इसे कोई एतसमीर है?”

राज ने अपना एक नाईट सूट मेरी तरफ बढ़ाया। मैंने उसे अपने हाथों में लिया और रुखसार और राज के सामने अपने कपडे उतारे ओर सिर्फ जांघिया पहने हुए राज का नाईट सूट पहना और फिर जांघिया भी निकाल दिया। रुखसार और मैं वैसे भी रात को अंदर के कपडे नहीं पहनते थे।

रुखसार ने राज की और मुड़ते हुए लहजे में कहा, “मुझे भी तुम्हारे या डॉली के कपडे यहीं पर पहनने में कोई एतसमीर नहीं है। लाओ, कहाँ है डॉली का नाईट गाउन?” मैं समझ गया की डॉली को चढ़ गयी है।

राज ने जल्दी से चुन कर डॉली का वह नाईट गाउन निकाला जो एकदम पतला और लगभग पारदर्शी सा था। राज ने अपने हनीमून पर डॉली के लीये वह ख़रीदा था। फिर उसने रुखसार से कहा, “समीर तो पागल हो गया है। अरे इसे कोई शिष्टता का भी ध्यान है के नहीं? क्या मेरी भाभी जान मेरे सामने अपने कपडे बदलेगी? रुखसार रुक जाओ। मैं यहां से चला जाता हूँ। आप अपने कपडे बदलो तब तक मैं भी अपना नाईट गाउन पहनकर आता हूँ।

रुखसार को वह गाउन पकड़ा कर राज वहाँ से गायब हो गया। अब रुखसार के मनमें राज के प्रति बेहद सौहार्दपूर्ण भाव हो गया था। उसके लिए राज एक शिष्ट, सभ्य और अत्यन्त संवेदनशील आदमी था जिसको महिलाओं का सम्मान करना भली भांति आता था। राज की सुबह वाली शरारत को जैसे वह भूल चुकी थी।

रुखसार ने डॉली गाउन हाथ में लिया, तब मैंने उसे कहा, “अब इसे पहनलो और अपने अंदर के कपड़ों को निकाल कर अलग से रखना ताकि कल सुबह हम उसे फिर से पहन सकें। रुखसार इधर उधर देखा। राज जा चूका था। तब उसने मेरे सामने ही अपने कपडे उतारे और ब्लाउज पैंटी , ब्रा इत्यादि तह करके बैडरूम के कोने में रख दिए। मैंने रुखसार को कई बार नंगे देखा था..

पर उस रातकी बात ही कुछ और थी। रुखसार की आँखों में वह सुरूर मैंने पहली बार देखा। वह शराब से नहीं था। उसे आज अपने स्त्री होने का गर्व महसूस हो रहाथा। राज यदि जिद करता तो रुखसार को उसके सामने शायद मजबूर हो कर कपडे बदलने पड़ते। पर राज ने ऐसा कुछ नहीं किया। उसने रुखसार को अकेले में (उसके पति के सामने ही) कपडे बदलने का मौक़ा दिया। इस बात से रुखसार राज की एक तरह से ऋणी बन चुकी थी।

मैंने अपनी बीबी को उस गाउन में जब देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसके पिछेकी रौशनी में उसकी टाँगे, उसके नितम्ब, उसके स्तन, निपल बल्कि उसकी फुद्दी की गहराई तक नजर आ रही थी।

ऐसा लग रहा था जैसे उसने कपडे पहने ही नहीं थे। मेरा माथा यह सोचकर ठनक गया की जब राज उसे इस हाल में देखेगा तो उसके ऊपर क्या बीतेगी।

तभी मैंने राज को अपने हाथों से तालियां बजाते हुए सूना। उसने रुखसार को उस गाउन में देख लिया था।

वह रुखसार के पास आया और जैसे रुखसार के कानों में फुसफुसाता हुआ बोला, “भाभी जान आप इस गाउन मैं मेनका से भी अधिक सुन्दर लग रही हो। मैं भगवान की सौगंध खा कर कहता हूँ की मैंने आज तक आप जितनी सुन्दर स्त्री को नहीं देखा।”

राज ने आगे बढ़कर रुखसार से पूछा, “क्या मैं आप को छू सकता हूँ?”

 
अपनी इतनी ज्यादा तारीफ़ सुनकर रुखसार तो जैसे बौखला ही गयी। वह यह समझ नहीं पायी की वह उस गाउन में पूरी नंगी सी दिख रही थी। बल्कि वह तो राज की प्रशंशा के पूल बाँधने से इतनी खुश हुयी की वह अनायास ही राज के पास आई और राज ने जब अपने हाथ फैलाए तो वह मुस्कुराती हुयी उसमें समा गयी। मैं अपनी भोली और सरल बीबी के कारनामे देख कर दंग सा रह गया। रुखसार ने मेरी और देखा और ऐसे मुंह बनाया जैसे मैं उसका कोई विरोधी हूँ।

वह राज के बाँहों में से बाहर आकर राज के ही बगल मैं बैठ गयी। रुखसार ने मुझे भी अपने पास बुलाया और अपने दूसरी और बिठाया। रुखसार मेरे और राज के बीचमें बैठी हुयी थी। रुखसार ने अपना एक हाथ मेरे और एक हाथ राज के हाथ में दे रखा था। हम तीनों एक अजीब से बंधन मैं बंधे हुए लग रहे थे।

राज उसने तब रुखसार का हाथ अपने हाथ में लेकर उसे सेहलना शुरू किया और बोला, “समीर, रुखसार, मैं तुम्हें अब एक बड़ी गम्भीर बात कहने वाला हूँ। कुछ ख़ास कारण से मैंने सबसे यह बात छुपाके रखी है। यहां तक की मैंने डॉली को और अपने माता और पिता तक को नहीं बताया। ” अचानक हम सब गम्भीर हो गए।

राज ने तब हम को बताया की उसको उसकी कंपनी की औरसे उसे निकासी का आर्डर मिल गया था। उसे एक महीने का नोटिस मिला था। अब उसके पास कोई जॉब नहीं था। अगर वह एक महीने में कोई और जॉब नहीं ढूंढ पायेगा तो उसे घर बैठना पड़ेगा। कमरे में जैसे एक मायूस सा वातावरण फ़ैल गया।

अब राज वह राज नहीं लग रहा था। हम जानते थे की राज का पूरा घर उसीकी आमदनी से चलता था। अगर आमदनी रुक गयी तो सब की हालात क्या होगी यह सोचना भी मुश्किल था। राज की आँखोंसे आंसू बहने लगे। वह अपने आप को सम्हाल नहीं पा रहा था। मैंने और रुखसार ने उसके हाथ पकडे और उसको ढाढस देने की कोशिश करने लगे। पर राज के आंसू रुकते ही न थे। राज एकदम उठ खड़ा हुआ और बाथरूम की और बढ़ा।

रुखसार भी भावुक हो रही थी। राज की ऐसी हालत उससे देखी नहीं जा रही थी। रुखसार उठकर मेरे पास आई। उसकी आँखों में भी आंसू थे। वह बोली, अरे देखो तो, राज का कैसा हाल हो रहा है। उसे क्या हो गया? उसे सम्हालो। डॉली को इस वक्त राज के पास होना चाहिए था। तुम क्या कर रहे हो। जाओ अपने दोस्त को सांत्वना दो। उसके पास बैठो, उसको गले लगाओ।”

तब मैंने अपनी बीबी को अपनी बाँहों में लेते हुए कहा, “देखो आज होली है। आज आनंद का त्यौहार है। रोने का नहीं। ऐसे वक्त में तो एक स्त्री ही पुरुष को प्रेम देकर अपने स्त्रीत्व से शांत कर सकती है। मैं कुछ नहीं कर सकता। डॉली भी तो राज के पास नहीं है। आज तो तुम ही राज को शांत कर सकती हो।

मेरी बात सुनकर रुखसार सहम सी गयी और कुछ देर तक सोचने लग गयी। फिर बोली, “पर अगर मैं उसे अपने स्त्रीत्व से शांत करने की कोशिश करुँगी और कुछ ऊपर नीचे होगया तो?”

मैंने कहा, “तो क्या होगा? मैं हूँ ना? सुबह उसने तुम्हारी चूचियां दबाई तो क्या हुआ? कौन सा आसमान टूट पड़ा? तुम्हें कुछ नहीं होगा। ज्यादा चिंता मत करो। मैं तुम्हारा पति तुम्हे कह रहा हूँ। यह ज्यादा सोचने का वक्त नहीं है। तुम मेरे साथ चलो और उसे अपने आँचल में लेकर शांत करो। वरना वह कहीं वह कोई पागलपन न कर बैठे। वह कहीं अपनी जान न खो बैठे। और अगर ऐसा कुछ हुआ तो तुम अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाओगी।”

रुखसार हड़बड़ा कर उठी और राज जहां बाहर बैठा था उसके पास गयी। उसने राज का हाथ पकड़ा और उसे खीच कर बैडरूम में ले आई। राज की सिसकियाँ तब भी नहीं रुक रही थी। पलंग पर रुखसार मेरे और राज के बीच बैठी। उसने राज का सर अपनी गोद में रखा और उसके काले घने बालों में अपनी उंगलियां ऐसे फेर रही थी जैसे वह कंघा कर रही हो। अब राज का सर मेरी बीबी की गोद में था।

राज का नाक अब रुखसार के स्तनों को छू रहा था। राज का हाल देखने वाला था। रुखसार जैसे ही थोड़ी झुकी की उसकी मद मस्त चूंचियां राज के नाक पर रगड़ ने लगीं। रुखसार सिहर उठी। रुखसार सीधी बैठी और राज और मुझे अपनी दोनों बाँहों में लिया।

मैंने रुखसार के रसीले होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होठों को चूसने लगा। रुखसार ने अपनी आँखें बंद कर ली। राज ने हमें चुम्बन करते देख हमारे मुंह के बीच अपना मुँह घुसेड़ दिया। जब मैंने देखा की राज भी रुखसार के रसीले होंठो को चूसना और उसे किस करने के लिए उतावला हो रहा था तो मैं बीचमें से हट गया।

तब राज और रुखसार के रसभरे होंठ मिल गये और राज ने रुखसार का सर अपने हाथ में पकड़ कर रुखसार के होठों को चूसना शुरू किया। रुखसार की आँखे बंद थीं। पर जैसे ही राज की मूछें उसने महसूस की, तो उसने आँख खोली और राज को उस से चुम्बन करते पाया। वह थोड़ी छटपटाई और मुंह हटाने लगी। पर राज ने उसका सर कस के पकड़ा था।

वह हिल न पायी और शायद उसे याद आया की उस रात उसने मुझे राज को अपना थोडा सा स्त्री जातीय प्यार देनेका वादा किया था। शायद यह सोच कर वह शांत हो गई और राज के चुम्बन में उसकी सह भागिनी हो गयी। मेरे लिए यह एक अकल्पनीय द्रष्य था। मेरी रूढ़िवादी बीबी मेरे प्रिय दोस्त को लिपट कर किस कर रही थी। रुखसार ने जब देखा की वह उसकी जीभ को भी चूसना चाहता था तब रुखसार ने राज के मुंह में अपनी जीभ को जाने दिया।

राज मेरी प्रिय बीबी को ऐसे चुम्बन कर रहा था जैसे वह अब उसे नहीं छोड़ेगा। रुखसार साँस नहीं ले पा रही थी। उसने अपना मुंह राज के मुंह से हटाया और जोरों से सांस लेने लगी। राज रुखसार को कष्ट में देख थोड़ा खिसिया गया। उसकी खिसियानी हालत देख रुखसार ने उसे अपनी एक बांह में लिया और मुझे दूसरी बाँह में। हम दोनों को अपनी बाँहों में ले कर वह पलंग पर लेट गयी।

उसका मुंह राज की और था। मैं उस के पीछे लेटा था। उसने एकबार फिर राज के होंठ से अपने होंठ मिलाये और अब वह और जोश से राज को चुम्बन करने लगी। तब राज और मेरी बीबी ऐसे चुम्बन कर रहे थे जैसे दो प्रेमी सालों के बाद मिले हों। रुखसार के दोनों हाथ राज के सर को अपनी बाँहों में लिए हुए थे। राज ने भी मेरी बीबी को कमर से कस के अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था।

 
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