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मैं जब वापस आया तब रुखसार बिस्तरमें मेरा इंतजार कर रही थी। मैं जानता था की वह वह मुझसे वहाँ क्या हुआ यह सुनने के लिए बेताब थी। मैंने भी हाथ मुंह धोया और बिस्तर में उसके पास जाके अपने कपडे निकाल के लेट गया। उसने जब महसूस किया की मैं तो बिल्कुल नंगा बिस्तर में घुसा हुआ हूँ तो बोली, “लगता है आज कुछ तीर मार के आये हो तुम। बोलो, चिड़िया जाल में फँसी या नहीं।”
मैने रुखसार को अपनी बाँहों में घेर लिया। मैं उसके नाइट गाउन को उतारने में लग गया। उसके नाइट गाउन को खोल कर उसे बाजू में रख कर फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मुंह पर मुंह लगा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मेरा खड़ा लंड उसकी फुद्दी को टक्कर मार रहा था। वह कुछ बोलना चाहती थी, पर चूँकि मैंने उसके होठ होंठ कास कर दबाये हुए थे इसलिए वह कुछ बोल नहीं पायी।
मैंने धीरे से अपने होंठ हटाये और बोला, “चिड़िया जाल में तो फंस सकती थी, पर मैंने उसे नहीं फंसाया। मैं उसे आसानी से फंसा लूंगा अगर तुम सपोर्ट करो तो।”
“तुम्हे मुझसे सपोर्ट चाहिए, एक दूसरी औरत को फ़साने के लिए?” बड़े आश्चर्य से उसने पूछा।
मैंने उसे सहलाते हुए कहा, “हाँ। मुझे तुम्हारा सपोर्ट ऐसे चाहिए की हम कुछ ऐसा करें की जिससे ऐसा ना लगे की राज पर या तुम पर पर कोई ज्यादती हो रही है।”
रुखसार बड़ी उत्सुकता से मेरी बात सुन रही थी। मैंने कहा, “अगर में आज डॉली के साथ कुछ करता और अगर तुम्हे या राज को वह मालूम पड़ता, तो क्या तुम्हें मनमें एक तरह की रंजिश न होती? क्या राज इससे आहत न होता?” रुखसार मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने अपना सर हिलाके हामी भरी।
मैंने फिर मेरी बीबी को सारा किस्सा सुनाया। मैंने उससे कुछ भी नहीं छुपाया। मैंने कहा, “शायद यदि मैं चाहता तो डॉली को अपनी बाँहों में आज जक़ड सकता था, चुम भी सकता था, और शायद चोद भी सकता था। पर मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। मैं तुम्हे बताये बिना कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिससे तुम्हे चोट पहुंचे। ”
मेरी बात सुनकर रुखसार भावुक हो गयी और बोली,” यही बात तुम्हारे दोस्त पर भी लागू होती है। तुम उस दिन राज के बारे में मुझे खरी खोटी सूना रहे थे न? तुम्हारे कहने पर मैं जब राज के सामने तौलिया पहन के आयी तो उसने मुझे छुआ भी नहीं। वह चाहता तो सब कुछ कर सकता था..
मैं भी उसे शायद रोक नहीं पाती। हम एकदूसरे के इतने करीब खड़े थे। तब भी उसने कुछ नहीं किया। हाँ वह बादमें थोड़ा भावुक हो गया और मुझे बाहों में ले लिया। पर तुरंत उसने मुझसे माफ़ी भी मांगी। हाँ, मैं ये मना नहीं करुँगी के अगर मैं उसे और ज्यादा लिफ्ट देती तो वह मुझे छोड़ता नहीं। शायद मुझे वहीँ चोद देता। पर वह तो हर मर्द करता।“
एक तरफ मेरी बीबी यह कह रही थी की राज ने उसे छुआ भी नहीं पर तुरंत वह कह रही थी की राज ने उसे अपनी बाहों में ले लिया था। मैं समझ गया की रुखसार राज का पक्ष ले रही थी।
रुखसार मेरे पास आयी और मुझे अपने हाथों से मेरी छाती पर पिटनेका नाटक करती हुई बोली, “यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है । न तुम मुझे राज को उकसाने के लिए कहते और न यह सब होता। मुझे आज इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है।” यह बोलते हुए भी मेरी बीबी का मुंह शर्म से जैसे लाल हो गया।
मैंने महसूस किया की तब मेरी बीवी इतनी कामान्ध हो गयी की उसने अपनी पोजीशन बदली और मेरे पॉव के बीच पहुँच कर मेरा लण्ड अपने मुंह में डाल कर बड़े प्यार से चाटने लगी। फिर धीरे से वह मेरे लण्ड को मुंह के अंदर बाहर करने लगी जैसे वह मुंहसे अपनी चुदाई करवा रही हो। मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मेरे लण्ड में गरम खून दौड़ रहा था। उत्तेजना के मारे मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पा रहा था।
जो मेरी प्यारी बीबी ने हमारी शादी के इतने सालों से नहीं किया था, वह आज कल वह आसानी से मुझे खुश करने के लिए कर रही थी। आजतक उसने मेरे कई बार कहने पर भी मेरा लण्ड कभी भी अपने मुंह में नहीं डाला था।
आजकल वह मेरे आग्रह किये बिना ही मुझे खुश करने के लिए वह मरे लण्ड को न सिर्फ मुंह में डालती थी पर उसे बड़े प्यार से चूसती भी थी। उसे पता था की ऐसे करने से मैं बहुत उत्तेजित हो जाता हूँ। मेरी प्यारी बीबी के साथ मैं अब वैवाहिक जीवन का वह आनंद उठा रहा था जो मुझे शादी के आठ सालों में भी नसीब नहीं हुआथा। कहीं ना कहीं इसमें राज का भी योगदान था इसमें कोई शक नहीं था।
मैंने उसे मेरी टांगो के बीच से उठाकर अपने सीने से लगाया और बोला, “डार्लिंग, मैं तुम्हे इतना चाहता हूँ की जिसकी कोई सीमा नहीं। मैं तुम्हें जीवन के सब सुख अनुभव करवाना चाहता हूँ। एक मर्द जीवन में कई औरतों को चोदता है। मैंने भी तुम्हारे अलावा कुछ लड़कियों को और औरतों को शादी से पहले चोदा है..
अगर तुम मुझसे इतना प्यार नहीं करती तो मैं शादी के बाद भी किसी न किसी औरत को चोदता होता। मैं तुम्हें भी ऐसे आनंद का अनुभव करवाना चाहता हूँ। अपनी बीबी या अपने पति के अलावा और किसीको चोदने में या और किसीसे चुदवाने में कुछ अनोखा ही आनंद आता है। यह मैं जानता हूँ। वही आनंद मैं चाहता हूँ की तुम अनुभव करो।“
मुझे तब ऐसा लगा जैसे मेरी बात सुनकर रुखसार कुछ रिसिया गयी। वह मेरा हाथ छुड़ा कर बोली, “जानू, मैं सच बोलती हूँ। मुझे मात्र तुमसे ही सेक्स का आनंद लेनाहै। मैं तुम से बहुत ही खुश हूँ। पर लगता है तुम मुझ से खुश नहीं हो इसीलिए ऐसा सोचते हो। मैंने तुम्हें पूरी छूट दे रखी है। जहां चाहे जाओ, जिस किसीको चोदना है चोदो। मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी।”
फिर मैंने रुखसार की चिबुक पकड़ कर कहा, “मेरी प्यारी डार्लिंग मेरी कसम है यदि तू ज़रा सा भी झूठ बोली तो। सच सच बताना, राज ने जब तुझे बाँहों में लेकर डांस किया था और जब तुम राज के ऊपर धड़ाम से गिरी और उस समय जब राज ने तुम्हे बाहों में लिया और तुम्हारे बूब्स दबाये तो क्या तुम उत्तेजित नहीं हुयी थी? आज सिर्फ सच बोलना।”
रुखसार जैसे सहम गयी। उसने कभी सोचा भी नहीं था की इस तरह कभी उसे भी कटहरे में खड़ा होना पड़ेगा। उसके गाल शर्म के मारे लाल हो गये। थोड़ी देर सोच कर वह बोली, “हां यह सच है। मैं झूठ नहीं बोलूंगी। उसे छू कर मेरे जिस्म में रोमांच सा हो रहा था। पर मैंने कभी भी उसके या किसी और के बारे में ऐसा वैसा नहीं सोचा। एक बात और भी है..
शादी का बंधन एक नाजुक धागे से बंधा हुआ है। कभी कभी उसे ज्यादा खींचने से वह धागा टूट सकता है। ऐसे पर पुरुष सम्बन्ध का मतलब उस धागे को ज्यादा खींचना। एक बात और। अपनी बीबी को पर पुरुष से जातीय सम्बन्ध के लिए उकसाना खतरनाक भी हो सकता है। हो सकता है मुझे दुसरेसे चुदवाने में मझा आने लगे और मैं बार बार दूसरे मर्द से चुदवाना चहुँ तो?”
बातों बातों में मेरी सीधी सादी बीबी ने मुझे वैवाहिक सम्बन्ध की वह बात कह डाली जो एक सटीक खतरे की और इंगित करती थी। मेरी बीबी ने मुझसे राज का नाम लिए बगैर यह भी कह दिया की एक बार चुदने के बाद हो सकता है वह राज से बार बार चुदवाना चाहे..
तब फिर मुझे इसकी इजाज़त देनी होगी। पर मैंने इस बारे में काफी सोच रखा था और मेरी बीबी के लिए मेरे पास भी सटीक जवाब था। हालांकि मेरी बीबी की बातों से मुझे एक बात साफ़ नजर आयी की पिछले कुछ दिनों में रुखसार और राज के थोड़े करीब आने से मेरी बीबी का राज के प्रति जो भय अथवा वैमनस्य था, वह नहीं रहा था। मुझे अब हमारा रास्ता साफ़ नजर आ रहाथा।
तब मैंने कहा, ” डार्लिंग, मुझे एक बात बताओ, मानलो आज दिन में राज ने तुम्हे यदि चोद दिया होता, तो क्या तुम मुझे छोड़ देती? या क्या मैं तुम्हें छोड़ देता? मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ की सेक्स और प्रेम में बहुत अन्तर है। आज हम पति बीबी मात्र इस लिए नहीं हैं क्योंकि हम एक दूसरे से सेक्स करते हैं..
बल्कि हम पति बीबी इस लिए भी हैं क्योंकि हम न सिर्फ एक दूसरे से प्यार एवं सेक्स करते हैं पर एक दूसरे की जिम्मेदारियां, खूबियाँ और कमियां हम मिलकर शेयर करते हैं और उसका फायदा या नुक्सान हम क़बूल करते हैं। यदि हम अपने इस बंधन से वाकिफ हैं तो ऐसी कोई बात नहीं जो हमें जुदा कर सके। मैं तो एक जातीय अनुभव करने के मात्र के लिए ही कह रहा हूँ।” रुखसार कुछ न बोली और चुपचाप मुझे देखने लगी।
मैने रुखसार को अपनी बाँहों में घेर लिया। मैं उसके नाइट गाउन को उतारने में लग गया। उसके नाइट गाउन को खोल कर उसे बाजू में रख कर फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मुंह पर मुंह लगा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मेरा खड़ा लंड उसकी फुद्दी को टक्कर मार रहा था। वह कुछ बोलना चाहती थी, पर चूँकि मैंने उसके होठ होंठ कास कर दबाये हुए थे इसलिए वह कुछ बोल नहीं पायी।
मैंने धीरे से अपने होंठ हटाये और बोला, “चिड़िया जाल में तो फंस सकती थी, पर मैंने उसे नहीं फंसाया। मैं उसे आसानी से फंसा लूंगा अगर तुम सपोर्ट करो तो।”
“तुम्हे मुझसे सपोर्ट चाहिए, एक दूसरी औरत को फ़साने के लिए?” बड़े आश्चर्य से उसने पूछा।
मैंने उसे सहलाते हुए कहा, “हाँ। मुझे तुम्हारा सपोर्ट ऐसे चाहिए की हम कुछ ऐसा करें की जिससे ऐसा ना लगे की राज पर या तुम पर पर कोई ज्यादती हो रही है।”
रुखसार बड़ी उत्सुकता से मेरी बात सुन रही थी। मैंने कहा, “अगर में आज डॉली के साथ कुछ करता और अगर तुम्हे या राज को वह मालूम पड़ता, तो क्या तुम्हें मनमें एक तरह की रंजिश न होती? क्या राज इससे आहत न होता?” रुखसार मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने अपना सर हिलाके हामी भरी।
मैंने फिर मेरी बीबी को सारा किस्सा सुनाया। मैंने उससे कुछ भी नहीं छुपाया। मैंने कहा, “शायद यदि मैं चाहता तो डॉली को अपनी बाँहों में आज जक़ड सकता था, चुम भी सकता था, और शायद चोद भी सकता था। पर मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। मैं तुम्हे बताये बिना कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिससे तुम्हे चोट पहुंचे। ”
मेरी बात सुनकर रुखसार भावुक हो गयी और बोली,” यही बात तुम्हारे दोस्त पर भी लागू होती है। तुम उस दिन राज के बारे में मुझे खरी खोटी सूना रहे थे न? तुम्हारे कहने पर मैं जब राज के सामने तौलिया पहन के आयी तो उसने मुझे छुआ भी नहीं। वह चाहता तो सब कुछ कर सकता था..
मैं भी उसे शायद रोक नहीं पाती। हम एकदूसरे के इतने करीब खड़े थे। तब भी उसने कुछ नहीं किया। हाँ वह बादमें थोड़ा भावुक हो गया और मुझे बाहों में ले लिया। पर तुरंत उसने मुझसे माफ़ी भी मांगी। हाँ, मैं ये मना नहीं करुँगी के अगर मैं उसे और ज्यादा लिफ्ट देती तो वह मुझे छोड़ता नहीं। शायद मुझे वहीँ चोद देता। पर वह तो हर मर्द करता।“
एक तरफ मेरी बीबी यह कह रही थी की राज ने उसे छुआ भी नहीं पर तुरंत वह कह रही थी की राज ने उसे अपनी बाहों में ले लिया था। मैं समझ गया की रुखसार राज का पक्ष ले रही थी।
रुखसार मेरे पास आयी और मुझे अपने हाथों से मेरी छाती पर पिटनेका नाटक करती हुई बोली, “यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है । न तुम मुझे राज को उकसाने के लिए कहते और न यह सब होता। मुझे आज इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है।” यह बोलते हुए भी मेरी बीबी का मुंह शर्म से जैसे लाल हो गया।
मैंने महसूस किया की तब मेरी बीवी इतनी कामान्ध हो गयी की उसने अपनी पोजीशन बदली और मेरे पॉव के बीच पहुँच कर मेरा लण्ड अपने मुंह में डाल कर बड़े प्यार से चाटने लगी। फिर धीरे से वह मेरे लण्ड को मुंह के अंदर बाहर करने लगी जैसे वह मुंहसे अपनी चुदाई करवा रही हो। मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मेरे लण्ड में गरम खून दौड़ रहा था। उत्तेजना के मारे मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पा रहा था।
जो मेरी प्यारी बीबी ने हमारी शादी के इतने सालों से नहीं किया था, वह आज कल वह आसानी से मुझे खुश करने के लिए कर रही थी। आजतक उसने मेरे कई बार कहने पर भी मेरा लण्ड कभी भी अपने मुंह में नहीं डाला था।
आजकल वह मेरे आग्रह किये बिना ही मुझे खुश करने के लिए वह मरे लण्ड को न सिर्फ मुंह में डालती थी पर उसे बड़े प्यार से चूसती भी थी। उसे पता था की ऐसे करने से मैं बहुत उत्तेजित हो जाता हूँ। मेरी प्यारी बीबी के साथ मैं अब वैवाहिक जीवन का वह आनंद उठा रहा था जो मुझे शादी के आठ सालों में भी नसीब नहीं हुआथा। कहीं ना कहीं इसमें राज का भी योगदान था इसमें कोई शक नहीं था।
मैंने उसे मेरी टांगो के बीच से उठाकर अपने सीने से लगाया और बोला, “डार्लिंग, मैं तुम्हे इतना चाहता हूँ की जिसकी कोई सीमा नहीं। मैं तुम्हें जीवन के सब सुख अनुभव करवाना चाहता हूँ। एक मर्द जीवन में कई औरतों को चोदता है। मैंने भी तुम्हारे अलावा कुछ लड़कियों को और औरतों को शादी से पहले चोदा है..
अगर तुम मुझसे इतना प्यार नहीं करती तो मैं शादी के बाद भी किसी न किसी औरत को चोदता होता। मैं तुम्हें भी ऐसे आनंद का अनुभव करवाना चाहता हूँ। अपनी बीबी या अपने पति के अलावा और किसीको चोदने में या और किसीसे चुदवाने में कुछ अनोखा ही आनंद आता है। यह मैं जानता हूँ। वही आनंद मैं चाहता हूँ की तुम अनुभव करो।“
मुझे तब ऐसा लगा जैसे मेरी बात सुनकर रुखसार कुछ रिसिया गयी। वह मेरा हाथ छुड़ा कर बोली, “जानू, मैं सच बोलती हूँ। मुझे मात्र तुमसे ही सेक्स का आनंद लेनाहै। मैं तुम से बहुत ही खुश हूँ। पर लगता है तुम मुझ से खुश नहीं हो इसीलिए ऐसा सोचते हो। मैंने तुम्हें पूरी छूट दे रखी है। जहां चाहे जाओ, जिस किसीको चोदना है चोदो। मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी।”
फिर मैंने रुखसार की चिबुक पकड़ कर कहा, “मेरी प्यारी डार्लिंग मेरी कसम है यदि तू ज़रा सा भी झूठ बोली तो। सच सच बताना, राज ने जब तुझे बाँहों में लेकर डांस किया था और जब तुम राज के ऊपर धड़ाम से गिरी और उस समय जब राज ने तुम्हे बाहों में लिया और तुम्हारे बूब्स दबाये तो क्या तुम उत्तेजित नहीं हुयी थी? आज सिर्फ सच बोलना।”
रुखसार जैसे सहम गयी। उसने कभी सोचा भी नहीं था की इस तरह कभी उसे भी कटहरे में खड़ा होना पड़ेगा। उसके गाल शर्म के मारे लाल हो गये। थोड़ी देर सोच कर वह बोली, “हां यह सच है। मैं झूठ नहीं बोलूंगी। उसे छू कर मेरे जिस्म में रोमांच सा हो रहा था। पर मैंने कभी भी उसके या किसी और के बारे में ऐसा वैसा नहीं सोचा। एक बात और भी है..
शादी का बंधन एक नाजुक धागे से बंधा हुआ है। कभी कभी उसे ज्यादा खींचने से वह धागा टूट सकता है। ऐसे पर पुरुष सम्बन्ध का मतलब उस धागे को ज्यादा खींचना। एक बात और। अपनी बीबी को पर पुरुष से जातीय सम्बन्ध के लिए उकसाना खतरनाक भी हो सकता है। हो सकता है मुझे दुसरेसे चुदवाने में मझा आने लगे और मैं बार बार दूसरे मर्द से चुदवाना चहुँ तो?”
बातों बातों में मेरी सीधी सादी बीबी ने मुझे वैवाहिक सम्बन्ध की वह बात कह डाली जो एक सटीक खतरे की और इंगित करती थी। मेरी बीबी ने मुझसे राज का नाम लिए बगैर यह भी कह दिया की एक बार चुदने के बाद हो सकता है वह राज से बार बार चुदवाना चाहे..
तब फिर मुझे इसकी इजाज़त देनी होगी। पर मैंने इस बारे में काफी सोच रखा था और मेरी बीबी के लिए मेरे पास भी सटीक जवाब था। हालांकि मेरी बीबी की बातों से मुझे एक बात साफ़ नजर आयी की पिछले कुछ दिनों में रुखसार और राज के थोड़े करीब आने से मेरी बीबी का राज के प्रति जो भय अथवा वैमनस्य था, वह नहीं रहा था। मुझे अब हमारा रास्ता साफ़ नजर आ रहाथा।
तब मैंने कहा, ” डार्लिंग, मुझे एक बात बताओ, मानलो आज दिन में राज ने तुम्हे यदि चोद दिया होता, तो क्या तुम मुझे छोड़ देती? या क्या मैं तुम्हें छोड़ देता? मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ की सेक्स और प्रेम में बहुत अन्तर है। आज हम पति बीबी मात्र इस लिए नहीं हैं क्योंकि हम एक दूसरे से सेक्स करते हैं..
बल्कि हम पति बीबी इस लिए भी हैं क्योंकि हम न सिर्फ एक दूसरे से प्यार एवं सेक्स करते हैं पर एक दूसरे की जिम्मेदारियां, खूबियाँ और कमियां हम मिलकर शेयर करते हैं और उसका फायदा या नुक्सान हम क़बूल करते हैं। यदि हम अपने इस बंधन से वाकिफ हैं तो ऐसी कोई बात नहीं जो हमें जुदा कर सके। मैं तो एक जातीय अनुभव करने के मात्र के लिए ही कह रहा हूँ।” रुखसार कुछ न बोली और चुपचाप मुझे देखने लगी।