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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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यह द्रष्य मेरे लिए एकदम उत्तेजित करने वाला था। मेरा लण्ड एकदम कड़क हो गया था। मैंने भी रुखसार को पीछे से मेरी बाहोँ में जकड़ा और मेरी बीबी के दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर मसलना शुरू किया। हम तीनों पलंग पर लेटे हुए थे। मैंने फिर मेंरे कड़े लण्ड को मेरी बीबी के गाउन ऊपर से उसकी गांड में डालना चाहा। मैं उसे पीछे से धक्का दे रहा था। इस कारण वह राज में घुसी जा रही थी। राज पलंग के उस छौर पर पहुँच गया जहाँ दीवार थी और उसके लिए और पीछे खिसकना संभव नहीं था।

अचानक रुखसार जोर से हँस पड़ी। उसे हँसते देख राज ने पूछा, “भाभी जानजी, क्या बात है? आप क्यों हंस रही हो?”

तब रुखसार सहज रूप से बोल पड़ी, “तुम्हारे भैया मुझे पिछेसे धक्का दे रहे हैं। उनका कड़क घंटा वह मेरे पिछवाड़े में घुसेड़ ने की कोशिश कर रहे है। इनकी हालत देख मुझे हंसी आ गयी।”

मैंने पहली बार मेरी रूढ़ि वादी बीबी के मुंह से किसी पर पुरुष के सामने लण्ड के लिए कोई भी शब्द का इस्तमाल करते हुए सुना। मुझे लगा की जीन और व्हिस्की की मिलावट के दो पुरे पेग पीनेसे अब मेरी बीबी थोड़ी बेफिक्र हो गयी थी। साथ में वह अब राज से पहले से काफी अधिक घनिष्ठता महसूस कर रही थी।

इसे सुनकर राज ने रिसियायी आवाज में कहा, “भाभी जानजी, आपने अपने पति की हालत तो देखी पर मेरे हाल नहीं देखे। यह देखिये मेरा क्या हाल है?”

ऐसा कहते ही रुखसार को कोई मौका ना देते हुए राज ने रुखसार का हाथ पकड़ कर अपने दोनों पांव के बीच अपने लण्ड पर रख दिया और ऊपर से रुखसार के हाथ को जोरों से अपने लण्ड ऊपर दबाने लगा। मेरे पीछे से धक्का देने के कारण रुखसार के बहुत कोशिश करने पर भी वह वहां से हाथ जब हटा नहीं पायी तब रुखसार ने राज के लण्ड को अपने हाथों में पकड़ा। राज का पाजामा उस जगह पर चिकनाहट से भरा हुआ गिला हो चुका था। यह देख कर मैं ख़ुशी से पागल हो रहा था। अब मुझे मेरा सपना पूरा होनेका पर भरोसा हो गया।

मैंने तब रुखसार को पीछे से धक्का मारना बंद किया और मैं पीछे हट गया। अब रुखसार चाहती तो अपना हाथ वहां से हटा सकती थी। परंतु मुझे यह दीख रहा था की रुखसार ने अपना हाथ वहां ही रखा। वह शायद राज के लण्ड की लंबाई और मोटाई भाँप ने की कोशीश कर रही थी। राज के पाजामे के ऊपर से भी उसे राज के लंबे और मोटे लण्ड की पैमायश का अंदाज तो हो ही गया था।

मेरी प्यारी बीवी जब राज के लण्ड की पैमाइश कर रही थी तब अचानक ही उसके गाउन की ज़िप का लीवर मेरे हाथों लगा। मैंने कुछ न सोचते हुए उसे नीचे सरकाया और उसको रुखसार की कमर तक ले गया।

उसके गाउन के दोनों पट खुल गए। रुखसार ने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। जैसे ही गाउन के पट खुले और ज़िप कमर तक पहुँच गयी तो उसके दो बड़े बड़े अनार मेरे हाथों में आ गये। जैसे ही राज ने रुखसार के नंगे स्तनों को देखा तो वह पागल सा हो गया। इन स्तनों को ब्लाउज के नीचे दबे हुए वह कई बार चोरी चोरी देखता था। उस समय उसने सपने में भी यह सोचा नहीं होगा की एक समय वह उन मम्मों को कोई भी आवरण के बिना देख पायेगा।

राज को और कुछ नहीं चाहिए था। वह तो रुखसार के दूध को पीने के लिए अधीरा था। परंतु मुझे तब बड़ा आश्चर्य यह हुआ की उसके सामने रुखसार के बड़े बड़े और सख्त मम्मे गुरुत्वाकर्षण के नियम को न मानते हुए उद्दंड से ऐसे खड़े थे जैसे राज को चुनौती दे रहे हों। फिर भी राज ने उन्हें हाथों में न पकड़ ते हुए रुखसार के कानों में कुछ कहा। यह सुनकर रुखसार मुस्कुरायी और उसने अपना सर हामी दर्शाते हुए हिलाया। मुझसे अपनी जिज्ञासा रोकी नहीं गयी। मैंने राज से पूछा, “तुमने रुखसार से क्या कहा?

राज ने इसका कोई जवाब न देते हुए मेरी पत्त्नी के दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में भरते हुए कहा, “मैंने रुखसार से इसके लिए इजाजत मांगी थी।”

मैं राज की इस हरकत से हैरान रह गया। कमीना, उसने अपना काम भी करवा लिया और ऊपर से शराफत का नाटक भी कर के रुखसार की आँखों में शरीफ बन गया।

उसने रुखसार के दोनों मम्मो को अपने दोनों हाथों में बड़ी मुश्किल समाते हुए रखा और बोला, रुखसार तुम्हारे स्तनों का कोई मुकाबला नहीं। मैंने कभी किसी भी औरत के इतने सुन्दर मम्मे नहीं देखे। इसमें डॉली भी शामिल है।”

मैंने मेरी बीबी की और देखा तो वह शर्म से लाल हो रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे। तब मेरी बीबी ने राज को अपनी और खींचा और उसके मुंह को अपने स्तनों में घुसा दिया। राज का मुंह बारी बारी कभी एक मम्मे को तो कभी दूसरे को जोर से चूसने लगा।

जब वह मेरी बीबी के एक स्तन को चूसता था तो दूसरे को जोर से दबाता और खींचता था और अपनी उँगलियों में रुखसार की निप्पलों को जैसे चूंटी भर रहा हो ऐसे दबाता था। कई बार तो वह इतना जोर से दबा देता की रुखसार के मुंह से टीस सी निकल जाती। तब वह राज को धीरे दबाने का इशारा करती।

बस और क्या था? अब तो मुझे और राज को जैसे लाइसेंस मिल गया था। मैंने भी रुखसार के रस से भरे मम्मों को चूसना शुरू किया। अब राज कहाँ रुकने वाला था? वह रुखसार के दूसरे मम्मे को अपने मुंह में रख कर उसकी निप्पल को काट ने लगा। रुखसार के हाल का क्या कहना? उसकी जिंदगी में पहली बार उसके स्तनों को दो मर्द एक साथ चूस रहे थे।

रुखसार इतनी गरम और उत्तेजित हो गयी थी की वह अपने आप को सम्हाल नहीं पा रही थी। अब तक जो मर्यादा का बांध उसके अपने मन में था अब वह टूटने लगा था। अपने स्तनों पर राज के मुंह के स्पर्श से ही अब वह पागल सी हो रही थी।

मैंने झुक कर प्यार से मेरी प्यारी बीबी के रसीले होठों पर चुम्बन किया और उसके कानों में फुसफुसा कर बोला, “मेरी जान, आज तूमने मुझे वह गिफ्ट दिया है जिसके लिए में तुम्हारा ऋणी हूँ। तुमने मेरे कहने पर अपनी लज्जा का बलिदान किया है इसका ऋण मैं चूका नहीं सकता। रुखसार मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और अब तो मैं तुमसे और भी प्यार करने लगा हूँ। मैं चाहता हूँ की आज तुम लज्जा को एक तरफ रख कर हम दोनों से सेक्स का पूरा आनंद लो और हमें सेक्स का पूरा आनंद दो। आज तुम हम दोनों के साथ यह समझ कर सेक्स करो जैसे हम दोनों ही आज रात के लिए तुम्हारे पति हैं।“

रुखसार आँखे बंद कर मेरी बात ध्यान से सुन रही थी। जब वह कुछ न बोली तो मैंने उसे कहा, “डार्लिंग, अब आँखे खोलो और मुझे जवाब दो।”

तब मेरी शर्मीली खूबसूरत बीबी ने अपनी आँखे खोली और और मेरी आँखों में आँखे डाल कर मुस्कुराई। उसने मेरा सर अपने दोनों हाथों में लेकर मेरे होंठ अपने होंठो पर दबा दिए और मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल दी। ऐसे थोड़ी देर चुम्बन करने के बाद मेरे कान में फुसफुसाई, “चलो भी। अब जो होना था वह हुआ। अब बातें कम और काम ज्यादा।”

राज ने जब हमारा आपस में प्रेमआलाप देखा तो वह भी मुस्कुराया और समझ गया की अब रुखसार भी हमारे साथ है। राज ने और मैंने तब प्यार से रुखसार को पलंग पर लिटा दिया। हम दोनों उसके दोनों और बैठ गए और उसकी चूचियों को चूसने लगे। रुखसार ने हम दोनों को बड़े प्यार भरी नजर से देखा और फिर अपनी आँखें बंद करली।

अब वह हमारे प्यार का आनंद ले रही थी। उसे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ था। आज तक उसने सिर्फ मेरे प्यार का ही अनुभव किया था। अब उसे दो प्रेमियों के प्यार का आनंद मिल रहा था। आगे चलकर यह अनुभव क्या रंग लाएगा उसकी कल्पना मात्र से ही वह उत्तेजित हो रही थी और मैंने वह उसके शरीर में हो रहे कम्पन से महसूस किया।

मैंने धीरे से मेरा हाथ उसके गाउन के अंदर डाला। उसकी नाभि और उसके पतले पेट का जो उभार था उसको मैं प्यार से सहलाने लगा। मेरी बीबी मेरे स्पर्श से काँप उठी। मैंने मेरे हाथ रुखसार की पीठ के नीचे डाल दिए और उसे धीरे से बैठाया। उसे बिठाते ही उसका खुला गाउन नीचेकी और सरक गया और वह आगे और पीछे से ऊपर से नंगी हो गयी। राज जिसकी मात्र कल्पना ही तब तक करता था वह रुखसार के कमसिन जिस्म को ऊपर से पूरा नंगा देख कर उसे तो कुबेर का खजाना ही जैसे मिल गया।

राज ने रुखसार के दोनों स्तनों को ऐसे ताकत से पकड़ रखा था की जैसे वह उन्हें छोड़ना ही नहीं चाहता था। कभी वह उन्हें मसाज करता था तो कभी निप्पलों को अपनी उँगलियों में दबाता तो कभी झुक कर एक को चूसता और दूसरे को जोरों से दबाता।

 
रुखसार अब हम दोनों प्रेमियों का उसके मम्मों को चूसना और मलने की प्रक्रिया से इतनी कामोत्तेजित हो चुकी थी के उस से अपने जिस्म को नियत्रण में रखना मुश्किल हो रहा था।

मैं देख रहा था की वह हम दोनों के उसके स्तन मंडल के साथ प्यार करने से अब वह अपने कामोन्माद से एकदम असहाय सी लग रही थी। रुखसार तब अपनी कमर और अपनी नीचे के बदन को उछालते हुए बोलने लगी, “समीर, राज जल्दी करो, और चुसो जल्दी आह्ह्ह्ह्ह.. ओह्ह्ह्ह.. मेरी चूंचियां और दबाव ओओफ़फ़फ़।

तब मुझे लगा की वह अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी। मैंने राज को इशारा किया और हम दोनों उसके मम्मों को और फुर्ती से दबाने और चूसने लगे।

जल्द ही मेरी प्रियतमा एक दबी हुयी टीस और आह के साथ उस रात पहली बार झड़ गयी। उसकी साँसे तेज चल रहीं थी। थोड़ी देर के बाद उसने अपनी आँखें खोली और हम दोनों की और देखा।

मैंने रुखसार से कहा, “डार्लिंग, अब हम लोगों से क्या परदा? अब हमें अपना लुभावना सुन्दर जिस्म के दर्शन कराओ। अब मत शर्माओ। रुखसार ने मेरी और देखा पर कुछ न बोली। मैंने राज को इशारा किया की अब वह काम हम ही कर लेते हैं। राज थोड़ा हिचकिचाता आगे बढ़ा और रुखसार के बदन से गाउन निकालने लगा। रुखसार ने भी अपने फुद्दीड़ उठा कर हमें गाउन को निकाल ने में सहयोग दिया। मैंने जब रुखसार को खड़ा होने को कहा तो वह शर्मा कर बोली, “आप पहले लाइटें बुझा दीजिये।”

राज ने उठकर कमरे की सारी लाइटें बुझा दी बस एक डिम लाइट चालू रक्खी। फिर रुखसार जब उठ खड़ी हुयी तब उसका गाउन अपने आप ही नीचे सरक गया और मेरी शर्मीली रूढ़ि वादी बीबी हम दोनों के सामने पूर्णतः निर्वस्त्र हो गयी। यह उसका पहला अनुभव था जब वह अपने पति के अलावा किसी और व्यक्ति के सामने नग्न खड़ी थी।

राज और मैं दोनों रुखसार के कमसिन जिस्म को देखते ही रह गए। हालाँकि मैंने कई बार मेरी बीबीको निर्वस्त्र देखा था, परंतु उस रात वह जैसे मत्स्यांगना की तरह अद्भुत सुन्दर लग रही थी। राज ने रुखसार को बड़ी तेज नजर से ऊपर से नीचे तक, आगे, पीछे सब तरफ से घूर कर देखने लगा।

मेरी बीबी शर्म से पानी पानी हुयी जा रही थी। एक तरफ वह अब अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार हो रही थी तो दूसरी और स्त्री सहज लज्जा उसे मार रही थी। वह अपनी नजर फर्श पर गाड़े हुए ऐसे खड़ी थी जैसे कोई अद्भुत शिल्पकार ने एकसुन्दर नग्न स्त्री की मूर्ति बना कर वहां रक्खी हो।

राज उसे देखता ही रह गया। रुखसार की कमर ऐसे लग रही थी जैसे दो पर्वतों के बीच में घाटी हो। उसके उरोज से उसकी कमर का उतार और फिर उसकी कमर से कूल्हों का उभार इतना रोमांचक और अद्भुत था की देखते ही बनता था। उसके सर को छोड़ कहीं बाल का एक तिनका भी नहीं था।

उसके दो पांव के बीच में उसकी फुद्दी का उभार कोई भी शरीफ आदमी का ईमान खराब कर देने वाला था। उसकी योनि के होठ एकदम साफ़ और सुन्दर गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे। उसकी योनि में से रस चू रहा था। वह रुखसार के हालात को बयाँ रहा था।

राज ने आगे बढ़कर रुखसार को अपनी बाहों में लिया। उस रात मेरी शर्मीली बीबी ने यह मन बना लिया था की आज वह मेरी ख्वाहिश पूरी करेगी। वह राज की बाँहों में समां गयी और शर्म से अपनी आँखें झुका ली। राज को तो जैसे स्वर्ग मिल गया।

 
राज ने आगे बढ़कर रुखसार को अपनी बाहों में लिया। उस रात मेरी शर्मीली बीबी ने यह मन बना लिया था की आज वह मेरी ख्वाहिश पूरी करेगी। वह राज की बाँहों में समां गयी और शर्म से अपनी आँखें झुका ली। राज को तो जैसे स्वर्ग मिल गया।

वह अपने हाथोँ से रुखसार के नंगे बदन को सहला रहा था। उसके दोनोँ हाथ रुखसार के पीछे, उसकी रीढ़ की खाई में ऊपर नीचे हो रहे थे। कभी वह अपना हाथ रुखसार के फुद्दीड़ों के ऊपर रखता और रुखसार की गाँड़ के गालों को दबाता, तो कभी अपनी उंगली को उस गांड के होठों के बीच की दरार में डालता था।

सने मेरी बीबी को इस हालात में देखने की कल्पना मात्र की थी। उसे यह मानना बड़ा अजीब लग रहा था की तब रुखसार का वह बदन उसका होने वाला था।

राज उसे देखता ही रह गया। रुखसार की कमर ऐसे लग रही थी जैसे दो पर्वतों के बीच में घाटी हो। उसके उरोज से उसकी कमर का उतार और फिर उसकी कमर से कूल्हों का उभार इतना रोमांचक और अद्भुत था की देखते ही बनता था।

उसके सर को छोड़ कहीं बाल का एक तिनका भी नहीं था। उसके दो पांव के बीच में उसकी फुद्दी का उभार कोई भी शरीफ आदमी का ईमान खराब कर देने वाला था।

उसकी योनि के होठ एकदम साफ़ और सुन्दर गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे। उसकी योनि में से रस चू रहा था। वह रुखसार के हालात को बयाँ रहा था।

राज ने आगे बढ़कर रुखसार को अपनी बाहों में लिया। उस रात मेरी शर्मीली बीबी ने यह मन बना लिया था की आज वह मेरी ख्वाहिश पूरी करेगी। वह राज की बाँहों में समां गयी और शर्म से अपनी आँखें झुका ली।

राज को तो जैसे स्वर्ग मिल गया। वह अपने हाथोँ से रुखसार के नंगे बदन को सहला रहा था। उसके दोनोँ हाथ रुखसार के पीछे, उसकी रीढ़ की खाई में ऊपर नीचे हो रहे थे। कभी वह अपना हाथ रुखसार के फुद्दीड़ों के ऊपर रखता और रुखसार की गाँड़ के गालों को दबाता, तो कभी अपनी उंगली को उस गांड के होठों के बीच की दरार में डालता था।

उसने मेरी बीबीको इस हालात में देखने की कल्पना मात्र की थी। उसे यह मानना बड़ा अजीब लग रहा था की तब रुखसार का वह बदन उसका होने वाला था।

राज नीचे झुक कर रुखसार के पीछे गया। वह अपना सर ऊपर कर मेरी और देखते हुए बोला, “क्या मैं रुखसार के कूल्हों को महसूस कर सकता हूँ? मैं कई महीनों से, जबसे मैंने रुखसार भाभी जान को पेहली बार देखा था तबसे इन कूल्हों को सहलाने के लिए तड़प रहा हूँ।”

रुखसार ने डरते और हीच किचाते हुए मेरी और देखा। मैंने अपनी पलकें हिलाके राज को अपनी अनुमति दे दी। राज ने तुरंत ही मेरी बीबी की सुडौल गांड के दोनों गालों को चूमा और चूमता ही गया।

रुखसार की गांड का घुमाव और उसकी वक्रता में राज अपनी जीभ घुसा कर उन्हें चूमने और अपने हाथों से सहलाने लगा। जब उसने रुखसार की गांड के छिद्र में अपनी जीभ घुसाई तो रुखसार के बदन में कम्पन होने लगा।

मैं उन दोनो की और आगे बढ़ा। मैंने धीरे से राज को खड़ा किया और रुखसार का हाथ राज की टांगों के बीच में रखा और उसके लंड को हिलाने के लिए उसे प्रोत्साहित किया। रुखसार जैसे मेरा इशारा समझ गयी और राज के लंड को उसके पाजामे के उपरसे सहलाने लगी।

मैं धीरे से राज के पीछे गया और राज के पाजामे का नाड़ा मैंने खोल दिया। राज तो पागल हुआ जा रहा था। जैसे ही उसका पाजामा फर्श पर गिरा तो उसका लंबा और मोटा लण्ड हवा में लहराने लगा। तब वह एकदम कड़क हो चूका था।

 
वह बिलकुल बिना झुके अपना सर उठा के खड़ा हुआ था। ऐसे लग रहा था जैसे वह रुखसार की फुद्दी की और जाने को मचल रहा था। राज के नंगे होते ही रुखसार की आँखें राज के लण्ड पर टिक सी गयी।

राज का लण्ड मेरे लण्ड से थोड़ा लंबा और मोटा भी था। जैसे ही राज का पाजामा नीचे गिरा रुखसार का हाथ अनायास ही राज के लण्ड को छू गया।

अब तक मेरी प्यारी बीबी ने कोई पराये मर्द का लण्ड देखा नहीं था। उसके लिए तो यह एक अजूबा सा था। इतना मोटा और लंबा लण्ड देख रुखसार के चेहरे की भाव भंगिमा देखते ही बनती थी।

वह क्या सोच रही थी, मैं उसकी कल्पना ही कर सकता था। शायद वह यह सोच रही होगी की कभी न कभी तो उस लण्ड को उसकी फुद्दी में घुसना ही था। उस समय उसका क्या हाल होगा उसे कैसा महसूस होगा शायद वह यही सोच रही होगी।

यह सोच कर थोड़ी देर के लिए रुखसार जैसे ठिठक सी गयी। फिर रुखसार ने से धीरे से राज का लण्ड अपने हाथ में लिया। वह अपनी मुठी में उसे पूरी तरह से ले न पायी, पर फिर भी उसने अपनी आधी मुठी से ही राज के लण्ड को सहलाना शुरू किया।

राज का लण्ड थीड़ी सी रोशनी में भी चमक रहा था। राज की तरह उसका लण्ड भी गोरा था। उसकी पूरी गोलाई पर उसका पूर्व रस फैला हुआ था। चारों और से चिकनी मलाई फ़ैल जाने के कारण वह स्निग्ध दिख रहा था।

सबसे खूबसूरत उसकी पूरी लंबाई पर बिछी हुयी रगें थीं। उसकी गोरी चमड़ी पर थोड़ी सी श्यामल रंग की नसोँ का जाल बिछा हुआ था। जिस वक्त रुखसार ने राज का लण्ड अपने हाथ में लिया उसके लण्ड की चमड़ी के तले बिछी हुयी नसोँ में जैसे गरम खून का सैलाब फर्राटे मारता हुआ दौड़ने लगा। उसकी नसें फूल रही थीं। राज का लण्ड पूरी तरह अपनी चरम ताकत से खड़ा था।

राज के तने हुए लण्ड को देख रुखसार के गाल एकदम लाल हो गए। उसे महसूस हुआ की वह अपने पति के दोस्त के सामने नंग धड़ंग खड़ी थी और उसके पति का दोस्त भी नंगा उसके सामने खड़ा था और अपने लंबे, मोटे लण्ड का प्रदर्शन कर रहा था।

ऐसा वास्तव में हो सकेगा यह कभी उसने सोचा भी नहीं था। हाँ उसने कभी अपने सपने में ऐसा होने की उम्मीद जरूर की होगी। रुखसार के मुंह के भाव को राज समझ गया और उसने मेरी बीबी को अपने आहोश में लेकर थोड़ा झुक कर पहले उसके गालोँ पर और फिर उसके होठों पर होने होँठ रख दिए और वह रुखसार को बेतहाशा चूमने लगा।

रुखसार को होठों पर चूमते चूमते थोड़ा और झुक कर राज रुखसार के स्तनों को भी चूमने और चाटने लगा। रुखसार से जैसे उसका जी नहीं भर रहा था।

मेरी निष्ठावान बीबी भी राज से लिपट गयी और उसके होठों को चूसने और चूमने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसे उसे अपनी कितने सालों की प्यास बुझाने का मौका मिल गया था। मेरी बीबी और मेरा ख़ास दोस्त अब मेरे ही सामने एक दूसरे से ऐसे लिपटे हुए एक दूसरे को चुम्बन कर रहे थे जैसे वास्तव में वह पति बीबी या घनिष्ठ प्रेमी हों।

मैं उन दोनों को देखता ही रहा। उस वक्त कुछ क्षणों के लिए मेरे मनमे जरा सी ईर्ष्या का भाव आया। इस तरह का उन्मत्त चुम्बन करने के बाद, जब मेरी बीबी ने मेरी और थोड़ा सा घबराते हुए देखा तो वह मेरे मन के भावों को शायद ताड़ गयी। वह तुरंत राज की बाँहों में से निकल कर मेरे पास आयी और मुझे अपनी बाँहों में लेनेके लिए मेरी और देखने लगी।

मैंने तुरंत ही उसे अपनी बाहों में लिया, तब उसने मेरे कान में कहा, “आप मेरे सर्वस्व हैं। मैं आप के बिना अधूरी हूँ और आपके बिना रहने का सोच भी नहीं सकती। आप दुनिया के सर्वोत्तम पति हो यह मैं निसंकोच कह सकती हूँ। आज मैं यह मानती हूँ की मेरे मन में राज के प्रति आकर्षण था। आपने शायद इसे भाँप लिया था। आज आपने मेरे और राज के शारीरिक सम्भोग की व्यवस्था करके उस को भी पूरा करने की कोशिश की, इसके लिए मैं वास्तव में आपकी ऋणी हूँ। यदि आप मुझे इसके लिये बाध्य न करते तो मैं कभी राज को अपने बदन को छूने भी नहीं देती। मैं आपकी थी, आपकी हूँ और हमेशा आपकी रहूंगी। इसको कोई भी व्यक्ति बदल नहीं सकता।”

तब राज मेरे पीछे आया और एक झटके में ही मेरे पाजामे का नाड़ा खोल कर उसे नीचे गिरा दिया। मैंने भी मेरा कुरता निकाल फेंका और मैं भी रुखसार और राज जैसे ही नंगा हो गया। मेरे नंगे होते ही मेरा लण्ड अपने बंधन में से बाहर कूद पड़ा।

 
वह अकड़ कर खड़ा था और मेरी बीबी की फुद्दी को चूमने के लिए उतावला हो ऐसे उसकी दिशा में इंगित कर रहा था। रुखसार ने अपने नित्य चुदसखा को अपने हाथ में लिया और उसे बड़े प्यार से सहलाने लगी।

तब मैंने रुखसार को राज की और धकेला और जब दोनों एक साथ हुए तो उनको एक और धक्का मार कर पलंग के ऊपर गिराया। गिरते हुए राज ने मेरी बाँह पकड़ी और मुझे भी अपने साथ खिंच लीया। हम तीनों धड़ाम से पलंग पर गिरे। मैं अपनी निष्ठावान और शर्मीली बीबी को मेरे ही घनिष्ठ दोस्त की बाहों मेरी मर्जी ही नहीं, मेरे आग्रह से नंगा लिपट ते हुए देख उन्मादित हो गया।

राज की दोनों टाँगे मेरी बीवी के ऊपर लिपटी हुयी थीं। मेरी बीबी उसमे जैसे समा गयी थी। राज का लण्ड रुखसार की फुद्दी पर रगड़ रहा था। ऐसे कड़क लण्ड को सम्हालना राज के लिए वास्तव में मुश्किल हो रहा होगा। रुखसार और राज एक दुसरेकी आहोश में चुम्बन कर रहे थे। रुखसार ने एक हाथ में उसका लण्ड पकड़ रखा था। उसका दुसरा हाथ मेरी और बढ़ा और मेर लण्ड को पकड़ा।

मेरी शर्मीली और रूढ़िवादी बीबी तब एक हाथ में मेरा और दूसरे हाथ में मेरे नजदीकी दोस्त राज का लण्ड अपने हाथ में पकड़ कर बड़े प्रेम से सहला रही थी। हम तीनों पूण रूप से नग्न हालात में थे और एक दूसरे को लिपटे हुए थे। रुखसार बीच बीच में राज के अंडकोष को अपने हाथों से इतमे प्यार से सहलाती थी की मैं जानता था की उस समय राज का हाल कैसा हो रहा होगा। रुखसार के हाथ में एक जादू था। वह मेरे एंडकोष को ऐसे सहलाती थी की मैं उस आनंद का कोई वर्णन कही कर सकता।

उधर राज और मेरी बीबी ऐसे चिपके थे जैसे अलग ही नहीं होंगे। रुखसार भी राज की बाँहों मैं ऐसे समा गयी थी के पता ही नहीं चलता था के वह गयी कहाँ। राज के हाथ रुखसार के नंगे पिछवाड़े को सहला रहे थे।

राज का हाथ बार बार रुखसार के कूल्हों को दबाता रहता था और उसकी उँगलियाँ कूल्हों के बीच वाली दरार में बार बार घुस कर रुखसार की गांड के छिद्र में घुसेड़ता रहता था।

इस से रुखसार और उत्तेजित हो कर गहरी साँसे लेकर, “राज यह क्या कर रहे हो? प्लीज मैं बहुत गरम हो रही हूँ। आहहह.. बोलती रहती थी। रुखसार की उत्तेजना उसकी धीमी सी कराहटों में मेहसूस हो रही थीं।

अब रुखसार इतनी गरम और उत्तेजित हो चुकी थी की वह कामोत्तेजना में कराह रही थी। उसने राज से अपने आप को अलग कर उसे अपनी टांगो के पास जाने का इशारा किया और उसका मुंह अपनी नाभि पर रखा। राज को और क्या चाहिए था। उसे अपनी कामाङ्गना (सेक्स पार्टनर) का आदेश जो मिला था। उसने रुखसार की पतली कमर पर अपना मुंह रख कर वह मेरी बीबी की नाभि को चाटने एवं चूमने लगा।

उसकी जीभ से लार रुखसार के पेट पर गिर रही थी, वह उसे चाटकर रुखसार के पेट पर अपना मुंह दबाकर उसे इतने प्यार से चुम्बन कर रहा था की मेरी बीबी की कामुक कराहटें रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं। अपना मुंह रुखसार के पेट, नाभि और नीचे वाले उभार पर इतने प्यार से चूमने से मेरी बीबी की कामाग्नि की आग और तेज़ी से भड़क रही था। मैं मान गया की आज तक मैंने इतने सालों मे अपनी बीबी के बदन को इस तरह नहीं चूमा था।

उसका हाथ अनायास ही मेरी बीबी की फुद्दी पर रुक गया। रुखसार की फुद्दी का उभार कितना सेक्सी है वह तो मैं जानता ही था। मुझे यह भी पता था की वहाँ हाथ रखने मात्र से मेरी अर्धांगिनी कैसे फुदकती है। राज के वहां छूते ही रुखसार अपने कूल्हों को गद्दे पर रगड़ ने लगी। राज अचानक रुक गया।

उसने थोड़ा ऊपर उठकर रुखसार से पूछा की क्या वह अपनी उंगली रुखसार की फुद्दी मैं डाल सकता है?

 
मेरी प्यारी पतिव्रता बीबी ने मेरी और देखा। वह शायद मेरी अनुमति चाह रही थी। तब मैंने कहा। “डार्लिंग, हमारा पति बीबी का रिश्ता अटूट और पवित्र है। जब तक हम एक दूसरे के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे तब तक इसे आंच नहीं आ सकती। मैं तुम्हारा पति आज तुम्हें राज के साथ पूरा सम्भोग करनेकी न सिर्फ इजाजत देता हूँ, मैं तुम्हे आग्रह करता हूँ के आज की रात तुम उसे अपने पति की तरह मानकर उसे सब शारीरिक सुख दो जो तुम दे सकती हो और उससे सारे शारीरिक सुख लो जो वह तुम्हे देना चाहता है।“

मेंरी बात सुन कर रुखसार और राज दोनोँ में अब जैसे नयी स्फूर्ति आ गयी। मर्यादा के बचे खुचे बंधन तब चकना चूर हो गए। अब राज ने रुखसार की फुद्दी पर अपना दायां हाथ रखा और वह फुद्दी के होठों को बड़े प्यार से सहलाने लगा।

मैं यह दृश्य देख कर अपने हर्षोन्माद पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था। रुखसार के लिए तो वह पहला मौका था जब एक पर पुरुष ने उस जगह पर उसे छुआ था। और जब राज ने उसके छोटे छिद्र में अपनी उंगली डाली तो रुखसार एकदम उछल पड़ी। वह राज की उँगलियों को अपने छोटे से प्रेम छिद्र से खेलते अनुभव कर पगला सी गयी थी।

राज ने जब रुखसार की फुद्दी के दोनों होठों को चौड़ा कर के देखा तो कुछ सोच में पड़ गया। शायद राज की बीबी डॉली का प्रेम छिद्र और योनि मार्ग खुला हुआ होगा, क्योंकि रुखसार का इतना छोटा सा छिद्र देख राज अनायास ही बोल उठा, “रुखसार तुम्हारा छिद्र तो एकदम छोटा सा है।

मैं तो जानता था की मेरी बीबी को सेक्स के लिए तैयार करने का इससे बेहतर कोई रास्ता नहीं था। जब रुखसार को चुदवाने सेक्स के लिए तैयार करना होता था, तब मैं उसकी फुद्दी में प्यार से अपनी एक उंगली डाल कर उसकी फुद्दी के होठ को अंदर से धीरे धीरे रगड़ कर उसे चुदवाने के लिए मजबूर कर देता था।

राज के उंगली डालने से जब रुखसार छटपटाई तो राज भी यह तरकीब समझ गया। वह बड़े प्यार से मेरी बीबी की फुद्दी में अपनी उंगली को वह जगह रगड़ रहा था जहाँ पर रगड़ने से रुखसार एकदम पागल सी होकर चुदवाने के लिए बेबस हो जाती थी।

रुखसार की बेबसी अब देखते ही बनती थी। राज के लगातार क्लाइटोरिस पर उंगली रगड़ते रहने से रुखसार कामुकता भरी आवाज में कराहने लगी। जैसे जैसे रुखसार की छटपटाहट और कामातुर आवाजें बढती गयी, राज अपनी उंगली उतनी ही ज्यादा फुर्ती से और रगड़ने लगा।

मेरी कामातुर बीबी तब राज से चुदवाने के लिए राज का हाथ पकड़ कर कहने लगी, “राज, यार यह मत करो। मैं पागल हुयी जा रही हूँ। मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही। आओ तुम जल्दी मुझ पर चढ़ जाओ और प्लीज मेरी चुदाई करो।”

पर राज तो रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उस रात जैसे उसने ठान ली थी की अब तो वह रुखसार को अपनी कामाङ्गिनी बना कर ही छोड़ेगा। वह रुखसार को इतना उत्तेजित करेगा की रुखसार आगे भी महीनों या सालों तक राज से चुदवाने के लिए तड़पती रहे।

राज के उंगली चोदन से रुखसार अपने आपको सम्हाल नहीं पा रही थी। रुखसार की साँसे जैसे फुफकार मार रही थी। बेड पर वह अपने कूल्हों को उछाल के फिर पटक रही थी। उसके दिल की धड़कन की रफ़्तार तेज हो गयी।

मैं जान गया के अब मेरी बीबी झड़ने वाली है। वह कामुकता के चरम पर पहुँच रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने स्तनोँ को चूसने और मलने के लिए इशारा करने लगी।

 
राज ने जब यह देखा तो उसने एक हाथ से रुखसार के दूध दबाने शुरूकर दिए। मैं भी उसके दूसरे स्तन पर चिपक गया और उसे चूसने और जोर से दबाने लगा। उस समय न सिर्फ मेरी बीबी, किन्तु हम तीनों कामुकता की ज्वाला में जल रहे थे। रुखसार तब झड़ने वाली थी।

फिर एक कराह और एक आह्ह की सिसकारी छोड़ते हुए रुखसार एकदम शिथिल होकर बिस्तर पर ढेर हो गयी। अब उसकी साँसें भी धीमी हो गयी। करीब पांच मिनट तक राज की ऊँगली से चुदने पर कामान्धता की चरम पर पहुँच ने के बाद उन्माद भरे नशे का वह जैसे आस्वादन कर रही थी।

कुछ क्षणों बाद उसने मेरे गले में अपनी बाहों की माला डाली और मरे होठों से होंठ मिलाकर बिना बोले उन्हें चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे इस नए अनुभव करवानेके लिए वह मेरे प्रति अपनी कृतज्ञता दर्शा रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरी प्यारी बीबी बैठी और मेरी और राज को और देख कर बोली, “समीर और राज। अब तक तुम दोनों ने मुझे खुश किया, अब मेरी बारी है।”

रुखसार ने यह कह कर हम दोनों को फर्श पर खड़ा किया और खुद अपने घुटनों को मोड़ कर अपने कूल्हों पर बैठ गयी। इस पोज़ में वह एकदम सेक्स की देवी लग रही थी। उसके उन्मत्त उरोज उसकी छाती पर ऐसे फैले थे जैसे गुलाबी रंग के दो गुब्बारे उसकी छाती पर चिपका दिये हों। रुखसार के स्तन एकदम उन्मत्त और गुब्बारे की तरह फुले हुए थे। जाहिर है की मेरा और राज का लण्ड पुरे तनाव में था।

रुखसार ने मेरी और देखा और हम दोनों का लण्ड अपने दोनों हाथों में लेकर धीरे धीरे सहलाने लगी। हालांकि हम दोनों का लण्ड उसके हाथोँ में था, मैं देख रहा था की उसका ध्यान राज के मोटे और लंबे लंड पर ज्यादा था। उसका इतना तना हुआ अकड़ा, मोटा और लंबा लंड को हाथ में पकड़ कर मुझसे नजरें बचा कर वह उसे घूर घूर कर देखती रहती थी।

थोड़ा सा सहलाने के बाद रुखसार ने मेरे लण्ड को अपने होठ से चूमा और अपनी जीभ से मेर लण्ड पर फैले हुए मेरे रास को चाटा और धीरे से उसके अग्र भाग को अपने होठों के बीच लिया। मेरे लण्ड के छोटे से हिस्से को मुंह में लेकर वह उसको ऊपर नीचे अपनी जीभ से रगड़ ने लगी। जब मेरी बीबी ज्यादा कामातुर हो जाती थी तो मुझे कभी कभी यह लाभ मिलता था।

मेरी आठ साल की शादी के जीवन में यह शायद तीसरा या चौथा मौका था जब मेरी बीबी ने मुझे यह सेवा दी। उधर वह दूसरे हाथ से राज के लण्ड को आराम से सहलाये जा रही थी।

थोड़ी देर मेरा लण्ड चूसने के बाद रुखसार ने अपना मुंह राज के लण्ड की और किया। धीरे से राज की और नजर उठाते हुए रुखसार ने राज के लण्ड को भी मेरी ही तरह चाटने लगी। राज स्तंभित होकर देखता ही रह गया।

उसकी स्वप्न सुंदरी आज उसके लण्ड का चुम्बन कर रही थी और उसे चूस रही थी यह उसके लिए अकल्पनीय सा था। रुखसार ने धीरे धीरे राज को लण्ड को मुंह में डालने की कोशिश की। पर उसका मुंह इतना खुल नहीं पा रहा था। तब रुखसार ने राज के लण्ड के सिर्फ अग्र भाग को थोड़ा सा मुंह में डाला और उसे चूमने एवं चाटने लगी।

धीरे धीरे वह उसमें इतनी मग्न हो गयी की राज के लण्ड को वह बार बार चूमने लगी और जैसे वह उसे छोड़ना ही नहीं चाह रही थी। राज के लिए यह बड़ी मुश्किल की घडी थी। वह उत्तेजना के शिखर और पहुँच रहा था। उसी उत्तेजना में उसने रुखसार का सर हाथ में लेकर अपना मोटा और लंबा लण्ड रुखसार के मुंह में घुसेड़ दिया।

रुखसार ने बरबस ही अपना मुंह और खोला और राज के लण्ड को अपने होठों से और अपनी जीभ से जैसे अपने मुंह में चुदवाने लगी। राज का बदन एकदम अकड़ गया था। इस हालत में वह अपने आप को रोक नहीं पाया और एक आह्हः… के साथ उसके लण्ड में से फव्वारा छूटा और उसका वीर्य निकल पड़ा और मेरी सुन्दर नग्न बीबी के मुंह को पूरा भर कर उसके नंगे बदन पर गिरा और फ़ैल गया।

तब मैं मेरी बीबी के स्तनों को मेरे दोनों हाथो से दबा रहा था। राज का गरमा गरम वीर्य मेरे हाथों को छुआ और मेरी बीबी के स्तनों पर जैसे कोई मलाई फैली हो ऐसे फ़ैल गया। वह मलाई धीरे धीरे और भी नीचे टपकने लगी। पता नहीं कितना माल राज ने मेरी बीबी के मुंह में भर डाला था।

राज के वीर्य स्खलन होने पर मैंने देखा तो रुखसार थोड़ी सी सकुचायी या निराश सी लग रही थी। उसने मेरी और देखा। मैं समझ गया की शायद उसे इसलिए निराशा हो रही होगी की अब राज तो झड़ गया। अब वह उसे चोद नहीं पायेगा।

 
मैं धीरेसे रुखसार के कान के पास गया और उसके कान में बोला, “डार्लिंग, निराश न हो। वह थोड़े ही अपनी बीबी को चोद रहा है, जो थक जाएगा या ऊब जाएगा? वह तो उसकी प्रेमिका को चोदने जा रहा है। यही तो अंतर है बीबी और प्रेमिका में। प्रेमिका के लिए उसका लण्ड हमेशा खड़ा रहेगा। उलटा एक बार झड़ जानेसे उसका स्टैमिना अब बढ़ जायेगा। राज अब तुम्हें आसानी से नहीं छोड़ेगा। वह अब तुम्हे दोगुना जोर से चोदेगा।”

मेरी इतने खुले से ऐसा कहने पर मेरी शर्मीली बीबी शर्म से लाल हो गयी।

राज हमारी काना फूसि देखरहा था। वह धीरेसे बोला, “कहीं तुम मियां बीबी मुझे फंसाने को कोई प्रोग्राम तो नहीं बना रहे हो ना?”

तब रुखसार अनायास ही बोल पड़ी, “हम तुम्हे क्या फंसायेंगे? तुम दोनों ने मिलकर तो आज मुझे फंसा दिया। ”

पर अब रुखसार को मेरी और से कोई संकोच नहीं रहा। रुखसार ने राज को अपनी बाँहों में लिया और उसके होठों पर चुबन की एक चुस्की लेकर अपने स्तनों को राज के मुंह में डाल दिया। वह उसे अपने मम्मो को चुसवाना चाहती थी। जैसे ही राज ने मेरी बीबी के मम्मो को चूसना शुरूकिया तो रुखसार के बदन में जोश भर गया और उसने अपने मुंह में मेरा लण्ड लिया।

वह मुझे यह महसूस नहीं होने देना चाहता थी, की वह मुझे भूलकर राज के पीछे लग गयी है। मैं भी रुखसार का सर पकड़ कर उस के मुंह को चोदने लगा। मुझे आज उसके मुंह को चोदने में बहुत आनंद आ रहा था, क्योंकि आज मैं अपनी बीबी की मुंह चुदाई मेरे दोस्त के सामने कर रहा था।

थोड़ी ही देर मैं मैं भी अपने जोश पर नियंत्रण नहीं रख पाया। मेरे मुंह से एक आह सी निकल गयी और मैंने मेरी बीबी के मुंह में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। रुखसार राज के वीर्य का स्वाद तो जानती ही थी। मेरी बीबी मेरा वीर्य भी पहले ही की तरह निगल गयी।

मेरे इतने सालों के वैवाहिक जीवन में यह पहली बार हुआ की मेरी बीबी मेरे वीर्य को निगल गयी हो। तब तक जब भी कोई ऐसा बिरला मौका होता था जब रुखसार मेर लण्ड को अपने मुंह में डालती थी तो या तो मैं थोड़ी देर के बाद मेरा लण्ड निकाल लेता था, या फिर मेरी बीबी मुझे मुंह में मेरा वीर्य नहीं छोड़ने की हिदायत देती थी। वह दिन मेरे लिए ऐतिहासिक था।

राज और मैं हम दोनों ही रुखसार के इस भाव प्रदर्शन से अभिभूत हो गए थे। मैं मेरी बीबी को सेक्स का ऐसे उन्मादअनुभव कराना चाहता था जो उसने शायद पहले कभी नहीं किया हो। मैंने राज के कानों में बोला, “क्यों न हम रुखसार को अब सेक्स का ऐसा अनुभव कराएं जो उसने पहले कभी किया ना हो?”

 
राज ने मेरी और देखा और मेरा हाथ अपने हाथ में ले कर सख्ती से पकड़ा और बोला, “मैं तुमसे पूरी तरह सहमत हूँ। मेरा भी उसमें एक स्वार्थ है। तुम्हारी अनुमति के बगैर वह पूरा नहीं हो सकता। मैं भी रुखसार को सेक्स की पराकाष्ठा पर ले जाना चाहता हूँ, जिससे वह मुझसे दुबारा सेक्स करने को इच्छुक हो। पर उसके लिए तुम्हारी अनुमति भी आवश्यक है। ”

तब मैंने उसे कहा, “मैं यह मानता हूँ की यदि हम सब साथ में एक दूसरे से कुछ भी न छुपाकर सेक्स करते हैं तो वह आनंद देता है। पर यदि चोरी से या छुपी कर सेक्स करते हैं तो परेशानी और ईर्ष्या का कारण बन जाता है। मैं चाहता हूँ की डॉली भी हमारे साथ शामिल हो। हम सब मिलकर एक दूसरे को एन्जॉय करें और करते रहें। ”

रुखसार ने हमारी और देखा। वह समझ गयी के मैं और राज उससे सेक्स करनें के बारे में ही कुछ बात कर रहें होंगे। मैंने उसकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए कहा, “राज तुम से बार बार सेक्स करने के बारें में पूछ रहा था। मैंने उसे कहा की अगर हम सब राजी हैं तो कोई रुकावट नहीं है।” रुखसार ने इस पर कोई टिपण्णी नहीं की।

पर रुखसार अब काफी खुल गयी थी। वह उठ खड़ी हुयी और हम दोनों के साथ पलंग पर वापस आ गयी। फिर फुर्ती से वह मेरी गोद मैं बैठ गयी। उसने अपने दोनों पाँव मेरी कमर के दोनों और फैला कर मुझे अपने पाँव में जकड लिया।

मेरे होठ से होठ मिलाकर बोली, “मेरे प्राणनाथ, डार्लिंग पूरी दुनिया में तुम शायद गिने चुने लोगों में से हो जो अपनी बीबी को दूसरे के साथ सेक्स करने लिए उकसाता है। पर अगर मुझे इसकी लत पड़ गयी तो तुम क्या करोगे? कहीं ऐसा न हो की मैं रोज किसी और के साथ सोना चाहूँ तो?” ऐसा बोल उसने मुझे पुरे जोश से चूमना शुरू किया।

तब राज उसके पीछे सरक कर पहुँच गया और मेरे और रुखसार के बीच में हाथ डालकर रुखसार की चूँचियों को सहलाने और दबाने लगा।

रुखसार ने राज का हाथ पकड़ा और राज को अपनी और खिंचा। राज रुखसार के कूल्हों से अपना लण्ड सटाकर बैठ गया। रुखसार की गरम फुद्दी का स्पर्श होते ही धीरे धीरे मेरा लण्ड कड़क होने लगा।

उसके वीर्य का फौवारा निकलने पर भी राज का लण्ड तो ढीला पड़ा ही न था। मैं राज की क्षमता देख हैरान रह गया। खैर, उस दिन का माहौल ही कुछ ऐसा था। मेरा लण्ड भी तो एक बार झड़ने के बाद फिर से कड़क हो गया था।

थोड़ी देर तक मेरी नंगी बीबी को चूमने के बाद मैंने उसे पलंग के किनारे सुलाया और उसे अपनी टांगें नीचे लटकाने को कहा। राज तो जैसे रुखसार से चिपका हुआ ही था।

जब रुखसार पलंग के किनारे अपनी टाँगे नीचे लटका के पलंग के ऊपर लेट गयी तो राज उसकी छाती पर अपना मुंह रख कर लेट गया। मैं झट से पलंग के नीचे उतरा और अपनी बीबी की टांगो को फैला कर उसकी फुद्दी चाटने लगा।

मेरी जीभ जैसे ही रुखसार की फुद्दी में घुसी की रुखसार छटपटाने लगी। मुझे पता था की रुखसार की फुद्दी चाटने से या फिर उसको उंगली से चोदने से वह इतनी कामान्ध हो जाती थी की तब वह बार बार मुझे चोदने के लिए गिड़गिड़ाती थी।

आज मैं उसे हम दोनों से चुदवाना चाहता था। इसके लिए हमें उसे इतना उत्तेजित करना था की वह शर्म के सारे बंधन तोड़ कर हम दोनों से चुदवाने के लिए बाध्य हो जाए।

 
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