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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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खैर ऐसे ही कुछ दिन चलता रहा। कुछ दिनों बाद राज का टूर का दौरा बढ़ने लगा। उनका काम का बोझ बढ़ गया। तब एक दिन मेरे पति राज ने मुझे कहा की यदि उसकी गैर हाजिरी में मुझे कोई भी दिक्कत होती है तो मैं भी समीर को बुला सकती हूँ तब मुझे जैसे सब कुछ मिल गया। राज उन दिनों टूर पर बहुत ज्यादा रहता था।

एक दिन रात को दस बजे मुझे ध्यान आया की हमारे बाथरूम का नलका ज्यादा ही लीक कर रहा था। मैं समीर को बुलाना तो चाहती थी पर बड़ा हिचकिचा रही थी।

इतनी रात को अकेले में घर बुलाना ठीक नहीं लग रहा था। पर क्या करती? मज़बूरी थी। यदि उस नलके को ठीक नहीं किया तो सुबह टंकी खाली हो सकती थी और फिर पुरे दिन पानी के बगैर क्या हाल हो सकता था वह सोचने से ही मैं घबरा गयी। फिर राज और समीर दोनों ने ही तो कहा था की मैं समीर को कभीभी बुला सकती थी? यह सोच कर मैंने समीर को रात करीब साढ़े दस बजे फ़ोन किया और समीर थोड़ी देर के बाद आया। वह कुछ चाभियाँ और स्क्रू ड्राइवर इत्यादि लेकर बाथरूम में घुसा।

उस रात बिना कुछ सोचे समझे मैं भी समीर के साथ बाथरूम में घुसी। मैं देखना चाहती थी की आखिर समस्या क्या है, और समीर उसे कैसे ठीक करता है। छोटे से बाथरूम मैं मुझे समीर से सटकर खड़े रहना पड़ा। उस की साँसे मैं महसूस कर रही थी। उसके थोडासा हिलने पर उसकी कोहनी मेरे स्तन पर टकरा जाती थी। मेरे बदन में अजीब सो रोमांच हो रहा था। कई महीनों या सालों के बाद मुझे ऐसा रोमांच महसूस हुआ। मेरे स्तनोँ में जैसे बिजली का करंट बह रहा हो ऐसा मुझे लग रहा था। मेरे बदन में एक के बाद एक सिहरन की मौजें उछाल मार रही थी।

तीन सालों से राज से मानसिक और शारीरिक उदासीनता के कारण मेरा अंतःस्राव रुक सा गया था। समीर की निकटता से जैसे सारा इकठ्ठा हुआ वह अंतःस्राव जो उदासीनता के बाँध के कारण सालों से रुंधित था उसमें दरार पड़ गई गयी और वह कोई न कोई रूप में बून्द बून्द रिसना शुरू हो गया। सालों के बाद फिरसे मेरे मनमें वह जातीयता की मचलन उजागर होने लगी।

मेरे यह भाव को आप अनैतिक कह सकते हैं। मैं भी समझती थी की ऐसा विचार करना भी पाप था। यह समझते हुए भी मैं रोमांच अनुभव कर रही थी। मैं शायद समीर को एक तरह से चुनौती दे रही थी। एक सुन्दर स्त्री जब अकेले में एक युवा पुरुष को अपने स्तनोँ को बार बार सहज रूप से छूने दे तो मतलब तो साफ़ ही है न?

तब अचानक समीर के हाथ से कुछ छूट कर नीचे गिर ने के कारण पाइप में से पानी का फव्वारा छूटा। पानी का जोश इतना तेज था की समीर और मैं दोनों ही देखते ही देखते पूरे भीग गए। मेरे हाल तो बिलकुल देखने लायक थे। उस रात को मैं सोने जा रही थी इस लिए मैंने मात्र मेरी नाइटी पहनी थी और अंदर कुछ नहीं पहना था। जब समीर आया तो मैंने अपने कंधे पर चुन्नी डाल दी थी, ताकि मैं अपने बड़े स्तनोँ को कुछ हद तक छिपा सकूँ।

पानी के फव्वारे के कारण न सिर्फ मेरी चुन्नी उड़ गयी, बल्कि मेरा पूरा बदन पानी में सराबोर भीग गया, और मेरी पतली नाइटी मेरे बदन पर ऐसे चिपक गयी की ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कोई कपडे पहने ही नहीं थे। मेरे पति के ख़ास दोस्त के सामने मैं जैसे नंगी खड़ी हुई थी। लाज से मैं कुछ भी बोलने लायक ही नहीं थी।

समीर का हाल देखते ही बनता था। उसके मुंह पर हवाइयां उड़ रहीं थीं। एक बुद्धू की तरह वह एकटक मेरे स्तनोँ को ताक रहा था। मैंने जब अपनी छाती को देखा तो समझी। मेरी निप्पले साफ़ साफ़ दिख रहीं थीं। ठण्ड और भीगने के कारण मेरी निप्पले खड़ी सख्त होगयी थीं। मेरे सख्त बड़े स्तन जैसे समीर को चुनौती दे रहे थे।

मैं जान गयी की अगर मैं थोड़ी देर और वहां उस हाल में खड़ी रही तो मेरी शामत आना तय था। समीर की नजरें मेरे बदन को ऐसे तक रही थीं जैसे एक भूखा प्यासा आदमी गरम, स्वादिष्ट और सुगन्धित पकवान को सामने सजाये हुए रखा देख कर ललचाता है।

मेरी जांघें पूरी नंगी दिख रही थीं। मेरी जांघों के बीच का उभार और मेरी योनि की मध्य रेखा पर फैले हलके बाल भी दिख रहे थे। मैं अपने नितम्ब नहीं देख पा रही थी। पर मुझे समीर की नजर से पता लग गया था की वह भी उसकी आँखों को ठंडक और लन्ड को तेज गर्मी दे रहे होंगे। अनायास ही मेरी नजर समीर के पाँव के बीच गयी। उसने भी पाजामे के नीचे कुछ नहीं पहना था। मुझे उसके पाँव के बीच उसका खड़ा लन्ड नजर आया।

 
मैं कुछ सोचूं उसके पहले समीर अपनी जगह से फव्वारे से बचने के लिए खिसका। मेरा पाँव पीछे रखी बाल्टी में फंस जाने की वजह से मैं लुढ़क कर समीर पर जा गिरी। मुझे गिरने से रोकने के लिए समीर ने अपनी बाँहोंसे मुझे पकड़ लिया और मैं जैसे ही फिसलने लगी तो मुझे कमर से पकड़ कर उठा लिया। पर गीले कपड़ों के कारण उसका हाथ मेरे स्तनों पर जा पहुंचा। स्वभावतः ही उसकी उंगलियां मेरे स्तनों को दबाने को मजबूर हो गयी। है राम, उस समय मेरी निप्पलें दबवाने और सहलवाने के लिए जैसे बेबाक थीं और पुरे अटेंशन में सख्त कड़क थीं। मेरी लंबी निप्पलों को जैसे समीर ने ताकत से अपनी उँगलियों में पिचकाया की मैं आधी उन्माद और आधे भय से कराह उठी, “आअह्ह्ह… ओह्ह ….”

समीर ने कस के मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया। सकड़ी जगह में समीर की और मेरी कमर जैसे ही एक दूसरे से सट गयी की उसका खड़ा कड़ा लन्ड मेरे पाँव के बीच टक्कर मारने लगा। तब मैं अपने आप को नियत्रण में रख सकने में असहाय पाने लगी और मैं इतनी डर गयी की एकदम वहाँ से भागी और बाहर निकल कर एक तौलिया बदन पर लपेट कर एक और तौलिया के साथ राज का एक जोड़ी कुर्ता पजामा समीर के लिए मेरे हाथों में लेकर बाथरूम के बाहर ही खड़ी रही।

समीर की वह प्यासी भूखी नजर मेरे ह्रदय को चिर गयी थी। मैं समीर को दोषी कैसे मानूँ? मेरा हाल भी तो बेहतर नहीं था। समीर का हाल देखकर मैं भी तो कामातुर हो रही थी। मेरा आधा मन मुझे उस पराये पुरुष की बाहोँ में जाने के लिए झकझोर रहा था और मेरा दिमाग वहाँ से दूर जाने के लिए कह रहा था। मैंने अपनी कामातुरता पर जैसे तैसे नियत्रण किया।

शायद मेरे बाहर की और भागने से समीर को होश आया की वह क्या करने जा रहा था। वह अंदर ही अंदर अपने आपको गुनाहगार महसूस करने लगा होगा क्योंकि वह अपना मुंह बाहर निकाल कर मुझसे माफ़ी मांगने लगा। वह कहने लगा, “डॉली, प्लीज मुझे माफ़ कर देना। मैं बहक गया था। प्लीज मुझे माफ़ कर दो और राज से मत कहना।”

मैंने जवाब में अपनी हंसी रोकते हुए कहा, “चलो भाई, बाहर निकलो। मैं राज से यह सब बता कर अपने लिए थोड़े ही मुसीबत खड़ी करुँगी? क्या मैं तुम्हें तौलिया दे दूँ?”

तब समीर ने कहा की वह नलके को ठीक कर के ही फिर कपडे बदलेगा। थोड़ी ही देर में समीर ने नलका ठीक किया। जैसे ही पानी का फव्वारा बंद हुआ, मैंने बाथरूम का दरवाजा खोला और समीर को तौलिया दिया। समीर ने मेरी और देखा तो उसका चेहरा देख कर कुछ क्षणों के लिए मुझे समीर पर तरस आ गया। मैं उसके मन के हाल भली भाँती समझ पा रही थी। यदि उस समय मेरी जगह रुखसार होती और समीर की जगह मेरा पति होता तो क्या होता यह मैं भली भाँती कल्पना कर सकती थी।

तब राज रुखसार को अपनी बाहों में ले लेता और रुखसार को उतना उकसाता, तर्क वितर्क करता और अपनी सारी शक्ति उस को मनाने में लगा देता। रुखसार राज की बांहों में आ ही जाती। आखिर में येनकेन प्रकारेण वह उसे चोदने के लिए राजी कर ही लेता और उसे चोदे बगैर छोड़ता नहीं। राज की स्त्रियों को ललचाने की क्षमता के बारे में मुझसे अधिक भला और कौन जानता था?

पर समीर राज नहीं था। समीर ने बाथरूम में ही अपने कपडे बदले और फिर बाहर आया। उस कुछ क्षणों की नाजुक अवस्था के बाद समीर ने मुझसे और किसी भी तरह का अनुग्रह नहीं किया। मुझे ऐसा लगा जैसे वह सोच रहा था की मैं उसे पसंद नहीं करती और इसी लिए बाथरूम से भाग निकली। उसका चेहरा निराशा से घिरा हुआ था। मेरे मन में उसका चेहरा देख एक टीस सी उठी। मेरा मन तो करता था की मैं उसकी बाहोँ में लिपट जाऊं और उसे कहूँ की मैं भी उसकी तरह ही सेक्स की भूखी और प्यार की प्यासी हूँ। पर मैंने अपने आप को सम्हाला। उस समय यदि मैं थोड़ी सी भी डगमगा जाती तो उस रात मेरा समीर से चुदना तय था। तब न मैं उसको रोक पाती न वह अपने आप पर नियत्रण कर पाता।

 
उस रात को मैं समीर की इतनी कृतज्ञ हो गयी की नलका ठीक होने के बाद मैंने उसे बिना सोचे समझे कहा, “मैं इतनी रात गए आपको डिस्टर्ब करने के लिए माफी चाहती हूँ। आपने आकर यह नलका ठीक कर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। पता नहीं मैं उसका ऋण कैसे चुका पाउंगी। समीर प्लीज आपका मैं यदि कोई भी काम कर सकूँ तो वह मेरा सौभाग्य होगा। मुझसे बिना झिझक आप कुछ भी मांगिये गा। मैं पीछे नहीं हटूंगी।“

उस समय मैं शायद अपने गुप्त मन में चाहती थी की समीर मुझे अपनी बाहों में जकड ले और मुझे छोड़े ही न। ऐसी हालात मैं अगर वह मुझको चोदने की इच्छा प्रगट करता तो मैं शायद मना नहीं कर पाती। बादमें मुझे बड़ा अफ़सोस होने लगा की मैं भी बड़ी बेवकूफ निकली की मैंने ऐसा वचन दे दिया। कहीं समीर ने गलत सोच लिया होता और वह मुझसे कुछ ऐसी वैसी मांग करता तो मैं क्या जवाब देती? उस समय मेरा हाल ऐसा था की यदि समीर कुछ भी कर लेता तो मैं विरोध न करती।

मेरी मनोदशा का यदि सही विश्लेषण करें तो पता नहीं पर कहीं न कहीं मुझे शायद मन ही मनमें यह भी अफ़सोस हुआ होगा की आखिर समीर ने मुझसे सेक्स करनेका वचन उसी समय क्यों नहीं माँगा?

जब समीर जाने लगा तब मैं उसके साथ साथ चली और चलते चलते जाने अनजाने (शायद जान बुझ कर) मेरे बूब्स उस की बाँहों से बार बार रगड़ने लगे। मैं जानती थी की समीर बेचारा मेरे स्तनों का स्पर्श पाने के लिए कितना उत्सुक था। उसके लिए मैं उतना तो कर ही सकती थी। यदि उसकी जगह मेरा ठर्कु पति होता तो पता नहीं वह क्या नहीं करता। परंतु समीर ने कुछ नहीं किया। तब मुझे ऐसा लगा की हर मर्द मेरे पति की तरह ठर्कु नहीं होता। मेरे मन में समीर के प्रति सम्मान और विश्वश्नियता का भाव हुआ।

समीर ने रुक कर कुछ खेद पूर्वक मुझे कहा, “इसमें उपकार की क्या बात है? यदि मेरे घर में ऐसे ही नलका खराब हुआ होता और यदि मेरी बीबी रुखसार मुझे उसे ठीक करने के लिए कहती तो मेरे उस नलके को ठीक करने पर क्या वह मेरा शुक्रिया करती? राज ने मुझे एक बार कहा था की हम दो कपल एक ही हैं। उसने कहा था की वह रुखसार और तुम में कोई फर्क नहीं समझता। वैसे ही मैं भी तुम में और रुखसार में फर्क न समझूँ। वह चाहता है की तुम और रुखसार भी राज और मुझ में कोई फर्क न समझो। अगर यह बात सही है तो फिर उपकार की कोई बात ही नहीं है। ”

मैं सोच में पड़ गई। भई इस का क्या मतलब था? क्या मैं समीर को अपना पति मान लूँ? क्या राज भी वैसा ही सोच रहा था? क्या मेरा पति राज, समीर की बीबी रुखसार को भी अपनी बीबी समझ ले? क्या इसका मतलब यह था की मेरे और रुखसार हम दोनों के दो पति थे और समीर और राज की हम दोनों पत्नियां? क्या मेरा पति राज और रुखसार का पति समीर यही प्लानिंग कर रहे थे? क्या ऐसा कह कर समीर मुझे यह सन्देश देना चाहता था की उस शाम मुझे बाथरूम में से नहीं भाग जाना चाहिए था? यह सोच कर मेरा माथा ठनका।

 
पर मुझे ऐसा लगा की शायद यह मेरे दिमाग का कीड़ा था। हमारे पति ऐसा नहीं सोच सकते। मैं राज को भली भांति जानती थी। वह तो मुझ पर हमेशा मालिकाना हक़ जताता था। उनका शायद कहने का मतलब यह होगा की हम एक दूसरे से इतने करीब हो गए थे की हमारा सम्बन्ध दोस्ती से भी बढ़ कर और करीब का निजी हो चुका था जिसका नाम देना मुश्किल था। शायद इसी कारण मुझे समीर को आधी रात को बुलाने में कोई परेशानी नहीं हुयी और वह आ भी गया। और रुखसार ने भी अपने पति को किसी और की बीबी से अकेले में आधी रात को मिलने के लिए इजाजत दे दी। यह सोच कर मैंने अपने आपको सांत्वना दी।

मैं उस समय की बातें सोचने लगी जब हमारी शादी हुई थी। हमारी शादी के बाद का समय मेरे लिए कोई स्वर्णिम युग से कम नहीं था। उन दिनों हम दोनों खूब चुदाई करते थे। राज का मोटा और लंबा लन्ड शुरू शुरू में मुझे बड़ा परेशान करता था। शादी के तुरंत बाद तो मेरी फुद्दी इतनी चुदाई की वजह से सूज जाती थी। उस वक्त मेरा पति राज अपने आप पर संयम रख कर मुझे ठीक होने का मौका देता था। राज मुझसे बहोत प्यार करता था। खैर वोह मुझे अब भी बहोत प्यार करता है। पर हमारी सेक्स लाइफ में जब मेरी बेटी गुन्नू पैदा हुई उस के बाद से थोड़ी दुरी जरूर पैदा हुई थी।

हमारी शादी के बाद से राज हमेशा मुझ पर मालिकाना हक़ रखता था। मुझे कोई घूर के देखे वह उसे पसंद नहीं था। वह मुझे अपनी निजी संपत्ति मानता था। यह मुझे भी अच्छा लगता था। मैं सिर्फ मेरे राज की बनकर रहना चाहती थी। हम दोनों ने शादी के तीन साल खूब मजे किये।

गुन्नू के जन्म के बाद से धीरे धीरे हम पति बीबी की दूरियां थोड़ी बढ़ने लगीं। साधारणतः स्त्री की प्रसव के बाद सेक्स में रूचि कम हो ही जाती है। मेरा सिझेरिअन हुआ था। और डॉक्टरों ने शायद आपरेशन के बाद मेरी योनि के छिद्र को थोड़ा ज्यादा ही बड़ा सील दिया था। उस कारण जब राज ने मुझे बेटी के प्रसव के बाद पहली बार चोदा तो उसे वह पहली चुदाई के जैसा आनंद नहीं आया।

तब से राज सेक्स करने से बचने लगे । मैं यह समझ गयी थी, पर क्या करती? अब हमारे सक्से में वह गर्माहट नहीं थी। जब मैं तैयार होती तो राज पोछे हट जाते और जब वह गरम होते तो थकान के कारण मैं बहाना बना लेती। और जब हम दोनों गर्म हो जाते तो मज़ा तो आता था पर वह बात नहीं बन पाती थी। इसका हमारे वैवाहिक जीवन पर विपरीत असर होने लगा। मैं तुरंत इस बात को समझ नहीं पायी।

जब हमारे जीवन में समीर और रुखसार आये और जब मैंने देखा की मेरा पति राज, समीर की बीबी रुखसार की और आकर्षित होने लगा था, तब धीरे धीरे मेरी समझ में आया की सेक्स की दुरी की वजह से हम पति बीबी में वह पहले वाली बात नहीं रही थी। पर तब शायद देर हो चुकी थी। मैं मन ही मन बड़ी दुखी रहने लगी। मैं तब मेरेपति का दोष भी नहीं निकाल सकती थी। मुझे मेरे पति राज की शादी के पहले दी हुई हिदायत याद आयी की अगर वह किसी और औरत को चोदे तो मैं बुरा न मानूँ। मैंने भी उसे शादी से पहले ही इजाजत दे दी थी। पर अब मैं उस पर अपना हक़ जमा रही थी। मैं उसका किसी भी औरत से बंटवारा नहीं करना चाहती थी। मेरे लिए सब असह्य होता जा रहा था।

मैं राज के चेहरे पर परिवर्तन देख रही थी। जब रुखसार ने राज से गिफ्ट न लेकर मेरे पति को एक करारा झटका दिया था उसके बाद राज कुछ मुरझा सा लग रहाथा। पर उसके एकाध दो दिन के बाद वह जैसे चहकने लगा। मैंने सोचा की क्या कहीं उसने रुखसार को पटा तो नहीं लिया? पर मेरे पास उसका जवाब नहीं था।

उस घटना के बाद से मैं ज्यादा ही व्यस्त हो गयी। बेटी जब प्ले स्कूल में जाने लगी तो मुझे उसे पढाई करानी पड़ती थी। उसको स्कूल में छोड़ के आना फिर लेने जाना इन कामों में से जैसे समय ही नहीं निकल पाता था। होली के त्यौहार में जब पापा और मम्मी ने हम दोनों को दिल्ली बुलाया तो राज ने मना कर दिया। उसे ऑफिस में ज्यादा काम था और उसे छुट्टी नहीं मिल पा रही थी। आखिर मैं कुछ दिनों के लिए अकेली ही अपने मायके गयी।

एक बार तो मुझे शक भी हुआ की कहीं वह रुखसार के साथ कुछ करने का गुप्त प्लान तो नहीं बना रहा था? हर बार होली में हम समीर और रुखसार से खूब होली खेलते थे। उस दिन राज रुखसार को रंग लगाने में मेरे और समीर के सामने थोड़ी ज्यादा ही छूट ले लेता था। पर तब भी कोई ऐसी बात नहीं हुई की मुझे या समीर को कोई शक का कारण नजर आए। हम सब उस बात को हंसी मजाक में टाल देते थे। समीर भी बेचारा मुझे रंग तो लगाता था और मुझे इधर उधर छूने की कोशिश भी करता था। पर शायद राज या रुखसार के डर के मारे, या फिर मैं उस से बच कर भाग निकलती थी उस के कारण कुछ ज्यादा कर नहीं पाता था।

मेरे होली के उपरान्त मायके से वापस आने के बाद मैं मेरे जीवन में कुछ अजीब से बदलाव अनुभव करने लगी। अचानक ही मेरे पति का मेरी और आकर्षण जैसे एकदम बढ़ गया. राज मेरी छोटी छोटी बातों का बड़ा ध्यान रखने लगा। मेरे साथ उसने ज्यादा वक्त देना शुरू कर दिया। मेरे लिए तो वह एक स्वप्न के समान था। मुझे ऐसे लगा की शायद होली में राज की शरारतों से तंग आकर रुखसार उसे एक और झटका दे दिया था और उसकी समझ मैं आ गया था की उसका मेरे बगैर चारा नहीं था। मेरी माँ वास्तव में ही सच बोल रही थी, की आखिर में पति को अपने घर में अपनी बीबी से ही सुकुन मिलता है।

पर मेरे मन में यह शंका घर कर गयी की हो न हो मेरे पति ने रुखसार को पटा ही लिया था और मौक़ा मिलते ही शायद उसे चोद भी दिया होगा। इसी कारण वह इतना खिल रहा था। समीर तो टूर पर रहता ही था। कहीं न कहीं कोई एक दिन मौका पाकर उसने बेचारी रुखसार को अपनी मीठी मीठी बातों में फांस ही लिया होगा। इसी कारण वह इतना फुदक रहा था और बड़ा खुश नजर आ रहा था। मुझे ज्यादा प्यार जता ने का कारण भी शायद यह रहा होगा की वह स्वयं को गुनहगार अनुभव कर रहा था और इसी लिए वह मुझे खुश रखनेकी कोशिश में लगा था।

मुझे ख़ुशी तो थी की राज मुझे ज्यादा समय और ध्यान दे रहा था पर मैं उसका अहसान नहीं उसका प्यार चाहती थी। इसी लिए मैं उसके साथ सहजता या आनंदित अनुभव नहीं कर पा रही थी। उसे भी शायद ऐसा ही लग रहा था जिसके कारण हम दोनों में करीबी आ नहीं पायी और मैं उससे सेक्स करना टालती रही।

बात यहीं ख़त्म नहीं थी। वह हमारी सेक्स लाइफ के बारे में भी बड़ा चिंतित लग रहा था। मेरे दिमाग में घर कर गयी थी की राज मुझसे प्यार के कारण नहीं पर उसने जो रुखसार के साथ कुकर्म किया होगा उस दोष के बोझ में दबे होने के कारण यह प्यार जता रहा था।

जब मुझसे रहा नहीं गया तब मैंने एक दिन उससे पूछा, ” डार्लिंग होली की छुट्टियां बिताकर लौटने के बाद मैं देख रही हूँ की तुम मुझसे ज्यादा ही प्यार जताने लगे हो। क्या बात है? क्या तुम मुझसे कुछ चाहते हो?”

मेरी बात सुनकर राज रिसिया से गए। नासमीरगी से मुंह बनाकर वह बोले, “कमाल है! बीबी से प्यार न करो तो मुसीबत और बीबी से प्यार करो तो मुसीबत! नहीं डार्लिंग ऐसी कोई बात नहीं है। बस अब मैं समझ रहा हूँ की अपनी बीबी ही अपनी सच्ची दोस्त और अंतरंग साथीदार है।”

मेरा मन किया की मैं मेरे पति से पूछूँ की क्या रुखसार ने कहीं उसे फिर से फटकार तो नहीं दिया? पर मैंने न पूछना ही बेहतर समझा। मैंने सोचा जो भी होगा अपने आप सामने आएगा या फिर राज स्वयं ही बतादेगे। मुझे थोड़ा इन्तेजार ही करना है।

 
थोड़ी देर बाद राज ने मेरे स्तनों को दबाते हुए पूछा, “डार्लिंग, मुझे समीर कह रहा था की तुमने उसे कहा की तुम समीर की ऋणी हो और वह जो कहेगा वह करोगी। क्या यह सच है?”

मैंने सकुचाते हुए कहा, “हाँ। सच तो है। समीर बेचारा आधी रात को मेरी मदद के लिए आया जो था। मैं वास्तव में उसके एहसान के बोझ के नीचे जैसे दब गयी थी।”

राज: “तो क्या समीर तुमसे जो कुछ कहेगा वह तुम करोगी?”

मैं, “हाँ क्यों नहीं करुँगी? आखिर उसके प्रति मेरा ऋण जो है। जब उसका मन करे अगर वह कुछ स्पेशल डिश खाना चाहता है तो मुझे उसे बनाके खिलाने में बड़ी ख़ुशी होगी। पर बात क्या है? शायद तुम कुछ कहना चाहते हो। क्या समीर ने तुमसे कुछ कहा?”

राज, “अगर समीर तुमसे कहे की वह तुम को चोदना चाहता है तो क्या तुम तैयार होओगी?”

मैं एकदम सोच में पड़गई। कहीं मेरे मन के एक कोने में समीर से सेक्स करने की इच्छा तो नहीं छुपी हुई थी? क्या इसी लिए मैंने जाने अनजाने में ऐसा वचन दे डाला था? या फिर क्या मैंने जान बुझ कर तो यह वचन नहीं दिया? क्या मेरे मन में यह बात थी की शायद समीर मुझसे सेक्स करने की मांग रख ही दे? तो फिर मुझे उस को मना करने का मौका ही न मिले? तब मुझे उससे सेक्स करने के लिए बाध्य होना ही पडेगा। और ऐसे हालात में मुझे उस बात पर कोई निर्णय नहीं लेना पड़ेगा तो फिर मेरा कोई कसूर तो न हुआ न? मैंने तो कोई शुरुआत नहीं की थीं न? मैंने अपने आप को सम्हालते हुए कहा, “यह तुम क्या पागल की तरह बक बक कर रहे हो? तुम्हारे मन में ऐसा विचार कैसे आया?”

राज, “डार्लिंग तुम तो वैसे ही नासमीर हो रही हो। तुम ज़रा सोचो। अगर कोई सुन्दर स्त्री कोई ऐसे पुरुष से की, जो उस स्त्री की और आकर्षित है, उस से यह कहे की वह पुरुष उसे जो भी कहेगा वह करेगी तो इसका अर्थ क्या होता है?” बातों बातों में मेरे पति ने मुझे कह ही दिया की समीर मेरी और आकर्षित था।

मैं मेरे पति की और देखने लगी। कहीं वह मुझ पर शक तो नहीं कर रहा था? मैंने घबराते हुए कहा, “पर राज, मेरा कहने का अर्थ यह तो नहीं था। क्या तुम कहीं मेरे और समीर के बारे में उल्टा पुल्टा तो नहीं सोच रहे हो?”

मेरे पति ने तुरंत मुझे अपनी बाहों में लेते हुए कहा, “जानू, मैं तुम्हारे बारे में कभी ऐसा सोच नहीं सकता। मुझे अपने आप पर भरोसा नहीं है, पर तुम पर पूरा भरोसा है। ”

फिर राज थोड़ी देर चुप रहा। फिर बोला, “डॉली, एक बार मात्र कल्पना करने के लिए ही यह मान लो की अगर सचमुच में समीर तुमसे सेक्स करने के लिए कहे तो तुम क्या करोगी?”

मेरे पति की बात सुनकर मैं आग बबुला हो गयी। राज क्या कहना चाहते थे? मैंने बड़े ही रूखे स्वर में राज से कहा, “पहली बात तो यह की समीर भला ऐसा क्यों कहेंगे? और अगर उन्हों ने ऐसा कह भी दिया तो क्या मैं मान जाउंगी? तुम पागल तो नहीं हो गए? मैं तुम्हें कोई भी हालात में धोका देनेका सोच भी नहीं सकती।”

राज मुझ से नजरें चुराते हुए बोले, “और अगर मैं कहूँ की मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं है तो?” मैं राज की और गौर से देखने लगी। मैं अपने पति का मन पढ़ने की कोशिश कर रही थी। मैंने पटाक से जवाब दिया, “तब भी नहीं। आपको भले ही आपत्ति न हो पर मैं फिर भी आपसे धोका नहीं कर सकती। ”

“और अगर मैं कहूँ की मैं चाहता हूँ की समीर और तुम एक दूसरे से सेक्स करो तो?” राज ने डरते हुए पूछा।

मेरे पतिदेव की बातें सुनकर मेरी आँखें फट गयी। आखिर वह क्या कहना चाहते थे?

“लगता है, तुम होश में नहीं हो। तुम्हें पता नहीं तुम क्या बक रहे हो। शादी के पहले से ही मैंने तुम्हें छूट दे रखी है की तुम चाहे जिससे सेक्स करो। पर मैंने तुम्हें कोई वचन नहीं दिया की मैं किसी और से सेक्स करुँगी। कहीं ऐसा तो नहीं की तुम मुझे समीर से सेक्स करने के लिए उकसा कर रुखसार को चोदने के लिए रास्ता बना रहे हो? अगर ऐसा है तो मैं तुम्हें रुखसार को चोदने की आजादी देती हूँ। मैं तुम्हें वचन देती हूँ की ऐसा होने पर मैं तुमसे कोई गिला शिकवा नहीं करुँगी। फिर तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो?” मैंने बड़े ही तेज शब्दों में मेरे पति को झाड़ दिया।

तब राज ने कहा, “डार्लिंग, एक बार सोचो। क्या तुम्हें समीर की बाहोंमें उस डांसमें समीर के साथ कमर से कमर और जाँघ से जाँघ रगड़ते हुए उत्तेजना का अनुभव नहीं हुआ था? सच बोलना?”

 
मैं चुप हो गयी और सोचने लगी। राज की बात पूरी गलत तो नहीं थी। पर हाँ, एक बात थी। मैं वास्तव में तो राज से बदला लेने की लिए ही समीर के साथ डांस करने के लिए राजी हुई थी। मैंने लपक कर राज से कहा, “देखो डार्लिंग, आज मैं तुम्हें सच कह रही हूँ। जब मैंने तुम्हें रुखसार के साथ करीबी से डांस करते हुए देखा तो मुझे बड़ा बुरा लगा। मैं अंदर ही अंदर आहत सी हो गयी थी और तुम पर गुस्सा भी थी। तब अचानक समीर ने डांस करनेके लिए मुझे आमंत्रित किया। मैंने उसके साथ इसलिए भी बदन रगड़कर डांस किया की मैं तुमसे प्रतिशोध लेना चाहती थी। अब अगर कोई मर्द आपको छुए और गुप्त अंगों को स्पर्श करे तो थोड़ी उत्तेजना तो हो ही जाती है। “

राज के मुंह से अनायास ही हंसी फुट पड़ी। उसने कहा, “देखो, तुमने खुद ही कहा न की इसलिए ‘भी’ तुमने समीर के साथ बदन से बदन रगड़ते हुए डांस किया? यहां ‘भी’ का मतलब होता है की आपके मनमें एक तरह की उत्सुकता थी की समीर के साथ डांस करना है। और साथ साथ प्रतिशोध भी लेना था। और तुमने माना भी की तुम्हे उत्तेजना हुई थी। सही या गलत? ”

मैं राज के साथ तर्क वितरक करने के मूड में नहीं थी। मैं सचमुच में गंभीरता पूर्वक सोचने लगी की राज आखिर मुझे क्या कहना चाहता है। मैंने दबे स्वर में पूछा, “मैंने उसे वचन जरूर दिया था पर ऐसा नहीं के वह मेरे साथ सेक्स करने की बात ही करने लगे। यह तो गलत बात हुई न? मैंने भोले पन में वचन दे दिया उसका समीर को फायदा नहीं उठाना चाहिए। अगर उसने ऐसा कुछ मांग लिया तो मैं उसे क्या जवाब दूंगी?” मैं थोड़ी देर चुप रही और फिर बोली, तुम ही बताओ, मुझे क्या करना चाहिए?”

राज ने कहा, “जरा सोचो। क्या समीर अगर तुमसे ऐसा कुछ मांग लेता है, तो क्या वह गलत है? उस रात को तुम्हारी करीबी, तुम्हारे शरीर का उसके बदन से बार बार टकराना, तुम्हारा सिर्फ गाउन में उसके सामने आना बगैरह यह दर्शाता है की तुम समीर को कुछ इशारा कर रही थी। और याद करो उस पार्टी में तुमने उससे अपना बदन रगड़ कर जो डांस किया था उससे वह क्या समझेगा? अगर वह तुमसे सेक्स करने की इच्छा बताये तो उसमें उसका कोई दोष कैसे भला? पर फिर भी उसने अपनी वह इच्छा जाहिर नहीं की। शायद इसका अर्थ यह है की वह तुमसे सेक्स करने की इच्छा रखता तो है, पर तुम्हारी सहमति मांगनें में झिझकता है।”

मेरे पति की बात सुनकर मैं उलझन में पड़ गयी। राज शायद सही कह रहा था। उसने सारी बातें खुल्ले में उजागर कर दी। झेंपी आवाज में मैंने मेरे पति से पूछा, “प्लीज, मुझे तुम भरमाओ मत। मुझे सही मार्ग दर्शन दो। मैं यह सब झंझट में नहीं पड़ना चाहती। मैं मात्र तुमसे ही सेक्स करना चाहती हूँ। तुम चाहे जिससे सेक्स करो। मुझे तुम्हारे अलावा किस और से सेक्स नहीं करना। तुम इस बारेमें सोचना भी मत।”

राज ने धीरे से कहा, “तुम तो परेशान हो गयी। चिंता मत करो। समीर ने अभी कुछ मांगा तो नहीं है न? फिर तुम चिंता क्यों कर रही हो? इस बारे में सोचो मत। जब मांगेगा तब देखेंगे।”वह बात वहीँ पर खत्म हो गयी।

पर वास्तव में वह बात मेरे मन में ख़तम नहीं हुई थी। मेरे मन में एक तरह से मंथन शुरू हो गया। मैं मेरे पति के प्रति पूर्णरूपेण निष्ठावान थी पर साथ साथ में कहीं न कहीं समीर के प्रति भी मेरे मन में एक कोमल भाव अंकुरित हो रहा था, उसकी अवमानना करना अपने आप से धोखा करने जैसा था।

दूसरे दिन सुबह राज जब ऑफिस गया और गुन्नू को मैं उसकी स्कूल बस में छोड़ कर वापस आयी तो चाय की प्याली ले कर बैठे बैठे मैं मन ही मन सोचने लगी की मुझे क्या हो रहा था?

खैर मुझे बहोत सारे काम निपटाने थे। मैं अपने घर काम में लग गयी। मैं अगले दो तीन घंटो में रसोई, सफाई, कपडे इत्यादि में ऐसी उलझ गयी की देखते ही देखते दोपहर हो गई। अभी गुन्नू को आनेमें कुछ वक्त था की राज का फ़ोन आया। उसने कहा की उसे अगले दिन टूर पर जाना था।

उसने धीरे से मुझे कहा की वह रात को मुझसे मौज करना चाहता है। हम फ़ोन पर बात करने के समय चुदाई के कार्यक्रम को मौज कहते थे। राज ने कहा वह एक ब्लू फिल्म लाया था और वह चाहता था की उस रात को हम दोनों वह ब्लू फिल्म को देखें और फिर इतनी चुदाई करें की उसकी एक हफ्ते की टूर तक वह नशा कायम रहे। राज की बात सुनकर मुझे भी अच्छा लगा।

शाम को ऑफिस से आते ही राज ने मुझसे कहा, “डार्लिंग, आज डिनर के बाद गुन्नू को जल्दी सुलाकर तुम अच्छी तरह नहाकर ड्राइंग रूम में आ जाना। आज हम खूब मस्ती करेंगे। मैं एक ख़ास ब्लू फिल्म लाया हूँ देखेंगे।”

मुझे यह सुनकर सुखद आश्चर्य हुआ। पर साथ साथ अचानक मेरे मन में शक की एक किरण उठी। आखिर बात क्या थी? क्यों अचानक वह मुझे इतना प्यार जता ने की कोशिश कर रहा था? मेरे पति आज कई सालोंके बाद इतने रोमांटिक मूड में नजर आये। कारण कुछ भी हो, मुझे अच्छा लगा। मैंने सर हिला कर हामी भरी और घर काम में लग गयी और राज अपने काम में व्यस्त हो गए।

रात को डिनर के बाद मैंने मेरी बच्ची को सुलाया और अच्छी तरह नहा कर मात्र एक नाईट गाउन पहन कर मैं जब ड्राइंग रूम में उपस्थित हुई तो राज सारे साजो सामान सजाकर तैयार थे। सेंटर टेबल पर ठंडी बियर और दो गिलास रखे थे। कमरे में मंद सा एक बिजली का बल्ब जल रहा था। राज ने फर्श पर ही दो गद्दे बिछा रखे थे जैसे रात हम वहीँ सोने वाले थे।

मेरे पहुँचते ही अपनी बाहेँ फैलाकर मेरे पति ने मुझे अपनी गोद में बिठाया। दिवार के सहारे बड़े तकिये पर अपनी पीठ टिका कर वह बैठे हुए थे। मेरे पहुँचते ही उन्होंने गिलास में बियर डालकर मुझे दी और हम दोनोँ ने “चियर्स” कह कर हलके घूंट पिए। उधर रिमोट से राज ने फिल्म चालूकर दी।

वह ब्लू फिल्म से ज्यादा एक कहानी आधरित सेक्सी फिल्म थी। एक भारतीय युगल पति नयन और बीबी नयना अपने दूसरे हनीमून में विदेश जाता है। वहां उनका परिचय एक दूसरे भारतीय युगल पति कमल और बीबी कमला के साथ होता है। तब पता चलता है की वह दोनों युगल भारत में एक ही शहर में रहते थे।

 


कमल ज्यादा ही स्मार्ट और दिल फेंक था। वह नयन की सुन्दर और सेक्सी बीबी नयना की और एकदम आकर्षित हो जाता है। हालांकि उसकी अपनी बीबी कमला भी खूबसूरत थी। कमल देखता है की नयन भी उसकी बीबी कमला को लालच भरी नजरोंसे घूरता रहता था पर बेचारा नयन संकोच के मारे अपनी इच्छा प्रकट नहीं कर पाता था।

पहले दिन थोड़ा घूमने के बाद दोपहर होटल में जब कमल यह देखता है की नयन और कमला एक दूसरे से काफी घुलमिल गए हैं, तब कमल प्रस्ताव रखता है की शाम को नयन कमला के साथ और कमल नयना के साथ बाहर घूमने जाएंगे। और देर शाम को होटल में सब लोग फिर साथ हो जाएंगे। दोनों पत्नियां थोड़ी हिचकिचाहट, थोड़े तर्क वितर्क और थोड़े मनाने मानने के बाद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती हैं।

दूसरे दिन शॉपिंग करते हुए और बसों में घूमते हुए कमल नयना को पटा लेता है और उसके साथ काफी चुम्मा चाटी और स्तनों को दबाना और चोरी छुपी एक दूसरे के पाँव के बीच में हाथ डाल कर एक दुसरेकी योनियों को छूना और सहलाना इत्यादि हो जाता है।

उधर कमला ज्यादा ही तेज थी। वह जानती थी की नयन उसको ताड़ रहा था, पर थोड़ा ज्यादा शर्मिला होने के कारण हिचकिचा रहा था। नयन और कमला समंदर के किनारे जाते हैं और वहां कमला नयन को खींचकर समंदर में दौड़ जाती है। वहां दोनों एक दूसरे को गीले कपड़ों में चूमते हैं। पानी के अंदर कमला नयन के अंडरवियर में हाथ डालकर उसका लन्ड बाहर निकाल कर उसे वहीँ पर वीर्यस्खलन करा देती है। नयन भी आखिर में कमला के पाँवों को खोलकर उसकी पैंटी हटा कर कमला की फुद्दी के समंदर के खारे पानी से मिले हुए रस को चाटता है।

राज और मैं, फर्श पर बिछे गद्दे पर बैठे थे और मैं राज की गोद में थी। मेरे पति का लन्ड खड़ा हो गया था जिसे मैं अपने कूल्हों के बीच की दरार में महसूस कर रही थी। वह फिल्म इतनी उत्तेजक थी की मैं अपने पाँवोँ में से बह रहे प्रवाही को राज से कैसे छुपाऊं यह उधेड़बुन में थी। पर राज जैसे मेरी उलझन समझ गए। उन्होंने मेरी पतले गाउन को ऊपर उठा कर मेरे पॉंव के बीच में हाथ डाला और बिना कुछ बोले मेरा प्रवाही मेरी जांघों पर प्रसार ने लगा।

उससे तो मैं और भी उत्तेजित हो गयी। मेरी योनि में से तो जैसे पिचकारी ही छूटने लगी। तब राज ने अपनी उंगली में थोड़ रस लिया और चाटने लगे। मैंने झुक कर मेरे पति की टांगों के बीच हाथ डाल कर उनका लन्ड मेरे हाथ में लिया। मैं उसे फूलता हुआ महसूस कर रही थी। जल्द ही वह एकदम कड़क और लंबा होगया। मैं मेरे पति की गोद में लेट गयी और मैंने राज का लन्ड मुंह में लिया और उसे चूमने और चूसने लगी।

राज ने मुझे लिटा कर मेरे गाउन को मेरी कमर पर ले गए। मैं नीचे से एकदम नंगी थी। वह मेरे पाँव के तलवे को चाटने लग गए। कई सालों के बाद मेरे पति ने मेरे पाँव को चाटा। धीरे धीरे वह चाटते चाटते ऊपर की और आरहे थे। मैं जानती थी की उनका निशाना कहाँ था। हालांकि मेरा ध्यान तो मेरे पति की प्यारी मीठी हरकतों पर ही था; पर मैं दिखावा कर रही थी जैसे मैं फिल्म को बड़े ध्यान से देख रही थी।

फिल्म चल रही थी और उसमें शाम को जब दोनों युगल मिलते हैं तो कहानी दूसरी ही होती है। अब पत्नियां भी दुसरेके पति से काफी निःसंकोच महसूस करती थीं, पर बाहर से जता नहीं रही थीं। दोनों युगल एक ही कमरे में जब शामको मिलते हैं तो वहां भी कमल नयना को साथ में बिठाता है और कमला नयन के साथ जा के बैठ जाती है। नयन टीवी चालू करता है तो उसपर कोई सेक्सी फिल्म चल रही थी। बातें करते करते धीरे धीरे दोनों युगल एक दूसरे की बीबियों को चूमते है, एक दूसरे के पॉंव के बीच हाथ डालकर एक दूसरे को महसूस करते हैं। तब कमल नयना को अपने कमरे में ले जाता है। नयना सहमी सहमी उसके साथ चल देती है क्योंकि वह देखती है की उसका पति नयन कमला से चिपका हुआ था और उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा था।

कमल नयना के बदन से प्यारसे एक के बाद एक कपडे उतारता है और नयना भी कमल को उसमें सहायता करने लगती है। थोड़ी ही देर में दोनों निर्वस्त्र हो कर एकदूसरे से जब चिपक जाते हैं उसी समय कमला और नयन उस कमरे में प्रवेश करते हैं। नयन अपनी बीबी नयना को कमल की बाहोंमें नंगी देखकर कमला को उठाकर उसी पलंग पर सुलाता है और उसके वस्र निकाल कर स्वयं भी निर्वस्त्र हो जाता है।

 
दोनों पति एक दूसरे के सामने ही दोनों बीबियों को मिलकर चोदते हैं और कभी अपनी बीबी तो कभी दूसरे की बीबी को चोदते हैं और ऐसे ही फिल्म समाप्त होती है।

जाहिर था की राज उस फिल्म को देख उत्तेजित हो गए थे और उन्होंने मुझे अपनी बाहोंमे जकड़ कर पूरी फिल्म देखी। मैं इतनी गरम हो गयी की मैंने राज के लन्ड को निकालकर अपने हाथ में लेकर जब सहलाने लगी तो राज ने मुझे थोड़ा सरकाया और पूछा, “डॉली तुम्हें यह फिल्म कैसी लगी?”

मैंने कहा “बहुत उत्तेजक थी। मेरी योनि में से तो पानी बहने लगा और थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। राज तुमने तो मुझे पागल कर दिया। पर सच में ऐसा थोड़े ही होता है?”

राज ने भोलेपन से पूछा, “क्या?”

मैंने कहा, “यह बीबियों की अदला बदली हमारे यहां थोड़े ही होती है?”

तब राज ने कहा, “एक बात बताओ। जब मैं किसीकी बीबी को चोदता हूँ तो जाहिर है की वह बीबी तो एक गैर मर्द से चुद गयी। हो सकता है उसका पति भी किसी न किसी की बीबी को चोदता ही होगा। यह तो होता है न? मैं तुम्हें एक बात बताता हूँ। हमारी कॉलोनी में शायद ही कोई बीबी ऐसी होगी जिसे किसी और ने नहीं चोदा होगा। हाँ कुछ ऐसी बदसूरत बीबियाँ हो भी सकती है, जो किसी गैर मर्द को आकर्षित न कर पाए।”

मुझे मेरे पति की बात बिलकुल नहीं भाई। यह सुनकर मेरा दिमाग छटका, ?मैंने पूछा, “भाई मैंने तो आज तक तुम्हारे अलावा किसीसे सेक्स नहीं किया। क्या मैं बदसूरत या अनाकर्षक हूँ?”

तब राज ने अपने आप को सम्हालते हुए कहा, “मेरा कहने का मकसद यह नहीं था। मैं यह कहना चाह रहा था की अब मर्द और औरत में समानता का युग है। अगर पति कोई दूसरी औरत से सेक्स कर सकता है तो बीबी क्यों नहीं कर सकती। और अगर यह एक दूसरे की मर्जी से बिना कोई मन मुटाव से होता है तो इस में गलत भी क्या है? पति बीबी के सम्बन्ध तो इससे बिगड़ने के बजाय और भी अच्छे हो जायेंगे। क्या मैं गलत कह रहा हूँ?

मैं बड़ी दुविधा में पड़ गई। राज कह तो सच रहे थे। पर अगर में खुल के हाँ कहूँ तो कहीं वह गलत तो नहीं समझ लेंगे? मैंने बुझे से स्वर में कहा, “बात तो ठीक है, पर क्या वास्तव में कोई पति अपनी बीबी को दूसरे मर्द से चुदते देख सकता है? क्या उसे जलन नहीं होगी?”

मेरे पति के पास उसका उत्तर तैयार था। वह बोले, “बिलकुल नहीं। क्योंकि उसकी बीबी उसे धोखा थोड़े ही दे रही थी? पति तो खुद ही अपनी बीबी को दूसरे मर्द से चुदवाने के लिए राजी कर रहा था। और फिर जब पति अगर दूसरी औरत को चोदता है और अपनी बीबी को भी दूसरे चुदवाने के लिए तैयार है तो फिर वह बुरा क्यों मानेगा?”

मेरी टांगों के बीच में से तो जैसे झरना बह रहा था। मेरी स्थिति बड़ी उन्मादक हो रही थी। मेरे पति मुझे ऐसी बातें करके दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए उकसा रहे थे, या फिर मुझे सेक्स करने के लिए तैयार कर रहे थे यह मेरी समझ में नहीं आया। पर उस समय मैं मेरी योनि मैं हो रही उन्मादित चंचलता और कामुकता से तिलमिला रही थी। मुझे तुरन्त ही मेरी फुद्दी में एक लन्ड चाहिए था। मैंने बहकी आवाज में राज से कहा, “अरे तुम मुझे इतना उकसा क्यों रहे हो? कहीं मैं बहक न जाऊं। अब तुम मुझे और मत तड़पाओ औ और जैसा तुम कहते हो न, मुझे खूब चोदो।”

राज तैयार ही था। उसने मेरा गाउन मेरे सर के उपरसे हटा कर मुझे पूरी नंगी कर दिया। और फिर खुद अपने कपडे उतार कर मेरे सामने नंग धंडंग खड़ा होगया। उसका मोटा लंबा लन्ड ऐसे उठा हुआ था जैसे वह छत की और देख रहा हो।

 


मेरे दोनों पॉंव खोलकर वह मेरे स्तनों को दोनों हाथों से भींचने लगे। उन्होंने अपना लन्ड मेरी फुद्दी की मध्यांक रेखा पर रखा और उसे रगड़ने लगे। मैं अपना आपा खो रही थी और राज के लन्ड का मेरे अंदर प्रवेश का बेसब्री से इन्तेजार कर रही थी। तभी उन्होंने उसे थोड़ा अंदर घुसेड़ा और रुक गये। मैंने अधीर होकर पूछा क्या बात है? तो वह बोले, “मेरी बड़ी इच्छा है की हम भी कभी दूसरों के सामने एक ही कमरे में एक ही पलंग पर सेक्स करें। क्या तुम भी ऐसे ही दूसरों के सामने मुझसे कभी चुदवाओगी?”

मैं उनका लन्ड लेने के लिए तड़प रही थी, पर राज मुझे बस तड़पाए जा रहा था। पर फिर भी मैं अड़ी रही मैंने कहा, “अरे भाई ठीक है, पर किस के सामने? आखिर तुम मुझसे क्या करवाना चाहते हो? क्या तुम ऐसे वैसों के सामने मुझे नंगी करना चाहते हो? और तुम मुझे क्यों तड़पा रहे हो?”

राज ने कहा, “पहले यह वचन दो की हम भी यह फिल्म की तरह एक दूसरे कपल के सामने सेक्स करेंगे न? बोलो हाँ या ना?”

मेरा पति मुझे पागल कर रहा था। एक और वह मेरी फुद्दी की दरार पर अपना लन्ड रगड़ रहा था और मुझे उकसा रहा था, दूसरी और मुझे ऐसी कामुकता भरी बातें सुनाकर और तिलमिला रहा था। मैं पति से चुदवाने को उतावली हो रही थी, पर जल्द बाजी में कोई गलत वचन न दूँ यह चिंता भी थी। क्योंकि मैं जानती थी की एक बार मैंने अगर हाँ कह दिया तो फिर राज वह मुझसे करवाकर ही रहेगा।

राज का मुझ पर ऐसा दबाव देनेसे मैं झल्ला कर बोली, “राज, तुम मुझे क्या समझते हो? क्या मैं कोई ऐसी वैसी औरत हूँ को जो हर किसीके सामने अपनी टांगें खोल दूंगी? मैंने तुम्हे जिस किसी औरत के साथ मौज करनी है तो करने की इजाजत दे रक्खी है। पर मुझे बख्शो और मेरे आगे फिर कभी ऐसी बात मत करना।”

राज की शक्ल रोनी सी हो गयी। वह बड़ा दुखी हो गया था। उन्हें दुखी देख कर मैं भी दुखी हो गयी और राज को देख कर बोली, “डार्लिंग मैं क्या करूँ? दूसरे मर्द के साथ थोड़ी सी छेड़छाड़ या थोड़ी मस्ती चलती है। पर सेक्स? यह तो मैं सोच भी नहीं सकती।

बस मेरा इतना ही कहना था की राज दूसरी और करवट बदल कर सो गए। वह उत्तेजना और उन्माद का माहौल एकदम ख़त्म हो गया और वही पुरानी दुरी हम दोनों के बीच आ खड़ी हो गयी। मैं मन ही मन बड़ी दुखी हो रही थी की मैंने भी कहाँ मेरे पति का मूड खराब कर दिया। उस रात को उन्होंने क्या प्लानिंग की थी की हम देर रात तक चुदाई करेंगे। पर मेरी बात ने जैसे राज के मूड पर ठंडा पानि फेंक दिया।

मेरा मन किया की मैं राज से कहूँ की अगर उसका बहुत मन दुःख हो रहा हो तो मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती हूँ। पर मैं कुछ बोल नहीं पायी और चुपचाप सो गयी।

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उस रात मैं सो न सकी। सारी रात मैं राज की बातों के बारेमें ही सोचती रही। राज की बातों की गहराई को समझने की कोशिश करने लगी। पता ही नहीं चला की कब मैं सो गयी और कब सुबह हो गयी। पर मस्तिष्क में तब भी वही बात घूम रही थी।

सारी बात तब शुरू हुई जब राज समीर को दिए हुए वचन के बारे में मुझसे पूछताछ करने लगा। जरूर मेरा पति मुझसे कुछ कहना चाहता था। अचानक सारी बात मेरी समझ में आ गयी। अब मैं एक और एक दो समझ गयी और तब मुझे गुस्सा भी आया, दुःख भी हुआ और मेरे पति की और सहानुभूति भी हुई। मेरा पति मुझे उकसा रहा था ताकि मैं समीर से सेक्स करूँ जिससे मरे पति को रुखसार से सेक्स करने का लाइसेंस मिल जाय।

 
सारी बात तब शुरू हुई जब राज समीर को दिए हुए वचन के बारे में मुझसे पूछताछ करने लगा। जरूर मेरा पति मुझसे कुछ कहना चाहता था। अचानक सारी बात मेरी समझ में आ गयी। अब मैं एक और एक दो समझ गयी और तब मुझे गुस्सा भी आया, दुःख भी हुआ और मेरे पति की और सहानुभूति भी हुई। मेरा पति मुझे उकसा रहा था ताकि मैं समीर से सेक्स करूँ जिससे मरे पति को रुखसार से सेक्स करने का लाइसेंस मिल जाय।

बापरे! मेरे पति कितनी गहरी चाल चल रहे थे! मैं समझ गयी की होली में मेरे न रहते हुए बहुत कुछ हो चुका था। इसीलिए मेरे पति के स्वभाव में इतना अधिक परिवर्तन आया था। पर तब भी मैं वास्तव में क्या हुआ था यह नहीं समझ पायी। पर फिर मैं सोचने लगी की मैंने तो मेरे पति को शादी से पहले ही इजाजत देदी थी की वह किसी और स्त्री को चोदे तो मुझे कोई एतसमीर नहीं होगा। फिर उन्हें क्या जरुरत थी मुझको उकसाने की की मैं किसी से चुदवाऊँ? इसका मेरे पास कोई जवाब न था।

तब अचानक मेरे मन में इसउधेड़बुन का हल निकालने का एक विचार आया। क्यों न मैं इसके बारेमें रुखसार से अकेले में बात करूँ? रुखसार बड़ी समझदार और सुलझी हुई औरत थी। वह जरूर मुझे सही मार्गदर्शन देगी। मैं ऐसा सोच ही रही थी की रुखसार का ही फ़ोन आ गया। मुझे बड़ा ताजुब हुआ। कैसे हम एक दूसरे की मन बात जान गए थे।

फ़ोन पर हमारी चर्चा कुछ इस प्रकार रही।

मैं, “हेल्लो! हाँ रुखसार। कैसी हो? सब ठीक ठाक तो हैं? कैसे फ़ोन किया?”

रुखसार, “बस सोचा, काफी समयसे तुमसे अकेले में बात नहीं हुई। बहुत मन कर रहा था। वैसे तो हम मिलते रहते हैं, पर पिछले कुछ दिनों से मिलना नहीं हुआ। काम से थोड़ा फारिग हुई तो सोचा चलो आज तुमसे बात करती हूँ।”

मैं, “बहुत अच्छा किया। मैं भी तुमसे बात करने की सोच रही थी। ”

रुखसार, “क्या बात है? बोलो। कुछ ख़ास बात है?”

मैं, ” हाँ, ….. नहीं कोई ख़ास बात नहीं है, बस ऐसे ही।”

रुखसार, “देखो डॉली तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो। बोलो, क्या बात है?”

रुखसार की इतनी प्यार भरी बात सुनकर मुझसे रहा नहीं गया। मेरी धीरज का बाँध जैसे टूट गया और मैं बच्चे की तरह फ़ोन पर ही फफक फफक कर रोने लगी।”

उस तरफ लगता था जैसे मेरा रोना सुनकर रुखसार घभड़ा कर बोली, “अरे, भाभी जान, बात क्या है? कोई बड़ी मुसीबत आन पड़ी है क्या? बताती क्यों नहीं?”

मैंने अपने आप को सम्हालते हुए कहा, “ऐसी कोई ख़ास बात नहीं। बस ऐसे ही। ”

रुखसार, “ऐसे ही कोई रोता है क्या? रुको मैं अभी इसी वक्त आ रही हूँ। मुझे भी तुमसे कुछ बात करनी है।”

देखते हीदेखते रुखसार दरवाजे पर थी। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला की नेना ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और बोली, ” एक साल ही सही, पर बड़ी हूँ। इस नाते से तुम मेरी छोटी बहन हुई। अपनी बहन से कोई भला कुछ भी छुपाता है क्या?”

मैंने अपने आप को सम्हाला और मैं रसोई में से चाय और कुछ नाश्ता ले आयी। रुखसार ने मुझे ठीक से बिठाया मेरा एक हाथ अपने हाथों में लिया और उसे सहलाने लगी और बोली, “अपनी बड़ी बहन से बताओगी नहीं की क्या बात है?”

 
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