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एक मस्त लम्बी कहानी .......!complete

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. जब मैं सानिया के मुँह में झड़ रहा था तभी जमील घर के भीतर से बोला-"अब जल्दी खत्म करो तुम लोग, मुझे जरा बाहर जाना है, एक काम है।" उसके आवाज में अब वैसी नाराजगी नहीं थी जैसी नाराजगी देखा कर वह वहाँ से हटा था। असल में हम बाहर वाले कमरे में ही चुदाई का खेल खेल रहे थे और घर के बाहर जाने के लिए उस रुम में आना ही होता। मैं सानिया की मुँह में पिचकारी छोड़ते हुए कहा, "खत्म हो गया है यार, पिचकारी छुट गयी। जाना चाहते हो तो जाओ, रुम में थोड़ा नजर फ़ेर लेना अगर अधनंगा बदन न देखना हो तो।" सानिया अपना हाथ अपने कपड़े की तरफ़ बढ़ाई, तो मैंने उसका हाथ थाम लिया और इशारे से कहा की वो मेरा लन्ड अपने मुँह से साफ़ करे। सानिया समझ गयी और फ़िर से अपना चेहरा मेरे लन्ड की तरफ़ कर दी। मैं अब खड़ा हो गया था, और अपनी कमर पर हाथ रखे था। सानिया जमीन पर घुटने के बल बैठी थी। दोनों बिल्कुल नंग-धड़ंग थे। तभी जमील कमरे में आया। सानिया अपने दाहिने हाथ से मेरे फ़ुले हुए मर्दाने गोलों को सहला रही थी और अपने जीभ से मेरे लन्ड से लिपसे सफ़ेद माल को चाट रही थी। मैं आराम से कमर पर हाथ रख कर उससे लन्ड चटवा रहा था। अपने अब्बा को सामने देख कर वो लन्ड मुँह के भीतर ले ली, और फ़िर हाथ बढ़ा कर अपने कपड़े से अपने चूत को ढ़क लिया। जमील ने भरपुर नजरों से हमें देखा और हल्के से कहा-"बेहया लड़की..."। मैं हँस दिया और अपना लन्ड सानिया की मुँह से खींच लिया और झुक कर सानिया के होठ पर अपने होठ रख दिए। उसके होठों पर मेरे लन्ड का माल लिपसा हुआ था, पर मुझे इसकी परवाह अब नहीं थी। जमील एक पल सब देखा और फ़िर घर से बाहर निकल गया। सानिया नंगे ही उठी और पानी लाने चली गयी। पानी पीने के बाद हमने कपड़े पहन लिए। फ़िर मैंने मोबाईल पर जमील को फ़ोन किया कि वो कहाँ है। तब उसने कहा की उसका मन बहुत बेचैन हो गया था मेरे और सानिया की करतुत देख कर और इसीलिए वो ऐसे हीं टहलने निकल गया है। मैंने उसको कहा कि अब वो आ जाए, मैं अपने घर जा रहा हूँ। एक और ग्लास पानी पी कर मैं निकल गया। बाद में सानिया ने मुझे बताया कि जमील करीब १५ मिनट बाद आया, वो चुप-चाप था।
 
.सानिया ने खाना लगाया तो दोनों साथ हीं खाए। उसी डायनिंग टेबुल पर उसने सानिया से पहली बार खुल कर बात की और कहा कि सानिया को ऐसे किसी से नहीं चुदना चाहिए। सानिया को भी अब कोई झिझक रह नहीं गयी थी। उसने खुल कर कह दिया कि अब वो जवान है और जवानी का मजा लुटना चाहती है। उसने आगे कहा कि जब जमील इस उम्र में कुँवारी लड़की को चोदने जा सकता है तो क्या वो अपनी मर्जी से महिने में दो-चार बार नहीं चुदा सकती। उसके शब्द थे, "अब्बू, अब जब मुझे पता चल गया है कि सेक्स में कितना और कैसा मजा है तो अब मैं नहीं रुक सकती इस मजा को लेने से। जब तक नहीं चुदी थी तब कि बात और थी। पर अब जब मैं चुदाने लगी हूँ तो चुदाते समय मिलने वाली मदहोशी का मजा लेना नहीं छोड़ सकती। अब्बू, आप तो मेरे से बड़े हैं, आपको तो पता है कि कैसा मजा है सेक्स में। सच कहूँ तो अब्बू, जैसे आपलोग को अलग-अलग लड़की के बदन से अलग-अलग मजा मिलता है वैसे हीं एक लड़की को भी तो अलग-अलग मर्द के लन्ड से अलग-अलग मजा आता है। दो-एक साल साल में निकाह के बाद पता नहीं कैसा घर मिले, कितना पर्दा करना पड़े, इसीलिए अभी हीं जितना मजा ले सकती हूँ लेना चाहती हूँ।" जमील कई तरह से सानिया को समझा रहा था और सानिया थी कि मान नहीं रही थी कि वो गलत है। सानिया हमेशा जमील को आईना दिखा देती कि कैसे जमील नयी लड़्की से सेक्स करके मजा लेता रहा है इन दिनों। जमील के पास सानिया के ऐसे साफ़ बोल का कोई जवाब नहीं था। वो समझ गया कि अब सानिया नहीं रुकेगी। सानिया भी जोश में कह दी-"देखिए अब्बू, अब जो जैसे हो रहा है होने दीजिए, मैं ध्यान रखुँगी कि कोई गड़बड़ न हो। अगर अब आप मुझे रोकेंगे तो, मैं दो-चार होटल में जा कर अपनी फ़ोटो रख दुँगी कि मैं फ़्री में चुदने को तैयार हूँ। फ़िर देखना कैसे इस घर के दरवाजे पर लाईन लगेगी।" जमील थोड़ा उदास हो चुप हो गया तो सानिया उसको खुश करने के लिए उसकी गोदी में बैठ गयी। जमील अब भी चुप था तो सानिया ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी दाहिनी चुची पर रख दिया और खुद उसके होठ को चुम ली। वो जमील को खुल कर बोली-"अब्बू, अगर आप मुझें चोदना चाहते हों तो चोद लीजिए ना। मैं आपको न नहीं करुँगी, बल्कि मुझे खुशी होगी। मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ। एक बार मुझे मौका दीजिए, दुनिया कि कितनी भी रन्ड़ी आप चोदे हों, मैं उन सब से बीस रहुँगी, आप देख लीजिएगा। क्या मैं जवान नहीं हूँ कि सेक्सी नहीं हूँ या सुन्दर नहीं हूँ? मेरा पुरा नंगा बदन आज आपने देखा, क्या वो किसी से कम है? बोलिए अब्बू।" और उसने एक गहरा चुम्बन जमील के होठ पर जड़ दिया। जमील अब एक बार गौर से सानिया को देखा। सच तो ये था कि जमील को सानिया में माल दिखती तो थी, पर उसके दिल में कुंठा थी कि ये मेरी बेटी है, इसको कैसे चोदुँ, पर अब इतना कुछ होने और देखने के बाद जमील का मन भी डोलने लगा था। उसने एक गहरी नजर से सानिया को देखा और कहा वो सब ठीक है बेटा पर मुझे थोड़ा सोचने का वक्त दो। फ़िर वो खुद इस बार सानिया पर झुका और एक हल्का चुम्बन उसकी गुलाबी होंठ पर जड़ दिया और बेसिन पर हाथ धोने चला गया। सानिया इतने से हीं खुश हो गयी। उसे पक्का यकिन हो गया कि अब उसकी बूर को उसका बाप जरुर चोदेगा।
 
. अगली सुबह जब सानिया चाय ले कर जमील के कमरे में गयी तब वो बिल्कुल नंग-धड़ंग थी। सुबह-सुबह जमील हुस्न की हसीन मल्लिका का यह रुप देख चकरा गया फ़िर संभल कर बोला, "सानिया बेटा ऐसे मेरे सामने मत आया करो, बड़ा अजीब लगता है। वैसे भी अभी थोड़ी देर में कामवाली बाई आएगी और तुम ऐसे बनी हुई हो।" सानिया ने कहा, "असल मे मैं अपने अब्बू की सुबह हसीन बनाना चाहती थी इसीलिए आपको अपना बदन ऐसे दिखाई। अब कपड़ा पहन लुँगी" कहते हुए उसने जमील का एक शर्ट उसी कमरे के वार्ड्रोब से ले कर पहने ली, जो उसकी आधी जाँघ तक पहुँच कर खड़े रहने पर उसकी चूत को ढ़क रहा था। फ़िर वो जब चाय पीने के लिए जमील के बिस्तर पर उसके सामने पालथी मार कर बैठ रही थी तो उसने देखा की जमील की नजर उसकी दोनों जाँघ के बीच फ़िक्स थी। वह अब अपनी जवान बेटी की बूर के दर्शन करना चाह रहा था। सानिया को खुशी हुई कि उसके अब कामयाबी मिल रही थी। उसका बाप अब उसके जवान बदन में दिलचस्पी लेने लगा था। वह चाय पीते हुए अपने एक पैर को अपने छाती की ओर मोड़ लिया, दुसरा अभी भी बिस्तर पर वैसे हीं था जैसे पालथी मार कर बैठते समय था। इस तरह से जमील को लगातार अपनी बेटी की चूत दिख रही थी। जमील की नजर अपनी चूत पर फ़िक्स देख सानिया बोली, "ऐसे अगर आप दिन की शुरुआत करेंगे हो तो दिन अच्छा गुजरेगा।" जमील अपनी बेटी की बात सुन कर हँसा और कहा, "कब तक, जब तुम्हारी अम्मी आ जाएगी तब कैसे ऐसे दिन की शुरुआत करा पाओगी।" सानिया समझ गयी की अब उसके अब्बू रोज़ अपने दिन की शुरुआत ऐसे हीं करने की चाह रखते हैं। वह बोली, "वही तो, इसीलिए तो कह रहीं हूँ जब तक अम्मी घर पर नहीं हैं तब तक हम दोनों जितना मस्ती कर सकते है, कर लें। वैसे अम्मी के रहने पर भी इतना दर्शन तो मैं अपने बदन का आपको करवा हीं दुँगी रोज़, आप देख लेना। और फ़िर जब मन हो तो के लिए चाचू का घर है ना। वहाँ तो हम दोनों अकेले-अकेले जा कर मजा कर हीं सकते है और अगर आपका मन हो तो हम आपस में भी मजा कर सकते है चाचू कभी भी बुरा नहीं मानेंगे। अच्छा अब्बू एक बात बताईए-क्या आप कभी मुझे चोदेंगे या बस ऐसे ही?"जमील अब सानिया के चेहरे को देखते हुए बोला-"असल में सानिया, कल रात सोने के पहले मैं बहुत सोचा। यह तो बिल्कुल सच है कि तुम बहुत-बहुत ज्यादा हसीन हो और मैं हमेशा हीं अपने को खुश-किस्मत समझता रहा कि तुम्हारे लिए बढ़िया रिश्ता तय करते समय मुझे परेशानी नहीं होगी। मैं तो तुम्हारे ग्रैजुएशन के इंतजार में था, वर्ना कई अच्छे रिश्ते आ रहे है तुम्हारी अम्मी की रिश्तेदारी से, पर अभी तक तुम्हारी अम्मी हीं ना बोल रही हैं। फ़िर पिछले कुछ समय में जो हुआ, मुझे पता चला कि तुम सेक्सुअली ऐक्टीव हो और मैं भी कई लड़्कियों के साथ बाबू के घर पर वह सब किया, तो अब मुझे लगता है कि अगर तुम्हारा निकाह आज तक टला तो इसकी वजह शायद यही थी कि मुझे अपनी बेटी का नंगा जिस्म देखना था। उसको अपने दोस्त से चुदवाते देखना था। अगर अल्लाह की मर्जी इसमें ना होती तो कब का तुम्हारा निकाह हो गया होता १६-१७ की थी तब से तुम्हारे लिए रिश्ते आ रहे है। कल रात यही सोचते सोचते जब मुझे यह लगा कि सब ऊपरवाले की मर्जी से हुआ है तब मुझे नींद आ गयी। सो अब देखो आगे क्या होता है। तुम बताओ, तुम कब से यह सब कर रही हो और हमें कुछ भनक भी ना लगी। जिस तरह से कल तुम बाबू के साथ कर रही थी और जैसे बेलौस बोल रही थी, लगता नहीं कि तुम नई हो इस खेल में। इतनी उमर हो गयी मेरी पर मैं ऐसा नहीं बोल सकता जैसा तुम बोल रही थी और बाबू के एक-एक बात का बड़ी बेहयाई से जवाब दे रही थी। तुम दोनों एक-दुसरे के साथ मजा कर रहे हो यह जान कर भी मैं शायद घर पर रुकता पर तुम दोनों की बात सुनकर मन में अजब सा कुछ होने लगा और घर पर रुकना मुस्किल हो गया।" सानिया मुस्कुरा दी और बोली-"तब फ़िर आप वहीं रुम में आ कर देखे क्यों नहीं हमलोग को वह सब करते, इस तरह से आपने जो चाचू को वादा किया था वो भी पुरा हो जाता। आपको तो एक बार देखना हीं है कि कैसे हम लोग चुदाई का खेल खेलते हैं।" जमील का जवाब था-"हाँ सो तो है, एक बार तो मुझे देखना हीं होगा। पर उसके लिए हिम्मत जुटा रहा हूँ। अपनी बेटी तो उसके शौहर से चुदवाते देखने की तो किसी की हिम्मत नहीं होती, यहाँ तो मुझे अपनी बेटी को एक गैर से चुदवाते देखना होगा।"
 
सानिया खुशी से चहक कर बोली-"अरे कोई मुश्किल नहीं होगी। आप आराम से बैठ जाना, अब तो मुझे आपके सामने पुरी तरह से नंगे होने में कोई हिचक भी नहीं है और कल के सेक्स गेम के बाद तो मुझे बिल्कुल भी झिझक नहीं रह गई है आपसे। बल्कि जैसा कि मैंने कहा भी कि मैं तो आपसे चुदाने को बेचैन हूँ। आप सामने बैठ कर देखना, आपके लिए मैं ऐसे मजे से चुदवाऊँगी कि आपको भी फ़ख्र होगा कि आपने भी कोई लाईव शो देखा है।" जमील मुस्कुरा कर कहा-"हाँ, कल के ट्रेलर को देख कर मुझे भी समझ आ गया कि अगर इस लाईव शो को नहीं देखा तो अब तक का सब बेकार हो जाएगा। बस थोड़ी तैयारी करनी है, बाबू से बात भी करना है।...अच्छा अब तुम जाओ और ठीक से कपड़े-वपड़े पहनो, बाई आनेवाली होगी काम करने और तुम ऐसे मेरे शर्ट में उसके सामने जाओगी, क्या अच्छा लगेगा। ऐसे छोटे लोग दस जगह बात को नमक-मिर्च लगा कर फ़ैला देंगे, काफ़ी बदनामी हो जायेगी।" अब सानिया बोली-"ठीक है, जाती हूँ पर एक बार चुम्मा तो लीजिए प्यार से।" जमील सानिया के होठों पर एक गहरा चुम्बन जड़ दिया। पर सानिया बोली, "और मेरे नीचे वाली होठ का क्या?" जमील हिचका-"क्या बोल रही हो, तुम मेरी बेटी हो ना।" सानिया-"तो क्या हुआ, ऐसा रहा तो आप मुझे किस तरह चोद पाएँगे? चलिए अब हिचक छोड़िए और मेरे बूर को एक प्यार भरा चुम्मा दीजिए, उसको चुभलाईए एक बार तब हटुँगी यहाँ से नहीं तो ऐसे हीं टाँग खोल कर आपने इसी बेड पर लेट जाऊँगी, बाई जो समझे।" सानिया के चेहरे पर एक कुटिल हँसी थी। और जमील को हार मानना पड़ा। वो सानिया की जाँघो की तरफ़ झुका तो सानिया थोड़ा नीचे की ओर पसर कर हल्का सा लेट गयी और अपनी जाँघ खोल दी। जमील की नाक में सानिया के चूत से निकल रही एक हल्की खट्टी महक पहुँच रही थी। जमील बहुत एक्साईटेड था, आज पहली बार सानिया की चूत को इतने पास से देख रहा था। पहली बार देख रहा था, उसकी चूत की हल्के गुलाबी होठ पर भी ८-१० बाल निकल आए थे। उसकी झाँट अब थोड़ी निकल आई थी, वैसे भी सानिया को झाँट साफ़ किए आज नौ दिन हो गया था। जमील के होठ जब सानिया के बूर पर चिपके तो सानिया का बदन थड़थड़ा उठा। सानिया के मुँह से एक आआआहह्ह्ह्ह निकल गया। जमील ने उसके चूत की दोनों होठों को अपने मुँह में भर कर चुभलाने लगा। सानिया सिसकी भर उठी। अभी १०-१५ सेकेण्ड हीं बिता कि बाहर की कौलबेल बज उठी। बाई आ गयी थी। सानिया अपने कमरे की तरफ़ भागी और जमील अपने लुंगी को ठीक करता हुआ दरवाजा खोलने चल पड़ा। मैं तब शहर से बाहर था जब जमील का फ़ोन मुझे आया। वो आमने-सामने बैठ कर बात करने को बेताब था। मैं समझ रहा था कि अब कोई देर नहीं है, सानिया ने अपने बाप को पटा लिया है। खैर मैं तीन दिन बाद शुक्रवार को सुबह लौटा और शाम को जमील के घर पहुँच गया।
 
रास्ते में मैंने एक वियाग्रा की गोली खरीद कर खा ली। सानिया मुझे बता चुकी थी कि जमील हम दोनों की चुदाई देखने को रेडी है, और उसने सानिया की चूत पर चुम्मा भी लिया है। आज जब मैं जमील के घर जा रहा था तब तय कर चुका था कि जमील देखे या ना देखे उस हसीन लौन्डिया की चूत का बैन्ड आज देना था। बस अब सोच की दिशा यह थी कि कैसे यह काम हो। फ़िर मैंने अपने दिमाग को एक झटका दिया कि चुदाई के खेल में कोई नियम नहीं होता, बस जो होता है स्वमेव हीं होता है और वही सबसे शानदार सेक्स होता है। मेरा अपना अनुभव तो यही था। और मुझे पता था कि अब वियाग्रा के असर से अब मैं कम से कम तीन घन्टे लगातार बूर में लन्ड की पम्पिंग कर सकता था, चाहे जितनी बार भी झड़ुँ। इतने देर में तो मेरे जैसा अनुभवी कैसी भी औरत को पस्त कर देता, सानिया तो चाहे जितना भी चुदी हो आज तक जिन औरतों का बैन्ड मैंने आज तक बजाया था, उनके सामने तो एक गाय की बछिया की तरह हीं थी और था पुरा जवान साँढ़। मैं वियाग्रा कभी-कभी हीं इस्तेमाल करता था, और आज मुझे लगा कि ऐसा हीं एक दिन है। करीब ८ बजे मैं जमील के घर पहुँचा, तो उसके चेहरे पर रौनक दिखी। सानिया भी मुस्कुराते हुए मिली तो मैंने उसके होठ को चुम कर उसका अभिवादन किया और बोला-"ओ सानिया, पिछले पाँच दिन से तुम मुझे याद आ रही थी। आज मेरा बहुत मन है, तुम तैयार हो ना आज के लिए।" सानिया का जवाब था, "मैं तो हमेशा हीं तैयार हूँ चाचू आपके लिए, अभी खोलुँ कपड़े?" जमील बोला-"अरे आराम से, आज रात यहीं रुक जाओ हमारे साथ और साले आज तो मैं भी देखुँगा और अपना वादा पुरा कर दुँगा।" मैं बोला-"क्या बोला रे साले जमील, तु देखेगा, क्या सच में? सच कह रहा है?" जमील हँस कर बोला-"हाँ साले हरामी, पिछली बार तो सिर्फ़ झलकी देखी और सुना बहुत कुछ पर अबकि बार सब देखुँगा।" मैं चहक कर बोला-"वाह मजा आ जायेगा, बाप के सामने बेटी की चुदाई। वाह पहली बार ऐसा मौका मिलेगा मुझे। देख साले अब तु बीच में भागने मत लगना, जब मैं सानिया की बूर चोद रहा होऊँगा।" अब सानिया बोली-"अब नहीं भागेंगे अब्बू, अब उनको भी सब की तरह मैं एक सेक्सी माल दिखने लगी हूँ", कह कर सानिया ने अपने अब्बू को देखते हुए अपनी एक आँख दबा कर एक मस्त लौन्डिया की तरह आँख मारी। यह सब देख और आगे की बात सोच मेरी बाछें खिल गयी। फ़िर हम सब पास के एक ढ़ाबे में गए और हल्का खाना खाया। वियाग्रा खाए मुझे करीब एक घन्टा हो गया था और मेरा लन्ड टनटनाया हुआ था। घर लौटते समय हीं कार के भीतर हीं मैं सानिया के साथ चुहलबाजी करने लगा था। घर पहुँचते हीं मैं तुरन्त सानिया को दबोच लिया और उसको इधर-उधर चुमते हुए उसके कपड़े खोल्ने शुरु कर दिए। सानिया भी मुझे नंगा करने लगी। एक मिनट से भी कम समय में हम दोनों मादरजात नंगे थे। सानिया के चूत पर हल्की-हल्की झाँट उग आयी थी और उसकी गोरी चूत पर एक कालिमा बिखेर रही थी। साली चुदने को बेताब थी। और मेरे लन्ड को बार बार पकड़ कर अपने चूत से भिरा रही थी, जबकि अभी हम दोनों हीं खड़े थे। मैं जमील के आने के इंतजार में था। तभी जमील कार को गराज में लगा कर आ गया तो हम दोनों को नंगा देखा और मुस्कुराया, "बहुत बेताबी है दोस्त..."। मैं बोला-"साले, एक बार चोद ले तु भी सानिया की चूत फ़िर तु भी ऐसे हीं बेताब हुआ रहेगा अपने लन्ड को इसकी बूर के भीतर पार्क करने के लिए। अब बोलो कहाँ बैठ कर देखोगे अपनी बेटी की चुदाई?" सानिया बोली, "मेरे रुम में चलिए रात को नींद बाद में आप वहीं मेरे साथ सो जाईएगा।" हम सब सानिया के कमरे में आ गये। सानिया ने अपने रीडिंग टेबुल के साथ वाली कुर्सी को बेड के पास खींच दिया और जमील को बैठने का इशारा किया। जमील जब कुर्सी पर आराम से बैठ गया तब वो मेरे से लिपट गयी और बोली-"चाचू आओ और मुझे आज जन्नत की सैर करा दो।
 
.अब्बू को मैंने वादा किया है कि मैं उनके सामने सबसे ज्यादा मस्त लड़की बन कर दिखाऊँगी। आप मेरे वादे की लाज रखना और मुझे ऐसे चोदना कि मैं घिर्नी की तरह नाच उठूँ।" मैं बोला-"फ़िक्र मत करो सानिया बेटा, आज की चुदाई तू जिन्दगी भर नहीं भुलेगी। पिछले ८ दिन से मैंने मुठ भी नहीं मारी है, सो आज तुम्हें खुब माल मिलेगा, बार-बार मिलेगा। आज तू एक कुत्ते के पिल्ले की तरह किकींया जाओगी।" जमील अब बोला-"साले हरामी, मुझे तू कुत्ता बोल रहा है?" मैं फ़ट से जवाब दिया-"ठीक तो बोला हूँ, जब तुम्हारी बेटी एक कुतिया बन कर मेरे से चुदेगी, तो तू भी तो कुतिया का बाप कहलाएगा, और तब तू क्या रहेगा, सोच?" सानिया ने हल्के से धक्के के साथ मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और बोली, "अभी तो तुम घोड़े बनोगे और मैं तुम्हारी सवारी करुँगी।" अब मेरे कमर पर बैठ गयी थी और मेरे सीने पर गिर कर मुझे चुम रही थी। फ़िर वो सीधी हुई और मेरा कड़ा लन्ड अपने हाथों से पकड़ कर अपने बूर के छेद पर सेट की और फ़िर उपर से धीरे-धीरे अपना वजन डालने लगी। मेरा लन्ड भी धीरे-धीरे सानिया की पनियाई हुई चूत को पुरी तरह से खोलता हुआ भीतर घुसता चला गया। सानिया की आँख बन्द थी, और उसके चेहरे के भाव को मैं देख रहा था और जमील की नजर उस छेद पर थी जिसमें धीरे-धीरे मेरा लन्ड घुस रहा था। जब सानिया मेरा लन्ड जड़ तक घुसा ली तो आँख खोल कर अब्बू को देखा और पूछी-"अब्बू आपको सब साफ़ दिखा, या एक बार और लन्द बाहर निकाल कर फ़िर से भीतर घुसाऊँ?" जमील बोला-"दिखा तो ठीक-ठाक हीं, पर एक बार और दिखा दोगी तो मेहरबानी होगी।" सानिया फ़ट खड़ी हो गयी और मेरा लन्ड एक ’फ़क्क’ की आवाज के साथ उसकी टाईट चूत से निकल गया। सानिया एल बार फ़िर उसको पकड़ी और फ़िर से उसको अपने बूर की छेद से भिरा कर धीरे-धीरे घुसाई और इस बार उसकी नजर अपने बाप पर थी, और जमील की नजर फ़िर से सानिया के गोरी बूर और उसमें घुसते मेरे साँवले लन्ड पर थी। जब पुरा भीतर घुस गया तो सानिया बोली-"अब तो सब देखे ना अब्बू, अब देखिए कैसे मैं इस लन्ड को अपने बूर से मथ देती हूँ, एक मथानी की तरह", और सानिया अपना कमर हल्के-हल्के गोल-गोल घुमाने लगी और मेरा लन्ड लगभग आधा बाहर निकल जाता फ़िर भीतर घुस जाता। आज सानिया बिल्कुल नये जोश में थी। कुछ हीं क्षण में उसके मुँह से सिसकी निकलने लगी। उसकी मस्त आवाज मुझे भी मस्त बना रही थी। करीब ५ मिनट बाद सानिया थक गयी और बोली-"अब चाचू आप चोदो मुझे उपर से थक गयी, मैं अब नीचे लेटुँगी।" सानिया मेरे उपर से हट गयी। उसकी बूर से निकल रहा पानी मेरे लन्ड से लिपटा हुआ था और एक हल्की से धार उसकी बूर से निकल कर उसकी जाँघों पर फ़ैल रही थी। मैंने उसको सीध ठीक से लिटाया और कह-"अभी हीं थक गयी, आज तो मेरा "चुदाई स्पेशल" का प्लान है। क्यों जमील, अब पता चला कि तुम्हारी लाड़ली बेटी कैसा माल है?"
 
मैंने उसकी चुदी हुई बूर पर अपना मुँह रख दिया और आराम से उसकी चूत के मदन रस का पान करने लगा। सानिया अब सनसनी से भर रही थी। मुझे बार-बार उपर आ कर चोदने को बोल रही थी, पर मैं भी पक्का चुदक्कड़ था, ऐसे लड़की की बात कैसे मान लेता वो भी तब जब उसका बाप सामने बैठ कर बेटी की निगरानी कर रहा हो कि बन्दा उसकी बेटी को ठीक से चोद रहा है या नहीं। सानिया की बूर को चुस-चाट कर साफ़ करने के बाद एक दम ताजे जोश के साथ मैंने अपना लन्ड साली की चूत में पेल दिया और लगा उपर से उसकी चुदाई करने। वह अब गले से आआह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह की आवाज निकाल रही थी। मैं सानिया की सपाट पेट कर अपना हाथ रख कर तेज गति से उसकी बूर चोद रहा था, और देख रहा था कि जामील साला लगातार सानिया के चेहरे और उसकी चुद रही बूर पर नजर गड़ाए हुए है। मैंने पूछा-"ठीक से चोद रहा हूँ न तुम्हारी बेटी जमील कि नहीं?" अब पहली बार हम दोनों की नजर मिली। उसके चेहरे पर अजीब से लाज, और घबड़ाहट और एक्साईट्मेंट के भाव दिख रहे थे। पट्ठा अब यहाँ से भागने वाला नहीं था। मैंने फ़िर पूछा-"कैसी लग रही है बेटी की चुदाई? ठीक है या कमी है कुछ मेरे चुदाई में?" वो बोला-"अब यह तो सानिया हीं बताएगी।" सानिया बोली-"ओह चाचू, चोदो मुझे जोर-जोर से चोदो। मेरी बूर का भोंसड़ा बना दो आज।" मैं बोला-"पहले पापा को बता कि मैं उसकी बेटी को ठीक से चोद रहा हूँ या नहीं?" सानिया-"आह अब्बू, चाचू बहुत अच्छा चोदते हैं, मैंने जिनसे भी चुदाया है आज तक चाचू इज द बेस्ट। आपको देख कर मजा आ रहा है या नहीं?" मैं सानिया को अब पलट रहा था, फ़िर मैंने उसकी चुतड़ को उपर उठा दिया और उसकी गाँड़ की छेद को ऊँगली से सहलाने लगा तो सानिया बोली, "नहीं वो सब नहीं अभी मेरी बूर की खुजली मिटाओ साले भड़ुए।" मैं भी उस पर चढ़ गया। पीछे से उसकी बूर थोड़ा ज्यादा ही सुन्दर दिखती थी तो मैंने जमील को कहा कि वो एक बार थोड़ा नीचे झुक कर देखे कि कैसे उसकी बेटी के बूर को पीछे से मैं चोद रहा हूँ। जमील साला, दुनिया की सारी मर्यादा भूल कर नीचे झुक गया और मैं उसकी बेटी को चोदता जा रहा था लगातार। घच-घच-फ़च-फ़च की आवाज से सारा कमर गुँज रहा था। मेरी जाँघ सानिया की चुतड़ पर थाप दे रही थी और सानिया हर थाप के साथ जैसे एक हलके आआअह्ह का आलाप कर रही थी। जमील साला आराम से नीचे बैठ कर अब अपनी बेटी की चुद रही बूर को मजे से देख रहा था। करीब २० मिनट से मैं सानिया की बूर चोद रहा था लगातार और अब मैं पहली बार झड़ने वाली स्थिति में आ गया था। जब मैंने कहा कि अब कहाँ लोगी तो वो तुरन्त बेझिझक बोली "मुँह में" और झट मेरे लन्ड के लिए मुँह खोल दी। मैं मुँह तक लन्ड पहुँचाऊँ उसके पहले हीं पहली पिचकारी छुट गयी और सब माल उसके चेहरे पर नाक और बाँए गाल कर फ़ैल गया। पर दुसरी और तीसरी पिचकारी जो छूटी वो सही निशाने पर गयी, सानिया की मुँह में। सानिया अब अपने जीभ चाट चाट कर मेरा लन्ड साफ़ की और फ़िर अपनी ऊँगली से अपने गाल पर के माल को भी पोंछ कर चाट लिया। एक-दो बुँद जो उसकी छाती पर गिरा उसे किसी ब्लू-फ़िल्म की हीरोईन की तरह उससे अपने चुची पर मलिश कर ली। मैं तो वियाग्रा की जोश में था और मेरा लन्ड ५% के करीब हीं ढ़ीला हुआ था। मैंने एक बार फ़िर सानिया को लिटा दिया और उस पर चढ़ गया। सानिया को ऐसी उम्मीद नहीं थी। वो जब तक समझे, तब तक तो मैं एक बार फ़िर अपना लौंड़ा उसकी बूर में पेल कर उसकी बूर की चुदाई शुरु कर चुका था। वो बस आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह इइइइस्स्स्स्स्स्स्स जैसे हीं शब्द बोल रही थी।
 
. जमील भी मेरे इस जोश को देख चकित था। सानिया की बूर कई बार थड़थड़ाई, वो भी चरम सुख पा चुकी है, मुझे पता चल गया पर अभी रुकने का नाम भी नहीं लेने वाला था मैं। सानिया अब थोड़ा शान्त हुई थी, पर जल्द हीं मैं उसको पलटा और घोड़ी बनने को कहा। वो पोजिशन ले ली तो मैं उसकी चूत को चुसना शुरु कर दिया। खुब चुस-चुस कर उसके चूत के नमकीन लिसलिसे पानी को मजा लिया। उसकी बूर की खट्टी महक में अब उसके बदन के पसीने की महक भी थी। पर जब मेरे जैसे मर्द पर चुदासी चढ़ी हो तो ऐसी महक सिर्फ़ और सिर्फ़ खुश्बू हीं लगती है। फ़िर मुझे एक बात सुझी, मैंने जमील को कहा-"आओ एक बार सुँघ कर देखो अपनी बेटी की बूर। कैसी मस्त खुश्बू निकल रही है इस छेद से। अभी-अभी झड़ी है।" जमील बेशर्म हो कर पूछा-"क्या सच में तुम झड़ी हो बेटा?" सानिया हाँफ़ते हुए बोली-"हाँ अब्बू, चाचू बेजोड़ हैं।" जमील पास आया और झुक कर सानिया की बूर सुँघा। मैंने कहा-"साले एक बार टेस्ट को कर", तो वो अपने जीभ को सानिया की खुली हुई बूर पर नीचे से उपर तक दो बार चलाया। मैंने कहा-"अब हट साली घोड़ी बनी हुई है, पहले सवारी करने दे। मैं पीछे से उस पर चढ़ गया और अपना टनटनाया हुआ लन्ड गच्च से उसकी बूर में पेल दिया। मैंने उसके बाल को पकड़ कर पीछे खींचते हुए एक बार फ़िर से उसकी चुदाई शुरु कर दी। बाल खींचने से उसका चेहरा उपर उठ गया और उसका लाल भभुका चेहरा उसके बाप के सामने था। आँख बन्द था, औए मुँह खुला हुआ। साली को हल्का सा दर्द देने के लिए मैंने बाल को जोर से खींच दिया और वोह करह उठी, पर अब तो उसको इन दर्दों की परवाह हीं नहीं थी। जमील को उसका दर्द महसूस हुआ और वो बोल पड़ा-"बाबू धीरे से खींचो, बेचारी को दर्द हो रहा होगा।" मैंने अपनी पकड़ अब तक वैसे भी ढ़ीली कर दी थी। पर सानिया बोल पड़ी-"आह चाचू ऐसे हीं करो, कोई दर्द नहीं हो रहा मेरी चूत में आग लगी हुई है, जल्दी उसको बुझाओ। चोदो खुब चोदो मेरी चूत। आपको मजा दे रही है कि नहीं मेरी चूत। फ़ाड़ दो आज इसको चोद कर, आप भी आज बहुत जोश में हैं। अब्बू के सामने चूत फ़ट भी जाए तो कोई गम नहीं। आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चोद साले मादरचोद साले हरामी, साले हरामजादे, चोद मादरचोद खुब चोद जोर से चोद देखती हूँ कितना दम है साले।" मैं अब उसकी कमर को पकड़ कर तेज धक्के लगाने लगा और दुसरी बार उसकी चूत थड़थड़ाई, वो फ़िर से झड़ी थी और यह सोचते हीं मेरी भी पिचकारी छुट गयी, पर इस बार मैं नहीं रुका। जब मेरा सफ़ेद सा लिसलिसा माल उसकी बूर से हल्का सा बाहर की तरफ़ आया तो जमील उठ खड़ा हो गया-"यह क्या किया यार, इसके भीतर निकाल दिए, अगर कुछ गड़बड़ हुई तो मैं तो कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहुँगा।" मैं अभी भी वैसे हीं पम्प किए जा रहा था। जोश में बोल उठा-"साले आज जब बाप के सामने बेटी चुदे तो मैं क्यों डरूँ, इतने दिन बाद आज एक बार इस रन्डी की बूर में माल निकालने तो दे। अब इसको भीतर दूर तक पहुँचाना है। चल साली सीधा लेट हरामजादी, अब उपर से पेलुँगा तब यह सब माल तुम्हारी बच्चादानी तक पहुँचेगा।" सानिया तुरन्त पलट गई और अपने अब्बू की तरफ़ चेहरा करके बोली-"आप की बदनामी नहीं होगी अब्बू, आप परेशान नहीं होईए।" जमील हकलाते हुए बोला-"पर अगर बेटी कोई बच्चा रह गया तब क्या होगा। अब तुम बच्ची नहीं हो जान।" मैं उपर से सानिया के बूर के बाहर निकल रहे अपने सफ़ेद वीर्य को अपने लन्ड से समेट कर सब को उसकी बूर के भीतर ठेलते हुए अपना लौंड़ा भीतर घुसा कर उसके चुचियों को मसलते हुए बोला-"हाँ रे जमील तेरी बेटी बच्ची नहीं है। इसीलिए तो इसको चोद रहा हूँ। मस्त लौन्डिया है साली। चुद साली चुद।" और सानिया बोली-"अब्बू आप चिन्ता नहीं कीजिए। अभी एक दिन पहले हीं मेरी पीरियड्स खत्म हुई है, इसीलिए तो मैं आराम से चाचू को अपना माल भीतर गिराने दी। मुझे जब उनका लन्ड धुक-धुकाया था तो पता चल गया था कि अब ये छुटेन्गे। चोदो चाचू, आराम से चोद कर भोगो मेरे चूत को।" मैं ने कहा, "हाँ रे साली, लगातार ४५ मिनट से ठुकाई हो रही है तुम्हारे चूत की पता है तुम्हें।" कहते हुए मैंने उसको बाँए करवट कर दिय और फ़िर उसकी कमर पकड़ कर पम्पिन्ग शुरु कर दी।" थोड़ी देर बाद मैंने कहा, "अब बन कुतिया साली।" सानिया अब थोड़े कातर स्वर में बोली, "चाचू अब आज छोड़ दो, बहुत थक गयी हूँ आज। बहुत दुख रही है मेरी चूत अब।" जमील भी उसका पक्ष लिया। पर मेरे जोश में कोई कमी नहीं थी, सब वियाग्रा का कमाल था। मुझे पता था कि ऐसी मेहनत के बाद अगले दो दिन तक मेरा लन्ड दुखेगा। पर अभी तो मुझे अपना मर्दाना जौहर दिखाना था जमील को उसकी बेटी को पस्त होने तक चोद कर। मैंने सानिया को अपने हाथों से पलटा। वो तकिए के सहारे सिर टिका ली तो मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी चूत को बिस्तर से थोड़ा उपर उठाया। वो थकी-थकी से मुवमेन्ट के साथ मेरा साथ देने की कोशिश कर रही थी।
 
मैंने उसकी कमर को पकड़ा और उसकी बूर को चोदने लगा। उसके मुँह से कराह जैसी सिस्की निकल रही थी। मैं भी सोच रहा था कि अबकि बार इसकी बूर में माल निकाल कर साली को छोड़ दुँगा। मेरे धक्के से साथ उसकी कमर नीचे होती जा रही थी। जल्द हीं वो बिस्तर से लगभग सट गयी और मैं उसके पीठ से चिपक कर तेज झटकों के साथ उसे चोदे जा रहा था। जोर के धक्के के साथ वो सच में एक कुतिया की तरह कींकिया रही थी। मैं बोला-"अब जा कर बनी है तु असल कुतिया रे साली रन्डी। सुन रहे हो जमील, कैसी आवाज निकल रही है इस कुतिया की मुँह से।" सानिया को अब इस सब बात से जैसे मतलब नहीं था। जमील भी चुप-चाप सब देख रहा था कि मैं एक बार फ़िर छुट गया। सानिया के बूर के भीतर हीं मैं फ़िर से अपना माल निकाल था। मैं करीब २० सेकेन्ड तक उसकी पीठ से चिपक कर लेटा रहा फ़िर उसके बदन पर से उठ गया। सानिया अभी भी वैसे ही लेटी हुई थी। मैंने उसको सीधा पलटा और फ़िर उसकी बूर से बह रहे अपने सफ़ेद माल को अपनी ऊँगली से काछ कर फ़िर से उसकी बूर में डाल दिया। सानिया निढ़ाल सी पड़ी थी तो मैंने एक-एक कर के अपनी दो उँगली उसकी ताजा चुदी चूत में घुसा दिया और हल्के हल्के उँगली से उसकी बूर की मासिल शुरु कर दी। वो बिल्कुल निश्चल लेटी हुई थी तो मैंने अपनी उँगली से उसकी जी-स्पौट की तलाश शुरु कर दी। जल्दी हीं सानिया का बदन हरकत में आया तो मैं समझ गया कि मुझे उसका जी-स्पौट मिल गया है। मैं अब जोर-जोर से उसके बूर के भीतर के इस जादुई बिन्दु को अपनी बीच वाली उँगली से कुरेदने लगा। सानिया फ़िर से करह उठी और १० सेकेन्ड के भीतर स्खलित हो गयी। उसके मुँह से सिर्फ़ एक उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकली और उसकी आँख बन्द हो गयी। मैंने सानिया का चेहरा थपथपाया और पूछा-"मजा आया बेटा आज? बोल न मेरी जान, मेरी बुलबुल।" सानिया ने आँख खोली, उठी और मेरे सीने से लिपट गयी। मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया। मैंने कहा-"अब बेटा, एक बार जमील का लन्ड चुस कर झाड़ दो, साला का लन्ड नहीं तो बहुत दर्द करेगा। क्यों बे जमील, निकाल अपना लन्ड बाहर। मैं अब नहाने जा रहा हूँ, तू चुसवा ले कम से कम आज। फ़िर कभी चोद लेना सानिया। आज इसको छोड़ दो अब।" कह कर हँसते हुए मैं नंगे ही बाथरुम की तरफ़ चल दिया।
 
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