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एक मस्त लम्बी कहानी .......!complete

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मुझे रंजिता पर दया आ गई, तो मैंने यही बात रागिनी को कहा। रागिनी भी रंजिता की हालत पर तरस खा बोली, "हमें कुछ करना होगा वर्ना ये साला अंकल उस बेचारी को ऐसा डरा देगा कि बेचारी अपने खसम से भी चुदाने में डरेगी आज के बाद।" मेरे हाँ में सर हिलाने पर, रागिने वैसे हीं नंगी उन दोनों की तरफ़ बढ़ गई। मैं भी पीछे चला। रागिनी ने जमील से कहा-"आ जाओ अंकल, मेरे गाँड़ में अपना लन्ड पेल लो। ये बेचारी अभी बच्ची है, इसको तो ठीक से अपना झाँट भी छिलने नहीं आता है...अभी क्या गाँड़ मरा पाएगी।" रंजिता यह सब सुन कर जैसे चैन पाई और उठ कर बिस्तर पर एक तरह खिसक गई जिससे रागिनी बिस्तर पर आ सके। जमील का काला खतना हुआ लन्ड अब दम तना हुआ था और उसका का गुलाबी सुपाड़ा एक दम लाल आलू बना हुआ था। लन्ड की नसें फ़ुली हुई थी। सब वियाग्रा का असर था। रागिनी अपने हाथों और घुटनों के बल एक कुतिया की तरह बिस्तर पर अपना पोजीशन ठीक की। उसकी गुलाबी बूर जिसमें अभी कुछ समय पहले मैं अपने हल्लाबी लन्ड को पेल कर भीतर घुच-पिलान का खेल खेलने में मगन था अब भी मेरे उस चुदाई के सबूत के तौर पर गीली हुई चमक बिखेर रही थी। मैंने रंजिता की तरफ़ नजर घुमाई तो देखा कि बेचारी रागिनी की उठी हुई चुतड़ और उसकी खुली हुई बूर पर नजर गड़ाए हुए है।
 
रागिनी ने मुझे तब कहा कि मैं जरा उसकी गाँड़ को खोद दूँ जिससे वो थोड़ी ढ़ीली हो सके।रंजिता अब बोली, "ये साहब तो मेरी बिना ढ़ीली किए ही भीतर घुसा रहे थे, बहुत दर्द हो रहा था दीदी।"जमील बोला-"चुप कर अब साली रंडी, नखरे ना कर। रंडी बन कर चुदने आई है तो चुप-चाप चुद और फ़ूट ले हरामजादी।"मैंने अब जमील को कहा, "क्या यार, अब इस पर क्यों झल्ला रहे हो? बेचारी अभी नई है, धीरे-धीरे सब सीख जाएगी। तेरी बेटी भी धीरे-धीरे हीं सब सीखी है। अब देख वो वहाँ तीन के साथ चुदा रही है और खुब खुश है, और ये बेचारी एक तेरे जैसे मर्द को नहीं झेल पाई।"मैं अब तक रागिनी की गाँड़ में ऊँगली भीतर-बाहर कर के उसकी गांड़ को मस्त बना चुका था।वो अपना गांड़ को बिल्कुल ढ़ीला कर दी थी और मैं अब अपने दो ऊँगली थुक से गीली करके डाल कर उसे और लूज कर दिया तो वोबोली, "आ जाओ जमील अंकल आप अब मैं तैयार हूँ।"जमील ने बिना देर किए अपना लन्ड रागिनी की गाँड़ में पेल दिया। रागिनी एक बार दर्द से कराही और फ़िर अपने होठ भींच लिए।रंजिता देख रही थी कि कैसे सब भीतर गया। जब पूरा छः ईंच लन्ड भीतर घुस गया तो जमील अब उसकी गांड़ मारने लगा हौले-हौले।
 
. मैंने रंजिता को धीरे से कहा, "देख लिया कैसे मर्द लोग चोदते है एक लौन्डिया को। लड़की को सिर्फ़ मर्दों से बूर हीं नहीं चुदाना पड़ता, उन्हें मर्दों से गाँड़ भी मरवानी पड़ती है।इसकी खुद की बेटी आज बगलवाले कौटेज में तीन-तीन मर्दों के साथ सोई है। साली को आज पहली बार उसकी तीनों छेद में पेला जाएगा। इसीलिए ये साला जमील यहाँ लौन्डिया की गाँड़ मार कर अपना गम कम कर रहा है। साला एक दम मादरचोद, बेटीचोद हरामी है।"रंजिता अब सब समझी और उसकी आँख आश्चर्य से फ़ट गई, "क्या सच इनकी अपनी बेटी..."।मैंने कहा, "हाँ, साला मेरा दोस्त है। ये जितना चपन्डुक है, इसकी बेटी उतना हीं बड़ा माल। साली जब पूरे कपड़े में होती है तब भी मर्दों के लन्ड से पानी निकाल देती है। उसे मैं आराम से चोद सकूँ, इसलिए मैंने उसे इस मादरचोद से बी चुदावा दिया।अब जब साला खुद अपनी बेटी को चोद चुका है तब कैसे उसको दुसरों से चुदाने से मना करे। सो अब ये मादर-चोद ऐसे हीं अपनी खीज निकालता रहता है।तुम फ़िक्र छॊड़ो और आओ एक बार मेरे से चुदा लो। मैं तुम्हें प्यार से चोद कर तुम्हारी जवानी का पूरा मजा दुँगा।"वो अब रागिनी की तरफ़ ईशारा करके बोली-"यह कौन है, आपकी बेटी?"मैं हंस पड़ा-"नहीं ये एक रंडी है, बहुत ही प्यारी रंडी पर अब मेरे साथ अंकल और भतीजी का रिश्ता है।"और मैंने उसे अपनी गोद में खींच कर उसके होठ चुसने शुरु कर दिए और जल्द हीं वो भी गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी।
 
. फ़िर तो उस रात रंजिता एक बार मुझसे और दो बार जमील से बूर में चुदी।रागिनी की एक बार गाँड़ जमील ने मारी और फ़िर दो बार वो मेरे से अपने बोर्र में चुदी।अंत में रंजिता भी सब देख कर जोश में आ गई और बोली कि एक बार मेरी भी गांड़ मार दीजिए आप।मैंने उसे समझाया, "गाँड़ मार दीजिए नहीं गाँड़ माए लीजिए कहो। लड़की देती है और मर्दलोग लेते हैं। मैं तुम्हारी चूत लेता हूँ, तुम अपना चूत देती हो। मैं गाँड़ मारता हूँ, तुम गाँड़ मरवाती हो। मैं तुम्हें चोदता हूँ, तुम चुदवाती हो। लड़की चोदती नहीं चुदाती है। जैसे हिन्दीं में आप और तुम दो शब्द है और अंग्रेजी में सिर्फ़ यू, उसी तरह हिन्दी में चुदना और चुदाना दो शब्द है जबकि अंग्रेजी में सिर्फ़ फ़क। अब कुछ समझ में आया।"रागिनी हंस दी, "अंकल आप तो पूरा क्लास हीं लगा के बैठ गए। बेचारी अब तड़प रही है तो एक बार उसकी गांड़ भी अपने लन्ड से खुजला दीजिए।मैं तो अब थक गई हूँ, बस अब बैठ कर देखुँगी सब।"मैंने कहा-"अरे ये बेचारी जब रंडी हीं बन रही है तो कुछ ठीक से बोलना सीख लेगी तो ज्यादा पैसा मिलेगा। आओ रंडी पास आ कर कुतिया बन, फ़िर तेरी गाँड़ को गीला और ढ़ीला करके उसको मारुँगा।"रंजिता भी पास आ कर जैसे रागिनी अपना गाँड़ मरवाते समय पलट कर रेडी हुई थी वैसे ही वो भी हो गई, तो मैं हौले-हौले उसके गाँड़ अपनी बीच वाली ऊँगली से खोदने लगा।जल्द ही मैंने समझ लिया कि क्यों बेचारी जमील से गाँड़ मरवाते समय तड़प रही थी। असल में जैसे हीं मैं उसकी गाँड़ में अपनी ऊँगली घुसाने की कोशिश करता वो अपना गाँड़ का चेद सिकोड़ लेती।
 
बस मैंने उसको समझाया कि कैसे उसे रीलैक्स करना है। वो अच्छी स्टुडेन्ट थी, जल्दी ही सीख गई और फ़िर कुछ ही समय में वो मेरी दो ऊंगली भीतर घुसवा ली। फ़िर मैंने उससे कहा कि अब वो जब समझ गई कि कैसे अपना गाँड़ उसे खोलना है कि लन्ड भीतर घुस सके, तो अब वो मेरे लन्ड को चुस कर टनटना दे जिससे उसके छोटे से गांड़ में वो घुस कर उसके इस छेद की भी चुदाई कर सके।रंजिता खुशी-खुशी मेरे लन्ड को अपने मुँह में ले कर चुसने लगी।जल्द हीं मेरा लन्ड फ़नफ़ना गया और नये बिल में घुसने के लिए फ़ुँफ़कारने लगा। मैंने हल्के हाथों से रंजिता को पलट दिया। वो सब समझ कर सही पोज में आ गई, और मैंने उसकी गाँड़ पर ढ़ेर सारा थुक लपेसा और अपना लन्ड उसकी कोरी गाँड़ की छेद पर भिरा कर धीरे-धीरे दबाने लगा।मेरा सुपाड़ा भीतर चला गया, रंजिता का बदन हल्के से कांपा था, शायद दर्द से।मैंने उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया था और फ़िर अपना लन्ड बाहर खींच लिया।। वो फ़िर कांपी, उसे पता चल गया कि मैं क्या कर रहा हूँ। ऐसे ही तीन बार मैंने अपना सुपाड़ा उसकी गाँड़ में पेला और खींचा, और फ़िर चौथी बार मैंने अपना सुपाड़ा भीतर किया तो रंजिता की गांड़ को मेरे लन्ड के सुपाड़े की आदत पर गयी थी सो इस बार उसका बदन नहीं के बरा बर कांपा।मैंने यह सब महसूस किया और इस बार उसकी कमर को पुरे से जकड़ कर जोर से लन्ड भीतर ठांस दिया। वो दर्द से बीलबीलाने लगी पर मैंने बिना रुके अपन लन्ड करीब ६" भीतर ठांस दिया।उसकी आंखो से आंसू निकल गए, रागिनी के चेहरे से रंजिता के दर्द का अंदाजा मुझे हो रहा था पर मेरे जैसे हरामी को लौन्डिया के दर्द से कुछ होना तो था नहीं जब माल खुद अपनी मर्जी से अपनी गांड़ फ़ड़वा रही थी तो।सो मैं पूरी बेदर्दी से उसकी गाँड़ में लन्ड भीतर बाह्र करके उसकी कुँवारी गांद का लुत्फ़ उठाने लगा। जल्दी हीं उसे भी मजा आने लगा तो वो भी साथ देने लगी।
 
. लौन्डिया की यही मस्ती वो चीज है जिसकी वजह से मैं किसी भी लौन्डिया को चोदते समय उसके दर्द की परवाह नहीं करता। मुझे पता है कि लड़की जैसे हीं १३-१४ की उमर के करीब होती है, वो कैसा भी लन्ड अपने भीतर डलवा सकती है। उसके बदन की बनावट हीं ऐसी है। यहाँ तो यह कुतिया कम से कम १८ की जरुर थी। सो जल्द हीं मस्ती पा मस्त हो गई और फ़िर मजे ले कर अपना गाँड़ मरवाई।करीब १४-१५ मिनट की चुदाई या कहिए गांड़ मराई के बाद मैं उसकी गांड़ में हीं झड़ गया, और जब अपना लन्ड बाहर खींचा तो तो अपने गांड़ के छेद को भींची और तब उसकी गांद में से मेरा सफ़ेद माल बाहर बह निकला।साली के गांड़ का उदघाटन हो चुका था। रात के करीब १२ बज चुके थे, सो हम सब अब सो गए। सोते समय दिमाग में एक बात थी कि सानिया साली का क्या हो रहा है वहाँ, सोचा कि चलो सुबह सब पता चल जाएगा।सुबह सबसे पहले रागिनी की आँख खुली।उसने जब खिड़की का पर्दा हटाया तो रोशनी से हम सब जग गए। सब ऐसे हीं नंग-धड़ग सो गए थे।रंजिता उठी तो अपने हाथ से अपने बूर को कवर करते हुए उठी और बोली, बाप रे बहुत देर हो गया,अब घर जा कर जल्दी-जल्दी सब काम करना होगा। उसको अभी अपने छोटे भाई बहन को खाना बना कर ९ बजे तक स्कूल भेजना था।पता चला कि उसकी माँ नहीं है और बाप शराबी है। उसका बाप एक बोतल विदेशी शराब के बदले उसे रात भर के लिए मैनेजर के साथ भेजा था।ऐसा आज तीसरी बार हुआ था। रंजिता ने बताया कि उसको अब २००० रू० मिलेगा मैनेजर से, तो मुझे दया आ गई और मैंने उसे २००० और दिए, और अपने शेविंग किट से बोरोलिन दिया की वो उसे अपने गांद के छेद पर लगाया करे। मैंने देखा कि कल कि गाँड़ मराई के चक्कर में उसकी गाँड़ के छेद के फ़ोल्ड्स थोड़ा छिल गए थे। मैंने उसके गांड़ के छेद पर पहली बार अपने हाथ से बोरोलिन लगाया। साली इतना प्यार पा कर पिघल गयी, पर हम सब ने उसे विदा कर दिया। तभी जमील के फ़ोन पर सानिया का फ़ोन आया

 
. जमील तुरंत उससे बोला-"कैसी हो बेटा तुम?" मैंने उसके हाथ से फ़ोन ले कर स्पीकर औन कर दिया। सानिया बोल रही थी-"खुब बढ़िया अब्बू, कोई परेशानी की बात नहीं है। खुब मजा आया। अभी तो सो कर उठी हूँ, और बिल मेरी मालिश कर रहा है।" मैंने पूछा-"ये बिल कौन है बेटा? उन्हीं में से कोई या कोई बाहर का है?" मेरी आवाज सुन सानिया बोली-"ओह, गुड मौर्निंग अंकल। बिल और जैक नाम है एडविन के दोनों दोस्त का। कल रात में तीनों ने मुझे साथ में चोदा। साथ में बिल और एडविन की गर्ल-फ़्रेन्ड्स भी थी, मिल्ली और एलिशा। खुब मजा आया। क्या बताऊँ अंकल, सब ने मिल कर मुझे जो मजा दिया...अल्लाह कसम, ऐसा मजा आज तक नहीं आया था।" मिल्ली और एलिशा ने तो मुझे मिल कर इतना गरम कर दिया कि कब और कैसे मैं चुदी कुछ होश हीं नहीं रहा। बाद में वो दोनों आपस में मशगुल हो गई और तब तीनों लड़कों ने मुझे चोद-चोद कर बेदम कर दिया। बारी-बारी से, तीनों मेरे में घुसा रहे थे और मुझे जरा भी आराम करने का मौका नहीं दे रहे थे। एडविन दो बार मेरे मुँह में और एक बार मेरे बूर में झड़ा। जैक भी मेरे बूर में दो बार झड़ा। बिल अभी तक सिर्फ़ मेरे मुँह में हीं झड़ा, कल रात वो मिल्ली और एलिशा के साथ ही रहा। आज वो मुझे अकेले चोदेगा अभी फ़िर सब मिल कर चोदेंगे।" मैंने तब पूछा, "किसी ने गाँड़ नहीं मारी तुम्हारी?" सानिया बोली, "नहीं वो सब आज के लिए छोड़ा हुआ है इन लोगों ने। चाचू मैंने इन्हें बता दिया कि मैं यहाँ अपने अब्बू और चाचू और एक अपनी कजन के साथ आई हूँ तो ये सब खुब आश्चर्य कर रहे थे। उन्हें विश्वास हीं नहीं हो रहा था कि अपने देश में ऐसा होता होगा। ये साले गोरे समझते हैं कि यही लोग सेक्स एक्स्पर्ट हैं।"
 
जमील बीच में बोला-"तुम्हें ये सब ऐसे नहीं बताना चाहिए था बेटा, कितनी खराब बात है यह"। उसके चेहरे पर हल्की सी चिन्ता उभर रही थी। सानिया अपनी हीं रौ में थी, बात काट कर बोली-"क्या नहीं बताना चाहिए, ये क्या यहाँ हमारे अड़ोस-पड़ोस में, या अम्मी से कहेंगे क्या कि मैं अप्ने अब्बू से चुदाती हूँ। इनको मजा आया, और मुझे भी यह सब बता कर। और हाँ अब्बू, बिल बोल रहा है कि अगर आप सब भी यहीं आ जाएँ तो मजा आ जाएगा। लीजिए बात कीजिए उससे।" और तब एक अंग्रेज मर्दाना स्वर फ़ोन से आया-"हल्लो अंकल्स, गुड मौर्निंग...युर डौटर इज सुपर्ब, शी इज अ डार्लिंग बेबी...शी नोज हौ तो एंजोय सेक्स एंड लेट अ मैन एंजोय हर बोडी...थैंक्यू अंकल फ़ोर हैविंग सच अ नाईस गर्ल विद यु...व्हाई डोंट यु कम एंड जोईन अस दिस मौर्निंग...वी विल हैव अ ग्रेट टाईम टुगेदर...वी औल विल गिव यु अ ग्रेट शो विद युअर डाटर...कम हीयर प्लीज...यु मे एन्जाय आवर गर्ल्स, दे आर ग्रेट कौक सकर्स, युल्ल लव देम।" जमील नो..नो कर रहा था, पर मैंने कहा, "ओके वे विल कम, आफ़टर अबाऊट ३० मिनिट्स, डोंट वरी...." और उसने कहा, वी विल वेट टिल्ल यु कम"। इसके बाद बिल ने हमें थैंक्स कहा, फ़िर सानिया की आवाज आई, "चाचू, आप अब्बू के साथ लाना, बहुत मजा आएगा, सब मिल कर खेलेंगे। रागिनी तुम भी आना और रेडी रहना, ये लोग तुम्हें छोड़ेगे नहीम, तुम मेरी कजन हो, तो सब तुमसे भी मस्ती जरुर करेंगे।" रागिनी ने कहा-"हाँ दीदी, मुझे पता है, मेरे लिए तो ये विदेशी मजा पहली बार ही है, सिर्फ़ तुम्हारी पहल पर मिलेगा ये सब, थैंक्स दी।" बेचारा जमील अब अलग-थलग पर गया, उसे समझ में आ गया कि हम दोनों अब उसके न कहने से रुकेंगे नहीं। रागिनी ने उसको कहा कि अब वो भी तैयार हो जाए, साथ चलने के लिए, नहीं तो बाद में अफ़सोस होगा। वो भी अब चलने को तैयार होने के लिए बाथरूम में चला गया। करीब आधे घंटे बाद हम तीनों नहा-धो कर बगल वाली कौटेज की तरफ़ बढ़ चले। मैनेजर ने हमें उस तरफ़ जाते देखा तो मुस्कुराया। मैंने भी उसको देख आँख मारी, तो उसने अपना दाहिना अँगुठा उपर करके हमें "गुड-लक" विश किया। वो समझ रहा था कि अब हमारा इरादा क्या है।
 
जब हम उनके कौटेज में पहुँचे तब उनका दरवाजा भिड़ा हुआ था और हमारे नौक करने पर किसी ने "कम-इन प्लीज" कहा। हम अंदर गए तो देखा कि तीनों लड़के बिल्कुल नंगे हो बेड और कुर्सी पे बैठे हैं और तीनो लड़कियाँ उनके लंडों से खेल रहीं हैं। एडविन और जैक दोनों बेड पर थे, जबकि बिल कुर्सी पर। लड़कियों में सिर्फ़ सानिया हीं नंगी थी, बाकि दोनों जीन्स और टौप पहने थीं। पास में रखे सोफ़े की तरफ़ हम तीनों बढ़े, तो तीनों लड़के हमारे पास आए, साथ में सब लड़कियाँ भी आई। बिल ने हमें वेलकम किया और सब का परिचय दिया। फ़िर सानिया ने हमारा परिचय कराया उनसे कराया। सब एक-दुसरे से हाथ-वाथ मिलाए। मेरी नजर उन दोनों गोरी बालाओं पर थी। दोनों मस्त फ़ीगर की मालकिन थी। मिल्ली बिल की गर्ल-फ़्रेन्ड थी और एलिशा एड्विन की। दोनों २२-२४ साल की हँसमुख लड़कियाँ थी और देख कर लगता था कि बहनें हैं, खुब गोरी और फ़्रेश माल। मैंने उन दोनों को घुरते हुए कहा-"वेल, यु पीपल कैरी-औन...बिल यु टोल्ड अस थत वी’ल्ल हेव ग्रेट टाईम, सो वी’ल्ल सिट देयर एंड एन्जाय", और हम सब सोफ़े पे बैठने लगे। तभी एडवीन ने रागिनी का हाथ पकड़ा, "कम औन बेबी, यु कम विद अस...वी’ल्ल शो यु द हेवन..." और उसने अपने बाहों का घेरा रागिनी की कमर के चारों ओर लपेट कर उसे अपने साथ बेड पर खींचा। हम जैसे हीं सोफ़े पर बैठे, दोनों गोरी बालाओं हमारे पास आ जमीन पर बैठ गईं, घुटनों के बल।
 
अब हालात यह थी कि सानिया तो बिल का लन्ड चूस रही थी, एलिशा मेरा और मिल्ली जमील का पैंट से बाहर खींच चुकी थीं। रागिनी के बदन से कपड़ा उतारा जा रहा था और वो एड्विन और जैक के बीच में थी जबकि दोनों उसके आगे और पीछे से चिपके हुए थे और कपड़े खोल रहे थे। करीब ५ मिनट बाद बिल ने सानिया को अपने उपर आने का ईशारा किया और थोड़ा कुर्सी पर पसर गया। सानिया ने एक नजर हमें देखा, हम दोनों तो उसी भी देख हीं रहे थे, सो हमारी नजरें मिली। सानिया मुस्कुराई और बिल के उपर चढ़ गई। एक हल्के से कराह के साथ उसने अपने हाथ से बिल का लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा लिया और फ़िर हौले से उसकी गोद में बैठ गई। उस कमरे में सबसे लम्बा लन्ड बिल का ही था, करीब १०" का होगा, या ९" तो पक्का था। फ़िर जब बिल थोड़ा और पसरा तो सानिया उपर से अपने कमर को उठा गिरा कर अपने चूत को उसके लन्ड से चुदाने लगी। बिल उसकी चूचियों से खेल रहा था, और फ़िर जल्द हीं सानिया की सिस्की कमरे में भर गई। अब हमारे साथ वाली गोरी लड़कियाँ भी खड़ी हो कर अपने कपड़े खोलने लगी थीं। रागिनी को बिस्तर पर लिटा कर दोनों दोस्त उसकी छाती और बूर को चूस चाट रहे थे। जमील के लिए तो हालत था कि वह किधर देखे और किधर नहीं देखे। मैं तो अभी एलिशा के पैन्टी पर नजर गड़ाए था जो अब हौले-हौले उसके कमर से नीचे खिसक रही थी और उसका एक दम चिकना मक्खन चूत की चमक आने लगी थी। जल्द हीं एलिशा मेरे गोद में और मेरे बगल में बैठे जमील की गोद में मिल्ली चढ़ गई और हमरी तरह अपना चेहरा कर अपने बूर में हमारे लन्ड घुसा ली। वो दोनों खुद हीं उपर से हिल-हिल कर हमें चोद रहीं थीं। हमें भी मजा आ रहा था। जमील की आँख बन्द थी, जबकि मैं एलिशा को अपनी ओर खींच कर उस्कए होठ का रस पान करने लगा था।
 
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