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कहीं वो सब सपना तो नही complete

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इस बार माँ को हल्की खाँसी हुई थी

लेकिन माँ ने लंड को मूह से नही निकाला ऑर सर को आगे पीछे करते हुए पूरे लंड को मूह मे लेने लगी ऑर

मैं भी माँ के सर को हाथों मे पकड़ कर लंड को पूरा अंदर तक घुसा कर माँ के मूह को लंड से तेज़ी

से चोदने लगा,,

मेरा लंड माँ के गले से टकरा कर नीचे की तरफ हल्का सा मूड जाता ऑर गले से नीचे उतर

जाता तभी माँ ने अपने सर की थोड़ा उपर की तरफ उठा लिया ऑर माँ का मूह भी थोड़ा उपर उठ गया माँ की

आँखें मेरी आँखों से मिलने लगी ऑर मैने लंड को उपर से नीचे करके माँ के मूह मे डालना शुरू किया ऑर

पूरा लंड अंदर घुसाने लगा ऑर गले से भी नही टकरा रहा था ऑर बड़े आराम से अंदर तक घुस रहा था,,

मुझे ऐसे ही माँ के मूह को चोद्ते हुए 15 मिनिट हो गये थे ऑर माँ ने ऐसे बीच 2-4 बार लंड को मूह

से बाहर निकाला था ऑर जितना भी थूक मूह मे होता था उसको लंड पर थूक देती ऑर अपने हाथों से पूरे लंड

पर आगे पीछे करके फेला देती ऑर फिर से मूह उपर करके लंड को मूह मे भर लेती ऑर अपने हाथ लंड से

हटा देती ऑर मैं माँ के मूह को अपने हाथों से पकड़ कर लंड को गले से नीचे तक उतारने लग जाता,माँ

के हाथ मेरी गान्ड पर होते ऑर माँ मुझे ऑर तेज़ी से लंड को मूह मे डालने को बोलती ऑर खुद मेरी गान्ड को

अपने हाथों से तेज़ी से आगे पीछे करने करने लगती ऑर मैं भी माँ का इशारा समझ कर लंड को तेज़ी से पूरा

अंदर तक घुसा कर गले से नीचे उतार कर माँ के मूह को चोदने लग जाता,,अब ऐसे लगने लगा था कि मेरा

पानी निकलने वाला है मैने माँ के सर को हाथ से पकड़ा हुआ था ऑर माँ के बालों को हल्के से खींचते

हुए एक इशारा कर दिया कि मेरा होने वाला है तभी माँ ने अपनी दोनो आँखों की पॅल्को को एक ही टाइम पर 2-3

बार एक साथ झपकाया ऑर मेरी गान्ड पर हल्के से हाथ मार कर अपने पानी को मूह मे ही डालने को बोला ऑर

मैने भी माँ के सर को कस्के हाथों मे पकड़ा ऑर स्पीड तेज करते हुए लंड को ऑर ज़्यादा तेज़ी से और ज़्यादा

नीचे तक डालने की कोशिश करने लगा ऑर तभी 15-20 सेकेंड बाद ही मेरे लंड ने माँ के गले के अंदर तक

घुस कर स्पर्म की पिचकारियाँ मारना शुरू कर दिया ऑर मैने भी ज़ोर से लंड को माँ के मूह पर दबा लिया

जिस से मेरी बॉल्स माँ के लिप्स को टच करने लगी ,,,मैने लंड को तब तक पीछे नही किया ऑर ना ही माँ के सर

को अपने हाथों से छोड़ा जब तक स्पर्म की लास्ट बूँद तक माँ के गले से नीचे नही उतर गई,,,सारा स्पर्म

माँ के गले से नीचे गया एक बूँद भी माँ की ज़ुबान पर या माँ के मूह मे नही गिरी,,,मेरा लंड अब हल्का

सा सिकुड गया ऑर मैने भी माँ के सर को छोड़ कर लंड को बाहर करने की कोशिश की लेकिन तभी माँ ने

लंड को मूह मे भरे रखा ऑर चाट कर सॉफ करते हुए चूसने भी लगी,मेरा लंड अभी ठीक से सिकुड़ना भी

शुरू नही हुआ था कि वापिस माँ की ज़ुबान ऑर लिप्स के टच से ओकात मे आने लगा,,माँ ने 2 मिनिट मे ही

ऐसी मस्ती भरे अंदाज़ से मेरे लंड को मूह मे भरके चूसा था कि वो जल्दी ही फिर से हार्ड हो गया ,,

लंड के पूरे खड़े होने पर मा ने उसको मूह से निकाल दिया ऑर खड़ी हो गई ,,मैने माँ के खड़े होते ही

माँ के सर को पकड़ा ऑर लिप्स मे लिप्स जाकड़ कर किस करने लगा,, ऑर जल्दी से मां को किचन की शेल्व की तरफ

ले गया ऑर उनकी गान्ड को शेल्व से सटा दिया ऑर खुद ज़मीन पर बैठ गया ऑर माँ की टाँग को उठा कर माँ

की चूत को खोली और उसी हालत मे अपने फेस के सामने कर लिया ऑर जल्दी से अपने लिप्स को माँ की चूत से लगा कर चूत को चूसने लगा,,माँ ने भी एक टाँग मेरे उपर रखके खुद के हाथ शेल्व पर रखे ऑर सहारा लेके खुद की

टाँग को थोड़ा सा हवा मे उठा दिया ऑर मेरे फेस को आराम से चूत तक जाने का रास्ता दे दिया मेरा पूरा

फेस माँ की टाँगो के बीच समा कर माँ की चूत पर मेरे लिप्स रखने के लिया मेरी मदद करने लगा ,

मैने भी माँ की चूत को उसी अंदाज़ से चूसना ऑर चाटना शुरू किया जिस अंदाज़ से कुछ देर पहले माँ

मेरे लंड को चूस रही थी,,,मैं माँ की चूत के दोनो लिप्स को मूह मे भर लेता ऑर हल्के हल्के काटते हुए

चूसने लगता माँ भी सिसकियाँ लेके खुद जोश मे भरती जा रही थी ऑर उसकी सिसकियों से मेरा जोश भी चरम

सीमा पर पहुँच गया था मैने चूत को मूह मे भरा ऑर लिप्स को चूस्ते हुए अपनी ज़ुबान को चूत के

अंदर घुसा दिया ऑर ज़ुबान से चूत के अंदर बहते हुए रस को पीने लगा ऑर साथ ही चूत के लिप्स को बार

बात अपने दाँतों से काट देता,,जब भी माँ की चूत के लिप्स मेरे दाँतों के बीच आते ऑर मैं उनको हल्के

से काट देता तभी माँ की सिसकी मे एक हल्का दर्द सॉफ सुनाई देता जो कि मीठा दर्द था ऑर उसके बाद ही

माँ की ससिकियाँ ऑर तेज ऑर ज़्यादा लंबी होने लग जाती,,माँ ने अपने एक हाथ को शेल्व पर रखा ऑर एक हाथ को

नीचे करके मेरे सर को चूत पर दबा दिया,,,,,,,,,,,,,आहह ब्बेटया ऊऊरर ज्जूओर्रर्र

ससीए काटत्ट म्म्मीीररीि कच्छूवतत कककूऊ प्प्प्ूउर्रा म्मूउहह म्मईए बभ्ाररल्ली ख्हा ज्जा ईइससस्स

कच्छिीिककन्णिी कक्च्छाम्मील्लीी कक्कूव ,,,आहह उउउहह ऊऊहह

म्म्मीिररर्ाा प्पययार्रा ब्बीत्टता क्क्कीिट्त्न्नीी आक्च्छीी त्ताररह कच्छूत्त क्कू कच्छात्त क्कार्र माआ क्कीी

स्सीववा क्काररताा हहाईईइ अहह अहह उउउहह

ऊओररर उउउन्नड़दीर्र त्त्टाककक ज्जुउउब्बान द्दाल्लू अप्प्पननीी ब्बीतता प्प्प्ूउर्रिि उउन्नड़दीर्र त्टाककककककक

ग्घुउस्स्साआ द्डूऊ ऊओरर कच्ूदू अप्प्प्प्पनन्ी ज्जुउउब्बांन्न ससीए आप्प्प्प्प्पंंननन्न्निईीईईईईईईईई

म्म्म्मपमममाआआआआ ककक्कीईईई कचहूवततत्त कककूऊ आआआआआआआअहह उुउऊहह

माँ मेरे सर को कस्के अपनी चूत पर दबा रही थी फिर एक दम से उछल कर किचन की शेल्व पर चाढ़

गई ऑर मेरा सर भी छोड़ दिया ,,मैं भी जल्दी से उठा ऑर माँ की चूत को मूह मे भर लिया ऑर माँ आराम

से टाँगें खोल कर किचन की शेल्व पर लेट गई ,,,,मैने वापिस माँ की चूत को पागल पन वाले अंदाज़

मे चूसना शुरू कर दिया ऑर माँ ने भी मेरे सर को अपने हाथों मे पकड़ा ऑर चूत पर दबा दिया ऑर तभी

मैने अपनी ज़ुबान को चूत मे घुसा दिया ऑर अंदर बाहर करने लगा,,

आहह ब्ब्बेट्टया ऊओररर जजूर्र ससीए च्छुउऊस्सूऊ आहह उऊहह

हमम्म्ममममममममममममममम हहयययययययययययययययययययययी

आहह हम्म उूुुुुुउऊहह ऊओरर त्टीजज ब्बेतता ऊहह अहह

प्प्प्ूउर्रा क्काहह ज्ज्ज्जाऊ ईीसस्क्क्कूव आहह उऊहह फिर माँ ने मेरे हाथ पकड़े

जो माँ की दोनो टाँगो पर चूत के पास थे उनको पकड़ कर आपने बूब्स पर रख दिया ऑर मैने भी

बूब्स हाथ मे आते ही उनको दबाना शुरू कर दिया,,

आहह जज़ार्रा ज्जूओर्रर ससीए मास्सल्लूऊओ

ब्बीत्टता म्मीररी ब्बाददी ब्बाड़ददी ब्बूवबबसस्स ककूऊव जजूर्र्र ससीईए ऊररर ज्ज्ज्ूओर्र ससीए माँ

खुद भी अपने हाथों को मेरे हाथों पर रख कर अपने बूबे को मसलवाने मे लगी हुई थी ऑर मुझे तेज़ी

से बूब्स मसल्ने ऑर पूरी ज़ुबान चूत मे डालके चूसने को बोल रही थी मैं भी मस्ती मे पागलो की तरह

चूत को चूस्ते हुए ऑर चूत के लिप्स को काटते हुए माँ को पूरी मस्ती से मज़े दे रहा था,,,,,,फिर माँ ने

मेरे सर पर हल्के से मारा ऑर बोली,,,,,,,,,,,,,,,,आहह उूुुुुुुुउऊहह

आअब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब इूऊऊऊररर्र्र्र्र्र्र्र्ररर बबार्रददासशहत्त्तत्त न्नहहिि हूटता ब्बीतता ज्जल्लद्दददीई

सस्स्स्सीए ग्घुउस्स्साअ द्डूऊ आप्प्पंनईए म्मूओस्स्साअलल्ल्ल कककू म्मईरीइइ चहूऊवटत म्मीई

आहह ज्ज्जल्ल्लडदिईई क्काआररू ब्बीतता वव्ववीररनन्ना म्माआईयईईईईन्न्न्न् म्म्म्ररररर ज्जुउन्नगगीइइ आब्ब्ब ऊवार

म्म्म्मा त्त्ट त्टाद्दाप्प्पााू आहह ज्जाल्ल्लडददिईई द्दाल्लीी आपपंनईए मम्मूस्साल्ल ककूऊऊओ

ज्ज्जाल्ल्लदीीईई कककाररूव ब्बीत्टता ,,,

 


,तभी मैं भी सीधा खड़ा हो गया ओर माँ की टांगो को खोल कर ऑर

ज़्यादा फेला दिया ऑर थोड़ा खींच कर माँ को अपनी तरफ़ कर लिया जिस से माँ की चूत अच्छी तारह खुल कर

मेरे लंड के करीब आ गई ऑर मैने लंड को माँ की चूत से लगा कर एक ही जोरदार धक्के मे पूरा लंड माँ

की चूत मे घुस्सा दिया ,,,,,,,,,,,,माँ बॅस अया बब्बहार्रतटिईइ ररीहह गगगगगगगययईीीई

माँ अब किचन की शेल्व पर नंगी होके अपनी टाँगो को पूरी खोल कर ऑर खुली चूत को मेरे सामने

करके लेटी हुई थी ऑर मैं माँ की टाँगो के बीच मे नंगा होके पूरी ओकात मे आ चुके लंड के साथ

किचन के फ्लोर पर खड़ा हुआ था,,,,मैने अपनी लंड की टोपी को माँ की चूत पर रखा ऑर धक्का देके

अंदर घुसा दिया लेकिन पूरा नही घुसाया ,,,आधे ही लडन को पहली बार मे अंदर किया ऑर तेज़ी से उतने लंड

को ही अंदर बाहर करते हुए माँ की टाँगो को पकड़ कर माँ की चूत को चोदने लगा,माँ की चूत का

चिकना ऑर गर्म टच मेरे लंड की टोपी को अलग ही अहसास दे रहा था ऑर मस्ती को बढ़ा रहा था,,आहह

ककक़क्कीिट्टन्न्नाअ त्टताद्डप्पााअ र्राहहा हहाइईइ आजज्ज आपपननीी म्माआ क्कू ततुउउउ प्प्प्ूउर्राआआअ

ककककककक्क्कययउउुुुुउउ न्न्न््ड नाहहिईीई गगग्गघहुउऊउस्स्स्साआ र्रााहहाअ ईइसस्स मम्मूओस्स्साल्ल

कककककूऊ म्मीरीईईई ककककककककचूऊऊवटतत्तत्त म्म्मी,ईए आअहह म्म्म्मा आटततटटतत्त

टत्त्ताआद्ड्द्डप्प्प्पाा ब्बीतत्त्त्ताआ म्मात्त्तत्त ब्बान्न्न्न् इट्ट्टन्न्नाअ ज़्ज़्ज़्ज़ालल्ल्लीम्म्म्ममम आअहह

ऊऊओरर्र्ररर ग्घुउस्स्साअ उूउउन्न्ञददीर्रर प्प्प्ूउर्राा प्प्पीएल्ल्ल्ल्ल द्द्द्ड़ड़डीईई आप्प्प्पंंननणणनीईई

म्म्म्मपम्मूऊऊओस्स्सस्स्साालल्ल्ल कककूऊव म्म्मीरररर्रृिईई कचहूऊतततत्त म्मीईई ऊरर म्म्मीमररीइ

कककचहूऊतततत ककककूऊव प्पफाद्दद्ड ककक्कीए बब्बूवस्स्स्द्ड्दाा ब्बांन्नाआअ डदीईईई

आआहह द्दददाआाअलल्ल्ल्ल्ल न्न्न्ना आअ ब्ब्बबीत्त्ताआ एयियेसेज़्सी म्म्माीत्तत्त त्त्ताद्द्प्प्पाआअ

आअहह,,,,,,,,,,,,,,,,,मैने भी माँ की सिसकियाँ सुनी ऑर मस्ती मे टाँगो पर अपने हाथों की पकड़

मजबूत करते हुए पूरा लंड एक ही धक्के मे अंदर तक माँ की चूत की जड़ तक घुसा दिया ऑर घुसते ही

तेज़ी से स्पीड बढ़ा कर लंड को पूरा अंदर बाहर करने लगा ऑर धक्का भी पूरे ज़ोर से मारने लगा,,,,,,,,,,,,

आहह आब्ब्ब्ब्बबब आआय्य्ाआअ म्म्म्मा आआजजजजाआअ म्म्मीरररीई बबबीत्ताअ

अक़ााहह ईईआईसेससीए हहिईीई प्प्प्प्प्ुउउर्र्ररराआा म्म्म्मूओस्स्ससाााल्ल ददााल्लकक्क्ककके

कचहूऊद्ददड आआअप्प्पननन्िईीईई म्म्म्मा आआआ कककककक्कीईईईईईई कककचहूऊतततत्त ककककूऊव ऊऊऊ

आआआआहह ऊऊऊऊऊऊओह हयीईईईईईईईईईईई

आआआआआआआआआआअहह माँ की सिसकियों से एक मीठा ऑर उत्तेजिट्ट करने वाला शोर सारे

किचन मे गूंजने लगा था,,,माँ की चूत पानी छोड़ रही थी ऑर लंड को चिकना कर रही थी जिस से लंड

फिसल फिसल कर पूरा अंदर घुसने लगा था ऑर कुछ पानी माँ की चूत से बहता हुआ माँ की गान्ड के होल

पर लगते हुए किचन की शेल्व पर गिरने लगा था,,,,मेरी बॉल्स भी उस पानी से चिकनी हो गई थी ऑर जब भी

मेरा पूरा लंड माँ की चूत मे घुस्सता तो मेरी बॉल्स माँ की चूत से टकराती ऑर चूत के पानी की वजह से

एक पच की आवाज़ होती,,,,,,,,,जैसे जैसे धक्का तेज होता गया लंड पूरा अंदर घुसने लगा वैसे वैसे हर

बार जब बॉल्स चूत से टकराती तो पाcछ्ह पह की आवाज़ भी तेज होने लगती ऑर माँ की सिसकियों के साथ

मिलकर ये पाअकच पकककचह की आवाज़ ने एक अजीब ही महॉल बना दिया था किचन मे जो दिल मे मस्ती

की उमंग भरने के लिए काफ़ी था ,,,

माँ अपने ही हाथों से अपने बूब्स मसल रही थी ऑर बारी बारी से अपने बूब्स को अपने मूह मे भरके खुद

ही चुस्तो ऑर हल्के हल्के काट भी देती ऑर कभी बूब को पकड़ कर उसकी घुंडी को अपनी ज़ुबान से चाटने लग

जाती,,,,मैं भी अपनी स्पीड से माँ की चूत का बॅंड बजा रहा था ऑर माँ खुद भी अपने आप को ज़्यादा मस्त

करने की हर कोशिश कर रही थी,,कुछ देर बाद मैने भी मा की छूट मे लंड पेलते हुए अपने हाथ को

माँ की चूत पर रखा ऑर चूत के उपर वाले हल्के मास को अपनी उंगली ऑर उंगुठे से दबा कर सहलाने

लगा था,,मैने भी माँ को ऑर ज़्यादा मस्त करने की अपनी कोशिश शुरू कर दी थी ऑर उसका असर भी होने लगा

था क्योंकि माँ की सिसकियाँ अब ऑर ज़्यादा तेज होने लगी थी शायद किचन के साथ साथ पूरे घर मे उसकी सिसकियों

का शोर गूँज रहा था,,,,,आआआआआआआआआअहह ब्बीत्त्त्ाआअ ईीसस उउउण्नग्ल्लिइीई

ककककूऊ बभहिी ल्लुउउन्न्ड़डड़ क्की स्साआततह म्मीररीि कच्छूत्त म्मी ग्घुउस्साअ डीई आहह

आअहह उुउऊहह क्कीिट्त्न्ना ंमाज़्जा आ रर्राहहाअ हहाइी ,,तभी माँ के बदन ने भी झटके लेने

शुरू कर दिए ऑर कुछ ही देर मे माँ की चूत ने पानी छोड़ दिया जो माँ की चूत से होते हुए शेल्व पर ऑर

फिर किचन के फ्लोर पर गिरने लगा माँ अब भी सिसकियाँ ले रही थी ऑर ज़ोर ज़ोर से चोदने को बोल रही थी मैं

भी पूरी तेज़ी से लंड पेलते हुए उंगली को भी माँ की चूत से दबा कर सहला रहा था,,माँ का पानी निकलना

बंद हो गया था लेकिन सिसकियाँ अभी तक पूरे ज़ोर पर था ऑर उतने ही ज़ोर पर थी उनकी लालसा मेरे लंड को अपनी

चूत मे ऑर ज़्यादा अंदर तक लेने की,,,,,,आहह उूुुुउऊहह आअहह

हमम्म्मममममममममममममम उूुुुुुुुुुुउऊहह

र्ररुउुऊउक्कणणाआ न्नाहहिईिइ ब्बीत्ताआ ईएआईसेसीई हहिि ट्टीएजज़्ज़्जिई सससी प्प्प्प्प्प्ूउर्र्र्ररराआआआअ

म्म्म्म्मूऊवस्साअलल्ल्ल उूउउन्न्ड़दर्र्र ग्घूउऊउस्स्साआ क्काआररर ककककचहूऊडदड़त्ट्टीईईईईई

रर्रााहहूऊओ आअहह ,,

मैं समझ गया कि एक बार पानी निकलने के बाद भी माँ की संतुष्टि

नही हुई थी अब उसका 2न्ड राउंड शुरू हो गया ,,,,,,,,,,,ऑर संतुष्टि होती भी कैसे साली रंडी को एक टाइम मे

2 लंड लेने की आदत थी वो भी एक नही कम से कम 4 बार,,,,,,,जब तक 2 लंड से चुदाई के बाद उसका 4 बार

पानी नही निकलता था उसको चैन नही आता था इसीलिए तो एक बार पानी निकालने के बाद भी ही तुर्रंत दोबारा से

चुदाई को तैयार हो गई थी,,,,,,,

करीब 10 मिनिट ऐसे ही चोदने के बाद मैने माँ की चूत से लंड निकाल लिया ऑर माँ को एक साइड करके लेटा

दिया जिस से माँ ने अपनी लेफ्ट आर्म को एल्बो से बेंड करके किचन की शेल्व पर रखके उसका सहारा ले लिया ऑर

टाँगो को भी एक साइड कर लिया ,,मैने माँ की एक टाँग को उपर उठा कर हाथ मे पकड़ लिया ऑर लंड को

माँ की गान्ड पर रखा माँ ने भी खुद को हल्का सा हिला कर अपने आप को अड्जस्ट किया ताकि मैं लंड को

आराम से गान्ड मे घुसा सकूँ ,,मैने भी लंड को गान्ड पर रखा ऑर हल्के से धक्का लगाया लेकिन लंड

अंदर नही गया तभी माँ ने किचन की शेल्व पर रखी एक आयिल की बॉटल की तरफ़ इशारा किया मैने जल्दी से

जाके वो बॉटल उठाई ऑर वापिस आ गया फिर लंड पर खूब सारा आयिल लगा लिया ऑर फिर हाथ पर खूब सारा आयिल

लेके हाथ को माँ की गान्ड के पास किया ऑर दूसरे हाथ से माँ की गान्ड पर आयिल लगाने लगा,,एक हाथ पर आयिल

था ऑर दूसरे हाथ की उंगलियों को आयिल मे डुबो कर माँ की गान्ड पर लगाते हुए उंगली को माँ की गान्ड मे

डाल देता ऑर इस तरह थोड़ा आयिल माँ की गान्ड मे भी चला जाता फिर उंगली माँ की गान्ड मे अंदर करके हर

तरफ घुमा देता जिस से चारो तरफ आयिल लग जाता,,मैने अपने हाथ का सारा आयिल माँ की गान्ड पर लगा दिया

ऑर जो हाथ पर थोड़ा सा बच गया उसको अपने लंड पर अच्छी तरह हाथ आगे पीछे करते हुए मलने लगा फिर से

माँ की टाँग को हाथ मे पकड़ा ऑर उपर उठा दिया फिर लंड गान्ड पर रखा ऑर हल्का सा धक्का दिया तभी लंड

फिसल कर पूरा अंदर चला गया लंड ऑर गान्ड दोनो आयिल से इतने ज़्यादा चिकने हो गये थे कि मेरे हल्के से

धक्के से ही लंड पूरा अंदर चला गया ऑर मैं खुद को संभाल नही सका ऑर मेरी टाँग हल्की सी शेल्व

से टकरा गयी लेकिन माँ को एक एक झटके ने बहुत मज़ा दिया ऑर मस्ती मे माँ की सिसकियाँ एक दम से शुरू हो

गई ऑर मैं भी लंड को आगे पीछे करने लगा मेरा लंड बड़े आराम से फिसल फिसल कर अंदर जाने लगा एक

तो माँ की गान्ड इतनी ज़्यादा खुली थी उपर से इतना सारा आयिल लगा हुआ था कि लंड हल्के से धक्के से पूरा अंदर

घुसता चला जाता था ऑर माँ को मस्त कर देता साथ ही मेरे मे भी मस्ती भरने लग जाती ऑर मैं हल्के -2

स्पीड तेज करने लग जाता,,,अब गान्ड मे इतना ज़्यादा मज़ा आने लगा कि मेरी भी सिकियाँ शुरू हो गई ऑर मैं

भी माँ का साथ देने लगा ,,,,,,,,,,,,,,,

 
आहह म्म्म्मaमममममाआआआ आअपपककक्कीईईईई

गगगगगगाअंन्न्न्ँaदडड़ ब्ब्ब्बबभहूुूथत् म्माअस्स्टटत् हहाऐईयईई ईट्त्न्नाअ ंमाज़्ज़जा कच्छूवततत्तत्त

म्म्मवईए न्न्नाहहीी आट्टाअ ज्जििट्त्न्नाअ आपपक्कीईईई गगाणन्ँदडड़ म्म्मजईए आअत्त्ताअ हहाइईइ दडील्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल

कककाररर्त्त्ताआ हहाइईइ एआईसीए हहिि ल्ल्ल्लुउउन्न्ड़डड़ ग्घहुउस्स्साअ क्काररर आप्प्पक्कीी गग्ग्गाणन्ँद्दद्ड

ककक्कूव कचछूड्ड़तता र्रहहुउ ककब्भिि ब्बाहरारररर न्नाहहीी क्काररुउउ आपपन्ंनईए ल्ल्लुउउन्न्ड़डड़

कक्कूव आहह कक्क्क्यय्याअ म्म्म्मा स्स्थथतत्त गग्ग्गाणन्न्ँदडड़ हहाइईईई इट्टन्ननी ब्बाआद्ददडिईईई ऊओर

म्माम्मूओततीईइ म्म्माउस्स्थटत्त ग्गगाणन्ँद्दद्ड म्म्मीड ल्ल्लुउन्न्ड्ड़ दददााल्लक्क्कीए कचहूऊओद्दद्ड़नणनी

ककक्काा म्म्माडअज़्जजजाअ हहिि ककुउउक्च ऊओररर हहाऐी आहमम्म्माआआआआआ ब्भ्हुउत

म्म्म्मतमाआज़्जजज्जाआ आआ र्र्र्ररराहहााअ हहाइईईई उउउहह,,,,,,मेरी

स्पीड काफ़ी तेज थी ऑर उस से भी ज़्यादा तेज थी मेरी सिसकियाँ,,,,,,,,,

माँ भी मस्ती मे अपने हाथ को अपने बूब्स पर रख कर सहला रही थी ऑर ज़ोर से दबा रही थी फिर गार्डेन

को हल्के से नीचे करती ऑर बूब को हाथ मे पकड़ कर उपर करके मूह मे भर लेती ऑर हल्के हल्के काट-ती

हुए चूसने लगती,,,,,,फिर माँ ने अपने हाथ को आपकी गान्ड पर रखा ऑर गान्ड से हल्का सा आयिल अपने हाथ

पर लगा लिया फिर आयिल लगे हाथ से अपने बूब्स की कस कस के मसल्ने लगी,,,,हाथ की पकड़ तो पूरी तेज थी माँ

की ऑर मजबूती से माँ अपने हाथ से बूब्स को दबा रही थी लेकिन आयिल की वजह से बूब हाथ से फिसल जाता

जिसका एक अलग ही मज़ा आने लगा था माँ को जो उसकी सिसकियों से पता लग रहा था,,तभी माँ ने मेरा हाथ

पकड़ा जो माँ की टांग पर था उसको पकड़ कर अपने बूब पर रख दिया मेरे उस हाथ पर खूब सारा आयिल

लगा हुआ था जिसमे से काफ़ी आयिल माँ की टाँग पर लग गया था जहाँ से मैने माँ की टाँग को पकड़ा हुआ था,,

लेकिन अभी भी हाथ पर काफ़ी आयिल बाकी था जिस से मैं माँ के बूब्स को दबाने लगा लेकिन माँ का बूब हाथ

से फिसल जाता ऑर तभी माँ की सिसकी तेज़ी से निकल जाती,,तभी मैने माँ की उस टाँग को जो माँ ने खुद ही अपनी

हिम्मत से हवा मे उठाई हुई थी उसके अपने शोल्डर पर रखा ऑर माँ को करीब खीच लिया ऑर अपने

दोनो हाथों को माँ के बूब्स पर रख दिया ऑर तेज़ी से थोड़ा ज़ोर लगा कर दबाने लगा दोनो हाथ आयिल से पूरी

तरह चिकने हो गये थे जो मजबूती से फिसल फिसल कर माँ को मज़ा देने लगे थे ,,,,आआहह

ब्ब्बबबीएतत्टाआआ ऊऊररररर ज्ज्ज्जूऊर्ररर सस्स्सीए म्मास्सल्लूऊ म्म्मीसररीए ब्ब्बूओबब्बसस्स कककूऊऊ

ऊऊओरर्र्रर ट्टीएजज़्ज़ििीइ सस्स्स्सीए आहह ज्ज्ज्ूओद्दड़ ससीए द्डब्बा क्काअरररर म्मास्सल्लूऊ अहह

आहह उउउहह माँ की मस्ती पूरे ज़ोर पर थी तभी मेरा ध्यान पास ही पड़ी हुई एक

सब्ज़ी की बास्केट पर गया जिसमे मैने उसमे से एक बेंगन उठा लिया जो मेरे लंड जितना ही मोटा ऑर लंबा था

माँ मेरी तरफ गौर से देखने लगी शायद सोच रही थी कि इस बेंगन का मैं क्या करने वाला हूँ क्योंकि

जहाँ तक मेरा ख्याल था माँ के पास शुरू से ही कोई ना कोई लंड तैयार रहता था उसको चोदने के लिए,,कभी

डॅड का,,,,,,फिर मामा का,,,ऑर बाद मे विशाल का लंड भी तो तैयार हो गया था ऑर सबसे लास्ट मे मेरा भी

नंबर लग गया था इसलिए माँ को कभी बेन्गन की ज़रूरत ही नही पड़ी होगी,,माँ मेरे को अजीब नज़रो से

देखती जा रही थी,तभी मैने पास मे पड़ी हुई आयिल वाली बॉटल भी उठा ली लेकिन इस सब काम के बीच माँ की

टाँग अभी भी मेरे शोल्डर पर थी ऑर लंड माँ की गान्ड मे आगे पीछे हो रहा था लेकिन स्पीड थोड़ी

स्लो ज़रूर हो गई थी,,,,,

मैने पास ही पड़ी आयिल की बॉटल से कुछ आयिल लिया ऑर उसको बेंगन पर लगा दिया ऑर अच्छी तरफ से दोनो हाथो से उसको बेंगन पर हर तरफ लगा कर बेन्गन को चिकना कर दिया ऑर फिर बेंगन को माँ की चूत पर रखा

ऑर माँ की तरफ देखा तो माँ के चेहरे पर एक मस्ती भरी मुस्कान थी,,,मैने बेंगन को माँ की चूत

पर रखते ही जल्दी से अंदर घुसा दिया ऑर जैसे लंड की स्पीड कुछ देर पहले थी गान्ड को चोदने की उतनी ही

स्पीड से बेंगन को अंदर बाहर करते हुए माँ की चूत को बेंगन से चोदने लगा ऑर वापिस लंड की स्पीड

भी गान्ड मे तेज कर दी ऑर लंड को वापिस तेज़ी से माँ की गान्ड मे पूरा अंदर तक घुसाने लगा,,,,माँ को अब

2 लंड का मज़ा आने लगा,,,,,,,,,,,,,,,,,आआआआआआआआआहह उूुुुुुुुुुुउऊहह

म्म्म्मी ररर्राआ बबबीत्ताअ क्कीिट्त्न्नाआ क्क्हाअय्याल्ल रृाक्खहट्ता हहाीइ म्मेरर्राा क्कीिट्त्न्नाअ

ंमाज़्जाआ द्दीत्त्ताअ हहाीइ मम्मूउज़्झहहीए वउूओ बहिी ईककक ल्लुउन्न्ड़डड़ सीए 2 ल्लुउउन्न्ड़डड़ क्काअ

ंमज़्ज़जाआ,,,,,,,,,,,,,,,,ककक्क्क्ययययउउुउउ म्माआ म्ंओमाज़्ज़जाअ आआ र्राहहाअ हहाइईइ न्नाआआ ,,,,,,,,

,,,,,,,,,हहानं ब्बेतत्टाअ बभ्हुत्त् ंमाज़्जाआ एयेए रर्राहहाअ हहाऐईयइ टतेरेरी स्साटतह ततूऊऊ

व्वाईीइसससी बभीी बभ्हुत्त् ंमाज़्जाअ आट्टाअ हहाऐईयइ क्क्कययउउऊऊक्कीी ततुउउ आक्कील्ला हहिि 2 ल्लुउन्न्ड्ड़

क्काअ ंमाज़्जा डदीएतता हहाइईइ अप्प्पपननीी म्माआ क्कू ,,,म्माअंमा ऊओरर ववीिसशहाआाालल्ल्ल

क्क्कीिई क्काममी क्का ईईएहहस्साआअसस्स ब्ब्बभहिईिइ न्न्नाहहीी हहूननी द्द्द्दीत्ताअ,,,,,,आहह

बब्बेतटटा एआईसी हहीी म्ंनमाज़्ज़जा द्द्दीतते र्रर्राहहू आप्प्पनन्ी म्म्मातआ कक्कूव ऊओरर त्त्टीज्जूऊओ

सस्स्सीए ल्लुउन्न्ड्ड़ दद्दाल्ल्लूओ म्माआ क्कीईइ गगाणन्दड़ म्म्मयईए ऊओरर त्टीज्जजििीइ ससी चहूओद्दूऊऊओ

म्म्म्मएममीर्ररिइ कचूऊऊथततटतत्त ककककूऊव ब्बांनन्गगुउुन्न्ञन् सस्सीई आअहह उुउऊहह

माँ सिसकियाँ लेती रही ऑर मैं माँ की गान्ड को लंड से ऑर चूत को बेंगन से तेज़ी से पूरा अंदर घुसा कर

चोदता रहा,,,करीब 15 से मिनिट तक ऐसे ही चोदने के बाद मेरा पानी निकलने वाला हो गया ऑर मैने लंड

की स्पीड को गान्ड मे धीरे कर दिया ऑर बेंगन को माँ की चूत मे तेरी से अंदर बाहर करने लगा माँ को

शायद पता चल गया कि मैं ऐसे क्यू कर रहा हूँ मैं माँ के साथ ही झड़ना चाहता था

 


,,,माँ ने मेरे

हाथ को बेंगन के उपर से पकड़ा ऑर तेज़ी से आगे पीछे करने लगी ऑर मैं लंड को हल्की स्पीड मे गान्ड मे

पेलने लगा करीब 2-3 मिनिट बाद माँ ने अपने सर को हिला कर मुझे बता दिया कि अब वो भी झड़ने वाली

है तो मैने वापिस लंड की स्पीड को गान्ड मे तेज कर दिया ,,,माँ भी तेज तेज सिसकियाँ लेने लगी ऑर मैं भी

वैसे ही तेज तेज आहह भरने लगा ऑर तभी एक दम से मेरे बदन ने झटके मारने शुरू कर दिए मैने

मैने देखा कि माँ की टाँग जो मेरे शोल्डर पर रखी थी वो भी तेज़ी से झटके खा रही थी ,,तभी मेरे

लंड ने पिचकारी मारना शुरू कर दिया ऑर माँ की चूत ने भी पानी का एक तेज बहाव बहाना शुरू कर दिया

जो बेंगन की साइड से तेज़ी से निकलते हुए मेरी टाँगो पर गिरने लगा ऑर हल्की आवाज़ होने लगी जैसे चूत मे

से पेशाब निकलते टाइम होती थी ,,,,,

मैने भी अपने पानी से माँ की गान्ड को भर दिया लेकिन जब तक मेरा

सारा पानी गान्ड मे नही निकल गया मैने हिलना नही छोड़ा ऑर स्लो स्पीड मे लंड को अंदर बाहर करता

रहा माँ ने भी एक हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा हुआ था जिसमे बेन्गन था ऑर उसको धीरे धीरे आगे पीछे

कर रही थी,,,,फिर माँ ने आने हाथ को पीछे कर लिया ऑर खुद भी शेल्व पर पीछे की तरफ गिर गई ऑर तेज़ी से

साँसे लेने लगी मैने भी अपना लंड माँ की गान्ड से निकाल लिया ऑर किचन के फ्लोर पर नीचे लेट गया ऑर तेज़ी

से साँसे लेते हुए माँ की गान्ड को देखने लगा ,,,मेरा पानी माँ की गान्ड से निकल रहा था ऑर माँ की चूत

से निकलने वाले पानी के साथ मिलकर शेल्व से होते हुए किचन के फ्लोर पर ऑर कुछ मेरी टाँगो पर गिरने

लगा था,,,,,,,,,,,,,

उसके बाद जब हालत ठीक हुई माँ शेल्व से उतर कर नीचे मेरे पास किचन के फ्लोर पर आके लेट गई ऑर मेरे

लिप्स को बड़े प्यार से हल्के से किस किया ,,,,,,,,,,,,,,,

माँ--,मेरा बेटा कितना मज़ा देता है अपनी माँ को कितना ख्याल रखता है अपनी माँ का,,,,,,,,,तुझे भी मज़ा आया ना बेटा माँ की गान्ड मारने मे,,,,,,,,,,,,

मैं--हाँ माँ बहुत मज़ा आया,,,,,तो फिर क्या बोलता है एक बार ऑर मारेगा अपनी माँ की गान्ड

मैं कुछ नही बोला ऑर तभी माँ ने अपने सर को नीचे की तरफ किया ऑर मेरे लंड को ऐसे ही मूह मे भर लिया जो अभी सो रहा था ऑर मेरे स्पर्म ऑर आयिल से भीगा हुआ था,,माँ ने 2 मिनिट मे उसको सॉफ कर दिया ऑर फिर से खड़ा कर दिया, उसके बाद मैने फिर से माँ की गान्ड मारी ऑर चूत को बेंगन से चोदा तो कभी बेन्गन को गान्ड मे ऑर अपने

मूसल को माँ की चूत मे डालके 2 बार ऑर चोदा,,,,,,,, फिर मैने ऑर माँ ने मिलकर किसी के आने से पहले

किचन की सफाई की ऑर एक साथ नंगे होके माँ के बाथरूम मे नहाए भी ऑर हल्की मस्ती भी की लेकिन हमने

बाथरूम मे चुदाई नही की,,,,फिर मैं अपने रूम मे जाके लेट गया ऑर माँ भी बोली कि थोड़ी देर आराम

करके उनको खाना बनाना है,,,,,,,

 
अपने रूम मे लेटा हुआ था ओर मेरी आँख लग गई ऑर मेरे सर पर किस के हल्के से अहसास से नही नींद

खुली तो देखा बुआ मेरे बेड पर बैठ कर बड़े प्यार से मेरे सर पर हाथ घुमा रही थी,,,,,,,,

बुआ--उठज़ा मेरे प्यारे बेटा सन्नी,,,,

मैं भी आँखें मलते हुआ बेड पर उठकर बैठ गया,,,,,,,,,

बुआ--सॉरी सन्नी बेटा वो तेरी बड़ी पार्टी नही दे सकी मैं लेकिन आज पक्का दूँगी प्रोमिसस इतना बोल कर बुआ ने अपने पर्स से एक चाबी निकाली ऑर मुझे देते हुए बोली,,,,,,बेटा ये बुटीक के पीछे वाले गेट की चाबी है रात को खुद ही पीछे

वाले गेट से आ जाना क्योंकि सामने वाले गेट का काँच लगा हुआ है मैं नीचे आई तो कोई देख लेगा क्योंकि

मेरी हालत ठीक नही होगी क्योंकि तेरे लिए पार्टी का बंदोबस्त भी तो मुझे ही करना है,,,,,,,,,,

मैं--लेकिन बुआ बड़ी पार्टी है क्या,,,,,,,,,

बुआ--ये तो सर्प्राइज़ है बेटा वहाँ आना ऑर खुद ही देख लेना ,,,,,ठीक है अब मैं चली

तुम ठीक 9 बजे के करीब वहाँ आ जाना,,,इतना बोल कर बुआ वहाँ से चली गई,,ऑर मैं मन ही मन खुश

होने लगा क्योंकि जहाँ तक मेरा ख्याल था बड़ी पार्टी पूजा ही हो सकती थी ,,मैं बड़ा खुश था क्योंकि

काफ़ी टाइम से मैने पूजा की चुदाई नही की थी,,,,,,,,यह सोच कर मैं खुशी के मारे पागल होने लगा,,,,ऑर

तभी मेरी खुशी टेन्षन मे बदल गई,,,,,,मुझे मेरे दोस्त करण का फोन आया,,,,,जो बहुत गुस्से मे था

मैने पूछा कि क्या हुआ तो उसने कुछ नही बताय बस मुझे अपने घर पर बुलाया ,,,,,,,,,मुझे भी उसके

गुस्से से बहुत ज़्यादा टेन्षन होने लगी थी मैं जल्दी से तैयार हुआ ऑर बाइक लेके उसके घर की तरफ चल पड़ा

एक तो मुझे करण की टेन्षन थी क्योंकि वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त था ऑर दूसरा हल्की हल्की बारिश भी हो रही

थी मैं किसी के घर भीगे बदन नही जाना चाहता था इसलिए बाइक को उड़ाता हुआ करण के घर पहुच

गया,,,,,,,,,,,,मैने बेल बजाई तो करण की माँ बाहर आई उसकी माँ को देखते ही मुझे मस्ती चढ़ने लगी थी

क्योंकि जबसे माँ ऑर बुआ को चोदा था मुझे ज़्यादा उमर की लॅडीस मे भी दिलचस्पी पैदा होने लगी थी ऑर

कुछ ज़्यादा ही,,,,,,,,,,,,,,

मैं-नमस्ते आंटी ,,,,,,,,,,,,

आंटी--नमस्ते बेटा ,,,,,,हाउ आर यू बेटा,,,,,,,

मैं-आइम आंटी हाउ आर यू,,

आंटी -आइम ऑल्सो फाइन बेटा,,,,,,,,,,,,,,,

मैं--आंटी करण कहाँ है

आंटी--वो अपने रूम मे है बेटा आज कॉलेज भी नही गया ऑर

सुबह से अपने रूम से भी नही निकला हैमैने पूछा तो कुछ बता भी नही रहा है लेकिन कुछ परेशान

सा लग रहा है,,,तुम उसके दोस्त हो बेटा तुम ही पूछो शायद कुछ बता दे,,,,,,,

मैं--ठीक है आंटी मैं देखता हूँ क्या प्राब्लम है उसको ,,,,,,,मैं आंटी के पीछे पीछे अंदर चला गया ,,,,आंटी आगे चल रही थी ऑर मैं पीछे से उनकी बड़ी सी गान्ड को मटकते हुए देख रहा था एक दम मेरी माँ जैसी गान्ड थी इनकी भी

दिल कर रहा था अभी साली की सलवार उतार कर लंड पेल दूं,,,,,करण का नाम करण अरोरा था ,,,पंजाबी

था वो ऑर उसकी माँ तो एक दम मस्त थी,,,,,आपको तो पता ही है पंजाबी लॅडीस कितनी गोरी चिट्टी ऑर मस्त भरे

हुए बदन की मालकिन होती है,,,करण की माँ भी बिल्कुल वैसी ही थी एक दम मस्त गोरी चिट्टी बड़े बड़े बूब्स

ऑर बड़ी मोटी मस्त गान्ड ,,,,,,,,,,,

आंटी--तुम उसके रूम मे चलो बेटा मैं तुम्हारे लिए कुछ चाइ कॉफी लेके आती हूँ,,,,,,,,,,,,,,

मैं--नही आंटी इसकी कोई ज़रूरत नही मैं ठीक हूँ ,,,,,,,,,,

आंटी--अरे ऐसे कैसे बेटा इतने दिनो बाद तुम आए हो ऑर बिना चाय के कैसे जाने दूँगी तुमको,,,,,,अब जाओ करण के रूम मे मैं अभी तुम दोनो के लिए कुछ लेके आती हूँ,,,,,,,,,,,,,,आंटी किचन की तरफ चली गई ऑर मैं उसके किचन के अंदर तक जाते पीछे से उनकी गान्ड देखता रहा जब वो अंदर चली गई तो मैं भी करण के रूम मे चला गया,,,,,,करण

बेड पर लेटा हुआ था ऑर उसकी आँखों मे हल्के हल्के आँसू थे,,,,,,,,,,,मुझे देख कर वो जल्दी से मेरे

गले लग गया ओर किसी छोटे बच्चे की तरह रोने लगा,,,,,,,,,,,,,,,

मैं--अरे करण क्या हुआ दोस्त ऐसे रो क्यू रहा है,मैं उसको दिलासा देते हुए बोला

करण-सन्नी मैं बहुत दुखी हूँ यार ,,,,मुझे बहुत बड़ी टेन्षन है,,,,,,

मैं-क्या टेन्षन है करण मुझे बता मैं तेरा दोस्त हूँ,,,,,,,,तेरी टेन्षन मेरी टेन्षन,,,,,,,ऑर वैसे भी

दुख दर्द बाँटने से कम होता है,,,,,,,

करण--मुझे एक रिवॉल्वर चाहिए सन्नी,,,,,,,,,,,,,,,,उसने गुस्से मे रोते हुए बोला

मैं-र रिवॉल्वर ,,,,,,,,लेकिन किस लिए कारण ,,,आख़िर बात क्या है,,,,,,,,क्या ज़रूरत पड़ गई तेरे को रिवॉल्वर की

करण-मुझे किसी का खून करना है सन्नी,,,,,,,तू बता मुझे रिवॉल्वर दिला सकता है कहीं से ,प्लीज़ मेरे दोस्त

मेरा इतना काम कर दे,,,,,,,,

मैं--हाँ करण रिवॉल्वर तो दिला सकता हूँ लेकिन ऐसी क्या ज़रूरत पड़ गई तेरे को,,,,,,,,

करण-मुझे किसी को गोली मारनी है सन्नी,,,,,,,,वो पूरे गुस्से मे बोल रहा था,,,,

मैं--अच्छा तू ज़रा ठंडे दिमाग़ से बैठ कर मेरे से बात कर ऑर पहले बच्चों की तरह रोना बंद कर,,,,,बच्चों

की तरह रोता है तू गोली क्या मारेगा किसी को,,,,,,

करण--सन्नी तू बोल बस मुझे रिवॉल्वर लेके दे सकता है या नही,,,मैं उस हरामजादे को गोली मार दूँगा

 


मैं--किसकी बात कर रहा है तू करण ज़रा खुले बता यार बात क्या है,,,,,तेरी किसी से फाइट हुई है तो बता ,,,

करण--किसी से कोई फाइट नही हुई सन्नी बस किसी पे बहुत गुस्सा है उस हरामजादे को देखता हूँ तो खून खौल

उठता है,,,,,,,जान से मारने को दिल करता है उसको,,,,,,,,

मैं--करण पहेलियाँ मत भुजा यार बात बता प्लक्ष्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ किसी ने तुझे कुछ कहा है तो अभी बता साले को घर

से निकाल कर मारते है अभी इसी टाइम,,,,,,,,,

करण--नही सन्नी उसको तू नही उसको मैं मारूँगा,,,,,,,तू बस मुझे कहीं से रिवॉल्वर लाकर दे बस मेरे भाई

मैं--वो भी ला दूँगा करण पहले तू बात तो बता यार,,,,,,,,,तूने किसको गोली मारनी है ऑर क्यू मारनी है,,,,,

करण--उस हरामजादे अमित को,,,,,,,,,

मैं--अमित,,,,,,,,,,,,कॉन अमित,,,,,,,,,,,

करण--वही अपने कॉलेज का बिगड़ा हुआ कमीना,,,,,,,,,,,,,,साले को जान से मार दूँगा मैं,,,,,,,,

मैं--लेकिन बात क्या है बता तो सही ,,,,,,फिर मैं तेरे को अभी घर से अपने बाप की रिवॉल्वर लाकर देता हूँ,,

पहले पूरी बात बता मुझे जल्दी से,,,,,,

करण--सन्नी यार वो अमित,,,,,,,,,,,अभी उसने बोलना शुरू ही किया था दरवाजा खुला ऑर करण की माँ,,,अलका आंटी

कॉफी लेके अंदर आ गई ऑर करण एक दम से चुप कर गया,,,आंटी ने स्माइल देके मेरी तरफ देखा ऑर करण

को अजीब नज़रो से देखते हुए सामने टेबल पर कॉफी ट्रे रखी,,,,,

आंटी--,लगता है कोई ज़रूरी बात चल रही है दोस्तो मे,,,इतना बोल कर आंटी कॉफी रखके वापिस चली गई,,,,,,,,,,,,

मैं--अब बता क्या बात है,,,,,,

करण उठा ऑर दरवाजे के पास गया ऑर दरवाजे के बाहर अपनी मोम को देखा जब

उसको लगा कि उसकी मोम अपने रूम मे चली गई है तो उसने दरवाजा बंद किया ऑर वापिस आके वहीं बैठ

गया,,,,,,,,,,,,,,सन्नी तुझे तो पता है ना कि अमित हमारे कॉलेज का सबसे बिगड़ा हुआ लड़का है,,पता नही'

कितनी लड़कियों को अपने जाल मे फसा कर उनकी ज़िंदगी खराब कर चुका है,,,,,,,

मैं--,हाँ जानता हूँ अब किसकी जिंदगी खराब कर रहा है वो,,,,,,,,,,

करण कुछ देर चुप रहा ,,,,,,,,,,

मैं--करण बोल ना यार ,मैं तेरा दोस्त हूँ मेरे से क्यू छुपाता है,,,,,,जो भी है दिल मे खुलके बता ,,,,,,

करण--शिखा दीदी की,,,,,,,,,इतना बोल कर वो फिर से रोने लगा ऑर अमित को माँ बेहन की एक से एक बढ़ कर गालियाँ देने लगा,,,,,,,,,,,,

मैं--शिखा दीदी की,,,,,,,,तुझे किसने बोला,,,,,,,,लेकिन शिखा दीदी अमित को कैसे जानती है,ऑर अमित तो हमारा सीनियर

है,,,,,,ऑर शिखा दीदी को तो कॉलेज छोड़े 1 साल से उपर होने वाला है,,,,,,,,,,,

करण-हां सन्नी,,,,,,,,,,शिखा दीदी अपनी शादी से पहले ही कॉलेज छोड़ चुकी थी ,लेकिन अमित को वो पहले से

थोड़ा बहुत जानती थी,,,,,,,लेकिन आज कल उसके साथ बाइक पर ऑर कभी उसकी कार मे घूमती है,,,,,मैने कयि

बार देखा उनको ऑर मना भी किया कि अमित के साथ नही घुमा करे,,वो अच्छा लड़का नही है लेकिन शिखा

दीदी पर अमित के प्यार का भूत सवार है,,,,,,जब मैं उसको अमित की घटिया कर्तूते बताने लगता हूँ तो

वो बोलती है कि अमित ऐसा नही है,,,,,,,,,,,,ऑर उपर से अमित दीदी को बोलता है कि उसने मुझे कॉलेज की बास्केट

बॉल टीम मे नही लिया था इसलिए मैं उसको बदनाम कर रहा हूँ,ऑर मेरी बेहन मेरा नही उस हरामी

अमित का यकीन कर रही है,,,,,,,,,दीदी को समझा कर मैं थक गया हूँ अभी 2 महीने से दीदी ऑर अमित

का लफडा शुरू है ,,,,मैने कयि बार दीदी को समझाया बूत वो नही मानती,,,,वो तो अमित को बहुत अच्छा लड़का

समझती है मेरी किसी बात का यकीन ही नही करती,,,,,,,,,अब एक ही तरीका है दीदी को उसकी चंगुल से आज़ाद

करवाने का,,,,,उस साले अमित को ही रास्ते से हटा देता हूँ,,,,,,,,,,,,,जब तक उसके दिल पे गोली नही मारता

मुझे चैन नही मिलना,,,,,,,,,,,,

मैं--तू ठंडे दिमाग़ से काम ले मेरे भाई,,,,,,ऑर सबसे पहले अपने घर वालो को सब कुछ बता दे ,,दीदी ऑर

अमित के बारे मे,,,,,,,,,,,,,फिर अमित की सच्चाई भी बता देना अपने मोम-डॅड को,,,,,,,

करण--नही सन्नी मैं घर वालो को कुछ नही बता सकता,,,,,तू तो जानता है कि 6 महीने पहले ही दीदी की शादी

हुई थी ऑर शादी के 1 महीने बाद ही तलाक़ हो गया था,,,,,,,,एक तो मेरे घर वाले अब तक उसी बात को भूल

नही सके उपर से दीदी ऑर अमित के बारे मे पता चलेगा तो पता नही क्या करेंगे वो लोग,,,,,,ऑर डॅड तो कुछ

दिन पहले ही ऑफीस की तरफ से 4 साल के लिए गये अमेरिका,,,,अब उनको सब पता चला तो मुश्किल हो जानी है,,

वैसे भी अमित के लिए मैं अकेला ही काफ़ी हूँ,,,,,,,,,तू बस मुझे रिवॉल्वर लाके दे कहीं से भी,,,,,,,,

मैं--लेकिन तेरी दीदी शादी के बाद कैसे मिली अमित को,,,जब वो 1 साल पहले ही कॉलेज छोड़ चुकी थी,,,,,,,,,

तुझे पता है ना मेरी सिस अमित की सिस की अच्छी दोस्त थी,,,,,,बस उसके घर आना जाना था दीदी का ऑर पता नही

कब वो अमित की चुंगल मे फस गई,,,,,,,,,,अमित की तो पहले से ही दीदी पर नज़र थी ये मैं जानता था,

 
मैने सोचा क्यूँ ना साले को अपने दिल की बात बता दूं कि औरत तभी मूह मारने बाहर जाती है जब चूत की

खुजली बढ़ जाती है,ऑर इसकी दीदी तो थी भी कमाल की मस्त माल,,,,,,,,,,बड़े बूब्स ,,,,,,गोरा रंग,,,लंबा

कद ,,,,,,काले बाल जो गान्ड से भी नीचे तक आते थे,,,,,,साली की शादी हो गई थी फिर चाहे अपने पति के

घर 1 महीना ही रही थी फिर भी उसके पति ने एक महीना तो जम कर चुदाई की होगी उसकी,,,,ऑर उसको अब तक

कोई लंड नही मिला होगा इसलिए ज़्यादा खुजली होने लगी होगी तभी तो बड़ी आसानी से अमित के चक्कर मे फस

गई,,,,,,,,,अमित साला था भी कमीना पता नही कितनी लड़कियों की ज़िंदगी खराब कर चुका था,,,,,बड़े बाप

का बेटा था इसलिए पोलीस भी कुछ नही कर सकती थी,,,,,,कॉलेज की 2 लड़कियों ने तो उसकी वजह से ख़ुदकुशी

भी की थी क्योंकि साले ने उनका एमएमएस बना कर सब दोस्तो को सेंड कर दिया था ऑर सब दोस्त भी उन लड़कियों को

अपनी हवस का शिकार बनाना चाहते थे,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्यू ना साले को बता दूँ कि तू खुद अपनी बेहन की

चुदाई करनी शुरू कर्दे क्योंकि एक महीना अपने पति से चुदने के बाद अब उसको खुजली होने लगी है चूत मे

तू खुद उसकी चूत की खुजली दूर कर देगा तो उसको बाहर जाने की ज़रूरत ही नही पड़नी,,,,,,लेकिन साला पता

नही मेरी बात समझेगा या नही,,,,,,,,,,,

मैं-देख करण मेरे भाई,,,,,तू अमित से बदला लेना चाहता है तो गोली इसका एलाज़ नही है,,ऑर आज तू अमित को मार

देगा तो कल कोई ऑर आ जाएगा तेरी दीदी की लाइफ मे फिर तू क्या करेगा,,,,,,क्या उसको भी गोली मारेगा,,,,,,

करण-तो मैं क्या करू सन्नी तू ही बता,,,,वो साला मेरी बेहन की ज़िंदगी करब कर देगा,,,,ऑर मेरी बेहन मेरी

कोई बात नही सुनती,,,,,,

मैं-देख गोली इसका इलाज नही है,,,,,,,,,,,,जैसा मैं बोलता हूँ तू वैसा कर,,,,अगर मेरे पे यकीन है तो,,,

सबसे पहले तू अपनी दीदी को बोल कि अमित से शादी के लिए बात करे,,,,,फिर उसके बाद वो कम से कम उसको पूरे

15 दिन मिलें नही,,,,,,,,

करण--लेकिन सन्नी वो मेरी बात नही सुनेगी मैं जानता हूँ,,,,,,,,,

मैं--तू पूरी बात तू सुन यार,,,,,,,,,,,,दीदी को बोल कि उससे अपनी ऑर अमित की शादी की बात करे फिर,,कम से कम 15

दिन तक नही मिले,,,,,,,,,,ऑर बोल उसको कि 15 दिन मे तू उनको अमित के खिलाफ कोई पक्का सबूत लाके देगा

तभी वो तेरा यकीन करेगी,,,,,,,,,,ऑर अगर तू 15 दिन मे अमित क खिलाफ कोई सबूत लाने मे नाकाम रहा

तो फिर वो जो मर्ज़ी करे तू उसके बीच नही आएगा,,,,,,,,,,,,बस तू एक बार दीदी को इतना बोल ऑर बाकी सब मेरे

पर छोड़ दे,,,,,,,,,,

कारण-फिर तू क्या करेगा सन्नी..........ओर अगर दीदी नही मानी तो,,,,,,,,,,

मैं--मैं कुछ भी करूँ तेरे को अमित से छुटकारा दिला दूँगा बस,,,,,,,,,,ऑर दीदी को मनाना तेरा काम है,,,ये

तू कैसे करेगा ये तू देख,,,,,,,ऑर ये बात ज़ोर ज़बरदस्ती ऑर गुस्से से नही,,प्यार ऑर अपने पन से करना जैसे

तू उनका छोटा नही बड़ा भाई हाँ,ऑर प्यार से अपनी लिट्ल सिस को समझ रहा है,,,,,,,,,,,,,,,बाकी सब मैं खुद

संभाल लूँगा,,,,,,,,,ठीक है

करण-ठीक है सन्नी मैं कोशिश करता हूँ,,,,,,,,

मैं--कोशिश नही तुझे दीदी को मनाना ही होगा तभी मैं कुछ कर सकता हूँ,,,,,,

करण-ठीक है ,,,,मैं दीदी को मना लूँगा ,,,,वो भी प्यार से,,,,,,,,,,,

मैं-चल अब कॉफी पे ठंडी हो गई है,,,,,,,,ऑर टेन्षन भूल जा सारी अब ये तेरी टेन्षन मेरी टेन्षन है,,,,,

हम दोनो कॉफी पीने लगे,,,,अब करण के चेहरे पर टेन्षन नही थी,,,,वो मेरे को सब बता कर कुछ

राहत महसूस कर रहा था ऑर मैने जो उसको वादा किया था कि मैं अमित का कुछ ना कुछ एलाज़ कर दूँगा

वो भी पक्के तरीके से,,उसको इस बात से भी कुछ खुशी थी,,,,हम दोनो ने कॉफी ख़तम की ऑर मैं

उसको माल मे ले गया घुमाने के लिए ताकि वो कुछ मस्ती करे ऑर टेन्षन को पूरी तरह भूल जाए ऑर मैं

खुद भी उस टेन्षन को दिमाग़ से निकाल देना चाहता था क्योंकि मुझे रात को बड़ी पार्टी लेने बुआ के पास

जो जाना था,,,,,,,,काफ़ी टाइम हम लोग घूमते रहे ,,,,,,,,,,अभी हम लोग घर की तरफ जा रहे थे तभी बुआ का

फोन आ गया ,,,,,,,,,

बुआ-हेलो सन्नी,,,,,,,,,,आइ,म सॉरी बेटा आज भी तेरी बड़ी पार्टी नही हो सकती कुछ प्राब्लम हो गई है,,,,,,प्ल्ज़्ज़ आज तुम मत आना ,,,,,,,,,,,कल पक्का मैं कैसे भी करके तुझे बड़ी पार्टी ज़रूर दूँगी,

प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ बेटा,इतना बोलकर बुआ ने फोन काट दिया

मुझे कुछ बोलने का मोका ही नही दिया,,,,

करण-किसका फोन था सन्नी,,,,,,,,,,,,,,,

मैं--,कुछ नही यार घर से फोन था खाने पर बुला रहे है,,,,,,,,,मैने करण को उसको

घर छोड़ा ऑर खुद अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,,,,,मुझे घर दूसरे रास्ते से जाना था लेकिन मैने जान

भूज कर बुआ के बुटीक के रास्ते से जाने का सोचा आख़िर पता तो चले कि बड़ी पार्टी हर बार कॅन्सल क्यूँ

हो रही थी,,,,,,,,बुआ के बुटीक के पास गया तो देखा कि शॉप की तरफ का दरवाजा बंद था तो मैं पीछे

के रास्ते की तरफ गया ,,,,,बाइक साइड पर लगाके मेन गेट की एक साइड से देखा तो बुआ की कार अंदर ही थी,,ऑर

एक अक्तिवा भी था अंदर ये शोभा दीदी का नही था शायद पूजा का हो सकता था,,,,,वैसे भी पूजा ऑर उसकी

सिस अब बुटीक के उपर वाले फ्लॅट मे रहने लगी थी ऑर अगर पूजा अपनी सिस के सामने बुआ के साथ खेल सकती है

तो पक्का वो खुद भी शामिल होती होगी उनके खेल मे,,,ऑर अगर काम ही कर रही थी तो बुआ ने वहाँ रुक कर

क्या करना था ,,,,काम तो पूजा ऑर मनीषा ने ही करना था,,,,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था ,,,फिर

सोचा कि टेन्षन क्यू लेनी चलो घर चलते है,,मैने पॉकेट मे हाथ डाला बाइक की चाबी निकालने के लिए लेकिन

मेरे हाथ मे वो चाबी आ गई जो बुआ ने मुझे दी थी,,,,,बुटीक के पीछे वाले गेट की चाबी,,वही जिसपे अभी

मैं खड़ा हुआ था,,,मैने सोचा क्यूँ ना एक बार देख लिया जाए कि आख़िर हो क्या रहा है,,,,,अगर खेल चल

रहा है तो मैं भी खेलना शुरू कर दूँगा,,,,,,,,,,ऑर अगर वो लोग काम कर रही होंगी तो बोल दूँगा कि मैं

पास मे ही था तो सोचा एक बार मिलके चला जाता हूँ,,,,,,,,,

 


काम बना तो ठीक वर्ना यहाँ भी चाइ पीते है ऑर घर चलते है,,,,,मैने बड़े आराम से गेट खोला ताकि शोर ना हो,,लेकिन पहली बार ये गेट खोल रहा था इसलिए लाख कोशिश के बाद भी हल्का सा शोर हो ही गया,,,फिर अंदर गया ऑर सीडियाँ चढ़कर उपर चला गया,,,,,उपर वाला डोर भी लॉक था लेकिन उसकी चाबी भी थी मेरे पास,,,,,उसको आराम से बिना कोई आवाज़ किए खोलने मे कामयाब हो गया मैं ऑर बड़े आराम से हल्के कदमो से अंदर चला गया,,,,अंदर किचन की लाइट बंद थी ,,,,,, दोनो रूम के डोर भी बंद थे,,लेकिन एक रूम मे लाइट जल रही थी जिसकी हल्की रोशनी दरवाजे से बाहर आ रही थी,,मैं उस दरवाजे के पास गया तो अंदर से कुछ आवाज़ आ रही थी,,,,,,,,,,,अहह उूुुुुुुउऊहह

सिसकियों की आवाज़,,,,,,,,,मैने दरवाजे को खोलना चाहा तो वो अंदर से बंद था ,,,लॉक था या वैसे ही बंद

था पता नही,लेकिन अगर मैं खोलता तो आवाज़ हो जानी थी इसलिए मैने खोला नही,,,,,तभी मुझे अंदर से

दरवाजे के खुलने की आवाज़ आई ऑर मैं भाग कर किचन मे छुप गया,,,,तभी मैने वहाँ से चुपके बाहर

की तरफ देखा तो उस रूम से एक औरत बाहर निकली ऑर बातरूम मे चली गई,,,उसके बूब्स छोटे छोटे थे

ये बुआ तो नही थी पक्का क्योंकि ये हाइट मे बुआ से छोटी थी,,ऑर पूजा या शोभा दीदी भी नही थी क्योंकि

इसके बूब्स उनसे छोटे थे,,,,,मुझे लगा कि ये पूजा की सिस मनीषा तो नही,,,,ऑर मेरा शक सही निकला,जब

वो बाथरूम से बाहर आई तो बाथरूम की लाइट जलती छोड़ कर बाहर आ गई थी ऑर उसकी रोशनी मे मैने

उसके फेस को देख लिया था,,,,फेस क्या बहुत कुछ देख लिया था,,,,,,,,,,,,एक मर्द की आँखें होती ही एक्स-रे से तेज

है,,,,जो एक झलक मे सर से पैर तक देख लेता है,,,ऑर जब सामने खूबसूरत ऑर जवान लड़की हो तो एक्स-रे

करने का मज़ा ही कुछ ऑर होता है,,,,,वो वापिस रूम मे जाने के लिए उसी तरफ बढ़ने लगी ऑर मैं वापिस छुप

गया,,,,तभी उसके अंदर जाते ही कोई ऑर रूम से निकला ऑर बाथरूम की तरफ जाने लगा,,,,,लेकिन ये कोई औरत '

नही थी कोई मर्द था,,,,लेकिन कॉन था ये इस से पहले कि मैं बाहर निकल कर देखता वो बाथरूम मे घुस

चुका था,,,मैं बाहर से चुपके उसको देखने लगा कि कब वो बाहर आए ऑर मैं उसका चेहरा देखु,,,लेकिन

कोई फ़ायदा नही हुआ जब वो बाहर आया तो पहले से बाथरूम की लाइट बंद करके ही बाहर निकला था,,,मुझे

कुछ नज़र ही नही आया,,फिर वो रूम मे चला गया,,उसके अंदर जाते ही मैं भी रूम के दरवाजे की तरफ

आया ऑर देखने लगा,,उसने रूम के दरवाजे को अभी बंद नही किया था,,मैने हल्के से खुले दरवाजे से

अंदर देखा तो बुआ ऑर पूजा नंगे ही बेड पर थे ऑर किस कर रहे थे,,,ऑर पूजा की छोटी सिस मनीषा बेड

से टाँगे नीचे करके एक साइड पर बैठी हुई थी ,,तभी वो मर्द मनीषा के पास गया ऑर मनीषा ने उसके लंड

को मूह मे भर लिया ,,,बाहर बहुत अंधेरा था कोई मुझे नही देख सकता था लेकिन अंदर लाइट जल रही थी

ऑर मुझे सब कुछ नज़र आ रहा था सिर्फ़ उस मर्द का चेहरा नही,,,,,तभी वो मर्द बोला,,,,,,,गीता ज़रा डोर

तो लॉक करो,,,,,,ओह म्म्म्मडममममममय्यययी गगगगगगूद्द्द्द्दद्ड ,ये तो डॅड की आवाज़ थी,,,,मेरी तो

गान्ड ही फॅट गई थी,,,,,,,,ये क्या हो गया,,,,,,,,,साला जिसको घर मे सबसे शरीफ ऑर लाचार समझता था ऑर

सोचता था कि मेरा बाप कैसा है जो कुछ भी नही जानता मेरी माँ के बारे मे ऑर माँ अपने भाई ऑर बेटे से

चुदवा रही थी,,मेरे बाप को धोखा दे रही थी,,लेकिन मेरा बाप तो खुद सबसे बड़ा हरामी निकला जो

अपनी बेहन ऑर उसकी बुटीक मे काम करने वाली लड़कियों के साथ है,,,वो भी नंगा ऑर बाकी सब भी नंगे

है,,,,,,इस से पहले मैं कुछ ऑर देख पता बुआ ने डोर अंदर से बंद कर दिया,,,,,,,,,,,,

बुआ-क्या भाई यहाँ कॉन आने वाला है,,,,,गेट भी लॉक है ऑर सामने का डोर भी लॉक है,,,अब कॉन उपर आ सकता है,,,,,

पापा--कोई आए या ना आए बहना लेकिन तुझे पता है मैं हमेशा सावधानी बर्त-ता हूँ,,,

बुआ-ठीक है भाई अब कर दिया डोर लॉक अब तो टेन्षन फ्री हो जाओ,,,,,,,,फिर उसके बाद कोई आवाज़ नही आई बस हल्की हल्की सिसकियाँ गूँजती रही,,,,,,

मैं ज़्यादा देर नही रुका ऑर वापिस बाहर चला गया ऑर गेट लॉक करके बाइक लेके घर आ गया,

रास्ते भर मैं यही सोचता रहा कि मेरी फॅमिली तो साली रंडियों ऑर दल्लो की फॅमिली है,,,,,,,साला हर कोई

किसी ना किसी को चोद रहा है,,,,,,,,,,,,,माँ भाई ऑर विशाल एक साथ एक बेड पर होते है लेकिन किसी को नही

पता,,,,,,,,ऑर अब मैं भी उसके साथ होता हूँ,,,,,,,,,,,,,,इधर बुआ ऑर शोभा एक साथ,,ऑर अब मैं भी

उनके साथ हूँ,ये भी किसी को नही पता,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ऑर आज मेरा बाप बुआ पूजा ऑर मनीषा एक साथ

ये मेरे को पता है लेकिन किसी ऑर को नही पता,,,,,,,,,,,,ये साला हो क्या रहा है मेरे घर मे,,,इसका पता

तो लगाना ही पड़ेगा,,,,ऑर जवाब सबके पास है,,लेकिन मैं किस से पूछ सकता हूँ इसके बारे मे,,,,यही

सोचता हुआ मैं घर आ गया,,,,,,,,बेल बजाई ऑर कुछ देर बाद माँ बिखरे बाल लिए बाहर आ गई,,

माँ--अरे तुम तो आज करण के घर रहने वाले थे ना,,,,,,,,,,,,

मैं--हाँ माँ उसके घर वाले वापिस आ गये तो मैं भी आ गया,,,

मैं फिर अंदर चला गया,,,,,,मैने देखा कि मामा माँ के रूम मे लेटा हुआ था,,,,,मेरे अंदर देखते

ही माँ ने मेरी तरफ हँसके देखा,,,,,,

माँ--तू भी आएगा क्या मेरे बेटा,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं--नही माँ मैं सोने जा रहा हूँ कुछ थक गया हूँ,,,,,,,,,,,,,,मैं अपने रूम मे चला गया,,,रूम का डोर खोला तो सोनिया अपने बेड पर लॅपटॉप पर कुछ कर रही थी,,नोट्स बना रही होगी ऑर इसने क्या करना ,,,,,मुझे आते देख उसने लॅपटॉप बंद किया ओर मेरी तरफ पीठ करके चद्दर लेके लेट गई,,,मैने भी बाथरूम मे जाके शवर लिया ऑर अपने बेड पर आके लेट गया,,,साला सर फटा जा रहा था टेन्षन से,,,,कुछ समझ नही आ रहा था सोने से पहले शवर लिया ताकि नींद अच्छी आए ,,,लेकिन नींद तो आँखों से कोसों दूर थी,,,,लेकिन फिर भी मैं सो गया,,,,,,,,कब सोया कब आँख लगी पता नही चला,,,,,,,,,
 


सुबह उठा तो सब लोग नाश्ता कर रहे थे,,,,,,,,दाद भी आ गये थे,,,,,,,,,,

मैं--,अरे डॅड आप कब आए,,,,,

डॅड--बेटा बॅंक के काम से बाहर गया था आज ही सुबह आया हूँ 6 बजे की ट्रेन से,,,,,,

मैं-साला हरामी कितना झूठ बोल रहा है,,,,,कल बुआ की बुटीक पर था अकेला ट्रेन का एंजिन बनकर 3-3 बोगियों को संभाल रहा था,,,,,,,,,,मैने मन ही मन पता नही कितनी गालियाँ दी अपने बाप को ,,,,,,,नाश्ता कर ही रहा था तभी बाहर बेल

बजी ओर सोनिया उठकर चली गई,,,,,,,,,बाहर कविता आई थी ऑर सोनिया उसके साथ कॉलेज गई थी,,

लगता है भाई बेहन की फाइट अभी सॉल्व नही हुई,,,,,,,,,,,,,डॅड ने हस्ते हुआ बोला,,,,,,,,

मैने कुछ नही कहा ऑर नाश्ता करके कॉलेज को चला गया,,,,,,,,,आज कुछ खास नही हुआ बस बोर होता रहा पूरा दिन,,,,,,,,,,,,जब कॉलेजसे वापिस घर जा रहा था तो देखा कि कविता ऑर सोनिया बाहर गेट से कुछ आगे जाके रुके हुए थे,,,,,,,,,,मैने भी बाइक उनके पास रोक दी लेकिन मुझे देख कर सोनिया ने अपना फेस दोसरि तरफ कर लिया,,,,,,,,,,

मैं--क्या हुआ कविता,,,,,,,,,,,,

कविता-कुछ नही सन्नी ये अक्तिवा अपने आप बंद हो गई पता नही क्या हुआ इसको,,,,,,,,

मैं-मैं कुछ हेल्प कर सकता हूँ क्या,,,,,,,,,,

सोनिया--,कविता इसको जाने दो हम किसी ओर की हेल्प लेते है,,,,,,,,,,,

कविता-अरे बाबा तुम दोनोकी आपस की फाइट है इसमे अक्तिवा का या मेरा क्या कसूर ऑर वैसे भी किसी अजनबी की हेल्प लेने से बेहतर है किसी अपने की हेल्प लेना,,,सन्नी तुम इसको बोलने दो ,,,ये जब देखो गुस्सा नाक पर रखती है,,तुम प्लीज़ हेल्पकरो ना,,,,,,,,,,

,मैने बाइक को स्टॅंड पर खड़ा किया ऑर अक्तिवा को स्टार्ट करने लगा लेकिन वो स्टार्ट ही नही हो रही

थी,,,तभी मैने उसके पेट्रोल टांक मे देखा कहीं पेट्रोल तो ख़तम नही हुआ लेकिन पेट्रोल तो बहुत था उसमे

फिर मैने उसके कवर को उपर उठा कर प्लग पाना लेके उसका प्लग निकाला तो देखा उसपे बहुत सारा कार्बन

जमा हुआ था मैने प्लग सॉफ किया ऑर वापिस अक्तिवा स्टार्ट की तो वो स्टार्ट हो गई,,,,,,,,,,,,,

कविता--,थॅंक्स सन्नी,,

मैं-अरे इसमे थॅंक्स की क्या बात प्लग गंदा था मैने सॉफ कर दिया इसमे क्या बड़ी बात थी,,,,,

कविता--लेकिन फिर भी तूने हेल्प तो की ना हमारी,,,,,,,,

,हमारी नही सिर्फ़ तेरी,सोनिया गुस्से से बोली,,,,,,,,,,,

हाँ हाँ बाबा मेरी बस मेरी अम्मा ,,अब गुस्सा छोड़ ऑर बैठ घर चले,,पता नही कब तुम लोग बड़े होगे ऑर कब तुम्हारी ये

फाइट करने की आदत छूटेजी,,,,बाइ सन्नी,,,,,

मैं--,बाइ तो ठीक है लेकिन इस अक्तिवा को सर्विस के लिए भेज देना वेर्ना फिर से बंद हो जाएगी,,,,,,,,,

कविता--ठीक है सन्नी मैं भाई को बोल दूँगी,,,,,,,,,बयईईई

,मैने भी बाइ बोला ऑर वो चली गई मैने भी बाइक स्टार्ट की ऑर उनके पीछे पीछे चलने लगा क्योंकि मुझे भी उसी रास्ते जाना था लेकिन सोनिया को मेरा उनके पीछे पीछे आना अच्छा नही लग रहा था वो बार बार गुस्से से पीछे मूड कर देख रही थी,,,,तभी एक बाइक पर 2 लड़के आए ऑर उन दोनो से छेड़खानी करने लगे,,,,मैने आगे जाके सालो को मारना

चाहा लेकिन सोनिया ने खुद ही उनको भला बुरा सुना दिया ,लेकिन वो लोग ऑर ज़्यादा बत्तमीजी करने लगे तो कविता

ने अक्तिवा रोक दी ऑर सोनिया नीचे उतर कर उनको थप्पड़ मारने लगी तभी एक लड़के ने सोनिया का हाथ पकड़ लिया

ऑर दूसरे ने कविता की अक्तिवा का हॅंडल को पकड़ लिया,,,,,,,,,,,,मैं थोड़ा पीछे था ओर मैने बाइक को एक दम

रेस देके उनकी तरफ पूरी तेज़ी से भगाना शुरू किया ऑर मुझे देख कर सोनिया जल्दी से हाथ छुड़ा कर हल्के

पीछे हो गई ऑर मैने बाइक को सीधा उन लोगो के बाइक की तरफ मोड़ कर उनके पास पहुँचने से पहले ही अपनी

बाइक से जंप करके साइड मे कूद गया ऑर मेरा बाइक करीब 60 या 80 की स्पीड ये उन लोगो की बाइक से टकरा गया

हलकी हल्की सी टक्कर कविता की अक्तिवा को भी लगी लेकिन बाइक पर ज़्यादा ज़ोर से टक्कर लगी ऑर वो दोनो लड़के गिर गये बिके पर जंप करने से मेरे भी हाथ पैर पर हल्की चोट लगी थी लेकिन मैं भाग कर उन लड़को के पास

गया ऑर एक को ज़मीन से उठा कर उसके सर मूह ऑर पेट मे ज़ोर से घूँसे मारने लगा ऑर दूसरा जो अब तक

ज़मीन पेर ही गिरा हुआ था उसको वही पड़े पड़े उसके पेट ऑर कमर पर ज़ोर से टाँगे मारने लगा,,,,मैं

फाइट के मामले मे पूरा पागल था जब भी लड़ता तो ये नही देखता किसको लग रही है ऑर कितनी लग रही है मैं

पागलो की तरह उन दोनो को मार रहा था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,साले मेरी बेहन को छेड़ता है,मार डालूँगा जान

से ,,,,मैं बहुत बुरा मार रहा था उनको आस पास भीड़ भी ज़मा हो गई थी लेकिन मेरे गुस्से को देख कर

कोई बीच मे नही आ रहा था,,,कविता तो अपनी अक्तिवा से उतर कर साइड मे हो गई थी ऑर बहुत ज़्यादा डर गई

थी,,,लेकिन सोनिया वही खड़ी मुझे देख रही तो ऑर रोती हुई मुझे बोल रही थी प्ल्ज़्ज़ सन्नी छोड़ दो इनको

मर जाएगा कोई प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ सन्नी माफ़ कर दो इनको मैने भी माफ़ कर दिया,,,,,,सन्नी प्लज़्ज़्ज़ लेकिन मैं उसकी

भी कोई बात नही सुन रहा था मैं तो बस पागलो की तरह उन दोनो को मार रहा था,,,एक बंदे ने उन लड़को

की तरफ से बीच बचाव करने की कोशिश की तो मैने उसको भी धक्का देके साइड कर दिया ऑर कविता भी

वहाँ भीड़ से बोलने लगी कि मैं उनका भाई हूँ ऑर इन लड़को ने हमसे बत्तमीजी की थी लेकिन साथ ही वो

सबको बोल रही थी कि मुझे रोके ,लेकिन कोई बीच मे नही आ रहा था,,,,,,,,तभी मुझे किसी ने पीछे से

पकड़ा ऑर मैने उसको कस्के मूह पर थप्पड़ मारा ऑर वो गिर गया,,,,ओह शिट ये तो सोनिया थी,,,,,उसके फेस पर

मैने गुस्से से ऑर पूरे ज़ोर से मारा था मेरी 5 फिंगर उसके मूह पे छप गई थी ऑर लिप्स से खून भी बहने

लगा था,,,,,मैने उसको हाथ से पकड़ कर उठाया ऑर उसने मेरा हाथ झटक दिया लेकिन गुस्से से मुझे नही

देखा बल्कि अजीब नज़रो से देखने लगी थी,,उसकी नज़रो मे क्या था मुझे पता नही चल रहा था,,,तभी

उसने कविता की अक्तिवा को स्टार्ट किया ऑर कविता को बैठने को बोला ऑर कविता भी बैठ गई ऑर वो दोनो वहाँ से

चली गई,,,ऑर इतनी देर मे वहाँ पोलीस आ गई ऑर उन लड़को को पकड़ लिया ऑर साथ मेमुझे भी पकड़ लिया,,,

,,मैने उनको लाख समझाया कि ग़लती इन लड़को की थी लेकिन वो नही मान रहे थे,,,भीड़ के लोगो ने

भी समझाया तो उन लोगो ने मुझे छोड़ दिया ऑर मुझे पूछा कि इन लड़को के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवानी है तो

मैने मना कर दिया क्योंकि मैं खुद ही उनको बहुत सज़ा दे चुका था,,,,,,,,जी नही सर इनको इनकी सज़ा मिल गई

है,,,,,,,,,,,पोलीस ने भी उन लड़को को वॉर्निंग देके छोड़ दिया,,,,,,,,,,,,,वो लोग वहाँ से चले गये ऑर भीड़

ही अपने अपने रास्ते पर निकल गई,,,,,,मैने भी बाइक स्टार्ट किया जो कि अब बहुत बुरी हालत मे था,,लेकिन फिर

भी स्टार्ट हो गया था,,,,,,,,,,,,मैं घर की तरफ चल पड़ा,,,,,,,,,,रास्ते मे मैं अजीब उलझन मे रहा,,कि

आख़िर सोनिया की नज़रो मे क्या था,,वो ऐसे क्यू देख रही थी मुझको,,,,,,मैं तो उसके लिए ही फाइट कर रहा था

फिर उसको क्या हुआ,,,,,,लेकिन वो गुस्सा तो नही था जो उसकी आँखों मे था,,फिर क्या था वो,,,,

मैं घर पहुँचा तो कपड़े गंदे थे,,ऑर हल्की चोटे भी लगी हुई थी जहाँ से खून बह रहा था,,,,,,,

माँ परेशान हो गई,,,,,,,,

माँ--,हे राम ये क्या हुआ मेरे बेटे को इतनी चोट कहाँ से लग गई,,,,,क्या हुआ मेरे

बेटा,,,,तभी माँ भाग कर अपने रूम मे गई ऑर मेडिसिन वाला बॉक्स लेके आई ऑर फिर किचन मे चली गई

ऑर गर्म पानी करने के लिए गॅस पर रखा ऑर वापिस आके मेरे पास बैठ गई,,मेरे कपड़े जगह जगह से फटे

हुए थे पॅंट भी और टी-शर्ट भी,,,ऑर कयि जगह हल्की खरोन्चे लगी हुई थी जहाँ से हल्का खून बह रहा

था,,,,चल जल्दी कपड़े निकाल अपने बेटा मैं जख़्मो को सॉफ करके दवाई लगा देती हूँ,,

मैं--माँ मैं ठीक हूँ हल्की खरोंच है बस ठीक हो जाएगी

लेकिन माँ ने मेरी कोई बात नही सुनी ऑर खुद मेरे कपड़े उतारने लगी ,माँ मेरी पॅंट उतारने लगी ,,,,,,,,,,,

मैं-रूको माँ मैं उतार देता हूँ,,,,,,,,,

माँ--अरे शर्मा क्यू रहे हो पहली बार उतार रही हूँ क्या,,,,

मैं--माँ मैने नीचे अंडरवेार नही पहना,,,

माँ हँसने लगी ऑर उठकर अपने रूम मे गई ओर टवल लेके आई मैने अपनी कमर पेर टवल लपेट कर पॅंट निकाल दी ऑर टवल मे सोफे पेर बैठ गया,पहले तो पता नही चल रहा था लेकिन कपड़े उतर जाने के बाद पता चला कि कहाँ कहाँ जखम लगे थे, कई जगह पर तो पूरी स्किन उतर गई थी,,,,बड़ा हीरो बनके जंप किया था ना बाइक से अब भुग्तो,,,,,,साला पहले तो पता नही चला लेकिन अब ज़ख़्मों को देख देख कर दर्द भी होने लगा था,,,,,

माँ--तेरा ये हाल हुआ कैसे मेरे बेटे,,,आक्सिडेंट हुआ क्या,,,,,,,,,,,,

मैं--,माँ वो मेरे,,,,,,,,,,,अभी मैने बोलना शुरू ही किया तभी डोर खुला ऑर मैने पीछे मूडकर देखा तो कविता ऑर सोनिया अंदर आ रही थी,,,

सोनिया ऑर कविता हमारे पास आके खड़ी हो गई थी,,,,,,,मैं कविता से शर्मा रहा था क्योंकि वो मुझे घूर रही थी ओर हल्के से शर्मा भी रही थी,,,,,सोनिया की आँखें अभी भी थोड़ी नम थी ऑर लिप्स पेर हल्का सा खून लगा हुआ था जो मेरे थप्पड़

मारने से निकला था ,,,,,,माँ ने सोनिया के लिप्स पर खून देखा तो उसको भी पूछने लगी ,,,,,,,,,,,तेरे को क्या

हुए बेटी,,,,,,एक तो तेरे भाई को चोट लग गई इतनी अब तुझे क्या हुआ,,,,हमारे घर को तो नज़र लग गई किसी

की मेरे दोनो बच्चों को चोट लग गई,,,,,,,,माँ की आँखें भी थोड़ी नम हो गई थी,,,,,,,,,तुझे क्या हुआ सोनिया

बेटी,,,,,तेरे भाई का तो आक्सिडेंट हुआ तेरा भी कहीं,,,,,,,,,,,,

तभी सोनिया बोल पड़ी,,,,,,माँ भाई का आक्सिडेंट नही हुआ ऑर ना ही मेरा,,,,,,,,,,,माँ सोनिया के मूह की तरफ देखने लगी ओर मेरा ध्यान भी उसकी तरफ था,,,

तभी सोनिया ने मा को सब कुछ बता दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

माँ--अरे तेरे को तो खुश होना चाहिए बेटी तेरे को ऐसा भाई मिला जो तेरी हेल्प करता है,वक़्त रहते तेरे काम आता है,,,,बड़ी किस्मत वाली है तू बेटी जो तुझे ऐसा भाई मिला ऑर मुझे ऐसा बेटा,,,,,,,,,,इतना बोल कर माँ ने मुझे गले लगा लिया ऑर किचन मे चली गई गर्म पानी लेने,,,,

,सोनिया मेरे पास खड़ी हुई थी ओर उसकी आँखें नम थी लेकिन साली कविता मेरे नंगे जिस्म को बड़ा

घूर कर देख रही थी तभी माँ ने गर्म पानी वाला बर्तन सामने टेबल पर रखा ऑर एक कपड़े को पानी से

भीगो कर मेरे ज़ख़्मों को सॉफ करने लगी,,,,माँ को देख सोनिया ने भी एक कपड़ा लिया ऑर माँ की तरह मेरे

ज़ख़्मों को सॉफ करने के लिए मेरे सामने पड़े टेबल पेर बैठ गई,,ऑर मेरी टाँगों को अपने हाथ से टेबल पर

रखा ऑर मेरे टाँगों पर लगे ज़ख़्मों को सॉफ करने लगी,,माँ मेरी पीठ ऑर हाथ पर लगे ज़ख़्मों को

सॉफ कर रही थी ऑर सोनिया मेरी टाँगों पर लगे ज़ख़्मों को सॉफ करने लगी,,,,सोनिया की आँखों से आँसू निकल

कर मेरी टाँगों पर गिर रहे थे,उस मासूम की आँखों मे आँसू मुझे अच्छे नही लग रहे थे क्योंकि

मैने उस क्यूट ऑर मासूम चेहरे पर हमेशा मुस्कान ही देखी थी,,आज उस चेहरे पर उदासी ने मुझे

मेरे जख़्मो से भी ज़्यादा हर्ट किया था,,,,,,मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था,,,क्योंकि मैने उस मासूम

के चेहरे से मुस्कान छीन कर रोने को मजबूर किया था,,,,,,,,

जखम ज़्यादा गहरे नही थे बस हल्की सी स्किन छिल गई थी,,,जिसपे माँ ने सॉफ करके दवाई लगा दी थी,,,ऑर

सोनिया मेरी टाँगों पर दवाई लगा रही थी,,मैं टवल मे था मुझे बहुत अजीब लग रहा था,,,वैसे नंगा

बैठा होता 3 लॅडीस के सामने तो लंड महाराज एक पल मे ओकात मे आ जाते लेकिन आज मेरा दिल कुछ अजीब सी

बेचैनी मे था कुछ समझ नही आ रहा था,,,,,,दवाई लगते ही मैं एक दम से वहाँ से उठा ऑर अपने रूम

की तरफ जाने लगा,,,,,अभी सोनिया मेडिसिन लगा रही थी लेकिन मैं उठा ऑर दवाई बीच मे ही लगाते वहाँ से

उठ गया,,,,,,,,,,,,,,,

माँ--अरे कहाँ जा रहे हो बेटा दवाई तो ठीक से लगाने दो,,,,,,,,,

,मैं कुछ नही बोला ऑर वहाँ से सीधा अपने रूम मे चला गया ऑर अंदर से लॉक कर लिया,,,,,,,,,,,,माँ मेरे पीछे पीछे मेरे रूम तक आई ऑर बाहर से डोर पर नॉक करने लगी,,,,,,,,,,,,,,,,

माँ--सन्नी बेटा दवाई तो ठीक से लगाने दो,,,,,,,,,,,

माँ--बस माँ लग गई दवाई अब मुझे आराम करने दो आप जाओ यहाँ से,,,,,,,,

फिर सोनिया की आवाज़ आई,,,,,,,,,भाई मेडिसिन लगा लो प्लज़्ज़्ज़्ज़ ,,,,,,,,,,,

लेकिन मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,,,,,,कुछ देर तक दोनो डोर पर नॉक करती

रही लेकिन मैने डोर नही खोला ऑर वो लोग चली गई,,,,,,,,,,मैं चुप चाप से बेड पर बैठ गया ,,,मुझे

बड़ा अजीब फील हो रहा था कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं ऐसे उठकर क्यूँ आ गया,क्या हुआ था मुझे,

,,,,,,,,,,,,,,,कुछ 15-20 मिनिट बाद रूम के डोर पर नॉक हुआ

मैं--कौन है,,,,,,,,,,,

कविता--सन्नी मैं हूँ कविता,,,,,,,,,,,,,

मैं--क्या चाहिए तुझे,,,,,,,,,,,,

कविता--आंटी ने गर्म दूध ऑर पेन किल्लर दी है,,,,,,ये दूध पी लो ऑर मेडिसिन खा लो,,,,,,,,,,,,

मैने डोर खोला ऑर उसके हाथ से दूध ओर मेडिसिन लेने लगा ,,,,,,,,मेरा हाथ उसके हाथ से ढूढ़ का ग्लास लेने मे लगा हुआ था जबकि मेरा ध्यान उसके चेहरे की तरफ था वो बड़ी ध्यान से मेरे जिस्म को देख रही थी,देख क्या रही थी घूर रही थी,,,,उसने मुझे दूध ऑर मेडिसिन दी ऑर हँस कर वापिस नीचे चली गई,,,,,मैने भी दूध पिया ऑर मेडिसिन लेके बेड पर लेट गया,,,,,,पेन किल्लर से नींद भी आती है इसलिए बेड पर लेट-ते ही मेरी आँख लग गई,,,,,,,,अगले 2 दिन मैं अपने रूम से नही निकला एक तो मेडिसिन की वजह से कपड़े नही पहन सकता था ऑर दिल भी नही कर रहा था बाहर कहीं जाने को,,,,,,,,बस रूम मे लेटा रहा ऑर बोर होता रहा,,,,,,,,,कोई भी मिलने आता तो मैं रूम नही खोलता ऑर किसी को अंदर नही आने देता माँ भी खाना देके बाहर से ही चली जाती,,,,मेडिसिन भी खुद ही लगाता था,,,,बस एक बार डॅड को अंदर आने

दिया था क्योंकि उनको नही रोक सकता था मैं,,,वो भी बस 2 मिनिट ही मेरे पास बैठे ऑर चले गये,,,,,,

सोनिया भी 2 दिन कविता के घर पर ही रही थी,,,,,,

 
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