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कहीं वो सब सपना तो नही complete

माँ उठी ऑर किचन मे चली गई वो कुछ परेशान लग रही थी,,,

मैं माँ की जगह पर दीदी के साथ बैठ गया ऑर टीवी देखने लगा,,,,,,मैं टीवी देख रहा

था तभी मुझे मेरे लंड पर कुछ हरकत महसूस हुई मैने नीचे देखा तो दीदी का

हाथ मेरी पैंट के उपर था ऑर वो मेरे लंड को हाथ मे लेके दबा रही थी,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--क्या कर रही हो दीदी माँ देख लेगी,,,,,,,,,

शोभा--,माँ किचन मे है नही देखेगी वो,,,,,,,,,,,,

सन्नी-लेकिन दीदी,,

तभी दीदी ने मेरी बोलती बंद करवा दी,,,तुझे नही पता सन्नी तेरी खातिर आज मैं कॉलेज नही गई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी-क्यू दीदी,,,,,,,,,,

शोभा-आज मेरा बहुत दिल था तेरे से चुदाई करने को,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी-लेकिन दीदी माँ तो घर पे है फिर कैसे हो सकता है ,,,,,,,,,,,

शोभा--स्टुपिड जानती हूँ माँ घर पे है लेकिन सुबह गाओं से फोन आया था माँ के चाचा जी बहुत बीमार है शायद अब नही

बचने वाले हॉस्पिटल वालों ने भी जवाब दे दिया है इसलिए माँ ऑर मामा थोड़ी देर मे निकलने वाले है,,,,,,,,,इतनी देर मे माँ नाश्ता लेके आ गई,,,,,,,,,,,,

सन्नी--अरे इतनी जल्दी तैयार हो गया नाश्ता माँ,,,,,,,,,,,,,,,,

माँ-हाँ बेटा सुबह सॅंडविच बनाए थे तो तेरे लिए भी बनाकर फ्रिड्ज मे रख दिए थे,,,,,,,इतना बोलकर माँ ने सॅंडविच वाली प्लेट मुझे दी ओर खुद अपने रूममे चली गई इतने मे मामा बाहर से आ गया ऑर माँ के रूम मे चला गया ,,,मैं नाश्ता

करने लगा ऑर टीवी देखने लगा जबकि दीदी टीवी देखते हुए बार बार मेरे लंड की दबा रहीथी मुझे डर था कोई देख ना ले लेकिन दीदी तो समझ ही नही रही थी ऑर मस्ती करती हुई बार बार मोका देख कर मेरे लंड को हल्के से दबा देती,,,,,,,,,,,,,कुछ देर बाद माँ ऑर मामा जी बाहर निकले माँ के रूम से मामा के हाथ मे एक बॅग था,,,,,,,

सन्नी-माँ आप लोग कहाँ जा रहे है,,मैं जानता तो था अभी कुछ देर पहले ही दीदी ने बताया था लेकिन फिर भी अंजान बनतेहुए मैं माँ से पूछ रहा था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

माँ=बेटा मेरे चाचा जी की तबीयत ठीक नही है उन्ही की खबर लेने गाओं जा रहे है 3-4 दिन लग जाने है ,,,,,,,अब माँ झूठ तो नही बोल रही होगी क्यूकी पहले तो भाई के पास जाती थी माँ गाओं जाने का झूठा बहाना करके लेकिन अब तो भाई भी नही है ,,तो माँ को सच मे गाओं ही जाना होगा,,,,,,,,,,,,,,,,मैं प्लेट रखकर माँ ऑर मामा से मिला दीदी ने भी उनको बाइ बोला ऑर माँ के बाहर जाते ही गेट को बंद करके मेन डोर को भी लॉक किया ओर जल्दी से मेरे पास आ गई,,,,,,मैं अभी नाश्ता कर ही रहा था

,,,मेरे पास आते ही दीदी ने लंड को पॅंट से बाहर निकालने की कोशिश की ,,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी-रूको दीदी पहले नाश्ता तो कर लेने दो,,,,,,,,,,,,,,,,,

 


सोभा-तेरा पेट तो भर गया होगा अब तक अब मुझे भी मेरा पेट भरने दे सन्नी इतना बोलते ही दीदी ने लंड को बाहर निकल लिया ओर जल्दी से मुँह मे भर लिया,,ऑर मेरे हाथ से सॅंडविच वाली प्लेट को साइड के सोफे पर रख दिया मेरा लंड कुछदेर पहले दीदी के हाथों से हल्का हल्का दबा कर कुछ हद तक ओकात मे आ चुका था लेकिन दीदी के मुँह मे जाते ही लंड ने ज़ोर ज़ोर से अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया,,दीदी ने मेरे लंड को इतनी मस्ती से ऑर पागलपन से चूसना शुरू किया था कि कुछ ही पल मे लंड फुल ओकात मे आ गया ऑर मस्ती से मेरा बुरा हाल होने लगा ,,इतना बुरा हाल की मुँह मे जो सॅंडविच का एक छोटा सा टुकड़ा था उसको चबाना भी मुश्किल होने लगा था ,,लेकिन मैं जल्दी से उसको

चबा कर निगल गया अगर कुछ देर ऑर चबाता तो शायद मस्ती की वजह से वो टुकड़ा हलक मे फस जाता ,,,,,,

दीदी के सॉफ्ट लिप्स ऑर वेट ज़ुबान ने कुछ पॅलो मे लंड को पूरा हार्ड कर दिया फिर दीदी पीछे

हटी ओर उठके अपने कपड़े निकालने लगी ऑर कुछ पॅलो मे ही नंगी हो गई ऑर जल्दी से मुझे

भी नंगा करने के लिए मेरी टी-शर्ट को पकड़ा ऑर अब तक मैं भी मस्ती मे आ गया था

मैने भी रज़ामंदी मे अपने हाथ उपर उठा दिए ताकि टी-शर्ट जल्दी से निकल जाए ऑर टी-शर्ट

निकलते ही दीदी ने बनियान भी निकाल दी ऑर मुझे खड़ा करके मेरी पॅंट को नीचे ज़मीन

पर गिरा दिया लेकिन मैने जूते पहने हुए थे जिस वजह से दीदी ने मेरी पॅंट को अलग

नही किया बल्कि ऐसे ही पैरो मे जूतों एक पास छोड़ दिया ऑर मुझे वापिस सोफे पर बिठा

दिया ,,दीदी ने लंड को वापिस मुँह मे भर लिया ओर चूसने लगी मेरी भी हालत खराब हो गई

थी मैं भी दीदी के सर को अपने हाथों मे पकड़ कर उपर नीचे करते हुए लंड से

दीदी के मुँह को चोदने मे लगा हुआ था लेकिन मुझे ऐसा करने की कोई ज़रूरत नही थी

क्यूकी दीदी खुद ही मेरे लंड को बहुत मस्ती भरे अंदाज़ से चूस रही थी फिर भी मस्ती

मे आके मैं खुद ऐसी हरकते कर रहा था ,,दीदी अपने मुँह को पूरा खोलकर अपने

सर को मेरे लंड पर ज़ोर से दबा लेती जिस से मेरे लंड की टोपी दीदी के गले से अंदर तक चली

जाती ऑर दीदी कुछ देर ऐसे ही टोपी को गले से नीचे तक घुसा कर अपने सर को उपर नीचे

करने लग जाती मेरे को उस टाइम ऐसे लगता था जैसे मेरा लंड कि टाइट गान्ड मे

घुसा हुआ है,,बहुत ज़्यादा मज़ा आता था उस टाइम मे ,,,फिर दीदी लंड को थोड़ा बाहर

निकालती ऑर मुँह मे लेके अपनी ज़ुबान से खेलने लग जाती ऑर कभी बाहर निकाल कर लंड पर

ज़ुबान से चाटने लगती फिर मुँह मे जमा थूक को लंड पर थूक देती ऑर अपने हाथों से

लंड को मसल्ने लग जाती दीदी के अंदाज़ मे अब काफ़ी हद तक निखार चुका था इस कला मे

दीदी अब बहुत माहिर हो चुकी थी मुझे कुछ ही पॅलो मे ऐसा लगने लगा था कि मेरा लंड

पानी छोड़ देगा इसलिए मैने दीदी को लंड से हटाने की कोशिश भी की दीदी भी समझ गई

थी कि मैं क्यू दीदी को लंड से पीछे कर रहा था दीदी ने लंड से हटने की बजाए मेरे

लंड को मुँह मे भर लिया ऑर सर को तेज़ी से उपर नीचे करने लगी साथ ही बाकी के लंड को जो

मुँह से बाहर था उसको हाथों मे लेके मसल्ने लगी इस से ये हुआ कि 2 मिनिट मे ही

मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया ऑर दीदी के मुँह को स्पर्म से भर दिया लेकिन दीदी फिर भी

नही रुकी ऑर ऐसे ही मेरे स्पर्म को निगलती हुई लंड को चुस्ती रही मेरे लंड से आख़िरी

बूँद तक स्पर्म की दीदी के हलक से नीचे उतर चुकी थी लेकिन ना तो दीदी ने मेरे लंड को

चूसना बंद किया तह ना ही दीदी के हाथ ओर मुँह की स्पीड कम हुई थी मेरे लंड ने पानी

निकाल कर अब मुरझना शुरू भी नही किया था कि दीदी के द्वारा मस्त चुसाई से उसमे

फिर से एक जोश भरने लगा था ऑर उसने वापिस ओकात मे आना शुरू कर दिया था,,,

 


जब लंड फिर से ओकात मे आ गया तो मैने जोश मे आके दीदी को लंड से हटाया ऑर जल्दी से

अपनी जगह पर बिठा कर खुद ज़मीन पर बैठ गया ऑर दीदी की टाँगों को खोल कर अपने

सर को दीदी की चूत के पास कर दिया फिर जल्दी से चूत के छोटे छोटे लिप्स को मुँह मे

भर लिया दीदी थोड़ा पीछे होके बैठी हुई थी मैने दीदी की दोनो टाँगों को कस्के अपने

हाथों मे पकड़ा ऑर अपने करीब खींच लिया ऑर जबरदस्त तरीके से चूत को मुँह मे

भरके चूसने लगा दीदी भी अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी

ऑर साथ ही मस्ती मे चिल्लाने लगी,,,,,,,,,,,,,,,,,आहह उूुुुउऊहह

हह हमम्म्ममममममम ईएसस्स्स्स्सीई हहिईीईई कककककच्छुउसू म्मीर

ईईइ कच्छूत्त ककूऊ ब्ब्बभायईईईईईई आहह उउउउउउउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हमम्म

आआआआअहह प्प्प्पुउर्राअ कच्ब्बाा ज्जाऊओ म्मीर्ररिइ

कच्छूटतत ककूऊ क्क्हा ज्जााआूओ ईीइसस्सस्स कच्छिीिकककककन्णिी कक्च्छामम्मील्लीी

ककूऊ आअहह उुउऊहह बब्भ्ाऐईइ म्मीररीि cछूत्त्त कककूऊ

आपपंनी दडांन्त्तूवंन्न म्मी बभ्ार्रकक्क़ीए क्काअततटू प्प्प्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ आहह,,

मैं भी दीदी की छूट को दंटून से हल्के हल्के काटना शुरू कर दिया त्तूऊऊद्द

डाा ज्ज्ज्ूओर्रर सस्सीए क्काअतत्तूओ बभहाइईईई आअहह ज्जुउउब्बाआंन्न ककूऊव

ब्भ्हीइ उउन्न्ञदडडीएरररर ग्घूउसा दद्दूऊव ब्ब्भ्हाआईईई आअहह

हह उऊहह मैने दीदी की चूत एक लिप्स को मुँह मे भर

ऑर दाँतों से थोड़ा ज़ोर लगा कर काटने लगा दीदी भी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी फिर मैने

अपनी ज़ुबान को दीदी की चूत मे घुसा दिया ऑर ज़ुबान को तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा

दीदी भी मेरे बालों को पकड़ कर मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी मैं करीब

10-15 मिनिट से ऐसे ही दीदी की चूत को चूस ऑर काट रहा था तभी एक दम से दीदी ने

मेरे सर के बालों को कस्के पकड़ा ऑर चूत पर ज़ोर से दबा दिया ऑर साथ ही मैने भी दीदी

की पूरी चूत को मुँह मे भर लिया दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसको मैं पूरा का पूरा

अपने गले से नीचे तक ले गया वो पानी ज़्यादा नही था लेकिन जितना भी था बहुत ही

ज़्यादा टेस्टी था थोड़ी अजीब महक थी उसकी ऑर स्वाद भी बहुत तीखा नमकीन था लेकिन

वो स्वाद ओर वो तेज महक मदहोश करने वाली होती है उसको वही समझ सकता है जिसने

चूत का पानी पिया हो,,,,,,,,दीदी की चूत ने जब पानी छोड़ दिया तो दीदी ने मुझे अपनी

चूत से अलग कर दिया ऑर जल्दी से सोफे पर झुक कर कुतिया बन गई मैने भी उठा ऑर अपने

जूते उतार कर पॅंट निकाल दी ऑर लंड को दीदी के मुँह के पास ले गया ऑर दीदी ने भी जल्दी से अपने

मुँह को खोल दिया ऑर लंड को अंदर जाने की अनुमति दे दी,,,,

मैने दीदी के मुँह कोहल्के से चोदना शुरू कर दिया ऑर 1-2 मिनिट मे जब लंड थूक से पूरा चिकना हो गया तो

मैं सोफे पर दीदी के पीछे चला गया ऑर लंड को दीदी की चूत पर टिका दिया लेकिन तभी दीदी ने

मेरे लंड को हाथ मे पकड़ा ऑर चूत से हटा कर गान्ड पर रख दिया मेने भी

लंड को थोडा धक्का दिया ऑर लंड दीदी की गान्ड मे घुसा दिया ऑर हल्के से चोदना शुरू

कर दिया लंड दीदी के थूक की वजह से चिकना हो गया था ऑर दीदी की गान्ड भी मस्ती मे अपने

आप थोड़ी सी खुल गई थी जिस से एक ही बार मे पूरा लंड दीदी की गान्ड मे चला

गया था आहह आरररामम ससीए क्कार्रूऊ ससुउन्नयी ददार्र्द्द

हूटता हहाइईइ लेकिन मैं मस्ती मे ज़ोर से झटके लगाने लगा था ऑर दीदी कभी आहह

भरके दर्द हल्के दर्द का इज़हार करती तो कभी तेज़ी सिसकियाँ लेते हुए मुझे ऑर ज़्यादा

तेज धक्के लगाने को बोलने लगती ऑर मैं भी दीदी की कमर को पकड़ कर तेज़ी से धक्के

मारने शुरू कर देता,,,,,

मेरे हाथ दीदी की कमर पर थे ऑर मैं घुटनो के बल सोफे पर बैठा हुआ था ऑर लंड को

दीदी की गान्ड मे घुसा कर तेज़ी से चुदाई कर रहा था दीदी भी मस्ती मे सिसकियाँ लेती जा

रही थी कुछ देर बाद दीदी ने मेरे हाथों को पकड़ा ऑर अपने बूब्स की तरफ बढ़ा दिया

मैने भी खुद को घुटनो के बल से उठा कर अपने पैरो पर खड़ा कर लिया ऑर दीदी की

पीठ पर झुक कर दीदी के बूब्स को पकड़ लिया ऑर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाते हुए बूब्स को

दबाने लगा दीदी अब कुतिया की तरह झुकी हुई थी ऑर मैं किसी कुत्ते की तरह दीदी के उपर

चढ़ा हुआ था ऑर दमदार चुदाई करता हुआ बूब्स को मसल रहा था दीदी भी बार बार

मुझे तेज़ी से चुदाई करने को ऑर बूब्स को भी ज़ोर से मसल्ने को बोल रही थी ऊररर त्तीईज्ज्ज

सीखोवूऊवुडोवू म्मूउज़्झहहीए ससुउन्नययी प्पूउर्राा ल्लुउन्न्ड़डड़ ग्घूउऊउउस्साआआ

दद्दूऊ म्म्मीमररीइ गगाआंनदडड़ म्मीईई ऊऊररररर ट्टीज ऊऊरररर ट्टीज़्ज़ज्ज्ज

आआआहह बभहूुूथत् म्म्माीअज़्जजज्ज्जाआअ एयेए र्र्ररराहहाअ हहाऐईइ

ससुउउन्न्नययययी ऊओररर्र ज्ज्ज्जूऊओररर सस्सीई म्म्मारअस्सल्लूऊ म्म्मीसररीए ब्ब्बूबबसस

कककूऊ ऊओरर्र्रर ज्ज्जूर्र्र ससीई आअहह उउउउउउउउउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

हह हं,म्म्म्म्ममममममममममम मेरी भी स्पीड तेज थी ऑर

हाथ भी पूरे ज़ोर से मसल रहे थे दीदी के बूब्स को ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
कुछ देर बाद दीदी

ज़रा सा हिली तो मैं समझ गया कि दीदी मुझे हटने को बोल रही है तो मैं हट गया दीदी के

उपर से ऑर तभी दीदी उठी ऑर मुझे पकड़ कर सोफे पर पीठ पीछे करके आराम से बिठा

दिया ऑर लंड पर अपने सर को झुका कर जल्दी से मुँह मे भर लिया ऑर तेज़ी से सर को उपर नीचे

करते हुए लंड को चूसने लगी 2 मिनिट ऐसे ही लंड चूसने का बाद दीदी उठी ऑर दोनो

टाँगों को खोलकर मेरे उपर चढ़ गई ऑर लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी

गान्ड पर रखा ऑर गान्ड को नीचे करते हुए मेरे लंड पर बैठ गई ऑर लंड दीदी की

गान्ड मे समा गया अभी लंड दीदी की गान्ड मे गया ही था कि दीदी ने जल्दी से अपने हाथ

मेरे शोल्डर पर रखे ओर तेज़ी से खुद उपर नीचे होके लंड को गान्ड मे लेके चुदाई

करवाने लगी

दीदी के उपर नीचे होने से उनक बूब्स हवा मे तेज़ी से हिचकोले खा रहे

थे दीदी ने मुझे आँखों से अपने बूब्स की तरफ इशारा किया ऑर मैने भी जल्दी से अपने

हाथ दीदी के बूब्स पर रख दिए लेकिन दीदी कुछ ऑर चाहती थी इसलिए खुद ही दीदी ने आगे

बढ़ कर अपने बूब्स मेरे फेस के करीब कर दिया ऑर मेरे शोल्डर से अपने हाथ उठा कर

मेरे सर को कस्के अपने बूब्स पर दबा दिया अब तक मेरा भी मुँह खुल चुका था ऑर

मैने भी जल्दी से बूब को मुँह मे भर लिया ऑर जबरदस्त तरीके से चूसने लगा,,,मेरा

लंड दीदी की गान्ड की दीवारों से एक दम सटके अंदर बाहर हो रहा था ऑर टाइट गान्ड की

रगड़ मेरे लंड की टोपी पर होते हुए मुझे मस्ती मे पागल कर रही थी मैने

दीदी की पीठ को मस्ती मे अपने हाथों से पकड़ा ऑर दीदी को अपनी तरफ कस्के दबा लिया ऑर

ज़ोर से अपनी बाहों मे दीदी को जकड़कर खुद अपने ज़ोर से दीदी को उपर नीचे उछालने लगा

दीदी भी मेरे हाथों की हरकत ऑर मेरे ज़ोर को समझती हुई खुद भी अपनी स्पीड को तेज करने

के लिए अपने घुटनो को सोफे पर टिका कर तेज़ी से उपर नीचे उछलने लगी,,उधर मैं बारी-

बारी से दीदी के बूब्स को चूसने ऑर काटने मे लगा हुआ था,,दीदी भी मेरे सर को कस्के अपने

बूब्स पर दबा रही थी ऑर मस्ती में पागलो की तरह चिल्ला रही थी घर के हॉल मे इतना ज़्यादा

शोर हो रहा था दीदी की मस्ती भरी सिसकियों का ऑर गान्ड से बहता पानी भी लंड पर नीचे

की तरफ इकट्ठा हो गया था जब भी दीदी नीचे होती तो लंड पर जमा पानी गान्ड की टक्कर से

एक तेज आवाज़ करता ,,,,,,पकच पकच ऑर दीदी की मस्ती भरी सिसकियों से एक अजीब मस्ती भरा

माहौल बन गया था हॉल मे जो मुझे भी मस्त कर रहा था ,,,,,,,हम लोग लगभग इसी

पोज़ मे 10-12 मिनिट चुदाई करते रहे तभी दीदी एक दम से मेरे हाथों को अपनी पीठ

से हटाने लगी ओर मैने भी दीदी की पीठ पर अपने हाथों की पकड़ को कमजोर किया लेकिन

दीदी को आज़ाद नही किया ऑर ना ही अपने उपर से हटने दिया लेकिन तब तक दीदी मेरे उपर बैठी

हुई ही पीछे अपनी पीठ की तरफ हल्का सा झुक गई ऑर मैने दीदी की पीठ को अपने हाथों से

थाम कर दीदी को गिरने से रोका ऑर एक दम से दीदी की पीठ पर हाथ लगा कर उनको

संभालते हुए खुद खड़ा हो गया ,,,,दीदी को ऐसे गोद मे उठाकर मैं वापिस पलट गया ऑर

दीदी को सोफे की तरफ कर दिया दीदी कुछ समझ नही रही थी ,,,मैने दीदी को अपनी

बाहों मे पकड़े हुए उनकी पीठ को अपने हाथों का सहारा देते हुए लंड को दीदी की गान्ड

मे ही रखा ऑर ऐसे ही खड़े खड़े दीदी की चोदना शुरू कर दिया अब तक दीदी कुछ कुछ

समझ गई ऑर दीदी ने पीठ को हल्का सा ऑर झुका दिया ऑर अपने हाथ नीचे करके सोफे का

सहारा लेते हुए खुद के सर ऑर पीठ को सीधा करने की कोशिश की ओर खुद को थोड़ा अड्जस्ट

किया दीदी के अगले जिस्म का सहारा तो सोफे पर था लेकिन कमर पर मेरे हाथ थे जिस से गान्ड

हवा मे उठी हुई थी ऑर मैं ऐसे ही दीदी को गोद मे झुका कर चुदाई कर रहा था दीदी

मेरी इस हरकत से बड़ी खुश लग रही थी मैं खुद आगे पीछे होने की जगह दीदी के जिस्म

को पीठ से पकड़ कर उनको ही आगे पीछे कर रहा था ऑर खुद एक ही जगह पर खड़ा हुआ

था मेरी हाथों की पकड़ दीदी की पीठ पर बहुत मजबूत हो गई थी ऑर मैं पूरे ज़ोर से दीदी

की पीठ को आगे पीछे करते हुए लंड को पूरा जड़ तक दीदी की गान्ड मे घुसा रहा था,,,,,

आआज्जजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज तततूऊऊ ब्बाददीए म्मएम्मूऊओददड़ म्म्म्मी हहू

ससुउउन्नयी क्कीिट्त्न्ना ंमाज़्जाअ द्डदीए र्राहही हहूऊओ आप्प्पनन्िईिइ ददिदडिई

ककूऊव आआहह उूुउऊहह ब्बास्स ीईसस्सीई हहिईिइ दडील्ल्ल

कककाररत्ता हहाइईइ त्त्त्तीर्र्रा ल्ल्लुउन्न्ञदड़ म्मीरीइ गगाणन्ंदड़ ककूऊ कच्छूड्ड़तता

र्राहही ऊर्रररर म्मैतईन्न्न बभहिईिइ ीसससी हहिईिइ त्टीरीईइ ब्बाहहूओंन्न म्मी

प्पिग्घल्ल्लीइी र्राहहुउऊउ आअहह ऊऊरररर ज्ज्ज्ूओर्रर सस्सीईए कच्छूऊद्दद

म्म्मीघरररीए ब्भ्ह्हाईइ आपपनन्िईिइ प्पययार्ररीि दडिड्डिईई ककूऊ प्पूउर्र्राा

मम्मूओस्साल्ल्ल ग्घुउऊसाआ द्डदीए म्म्मीलररीि गगाणनदडड़ म्म्मी्ईई ऊओररर

त्त्टीज्जज ऊऊरररर त्त्त्त्तीईएज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मैं भी दीदी की सिसकियों से ज़्यादा स्पीड से दीदी की चुदाई कर

रहा था तभी 5-7 मिनिट के बाद दीदी ने ऑर ज़्यादा तेज़ी से चिल्ल्लाना शुरू कर दिया मतलब

दीदी का काम होने ही वाला था दीदी ने जल्दी से अपने एक हाथ को सोफे से उठा लिया ऑर अपनी

चूत पर रखके तेज़ी से चूत को मसल्ने लगी अब दीदी का एक हाथ सोफे पर था तो मैने

अपने दोनो हाथो से मजबूती से दीदी को थामा ओर दीदी की पीठ को हिलाना छोड़ कर खुद

तेज़ी से आगे पीछे होने लगा इतने मे ही दीदी ने तेज़ी से चिल्लाते हुए पानी निकाल दिया ऑर सारा

पानी मेरी टाँगों से होते हुए ज़मीन पर गिरने लगा लेकिन दीदी ने मुझे रुकने को नही

बोला ऑर ना ही मैं रुका अब दीदी का सारा पानी निकल गया तो दीदी ने अपने दूसरे हाथ को भी

सोफे से हटाने की कोशिश की तो मैने भी अपने एक हाथ को नीचे से दीदी की पीठ से हटा कर

थोड़ा उपर उनके शोल्डर की तरफ करके उनको सहारा दिया ,,दीदी ने भी मेरे हाथ के सहारे

का फ़ायदा उठाते हुए अपने आप को थोड़ा सीधा किया ऑर जल्दी से दोनो हाथों को मेरे

शोल्डर से घुमा कर मेरी गर्दन पर जाकड़ लिया ऑर खुद आगे होके मेरे से लिपट गई दीदी

के बूब्स मेरी छाती से दब गये ,,,

 


मैने दीदी की पीठ से अपने हाथ उठाकर दीदी की गान्ड पर रख दिए ऑर गान्ड को तेज़ी से

उपर नीचे करने लगा तभी दीदी ने एक तरफ देखा ऑर मुझे भी उधर जाने का इशारा किया

ऑर मैं भी दीदी को ऐसे ही बाहों मे भरे उस तरफ चलने लगा अब मैने धक्के

मारने बंद कर दिए थे ऑर दीदी को बाहों मे उठाकर डाइनिंग टेबल की तरफ चलने लगा

ऑर वहाँ जाके मैने दीदी को टेबल पर लेटा दिया ऑर खुद ज़मीन पर खड़ा होके फिर

से तेज़ी से दीदी की गान्ड को चोदने लगा दीदी मस्ती मे थी क्यूकी आज मैं दमदार तरीके

से दीदी को चोद रहा था दीदी पानी निकाल चुकी थी लेकिन अभी भी मैदान मे अच्छी खिलाड़ी

की तरह डॅट कर मेरा मुक़ाबला कर रही थी ऑर मुझे तेज़ी से चोदने को बोल रही थी मैं भी

दीदी के चेहरे पर झलक रही मस्ती देख कर मस्त हो रहा था ऑर उसी मस्ती मे मस्त

चुदाई करके दीदी को ऑर भी ज़्यादा मस्त कर रहा था,,,,दीदी भी अब ऑर ज़्यादा पागल

हो चुकी थी मस्ती मे वो टेबल पर लेट कर खुद की बाहों को खोलकर मस्ती मे एंजाय

करती हुई हाथों को इधर उधर झटक रही थी जिस से टेबल पर पड़ा हुआ समान नीचे

गिरने लगा हुआ था कुछ काँच के बर्तन भी नीचे गिरके टूट गये थे लेकिन हम दोनो मे

से किसी को उनकी फिकर नही थी फिकर थी तो बस चुदाई ख़तम होने की क्यूकी ना दीदी चाहती थी

कि अब उनका पानी निकले ऑर ना ही मैं चाहता था क्यूकी आज कुछ अलग ऑर बेहतरीन

मज़ा आ रहा था हम दोनो को

तभी दीदी ने मेरे हाथों को पकड़ा जो उनकी कमर पर

थे ऑर मुझे अपने उपर झुकाने के लिए अपनी तरफ खींच लिया लेकिन ऐसा करते ही लंड को

दीदी की गान्ड मे जाने को मुश्किल होने लगी तो दीदी ने जल्दी से अपनी टाँगों की अपने हाथों

से पकड़ा ऑर अपने पैर सर की तरफ करके टाँगों को मोड़ने लगी उतनी देर मे मैं खुद दीदी

के उपर झुक चुका था ऑर दीदी की टाँगें भी पीछे की तरफ जा चुकी थी मैं दीदी का

मकसद समझ गया था कि क्यू उन्होने मुझे अपने उपर झुकने को बोला था ऑर उसी मकसद

को पूरा करने के लिए मैने अपने मुँह को खोला ऑर दीदी के एक बूब को मुँह मे भर लिया ऑर

चूसने लगा तभी दूसरे बूब को हाथों से मसल्ने लगा ,,,,,,,,,,,,,आहह

ीईसस्स्स्स्स्सीईईई हहिईीईईईईईई कककककककचहुउऊस्स्ूओ म्मीररी

प्पययाररी ब्बाहहिि आअपपननीी दडियड्ड्डीई क्की ब्बूवबबसस कककूऊ ऊओरर ज्जूओर्रर्र

ससीए म्मास्सल्लूऊ ईिईन्नक्कूव ऊरर प्पययारर सससी च्छुउसूऊ आपपंनी

दडांन्त्तूओन्न सस्सीए ककाट्टू इन्नक्कूव आहह उूुुुउऊहह

कककखहाा ज्ज्जाआओ म्म्मीकररी ब्बूवोब्ब्स्स्स कक्कूव ब्ब्बबभाईईइ आअहह मैं

भी लंड को दीदी की गान्ड मे जड़ तक घुसा कर तेज़ी से धक्के मारते हुए दीदी के बूब्स को

बारी बारी से मसल ऑर चूस रहा था तभी कुछ देर बाद मुझे लगा कि मैं भी झड़ने

वाला हूँ तो मैने अपने एक हाथ को जो दीदी के बूब पर था उसको दीदी की चूत पर रखा

ऑर चूत को तेज़ी से मसल्ने लगा ऑर 2 उंगलियाँ चूत मे घुसा कर तेज़ी से दीदी की चूत को

उंगलियों से चोदने लगा दीदी समझ गई कि मेरा होने वाला है तो दीदी ने भी अपनी एक टाँग

को अपने हाथ से छोड़ दिया ऑर अपने हाथ को भी अपनी चूत पर ले गई ऑर मेरे हाथ के साथ

साथ खुद भी अपनी चूत को रगड़ने लगी मेरे हाथ से ज़्यादा तेज स्पीड थी दीदी के हाथ की

उनकी चूत पर जिसके एहसास से दीदी पागल होकर तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगी करीब 2 मिनिट

बाद ही दीदी की चूत ने फिर से पानी निकालना शुरू कर दिया ऑर मैने भी तेज़ी से धक्के

मारते हुए दीदी की गान्ड को अपने लंड के पानी से भर दिया अब की मस्ती कुछ ज़्यादा ही हो

गई थी जिसकी वजह से लंड से बहुत ज़्यादा पानी निकला था जिसको निकलने मे भी कम से कम

10 सेक का टाइम लग गया था पानी निकलते ही मैने लंड को दीदी की गान्ड से निकाला ऑर टेबल

पर दीदी के साथ ही लेट गया ,,,,,,मैं ऑर दीदी नंगे ही टेबल पर लेट कर तेज़ी से साँसे लेने

लगे हुए थे,,,,,,,

 
सोनिया के कॉलेज आने से पहले तक मैं शोभा दीदी को 2 बार ऑर चोद चुका था ,,,,,सोनिया के

आने से पहले हम ने घर की हालत ठीक करदी थी जो भी समान टूटा था डाइनिंग टेबल से गिरके

ऑर जितना भी शोभा दीदी की चूत का पानी ओर मेरे लंड के स्पर्म गिरा था ज़मीन पर हम ने

वो सब सॉफ कर दिया था सोनिया के आते ही दीदी किचन मे खाना बनाने चली गई ऑर सोफे पर

बैठ कर टीवी देखने लगा,,सोनिया अपने रूम मे जाके फ्रेश होके नीचे आ गई ऑर

डाइनिंग टेबल पर बैठ गई,,,,,शोभा दीदी खाना लेके आ गई ,,,,,,,,,,

दीदी आज आप खाना बना रही हो माँ कहाँ है,,,,,,,,,,,सोनिया ने पूछा,,,,

माँ गाओं गयी है उनके चाचा जी की तबीयत बहुत खराब है,,,,अब शायद बचने की उम्मीद

नही है ,,,,हॉस्पिटल वालो ने भी अब जवाब दे दिया है,, शोभा दीदी ने सोनिया को बताया

सोनिया की आँखें खाना कहते हुए नम होने लगी थी,,,,,,,,,,,वो थी ही ऐसी किसी का दर्द नही

देख सकती थी,,ऑर अब तो माँ के चाचा जी की बात हो रही थी जिनके बचने के चान्स बहुत

कम थे,,,,,,,,,

अरे पगली तू दिल छोटा मत कर ओर खाना खा आराम से,,,,भगवान ने चाहा तो सब ठीक होगा

,,,,वैसे भी उनकी उमर काफ़ी हो चुकी है ,,,,,,, शोभा दीदी ने सोनिया को समझाते हुए कहा

सोनिया फिर भी नम आँखे किए मुँह मे जो रोटी का नीवाला था उसको हल्के हल्के चबाती रही

,,,,,,,,

माँ वापिस कब आएगी दीदी,,,,,,,,,सोनिया ने खाना चबाते हुए पूछा

पता नही सोनिया,,,,,,,,,,4-5 दिन का तो बोलके गई है बाकी फोन करके बताने को बोला था

मामा जी ने,,,,,,,,,, शोभा ने जबाब दिया

शोभा ने इतनी बात की ऑर अपने रूम मे उपर की तरफ चली गई,,,,,

मेरा ध्यान उनकी बातों की तरफ था शोभा दीदी जब चली गई तो मैं उनको उपर जाते देख

रहा था वो सीडियाँ चढ़ कर उपर चली गई ऑर मेरी नज़रे वापिस पलट कर डाइनिंग टेबल की

तरफ गई तो सोनिया मेरी तरफ देख रही थी,,,,एक पल के लिए हम दोनो की नज़रे आपस मे मिली

ऑर वो खाने खाने के लिए प्लेट की तरफ देखने लगी जबकि मैं वापिस टीवी देखने लगा,,,,,,,,

उसने भी दोबारा मेरी तरफ देखा या नही मुझे नही पता लेकिन मेरी हिम्मत नही हुई

दोबारा उसकी तरफ देखने की,,,,,,,,,,ये नही है कि मुझे उस से डर लगता था बल्कि जब भी उसकी

तरफ देखता तो वो अजीब नज़रो से मुझे देखने लग जाती उसकी नज़रो मे गुस्सा नही होता था

लेकिन जो भी भावना होती थी उसके देखने के अंदाज़ मे मैं उसको समझ नही पा रहा

था ऑर बेचैन हो जाता था ऑर यही बेचैनी मुझे डरने लग जाती थी,,,,,,,,,

सोनिया ने भी खाना खाया ऑर उपर रूम मे चली गई ऑर मैं टीवी देखने मे बिज़ी हो गया

,,,,,,,,,,,,,

रात को हम लोग उपर बुआ की किचन के बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे

थे ,,,,माँ नही थी इसलिए सबका खाना उपर ही बनाया था बुआ ने,,,,,,,,,सब लोगो ने खाना

ख्तम किया ऑर अपने अपने रूम मे चले गये,,,मैं भी अपने रूम मे आया ऑर कुछ देर

लॅपटॉप पर गेम खेलने लगा ,,,,तब तक सोनिया बाहर ही थी ,,,,कुछ देर बाद मैं शवर

लेने के लिए बाथरूम मे चला गया ऑर जब बाहर आया तो बाहर का नजारा देख कर आँखें

फटी की फटी रह गई,,,,बाहर सोनिया बर्म्यूडा पहन कर मिरर के सामने खड़ी थी उसने

उपर सिर्फ़ ब्रा पहना हुआ था अभी वो ब्रा को बाँध ही रही थी ऑर तभी उसका ध्यान मिरर

मे मेरी तरफ गया मैं बाथरूम मे डोर पर खड़ा उसको देख रहा था उसने जल्दी से

वापिस पलट कर अपनी टी-शर्ट उठाई ऑर अपने सीने को ऐसे ही टी-शर्ट से ढक लिया ,,,,,,उसके

हाथों मे टी-शर्ट थी ऑर उसने दोनो हाथों से टी-शर्ट पकड़ कर खुद को ढका हुआ था ,,,

वो मेरी तरफ देख रही थी ऑर मैं उसकी तरफ ना वो कुछ बोल रही थी ऑर ना ही मैं,,,,,,,,तभी

अचानक मेरा फोन बजने लगा ऑर हम दोनो सपने से जाग गये ऑर मैं तेज़ी से अपने बेड

पर पड़े हुए फोन की तरफ बढ़ा ऑर फोन उठा कर जल्दी से रूम से बाहर चला गया ऑर

जाते जाते सोनिया को सॉरी बोल गया लेकिन मैने पलट कर उसकी तरफ नही देखा था,,,,,,,,,,,

फोन करण का था उसको आज भी चूत लेने का मन हो रहा था लेकिन मैने मना कर दिया

बोला कि आज बुआ है बुटीक पर आज मुश्किल है,,,,मैने ऐसा क्यूँ किया नही जानता,,,,,दिल तो

मेरा भी था आज चूत लेने को लेकिन फिर भी मैने करण को मना कर दिया था ना जाने

क्यू,,,,शायद अभी जो कुछ मेरे रूम मे हुआ ऑर जिस हालत मे मैं सोनिया को देखा ऑर जिस

तरह से चुप चाप वो मुझे देख रही थी शायद उसकी वजह से मैं बेचैन हो गया

था,,,,,,,,,,फोन पर बात करने के बाद भी मेरा दिल नही कर रहा था रूम मे जाने को

पता नही वो क्या सोच रही होगी ,,,मेरी हिम्मत नही हो रही थी उसका सामना करने की मैं

बहुत डर गया था,,,,लेकिन रूम मे तो जाना ही था,,,,,,मैं डरते हुए अपने रूम मे गया ,,

मैने सोनिया की तरफ एक बार भी नही देखा ऑर सीधा अपने बेड पर जाके अपनी तरफ की लाइट

ऑफ करके चद्दर लेके सोनिया की तरफ पीठ की ऑर लेट गया,,,,,,,,मुझे नींद तो नही आ रही

थी फिर भी मैं सोने की कोशिश करने लगा,,,,,,,,,काफ़ी टाइम तक मेरी आँख नही लगी अब

तो सोनिया भी शायद सो चुकी होगी मैने हिम्मत करके उसकी तरफ फेस किया ऑर देखा तो होश

उड़ गये फिर से वो बेड पर बैठी हुई थी ऑर मेरी तरफ देख रही थी उसी तरह अजीब नज़रो से ,,

मुझसे उसका इस तरह मुझे देखना मेरे से बर्दाश्त नही हो रहा था ,,,मैं बहुत ज़्यादा

बेचैन हो गया था दिल तो किया एक बार पूछ लूँ उसको कि तुम ऐसे क्यूँ देख रही हो

मुझे लेकिन हिम्मत नही हो रही थी मैं वापिस फेस दूसरी तरफ करके लेट गया ऑर सोने

की कोशिश करने लगा लेकिन नींद तो मेरी आँखों से आज कोसों दूर थी तभी ना जाने

मुझे क्या हुआ मैने चद्दर उठाई ऑर अपना लॅपटॉप लिया ऑर रूम से जाने लगा तो देखा

कि रात के 1 बज रहे थे एक पल के लिए मैं हैरान हो गया कि 10 बजे डिन्नर किया था

करीब 10:30 तक मैं शवर भी ले चुका था उसके बाद 2 मिनिट ही करण से फोन

पर बात हुई थी तबसे मैं ऐसे ही लेटा हुआ था ऑर क्या सोनिया भी तबसे मुझे ऐसे ही

देख रही थी एक पल मे इतना कुछ सोच कर मैं फिर बेचैन होने लगा अब ऑर ज़्यादा

बेचैन होने से बचने के लिए मैं दरवाजा खोलके नीचे चला गया,,,,माँ के रूम मे

तो डॅड थे इसलिए मैने सोचा कि मैं आज रात को मामा के रूम मे सो जाता हूँ रूम

से निकलते हुए भी मैने सोनिया की तरफ नही देखा था,,,,,,,,,,मामा के रूम मे अभी आ

ही रहा था कि मैने देखा कि डॅड के रूम का दरवाजा खुला ऑर बुआ वहाँ से बाहर

निकल कर किचन की तरफ जाने लगी मैं जल्दी से पीछे हो गया ऑर छुप गया जब बुआ वापिस

डॅड के रूम मे चली गई तो मैं भी मामा के रूम मे चला गया,,,,,,,,,,,,,मामा के रूम

मे जाके मैं बेड पर लेट गया ,,,,,,

बुआ अगर डॅड के रूम मे थी तो हो सकता था शोभा भी वहीं हो मेरा दिल किया क्यूँ ना आज

डॅड के रूम मे चला जाए ऑर जैसे माँ ऑर मामा के साथ मज़ा किया वैसे डॅड बुआ ऑर

शोभा के साथ भी ग्रूप सेक्स का मज़ा लिया जाए लेकिन मेरा दिल नही माना क्यूकी दिल आज कुछ

बेचैन था मेरा पता नही क्या हो गया था इतना ज़्यादा बेचैन हो गया कि इतनी सारी चूत

मिल सकती थी रात को लेकिन मेरा दिल ही नही कर रहा था किसी भी चूत का मज़ा लेने के लिए,,

अब बेचैनी से बचने क लिए मैने लॅपटॉप ऑन किया ऑर गेम खेलने लगा ऑर कब गेम

खेलते हुए मुझे नींद आ गई पता ही नही चला,,,,,सुबह उठा ऑर अपने रूम मे चला

गया सोनिया अभी सो रही थी मैने लॅपटॉप को बेड पर रखा ऑर फ्रेश होके तैयार हो गया टाइम

देखा तो अभी काफ़ी टाइम था कॉलेज जाने को तो मैं नीचे जाके टीवी ऑन करके सोफे पर बैठ

गया तभी डॅड के रूम का दरवाजा खुला ऑर बुआ बाहर आ गई ऑर जैसे ही बुआ की नज़र

मेरे पर पड़ी वो डर गई मुझे वहाँ देख कर फिर आँखें मलती हुई खुद को संभालते

हुए बोली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,तुम यहाँ क्या कर रहे हो सन्नी इतनी जल्दी कैसे उठ गये आज,,,,,,,,,,,,

मैने सोचा क्या बोलूं अब आपको बुआ कि कल रात मुझे नींद ही नही आई ठीक से,,,,कुछ

नही बुआ बस ऐसे ही आज सुबह जल्दी हो गई मेरी ,,,,,,,, मैने बुआ से कहा

बुआ हँसने लगी,,,,,,,,,,,,,,,

आप यहाँ क्या कर रही थी बुआ डॅड के रूम मे,,,,,,,,,,,,,,,मैने बुआ से पूछा

बुआ डरते हुए सहमी हुई आवाज़ मे बोली,,मैं तो तेरे डॅड को उठाने आई थी आज तेरी माँ नही है ना

जो तेरे डॅड को उठा दे सो मैं उठाने चली आई इतना बोलकर बुआ जल्दी से कुछ ऑर बोले बिना सीडियाँ

चढ़ कर अपने रूम की तरफ उपर चली गई ,,,,,,

मैने सोचा की अगर बुआ यहाँ है तो शोभा भी यहीं होगी डॅड के

रूम मे इसलिए मैं वहाँ से उठकर आगे गया ऑर डॅड के रूम से अंदर देखने लगा लेकिन

वहाँ कोई नही था डॅड उठकर बाथरूम चले गये थे ऑर बाकी रूम खाली था शायद

शोभा नही आई होगी रात को बुआ के साथ डॅड के रूम मे ,,,,,,,मैं वापिस जाके टीवी देखने

लगा,,,,,,,,,अभी कुछ देर ही हुई थी टीवी देखते तभी मेरे सर पे हल्का सा थप्पड़ लगा ,,,,,,,

कहाँ था रात को तू सन्नी ,,,,,,,,, शोभा दीदी ने मुझसे पूछा

,मैने पीछे मूड कर देखा तो शोभा दीदी थी नाइटी मे,,

,,,मैं तो यहीं था दीदी आप कहाँ थी,,,,,,,,,,,,,,, मैने शोभा से पूछा

मैं भी यहीं थी मुझे कहाँ जाना था ,, रात तेरे रूम मे गई थी मैं तब तो सोनिया अकेली थी

रूम मे तुम तो नही थे वहाँ पर,..शोभा ने जबाब दिया

,क्यू दीदी आप मेरे रूम मे क्यू गई थी मैने हँसते हुए पूछा

तभी दीदी ने हल्के से एक ऑर थप्पड़ मारा,,,,,,,,,,बस ऐसे ही गई थी तेरे रूम मे,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी-दीदी मैं रात को नीचेसोया था मामा जी क रूम मे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शोभा--मामा जी के रूम मे सोया था तो मुझे बता नही

सकता था मैं भी यहीं आ जाती तेरे पास पता है रात कितना मूड था मेरा,,तू मेरे को

बता नही सकता था सन्नी मैं यहाँ आ जाती या तेरे को अपने रूम मे ले जाती मैं भी

अकेली बोर होती रही रात भर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी-अकेली क्यू दीदी बुआ नही थी क्या साथ मे ,,,,,,,,,,,

 
तभी दीदी भी ज़रा सोचकर बोली,,,,,,,,,,,,,,,,बुआ थी लेकिन बुआ की तबीयत ठीक नही थी उनका

मूड नही था इसलिए मैं अकेली थी जो तेरे साथ मस्ती करती ऑर तू नीचे क्यू सोया था सोनिया से

फिर तेरा झगड़ा हुआ क्या,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं कुछ नही बोला चुप रहा,,,,,,,,,

अच्छा तो भाई बेहन की फाइट अभी तक चल रही है दीदी हँसने लगी ऑर हँसते हुई वहाँ से वापिस उपर की तरफ चली

गई,,,,,,,,,,,

आज सुबह नाश्ता भी बुआ ने अपने किचन मे बनाया था ,,,,,,मैने नाश्ता किया ऑर कॉलेज

जाने के लिए बाहर निकला ऑर बिके स्टार्ट करने लगा तभी कविता भी बाहर आ गई थी अपनी अक्तिवा

लेके,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--हाई कविता ,,,,,,,,,

कविता--हाई सन्नी,,,,,,एक उदास सी आवाज़ के साथ कविता ने मेरे को हाई बोला,,,,,,,

क्या हुआ तुम ठीक तो हो ना कविता,,,,,,,,,,मैने पूछा.....

कविता--हां सन्नी मैं ठीक हूँ,,,,,लेकिन अभी भी उसकी आवाज़ बहुत उदास लग रही थी,,,,,,,

सन्नी--फिर इतना उदासी के साथ क्यू जवाब दे रही हो मेरी बातों का,,,,,,

इस से पहले वो मेरे को कोई जवाब देती सोनिया बाहर आ गई ऑर आके कविता के पास खड़ी हो गई

कविता ने सोनिया को आते ही गले से लगा लिया ऑर हल्का सा रोने लगी तभी सोनिया ने उसके चेहरे

पर लगा हुआ चाशा निकाला ऑर मैं देखता ही रह गया उसकी आँखें ऐसी लाल हो चुकी थी

जैसे पता नही कितने टाइम से वो रोती जा रही हो ,,मेरा ध्यान उसकी तरफ था तभी उसने अपनी

नज़रे तिर्छि करके मेरी तरफ देखा ऑर सोनिया ने भी कविता की नज़रो का पीछा करते हुए मेरी

तरफ देखा ऑर जल्दी से कविता का चश्मा ठीक कर दिया ऑर कोई बात ना करते हुए कविता को सीट

पर पीछे होने के लिए बोला ऑर कविता पीछे होके बैठ गई ऑर सोनिया खुद आगे बैठ कर उसकी

अक्तिवा ड्राइव करने लगी ऑर वो दोनो वहाँ से चली गई तब तक मैं भी बाइक स्टार्ट कर चुका

था ऑर मैं भी उनके पीछे पीछे चलने लगा ,,,,,,मैं अभी कुछ आगे ही गया था तभी मेरा

फोन बजने लगा फोन से ज़्यादा ज़रूरी था मेरे लिए वो वजह जानना जिस वजह से कविता रो

रही थी लेकिन फोन दोबारा से फिर बजने लगा तो मैने बाइक साइड पर रोक दी ऑर मेरे फोन

उठाते उठाते ही सोनिया ऑर कविता मेरे से कहीं आगे निकल गई थी,,,,,,,,,,,,,

मैने फोन पर बात की ओर बाइक चलाना शुरू कर दिया,,,लेकिन कोई फ़ायदा नही हुआ अब तक तो

सोनिया ऑर कविता काफ़ी दूर निकल गई थी,,,,,,मैं बाइक चलाते हुए कॉलेज के बाहर पहुँचा

गया तभी फिर से फोन बजने लगा था,,

ये फोन था शिखा दीदी का,,,,,,,,,,,

शिखा--हेलो सन्नी,,,,,,,,,,

सन्नी--हेलो शिखा दीदी,,,,,,हाउ आर यू,,,,,,

शिखा--आइम फाइन सन्नी ,,यू टेल,,,,,,,,

सन्नी-मैं भी ठीक हूँ दीदी,,,,,आज कैसे याद किया दीदी ,,,,,,,,,,

शिखा-कुछ नही सन्नी बस दिल नही लग रहा था तेरे बिना तो सोचा एक फोन कर लेती हूँ ऑर अगर

फ्री हो तो मिल भी लेती हूँ,,,,,,,,,

वो बोल इतने मस्ती भरे अंदाज़ से रही थी कि मैं कविता के उदास चेहरे को भूल ही गया

था ऑर शिखा की मस्ती भरी आवाज़ मे कहीं खो गया था ऑर लंड ने भी कुछ पलों मे ही

अपनी ओकात दिखानी शुरू करदी थी,,,,,

सन्नी-दीदी मैं तो फ्री ही हूँ कोई ख़ास काम नही है मेरे को,,,बस कॉलेज ही जा रहा था,,,,

तभी दीदी हँसने लगी,,,,,,,,,,,,

सन्नी--तो बोलो दीदी आ जाउ क्या मिलने के लिए घर पे,,,,,,,,,

शिखा--नही नही सन्नी घर पे नही,,,,,,,आज माँ है घर पे ,कहीं ऑर मिलते है,,,,,,,,,,

सन्नी-कहीं ऑर कहाँ दीदी,,,,,,,,,,,

शिखा--वो तुमको पता होगा सन्नी तुम कुछ करो प्लीज़ मेरा बहुत दिल कर रहा है आज तेरे से

मिलने को,,,,,,

सन्नी-साला दिल तो मेरा भी करने लगा था अब लेकिन कहाँ मिल सकता हूँ,,,,,,,,ऐसी कोई जगह भी

तो नही है,,,,,,सुमित के घर लेके जाता लेकिन ये नही मानेगी वहाँ जाने को ऑर वैसे भी मेरा

भी इतना दिल नही करता इसको वहाँ लेके जाने को,,,,,,,,,,बुटीक पर ले जाता लेकिन वहाँ भी

पंगा था,,,घर पे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,तभी मेरे दिमाग़ मे एक प्लान आया ,,,,,दीदी आप थोड़ी

देर इंतजार करो मैं कोई जगह का जुगाड़ करके वापिस कॉल करता हूँ आपको,,,,,,,

शिखा--ठीक है सन्नी लेकिन जल्दी करना मेरे से इंतजार नही होगा ज़्यादा ,समझ रहे हो ना,,,,,,,,

सन्नी--हाँ दीदी समझ रहा हूँ इंतजार तो मेरे से भी नही होना अब ज़्यादा,,,,,,,,,

मैने फोन काट दिया ऑर बाइक को वापिस घर की तरफ मोड़ दिया,,,,,,,,घर पहुँचा तो

देखा कि शोबा दीदी की अक्तिवा नही थी वहाँ मतलब वो जा चुकी थी लेकिन डॅड ऑर बुआ की

कार अभी घर पे ही थी वो अभी तक नही गये थे ऑर शायद आज उन लोगो को कहीं जाना भी

नही था घर पे रहके मस्ती करने का इरादा था दोनो का,,लेकिन मैं उनके इरादे पर पानी

फेरने आ गया था,,,,,,,,,,,,,मैने बेल बजाई लेकिन कोई जवाब नही आया,,,मैने फिर बेल

बजाई लेकिन फिर भी कोई जवाब नही आया,,,फिर कोई 5-7 मिनिट बाद बुआ ने दरवाजा

उनके बाल बिखरे हुए थे ऑर गीले थे शायद वो नहा रही थी,,,,,

बुआ--अरे तुम आज इतनी जल्दी वापिस आ गये ,,,अभी तो गये थे कॉलेज,,,,,,,बुआ ज़रा हँस कर बोल रही

थी लेकिन उनकी हँसी के पीछे छुपे हुए गुस्से के तेवर मुझे सॉफ नज़र आ रहे थे वो मेरे

घर आने से बिल्कुल खुश नही थी क्यूकी मेरे आने से उनका ऑर दाद का काम जो खराब हो गया

था,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--बुआ मेरे सर मे हल्का सा दर्द होने लगा था सोचा कि इस से पहले दर्द ज़्यादा हो जाए क्यूँ

ना घर जाके आराम किया जाए,,,,,,,,,,,,लेकिन आप अभी तक बुटीक क्यू नही गई बुआ,,,,,,,,,,,,,

बुआ कुछ सोचते हुए बोली,,,,,,,,,,,,,,,,,कुछ नही बेटा ज़रा घर का काम ख़तम कर रही थी

तेरी माँ तो यहाँ नही है सोचा आज मैं घर का काम कर लेती हूँ थोड़ा सा,,,अभी काम

ख़तम हुआ था ऑर बाथ लेके तैयार होने लगी थी तभी तुम आ गये,,,,,,,,,,

बुआ दरवाजे से साइड हो गई ऑर मैं अंदर आने लगा ऑर अंदर आके मैं सोफे की तरफ बढ़ने

लगा ऑर रास्ते मे मैने डॅड के रूम की तरफ नज़र मारी तो उनके रूम का दरवाजा पूरा ही

खुला हुआ था लेकिन रूम मे कोई नही था,,,,,मैं आके सोफे पर बैठ गया,,,,,,,,,,

बुआ--तुझे कुछ चाहिए तो नही बेटा,,,,,,,,,,,

सन्नी--नही बुआ मैं ठीक हूँ मुझे कुछ नही चाहिए,,,,,,,

बुआ--मेडिसिन दूं क्या बेटा,,,ख़ाके आराम कर लेना,,,,,,,,,,

सन्नी--नही बुआ मैं अभी आते टाइम मेडिसिन लेके आया हूँ शॉप से,,,,,,

बुआ--ठीक है बेटा तुम मेडिसिन खा लेना ऑर आराम कर लेना मैं अब तैयार होके बुटीक जा रही

हूँ,,,,,,,,,अभी बुआ उपर जाने क लिए पलटी ही थी कि डॅड भी अपने रूम से बाहर आ गये,,,,,

किसको चाहिए मेडिसिन,,डॅड ने रूम से निकलते ही पूछा,,,,,,,,,,

मेरे बोलने से पहले ही बुआ बोल पड़ी,,,,,,,,,,,,,,,सन्नी को चाहिए भाई इसके सर मे दर्द है

तभी तो कॉलेज से जल्दी आ गया है ,,,मैने इसको बोल दिया अब मेडिसिन लेके आराम करे,,,,

मैने डॅड की तरफ देखा तो ऐसा लगा कि डॅड भी अभी अभी नहा कर ही निकले है बाथरूम

से ,,,,,,,,,मेरा शक ग़लत नही तो दोनो भाई बेहन साथ मे बाथ ले रहे थे तभी तो बुआ

को टाइम लगा दरवाजा खोलने मे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

डॅड आज आप भी लेट जाने वाले है क्या ऑफीस,,,,,,,,,,मैने डॅड से पूछा,,,,,,,

डॅड बुआ की तरफ़ देखते हुए,,,,,,,,,,,,,,,,,हाँ बेटा आज मुझे भी थोड़ा लेट जाना था ऑफीस

लेकिन अब तुम आ गये हो तो मैं चलता हूँ तुम आराम करो ऑर मेडिसिन लेना मत भूलना

,,,,,

हाँ हाँ अब मेरे आते ही सबको जाने की जल्दी पड़ी है,,,,,,,,,,ऑर यही तो मैं चाहता हूँ कि

मैं घर पर आउ ऑर मेरे आते ही आप लोग यहाँ से चले जाओ,,,,,,क्यूकी पहले भी ऐसा कई

बार हो चुका है जब भी माँ ऑर मामा जी गाओं जाते थे या भाई के पास जाते थे तब बुआ

ऑर डॅड घर पर रहते थे लेकिन मेरे आते ही सब अपने काम पर चले जाते थे क्यूकी अब

उनको मोका जो नही मिलना था घर पे मस्ती करने का,,,,ऑर आज भी वैसा ही हुआ मेरे आते ही

बुआ ऑर डॅड तैयार होके घर से चले गये ऑर मेरा प्लान कामयाब हो गया,,क्यूकी मैं भी

यही चाहता था कि घर फ्री हो जाए ऑर मैं शिखा को यहाँ बुला सकूँ ऑर उसके साथ मस्ती

कर सकूँ,,,,,,,,,,

 
बुआ ऑर डॅड दोनो 10-15 मिनट बाद वहाँ से चले गये ऑर मैने पहले ही शिखा को कॉल

करके मेरे घर आने का बोल दिया था,,,,,बुआ ऑर डॅड के जाने के करीब 15 मिनट बाद बेल

बजी ,,मैने दरवाजा खोला ऑर फिर वापिस आके सोफे पर बैठ गया,,,करीब 20 मिनट बाद

फिर बेल बजी ऑर मैने दरवाजा खोला तो सामने शिखा दीदी खड़ी हुई थी,,,या अल्लाह क्या लग

रही थी वो ,,एक तो गोरा रंग उपर से काले रंग का तंग पयज़ामी ऑर कुरती वाला सूट जिसमे से

एक एक अंग का नाप लेना आसान हो जाता है ऑर उपर से दीदी का भरा हुआ बदन मैं तो एक

पल को बेहोश होने को था,,ऐसा नही था कि शिखा हो पहली बार देखा था लेकिन आज तो वो

कयामत ही लग रही थी,,,,,हो ना हो रास्ते मे आते टाइम जिस मर्द ने भी उसको एक नज़र देखा

होगा दुआ मे उसी को माँगा होगा चाहे एक रात के लिए ही सही लेकिन माँगा ज़रूर होगा,,सच

मे आज तो जान निकाल कर रख दी थी शिखा ने ,,,,,,,,,मैने दरवाजा खोला तो वो अंदर आ गई

अभी मैने पलट कर दरवाजा बंद भी नही किया था कि शिखा जल्दी से मेरे से लिपट गई,,

शिखा--ऊहह सन्नी तुझे नही पता मैं कितना तड़प रही थी तेरे बिना मेरी चूत को कितनी आग लगी हुई

थी तेरा लंड लेने की,,इतना बोलते ही दीदी ने मेरे लिप्स को कस्के अपने लिप्स मे जकड लिया ऑर तभी

अपने हाथ को मेरे लंड पर रखके कस्के दबा दिया ,,इस से पहले मैं कुछ कहता या बोलता

दीदी ने मुझे जबरदस्त तरीके से किस करना शुरू कर दिया,,,तभी मैने दीदी को पीछे

किया,,,,,,,,,,,

सन्नी--रूको दीदी पहले दरवाजा तो बंद करने दो ऑर ज़रा आराम से बोलो अगर किसी ने आपकी

आवाज़ सुन ली तो पंगा हो जाना है,,,,,,,,,,

शिखा--कॉन सुनेगा मेरी आवाज़ सन्नी घर पे कोई है क्या,,,,,,

मैं एक पल चुप रहा,,,,,,,,,,,,दीदी घर पे तो कोई नही है लेकिन फिर भी आप थोड़ा धीरे

बोलो प्ल्ज़्ज़ ,,,,,,,,,,,

शिखा--ओके बाबा अब जल्दी कुछ करो मेरे से रहा नही जाता,,,,,,,,,,

मैने दरवाजा बंद किया ऑर दीदी को अपने साथ माँ के रूम मे ले गया अभी मैं बेड पर

बैठा ही था कि दीदी ने रूम मे आते ही जल्दी से कपड़े निकालना शुरू कर दिया ऑर मेरे देखते

ही देखते दीदी एक दम नंगी हो गई,,,,,,,

सन्नी-लगता है कुछ ज़्यादा ही आग लगी है दीदी आपकी चूत मे ,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा--हाँ सन्नी तू नही जानता कितनी आग लगी हुई है मेरी चूत मे,,कब्से तड़प रही है मेरी

चूत तेरे लंड का पानी पीने के लिए ,,,,एक बार इसको अपने लंड का पानी पीला दे फिर इसकी आग

भुज जाएगी,,,,,,,,,,,,,इतना बोलते हुए दीदी खुद अपनी चूत मे उंगली करती हुई ऑर एक हाथ से

अपने बूब्स को मसल्ति हुई मेरे करीब आ गई,,,,

दीदी ने मेरे करीब आते ही अपनी चूत के पानी से सराबोर उंगलिया चूत से निकाली ऑर मेरे

लिप्स पर रख दी ,,,उंगलियों पर चूत का पानी लगा हुआ था उंगलियाँ मेरे लिप्स पर लगते ही

उसकी नमकीन ऑर मदहोश करने वाली खुसबू से ना जाने कब मेरे लिप्स खुल गये ऑर दीदी की

उंगलियाँ मेरे मुँह मे चली गई ऑर मुँह मे जाते ही मैने उग्लियों को चूसना शुरू कर दिया

तभी दीदी ने जल्दी से अपनी उंगलिया वापिस खींच ली ऑर फिर से थूक से सराबोर उंगलिया

अपनी चूत मे घुसा दी ऑर वापिस चूत के पानी से भिगो कर उंगलियों को मेरे मुँह मे डाल

दिया,,,मैने जल्दी से दीदी को कमर से पकड़ा ऑर बेड पर अपनी तरफ खेंच लिया ऑर पलट कर

दीदी को बेड पर लेटा दिया ऑर खुद बेड से खड़ा हो गया ,,,अब दीदी बेड पर नंगी पीठ के

बल लेटी हुई थी ऑर मुझे देखते हुए अपनी चूत मे उंगलिया करते हुए अपने बूब्स को मसल

रही थी उसके चेहरे पर वासना ऑर सेक्स की तड़प सॉफ नज़र आ रही थी,,,मैं भी अब पूरी

मस्ती मे आ गया था ऑर अपने कपड़े निकालने मे लगा हुआ था,,,,कुछ पल मे ही मैं भी

नंगा हो गया मेरे नंगा होते ही दीदी जल्दी से उठी ऑर मेरे आधे खड़े लंड को जल्दी से

मुँह मे भर लिया ऑर खुद बेड पर झुक कर घुटने मोड़ कर कुतिया बन गई ऑर तेज़ी से मेरे

लंड को मुँह मे लेके अपने सर के साथ-साथ अपनी कमर ऑर बाकी जिस्म को भी तेज़ी से आगे पीछे

करने लगी,,,मेरा लंड जो अभी आधा ही खड़ा हुआ था दीदी के गम ऑर सॉफ्ट लिप्स ऑर थूक से

भीगी हुई ज़ुबान के संपर्क मे आके पूरी ओकात मे आ चुका था मेरे को कुछ ही पल मे

इतनी ज़्यादा मस्ती चढ़ने लगी थी कि ज़मीन पर खड़े हुए मेरी कमर भी आगे पीछे हिलने

लगी थी ऑर मैं भी अपनी कमर को हिला कर अपने लंड को दीदी के मुँह मे घुसाने मे लगा

हुआ था,,,अब तक दीदी काफ़ी ऐकसपर्ट हो चुकी थी मेरा लंड चूसने मे पहले पहले तो मेरा

मूसल आधा भी नही ले पाती थी लेकिन अब तो पूरा गले के अंदर तक लेके जाती थी फिर भी ऑर

ज़्यादा अंदर करने को बोलती थी,,,,दीदी घुटने मोड़ कर अपने हाथों को बेड पर टिका कर

कुतिया की तरह झुकी हुई थी मैं मैं ज़मीन पर खड़ा हुआ अपने लंड को दीदी के मुँह

मे तेज़ी से अंदर बाहर करते हुए उनकी कमर को कस्के पकड़ कर लंड से दीदी के मुँह की

चुदाई कर रहा था मेरा लंड पूरा दीदी के मुँह मे जा रहा था फिर भी वो अपनी ज़ुबान को

बाहर निकाल कर मेरे लंड के घुसने के लिए ऑर जगह बन रही थी अपने मुँह मे ,,,,मेरा

लंड दीदी के गले से नीचे उतर रहा था ऑर मुझे किसी टाइट गान्ड की चुदाई का मज़ा आ

रहा था,,,,मैं करीब 10 मिनट तक ऐसे ही दीदी के मुँह को चोदता रहा फिर दीदी के मुँह

मे ही झड गया जब तक मेरे लंड ने पानी की आखरी बूँद तक दीदी के मुँह मे नही निकाल

दी थी तब तक दीदी ने मेरे लंड को बाहर नही निकालने दिया अपने मुँह से ऑर जब लंड ने सारा

पानी निकाल दिया तो दीदी ने लंड को अच्छी तरह चाट कर सॉफ कर दिया ऑर अपने मुँह से निकाल

दिया ,,जो थोड़ा बहुत पानी दीदी के मुँह से निकल कर उनकी चिन पर आ गया था दीदी ने उसको भी

अपने हाथ से सॉफ किया फिर हाथ से भी मेरे पानी को ज़ुबान की मदद से चाट लिया ऑर फिर

खुद पलट कर चूत मेरे सामने करके लेट गई मैने भी दीदी का इशारा समझा ऑर जल्दी से

ज़मीन पर घुटने के बल बैठ गया ऑर अपने सर को दीदी की चूत की तरफ बढ़ा दिया फिर दोनो

हाथों से दीदी को टाँगों को पकड़ा ऑर अपनी तरफ खींच लिया ऑर जल्दी से मुँहको दीदी की

चूत पर लगा कर तेज़ी से चूत के लिप्स को मुँह मे भर लिया ऑर चूसने लगा,,,

 
दीदी की चूत

अब तक काफ़ी सारा नमकीन पानी निकाल चुकी थी जिसका स्वाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा था

मैं चूत के लिप्स को चाटता हुआ बीच बीच मे ज़ुबान को अच्छी तरह दीदी की चूत पर

फेरने लगता तभी दीदी तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगी तो मैं जल्दी से उठा ऑर दीदी के मुँह पर

हाथ रख दिया,,,,,,,दीदी की आवाज़ तो बंद हो गई लेकिन दीदी अपनी नज़रो से मुझे सवाल करने

लगी कि मुझे चुप क्यूँ करवा दिया तो मैने भी अपनी उंगली को अपने लिप्स पर रखा ऑर दीदी

को चुप रहने का इशारा किया तो दीदी ने भी हां मे सर हिला कर हामी भर दी ऑर मैं

वापिस दीदी की चूत की तरफ बढ़ गया ऑर फिर से चूत को प्यार से चाटने ऑर चूसने लगा मैं

इतनी तेज़ी से लेकिन प्यार से मस्ती भरे अंदाज़ मे दीदी की चूत को चूसने ऑर चाटने मे लगा

हुआ था कि दीदी का सिसकियों पर क़ाबू पाना मुश्किल हो रहा था तभी दीदी ने पास ही पड़े

एक पिल्लो को उठा कर अपने मुँह पे रख लिया ऑर आवाज़ को दबाने की कोशिश करने लगी जो

कोशिश काफ़ी हद तक कामयाब भी रही,,,,,मैने भी दीदी की चूत को इतने प्यार से चाटा

कि कुछ 5-8 मिनट मे ही दीदी की चूत ने पानी निकाल दिया था जिसको मैं सारा का सारा

पी गया था ,,चूत का पानी पीक मैने चूत को अच्छी तरह चाट कर सॉफ भी कर दिया था

,,

अब मैं ऑर दीदी बेड पर लेट गये ऑर दीदी ने अपने फेस से पिल्लो हटा कर साइड रख दिया ऑर

जल्दी से मेरे को किस करने लगी,,,मैने भी किस का रेस्पॉन्स देते हुए दीदी को पकड़ कर अपने

उपर खींच लिया ऑर जबरदस्त तरीके से दीदी के लिप्स को चूमने लगा दीदी के बड़े बड़े

बूब्स मेरी छाती पर दबने लगे थे ऑर नीचे मेरा लंड जो फिर से ओकात मे आ चुका था

उसकी टोपी की रगड़ दीदी की चूत पर होने लगी थी दीदी ने भी चूत पर लंड की रगड़ को

महसूस करते ही अपनी टाँगो को ऑर ज़्यादा खोल दिया मैने भी दीदी की पीठ को सहलाते

हुए अपने हाथों को दीदी की गान्ड पे रखा ऑर गान्ड को कस्के पकड़कर दीदी को हल्का सा

उपर खींचा जिस से लंड की टोपी एक दम सही जगह पर आ गई ऑर जब मैने दीदी को नीचे

किया तो लंड दीदी की चूत मे समा गया ऑर जल्दी से मैने दीदी को गान्ड को पकड़ कर उपर

नीचे करना शुरू कर दिया दीदी ने भी मस्ती मे आके मेरा पूरा साथ देते हुए अपने

हाथों से मेरे सर को पकड़ा ऑर तेज़ी से खुद को उपर नीचे करने लगी तभी मेरे हाथों ने

एक चाल ऑर चली ऑर मैने अपने हाथों से दीदी की गान्ड को खोला ऑर अपने हाथ की एक उंगली को

दीदी की गान्ड मे घुसा दिया दीदी की गान्ड खुद-ब-खुद मस्ती मे खुलने ऑर बंद होने

लगी थी इस बात का फ़ायदा उठाते हुए मैने दीदी की गान्ड मे दोनो हाथों की 2-2 उंगलिया

डाल दी तभी एक दम से दीदी ने अपने लिप्स को मेरे लिप्स से हटा लिया ऑर मेरी तरफ देखने लगी

क्यूई दीदडिई म्माज्जाअ आ र्राहहा हहाइी नाअ,,,,,,,,,,,,हान्न्न ससुउन्नययी ब्भ्ह्हुउउत्त

म्ंूमाज़्जाअ आ र्राहहा हहाऐ,,,ईएसससा ल्लाग्ग र्राहहा हहाइईइ जाइईसीए 2 ल्लुउन्न्ड़डड़

ईएकककक हिी त्तीम्मी पपीए र्र म्मीरीइ कच्छुद्डाइ क्कार्र र्रहही हहाऐ,,,,,,,,,,,,,दीदी

आपपकाअ ड्डाइयील क्काररत्त्ताअ हहाइी क्क्य्याअ 2 ल्लुउन्न्ड्ड़ सससी ईककक हहिि ब्बीद्द्ड प्पीर

च्छुउूऊद्ड़ञनी ककूऊ ,,,,,,,दीदी इतनी ज़्यादा मस्ती मे थी कि कुछ सोचे समझे बिना ही

दीदी ने हां मे सर हिला दिया ऑर मैने भी मोका देखते ही बेड की मॅट्रेस के नीचे से एक

नकली लंड निकाला जो मैने बुआ के बॅग से निकाला था उसको जल्दी से दीदी की गान्ड मे घुसा

दिया दीदी एक दम से चिल्लाने ही लगी थी कि मैने एक हाथ से दीदी के सर को पकड़ा ऑर अपने

सर के करीब करके लिप्स को लिप्स मे जकड कर किस करते हुए दीदी की चीख को दबा दिया ,,

मैने नकली लंड को तेज़ी से गान्ड मे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया ऑर अपने लंड से

तेज़ी से दीदी की चूत को चोदने लगा कुछ देर बाद दीदी फिर से सर को उपर करके मेरी तरफ

देखने लगी मानो पूछ रही हो कि सन्नी ये गान्ड मे क्या घुसा दिया है तुमने,,,,,लेकिन

दीदी के पूछने से पहले ही मैने नकली लंड को बाहर निकाला ऑर दीदी के सामने कर दिया दीदी

की आँखें चमक गई नकली लंड देख कर ,,,,ऑर दीदी ने मुझे वापिस इशारा किया कि जल्दी से

इसको मेरी गान्ड मे वापिस घुसा दो लेकिन मैने ऐसा नही किया ,,,,,,,,,,,,दिदीइ ईईसस न्नाककल्ली

ल्लुउन्न्ड्ड़ ससी ंमाज़्जा आ र्राहहा हहाइी न्ना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हहानं ससुउन्नययी भ्हुत

म्माज्जा आ र्राहहा हहाइी यययय त्तूओ स्साक्च्छ म्मईए एआईसीए ल्लाग्ग र्राहहाअ

हहाआऐययइ ज्ज्जासस्ससी स्साआकच म्मईए कककू द्दुऊऊसररा म्मार्र्द्द्द म्मूुझहही

छ्छूओद्दड़ रर्राहहा हहाऐ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

द्दीइद्दीइ यईीई ट्टू अब्भिईिइ कच्छूत्ताअ ल्ल्लुउन्न्ड्ड़ हहााईइ म्मीररी पास्ससस्स ईक

ऊओररर ईइसस्स ससी बभहीइ ब्बाद्दा ल्लुउन्न्ड्ड़ हहाइईइ उऊस्क्की स्साटतह ज्जय्याद्दा ंमाज़्जा

आयईगगा ब्बूओल्लू त्तूओ ल्ल्लीक्क्की आत्ता हहूऊंन्न,,,,,,,,,,,,,दीदी कुछ नही बोली ऑर

मेरे उपर से जल्दी से हट गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा--,जल्दी जाओ सन्नी ऑर लेके आओ उस मोटे लंड को आज

मुझे 2 लंड का मज़ा लेना है प्लीज़ जल्दी जाओ,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--,ऐसी नही दीदी वो लंड एक सर्प्राइज़ है आपके लिए आप एक काम करो अपने मुँह

को चद्दर से ढक लो जब तक वो लंड अपनी चूत मे नही जाता तब तक आपको उसको नही दिखाना है,,,,,,,,,,,

शिखा--ठीक है सन्नी मुझे सब मंजूर है लेकिन जल्दी जाओ उस बड़े लंड को लेके आओ मेरे से ऑर बर्दाश्त नही हो रहा,,,,,,,,,,

 
मैं जल्दी से उस रूम मे से निकला ऑर अपने मामा के रूम मे चला गया,,,,,,,जहाँ करण

मेरा इंतजार कर रहा था,,,,,,,सोनिया ऑर कविता के पीछे जाते मुझे पहले करण का ही फोन

आया था ऑर घर पे जब पहली बेल बजी थी तब करण ही आया था जिसको मैने ये कहके

यहाँ बुलाया था कि मेरी एक गर्लफ्रेंड है जिसको मैं करण से चुदवा सकता हूँ लेकिन एक शर्त

है कि वो करण को अपना फेस नही दिखाएगी करण भी चूत के लिए किसी की शर्त को

मानने को तैयार हो गया था जैसे अभी शिखा तैयार हुई है बड़े लंड के लिए मेरी कोई भी बात

मानने को,,,,,,,,,,,,,,,,

करण बेड से उठा,,,,,,,,,क्या हुआ सन्नी वो आ गई,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--हाँ वो आ गई ओर तैयार भी है चुदने को लेकिन उसको ये नही पता कि तुम उसको चोदोगे वो

तो यही समझेगी कि मैं उसको चोद रहा हूँ,,,,,,,,,,,,,,उसका चेहरा ढका हुआ है मैने

तुम जब भी उसको चोदो तो प्लज़्ज़्ज़्ज़ कोई बात मत करना कुछ मत बोलना उसको यही लगना

चाहिए कि मैं ही उसको चोद रहा हूँ,,,,,,,,,,

करण--क्या मतलब सन्नी,,,,,,,,,,,,,क्या तूने उसको नही बताया कि मैं उसको चोदने वाला हूँ ,,लेकिन

तूने फोन पर तो बोला था कि वो भी तैयार है मेरे से चुदने को,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--देख वो तैयार नही है लेकिन जब तेरा लंड उसकी चूत मे जाएगा तो वो तैयार हो जाएगी,,अब तू

ज्याद बात मत कर बोल चूत चाहिए या नही,,,,,,,,,,,,

करण कुछ नही बोला ओर मेरे साथ चलने लगा,,,,,,,,,,,,,,,,,

सन्नी--अबे साले पहले कपड़े निकाल ऑर चल मेरे साथ जल्दी से,,,,,,,,,,

मैं करण को लेके माँ के रूम मे आ गया जहाँ शिखा नंगी लेटी हुई थी लेकिन मुँह पर

एक चद्दर थी उसके जिस से उसका फेस कवर था ऑर ना तो वो करण को देख सकती थी ना करण

उसके फेस को,,,,,,,,,,,करण पहले से नंगा था ऑर रूम मे आके एक नंगे ऑर गोरे बदन को

ऐसी हालत मे, बेड पर देख कर उसका लंड भी ओकात मे आने लगा था,,तब तक मैं शिखा

के पास बेड पर चला गया ऑर इस से पहले वो कुछ बोलती मैने नकली लंड को चद्दर के

अंदर कर दिया ऑर शिखा ने भी जल्दी से उस नकली लंड को मुँह मे भर लिया इतने मे करण

का लंड तैयार हो गया ऑर मैने उसको इशारा किया ऑर वो जल्दी से बेड पर आ गया जब करण बेड

पर चढ़ने लगा तो मैने जानभूज कर खुद को भी ज़रा ज़ोर से हिला दिया ताकि मेरे हिलने से

बेड भी हिलने लगे ऑर शिखा को करण के बेड पर चढ़ने का पता ना चल सके,,,बेड पर आते ही

वो शिखा के उपर चढ़ गया ऑर लंड को शिखा की चूत मे घुसा कर जल्दी से तेज तेज झटके

मारना शुरू कर दिया उधर मैने भी नकली लंड को शिखा के मुँह मे अंदर बाहर करना

शुरू कर दिया ताकि वो कोई आवाज़ ना कर सके ऑर करण उसकी आवाज़ से उसको पहचान ना ले करण

तो पहले से ही चुप चाप चुदाई करने मे लगा हुआ था करण तेज़ी से चुदाई करता हुआ

शिखा के बूब्स को चूसने लगा ऑर अपने एक हाथ से पकड़ने लगा तभी मैने उसको मना

कर दिया क्यूकी शिखा को शक हो जाता ,,,करण ने वापिस अपने दोनो हाथों को बेड से लगाकर

खुद को शिखा के बदन से उपर उठा लिया ऑर फिर तेज़ी से शिखा की चूत को चोदते हुए

अपने सर को नीचे करके शिखा के बूब्स को चूसने लगा

करण आज नई चूत मिलने से कुछ

ज़्यादा ही एग्ज़ाइट हो गया था ऑर तेज़ी से पूरी स्पीड से शिखा को चोदने मे लगा हुआ था उसको

तो ये भी नही पता था कि जिसको वो इतने मज़े से ऑर इतनी तेज़ी से चोद रहा है वो उसकी अपनी

बेहन है,,,,,उधर शिखा भी इतनी तेज़ी से हो रही अपनी चूत की चुदाई मे पागल होने लगी

ऑर तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगी ये तो अच्छा था कि मैने नकली लंड को उसके मुँह मे घुसा रखा

था वर्ना उसकी आवाज़ से करण को उसकी पहचान हो जाती ऑर पंगा हो जाता...तभी फिर से करण

ने अपने जिस्म को शिखा के जिस्म पर रख दिया मुझे डर था कही शिखा ऑर कोई एहसास ना

हो जाए कि मेरे अलावा कोई ओर भी है रूम मे इसलिए करण के नीचे होते ही मैने करण के

हाथ मे वो नकली लंड पकड़ा दिया जो अभी तक मेरे हाथ मे था ऑर खुद जल्दी से उठकर

साइड मे हट गया करण इतनी तेज़ी से चोद रहा था ऑर काफ़ी लंबे टाइम तक चोदता रहा अपनी सिस

को ऑर करीब 15-20 मिनट की तेज चुदाई के दोरान शिखा एक बार ऑर पानी निकाल चुकी थी

लेकिन करण अभी भी डटा हुआ था ऑर तभी 2 मिनट बाद ही करण ने अभी पानी छोड़ना

शुरू कर दिया ऑर उसके अपनी बेहन की चूत को पानी से भर दिया ऑर जल्दी से उतरकर शिखा की

राइट साइड मे लेट गया ऑर हाँफने लगा उधर मैं शिखा की लेफ्ट साइड मे लेटा हुआ था कुछ

देर बाद खुद पर क़ाबू पाके शिखा ने अपने चेहरे से चद्दर निकाल दी उसका फेस मेरी

तरफ था उसने अपने पास पड़े नकली लंड को उठाया ऑर मेरी तरफ करते हुए इशारे मे ही

पूछने लगी कि ये तो वही नकली लंड है तो फिर बड़ा वाला लंड कहाँ है जो तुम लेने गये

था तभी मैने उसको उसकी दूसरी तरफ इशारा करते हुए करण की तरफ इशारा कर दिया उसने

जैसे ही पलट कर करण की तरफ देखा एक दम से डर गई ऑर जल्दी से अपनी चद्दर उठाकर

खुद के नंगे जिस्म को ढक लिया तब तक करण भी गुम्सुम हो चुका था अपनी बेहन को

ऐसी नंगी हालत मे अपने दोस्त के साथ एक ही बेड पर देख कर,,,,,,,,,,,करण ने भी पास ही

पड़े एक पिल्लो को उठा लिया ऑर जितना ज़रूरी था उतना बदन ढक लिया,,,,,,,,,,,

 
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