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कांता की कामपिपासा

आर पी बड़ी ही बेरहमी से उसकी चुचियों को मसल रहा था…….. लगभग 15 मिनट के बाद आर पी का शरीर अकड़ने सा लगा…………उसके शरीर मे एक झटका सा लगा और उसकी दोनो आँखे भिच गयी………. और ढेर सारा वीर्य निकल कर कांता के हाथो पर गिर

गया……….. इसके साथ ही आर पी लंबी लंबी सासे लेते हुए पीछे वाली कुर्सी पर निढाल हो गया……………….

कांता ने अपने हाथ को उसकी धोती से ही पोछ लिया और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बैठ गयी…..

लगभग 4.45 बजे सुबह जानकी लाल की आँख खुली……. पीछे मूड कर देखा तो कांता और आर पी दोनो सीट के दोनो तरफ गहरी नींद मे सो रहे थे………….. ड्राइवर बड़ी ही सावधानी से गाड़ी चला रहा था……… लगभग 1 घंटे बाद आर पी और कांता भी उठ गये…. दोनो की नज़रे मिलते ही दोनो हल्के से मुस्करा दिए…………….

आर पी ने ड्राइवर से गाड़ी को किसी अच्छे से रेस्टौरेंट पर रोकने के लिए कहा…… कुछ देर बाद एक अच्छा सा रेस्टौरेंट देख कर ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी…………. फिर सभी लोग उतर कर रेस्टौरेंट मे गये…. वहाँ पर तीनो ने आपने हाथ मुँह धोए ……… ड्राइवर ने भी अपने हाथ पैर धोए मगर वो उन तीनो से अलग था….. फिर तीनो ने सुबह की चाई पी……… फिर जानकी लाल और आर पी मे इधर उधर बिज़्नेस की बाते होने लगी…. आर पी बात करते हुए बार बार जानकी लाल की नज़रों को बचाकर कांता की तरफ देख रहा था…

चाइ पीने के बाद तीनो वापस कार मे आकर बैठ गये………….. सुबह के 7.00 बजने को थे……… वो लोग अभी भी गुड़गावा से करीब 120 किमी की दूरी पर थे…… तीनो के कार मे बैठने के साथ ही ड्राइवर गाड़ी को हाइवे पर ले आया और गाड़ी को सरपट दौड़ाने लगा……………

कार मे बैठे बैठ ही जानकी लाल और आर पी मे बिज़्नेस से रिलेटेड बाते होती रही……….. लगभग 2 घंटे के सफ़र के बाद उनकी कार गुड़गावा मे पहुच गयी……….. ड्राइवर गाड़ी को आर पी के शोरुम पर ले गया……….. आर पी का शोरुम 10 बजे खुलता था लेकिन चपरासी सुबह 9.00 बजे शोरुम खोलकर ऑफीस की सॉफ सफाई मे लग जाता……..

 
आर पी: अरे जानकी लाल जी………. अब आप यहाँ से देल्ही कैसे जायंगे?

जानकी लाल: यहीं से कोई टॅक्सी हाइयर करेंगे? और क्या?

आर पी: अरे जानकी लाल जी……. आप ऐसा क्यो नही करते… आप मेरी गाड़ी लेकर चले जाए….. यहाँ मेरे ऑफीस मे और भी गाड़िया है…… 2 तारीख को मुझे वापस जयपुर ही जाना है…… तो आप लोगो के साथ ही चले चलेंगे……… और वहाँ से आप फ्लाइट पकड़ कर निकल जाना………………….

जानकी लाल: अरे नही नही…… पहले ही आपको मैने इतना परेशान कर दिया है…… अब और ज़्यादा नही कर सकते.

आर पी: अरे जानकी लाल जी इसमे परेशानी की क्या बात है……. आप बेफिक्र होकर मेरी कार ले जाएँ…… अपना काम करके वापस

लौटिए……… हम साथ साथ जयपुर चले चलेंगे……… ये ठीक रहेगा………… क्यो बेटी कांता.

कांता तो समझ ही चुकी थी कि आर पी ऐसा क्यों कह रहा है……….

आर पी के दबाव देने के कारण जानकी लाल को झुकना ही पड़ा……….

और वो आर पी की दूसरी कार से देल्ही के लिए रवाना हो गये………… एक तो दिसंबर. 31 का दिन ……… उपर से देल्ही के ट्रफ़िक के कारण लगभग 2.00 बजे वो देल्ही के उस होटेल मे पहुचे जहाँ पर पहले से ही जानकी लाल ने कमरा बुक करवा लिया था………..

रिसेप्षनिस्ट से कमरे की चाभी लेकर कांता और जानकी लाल दोनो कमरे मे बढ़ चले…………… कमरे मे पहुच कर जानकी ने कमरे को लॉक किया और पीछे से कांता को अपनी बाहो मे पकड़ कर उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी चुचियों को ब्लाउस के ऊपर से ही दबाने लगे……….. आर पी के फॉर प्ले ने कांता को वैसे ही अधूरा छोड़ दिया था……. इसलिए कांता को भी इस रेफ्रेशमेंट की ज़रूरत महसूस हो रही थी…………… जल्द हो दोनो के तन से कपड़े जुदा हो गयी… और कमरे मे गरम सिसकारियाँ गुज़्ने लगी………………

 
शाम को 9.30 बजे

जानकी लाल बिल्कुल तैयार थे. उन्हे देख कर ऐसा लग रहा था कि उन्हे किसी पार्टी मे जाना है…….. कांता शायद तैयार हो रही थी…….. और जानकी लाल उसी का वेट कर रहे थे………….. जानकी लाल ने अपनी कलाई पर बँधी हुई घड़ी को देखने हुए कहा

जानकी लाल: अरे बहू अब चलो भी…………….. 10 बजने वाले है……… वहाँ पर प्रेम सिंग आ गया होगा…… सोचता हूँ आज कुछ डिस्कशन कर लूँ उसके पीए से……… आज ही प्रेम सिंग से मुलाकात हो जायगी तो कल काम जल्दी हो जाएगा………..

जानकी लाल की आवाज़ सुनकर कांता ने अंदर से ही कहा

कांता: बस बाबू जी……… 2 मिनट मे आ रही हूँ.

लगभग 10 मिनट बाद जानकी लाल के कांता के आने की आहट सुनाई दी……. जानकी लाल ने पीछे मूड कर कांता को देखा तो देखते ही रह गये….. हल्के पीले रंग की बेहतरीन डिज़ाइन की हुई साड़ी….. उसी को मॅच करता हुए शानदार हाफ स्लीव का ब्लाउस………… गले मे वाइट गोल्ड का डिज़ाइन किया हुआ……… नेक्लेस….. जिसमे ब्लॅक डिमांड लगे हुए थे…………… कानो मे वाइट गोल्ड के बड़े झुमके…. खुले हुए रेशमी बाल…………. और उसके हल्की साड़ी से दिखाई देता उसका मांसल और सपाट पेट….. और उसमे उसकी गहरी नाभि की झलक………….. साक्षात रति का जीता जागता रूप लग रही थी कांता.

जानकी लाल का मुँह खुला का खुला रह गया कांता को मंत्रमुग्ध कर देने वाला रूप देख कर…………. जब कांता उनके पास आकर उनसे चलने के लिए बोली तब जाकर जानकी लाल की तंद्रा टूटी………….

जानकी लाल ने कांता को आगे चलने का इशारा किया…….. कांता के आगे जाते ही जानकी लाल उसे पीछे से जाते हुए देखने लगे………

.. कांता का ब्लाउस पीछे से काफ़ी खुला हुआ था जिस से कि कांता की मांसल पीठ का सेक्सी व्यू बड़ा ही मादक लग रहा था……..

पता नही आज ये कहर किस्पर टूटेगा……. जानकी लाल ने कांतो को देख कर अपने आप से कहा, फिर वो भी कांता के पीछे पीछे कमरे से बाहर निकल लिए.

बाहर आर पी का ड्राइवर कार लिए उनका इंतज़ार कर रहा था……. दोनो कार मे बैठ गये…… ड्राइवर कार को उस होटेल से निकाल कर शहर की रोड पर ले आया……. चारो तरफ सड़क पर 31स्ट नाइट की पार्टी की रौनक भिखरी हुई थी….. सड़क पर काफ़ी भीड़ थी सभी होटेल्स भी सजे हुए थे………… लगभग 20 मिनट के बाद कार एक साधारण होटेल के सामने रुकी. जानकी लाल और कांता दोनो निकलकर होटेल के अंदर चले गये……

 
होटेल के हॉल मे काफ़ी भीड़ थी……. और म्यूज़िक का शोर भी था सभी लोग 31स्ट पार्टी की जश्न मनाने मे डूबे हुए थे……… कई जोड़े बाहो मे बाहे डाले मस्ती मे झूम रहे थे….. पार्टी अपने शबाब पर थी……… जानकी लाल की आँखे किसी को ढूढ़ रही थी……… तभी एक वेटर आकर जानकी लाल ले बोला……….. सर प्रेम सिंग पूनिया का पीए आपको वहा बुला रहा है…..

जानकी लाल ने वेटर के हाथ के इशारे की तरफ देखा तो वहाँ प्स (प्रेम सिंग) हाथ हिलाकर जानकी लाल को बुला रहा था.. जानकी लाल उसकी तरफ चल पड़ा. पीछे पीछे कांता भी थी… वहाँ पर एक लंबा चौड़ा आदमी भी खड़ा था जिसकी उमर लगभग 48-50 के करीब थी… जैसे ही जानकी लाल और कांता वहाँ पहुचे पीए ने पास खड़े आदमी का परिचय जानकी से करवाया

पीए: ये है हुमारे साहब श्री प्रेम सिंग पूनिया, और सर ये है जानकी लाल जी, जिनके बारे मे मैने आप से बात की थी.

जानकी लाल ने प्रेम सिंग पूनिया का हाथ जोड़कर अभिवादन किया, पीए ने भी हल्के से मुस्काराकर एक गुरूर नुमा अभिवादन किया जानकी लाल का…

जानकी लाल: ये है मेरी बहू कांता, बिज़्नेस मे मेरा सहयोग भी करती है…….

इस बार पीए ने ऊपर से नीचे तक कांता को बड़े गौर से देखा.. साड़ी मे लिपटी उसकी मदमस्त जवानी देख कर पीए की आँखे चुन्धिया गयी,

कांता का जिस्म साड़ी मे इतना विस्फोटक लग रहा था जैसे कि साड़ी मे कांता का जिस्म नही बल्कि आरडीएक्स रखा हो… प्रेम सिंग ने अपने आपको संभालते हुए कांता की तरफ देख कर हल्के से मुस्करा दिया……….

कुछ देर इधर उधर की बाते करने के बाद जानकी लाल को प्रेम सिंग के पीए ने इशारे से एक तरफ चलने को कहा……. जानकी लाल कांता से अभी आता हूँ बोलकर पीए के साथ चले गये………

उनके जाने के बाद प्रेम सिंग और कांता दोनो ही रह गये. प्रेम सिंग ने बात करने के गुरेज़ से कांता से कहा

प्रेम सिंग: क्या लेंगी आप, विस्की, स्कॉच, वोडका……………

कांता: जी रहने दीजिए मैं ये सब लेना पसंद नही करती…………..

प्रेम सिंग: पसंद नही करती है, मगर कभी कभी लेती तो है ना…… बताइए क्या लेंगी…………. वैसे भी आज पार्टी है… और कभी कभी लेने मे कोई बुराई नही है……….. बिल्कुल लाइट………

कांता जानती थी टेंडर देना, ना देना इसी के हाथ मे है, ये सोचकर कांता बोली

कांता: ठीक है……. लेकिंग बिल्कुल हल्का सा……………

प्रेम सिंग: ओके…….. वेटर इधर आऊऊऊऊ.

वेटर: जी सर…….. कहिए……

प्रेम सिंग: ऐसा करो एक पेग स्कॉच लार्ज, और दूसरा स्म्र्नॉफ ऑरेंज फ्लेवर स्माल पेग लेकर आओ (स्माल पेग कहते हुए प्रेम सिंग ने वेटर की तरफ आँख दबा दी थी, वेटर समझ गया कि दोनो ही लार्ज पेग लेकर आने है)

 
कुछ देर कुछ देर बाद वेटर ऑर्डर ले आया……. दोनो ही पास के टेबल पर बैठ गये थे……….. पेग के साथ स्नॅक भी थे…… दोनो ने अपना अपना ग्लास उठाया और दोनो चियर्स किया.

प्रेम सिंग: आज की शाम………. आपके नाम

प्रेम सिंग के इस कॉमेंट्स पर कांता मुस्कुराए बिना नही रह सकी……… दोनो ने हल्का हल्का सीप लिया और फिर इधर उधर की बाते करने लगे………. लगभग 10 मिनट के बाद दोनो के ग्लास खाली हो चुके थे…… प्रेम सिंग ने इशारे मे वेटर को बुलाया और बोले

प्रेम सिंग: ऑर्डर रिपीट कर दो.

वेटर 2 मिनट मे ही दूसरे पेग ले आया………… दोनो हल्के हल्के सीप ले रहे थे. हल्की हसी मज़ाक का दौर शुरू हो गया था………. कुछ देर बाद दोनो का दूसरा पेग भी खाली हो गया था…………….. अब कांता पर शराब का हल्का शुरूर नज़र आने लगा था………. जब कांता प्रेम सिंग से घुल मिल गयी तब प्रेम सिंग ने बड़े ही प्यार से कांता से कहा.

प्रेम सिंग: कॅन यू डॅन्स वित मी प्ल्ज़………….

कुछ शराब का नशा……… कुछ जवानी का नशा………… कुछ पार्टी का नशा…….. होने की वजह से कांता ने भी मुस्कुराते हुए उसकी बात मान ली….. और उसके साथ डॅन्स करने के लिए खड़ी हो गयी………

प्रेम सिंग ने बड़ी ही नज़ाकत के साथ उसका हाथ थामा और डांस फ्लॉर की तरफ चल दिया. डॅन्स फ्लोर पर पहुचने के बाद दोनो धीरे धीरे थिरकने लगे……………. कुछ देर तक तो दोनो के जिस्मो मे फासला था…….. लेकिन धीरे धीरे प्रेम सिंग के हाथ कांता के जिस्म को टच करने लगे थे………

एक तो डांस फ्लोर पे वैसे ही भीड़ थी…… दूसरा डॅन्स लाइट की वजह से ठीक से कुछ देख पाना भी मुस्किल था. प्रेम सिंग इस बात का पूरा फ़ायदा उठा रहा था….. धीरे धीरे प्रेम सिंग ने अपने दोनो हाथ कांता की कमर पर रख दिया….

कांता के हाथ भी अब प्रेम सिंग के कंधे तक पहुँच चुके थे….

धीरे धीरे प्रेम सिंग कांता के करीब आ गया था और लगभग उसके शरीर से चिपक रहा था…….. तभी डिस्को थिक की लाइट बिल्कुल हल्की हो गयी……. एक धीमे रिदम का लेकिन सेक्सी म्यूज़िक शुरू हो गया……. सभी जोड़े एक दूसरे से चिपक कर धीमे धीमे झूम रहे थे. प्रेम सिंग ने इस मौके का फ़ायदा उठाकर अपने दोनो हाथो का कांता के दोनो विशाल कुल्हो पर रखकर फेरते हुए कांता के शरीर को अपने से चिपका कर हल्के हल्के झूमने लगा…………………

 
कांता को शराब का शुरूर तो था ही उपर से प्रेम सिंग के हाथो का स्पर्श अपने कुल्हो पर पाकर वो और भी आनदित होने लगी थी….. प्रेम सिंग ने जब देखा कि कांता अपने कुल्हो को सहलाने का कोई विरोध नही कर रही है तो उसने अपने हाथ कांता की नन्ही पीठ पर रख दिया.

कांता की चौड़ी और मासल पीठ पर प्रेम सिंग बड़ी ही नज़ाकत के साथ अपना हाथ फिरा रहा था.

कांता ने जब देखा कि प्रेम सिंग पर उसके यौवन का जादू चल गया है तो कांता ने उससे बिज़्नेस की बाते छेड़ते हुए कहा

कांता: तो सर अब आपने क्या सोचा है मेरी फाइल के बारे मे…

प्रेम सिंग: (एक हाथ से कांता की पीठ और दूसरे हाथ से कांता की गान्ड सहलाते हुए बोला) अजी मेडम अभी से इतनी जल्दी क्या है अभी अभी तो फाइल मेरे पास आई है……. अभी मैं आपके प्रॉजेक्ट की फाइल को देखूँगा, समझूंगा तब जाकर डिसिशन लूँगा………………

कांता: कब और कैसे देखना पसंद करेंगे आप मेरी फाइल को………..

प्रेम सिंग: अजी मेडम आप जितनी अच्छी तरह मुझे फाइल दीखायंगी, उतना ही पॉज़िटिव कांट्रॅक्ट के लिए होगा. (प्रेम सिंग ने अपनी मंशा से ये जाहिर कर दिया था कि अगर कांता को कांट्रॅक्ट लेना है तो वो प्रेम सिंग को नाराज़ ना करे

.कांता को कांट्रॅक्ट ही वॅल्यू मालूम थी, और वो इसे हाथ से नही जाने देना चाहती थी, इसलिए मुस्कुराती हुई बोली)

कांता: अब तो पूरी की पूरी फाइल आपके हाथो मे है, जैसे देखना चाहे वैसे देख सकते है, वैसे एक बात बता दूँ कि मेरी फाइल मे कोई कमी नही मिलेगी आपको.

कांता के मुँह से ये सुनकेर प्रेम सिंग की आँखो मे चमक आ गयी और वो कांता की पीठ से अपने हाथ हटाकर कांता के दोनो विशालो कुल्हो को पकड़कर कांता को अपने जिस्म से चिपकाते हुए बोला…

प्रेम सिंग: एक बात तो है मेडम, आपकी फाइल उपर से देखने मे तो बड़ी कमाल की लगती है, लेकिन आप तो जानती है कि बिना फाइल को पढ़े आदमी कैसे बता सकता है कि ये फाइल काम की है कि नही……………….

कांता: अरे सर…….. यकीन मानिए…… मेरी फाइल बाहर से देखने मे जितनी आकर्षक है उस से ज़्यादा पढ़ने मे आपको मज़ा आयगा. मेरी फाइल पढ़कर आप निराश नही होंगे, ये मेरा वादा है आपसे…………

डांस फ्लोर मे बिल्कुल मध्यम रोशनी थी, जिससे कि कोई भी जोड़ा किसी दूसरे जोड़े को सॉफ तौर पर नही देख पा रहा था. सभी जोड़े आपस मे एक दूसरे से चिपके हुए थे. इसलिए बिना किसी हिचकिचाहट के प्रेम सिंग भी कांता के जिस्म को नाप रहा था……………

 
प्रेम सिंग अपने दोनो हाथ को कांता की गान्ड के दरार मे साड़ी के उपर से डालकर कांता के दोनो कुल्हो को बड़ी मस्ती मे दबा रहा था….

कांता भी प्रेम सिंग के बदन से एक दम चिपकी हुई थी, जिस से कि उसकी बड़ी बड़ी चूचिया प्रेम सिंग के सीने से दब कर उभर कर उपर आ रही थी.

प्रेम सिंग कांता की ब्लाउस मे से उभरी हुई चूचियो को देखते हुए बोला

प्रेम सिंग: अरे कांता जी……….. फाइल तो मेरे हाथो मे है… लेकिन इतनी भीड़ भाड़ मे इसको खोल के नही पढ़ा जा सकता ना…….. एकांत मे मैं ध्यान से आपकी फाइल को पढ़ पाउन्गा…………. ये कहते हुए उसकी नज़रे कांता की गोरी गोरी चुचियों पर टिकी हुई थी.

कांता ने प्रेम सिंग को उकसाते हुए कहा

कांता: माना सर कि इस भीड़ मे आप मेरी फाइल को ठीक से नही देख सकते है… मगर एक सरसरी नज़र तो फेर ही सकते है मेरी फाइल पर……………

.

यह कहकेर कांता ने प्रेम सिंग को के खुला निमंत्रण दे दिया कि वो आराम से कांता के बदन को हर जगह से सहला सकता है, कांता अपने प्रती उसकी प्यास को इस कदर बढ़ाना चाहती थी कि प्रेम सिंग उसको पाने के लिया व्याकुल हो जाए वो कांता का काम आसान हो सके……….

ये सुनकर प्रेम सिंग की मुस्कान 1 इंच और बढ़ गयी.. प्रेम सिंग ने अपना हाथ कांता की गान्ड से हटाते हुए उसके पीछे की तरफ घुमा दिया अब दोनो के चेहरे एक ही दिशा मे थे….. फिर प्रेम सिंग ने कांता की दोनो हथेलिओ को अपनी हथेलियों मे कस लिया और अपनी ठोडी (चिन) को कांता की गर्दन के पास उसके कंधो पर टिका दिया…….

इस फाइल चेकिंग के साथ-2 दोनो धीरे धीरे झूम भी रहे थे ताकि किसी की नज़रो मे ना आ सके. कुछ देर तक प्रेम सिंग कांता के दोनो हाथो को अपने हाथ मे लेकर…. झूमता रहा……. फिर उसने धीरे से अपना दाहिना हाथ कांता की साड़ी मे घुसाते हुए कांता के चिकने और सपाट पेट कर रख दिया…………

प्रेम सिंग का हाथ अपने पेट पर पड़ते ही कांता का रोम रोम खड़ा हो गया. प्रेम सिंग भी कांता के मुलायम और नरम पेट का स्पर्श पाकर गन्गना उठा……… प्रेम सिंग पर शराब और शबाब का नशा छाने लगा था. वो अपने होंठो को कांता की खुली हुई गर्दन पर रगड़ने लगा था…..

कांता भी आँखे बंद किए प्रेम सिंग के स्पर्श का आनंद ले रही थी. दोनो की बिज़्नेस मीटिंग बड़े ही इतमीनान से चल रही थी…………..

प्रेम सिंग कांता की गान्ड से बिल्कुल चिपका हुआ था. कांता की मांसल और बड़ी गान्ड की गर्मी से प्रेम सिंग का साँप अपना फन उठाने लगा था…….

कांता भी प्रेम सिंग के साँप की हल्की आहट अपनी गान्ड पर भी महसूस कर रही थी…

 
प्रेम सिंग कांता की गान्ड की चौड़ाई देख कर दंग हो रहा था… अब प्रेम सिंग ने अपना हाथ कांता के पेट से हटा कर धीरे से साड़ी के अंदर से ही कांता की मदमस्त चूचियो पर रख दिया… वैसे प्रेम सिंग की हथेली काफ़ी बड़ी थी…. लेकिन कांता की चूचियो की विशालता के आगे उसकी हथेलिया छोटी पड़ गयी थी. कांता की चूचियो को थोड़ा मसल्ते हुए प्रेम सिंग कांता के कान मे फुसफुसा कर बोला.

प्रेम सिंग: एक बात है कांता तुम्हारी फाइल के पायंट्स काफ़ी काफ़ी बड़े और आकर्षक है……. पॉइंट शब्द कहते हुए प्रेम सिंग ने कांता की चूचियो को ज़ोर से दबाया.

कांता भी समझ गयी कि वो कौन से पॉइंट की बात कर रहा है…. कांता प्रेम सिंग को और उकसाने के इरादे से बोली

कांता: अरे सर अभी तो आप मेरे पायंट्स को सरसरी निगाहो से देख रहे है…. जब आप इनको आराम से एकांत मे देखेंगे तो आप को पता चलेँगा………

कांता के इस कथन ने प्रेम सिंग को और रोमांचित कर दिया और वो जोश मे कांता की दोनो चूचियों को अपनी हथेलिओ मे लेकर दबाने लगा……………..

कांत ने अपना सर प्रेम सिंग के सीने पर झुका दिया था, जिससे कांता के उरोज और उभर गये थे, प्रेम सिंग दोनो हाथो से कांता की चूचियो को मीस रहा था. कांता ने अपने दोनो हाथ उठाकर प्रेम सिंग के सर को पीछे से थाम लिया, जिससे कांता की गुदाज बाहे प्रेम सिंग के होंठो से छुने लगी,

प्रेम सिंग कांता की गुदाज बाजुओ को अपने होंठो से चूमने लगा. दोनो ही एक दूसरे के जिस्म से ऐसे चिपके हुए थे जैसे कोई नाग नागिन का जोड़ा मेटिंग करते वक़्त चिपका हुआ रहता है

. कांता ने फुसफुसाते हुए प्रेम सिंग से कहा.

कांता: क्यो सर …………. मेरी फाइल पसंद आई कि नही आपको……………

प्रेम सिंग: (कांता के चुचों को अपने हाथ से मसल्ते हुए) सच कहूँ कांता जी…. आप की फाइल जैसी बेजोड़ फाइल मैने अभी तक नही देखी…. अब मुझे अहसास होने लगा है कि शायद ये टेंडर आपको ही मिलेगा…………….

कांता: अरे सर………. अभी आपने मेरी फाइल के केवल कुछ पॉइंट ही देखे है….. जब आप मेरी फाइल को खोल कर पढ़ लेंगे, तब शायद नही यक़ीनन ये टेंडर मुझे ही मिलेगा…..

प्रेम सिंग: (अपने हाथ कांता की चुचियों से हटाकर कांता के दोनो चुतड़ों को सहलाते हुए) मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कांता जी……………………..

ये कह कर प्रेम सिंग कांता के दोनो पाटो पर अपने हाथ को फिराने लगा…..

प्रेम सिंग की चुचि मिसाई से कांता के अंदर भी आग सुलगने लगी थी…

 
प्रेम सिंग ने अब कांता को फिर से घूमा दिया जिस से कि दोनो के चेहरे आमने सामने हो गये…. कांता की आँखे शराब और जवानी के नशे से लाल हो चुकी थी.. प्रेम सिंग अपने दोनो हाथो को कांता की गान्ड पर लेजाकर उसके चूतड़ो को दबाते हुए बोला….

प्रेम सिंग: एक बात तो है कांता जी आपकी फाइल का पीछे वाला हिस्सा काफ़ी वज़नदार है . आपकी फाइल के जो दो मजबूत पायंट्स है वो आपके आगे का उपर वाला हिस्सा और पीछे से ये वाला (कांता की गान्ड दबाते हुए) हिस्सा किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है……….. ये कह कर कांता की गान्ड पर अपने हाथ को ज़ोर से दबाकर कांता को अपने से बिल्कुल चिपका लिया और कांता की गर्दन पर किस्सस की झड़ी लगा दिया… फिर उसने अपने दोनो हाथो मे कांता का चेहरा थाम कर उसके रसीले और मादक होंठो पर अपने होंठो को चिपका दिया.

कांता भी अपने होंठो को खोलकर प्रेम सिंग का साथ दे रही थी. दोनो एक दूसरे को बड़ी ही गरम्जोशी के साथ चूम रहे थे.

प्रेम सिंग का हाथ कांता की गान्ड की दरार मे अपनी उंगलिओ को घुसाने का असफल प्रयास कर रहा था. प्रेम सिंग का लंड पॅंट फाड़ के बाहर आने के लिए बेताब हो रहा था. वासना के लाल डोरे प्रेम सिंग की आखो मे सॉफ दिखाई दे रहे थे. कांता के जिस्म का जादू प्रेम सिंग के ऊपर बुरी तरह चल चुका था. प्रेम सिंग धीरे धीरे जोश मे अपना आपा खोने लगा था. वो कांता के ब्लाउस मे हाथ घुसाने का प्रयास करने लगा.

कांता ने प्रेम सिंग को बड़े ही प्यार से समझाते हुए कहा.

कांता: अरे प्रेम सिंग जी आप इतने उतावले क्यो हो रहे है….... इस डॅन्स फ्लोर मे इतना ज़्यादा आगे बढ़ना ना तो आपके लिए सही है और ना ही मेरे लिए सही…………. कांता ये बात बड़ी मुश्कुरा के बोली...

हालाकि प्रेम सिंग नशे मे ज़रूर था लेकिन इतना भी नशे मे नही कि वो कांता की बात की सच्चाई को समझ ना सके………… कांता का कहना बिल्कुल ठीक था… मगर अब प्रेम सिंग को अपने आप को रोकना बड़ा ही मुश्किल लग रहा था. उसने कांता से कहा.

प्रेम सिंग: कांता क्या हम यहाँ होटेल मे नही रुक सकते…………….

कांता प्रेम सिंग की बेचैनी देख कर मन ही मन बहुत खुश हुई… चुकी कांता अभी पार्टी मे आई थी, और प्रेम सिंग भी पार्टी मे आया था, कांता को प्रेम सिंग के साथ मे रुकने मे कोई परेशानी नही थी, लेकिन कांता टेंडर के डॉक्युमेंट्स पर प्रेम सिंग के सिग्नेचर चाहती थी . कांता ने मन ही मन सोचा कि अगर अभी वो प्रेम सिंग के साथ रुक जाएगी तो टेंडर का मामला तो आगे नही बढ़सकता, और फिर वो प्रेम सिंग के साथ एक होना चाहती जब टेंडर प्रॉजेक्ट उसके हाथ लग जाए ये सोच कर कांता ने प्रेम सिंग से कहा:

कांता: वैसे तो मैं रुक सकती हूँ…….. मगर प्रेम सिंग जी आप तो जानते है कि मेरे साथ मेरे ससुर भी आए है…….. उनके सामने मैं कैसे यहाँ पर रुक सकती हूँ मुझे होटेल मे उनके साथ वापस जाना ही होगा……….. ऐसा करते है कि कल मैं अपनी प्रॉजेक्ट फाइल लेकर आपके ऑफीस आ जाती हूँ, या आप जहाँ कहे वहाँ आ जाती हूँ, फिर आराम से हम प्रॉजेक्ट का डिस्कशन कर सकते है………….

 
कांता का ये फ़ैसला प्रेम सिंग को नागवार सा लग रहा था लेकिंग कांता की बात बिल्कुल सही थी………… इसलिए प्रेम सिंग बेबस सा हो गया………… इस दौरान लगभग 1 घंटा बीत चुका था………. प्रेम सिंग का मूड अब बिल्कुल ऑफ सा हो गया था……..

कांता ने बड़े ही प्यार से उसके गाल को चूमते हुए कहा…….. अजी सर थोड़ा सा सबर कीजिए… बस आज रात की ही बात है कल आप मेरी फाइल को जैसे मर्ज़ी वैसे खोल कर देख लीजिएगा….. कांता ने ये बात इतने प्यारे अंदाज़ मे और इतनी प्यारी मुस्कान के साथ कही थी कि प्रेम सिंग को भी मुस्कुराना ही पड़ा……..

फिर दोनो एक दूसरे से दूर होते हुए वापस डॅन्स फ्लोर से नीचे उतर कर अपनी टेबल पर आ गये जहाँ जानकी लाल और प्रेम सिंग का पीए उनका वेट कर रहे थे. दोनो अब बड़ी शालीनता से एक दूसरे के साथ पेश आ रहे थे……..

जैसे ही प्रेम सिंग टेबल के पास आया तो उसका पीए कुर्सी छोड़ कर उठ गया.. प्रेम सिंग और कांता दोनो कुर्सी पर बैठ गये. प्रेम सिंग ने अपने पीए को भी बैठने का इशारा किया… अपने बॉस के कहने पर भी पीए उनके साथ बैठ गया……… पीए ने एक वेटर को बुलाकर खाने का ऑर्डर दिया………

कुछ ही देर बाद वेटर ऑर्डर ले आया और उसके बाद चारो खाने मे वयस्त हो गये….

खाते खाते पीए और प्रेम सिंग आपस मे कुछ काना फूसी भी कर रहे थे…….. पीए प्रेम सिंग की बात सुनकर ऐसे सिर हिला रहा था जैसे कि वो प्रेम सिंग की सारी बाते समझ गया हो.

जब वो लोग खाना ख़तम कर चुके तो जानकी लाल ने प्रेम सिंग से कहा……..

जानकी लाल: तो ठीक है प्रेम सिंग जी अब आप हमे इजाज़त दीजिए…… कल हम आपके ऑफीस मे मिलते है…………

.

प्रेम सिंग: ठीक है जानकी लाल जी……….. वैसे तो आपको मेरी सारी शर्ते पता ही है……. और अगर कल आपकी प्रॉजेक्ट फाइल देख कर मेरा जी खुश हो गया तो फिर ये प्रॉजेक्ट आपका है………….

प्रेम सिंग फाइल शब्द बोलते वक़्त कांता की तरफ तिरछी नज़रो से देखा……. कांता भी उसकी नज़रो से समझ गयी कि वो कौन सी फाइल की बात कर रहा है………. फिर दोनो प्रेम सिंग से विदा लेकर अपनी कार मे होटेल से बाहर चले गये……….

अगला दिन सुबह 9.00 बजे…………

कांता कमरे मे ड्रेसिंग टेबल पर बैठी हुई अपने बालो को ड्राइयर से सूखा रही थी. बाथरूम की आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि उसमे कोई नहा रहा है शायद जानकी लाल थे……… तभी कांता के कानो मे कुछ गिरने की आवाज़ के साथ जानकी लाल की कराह की आवाज़ आई……….

कांता उठकर तेज़ी से बाथरूम की तरफ गयी……… तो देखा कि जानकी लाल तौलिया लपेटे हुए बाथ रूम मे बैठे थे………… कांता उनके पास पहूचकर उन्हे उठाती हुई बोली

कांता: क्या हुआ बाबू जी आप गिर कैसे गये…………. ज़्यादा चोट तो नही लगी………. और अपने कंधो का सहारा देकर कांता जानकी लाल को सोफे पर बिठाई……. और खुद फोन से रिसेप्षन्स पर फोन करके उन्हे किसी डॉक्टर के लिए काहा……… फिर जानकी लाल के पास जाकर उनके पैर को देखने लगी………

जानकी लाल: अरे बहू बाथरूम मे साबुन के पानी से फिसलन सी हो गयी थी और मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया और मैं गिर पड़ा…….

 
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