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आर पी बड़ी ही बेरहमी से उसकी चुचियों को मसल रहा था…….. लगभग 15 मिनट के बाद आर पी का शरीर अकड़ने सा लगा…………उसके शरीर मे एक झटका सा लगा और उसकी दोनो आँखे भिच गयी………. और ढेर सारा वीर्य निकल कर कांता के हाथो पर गिर
गया……….. इसके साथ ही आर पी लंबी लंबी सासे लेते हुए पीछे वाली कुर्सी पर निढाल हो गया……………….
कांता ने अपने हाथ को उसकी धोती से ही पोछ लिया और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बैठ गयी…..
लगभग 4.45 बजे सुबह जानकी लाल की आँख खुली……. पीछे मूड कर देखा तो कांता और आर पी दोनो सीट के दोनो तरफ गहरी नींद मे सो रहे थे………….. ड्राइवर बड़ी ही सावधानी से गाड़ी चला रहा था……… लगभग 1 घंटे बाद आर पी और कांता भी उठ गये…. दोनो की नज़रे मिलते ही दोनो हल्के से मुस्करा दिए…………….
आर पी ने ड्राइवर से गाड़ी को किसी अच्छे से रेस्टौरेंट पर रोकने के लिए कहा…… कुछ देर बाद एक अच्छा सा रेस्टौरेंट देख कर ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी…………. फिर सभी लोग उतर कर रेस्टौरेंट मे गये…. वहाँ पर तीनो ने आपने हाथ मुँह धोए ……… ड्राइवर ने भी अपने हाथ पैर धोए मगर वो उन तीनो से अलग था….. फिर तीनो ने सुबह की चाई पी……… फिर जानकी लाल और आर पी मे इधर उधर बिज़्नेस की बाते होने लगी…. आर पी बात करते हुए बार बार जानकी लाल की नज़रों को बचाकर कांता की तरफ देख रहा था…
चाइ पीने के बाद तीनो वापस कार मे आकर बैठ गये………….. सुबह के 7.00 बजने को थे……… वो लोग अभी भी गुड़गावा से करीब 120 किमी की दूरी पर थे…… तीनो के कार मे बैठने के साथ ही ड्राइवर गाड़ी को हाइवे पर ले आया और गाड़ी को सरपट दौड़ाने लगा……………
कार मे बैठे बैठ ही जानकी लाल और आर पी मे बिज़्नेस से रिलेटेड बाते होती रही……….. लगभग 2 घंटे के सफ़र के बाद उनकी कार गुड़गावा मे पहुच गयी……….. ड्राइवर गाड़ी को आर पी के शोरुम पर ले गया……….. आर पी का शोरुम 10 बजे खुलता था लेकिन चपरासी सुबह 9.00 बजे शोरुम खोलकर ऑफीस की सॉफ सफाई मे लग जाता……..
गया……….. इसके साथ ही आर पी लंबी लंबी सासे लेते हुए पीछे वाली कुर्सी पर निढाल हो गया……………….
कांता ने अपने हाथ को उसकी धोती से ही पोछ लिया और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बैठ गयी…..
लगभग 4.45 बजे सुबह जानकी लाल की आँख खुली……. पीछे मूड कर देखा तो कांता और आर पी दोनो सीट के दोनो तरफ गहरी नींद मे सो रहे थे………….. ड्राइवर बड़ी ही सावधानी से गाड़ी चला रहा था……… लगभग 1 घंटे बाद आर पी और कांता भी उठ गये…. दोनो की नज़रे मिलते ही दोनो हल्के से मुस्करा दिए…………….
आर पी ने ड्राइवर से गाड़ी को किसी अच्छे से रेस्टौरेंट पर रोकने के लिए कहा…… कुछ देर बाद एक अच्छा सा रेस्टौरेंट देख कर ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी…………. फिर सभी लोग उतर कर रेस्टौरेंट मे गये…. वहाँ पर तीनो ने आपने हाथ मुँह धोए ……… ड्राइवर ने भी अपने हाथ पैर धोए मगर वो उन तीनो से अलग था….. फिर तीनो ने सुबह की चाई पी……… फिर जानकी लाल और आर पी मे इधर उधर बिज़्नेस की बाते होने लगी…. आर पी बात करते हुए बार बार जानकी लाल की नज़रों को बचाकर कांता की तरफ देख रहा था…
चाइ पीने के बाद तीनो वापस कार मे आकर बैठ गये………….. सुबह के 7.00 बजने को थे……… वो लोग अभी भी गुड़गावा से करीब 120 किमी की दूरी पर थे…… तीनो के कार मे बैठने के साथ ही ड्राइवर गाड़ी को हाइवे पर ले आया और गाड़ी को सरपट दौड़ाने लगा……………
कार मे बैठे बैठ ही जानकी लाल और आर पी मे बिज़्नेस से रिलेटेड बाते होती रही……….. लगभग 2 घंटे के सफ़र के बाद उनकी कार गुड़गावा मे पहुच गयी……….. ड्राइवर गाड़ी को आर पी के शोरुम पर ले गया……….. आर पी का शोरुम 10 बजे खुलता था लेकिन चपरासी सुबह 9.00 बजे शोरुम खोलकर ऑफीस की सॉफ सफाई मे लग जाता……..