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कांता समझ गयी कि प्रेम सिंग कहाँ ठप्पा लगाने के लिए बोल रहा था...... प्रेम सिंग कांता को टेबल के सहारे थोड़ा झुकाकर खड़ा कर दिया, जिससे कांता की गान्ड काफ़ी उभर गयी, फिर कांता की टाँगों को चौड़ी करते हुए उसकी गान्ड की दरार मे अपनी उंगली डालकर कांता की गान्ड के छेद टटोलने लगा, कांता ने प्रेम सिंग की सहूलियत के लिए अपनी टांगे और चौड़ी कर दी, प्रेम सिंग ने अपनी बीच वाली उंगली को कांता की गान्ड मे घुसाने की कोशिश की लेकिन वो चिकनाई रहित होने के कारण कांता की गान्ड मे नही घुस सकी. बिना चिकनाई के कांता को भी दर्द महसूस हो रहा था.... तभी कांता ने प्रेम सिंग को रोकते हुए अपने हॅंड बॅग से वॅसलीन निकालकर प्रेम सिंग के हाथो मे देती हुई बोली
कांता: प्रेम सिंग जी.............. इसे यूज़ करिए........ दोनो को सहूलियत रह जाएगी.
प्रेम सिंग कांता की बेबाकी देख कर हैरान रह गया.... वो समझ गया कि कांता प्री प्लान के साथ उसके पास आई थी. और वो अपनी उंगलिओ मे वॅसलीन लगाते हुए बोला:
प्रेम सिंग : मान गये कांता जी आपको............ पूरी तैयारी के साथ आई है.
कांता: टेंडर जो हासिल करना था............ तैयारी के बिना टेंडर कैसे मिल सकता था.
प्रेम सिंग ने फिर से कांता को फिर से टेबल पर झुका दिया और उसकी गान्ड के दरार को चौड़ी कर के उसमे वॅसलीन लगाने लगा.. जब कांता की गान्ड मे वॅसलीन लग गया तब प्रेम सिंग ने अपनी उंगीली कांता की गान्ड मे घुसाने के कोशिश की. कांता ने अपनी गान्ड को ढीला छोड़ दिया जिस से कि कुछ ही देर मे प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे घुस गयी. कांता की गान्ड मे जैसे ही प्रेम सिंग की उंगली घुसी उसके मुँह से एक हल्की आह निकल गयी. प्रेम सिंग अब अपनी उंगली को कांता की गान्ड मे आगे पीछे करने लगा. कुछ देर बाद ही कांता की गान्ड के नसे काफ़ी मुलायम और फ्लेक्सिबल हो गयी जिस से कि प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे आराम से अंदर बाहर होने लगी......
. प्रेम सिंग अब अपनी दूसरी उंगली को भी कांता की गान्ड मे धीरे धीरे सरकाने लगा. कुछ देर बाद कांता की गान्ड के अंदर प्रेम सिंग की दोनो उंगिलिया थी.... अब कांता की गान्ड पहले से काफ़ी चौड़ी हो चुकी थी....... प्रेम सिंग ने अपनी उंगली कांता की गान्ड मे अंदर बाहर करते हुए कांता से कहा.
प्रेम सिंग : क्यो कांता जी……….. आप आपकी फाइल पर अपनी मोहर का ठप्पा लगाना शुरू करूँ?
कांता: प्रेम सिंग जी.............. इसे यूज़ करिए........ दोनो को सहूलियत रह जाएगी.
प्रेम सिंग कांता की बेबाकी देख कर हैरान रह गया.... वो समझ गया कि कांता प्री प्लान के साथ उसके पास आई थी. और वो अपनी उंगलिओ मे वॅसलीन लगाते हुए बोला:
प्रेम सिंग : मान गये कांता जी आपको............ पूरी तैयारी के साथ आई है.
कांता: टेंडर जो हासिल करना था............ तैयारी के बिना टेंडर कैसे मिल सकता था.
प्रेम सिंग ने फिर से कांता को फिर से टेबल पर झुका दिया और उसकी गान्ड के दरार को चौड़ी कर के उसमे वॅसलीन लगाने लगा.. जब कांता की गान्ड मे वॅसलीन लग गया तब प्रेम सिंग ने अपनी उंगीली कांता की गान्ड मे घुसाने के कोशिश की. कांता ने अपनी गान्ड को ढीला छोड़ दिया जिस से कि कुछ ही देर मे प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे घुस गयी. कांता की गान्ड मे जैसे ही प्रेम सिंग की उंगली घुसी उसके मुँह से एक हल्की आह निकल गयी. प्रेम सिंग अब अपनी उंगली को कांता की गान्ड मे आगे पीछे करने लगा. कुछ देर बाद ही कांता की गान्ड के नसे काफ़ी मुलायम और फ्लेक्सिबल हो गयी जिस से कि प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे आराम से अंदर बाहर होने लगी......
. प्रेम सिंग अब अपनी दूसरी उंगली को भी कांता की गान्ड मे धीरे धीरे सरकाने लगा. कुछ देर बाद कांता की गान्ड के अंदर प्रेम सिंग की दोनो उंगिलिया थी.... अब कांता की गान्ड पहले से काफ़ी चौड़ी हो चुकी थी....... प्रेम सिंग ने अपनी उंगली कांता की गान्ड मे अंदर बाहर करते हुए कांता से कहा.
प्रेम सिंग : क्यो कांता जी……….. आप आपकी फाइल पर अपनी मोहर का ठप्पा लगाना शुरू करूँ?