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कांता की कामपिपासा

कांता समझ गयी कि प्रेम सिंग कहाँ ठप्पा लगाने के लिए बोल रहा था...... प्रेम सिंग कांता को टेबल के सहारे थोड़ा झुकाकर खड़ा कर दिया, जिससे कांता की गान्ड काफ़ी उभर गयी, फिर कांता की टाँगों को चौड़ी करते हुए उसकी गान्ड की दरार मे अपनी उंगली डालकर कांता की गान्ड के छेद टटोलने लगा, कांता ने प्रेम सिंग की सहूलियत के लिए अपनी टांगे और चौड़ी कर दी, प्रेम सिंग ने अपनी बीच वाली उंगली को कांता की गान्ड मे घुसाने की कोशिश की लेकिन वो चिकनाई रहित होने के कारण कांता की गान्ड मे नही घुस सकी. बिना चिकनाई के कांता को भी दर्द महसूस हो रहा था.... तभी कांता ने प्रेम सिंग को रोकते हुए अपने हॅंड बॅग से वॅसलीन निकालकर प्रेम सिंग के हाथो मे देती हुई बोली

कांता: प्रेम सिंग जी.............. इसे यूज़ करिए........ दोनो को सहूलियत रह जाएगी.

प्रेम सिंग कांता की बेबाकी देख कर हैरान रह गया.... वो समझ गया कि कांता प्री प्लान के साथ उसके पास आई थी. और वो अपनी उंगलिओ मे वॅसलीन लगाते हुए बोला:

प्रेम सिंग : मान गये कांता जी आपको............ पूरी तैयारी के साथ आई है.

कांता: टेंडर जो हासिल करना था............ तैयारी के बिना टेंडर कैसे मिल सकता था.

प्रेम सिंग ने फिर से कांता को फिर से टेबल पर झुका दिया और उसकी गान्ड के दरार को चौड़ी कर के उसमे वॅसलीन लगाने लगा.. जब कांता की गान्ड मे वॅसलीन लग गया तब प्रेम सिंग ने अपनी उंगीली कांता की गान्ड मे घुसाने के कोशिश की. कांता ने अपनी गान्ड को ढीला छोड़ दिया जिस से कि कुछ ही देर मे प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे घुस गयी. कांता की गान्ड मे जैसे ही प्रेम सिंग की उंगली घुसी उसके मुँह से एक हल्की आह निकल गयी. प्रेम सिंग अब अपनी उंगली को कांता की गान्ड मे आगे पीछे करने लगा. कुछ देर बाद ही कांता की गान्ड के नसे काफ़ी मुलायम और फ्लेक्सिबल हो गयी जिस से कि प्रेम सिंग की उंगली कांता की गान्ड मे आराम से अंदर बाहर होने लगी......

. प्रेम सिंग अब अपनी दूसरी उंगली को भी कांता की गान्ड मे धीरे धीरे सरकाने लगा. कुछ देर बाद कांता की गान्ड के अंदर प्रेम सिंग की दोनो उंगिलिया थी.... अब कांता की गान्ड पहले से काफ़ी चौड़ी हो चुकी थी....... प्रेम सिंग ने अपनी उंगली कांता की गान्ड मे अंदर बाहर करते हुए कांता से कहा.

प्रेम सिंग : क्यो कांता जी……….. आप आपकी फाइल पर अपनी मोहर का ठप्पा लगाना शुरू करूँ?

 
प्रेम सिंग : क्यो कांता जी……….. आप आपकी फाइल पर अपनी मोहर का ठप्पा लगाना शुरू करूँ?

कांता: ठप्पा तो लगाना ही पड़ेगा ………. बिना ठप्पे के सिग्नेचर कैसे ऑतरिज़्ड होगा…….

प्रेम सिंग : तो कांता जी ठप्पा लगवाने के लिए तैयार हो जाएँ… ये कह कर प्रेम सिंग ने अपने लंड पर वॅसलीन लगाकर उसका सुपाड़ा कांता की गान्ड के छेद पर टिका कर ज़ोर लगाया………..

कांता ने भी अपनी गान्ड को बिल्कुल ढीला छोड़ दिया था ताकि प्रेम सिंग को लंड घुसाने मे आसानी हो. कुछ ही देर के प्रयास मे प्रेम सिंग का सुपाड़ा कांता की गान्ड मे घुस गया…… जैसे ही सुपाड़ा कांता की गान्ड मे घुसा तो कांता के मुँह से कराह निकल गयी……. प्रेम सिंग अपने दोनो हाथो से कांता की मोटी मोटी चुचियों को पकड़ कर उस को मीसते हुए अपने लंड को कांता की गान्ड मे आगे पीछे करते हुए कांता से पूछा

प्रेम सिंग : क्यो कांता जी………. कैसा लग रहा है??/

कांता: सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईइइर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर………… बहुत ही बढ़िया…………. आपका ठप्पा तो काफ़ी तगड़ा है……

..

प्रेम सिंग : (कांता की चूचियो को ज़ोर से मीसते हुए) असली ठप्पा तो अब लगेगा मेडम……..

कांता: (मस्ती भरी आवाज़ मे) तो लगाइए ना….. अब क्यो देर कर रहे है……. मैं तो अपनी पूरी फाइल खोल के आपके सामने खड़ी हूँ………

प्रेम सिंग कांता की बाते सुनकर समझ गया कि कांता अब पूरी मस्ती मे आ चुकी थी. इस बात को देखते हुए उसने कांता की दोनो चुचियो को ज़ोर से पकड़ कर एक बहुत ही तेज झटका अपनी कमर मे लगाया…………………………….. झटका इतना तेज था कि प्रेम सिंग का आधा लंड कांता की गान्ड को चीरता हुआ अंदर घूस गया………..

प्रेम सिंग का लंड जैसे ही कांता की गान्ड मे घुसा…….. कांता दर्द के मारे चीख उठी…….. वैसे तो उसने कई बार अपनी गान्ड मरवाई थी लेकिन इतना तेज शॉट आज तक किसी ने नही मारा था, जितना की प्रेम सिंग ने मारा था.

 
कांता दर्द भरी आवाज़ मे बोली

कांता: अरे सर……………. ज़रा धीरे धीरे ठप्पा मारिए…………… आप मेरी फाइल की जान ही ले लेंगे………………..

प्रेम सिंग : (अपने लंड को कांता की गान्ड मे आगे पीछे करते हुए बोला) अरे मेडम ठप्पा तेज मारूँगा तभी तो फाइल पर इंप्रेशन अच्छा आएगा……..

लंड आगे पीछे करने से कांता की गान्ड का दर्द थोड़ा कम हो गया था……. प्रेम सिंग उसकी चूचियो के खड़े निपल को अपने दोनो हाथो की उंगलियो से तेज तेज मसल रहा था. कुछ ही देर बाद जब प्रेम सिंग ने ये देखा कि कांता का दर्द बिल्कुल गायब हो गया और फिर से मस्ती मे आ गयी है तो उसने अपनी दोनो हथेलियो को चौड़ा करके कांता के स्तनों पर रखकर उनको ज़ोर से पकड़ का अपनी कमर का एक तेज झटका कांता की गान्ड पर टिका दिया…….. झटका इतना तेज था कि प्रेम सिंग का लंड कांता की गान्ड को चीरता हुआ पूरा जड़ तक कांता की गान्ड मे समा गया………..

जैसे ही कांता की गान्ड मे प्रेम सिंग का लंड पूरा का पूरा घुसा वैसे ही फिर से कांता के चेहरे पर दर्द के भाव उभर आए……………. कांता फिर से दर्द भरी आवाज़ मे प्रेम सिंग से बोली

कांता: (दर्द से कराहते हुए) अरे सर……… ठप्पा ज़रा धीरे मारिए, ऐसा लग रहा है कि आप मेरी फाइल को फाड़ ही डालेंगे…………………

प्रेम सिंग : अरे कांता जी जिस फाइल पर जितने ज़्यादा ठप्पे लगे होते है उसकी वॅल्यू उतना ज़्यादा होती है…………………………. ये कहकर प्रेम सिंग अपने धक्को की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़ाने लगा……. हर धक्के के साथ कांता के मुँह से आआहह निकल रही थी……. कुछ ही देर मे प्रेम सिंग के धक्को की स्पीड बहुत ज़्यादा हो गयी……. धक्कों के प्रहार से कांता के कूल्हे और प्रेम सिंग की जाँघ की थॅपप्पप्पप्प्प्प…. थॅपप्पप्पप्प्प्प की आवाज़ पूरे ऑफीस मे गूँज रही थी. कांता की गान्ड के अंदर अभी तक इतनी बेरहमी से किसी ने खलबली नही मचाई थी, जितना कि प्रेम सिंग का लंड मचा रहा था……

 
प्रेम सिंग का हर धक्का कांता की गान्ड पर कहेर बरसा रहा था. कांता के मुँह से हर धक्के के साथ अहह………. अहह की आवाज़ निकल रही थी. प्रेम सिंग ने कांता के कंधो को अपनी दोनो हथेलियों से थामकर अपने धक्को की स्पीड को और बढ़ा दिया,

कांता की गान्ड प्रेम सिंग के धक्को के प्रहार से लाल हो चुकी थी. प्रेम सिंग की स्पीड इतनी ज़्यादा थी कि कांता को पता ही नही पड़ रहा था कि प्रेम सिंग का लंड कब उसकी गान्ड से निकला और दोबारा कब उसकी गान्ड मे समा गया. कांता को ऐसा लग रहा था जैसे कि हर धक्के मे प्रेम सिंग का लंड उसकी गान्ड मे और ज़्यादा अंदर तक घुस जाता हो……….

प्रेम सिंग बड़ी ही बेदर्दी से कांता की गान्ड का मर्दन कर रहा था. प्रेम सिंग का हर धक्का कांता को कराहने पर मजबूर कर रहा था………… ठप्प्प्प…….. ठप्प्प्प्प्प्प्प की आवाज़ के साथ कांता की आआहह……. आआहह……. भी पूरे ऑफीस मे गूँज रही थी लगभग 6-7 मिनट तक प्रेम सिंग कांता की गान्ड मारता रहा… फिर अपने धक्को की स्पीड तेज करते हुए कांता की चुचियों को मीस्ते हुए, कांता के कान मे फुसफुसाते हुए बोला……….

प्रेम सिंग : क्यो कांता जी ठप्पा लगवाने मे मज़ा आया कि नही……

कांता : सच कहूँ तो आपने तो मेरी फाइल की सीलाई ही ढीली कर दी है………….

.

तभी प्रेम सिंग के पास रखा हुया टेलिफोन गन्गना उठा…………….

तरिंन्नननननणणन्……………….. तरिंन्नननननणणन्……………….. प्रेम सिंग ने अपना लंड कांता की गान्ड मे डाले डाले ही हाथ बढ़ा कर क्रेडल से रिसीवर को उठाकर अपने कानो से लगा कर बोला.

प्रेम सिंग : हेल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ……. कौन……………… अच्छे आप……………… ठीक हूँ……………………………….

हाँ यही बैठी हुई है …………… जी देता हूँ

और अपने हाथ से माउत स्पीकर को बंद करके कांता से बोला

प्रेम सिंग : (रिसीवर कांता को देते हुए) ये लो जानकी लाल जी का फोन है …………..

 
हाँ यही बैठी हुई है …………… जी देता हूँ

और अपने हाथ से माउत स्पीकर को बंद करके कांता से बोला

प्रेम सिंग : (रिसीवर कांता को देते हुए) ये लो जानकी लाल जी का फोन है …………..

कांता: हेल्लूऊऊऊऊऊ………..

जानकी लाल: हाँ बहू ………… क्या हुआ कांट्रॅक्ट का…………… बात बनी कि नही ……………..

कांता: अरे बाबू जी……….. प्रेम सिंग जी मेरी फाइल देख कर बहुत खुश हो गये…………. और हमारे आम तो इनको इतने पसंद आए ….. कि मैं क्या कहूँ………… मेरी फाइल के हर पॉइंट को बड़ी अच्छी तरह देखा उन्होंने. उनको प्रॉजेक्ट बहुत अच्छा लगा है…………..

जानकी लाल: खुश होते हुए………. अच्छे……. वाह भाई वाह………………. तुम उनसे फाइल पर सिग्नेचर करवा कर ही आना.

कांता: (प्रेम सिंग की तरफ देख कर मुस्कुराती हुई) हाँ बाबू जी उन्होने फाइल पर ठप्पा तो लगा दिया है, अब बस सिग्नेचर करने बाकी है, बस अब वो सिग्नेचर करना शुरू ही करने वाले थे तो आपका फोन आ गया……….

जानकी लाल: (खुश होते हुए) तू प्रेम सिंग जी से अच्छी तरह सिग्नेचर करवा लेना फाइल मे… समझ गयी………. कांता ने हामी भरी और फोन रख दिया…….

प्रेम सिंग कांता की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोला.

प्रेम सिंग : अब तो आपके ससुर जी की भी यही मर्ज़ी है कि आपकी फाइल पर मैं सिग्नेचर करूँ……………. तो सिग्नेचर करवाने के लिए तैयार है ना आप

कांता: अजी सर आपके जबर्जस्त ठाप्पों को सिग्नेचर करवाने के लिए ही तो झेला है मैने….. और दोनो हंस पड़े.

प्रेम सिंग ने कांता को अपनी टेबल पर बिठा दिया…… और उसकी दोनो टाँगों को टेबल से नीचे लटका कर उसकी दोनो टाँगों के बीच मे खड़ा होकर कांता के कामुक होंठो पर अपने होंठो को रख दिए कुछ देर तक उसके होंठो को चूमने के बाद प्रेम सिंग कांता की चुचियों को एक बार फिर अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा……….. अपने हाथ को कांता की चूत पर फेरते हुए अपनी उंगली को कांता की चूत मे घुसाने लगा…….

 
कांता की चूत काम रस से पूरी तरह गीली होकर चिकनी हो चुकी थी और चुदने के लिए तैयार थी. प्रेम सिंग ने कांता के चूचियो पर से अपना मुँह हटाया और कांता की चूत के होंठो पर अपने लंड को टिका कर कांता की कमर को पकड़कर अपने लंड का दबाव कांता की चूत पर लगाया………. कांता की चूत पहेल ही काफ़ी गीली थी इसलियो प्रेम सिंग के लंड का टोपा बिना किसी परेशानी के कांता की चूत मे जाकर अटक गया……. प्रेम सिंग ने कांता को टेबल पर लिटा दिया और अपनी दोनो हथेलियो मे कांता की चूचियो को पकड़ कर एक जबरदस्त प्रहार कांता की चूत पर किया…

प्रहार इतना जबरदस्त था कि प्रेम सिंग का पूरा का पूरा लंड जड़ तक कांता की चूत मे सतत्तटटटटटटटटटटत्त्ताआआक्ककककककककक की आवाज़ के साथ समा गया…….. जैसे ही कांता की चूत मे प्रेम सिंग का लंड जड़ तक घुसा वैसे ही कांता के मुँह से आआआआहह निकल गयी.. प्रेम सिंग ने देखा कि जब कांता की चूत मे उसका पूरा लंड घुस चुका है तो उसने अपना एक हाथ कांता की गान्ड पे और दूसरा हाथ उसकी पीठ के नीचे लगाकर कांता की चूत मे अपना लंड डाले डाले ही कांता को अपनी गोद मे उठा लिया..

कांता ने भी अपनी बाहो का घेरा बनाकर प्रेम सिंग को अपने हाथो मे जकड लिया, कांता ने अपनी दोनो टांगे प्रेम सिंग की कमर के इर्द गिर्द लपेट रखी थी. प्रेम सिंग ने अपना दूसरा हाथ भी कांता के बड़े बड़े चूतड़ो पर लगा कर कांता को अपनी गोद मे खड़े ही खड़े उपर नीचे करने लगा…………….

. कांता भी प्रेम सिंग का इशारा समझ कर अपनी गान्ड को हिलाने लगी……… प्रेम सिंग का लंड कांता की चूत मे पूरा जड़ तक कसा हुआ लग रहा था जैसे कोई मोटी लकड़ी कांता की चूत मे फसी हुई हो, धीरे धीरे कांता के उछलने की स्पीड इतनी तेज हो गयी कि प्रेम सिंग का लंड उसकी चूत मे से टोपे तक बाहर आता और अगले ही पल जड़ तक कांता की चूत मे समा जाता………. कांता की चूत अब और ज़्यादा गीली हो चूकि थी और उसकी चूत का पानी प्रेम सिंग के लंड पर से रिस्ता हुआ उसके अंडकोषो पर आकर नीचे टपक रहा था……….

प्रेम सिंग का लंड हर बार कांता की चूत की गहराई को पहले से ज़्यादा नाप रहा था…… कांता की चूत मे प्रेम सिंग जैसे ही अपना लंड जड़ तक पेलटा वैसे ही कांता के मुँह से आआआहह निकल जाती थी. प्रेम सिंग कांता को गोद मे लेकर खड़े खड़े चोदते हुए बोला…………

प्रेम सिंग : क्यो कांता जी ………………….. सिग्नेचर करवाने मे मज़ा आ रहा है ना…………………

कांता: अहह सीरिरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर ……….. क्या बताऊं…. ………….. आपके सिग्नेचर करने का स्टाइल बड़ा ही निराला है…………….. और उपर से ये आपका मोटा पेन…………. सच कहूँ तो इस तरह से शायद ही कभी किसी ने किसी की फाइल पर सिग्नेचर किए होंगे……….. मैं तो आपके सिग्नेचर की दीवानी हो गयी हूँ……….. ये कह कर कांता और तेज़ी से उछल उछल कर प्रेम सिंग का लंड अपनी चूत मे घोटने लगी……………

 


लगभग 5 मिनट तक प्रेम सिंग ऐसे ही खड़े खड़े कांता की चुदाई करता रहा…………. उसके बाद प्रेम सिंग ने ऑफीस मे पड़े सोफे पर कांता को ले जाकर लिटा दिया…….. और उसकी दोनो टाँगों को चौड़ी करके कांता की चूत पर धक्के लगाने शुरू कर दिए……………… प्रेम सिंग के धक्के इतने जबर्जस्त थे कि हर धक्के के साथ सोफा थोड़ा सा खिसकता जा रहा था……. हर धक्के के साथ दोनो की जाँघो की टकराहट से फत्त्तटटटटटटतत्त…………. फत्त्तटटटटटटतत्त…………. की आवाज़ फिर गूंजने लागी……. कांता की चूत से भी पचह……….. पचह……….. की आवाज़ आने लगी थी…. प्रेम सिंग कांता की चूत को ऐसे हुमच हुमच का चोद रहा था जैसे कि आज वो कांता की चूत ही फाड़ डालेगा…………… हर धक्के के साथ कांता की दर्द भरी आअहह ………. आअहह ………. कमरे मे गूँज रही थी……….. प्रेम सिंग के हर धक्के के साथ…… फहाआटततटटटटतत्त…….. पचह……… और कांता की आआहह की आवाज़ माहॉल को चुदाइमय बना रही थी……….

प्रेम सिंग कांता को चोदते हुए बोला…….

प्रेम सिंग : सच कह रहहाा हूँ कांता जी ……………… आज तक मैने तुम्हारे जैसे गरम चूत वाली औरत नही देखिईीईईईईईईई………….. मज़ा आ गया तुम्हारी चूत को चोदकर…………………..

कांता: सिस्कार्ते हुए बोली……………………………….. सच तो ये भी है कि मैने भी तुम्हारे पेन जैसा मोटा पेन आज तक……….. नही देखा………………….

अपने लंड की तारीफ़ सुनकर प्रेम सिंग का जोश और ज़्यादा बढ़ गया और वो कांता की दोनो चूचियो को पकड़कर मसल्ते हुए और तेज़ी से कांता को पेलने लगा……………………

लगभग 7-8 मिनट की चुदाई के बाद कांता के शरीर मे अकड़ान से पैदा होने लगी………………… उसकी साँसे काफ़ी तेज और भारी भारी होने लगी….. प्रेम सिंग का भी कुछ ऐसा ही हाल था……. प्रेम सिंग की पकड़ कांता पर और तेज होने लगी……… तभी कांता के मुँह से एक बड़ी चीख निकलीईए …….आआअहााह और उसका शरीर झटका खाने लगा… उसकी आँखे भिन्च गयी…….

कुछ ऐसा ही हाल प्रेम सिंग का था……. उसका शारी भी झटके खाने लगा था…… और हर झटके पर उसके लंड से वीर्य की गरम धार को कांता अपनी चूत की दीवारो पर महसूस कर रही थी………….. कांता की चूत ने भी काफ़ी मात्रा मे पानी छोड़ा था इसलिए… उसकी चूत से कामरस बहकर उसकी जाँघो से होकर सोफे पर गिर रहा था……

दोनो निढाल होकर सोफे पर पड़े थे………….. दोनो के चेहरे पर सुकून था……….. होता भी क्यो नही………… प्रेम सिंग ने अच्छी फाइल पर अपने सिग्नेचर जो किए थे………………… और कांता की प्रेम सिंग के साथ ये मीटिंग सक्सेस्फुल जो रही थी……………..

 
आफ्टर 7 डेज़

जानकी लाल लॉन मे बैठे हुए अख़बार पढ़ रहे थे….. पास की कुर्सी पर जया देवी और कांता भी बैठी हुई थी…………. कांता तीनो के लिए चाई बना रही थी………. चाइ बनाकर उसने कप जया देवी की तरफ बढ़ाया और दूसरा कप जानकी लाल को देते हुए बोली…………..

कांता: लीजिए बाबू जी ……… चाइ पी लीजिए………… कांता की आवाज़ सुनकर जानकी लाल ने अख़बार टेबल पर रख दिया और मुस्कुराते हुए चाइ का कप कांता के हाथो से ले लिया…………

छाई की चुस्की लेते हुए जानकी लाल कांता से बोले……………

अरे हां बहू……….. वो आज सुबह कमाल पॅकिंग मेटीरियल के यहाँ से फोन आया था ………. वो कार्टून (मोटे कागज के बड़े बड़े डिब्बे, जिनमे फ्रूट्स पॅक किए जाते है) बनाने के ऑर्डर के लिए बोल रहा था मैने….. उस से कोटेशन मँगाया है……. और भी दो कंपनी है उनसे भी मैने कोटेशन के लिए बोल रखा है………….. जिसका रेट बिलो होगा उस से बात कर लेंगे……..

कांता: हा बाबू जी…………… और वैसे भी अभी तो एप्रिल-मे मे ही हमे सप्लाइ देनी है, और आप पर बाटिया (आम के फूल) भी फेब के लास्ट मे ही आनी है… इसलिए अभी हमारे पास 2 मंत्स का टाइम है………. इसलिए हम जल्दबाज़ी मे कोई ऑर्डर नही देंगे अभी………..

जानकी लाल: हां बहू ये तो तुम ठीक कह रही है………….. मैं ये सोच रहा था कि अभी हमारे पास थोड़ा टाइम है…….. लेकिन फेब के बाद हम लोगो के पास बिल्कुल टाइम नही रहेगा…….. तो क्यो ना इस दौरान हम स्वामी जी से मिल आएँ………………… (जया देवी की तरफ देखते हुए) क्यो…. जया….. क्या ख़याल है आपका?

जया देवी: मैं तो ये सोच रही हूँ कि क्यो ना हम इस हवेली मे एक यग्य करवा लेते है…….. वैसे भी इतना बड़ा प्रॉजेक्ट अपनी कंपनी को पहली बार मिला है……….. तो क्यो ना हम हवेली मे ही स्वामी जी को बुलाकर एक यग्य करवा ले…………………

स्वामी जी का जिक्र होते ही कांता को स्वामी जी के साथ किया हुआ हवन हवन याद आ गया………….. और उसका रोम रोम खड़ा हो गया…………… जया देवी कांता की तंद्रा को तोड़ती हुई बोली………..

जया देवी: क्यो बेटी……………… तुम्हारा क्या ख्याल है इस बारे मे?

कांता: जी माँ जी………….. आप ठीक कह रही है…………. इसी बहाने हवेली का वातावरण भी शुद्ध हो जाएगा………

 
जानकी लाल जया और कांता की बात सुनकर बोले ………… तो ठीक है मैं आज ही स्वामी जी के आश्रम जाकर उनसे टाइम ले लेता हूँ……..

ये कह कर जानकी लाल वापस अख़बार उठाकर पढ़ने लग गये…….. कांता उठकर हवेली के अंदर चली गयी……… स्वामी जी का ज़िकरा सुनकर कांता के दिमाग़ मे हवन वाला दृश्य उत्तपन्न होने लगा……….. कैसे स्वामी जी ने हवन के बहाने उसकी जबर्जस्त चुदाइ की थी…….. इन सब को याद करके कांता गरम होने लगी………. उसे अपनी जाँघो के बीच कुछ रेंगता सा प्रतीत होने लगा………. उसकी चूचियो के निपल ब्लाउस के अंदर ही कड़े होने लगे……. कांता की साँसे गरम होने लगी थी….. कांता सीढ़ियो पर चड़ती हुई अपने बेडरूम मे गयी और दरवाजे को अंदर से लॉक कर दिया…… अंदर जाकर कांता आईने के सामने खड़ी होकर अपने आप को निहारने लगी……. कांता को आईने मे अपनी आखो मे तैरते वासना के लाल डोरे सॉफ दीखाई दे रहे थे………… अपने आप को आईने मे देखते हुए कांता और उत्तेजित होने लगी…… उत्तेजना उसके उपर इस कदर हावी होने लगी कि वो अपने होंठ को अपने दातों से ही काटने लगी………. उसके मादक होंठ उसके मोटी जैसे दाँत के बीच बड़े ही कामातूर लग रहे थे.

कांता ने अपनी साड़ी का पल्लू खिचकर उसे एक तरफ गिरा दिया……. कांता का ब्लाउस काफ़ी कसा हुआ था जिसकी वजह से उसकी चुचियों का उपरी हिस्सा दबा ब्लाउज से बाहर निकलता हुआ लग रहा था…… कांता काफ़ी लो कट ब्लाउस पहनती थी इसलिए उसकी चूचियो की गहरी घाटी काफ़ी स्पष्ट दीख रही थी. कांता ने अपने बालो मे लगा हुआ हेर बॅंड भी खोल दिया, जिस से उसके घने लंबे बाल बादल की तरफ उसके चारों तरफ बिखर गये कांता अपने आपको शीशे मे यू ही एक टक देखती रही………. फिर उसने अपना हाथ धीरे से अपने बड़े बड़े उभारो पर रख कर उन्हे ब्लाउस के उपर से ही मसलने लगी….. उसकी आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी थी……….

कांता अपनी दोनो हथेलियो से अपनी दोनो चुचियों को बड़ी ही ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी………. कुछ ही देर बाद उसने अपने ब्लाउस के हुक को खोलकर अपने तन से ब्लाउस को अलग कर दिया……. अब कांता के उपरी हिस्से पर एक छोटी सी ब्रा थी……… जो कि कांता के कठोर और बड़े उरोजो पर पाबंदी लगाने मे पूरी तरह नाकाम थी……….. कांता के निपल कड़े हो चुके थे जिनकी झलक कांता के ब्रा से सॉफ देखी जा सकती थी……….. कांता ने अपनी चूचियो को कुछ देर तक ब्रा के उपर से ही सहलाया …… उसको स्वामी जी का स्पर्श याद आ गया………………… कैसे स्वामी जी ने बेदर्दी से उसकी दोनो चूचियो को शुद्ध करने के बहाने बुरी तरह मसला था……. अपनी चूची मिसाई याद आते ही कांता की चूत और ज़यादा गीली हो गयी…….. कांता ने अपनी साड़ी को कमर मे से खोलकर अलग कर दिया……. उसके बाद उसने अपना पेटीकोत भी खोल कर अलग कर दिया……

 
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