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कांता की कामपिपासा

अब कांता के बदन पर एक काले रंग की ब्रा और काले रंग की ही पैंटी मात्र थी जो कि उसके सेक्सी जिस्म को और सेक्सी बना रहे थे…….. कांता की उभरी हुई बड़ी बड़ी चूचिया……….. उसके खुले बाल……. उसका सपाट पेट…. और उसपर उसकी गहरी नाभि……………. उसके बड़े बड़े और चौड़े विशाल कूल्हे…. कांता की सुडोल और चिकनी टांगे......... सब चीज़े जैसे कह रही हो आओ समा जाऊओ मुझमे………. उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या रूप पाया था कांता ने…….

कांता अपनी चूचियो को मसल्ती हुई बड़बाड़ाने लगी……… अरे स्वामी जीिइईईईई………. जाअल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्द्द्द्द्द्द्दीईई आऊऊऊऊऊऊऊओ ना……… फिर से चूस लो मेरे इन संतरो को………….. फिर से शुद्ध कर दो मेरे पिछवाडे को अपने मोटे केले से……….. ये कहते हुए कांता का हाथ अपनी आप चूत पर पहुच गया और पैंटी के उप्पर से ही अपनी चूत को मसल्ने लगी….. उसकी पैंटी भी काम रस से गीली हो चुकी थी…………….. कांता फिर बड़बड़ाते हुए बोली…………….अरे जानकी लाल तुम भी आ जााआऊऊऊऊऊऊऊ तुम भी अपना गीला मेरी पिच पर गाढ दो ……………………………………. ये कहते हुए कांता अपने बेड पर लेट गयी और अपने हाथ को अपनी पैंटी मे डालकर अपनी चूत को मुठ्ठी मे भरकर मसल्ने लगी…….. और अपने दूसरे हाथ से अपनी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से मीसने लगी…………….

कांता बार बार अपने होंठो को पर अपनी जीभ को फिरा रही थी….. उसकी कमर अपने आप उचकाने लग गयी थी…….. तभी डोर पर किसी की खटखटाहट ने उसको अपने हाथ रोकने पर मजबूर कर दिया……… कांता सोचने लगी कि कौन है …….. शायद फूलवा………… या जानकी लाल……….. कांता ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े समेट कर आलमारी मे डाल दिए और एक गाउन पहेन कर दारवाजे की तरफ बढ़ चली……..

कांता ने अपने आप को नॉर्मल करते हुए अपने बेडरूम का दरवाजा खोला…… सामने फूलवा और एक आदमी जिसकी उमर लगभग 35-40 के बीच थी, कद काठी मे काफ़ी हुस्त पुष्ट और लंबा चौड़ा था. रंग उसका गेहुआ था…. कुल मिलकार साधरन नाक नक्श का एक सुडोल काया का मालिक था वो……… कांता ने एक नज़र उस आदमी को देखा और फूलवा की तरफ प्रश्‍न भरी निगाह से देखी… फूलवा अपनी छोटी मालकिन की आँखो का आशय समझकर बोली……..

फूलवा: मालकिन ये प्लम्बर है……… आपने आज सुबह बताया था कि आपके बाथरूम का नल ठीक नही है…………… तो मैं ड्राइवर से कह कर इसको बुलवाई है नाल ठीक करने के लिए………….. फूलवा की बात सुनकर कांता को याद आया कि सुबह उसके बाथरूम के नल मे कुछ प्राब्लम आ रही थी तो उसने इसको ठीक करवाने के लिए फूलवा से कहा था………. फूलवा की बात सुनकर कांता वापस अपने बेड पर आ के बैठ गयी…….. फूलवा ने उस आदमी से कहा……..

फूलवा: (अंदर आते हुए) आ जाऊऊऊऊऊ……….. बाथरूम के सारे नल चेक कर लेना……………….. सभी प्रॉपर चलने चाहिए…………………..

 
फूलवा की बात सुनकर वो आदमी बेडरूम के अटॅच्ड बाथरूम मे चला गया………. उसके हाथ मे एक बॅग था…….. शायद उसमे उसके टूल्स थे…… वो बाथरूम मे जाकर एक एक नल को चेक करने लगा………..

फूलवा: मालकिन मैं किचन मे जाती हूँ………………… नाश्ता तैयार करना है……………. कांता ने उसे जाने का इशारा किया…. फूलवा कांता के बेडरूम से बाहर निकल गयी……….. बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था…….. सामने वो आदमी अपने काम मे लगा हुया था……. कांता अपने बेड पर बैठी बैठी उसे देख रही थी……….. कांता ने पहली बार अच्छी तरह से उस आदमी को देखा…………..

शारीरिक रूप से काफ़ी बालिश्ट लग रहा था वो…….. उसके हाथ की नसे काफ़ी उभरी हुई थी जिससे ये पता चलता था कि वो एक मेहनतकश आदमी है…………. उसके कंधे भी काफ़ी चौड़े थे……… उसकी हाइट लगभग 6फ्ट के करीब की रही होगी……………. कांता बड़े ध्यान से उसे देख रही थी…………… वो आदमी बड़ी ही तल्लिनता के साथ अपने काम मे लगा हुया था…….. कांता ने उस से पूछा…………….

कांता: क्या नाम है तुम्हाराआ………………………..

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आदमी: जी मेरा नाम शशि कांत है………………. ये कहते हुए उसने एक नज़र कांता को देखा……………………..

कांता: फूलवा को तुम कैसे जानते हो…………………..

शशि कांत: दरअसल मैं फूलवा मेरे गाँव की है………. शादी के बाद वो यहाँ चली आई………. लेकिन अभी भी गाँव आते जाते उस से मुलाकात होती रहती है……………. शशि कांत ने ये बात बड़ी लापरवाही से कही और फिर अपने काम मे मशगूल हो गया………………..

कांता: मतलब तुम्हारी और फूलवा की जान पहचान बड़ी पुरानी लगती है. ……….. कांता ने इस वाक़्य को इस अंदाज मे कहा कि इस पूरे वाक्य का मतलब ही बदल गया……… इस बात की उम्मीद शशि कांत को भी नही थी , इसलिए उसका चौकना लाज़मी था…. शशि कांत ने एक नज़र कांता को देखा……… कांता के होंठो पर एक कुटिल मुस्कान थी………… शशि कांत कुछ देर के लिए तो बिल्कुल अवाक रह गया कांता की इन बातो से……..कुछ देर तक तो जैसे उसे कुछ सूझा ही नही की वो कांता से क्या बोले…………. कुछ देर बाद चुपचाप खड़े रहने के बाद शशि कांत फिर अपने काम मे लग गया…………. कांता समझ गयी कि उसने शशि कांत की किसी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया है…

कांता एस के (शशि कांत) के चेहरे को देख कर समझ गयी कि फूलवा और एस के मे पहले से कोई कनेक्षन था……… एस के कांता के इस सवाल से कुछ असहज हो गया था…. और होना लाज़मी भी था क्यो कि कांता कुछ भी बोल सकती थी, लेकिन अगर एस के कुछ बोलता और अगर कांता को बात बुरी लगती तो एस के के लिए परेशानी का सबब बन सकता था….. इसलिए एस के ने चुप रहना ही मुनासिब समझा और अपने काम मे फिर से लग गया……………..

 
कांता अपने बेड पर बैठी हुई तकिये को अपनी गोद मे लेकर उसे दबाते हुए थोड़ा सा नीचे झुक गयी……. कांता का गाउन काफ़ी चौड़े गले का था जिसकी वजह से उसकी चूचियो के उपर वाला भाग तकिये से दबे हुए होने के कारण उभर गया और गाउन के गले के अंदर से उसकी दूधिया गोलाइया दिखाई देने लगी………… कांता ने फिर बात करने की गरज से एस के से पूछा………………

कांता: अच्छा छोड़ो इस टॉपिक को……… ये बताओ कि तुमहरी शादी हो गयी है क्या…………….

एस के कांता के इस जवाब पर उसकी तरफ नज़रे उठाकर देखा………… देखना तो वो कांता के चेहरे की तरफ चाह रहा था.. लेकिन उसकी उठती हुई नज़रे…… कांता की चूचियो पर ही ठहर गयी……… उपर उठ ही नही सकी एस के की नज़र………. कांता की गोरी गोरी चूचियो की एक झलक पाकर एस के कुछ पॅलो के लिए जैसे खो गया……. लेकिंग फिर एस के ने अपने आप की संभालते हुए कांता को एक नज़र देख कर बोला.

एस के : हाआआआआ……… शादी हो गयी है……………….

कांता: तो तुम्हारी पत्नी भी तुम्हारे साथ यही रहती है………………..?

एस के: कांता के चहेरे को गौर से देखते हुए बोला……….. नही मेरी पत्नी और मेरे बच्चे गाँव मे ही रहते है……….

कांता: अच्छा जी………………….. मतलब तुम बच्चे भी पैदा कर सकते हो?

कांता ये टोन्ट भरे शब्द एस के के कानो पे ऐसे पड़े जैसे किसी ने जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया हो उसके कान के नीचे? ये प्रश्न उसके पौरुष पर संदेह की उंगली उठा रहे थे……. उसका मन तो किया कि कांता को बोले कि एक बार आजमा कर तो देखो मेडम एक बार मे ही अगर हरी नही कर दिया तो मेरा भी नाम शशि कांत नही………. मगर अपने गुस्से को वो पी गया……….

कांता को उसका लाल पीला चेहरा देख कर बड़ा मज़ा आ रहा था……….. उसने फिर एस के को छेड़ने की नीयत से कहा…………

कांता: बिना बीवी के इतनी ठंडी रात कैसे काटते हो तुम……………………

 
अब एस के का चुप रहना मुस्किल हो गया……… उसने अपने गुस्से को दबाते हुए कहा………..

एस के: जिनकी शादी नही होती है उनकी भी राते तो कटती होगी ना…….. वो भी तो ज़िंदा रहते ही है…………………….

कांता: उनको तो पता ही नही होता कि शादी के बाद सर्दी की रात मे क्या मज़ा आता है ……… इसलिए वो काट लेते है रात को लेकिन जिनको इसका मज़ा पता होता है उनकी राते काफ़ी मुश्किल भरी होती है………….

अब तक एस के भी समझ गया था कि कांता जानबूझ कर उस से ऐसे प्रश्न कर रही है…… तो उसमे भी थोड़ी हिम्मत आ गयी और वो बोला

एस के: आपकी भी तो शादी हो चुकी है…….. आप भी तो अपनी राते अकेले ही काट टी है…….. जैसे आप की रात कट ती है ………. वैसे ही मेरी भी रात कट जाती है……………

 
अब तक एस के भी समझ गया था कि कांता जानबूझ कर उस से ऐसे प्रश्न कर रही है…… तो उसमे भी थोड़ी हिम्मत आ गयी और वो बोला

एस के: आपकी भी तो शादी हो चुकी है…….. आप भी तो अपनी राते अकेले ही काट टी है…….. जैसे आप की रात कट ती है ………. वैसे ही मेरी भी रात कट जाती है……………

इस बार एसके की आवाज़ मे काफ़ी बेफिक्री थी…….. कांता को भी एसके का यू बेझिझक बोलना काफ़ी अच्छा लगा……….. एसके बाथरूम से बाहर आ कर दरवाजे के पास लगे वॉशबेसिन के नल को चेक करने लगा…… कांता अब अपने बेड पर पीठ के होकर लेट गयी जिस से कि उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ उभर सी गयी और गाउन का गला चौड़ा होने के कारण उसकी चूचियाँ और ज़्यादा नुमाया होने लगी…….. कांता के घने और लंबे बाल भी बेड से नीचे लटके हुए थे……. कांता ने वैसे पड़े पड़े ही एसके से कहा………….. ज़रा ठीक से चेक कर के लगाना नल……. पानी ही नही आता ढंग से ………..

एसके: घबराइये मत मेडम………. मैं जब लगाता हूँ तो भरपूर पानी आता है……………

कांता एसके की बातो को सुनकर मन ही मन मुस्कुरा उठी………… उसने फिर एसके पर टोन्ट कसते हुए कहा………..

कांता: अरे जो पहले लगा कर के गया था वो भी ऐसे ही बोल रहा था लेकिन तुम खुद ही देख लो…………. अब तो बूँद बूँद भी मुश्किल से ही निकल पाता है …………

एसके: अरे मेडम मैने अभी तक जितनों के भी नल लगाया है उन्हें कभी भी पानी की कमी की शिकायात नही हुई है……………….

कांता: अच्छा……….. अभी तक कितने लोगो के नल लगाया है तुमने?

ये कहते हुए कांता अपने बेड से उठकर वॉशबेसिन के पास आ गयी………….

एसके: अरे मेडम औरो की छोड़िए लेकिन मैं आपके नल ऐसे लगा के जाउन्गा कि आप को कोई प्राब्लम नही होगी…………..

कांता: अच्छा बड़ा घमंड है अपने नल पर तुम्हे?

एसके: घमंड नही है मेडम मुझे अपने आप पर विश्वास है?

कांता: वैसे अगर नल बड़ा और मोटा हो तो पानी ज़्यादा निकलता है?

कांता इन वाक़्यो को बोलते हुए एसके के चेहरे को पढ़ने की कोशिस कर रही थी………….

एसके इतना भी भोला नही था कि वो कांता की बातो का मतलब ना समझ सके…………. लेकिन कांता की द्वियार्थी बातो से उसकी हिम्मत भी काफ़ी बढ़ गयी थी…. कांता की बाते सुनकर वो बोला…………..

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एसके: मेरा नल भी काफ़ी बड़ा और मोटा है……….. अगर आप चाहे तो पहले देख ले…. और अगर पसंद आ जाए तो लगवा लीजिएगा…………

 
एसके की बाते सुनकर कांता की चूत मे से पसीना निकलने लगा था………. उसके निपल धीरे धीरे उसके गाउन मे सर उठाने लगे थे… कांता ने एसके से कहा

कांता: ठीक है तुम अपना नल तो दिखाओ पहले…………… अगर मुझे पसंद आ गया तो मैं तुम्हे नल फिट करने का मौंका ज़रूर दूँगी…………

कांता की बाते सुनकर एसके के लंड मे भी सिरहन होने लगी थी……. उसने दरवाजे की तरफ इशारे करते हुए कहा………

एसके: नल तो मैं तुम्हे दिखा सकता हूँ लेकिन उसके लिए थोड़ी सी प्राइवसी होनी चाहिए…….

कांता ने एसके के इस कथन का मतलब समझते हुए अपने कमरे के दरवाजे को अंदर से लॉक कर दिया….

दरवाजे के लॉक करते ही एसके ये बात समझ गया कि कांता ने अपना काम कर दिया है अब जो भी करना है उसे ही करना पड़ेगा……….. वरना आज कांता के बाथरूम मे नल फिट करने का चान्स वो हाथ से गवा देगा……..

कांता दरवाजे को लॉक करके वापस वॉशबेसिन के पास आ गयी और एसके से बोली…

कांता: लो अब मैने प्राइवसी भी कर दी…….. अब ज़रा अपना नल तो दिखाओ….. ज़रा हम ही तो देखे कि ऐसी क्या बात है तुम्हारे नल मे…………..

ये कहते हुए कांता एसके के इतने करीब खड़ी हो गयी कि दोनो के जिस्म की गर्मी एक दूसरे को महसूस होने लगी………. कांता की आँखो की खुमारी ये सॉफ कह रही थी कि आओ मुझे भोग लो………. मुझे लूट लो………… मुझे रोन्द डालो…….. मुझे पकड़ के मसल डालो…………

एसके भी अब समझ गया था कि अब अगर उसने कुछ नही किया तो हमेशा के लिए कांता की नज़रो से गिर जाएगा……. इसलिए उसने हिम्मत करके कांता का हाथ अपने हाथ मे लिया और अपने लंड पर पेंट के उपर से ही रख दिया……. कांता का हाथ जैसे ही एसके के लंड पे पड़ा उसका लंड दुगुना फुफ्कार के साथ अपना सिर उठाने लगा………. कांता के हाथो ने भी एसके के लंड की मजबूती को महसूस कर लिया था………. कांता अपने हाथ को एसके के लंड पर मसल्ने लगी,…

 
कांता की इस हरकत ने एसके की रही सही झिझक भी दूर कर दी और एसके ने अपना हाथ कांता की चूचियो पर रख दिया…… और उन्हे दोनो हाथो से मसल्ने लगा….. कांता भी अपने हाथ का दबाव एसके के लंड पर बना रही थी…….. एसके का लंड आप पूरी तरह पेंट मे खड़ा हो चुका था…… एसके ने कांता की चूचियो पर अपना दबाव बढ़ाते हुए बोला………

एसके: क्यो मेडम ………… कैसा लगा मेरा नल आपको………..

कांता: एसके के लंड को मसल्ते हुए बोली………… अब भला डिब्बे के अंदर रखी चीज़ को उपर से ही कैसे बता सकता है कि वो चीज़ कैसी है……………..

एसके कांता की बातो का अर्थ समझ गया था……. उसने अपने एक हाथ को कांता की मोटी मोटी चूचियो से हटाया और अपनी ज़िप को खोल दिया और कांता ने उसके खुले हुए ज़िप मे हाथ डाल कर उसके अंडरवेर के उपर से ही एसके के लंड को अपने हाथो मे लेकर मसालने लगी ………

जैसे ही कांता के हाथ एसके के लंड पर पड़े थे…… एसके का लंड और भी फुफकारने लगा……… उसका जोश और ज़्यादा होने लगा उसने कांता की चूचियो से हटा कर उसकी बड़ी बड़ी गान्ड के गहरी दरार मे डाल कर फेरने लगा…..

कांता उसके लंड को मसल रही थी. और एसके उसकी गान्ड की नाप तोल ले रहा था कुछ देर तक दोनो ही ऐसे एक दूसरे के अंगो से खेलते रहे……. फिर कांता ने कहा

कांता: अरे यार अगर तुम्हे अपने नल को मेरे मे फिट करना है तो इसे इस थैली से तो बाहर निकालूऊऊऊऊ………..

एसके: कांता की गान्ड की दरार मे अंपनी उंगलिओ को घुसाते हुए……….. अरे मेडम मेरा नाल तो ही देखोगी या अपने एरिया को भी दीखाओगी……. जहा मुझे अपना नल लगाना है……..

एसके का इतना कहना था कि कांता ने उसके लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और घूम कर अपनी बड़ी बड़ी गान्ड को एसके के लंड पर रगड़ती हुई उसके हाथ को अपनी चूचियो पर रखती हुई बोली………..

कांता: तो हटा दो ना कवर के मेरे उपर से ……… मुझे तो तुम्हारा नल लगवाना है ………… इसलिए तुम एरिया खुद ही देख लो कि तुम्हारा नल कहाँ फिट हो पाएगा………….

 
कांता की बात सुनकर एसके ने अपने हाथ को कांता की चूचियों से हटाया और नीचे झुक कर कांता के गाउन को नीचे से पकड़कर बड़ी ही अदा से उपर उठा दिया…………

. जब कांता का गाउन उसकी कमर से उपर उठ गया तो कांता ने अपने दोनो हाथो को उपर कर दिया जिस से कि गाउन आसानी से बाहर निकल सके……. कांता का गाउन बाहर निकलते ही उसकी कांतिमय काया चमक उठी…………

एसके ने उसके गाउन के हट ते ही अपने हाथ कांता की बड़ी बड़ी मस्त चूचियो पर ब्रा के उपर से ही रख दिए……….. कांता की बड़ी बड़ी चूचिया एसके के हाथो मे समा नही पा रही थी…….. कांता के उरोज के चूचक जोश से खड़े हो गये थे……… एसके ने उसके चूचक अपने अंगूठे की चुटकी मे मसल्ते हुए कांता के कान मे फुसफुसाते हुए कहा…………..

एसके: लगता है आपको एक ऐसे नल की ज़रूरत है जिससे पानी भरपूर मात्रा मे निकलता हो……….. काफ़ी प्यासी लगती है आप…………

कांता: तो क्यो ……….. तुम तो कह रहे थे कि तुम्हारा नल काफ़ी पानी देता है तो फिर तुम क्यो इतना घबराते हो………..

एसके: अरे मेडम मैं तो पहली ही नज़र मे आपके यहाँ अपना नल फिट करने के लिए उतावला हो गया था………

ये कह कर एसके ने अपने हाथ कांता की ब्रा मे डालते हुए उसकी चूचियो को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा………

कांता तो पहले से ही गरम थी…… और एसके के हाथो का मर्दाना स्पर्श पाकर वो और गरम हो गयी…….. उसकी चूत काम रस से गीली हो चुकी थी……. एसके काफ़ी देर तक उसकी बड़ी बड़ी चूचियो को मसल्ता रहा… फिर उसके धीरे से अपना एक हाथ बढ़ा कर कांता की मांसल चूत पर रख दिया……… जैसे ही कांता की चूत पर एसके के गरम हाथो का स्पर्श हुया वो भी मचल उठी……..

कांता को इस बात का आभास था कि काम बहुत ज़्यादा है और टाइम सीमित है……. इसलिए वो एसके से बोली………..

कांता: अरे एसके ………… दीवार ही देखते रहोगे या अपना नल भी दीखाओगे मुझे……..

कांता का इतना कहना था कि एसके ने कांता को आज़ाद किया और अपने कपड़े एक तरफ खोल कर रख दिए…….. कुछ ही समय मे एसके बिल्कुल निर्वस्त्र हो गया था…. उसका लंड वाकई बहुत बता और मोटा था ……… वो अपने लंड को अपने हाथ मे लेकर हिलाते हुए बोला……………

एसके: ये रहा मेरा नल मेडम……. जैसे मर्ज़ी हो देख लो……….. पसंद आए तो इसे लगवा लेना…………

कांता: (एसके के लंड को अपने हाथ मे लेकर उसकी मोटाई नापते हुए) नल तो तुम्हारा काफ़ी लंबा और मोटा दिख रहा है लेकिन……. इसमे से पाने कितना निकलेगा ये कैसा पता चलेगा………..

एसके: इसके लिए तो आपको इसको एक बार फिट करवाना ही पड़ेगा तभी इसकी हैसीयत का पता चल सकेगा………. ये कहते हुए एसके कांता की ब्रा के हूक को खोलने लग गया…………

 
कांता ने भी एसके की इस हरकत का कोई विरोध नही किया…… कुछ ही पल मे कांता के दोनो कबूतर ब्रा की क़ैद से आज़ाद हो चुके थे…….. एसके ने कांता के बड़े बड़े और कठोर स्तनों को अपने हाथ से मसल्ते लगा…. कुच्छ देर तक वो यू ही कांता की मस्त मस्त चूचियो से खेलता रहा…….

कांता को भी एसके का यो चूची मसलना बड़ा अच्छा लग रहा था ……….

. कुछ देर तक कांता की चूचियो को मसल्ने के बाद एसके ने कांता की एक चूची को आपे मुँह मे भर लिया. और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसने लंगा…..

अपनी चूची पर एसके के होंठो कर स्पर्श पाकर कांता सिहर उठी……… उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी. एसके कांता की चूची को चूस्ते हुए अपना हाथ कांता की पैंटी मे घुसाकर उसकी गान्ड को मसल्ने लगा ……. कांता ने एसके के पेंट की बेल्ट को खोल दिया, ज़िप तो पहले से ही खुली हुई थी बेल्ट खोलने के बाद पेंट के हुक के खुलते ही एसके की पेंट नीचे सरक गयी …… कांता ने अपना हाथ एस के के अंडरवेर मे घुसा दिया और उसके लंड को अपने हाथो मे पकड़ने का प्रयास करने लगी…….

एसके अब कांता की पैंटी को नीचे खिसकाने की कोशिश करने लगा लेकिन पैंटी कांता की गान्ड पर बिल्कुल कसी हुई थी इसलिए निकल नही पाई……..

कांता ने एसके को रुकने का इशारा करते हुए उसे अपने से दूर किया और घूटने के बल एसके के सामने बैठ गयी.. उसके मुँह के ठीक सामने एसके का लंड था. कांता एसके की मजबूत जाँघो को सहलाती हुई अंडरवेअर के उपर से ही एसके के लंड को अपने दांतो से हल्के हल्के काटने लगी……

कांता की इस हरकत से एसके की आँखे बंद हो गयी और उसका मुँह अपने आप छत की तरफ हो गया….

कुछ देर तक कांता यूही एसके के लंड पर अपने दाँत गढ़ाती रही.. फिर उसने एसके के अंडरवेर मे दोनो तरफ से उंगली फ़साकर उसके अंडरवेर को नीचे खीच दिया.

एसके का लंड ऐसे बाहर उछ्ला जैसे कोई रबर का पाइप झटके से बाहर निकलता हो…….. कांता एसके के लंड को सहलाती हुई बोली……..

कांता: तुम्हारा नल तो वाकई बहुत बड़ा है……….. लगता है कि आज मेरी प्यास बुझ जाएगी……. ये कह कर कांता ने एसके का सुपाडे अपने मुँह मे ले लिया ……….

एसके तो जैसे स्वर्ग मे पहुच गया था…….. वो अपना हाथ कांता के बालो मे फिराने लगा………. कांता भी एसके के लंड को जड़ तक मुँह मे लेकर चूस रही थी……… एसके भी कांता के सिर को पकड़ कर अपने लंड को कांता के मुँह मे पेलने लगा…….. कुछ देर तक वो कांता के मुँह को यू ही चोदता रहा.. फिर उसने कांता के मुँह मे से अपना लंड निकाल कर कांता को बेड की तरफ चलने का इशारा किया ……….

 
कांता के बेड के पास पहुँचते ही एसके ने कांता से कहा,,,,,,,,,,,,,

एसके: मेडम अब जहाँ नाल लगवाना है उस जगह को भी तो दिखाइए………..

एसके की बात समझकर कांता ने अपनी पैंटी उतार दी …….

कांता की फूली हुई चूत देख कर एसके अपना आपा खो बैठा और कांता को बेड पर लिटाकर उसकी टांगे चौड़ी कर के अपने होंठो को कांता की चूत पर टिका दिया……… कांता ने अपनी टांगे और चौड़ी कर दी और एसके के मुँह पर अपनी चूत को रगड़ने लगी ………… कांता की चूत को एसके किसी कुत्ते की तरह चाट रहा था …………….

कांता बेड पर लेटे लेटे अपनी दोनो चूचियो को अपने हाथो से ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी ……

लगभग 5 मिनट तक एसके कांता की चूत चाट ता रहा…….. फिर वो अपने मुँह को कांता की चूत से हटा कर उसकी चूत पर अपना लंड टिकाते हुए बोला………

एसके: क्यो मेडम ……… अब आप कहे तो नल लगा दूं मैं……….

कांता: अरे इसमे कौन सी पूच्छने की बात है………. मैं तो कब्से तैयार हूँ नल लगवाने के लिए…………….

कांता की बात सुनकर एसके ने कांता की कमर को पकड़ कर एक ज़ोर का झटका लगाया ………………… एक आआआआआहह की आवाज़ कांता के मुँह से निकली और एसके का आधा लंड कांता की चूत मे समा गया…………..

एसके ने अपने होंठ कांता की खुले होंठो पर रख दिए और उसके होंठो को चूसने लगा. उसने अपने हाथ कांता की चूचियो पर रख दिए और उन्हे धहेरे धीरे मसल्ने लगा…… चूचियो की मिसाई से कांता अपने नीचे के दर्द को भूल गयी और एसके को अपनी बाहो मे लेकर उसकी पीठ पर अपने हाथ फिराने लगी………….. जब एसके ने देखा कि कांता नॉर्मल है तो उसने एक झटके के साथ अपने लंड को कांता की चूत से बाहर खीचा और एक बड़ा प्रहार अपने लंड से कांता की चूत पर किया, फलस्वरूप एसके का लंड जड़ तक कांता की चूत को चौड़ा करते हुए अंदर घूस गया……

जैसे ही एसके का लंड कांता की चूत मे पूरा घुसा कांता दर्द से दोहरी हो गयी………….

 
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