S
StoryPublisher
Guest
. कांता को तो जैसे बिजली का झटका लग गया, वो फिर से मामा के बाहुपाश मे कसमसाने लगी …..
उसकी कसमसाहट को देख कर मामा समझ गया कि कांता अपने आपको छुड़ाने का झूठा नाटक कर रही है…. इसलिए मामा ने अपना दूसरा हाथ भी कांता के ब्लाउस मे डाल दिया, एक तो कांता का ब्लाउस छोटा था, उपर से उसमे उसके बड़े बड़े जोबन, उपर से मामा अपने दोनो हाथ कांता के ब्लाउस मे डाल कर कांता के जोबन को मसल रहे थे……
जिसका नतीजा ये हुआ कि कांता के ब्लाउस के उपर के दो बटनो ने धोका दे दिया और और चॅट- चत्ट- की आवाज़ के साथ कांता के ब्लाउस के दोनो बटन ज़मीन पर धराशायी हो गये…. कांता ने ब्लाउस के अंदर ब्रा नही पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसने मदमस्त कबूतर लगभग आज़ाद हो चुके थे…. अपने ब्लाउस को यू खुलता देख कांता मामा जी से बोली
कांता: उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़………….. माआआअम्म्म्मममममाआआ जी छोड़िए ना,.. ये क्या कर रहे है………. आप ने तो मेरा ब्लाउस ही फाड़ दिया …………..
कांता के ब्लाउस के दोनो बटन टूटने की वजह से मामा के हाथो मे अब कांता के दोनो जोबन अच्छी तरह आ गये थे मामा अपनी दोनो हथेलियो से कांता की चुचियों को ऐसे मीस रहा था जैसे को नींबू निचोड़ रहा हो…. मामा अपना होंठ कांता के कान के पास ले गये और फुसफुसा कर बोले
मामा: अरे कांता अभी तो सिर्फ़ ब्लाउस ही फाडा है…………….. लेकिन आज तुम्हारी कई चीज़ फाड़ुँगा….
मामा के होंठ कांता की गर्दन पर थे और कांता उनके नथुनो से निकलने वाली गरम गरम सास को अपनी गर्दन के पास महसूस कर रही थी , मामा की चूची मिसाई की वजह से कांता के निपल कड़े होने लगे थे. वैसे तो कांता मामा की बात का मतलब समझ रही थी लेकिन ना समझने का नाटक करती हुई मामा से बोली,,,,,,,,,,,,
कांता: ये क्या कह रहे है मामा जी.,………. अब मेरी कौन सी चीज़ फाड़ना चाहते है आप?
कांता के कड़े निपल को मामा के अनुभवी हाथो ने पहचान लिया था. मामा अब ये समझ गया था कि कांता अब होली खेलने मे मज़ा आने लगा है. और अब कांता उसकी किसी भी हरकत का विरोध नही करेगी, ये समझते ही माना ने कांता की चूचियो को और ज़ोर से मीसने लगा. मामा के हाथो का गुलाल तो कब का ख़तम हो चुका था, अब उसके हाथ मे गुलाल नही बल्कि कांता का बड़ा वाला माल था, जिसे मामा मीज़ मीज़ कर लाल कर रहा था, कांता के दोनो निपल कड़े होके किसी मूँगफली की तरह हो गये थे. शादी के बाद कांता की गोलाइया और पुष्ट हो गयी थी….. उनका आकार इतना बड़ा था कि मामा की दोनो बड़ी हथेलियो मे भी नही समा पा रहा था……… मामा कांता की जवानी मे उलझा हुआ था तभी उसके कानो मे कांता की आवाज़ सुनाई दी
कांता: बस मामा जी…………. अब तो आपने जी भर कर डाल लिया ना………… और डाला क्या रगड़ रगड़ कर डाल लिया आपने, अब तो मुझे आज़ाद कर दीजिए…….
मामा कांता की चूचियो की घुंडीयों को मसल्ते हुए बोले………
मामा: अरे कांता………… इतनी जल्दी भी क्या है ……… और अभी तक तो तुम कपड़ो मे ही हो….. मुझे कपड़ो पर नही तुम्हारे इस मस्त बदन पर रंग मलना है…………….
उसकी कसमसाहट को देख कर मामा समझ गया कि कांता अपने आपको छुड़ाने का झूठा नाटक कर रही है…. इसलिए मामा ने अपना दूसरा हाथ भी कांता के ब्लाउस मे डाल दिया, एक तो कांता का ब्लाउस छोटा था, उपर से उसमे उसके बड़े बड़े जोबन, उपर से मामा अपने दोनो हाथ कांता के ब्लाउस मे डाल कर कांता के जोबन को मसल रहे थे……
जिसका नतीजा ये हुआ कि कांता के ब्लाउस के उपर के दो बटनो ने धोका दे दिया और और चॅट- चत्ट- की आवाज़ के साथ कांता के ब्लाउस के दोनो बटन ज़मीन पर धराशायी हो गये…. कांता ने ब्लाउस के अंदर ब्रा नही पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसने मदमस्त कबूतर लगभग आज़ाद हो चुके थे…. अपने ब्लाउस को यू खुलता देख कांता मामा जी से बोली
कांता: उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़………….. माआआअम्म्म्मममममाआआ जी छोड़िए ना,.. ये क्या कर रहे है………. आप ने तो मेरा ब्लाउस ही फाड़ दिया …………..
कांता के ब्लाउस के दोनो बटन टूटने की वजह से मामा के हाथो मे अब कांता के दोनो जोबन अच्छी तरह आ गये थे मामा अपनी दोनो हथेलियो से कांता की चुचियों को ऐसे मीस रहा था जैसे को नींबू निचोड़ रहा हो…. मामा अपना होंठ कांता के कान के पास ले गये और फुसफुसा कर बोले
मामा: अरे कांता अभी तो सिर्फ़ ब्लाउस ही फाडा है…………….. लेकिन आज तुम्हारी कई चीज़ फाड़ुँगा….
मामा के होंठ कांता की गर्दन पर थे और कांता उनके नथुनो से निकलने वाली गरम गरम सास को अपनी गर्दन के पास महसूस कर रही थी , मामा की चूची मिसाई की वजह से कांता के निपल कड़े होने लगे थे. वैसे तो कांता मामा की बात का मतलब समझ रही थी लेकिन ना समझने का नाटक करती हुई मामा से बोली,,,,,,,,,,,,
कांता: ये क्या कह रहे है मामा जी.,………. अब मेरी कौन सी चीज़ फाड़ना चाहते है आप?
कांता के कड़े निपल को मामा के अनुभवी हाथो ने पहचान लिया था. मामा अब ये समझ गया था कि कांता अब होली खेलने मे मज़ा आने लगा है. और अब कांता उसकी किसी भी हरकत का विरोध नही करेगी, ये समझते ही माना ने कांता की चूचियो को और ज़ोर से मीसने लगा. मामा के हाथो का गुलाल तो कब का ख़तम हो चुका था, अब उसके हाथ मे गुलाल नही बल्कि कांता का बड़ा वाला माल था, जिसे मामा मीज़ मीज़ कर लाल कर रहा था, कांता के दोनो निपल कड़े होके किसी मूँगफली की तरह हो गये थे. शादी के बाद कांता की गोलाइया और पुष्ट हो गयी थी….. उनका आकार इतना बड़ा था कि मामा की दोनो बड़ी हथेलियो मे भी नही समा पा रहा था……… मामा कांता की जवानी मे उलझा हुआ था तभी उसके कानो मे कांता की आवाज़ सुनाई दी
कांता: बस मामा जी…………. अब तो आपने जी भर कर डाल लिया ना………… और डाला क्या रगड़ रगड़ कर डाल लिया आपने, अब तो मुझे आज़ाद कर दीजिए…….
मामा कांता की चूचियो की घुंडीयों को मसल्ते हुए बोले………
मामा: अरे कांता………… इतनी जल्दी भी क्या है ……… और अभी तक तो तुम कपड़ो मे ही हो….. मुझे कपड़ो पर नही तुम्हारे इस मस्त बदन पर रंग मलना है…………….