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कांता सोफे पर पेट के बल लेट गयी… लाखा राम कांता को अपनी बाजुओ मे पकड़ कर अपने शरीर को कांता के उपर रखते हुए फिर से कांता की गान्ड मारने लगा… इस बार लाखा राम की स्पीड काफ़ी धीमी थी मगर उस धीमी स्पीड मे भी लाखा राम कांता की गान्ड की पूरी गहराई नाप रहा था.. इस बात का सबूत कांता की सिसकारियाँ थी.
लाखा राम कांता की पीछे से मारते हुए उसके कान मे फुसफुसा कर बोला…
लाखा राम: क्यो कांता… कैसा लग रहा है मेरा गन्ना अपने कुल्हो मे लेकर…
कांता: मेरे कुल्हो को हमेशा ऐसे ही मोटे और लंबे गन्ने की चाहत होती है.. आपके गन्ने को अपने कुल्हो मे डलवाकर मज़ा आ गया…
लाखा राम: अब ये मज़ा तुम्हे पूरे साल मिलेगा…
कांता: मैं भी यही चाहती हो कि तुम्हारा गन्ना हमेशा ऐसे ही मेरे कुल्हो मे पिलता रहे.. और तुम्हारे गन्ने कर रस निकलता रहे…
लाखा राम: रस तो तुम्हारा भी खूब टपक रहा है… लाखा राम ने अपने एक हाथ से कांता की रसीली चूत को मसल्ते हुए कहा… लगता है इसे भी मेरे गन्ने की ज़रूरत महसूस हो रही है…
कांता: आपका गन्ना है ही इतना जबरदस्त कि हर कोई इसे लेना चाहेगा….
लाखा राम: और तुम्हारी भी तो इतनी जबरदस्त है कि हर कोई लेना चाहेगा…. लाखा राम कांता की गान्ड मारते हुए बोला….
कांता: हर कोई क्या लेना चाहेगा… मेरी…………………
लाखा राम: वही जो मैं ले रहा हूँ……….
कांता: क्या ले रहे हो आप मेरिइईईईईईई….
कांता की बात सुनकर लाखा राम कांता के कानो मे फुसफुसाते हुए बोला…
लाखा राम: मैं तुम्हारी…. गाआंन्नननननन्न्ँद्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ले रहा हूँ कांता….. और तुम मुझे खुशी खुशी दे रही हो….
कांता: लेने देने से ही तो बिज़्नेस्स्स आगे बढ़ता है लाखा राम जी…. और हमें अपना बिज़्नेस आगे बढ़ाना है……
लाखा राम ने कांता की गान्ड से अपना लंड बाहर खिच लिया…. और फिर सोफे पर अपनी पीठ टिकाते हुए अपनी दोनो टाँगो को नीचे कालीन पर रखकर अधलेटा होगया इस समय उसका बड़ा लंड किसी डंडे की तरह लग रहा था.. उसने इशारे से कांता को अपने लंड पर बैठने के लिया कहा…
लाखा राम कांता की पीछे से मारते हुए उसके कान मे फुसफुसा कर बोला…
लाखा राम: क्यो कांता… कैसा लग रहा है मेरा गन्ना अपने कुल्हो मे लेकर…
कांता: मेरे कुल्हो को हमेशा ऐसे ही मोटे और लंबे गन्ने की चाहत होती है.. आपके गन्ने को अपने कुल्हो मे डलवाकर मज़ा आ गया…
लाखा राम: अब ये मज़ा तुम्हे पूरे साल मिलेगा…
कांता: मैं भी यही चाहती हो कि तुम्हारा गन्ना हमेशा ऐसे ही मेरे कुल्हो मे पिलता रहे.. और तुम्हारे गन्ने कर रस निकलता रहे…
लाखा राम: रस तो तुम्हारा भी खूब टपक रहा है… लाखा राम ने अपने एक हाथ से कांता की रसीली चूत को मसल्ते हुए कहा… लगता है इसे भी मेरे गन्ने की ज़रूरत महसूस हो रही है…
कांता: आपका गन्ना है ही इतना जबरदस्त कि हर कोई इसे लेना चाहेगा….
लाखा राम: और तुम्हारी भी तो इतनी जबरदस्त है कि हर कोई लेना चाहेगा…. लाखा राम कांता की गान्ड मारते हुए बोला….
कांता: हर कोई क्या लेना चाहेगा… मेरी…………………
लाखा राम: वही जो मैं ले रहा हूँ……….
कांता: क्या ले रहे हो आप मेरिइईईईईईई….
कांता की बात सुनकर लाखा राम कांता के कानो मे फुसफुसाते हुए बोला…
लाखा राम: मैं तुम्हारी…. गाआंन्नननननन्न्ँद्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ले रहा हूँ कांता….. और तुम मुझे खुशी खुशी दे रही हो….
कांता: लेने देने से ही तो बिज़्नेस्स्स आगे बढ़ता है लाखा राम जी…. और हमें अपना बिज़्नेस आगे बढ़ाना है……
लाखा राम ने कांता की गान्ड से अपना लंड बाहर खिच लिया…. और फिर सोफे पर अपनी पीठ टिकाते हुए अपनी दोनो टाँगो को नीचे कालीन पर रखकर अधलेटा होगया इस समय उसका बड़ा लंड किसी डंडे की तरह लग रहा था.. उसने इशारे से कांता को अपने लंड पर बैठने के लिया कहा…