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कांता की कामपिपासा

कांता सोफे पर पेट के बल लेट गयी… लाखा राम कांता को अपनी बाजुओ मे पकड़ कर अपने शरीर को कांता के उपर रखते हुए फिर से कांता की गान्ड मारने लगा… इस बार लाखा राम की स्पीड काफ़ी धीमी थी मगर उस धीमी स्पीड मे भी लाखा राम कांता की गान्ड की पूरी गहराई नाप रहा था.. इस बात का सबूत कांता की सिसकारियाँ थी.

लाखा राम कांता की पीछे से मारते हुए उसके कान मे फुसफुसा कर बोला…

लाखा राम: क्यो कांता… कैसा लग रहा है मेरा गन्ना अपने कुल्हो मे लेकर…

कांता: मेरे कुल्हो को हमेशा ऐसे ही मोटे और लंबे गन्ने की चाहत होती है.. आपके गन्ने को अपने कुल्हो मे डलवाकर मज़ा आ गया…

लाखा राम: अब ये मज़ा तुम्हे पूरे साल मिलेगा…

कांता: मैं भी यही चाहती हो कि तुम्हारा गन्ना हमेशा ऐसे ही मेरे कुल्हो मे पिलता रहे.. और तुम्हारे गन्ने कर रस निकलता रहे…

लाखा राम: रस तो तुम्हारा भी खूब टपक रहा है… लाखा राम ने अपने एक हाथ से कांता की रसीली चूत को मसल्ते हुए कहा… लगता है इसे भी मेरे गन्ने की ज़रूरत महसूस हो रही है…

कांता: आपका गन्ना है ही इतना जबरदस्त कि हर कोई इसे लेना चाहेगा….

लाखा राम: और तुम्हारी भी तो इतनी जबरदस्त है कि हर कोई लेना चाहेगा…. लाखा राम कांता की गान्ड मारते हुए बोला….

कांता: हर कोई क्या लेना चाहेगा… मेरी…………………

लाखा राम: वही जो मैं ले रहा हूँ……….

कांता: क्या ले रहे हो आप मेरिइईईईईईई….

कांता की बात सुनकर लाखा राम कांता के कानो मे फुसफुसाते हुए बोला…

लाखा राम: मैं तुम्हारी…. गाआंन्‍नननननन्न्ँद्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ले रहा हूँ कांता….. और तुम मुझे खुशी खुशी दे रही हो….

कांता: लेने देने से ही तो बिज़्नेस्स्स आगे बढ़ता है लाखा राम जी…. और हमें अपना बिज़्नेस आगे बढ़ाना है……

लाखा राम ने कांता की गान्ड से अपना लंड बाहर खिच लिया…. और फिर सोफे पर अपनी पीठ टिकाते हुए अपनी दोनो टाँगो को नीचे कालीन पर रखकर अधलेटा होगया इस समय उसका बड़ा लंड किसी डंडे की तरह लग रहा था.. उसने इशारे से कांता को अपने लंड पर बैठने के लिया कहा…

 
कांता की बात सुनकर लाखा राम कांता के कानो मे फुसफुसाते हुए बोला…

लाखा राम: मैं तुम्हारी…. गाआंन्‍नननननन्न्ँद्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ले रहा हूँ कांता….. और तुम मुझे खुशी खुशी दे रही हो….

कांता: लेने देने से ही तो बिज़्नेस्स्स आगे बढ़ता है लाखा राम जी…. और हमें अपना बिज़्नेस आगे बढ़ाना है……

लाखा राम ने कांता की गान्ड से अपना लंड बाहर खिच लिया…. और फिर सोफे पर अपनी पीठ टिकाते हुए अपनी दोनो टाँगो को नीचे कालीन पर रखकर अधलेटा होगया इस समय उसका बड़ा लंड किसी डंडे की तरह लग रहा था.. उसने इशारे से कांता को अपने लंड पर बैठने के लिया कहा…

कांता ने अपने दोनो पैरो को लाखा राम के मोटे और मजबूत पैरो पर रखकर अपने दोनो हाथो को लाखा राम की छाती पर रख दिया… और अपने चौड़ी गान्ड को लाखा राम के सुपाडे पर धीरे से टिका दिया… लाखा राम का लंड सरसराता हुआ… किसी साप की तरह कांता की गान्ड रुपी बिल मे घुस गया… पूरा लंड अंदर घुसाने के बाद लाखा राम ने अपनी कमर को उचकाना शुरू किया.. और इसी के साथ लाखा राम का पोल एक बार फिर कांता के होल मे अंदर बाहर होने लगा

लाखा राम कांता की जम के ले रहा था… कांता भी लाखा राम की सेक्स पोज़िशन को देख कर उसकी कायल हो गयी… इस पोज़िशन मे भी लाखा राम कांता की गान्ड लगभग 5 मिनट तक मारता रहा… कांता उसकी मर्दानगी और बलिष्ठता को देख कर चकित हो रही थी.. इस उमर मे भी लाखा राम का कमाल का स्टॅमिना था… लाखा राम ने कांता को अपने उपर से उतारा और वहाँ बिछे हुए कालीन पर दोनो घुटनो के बल पर बिठा दिया.. और फिर कांता को घुटनो पर ही अधलेटा कर दिया…

कांता समझ गयी कि फिर उसका क्या इरादा है… कांता लाखा राम से बोली….

कांता: आज तुम्हे मुझे मारने का इरादा है क्या………………. हालाकी मन ही मन इस बेहतरीन छुदाई के लिए लाखा राम को धन्याबाद दे रही थी वो… वो जांनबुझ कर लाखा राम को उकसा रही थी ताकि लाखा राम उसे और बुरी तरह रौंदे….

लाखा राम अपनी दोनो टाँगों को कांता के दोनो तरफ फैलकार उसकी चौड़ी गान्ड के छेद पर अपने सुपाडे तो टिकाते हुए कहा….

लाखा राम: तुम्हे मारने का इरादा नही है कांता… लेकिन आज तुम्हारी अच्छी तरफ मारने का इरादा ज़रूर है मेरा… और ये कहते हुए एक जोरदार का धक्का कांता की गान्ड पर लगाया… इतनी लंबी गान्ड मराई के बाद कांता की गान्ड काफ़ी चौड़ी हो गयी थी .. इसलिए बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के एक बार फिर लाखा राम का लंड कांता की गान्ड मे समा गया… दो चार धक्के धीरे धीरे मारने के बाद लाखा राम ने फिर स्पीड पकड़ ली… एक बात फिर हॉल मे ताप्प्प्प्प्प्प्प…….. ठप्प्प्प्प्प्प्प… की आवाज़ गूंजने लगी…

कांता ने महसूस किया कि ये अब तक की उसकी सबसे अच्छी गान्ड मराई थी….

लाखा राम ने कांता की गान्ड मारते हुए कहा.….

लाखा राम: कांता…. जब तुम यहाँ आई थी तो तुम्हे देख कर मैने सोच लिया थी कि अगर तुम्हे चोदने का मौका मिलेगा तो सबसे पहले तुम्हारी इस मटकती हुई गान्ड को मारूँगा… क्या गान्ड है तुम्हारी…. धन्य हो गया मेरा लंड तुम्हारी गान्ड मारकररर्र्र्र्र्र्र्ररर………….

 
कांता: और मेरी गान्ड भी धन्य हो गयी तुमसे मरवाकर… और फिर दोनो जोश से भरकर अपना काम करने लगे… कांता अब अपनी चूत की भूख शांत करनी थी… उसकी चूत काफ़ी देर से सिसक रही थी… उसने लाखा राम से कहा…

कांता: अरे लाखा राम जी… ज़रा सा ध्यान आगे की तरफ भी दो… काफ़ी देर से आपका इंतजार कर रही है मेरी आगे वाली गली…

लाखा राम: कांता की गान्ड मारते हुए बोला… अभी तुम्हारी आगे वाली गली मे भी धमा चौकड़ी मचाता हूँ… ये कहकर लाखा राम ने कांता को पीठ के बल नीचे कालीन पर ही लिटा दिया.. और उसकी दोनो टाँगों को चौड़ी करते हुए अपना मोटा लंड कांता की गीली और चिकनी गुलाबी चूत पर टिका दिया..

उसके लंड को रास्ता देने के लिए कांता की चूत ने अपनी दोनो गुलाबी फांको को खोल दिया… कांता की चूत पहले ही काफ़ी गीली और चिकनी हो चुकी थी इसलिए बिना किसी अवरोथ के लाखा राम का लंड कांता की चूत मे समा गया… कांता की चूत मे लाखा राम का लंड किसी बाज़ की तरफ फ़सा हुआ था… कांता के मूह से सिसकारी तेज होने लगी… और साथ ही साथ लाखा राम के धक्को की स्पीड भी.. और फिर एक बार लंड और चूत की जंग शुरू हो गयी… हर झटके के साथ कांता के मोटी मोटी चूचियाँ हिचकोले खा रही थी .

कांता मस्ती मे चिल्ला रही थी…

आआआहह… और ज़ोर सीईईईईई………..सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साआआहह और तेज माआरूऊऊऊऊ.. फाड़ दो मेरी चूऊऊऊथततटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटतत्त को….. बुझा दो इसकी प्यासस्स्स्स्सस्स………….. आज तक ऐसे किसी ने नही चूऊद्द्द्द्द्द्द्द्दददााा. मुझीईए……आआआहह…सस्स्स्सस्स …

कांता की उत्तेजित बाते सुनकर लाखा राम और आक्रामक हो गया… कुछ देर इसी तरह उसकी चुदाई करने के बाद लाखा राम ने कांता को वहाँ पड़े टेबल पर मुँह के बल लिटाया… और बिना समय गवाए अपने लंड को कांता की चूत मे दोबारा पेल दिया..और फिर किसी रोबोट की तरह कांता के जोड़ो के बीच मे धक्के लगाने लगा.. उसके हर धक्के के तीव्र प्रहार से कांता की गान्ड हिल रही थी.. कांता की हिलती हुई गान्ड लाखा राम की उत्तेजना को और बढ़ा देती और उसका धक्का पहले वाले धक्के से तेज हो जाता… चुदाई अब चरम पर पहुच चुकी थी… कांता की चूत मे से रस रिस रिस के उसकी टाँगों तक आ गया था… अब चुदाई की आवाज़ में थाप्प्प… ठप्प्प्प.. के साथ पचह..पचह. की आवाज़ भी शामिल हो गयी…

 
कांता की उत्तेजित बाते सुनकर लाखा राम और आक्रामक हो गया… कुछ देर इसी तरह उसकी चुदाई करने के बाद लाखा राम ने कांता को वहाँ पड़े टेबल पर मुँह के बल लिटाया… और बिना समय गवाए अपने लंड को कांता की चूत मे दोबारा पेल दिया..और फिर किसी रोबोट की तरह कांता के जोड़ो के बीच मे धक्के लगाने लगा.. उसके हर धक्के के तीव्र प्रहार से कांता की गान्ड हिल रही थी.. कांता की हिलती हुई गान्ड लाखा राम की उत्तेजना को और बढ़ा देती और उसका धक्का पहले वाले धक्के से तेज हो जाता… चुदाई अब चरम पर पहुच चुकी थी… कांता की चूत मे से रस रिस रिस के उसकी टाँगों तक आ गया था… अब चुदाई की आवाज़ में थाप्प्प… ठप्प्प्प.. के साथ पचह..पचह. की आवाज़ भी शामिल हो गयी…

दोनो की चुदाई का दौर अब अपने चरम पर था… दोनो प्रतिद्वंदी अपनी मंज़ील की तरफ बड़ी तेज़ी से बढ़ रहे थे.. दोनो ही इस खेल के माहिर थे… इसलिए दोनो एक दूस्सरे पर नहले पर दहला की तरह अपना अपना काम कर रहे थे. कांता आनंद के सातवे आसमान पर थी.. और होती भी क्यो नही.. लाखा राम के पास इतना अच्छा हथ्यार जो था… चुदाई के इस परमानंद का अच्छी तरह लुफ्त उठा रही थी कांता…

कांता को कुछ देर इसी तरह पीछे से चोदने के बाद लाखा राम ने उसको टेबल पर पीठ के बल लिटाया और फिर एक बार उसकी चूत मे लंड पेल दिया…. उसका हर धक्का कांता को जन्नत की तरफ धकेल रहा था…

कांता के शरीर मे अब एक अजीब सी हलचल होने लगी थी… लाखा राम.. के धक्कों की स्पीड अब सबसे ज़्यादा तेज थी…. उसने कांता की दोनो टाँगों को घुटनो तक मोड दिया और उसके दोनो पैरो को अपने बाजुओ से थामते हुए बड़ी ही तेज़ी से धक्के मारने लगा…

उसके हर धक्के के साथ कांता की आवाज़ और कांता की चूत की आवाज़ सुनाई दे रही थी.. चुदाई अपने चरम पर थी…महाचुदाई का महाभियान अपने अंत की तरफ अग्रसर था… बस ही कुछ ही पॅलो मे कांता के अंदर का लावा उसकी चूत के रास्ते बाहर आने के लिए बेताब था… इस बात की अनुभूति ने कांता की चूत पर हो रहे प्रहार के प्रतिउत्तर मे अपने प्रहार को भी तेज कर दिया था…

लाखा राम की आवाज़ भी किसी जानवर के गुर्राने जैसी लगने लगी थी… वो किसी वहशी की तरह कांता को चोद रहा था.. लाखा राम काफ़ी देर से कांता को खड़े खड़े चोद रहा था.. जिस से उसके पैरो मे हल्की थकान महसूस होने लगी.. इसलिए वो कांता के साथ ही लेट गया अब कांता टेबल पर उसके आगे थी और लाखा राम ने फिर से कांता की चूत पीछे से मारनी शुरू कर दी… कांता की आखे मदहोशी मे डूबी हुई थी और अपनी चुदाई का परम सुख प्राप्त कर रही थी..

लाखा राम की गजब की चुदाई ने कांता को अपने चरम पर पहुचा दिया था.. लाखा राम को भी ये आभास हो गया था कि अब वो और ज़्यादा देर मैदान मे नही टिक पाएगा… कांता की सिसकारी अब तेज आह मे बदल रही थी.. उसके भी शरीर मे ऐंठन होने लगी थी.. उसकी सासे भी अब उखडने लगी थी… लाखा राम ने फिर एक बार सेक्स पोज़िशन बदली और कांता को अपने उपर आने के लिए कहा.. अब लाखा राम लेटा हुआ था और कांता की पीठ लाखा राम के सामने थी.. इस समय कांता की दोनो टांगे लाखा राम के दोनो तरफ फैली हुई थी और लाखा राम का लंड कांता की चौड़ी चूत को और चौड़ी कर रहा था…

और फिर अचानक कांता का बदन कापने लगा… उसके शरीर मे अकड़न होने लगी.. उसके मुँह से हाफने की आवाज़ आने लगी… और फिर अचानक उसकी चूत से ऐसे पानी निकलने लगा जैसे किसी ने सरकारी नल खोल दिया हो…. पानी एक झटके के साथ निकला.. जैसे कोई फव्वारा निकला हो.. कुछ पल बाद फिर कांता के शरीर ने हिचकोले खाकर दूसरा झटका दिया.. और फिर तीसरा… हर बार पानी की मात्रा पहलसे से ज़्यादा थी..

 
इधर लाखा राम भी का लंड भी अपने मुँह से पानी निकालने के लिए बेताब था… वो भी कांता को फिर से टेबल पर पटक कर चोदने लगता है 1… 2…. 333….44……………. धक्को के बाद उसके मुँह से भी एक लंबी कराह निकल जाती है… और कांता की चूत मे से कुछ बहने लगता है.. दोनो खिलाड़ी … थके हुए एक दूसरे के उपर पड़े रहते है… और आख़िर कांता ने लाखा राम के मोटे गन्ने को रस निकाल ही दिया..

लाखा राम भी यही सोचता है कि कमाल की चुदक्कड औरत है कांता.. आख़िर मेरे गन्ने का रस निचोड़ ही लिया…………….

देर रात लाखा राम के साथ चल रही मीटिंग की वजह से कांता अगले दिन दोपहर के बाद ही निकल सकी लाखा राम की हवेली से…. रास्ते मे कांता अपने इस मिल के प्रोडक्षन के बारे मे सोच रही थी.. तभी उसकी सोच मे मोबाइल की रिंग ने विध्न डाल दिया…. कार की सीट पर रखे मोबाइल की स्क्रीन पर देखा तो फोन जानकी लाल का था…….. कांता ने मोबाइल उठा कर कान से लगा लिया…

जानकी लाल: और बेटी कहाँ हो…….. और कितनी देर लगेगी… तुम्हे घर आने मे?

कांता: बस बाबूजी… 1 घंटे मे पहुच जाउन्गी.. मैं.. रास्ते मे हूँ.

जानकी लाल: बड़ी देर लगा दी निकलने मे तुमने….

कांता: हाँ.. आज सुबह देर से ही उठी… वो क्या है कि लाखा राम के साथ डील पूरी करने मे थोड़ा वक़्त लग गया… रात को लेट ही सोई थी मैं…

जानकी लाल: हाँ वो तो है.. बड़ी डील के लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है.. हँसते हुए.. है कि नही….

कांता:हमम्म्मममममममममम… वो तो है… बिज़्नेस पाने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है.

जानकी लाल: ठीक है तो आ जाओ तुम उसके बाद हम आगे के प्लान के बारे मे डिसकसस करते है…

कांता: ओके बाबूजी… और इसी के साथ फोन कट कर दिया… फोन रखकर कांता कार की खिड़की से बाहर खेतो का नज़ारा करने लगी… हरे भरे खेत देख कर किसी का दिल भी ख़ुसनूमा हो जाता… कांता उस हरियाली मे खो गयी… उसकी कार बड़ी ही तेज़ी से मंज़िल की तरफ बढ़ रही थी……

 
जानकी लाल: ठीक है तो आ जाओ तुम उसके बाद हम आगे के प्लान के बारे मे डिसकसस करते है…

कांता: ओके बाबूजी… और इसी के साथ फोन कट कर दिया… फोन रखकर कांता कार की खिड़की से बाहर खेतो का नज़ारा करने लगी… हरे भरे खेत देख कर किसी का दिल भी ख़ुसनूमा हो जाता… कांता उस हरियाली मे खो गयी… उसकी कार बड़ी ही तेज़ी से मंज़िल की तरफ बढ़ रही थी……

कोई एक घंटे बाद कार हवेली पर पहुच गयी… कार से उतरकर कांता ने हवेली नुमा बंगले के मेन दरवाजे से अंदर की तरफ दाखिल हो गयी… जानकी लाल और कांता की सासू माँ वही सोफे पर आराम से बैठ कर शाम की चाइ पी रहे थे..कांता ने सामने की दीवार पर टॅंगी हुई घड़ी पर नज़र डाली… शाम के 4.15 हो चुके थे… कांता को देख कर जानकी लाल मुस्कुरा दिया.. कांता की सासू ने भी मुस्कुराते हुए पूछा…

सासू: और कैसा रहा.. तुम्हारा सफ़र.. और मीटिंग ठीक रही कि नही…

कांता: वही पास के सोफे पर बैठते हुए… अरे माँ जी जब आपका आशीर्वाद साथ है तो मीटिंग ठीक से क्यो नही होगी…

'

सासू: वो तो मुझे पता है… तुम मे बात ही ऐसी है कि तुम किसी भी बिज़्नेस मे फैल नही हो सकती.. मैने तो कभी सोचा भी नही था… कि हमारा बिज़्नेस इतनी जल्दी इतना फैल जाएगा….. और कांता की तरफ देख कर मुस्कुरा दिया.. प्रतिउत्तर मे कांता भी मुस्कुरा उठी और मन ही मन बोली… तुम्हारे इस बिज़्नेस को फैलाने मे मेरा क्या क्या फैल गया है.. ये तुम्हे क्या पता…

कांता: माजी मैं थोड़ा आराम कर लेती हूँ…

सासू: हहा बेटी जाओ आराम कर लो थक गयी होगी तुम…..

कांता जाते हुए जानकी लाल की तरफ देख कर बोली

कांता: बाबू जी मैं थोड़ा आराम कर लेती हूँ… शाम को बिज़्नेस के बारे मे डिसकस करेंगे हम लोग.. जानकी लाल ने सहमति मे सिर हिलाया…

कांता अपनी फाइल्स उठाकर उपर अपने बेडरूम की तरफ चल दी… जानकी लाल उसको जाते हुए पीछे से देख रहे थे.. ऐसा कांता की सासू को लग रहा था.. लेकिन जानकी लाल कांता को नही देख रहा था.. वो तो कांता की देख रहा था… अब ये मत पूछ लेना आपलोग कि क्या देख रहा था….

 
टाइम रात के 9.30 हो चुके थे.. सभी लोगो ने खाना खा लिया था… कांता की सासू अपने बेडरूम मे लेटी हुई थी… जानकी लाल भी वही पर थे… उन्होने वहाँ टेबल पर पड़ा ग्लास का दूध उठाया और अपने पत्नी को देते हुए कहा… लो ये दूध पी लो मैं अभी 10 मिनट मे कांता से कुछ बात करके आता हूँ…

अपने प्रति इस प्यार को देख कर जानकी की पत्नी ने मुस्कुराते हुए दूध का ग्लास जानकी लाल के हाथ से अपने हाथ मे लिया.. और जानकी लाल अपने बेडरूम से निकल कर बाहर आ गये… कांता हॉल मे ही कुछ फाइल्स मे अपना सिर खपा रही थी.. किचन मे फूलवा सफाई का काम कर रही थी.. जानकी नेलाल कांता के पास वाले सोफे पर बैठते हुए कांता से पूछा…

जानकी लाल: तो हाँ कांता.. कितने लोगो को फाइनल किया.. अपना माल बेचने के लिए…

कांता: (गंभीरता से).. लिस्ट तो बना ली मैने.. लेकिन मेरा मन नही कर रहा है कि मैं इन्हे अपना माल दूँ…

जानकी लाल: (हैरान होते हुए) क्यो… प्रोडक्षन का माल हम बेचेंगे नही तो फिर क्या करेंगे….?

कांता: हम अपना माल बेचेंगे .. लेकिन 2-3 लोगो को ही माल सप्लाइ करेंगे हम यहाँ पर… वो भी सिर्फ़ उन्ही लोगो को जिनकी मार्केट मे पकड़ अच्छी हो… और जो ज़्यादा से ज़्यादा माल खपा सकें मार्केट मे..

जानकी लाल: वो तो ठीक है लेकिन तुम्हे तो पता ही है कि हम रोज कम से कम 2000 हज़ार टन गन्ने की पिराई कर सकते है.. और इतना प्रोडक्षन हम केवल दो डिस्ट्रीब्यूटर के ज़रिए नही खपा सकते… तुम्हारे दिमाग़ मे कोई और प्लान चल रहा है शायद… जानकी लाल कांता को उत्सुकता से देखते हुए बोला

कांता: बिल्कुल ठीक सोच रहे है आप… मेरे दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा है .. मैं इस माल को लोकल मार्केट मे नही बल्कि एक्सपोर्ट करना चाहती हूँ…. इस से हमारी कंपनी की साख बढ़ेगी और मुनाफ़ा भी ज़्यादा मिलेगा हमे.

जानकी लाल: वो सब तो ठीक है लेकिन हमे चीनी को एक्सपोर्ट करने के बारे मे ज़यादा पता नही है… सब चीज़े हमारे लिए अंजानी सी है… इसमे काफ़ी जोखिम हो सकता है

कांता: बिज़्नेस मे तो जोखिम लेना ही पड़ता है बाबू जी… कांता की बातो से आत्मविश्वास झलक रहा था…

 
जानकी लाल: वो सब तो ठीक है लेकिन हमे चीनी को एक्सपोर्ट करने के बारे मे ज़यादा पता नही है… सब चीज़े हमारे लिए अंजानी सी है… इसमे काफ़ी जोखिम हो सकता है

कांता: बिज़्नेस मे तो जोखिम लेना ही पड़ता है बाबू जी… कांता की बातो से आत्मविश्वास झलक रहा था…

जानकी लाल: वो तो ठीक है.. लेकिन कोई भी चीज़ लोकल मार्केट मे तो आसानी से खपाई जा सकती है लेकिन इंटरनॅशनल मार्केट मे अपने माल को खपाना मुश्किल होगा..

कांता: मुश्किल ज़रूर है.. लेकिन नामुमकिन नही… आप अपने किसी एक आदमी को चीनी एक्सपोर्ट करने के लिए जो भी डॉक्यूमेशन की ज़रूरत है उसे पूरा करने के लिए कहे.. कोई प्राब्लम हो उसे निपटा जाएगा…

जानकी लाल: ठीक है… तो अभी एक और काम निपटा ले हम???????????????????????????? और जानकी लाल कांता को देखते हुए मुस्कुराने लगा…. कांता भी समझ गयी कि वो कौन से काम के लिए कह रहा है..

कांता: अपनी सास के कमरे की तरफ देखती हुई बोली.. वो माँ जी….

जानकी लाल; उसकी बात को काटते हुए बोला… दूध मे नींद की गोली मिला दी थी मैने.. और फिर दोनो मुस्कुरा दिया.. तो चले चेस खेलने… कांता उठकर अपने कमरे मे उपर की तरफ चल दी… जानकी लाल भी कांता के पीछे हो लिया… कांता जब सीढ़ियो पर चढ़ रही थी तो उसके मोटे चूतड़ बड़े ही मादक अंदाज मे हिल रहे थे.. उसे देख कर जानकी लाल अपने लंड को मसल्ते हुए अपने आप से बोला… आज तेरी गान्ड जम के मारूँगा

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