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फिल्म ख़त्म हुई तब तक 12 बजने में 10 मिनट कम थे।
विराज- यार, काश हम भी तुम्हारे नग्न समुद्रतट यानि न्यूड बीच वाला अनुभव ले पाते।
शालू- मुझे तो उस क्लब में जाकर चुदवाने का मन कर रहा है।
जय- क्यों ना हम यहीं वो क्लब बना लें। मान लो यही वो क्लब है और हम न्यू इयर मनाने यहाँ आये हैं।
शालू- एक काम करते हैं जैसे ही 12 बजेंगे, हम सब एक साथ नंगे हो जाएँगे तो फिर किसी को पहले या बाद में नहीं होना पड़ेगा और शर्म भी नहीं आएगी।
विराज- ठीक है फिर ऐसे कपड़े पहन लेते हैं जो एक झटके में निकल जाएं।
शीतल- आप लोग अन्दर जा कर लुंगी पहन लो।
शालू- हाँ, हमारे कपड़े तो वैसे भी केवल ये डोरियों से अटके हैं बस अन्दर के कपड़े निकालने पड़ेंगे तो वो हम पहले ही निकाल लेते हैं।
शालू और शीतल ने जो मैक्सी पहनी थीं उनमें कंधे पर बस दो डोरी थीं जिनके सहारे पूरी ड्रेस लटक रही थी। जब दोनों मर्द बेडरूम में लुंगी लेने गए तो शालू ने अपनी निगरानी में शीतल के ब्रा और पेंटी निकलवा दिए और खुद के भी निकाल दिए। 12 बजने में 1 ही मिनट बचा था।
जय (ऊंची आवाज़ में)- एक काम करो आप लोग भी यहाँ बेडरूम में ही आ जाओ।
शीतल- ठीक है जी।
शीतल ने नशे में लहराती हुई आवाज़ में जवाब दिया.
दोनों बेडरूम में पहुंचे तो जय और विराज लुंगी लपेट कर आधे नंगे खड़े थे और आखिरी मिनट के सेकंड्स गिन रहे थे।
49 … 50 … 51 … 52 … 53 … 54 … 55 … 56 … 57 … 58 … 59 … हैप्पी न्यू इयर !!!
एक झटके में दोनों लुंगियां ज़मीन पर थीं। अगले ही क्षण शालू की मैक्सी भी फर्श पर गिर गई लेकिन शीतल ने अपनी मैक्सी निकलने के बजाए दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं थीं। आखिर शालू ने ही उसे अपने गले लगाते हुए उसकी मैक्सी नीचे खसका दी। वैसे शायद वो ऐसी हालत में शालू को अपने से चिपकने ना देती लेकिन अभी शर्म के मारे वो उससे चिपक गई और अपना सर उसके कंधे पर झुका कर आँखें मूँद लीं।
विराज जाकर शालू के पीछे चिपक गया और जय शीतल का पीछे। शालू ने जय को आँख मारते हुए चुम्बन का इशारा किया और अपने होंठ आगे कर दिए। जय भी हल्का नशे में था और न्यू इयर पार्टी की मस्ती थी सो अलग। उसने भी आवाज़ किये बिना अपने होंठ शालू के होंठों से टकरा कर हल्का सा चुम्बन ले लिया। तभी शालू ने शीतल धक्का दे कर अपने से अलग किया।
शालू- अब तू अपना पति सम्हाल; मैं अपना सम्हालती हूँ।
इतना कह कर शालू पलटी और घुटनों के बल बैठ कर विराज का लंड चूसने लगी। जय ने शीतल को पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ से उसके स्तन मसलने लगा और दूसरे से उसकी चूत का दाना।
एम्स्टर्डम में तो कोई अनजान था जिसके सामने शीतल ने चुदवाया था और वहां एक जोड़ा स्टेज पर खुले आम चुदाई कर रहा था जिसे देख कर उसे जोश आ गया था; लेकिन यहाँ तो उसके पति का लंगोटिया यार था जिसके सामने वो नंगी खड़ी थी और वो अपनी पत्नी से लंड चुसवाते हुए उसके नंगे बदन को निहार रहा था।
पहली बार अपने बचपन के दोस्त की नंगी बीवी को देखते हुए विराज के लंड को लोहे की रॉड बनने में देर नहीं लगी। उसने शालू को वहीँ बिस्तर पर पटका और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा कर उसे चोदने लगा। शालू के दोनों पैरों को उसने अपने हाथों से पकड़ रखा था और खुद घुटने मोड़ कर बिस्तर पर बैठे बैठे उसे चोद रहा था।
जय और शीतल कुछ देर तक तो उनकी चुदाई देखते रहे फिर जय शालू के बाजू में पीछे दीवार पर तकिया लगा कर अधलेटा सा बैठ गया और शीतल को अपना लंड चूसने के लिए कहा। पहले तो कुछ देर उसने बिस्तर के किनारे बैठ कर जय का लंड चूसा लेकिन फिर सुविधा के हिसाब से बिस्तर पर पैर मोड़ कर बैठी और झुक कर चूसने लगी। ऐसे में उसकी गांड विराज की आँखों के ठीक सामने थी और दोनों जंघाओं के बीच उसकी चिकनी मुनिया भी झाँक रही थी।
विराज कभी शीतल की गांड और चूत को देखता तो कभी उसके झूलते मम्मों को। शालू का ध्यान काफी देर से विराज की नज़रों पर था। उसने भी सोचा क्यों ना वो कोई शरारत करे। उसने अपना सर जय की ओर घुमाया और जैसे ही जय ने उसकी ओर देखा, शालू ने अपने हाथों से अपने स्तनों को सहलाते हुए आँखों से उनकी ओर इशारा किया और फिर अपने होंठों से एक हवाई चुम्बन जय की ओर फेंका।
जय इस मादक आमंत्रण के सम्मोहन में बंध कर जैसे खुद-ब-खुद शालू की ओर झुका और उसके रसीले आमों का रस चूसने लगा। शीतल तो जय के लंड पर झुकी थी इसलिए देख नहीं पाई कि अभी अभी क्या हुआ लेकिन इस हरकत ने विराज का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी आँखों के सामने उसका दोस्त उसकी बीवी के स्तनों को मसलते हुए चूस रहा था। विराज की उत्तेजना और बढ़ गई और उस से रहा नहीं गया। उसने भी शीतल की गांड पर हाथ फेरते हुए एक उंगली उसकी भीगी-भीगी चुनिया-मुनिया के अन्दर सरका दी।
विराज- यार, काश हम भी तुम्हारे नग्न समुद्रतट यानि न्यूड बीच वाला अनुभव ले पाते।
शालू- मुझे तो उस क्लब में जाकर चुदवाने का मन कर रहा है।
जय- क्यों ना हम यहीं वो क्लब बना लें। मान लो यही वो क्लब है और हम न्यू इयर मनाने यहाँ आये हैं।
शालू- एक काम करते हैं जैसे ही 12 बजेंगे, हम सब एक साथ नंगे हो जाएँगे तो फिर किसी को पहले या बाद में नहीं होना पड़ेगा और शर्म भी नहीं आएगी।
विराज- ठीक है फिर ऐसे कपड़े पहन लेते हैं जो एक झटके में निकल जाएं।
शीतल- आप लोग अन्दर जा कर लुंगी पहन लो।
शालू- हाँ, हमारे कपड़े तो वैसे भी केवल ये डोरियों से अटके हैं बस अन्दर के कपड़े निकालने पड़ेंगे तो वो हम पहले ही निकाल लेते हैं।
शालू और शीतल ने जो मैक्सी पहनी थीं उनमें कंधे पर बस दो डोरी थीं जिनके सहारे पूरी ड्रेस लटक रही थी। जब दोनों मर्द बेडरूम में लुंगी लेने गए तो शालू ने अपनी निगरानी में शीतल के ब्रा और पेंटी निकलवा दिए और खुद के भी निकाल दिए। 12 बजने में 1 ही मिनट बचा था।
जय (ऊंची आवाज़ में)- एक काम करो आप लोग भी यहाँ बेडरूम में ही आ जाओ।
शीतल- ठीक है जी।
शीतल ने नशे में लहराती हुई आवाज़ में जवाब दिया.
दोनों बेडरूम में पहुंचे तो जय और विराज लुंगी लपेट कर आधे नंगे खड़े थे और आखिरी मिनट के सेकंड्स गिन रहे थे।
49 … 50 … 51 … 52 … 53 … 54 … 55 … 56 … 57 … 58 … 59 … हैप्पी न्यू इयर !!!
एक झटके में दोनों लुंगियां ज़मीन पर थीं। अगले ही क्षण शालू की मैक्सी भी फर्श पर गिर गई लेकिन शीतल ने अपनी मैक्सी निकलने के बजाए दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं थीं। आखिर शालू ने ही उसे अपने गले लगाते हुए उसकी मैक्सी नीचे खसका दी। वैसे शायद वो ऐसी हालत में शालू को अपने से चिपकने ना देती लेकिन अभी शर्म के मारे वो उससे चिपक गई और अपना सर उसके कंधे पर झुका कर आँखें मूँद लीं।
विराज जाकर शालू के पीछे चिपक गया और जय शीतल का पीछे। शालू ने जय को आँख मारते हुए चुम्बन का इशारा किया और अपने होंठ आगे कर दिए। जय भी हल्का नशे में था और न्यू इयर पार्टी की मस्ती थी सो अलग। उसने भी आवाज़ किये बिना अपने होंठ शालू के होंठों से टकरा कर हल्का सा चुम्बन ले लिया। तभी शालू ने शीतल धक्का दे कर अपने से अलग किया।
शालू- अब तू अपना पति सम्हाल; मैं अपना सम्हालती हूँ।
इतना कह कर शालू पलटी और घुटनों के बल बैठ कर विराज का लंड चूसने लगी। जय ने शीतल को पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ से उसके स्तन मसलने लगा और दूसरे से उसकी चूत का दाना।
एम्स्टर्डम में तो कोई अनजान था जिसके सामने शीतल ने चुदवाया था और वहां एक जोड़ा स्टेज पर खुले आम चुदाई कर रहा था जिसे देख कर उसे जोश आ गया था; लेकिन यहाँ तो उसके पति का लंगोटिया यार था जिसके सामने वो नंगी खड़ी थी और वो अपनी पत्नी से लंड चुसवाते हुए उसके नंगे बदन को निहार रहा था।
पहली बार अपने बचपन के दोस्त की नंगी बीवी को देखते हुए विराज के लंड को लोहे की रॉड बनने में देर नहीं लगी। उसने शालू को वहीँ बिस्तर पर पटका और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा कर उसे चोदने लगा। शालू के दोनों पैरों को उसने अपने हाथों से पकड़ रखा था और खुद घुटने मोड़ कर बिस्तर पर बैठे बैठे उसे चोद रहा था।
जय और शीतल कुछ देर तक तो उनकी चुदाई देखते रहे फिर जय शालू के बाजू में पीछे दीवार पर तकिया लगा कर अधलेटा सा बैठ गया और शीतल को अपना लंड चूसने के लिए कहा। पहले तो कुछ देर उसने बिस्तर के किनारे बैठ कर जय का लंड चूसा लेकिन फिर सुविधा के हिसाब से बिस्तर पर पैर मोड़ कर बैठी और झुक कर चूसने लगी। ऐसे में उसकी गांड विराज की आँखों के ठीक सामने थी और दोनों जंघाओं के बीच उसकी चिकनी मुनिया भी झाँक रही थी।
विराज कभी शीतल की गांड और चूत को देखता तो कभी उसके झूलते मम्मों को। शालू का ध्यान काफी देर से विराज की नज़रों पर था। उसने भी सोचा क्यों ना वो कोई शरारत करे। उसने अपना सर जय की ओर घुमाया और जैसे ही जय ने उसकी ओर देखा, शालू ने अपने हाथों से अपने स्तनों को सहलाते हुए आँखों से उनकी ओर इशारा किया और फिर अपने होंठों से एक हवाई चुम्बन जय की ओर फेंका।
जय इस मादक आमंत्रण के सम्मोहन में बंध कर जैसे खुद-ब-खुद शालू की ओर झुका और उसके रसीले आमों का रस चूसने लगा। शीतल तो जय के लंड पर झुकी थी इसलिए देख नहीं पाई कि अभी अभी क्या हुआ लेकिन इस हरकत ने विराज का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी आँखों के सामने उसका दोस्त उसकी बीवी के स्तनों को मसलते हुए चूस रहा था। विराज की उत्तेजना और बढ़ गई और उस से रहा नहीं गया। उसने भी शीतल की गांड पर हाथ फेरते हुए एक उंगली उसकी भीगी-भीगी चुनिया-मुनिया के अन्दर सरका दी।