शिवा ने बाइक को ज़ोर से दौड़ाया और लक्ष्मी के हाथ बार बार उसके पैंट में उभरे लंड से टकराने लगे। वो समझ गयी कि ये हरकत वो जान बुझ कर ,कर रहा है। उसे थोड़ी परेशानी सी हुई फिर सोची कि इस उम्र में लड़कों का दिमाग़ सेक्स की तरफ़ ज़्यादा ही रहता है। मुझे इसका कोई इलाज ढूँढना पड़ेगा।
तभी झरने के पास का एक जंगल सा आ गया। काफ़ी गाड़ियाँ वहाँ खड़ीं थीं । वह भी अपनी बाइक पार्क किया और फिर दोनों पैदल जंगल के अंदर से होकर झरने की ओर चलने लगे। शिवा यहाँ पहले भी कई बार अपने दोस्तों के साथ आ चुका था। उसे पता था कि यहाँ एक लवर्ज़ पार्क है जहाँ उलटे सीधे काम होते हैं । वह जानबूझकर मॉ को उसी रास्ते से ले गया। लक्ष्मी इससे अनजान शिवा का हाथ पकड़कर चल रही थी। शिवा: मम्मी मैं आपके कमर में हाथ डाल लूँ क्या?
लक्ष्मी: वो क्यों?
शिवा: मम्मी यहाँ रास्ता ख़राब है ना।
लक्ष्मी: इतना भी ख़राब नहीं है।
शिवा चुप रहा तभी दोनों को चुम्ममियों की आवाज़ें आयीं और शिवा मन ही मन मुस्कुराया। लक्ष्मी चौक कर उधर देखी जहाँ से आवाज़ आयी थी। वहाँ पास ही एक पेड़ के पीछे एक जवान जोड़ा चिपका हुआ था और ज़ोरदार किस्स हो रहे थे।
लक्ष्मी ने हैरानी से देखा कि ये सब इस तरह ओपन में कैसे कर रहे हैं??
थोड़ा आगे जाने पर एक और अजीब सा दृश्य दिखा। एक लड़का अपनी पैंट खोला हुआ था और एक लड़की धूटनों के बल सामने बैठी उसका लंड चूस रही थी। हे भगवान वो सोची: कोई लाज शर्म बची है इस दुनिया में या नहीं। अचानक फ़च फ़च की आवाज़ आयी और वह समझ गयी कि आसपास चुदाई भी हो रही है। वो चोर निगाहों से देखी और उफ़्फ़्फ़्फ सामने पेड़ पकड़कर एक लड़की आगे को झुकी थी । उसकी पैंट नीचे ज़मीन पर पड़ी थी उसके टांगों के बीच और एक लड़का पीछे से उसकी ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था। और उसके हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे । उसका हाथ उसके टॉप के अंदर था। अब तो लक्ष्मी की पैंटी गीली होने लगी। उसने चोरी से शिवा को देखा तो वह उसकी ओर देखकर मुस्कुरा रहा था और उसके पैंट पर एक तंबू बना हुआ था जिसे वो दबा कर मस्त हो रहा था। लक्ष्मी के गाल लाल हो चुके थे और सीना ऊपर नीचे हो रहा था जिसे शिवा मस्ती से देख रहा था।
अब शिवा ने हिम्मत की और अपनी माँ के कमर में हाथ डाला और कहा: मम्मी हमारे शहर में जगह की कमी है ना इसलिए ये जोड़े यहाँ मज़ा करने आते हैं ।
लक्ष्मी: तू भी पहले यहाँ किसी लड़की को लाया है क्या?
शिवा: अरे नहीं मम्मी मैं ऐसा लड़का नहीं हूँ। बस कुछ दोस्तों के साथ एक बार आया था। वह माँ की चिकनी कमर सहलाता हुआ बोला: पर मम्मी सब कितना मज़ा कर रहें हैं ना?
लक्ष्मी: अभी तेरे ये सब करने के दिन नहीं हैं । पढ़ाई पर ध्यान दिया कर। उसे शिवा के मर्दाना हाथ का स्पर्श अपनी कमर पर बुरा तो नहीं लग रहा था । उसकी इच्छा हो रही थी कि एक बार किसी तरह से अपनी बुर खुजा लूँ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितनी खुजली सी हो रही थी अंदर वहाँ पर।
इसी तरह से अगर बढ़ते हुए अचानक वो हैरान सी रह गयी ।एक क़रीब ४५ साल की थोड़ी मोटी सी औरत एक १९/२० साल के लड़के से चिपकी हुई थी और दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे। लड़के के हाथ औरत के मोटे चूतरों को दबा रहे थे। औरत के हाथ भी लड़के के पैंट के ऊपर से शायद उसका लंड दबा रही थी। तभी वो लड़का थोड़ा ज़ोर से चिल्लाया; उइइइइइइइ चाची आपने मेरे बॉल्ज़ दबा दिए।
औरत: ओह सॉरी बेटा सॉरी।
लक्ष्मी की तो जैसे जान ही अटक गयी। हे भगवान वो सोची: ये अपने भतीजे के साथ ऐसा कर रही है। वह बहुत परेशान सी होकर जल्दी जल्दी चलने लगी ताकि वहाँ से निकल सके। अचानक उसने महसूस किया कि शिवा का हाथ उसकी कमर से खिसक कर उसके नितम्बों पर आ गया है। और वो उनको सहलाने लगा है। वह सोची कि इस लड़के के मन में क्या चल रहा है??? कहीं वह उसे यानी अपनी सगी माँ को ग़लत दृष्टि से तो नहीं देख रहा है। तभी उसे एक ठोकर सी लगी और शिवा ने उसे अपने से चिपका लिया और उसे गिरने से बचा लिया। पर इस चक्कर में उसका खड़ा लंड उसके बदन से टकरा गया और शिवा की बाहों में झूलती हुए उसे अहसास हुआ कि शिवा का हाथ उसके ब्लाउस ऊपर से उसकी एक चूची पर थे। दोनों उस लमहों की मिठास में मानो खो से गए। तभी लक्ष्मी उससे अलग हुई और बोली: उफ़्फ़्फ कितना बेकार रास्ता है।
थोड़ा और आगे जाने पर एक दो और जोड़े मिले जो प्यार कर रहे थे। पर फिर एक जोड़े ने लक्ष्मी को डिस्टर्ब कर दिया। एक पचास साल का गंजा सा आदमी एक १९/२० साल की लड़की को गोद में लेकर बैठा था और उसकी चूचियाँ दबाकर उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी बुर सहला रहा था। वो भी प्यार से उस आदमी को चूम रही थी। पता नहीं लक्ष्मी को क्यों ऐसा महसूस हुआ कि हरी (उसका पति )और तान्या भी क्या ऐसा कर सकते हैं??? क्या ये भी बाप बेटी हैं ?
तभी लक्ष्मी ने महसूस किया कि अब शिवा का एक हाथ उसके मोटे चूतरों पर आ गया था और वह अब उनको खुलकर दबा रहा था। लक्ष्मी उसकी हिम्मत पर हैरान थी।
तभी झरना आ गया। वहाँ नीचे कई लड़के लड़कियाँ पानी में नहा रहे थे। सब मस्ती कर रहे थे और लड़के साफ़ साफ़ लड़कियों की चूचियाँ दबा रहे थे और उनकी जाँघे सहला रहे थे नहाने के बहाने। लड़कों की हाफ़ पैंट और चड्डियाँ सामने से फूली हुई थी और बता रहीं थी कि सब कितने उत्तेजित हैं ।
लक्ष्मी ने चोर निगाहों से देखा तो पाया कि शिवा का भी अभी भी पूरा खड़ा है। सच में उसका बेटा मस्त जवान हो गया है। आख़िर कितना बड़ा हो गया है उसका लंड भी। साफ़ पता चल रहा था : वो सोची।
शिवा: मम्मी चलो हम भी नहाते हैं ।
लक्ष्मी: ना बाबा मैं नहीं नहाऊँगी। तू जा नहा ले, और लड़कियों से मज़ा कर ले।
शिवा: मम्मी मैं अकेला नहीं जाऊँगा। आपके साथ ही जाऊँगा।
लक्ष्मी: मैं तो कपड़े नहीं लायी हूँ और वैसे भी मुझे नहीं नहाना।
शिवा: तो चलो वहाँ बैठते हैं कुछ देर।
शिवा लक्ष्मी को लेकर एक झाड़ के पीछे ले गया जहाँ शायद और कोई नहीं था। दोनों एक पत्थर पर बैठ गए। शिवा ने लक्ष्मी का हाथ पकड़ा और उसे सहलाने लगा।
लक्ष्मी: एक बात पूँछँ?
शिवा: हाँ मम्मी बोलो ना?
लक्ष्मी: तू मेरा पिछवाड़ा क्यों सहला रहा था अभी? मैं तेरी कोई गर्ल फ़्रेंड हूँ क्या? माँ हूँ तेरी।
शिवा: मम्मी मै आपको अपनी गर्ल फ़्रेंड ही समझता हूँ। आप मेरी प्यारी सी मम्मी कम गर्ल फ़्रेंड हो।
लक्ष्मी उसकी बात सुनकर हंस पड़ी: बदमाश कुछ भी बोलता है।
शिवा: सच मम्मी मै आज आपको बोलना चाहता हूँ कि आइ लव यू । एक बेटे की तरह भी और एक बोय्य फ़्रेंड की तरह भी।
लक्ष्मी हैरानी से उसका मुँह देखती रह गयी। हे भगवान इस लड़के को मै कैसे समझाऊँ?
लक्ष्मी बैठी सोच रही थी कि शिवा उसके बारे में शायद ग़लत फ़हमी का शिकार हो गया है। यह सही है कि वह अपने जेठ से चुदवा चुकी है और हरी भी अपने भाई की बहू को चो द चुका है पर उन सबने ख़ून का रिश्ता नहीं था। पर यहाँ तो शिवा मेरा सगा बेटा है और हरी भी तान्या के साथ कुछ ग़लत करने का कैसे सोच सकता है क्योंकि आख़िर वो भी तो उसकी सगी बेटी है। उसने सिर उठा कर देखा तो शिवा भी उसके ब्लाउस से बाहर निकली हुई गोलाइयों को घूर रहा था क्योंकि उसका साड़ी का पल्लू गिरा हुआ था। उसकी नज़र ना चाहते हुए भी शिवा के पैंट के सामने भाग पर जा गिरी जहाँ एक मस्त तंबू बना हुआ था।
लक्ष्मी ने जल्दी से अपना पल्लू उठाया और अपनी छाती ढक ली और बोली: अब चलें वापस ।
तब शिवा लुढ़कर अपनी माँ के गोद में अपना सिर रख दिया और बोला: उफ़्फ़्फ मम्मी क्या जल्दी है जाने की। इतना अच्छा मौसम है यहाँ ।
लक्ष्मी: अच्छा बाबा पड़ा रह ऐसे ही। वो उसके बालों में हाथ फेरने लगी। अब शिवा ने अपना मुँह उसकी छातियों के ऊपर रखा और बड़े भोलेपन से पूछा: एक बात पूँछुं मम्मी? आप नाराज़ नहीं होना।
लक्ष्मी प्यार से : हाँ पूछ ।
शिवा: मैं जब छोटा था तब आपका दूध पीता था ना?
लक्ष्मी: ये भी कोई पूछने की बात है सभी बच्चे पीते हैं। तान्या ने भी पीया है।
शिवा: तब ये बताओ कि मै अब फिर से क्यों नहीं पी सकता?
लक्ष्मी: ये कैसा प्रश्न है? अब तू बड़ा हो गया है अब तुझे दूध थोड़े ना पिलाऊँगी।
शिवा: मगर मुझे तो पीना है ना। उसने अपना सिर उसके साड़ी के ऊपर से उसकी छातियों पर रगड़ कर कहा।
लक्ष्मी की निगाह फिर से उसके तंबू पर पड़ी और वह बेचेंन होकर उसे उठाती हुई बोली: : ये नहीं हो सकता। अच्छा अब चल उठ यहाँ मेरी गोद से।
शिवा: नहीं मम्मी आपको मुझे दूध पिलाना ही होगा। मै नहीं उठता जब तक आप वादा नहीं करती कि आप मुझे घर जाकर पिलाओगी।
लक्ष्मी झल्लाकर उसे धक्का सा दी और बोली: चल उठ मेरी गोद से निकम्मा कहीं का। कुछ भी बोले जा रहा है।
लक्ष्मी के धक्के से शिवा उसकी गोद से बाहर आया और लुढ़क कर वो पथ्थर की ओर गया और उसका सिर उससे टकराया और वह आऽऽऽऽह करके अपना सिर पकड़ लिया। जैसे ही उसने अपना हाथ उठाया उसके हाथ में लाल ख़ून था। लक्ष्मी हड़बड़ा गयी और जल्दी से उसके पास आकर उसका घाव चेक की और बोली: हे भगवान तुझे तो काफ़ी चोत लग गयी है। वो अपने पर्स से टिश्यू पेपर निकाली और उसका ख़ून साफ़ करने लगी। फिर पानी से उसका घाव साफ़ की और बोली: चल उठ तुझे डॉक्टर के पास जाकर पट्टी करानी होगी।
शिवा की आँखें उसपर झुकी माँ की छातियों पर थीं । वह बेशर्मी से बोला: जब तक आप मुझे दूध पिलाने का वादा नहीं करती मैं डॉक्टर के पास नहीं जाऊँगा।
लक्ष्मी: पागल हो गया है क्या? अच्छा चल उठ घर वापस चलें।
शिवा चुपचाप उठा और दूसरे रास्ते से पार्किंग से अपनी बाइक लेकर मम्मी को लेकर वापस घर की ओर बाइक दौड़ने लगा। इस बार लक्ष्मी उसके पीछे बैठी थी पर उसने उसके पेट पर हाथ नहीं रखा था बल्कि कंधे पर ही रखा था। माँ बेटे में कोई बात नहीं हो रही थी। अचानक लक्ष्मी ने देखा कि ख़ून घाव से फिर से रिसने लगा था। वो बोली: बेटा चल डॉक्टर के पास चल एक बार पट्टी करवा ले।
शिवा बाइक चलाते हुए: मैं नहीं जाऊँगा जब तक आप मेरी बात नहीं मानोगी।
लक्ष्मी: ये कैसा पागलपन है शिवा? वो देखो सामने एक डॉक्टर की डिस्पेन्सरी है , गाड़ी रोको।
शिवा: मम्मी गाड़ी नहीं रुकेगी जब तक आप हाँ नहीं कहोगी।
लक्ष्मी ने घाव की ओर देखा जो लाल हो चुका था। वह घबराने लगी। वह आख़िर हार कर बोली: बहुत नालायक है तू। अच्छा चल मेरी हाँ है अब गाड़ी रोक देख एक और डिस्पेन्सरी आ गयी है सामने।
शिवा: मम्मी बाद में वादे से मुकर तो नहीं जाओगी ना?
लक्ष्मी: नहीं मुकरूँगी। चल रोक अब।
शिवा ने गाड़ी डिस्पेन्सरी के सामने रोकी और उतरकर मम्मी के साथ अंदर गया। वहाँ डॉक्टर ने उसकी पट्टी करी और दवाई दी। लक्ष्मी ने पैसे दिए और दोनों बाहर आए।
शिवा बाइक स्टार्ट करते हुए: मम्मी वादा याद है ना?
लक्ष्मी परेशान सी होकर: चल घर चल वहीं बात करेंगे।
शिवा ने गाड़ी बंद कर दी।
लक्ष्मी: अब क्या हुआ?
शिवा: मैं घर तभी जाऊँगा जब आप हाँ बोलोगी।
लक्ष्मी झल्लाकर: हाँ तो बोल दी थी ना। अब बार बार क्यों वही बात कर रहा है।
शिवा ने बाइक स्टार्ट की और दोनों थोड़ी दूर गए थे तभी एक रेस्तराँ के सामने उसने गाड़ी रोकी और बोला: चलो यहीं खाना खा लेते है। तान्या के लिए पैक भी करवा लेंगे।
लक्ष्मी: मुझे भूक़ नहीं है । बस अब घर चलो।
शिवा ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और उसे बाँह से पकड़कर अंदर रेस्तराँ में के गया और जाके एक टेबल पर बैठा।
शिवा: मम्मी एक बात बता देता हूँ कि दूध तो मैं पीकर ही रहूँगा चाहे आप कितना ही रूठी रहो।
शिवा ने खाना ऑर्डर किया और लक्ष्मी ने चुपचाप खा लिया। बाद में तान्या के लिए खाना पैक कराकर दोनों चुपचाप वहाँ से निकले और घर पहुँचे। तान्या कोई मूवी देख रही थी। तान्या: मम्मी मज़ा आया ?
लक्ष्मी: इसे ही पूछ । देख अपना सिर भी फुड़वा लिया है।
तान्या ने भाई की चोट पर चिंता दिखाई और पूछा कि ये कैसे हुआ?
शिवा ने झूटमूठ कह दिया कि पैर फिसल गया था और चोट लग गयी गिरने से।
ख़ैर थोड़ी देर बातें करने के बस सब सोने चले गए।
शिवा को अब भी हल्का सा दर्द था सो वो जल्दी ही सो गया। तान्या भी झड़ी हुई थी सो नींद के आग़ोश में समा गयी।
नींद बस लक्ष्मी को नहीं आ रही थी। वह आज की घटनाओं के बारे में सोच रही थी। एक बात तो पक्की थी कि शिवा उसे झरना दिखाने नहीं अपनी वासना का इझहार करने गया था। वह उसे उस लवर्ज़ पार्क से भी इसीलिए लेकर गया था ताकि वो उसे उत्तेजित कर सके। और अब ये दूध पीने वाली बात तो साफ़ साफ़ इस बात का सबूत है कि वह उसको माँ की नहीं बल्कि औरत की तरह ट्रीट कर रहा है। और आज दिन भर उसका खड़ा लंड तो पैंट के ऊपर से तना हुआ ही था। लक्ष्मी की बुर में चिटियाँ चलने लगीं और उसे डिल्डो याद आया।
वह उठी और आलमारी खोली और डिल्डो निकाली और अपनी नायटी उठकर पैंटी उतारी और स्विच ओन करके उसकी गंन्न्न्न्न्न्न में खो गयी और मज़े से आऽऽऽहहह करते हुए क़रीब १५ मिनट में झड़ गयी। फिर वो डिल्डो को साफ़ करके सो गयी।
अगले अप्डेट में: क्या शिवा अपनी माँ दूध पी सका?
तान्या के और मज़े ??? हरी मुंबई में क्या कर रहा है?
सुबह सबसे पहले तान्या उठी और फ़्रेश होकर किचन में पहुँची तो देखी कि मम्मी वहाँ नहीं है। वह मम्मी के कमरे में गयी और देखी कि वो गहरी नींद में सो रही है। वह मम्मी के पास आकर बैठी और धीरे से हिलाकर बोली: मम्मी आज उठना नहीं है क्या? सात बज गए हैं ।
लक्ष्मी उठकर बोली: पता नहीं कैसे सोते रह गयी। तू बैठ मैं अभी बाथरूम से आती हूँ।
लक्ष्मी के बाथरूम में घुसते ही तान्या की इच्छा हुई कि एक बार डिल्डो को छू ले। वह आलमारी में हाथ डाली और डिल्डो को वहाँ नहीं पा कर थोड़ा हैरान हुई। उसने और खोजा तो उसे वह दूसरी तरफ़ मिल गया। ओह तो इसका मतलब है कि माँ ने इसको कल यूज़ किया है। पर भय्या के साथ बाहर जाकर ऐसा क्या हो गया कि मम्मी को इस मोटू की ज़रूरत पड़ गयी। या क्या पता मम्मी रोज़ इसको लेती होंगी? नहीं ये सम्भव नहीं है। वो सोची कि पता करना पड़ेगा। फिर वो डिल्डो को थोड़ा देर सहलायी और उसे अपनी जगह पर रख कर किचन में चली गयी और चाय बनाने लगी।
लक्ष्मी किचन में आके तान्या को प्यार की और बोली: वाह आज मेरी बेटी चाय बना रही है। अच्छा तू जाकर भाई को उठा मै चाय डालती हूँ। तान्या भी माँ से चिपक कर बोली: ठीक है मम्मी। आइ लव यू। वो उसके गाल और अचानक से होंठ चूमकर भाग गयी। लक्ष्मी उसके इस व्यवहार से थोड़ा सा हैरान हो गयी।
जब वो भाई के कमरे में पहुँची तो वो एक हाफ़ पैंट और टी शर्ट में सीधा पीठ के बल सो रहा था। उसकी बालों से भरी पुष्ट जाँघें देखकर उसे कुछ होने लगा। खेल में भाग लेने के कारण उसके हाथ की मछलियाँ भी उभरी हुई थीं। अब उसकी आँख उसके हाफ़ पैंट में से तने हुए उसके तंबू पर पड़ी और वी अपनी पैंटी के गीले होने के अहसास से मस्त हो उठी। वह उसके पास आकर चिल्लाई: भय्या उठो मम्मी बुला रही है। शिवा आँखें खोलीं और सामने बहन को गाउन में देखकर बोला: आह बहना आज तुम कैसे आ गयी? मैं तो सोच रहा था कि मम्मी आएँगे उठाने। फिर उसकी निगाह अपने उभार पर पड़ी और वो बेशर्मी से मुस्कुराता हुआ उभार की ओर इशारा करके बोला: तान्या मेरी उम्र में ये स्वाभाविक है । और हँसता हुआ बाथरूम में घुस गया।
तान्या उसके व्यवहार से हैरान रह गयी। पर वो जानती थी कि शिवा उसे और मम्मी को भी गंदी निगाह से से देखता है। वह आकर डाइनिंग रूम में बैठकर चाय पीने लगी। थोड़ी देर में शिवा आया और सीधे किचन में घुस गया। वहाँ जाकर लक्ष्मी को पीछे से पकड़ा और उसका गाउन के ऊपर से पेट सहलाते हुए अपना आधा खड़ा लंड उसके चूतरों के बीच धँसा दिया। लक्ष्मी उफ़्फ़ करके बोली: छोड़ मुझे । चल अपनी चाय ले और बैठ तान्या के साथ।
शिवा उसके कान में फुसफुसाता हुआ बोला: मम्मी कल का वादा याद है ना? तान्या के जाने के बाद मैं दूध पियूँगा। उसके हाथ अब उसकी चूचियों के निचले हिस्से को मानो छू रहे थे। अब लक्ष्मी ने हल्के से उसे डाँटा और कहा: छोड़ मुझे नालायक । लगता है तेरे पापा से शिकायत करनी होगी तेरी।
शिवा: मम्मी चाहो जो करो आज मैं दूध तो पीकर ही रहूँगा। यह कह कर वो अपनी चाय लेकर बाहर तान्या के पास आकर बैठ गया।
शिवा चाहता था कि तान्या एक दो घंटे के लिए कहीं बाहर चली जाए ये सोचकर वह बोला: फिर तान्या आज क्या करोगी?
तान्या मुँह बिचका कर: कुछ सोचा नहीं अभी।
शिवा: अरे तेरी किसी फ़्रेंड का यहाँ घूम आ । और मुझे भी ले जा मैं भी उसे लाइन मार लूँगा।
तान्या: हो सकता है जाऊँ पर आपको नहीं ले जाऊँगी।
शिवा ख़ुश होकर: चलो कोई बात नहीं मुझे ना ले जा पर तू तो घूम आ ।
तान्या के कान खड़े हो गए। ये भय्या मुझे बाहर भेजने के लिए इतना उतावला क्यों हो रहा है? ज़रूर कोई चक्कर है। मुझे पता करना पड़ेगा। ऐसा करती हूँ कि इसको बोल देती हूँ कि बाहर जा रही हूँ पर बाद में वापस आकर देखूँगी कि क्या चक्कर चल रहा है इसके मन में।
वो बोली: सही कहा भय्या, मैं एक दो घंटे के लिए घूम ही आती हूँ। चलो अब नहाती हूँ। वह उठकर अपने कमरे में आयी और सोचने लगी कि एक बार बाहर जाकर वापस कैसे आऊँगी ? उसे याद आया कि मम्मी के पास एक्स्ट्रा चाबी है जो पापा यूज़ करते हैं जब यहाँ होते हैं। वो सोची कि जब मम्मी बाथरूम में। नहाएगी तब वह उस चाबी को ले आएगी। अब वह नहाने घुस गयी।
उधर शिवा वापस जाकर किचन में लक्ष्मी को पीछे से पकड़ा और उसके गाल चूमा और बोला: मम्मी तान्या बाहर जाएगी एक दो घंटे के लिए बस उस समय आप मुझे दूध पिला देना। यह कहते हुए उसने लक्ष्मी की दोनों चूचियों पर अपने हाथ रखे और हल्के से दबाया। उधर अब उसका पूरा खड़ा लंड लक्ष्मी की गाँड़ में घुसने की कोशिश कर रहा था गाउन के ऊपर से ही। लक्ष्मी के बदन में एक ज़बरदस्त गुदगुदी हुई और वह मज़े से आँखें बंद कर ली। शिवा का हौसला बढ़ गया और वह अब और ज़ोर ज़ोर से चूचियाँ दबाने और अपनी कमर को हिलाने और उसकी गाँड़ में लंड रगड़ने लगा।
अचानक लक्ष्मी को होश आया और वह उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए बोली: छोड़ मुझे कमीने। मैं तेरी माँ हूँ कोई गर्ल फ़्रेंड नहीं हूँ। आऽऽऽऽह बेटा छोड़ दे ना प्लीज़। शिवा। ने उसे छोड़ दिया और बोला: मम्मी अभी तो छोड़ रहा हूँ पर तान्या के जाने के। बाद दूध तो पियूँगा ही।
लक्ष्मी किचन से बाहर आयी और सीधे अपने कमरे में जाकर लेट गयी और सोचने लगी कि आख़िर इस समाया का हाल क्या है? ये लड़का तो पागल हुआ जा रहा है। अचानक उसे लगा कि उसकी पैंटी गीली हो चुकी है। उसे बड़ी शर्म आयी अपने आप पर । हे भगवान , क्या सच में मुझे इतना मज़ा आया अपने बेटे के साथ कि मेरी बुर पानी छोड़ रही है। उसका हाथ अपने आप अपनी बुर पर गया जहाँ खुजली सी हो रही थी। वह उसे खुजा बैठी।
तभी तान्या किचन में गयी वह मम्मी से अपने बाहर जाने का बताना चाहती थी। वो जानना चाहती थी कि इसमें क्या मॉ का भी हाथ है। क्या वह भी चाहती है कि तान्या बाहर जाए?? पर लक्ष्मी को वहाँ ना पाकर वो उसके बेडरूम में पहुँची और खिड़की से अंदर झाँकी। उफ़्फ़्फ़्फ अंदर मम्मी बिस्तर पर लेटीं गाउन के ऊपर से बुर खुजा रहीं थीं। उफ़्फ़्फ़्फ मम्मी में इस उम्र में भी इतनी गरमी है।
उधर शिवा अपने बाथरूम में नंगा नहाते हुए अपने खड़े लंड से बात कर रहा था: भाई थोड़ा सबर कर आज हो सकता है मम्मी चुदवा ही ले।
वह आज बहुत उत्तेजित था। वो कई लड़कियाँ चोद चुका था पर आज मम्मी की चुदाई का सोचकर उसका लंड शांत ही नहीं हो रहा था।
उधर मुंबई में हरी व्यास भी इस समय एक २० साल की लड़की के साथ होटेल के कमरे में नंगा था। वो लड़की सो रही थी। रात को उसने उसे दो राउंड चोदा था। लड़की स्लिम और सेक्सी थी। मस्त चूचियाँ थीं जिनको वो अब दबाने और चूसने लगा। लड़की की नींद खुली और वो बोली: आऽऽह पपाऽऽऽऽऽ सुबह सुबह शुरू हो गए।
हरी: बेटी तुम माल ही ऐसी हो। वह उसकी बुर सहलाने लगा। लड़की : पापा क्या अभी फिर से चोदोगे अपनी बेटी को?
हरी: हाऽऽऽऽऽऽऽऽय हाऽऽऽऽऽऽऽऽंनन तान्या बेटी अब और चोदूँगा।
यह सब रात से हो रहा था क्योंकि हरी इस लड़की को एक्स्ट्रा पैसा दे रहा था कि वह उसकी बेटी का रोल प्ले करेगी और तान्या बनकर चुदेंगीं। अब वह उस पर आ गया और चोदने लगा। हरी: आऽऽऽऽह तान्याआऽऽऽऽऽ बेटीइइइइइइइ क्या मस्त टाइट चूत है तेरी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़।
लड़की भी चिल्ला रही थी: आऽऽऽऽऽऽह पाऽऽऽऽऽऽपा फ़ाऽऽऽऽऽऽड़ दो अपनी बेटी की चूत ।
इस तरह दोनों बाप बेटी का खेल खेलते हुए झड़ गए।
जब लड़की की साँस सामान्य हुई तो वह बोली: क्या आप सच में अपनी बेटी तान्या को चोदना चाहते हैं या ये सिर्फ़ फंटसी है?
हरि: मेरे चाहने से भला क्या होगा? तान्या भी तो राज़ी होनी चाहिए।
लड़की: अरे इसमें उसकी रज़ामंदी को लेकर आप क्यों परेशान हो? बस एक अच्छी सी कर ख़रीद दो उसको वो वैसे ही आपकी गोद में आकर बैठ जाएगी।
हरी: अरे उससे बड़ा एक लड़का भी तो है ना। उसे नहीं दूँगा और लड़की को कार ले दूँगा तो घाट में एक महाभारत छिड़ जाएगी।
लड़की: अरे लड़के के पास बाइक तो होगी ना?
हरी: हाँ है।
लड़की: बस लड़की की सेफ़्टी की बात करके बेटे को समझा लेना और बेटी से कार की क़ीमत वसूल कर लेना। वह यह कहते हुए हरी का नरम लंड सहला रही थी। उसकी यह बात सुनकर उसका लंड फिर से ठुमकने लगा। हरी को और उसके लंड को लड़की की बात में काफ़ी दम नज़र आया। वो बोला: सही कहा तुमने। चलो अब इसे चूसो। वो लड़की हरी का लंड चूसने लगी। हरी उसके मुँह में झड़ा तो सुस्ताकर बोला: चलो अब तय्यार होता हूँ। आज घर वापस जाना है। चलो तुम भी निकलो अब। वो उसे पैसे देते हुए बोला। अब हरी भी तय्यार होने लगा।
तान्या ने नहाने के बाद रम्या को फ़ोन किया: क्या हाल है?
रम्या: सब बढ़िया । आज तेरे पापा वापस आ रहे हैं । सीधा एक होटेल में आएँगे और मुझे उनके पास जाना है अभी दो घंटे में।
तान्या: ओह हमको तो बोले हैं कि शाम की फ़्लाइट से आएँगे।
रम्या: यार पूरी दोपहर मुझे चोदेंगे और फिर शाम को तुम्हारे पास पहुँचेंगे। बहुत चुदक्कड है तुम्हारे पापा।
तान्या : हे भगवान।
रम्या: अच्छा ये बता कि तू अब तय्यार है उनके मस्त लंड का मज़ा लेने को? वह पूछेंगे तेरे बारे में। क्या बोलूँ?
तान्या: छी क्या बकती है। वो मेरे पापा हैं ।
रम्या: अरे वो तो तुझे चोदने को पागल हो रहे हैं ।क्यों मेरा नुक़सान करा रही है, मुझे वो पैसा देंगे अगर तू उनसे चुद गयी तो।
तान्या को अपनी बुर गीली होती लगी। वह सामने से बोली: चल बस कर । मैं रखती हूँ।
फ़ोन काटकर तान्या सोचने लगी कि कैसा परिवार है हमारा? पापा बेटी को और बेटा माँ और बहन को ग़लत नज़र से देख रहे हैं । तभी उसे याद आया कि उसे घर की चाबी लेनी है। वो मम्मी के कमरे में गयी तो वहाँ कोई नहीं था। वो बाथरूम के पास गयी तो अंदर से शॉवर की आवाज़ आ रही थी। वह चुपचाप आलमारी खोली और डूप्लिकेट चाबी निकाली और अपने जेब में डाल ली। वहीं उसे याद आया कि डिल्डो भी पड़ा है। वो चेक करी तो उसे डिल्डो अपनी जगह में नहीं मिला। थोड़ा खोजने पर वह उसे आलमरी के दूसरे खाने में मिला। वो समझ गयी कि कल रात भी मम्मी ने इसका भरपूर उपयोग किया है। डिल्डो को हाथ में लेकर वह उसे सहलायी और उसकी बुर और गीली हो गयी। फिर बाथरूम में हलचल हुई तो वह जल्दी से आलमारी बंद करके बाहर आ गयी।
उधर शिवा मस्ती से नहाया और तय्यार होकर मम्मी के कमरे में आया और देखा कि लक्ष्मी ने एक सलवार क़मीज़ डाली हुई थी जिसमें से उसके तने हुए बड़े बड़े स्तन मस्त मादक लग रहे थे। उसका लंड लम्बा होने लगा। वो बोला: उफ़्फ़्फ़्फ मम्मी आप कितनी सेक्सी लग रही हो।
लक्ष्मी: कोई अपनी मम्मी को ऐसा बोलता है? बहुत बदतमीज़ हो गया है तू। तेरे पापा शाम को आएँगे उनको बोलती हूँ।
शिवा: मम्मी जो बोलना हो बोल देना बस अपना वादा याद रखना और तान्या के जाते ही उसे पूरा करना।
लक्ष्मी झल्लाकर: चल बाहर जा मेरे कमरे से। मुझे तेरी शक्ल भी नहीं देखनी है।
शिवा हँसता हुआ बाहर निकल गया और तान्या को खोजने लगा। तभी तान्या कमरे से बाहर आई और वो उसे देखता ही रह गया। जींस और टॉप में मस्त माल लग रही थी। वह अपने पर क़ाबू करके बोला: फिर क्या प्रोग्राम बना ?
तान्या: बस रम्या के साथ एक माल में जा रही हूँ उसे कुछ शॉपिंग करनी है।
शिवा: कब तक वापस आओगी?
तान्या: दो घंटे तो लग ही जाएँगे।
शिवा मन ही मन में ख़ुश हुआ और बोला: चलो जाओ ऐश करो। मैं भी एक दोस्त के घर जाऊँगा थोड़ी देर में।
थोड़ी देर बाद तान्या बाहर निकलते हुए बोली: मम्मी मैं दो घंटे में आती हूँ ।
शिवा उस समय हॉल में था और लक्ष्मी अपने कमरे में।
तान्या बाहर निकल कर पास की एक पब्लिक लाइब्रेरी में चली गयी और सोची कि आधा घंटा यहाँ बिताकर वापस घर जाऊँगी।
शिवा उसके जाते ही उठा और लक्ष्मी के कमरे में घुस गया। लक्ष्मी उस समय बिस्तर पर लेती टी वी देख रही थी। वो अधलेटि लक्ष्मी के पेट पर अपना सिर रखकर लेट गया। लक्ष्मी ने उठने की कोशिश की पर वह उसे उठने नहीं दिया और बोला: मम्मी लेटी रहो ना आराम से ।
लक्ष्मी चुपचाप लेट गयी। अब शिवा थोड़ी देर बाद अपना सिर लक्ष्मी की ओर घुमाया और बोला: मम्मी आप बहुत सुंदर हो। पता नहीं पापा आपका कितना ध्यान रखते हैं ?
लक्ष्मी: वो मेरा पूरा ध्यान रखते है। चल अब उठ मेरे ऊपर से ।
शिवा: मम्मी मैं तो दूध पीने के लिए आया हूँ। तान्या भी बाहर गयी है और पापा भी शाम को वापस आएँगे। अच्छा मौक़ा है अपने बेटे को इच्छा पूरी कर दो ना।
लक्ष्मी : हट ऊपर से नालायक़।
शिवा ने अब अपना एक हाथ मम्मी की चूची पर रखा और उसके ऊपर आ गया। लक्ष्मी की आऽऽऽह निकल गयी।
तभी तान्या घर ke अंदर आइ और हाल में किसी को ना पाकर मम्मी के बेडरूम की ओर चल पड़ी।
तान्या ने देखा कि अब शिवा मम्मी के ऊपर आकर उनकी एक चुचि सहला रहा था और आगे होकर उनके गाल चूम रहा था। फिर वह उनके होंठ चूमने लगा। लक्ष्मी की आँखें मज़े से बंद हो गयीं। अब शिवा की हिम्मत बढ़ी और वह उनकी दूसरी चुचि भी सहलाने लगा। लक्ष्मी अपने बेटे की मस्त हरकतों से पगला सी गयी थी। अचानक उसकी आँख खुली और उसे अहसास हुआ कि ये सब ग़लत है। वह उसे धक्का देने लगी और बोली: छोड़ मुझे। ये सब क्या कर रहा है?
शिवा: मम्मी मुझे दूध पीना है ना। इसलिए आपको गरम कर रहा हूँ। चलो ये कुर्ता निकालो। ये कहकर वो ऊपर से हटकर उसका कुर्ता ऊपर उठाने लगा। लक्ष्मी को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इस लड़के को हैंडल करे। फिर सच तो ये है कि उसका ख़ुद ही मन कर रहा था कि ये सब चलता रहे। अब शिवा उसका कुर्ता उठाकर उसके पेट को नंगा कर चुका था और अब वो उसके पेट को चूमने लगा था।फिर उसने मम्मी की नाभि को चूमना शुरू किया और जीभ से कुरेदने लगा। लक्ष्मी की उफ़्फ़्फ़्फ निकल गयी। अब वह ख़ुद भी गरम हो चुकी थी। उसका विरोध कम होते जा रहा था। शिवा ने अब कुर्ता और ऊपर किया तो लक्ष्मी ने थोड़ा ऊपर होकर उसकी मदद ही कर दी। अब कुर्ता गर्दन के पास था और नीचे मम्मी की गोरे बदन पर काली ब्रा में आधी छुपी बड़ी बड़ी चूचियाँ मस्त दिख रही थीं। वह बोला: उफ़्फ़्फ़्फ मम्मी आपके दूध कितने बड़े हैं? अब वह ब्रा के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। लक्ष्मी की वासना अब आग की तरह फैल रही थी और उसकी बुर में ज़बरदस्त खुजला मच रही थी।
तान्या आँखे फैलाकर ये सब देख रही थी। अब शिवा बोला: मम्मी ब्रा खोलना है थोड़ा पलटो ना।
लक्ष्मी ने सिर ना में हिला दिया। शिवा कहाँ मानने वाला था वह उठा और मम्मी को पलट दिया। अब उसकी ब्रा के स्ट्रैप को खोल और फिर मम्मी की चिकनी गोरी पीठ को चूमने लगा। अब लक्ष्मी ने शायद समर्पण कर दिया था। वह चुपचाप मज़ा ले रही थी। अब शिवा ने मम्मी को फिर से पलटा और अब वह ब्रा के ऊपर से नंगी चूचियों का चूम्मा लेने लगा। फिर वह मम्मी के होंठ चूसते हुए ब्रा के कप उठाया और उसकी आँख के सामने मम्मी की ४० साइज़ की बड़ी बड़ी चूचियाँ थीं । उफ़्फ़्फ़्फ कितनी गोरी भारी और काले लम्बे निपल से सजी हुई मस्त मादक दिख रही थी।
अब शिवा नंगी चूचियाँ दबाने लगा। और निपल्ज़ को भी उमेठने लगा। लक्ष्मी उईईईई कह कर चिल्ला उठी।
शिवा ने मम्मी के होंठ चूसकर कहा: मम्मी मज़ा आ रहा है ना?
लक्ष्मी ने मुँह दूसरी ओर कर लिया और कोई जवाब नहीं दिया।
शिवा चूचियाँ मसलते हुए बोला: मम्मी अब दूध पी लूँ?
लक्ष्मी: आऽऽऽऽह जैसे मैं मना करूँगी तो नहीं पिएगा? आऽऽऽऽऽहह। धीरे से दबा ना ।
शिवा: मम्मी जब तक आप नहीं कहोगी बेटा पी ले। मैं नहीं पियूँगा।
लक्ष्मी: आऽऽऽहह। बहुत कमीना है तू। उईईईईई। उसकी बुर में बहुत खुजली हो रही थी। अच्छे बुरे की समझ कहाँ।बची थी उसमें । वो बोली: आऽऽऽऽऽह पी ले बेटा पी ले। अपनी मॉ का दूध पी ले।
शिवा ख़ुश हो गया और अपना सिर एक चुचि पर रखा और मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चुचि दबाने लगा। लक्ष्मी मज़े से भर गयी थी और उसका सिर अपने चुचि पर दबाकर चिल्लाई: आऽऽऽऽऽह बेटा और चूस उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ । मर गयी रे । आऽऽहह।
शिवा अब बदल बदल कर चुचि चूस और दवा रहा था। लक्ष्मी की बुर पनिया कर उसे मस्त कर रही थी।वो सोची कि उफ़्फ़्फ़्फ कितना मस्त चूसता है मेरे बेटा। आऽऽऽहह ।
शिवा ने क़रीब १५ मिनट चूचियाँ चूसीं और फिर बोला: मम्मी इनमे दूध क्यों नहीं आ रहा?
लक्ष्मी हंसकर: चल बदमाश। मुझे सब पता है कि तू बड़ा अनजान बन रहा है। अब लक्ष्मी को जैसे होश आया । वो बोली: चल अब हट तेरा दूध पीना हो गया ना। अब छोड़ मुझे।
शिवा ने बेशर्मी से अपनी मॉ की सलवार के ऊपर से बुर के हिस्से को अपने हाथ में ले लिया और दबाने लगा। अब लक्ष्मी की आऽऽह निकल गयी। वो चिल्लाई: ओह्ह्ह छोड़ उसे । हाथ हटा। ये पाप है। भला माँ बेटा ये सब करते हैं क्या?
शिवा ने एक गहरी नज़र से माँ को देखा और बोला: सच में आप नहीं चाहती कि मैं इसे छू लूँ? वो उसकी बुर को दबाते हुए बोला।
लक्ष्मी: आऽऽऽऽह हाँ यह नहीं। अब चल हट जा और मेरे कमरे से बाहर जा।
अब शिवा ने जो किया उसके लिए वह बिलकुल तय्यार नहीं थी। वह एकदम से अपने लोअर को चड्डी के साथ नीचे किया और उसका मस्त मोटा लंड लक्ष्मी और बाहर खड़ी तान्या के सामने लहरा उठा। लंड उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था। लक्ष्मी तो हैरान रह गयी। आजतक जितने लंड उसने लिए थे ये वाला सबसे सुंदर था। गोरा लम्बा मोटा और गुलाबी सुपाडा । सुपाड़े के ऊपर एक बूँद प्रीकम भी थी। लंड की मर्दानी ख़ुशबू उसकी नथुनों में घुसी जब वह अपना लंड आगे लाकर अपनी माँ के मुँह के पास लहराने लगा। लक्ष्मी और तान्या की आँखे उस पर से मानो हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं। दोनों की बुरों में चिटियाँ सी चलने लगी।
अचानक लक्ष्मी को झटका लगा और वो भर्राए स्वर में बोली: ये क्या कर रहा है बेटा? मैं तेरी माँ हूँ। चल निकल मेरे कमरे से ।
शिवा कुटिल हँसी हँसकर बोला: मम्मी आज आप मुझे जाने को कह रही हो पर जल्दी ही आप मेरे इस हथियार को अपने अंदर लेकर मस्ती से बोलोगी: बेटा तू कितना मज़ा देता है। यह कहकर उसने अपना लंड अंदर किया और बाहर निकल गया। तान्या इसे आते देखकर एक ओर होकर छुप गयी।
अब शिवा तो अपने कमरे में चला गया और जाके मूठ्ठ मारने लगा मम्मी मम्मी आऽऽऽह करके चिल्लाते हुए। तान्या जब उसके कमरे के सामने पहुँची तो उसे अजीब अजीब सी आवाज़ आ रही थी। वह पर्दा हटाकर खिड़की से देखी तो मस्त हो गयी। शिवा अपना लंड हिला हिलाकर मम्मी मम्मी कहकर चिल्ला रहा था। अचानक उसके लंड से सफ़ेद रस का मानो झरना बहने लगा। फ़व्वारे की तरह उसका वीर्य झटके मार मार कर निकल रहा था। थोड़ी देर बाद वह शांत होकर बिस्तर पर गिर गया और वैसे ही सो गया। उसका विशाल लंड सोए हुए सांप की तरह उसकी एक जाँघ पर पड़ा सुस्ता रहा था।
अब तान्या अपनी गीली बुर लेकर फिर से मम्मी के कमरे की ओर गयी तो वहाँ भी अजीब सी आवाज़ें आ रहीं थीं । वो चुपचाप खिड़की का पर्दा हटा कर झाँकी तो देखी कि मम्मी भी मोटा डिल्डो लेकर अपनी बुर में अंदर बाहर कर रही थी। और अपने उन निपल्ज़ को मसल रहीं थीं जिनको अभी शिवा चूस कर गया था। फिर वह अपनी गाँड़ उछाल कर आऽऽऽऽऽऽह शिवाआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी। फिर उस गीले डिल्डो को बग़ल में रखकर वो भी शायद सो गयी।
अब तान्या भी अपने कमरे में आयी और अपनी जींस और पैंटी नीचे करके दो उँगलियों से अपनी बुर को सहलाते हुए अपनी क्लिट सहलाकर आऽऽऽऽह कहकर झड़ने लगी । उसके सामने बार बार भाई का लंड आ रहा था जब वो झड़ रही थी।
उधर हरी इस समय रम्या को लेकर चुदाई में लगा हुआ था। होटेल के कमरे में रम्या की सिसकियाँ और चुदाई की फ़च फ़च की आवाज़ भरी हुई थी। चोदते हुए वो बोला: आऽऽऽह तुम तान्या से बात की क्या?
रम्या: आऽऽऽह कैसी बात?
हरी: साली रँडी चुदावने की बात और क्या बात? वो उसके निपल को बेरहमी से काटा और बोला:।
रम्या: आऽऽऽऽह हाँ बोली हूँ उसको। और आपके लंड की फ़ोटो भी दिखाई हूँ। शायद वो इंट्रेस्टेड हो रही है।
हरी: आऽऽऽह्ह्ह कुतिया क्या टाइट चूत है तेरी आऽऽऽऽह अरे मादरचोद एक बार तान्या को चुदवा से साली तुझे ५००० दूँगा। ऐसा कौन बाप होगा जो कि अपनी ही बेटी को चोदने के लिए बेटी की सहेली को दलाली देगा। रँडी की बच्ची दिला तान्या की बुर मुझे। आऽऽऽऽऽऽहह साली मैं गया। यह कहकर वो झड़ने लगा। रम्या ने अपनी पैंटी से उसका लंड पोंछा और अपनी चूत में गिरा वीर्य भी पोंछा।
थोड़ी देर सुस्ताने के बाद वो पास पड़ी रम्या की चुचि दबाकर बोला: बता ना कहाँ तक बात पहुँची।
रम्या मुस्कुरा कर: बात आगे बढ़ी है। मैंने उसे बताया है कि आप मुझे अभी चोदोगे और बाद में घर जाओगे यह कह कर कि आप शाम की फ़्लाइट से आए हो । फिर वो आप ऐसा करो मेरी पैंटी अपने सूट्केस में छिपा लो। । इसमें आपका और मेरा रस लगा है। मैं उसे बोलूँगी कि अगर विश्वास ना हो कि मैं आपसे चुदीं हूँ तो अपने पापा का सूट केस चेक कर ले । जब वो मेरी पैंटी आपके सूटकेस में देखेगी तो उसे मेरी बात पर विश्वास हो जाएगा। और फिर मेरी बाक़ी कि बातें भी उसे सच लगेगी कि आप उसे चोदना चाहते हो।
हरी उत्तेजित होकर उसे चूमा और बोला: वाह क्या आइडिया है। आऽऽह देखो तान्या के नाम से मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा। फिर रम्या ने उसका लंड चूसना शुरू किया जिसका अंत एक ज़ोरदार चुदाई में हुआ ।अब फिर से उसने पानी पैंटी से पूरा रस साफ़ किया और एक पेपर में उसे लपेट कर हरी के सूटकेस में ऊपर के खाने में ज़िपर खोल कर रखा और ज़िपर बंद किया।
बाद में वो बोली: मैं तान्या को बताऊँगी कि पैंटी कहाँ रखी है। मज़ा आएगा जब वो इसे सूँघेगी। अपने पापा का रस उसे ज़रूर पसंद आएगा। दोनों हँसने लगे।
हरी: अभी फ़ोन करो ना मेरे सामने।
रम्या ने स्पीकर मोड में रखकर तान्या को कॉल लगाया।
तान्या: हेलो।
रम्या: हाँ बेबी क्या हाल है? पापा घर पहुँचे? वो हरी का लंड सहलाते हुए बोली।
तान्या: वो तो दो घंटे के बाद आएँगे।
रम्या: अरे वो दो घंटे से मेरे साथ होटेल में है। और मस्त चोदा है मुझे। अभी अभी निकले हैं । चुदाई करते हुए पूछ रहे थे कि मैंने तुझे पटाया या नहीं।
तान्या: मैं नहीं मानती तेरी बात। कहानी बनाती हो तुम।
रम्या: अच्छा एक काम कर। तेरे पापा के सूट्केस में उन्होंने मेरी पिंक कलर की पैंटी रखी है ऊपर के खाने में। वो बोल रहे थे कि उसे सूँघेंगे। तू देख लेना। तब तो विश्वास हो जाएगा ना। सच में तान्या तेरे पापा बहुत प्यार करते हैं तुमको। एक बार चुदवा ले ना उनसे।
तान्या ने फ़ोन काटा। पर वो सोचने लगी। क्या सच में ऐसा हो सकता है? क्या पापा घर ना आके होटेल में रम्या की चुदाई कर रहे है। और ये मेरे बारे में क्या क्या बोलती रहती है पापा को लेकर। फिर उसे पापा का लंड वाली फ़ोटो याद आयी। वो निश्चय करी कि पापा का सूट्केस तो वह चेक करेगी ही।
उधर हरी तान्या से बहुत ख़ुश हुआ और बोला: क्या दिमाग़ पाया है तुमने। मुझे लगता है कि वो मेरा सूट्केस चेक करेगी ही। मैं ऐसा करूँगा कि सूट्केस को ऐसी जगह रखूँगा जहाँ वो आसानी से उसे खोलकर चेक करे।
बाद में हरी अपना समान लेकर घर को निकल गया और रम्या भी अपने घर चुदाई की फ़ीस लेकर चली गयी।
जैसे ही हरी घर पहुँचा लक्ष्मी उससे लिपट गयी। दोनों बच्चे अपने अपने कमरे में सो रहे थे। शाम के ६ बजे थे। हरी ने लक्ष्मी को अपने सीने से भींच कर प्यार किया और उसके बड़े बड़े नितम्बों को दबाकर मस्ती से बोला: कैसी हो मेरी जान। बहुत मस्त गाँड़ है तुम्हारी। दबाने में मज़ा आता है।
लक्ष्मी: बस आपको तो गाँड़ दबाने की पड़ी है। यहाँ मैं अकेले कितनी बोर होती हूँ उससे आपको क्या।
हरी उसके होंठ चूमा और उसकी चूची दबाकर बोला: अरे मेरी जान मेरा तो भी इन चूचियों के बिना क्या हाल होता है तुम क्या जानो। अब वो एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसके मस्त चूतर दबा रहा था और बोला: जान आज रात को मस्ती से चुदाई करेंगे। वह अब सलवार के ऊपर से उसकी बुर दबाते हुए बोला।
लक्ष्मी तो ख़ुद ही शिवा की हरकतों से गरम हो रखी थी सो बोली: क्यों नहीं मेरे राजा। आपकी चीज़ है आप ले लेना।
तभी कुछ आवाज़ हुई और तान्या बाहर आयी और दोनों अलग हो गए।तान्या आकर पापा कहकर उससे लिपट गयी। हरी मस्त होकर उसे अपने से चिपका लिया और उसके जवान बदन को महसूस करने लगा। उसकी पीठ पर हाथ फेरकर उसके गाल चूमा और बोला: कैसी है हमारी बिटिया रानी? सब ठीक?
तान्या: पापा आप मेरे लिए मुंबई से क्या लाए?
हरी: अभी तो कुछ नहीं ला पाया। पर तुमको एक स्पेशल गिफ़्ट देने का सोच रहा हूँ। बाद में बताऊँगा।
तान्या ने पापा के सूट्केस को अजीब नज़र से देखा। अब हरी भी उसे सूट्केस देखने का मौक़ा देने का सोचा। हरी फिर से बोला: बेटी मेरा सूट्केस मेरे कमरे में रख दो और हाँ उसमें से मेरी चप्पल निकाल कर दे देना। वो उसे इस तरह से एक मौक़ा देना चाहता था ताकि वो सूट्केस में रम्या की पैंटी देख ले।
तान्या सूट्केस लेकर पापा के कमरे में गयी और सूट्केस को टेबल पर रखकर खोली । जैसा कि रम्या ने कहा था वो ऊपर का खाने का जीप खोली और वहाँ उसे पेपर में लिपटा एक कपड़ा सा मिला। वह कांपते हाथो से पेपर को खोली तो अंदर पिंक कलर की पैंटी निकली । वह समझ गयी कि यह रम्या की ही है। इसका मतलब है कि वह बाक़ी बातें भी पापा के बारे में बतायी थी वो भी सच है। और यह भी सच है कि उसके पापा उसे चोदना चाहते हैं । उसका हाथ अपनी चूत पर चला गाय और वह उसे खुजा बैठी। उधर लक्ष्मी और हरी सोफ़े पर बैठे थे और हरी लक्ष्मी की जाँघ सहलाकर बात कर रहा था पर उसका ध्यान इस बात पर था कि कब तान्या चप्पल लेकर आएगी और उसके भाव कैसे होंगे? तभी शिवा बाहर आया और आकर पापा के पास बैठा और हरी उसे अपने से सटा कर बोला: क्या हाल है मेरे शेर का?
शिवा: सब बढ़िया पापा। शिवा ने मम्मी को गहरी नज़रों से देखा और मुस्कुराया। लक्ष्मी ने मुँह फेर लिया और खड़ी होकर अपने कमरे की ओर गयी ये सोचते हुए कि तान्या को इतनी देर क्यों लग रही है।
जब वह कमरे में घुसी तो तान्या को आहट हुई और वह जल्दी से जीप बंद करी पैंटी को अंदर रखकर। फिर चप्पल लेकर बोली: मम्मी चप्पल नहीं मिल रही थी। अभी मिली है। और वह बाहर आयी।
उसके जाने के बाद लक्ष्मी ने उस ज़िपर को खोला और उसके जाने के बाद उस खाने में हाथ डाला और पेपर में लिपटी पैंटी को निकाला और हैरान रह गयी। उसने उस चिपचिपी सी पैंटी को सूँघा और समझ गयी कि इसके पति का ही रस है जो किसी लड़की के रस से मिला हुआ। वो सन्न रह गयी। यह सच है कि वो एक बहुत कामुक व्यक्ति है। उसने अपनी भाई की बहू को चोदा है और लक्ष्मी को भी अपने भाई से चुदवाया है पर वह घर की बात थी। ये तो कोई बाहर की लड़की होगी जो पैसे के लिए उसके अधेड़ पति से चुदवा रही होगी। उसने पैंटी को ध्यान से देखा। वो पक्की थी कि ये उसकी या तान्या की तो नहीं है। उसे बड़ा धक्का लगा था। वह चुपचाप उसे पेपर में लपेटी और बिस्तर के नीचे छुपा लिया। फिर वह वहीं बिस्तर पर बैठ गयी।
उधर तान्या बाहर आयी और आकर शिवा के साथ बात कर रहे पापा को चप्पल दी। हरी ने बड़े ध्यान से तान्या को देखा तो उसके चेहरे पर थोड़ा परेशानी के भाव थे। वह समझ गया कि उसने पैंटी को देख लिया है। अब वह बोला: थैंक्स बेटी । आओ मेरे पास बैठो।
वो जाकर हरी की बग़ल में बैठ गयी। हरी ने एक हाथ शिवा के और दूसरा हाथ तान्या के कंधे पर रखा और उनको सहलाता हुआ बोला: मेरे दोनों बच्चे अब जवान हो गए हैं। शिवा जब तुम १८ के हुए थे तो मैंने तुमको क्या गिफ़्ट दिया था?
शिवा: पापा आपने बाइक दी थी।
अब हरी तान्या को अपने से चिपका कर बोला: अब मैं तान्या को भी एक गिफ़्ट दूँगा। ठीक है ना बेटी? वह उसके गाल चूमकर बोला।
तान्या: थैंक्स पापा। क्या देंगे?
शिवा: वो अभी सर्प्राइज़ है। वह उसकी चिकनी बाँह सहलाते हुए वासना से भरने लगा। शिवा के सामने उसका लंड खड़ा ना हो जाए यह सोचकर उसने अपनी टांगों को भींच लिया।
तभी लक्ष्मी आयी और चुपचाप किचन में चली गयी।
हरी: इसे क्या हो गया? मूड ऑफ़ लग रहा है इसका।
शिवा: आप दोनों बातें करो। मैं देख कर आता हूँ।
वह किचन में जाकर मम्मी कि पीछे से जकड़ कर कहा: क्या हुआ मम्मी उखड़ी सी दिख रही हो। आज तो आपकी सुहाग रात होगी ना पापा के साथ।
लक्ष्मी मुँह बिचका कर: मुझे कुछ नहीं मनाना उनके साथ। बहुत गंदे हैं तेरे पापा।
शिवा: क्या हुआ मम्मी ? वह अपनी माँ की चूचियाँ सहलाकर बोला।
लक्ष्मी: छोड़ मुझे कोई आ जाएगा। अभी जा। मेरा मूड नहीं है बात करने का।
शिवा ने लक्ष्मी के चूतरों को दबाया और बोला: मम्मी आप पापा से नाराज़ हो तो मैं सेवा कर दूँ आपकी?
लक्ष्मी ने उसे मारने को बेलन उठाने का नाटक किया और वह बाहर आ गया।
उधर सोफ़े पर बाप बेटी चिपके बैठे थे।
हरी: सच बताऊँ बेटी तुम बहुत सुंदर हो गयी हो जवान होकर। वह उसके टॉप के ऊपर से उसकी चूचियों को घूरता हुआ बोला। अब तान्या भी पापा के मर्दाने बदन के स्पर्श से मदहोश हो रही थी। वह बोली: पापा आप बेकार में मुझे चने के झाड़ पर चढ़ा रहे हो।
हरी: अच्छा बताओ लड़के तुम्हारे आगे पीछे घूमते थे कि नहीं स्कूल में? वह उसकी बाँह सहलाता हुआ बोला। उसके हाथ का बाहरी हिस्सा उसकी चूची से छू गया था।
तान्या सिहर कर: हाँ पापा पर वो तो सभी लड़कियों के पीछे रहते हैं।
हरी: बेटी एक बात पूछूँ बुरा तो नहीं मानोगी? हालाँकि किसी पापा को ये बात अपनी बेटी से नहीं पूछनी चाहिए।
तान्या: जी क्या?
हरी: तुम्हारा कोई बोय्य फ़्रेंड है क्या?
तान्या : नहीं पापा कोई नहीं है।
हरी: फिर तो बेटी तुम कुँवारी होगी?
तान्या शर्म से लाल होकर: पापा ये कैसा सवाल है?
हरी: असल में मेरा दोस्त बोला था कि आजकल शहर की सभी लड़कियाँ १७/१८ की होने से पहले ही चु— मतलब अपना कुँवारापन खो देती हैं । पर मैं बोला था कि सब नहीं बहुत सी। अब देखो तुम भी तो अभी कुँवारी हो ना?
तान्या ने हाँ में सिर झुका दिया।
हरी उसके गाल चूमा और बोला: मुझे तुम पर गर्व है मेरी लाड़ली बेटी।
तभी शिवा बाहर आया और बोला: पापा मम्मी तो बहुत ऑफ़ मूड में है पता नहीं क्यों? शिवा टी वी देखने लगा।
हरी: अरे सब ठीक हो जाएगा। चलो मै फ़्रेश होकर आता हूँ। वह खड़ा हुआ तो उसका खड़ा लंड एक मिनट के लिए तान्या की आँखों के सामने आया और वह अपनी बुर में तेज़ खुजली सी महसूस की।
शिवा अभी टी वी देखने में मस्त था। तान्या सोच रही थी कि पापा ने कैसी अजीब अजीब सी बातें की है उसके साथ??
उधर लक्ष्मी रात के खाने की तय्यारी करते हुए सोच रही थी कि हरी का ये सब कब से चल रहा है?
हरी अपने कमरे में जाकर सूट्केस खोला तो उसे पैंटी ग़ायब मिली। वो सोचा कि ये तान्या का काम है। पर सच तो यह था कि लक्ष्मी ने उसे बिस्तर के नीचे छिपाया था। वह मुस्कुराया और सोचा कि तान्या अकेले में उसे सूँघेगी। उग्फ़्फ़्फ़्फ़ ये सोचना ही कि तान्या उसका वीर्य सूँघेगी उसे बहुत गरम कर गया। अब नहाते हुए उसने मूठ्ठ मारने की सोची पर बाद में सोचा कि आज रात गरम लक्ष्मी को ही चोदा जाए। फिर वो तय्यार होकर ऑफ़िस का काम करने लगा।
उधर तान्या को चैन नहीं था। वह पापा के बारे में सोच सोच कर गरम हुए जा रही थी। फिर उसने भय्या की तरफ़ देखा । वो एक इंग्लिश पिक्चर देख रहा था जिसने पूल में बिकनी पहने लड़कियाँ नहा रहीं थीं । वह मस्ती में आकर अपना लंड दबा बैठा। तान्या ने यह देखा और अपनी बुर खुजा बैठी। फिर पता नहीं उसे क्या हुआ वो उठी और जाकर भय्या के पास उससे सट कर बैठी और बोली: भय्या क्या उलटी सीधी मूवी देख रहे हो।
शिवा उसके इस व्यवहार से थोड़ा सा हैरान था। पर वह बोला: तान्या कौन सा सेंट यूज़ करती हो आजकल? मस्त महक रही हो।
तान्या: भय्या वही तो है जो अपने मेरे जन्मदिन पर गिफ़्ट दिया था।
अब शिवा को मस्ती सूझी: वाह सच? अच्छा दिखाओ तो कैसी ख़ुशबू है? यह कहकर वो तान्या के हाथ को अपने हाथ में लेकर उसकी बाँह सूँघा और बोला: यहाँ तो पता नहीं चल रहा है। थोड़ा हाथ उठाओ तो । और ये कहते हुए उसने उसका एक हाथ उठा दिया और उसकी चिकनी बग़ल को सूँघने लगा और बोला: हाँ यहाँ पता चल रहा है। सच में मस्त गंध है इस सेंट की।
तान्या उसकी इस हरकत के लिए तय्यार नहीं थी सो सकपका गयी। इसके पहले की वह कुछ कहती लक्ष्मी अंदर आई और बोली: चलो खाना लगाती हूँ।
शिवा: ठीक है मम्मी चलो मै आपकी मदद करता हूँ। यह कहकर वो भी लक्ष्मी के पीछे पीछे किचन में चला गया।
किचन में जाकर वो लक्ष्मी को पीछे से पकड़कर उसकी गरदन को चूमकर बोला: क्या हुआ मम्मी आप बहुत अप्सेट हो?
लक्ष्मी अपने को छुड़ाकर बोली: सब ठीक है। चल प्लेट लगा।
शिवा उसे और ज़ोर से जकड़ता हुआ बोला: बोलो ना क्या बात है? मुझे दूध पिला कर अपना मूड ठीक कर लो।
लक्ष्मी हंस पड़ी: अच्छा चल छोड़ बदमाश कहीं का।
शिवा ने उसे छोड़ा और काम में उसकी मदद करने लगा।
उधर तान्या अपनी जाँघ दबाकर बैठी टी वी देख रही थी। तभी हरी आया और उसके पास आकर बैठा और बोला: देखो नहाने से कितना अच्छा लग रहा है। देखो ये मेरा नया सेण्ट कैसा है? कल ही ख़रीदा है। यह कहकर उसने अपनी बाँह उठाई और तान्या के सिर को पकड़कर अपनी
बग़ल में घुसेड़ दिया। तान्या को मादक सेण्ट की गंध अच्छी लगी। पर पापा का व्यवहार अजीब सा लगा।
तान्या: आऽऽऽह पापा अच्छा है।
तभी लक्ष्मी खाना लेकर आइ और हरी की यह हरकत देखी। वो बोली: ये क्या कर रहे हो? कोई अपनी जवान बेटी के साथ ये सब करता है।
हरी: अरे मैं क्या कर रहा हूँ? बस अपना नया सेंट ही तो सुँघा रहा हूँ। क्यों तान्या है ना?
बेचारी तान्या हाँ में सिर हिलाकर रह गयी।
सब खाना खाते हुए बातें करते रहे पर लक्ष्मी चुप सी थी। पता नहीं क्यों हरी अब शंकित सा हो उठा कि कहीं पैंटी लक्ष्मी को तो नहीं मिल गयी।
खाना खाने के अब सब सोफ़े पर टी वी देख रहे थे।कमरे में एक छोटी सी लाइट जल रही थी इसलिए रौशनी कम ही थी। हरी आकर के तान्या के पास बैठा और शिवा लक्ष्मी के साथ दूसरे सोफ़े पर। दोनों मर्द अपनी अपनी गोटियाँ सेट करने में लगे थे। शिवा तो थोड़ी देर तक लक्ष्मी की जाँघ सहलाने के बाद उसकी गोद में लेट गया। और अपना सिर टी वी की तरफ़ ही रखा। लक्ष्मी की चूचियाँ उसे कभी कभी गाल में छू जाती थी। वह इसी से उत्तेजित हुआ जा रहा था। लक्ष्मी भी उसके बाँह को सहला कर अपना प्यार दिखा रही थी। शिवा फुसफुसाया: मम्मी दूध पिलाओ ना।
लक्ष्मी ने आँखें तरेरीं : क्या बकवास कर रहा है?
शिवा: मम्मी सच बहुत मूड हो रहा है निपल चूसने का।
लक्ष्मी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।
उधर हरी भी तान्या की जाँघ सहला रहा था और उसको फुसफुसा कर बोला: बेटी बताओ ना क्या गिफ़्ट चाहिए।
तान्या: पापा एक स्कुटी ले दीजिए कोलेज में आराम हो जाएगा।
हरी: हाँ हाँ बेटी क्यों नहीं ज़रूर ले देंगे। पर पापा को भी कोई रिटर्न गिफ़्ट दोगी ना?
तान्या: मैं आपको क्या दे सकती हूँ।
हरी उसको वासना भरी नज़र से देखा और उसकी चूचियों को घूरते हुए बोला: आऽऽह बेटी तुम्हारे पास मुझे देने के लिए बहुत कुछ है।
तान्या थोड़ी सी अंकम्फ़्टर्बल हुई और चुप रही। उसे लगा की रम्या सच बोल रही है पापा उसकी जवानी पाना चाहते है। उत्तेजना से वह गीली होने लगी।
फिर लक्ष्मी ने महसूस किया कि शिवा उसके हाथ को सहला रहा है। और अचानक उसने बड़ी हिम्मत करते हुए लक्ष्मी का हाथ पकड़कर अपने लोअर पर रखा और लक्ष्मी का हाथ उसके लंड को छू गया। लक्ष्मी सिहर कर अपना हाथ छुड़ाई। और फिर उसे उठाकर अलग करते हुए बोली: अच्छा गुड नाइट मैं सोने जा रही हूँ। फिर हरी भी उठा और गुड नाइट करके अपने कमरे में चला गया। शिवा ने एक बार तान्या को देखा और अपने लोअर में खड़े लंड को ऐडजस्ट करते हुए बोला: क्यों सोना नहीं है क्या?
तान्या: आप जाओ मैं थोड़ी देर में सोऊँगी।
शिवा भी चला गया। तान्या बैठी टी वी देखती रही।
आगे क्या हुआ: जब तान्या ने अपने पापा और मम्मी के कमरे में झाँका और शिवा ने उस रात क्या किया?
जब अपने कमरे में पहुँचा तो देखा कि लक्ष्मी बिस्तर पर पीठ करके सोयी हुई है। गाउन में से उसके उभरे हुए चूतड़ मस्त सेक्सी दिख रहे थे। वह आकर उसके बग़ल में लेटा और अपनी एक टाँग को उसकी कमर पर चढ़ा कर उसकी पीठ सहलाते हुए बोला: क्या जान सोने के चक्कर में हो क्या? मैं तो मस्ती के मूड में हूँ। यह कहकर उसने उसके बड़े चूतड़ दबा दिए। लक्ष्मी कसमसा कर बोली: छोड़िए मुझे । सोने दीजिए।
हरी: यार क्या सोने की बात कर रही है। यहाँ देखो लंड महाराज परेशान हो रहे हैं आपकी बुर में घुसने के लिए। यह कहते हुए उसने अपना लंड उसकी गाँड़ पर रगड़ दिया। लक्ष्मी फिर से बोली: आऽऽह क्यों उस लौंडिया की बुर फाड़ कर भी शांत नहीं हुआ क्या आपका लंड?
उधर तान्या की कामवासना उसे परेशान कर रही थी। वह सोची कि देखते हैं पापा क्या आज मम्मी की चुदाई करेंगे क्या? वह उनके कमरे की खिड़की के पास जाकर हल्के से परदे से झाँकी तो हरी कह रहा था: किस लौंडिया की बात कर रही हो जान?
लक्ष्मी अब पलटी और उसकी आँख में आँख डालकर बोली: उसी की जिसकी यह पैंटी है? वह बिस्तर के नीचे से छिपाई हुई पैंटी निकाली और उसे दिखाती हुई बोली।
तान्या धक्क से रह गयी । वह सोची कि यह तो रम्या की ही पैंटी है। उफ़्फ़्फ यह मम्मी के हाथ कैसे आ गयी?
उधर हरी अनजान बनता हुआ बोला: यह क्या है? मुझे क्यों दिखा रही हो?
लक्ष्मी: अब नाटक बंद करिए और बताइये कि यह किसकी पैंटी है और आपके सूट्केस में क्या कर रही थी?
अब हरी पूरा घिर गया था वह बोला: देखो मैं तुमको सब सच सच बताता हूँ । तुमको याद है ना जब मैंने श्याम भय्या की बहू को चोदा था जब तुम श्याम भय्या से चुदीं थी? उसी समय मुझे महसूस हुआ कि जवान और छोटे उम्र की १९/२० साल की लड़की को चोदने में बहुत मज़ा है। बस मैं ताज़ा जवान लड़की की तलाश में लग गया। हमारी तान्या भी १८ की होने वाली थी और उसकी कई सहेलियाँ तो १८ पूरी भी कर चुकी थीं। इन्हीं लड़कियों में मुझे रम्या पसंद आइ। वह अभी अभी १८ की हुई थी और उसकी चूचियाँ और गाँड़ के उभार से पता चलता था कि रेग्युलर चुदवा रही है। एक बार वह तान्या के साथ सोफ़े पर बैठी बात कर रही थी तब मैंने उसे आँख मार दी। वह मुस्कुराई। फिर मैंने तान्या से पानी मँगाया और अकेले में उसे अपना विज़िटिंग कार्ड दिखाते हुए एक किताब के नीचे छिपा दिया और इशारा किया कि फ़ोन करे। फिर मैं पानी पीकर चला गया। शाम को रम्या का फ़ोन आया और मैंने उसे कॉफ़ी हाउस में बुलाया। वह स्कर्ट टॉप में आइ थी और बहुत सेक्सी लग रही थी। मैंने उसके हुस्न की तारीफ़ की तो वह ख़ुश हो गयी।
मैं: रम्या तुम सच में बहुत सेक्सी हो।
रम्या: थैंक्स अंकल। आप भी बहुत सेक्सी हो। इस उम्रें में आपने मेंटैंन किया हुआ है।
मैं: एक बात बताओ कि तुम मेरी जैसे उम्र के लोगों को घास डालती हो या नहीं।
रम्या सीरीयस हो कर: अंकल सच कहूँ तो मुझे आपके उम्र के लोग ही पसंद हैं । असल में मेरी घर की आर्थिक हालात ठीक नहीं है। और मैं पैसों के लिए आपके जैसे लोगों से मिलती हूँ और उनको ख़ुश करती हूँ। जवान लड़कों की कमर में तो दम होता है पर जेब ख़ाली रहती है। इसलिए मैं ज़्यादातर आपकी उम्र वालों से मिलती हूँ।
मैं: कितने पैसे लेती हो? क्या तान्या को पता है यह सब?
बाहर खड़ी तान्या के कान खड़े हो गए कि अब क्या जवाब देती है ये लड़की?
रम्या: तान्या को नहीं पता है। मैं ५००० लेती हूँ एक रात का।
मैं: अब तक कितनो से चुदवा चुकी हो? मैंने अब चुदाई शब्द का उपयोग किया।
रम्या: अंकल ३ महीने से मैं इस काम में आयी हूँ। अब तक चार अंकल ने मेरे साथ किया है। मैं ज़्यादा ग्राहक नहीं चाहती। बस यही अंकल मुझे बार बार बुलाते रहते हैं ।
मैं: तुम्हारा कोई दलाल भी है क्या?
रम्या: नहीं अंकल कोई नहीं है।
मैं: चलो फिर अभी चलें । मेरे पास २ घंटे हैं । कोई होटेल जानती हो?
रम्या: जी अंकल हाइवे पर एक छोटा सा बढ़िया होटेल है।
मैं: तो फिर चलो वहीं चलते हैं । पर तान्या को तो नहीं बताओगी ना?
रम्या: नहीं बताऊँगी।
फिर हम दोनों उसके बताए होटेल में कमरा लिए और मैंने पहली बार तुमसे धोका किया और उस कमसिन लौड़ियाँ की जवानी लूटी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या मज़ा मिला मुझे उसके कसे बदन से बता नहीं सकता। मस्त टाइट मोटे बूब्ज़ और टाइट बुर । बस जन्नत का मज़ा आ गया था। उस दो घंटे में मैंने दो बार चुदाई की। वह बड़े मज़े से मेरा लंड भी चूसी। बस इसके बाद मै हफ़्ते में एक बार उसे चोदे बगेर नहीं रह पाता हूँ। बस यही कहानी है उसकी और मेरी।
लक्ष्मी: पर आप उसकी पैंटी घर क्यों ले आए?
हरी ने मन ही मन रम्या को गाली दी और सोचा कि यह उसका ही आइडिया था कि पैंटी देखकर तान्या उत्तेजित हो जाएगी। और यहाँ पैंटी तान्या की माँ के हाथ पड़ गयी। वो सामने से बोला: पता नहीं उसने ये क्यों किया? मैं उससे पूछूँगा।
बाहर खड़ी तान्या सोची कि पापा अभी भी झूठ बोल रहे हैं उसे पता है कि पैंटी तो रम्या ने पापा की इच्छा पूरी करने के लिए ही रखी थी ताकि बेटी पापा के प्रति आकर्षित हो।
लक्ष्मी: चलो अब सोने दो। आप रंडियां ही चोदो अब ।
हरी बड़ी देर तक उसे मनाता रहा पर लक्ष्मी टस से मस नहीं हुई और करवट बदल कर लेटी रही। हारकर हरी भी दूसरी ओर करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगा।
तान्या अब अपने कमरे की ओर बढ़ी और जब वह शिवा के कमरे के सामने से निकली तो देखी कि कमरे में हल्की सी लाइट थी। वह खिड़की के परदे से झाँकी और देखी कि भय्या आज भी लैपटॉप पर चैटिंग कर रहा था। तान्या ध्यान से सुनने लगी।
शिवा: हाँ सच कह रहा हूँ। आज मैंने उनकी चूचियाँ चूसीं । यार क्या बड़ी बड़ी मस्त चूचियाँ हैं । पर उनमें से दूध नहीं आया। हाहाहाहाहा।
लड़की: अच्छा। मम्मी मान गयीं?
शिवा: हाँ मुश्किल से मानी। पर आज हो ही गया।
लड़की: अब आगे का क्या प्लान है?
शिवा: बस चुदाई का प्लान है और क्या? धीरे धीरे मम्मी को चुदाई के लिए राज़ी करना है।
तान्या सिहर उठी। भाई के मंसूबे तो काफ़ी खतरनाक हैं ।
लड़की: और बहना रानी का क्या सोचा?
शिवा: उसका नम्बर बाद में आएगा। वैसे आज मैंने एक बात नोटिस की है कि पापा भी उसको लाइन मार रहे हैं । पता नहीं क्या गिफ़्ट देने वाले हैं उसे। बाद में पक्का चोदेंगे उसे।
तान्या भाई के मुँह से यह सब सुनकर हैरान रह गयी। और ये सब वह एक चैट फ़्रेंड को बता रहा है?!
अब शिवा बोला: यार कुछ दिखाओ ना मूठ्ठ मारने की इच्छा हो रही है।
लड़की: क्या देखना है?
शिवा: टॉप और ब्रा निकाल कर बूब्ज़ ही दिखा दो।
लड़की: ठीक है तुम भी अपना लंड निकालो।
शिवा ने जल्दी से अपना लोअर और चड्डी उतारा और लड़की को लंड दिखाकर मूठ्ठ मारने लगा। तान्या की सांसें भी तेज़ चलने लगी भाई का मस्ताना लंड देखकर। उसका हाथ अपनी पैंटी के अंदर चला गया और वो भी वहाँ बुर में ऊँगली करने लगी।
शिवा: आऽऽऽऽह क्या बूब्ज़ है । दबाओ ना ज़रा। आऽऽऽऽह मस्त माल हो यार। आऽऽऽह अब चूत दिखाओ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त गीली चूत है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मैं गया और वो झड़ने लगा। गाढ़े सफ़ेद रस को देखकर तान्या भी अपनी चीख़ दबाकर झड़ने लगी। फिर कांपते पैरों से वह अपने कमरे में आयी और सो गयी।
सुबह लक्ष्मी सबसे पहले उठी और किचन में चाय की तैयारी करने लगी। वह अब भी एक गाउन में ही थी। फिर हरी उठा और सोफ़े पर बैठकर पेपर पढ़ने लगा। लक्ष्मी चाय लायी और चुपचाप उसे कप पकड़ा दी। हरी उसके चेहरे का रूखापन देखकर बोला: जान अभी भी नाराज़ हो? आओ बैठो प्लीज़ हम इसका हल निकाल लेंगे।
लक्ष्मी अपनी चाय पीते हुए उसके बग़ल में बैठ गयी।
हरी: देखो सच है कि मैंने तुम्हें धोका दिया है। पर ज़रा मेरे नज़रिए से भी देखो। एक बात तो है हम दोनों के सेक्स सम्बन्धों में एक ठहराव सा आ गया है। हम दोनों हर बार एक तरीक़े से ही सेक्स करते हैं । तुम पर और मुझ पर भी उम्र का असर तो हो रहा है।
उसी समय शिवा उठा और चाय के लिए ड्रॉइंग रूम की ओर आया। वहाँ मम्मी पापा की बातें सुनकर वह रुका और दीवार की आड़ में खड़ा होकर सुनने लगा।
लक्ष्मी कह रही थी: इसका मतलब है आप रँडियों से लगे रहोगे?
हरी: अरे नहीं ये तो बस कभी कभी स्वाद बदलने जैसा है।
रा अपना बेटा शिवा भी तुम्हारी चूचियों और मस्तानी गाँड़ को ताड़ता रहता है। मैंने कई बार देखा है। और शिवा तो एकदम से पट जाएगा।
शिवा पापा की बात सुनकर मस्त हो गया और लोअर के ऊपर से अपने खड़े लंड को दबाने लगा।
लक्ष्मी: हे भगवान आप भी ना कुछ भी बोल देते हो? शिवा मेरा बेटा है। मैं उसे इसके लिए पटाऊँगी? फिर वह सोची कि वो कमीना तो एक पैर पर खड़ा है मुझे चोदने के लिए।
हरी: अरे इसमें हर्ज ही क्या है? घर की बात घर में रहेगी। बाद में उसके एक दो दोस्तों से भी चुदवा लेना।
लक्ष्मी की पैंटी गीली होने लगी। वह इस ख़याल से उत्तेजित हो रही थी क्या सच में ये सब सम्भव है??
उधर तान्या भी चाय के लिए उसी हॉल में आयी जहाँ शिवा अपने लोअर के ऊपर से खड़ा लंड मसल रहा था अपने पापा और मम्मी की बातें सुनते हुए। वह आकर शिवा के पीछे खड़ी हो गयी तभी उसकी कान में आवाज़ आइ।
लक्ष्मी: अगर मैं शिवा को लाइन दे दूँ तो आप तो तान्या को नहीं छोड़ने वाले? सही कहा ना मैंने?
हरी अब अपना लंड लोअर के ऊपर से मला और बोला: सही कह रही हो। अगर तुम शिवा से चुदवा लेती हो तो मैं भी तान्या की लेने की कोशिश करूँगा। वैसे तुम्हें इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?
लक्ष्मी: क्यों उसकी शादी नहीं करनी है क्या?
हरी: ये क्या बात हुई? भला शादी का हमारी चुदाई से क्या लेना देना? तुम भी तो शादी के पहले चुदाई कर चुकी थीं उससे क्या फ़र्क़ पड़ा ?
लक्ष्मी लाल होकर: मैंने आपको बताया था कि मैं किन परिस्थितियों में चुदी थी? आप बहुत कठोर होते जा रहे हो।
हरी उसे प्यार से अपने पास खींचा उसकी एक चूची दबाते हुए बोला: नहीं जान ऐसी कोई बात नहीं है। तान्या अगर मुझसे चुद भी गयी तो भी उसकी शादी धूमधाम से ही करेंगे। शादी तो शिवा की भी होगी
उसी समय शिवा उठा और चाय के लिए ड्रॉइंग रूम की ओर आया। वहाँ मम्मी पापा की बातें सुनकर वह रुका और दीवार की आड़ में खड़ा होकर सुनने लगा।
लक्ष्मी कह रही थी: इसका मतलब है आप रँडियों से लगे रहोगे?
हरी: अरे नहीं ये तो बस कभी कभी स्वाद बदलने जैसा है।
लक्ष्मी ग़ुस्से से: और अगर मै भी ऐसे ही स्वाद बदलने लगूँ तो?
हरी: अरे जान बस यही कहने के लिए तो तुमको अभी बुलाया है । मैं यही चाहता हूँ कि अब तुम भी अपना स्वाद बदलो।
लक्ष्मी उसे हैरानी से देखते रह गयी और बोली: इसका मतलब है कि आप चाहते हो कि मैं भी दूसरे लोगों से चुदवाऊँ?
हरी: बस यही चाहता हूँ। मेरी इच्छा है कि तुम भी ज़िंदगी के मज़े लो। जैसा मैं ले रहा हूँ। इसीलिए जब मैंने श्याम भाई की बहू को चोदा था तब तुमको भी श्याम भाई से चुदवाय था और तुमने बताया था कि तुमको मज़ा भी आया था।
लक्ष्मी अपनी चाय पीते हुए उसके बग़ल में बैठ गयी।
हरी: देखो सच है कि मैंने तुम्हें धोका दिया है। पर ज़रा मेरे नज़रिए से भी देखो। एक बात तो है हम दोनों के सेक्स सम्बन्धों में एक ठहराव सा आ गया है। हम दोनों हर बार एक तरीक़े से ही सेक्स करते हैं । तुम पर और मुझ पर भी उम्र का असर तो हो रहा है।
लक्ष्मी: वो अलग बात है ।
हरी: अरे सब एक ही बात है। तुम भी मज़ा लो ना।
लक्ष्मी ग़ुस्से से : वाह ख़ुद तो टूर पर जाकर जवान लड़कियों से मज़ा लेते है और यहाँ मैं कहाँ से आदमी लाऊँ? और आपको ख़राब नहीं लगेगा अगर मैं दूसरे आदमियों से चुदवाऊँगी?
हरी: नहीं जान बिलकुल ख़राब नहीं लगेगा। बल्कि हम अपने अपने सेक्स अनुभव शेयर करेंगे और गरम होकर और मज़ा लेंगे। और रही तुमको आदमी ढूँढने की। तो जान शिवा के दोस्त हैं ना। ऊनमे से दो को तो मैंने तुम्हारी चूचियाँ और गाँड़ घूरते हुए देखा है। वैसे एक बात और बता दूँ तुम्हारा अपना बेटा शिवा भी तुम्हारी चूचियों और मस्तानी गाँड़ को ताड़ता रहता है। मैंने कई बार देखा है। और शिवा तो एकदम से पट जाएगा।
शिवा पापा की बात सुनकर मस्त हो गया और लोअर के ऊपर से अपने खड़े लंड को दबाने लगा
लक्ष्मी: हे भगवान आप भी ना कुछ भी बोल देते हो? शिवा मेरा बेटा है। मैं उसे इसके लिए पटाऊँगी? फिर वह सोची कि वो कमीना तो एक पैर पर खड़ा है मुझे चोदने के लिए।
हरी: अरे इसमें हर्ज ही क्या है? घर की बात घर में रहेगी। बाद में उसके एक दो दोस्तों से भी चुदवा लेना।
लक्ष्मी की पैंटी गीली होने लगी। वह इस ख़याल से उत्तेजित हो रही थी क्या सच में ये सब सम्भव है??
उधर तान्या भी चाय के लिए उसी हॉल में आयी जहाँ शिवा अपने लोअर के ऊपर से खड़ा लंड मसल रहा था अपने पापा और मम्मी की बातें सुनते हुए। वह आकर शिवा के पीछे खड़ी हो गयी तभी उसकी कान में आवाज़ आइ।
लक्ष्मी: अगर मैं शिवा को लाइन दे दूँ तो आप तो तान्या को नहीं छोड़ने वाले? सही कहा ना मैंने?
हरी अब अपना लंड लोअर के ऊपर से मला और बोला: सही कह रही हो। अगर तुम शिवा से चुदवा लेती हो तो मैं भी तान्या की लेने की कोशिश करूँगा। वैसे तुम्हें इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?
लक्ष्मी: क्यों उसकी शादी नहीं करनी है क्या?
हरी: ये क्या बात हुई? भला शादी का हमारी चुदाई से क्या लेना देना? तुम भी तो शादी के पहले चुदाई कर चुकी थीं उससे क्या फ़र्क़ पड़ा ?
लक्ष्मी लाल होकर: मैंने आपको बताया था कि मैं किन परिस्थितियों में चुदी थी? आप बहुत कठोर होते जा रहे हो।
हरी उसे प्यार से अपने पास खींचा उसकी एक चूची दबाते हुए बोला: नहीं जान ऐसी कोई बात नहीं है। तान्या अगर मुझसे चुद भी गयी तो भी उसकी शादी धूमधाम से ही करेंगे। शादी तो शिवा की भी होगी चाहे वो तुमको चोदे या नहीं।
लक्ष्मी अपनी जाँघ दबाकर अपनी गीली बुर का अहसास करके बोली: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आप क्या क्या बोल रहे हो। अब तो मेरा मन भी करप्ट हो रहा है । ये ठीक है क्या? एक बात और शिवा को पता चला कि आप तान्या के साथ फँसे हैं तो वह अपनी बहन की भी ले ही लेगा।
हरी: अच्छा तो है तान्या शादी के पहले दो लंडों का मज़ा ले लेगी और वह भी घर के ही।
शिवा को लगा कि उत्तेजना के मारे वो कहीं झड़ ना जाए। उसने लोअर में हाथ डालकर अपने लंड को दबाना शुरू कर दिया। और तान्या हैरान और उत्तेजित होकर अपने पापा के लोअर से फूले लंड को देख रही थी और सामने खड़े भाई के हाथ का मूव्मेंट भी देख रही थी साइड से । उसकी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी और वह अब चुपचाप अपने कमरे की ओर चली गयी।
जब शिवा ने देखा कि उनकी बातें थोड़ी देर के लिए रुकी हैं तो वो अपना लंड ऐडजस्ट करके सामने आया और दोनों को गुड मॉर्निंग किया। हरी ने अर्थपूर्ण नज़रों से लक्ष्मी को देखा।
लक्ष्मी उठती हुई बोली: रुक तेरे लिए चाय लाती हूँ।
हरी ने देखा कि शिवा बेशर्मी से अपनी माँ के गाउन में से डोलते मस्त चूतडों को देख रहा था और अपने लंड को दबा रहा था। हरी मन ही मन मुस्कुराया कि उसकी ऑब्ज़र्वेशन सही है कि ये अपनी मम्मी की लेना चाहता है।
तभी तान्या अपनी पैंटी बदल कर आइ और गुड मोर्निंग पापा और भय्या बोली। हरी उसे अपने पास बिठा कर उसके गाल चूमा और बोला: गुड मोर्निंग । कैसी है हमारी गुड़िया?
शिवा: पापा यह अब गुड़िया कहाँ रह गयी। मस्त जवान हो गयी है।
हरी: यह कितनी भी जवान हो जाए मेरे लिए तो गुड़िया ही रहेगी। है ना बेटी? वह फिर से उसकी बाँह सहलाते हुए और उसके गोल गाल चूमते हुए बोला।
तान्या भी उससे लिपट कर बोली: हाँ पापा। भय्या को जलन हो रही है।
हरी: क्यों हरी ऐसा है क्या? मैं तो सोचता हूँ कि तुम भी अपनी गुड़िया बहन को उतना ही प्यार करते हो जितना मैं करता हूँ सही है ना?
शिवा उठकर तान्या के पास आकर बैठा और उसके रुई के माफ़िक़ नरम गाल चूमकर बोला: हाँ पापा ये मेरी भी लाड़ली गुड़िया है। यह कहते हुए उसने तान्या के गाउन के ऊपर से उसकी गोल गोल चूचियों को घूरा और तान्या और हरी ने ये नोटिस भी किया।
तभी लक्ष्मी चाय लेकर आइ और बोली: ये बाप बेटा मेरी गुड़िया को क्यों तंग कर रहे हैं?
हरी: अरे हम तो गुड़िया को प्यार कर रहे है।
लक्ष्मी की नज़र बाप बेटे के लोअर पर पड़ी जहाँ तंबू बने हुए थे और जिसे वो जाँघों के बीच छिपाने की कोशिश कर रहे थे। वो फिर से गरम होने लगी। तान्या भी अपने पापा और भाई के बीच बैठी उनके मर्दाने पसीने की गंध से मदहोश सी हो रही थी। अभी कोई भी नहाया नहीं था।
फिर लक्ष्मी बोली: चलो सब लोग नहाओ । मैं नाश्ते की तैयारी करती हूँ। वो किचन में चली गयी। शिवा भी उठा और उसके पीछे पीछे किचन में गया और पीछे से उसे पकड़कर बोला: मम्मी आज मुझे फिर से दूध पीना है।
पता नहीं क्या हुआ कि लक्ष्मी के मुँह से निकल गया: ठीक है बाद में देखेंगे।
शिवा मस्ती में आकर उसके चूतडों पर अपना खड़ा लंड रगड़कर: आऽऽह मम्मी आप कितनी अच्छी हो। बहुत मज़ा आता है आपके दूध पीने में। यह कहता हुआ वो उसकी दोनों चूचियों को अपने पंजों में दबा लिया और बोला: मम्मी आज इनको जी भर के चूसूँगा।
लक्ष्मी हँसकर: अच्छा अच्छा बाद में देखेंगे अभी भाग यहाँ से। शिवा हँसता हुआ बाहर आया।
उधर तान्या खड़ी होकर बोली: पापा मैं नहाने जा रही हूँ।
हरी उसे ललचायी नज़रों से देखा और बोला: काश तुम छोटी होती तो मैं ख़ुद तुमको नहला देता।
तान्या: धत्त पापा अब मैं बड़ी हो गयी हूँ। चलती हूँ।
हरी : बेटी एक बात बताओ। आज दोपहर को क्या कर रही हो?
तान्या: पापा कुछ नहीं। आपको पता है कि अभी कोलेज खुलने में टाइम है।
हरी: तो एक काम करो ना । दोपहर को १२ बजे मुझे गांधी चौक पर मिलो। मैं तुमको कुछ गिफ़्ट देना चाहता हूँ। और हम साथ में खाना भी खाएँगे।
तान्या ख़ुश होकर: ठीक है पापा। मम्मी को भी लेती आऊँगी।
हरी: वो क्या करेगी? मैं गिफ़्ट तो तुम्हारे लिए ले रहा हूँ।
तान्या: ओह ठीक है मैं ही आ जाऊँगी।
हरी: और हाँ किसी को बताना मत कि तुम मुझसे मिलने आ रही हो। बोल देना कि सहेली के घर जा रही हो।
तान्या: पापा वो क्यों?
हरी: अरे बेटा सबको सर्प्राइज़ जो देना है।
तान्या ख़ुश होकर: ठीक है पापा। मैं आ जाऊँगी।
हरी उठा और उसको अपने बदन से चिपका कर उसके जवान बदन का मज़ा लेते हुए बोला: बहुत प्यारी बिटिया है हमारी। यह कहते हुए उसने गाउन के ऊपर से उसकी पीठ सहलाई और हाथ को धीरे से नीचे लाकर उसके हिप्स के ऊपरी हिस्से का सहलाया और फिर अलग होकर नहाने चला गया। तान्या भी पापा के मर्दाने बदन की गंध से मदहोश होकर अपने कमरे में चली गयी।
सबसे पहले नहाकर शिवा आया और जाकर किचन में लक्ष्मी से बोला: बोलो मम्मी क्या मदद करूँ आपकी?
लक्ष्मी ने उसे प्लटें लगाने को कहा और नाश्ता टेबल पर रखने लगी। पीछे से शिवा ने लक्ष्मी की कमर सहलाई और कहा: मम्मी मुझे बताओ ना क्या करना है आप क्यों अपनी कमर को कष्ट दे रही हो?
लक्ष्मी: चल बड़ा आया मदद करने। अगर मदद करनी है तो आज नाश्ता करने के बाद मेरे साथ चल सब्ज़ी लेकर आएँगे। बड़े खोले उठाएगा तब मानूँगी।
शिवा तान्या के कमरे में जाकर आवाज़ दिया: तय्यार हो गयी हमारी गुड़िया?
तान्या उसी समय बाहर आयी और स्कर्ट टॉप में मस्त माल लग रही थी। टॉप थोड़ा डीप कटा था उसमें से गोल गोल चूचियों के क्लीवेज़ साफ़ दिख रहे थे। गोरी चिकनी जाँघें और टाँगें भी स्कर्ट से मस्त चिकनी दिख रही थीं ।
तान्या: चलो भय्या क्या हुआ? कभी मुझे देखा नहीं क्या?
शिवा: उफ़्फ़्फ कितनी सुंदर हो गयी हो तुम। जो भी तुमसे शादी करेगा बहुत ही लकी होगा।
तान्या हँसकर : भय्या चलो अब नाश्ता करते है।
दोनों हॉल की तरफ़ चल पड़े । शिवा तान्या के पीछे चलते हुए उसके मस्त गोल गोल चूतडों को स्कर्ट के ऊपर से डोलते हुए देख कर मस्त होकर अपना लंड दबाने लगा।