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क्या वह बेवफ़ा थी?
तान्या को नींद नहीं आ रही थी। रात के १२ बज गए थे और वह करवटें बदल रही थी। वह १९ साल की एक जवान और स्वस्थ बदन की लड़की थी। उसकी शादी उसके मर्ज़ी के ख़िलाफ़ एक ३० साल के युवक रवि से कर दी गयी थी। तान्या अभी आगे पढ़ना चाहती थी पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। अच्छा ख़ासा कमाऊ लड़का मिल गया था तो उसके मॉ बाप क्यों उसे हाथ से जाने देते। शादी को ३ महीने हो गए थे और आज पहली बार रवि अपनी कम्पनी के काम से टूर पर बाहर गया था। उसने बताया हुआ था कि क्योंकि वह मार्केटिंग में है ,इसलिए उसे कभी कभी टूर पर जाना पड़ेगा। दिल्ली शहर के इस फ़्लैट में वो आज रात बिलकुल अकेली थी और उसे पुरानी बातें याद आ रही थी।
तान्या एक अल्लढ़ और मौजी लड़की थी। परिवार में माँ और पिता के अलावा एक बड़ा भाई भी था। जीवन बिलकुल ठीक ठाक चल रहा था। जब वह १८ की हुई उसका जन्म दिन बड़ी धूम धाम से मनाया गया। उसके पापा हरी व्यास ने सब परिवार वालों को बुलाया और कुछ सहेलियाँ भी आयीं थीं। तान्या ने १२वीं की परीक्षा भी अच्छे नम्बरों से पास की थी । उसकी मम्मी लक्ष्मी भी बहुत ख़ुश थी कि अब बिटिया कोलेज जाएगी। शिवा भय्या ने भी उसे सुबह सुबह प्यार किया और जन्म दिन की बधाई दिया। शिवा उससे २ साल बड़ा था और कोलेज में पढ़ता था। हरी व्यास का अपना व्यवसाय था और वो एक उच्च मध्यम वर्ग में गिने जाते थे।
शाम को पार्टी एक होटेल में रखी गयी थी। तान्या एक सुंदर से टॉप और स्कर्ट में तय्यार होकर आयी थी। वह एक लम्बी स्वस्थ और दिल्ली की फ़ैशनबल लड़की थी। ३२ साइज़ की चूचियाँ ब्रा में फँसी हुई टॉप से साफ़ दिख रही थी। टॉप से उसकी गहरी क्लीवेज़ भी दिखाई दे रही थी। पेट का कुछ हिस्सा नंगा था और उसकी गहरी नाभि जैसे क़यामत ढा रही थी। छोटी सी स्कर्ट से नीचे उसकी गदराई हुई गोरी पुष्ट जाँघें तो उफ़्फ़्फ क्या मस्त दिख रहीं थीं । स्कर्ट से पैंटी के किनारे भी दिख रहे थे।
जैसे ही वह अपनी सहेली रम्या के साथ अंदर हाल में आयी , सब मर्दों की मानो साँसे ही रुक गयीं । वह अंदर आकर अपनी मम्मी लक्ष्मी से लिपट गयी।
लक्ष्मी: वाह बेटी, आज बहुत प्यारी लग रही हो। ध्यान रखना कोई तुमको पसंद ना कर ले।
तान्या: मम्मी कोई मुझे पसंद करे उससे क्या होता है। सवाल ये है कि मैं भी उसे पसंद करूँ।
दोनों हँसने लगे। तान्या आगे जाकर पापा की तरफ़ बढ़ी जो एक कोने में होटेल के मैनेजर को कुछ आदेश दे रहे थे। तान्या को अपनी ओर आते देखकर हरी पहली बार थोड़ा सा अलग सा महसूस किया। आज उसकी बेटी सच में मस्त लग रही थी। तान्या पास आयी और आके अपने पापा से लिपट गयी और हरी ने उसकी सख़्त चूचियों ka दबाव अपने सीने पर महसूस किया और पहली बार अपनी बेटी के स्पर्श से उसका लंड झटका मारा। उसके हाथ बेटी की पीठ सहलाने लगे और वहाँ ब्रा का स्ट्रैप छूकर वह और उत्तेजित हो गया। उसका लंड अब काफ़ी बड़ा हो गया था। वो अपनी कमर पीछे को किया ताकि तान्या को उसके लंड की चुभन का अहसास ना हो जाए। फिर वह झुका और उसके गाल चूमा और बोला: चलो बेटी क़रीब क़रीब सब आ गए हैं अब केक काटा जाए।
तान्या उससे अलग हुई और बोली: भय्या कहाँ है?
हरी: वो देखो अपने दोस्तों के साथ खड़ा बातें कर रहा है।
उसके जाते ही उसने अपनी पैंट में लंड ऐडजस्ट किया और थोड़ा सा शर्मिंदा भी हुआ।
तान्या उसी तरफ़ को गयी और वहाँ जाकर अपने भाई के गले लगी। शिवा बोला: वाह आज तो बहुत सुंदर दिख रही हो। वह भी अपने सीने में उसके सख़्त अनारों के स्पर्श से पहली बार थोड़ा सा विचलित हुआ और फिर बोला: चलो केक काटा जाए।
शिवा ने नोटिस किया कि उसके सब दोस्त तान्या को ख़ा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे। उसने देखा कि कुछ दोस्तों ने तो उसकी जाँघें और स्कर्ट से उभरी मस्त गाँड़ देखकर अपना लंड भी पैंट में ऐडजस्ट करना शुरू कर दिया था। अचानक उसे भी महसूस हुआ कि उसका लंड भी अकड़ने लगा है। उसे ख़ुद पर शर्म आयी कि वो अपनी बहन के बारे में ऐसा कैसे सोच सकता है।
अब लक्ष्मी ने अनाउन्स किया और सब एक टेबल के पास आ गए जहाँ केक कटना था। तान्या का परिवार उसके पास था। तभी शिवा का फ़ोन बजा। शिवा: हेलो, ओह ताऊ जी ? आप लोग कहाँ हो? हम तो केक काटने जा रहे थे। अच्छा अच्छा आप लोग आओ फिर काटेंगे। फिर वो हरी से बोला: पापा ताऊजी और उनका परिवार होटेल के गेट तक आ गया है, पाँच मिनट रुक जाते हैं ।
सब बातें करने लगे। तभी हरी के बड़े भय्या श्याम और उनका बेटा अजय और उसकी पत्नी रूपा वहाँ आ पहुँचे।
सब एक दूसरे के गले मिले । श्याम भी दिल्ली में ही रहते थे। भाइयों के घरों के बीच में क़रीब २० किलोमीटर की दूरी थी। तान्या ने जब ताऊजी के पैर छुए तब उन्होंने उसे गले से लगा लिया और ना जाने तान्या को क्यों ऐसा लगा कि वो उसे ज़रा ज़ोर से अपने में भींच रहे थे। उनके हाथ भी उसकी पीठ से होते हुए थोड़ी देर के लिए ही सही पर उसके उठे हुए हिप्स पर आया और हाथ हट भी गया। तान्या हैरानी से उनको देखी पर ताऊ जी ने ऐसा व्यवहार किया मानो कुछ हुआ ही ना हो। अब तान्या जब पीछे को हटी तो उसकी आँख एक क्षण के लिए ताऊ जी के पैंट पर पड़ी तो वहाँ उसे साफ़ साफ़ एक बड़ा सा तंबू नज़र आया जिसे ताऊजी ने मुस्कुराकर तान्या को दिखाकर ऐडजस्ट किया।
तान्या वहाँ से हट गयी पर उसे थोड़ा सा अजीब तो लगा ही। फिर तान्या अपनी रूपा भाभी से भी गले लगी। उसके कज़िन अजय ने भी उसे गले लगाया और आशीर्वाद दिया। तान्या की ताई जी का दो साल पहले देहांत हो गया था लम्बी बीमारी के बाद ।
अब सब टेबल के पास आए और तान्या ने केक काटा । सबने तालियाँ बजाईं और जन्म दिन के गाने गाए गए ।तान्या को उसके परिवार के सदस्यों और फिर सहेलियों ने और शिवा के दोस्तों ने भी केक खिलाया। फिर पार्टी शुरू हुई । शिवा के दोस्त बोले: चल भाई हमारा गला कहाँ गीला कराएगा ?
शिवा ने एक वेटर को कहा: ये मेरे चारों दोस्तों और अजय भय्या को ले जाओ उस कमरे में जहाँ सब इंतज़ाम किया है। फिर दोस्तों से और अजय से बोला: आप चलो मैं अभी आता हूँ।
उनके जाने के बाद शिवा तान्या की एक सहेली रम्या से बात करने लगा और कोशिश करने लगा कि वो पट जाए तो थोड़ा बहुत मज़ा ले लेगा।
उधर तान्या अपनी मम्मी और रूपा भाभी के साथ बातें कर रही थी तभी उसकी सहेलियाँ भी आ गयीं और सन खाते हुए बातें करने लगे।
हरी भी अपने दोस्तों और भय्या के साथ एक टेबल पर बैठा और श्याम बोला: क्या हरी कुछ पीने का इंतज़ाम नहीं किया है क्या?
हरी: वाह भय्या पार्टी हो और ड्रिंकस ना हो ऐसा कभी हो सकता है।
तभी वेटर वहाँ ड्रिंकस सर्व करने लगे। जल्दी ही सब नशे में मस्त होने लगे।
उधर कमरे में अजय भी शिवा के दोस्तों के साथ मस्त हो रहा था।
उधर शिवा रम्या से मीठी मीठी बात करते हुए उसे क़रीब क़रीब पटा ही लिया था।
अब शिवा बोला: चलो ना रम्या मेरे साथ चलो थोड़ी सी वाइन पीते है।
रम्या दो बार पार्टी में वाइन पी चुकी थी सो वह उसके साथ चली गयी ।
तान्या ने रम्या को भाई के साथ जाते देखा तो वह समझ गयी कि कुछ गड़बड़ है। वह सबकी नज़र बचाकर उनके पीछे गयी और उनको एक कमरे में जाते देखकर उसका नम्बर नोट किया और वापस आ गयी।
क़रीब एक घंटे के बाद ताऊजी उठे और अजय को आवाज़ दिए। अजय तो वहाँ था नहीं। उनकी बहू रूपा भाग कर उनके पास गयी और बोली: पापा ये तो यहाँ नहीं है। कुछ काम था क्या?
श्याम थोड़ा लड़खड़ाते हुए: हाँ बहू ज़रा बाथरूम जाना था पर थोड़ा ज़्यादा चढ़ गयी है। थोड़ा सा सहारा दे दो।
रूपा ने देखा कि हरी और बाक़ी के मर्द सब मस्ती में झूम रहे थे और किसी का भी ध्यान उसके ससुर पर नहीं था ।उसने ससुर की कमर में हाथ रखा और श्याम ने बहू के कंधे पर हाथ रखा और दोनों बाथरूम की ओर चल पड़े।
अब तान्या सोची कि ज़रा मैं भी उस कमरे में जाऊँ जहाँ भय्या रम्या को लेकर गए हैं । उसे पता था कि वहाँ दारू चल रही होगी। उसने आज तक कभी वाइन भी नहीं ली थी। जब वह लॉबी की तरफ़ मुड़ी तो उसने देखा कि ताऊ जी अपनी बहू के साथ उसका सहारा लेकर बाथरूम को जा रहे हैं और तभी उसने जो देखा वो सन्न रह गयी। ताऊ जी ने अपने एक हाथ को रूपा के कंधे पर रखा हुआ था। उनका वह हाथ रूपा के ब्लाउस पर आया और वह उसकी एक बड़ी सी चूचि दबाने लगे। रूपा: पापा क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।
श्याम: हा हा यहाँ कौन है बहू? फिर वह अपना हाथ नीचे लाकर उसकी बड़ी बड़ी गाँड़ दबाने लगे। रूपा छिटक कर अलग हुई और बोली: जाइए बाथरूम आ गया है अंदर जायीये।
नशे में झूमते हुए श्याम: अरे बहू आओ ना तुम भी एक राउंड यहाँ कर लेते है।
रूपा: पापा आपसे खड़े तो हुआ नहीं जा रहा है और आप राउंड करोगे। जाओ जल्दी से निपट कर आओ। मैं यहीं खड़ी हूँ।
श्याम फिर से उसकी गाँड़ दबाकर: बहू आज तो तुम्हारी गाँड़ ही मारूँगा।
रूपा हँसकर: खड़े तो हो जायीये सीधे फिर जो मारना हो मार लीजिएगा ।
यह कहकर वो हँसती हुई वापस आ गयी। तान्या को तो काटों ख़ून नहीं। ये क्या हो रहा था ससुर और बहू में। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ वो हड़बड़ा कर उस कमरे में घुसी। जैसे ही वह अंदर आयी उसकी हालत एक बार फिर से ख़राब हो गयी। अंदर शिवा के दो दोस्त तो लुढ़क गए थे । पर जो हैरान करने वाला दृश्य था वो ये कि शिवा और अजय भय्या रम्या की एक एक चूची दबा रहे थे। शिवा का एक हाथ उसके स्कर्ट के अंदर ऊपर नीचे हो रहा था और रम्या आऽऽऽऽह कर रही थी। शिवा के एक एक हाथ भय्या के दोस्तों के पैंट से खड़े लंड पर था और वो बहुत ही उत्तेजित थी और अपनी गाँड़ हिलाकर शायद भय्या की ऊँगलियों का मज़ा ले रही थी। वो सोफ़े पर अधलेटी सी पड़ी थी और चार मर्द उसके ऊपर चढ़े जा रहे थे। तभी वह आऽऽऽऽऽऽह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइ चिल्लाई और फिर एक झटके से शांत हो गयी।
ये सब १८ साल की तान्या के लिए कुछ ज़्यादा ही हो रहा था। अभी ताऊजी और भाभी का देखी और अब यहाँ ये सब। वो चिल्लाई: ये सब क्या हो रहा है?
शिवा और अजय हड़बड़ा कर उठे और तान्या की आँखों के आगे दो बड़े से तंबू तने हुए थे उनकी पैंट में। रम्या ने जल्दी से अपना हाथ उन लड़कों के पैंट से हटाया जहाँ पैंट पर तंबू और साथ में गीला सा कुछ धब्बा भी था। रम्या अपने कपड़े ठीक करने लगी और बोली: देखो ना तान्या इन लोगों ने मुझे वाइन पिला कर मेरे साथ पता नहीं क्या क्या कर दिया।
अजय: अरे कुछ नहीं किया तुम्हारे साथ। और हमने नहीं पिलाई तुम ख़ुद से पीना चाहती थी।
शिवा: हाँ तान्या ये अपने मज़े से पी रही थी।
तान्या की आँख ना चाहते हुए भी भय्या के तंबू पर गयी और वह सिहर उठी और बोली: चलो रम्या अब चलो यहाँ से। बहुत पी ली है तुमने।
फिर वो रम्या को वहाँ से लेकर बाहर लायी और रम्या के ड्राइवर को फ़ोन किया और बाहर कार में छोड़कर आयी।
उधर हरी के सब दोस्त जा चुके थे और अब श्याम और हरी ही बचे थे। अब श्याम ने आवाज़ दी: अरे रूपा और लक्ष्मी आओ यहाँ बैठो।
दोनों आकर उनके साथ टेबल में बैठ गयीं । लक्ष्मी श्याम के पास और रूपा हरी के साथ वाली कुर्सी में बैठ गयी। अब श्याम ने दो ग्लास वाइन बनाई और उन दोनों को देता हुए बोला: चलो तुम दोनों भी पीओ।
दोनों मुस्कुराकर पीने लगीं। श्याम ने लक्ष्मी की जाँघ सहलाते हुए कहा: लक्ष्मी बहुत दिन हो गए तुमसे मज़े किए हुए।
लक्ष्मी: जी भय्या होली के बाद आज मिले हैं।
श्याम: वाह क्या याद दिलाई होली की। बहुत मज़ा किए थे। क्यों हरी याद है ना।
हरी: हाँ भय्या हम दोनों ने इसकी एक साथ ली थी। और फिर रूपा की चूची दबाकर बोला: और बहू से भी ख़ूब मस्ती की थी।
रूपा: आप दोनों भाई उस दिन पागल हो गए थे। वो तो अच्छा हुआ कि अजय शिवा और तान्या बाहर गए थे होली खेलने वरना मुश्किल हो जाती।
इस पर सब हँसने लगे। श्याम ने लक्ष्मी का हाथ अपने पैंट जे ऊपर से लंड पर रखा और हरी ने रूपा को देखा और वह ख़ुद ही उसका लंड दबाने लगी।
उधर आज तान्या हिल सी गयी थी। वो पापा के टेबल पर आयी तो देखा कि ताऊ जी वापस आकर फिर से पीरहे थे। पापा के सब दोस्त जा चुके थे।अब मम्मी और भाभी भी पी रहे थे। तान्या को देखकर सब सलीक़े से बैठ गए। वो हरी के पास आयी और बोली: पापा अब बस करिए । चलिए घर चलते हैं।
हरी ने देखा कि तान्या और सुंदर लग रही है। वो सोचा कि शायद मुझे चढ़ गयी है। वो सिर को झटका और बोला: बस बेटी चलते हैं। वैसे अब तुम भी १८ की हो गयी हो आज एक वाइन का ग्लास तुम्हारा भी बनता है।
इस पर श्याम ख़ुश होकर बोला: सही कहा। लो बेटी ये वाइन पीओ । उसे एक ग्लास देते हुए वह बोला। तान्या ने देखा की ताऊ जी की नज़रें उसकी चूचियों को घूर रहीं थी।
तभी लक्ष्मी बोली: हाँ हाँ बेटी पी लो एक ग्लास। थकावट दूर हो जाएगी। जेठ जी ने मुझे और रूपा को भी दो दो ग्लास पिला दी है।
तान्या ने ग्लास लिया और अपने पापा के पास जाकर खड़े खड़े ही पीने लगी। तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि पापा का हाथ उसकी कमर पर आ गया था और वो उसे सहलाते हुए बोले: बेटी वाइन का टेस्ट पसंद आया?
तान्या: जी पापा अच्छा है ।
तभी उसने महसूस किया कि पापा का हाथ उसकी कमर सहलाते हुए अब उसकी एक हिप पर आ गया था। वह थोड़ा सा चौंकी और पापा को देखी। पर वह तो श्याम से बात कर रहे थे । और श्याम अब भी उसकी चूचियों को बीच बीच में घूर रहे थे।
आज उसका अठ्ठारवाँ जन्म दिन काफ़ी महत्व पूर्ण था क्योंकि आज उसका वाइन से और कुछ सेक्शूअल फ़ीलिंग का सामना हुआ था।
आगे क्या होगा देखते हैं —————CONTI....................
आपके कामेंट्स का इंतज़ार रहेगा ।
तान्या को नींद नहीं आ रही थी। रात के १२ बज गए थे और वह करवटें बदल रही थी। वह १९ साल की एक जवान और स्वस्थ बदन की लड़की थी। उसकी शादी उसके मर्ज़ी के ख़िलाफ़ एक ३० साल के युवक रवि से कर दी गयी थी। तान्या अभी आगे पढ़ना चाहती थी पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। अच्छा ख़ासा कमाऊ लड़का मिल गया था तो उसके मॉ बाप क्यों उसे हाथ से जाने देते। शादी को ३ महीने हो गए थे और आज पहली बार रवि अपनी कम्पनी के काम से टूर पर बाहर गया था। उसने बताया हुआ था कि क्योंकि वह मार्केटिंग में है ,इसलिए उसे कभी कभी टूर पर जाना पड़ेगा। दिल्ली शहर के इस फ़्लैट में वो आज रात बिलकुल अकेली थी और उसे पुरानी बातें याद आ रही थी।
तान्या एक अल्लढ़ और मौजी लड़की थी। परिवार में माँ और पिता के अलावा एक बड़ा भाई भी था। जीवन बिलकुल ठीक ठाक चल रहा था। जब वह १८ की हुई उसका जन्म दिन बड़ी धूम धाम से मनाया गया। उसके पापा हरी व्यास ने सब परिवार वालों को बुलाया और कुछ सहेलियाँ भी आयीं थीं। तान्या ने १२वीं की परीक्षा भी अच्छे नम्बरों से पास की थी । उसकी मम्मी लक्ष्मी भी बहुत ख़ुश थी कि अब बिटिया कोलेज जाएगी। शिवा भय्या ने भी उसे सुबह सुबह प्यार किया और जन्म दिन की बधाई दिया। शिवा उससे २ साल बड़ा था और कोलेज में पढ़ता था। हरी व्यास का अपना व्यवसाय था और वो एक उच्च मध्यम वर्ग में गिने जाते थे।
शाम को पार्टी एक होटेल में रखी गयी थी। तान्या एक सुंदर से टॉप और स्कर्ट में तय्यार होकर आयी थी। वह एक लम्बी स्वस्थ और दिल्ली की फ़ैशनबल लड़की थी। ३२ साइज़ की चूचियाँ ब्रा में फँसी हुई टॉप से साफ़ दिख रही थी। टॉप से उसकी गहरी क्लीवेज़ भी दिखाई दे रही थी। पेट का कुछ हिस्सा नंगा था और उसकी गहरी नाभि जैसे क़यामत ढा रही थी। छोटी सी स्कर्ट से नीचे उसकी गदराई हुई गोरी पुष्ट जाँघें तो उफ़्फ़्फ क्या मस्त दिख रहीं थीं । स्कर्ट से पैंटी के किनारे भी दिख रहे थे।
जैसे ही वह अपनी सहेली रम्या के साथ अंदर हाल में आयी , सब मर्दों की मानो साँसे ही रुक गयीं । वह अंदर आकर अपनी मम्मी लक्ष्मी से लिपट गयी।
लक्ष्मी: वाह बेटी, आज बहुत प्यारी लग रही हो। ध्यान रखना कोई तुमको पसंद ना कर ले।
तान्या: मम्मी कोई मुझे पसंद करे उससे क्या होता है। सवाल ये है कि मैं भी उसे पसंद करूँ।
दोनों हँसने लगे। तान्या आगे जाकर पापा की तरफ़ बढ़ी जो एक कोने में होटेल के मैनेजर को कुछ आदेश दे रहे थे। तान्या को अपनी ओर आते देखकर हरी पहली बार थोड़ा सा अलग सा महसूस किया। आज उसकी बेटी सच में मस्त लग रही थी। तान्या पास आयी और आके अपने पापा से लिपट गयी और हरी ने उसकी सख़्त चूचियों ka दबाव अपने सीने पर महसूस किया और पहली बार अपनी बेटी के स्पर्श से उसका लंड झटका मारा। उसके हाथ बेटी की पीठ सहलाने लगे और वहाँ ब्रा का स्ट्रैप छूकर वह और उत्तेजित हो गया। उसका लंड अब काफ़ी बड़ा हो गया था। वो अपनी कमर पीछे को किया ताकि तान्या को उसके लंड की चुभन का अहसास ना हो जाए। फिर वह झुका और उसके गाल चूमा और बोला: चलो बेटी क़रीब क़रीब सब आ गए हैं अब केक काटा जाए।
तान्या उससे अलग हुई और बोली: भय्या कहाँ है?
हरी: वो देखो अपने दोस्तों के साथ खड़ा बातें कर रहा है।
उसके जाते ही उसने अपनी पैंट में लंड ऐडजस्ट किया और थोड़ा सा शर्मिंदा भी हुआ।
तान्या उसी तरफ़ को गयी और वहाँ जाकर अपने भाई के गले लगी। शिवा बोला: वाह आज तो बहुत सुंदर दिख रही हो। वह भी अपने सीने में उसके सख़्त अनारों के स्पर्श से पहली बार थोड़ा सा विचलित हुआ और फिर बोला: चलो केक काटा जाए।
शिवा ने नोटिस किया कि उसके सब दोस्त तान्या को ख़ा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे। उसने देखा कि कुछ दोस्तों ने तो उसकी जाँघें और स्कर्ट से उभरी मस्त गाँड़ देखकर अपना लंड भी पैंट में ऐडजस्ट करना शुरू कर दिया था। अचानक उसे भी महसूस हुआ कि उसका लंड भी अकड़ने लगा है। उसे ख़ुद पर शर्म आयी कि वो अपनी बहन के बारे में ऐसा कैसे सोच सकता है।
अब लक्ष्मी ने अनाउन्स किया और सब एक टेबल के पास आ गए जहाँ केक कटना था। तान्या का परिवार उसके पास था। तभी शिवा का फ़ोन बजा। शिवा: हेलो, ओह ताऊ जी ? आप लोग कहाँ हो? हम तो केक काटने जा रहे थे। अच्छा अच्छा आप लोग आओ फिर काटेंगे। फिर वो हरी से बोला: पापा ताऊजी और उनका परिवार होटेल के गेट तक आ गया है, पाँच मिनट रुक जाते हैं ।
सब बातें करने लगे। तभी हरी के बड़े भय्या श्याम और उनका बेटा अजय और उसकी पत्नी रूपा वहाँ आ पहुँचे।
सब एक दूसरे के गले मिले । श्याम भी दिल्ली में ही रहते थे। भाइयों के घरों के बीच में क़रीब २० किलोमीटर की दूरी थी। तान्या ने जब ताऊजी के पैर छुए तब उन्होंने उसे गले से लगा लिया और ना जाने तान्या को क्यों ऐसा लगा कि वो उसे ज़रा ज़ोर से अपने में भींच रहे थे। उनके हाथ भी उसकी पीठ से होते हुए थोड़ी देर के लिए ही सही पर उसके उठे हुए हिप्स पर आया और हाथ हट भी गया। तान्या हैरानी से उनको देखी पर ताऊ जी ने ऐसा व्यवहार किया मानो कुछ हुआ ही ना हो। अब तान्या जब पीछे को हटी तो उसकी आँख एक क्षण के लिए ताऊ जी के पैंट पर पड़ी तो वहाँ उसे साफ़ साफ़ एक बड़ा सा तंबू नज़र आया जिसे ताऊजी ने मुस्कुराकर तान्या को दिखाकर ऐडजस्ट किया।
तान्या वहाँ से हट गयी पर उसे थोड़ा सा अजीब तो लगा ही। फिर तान्या अपनी रूपा भाभी से भी गले लगी। उसके कज़िन अजय ने भी उसे गले लगाया और आशीर्वाद दिया। तान्या की ताई जी का दो साल पहले देहांत हो गया था लम्बी बीमारी के बाद ।
अब सब टेबल के पास आए और तान्या ने केक काटा । सबने तालियाँ बजाईं और जन्म दिन के गाने गाए गए ।तान्या को उसके परिवार के सदस्यों और फिर सहेलियों ने और शिवा के दोस्तों ने भी केक खिलाया। फिर पार्टी शुरू हुई । शिवा के दोस्त बोले: चल भाई हमारा गला कहाँ गीला कराएगा ?
शिवा ने एक वेटर को कहा: ये मेरे चारों दोस्तों और अजय भय्या को ले जाओ उस कमरे में जहाँ सब इंतज़ाम किया है। फिर दोस्तों से और अजय से बोला: आप चलो मैं अभी आता हूँ।
उनके जाने के बाद शिवा तान्या की एक सहेली रम्या से बात करने लगा और कोशिश करने लगा कि वो पट जाए तो थोड़ा बहुत मज़ा ले लेगा।
उधर तान्या अपनी मम्मी और रूपा भाभी के साथ बातें कर रही थी तभी उसकी सहेलियाँ भी आ गयीं और सन खाते हुए बातें करने लगे।
हरी भी अपने दोस्तों और भय्या के साथ एक टेबल पर बैठा और श्याम बोला: क्या हरी कुछ पीने का इंतज़ाम नहीं किया है क्या?
हरी: वाह भय्या पार्टी हो और ड्रिंकस ना हो ऐसा कभी हो सकता है।
तभी वेटर वहाँ ड्रिंकस सर्व करने लगे। जल्दी ही सब नशे में मस्त होने लगे।
उधर कमरे में अजय भी शिवा के दोस्तों के साथ मस्त हो रहा था।
उधर शिवा रम्या से मीठी मीठी बात करते हुए उसे क़रीब क़रीब पटा ही लिया था।
अब शिवा बोला: चलो ना रम्या मेरे साथ चलो थोड़ी सी वाइन पीते है।
रम्या दो बार पार्टी में वाइन पी चुकी थी सो वह उसके साथ चली गयी ।
तान्या ने रम्या को भाई के साथ जाते देखा तो वह समझ गयी कि कुछ गड़बड़ है। वह सबकी नज़र बचाकर उनके पीछे गयी और उनको एक कमरे में जाते देखकर उसका नम्बर नोट किया और वापस आ गयी।
क़रीब एक घंटे के बाद ताऊजी उठे और अजय को आवाज़ दिए। अजय तो वहाँ था नहीं। उनकी बहू रूपा भाग कर उनके पास गयी और बोली: पापा ये तो यहाँ नहीं है। कुछ काम था क्या?
श्याम थोड़ा लड़खड़ाते हुए: हाँ बहू ज़रा बाथरूम जाना था पर थोड़ा ज़्यादा चढ़ गयी है। थोड़ा सा सहारा दे दो।
रूपा ने देखा कि हरी और बाक़ी के मर्द सब मस्ती में झूम रहे थे और किसी का भी ध्यान उसके ससुर पर नहीं था ।उसने ससुर की कमर में हाथ रखा और श्याम ने बहू के कंधे पर हाथ रखा और दोनों बाथरूम की ओर चल पड़े।
अब तान्या सोची कि ज़रा मैं भी उस कमरे में जाऊँ जहाँ भय्या रम्या को लेकर गए हैं । उसे पता था कि वहाँ दारू चल रही होगी। उसने आज तक कभी वाइन भी नहीं ली थी। जब वह लॉबी की तरफ़ मुड़ी तो उसने देखा कि ताऊ जी अपनी बहू के साथ उसका सहारा लेकर बाथरूम को जा रहे हैं और तभी उसने जो देखा वो सन्न रह गयी। ताऊ जी ने अपने एक हाथ को रूपा के कंधे पर रखा हुआ था। उनका वह हाथ रूपा के ब्लाउस पर आया और वह उसकी एक बड़ी सी चूचि दबाने लगे। रूपा: पापा क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।
श्याम: हा हा यहाँ कौन है बहू? फिर वह अपना हाथ नीचे लाकर उसकी बड़ी बड़ी गाँड़ दबाने लगे। रूपा छिटक कर अलग हुई और बोली: जाइए बाथरूम आ गया है अंदर जायीये।
नशे में झूमते हुए श्याम: अरे बहू आओ ना तुम भी एक राउंड यहाँ कर लेते है।
रूपा: पापा आपसे खड़े तो हुआ नहीं जा रहा है और आप राउंड करोगे। जाओ जल्दी से निपट कर आओ। मैं यहीं खड़ी हूँ।
श्याम फिर से उसकी गाँड़ दबाकर: बहू आज तो तुम्हारी गाँड़ ही मारूँगा।
रूपा हँसकर: खड़े तो हो जायीये सीधे फिर जो मारना हो मार लीजिएगा ।
यह कहकर वो हँसती हुई वापस आ गयी। तान्या को तो काटों ख़ून नहीं। ये क्या हो रहा था ससुर और बहू में। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ वो हड़बड़ा कर उस कमरे में घुसी। जैसे ही वह अंदर आयी उसकी हालत एक बार फिर से ख़राब हो गयी। अंदर शिवा के दो दोस्त तो लुढ़क गए थे । पर जो हैरान करने वाला दृश्य था वो ये कि शिवा और अजय भय्या रम्या की एक एक चूची दबा रहे थे। शिवा का एक हाथ उसके स्कर्ट के अंदर ऊपर नीचे हो रहा था और रम्या आऽऽऽऽह कर रही थी। शिवा के एक एक हाथ भय्या के दोस्तों के पैंट से खड़े लंड पर था और वो बहुत ही उत्तेजित थी और अपनी गाँड़ हिलाकर शायद भय्या की ऊँगलियों का मज़ा ले रही थी। वो सोफ़े पर अधलेटी सी पड़ी थी और चार मर्द उसके ऊपर चढ़े जा रहे थे। तभी वह आऽऽऽऽऽऽह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइ चिल्लाई और फिर एक झटके से शांत हो गयी।
ये सब १८ साल की तान्या के लिए कुछ ज़्यादा ही हो रहा था। अभी ताऊजी और भाभी का देखी और अब यहाँ ये सब। वो चिल्लाई: ये सब क्या हो रहा है?
शिवा और अजय हड़बड़ा कर उठे और तान्या की आँखों के आगे दो बड़े से तंबू तने हुए थे उनकी पैंट में। रम्या ने जल्दी से अपना हाथ उन लड़कों के पैंट से हटाया जहाँ पैंट पर तंबू और साथ में गीला सा कुछ धब्बा भी था। रम्या अपने कपड़े ठीक करने लगी और बोली: देखो ना तान्या इन लोगों ने मुझे वाइन पिला कर मेरे साथ पता नहीं क्या क्या कर दिया।
अजय: अरे कुछ नहीं किया तुम्हारे साथ। और हमने नहीं पिलाई तुम ख़ुद से पीना चाहती थी।
शिवा: हाँ तान्या ये अपने मज़े से पी रही थी।
तान्या की आँख ना चाहते हुए भी भय्या के तंबू पर गयी और वह सिहर उठी और बोली: चलो रम्या अब चलो यहाँ से। बहुत पी ली है तुमने।
फिर वो रम्या को वहाँ से लेकर बाहर लायी और रम्या के ड्राइवर को फ़ोन किया और बाहर कार में छोड़कर आयी।
उधर हरी के सब दोस्त जा चुके थे और अब श्याम और हरी ही बचे थे। अब श्याम ने आवाज़ दी: अरे रूपा और लक्ष्मी आओ यहाँ बैठो।
दोनों आकर उनके साथ टेबल में बैठ गयीं । लक्ष्मी श्याम के पास और रूपा हरी के साथ वाली कुर्सी में बैठ गयी। अब श्याम ने दो ग्लास वाइन बनाई और उन दोनों को देता हुए बोला: चलो तुम दोनों भी पीओ।
दोनों मुस्कुराकर पीने लगीं। श्याम ने लक्ष्मी की जाँघ सहलाते हुए कहा: लक्ष्मी बहुत दिन हो गए तुमसे मज़े किए हुए।
लक्ष्मी: जी भय्या होली के बाद आज मिले हैं।
श्याम: वाह क्या याद दिलाई होली की। बहुत मज़ा किए थे। क्यों हरी याद है ना।
हरी: हाँ भय्या हम दोनों ने इसकी एक साथ ली थी। और फिर रूपा की चूची दबाकर बोला: और बहू से भी ख़ूब मस्ती की थी।
रूपा: आप दोनों भाई उस दिन पागल हो गए थे। वो तो अच्छा हुआ कि अजय शिवा और तान्या बाहर गए थे होली खेलने वरना मुश्किल हो जाती।
इस पर सब हँसने लगे। श्याम ने लक्ष्मी का हाथ अपने पैंट जे ऊपर से लंड पर रखा और हरी ने रूपा को देखा और वह ख़ुद ही उसका लंड दबाने लगी।
उधर आज तान्या हिल सी गयी थी। वो पापा के टेबल पर आयी तो देखा कि ताऊ जी वापस आकर फिर से पीरहे थे। पापा के सब दोस्त जा चुके थे।अब मम्मी और भाभी भी पी रहे थे। तान्या को देखकर सब सलीक़े से बैठ गए। वो हरी के पास आयी और बोली: पापा अब बस करिए । चलिए घर चलते हैं।
हरी ने देखा कि तान्या और सुंदर लग रही है। वो सोचा कि शायद मुझे चढ़ गयी है। वो सिर को झटका और बोला: बस बेटी चलते हैं। वैसे अब तुम भी १८ की हो गयी हो आज एक वाइन का ग्लास तुम्हारा भी बनता है।
इस पर श्याम ख़ुश होकर बोला: सही कहा। लो बेटी ये वाइन पीओ । उसे एक ग्लास देते हुए वह बोला। तान्या ने देखा की ताऊ जी की नज़रें उसकी चूचियों को घूर रहीं थी।
तभी लक्ष्मी बोली: हाँ हाँ बेटी पी लो एक ग्लास। थकावट दूर हो जाएगी। जेठ जी ने मुझे और रूपा को भी दो दो ग्लास पिला दी है।
तान्या ने ग्लास लिया और अपने पापा के पास जाकर खड़े खड़े ही पीने लगी। तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि पापा का हाथ उसकी कमर पर आ गया था और वो उसे सहलाते हुए बोले: बेटी वाइन का टेस्ट पसंद आया?
तान्या: जी पापा अच्छा है ।
तभी उसने महसूस किया कि पापा का हाथ उसकी कमर सहलाते हुए अब उसकी एक हिप पर आ गया था। वह थोड़ा सा चौंकी और पापा को देखी। पर वह तो श्याम से बात कर रहे थे । और श्याम अब भी उसकी चूचियों को बीच बीच में घूर रहे थे।
आज उसका अठ्ठारवाँ जन्म दिन काफ़ी महत्व पूर्ण था क्योंकि आज उसका वाइन से और कुछ सेक्शूअल फ़ीलिंग का सामना हुआ था।
आगे क्या होगा देखते हैं —————CONTI....................
आपके कामेंट्स का इंतज़ार रहेगा ।