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" मेरे साथ आओ ।" तांत्रिक बेतीराम ने कहा ।
तांत्रिक बेलीराम ने मंगलू को लेकर एक ऐसे कमरे में पहुंचा जो कि अन्य कमरे के नीचे वना हआ था । तहखाने जैसा था वो कमरा । उस कमरे में शैतान के बेटे की फीट भर ऊचाई की खूबसूरत मूर्ति बीचो बीच खड्री थी है इसके अलावा कमरे में कुछ भी नहीं था ।
"ये मूतिं किसकी हैं?" मंगलू ने पूछा ।
"शेतान के देते भवतारा की ।" बेलीराम ने जवाब दिया ।
"कितनी खूबसूरत है । कितने अच्छे रंग भरे हैं मूर्ति में ।" मंगलू ने कहा ।
तांत्रिक बेलीराम आगे बढकर पूर्ति के पास बैठा और एक हाथ मे से मूर्ति के साथ छेढ़छाड़ करने लगा । दूसरे हाथ में शैतान के बेटे का लेदरकैस युक्त चाकू थाम रखा था ।
"अब हमने कहां जाना है…क्या करना मंगलू ने पूछा । "
"हम शेतान के बेटे के मृत शरीर के पास जाएंगे ।"
"मृत शरीर ?"
"हां । 210 बरस से, शैतान के बेटे के शरीर को सभाल कर रखा-हुआ है !"
" तुमने ?"
" जो भी इस डेरे को संभालता है, शैतान के बेटे के शरीर की भी देख-रेख करता है ।। यहां सव शैतान के बेटे के सेवक हैं । जव मुझे इस डेरे का मालिक बनाया गया तो सब कुछ मेरी निग़रानी में आ गया ।"
तभी वहां वेहद मद्धिम सी आवाज़ गूंजी और सामने की दीवार का एक हिस्सा एक तरफ सरकने लगा । मंगलू ने चौककर उधर देखा और उसके होंठों से निकला ।
“ये क्या हो रहा है?"
" मैने किया है ।" बेलीराम, शैतान के बेटे की मूर्ति के पास खडा होता हुआ बोला---------"शैतान के बेटे के मृत शरीर के पास जाने का ये रास्ता । गुप्त रास्ता, इसे मेरे अलावा और कोई नहीं जानता !"
" ओह.......!"
"मेरे पीछे आओ !!" तांत्रिक बेलीराम उस रास्ते की तरफ बढ गया । मंगलू पीछे था।
आगे सीढ़ियाँ थी । वे नीचे उतरने लगे ।।
दस सीढियों के पश्चात फर्श-सा कुछ आ गया । वहां घोर अंधेरा था । हाथ को हाथ दिखाई न दे रहा था । आखें फाड़कर देखने पर भी, कुछ नजर न आया ।
"ये कैसी जगह है?" मंगलू ने पूछा । "
" चुप रहो ।" तांत्रिक बेलीराम ने कहा। तभी एक कड़कड़ाती आवाज गूजी ।
"कौन है?"
"मैं हूँ बॉथम । बेलीराम ।"
"ओह आज बरसों बाद इधर आना कैसे हुआ?"
“शेतान के बेटे के शरीर के पास जाना है ।"
"साथ कौन है तेरे"
“मंगलु !"
"समझा तो भवतारा के जीवित होने का वक्त आ गया । हमारा देवता फिर जिन्दा हो रहा है !!”
“मुझे आगे बढने के लिए रास्ता दे।"
"क्या करना होगा मुझे?”
“सारा रास्ता प्रकाश से भर दे । हमें कुछ दिखाईं नहीं दे रहा।"
अगले ही पल वहां प्रकाश हों गया ।
वे एक कमरे जैसी जगह थी, परंतु हर जगह धूल और जाले की वजह से गदी हो रही थी । इस कमरे में भी फर्श के बीचो बीच शैतान के देवता की मूर्ति लगी हुई थी । देखरेख न होने की वजह से मूर्ति पर धुल और जाला लगा नजर आ रहा था ।
तात्रिक बेलीराम आगे बढा और झुककर उस मूर्ति को घूमाया ।।
उसी पल वो रास्ता बंद हो गया ,जहाँ से वे इस तरफ आए ।
मंगलू की निगाह हर तरफ़ फिर रही थी ।"
सामने ही दो रास्ते जाते नजर आ रहे थे, परंतु वे अंधेरे से भरे थे । अगले ही पल वे रास्ते रोशनी से जगमगा उठे । जाने वो रोशनी कहाँ से आ रही थी । वहाँ मकडी के जाले लगे दिखाई दे रहे थे ।
"जा बेलीराम, अव तेरे को हर रास्ते में रोशनी मिलेगी !" बॉथम की आबाज वहां गूंजी ।
"कहां जाऊ ?"
" तेरे सामने दो रास्ते हैं, किसी भी एक रास्ते पर चला जा ।" बॉथम की आवाज गूजी ।
“मजाक करता है मुझसे?"
"मजाक------नही तो. ..!"
"रास्ता खोल, ये दोनों रास्ते तो दुश्मनों को धोखा देने के लिए वना रखे हैं, जो इधर आ जाएं तो इन दोनों रास्तों पर आगे बढते हुए मौत के मुह में चले जाएं ।"
"तो सव याद है तुझे?"
“याद क्यों न रखूंगा ।"
"मुझे भी सावधानी से काम लेना पड़ता है । कोई तेरा चेहरा, तेरे रंग-रूप में यहाँ आ जाए तो मैं उसे कैसे पहचानूंगा । इसी वास्ते तेरे को इन दोनों में से किसी एक रास्ते पर जाने को कहा ।"
"रास्ता खोल ।"
उसी पल एक तरफ की दीवार थोड्री सी सरकी और भीतर जाने की जगह दिखी ।
“आ मंगलू !"
बेलीराम मंगलू के साथ उस रास्ते में प्रवेश कर गया । वो वहुत हद तक साफ़-सुथरां रास्ता था । वहां इतनी रोशनी थी कि वे रास्ता देखते आगे बढ़ सके ।
तेजी से आगे बढने लगे ।
कहीं पर रास्ता तंग हो जाता तो कहीं खुला । यहीं सांस लेने के लिए हवा का पूरा इंतजाम था । जाने किधर से हवा जा रही थी, अलबत्ता कहीं-कहीं मंगलू को घुटन-स्री महसुस होती ।
"ये कैसा अजीब-सा रास्ता है ।" मंगलू ने आगे बढते हुए कहा ।
तांत्रिक बेलीराम आगे की जा रहा था । शैतान के बेटे के चाकू को उसने कपडों में ऱख लिया था ।
" तुम कहते हो कि शैतान के बेटे का शरीर 210 बरस से रखा हुआ! ” मंगलू बोला ।
"हां ।”
"तो अब तक वो खराब हो गया होगा ।"
"'नहीं । शरीर सुरक्षित है ।"
" ऐसा कैसे हो सकता है?”
"शैतान के बेटे के शरीर को कई तरह के रसायनों का लेप लगाकर सुरक्षित रखा हुआ है । वो कभी भी खराब नहीं हो सकता । वक्त वक्त पर रसायनों के लेप से मरम्मत होती रहती ।”
एकाएक वो रास्ता आगे बंद दिखा । वे दोनों ठिठके ।।
“ये क्या!"' मंगलू बोला…“आगे तो रास्ता ही नहीं है ।"
"ये सब दुश्मनों को धोखा देने के लिए है !" तांत्रिक बेलीराम ने गंभीर स्वर में कहा…“अगर कोई हमारी सुरक्षा को पार करके इधर आ भी जाए तो वो यहां से आगे न बढ सके !”
"बहुत पक्के इंतजाम कर रखे है । "
"करने पडते हैं । शैतान के बेटे के दुश्मन बहुत हैं । वे शैतान के बेटे के शरीर को नष्ट कर देना चाहते हैं ।"
"ऐसे लोगों को तो खत्म कर देना चाहिए ।"
"गिनती के लोग हों तो खत्म कर दे, परंतु दुश्मन तो असंख्य हैं । जिनके चेहरों से हम परिचित भी नहीं । ऐसे में किस-किसको खत्म करें ।" कहते हुए बेलीराम नीचे बैठा और फर्श के एक पत्थर को हटाया तो भीतर छोटा-सा गड्ढा दिखा उसने गड्ढे में हाथ डालकर भीतर जाने क्या किया कि सामने की दीवार हटती चली ।
रास्ता नजर जाने लगा ।