• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

हर पल अब कामिनी को भवतारा अच्छा लगता जा रहा था ।

"खामोश क्यों हो गई ? क्या मैं ये समझू कि मंगलू तुम्हें ज्यादा अच्छा लगता है?”

"गलत बात क्यों कहते हो?"

"तो?”

" तुम अच्छे लगते हो मुझें । मगलू तो मेरा दोस्त भर है बस ।" कामिनी मुस्कराकर कह उठी ।

वो खुद नहीं समझ पा, रही थी कि उसके होठों से ये सब बाते कैसे निकल रहीँ हैं । ये बात तो वो सपने में भी न सोच सकती थी कि उसके साथ ऐसा शैतान चल रहा है, जो अपनी ताकत के दम पर उससे कोई भी मनचाहा काम करवा सकता है ।

" मैं तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा, बहुत शानदार जिन्दगी दुगा तुम्हें, सब तुम्हारे आगे झुकेंगे ।"

"सच ।"

"हां तुम्हारी कसम कामिनी ।"

"लेकिन मुझे तुम्हारी बात पसद नहीं आई ।" कामिनी के होंठों से निकला ।

"क्या? "

" दिन में तुम मेरे पास रहोगे और रात को नहीं, ऐसा भी भला कही होता है?”

" ये मेरी मजबूरी है प्रिय कामिनी!" भवतारा ने अफसोस जताते हुए मीठे स्वर में कहा--" तुमसे जुदा होना मुझे भी अच्छा नंही लगेगा, परंतु ऐसा करना हमारे खानदान पर ये श्राप है कि जो औरत रात के वक्त मर्द के साथ रहेगी, वो सुबह मर जाएगी ।"

" ओह......!"

" प्यार में तो लोग क्या-क्या नहीं करते, क्या तुम ये छोटी-प्ती बात भी सहन नहीं कर सकति । अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो मेरी ...... मेरी इस बात से तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी । रात की अपेक्षा हम दिन में सेज सजाया करेंगे ।"

कामिनी का चेहरा शर्म से भर उठा ।

"हां कहो कामिनी!"

"हा ।"

"मैं दिन में तुम्हारे पास आया करूगा और अंधेरा होने से पहले चला जाया करूंगा । तुम्हारे पास नौकर-चाकर रहेगे । तुम्हें कोई परेशानी नहीं होने दूंगा । क्या तुम ये छोटा-सा त्याग नहीं कर सकती?" भवतारा की आवाज में आग्रह के भाव थे ।

"क्यों नहीं कर सकती, तुम जो कहोगे वो ही करूंगी !"

"ओह, मेरी रानी! तुम कितनी अच्छी हो । तुम्हारा चेहरा ही नही , तुम्हारा दिल भी सुन्दर है ।"

"तुम भी तो अच्छे हो ।"

"सच? "

" हां, पहले मैंने तुम्हें ठीक से पहचाना नहीं । मेरी ही गलती थी ये ।"

"आह ,मैं कितना भाग्यवान वन गया हूं तुम्हें पाकर, तुम अनमोल हो ।" भवतारा ने गहरी सांस ली ।

"मुझे मूख लगी है" । एकाएक कामिनी हक-भरे स्वर में कह उठी ।

"मुझें तो भूख जरा ही नहीं है ।"

"क्यों ?"

"मैंने सुबह बहुत ज्यादा खा लिया था । अब रात की ही पेट भरूगां , परंतु तुम खा लो।"

“क्या खाऊं ?"

" जो भी तुम्हें पसंद हो । बाजार की जो भी जगह तुम्हें अच्छी लगे, वहीं से खाना । उसके बाद तुम्हारे लिए सूट तुम्हारी मां के लिए साडी खरीद दूंगा । तुम्हें सोने का हार भी लेकर दूगा ।"

" सोने का हार? कामिनी चहक उठी ।

" हां, दुनिया की हर कीमती चीज तुम्हारे कदमों में बिछा दूगा, लेकिन एक-शर्त है ।" भवतारा मुस्कराया र!"

" क्या?

"तुम्हें मेरे कदमों में बिछ जाना होगा ।"

भवतारा ने इस तरह कहा कि कामिनी खिलखिलाकर हंस पड्री ।

"तुम बहुत अच्छे हो भवतारा !" कामिनी ने हंसी रोकते हुए कहा ।

कामिनी भवतारा की दीवानी होती जा रही थी । ये सव शैतान के बेटे की ताकतों का कमाल नहीं तो और क्या था । सुबह तक वो भवतारा का चेहरा भी नहीं देखना चाहती थी और अव उसके लिए पहला और आखिरी मर्द भवतारा ही रह गया था ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@
 
कामिनी झोंपडी में पहुंची तो बहुत खुश थी । खुशी छिपाए न छिप रही थी । हाथ में सामान से भरे लिफाफे थे, साथ में था सोने का भारी हार । दुकान पर पहनकर देखा था उस हार को, वो खूब उसे जंच रहा था ।

बसन्ती की निगाह उसके चेहरे पर पड्री तो वो अजीब-से स्वर में बोली ।

"ये क्या हो गया तेरे को…बहुतं खुश है?”

"हां मां ।"

बसन्ती ने होंठ सिकोड़कर उसे देखा ।।

" ये देखो मां, तुम्हारे लिए चार साड्रियां लाई हू। अपने लिए पाच सूट और सोने का भारी हार ।"

"सोने का भारी हार?" बसन्ती के होंठों से निकला ।

"बात क्या है, खुश क्यों नजर आरही है वो तेरे को पसंद आ गया क्या?"

"हां मां, वो बहुत अच्छा है, मैं शादी करूंगी उससे. ..!"

बसन्ती का चेहरा खिल उठा । वो झोपड़े में -बैठे बैठे चिल्लाई ।

"ओ बूढे! सुना तूने कामिनी क्या का रही है?"

झोंपडी के द्वार पर दीनू नजर आया ।

"क्या आफत आ गई ?"

("कामिनी को बो पसंद आ गया है, शादी को तेयार है !"

"हमारे बुरे दिन खत्म हुए ।" दीनू मुस्करा उठा।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@

भवतारा ने मंदिर के गेट के भीतर कदम रखा तो शाम के चार बज रहे थे । सूर्य तेजी से धूप फेक रहा था । अभी शाम होने में वक्त था ।

कामिनी से अलग होने के वाद भवतारा ने यूं ही घंटा-भर बैठने की सोची और मंदिर में आ गया था ।

कामिनी आज उसे पहले से भी अच्छी लगी थी । उसकी खूबसूरती पर भवतारा भी मोहित हो उठा था !!

आज पहली बार कामिनी का करीब हासिल हुआ था उसे । आंखों के सामने कामिनी का चेहरा ही नाच रहा था । सोने का हार जब दुकान पर उसके गले में डाला तो वो कितनी खुश हुई थी । तब उसकी खुशी देखते ही बनती थी । बीती बातों को याद करके भवतारा रह-रहकर मुस्करा पडता ।

"भवतारा.....!"

एकाएक भवतारा ठिठका ।

उसने आसं-पास देखा ।

मंदिर में लोग आ-जा रहे थे ,परंतु वो जानता था कि उसकी शक्तियों ने उसे मंदिर की सीमा के भीतर छिपा रखा है, कोई देख नहीं सकता, ऐसे में फिर किसने उसे पुकारा।

“किसे देख रहा है भवतारा?" आवाज पुनः कानों में पडी ।

"ओह, गुरुदेव -!" भवतारा के होंठों निकला ।

" दुनिया मे पहुँच कर मजे ले रहा है ।" गुरुदेव की आवाज पुन कानों पडी ।

"आप तो जानते ही हैं कि मैं अपने प्रिय भोजन की खातिर ही मनुष्य के शरीर में आया हूं।"

"अवश्य भोजन सबको मिलना चाहिए !"

"आपने कैसे आने का कष्ट किया मेरे पास ?"

" तुम भटक रहे हो । इसलिए अपने शिष्य को समझाने आना पड़ा !"

"नहीं गुरुदेव! मैं कहीं पर भी नहीं भटका ।"

गुरूदेव कें हंसने की अस्वाज आई।

"आप हंस क्यों रहे है ?"

"मैंने तुम्हें हमेशा शिक्षा दी थी कि हम लोगों में प्यार-मुहबत नाम की कोई चीज नहीं होती !"

"मुझे याद है गुरुदेव !"

“फिर तुम भूल क्यों गए?"

"कहां भूला हूं?"

"तुम कामिनी से प्यार करने लगे हो ।"

" हां गुरुदेव।।"

“ये मेरी शिक्षा में नहीं था ।"

"परंतु आपकी शिक्षा तो इस दुनिया में लागू नहीं होती ।"

"तुम पर तो लागू होती है।"

"इस दुनिया में भी?"

" हां, मेरी शिक्षा तुम पर लागू होती है । तुम जहाँ जागे होंगे, मेरी शिक्षा तुम्हारे साथ ही रहेगी ।।"

भवतारा एकाएक कुछ न कह सका ।
 
"हमारे धर्म में प्यार-मोहब्बत की कोई जगह नहीं है ।"

"ओफ्फ, ये आप क्या कह रहे हैं?”

"ये शिक्षा तुम्हें वहुत पहले से दी हुई है ।"

"लेकिन हमें भी प्यार हो सकता..... !"

"शैतान के बेटे के मुंह से प्यार की बाते जंचती नहीं है ।" आवाज कानों में पडी ।

भवतारा का चेहरा सख्त हो उठा ।।

कुछ चुप्पी रही ।

भवतारा तना-सा अपनी जगह पर खडा रहा।

"खामोश क्यों हो गया तू?" वो ही आवाज भवतारा के कानों मे पड़ी ।

"समस्या है गुरुदेव ।"

" कामिनी की?"

" हां , मुझे सच्चे मनसे उससे प्यार हों गया है । मै उसे.......!"

"छोड दे भवतारा, ये सव छोड़ दे।"

"नहीँ , गुरूजी मैं..... !"

"मुझें इनकार करता है । जिसने तेरे को लायक बनाया, उसे इन्कार करता है !"

" क्षमा गुरुदेव, ये इनकार नहीं बहस है । मैं कामिनी को प्यार ~ करने लगा हुं !! पहली बार तो मुझे किसी से सच्चा प्यार हुआ, है, इस प्यारका भरपूर आनन्द उठाना चाहता हूं !" भवतारा ने अपने शब्दों पर जोर देकर कहा।।।

"ये तेरे लिए शुभ नहीं हैं !"

“क्यों ?"

"तेरे ग्रहों में स्त्री है ही नहीं । अगर जबरन् तू अपनी जिंदगी ये स्त्री लाया तो घोर नुकसान होगा तुझे ।"

"आपके होते हुए मुझे किस बात की चिंता है । आप मेरे ग्रहों को ठीक दिशा दे सकते हैं।"

"स्त्री के कारण मैं तेरे ग्रहों से छेड़छाड़ नहीं कर सकता । मुझे भी अपना धर्मं निभाना है ।"

“क्या आप मेरे लिए, मेरा ये छोटा-सा काम नहीं कर सकते?" भवतारा बोला।

"असम्भव को सम्भव बनाने की चेष्टा मत करो, वर्ना घोर नाश होगा।"

“गुरुदेव !"

" स्वर को नीचा रख मेरे बच्चे।"

भवतारा के होंठ र्भिच गए । चेहरे पर कठोरता नाच उठी ।

“बेशक तू क्रोधित हो ले, परंतु तेरे को अपने पांव पीछे खींचने ही होंगे । कामिनी को छोडना ही होगा।

'

"ये...... ये नहीँ हो सकता।"

" नाश की राह पर मत चल !"

" मै कामिनी से प्यार करता हूं !"

"प्यार कुछ नहीं होता।स्त्री पुरुष में शरीर का आकर्षण होता है, जो ज्यादा देर नही रहता । करीब आने के बाद शीघ्र ही आकर्षण समाप्त हो जाता है !! लोगों ने इसी को प्यार का नाम दे रखा है । हकीकत मे जब एक की मृत्यु हो जाती है तो तो दूसरा जल्द ही पुनः विवाह कर लेता है , क्योंकि उसे जिस्म की जरूरत है । जिस्म की जरूरत को ही दूनिया ने प्यार का नाम दे रखा है ।। अब तुम भी प्यार की बात करने लगे हो !!"

"आप ठीक कह रहे हो गुरुदेव ।। कामिनी का जिस्म ही तो है, जिसकी तरफ मैं आकर्षित हुआ हूं। उसका चेहरा भी तो उसके जिस्म का ही अंश है । उसके चेहरे को देखे विना चैन नहीं मिलता । मैं उसे हमेशा के लिए अपना बना लेना चाहता हूं।"

"अपने कदम वापस ले ले ।"

“नहीं गुरूदेव !"

"वो तेरे पतन का कारण बन जाएंगी । क्या हो गया है तुझे? एक स्त्री के फेर में पड़कर तू इतना कमजोर हो गया कि…!"

“कमजोर नहीं …मैं उसका दीवाना हो गया हूं।"
 
" शैतान की औलाद स्त्रियों की दीवानी नही होती ।” इस बार गुरुदेव का स्वर तीखा हो गया-----" ये राह छोड़ दे ।"

भवतारा खामोश रहा ।

"हमारे धर्म में स्त्री वर्जित है ।"

“मैं शैतान का बेटा हू इसके लिए मुझे कुछ छुट तो मिलेगी । मैँ खास हूं।”

“बेशक तू खास मैं सही, परंतु धर्म कै विपरीत काम करने की छूट नहीं मिल सकती । तेरे लिए ये ही बडी बात होनी चाहिए कि मैं तेरे को समझाने आ गया क्योंकि तू शैतान का बेटा है । शैतानी धर्म में स्त्री से प्यार करने की कोई जगह नहीं है । फिर तेरे तो ग्रह ऐसे हैं कि स्त्री तेरा वजूद तक मिटा सकती है ।"

"आप मुझें डरा रहे हैं गुरुदेव ।।"

"सच बयान कर रहा जिस पर भरोसा नहीं रहा । तू अच्छी तरह जानता है कि झूठ नहीं बोलता !"

होंठ भिंच गए थे अवतारा के ।।

"सोचता क्या है कह दे कि अब कभी कामिनी के सामने नहीं पडेगा ।"

"झूठ ही कह दूं ?"

"तो तूने कामिनी को छोडने का फैसला नहीं लिया अभी तक?"

" कामिनी से दूर होने की सोचा, परंतु दिल नहीं मानता है एक बात तो बताइए गुरुदेव।।"

" पूछो ?"

" मेरे भबिष्य मे क्या है ?"

"मैँने तुम्हारे भविष्य में झाकां नहीँ ।"

"तो झाककर देखिए और मुझे बताइए ।"

"कभी नहीं, जब तक तू कामिनी को त्याग देने का वादा नहीं करता, तब, तक मैं तेरे भविष्य में नहीं झांकूगा ।"

"आप वहुत. कठोर होते जा रहे हैं गुरुदेव! "

"ये मेरा स्वभाव है । मैंने तेरे को गलत रास्ते पर जाने से रोकां, परंतु तू मान नहीं रहा ।"

“कोशिश करूंगा मैं !"

" मुझे दुख है कि मेरे समझाने पर भी तू मान नहीं रहा और धर्म का उलंघन कर रहा है ।"

"मैंने आपकी बात पर इनकार नहीं किया ।"

"मुझसे वादा भी तो नहीं किया कामिनी को छोडने का ।"

"मुझे कछ वक्त दीजिए.. .मैं. ..!"

"मैं कौन होता हूँ तेरे को वक्त देने वाला । मेरा काम तो शिक्षा देना है, तेरे को समझाना है । समझा दिया । मैंने अपने धर्म का पालन किया । इससे ज्यादा अब मैं और कुछ नहीं कर सकता । "

" गुरुदेब !"

परंतु जवाब मैं आवाज नहीं आईं ।

भवतारा ने पुन: पुकारा । जवाब कोई नहीं आया ।
 
भवतारा समझ गया कि गुरुदेव जा चुके है । वो पुन: मंदिर कै भीतर की तरफ़ बढ़ने लगा ।

चेहरे पर सोचों के गहरे भाव नजर आ रहे थे । कामिनी का मुस्कराता हंसता-खेलता, चेहरा रह-रहकरं आँखों के सामने आ जाता था ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@

नर्क में ।।

नर्क का बादशाह, शैतान अपने महल में टहल रहा था । हर तरफ अंधेरा फैला हुआ था । कहीं-कहीं सुर्ख…सी रोशनी फैली नजर आ रही थी । शैतान का चेहरा स्पष्ट नजर नहीं आरहा था, परं उसके टहलने से ये बात स्पष्ट जाहिर हो रही थी वो व्याकुल है । मन अधीर है । जैसे उसकी सोच उसे एक जगह टिकने न रही थी ।

तभी एक चार फीट का आदमी भीतर प्रविष्ट हुआ ।

शैतान ठिठकते हुए बोला ।

" कैसे आना हुआ गुरुदेव ?"

"आप वहुत परेशान लग रहे हैं?”

" भवतारा को लेकर हम परेशान हैं । वो मानवों की दुनिया में पुन: जिन्दा हो गया है, जबकि उस दुनिया में अभी उसका प्रवेश उचित्त न था ।"

“मैं भी भवतारा की वजह से ही आपकी सेवा में हाजिर हुआ हूं शैतान...... !"

"कोई खास बात होगी?"

“बेहद खास! भवतारा के ग्रह उसे स्त्री संसर्ग की इजाजत नहीं देते । हम यहां भी उसे स्त्रियों के पास नहीं जाने देते थे । ये रोक तब तक के लिए है, जब तक वो तीन सौ बरस का नहीं होता, उसके बाद वो मनमानी करने के लिए आजाद है ।"

"मुझे जानकारी है इस बात की । तुम कहना क्या चाहते हो ?" शैतान ने उसे देखा ।

"धरती पर भवतारा एक युवती से प्रेम करने लगा है ।"

“ओह! "

"उस युवती से वो व्याह करने का इरादा रखता है ।"

" बुरी बात बता रहे हो हमें ।" शैतान और भी व्याकुल हो उठा ।

"वो अपने को तबाह कर लेगा ऐसा करके । ये सब ठीक नहीं हो रहा शैतान! "

"सच में भवतारा अपना बुरा हाल करने जा रहा है । शायद तुम्हारा पढाया पाठ वो भूल गया है ।"

वो चुप रहा ।

" बच्चे कभी-कमी भटक जाते हैं, ऐसे में तुम्हारा फर्ज वनता है कि तुम उसे याद दिलाओ कि...... !"

“माफ करना शैतान, मैंने उसे समझाया, अभी उससे ही मिलकर आ रहा हूं , वो नहीं मानता मेरी बात ।”

"क्या कहता है?"

"कहता है कामिनी से वो वहुत प्यार करता है, उसे अपनाना चाहता है ।"

“इसका अंजाम उसे बताया ।"

"इतना ही बताया कि उसका भारी नुकसान होगा ।"

"कामिनी ।" शैतान बड़बड़ा उठा ।

"मैंने उसे शैतानी धर्म की दुहाई दी परंतु मेरी बात तो जेसे सुनने को तैयार ही नहीं वो!"

"उसे समझाओ गुरुदेव !"

"असम्भच है उसे समझाना । इससे ज्यादा मैं उसे नहीं समझा सकता ।"

" ओंफ्फ !"

"अब तो एक ही रास्ता बचा हे ।"

"क्या?" शैतान ने उसे देखा ।

"आप ही जाकर उसे समझाएं कि स्त्री से दूर रहे वो ।"

"वो अब जवान हो गया है । हमसे बहस करता है । मैंने तो उसे बहुत ज्यादा समझाया था कि धरती पर जाने का अभी वक्त ठीक नहीं, पंरंतु वो नहीं माना और हमसे झगडा करके वहां गया । हमारी बात नहीं मानी ।”

"इस बात की जानकारी है मुझे ।"
 
"वो मेरी नहीं सुनेगा, वैसे भी धरती की तरफ़ रुख करना, अभी मेरे लिए ठीक नहीं ।"

"फिर तो ये समस्या खडी हो गई ।"

"वो युवती कामिनी ने हाथ उसकी तरफ़ बढाया या अवतारा ने ?"

"भवतारा ने !"

" कैसी है दवो युवती?"

"अति सुन्दर ।"

" तभी तो भवतारा का दिल उसपर आ लगा, परंतु अभी इन बातों का समय नहीं आया ।"

" ऐक रास्ता है ।"

" कहो.....!"

"भवतारा तो शायद मानेगा नहीं, तो क्यों ना युवती की जान ली जाए । इससे ......!"

" नही , ये गलती मत करना । भवतारा अपनी ताकतों से ये जान जाएगा कि ये काम तुमने किया है । ऐसे में वो हमसे भारी तौर पर नाराज हो सकता है और उस नाराजगी में कोई गलत काम करके अपना ही नुकसान कर लेगा ।"

"भवतारा का सेवक मंगलू भी युवती को चाहता है !"

"तो क्या वो युवती मंगलू को चाहतीं है?”

" हां , परंतु भवतारा ने अपनी ताकती का इस्तेमाल करके युवती की चाहत का रुख अपनी तरफ़ मोड़ लिया है !"

शैतान चुप-सा हो गया

"गुरुदेव !" शैतान गंभीर स्वर मे बोला---"जैसे भी हो भवतारा को रोको !"

"रोकने के सेकडों तरीके हैं, परंतु जबर्दस्ती के तरीके अपनाने पर आपने इनकार कर दिया । ।"

“प्यार से रोको । भवतारा जिद्दी है,जबर्दस्ती के तरीके उस पर आजमाना ठीक न होगा ।"

"और कोई तरीका नहीं ।"

" क्या तुम उसे दोबारा नही समझा सकते?"

"कोई नहीं समझा सकता, परंतु बेहतर होता कि आप समझाते । आप पिता हैं उसके, शायद पिता की बात बो समझ पाए ।"

“धरती पर पांव रखने के लिए अभी मेरा वक्त ठीक नही है ! वर्ना मैं अवश्य उससे बात करता ।"

"बात तो आप भवतारा से यहाँ बैठे भी कर सकते हैं ।"

“अभी मेरा भवतारा से बात करना भी उचित नहीं । वत्त मुनासिब नहीं है, तुमने उसके भविष्य में झांका!."

"नहीं और झांक भी नहीं सकता क्योंकि भवतारा गलत रास्ते पर चल रहा है ।"

"अगर तुम चाहो तो उसके भविष्य में झांककर, हमैं पहले ही बता सकते हो कि कामिनी नाम की युवती के संसर्ग से भवतारा को कितना और क्या-क्या नुकसान होगा ?" शैतान ने कहा !!

"आप मुझे धर्म के खिलाफ़ चलने को कह सकते हैं । मैं शिक्षक हूँ दूसरों को धर्म के अनुसार चलने की शिक्षा देता हूं , ऐसे में मैं स्वयं ही धर्म के विरुद्ध कैसे चल सकता हूं? ये बात शैतानी धर्म के खिलाफ है , अगर भवतारा गलत रास्ते पर न पडा होंता तो मैं खुशी से उसके भविष्य में झांकता ।"

“तुम… एक बार फिर भवतारा को समझाओ ।"

“अवश्य मे एक बार फिर भवतारा को समझाने की चेष्टा करूंगा !"

@@@@@@@@@@@@@@@@@@
 
भवतारा ने भीतर प्रवेश किया तो पीछे की दीवार अपनी जगह पर आ गई । सामने ही मंगलू कुर्सी पर बैठा था ।

दोनों की नजरे मिली ।।

"तुम कहां थे सुबह ।" भवतारा ने मुस्कराते हुए सरल स्वर मेँ पूछा ?"

"बाहर ही था ।"

"पुलिया पर तो नहीं दिखे ।" भवतारा आगे बढा और कुर्सी पर बैठ गया ।

"पुलिया पर नहीं था , दूसरी तरफ़ घूमने चला गया था ।" मंगलू का स्वर शांत था ।

"कामिनी भी साथ थी?"

"हां, वो रास्ते में मिल गई थी ।"

"कामिनी अच्छी है वहुत खूबसूरत है । हर वक्त उसे देखते रहने को मन करता है ।"

" ये बात तुम कईं बार कह चुके हो ।" मगलू ने अप्रसन्नता से कहा ।

" मुझे कामिनी से प्यार हो गया है !"

" वो ऐसी नहीं है कि उससे प्यार किया जाए । धोबी की लड़की है तुम्हारा रुतबा बड़ा है ।"

“बो जैसी भी है, स्वीकार है ।"

"तुम तो ऐसे कह हो जैसे उससे व्याह करने जा रहे हो और वो राजी हो । "

" हां , बो मुझसे शादी करने को तैयार हो गई है ।" भवतारा मुस्कराया ।

" झूठ कह रहे हो ।"

"झूठ बोलकर मुझे क्या मिलेगा । बैसे भी मैं दोस्तों से झूठ नहीं बोलता ।"

"अच्छी बात है, अगर उसने शादी के लिए हां कह दी है तो ।"

" दिन-भर वो मेरे साथ ही थी । बाजार में हम इकट्ठे थे । खूब अच्छा लगा मुझे ।।"

"मैं तुम पर विश्वास नहीं कर पा रहा हूं कि तुम सच कह रहे हो या झूठ । "

"सच ।"

"मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूं।"

"कहो ।"

"रात तुमने उस युवती के साथ क्या किया?" मंगलू ने गंभीर स्वर में पूछा ।

" तुमने देखा?"

"हां ।"

"तो किर पूछने की क्या जरूरत है? तुम सव जानते ही हो।"

"खून पीना वहुत पुरी बात है । तुम क्या वहशी हो?”

"उससे भी ज्यादा ।" मुस्कराया भवतारा ।

"आखिर तुम हो कौन ?"

"शैतान का बेटा ।"

"वो तो ठीक है, परंतु तुम्हारी हकीकत क्या है ?”

"ये ही मेरी हकीकत है जो मैंने तुमसे कहा औंर जो तुमने देखा।" भवतारा का स्वर गंभीर हो गया… "तुम मेरे दोस्त हो और दोस्त ही बने रहो । ये बात किसी और को बताकर मेरे दुश्मन मत बन जाना ।"

" तुम्हारा इशारा कामिनी की तरफ हैं?"

" कामिनी की तरफ भी और दूसरों की तरफ़ भी ।" भवतारा गंभीर था…“इंसानी खून ही मेरा भोजन है इसीलिए मैं धरती पर आया, हूं। मुझे आशा है कि दोस्ती में मेरा साथ दोगे ।"

मंगलू सिहर गया, परंतु चेहरे के भाव सामान्य रहे ।
 
"जो भी हो, तुम्हारे द्वारा खून पिया जाना मुझें अच्छा नहीं लगा !"

"नर्क देखा है तुमने?"

"नहीं ।"

"में नर्क के बादशाह का बेटा हुं , अब समझे तुम कि मेरा रुतबा क्या है?" मंगलू ने सहमति से सिर हिला दिया ।

"मेरी सेवा में ही तुम्हारी गति है । मैं तुम्हें शैतानी शक्तियों से भर दूंगा । तुम मालामाल हो जाओगे ।"

" शक्तियां नहीं पैसा चाहिए ।"

" वो भी मिलेगा ।"

"तुम तो कहते हो अभी तुम्हारे पास पैसा नही है ?" मगंलू ने कहा !!

" हां , आने बाला है पैसा , तब........!"

" अब झूठ बोल रहे हो तुम । कल तुमने ब्रीफकेस मे नोट भरकर कामिनी के बाप को दिए वो पैसा कहा से आ गया ?"

" तो कामिनी ने बताइ तुम्हें ये बात ? " भवतारा मुस्करा पड़ा ।

"हां !"

" कुछ पैसा रखा था , वो ही दिया कल !"

" मुझे क्यों नही दिया पैसा मै तो कब सै मांग रहा हूं !"

" तुम तो मेरे दोस्त हो , कुछ देर भी हो गई तो क्या फर्क पडता है । कल बहा देना जरूरी था !"

" ताकि तुम कामिनी से ब्याह कर सको ?"

"हां !" मुस्करा रहा था भवतारा ।।

"तो पैसे से तुम कामिनी को खरीद रहे हो?"

"नहीं वो मुझसे प्यार करती है ।"

"झूठी बात ।"

"नहीं मानते तो कामिनी से पूछ लेना । वो तो झूठ नहीं बोलेगी।" भवतारा ने कहा ।

मंगलू कुछ कहने लंगा कि होंठ भीच लिए ।

" कुछ ही देर में शाम होने वाली है । चलो बाहर चलते हैं, फिर अंधेरा हो जाएगा ।"

"ताकि तुम किसी इंसान का खून पी सको ।"

"भोजन है मेरा।"

“मैं नही चलूगां !!

भवतारा मुस्कराया-"मुझें अपना, काम करना

आता है !"

मंगलू ने कुछ नहीं कहा, परंतु कुछ चुप्पी के वाद बोला ।

"मुझे लगता है कि तुम मुझे झूठ ही कहते रहे हो कि मुझे पैसा दोगे ।"

"मैं तुम्हे पैसा दूंगा मंगलू?"

"कब?"

"कहो ।"

"मैं थक गईं हूं , कॉफी पीने जा रही हु, तुम्हें कांफी की जरूरत हो तो आजाओ ।" मोना चौधरी ने कहा ।

"कहा हो तुम ?"

मोना चौधुरी ने बताया । बहुत दूर हो तुम, मुझे वहाँ पहुंचने में देर हो जाएगी: । तुम काफी का आनन्द लो।”

"शैतान के बेटे के बारे में...... ?"

"कुछ पता नहीं चला ।" सतपाल की आवाज कानों में पडी ।

"मुझे नहीं लगता कि ऐसे पता चलेगा, बहुत कठिन है इस तरह उस तक पहुंचना ।"

"लेकिन हमें कोशिश करते रहना चाहिए । खाली बैठने. का भी क्या फायदा?"

मोना चौधरी ने राजन को फोन किया और कॉफी के बारे में पूछा ।

बो पास ही था, उसने कहा कि वो दस मिनट में पहुंचता है ।

मोना चौधरी कैफे के बाहर खडी इंतजार कर रही थी, राजन दस मिनट में ही आ पहुंचा था ।

"दिन की भाख दौड़ का कोई फायदा हुआ ?" मोना चौधरी ने पूछा !!

दोनों कैफे के प्रवेश द्धार की तरफ़ बढ गए ।
 
" नही, थका देने वाला काम हम कर रहे हैं, समझ में नहीं आता कि इस तरह कैसे हम शैतान के बेटे तक पहुच सकेंगे, जबकि हम उसे पहचानते ही नहीं । बेशक वो हमारे सामने ही क्यों न खड़ा हो ?" राजन ने मुंह बनाकर कहा ।

" सुबह उठे तो उसके रात के कारनामे से अखबार भरा पड़ा होता है । लोग भी अब डरकर शाम के बाद घरों में ही रहने लगे है । पुलिस तो किसी पागल हत्यारे को तलाश करने में लगी हुई हैं !"

दोनों ने कैफे में प्रवेश किया, और एक सीट पर जा बैठे ।

"मेरे खयाल में हमें पुलिस को बता देना चाहिए कि ये हत्याएं कौन कर रहा है ।" राजन ने कहा ।

" कोई फायदा नहीं होगा । पुलिस हमारी बात पर कभी यकीन नहीं करेगी और हमे पागल समझेगी । हम भी खामखाह नए झंझट मे फंस जाएगे और हम जो कर रहे है , वो काम भी प्रभावित होगा !" मोना चौधरी ने कहा ।

" तुम ठीक कहती हो !"

" मेरे खयाल मे हम यूं ही भाग रहे है ! हम शैतान के बेटे को पहचानते तक नही !"

" जबकि वो आज का शिकार कर रहा होगा या कहीं ढूंढ रहा होगा !"

मोना चौधरी गहरी सांस लेकर रह गई ।

तभी वेटर आया ।।

दो काॅफी और स्नेक्स का आॅर्डर लेकर चला गया ।।

वो सोच भी नही सकते थे कि उनसे चार कदम की दूरी पर शैतान का बेटा बैठा उन्हें ही देख रहा था ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@

भवतारा बाजार में आ पहुचा था ।।

शाम हो चुकी थी और कुछ ही देर में रात का अंधेरा धिर जाना था । ज्यों-ज्यों वक्त बीतता जा रहा था, त्यों-त्यों उसका जिस्म तनाव से भरता जा रहा था । जब रात का अधेरा घिरा तो उस वक्त वो कैफे के सामने पहुचा था ।

लोगों को कैफे में आते-जाते देखा, जाने उसके मन में क्या आया कि उसके कदम भी कैफे की तरफ बढ गए।

उसे एक शिकार चाहिए था ।।

एक इंसान का खून, उसकी खुराक थी ।

और इंसानों के इस जंगल मे एक इंसान का मिल जाना या उसे हासिल कर लेना बेहद ही मामूली बात थी । वो वहशी चाहता था खून पीने के लिए चंद मिनट सकून-भरे मिल जाएं ।

भवतारा ने कैफे में प्रवेश किया ठिठका ।

कम लोग थे कैफे मे कठिनता से चार टेबले भरी थी ।।

तीन लोग वहां कॉफी सर्व करने (वेटर) के लिए खड़े हुए थे । एक व्यक्ति केश काउंटर के पीछे बैठा था ।

भवतारा को एक तरफ कोने में एक बंद दरवाजा दिखा, जिस पर व्यक्ति का चेहरा लगा था, वो समझ गया कि ये बाथरूम है । भवतारा बाथरूम की तरफ वढ़ा और दरवाजा धकेलकर भीतर प्रवेश कर गया । कमरे के साइज का ये बाथरूम था।

भवतारा ने वाशबेसिन के ऊपर लगे शीसे मे खुद को निहारा ।।

बहुत मासूम लग रहा था वो ।

एकाएक उसी पल उसके शरीर में ऐठन हुई । चेहरे पर कसाव आता गया । दोनों हाथों की मुट्टिठया र्भिच गई । वो शीशे मे खुद तो देख रहा था । उसी पल उसका मासूम चेहरा बदलने-सा लगा । सिर के बाल कांटों कीं तरह खड़े होने लगे । हाथ की ऊगलियों के नाखून एकाएक लम्बे होने लगे कि तभी धीरे धीरे उसके होंठो से नुकीले दो दांत होंठों को पार ककरते हुए बाहर को आने लगे ।

चंद पलो में ही वो वहशी बन गया था ।

कोई उसे देखता तो चीखकर बेहोश हो जाता ।

उसने फौरन अपने पर काबू पाने की चेष्टा की ।

तो कोई भी बाथरूम में प्रवेश कर सकता था ।

भरपूर चेष्टा के पश्चात वो अपने पर काबू पा चुका था ।

खुद को सामान्य अवस्था में ले आया था ।
 
वो पुन: सामान्य-सा इंसान लगने लगा था । तभी दरवाजा खुला और एक व्यक्ति ने भीतर प्रवेश किया। भवतारा आगे बढा वाशबेसिन से हाथ धोए उसने, उस व्यक्ति पर निगाह डाली, जो पेशाब करने लगा था । एकटक देख रहा था भवतारा उसे । आखों में सुर्खी आ गई थी । वो उस व्यक्ति को तौल रहा था नजरों से कि उसका ये शिकार रहे तो कैसा होगा?

उस व्यक्ति ने पेशाब किया और जल्दी से बाहर निकल गया, हाथ धो ने का भी कष्ट नहीं किया ।

भवतारा की आखें एकाएक सामान्य-सी हो गई ।

वाशबेसिन से हटा और आगे बढ़त्ते हुए दरवाजे को खोला और बाहर निकल गया ।

अब वहां सिर्फ दो टेबलों पर बैठे लोग थे । एक पर दो लोग थे, दूसरी पर तीन । भवतारा भी एक टेबल पर जा बैठा और इधर-उधर नजर घुमाने लगा । उसे अपने शिकार की तलाश थी उस शिकार की जो बाथरूम तक जाए और बो उसके पीछे जाकर अपने भोजन के तौर पर उसका खून भी सके ।

तभी वेटर उसके पास आया ।

"'क्या लेंगे सर?"

"कॉफी ।" भवतारा ने शांत स्वर में कहा और वेटर चला गया । . .

भवतारा की निगाह इधर-उधर घूमने लगी । . यही वो वक्त था, जब मोना चौधरी और राजन ने भीतर प्रवेश किया था ।

भवतारा ने दोनों को देखा तो चौका । मोना चौधरी को वो तब देख चुका था, जब मोना चौघऱी ने मंगलू - से उसका चाकू छीना था और राजन की तो बात ही और थी । वो सतपाल, मिथलेश और राजन को दुश्मन के तौर पर पहले से ही पहचानता था ।

मोना चौधरी भी उसके दुश्मनों की श्रेणी में आ चुकी थी । भोजन का समय और सामने दो दुश्मन मौजूद थे तो इससे बढिया बात और क्या हो सकती थी । भवतारा की निगाह उन दोनों पर ही रही । वे दोनों उसके पास वाली टेबल पर आ बैठे ।

भवतारा के होंठों पर मधुर मुस्कान नाच उठी, अपने दुश्मनों को इतने करीब-पाकर ।

मोना चौधरी और राजन ने उस पर नजर भी डाली, परंतु खास तवज्जो न दी । वे तो सोच जी न सकते थे कि शैतान का बेटा उनके पास बेहद करीब ही बैठा हुआ है । सोचते भी कैसे वो तो इंसानी वेश और रंग-रूप में था ।

वेटर उनका भी आँर्डर ले गया था ।

दोनों की बातें स्पष्ट तौर पर भवतारा के कानों मं पड़ रही थी । उसका ही जिक्र कर रहे थे वे दोनों । मन-ही-मन मुस्कराता भवतारा ये तयकर चुका था कि आज का शिकार इन दोनों मे से कोई एक होगा । इस तरह उसके भोजन की व्यवस्था भी हो जाएगी और एक दुश्मन का अंत भी ।

वेटर भवतारा के सामने काॅफी रख गया ।

मवतारा ने भला कहां काफी पीनी थी वल्कि कॉफी की स्पेल से उसने दम-सा घुटता महसुस किया तो काॅफी का प्याला टेबल के कोने की तरफ सरका दिया ।।

उसका ध्यान उन दोनों की बातों पर था ।।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@

“मैं कुछ और ही सोच रही हू राजन! !" मोना चौधरी ने कहा !!

"क्या?" कॉफी का घूंट भरतेते हुए राजन ने मोना चौधरी को देखा ।

"शैतान का बेटा, रात को ही अपना शिकार करता है, इंसान् .का खून पीता है ।”

“वो रात को ही अंधेरा होने पर ऐसा करेगा । दिन में बो सामान्य -इंसानों की तरह रहता है ।" राजन ने कहा’…"अँधेरे में उसकी शैतानी शक्तियां जाग उठती हैं । उसका अपने पर भी बस नहीं रहता होगा, तब उसे सिर्फ इंसान का खून पीना याद रहता होगा । वो जितने इंसानों का खून पीएगा उसकी शैतानी ताकते, उतनी ही ताकतवर होती चली जाएंगी ।"

" ऐसा क्यों?"

"छोडो इस बात को, बाते लम्बी हो जाएंगी, तुम क्या कह रही थी?" राजन ने पूछा ।।

"शैतान का बेटा अंधेरे वाली जगहों पर अपना शिकार करता है रात को ।" मोना चौधरी सोच-भरे स्वर में बोली-----" दिन में खामखाह ही अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं । हमें उसकी तलाश रात को करनी चाहिए ।"

"तुम ठीक बोली, परंतु ।"

"परंतु क्या ?"

“रात में उससे सामना होगा तो क्या होगा?" राजन बेचैन हो उठा ।

"हम उसे पकड सकते हैं, गोली मार सकते... . .!"

"बच्चों जैसी बाते मत करो !" राजन ने कुछ ज्यादा ही लम्बी सांस ली ।

"क्या मतलब?"

"हम उसका कुछ नहीं बिगाड सकते । अंधेरे में उसकी शैतानी ताकते जाग्रत हो उठती हैं । पकाना तो दुर, उस पर काबू पाना भी असम्भव-सी बात है ।। गोली उसका कुछ नहीं बिगाड सकती, सिवाय जख्म बनाने के और अपनी शैतानी ताकतो से बो शरीर पर बने जख्म को भी ठीक कर लेगा । अंधेरे में वो देत्य से कम साबित नहीं होगा !"

"तो हम उसे पकड़ नहीं सकते?"

" पकड सकते है, परंतु दिन में । दिन में वो कमजोर हो जाता हे। उसकी ताकते ज्यादा काम नहीं करती !"

" ओह , इसलिए उसका ठिक़ाना जानना जरूरी है कि तो कहां पर रह रहा है । ये जानने के बाद ही कुछ किया जा सकता है ।"

"फिर भी हमें रात को उसकी तलाश करनी चाहिए।"

" रात में बहुत खतरा हैं । वो रात में भी इस तरह हर चीज स्पष्ट देख सकता है, जैसे हम दिन में देख सकते हैं ।"

" ओह …!"

“ये आसान काम नहीं है । जान चले जाने वाला काम है, अंधेरे में उसके सामने पड़ना, मौत से टक्कर लेने जैसा है ।” राजन ने गंभरी स्वर में कहा ।

मोना चौधरी कुछ न बोली ।

बातों के दौरान दो कॉफी और स्नैक्स का मजा ले रहे थे !! पास बैठा भवतारा उनकी बाते सुन रहा था । रह-रहकर उसके शरीर में ऐठन उठ रही थी । उसका खून पीने का वक्त होता जा रहा था, परंतु जैसे-तैसे वो अपने पर काबू रखे हुए था । उनकी बाते सुनने में उसे मजा आ रहा था ।

"अब क्या करना है?" राजन ने पूछा।

"तुम होटल जाना चाहो तो जा सकते हो । मैं रात के कुछ घंटे अंधेरी जगहों पर उसे तलाश करने की चेष्टा करूंगी ।"

राजन क्षणिक सोचकर बोला ।
 
Back
Top