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हर पल अब कामिनी को भवतारा अच्छा लगता जा रहा था ।
"खामोश क्यों हो गई ? क्या मैं ये समझू कि मंगलू तुम्हें ज्यादा अच्छा लगता है?”
"गलत बात क्यों कहते हो?"
"तो?”
" तुम अच्छे लगते हो मुझें । मगलू तो मेरा दोस्त भर है बस ।" कामिनी मुस्कराकर कह उठी ।
वो खुद नहीं समझ पा, रही थी कि उसके होठों से ये सब बाते कैसे निकल रहीँ हैं । ये बात तो वो सपने में भी न सोच सकती थी कि उसके साथ ऐसा शैतान चल रहा है, जो अपनी ताकत के दम पर उससे कोई भी मनचाहा काम करवा सकता है ।
" मैं तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा, बहुत शानदार जिन्दगी दुगा तुम्हें, सब तुम्हारे आगे झुकेंगे ।"
"सच ।"
"हां तुम्हारी कसम कामिनी ।"
"लेकिन मुझे तुम्हारी बात पसद नहीं आई ।" कामिनी के होंठों से निकला ।
"क्या? "
" दिन में तुम मेरे पास रहोगे और रात को नहीं, ऐसा भी भला कही होता है?”
" ये मेरी मजबूरी है प्रिय कामिनी!" भवतारा ने अफसोस जताते हुए मीठे स्वर में कहा--" तुमसे जुदा होना मुझे भी अच्छा नंही लगेगा, परंतु ऐसा करना हमारे खानदान पर ये श्राप है कि जो औरत रात के वक्त मर्द के साथ रहेगी, वो सुबह मर जाएगी ।"
" ओह......!"
" प्यार में तो लोग क्या-क्या नहीं करते, क्या तुम ये छोटी-प्ती बात भी सहन नहीं कर सकति । अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो मेरी ...... मेरी इस बात से तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी । रात की अपेक्षा हम दिन में सेज सजाया करेंगे ।"
कामिनी का चेहरा शर्म से भर उठा ।
"हां कहो कामिनी!"
"हा ।"
"मैं दिन में तुम्हारे पास आया करूगा और अंधेरा होने से पहले चला जाया करूंगा । तुम्हारे पास नौकर-चाकर रहेगे । तुम्हें कोई परेशानी नहीं होने दूंगा । क्या तुम ये छोटा-सा त्याग नहीं कर सकती?" भवतारा की आवाज में आग्रह के भाव थे ।
"क्यों नहीं कर सकती, तुम जो कहोगे वो ही करूंगी !"
"ओह, मेरी रानी! तुम कितनी अच्छी हो । तुम्हारा चेहरा ही नही , तुम्हारा दिल भी सुन्दर है ।"
"तुम भी तो अच्छे हो ।"
"सच? "
" हां, पहले मैंने तुम्हें ठीक से पहचाना नहीं । मेरी ही गलती थी ये ।"
"आह ,मैं कितना भाग्यवान वन गया हूं तुम्हें पाकर, तुम अनमोल हो ।" भवतारा ने गहरी सांस ली ।
"मुझे मूख लगी है" । एकाएक कामिनी हक-भरे स्वर में कह उठी ।
"मुझें तो भूख जरा ही नहीं है ।"
"क्यों ?"
"मैंने सुबह बहुत ज्यादा खा लिया था । अब रात की ही पेट भरूगां , परंतु तुम खा लो।"
“क्या खाऊं ?"
" जो भी तुम्हें पसंद हो । बाजार की जो भी जगह तुम्हें अच्छी लगे, वहीं से खाना । उसके बाद तुम्हारे लिए सूट तुम्हारी मां के लिए साडी खरीद दूंगा । तुम्हें सोने का हार भी लेकर दूगा ।"
" सोने का हार? कामिनी चहक उठी ।
" हां, दुनिया की हर कीमती चीज तुम्हारे कदमों में बिछा दूगा, लेकिन एक-शर्त है ।" भवतारा मुस्कराया र!"
" क्या?
"तुम्हें मेरे कदमों में बिछ जाना होगा ।"
भवतारा ने इस तरह कहा कि कामिनी खिलखिलाकर हंस पड्री ।
"तुम बहुत अच्छे हो भवतारा !" कामिनी ने हंसी रोकते हुए कहा ।
कामिनी भवतारा की दीवानी होती जा रही थी । ये सव शैतान के बेटे की ताकतों का कमाल नहीं तो और क्या था । सुबह तक वो भवतारा का चेहरा भी नहीं देखना चाहती थी और अव उसके लिए पहला और आखिरी मर्द भवतारा ही रह गया था ।
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"खामोश क्यों हो गई ? क्या मैं ये समझू कि मंगलू तुम्हें ज्यादा अच्छा लगता है?”
"गलत बात क्यों कहते हो?"
"तो?”
" तुम अच्छे लगते हो मुझें । मगलू तो मेरा दोस्त भर है बस ।" कामिनी मुस्कराकर कह उठी ।
वो खुद नहीं समझ पा, रही थी कि उसके होठों से ये सब बाते कैसे निकल रहीँ हैं । ये बात तो वो सपने में भी न सोच सकती थी कि उसके साथ ऐसा शैतान चल रहा है, जो अपनी ताकत के दम पर उससे कोई भी मनचाहा काम करवा सकता है ।
" मैं तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा, बहुत शानदार जिन्दगी दुगा तुम्हें, सब तुम्हारे आगे झुकेंगे ।"
"सच ।"
"हां तुम्हारी कसम कामिनी ।"
"लेकिन मुझे तुम्हारी बात पसद नहीं आई ।" कामिनी के होंठों से निकला ।
"क्या? "
" दिन में तुम मेरे पास रहोगे और रात को नहीं, ऐसा भी भला कही होता है?”
" ये मेरी मजबूरी है प्रिय कामिनी!" भवतारा ने अफसोस जताते हुए मीठे स्वर में कहा--" तुमसे जुदा होना मुझे भी अच्छा नंही लगेगा, परंतु ऐसा करना हमारे खानदान पर ये श्राप है कि जो औरत रात के वक्त मर्द के साथ रहेगी, वो सुबह मर जाएगी ।"
" ओह......!"
" प्यार में तो लोग क्या-क्या नहीं करते, क्या तुम ये छोटी-प्ती बात भी सहन नहीं कर सकति । अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो मेरी ...... मेरी इस बात से तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी । रात की अपेक्षा हम दिन में सेज सजाया करेंगे ।"
कामिनी का चेहरा शर्म से भर उठा ।
"हां कहो कामिनी!"
"हा ।"
"मैं दिन में तुम्हारे पास आया करूगा और अंधेरा होने से पहले चला जाया करूंगा । तुम्हारे पास नौकर-चाकर रहेगे । तुम्हें कोई परेशानी नहीं होने दूंगा । क्या तुम ये छोटा-सा त्याग नहीं कर सकती?" भवतारा की आवाज में आग्रह के भाव थे ।
"क्यों नहीं कर सकती, तुम जो कहोगे वो ही करूंगी !"
"ओह, मेरी रानी! तुम कितनी अच्छी हो । तुम्हारा चेहरा ही नही , तुम्हारा दिल भी सुन्दर है ।"
"तुम भी तो अच्छे हो ।"
"सच? "
" हां, पहले मैंने तुम्हें ठीक से पहचाना नहीं । मेरी ही गलती थी ये ।"
"आह ,मैं कितना भाग्यवान वन गया हूं तुम्हें पाकर, तुम अनमोल हो ।" भवतारा ने गहरी सांस ली ।
"मुझे मूख लगी है" । एकाएक कामिनी हक-भरे स्वर में कह उठी ।
"मुझें तो भूख जरा ही नहीं है ।"
"क्यों ?"
"मैंने सुबह बहुत ज्यादा खा लिया था । अब रात की ही पेट भरूगां , परंतु तुम खा लो।"
“क्या खाऊं ?"
" जो भी तुम्हें पसंद हो । बाजार की जो भी जगह तुम्हें अच्छी लगे, वहीं से खाना । उसके बाद तुम्हारे लिए सूट तुम्हारी मां के लिए साडी खरीद दूंगा । तुम्हें सोने का हार भी लेकर दूगा ।"
" सोने का हार? कामिनी चहक उठी ।
" हां, दुनिया की हर कीमती चीज तुम्हारे कदमों में बिछा दूगा, लेकिन एक-शर्त है ।" भवतारा मुस्कराया र!"
" क्या?
"तुम्हें मेरे कदमों में बिछ जाना होगा ।"
भवतारा ने इस तरह कहा कि कामिनी खिलखिलाकर हंस पड्री ।
"तुम बहुत अच्छे हो भवतारा !" कामिनी ने हंसी रोकते हुए कहा ।
कामिनी भवतारा की दीवानी होती जा रही थी । ये सव शैतान के बेटे की ताकतों का कमाल नहीं तो और क्या था । सुबह तक वो भवतारा का चेहरा भी नहीं देखना चाहती थी और अव उसके लिए पहला और आखिरी मर्द भवतारा ही रह गया था ।
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